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ये क्या हो रहा है?



मेरे सामने बड़ी ही मुश्किल समस्या आ गयी थी, मैं अब वहां रुकना नही चाहता था, क्यूंकि मुझे डर था कि कहीं सुमेर ने मुझे देख तो नही लिया, तो दूसरी तरफ माँ का हुक्म था और बिना कुदाली लिए मैं जा भी नही सकता था, हारकर मैंने फैसला लिया कि अब जो भी हो देखा जायेगा, पर कुदाली तो लेनी ही पड़ेगी

यहीं सोचकर मैने बड़ी ही हिम्मत करके दरवाजे को खटखटाया, थोड़ी ही देर में सरला चाची ने आकर दरवाज़ा खोला, उनको देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कहीं मेहनत करके आ रही है, इसलिए पसीने से तरबतर हो रखी थी, बाल भी बिखरे हुए लग रहे थे, और उनके चेहरे की हवाइयां उडी हुई थी, शायद उन्हें डर था कि कहीं ताउजी तो वापस नही आ गये है, पर जब उन्होंने मुझे वहां देखा तो उनकी जान में जान आई

सरला – अरे समीर बेटा, तू यहाँ, मेरा मतलब है बड़े दिनों बाद आया इधर......

मैं – वो माँ ने आपके घर से कुदाली लाने के लिए भेजा है, इसीलिए आया था...

सरला – अच्छा ठीक है... तो रुक मैं अभी तेरे लिए कुदाली लाती हूँ...

ये कहकर सरला ताई अंदर चली गई, पर मैं अंदर नही गया, बस वहीं खड़ा खड़ा इंतज़ार कर रहा था, क्यूंकि जितना डर ताई को था उतना ही मुझे भी लग रहा था... और मैं नही चाहता था कि अंदर जाकर सुमेर से सामना करना पड़े, इसलिए वहीं खड़ा खड़ा इंतज़ार करता रहा

जल्द ही ताईजी अपने हाथो में कुदाली लिए बाहर आ गयी

सरला – ले समीर बेटा, और कुछ भी चाहिए क्या

मैं – जी नही ताईजी, बस कुदाली ही चाहिए थी... अब मैं चलता हूँ.....

सरला – अरे बेटा कम से कम पानी तो पीकर जा, इतने दिनों बाद आया है तू इधर

मैं – नही ताई, फिर कभी आकर पी लूँगा, आज प्यास नही और जल्दी भी जाना है

सच तो ये था कि अंदर का नज़ारा देखकर मेरा गला सुख चूका था, पर अब दोबारा अंदर जाने की हिम्मत नही थी मुझमे, इसलिए मैंने तुरंत कुदाली ली और अपने खेत की तरफ चल पड़ा,

......................................................................

पुरे दिन खेत में काम करने के बाद मैं, माँ और नीलू दीदी के साथ वापस घर आ गया, मेरा मन आज किसी भी काम में नही लग रहा था, मैं जानना चाहता था कि सुमेर और ताईजी आपस में वो क्या कर रहे थे, पर मुझे समझाने वाला कोई नही था, हार मानकर मैंने सोचा कि किसी तरह चमकू से ही पूछ लूँगा, पर उसे इस बात की भनक नही पडनी चाहिए कि मैंने ताईजी और सुमेर को ऐसा करते देखा

इसी उधेड़बुन में लगा मैं खाना खाने लगा, और खाना खाने के बाद आकर कमरे में लेट गया, थोड़ी देर बाद नीलू भी आकर लेट गयी........ कल की तरह आज भी नींद मेरी आँखों से कोषों दूर थी, और आज के वाकये ने मेरे लिए आज में घी का काम कर दिया, मैं किसी तरह नीलू के सोने का इंतज़ार करने लगा,

और तकरीबन 11 बजे के आस पास जब मुझे ये महसूस हुआ कि नीलू दीदी सो गयी है तो मैंने कल की ही तरह मुठ मारने का सोचा, मैंने हलके से अपने निक्कर को अपने घुटनों तक उतार दिया और अपनी हथेली में थूक लगाकर लंड पर मलने लगा

आज तो मेरा लंड और भी ज्यादा विकराल नज़र आ रहा था, क्यूंकि आज मेरे दिमाग में सरला ताई का नंगा बदन घूम रहा था, मैं ताई के नंगे बदन को सोचकर अपने लंड को मसले जा रहा था, और मुझे कल से भी ज्यादा मजा आ रहा था,

तभी अचानक नीलू दीदी ने हल्की सी करवट ली और मेरी तरफ पीठ करके सो गयी.... मुझे थोडा सा डर लगा.... मैंने डरते डरते नीलू दीदी की और देखा पर उनकी आँखे बंद थी... मुझे यकीन हो गया कि ये सो रही है... मैं फिर से अपने काम में लग गया

पर तभी अचानक वो हुआ जो मैंने कभी सपने में भी नही सोचा था.... मेरी नज़र अचानक नीलू दीदी की उठी हुई मांसल गांड पर जा पड़ी, और मेरे लंड ने ये सोचकर ही एक जोरदार ठुमकी ली,

नीलू दीदी मेरी तरफ पीठ किये लेटी थी, उसके बॉडी कर्व को देखकर मैं पागल सा हो गया…उसकी वो पतली कमर ने मुझ पर नज़ाने क्या जादू सा कर दिया था..जो मैं अपने होश को खो बैठा…

पीछे से उसकी गोरी नागिन सी बल खाती हुई कमर को देख मेरा लंड एक दम से तन गया, शायद आज काम करके दीदी बहुत थक गयी थी इसलिए जमकर नींद ले रही थी, मैं ये सोच कर उनके थोडा सा और करीब आ गया, और पीछे से नीलू दीदी के भरे हुए मस्त जिस्म को देखने लगा

क्या मस्त और सेक्सी बदन था नीलू दीदी का… 30 साइज़ के कसे हुई मम्मे…नीचे गठीला और भरा हुआ पेट और नागिन सी बलखाती कमर, उफ़फ्फ़ गांड तो पूछो ही मत, क्या गोल मटोल गांड थी…मैं अपने आपे से बाहर हो गया…नीलू को देख कर मेरा लंड एक दम से सख़्त हो कर, मेरी निक्कर में झटके खाने लगा

अब मेरे दिमाग़ में वासना का तूफान उठ चुका था…मैं नीलू दीदी के थोडा सा और करीब हो गया, मेरे और नीलू दीदी के बीच अब सिर्फ़ 7-8 इंच का फाँसला था…

नीलू दीदी के इतना करीब लेटे होने के कारण…मेरा लंड मेरे निक्कर में हलचल मचाए हुए था…अब मुझसे रहा नही जा रहा था…मैं दीदी के करीब खिसक गया..मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा…मैं डर रहा था..कि कहीं दीदी जाग ना जाए… पर वासना के नशे में आकर मैं आगे खिसक गया…और नीलू दीदी से एक दम चिपक गया…मेरा तना हुआ लंड अब नीलू दीदी की शलवार के ऊपेर से उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था…मैं काफ़ी देर ऐसे ही लेटा रहा…जैसे मैं नींद में हूँ….

