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ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

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लेकिन रत्ना के दिल मैं खलबली मची थी उसने की-होल से झाँक कर देखा रमेश और उनकी वाइफ दोनो एक दूसरे के नाज़ुक अंगो पर हाथ रखे हुए सो रहे थे .. रत्ना वो सीन देखकर पसीने पसीने हो गई रमेश का उभार उसके पायजामे से बाहर स्पष्ट दिख रहा था....रत्ना का दिल हुआ कि जाकर अभी उसे पकड़ ले और मसल डाले लेकिन रिश्ते की मर्यादा मैं बँधी हुई थी वो..लेकिन वो वापस आकर अपपने रूम मैं फिर लेट गई ..और अंधेरे मैं देखती हुई अपपनी पॅंटी नीचे खिसका कर अपपनी आँखो मैं रमेश का चेहरा देखने लगी और उंगलिया आराम से अंदर बाहर करने लगी.. ............................................................. थोड़ी देर बाद रमेश उसके कमरे मैं चुपके से आए और वो सो रही थी तभी रमेश ने धीरे से उसकी मॅक्सी को खिसकाया और घुटनो तक ले आए और प्यार से सहलाने लगे सुरेश उसके बगल मैं ही सो रहा था ना जाने कहा से रत्ना अपपने अंदर इतनी हिम्मत महसूस कर रहा थी कि कुछ भी हो जो हो रहा है आज हो जाने दो..... फिर रमेश उठ कर उसके चेहरे के पास अपपना चेहरा लाए और उसके होंठो पर एक हल्का सा किस किया ...लिप्स की गर्मी से रत्ना निहाल हो गई और उसका सोने ना नाटक जारी था ....फिर रमेश की उंगलिया रेंगती हुई उसके गले से होती हुई उसके सीने पर जा टिकी और उसने बड़े आराम से रमेश ने रत्ना के बूब्स दबाने सुरू कर दिए अब रत्ना खुद को रोक न्ही पा रही थी और सोच रही थी आज इस रिश्ते की मर्यादा तार-तार हो जानी चाहिए और खुल कर खेल का मज़ा लेना चाहिए लेकिन नारी सुलभ लज्जा उसे आँखे खोलने से मना कर रही थी... फिर रमेश से एक तेज़ धार ब्लेड निकाला और उसकी मॅक्सी को गले से लेकर पेट तक चीर दिया और उसकी चूचियाँ काली ब्रा मैं क़ैद नुमायन होने लगी काली ब्रा मैं वो गोरी चूचियाँ इतनी खूबसूरत लग रही थी कि मानो कोई अप्प्सरा सो रही हो फिर रमेश ने अपपने ब्लेड से उसकी ब्रा को भी बीच से काट दिया और इसी के साथ उसकी इज़्ज़त के धागे तार तार हो गये और रमेश ने उन गोरी चूचियों पर रखे गुलाबी दाने को अपपने मूह मैं लगा लिया और चूसने लगा रत्ना के लिए खुद को रोकना नामुमकिन हो गया ... काफ़ी देर चूसने के बाद रमेश ने अपपने हाथ पेट से नीचे योनि प्रदेश की ओर बढ़ाया और अब मॅक्सी उप्पर करने की बजाए अपने तेज़ धार ब्लेड से बीच से ही काट दिया और नीचे उसकी काली पॅंटी दिखने लगी लेकिन अब इसके आगे वो ब्लेड न्ही लगा सकता था क्योंकि ब्लेड उसकी योनि पर भी लग सकता था उसने ब्लेड को साइड मैं रख दिया और अपपनी उंगलियाँ फँसा कर उसकी पॅंटी को नीचे खिसकाने की कोशिश की लेकिन पॅंटी इतनी ज़्यादा टाइट थी कि एक इंच भी नीचे न्ही आई तो रमेश ने उपर से ही उसकी योनि पर हाथ फिराना सुरू कर दिया रत्ना केवल गर्मी से खुद को गीला महसूस कर रही थी तभी उसका हाथ उठा और अपपनी योनि पर चला गया और योनि मसल्ने लगी तभी बिल्ली ने अलमारी मैं रखी काँच की गिलास गिरा दी और उसके टूटने से सुरेश और रत्ना की आँख खुल गई.........

रत्ना: [मन ही मन] लगता है मैने सपना देखा था उउफफफफफफ्फ़ क्या ये सच हो सकता है ...सपने मैं तो बहुत डेंजर पेश आ रहे थे देख लूँगी तुम्हे भी जेठ जी ....जिस दिन मौका लगा तुम्हारा रस भी ज़रूर पीउँगी मैं.....न्ही तो मैं तुम्हारी बहू नही............
 
ये कैसा परिवार !!!!!!!-- 7

गतान्क से आगे....................

रात का वो सपना तो भुलाए न्ही भूल रहा था रत्ना को ....रत्ना सुबह सो कर उठी और घर की साफ सफाई मैं लग गई ..तभी भाभी भी उठ गई और वो भी साथ मैं लग कर सफाई करवाने लगी ..थोड़ी देर बाद रत्ना ने किचन मैं जाकर टी तैयार की सभी लोगो के लिए और रमेश का कप भाभी को देकर बोली भाभी ये चाइ दे आइए भैया को .लेकिन भाभी ने कहा कि मैं मुन्नी को पॉटी करवा रही हूँ प्लीज़ तुम ही दे आओ जाकर तो रत्ना चाइ लेकर खुद ही रमेश के कमरे मैं चली गई रमेश उस वक़्त सो रहें थे ....रत्ना ने दरवाजा बिना नॉक किए ही रूम मैं एंट्री मार दी अब धमाका तो होना ही था ..रमेश पूरी मस्ती मैं सो रहे थे जैसे की अप्प्नि बीवी के साथ संभोग कर रहे हो ...उस अवस्था मैं रत्ना ने पूरी गौर से देखा की रमेश का सामान तननाया खड़ा है और अगर इस वक़्त वो किसी के अंदर जाएगा तो उसको बहाल कर ही देगा . रत्ना को कन्फ्यूषन हो रहा था कि वो एंजाय करे या लज़्ज़ा का दामन ओढ़ ले ..देख कर मज़ा तो लिया जा रहा था लेकिन अगर कोई इस वक़्त रूम मैं आ गया तो क्या होगा , अगर रमेश जी उठ गये तो क्या सोचेंगे ........भाभी अंदर आ गई तो क्या कहेंगी ...समझ न्ही आ रहा था लेकिन रात का सपना रत्ना को याद आ गया कि सपने भी कही ना कही सच का ही हिस्सा होते है .शायद रमेश के दिल मैं कोई भावना छिपि हो और वो भी मुझे चाहते हो केवल जताना न्ही चाहते है इस तरह से 5 मिनूट गुजर गये वो अभी तक आसमंज़स की स्थिति मैं ही खड़ी थी..अब किसी भी वक़्त कोई आ सकता था शर्मिंदगी से बचने का एक ही ज़रिया था कि रमेश को जगा दिया जाए जो होगा देखा जाएगा...रत्ना ने निश्चय कर लिया और....

