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रंगीली बीवी की मस्तियाँ complete

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उसका चहरा वाह….वो अब मासूम नही सेक्सी लग रही थी शायद यही कारण था की वो अपने कपड़े चेंज करने चले गई ,लेकिन मेरे लिए वो इतनी मेहरबान कैसे हो रही थी,...??????

वो शर्माते हुए मेरे पास आयी और फिर से बिस्तर में लेट गई ,इसबार वो खुलकर कुछ भी नही कर रही थी,लेकिन मुझे उसके इस रूप को देखकर कुछ हिम्मत सी आयी,मैं फिर से उसके ऊपर आया और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया ,उसकी सांसे उखड़ी हुई थी मेरे हाथ नीचे गए और उसकी पेंटी के गीलेपन से ही मैंने उसके मन को पढ़ लिया,

वो मेरी हर छुवन पर सिसकिया ले रही थी,....

“हमारे बीच की सभी दीवारे थोड़ दो विकाश ,मैं तुम्हारी होना चाहती हु….”

उसके काँपते हुए होठो ने मुझसे कहा ...और मैं उसके रसभरे होठो को अपने होठो में लेकर उसका रस निचोड़ने लगा….वो और भी मुझे अपनी ओर भिच लेती वो अपने चरम पर थी ,

प्यार की यही खासियत है की जिस्म के मिलान से बढ़कर भी मजा उसमे आता है,वो अहसास ही वो सुकून दिला देता है,सबकुछ दूसरे के ऊपर छोड़ देना,अपने को किसी और का कर देना,पूर्ण समर्पण यही वो प्यार है जिसमे जिस्मो की मिलान की जरूरत नही होती,,,,...वो खुद को मेरे ऊपर छोड़ने लगी ,शायद ये उसका पहला अनुभव रहा हो ,क्योकि मेरी हर छुवन से उसके जिस्म में एक हलचल सी पैदा हो जाती थी,वो एक नशे में थी जो धीरे धीरे मुझे भी घेर रहा था…

मैं भी कब अपने कपड़ो को त्याग कर उसके बांहो में समा गया मुझे पता नही चला….जब मेरा नंगा लिंग उसकी योनि की दीवारों पर उसके पेंटी के ऊपर से रगड़ाया तो मुझे भी उसके गीलेपन का अहसास हुआ,

“आह जान “उसने मुझे कस लिया,मैंने अपने हाथ को नीचे कर उसके योनि को पेंटी के बंधन से आजाद किया ,उसका गोरा बदन एक उमंग से नाच रहा था वो लाल हो चुकी थी ,अभी तो उसे बहुत कुछ सहना बाकी था पर वो कभी भी चरम पर पहुच सकती थी,उसकी गीली योनि में एक उंगली घुसते ही मुझे उसके कौमार्य (वर्जिनिटी) का अहसास हो गया….

मेरे मन में एक बात अनायास ही उभर कर आयी,कि मैंने अभी तक किसी भी लड़की का कौमार्य नही लूटा है,और इत्तफाक से मैं उसी शख्स की बेटी का कौमार्य लूटने जा रहा हु जिसने मेरी बीवी का कौमार्य भंग किया था ,मिश्रा और काजल का ख्याल आते ही मेरे मन का वो राक्षस जाग गया जिसे मैंने इतने समय से खुद से भी छिपा के रखा था...मैं उसके ऊपर टूटा और एक ही झटके में अपना पूरे का पूरा लिंग उसके अंदर पूरी ताकत से घुसा दिया ….

“नहीईईईईई “एक जोर की चीख उसके मुह से निकली पर मेरे जागे हुए शैतान ने उसके मुह पर अपना हाथ रख दिया और फिर से झटका दिया ,अभी भी पूरा लिंग अंदर नही गया था,ऐसे तो उसकी योनि बहुत गीली थी पर फिर भी वो पहली बार का अहसास था और मेरे अंदर शैतान सवार हो चुका था,उसके आंखों से आंसू की कुछ बूंदे गिरी उसके मुह में मेरा हाथ था और वो थोडा छटपटा कर शांत भी हो गयी थी ,उसकी आंखे मुझे साफ कह रही थी उसे दर्द हो रहा है और उसे आराम चाहिये लेकिन मेरे सामने काजल की तस्वीर घूम गयी ,शायद मिश्रा ने ऐसे ही उसका कौमार्य लिया होगा,मैं एक जलन से जल उठा और मेरा अगला धक्का और भी तेज हो गया ,मैंने एक साथ ही 3 धक्के लगाए और वो छटपटाते हुए निढल हो गई उसकी गु गु की आवाज मेरे हाथो में ही दबकर रह गई,जब मैंने उसके आंसुओ और उसके चहरे को देखा तब जाकर मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी मैंने उसके मुह से अपना हाथ हटाया …