जब थोड़ी देर तक दीदी नही हिली…तो मैं हिम्मत करके और करीब खिसक गया…और मेरा लंड नीलू दीदी की गांड पर और दब गया…नीलू दीदी ने पतली सी शलवार कमीज़ पहनी हुई थी….और नीचे पैंटी भी पहनी हुई थी…जिसके कारण मेरा लंड उनकी गांड की दर्रार में नही जा पा रहा था..पर वैसे ही लेटा-2 अपने लंड को पकड़ कर नीलू दीदी की गदराई हुए गांड पर सलवार के उपर से ही रगड़ने लगा…

मैं साथ में दीदी के ऊपेर नज़र जमाए हुआ था…पर वो बिल्कुल शांत लेटी हुई थे..अब मेरा लंड बिल्कुल अकड़ चुका था…और मैं फारिग होने के बिकुल करीब था… मैंने अपना एक हाथ नीलू दीदी की चिकनी और मखमल जैसे गोरी कमर पर रख दिया…

इस बार नीलू दीदी थोड़ा सा हिली..और फिर से शांत पड़ गई…पर उसके हिलने से मेरा लंड उसकी शलवार और पैंटी को दबाता हुआ उसकी गांड की दर्रार में थोड़ा सा अंदर के तरफ दब गया था..

मैं अपने होशो हवाश खो चूका था, मैंने वासना में भरकर धीरे से अपने लंड को उसकी गांड की दरार में और अंदर घुसाने की कोशिश की, पर इस बार शायद नीलू दीदी के शरीर में थोड़ी हलचल हुई, मैं बिलकुल डर गया और तुरंत अपना लंड वापस पीछे खिंच लिया,

थोड़ी देर बाद ही दीदी दोबारा आराम से सो गयी, मैंने सोचा कि अब और जयादा आगे बढना खतरे से खाली नही है, इसलिए मैं वापस पीछे खिसक गया, अब कुछ भी करना खतरे से खाली नही था, इसलिए मैंने चुपचाप अपना निक्कर उपर किया और सो गया

 
जल्द ही आज की अपडेट दूंगा, आज एक ही अपडेट मिलेगी पर मेगा अपडेट होगी....
 


अगली सुबह मेरी नींद जल्दी ही खुल गयी, पर मैंने देखा कि नीलू दीदी पहले से ही उठकर बाहर जा चुकी थी, नीलू दीदी के बारे में सोचते ही मुझे रात की बात याद आ गयी,

“हाय... कितनी सुंदर है ना दीदी” मेरे दिमाग में आवाज़ आई..... मैं मन ही मन मुस्कुराने लगा, थोड़ी देर बाद उठकर मैं जंगल पानी के लिए निकल गया, चूँकि उस जमाने में लेट्रिन वैगरह तो होते नही थे, इसलिए हगने के लिए जंगल में ही जाना पड़ता था, मैं और चमकू अक्सर साथ ही जाया करते थे, उस दिन भी हम लोग साथ साथ ही जा रहे थे, कि चमकू बोला

चमकू – क्यों बे, कल खेलने क्यों नही आया?

मैं – वो यार, माँ ने मुझे उनके साथ खेत में काम करने के लिए ही बोला है, इसलिए अब मैं खेलने नही आ पाउँगा

चमकू – तो तू मना कर देता चूतिये,

मैं – कैसे मना कर देता यार, अम्मा डांटती तो

चमकू – क्या फुद्दू है तू बहनचोद, अपनी अम्मा की डांट से डरता है,

मैं – क्यों, तू नही डरता क्या तेरी अम्मा से,

चमकू – अबे साले, मैं डरने वालो में से नही, और वैसे भी मेरी अम्मा मेरी कोई बात नही टालती?

मैं – ऐसा क्यूँ???

चमकू – ये तो मैं नही बता सकता, पर इतना जान ले कि मेरी अम्मा मेरी हर बात मानती है, जैसे की वो मेरी अम्मा नही मेरी बीवी हो??

मैं – क्यूँ फेंक रहा है साले, तेरी अम्मा, यानि झुमरी काकी, तेरी हर बात मानती है, ये तो हो ही नही सकता, पूरा गाँव जानता है कि झुमरी काकी कितनी सख्त औरत है, और साले कितनी बार ही मेरे सामने तेरी अम्मा ने तुझे जमकर पीटा है, भूल गया उस दिन जब हमे खेलते खेलते अँधेरा हो गया था, और जब मैं तेरे साथ तेरे घर की तरफ गया तो तेरी अम्मा ने कैसे तुझे उल्टा करके पीटा था, चार दिन तक हगने में भी दर्द होता था तुझे, याद है कि भूल गया

चमकू – सब याद है मुझे, पर वो सब पुरानी बाते है, अब तो मेरे लिए मेरी अम्मा एक नौकरानी की तरह है, जो मेरा हर हुक्म मानती है,

मैं – हा हा हा......... बस कर यार, इतनी फेंकेंगा तो हंस हंस कर मेरी निक्कर में ही टट्टी निकल जायेगी

चमकू (गुस्से से) – साले हरामी, मेरा मजाक उडाता है, आज तो मैं तुझे दिखाकर ही रहूँगा कि मेरी अम्मा मेरी गुलाम है,,,, तू देखता जा

मैंने चमकू की बात को ज्यादा तवज्जो नही दी, और बस ऐसे ही हलकी फुलकी बाते करते करते हम सुबह के अँधेरे में जंगल में पहुंच गये, वहां पर भी चमकू अपनी अम्मा के बारे में ही बके जा रहा था, पर मुझे उसकी बातो पर बिल्कुल भी भरोसा नही हो रहा था, क्यूंकि झुमरी काकी का तो पुरे गाँव में खोंफ था,

झुमरी काकी के पति फौज में नोकरी करते थे, गाँव के लोग उन्हें फोजी साहब कहते थे और हम लोग फोजी काका, उस वक्त बॉर्डर पर भारत और चीन के बिच काफी टेंसन का माहौल था, इसलिए फौजी काका पिछले 6 महीने से घर नही आये थे, और शायद एक आध साल और भी घर नही आते, पर एक बात थी जो फौजी काका के बारे में सबको पता थी, वो ये कि पीछले साल बॉर्डर पर उनकी ट्रक की दुर्घटना हो गयी थी, पर कुछ ही दिनों बाद उन्होंने फिर से ड्यूटी जॉइन कर ली थी, पुरे गाँव में उनकी इस बहादुरी के किस्से मशहूर थे, और जब वो वापस गाँव आये थे तब गाँव वालो ने बड़ी ही गरम जोशी से उनका स्वागत किया था, पर जल्द ही बॉर्डर की टेंसन के चलते उन्हें वापस बुला लिया गया था, फौजी काका बड़े ही अच्छे स्वाभाव के इन्सान थे

पर झुमरी काकी बड़ी ही सख्त किस्म की औरत थी, पुरे गाँव में ये बात मशहूर थी, झुमरी काकी अपने पति की फौजदारी का रौब भी अक्सर दुसरो पर झाडती थी, वैसे दिखने में तो वो काफी अच्छी थी, पर स्वाभाव की बहुत ही कठोर थी, और इसी वजह से मैं भी उनसे बाते करने में डरता था, कई बार मेरे सामने ही वो चमकू को पिट दिया करती थी, और मुझे भी डांटती, इसलिए मैं तो कई दिनों से उनके घर की तरफ भी नही गया,

अब ऐसे में चमकू कहे कि उसकी अम्मा उसकी गुलाम है तो मैं तो क्या कोई भी उसकी बात पर हँसता

खैर जंगल पानी करने के बाद हम दोनों वापस अपने घरो की तरफ लौट चले,

चमकू – चल आज तुझे दिखाता हूँ, मैं अपनी अम्मा से डरता हूँ या वो मेरी गुलाम हैं?

