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फिर मैं नेहा के होंठों और चुचूकों को चूसते हुए अपने लिंग को उसकी की योनि की गहराइयों में धकेलने लगा तथा बहुत ही तेज़ी से धक्के लगाने लगा।
नेहा भी उसी तेज़ी से सिसकारियाँ लेती हुई मेरे हर धक्के का उत्तर अपने कूल्हों को उचका उचका कर देती और बड़े प्यार से मेरे लिंग का योनि के अंदर स्वागत करती।
लगभग पन्द्रह से बीस धक्कों के बाद नेहा अत्यंत ही ऊँचे स्वर में चिल्लाते हुए सिसकारी ली और उसका शरीर ऐंठने लगा!
उसकी टाँगें अकड़ गई, साँसें अत्यन्त तेज़ हो गई और वह हाँफते हुए कांपते स्वर में कहने लगी- उईई.. माँ…. मैं गई.. गई.. गई..
इसके साथ ही उसकी योनि के अंदर बहुत ही तीव्र सिकुड़न हुई तथा उसकी सिकुड़ती हुई योनि ने मेरे फूले हुए लिंग को जकड़ लिया और उसे अन्दर की ओर खींचने लगी!
जब मुझे लिंग को उसकी योनि के अंदर बाहर करने में अड़चन आने लगी तब मैंने अत्याधिक जोर लगा कर तेज़ी से धक्के लगाये।
योनि की जकड़न और लिंग की फुलावट के कारण हम दोनों के गुप्तांगों पर बहुत ही तीव्र रगड़ लगी जिससे दो धक्कों में ही हम दोनों एक साथ सखलित हो गए।
उसकी योनि के अंदर उसके रस की धारा और मेरे लिंग से निकले रस की बौछार से बाढ़ आ गई थी!
तब नेहा ने मुझे अपने बाहुपाश में ले कर अपने शरीर के साथ चिपका लिया तथा मुझे चूमने लगी!
उसकी योनि के अन्दर मेरे और उसके रस के मिश्रण से पैदा हुई गर्मी के कारण उसकी योनि और भी अधिक सिकुड़ गई तथा उसकी योनि मेरे लिंग को अत्याधिक शक्ति से जकड़ कर अपना प्यार प्रदर्शित करने लगी।
मैं नेहा और उसकी योनि के प्यार को ग्रहण करने के लिए नेहा के शरीर के ऊपर ही लेट गया और उसके स्तनों को मसलते हुए उसके रसीले होंटों और जीह्वा को चूसने लगा!
पन्द्रह मिनटों के बाद जब नेहा की योनि की जकड़न और मेरे लिंग की फुलावट कम हुई तब मैंने अपने लिंग को उसकी योनि से बाहर निकला और उसके बगल में लेटते हुए उसे अपने साथ चिपका लिया।
लेटे लेटे हम दोनों को कब नीद आ गई कुछ भी पता नहीं चला।
जब मेरी नींद खुली तो देखा कि सुबह के पांच बज चुके थे लेकिन पास में सोई हुई नेहा के आकर्षक एवं कामुक नग्न शरीर को देख कर मेरा मन डोल गया।
मैं अपने पर नियंत्रण खो गया और मैंने नेहा की चूचियों को मसलना और उसके चुचूकों को चूसने लगा तथा उसके जघन-स्थल के छोटे छोटे बालों को अपने हाथों से सहलाने लगा!
नेहा को जब अपने गुप्तांगों पर मेरा स्पर्श महसूस हुआ तो उसने अपनी आँखें खोली और मुझे विस्मित निगाहों से देखते हुए उठ कर बैठ गई!
फिर मेरे नग्न शरीर और लिंग को देख कर शायद उसे बीती रात की याद आ गई तो मुस्करा कर मुझसे लिपट गई तथा मेरे होंटों को चूमने लगी!