वो रोने लगी ,लेकिन उसके गीले नयन मुझे ही देखे जा रहे थे …

“आप शैतान हो …”

“सॉरी जान सॉरी ….”

मैं उसके गालो से ढलते हुए आंसुओ को अपने होठो में लेकर पीने लगा,कुछ ही देर में वो मेरे बालो को पकड़कर मुझे अपनी ओर खिंची और मेरे होठो को अपने होठो से मिला लिया,मैं जैसे ही अपने लिंग में हरकत की वो फिर से मुझे रोक दी …

“रुको ना दर्द में मार ही डालोगे क्या,आदमी हो की शैतान हो ,”

वो लगभग रोते हुए बोली ,लेकिन उसकी ये बात इतनी प्यारी थी की मैं उसके होठो को अपने दांतो में भर कर भिच लिया…

“नही ना “

मैंने अपनी जीभ उसके जीभ से मिला दी और वो मेरे प्यार के अंतहीन खाई में गिरने लगी ,हम एक दूजे को बेतहाशा चूमने लगे,हमारे हाथ एक दूजे के सर पर थे और उंगलिया बालो में फंसी थी…..

मेरे कमर ने भी धीरे धीरे से चलना शुरू किया पर इस बार मलीना बस सिसकिया ले रही थी और उसके योनि में एक रस का रिसाव होने लगा था जिसे हम कामरस कहते है,उससे उसकी योनि मेरे लिंग के लिए रास्ता आसान कर रही थी और हम दोनो को मजे के सागर में उतारने लगी थे जिसकी गहराई हमे भी नही पता थी,हमे एक दूजे को कहा चुम रहे थे ,कहा चाट रहे थे ,हमारे दांत कहा गड रहे थे ,थूक कहा छोड़े जा रहे थे ,हाथ किस जगह को निचोड़ रहे थे ,हमे कुछ भी आभास नही था,बस वो मजा बस वो अहसास ,बस वो जिस्म और वो कोमलता ,वो गर्मी ,वो नरमी …

वो सिसकिया और वो पसीने की फिसलन...बस यही रह गया था,मुझे तो पता भी नही चला की कब मैंने उसे अपने वीर्य की धार से भर दिया और कितने बार भर दिया हम लगभग बेहोश से थे ,या उन्मादी से ..कभी हम तेज होते तो कभी इतने धीरे ही पता ही नही चलता की कुछ हो रहा है...ये प्यार का नया अहसास था मेरे लिए भी और शायद मलीना के लिए भी ...वीर्य और कामरस मिलकर चादर को गिला कर रहे थे और साथ ही मलीना के कौमार्य की निशानी कुछ खून की बूंदे भी थी ,लेकिन किसे परवाह थी और किसकी परवाह थी….उसी गीले योनि में मैंने उसे दुबारा भीगा दिया...आंखे भी बंद हो रही थी पर कमर की चलन रुक नही रही थी,ना जाने वो कब खत्म हुई ना मुझे कुछ पता चला ना ही उसे बस हमारी आंखे बंद हो गई…………...

घर जाकर मैंने देखा रेणु अपना समान प्यारे के कमरे में शिफ्ट कर चुकी थी और एक नया लड़का वरुण नाम से ड्राइवर का चार्ज ले चुका था,ये मिश्रा के कारण ही हो रहा था की मेरे हर काम इतनी जल्दी ही हो जा रहे थे.मैं जब घर पहुचा तो वरुण रेणु के साथ गप्पे लड़ा रहा था,इसे आये एक दिन भी नही हुआ और वो ऐसे रेणु से बात कर रहा था जैसे की वो सालो से उसे जानता हो,वरुण एक कम उम्र का लड़का था,कुछ 20-21 की उम्र रही होगी,दिखने में बड़ा ही प्यारा सा था,और बचपने से भरा हुआ था,शायद उसकी ये पहली ही पोस्टिंग थी….