रत्ना- भाई साब उठिए

रत्ना- भाई....साब चाइ लो

भाई साब जाग तो गये लेकिन उन्होने महसूस कर लिया कि समान तो लोड है इस पोज़िशन मैं न्ही उठ सकता ..वो न्ही उठे

लेकिन रत्ना ने देखा कि रूम मैं कोई न्ही है और मौका देख कर उसने रमेश को हाथ लगा कर उठाना स्टार्ट कर दिया

रत्ना- भाई साब उठिए ना चाइ ठंडी हो रही है...

ये कहते हुए रत्ना ने जाने अंजाने रमेश के पप्पू को भी हाथ लगा लिया लेकिन रमेश जाने कैसा इंसान था न्ही उठा तो रत्ना ने ज़्यादा देर रुकना उचित न्ही समझा ओर चाइ रख कर बाहर निकल गई ...रत्ना के जाने के बाद रमेश ने आख खोली रत्ना के स्पर्श ने उसे पिघला दिया था लेकिन रमेश ने मर्यादा तोड़ना उचित न्ही समझा लेकिन उत्तेजना इतनी ज़्यादा हो गई थी अभी इसी वक़्त उपचार करना ज़रूरी था.. उसने अपपनी बीवी को आवाज़ लगाई

रमेश: कहा हो.......

भाभी: हाँ आई अभी आई

रमेश : आऊऊऊऊऊ

भाभी के आते ही रमेश ने रूम बंद करके भाभी को दबोच लिया

भाभी- अरे ये क्या कर रहे है सुबह सुबह अपपको क्या हो गया है

रमेश- तुमने रत्ना को क्यों भेजा चाइ लेकर

भाभी- मैं मुन्नी को लेकर टाय्लेट मैं थी....

रमेश- तुम जानती हो सुबह सुबह मेरा क्या हॉल होता है तुमने फिर भी उसे भेज दिया

भाभी- हे राम!! मुझे तो याद ही न्ही था तो उस वक़्त भी खड़ा था क्या

रमेश- और क्या रत्ना को देख कर क्या बैठ जाएगा

भाभी- हॅट...तुम भी एसी बात करोगे बहू है तुम्हारी

रमेश- तो मैने कब कहा मेरी बीवी है जो तुम हो वो तो कोई न्ही हो सकता

इतना कह कर रमेश ने उसके ब्लाउज को आगे से खोल दिया और उसकी गोरी चूचिया दिखने लगी..रमेश ने उन ब्राउन निपल्स को मूह मैं लेकर चूसना स्टार्ट कर दिया और भाभी पागल होने लगी अभी उनकी शादी को 4 साल ही तो हुए थे भाभी ने भी हाथ बढ़ा कर के पयज़ामे को नीचे खिसका दिया और उसके सामान को हाथ मैं लेकर सहलाने लगी फिर रमेश अपपना हाथ नीचे की तरफ लाया और साडी के उप्पर से ही कुछ टटोलने लगे और कही पर उन्होने अपपनी उंगलियाँ फँसा दी लेजकर लेकिन जहा उंगलियाँ फाँसी थी वाहा पर भाभी को मज़ा आ गया था था और उन्होने अपपनी टाँगे और चौड़ी कर दी थी ... टाँगे चौड़ी होने से आराम से जगह बन गई थी... रमेश ने उसी पोज़िशन मैं भाभी को धक्का देते हुए दीवार के सहारे ले जाकर खड़ा कर दिया और भाभी की साडी पूरी उपेर कर दी भाभी साडी के अंदर कुछ न्ही पहनती है पेटिकोट के अलावा

भाभी- अरे मुझे लेट तो जाने दो क्या खड़े खड़े ही करोगे

रमेश- हाँ आज ऐसे ही करूँगा

भाभी- लेकिन अंदर कैसे जाएगा

रमेश- क्यों न्ही जाएगा ...ऐसे भी जाएगा

भाभी- ठीक है डालो........
 


रमेश ने घुटने के बल बैठ कर उसकी योनि को अपपने मूह से गीला कर दिया और फिर से खड़ा होकर अपपना सामान हाथ मैं पकड़ कर भाभी के योनि द्वार पर रख कर एक धक्का लगाया और सत्त्त्त से अंदर और 15 -20 धक्के के बाद ही दोनो त्रप्त हो गये फिर रमेश ने रूम खोला और बाहर निकला तो रत्ना को गेट पर ही खड़ा पाया दोनो की नज़रे मिली और रमेश नहाने के लिए चला गया..........

रमेश के निपट लेनें के बाद भाभी खाली हो कर दुबारा किचन मैं पहुचि तो रत्ना ने पूछ ही लिया क्यों भाभी क्या हो गया था , बहुत देर लगा दी ....कही मूड मैं तो न्ही आ गई थी...भाभी झेन्प्ते हुए बोली "धत्टत्त"

फिर उसके बाद सब लोग रमेश भाभी सुरेश और रत्ना नाश्ते की टेबल पर इकट्ठा हुए और बातें होने लगी...रत्ना चोर नज़रो से रमेश को देख रही थी इन 2 दीनो मैं रत्ना की झिझक बहुत हद तक कम हो गई थी या ये कहो की सुरेश के प्लेबाय नेचर ने रत्ना तो थोड़ा बोल्ड कर दिया था....

रत्ना: सुनिए जी...क्यों ना हम लोग कही घूमने चले..

सुरेश: तुम्हे भी जाने क्या सूझ जाती है ...अब क्या टाइम है घूमने का और मेरे पास छुट्टी भी तो न्ही है

रत्ना- तुम्हारे पास तो कभी न्ही होगी तो क्या .आदमी काम किसलिए करता है घर वालो के लिए ना...

भाभी- अरे लाला जी [देवर को लाला जी कहते है ण.देहात. मैं]चलो ना हम लोग भी घूम लेंगे थोड़ा बहुत कहा टाइम ही मिल पाता है

रमेश- क्या तुम्हे भी ..कहा जाओगी

भाभी- ये तो रत्ना ही ब्ताएगी.बोलो रत्ना कहा चलॉगी

रत्ना- जी मैं तो खजुराहो जाना चाहती हूँ..