कुछ देर के बाद उसे मेरे लिंग की याद आ गई तब वह झट से एक हाथ से उसे पकड़ कर मसलने लगी और दूसरे हाथ से मेरे अंडकोष पकड़ कर उन्हें सहलाने लगी।
नेहा का हाथ लगते ही मेरे लिंग में चेतना आ गई और वह देखते ही देखते खड़ा हो गया।
मेरे लिंग के कड़क होते ही नेहा घूम गई और 69 की स्तिथि बनाती हुई मेरे लिंग को अपने मुँह में डाल कर चूसने लगी।
उसने मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ कर मेरे मुँह को अपनी योनि पर लगा कर दबा दिया।
नेहा भी उसी तेज़ी से सिसकारियाँ लेती हुई मेरे हर धक्के का उत्तर अपने कूल्हों को उचका उचका कर देती और बड़े प्यार से मेरे लिंग का योनि के अंदर स्वागत करती।
लगभग पन्द्रह से बीस धक्कों के बाद नेहा अत्यंत ही ऊँचे स्वर में चिल्लाते हुए सिसकारी ली और उसका शरीर ऐंठने लगा!
उसकी टाँगें अकड़ गई, साँसें अत्यन्त तेज़ हो गई और वह हाँफते हुए कांपते स्वर में कहने लगी- उईई.. माँ…. मैं गई.. गई.. गई..
इसके साथ ही उसकी योनि के अंदर बहुत ही तीव्र सिकुड़न हुई तथा उसकी सिकुड़ती हुई योनि ने मेरे फूले हुए लिंग को जकड़ लिया और उसे अन्दर की ओर खींचने लगी!
जब मुझे लिंग को उसकी योनि के अंदर बाहर करने में अड़चन आने लगी तब मैंने अत्याधिक जोर लगा कर तेज़ी से धक्के लगाये।
योनि की जकड़न और लिंग की फुलावट के कारण हम दोनों के गुप्तांगों पर बहुत ही तीव्र रगड़ लगी जिससे दो धक्कों में ही हम दोनों एक साथ सखलित हो गए।
उसकी योनि के अंदर उसके रस की धारा और मेरे लिंग से निकले रस की बौछार से बाढ़ आ गई थी!
तब नेहा ने मुझे अपने बाहुपाश में ले कर अपने शरीर के साथ चिपका लिया तथा मुझे चूमने लगी!
उसकी योनि के अन्दर मेरे और उसके रस के मिश्रण से पैदा हुई गर्मी के कारण उसकी योनि और भी अधिक सिकुड़ गई तथा उसकी योनि मेरे लिंग को अत्याधिक शक्ति से जकड़ कर अपना प्यार प्रदर्शित करने लगी।
मैं नेहा और उसकी योनि के प्यार को ग्रहण करने के लिए नेहा के शरीर के ऊपर ही लेट गया और उसके स्तनों को मसलते हुए उसके रसीले होंटों और जीह्वा को चूसने लगा!
पन्द्रह मिनटों के बाद जब नेहा की योनि की जकड़न और मेरे लिंग की फुलावट कम हुई तब मैंने अपने लिंग को उसकी योनि से बाहर निकला और उसके बगल में लेटते हुए उसे अपने साथ चिपका लिया।
लेटे लेटे हम दोनों को कब नीद आ गई कुछ भी पता नहीं चला।
जब मेरी नींद खुली तो देखा कि सुबह के पांच बज चुके थे लेकिन पास में सोई हुई नेहा के आकर्षक एवं कामुक नग्न शरीर को देख कर मेरा मन डोल गया।
मैं अपने पर नियंत्रण खो गया और मैंने नेहा की चूचियों को मसलना और उसके चुचूकों को चूसने लगा तथा उसके जघन-स्थल के छोटे छोटे बालों को अपने हाथों से सहलाने लगा!
नेहा को जब अपने गुप्तांगों पर मेरा स्पर्श महसूस हुआ तो उसने अपनी आँखें खोली और मुझे विस्मित निगाहों से देखते हुए उठ कर बैठ गई!
फिर मेरे नग्न शरीर और लिंग को देख कर शायद उसे बीती रात की याद आ गई तो मुस्करा कर मुझसे लिपट गई तथा मेरे होंटों को चूमने लगी!
कुछ देर के बाद उसे मेरे लिंग की याद आ गई तब वह झट से एक हाथ से उसे पकड़ कर मसलने लगी और दूसरे हाथ से मेरे अंडकोष पकड़ कर उन्हें सहलाने लगी।
नेहा का हाथ लगते ही मेरे लिंग में चेतना आ गई और वह देखते ही देखते खड़ा हो गया।
मेरे लिंग के कड़क होते ही नेहा घूम गई और 69 की स्तिथि बनाती हुई मेरे लिंग को अपने मुँह में डाल कर चूसने लगी।
उसने मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ कर मेरे मुँह को अपनी योनि पर लगा कर दबा दिया।