रेणु को देखकर ऐसा नही लग रहा था की आज ही उसकी जिंदगी में इतना बड़ा परिवर्तन आया हो,,,वो मुझे देखकर खड़े हो गयी और बड़ी ही प्यार भरी नजरो से मुझे देखा,

“आप बैठिए मैं आपके लिए चाय बना कर लाती हु “

वरुण भी खड़ा हो चुका था उसे मैंने बैठने को कहा …

“तो क्या नाम है तुम्हारा “

“जी सर वरुण “

“कही पहले काम किये हो “

“नही सर ये पहली पोस्टिंग है “

“अच्छा और पढ़ाई कितनी कीये हो “

“सर ग्रेजुएशन अभी कंपलीट किया हु…”

“अच्छा है ,फिर ड्राइवर की नॉकरी कैसे “

“सर सरकारी नॉकरी तो सरकारी होती है ना,और यहां तो छोटी छोटी नॉकरी के लिए भी कितनी मारा मारी है भला हो मिश्रा जी का की मुझे ये नॉकरी दिला दी “

मिश्रा का नाम लेते हुए उसके चहरे पर एक आभार का भाव आया,और मेरे चहरे पर एक मुस्कान ….

“तो मिश्रा जी ने लगवाया है तुम्हारा जॉब”

“जी सर वो मेरे पिता जी पहले मिश्रा जी के ड्राइवर थे…”

“अच्छा तब तो तुम बहुत अच्छे से जानते होंगे मिश्रा जी को “

“जी कभी कभी जाता था ,पापा के साथ उनके घर...ज्यादा नही “

“अच्छा है,और घर में कौन कौन है तुम्हारे “

“जी मा पापा और एक बहन है उनकी शादी हो चुकी है….”

“ओह यार फिर तो तुम घर के इकलौते लड़के हो तुम्हारी हिफाजत करनी पड़ेगी…”

मैं हँस पड़ा वही वो थोड़ा शर्मा गया…

रेणु चाय लेकर आयी ,

“ठीक है सर मैं चलता हु कल कितने समय आना है गाड़ी लेकर …”

“बैठो ना यार यही खाना खा के जाओ कहा अभी खाना बनाओगे ,”

“नही सर मेरी मा -पापा भी अभी साथ आये है,वही खाना खाना है….”

“ओह चलो अच्छा है,कभी लाना उन्हें भी मिलाने और कल 9-10 बजे तक आ जाओ …”

“जी ठीक है सर “

उसके जाने के बाद मैं रेणु के साथ बैठकर आज उसके साथ होने वाली सभी घटनाओं को सुनने लगा,रेणु बहुत ही खुस थी ,जैसे की वो आजाद हो गई हो किसी बर्षो पुरानी बेड़ियों से,उसके चहरे में आयी ख़ुशी देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा,

तभी काजल भी आ गई साथ में रॉकी था,खाना खाकर हम बिस्तर में गए,

आज काजल के बारे में मुझे जो पता चला था मैं उसके चहरे से कुछ पड़ने की कोशिस कर रहा था ,पर उसके चहरे पर कोई भी भाव कभी नही आता मानो वो एक बाहत अच्छी एक्ट्रेस थी,

“क्या हुआ ऐसे क्यो देख रहे हो…”

“बस कुछ जानने की कोसिस कर रहा हु,”

वो हल्के से हँसी ,

“क्या जानना चाहते हो आप “

वो मेरे पास खिसकी ,उसकी आंखों में मैंने हमेशा से ही बस प्यार देखा था,जो असीमित था,जिसमे मैं शायद डूब ही जाता अगर वो फिर से ना कहती ..

“बताओ ना क्या हुआ है “

“छोड़ो ना जान “

“बताओ ना जी ,क्या हो गया “

“सोचता हु तुम इतना काम कैसे कर लेती हो,पता नही तुम्हे क्या क्या सहन करना पड़ता होगा ..,,,,”

उसके चहरे में एक मुस्कुराहट आ गई

“आप भी ना ,आपका साथ और प्यार बस मेरे साथ रहे तो मुझे और कुछ भी नही चाहिए कुछ भी नही होगा मुझे आप फिक्र मत करो ,मैं सब सम्हाल लुंगी ….”

क्या सम्हाल रही हो जान वो तो समझ आ रहा है,मैने मन में कहा..