सुरेश- क्याआआआआआअ.......एसा कैसे हो सकता है...हम सब खजुराहो कैसे जा सकते है

भाभी- काहे लाला जी कजुराहो मैं एसा क्या है ....

सुरेश : अरे भाभी तुम न्ही जानती अभी ...भैया बताओ

रमेश- ले जाओ एक बार दिखा दो ..फिर भूल जाएँगी कहना

सुरेश- अरे भैया अप भी !!!!!!!!!!!!

रमेश- अरे चलो यरर चलते है [और रत्ना से नज़रे मिल गई तो जैसे सिग्नल ग्रीन हुआ]

सुरेश- लेकिन भैया रतनाआआ............

रत्ना- क्या रत्ना ..सब जाएँगे तो मैं क्या घर पर रहूंगी....

सुरेश - ओक ओकोकोक भाई चलो सब लोग चलो ..लेकिन फिर मुझसे ना कहना कि कहा ले आए हो

भाभी- हाँ न्ही कहेंगे तुमसे..

न्यू देल्ही से खजुराहो जाने के लिए झाँसी तक आना ही था फिर झाँसी से खजुराहो की ट्रेन मिलेगी

सुरेश ने 4 लोगो का झाँसी तक का रिज़र्वेशन लिया और झाँसी से खजुराहो तक का कोई रिज़र्वेशन न्ही मिला था तुरंत के लिए ..

घर आकर उसने शे-अर किया

सुरेश- आज रात को निकलते है ..सुबह 5 बजे तक हम झाँसी पहुच जाएँगे फिर झाँसी से आगे कोई कार रिज़र्व कर लेंगे खजुराहो तक के लिए

रत्ना - ओह्ह...जी आप कितने अच्छे हो

सुरेश ने मार्केट से ज़रूरत का कुछ समान लिया और 2 पॅकेट मूड्स कॉंडम भी लिए ....घर पर सारी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थी ये लोग निकलने के लिए तैयार हो चुके थे सुरेश ने फोन करके रेडियो टॅक्सी को बुला लिया और समान लाद कर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए निकल पड़े और 2न्ड एसी मैं जाकर अपपनी बर्थ देखी. लेकिन एक गड़बड़ हो चुकी थी सुरेश ने जब टिकेट बुक करवाए थे तब पहले भैया का नाम फिर रत्ना का नाम फिर भाभी का नाम फिर अपपना नाम लिखवाया था जिस वज़ह से रमेश और रत्ना आमने सामने और भाभी - सुरेश इनके पीछे वाले बर्थ पर बैठने की जगह मिल रही थी लेकिन क्योंकि चलो लोग घर के ही थे इसलिए अड्जस्टमेंट हो गया था रमेश अपपनी वाइफ के साथ और सुरेश अपपनी वाइफ के साथ जाकर बैठ गया था...ट्रेन ने जैसे ही पुरानी दिल्ली छ्चोड़ा तुरंत ही कोच अटेंडेंट आ गया और रमेश और भाभी का दरवाज़ा खटखटाया

सी.ए- नॉक ....नॉक

रमेश- कोन है

का- ट्रेन स्टाफ सर!!!!!

रमेश ने डोर ओपन किया और पूछा "जी कहिए "

का- टिकेट प्लीज़ सर..

रमेश- टिकेट मेरे भाई के पास है

का- हू ईज़ युवर ब्रदर सर प्लीज़ अस्क हिम हियर आंड शो मी युवर वॅलिड टिकेट

रमेश- वॅलिड टिकेट !! वॉट डू यू मीन मिस्टर !!! आप किस तरह से बात कर रहे है क्या पॅसेंजर्स से आप इस तरह से ही बात करते है

का- सॉरी सर ..युवर अरे टेकिंग मी इन रॉंग वे . इट ईज़ ऑल ऑफ माइ ड्यूटी आइ नीड टू चेक युवर टिकेट

रमेश - जस्ट वेट इअम कॉलिंग हिम हियर

रमेश उठ कर बगल मैं नॉक करता है... सुरेश पूछता है कॉन रमेश जवाब देता है मैं सुरेश दरवाज़ा ओपन करता है

सुरेश- हाँ भैया क्या हुआ ?

रमेश- अरे छ्होटे इन्हे टिकेट दिखाओ ...ये टिकेट माँग रहे है

सुरेश- 1 मिनूट सर मैं अभी लाया

सुरेश अंदर जाकर टिकेट ले आता है

सुरेश - ये लिज़िइ सर देखिए

का टिकेट देखता है ..और रमेश से पूछता है अपपका नाम क्या है सर

रमेश- जी मेरा नाम रमेश है

का- हूंम्म ...तो अपपके सामने तो मिसेज़ रत्ना होंगी ....

रमेश- जी न्‍न्न्नहिईीईईईई...आक्चुयली रत्ना मेरी बहू लगती है इसलिए वो मेरे सामने कैसे बैठ सकती है इसलिए हमने सीट एक्सचेंज कर ली है

का- सॉरी सर .. इट ईज़ नोट पासिबल ..

रमेश- क्या ?

का- सर आप एसा न्ही कर सकते मैं अपपको इसकी इजाज़त न्ही दे सकता क्योंकि दोसरे के नाम पर कोई दूसरा आदमी ट्रॅवेल न्ही कर सकता

रमेश- लेकिन जब दोनो पॅसेंजर्स तैयार है तो अपपको क्या प्राब्लम है

का- सॉरी सर फॉर सेक्यूरिटी रीज़न्स हम अपपको इसकी इज़ाज़त न्ही दे सकते ..अपपके रिश्तों से ज़्यादा रूल्स आंड टर्म्ज़ हमारे लिए इंपॉर्टेंट है

सुरेश- प्लीज़ सर समझने की कोशिस करिए

का - सर ये अपपको बुकिंग के समय ध्यान रखना चाहिए था. आइ आम वेरी सॉरी
 


थक हार कर रत्ना को रमःश् के ब्लॉक मैं और भाभी को सुरेश के ब्लॉक मैं जाना ही पड़ा ..... खैर जो भी हुआ हो लेकिन रत्ना का दिल बल्लियों उछाल रहा था और शायद कुछ एसा ही हॉल था रमेश का भी...............