मैं – रहने दे यार, अब मजाक बंद कर, वैसे भी मेरे पास वक्त नही इन सब बातो का, मुझे आज भी माँ और दीदी के साथ खेत जाना है, वो मेरी राह तकती होंगी,

चमकू – चल ठीक है, पर आज शाम को तू इधर आ जाना, आज तो मैं तुझे दिखाकर ही रहूँगा कि मैं सच बोल रहा हूँ या झूट...

मैं – चल ठीक है, आ जाऊंगा शाम को, पर अभी जाने दे मुझे......

चमकू – चल ठीक है फिर, मिलते है शाम को

चमकू से अलविदा लेकर मैं अपने घर की तरफ चल पड़ा, अब भी अँधेरा पूरी तरह नही मिटा था, पर गाँव वाले तो अपनी अपनी बैल लेकर खेतो की तरफ चल पड़े थे, मैं अब तेज़ तेज़ कदमो से अपने घर की तरफ बढ़ने लगा,

घर पहुंच कर मैंने जल्दी से नहाना धोना किया, और फिर माँ और दीदी के साथ खेत में चला गया, मैंने कल की तरह आज भी महसूस किया कि नीलू दीदी बिच बिच में मुझे अजीब नजरो से देखती, पर फिर वापस नार्मल हो जाती,

पुरे दिन खेत पर काम करने के बाद हम लोग शाम को वापस अपने घर की तरफ चल पड़े, घर आकर मैंने दोबारा स्नान किया, स्नान करते ही मेरी दिन भर की थकान दूर हो गयी, स्नान करने के बाद मैं अभी थोडा आराम कर ही रहा था कि मुझे चमकू की बात याद आ गयी,

मैं जल्दी से खड़ा हुआ और बाहर की तरफ जाने लगा

बाहर बाड़े में नीलू दीदी कुछ काम कर रही थी, मुझे बाहर जाता देख वो बोली

नीलू दीदी – समीर, इस वक्त कहाँ जा रहा है?

मैं – दीदी, वो मैं चमकू से मिलने जा रहा हूँ, जल्दी वापस आ जाऊंगा

नीलू दीदी – पर माँ ने बोला था ना, कि उस लडके से दूर रहा कर, वो सही लड़का नही है,

मैं – पर दीदी मैं पक्का जल्दी से घर आ जाऊंगा, और वैसे भी माँ तो अभी सरला ताई के घर गई है, और शायद लेट ही आएगी, तब तक तो मैं वापस आ जाऊंगा

नीलू दीदी – चल ठीक है, पर खाने के टेम से पहले घर आ जाना,समझा

मैं – ठीक है दीदी....

नीलू दीदी से इज़ाज़त लेकर मैं चमकू के घर की तरफ बढ़ गया, जल्दी ही मैं चमकू के घर के सामने था, हमारे घर की तरह उनका भी एक छोटा सा कच्चा मकान था, मैंने जाकर दरवाजे पर दस्तक दी, थोड़ी ही देर में चमकू ने आकर दरवाज़ा खोला,

चमकू – ओह, तो तू आ गया, मुझे तो लगा था कि तू आएगा ही नही,

मैं – कैसे नही आता यार, तूने बुलाया और हम चले आये....... हाहाहा....

चमकू – चल अंदर चलकर बाते करते है..

मैं – झुमरी काकी कहाँ गयी, दिखाई नही दे रही...

चमकू – अम्मा तो अभी बाहर अपनी सहेली के घर गयी है, आने में वक्त लगेगा..... तब तक हम बाते करते है आजा

मैं चमकू के साथ आकर खाट पर बैठ गया

मैं – अच्छा तो अब बता चमकू, तू सुबह सुबह आज क्या बरगला रहा था, कहीं कोइ नशा वशा तो नही कर लिया था सुबह सुबह....

चमकू – साले हरामी, तुझे अब भी मेरी बाते मजाक लगती है, मैं कह रहा हूँ ना कि अब मेरी अम्मा मेरी गुलाम है, तू मानता क्यों नही

मैं – कैसे मान लूँ यार, जिस झुमरी काकी से गाँव का बच्चा बच्चा डरता है, जो तुझे उल्टा लटका कर मार मार कर तेरी गांड सुजा दिया करती थी, तू बोलता है कि वो तेरी गुलाम है, भला मैं कैसे भरोषा कर लूँ

चमकू – लगता है तू ऐसे नही मानेगा, तुझे सच्चाई बतानी ही पड़ेगी....

मैं – सच्चाई, कैसी सच्चाई?

चमकू - पता नहीं तेरे को बताना चाहिए कि नहीं? तू अपने पेट में रख पाएगा या नहीं! सबको बोल दिया तो मैं गया काम से ,

मैं - यार वादा करता हूँ, किसि को नहीं बताऊँगा,

चमकू - तो सुन पिछले ६ महीने से मैं अपनी अम्मा को चोद रहा हूँ,

चमकू की बात सुनते ही जैसे मेरी तो आँखे फटी की फटी रह गयी,

मैं बोला- ये क्या बोल रहा है तू, भांग वांग तो नही खा ली, अपनी अम्मा को ही?

चमकू – हाँ अपनी अम्मा को ही, पर इसमें भी एक और खास बात है

मैं – क्या खास बात

चमकू – यही कि ये सब मेरे बापू ने शुरू करवाया था,

मैं हैरान होकर बोला- क्या फौजी काका ने कहा तुझसे कि काकी को चोदो

चमकू – हाँ यार

मैं – पर बता ना ये सब हुआ कैसे

चमकू - ये तो शायद तुझे पता ही होगा कि करीब 6-7 महीने पहले मेरे बापू का एक हादसा हुआ था, याद है ना

मैं – हाँ याद है ना, एक्सीडेंट के बाद भी तेरे बापू ने होंसला नही हारा और कैसे देश के लिए दोबारा हिम्मत से नोकरी शुरू कर दी, कैसे भूल सकता हूँ मैं

चमकू – ये बात सही है कि मेरे बापू ने होसला नही हारा पर और बहुत कुछ हार गये जो सिर्फ हमे पता है

मैं – मतलब ,,,,, मैं कुछ समझा नही...

चमकू – मैं तुझे सब बताता हूँ, पर तू किसी और को ना बताना

मैं – कैसी बात करता है यार , मैं सच में किसी को ये बात नही बताने वाला





अब चमकू मुझे अपनी कहानी सुनाने लगा जो मैं उसके शब्दों में ही आपको सुना रहा हूँ

चमकू – तो सुन, क़रीब 7 महीने पहले जब मेरे बापू का एक बड़ा ऐक्सिडेंट हुआ और वो बाल बाल बचे, तो उनको करीब करीब 15 दिन अस्पताल में रहना पड़ा था, कुछ दिन बाद वो यहाँ गाँव आये तो मैंने महसूस किया कि अब मेरे बापू और अम्मा किसी बात को लेकर बहुत ही परेशान रहा करते थे,

मैं उन दोनों को दुखी देखता पर मुझे कारण का पता नही था, ऐसे ही कुछ दिन चलते रहे, फ़ीर एक दिन दोनों में बहुत झगड़ा हुआ और मैं घबरा कर वहाँ पहुँचा तो देखा कि अम्मा बिस्तर पर बैठ कर रो रही थी और बापू अपना सर पकड़कर बैठे थे,

मैंने अम्मा को चुप कराया और अपने बापू से बोला- आप लोग क्यों लड़ रहे हो? आपने अम्मा को क्यों रुलाया?