“फिर भी अगर कुछ प्रॉब्लम हो तो मुझे जरूर बताना “

मैंने उसके चहरे को देखते हुए कहा ,वो मेरे गले से लग गयी,

“आप पर कोई भी आंच नही आने दूंगी जान,आप बस खुश रहो,मेरे लिए यही बहुत है,आप किसी भी चीज की फिक्र मत करो सब कुछ ठीक है,”

“ये मेरा फर्ज है जान की मैं तुम्हारी हिफाजत करू “

मैं उसके गालो को चूमते हुए कहा …

“और ये मेरा फर्ज है की मैं आपको हर मुसिबित से दूर रखु “

“यानी की मुसिबित है …”

“नही जान बस कुछ काम के लफड़े होते है ,मैं उसे आराम से हैंडल कर लुंगी ,लेकिन आज आपको क्या हो गया है.ऐसा क्यो लगाकि मैं किसी मुसिबित में हु”

“बस तुम्हे थका हुआ देखा ,और ऐसा भी तुम्हारी तकलीफ का मुझे कुछ तो आभास हो जाता है”

काजल के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी,

“अच्छा तो बताओ की मैं अभी क्या चाहती हु “

मेरे चहरे पर भी एक शरारती सी मुस्कान आयी ….

“ह्म्म्म तुम “मैंने उसे जोरो से कसा और उसके होठो पर अपने होठो को धकेल दिया ...उसकी बालो में फसी मेरी उंगलियों ने उसका सर मेरी तरफ धकेला ….और मेरी कमर ने उसके कमर पर एक धक्का दिया,

“तुम ये चाहती हो….”

वो मेरे आंखों में देख रही थी,बिल्कुल साफ और निश्चल आंखे...मैने उसकी कमर को पकड़कर अपनी ओर खिंचा ,

उसके गोल नितम्भो का स्पर्श ही मेरे लिंग को अकड़ाने को काफी था,

“आउच ,बहुत बदमाश हो गए हो आप “

“जब बीवी ही इतनी मस्त हो तो आदमी बदमाशी तो करेगा ही ना “वो फिर से मुझसे सट गयी आज उसने साड़ी पहने हुए थी,

 
मैं उसका पल्लू अलग किया उसके उजोर जो उसके कसे हुए ब्लाउज़ से झांक रहे थे बड़े ही मादक लग रहे थे,मेरे हाथ जैसे ही उसके कमर पर गयी मैं उस फुटबाल की तरह निकले हुए कूल्हों पर ही थम गया,मैं जितना उसे दबाता उतना ही काजल के मुह से सिसकारियां निकल जाती थी,उसकी आंखे नशीली हो रही थी वो मुझसे ऐसे चिपकी थी जिसे की कोई हवा भी हमारे बीच से नही निकल पाए,उसने अपने होठो को मेरे होठो पर लेकर मुझे आमंत्रित किया और मैंने भी उसके होठो के उस प्याले को जी भर चूसने में कोई कसर नही छोड़ी ….

मेरा हाथ जैसे ही उसके ब्लाउज़ की जीप पर गयी मैं उस निकलने लगा ,लेकिन ये क्या थोड़ी देर को मैं भी दंग रह गया…

उसने तो कोई भी ब्रा नही पहनी थी,जबकि जाहा तक मुझे याद है वो एक काली ब्रा और पेंटी पहनने को निकली थी,यानी किसी ने….

साला या तो मिश्रा होगा या वो साला रॉकी ,सोचकर मुझे थोड़ा अजीब भी लगा और जैसा आजकल मेरे साथ हो रहा था मेरे लिंग ने एक जोरदार अकड़ से उछाल मारी जैसे की कोई बड़ी उत्तेजक चीज हो गई हो ,मुझे शक था की शायद उसने पेंटी भी नही पहनी होगी मैं उसकी साड़ी को उठाने लगा और मेरा शक सही था ,मैंने काजल को कुछ भी नही कहा और उसके ऊपर बस टूट पड़ा…

जैसे ही मेरा हाथ उसकी योनि पर गयी मेरी उत्तेजना और भी बढ़ गयी ,इतनी गीली योनि….