रमेश और सुरेश को भी ये बात हाज़ाम न्ही हो रही थी एसा कैसे हो सकता है .....लगता है कि स्टाफ कुछ उपरी कमाई चाहता है सो रमेश ने ऑफर भी दिया कि भाई 100-200 लेकर मामला निपताओ लेकिन स्टाफ ने ये कहकर इनकार कर दिया कि अज्ज बीडीई साहब [ र्राइव. ऑफीसर] की स्पेशल विज़िट है इसलिए हम कोई रिस्क न्ही ले सकते

रमेश- अरे यार तो कॉन सा बड़े साब यहा आ जाएँगे फिर ये भी तो सोचो कि ये मेरी बहू है मैं कैसे रह सकता हू इसके साथ

स्टाफ- सर हम लोग बहुत मामूली नौकर है प्लीज़ आप हम पर प्रेशर ना दे .आप टीटी से कॉंटॅक्ट करे तो वो अपपकी हेल्प ज़रूर कर सकते है बट मैं न्ही कर सकता ..आइ आम वेरी सॉरी सर

रमेश- ये टीटी साहब कहा मिलेंगे

स्टाफ- सर वो अभी विज़िट पर आते ही होंगे लेकिन प्लीज़ तब तक आप लोगो को अपनी तय सीट पर ही बैठना होगा प्लीज़ ! दिस ईज़ माइ हंबल रिक्वेस्ट टू यू

सुरेश- वो बात ठीक है ..हम समझते है लेकिन प्लीज़ अप जल्दी से टीटी साहब को भेजे

स्टाफ- वो बस नेक्स्ट 20 मिनूट मैं ही राउंड पर आ रहे होंगे

रमेश- ठीक है 20 मिनूट मैं कोई फ़र्क न्ही पड़ता

लेकिन रत्ना की सारी खुशी काफूर हो गई थी ये बात सुनकर.उसने तो इन 10 मिनूट मैं अगले 8 घंटो का प्रोग्राम ब्ना लिया था लेकिन सुरेश ने सब चौपट कर दिया

लेकिन तब तक टीटी न्ही आया तब तक रमेश और सुरेश अपपने कॉमपार्टमेंट से बाहर ही खड़े रहे थे.तभी टीटी आता हुआ दिखाई दिया वो कोई 55 बरस का बुड्दा आदमी था जो बहुत खुश मिज़ाज़ लगता था .जब रमेश ने अपपनी कहानी बताई तो वो भी बहुत परेशान हुआ

टीटी- माफ़ किगिएगा साहब और कोई दिन होता तो मैं अपपकी रिक्वेस्ट पर ज़रूर ध्यान देता लेकिन आज ही बड़े साहब की स्पेशल विज़िट है इसलिए कोई रिस्क न्ही लेना चाहते है हम . भाई अब 4-5 साल की नौकरी है इसलिए दाग न्ही लगवाना चाहते है

रमेश- लेकिन साहब प्लीज़ आप सोचिए तो आख़िर बहू अपपने जेठ के साथ कैसे रह पाएँगी !!

टीटी- मैं समझता हूँ इस बात को लेकिन.........

रमेश- प्लीज़ सर प्लीज़ रिश्तो का कुछ तो ख्याल करिए ..एक बार को ये ठीक भी था अगर उसका पति साथ ना होता लेकिन जब उसका पति उसके साथ है तो मैं कैसे रह सकता हूँ और फिर सीट तो हम लोग खुद ही इंटरचेंज कर रहे है इसमें रेलवे का क्या नुकसान

टीटी- लेकिन सीट तो आदमी के नाम से अलॉट होती है ना ...अपपने देखा है कि टिकेट चेक करते वक़्त मैने अपपके वॅलिड आइडेंटिटी कार्ड देखे या न्ही ..केवल इसलिए कि किसी और के नाम से कोई और आदमी यात्रा ना करे ..सो प्लीज़

रमेश- ओह्ह्ह्ह.....माइ गॉड ....

टीटी- लेकिन एक रास्ता है .........

रमेश- क्या सर क्या प्लीज़ टेल मे सून

टीटी- अगर अप लोग अपपने अपपने जगह पर ही रहे और अगर कोई पूछे तो वो ही नाम ब्ताईएएगा जो की रिज़र्वेशन मैं लिखवाए थे ...वैसे तो इसकी संभावना ही ना के बराबर है लेकिन फिर भी रमेश अपपना नाम सुरेश और सुरेश को रमेश बताना होगा

रमेश- ठीक है ये हम कर सकते है

टीटी- ओके ! और कोई मदद

रमेश- नो सर! थॅंक यू वेरी मच

ट्रेन अपपनी द्रुत गति से चली जा रही थी और अब तक ग्वालिएर पहुच चुकी थी अब केवल 2 घंटे का सफ़र शेष था लेकिन ग्वालिएर से आगे बढ़ते ही गाड़ी अचानक रुक गई ..पता न्ही क्या हुआ था सभी लोग गहरी नींद मैं थे रत्ना उस वक़्त टाय्लेट मैं थी और उसे भी कोई रीज़न न्ही समझ आ रा था ट्रेन रुकने का तभी ट्रेन के अंदर कुछ लोग मूह पर कपड़ा बँधे हुए धड़-धड़ते हुए घुस आए सब के हाथ मैं दुनाली बंदूके थी और सभी के काले कपड़े पहन रखे थे दूसरे सबदो मैं कहे तो देखने मैं एक से एक ख़तरनाक डकैत थे वो लोग

तभी उनमे से एक आदमी बोला जो बातों से उनका सरदार लगा

सरदार- भाई जित्तेउ लोग है जे डिब्बा मैं सब लोग बाहर आ जाओ

लोग सो रहे थे किसी को न्ही सुनाई पड़ा जब 2 मिनूट तक कोई बाहर न्ही निकला तो सरदार ने 1 गोली चलाई जिसकी आवाज़ से ही सब कोप के भीतर हड़बदा उठे कि क्या हो गया है लेकिन कोई बाहर ना निकला और टाय्लेट मैं रत्ना कातो डर के मारे पेशाब ही रुक गया
 


सरदार ने फिर से आवाज़ लगाई तो लोग बाहर निकल कर आए लेकिन रत्ना अंदर ही थी. तो सरदार ने कहा

सरदार- आप लोग हमाई बात सुन लो हम तो है जहा के डकैत और जे समझ लो खून से खिल्बो हमाओ काम है ..हम लोग किन्हौ को कछु नई कहत अगर बे लोग अपपने ज़ेबर अओर रुपैया -पैसा दे देत है हुमे लेकिन हम चपर छपार पसंद नैया सुन लो ...आप लोग सो हमाए आदमी आउत है आबे तुम लोगान के पास ओउ तुम सब लोग आपाओ आपाओ समान दे दयो हमे..स्माल लाई की नई के हम फिर से सम्जह्ये अप लोगान को

टाय्लेट मैं बैठी रत्ना ने भी सुन लिया था सब उसका दिमाग़ सुन्न हो रहा था लेकिन उसने कुछ काबू भी किया था खुद पर तभी उसे ध्यान आया कि उसके पास एक मोबाइल है जिसे उसने तुरंत ही साइलेंट मोड़ पर डॉल लिया ताकि कोई भी शोर ना हो और टाय्लेट का दरवाज़ा अंदर से कस कर बंद कर लिया और अपपने मोबाइल से तुरंत ही 100 नंबर मिलाया ..उधर घंटी जाती रही लेकिन किसी ने न्ही उठाया रत्ना ने फिर ट्राइ किया सौभाग्य से अबकी बार की कॉल रेसीएवे की गयइ कोई मेल उधर से बोला

माले- हल्लो जी कहिए क्या बात है

रत्ना- [फुसफुसते हुए] जी मैं इस वक़्त चेन्नई एक्सप्रेस मैं हूँ और ग्वालिएर स्टेशन के आगे ये ट्रेन कही पर खड़ी है..

