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ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

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सुरेश- [ड्राइवर से] भाई रोको यार किनारे ज़रा टाय्लेट वग़ैरह कर ले

ड्राइवर ने कार किनारे रोक दी और सभी लोग उतर गये 3-4 मिनूट मे सभी लोग वापस आए तो सुरेश जल्दी से आगे जाकर बैठ गया और रत्ना भी साइड मे जहा बैठी थी बैठ गई अब प्राब्लम ये थी की भाभी भी अंदर न्ही जा रही थी और भैया रत्ना की वज़ह से बाहर खड़े थे

रमेश- चलो बाहर क्यों खड़ी हो

भाभी-आप बैठो मैं भी बैठती हूँ

रमेश- पागल हो क्या अंदर बहू बैठी है मैं वाहा ...........

भाभी-अरे मुझे थोड़ा उल्टियाँ जैसी हो रही है अभी बैठ जाओ 15 मिनूट बाद आप किनारे आ जाना

रमेश के दिल के तार झनझणा उठे लेकिन सुरेश साथ मे था कोई विपरीत प्रभाव ना हो ये सोचकर उसने सुरेश की ओर देखा लेकिन सुरेश का ध्याना कही और था इसलिए रमेश जल्दी से अंदर रत्ना के बगल मे जाकर बैठा गया अओर भाभी ने अंदर बैठकर दरवाज़ा लॉक कर लिया .......रमेश अब मौका गँवाने के मूड मे न्ही थे और रत्ना से बिल्कुल चिपक कर बैठे थे......

 
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