ये तो बस काजल के बस का था की रोज रोज के सेक्स के बाद भी वो मेरे लिए इतनी गीली रहती थी…

मेरे लिंग को आजाद करते और उसे काजल के अंदर जाते समय नही लगा और मेरे सुपडे की नोक ने जैसे ही उसके योनि के गीलेपन का रस चखा वो बेहाल सा उसके अंदर जाने लगा ,,,,

रस से भीगना तो लिंग के लिए वरदान सा होता है,,उसी योनि में कई लोगो के लिंग गए थे पर ये आज भी मेरी है,इसमें पता नही क्यो इतने प्यार की गर्मी का अहसास होता है ,

हमारे जिस्म मीले मन मिले सांसे मिली धड़कन मिले और बस एक ही हो गए….जब तक की हमारे शरीर ने हमारा साथ नही छोड़ा हम बस अपने कमर को धक्का देते ही रहे………...

योग आपके शरीर को हमेशा चुस्त और तंदरुस्त बनाये रखता है,साथ ही उससे आपके शरीर का सेप भी बहुत ही अच्छा हो जाता है,सुबह काजल को योगा करते देख ना जाने कितने मर्द अपने लिंग को अकड़ा लेते होंगे,आज उनमे एक और शामिल हो गया,वरुण मेरा ड्राइवर….

“वाओ यार क्या माल है “मुझे अपने पीछे से एक जानी पहचानी सी आवाज आयी जब मैं उस कतार में खड़ा था जहा बाकी लोग भी खड़े थे,काजल और रॉकी गार्डन में सबके सामने खड़े हो कर योगा ,एरोबिक ,और स्ट्रेचिंग सिखाते थे,सबसे पहली कतार में मिश्रा जी और बाकी के सीनियर सिटीजन होते,मैं अधिकतर लास्ट रो में नवजवानों के साथ ही होता था और वहां से मुझे काजल के लिए कुछ बहुत ही कमाल के कमेंट सुनने को आते,लोग फुसफुसाकर ही बोलते थे पर उनके चहरे पर आये भाव को मैं आसानी से पढ़ लेता था,आज मेरे साथ एक नई साथी भी थी ,मलीना ….

वो बहुत ही खुश लग रही थी,और पूरे उत्साह से कर रही थी,सच भी है जब हुस्न को देखने वाला मौजूद हो तोहि इसे सम्हालने का कोई मतलब और उत्साह होता है,वो झल्ली सी मलीना आज बम्ब बनकर आयी थी.लेकिन काजल ….

यारो काजल की तो बात ही और है…..

उसके एक एक कटाव जवान दिलो की धड़कने ही रोक देते,लेकिन चहरे का तेज और मासूमियत भी इतना कमाल का था की कोई भी उसे नजर मिलाकर घूरने की हिमाकत नही करता….

मैं पीछे पलट कर देखा वरुण अब भी काजल को ताड रहा था,शायद उसे ये नही पता था की काजल असल में कौन है उसे क्या कुछ लोगो को छोड़कर यहां किसी को नही पता था की वो मेरी पत्नी है,वरुण अभी तक काजल से मिला भी नही था,अचानक उसकी नजर मुझपर पड़ी और वो ऐसे झेंपा जैसे कोई बड़ी चोरी पकड़ी गई हो ….

“नमस्ते सर “

मैंने बस सर हिलाया और अपने काम में लग गया….सेशन खत्म होने के साथ ही लोग काजल और रॉकी को घेर लेते और कुछ प्रॉब्लम के बारे में जिक्र करते रहते,मैं और मलीना अलग खड़े होकर बातें कर रहे थे तभी मिश्रा जी मेरे पास पहुचे….साथ में दो जने और भी थे और वरुण भी साथ ही था,

“तो विकास वरुण से मिल लिए…”

“जी सर ,अच्छा लड़का है ,थैक्स यू “

“कोई बात नही ,और इनसे मिलो ये वरुण के माता पिता है,”

मैंने सबको नमस्ते कहा ,वरुण के पिता को देखकर मैं पहचान गया की ये वही शख्स है जो बार बार काजल को एक अजीब से नजर से घूर रहा था,मैंने उसे पहले बार देखा था,

और वरुण अपने मेडम से मिले ,

“नही सर ,नमस्ते मेडम जी “

वो मलीना के तरफ मुड़ा ,

“अरे पागल ये नही तुम्हारी मेडम वो है…”

मिश्रा ने काजल के तरफ उंगली की ,जहा वरुण काजल को देखकर अपना थूक गुटग गया ,वही वरुण के पिता भी काजल को देखकर ऐसे रिएक्ट करने लगे जैसे की उन्होंने उसे पहचान लिया हो,वो मिश्रा के तरफ देखता है लेकिन कुछ भी नही कहता और अपने को सामान्य कर लेता है………

मेरे समझने को ये तो काफी था की वो काजल के कुछ राज जानता है,पर मुझे बस इस बारे में थोड़ा डर लग रहा था की कही वो साला ये राज वरुण को ना बता दे…..