माले- तो जी हम का करे एमए ..ट्रेन खड़ी है ..

रत्ना- जी अप पूरी बात तो सुनिए ...

माले- का आप भी

रत्ना- सर ये पोलीस का नंबर ही है ना

माले- हाँ जी ग्वालिएर पोलीस कॉंटरोले रूम का नंबर है

रत्ना- तो आप मेरी बात ठीक से सुनिए समझे आप

इस टोन को सुनकर वो सकपका गया शायद उसे एसी उम्मीद न्ही थी

मेल- जी मेडम कहिए क्या सेवा करू अपपकी मैं

रत्ना- मैने कहा कि चेन्नई एक्शपस ग्वालिएर स्टेशन के आगे कही खड़ी है और ट्रेन मैं डाकू चढ़ आए है प्लीज़ आप कुछ करिए

माले- मेडम अप जिस डिब्बे मैं है उसका नंबर ब्ताइए

रत्ना- जी मैं 1स्ट्रीट एसी मैं हूँ

मेल- आप चिंता मत करिए आप तक मदद ज़रूर पहुचेगी

रत्ना ने टाय्लेट से बाहर निकलने की कोशिश न्ही की करीब 15 मिनूट मैं ही पोलीस ने एसी बुगी को चारो ओर से घेर लिया था और डकैतों को भी पकड़ लिया था

इस बात का ज़्यादा वर्णन बेकार है फिर ट्रेन वाहा से चली और 2 घंटे बाद ट्रेन झाँसी मैं थी....

क्रमशः..........................
 
ये कैसा परिवार !!!!!!!!! --8

गतान्क से आगे....................................

जैसे तैसे ट्रेन झाँसी पहुच गई अब झाँसी से आगे जाने के लिए 3 रास्ते थे या तो ट्रेन से महोबा तक जाए या फिर रोडवेज का सहारा लिया जाए या 3र्ड वे कोई प्राइवेट कार हाइयर की जाए कार लेना उनलोगो ने ज़्यादा अक्चा समझा लेकिन कार तो एजेन्सी मैं केवल 1 बची थी और उसके लिए 2 पार्टियाँ थी दूसरी पार्टी को भी जाना था लेकिन उन्हे केवल महोबा तक ही जाना था इसलिए 2 दोनो लोग अग्री हो गये थे जो दूसरी फॅमिली थी वो शायद हनिमून कपल थे और उन्हे भी खजुराहो ही जाना था लेकिन महोबा मैं रुकने के बाद लड़के की उमर कोई 22 साल और लड़की की 19 के आस पास होगी लड़की बहुत ही सुन्दर थी उसी अनुपात मैं लड़का भी किसी स्लिम हीरो से कम न्ही था ...कुल मिला कर जोड़ी जम रही थी लड़की ने लो कट टॉप पहना हुआ था जिसमे उसके छोटे से बूब्स के निपल्स बिल्कुल आसानी से दिख रहे थे. क्योंकि मेरे ख्याल से उसके बूब्स का साइज़ केवल 26 होगा बातों ही बातों मैं बोथ फॅमिलीस खुल गई थी रास्ता तो इतना बेहतरीन था कि कहने ही क्या गाड़ी मक्खन की तरह दौड़ रही थी सबसे आगे रमेश बैठा था ड्राइवर के बगल मैं पीछे की सीट पर सुरेश था बीच मैं , और भाभी और रत्ना सुरेश के अगाल बगल और उसके पीछे सीट पर वो न्यू कपल बैठा था. सुरेश भी धीरे धीरे नज़रे बचा कर रत्ना की जंघे सहलाता जा रहा था ये सीन शायद पीछे लड़के ने देख लिया था और उसने भी काम क्रीड़ा का शुभारंभ कर दिया था ..उसने धीरे से अपपने 2 दोनो हाथ लड़की के टोपके अप्पर से ही आराम से बूब्स पर रख दिए सब लोग आगे ही देख रहे थे लेकिन एक नज़र एसी भी थी जो आगे के साथ पीछे भी लगी थी ...शिकारी अपपना भोजन भला कैसे छ्चोड़ सकता था ...इस नवेली को देखकर तो जैसे सुरेश को मुहमांगी मुराद मिली थी इसलिए सुरेश जानबूझ कर रत्ना को इस तरह से छेड़ रहा था की पीछे वाले रिक्षन ज़रूर करें ... और उसका असर भी हुआ था पीछे से कामुक सिसकारियाँ आना स्टार्ट हो गई थी लेकिन मुसीबत ये थी कि अगर भैया भाभी और ड्राइवर ना होता तो शायद स्वपिंग की बात की जाती लेकिन अब क्या किया जाए कैसे इस लड़की के साथ केवल 10 घंटे गुजरने का मौका मिले तो मेरा लंड तो इसकी चूत मैं होगा चाहे कुछ भी हो चाहे रत्ना को ही इसके हज़्बेंड के पास भेजना पड़े ...अब चलते चलते 5 घंटे हो चुके थे और महोबा की दूरी केवल 60 किलो मीटर बची थी यानी केवल लगभग 1 से 1.5 घंटे का टाइम था सुरेश के पास इस खुराफाती दिमाग़ से कोई खुराफात छ्चोड़ने का ......लेकिन क्या किया जाए....तबकि गाड़ी हिचकोले खाने लगी

रमेहस- आररीई... ये क्या हो रहा है ड्राइवर .....

गाड़ी डिसबॅलेन्स हो रही थी सुरेश भाभी के अप्पर गिरा पड़ा था और कुछ इस तरह से की भाभी के लिप्स सुरेश के गाल पर थे ...
 