अम्मा आँसू पोंछतीं हुई बोली- बेटा तू जा यहाँ से, तेरा कोई काम नहीं है यहाँ,

बापू- नहीं तू कहीं नहीं जाएगा , हमारी लड़ाई तुमको लेकर ही है,

अम्मा - आप इसको क्यों इसमें उलझा रहे हो , बच्चा है अभी, बेचारा,

बापू- वह अब बच्चा नहीं रहा पूरा जवान है ,

अम्मा - आपको मेरी क़सम इसे यहाँ से जाने दो,

बापू- नहीं आज बात साफ़ होकर रहेगी,

अम्मा फिर से रोने लगी,

मैं हैरान था कि ये हो क्या रहा है?

बापू- देखो अब तुम बच्चे नहीं रहे, पूरे जवान आदमी हो 16-17 साल के, तुमने पता है ना कि मेरा एक्सीडेंट हुआ था, दरअसल इस ऐक्सिडेंट में मेरी मर्दानगि चली गयी है , अब मैं तुम्हारी अम्मा को शारीरिक संतोष नहीं दे सकता, अब अस्पताल वालों ने भी कह दिया है कि कोई उपाय नहीं है मेरे ठीक होने का,

मैं हैरान होकर बोला- तो ?

बापू- मैंने तुम्हारी अम्मा को कहा कि वो चाहे तो मुझे छोडकर जा सकती है, क्योंकि वो कब तक एक नामर्द के साथ रहेगी, पर वो इसके लिए तय्यार नहीं है,

अम्मा बिच में ही बोल पड़ी - अब इस उम्र में एक जवान लड़के की माँ होकर मैं कहाँ जाउंगी ? आप पागल हो गए हो, मैं ऐसे ही जी लूँगी, बस भगवान आपको सलामत रखे,

बापू- पर मैं नहीं चाहता कि तुम अपना मन मार के जियो, मैं तो चाहता हूँ कि तुम जी भर के अपनी ज़िंदगी जियो,

अम्मा - क्या ज़िन्दगी में शारीरिक सुख ही सब कुछ होता है? प्यार का कोई मतलब नहीं है?

बापू- प्यार तो बहुत ज़रूरी है पर शारीरिक सुख का भी बहुत महत्व है, मैं नहीं चाहता कि तुम बाक़ी ज़िन्दगी इसके बिना जीयो,

अम्मा फिर से रोने लगी,

बापू- मैंने एक दूसरा रास्ता भी तो बताया था तुझे ,

ये सुनके अम्मा रोते हुए वहाँ से बाहर निकल गई,

मैं - बापू दूसरा रास्ता क्या हो सकता है?

बापू- बेटा यहीं तो वो मान नहीं रही,

मैं - बापू आप मुझे बताओ मैं उनको मनाने की कोशिश करूँगा,

बापू- ये तुमसे ही सम्बंधित है,

मैं - मेरे से मतलब?

बापू- देखो बेटा, जब औरत प्यासी होती है ना तो वो किसी से भी चुदवा लेती है,

मैं तो उनके मुँह से ये शब्द सुनके हाक्का बक्का तह गया,

बापू- अब तुम्हारी अम्मा अगर किसी से भी चुदवा ली तो हमारी बदनामी हो जाएगी, बोलो होगी कि नहीं?

मैंने हाँ में सर हिलाया,

बापू- इसलिए मैंने उसको ये बोला है कि अब तुम भी जवान हो गए हो तो वो तुमसे ही चुदवा ले, इस तरह घर की बात घर में ही रहेगी,

मेरा तो मुँह खुला का खुला हो रह गया ,

मैं - ये कैसे हो सकता है बापू? वो मेरी अम्मा हैं,

बापू- वो तेरी अम्मा हैं, पर उससे पहले वो एक औरत है, वो अभी सिर्फ़ 38 साल की है, इस उम्र में तो औरत की चुदाई की चाहत बहुत बढ़ जाती है, और तेरी अम्मा तो वैसे भी शुरू से ही बहुत चुदासी रही है

मैं - पर बापू मुझे सोचकर भी अजीब लग रहा है, अम्मा कभी नहीं मानेगी ,

बापू- तू मान जा तो मैं उसे भी मना लूँगा,

मैं - पर बापू.......

बापू- पर वर कुछ नहीं, ज़रा मर्द की नज़र से देख उसे, क्या मस्त चूचियाँ हैं मस्त गुदाज बदन है, बड़े बड़े चूतर हैं, नाज़ुक सी बुर है उसकी, बहुत मज़े से चुदाती है,

अब मैं भी आखिर इन्सान हूँ, कब तक खुद पर लगाम रखता, और अब मेरा लंड खड़ा होने लगा , मैं वासना से भरने लगा,

बापू- वो लंड भी बहुत अच्छा चूसती है, तूने कभी किसी को चोदा है?

मैंने ना में सर हिलाया,

बापू- ओह तब तो तुझे सिखाना भी पड़ेगा, पहले ये बता कि अम्मा को चोदने को तय्यार है ना,

मेरा लौड़ा पैंट में एक तरफ़ से खड़ा होकर तंबू बन गया था, मुझे शर्म आयी और मैं किसी तरह अपने लंड को अजस्ट करने लगा,

ये बापू ने देख लिया और हँसते हुए बोले- चल तू हाँ बोले या ना बोले , तेरे लौड़े ने तो सर उठा कर हाँ बोल ही दिया है, क्यों...हा हा हा.....

मैंने शर्म से सर झुका लिया,

बापू मेरे पास आकर मेरे लौड़े को पकड़ लिए और उसकी लम्बाई और मोटाई को महसूस करने लगे,

और ख़ुश होकर बोले- वाह तेरा लौड़ा तो मेरे से भी बड़ा है और मोटा है, तू तो मुझसे ज़्यादा ही मज़ा देगा अपनी अम्मा को, अब तो मेरा खड़ा ही नहीं होता, पर जब खड़ा होता था तब भी तेरी अम्मा कभी कभी बोलती थी कि मेरा थोड़ा और मोटा होता तो उसको ज्यादा मज़ा आता, अब उसकी बड़े और मोटे लौड़े से चुदवाने की इच्छा भी पूरी हो जाएगी,

फिर बापू मेरे लौड़े से हाथ हटाकर बोले- बेटा मैं तुम्हें सिखा दूँगा कि अम्मा को कैसे चोदना है, पर पहले चलो अम्मा को मनाते हैं और तुम दोनों की चुदायी कराते हैं, आज वो इसीलिए रो रही थी कि उसे तुमसे नहीं चुदवाना है, कहती है कि अपने बेटे से कैसे चुदवा सकती हूँ,

मेरा लौड़ा अब झटके मार रहा था और मैं बापू के पीछे पीछे अम्मा के कमरे में जाने लगा, कमरे में अम्मा उलटी लेटी हुई थीं और उनका पिछवाड़ा सलवार में बहुत ही उभरा हुआ और मादक दिख रहा था, बापू ने मुझे इशारे से उनके चूतरों को दिखाते हुए फुसफुसाते हुए कहा- देख क्या गाँड़ है साली की, अभी देखना तुझसे कैसे कमर उछाल उछाल कर चुदवायेगी?