घर आकर काजल आपने काम में निकल गई वही मैंने डॉ को काल कर सारी सिचुएशन बताई ,

“फिक्र मत कर उसका बाप इतना तो समझदार होगा ही,लेकिन ये भी सही है की मिश्रा ने ही उस लड़के को प्लांट किया है,तो उससे कुछ तो एडवांटेज वो चाहता होगा,बस यही तुझे पता करना है फिर तू उसका ही यूज़ कर सकता है,मिश्रा और काजल के कारनामो को जानने के लिए हमे उसका ही कोई बंदा चाहिए था,साले मिश्रा ने वो खुद ही तेरी झोली में डाल दिया,बस अब एक काम कर की तू उसका भी मोबाइल हैक कर ले किसी भी तरह,और काजल के मोबाइल से तुझे कुछ इनफार्मेशन मिले तो मुझे बताना,”

“हा ठीक है,अभी तक तो कोई भी इनफार्मेशन काजल के तरफ से नही आयी है,वही पुरना कभी रॉकी का मेसेज कभी उसके घर वालो का ,कुछ क्लाइंट का,और कुछ दोस्तो का बस…”

“क्लाइंट ,कैसे क्लाइंट ,क्या बात करते है..”

“यार वही होटल से संबंधित ,जैसे होटल बुक करना है से पार्टी वगेरह …”

“अबे चूतिये अब इतना भी तुझे समझना पड़ेगा की होटल बुक कराने के लिए कोई होटल की मालकिन को नही रिसेप्शन को फोन लगता है ….”

मेरी तो थोड़ी देर के संट ही हो गई ये तो मेरे दिमाग में आया ही नही….

“अब मुह में ताला क्यो लग गया है तेरे….सभी नम्बर मुझे भेज …”

“यार लेकिन मैं तो सब डिलीट कर डाले …”

“तो सुन किसी भी दोस्त या क्लाइंट का मेसेज या काल आये चाहे जो भी बात हो मुझे वो कॉन्टेंट फारवर्ड कर देना …”

“ओके भाई”

“और उस इटालियन का क्या हाल है…”

‘भाई उसकी सील तोड़ दी …”

मैं जोरो से हँस पड़ा …

“साले कमीने ,मिश्रा का बदला उस बेचारी से ले लिया ..”

“लेकिन भाई वो सचमे मुझसे बहुत प्यार करती है यार..”

“कोई नही दोस्त,प्यार सचमे अंधा होता है,अब तो कंफर्म भी हो गया….चल ठीक है कोई भी क्लू मिले तो मुझे बता…”

“ओक्के “

बाहर वरुण भी आ चुका था ,

मैं झटपट तैयार होकर निकलने वाला था की रेणु ने मुझे रोक लिया…

“साहब आपने तो कहा था की आप मेरे पति होने का फर्ज भी निभाएंगे लेकिन आप तो मेरी तरफ देख भी नही रहे है ...उसके चहरे पे एक कातिल हँसी थी और वो गजब की सेक्सी लग रही थी,पूरी देशी हरीभरी माल…

साड़ी से झांकता उसका गुदाज पेट किसी मर्द की आहे निकलने को काफी था,बड़े चूतड़ को देख कर ही मसलने का मन करता,और उसके ब्लाउज़ से झांकते वो दो मखमली उभार जो इस बात का सबूत दे रहे थे की वो मेरे लिए अपने अंतःवस्त्रों का त्याग करके आयी है और मैं कपड़े के ऊपर से ही उसे मसल कर सुख पा सकता हु….