ड्राइवर ने किसी तरह से गाड़ी को संभाला

ड्राइवर- लगता है टाइयर पंक्चर हो गया है .

रमेश- क्या ...

ड्राइवर- जी हाँ

सुरेश- स्टप्नी तो होगी ना

ड्राइवर- वो तो है लेकिन टाइयर मैं हवा न्ही है

सुरेश- क्या बेवकूफ़ आदमी हो यार हवा क्या हर जगह मिलती है अब हम क्या करेंगे

ड्राइवर- क्या करे सब सुबह टाइयर पंक्चर हुआ था बस मैं हवा डलवाने जा रहा था सब ने आप लोगो के साथ भेज दिया मेरे ध्यान से उतर गया

सुरेश- ...ध्यान से उतर गया......अब हम क्या करें यार

ड्राइवर- सब अप लोग रूको मैं यहा पास मैं देखता हूँ कोई दुकान मिले तो टाइयर मैं हवा डलवाकर लाउ

सुरेश- लेकिन जाओगे कैसे

ड्राइवर- किसी गाड़ी से लिफ्ट लेता हूँ 10-15 मिनूट मैं आ जाउन्गा

वो लोग वेट करने लगे लेकिन उस रास्ते से 15 मिनूट तक कोई वहाँ ही न्ही गुजरा और जो निकले उन्होने गाड़ी न्ही रोकी करीब 45 मिनूट बाद एक गाड़ी ने लिफ्ट दी ड्राइवर को अब दोफर के 3 बज रहे थे उन लोगो को भूख लगी थी इसलिए साइड मैं पेड़ के नीचे उन लोगो ने चादर बिछा कर खाना लगाया और न्यू कपल को भी बुला कर बिठाया

सभी लोग खाना खाने लगे रत्ना ने बातों ही बातों मैं उनसे बोलना स्टार्ट कर दिया और रत्ना ने लड़की से पूछा

रत्ना- लगता है अभी न्यी न्यी शादी हुई है

लड़की - हाँ ये 1स्ट्रीट मोन्थ है हमारी शादी का

रत्ना- कहा के रहने वाले है आप

लड़की- जी हम लोग नोएडा के

रत्ना- अरे वाह हम लोग भी तो दिल्ली के है

लड़की- अच्छा

रत्ना- लो मैं तो तुम्हारा नाम ही पूछना भूल गई

लड़की- जी मेरा नाम पूनम है

रत्ना- मेरा रत्ना , ये मेरी भाभी है ये जेठ जी और ये इसकी बिटिया और ये मेरे हज़्बेंड है

पूनम- और ये है रितेश

रितेश- हाला एवेरिवन, नाइस टू मीट यू

रितेश ने बड़ी गहरी निगाहो से रत्ना को देखा जैसे पूछ रहा हो कैसा लगा मैं तुम्हे ..और रत्ना ने भी निगाहो मैं ही उत्तर दे दिया पूनम- हम लोग तो कल खजुराहो के लिए निकलने वाले थे अब तो 4 बज रहे है और मुझे लगता है कि 6 बजे से पहले हम महोबा न्ही पहुचेंगे और 5.30 के बाद अपपको महोबा से आगे जाने न्ही दिया जाएगा

सुरेश- क्यों ..मैने न्यूज़ मैं पड़ा था कि आज कल पोलीस कोमबिंग चल रही है उस एरिया मैं और एंपी से बाहर की गाड़ियाँ एंपी पोलीस साम को आने न्ही देती है तो आप लोग एसा करो आज महोबा मैं ही रुकते है कल हम लोग भी चलेंगे

सुरेश- भैया क्या कहते है ?

रमेश- चलो रुक जाते है कल चलेंगे क्या दिक्कत है रात मैं आराम भी मिल जाएगा थोड़ा

तभी एक ट्रक पास आकर खड़ा हुआ उसमे से ड्राइवर निकला और उसने गाड़ी का टाइयर चेंज करना स्टार्ट कर दिया 15 मिनूट बाद गाड़ी चलने को तैयार थी और अबकी बार न्यू कपल भी आगे आकर बैठ गया था न्यू कपल सुरेश के बिल्कुल सामने था जिसमे की पूनम की दोनो टाँगो के बीच सुरेश का पैर था और रत्ना की दोनो टॅंगो के बीच रितेश का पैर और रियल मज़ा तब आ रहा था जब ड्राइवर भरपूर ब्रेक लगा रहा था रत्ना जो जैसे भरा घड़ा थी और इंतज़ार कर रही थी कि कब गाड़ी खड़ी हो और केवल 10 मिनूट मिल जाए पूनम का तो हॉल खराब था सुरेश का घुटना पूनम के स्कर्ट के अंदर हो चुका था और लगभग पूनम की पुसी से टच हो रहा था दोनो ही इसका मज़ा ले रहे थे भाभी से ये बात च्छूपी न्ही थी लेकिन भाभी ना जाने क्यों मुस्कुरा रही थी ...थोड़ी देर बाद सब महोबा पहुच गये और ....वाहा 3 रूम लिए जिनमे एक मैं न्यू कपाल और एक मैं भैया -भाभी और एक मैं सुरेश रत्ना रुके.........

तीनो लोगो के रूम अगाल बगल मैं ही थे इसलिए आवाज़े आसानी से सुनी जा सकती थी लगभग 3 के तीनो ही " आराम " कर रहे थे और ड्राइवर अपनी गाड़ी मैं सो रहा था रत्ना अपपना भोग लगवाने के बाद थोड़ा एक्सट्रा मस्ती करना चाहती थी ...आज रत्ना को अपपनी कॉलेज पिक्निक याद आने लगी थी जब वो रात मैं अपपने टेंट से निकल कर अपपने अलग अलग बॉय फ्रेंड्स के पास जाती थी ...
 
थोड़ी देर बाद अंदर घुटन सी होने पर वो रूम से बाहर आकर खड़ी हो गई तो उसने देखा की ड्राइवर अपपनी गाड़ी के बाहर ही खड़ा था और अपपने हाथ से अपपने लिंग को सहला रहा था रत्ना का पारा फिर से चढ़ने लगा लेकिन ड्राइवर के लिए वो परेशान न्ही थी उसने रमेश के रूम मैं झाँकने की कोशिस की लेकिन ये बहुत रिस्की था ..आख़िर मान सम्मान की बात थी लेकिन उसने भी सोच लिया कि यहा से जाने के बाद तो कोई रास्ता न्ही है लेकिन दूसरी तरफ उसका ध्यान रितेश की तरफ भी था रमेश तो उसके साथ ही थे आज न्ही तो कल रमेश के आगोश मैं उसे आना ही था लेकिन अगर रितेश निकल गया तो फिर एसा मुर्गा उसे न्ही मिलने वाला था इसलिए वो पलट कर रितेश के रूम की तरफ गई और हौले से नॉक किया ..1 बार की नॉक मैं ही रूम का दरवाजा बड़े आराम से ओपन हुआ जिसका मतलब की रितेश इंतज़ार ही कर रहा था इस तरह से दरवाज़ा खुलता देख कर रत्ना हड़बड़ा गई क्योंकि उसे लगा था कि वो तो सो रहा होगा ....रितेश दरवाज़ा बंद कर बाहर आ गया ..