मैं अपने बापू के मुँह से गंदी बातें सुनकर हैरान हो गया, आजतक मैंने बापू का ये रूप नहीं देखा था, पर मैं तो अम्मा की मोटी गाँड़ देखकर उत्तेजित तो बहुत था,

तभी अम्मा को लगा कि वह कमरे में अकेली नहीं है, तो उसने मुँह घुमाकर देखा और एकदम से उठकर बैठ गयी,

अब बापू उसको देखकर हँसते हुए बोले- क्या जानु , क्यों सीधी हो गयी, चमकू तो तुम्हारी गाँड़ का उभार देखकर मस्त हो रहा था,

फिर बापू ने वो किया जो मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था, उन्होंने मुझे धक्का देकर अम्मा के सामने खड़ा किया और मेरे लौड़े को पकड़कर अम्मा को दिखाते हुए बोले- देख मैं ना कहता था कि कोई भी मर्द तेरा बदन देखकर पागल हो जाएगा, देख तेरा अपना बेटा ही तेरी मस्त गाँड़ देखकर कैसे लौड़ा खड़ा कर के खड़ा है,

अम्मा की तो आँखें जैसे बाहर को ही आ गयीं, वो हैरानी से बापू के हाथ में मेरा खड़ा लौड़ा देखे जा रही थी,

बापू ने मेरा लौड़ा अब मूठ मारने वाले अंदाज़ा में हिलाना चालू किया, और अम्मा की आँखें जैसे वहाँ से हट ही नहीं पा रही थी,

बापू- देख जानु क्या मोटा और लंबा लौड़ा है इसका, तेरी बड़े लौड़े से चुदवाने की इच्छा भी पूरी हो जाएगी,

अब बापू ने उनकी छातियाँ दबानी शुरू की और अम्मा आह कर उठी और बोली- छी क्या कर रहे हो, बेटे के सामने और ये क्यों पकड़ रखा है आपने?

बापू ने जैसे उनकी बात ही ना सुनी हो, वो मुझे बोले- लो बेटा अपनी अम्मा के दूध का मज़ा लो,

जब मैं हिचकिचाया तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अम्मा की छाती पर रख दिया,

अब मैं भी कहाँ रुकने वाला था, मैंने मज़े से छाती दबायी और अम्मा की चीख़ निकल गयी - आह जानवर है क्या? कोई इतनी ज़ोर से दबाता है क्या?

मैं डर गया और बोला- माफ़ करना अम्मा , पहली बार दबा रहा हूँ ना, मुझे अभी आता नहीं,

बापू हँसते हुए बोले- हाँ जल्द सब सिख जाएगा और अपनी अम्मा को बहुत मज़ा देगा , क्यों जानु है ना?

अम्मा कुछ नहीं बोली पर अब मैं थोड़ा धीरे से एक चुचि दबा रहा था और एक बापू दबा रहे थे, जल्द ही अम्मा की आँखें लाल होने लगी और वो वासना की आँधी में बह गयी,

अब बापू ने मुझे कहा- चलो अब उसके दोनों दूध तुम ही दबाओ, और मैं अब मज़े से उनके दूध दबाने लगा,

अब बापू ने मेरी पैंट की ज़िप नीचे की और मेरी पैंट की बेल्ट भी निकाल दी, अम्मा हैरानी से बापू की करतूत देख रही थी, अब बापू ने मेरी पैंट नीचे गिरा दी, और अम्मा ही नहीं बापू की भी आँखें फटीं रह गयीं, क्या ज़बरदस्त उभार था चड्डी में और मेरा लौडा चड्डी से बाहर आकर एक तरफ़ को निकल आया था, वो था ही इतना बड़ा की चड्डी में समा ही नहीं रहा था,

मेरा मोटा सुपाड़ा बाहर देखकर अम्मा की तो आह निकल गई, वो बोली- हे भगवान , कितना बड़ा है और मोटा भी,

बापू- हाँ जानू तुम्हारी बुर तो ये फाड़ ही देगा,

अम्मा - हाँ सच बहुत दर्द होगा लगता है मुझे,

बापू- अरे एक बार ये पहले भी तुम्हारी बुर फाड़ चुका है, जब बुर से बाहर आया था, आज अंदर जाकर फिर फाड़ेगा, और वो हँसने लगे, अब अम्मा भी मुस्करा दी,

फिर बापू ने अम्मा की कुर्ती उतार दी और ब्रा में फंसे हुए गोरे कबूतरों को देखकर मैं मस्ती से उनको दबाकर अम्मा की नरम जवानी का मज़ा लेने लगा,

बापू ने कहा- जानु चड्डी तो उतार दो बेचारा इसका लौड़ा कैसे फ़ंड़ा हुआ है, देखो ना,

अब अम्मा भी मस्ती में आ गयीं थीं , उन्होंने मेरी चड्डी उतार दी और मेरा गोरा मोटा लौड़ा देखकर सिसकी भर उठी,

अब बापू ने मेरा लौडा हाथ में लेकर सहलाया और कहा- देखो जानु कितना गरम है इसका लौड़ा और फिर अम्मा का हाथ पकड़कर उसपर रख दिया,

अम्मा के हाथ में मेरा लौड़ा आते ही अम्मा हाय कर उठी, वो मुझसे आँख नहीं मिला पा रही थी, पर उनका हाथ मेरे लौड़े पर चल रहा था और उनके अंगूठे ने सुपाडे का भी मज़ा ले लिया, मुझे उत्तेजना हो रही थी और मैं झुक कर उनकी ब्रा का हुक खोलना चाहा, पर मैं अनाड़ी खोल ही नहीं पाया,

बापू हँसते हुए मुझे हटा कर हुक खोल दिए और ब्रा को अलग करके अम्मा के बड़े बड़े मम्मे नंगा कर दिए, मैं तो जैसे पागल ही हो गया और मैंने अम्मा के खड़े लम्बे काले निपल्ज़ को मसलना शुरू किया, अब अम्मा की आह्ह्ह्ह्ह्ह निकलने लगी और उनका हाथ लौड़े पर और ज़ोर से चलने लगा,

तभी बापू ने अम्मा को लिटा दिया और मुझे बोले- चल बेटा अब अपनी माँ का दूध पी, जैसे बचपन में पिया था,

मैं झुका और अपना मुँह एक दूध पर रख दिया और उसे चूसने लगा, और दूसरे हाथ से दूसरे दूध को दबाकर मस्ती से भर गया,

अब अम्मा भी मज़े से हाऊय्य्य्य्य मेरा बच्चाआऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य कहकर मेरा सर अपनी छाती पर दबाने लगी,

बापू बोले- अरे बस क्या एक ही दूध पिएगा , चल दूसरा भी चूस,

मैंने दूध बदलकर चूसना चालू किया, उधर बापू अम्मा की सलवार उतार दिए, और मुझे पहली बार पता चला की अम्मा पैंटी पहनती ही नहीं, बापू ने बाद में बताया था कि पिछले कुछ सालों से उन्होंने अम्मा को पैंटी पहनने से मना किया था,

अब अम्मा की बिना बालों वाली बुर मेरे आँखों के सामने थी, बापू ने मुझे अम्मा के पैरों के पास आने को कहा और उनकी टांगों को घुटनो से मोड़कर फैला दिया और उनकी जाँघों के बीच इनकी फूली हुई बुर देख कर मुझे लगा कि मैं अभी झड़ जाऊंगा

फिर बापू ने मुझे बुर सहलाने को कहा और वो नरम फूली हुई बुर को दबाकर सहलाकर मैं बहुत गरम हो गया, मेरे लौड़े के मुँह में एक दो बूँद प्रीकम आ गया था,

बापू ने उस प्रीकम को अपनी ऊँगली में लिया और सूंघकर बोले- वाह क्या मस्त गंध है,

फिर अम्मा के नाक के नीचे रखकर उनको सुँघाए और फिर अपनी ऊँगली अम्मा के मुँह में डाल दी, अम्मा बड़े प्यार से उसको चाट ली,