सबसे आकर्षक तो था उसके नशीले नयना ,जिसपर वो शायद मुझे ही रिझाने के लिए काजल लगा कर आयी थी,

मैंने उसे कमर से पकड़ लिया और मेरे दिमाग में एक गजब का आईडिया कौंध गया…

“अरे मेरी रानी तुझे तो मैं पूरा निचोड़ लेता लेकिन मेरे पानी पर किसी और का भी तो हक है ,रात को पत्नी के साथ करने के बाद इतना कहा बचता है की तुझे भी भिगो दु,सारा पानी तो रात भर काजल ही निचोड़ लेती है...लेकिन तेरे लिए एक पति मैंने खोजा है,बिल्कुल तेरे टक्कर का है और तुझे नए लड़के वाला मजा भी देगा,चहरे तो लगता है जैसे की अभी उसने कुछ चखा भी नही है,तू उसे अपना हुस्न चखा कर मजा ले…”

वो मुझे बड़ी बड़ी आंखों से देखती है…

“वरुण याद है ड्राइवर अपना ,”

“वो तो बच्चा है साहब “

“इसीलिए तो कह रहा हु ,तू आसानी से उसे फंसा सकती है,और वो मजा भी तुझे पूरा देगा “

“अरे साहब कहा एक ड्राइवर के साथ इतने दिन तक तो रह कर देख ही चुकी हु,उसे तो इतना भी समय नही मिल पता की रात में कुछ कर पाए ...बस साहब लोगो की गुलामी ही करते रहो “

उसका चहरा थोड़ा फूल गया लेकिन वो इसमें और भी सेक्सी लग रही थी ,

“अरे मेरी जान इसे मैं तेरे लिए फ्री कर दूंगा,चल उसे यही रोक देता हु और मैं गाड़ी लेकर जाता हु,और सुन मेरे लिए तुझे एक काम और करना पड़ेगा….”

“क्या ,उसके मोबाइल में ये घुसा कर “मै उसे एक पेन ड्राइव देता हु,और उसे बताता हु की कैसे करना है…

“समझी ना “

वो आश्चर्य से मुझे देख रही थी.मैं प्यार से उसके गालो पर अपने हाथ रखता हु और हल्के से सहलाकर प्यार भारी आंखों से उसे देखता हु…

“समझ ले तेरे साहब के लिए बहुत जरूरी है,कोई फिर मुझे फसाने की कोसिस कर रहा है,और इस बार मुझे तेरे हुस्न की जरूरत पड़ेगी…..मुझे गलत मत समझना रेणु मैं सचमे तेरा उपयोग नही करना चाहता था पर मेरे सामने और कोई भी चारा नही है,और ऐसे भी काल जब वरुण को तेरे साथ देखा तो लगा ये साला तुझपर फिदा है और तुझे भी एक मर्द की जरूरत है,मैं तो शायद तेरे लिए वो ना कर पाउ लेकिन वो कर सकता है….और मैं कोई भी जबरदस्ती नही कर रहा हु तेरी मर्जी,मैं बुरा नही मानूंगा ,,”

वो मेरे आंखों में देख रही थी

“आप के लिए तो जान भी दे दु साहब,और ऐसे भी सचमे बहुत ही खुजली मची है...आने दो साले को आज तो उसे जन्नत देखती हु…”वो खिलखिला के हँस पड़ी वही मुझे भी थोड़ा सुकून आया …

मैं अपने कमरे में जाकर लेपटॉप ऑन किया कैमरा की सेटिंग कर के उसे हाल में ही रख दिया ...

मैंने वरुण को अंदर बुलाया और यही रुकने को कहा ,मैं गाड़ी की चाबी लेकर मलीना से मिलने चला गया...

 
“कुछ भी हो जाय पर किसी को भनक भी नही लगनी चाहिए कि तुम शादीशुदा हो,”

मिश्रा की हल्की सि आवाज हमारे कानो में पड़ी और मैं और मलीना सतर्क होकर सुनने लगे,

“ये कोई जंग नही है बाबू,आप अपने स्वार्थ के लिए कितनो की जिंदगी से खेलना चाहते हो,”

बाबू???हम दोनो ही एक दूसरे के चहरे को देखते है,ये काजल की आवाज थी,मलीना के चहरे पर एक मुस्कान आगयी पर मेरा चेहरा उतरा देख वो अपने हाथों को मेरे चेहरे पर फेरा,

“आप मेरे बाबू हो”मलीना ने मेरे कानों में कहा….