रितेश- मैं जानता था कि तुम ज़रूर आओगी

रत्ना- कैसे ?

रितेश- मुझे अहसास था

रत्ना- लेकिन मैने तो कोई इशारा न्ही किया था

रितेश- तुम्हारी निगाहे ही मुझे बता रही थी तुम आज की रात मुजसे ज़रूर मिलॉगी

रत्ना- मैने भी देखा था कि मेरे पति भी तुम्हारी पत्नी का साथ चाहते है

रितेश- समझता हूँ लेकिन अभी ये पासिबल न्ही है क्योंकि वो MC मैं है

रत्ना- तो इसका मतलब है कि तुम अभी भूखे हो

रितेश- पेट भरा होता तो यहा बाहर नींद खराब करता अब टाइम मत खराब करो बातें तो हम रास्ते मैं भी कर लेंगे

रत्ना- आरीई ..छोड़ो कोई देख लेगा

रितेश- कोई न्ही देखेगा केवल 1 किस दो

रत्ना- न्ही ...

रितेश- कॉलेज मैं भी तुम एसे ही करती थी...

रत्ना- तुम्हे अभी तक याद है

रितेश- तुम क्या भूलने वाली चीज़ हो हम तो शादी कर चुके होते अगर मेरे डॅडी ने प्रेशर ना डाला होता

रत्ना- छोड़ो भी पुरानी बातें मैं न्ही जानती कल क्या हुआ था ..बॅस आज की देखो

रितेश- हम कॉलेज के सबसे हॉट कपल हुआ करते थे ....और तुम्हारे अबॉर्षन के लिए मैने कितना उधार ले लिया था बाप रे..

रत्ना- ऑफ ओ तुम मुझे पुराने दिन क्यों याद दिला रहे हो

रितेश- तो 1 किस दो ना

रत्ना- तो मैं क्या हाथ मैं लेकर दूँ ..तुम्हारे हाथ पैर टूट गये है क्या

रितेश- ओह्ह्ह....मेरी जान ये कहते हुए उसके हाथ उसके नितंबो पर पूरी तरह से कस गये थे और इतनी गरम्जोशी की वज़ह से ठंडी मैं भी पसीना आ गया था रत्ना को तभी दरवाज़ा खड़खड़ाने की आवाज़ आई दोनो स्तर्क हुए और दूर दूर खड़े हो गये . तभी रमेश के रूम का दरवाज़ा खुला और रमेश बाहर आए और रत्ना के दरवाज़े के पास आकर खड़े हो गये ...रत्ना ये देखकर बहुत खुश हो गई कि उसका निशाना ठीक बैठा है और रमेश भी उसकी ओर आकर्षित हो गये थे .

दरवाज़े तक पहुचते ही रत्ना उनके पास आकर खड़ी हो गई

रत्ना- भाई साहब आप....कोई काम था क्या

रमेश- वो..वू.... मुझे कुछ....

रत्ना- हां कहिए

रमेश- तुम बाहर क्या कर रही हो

रत्ना- बस थोडा नींद न्ही आ रही थी इसलिए बाहर निकल आई थी

रमेश- मुझे वो मुझे तुमसे कुछ कहना था

रत्ना- जी भाई साहब कहिए

रमेश- मैं तुमसे अकेले मैं बात करना चाहता हूँ

रत्ना- जी मुझसे अकेले मैं लेकिन क्या .......

रमेश- तुम समझ सकती हो मुझे न्ही लगता कि तुम अंजान हो

रत्ना- जी मैं समझी न्ही

रमेश- तुम ही मुझे बार बार अपपनी तरफ खीच रही हो और मुझे अब तुम्हारा साथ चाहिए

रत्ना- लगता है आप होश मैं न्ही है

रमेश- मैं होश मैं हूँ लेकिन तुम नाटक कर रही हो

रत्ना- [दिल हीदिल मैं खुश] कैसा नाटक आप मेरे जेठ है

रमेश- ये बताने की ज़रूरत न्ही है तुम्हे ,मैं जानता हूँ कि तुम क्या चाहती हो लेकिन दुबारा मेरे करीब मत आना .

रत्ना- जी सुनिए...

लेकिन रमेश बिना कुछ सुने ही अपपने रूम मैं चला जाता है और बाहर न्ही निकलता रत्ना भी थोड़ी देर बाद अपपने रूम मैं जाती है रितेश तो रमेश को देखते ही चुपचाप रूम मैं जा चुका था
 


आप को रितेश के बारे मैं भी बता दूं रितेश रत्ना का कॉलेज बॉय फ्रेंड था रास्ते मैं तो दीनो का मिलना संयोग भर था लेकिन दोनो ने एक्सपोज़ इसलिए न्ही किया क्योंकि वो लवर भी थे और बात शादी तक पहुच चुकी थी...रत्ना कॉलेज टाइम मैं 2 बार प्रेग्नेंट भी हुई थी जिसे अबॉर्षन करवाने मैं रितेश ने बहुत कर्ज़ा लिया था और उसकी स्टडी बहुत डिस्टर्ब हुई थी..लेकिन दोनो एक दूसरे को चाहते थे.....

अपपने रूम मैं जाकर रत्ना भी सो गई .सुबह सुबह सभी लोग उठकर फ्रेश हुए और नाश्ता एक साथ ही लिया फिर उसके बाद ड्राइवर भी फ्रेश हुआ और गाड़ी लेकर वो लोग खजुराहो के लिए निकल पड़े

क्रमशः.......................