बापू बोले- बेटा, अपनी अम्मा को लंड दो चूसने के लिए , उसको चूसने में बहुत मज़ा आता है, अब अम्मा उठकर मेरा लौडा मुँह में लेकर चूसने लगी, और सुपाडे को जीभ से चाटने लगी,

फिर बापू ने कहा- चलो बाद में चूस लेना, अब चुदवा लो, अम्मा लौडा मुँह से निकाल कर लेट गयी,

अब बापू ने अम्मा की बुर की फाँकों को अलग किया और उनकी गुलाबी छेद को मुझे दिखाया और बोले- बेटा ये तेरा जन्म स्थान है, तू यहाँ से ही पैदा हुआ था, अब चल वापस यहीं अपना लौड़ा डालकर फिर से अंदर जा,

अब मैं अम्मा की जाँघों के बीच आया और बापू ने मेरे लौड़े को पकड़ कर के सुपाडे को गुलाबी छेद पर रखा और कहा- चल बेटा धक्का दो, मैंने धक्का मारा और आधा लौड़ा बुर के अंदर चला गया, अम्मा की चीख़ निकल गयी- हाऽऽऽऽयय्यय मरीइइइइइइइइइइ , धीरे से करोओओओओओओओओ ,

मैंने घबरा के बापू को देखा तो उन्होंने इशारा किया और ज़ोर से मारो, मैंने फिर धक्का मारा और मेरा पूरा लौड़ा अंदर चले गया, मुझे लगा कि जैसे किसी गरम भट्टी में मेरा लौडा फँस गया है, वाह क्या तंग बुर थी अम्मा की, अम्मा को शायद दर्द हो रहा था वो बोली- आह बेटा धीरे करो, तुम्हारा बहुत बड़ा है, थोड़ा समय दो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,

बापू ने कहा- बेटा अम्मा का दूध चूसो और दबाओ वो मस्त हो कर चुदवायेगी, मैंने वैसे ही किया, अब अम्मा गरम होने लगी और उनका दर्द भी मज़े में बदलने लगा,

फिर मैंने उनके होंठ चूसने शुरू किए, अब अम्मा ने मेरे चूतरों पर अपने हाथ रख दिया और मुझे धक्का मारने में मदद करने लगी,

उधर अम्मा नीचे से अपनी कमर उठाकर मेरा साथ देने लगी, अब ज़ोरों की चुदायी हो रही थी, तभी मैंने देखा कि बापू अपना पैंट उतारकर अपने छोटे से लंड को रगड़ रहे थे पर वो खड़ा नहीं हो रहा था,

उधर अम्मा अब चिल्ला रही थी- हाऊय्य्य्य्य्य बेटाआऽऽऽऽऽऽ चोद मुझे आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त लौड़ा है तेरा हाय्य्य्य्य मर गईइइइइइइइइ फाड़ दे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरी फाड़ दे, हाय्य्य्य्य्य्य्य ऐसी ही चुदायी चाहिए थी मुझे बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽ ,

अब कमरा फ़च फ़च की आवाज़ से भर गया था,

बापू अब पास आकर हमारी चुदायी देख रहे थे और अपना लंड हिला रहे थे, तभी अम्मा चिल्ला कर बोली- हाय्य्य्य्य्य्य्य जोओओओओओओओओओर्र्र्र्र से चोदोओओओओओओओओओ , आह्ह्ह्ह्ह मैं झड़ीइइइइइइ ,

अब मैं भी अपनी अम्मा के साथ ही झड़ गया,

बापू अभी भी लंड हिला रहे थे पर वह अभी भी छोटा सा सिकुड़ा हुआ ही था, मुझे बापू के लिए काफ़ी अफ़सोस था पर अपने लिए मैं बहुत ख़ुश था, मुझे चोदने के लिए चूत जो मिल गयी थी,

बस उस दिन के बाद से मैं अम्मा के साथ ही सोता हूँ, और वो रोज़ ही कम से कम दो बार मुझसे अपनी फुद्दी मरवाती है, अब तो मैं अम्मा की गांड भी मारता हूँ....

चमकू की कहानी सुनकर मेरा लोडा तो मेरी पेंट फाडकर बाहर आने को तैयार हो गया, मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजना महसूस कर रहा था, अब मुझे चुदाई के बारे में काफी कुछ पता चल गया था, और ये भी कि कल सरला ताई और सुमेर चुदाई ही कर रहे थे.....

चमकू – क्यों बे, अब तो यकीन हुआ ना कि अम्मा मेरी गुलाम है....

मैं – हाँ यार , सच में, तू बड़ी ही किस्मत वाला है, तेरे पास रोज़ चोदने के लिए चूत जो है...

चमकू – वैसे अगर तू चाहे तो एक काम हो सकता है..

मैं – वो क्या

चमकू – मैं तुझसे अपनी अम्मा को चुदवा सकता हूँ

चमकू की बात सुनकर तो मुझे लगा जैसे अभी मेरा पानी निकल जाएगा

मैं – पर यार ये कैसे सम्भव है, मेरा मतलब है कि तेरी बात अलग है, तू उनका बेटा है, पर वो मुझसे क्यों करवाएगी

चमकू – मेरे कहने से वो कुछ भी कर सकती है...

मैं – सच्ची, तू सच में काकी की दिलवाएगा मुझे....

चमकू – हाँ, पर एक शर्त है....

मैं – वो क्या...

चमकू – तू जब भी कोई चूत मारे तो मुझसे भी उसकी मरवाएगा....

मैं – पर यार मैं तो किसी की चूत नही मारता.,...

चमकू – अबे पता है बेवकूफ, इसलिए तो बोला कि जब भी मारे, आज नही तो कल, पर जब भी मारे

मैं – चल फिर तय रहा... पर तू झुमरी काकी को कैसे राज़ी करेगा....

चमकू – तू उसकी फ़िक्र मत कर, कुछ ही दिनों में वो तेरे लंड के निचे लेटी होंगी, बस तेरा लंड चूत मारने के लायक हो, कहीं ऐसा ना हो कि 2 इंच की लुल्ली लेकर हाज़िर हो जाए, नही तो तेरे साथ मुझे भी हाथ धोना पड जायेगा अपनी अम्मा की फुद्दी से, हा हा हा ..........

चमकू मेरे लंड का मजाक उड़ाकर हंसने लगा पर उसे ये बात कहाँ पता थी कि मेरा लंड उसके लंड से दुगुना लम्बा और ढाई गुना मोटा है.... मैं भी उस वक्त ज्यादा कुछ नही बोला... कुछ देर और हम यहाँ वहां की बाते करते रहे और फिर मैं वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा....

 
pliz comment krke bataye aapko khani kaisi lag rhi hai, is latest update ko likhne me ek or member ne meri help ki h, unka bhi bhut bhut sukriya......
 
main dekh rha hu ki jyadatar readers sirf pdhkr niklne me hi vishwas dikha rhe h, plz thoda sa time comments me bhi de,

isse ek to hme bhi update likhne ka hosla milega or aapko bhi update jldi milegi
 


चमकू से विदा लेकर मैं वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा, मेरे मन में आनंद की लहरे उठ रही थी, क्यूंकि चमकू ने जल्द ही मुझे अपनी अम्मा की चूत दिलाने का वादा जो किया था, मैं तो खुशी के मारे फुले ही नही समा रहा था, इसी खुशी में मेरे कदम अपने आप तेज़ी से घर की तरफ बढे जा रहे थे, कि तभी बिच में सरजू चाचा अपने घर के आंगन में बैठे दिखाई दे गये,