 
ये कैसा परिवार !!!!!!!!! --9

रास्ते के खूबसूरत नॅज़ारो को देखकर सभी बहुत खुश हो रहे थे महोबा जैसी छ्होटी सी जगह पर उन लोगो ने बहुत मज़ा लिया लेकिन रात की घंटा से रत्ना बहुत विचलित नज़र आ रही थी रत्ना के साथ 1 ही गाड़ी मैं उसका पूर्व प्रेमी और उसके जेठ जी दोनो ही बैठे थे रत्ना के तो दोनो हाथो मैं लड्डू थे और मूह कढ़ाई मैं ..एक साइड उसका पति जिसे उसकी ज़रूरत पूरी करनी ही थी फिर उसका प्रेमी और अगले उसके जेठ जी लेकिन रत्ना थोड़ा दुखी भी नज़र आ रही थी लेकिन वो मज़बूर भी थी की उसकी दिल की बात को सुने बिना ही रमेश ने बाहर का रास्ता नाप लिया था लेकिन रत्ना के पास सोचने का इतना टाइम न्ही था उसे कुछ ना कुछ करना ही था अगले 3 दीनो मैं ही ....तभी रास्ते मैं ही गाड़ी फिर से पंचार हो गई और सभी का मूड बहुत ज़्यादा ऑफ हो गया ..लग रहा था की दिन ही खराब है ....ड्राइवर दोबारा से टाइयर लेकर चला गया उसी बीच रितेश का मोबाइल बज उठा

रितेश- हल्लो !!!!!!!!!!

अदर साइड- हाँ रितेश कैसे हो बेटा

रितेश- मम्मी आप ...कहिए क्या हुआ

मम्मी- बेटा तेरे पापा की तबीयत बहुत खराब हो गई है वो तुम्हे ही याद कर रहे है

रितेश- क्या ??????????

मम्मी- हाँ बेटा जहा भी हो तुरंत ही घर आ जाओ

रितेश- ओकककक......मम्मी मई... मैं पहुचता हूँ

इस खबर ने तो जैसे रितेश की वाइफ का मूड चौपट कर दिया था लेकिन परिवारिक बहू थी ...तभी उन दोनो ने बाकी लोगो से विदा ली लेकिन रत्ना की तो जैसे दुनिया ही लूटी जा रही थी ...पता न्ही क्या होने वाला था उसका

रितेश और उसकी वाइफ वही से रोडवेस मैं सवार होकर महोबा के लिए निकल लिए और तब तक ड्राइवर भी वापस आ गया गाड़ी दुबारा से स्टार्ट हो गई लेकिन इस बार सुरेश किनारे भाभी रत्ना के बगल मे बैठी थी.

रत्ना के चेहरे पर उदासी तो थी लेकिन रमेश को देख कर थोड़ी तस्सल्ली मिल रही थी की अभी सब कुछ ख़तम न्ही हुआ था... गाड़ी अपपने फुल फॉर्म मे आ चुकी थी और शाम का हल्का हल्का अंधेरा भी होने लगा था और इसी अंधेरे मे भाभी का हाथ रत्ना की जाँघ पर आकर लगा और रत्ना की सिसकारी निकल गई गुदगुदी से रत्ना बिल्कुल मचल उठी रत्ना ने भाभी का हाथ अपपनी जाँघो पर दबा लिया अब भाभी ने बड़ी अदा से रत्ना की ओर देखा और कान मे कुछ फुसफुसा और रत्ना ने अपपना सिर हिलाया ...क्या बात हुई पता न्ही

15 मिनूट मैं ही अंधेरा पूरी तरह से च्छा गया और अब गाड़ी के अंदर हाथ को हाथ न्ही दिख रा था इस पूरे अंधेरे मे भाभी ने अपपने हाथ का दबाव रत्ना की जाँघ पर बढ़ा दिया गर्मी से रत्ना का पिघलना भी सुरू हो गया भाभी के हाथ जैसे जैसे मचल रहे थे रत्ना मदहोश होती जा रही थी अब भाभी ने साडी के उप्पेर से ही रत्ना की पॅंटी को टटोलना सुरू कर दिया और सहयोग की गरज से रत्ना ने भी अपपनी टाँगे थोडा चौड़ी कर दी अब भाभी आसानी से उसकी पॅंटी तक अपपनी उंगलियों को ला रही थी और इस स्पर्श से रत्ना भीग रही थी लेकिन रत्ना को सुरेश की ज़रूरत महसूस हो रही थी ..लेकिन भाभी का भी हॉल बहाल चुका था अब तक और भाभी को भी रमेश की ज़रूरत थी तो भाभी फुसफुसा कर रत्ना के कान मे बोली

भाभी- रत्ना !!

रत्ना- जी दीदी

भाभी- तुम्हारे भैया को यहा बैठा लूँ ...

रत्ना- जी!!!!!!!! पीछे ...

भाभी- और क्या मैं ड्राइवर की गोद मे बैठू जाकर

रत्ना- लेकिन भाभी इतनी भी क्या जल्दी है, होटेल मे कर लेना

भाभी- बर्दस्त नही हो रहा है अब

रत्ना- लेकिन मैं तो यही बैठी हूँ जेठ जी कैसे !!! ये सब ,,मतलब!!!और फिर ड्राइवर भी बैठा है ये भी है

भाभी- तुम चिंता मत करो उन्हे अपपनी जगह बिठा दूँगी और सुरेश की जगह मैं बैठ जाउन्गि सुरेश को आगे भेज दूँगी

रत्ना- जेठ जी मेरे बगल मे...!!!!!!!!!!!!

भाभी- अरे तो तेरे साथ थोड़े ना करने आ रहे है ..केवल पास मे बैठा लेना

रत्ना-[ भरपूर नाटक के साथ] लेकिन दीदी ये सब

दिल ही दिल मे रत्ना इतना खुश थी की भगवान ने एक खुशी ली तो दूसरी उससे भी बड़ी दे दी है लेकिन दिखावे के साथ बोली

रत्ना- ठीक है आप समझो

तभी रत्ना ने सुरेश से कहा

भाभी- लाला जी ..

सुरेश- हाँ भाभी

भाभी- भाई साहब को पीछे भेज दो तुम आगे चले जाओ

सुरेश- बर्दास्त न्ही हो रहा क्या

भाभी- धत्त्त्त...कुछ बात करनी है बॅस

सुरेश- अरे तो पहुच के कर लेना

भाभी- अरे बहुत ज़रूरी है

सुरेश- इतना ज़रूरी है तो हम कर दे

भाभी- न्ही तुम्हारी मशीन ये है इसके करो

सुरेश- इसके तो रोज़ करते है भाभी 1 चान्स तो दो हमे भी

भाभी- शादी हो गई लेकिन तुम ना बदले

सुरेश- तुमसे तो न्ही हुई ना

भाभी- अक्चा बकवास ना करो जाना है या न्ही

सुरेश- अरे तुम तो बहुत गरम हो रही हो लगता है बह जाओगी

भाभी- लाला जी !!!!!!!!!!!!

सुरेश - ठीक है भैया तुम लो मज़े ....
 
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