सरजू चाचा पुरे गाँव में अपने नशे की वजह से बदनाम थे, 24 घंटे बस चिलम खिंचा करते, उनका खेत भी हमारे खेत से बस थोडा ही पहले पड़ता था, चम्पक चाचा तो अक्सर अपने खेत में बने कोठियार(घास फूस और पत्थरों से बना कमरा) में ही पड़ा रहता था, रात को भी अक्सर वो वहीं रहता था, उसके घर में उसकी बीवी शांता चाची, और उनकी एक 15 साल की बेटी रानी थी, सरजू चाचा के बारे में ये बात भी पुरे गाँव में फैली थी कि सरजू चरसी होने के साथ साथ रंडीबाजी का शौक भी फरमाता है.. पर उसके मुंह पर ये बात बोलने की हिम्मत किसी में नही थी,

गाँव वाले अक्सर उससे कम ही बातचित करते थे, इसलिए सरजू चाचा भी ज्यादातर वक्त अपने खेत में ही रहते थे, और महीने में कोई 5-6 बार ही अपने घर आता थे,

बापूजी ने भी मुझे उससे दूर रहने को कहा था, पर चमकू की उससे अच्छी बनती थी, इसी वजह से मेरी भी थोड़ी जान पहचान उससे हो गई थी....

इसीलिए मुझे वहां से जाता देख उसने मुझे आवाज़ दी....

सरजू – अरे समीर बिटवा, कहाँ चले जा रहे हो आज?

मैं – कुछ नही सरजू चाचा, बस चमकू से मिलने गया था, अब घर की तरफ जा रहा हूँ वापस...

सरजू – अरे घर कहीं भागत जात है का, तनिक हमरे पास भी आकर बैठो जरा...

मैं – अरे नही चाचा, अभी काफी लेट हो गया है, माँ राह तकती होगी मेरी...

सरजू – अरे बिटवा, बस 5 मिनट की ही तो बात है, आओ जरा

मैं उसके पास नही बैठना चाहता था, पर हारकर मुझे उसकी बात माननी ही पड़ी, मैं जाकर उसकी खाट पर उसके साथ बैठ गया, सरजू हमेशा की तरह ही अपनी चिलम खिंच रहा था...

सरजू – लो बिटवा, तनिक तुम भी खींचकर देखो, कसम से मजा आ जायेगा......

मैं – अरे नही चाचा, तुम तो जानते हो, मुझे नशा करना पसंद नही...

सरजू – अरे बिटवा, बस एक कश लगाकर देखो, फिर देखो कितना हल्का हल्का महसूस होता है....

मैं – नही चाचा.... आप ही पीओ

सरजू – चल ठीक है, तुझे नही करना ना सही, पर सच में, जिन्दगी में मजा सिर्फ दो ही चीज़ में आता है

मैं – किनमे??

सरजू – एक तो चिलम खींचने में ..

मैं – और दूसरा..??

सरजू – और दूसरा चुदाई में.... हा हा हा ...

ये बोलकर सरजू हंसने लगा, पर मुझे बड़ा अजीब लग रहा था, पर मैं भी क्या बोलता, बस चुपचाप उसकी बात सुनता रहा

सरजू – अरे चुप काहे हो, चिलम तो नही पीते तुम, पर चुदाई तो की होगी कभी...

मैं – न....न...नही चाचा

सरजू (हँसते हुए) – अरे,इका मतलब अभी तक अपना हाथ जगन्नाथ ही करते हो... हा हा हा

मैं बस बेमन से मुस्कुरा दिया, बोलता तो भी क्या बोलता

सरजू – पर सच बोलत है समीर बिटवा, चूत मारने में जो मजा है ना, वो किसी और चीज़ में नाही....क्यों सही है ना

मैं – अब मैं क्या बताऊ चाचा, हम तो आज तक कोई चुत देखे ही नही, मारने की बात तो बहुत दूर की है...

सरजू – अरे का बात करते हो ,आज तक कोनो चूत ही नही देखि तुमने????

मैं – नही चाचा...

सरजू – हम्म... लगता है बिलकुल कोरे हो अभी तक, पर फिकर ना करो, जल्द ही कोई ना कोई तुमको भी मिल ही जायेगी,

मैं – देखि जाएगी चाचा ...

सरजू – चलो फिर, आया करो कभी कभी हमरे खेत पर भी, तुमरे खेत के पास ही तो है बिलकुल, हमरा भी तनिक टाइम पास ही हो जायेगा... क्यों... हा हा हा

मैं – ठीक है चाचा...... अब चलता हूँ....

सरजू चाचा से विदा लेकर मैं अपने घर की तरफ चल पड़ा, आज मैं बहुत ही उत्तेजित था, एक तो चमकू और उसकी अम्मा की चुदाई के बारे में सुनकर, और दूसरा सरजू चाचा की गरम बातो की वजह से .......

अब मेरा लंड बड़ा ही सख्त होकर मेरी पेंट में तम्बू बनाये हुआ था, मैं किसी तरह अपने लंड को एडजस्ट करता हुआ अपने घर पर पहुंचा, मेरी किस्मत अच्छी थी कि माँ अभी तक ताई के घर से वापस नही आई थी, घर पहुंचने के कुछ देर बाद ही पीछे से माँ भी आ गई, दीदी ने आज खुद ही खाना बनाकर रख लिया था, फिर हम सब ने मिलकर खाना खाया, माँ ने मुझे कल भी उनके साथ खेत में आने को बोल दिया, मैंने भी सर झुकाकर उनकी बात मान ली.....

खाना खाने के बाद मैं आकर सीधा अपने बिस्तर में लेट गया, और आज पुरे दिन हुए वाकयों को याद करने लगा कि किस तरह चमकू ने अपने बाप के कहने पर अपनी माँ की फुद्दी मारी, और किस तरह सरजू चाचा उसे चुदाई की गर्म बाते कर रहे थे, वो सब बाते याद आते ही दोबारा उसका लंड बुरी तरह खड़ा होकर तन गया, अब चूँकि मैं निक्कर में और बिना चड्डी के था, इसलिए मेरा लंड मेरे निक्कर में खतरनाक उभार बनाये हुए था,

मैं अभी पड़ा पड़ा अपने लंड को एडजस्ट कर ही रहा था कि नीलू दीदी भी कमरे में आ गई, हमने ज्यादा बात नही की और सीधा सो गये, पर मेरी आँखों में नींद कहाँ थी और बिना मुठ मारे तो मुझे आज नींद आने वाली नही थी, इसलिए मैं चुपचाप दीदी के सोने का वेट करने लगा, ताकि रोज़ की तरह उनके मस्त जिस्म से थोड़ी छेड़छाड़ कर सकूं

अब रात के करीब 12 बजने वाले थे, दीदी मेरी तरह पीठ किये गद्दे पर लेटी थी, मुझे डर तो अब भी लग रहा था, पर बिना मुठ मारे नींद भी तो नही आती, आख़िर में मैंने फैंसला कर लिया…चाहे वो जो भी हों…पर मैं ऐसे मोके को हाथ से नही जाने दूँगा…मैंने अपनी आँखे खोल कर गौर से देखा…मुझे अपनी आँखों पर विश्वास नही हुआ..नीलू दीदी ने आज क्रीम कलर का पतला सा शलवार कमीज़ पहना हुआ था…..

मेरा तो लंड एक ही पल में खड़ा हो कर झटके खाने लगा…पीछे उसकी गोश्त से भरे गोरे बदन को देख कर मुझसे रहा नही गया…और मैं उसकी तरफ खिसक कर उससे पीछे से चिपक गया…और धीरे -2 अपने और नीलू दीदी के बीच के गॅप को कम करने लगा…और कुछ ही देर में मैं नीलू दीदी के बदन से पीछे से चिपक गया…इस बार मेरा तना हुआ लंड उसकी गांड की दर्रार में धँस गया…

दीदी थोड़ा सा हिली…और अपनी गांड को पीछे मेरे लंड पर दबा दिया…मेरा लंड नीलू दीदी की शलवार को उसकी गांड की दर्रार में आगे सरकता हुआ…उसकी गांड की दर्रार में धँस गया…पर वो ये सब ऐसे कर रही थे…जैसे वो बहुत ही गहरी नींद में हो…इसीलिए मैं कुछ भी खुल कर नही कर सकता था…

मैं धीरे-2 अपनी कमर को हिला कर अपने लंड को उसकी गांड की दर्रार में रगड़ने लगा.. वो बिना हीले डुले वैसे ही पड़ी हुई थी….नीलू दीदी अब तेज़ी से साँसें ले रही थी. पर मैं बिल्कुल श्योर नही था, कि वो जाग रही हैं…या सोई हुई हैं…

पर तब एक मेरे ऊपर वासना के नशे का असर होने लगा था…मैंने धड़कते दिल के साथ अपना एक हाथ उसके पेट पर रख दिया…और कुछ देर लेटे रहने के बाद भी जब कोई हरकत ना हुई…तो मैं धीरे-2 अपने हाथ को दीदी के मम्मो की तरफ बढ़ाने लगा… और कुछ ही मिनिट में मेरा हाथ दीदी की कमीज़ के ऊपर उसके राइट मम्मे पर था..

जैसे ही मेरा हाथ नीलू दीदी की कमीज़ के ऊपर से उनके मम्मे पर पहुँचा… मैं मस्ती में एक दम पागल सा हो गया…उसके सख़्त और गोश्त से भरे मम्मे उनके तेज़ी से साँस लेने की वजह से ऊपर नीचे हो रही थी… मैं उनकी नाक से साँस लेने की आवाज़ को भी सॉफ-2 सुन पा रहा था…

फिर मैं कोई 5 मिनट तक ऐसे ही अपना हाथ उसके मम्मे पर रखे अपने लंड को उसकी गांड की दर्रार में आगे पीछे करता हुआ रगड़ता रहा…फिर मैंने हिम्मत करके धीरे-2 नीलू दीदी के मम्मे को अपने हाथ से दबाना चालू कर दिया…

मैं अपना सर उठा कर नीलू दीदी के फेस और आँखों पर नज़र जमाए हुआ था…ताकि अगर वो उठ भी जाए तो, मैं अपना हाथ पीछे खींच लूँ…पर मेरे अंदर वासना का तूफान बढ़ता ही जा रहा था…

और फिर मैंने अपना आपा खो कर धीरे-2 नीलू दीदी के मम्मे को दबाना शुरू कर दिया…वो एक पल के लिए थोडा सा हिली…और उनके मूह से उम्ह्ह की हलकी सी आवाज़ निकल गयी…पर वो ऐसे निकली जैसे वो नींद में हो….

मैं एक पल के लिए उसकी आवाज़ सुन कर अपने हाथ को वहीं रखे हुए थम गया… और जब थोड़े से इंतजार के बाद उसकी तरफ से कोई रियेक्शन नही हुआ…तो मैं फिर से अपने हाथ से धीरे-2 नीलू दीदी के मम्मे को दबाना शुरू कर दिया…अब मेरे हाथ की सख्ती उसकी मम्मे पर बढ़ाता जा रहा था….

मेरा तना हुआ लंड अब और ज्यादा अकड़ चुका था…मैंने अपने हाथ को नीलू दीदी के मम्मे से हटा कर, उसकी जांघ पर रख दिया…और धीरे जांघ को सहलाते हुए,नीचे आने लगा…जब मेरा हाथ उनके घुटने तक पहुँचा…तो मैंने नीलू की कमीज़ के पल्ले को पीछे से पकड़ कर ऊपर उठाना शुरू कर दिया…

मेरे हाथ पैर हवस और डर के मारे काँप रहे थे…मैं दीदी के फेस की ओर सर उठा कर देखते हुए…दीदी की कमीज़ को ऊपर उठाने लगा…जैसे-2 उसकी कमीज़ ऊपर उठ रही थी…मेरे दिल की धड़कने और तेज होने लगी…धीरे-2 मैंने उनकी कमीज़ को उसकी कमर तक ऊपर कर दिया…और फिर एक बार दीदी के फेस की तरफ देखा… उसकी आँखे अब भी बंद थी…पर उनके फेस पर अजीब सी तसूर्रत थी…मैंने उसकी जांघ पर धीरे- हाथ फेरना चालू कर दिया...फिर मैं थोडा सा पीछे हुआ पीछे से नीलू की गांड को देखने लगा….”उफ़फ्फ़ मेरी तो जान ही निकल गयी….क्रीम कलर की पतली सी शलवार में से उसकी ब्लॅक पैंटी सॉफ नुमाया हो रही थी…

मैंने अपना सारा कुछ दाँव पर रखते हुए…अपने शॉर्ट को नीचे करके अपने सख़्त खड़े हुए लंड को बाहर निकाल लिया…और उसकी शलवार और पैंटी के ऊपर से अपने लंड को उसकी गांड की दर्रार में रगड़ने लगा…मैं अब पूरी तरह से होश खो चुका था…

मेरा दिल कर रहा था, कि मैं अभी नीलू की शलवार और पैंटी को निकाल कर अपने लंड उसकी गांड के सूराख में डाल दूं…और खूब कस कस के दीदी को चोदु… पर मेरी हिम्मत नही पड़ रही थी… …अब मेरे लंड की नसें फूलने लगी थी…

मेरा लंड अब अपना पानी छोड़ने वाला था…मैं नीलू दीदी के जिस्म से एक दम चिपक गया…मेरे लंड का कॅप दीदी की पैंटी को उसकी गांड के लाइन में फैलाता हुआ…उसकी गांड के सूराख में पैंटी के ऊपर से दब गया….

इस बार फिर उसके मूह से उम्ह्ह की आवाज़ निकल गयी…मैंने अपने हाथ को आगे लेजा कर उसके मम्मे पर कमीज़ के ऊपर से रख दिया…और अपनी कमर को धीरे-2 हिलाने लगा.. अचानक मुझे अपने बदन का सारा खून अपने लंड की नसों में इकट्ठा होता महसूस होने लगा….और मेरे लंड से पानी की बोछार होने लगी…मेरा पूरा बदन काँप गया…

जब मुझे होश आया…तो मेरे डर के मारे गान्ड फटने लगी…मैं जल्दी से पीछे हो गया…और बिस्तर से उठ कर एक कपड़े को उठा कर बिस्तर पर आ गया, और पहले अपने लंड और बिस्तर पर गिरे वीर्य को सॉफ किया…फिर दीदी की जांघ और गांड वाले हिस्से से शलवार को बड़े ध्यान से सॉफ किया....पर मेरे गाढ़े वाइट कलर के वीर्य से दीदी की शलवार कुछ गीली हो गयी थी…मैंने हल्के हाथ से दीदी की कमीज़ के पल्ले को नीचे कर दिया…और बिस्तर पर लेट गया…

 
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