“तुम्हे लगता है कि ये कोई स्वार्थ है,,,,काजल तुम्हे इस बात का जरा भी इल्म है कि इससे कितनी जिंदगियां तबाह हो सकती है,जैसे उस राक्षस ने तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर दी,क्या तुम चाहती हो कि कोई और भी इसका शिकार हो,”

थोड़ी देर की शांति ने हमारे दिलों में कई सवाल खड़े कर दिए,ये किस राक्षस की बात हो रही थी,

“काजल मुझे जो बदला लेना था वो मैं ले चुका हूं,अब मेरी बेटी भी मेरे साथ है,तुम मेरे पास हो और मुझे क्या चाहिए,बाकी की जो जिंदगी बची है वो मैं आराम से काट सकता हु,लेकिन ये मेरी भी मजबूरी है कि जानकर मैं अंधा बना नही रह सकता,,,तुम्हे अब भी लगता है की मैं ये सब बदले के लिए कर रहा हु,”

हमे काजल के चूड़ियों की हल्की आवाजे आयी जैसे कि वो चलकर मिश्रा के पास आने लगी हो,ऐसे आज उसने जीन्स और शर्ट पहना था,लेकिन हाथ मे कुछ चूड़ियां वो हमेशा ही पहनती थी,ज्यादा या कम…

“आपपर भरोषा तो हमेशा था,लेकिन जबसे अपने मुझे धोखा दिया…”

“वो मेरी मजबूरी थी काजल,उस समय शायद मैं सही गलत का फैसला नही कर पाया लेकिन जब मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ तबसे मैंने कभी भी तुम्हारा साथ नही छोड़ा,तुम जंहा भी गई मैं तुम्हारे साथ था तुम्हे पता हो या नही,लेकिन मैंने तुम्हें हमेशा अपने आस पास ही रखा,”

“ताकि आप मेरे जिस्म से खेल सके” काजल की आवाज बर्फ जैसे ठंडी थी,

“नही काजल ये तुम क्या कह रही हो,”

“क्या ये सच नही है बाबू,क्या मेरे जिस्म की तुम्हे कोई हवस नही है,”

कजल के इस सवाल से मुझे भी बड़ा अटपटा सा लगा,

“काजल ये सही है की तुम्हारे जिस्म के मोह में मैं भी बंधा हु पर क्या मैं सिर्फ तुम्हे तुम्हारे जिस्म के कारण पसंद करता हु,????????हम इंसान है काजल और इंसान होने का मतलब सिर्फ जिस्म की जरूरतों को पूरा करना नही होता,इंसानियत इससे भी कही ऊपर है,इंसानियत का मतलब है भावनाएं,दया,प्यार,नफरत,गुस्सा,जलन ...सभी कुछ जो शायद सिर्फ मानवो के नसीब में है,मैं ये तो नही कहूंगा की मैं तुम्हे विकाश से ज्यादा प्यार करता हु,और तुम उसे छोड़कर बस मेरे लिए काम करो,लेकिन ये जरूर कहूंगा की मैं तुम्हारी बहुत इज्जत करता हु,ये तुम क्या कर रही हो..”

हमे काजल के पायलों की आवाज सुनाई दी,साथ ही चूड़ियों का वो खनखना,

“यही चाहते हो ना आप,लो हो जाती हु मैं फिर से नंगी,कर लो जो करना है,और इज्जत की तो बात आप मत ही करो…”काजल के बातो में एक अजीब सा दर्द साफ झलक रहा था,

“मुझे पता है की आप मुझे कितनी इज्जत से देखते हो ,मैं तो बस इस बात पर हैरान हु की अभी भी आपमे इतनी शर्म नही बची की आप मुझसे ये भी कह रहे हो की मैं तुम्हारी इज्जत करता हु,याद है की नही ………..”

काजल का ये प्रश्न मिश्रा को चुप ही करा दिया…

“बताओ याद है की नही…”इस बार काजल ने जोरो से कहा,

“याद नही है तो मैं याद दिलाऊ,मैं एक बच्ची थी ,जब मुझे उस दरिंदे के सामने फेका था तुमने ,और मेरी गलती क्या थी की मैं तुमसे प्यार करती थी बस……………….”

एक गहरी शांति वातावरण में फैल गई थी जिसका आभास मुझे और मलीना दोनो को हो रहा था,

“उसने मुझे ड्रग्स दिया,मैं फूल सी थी मिश्रा जब उसने मुझे पहली बार भोगा था,याद है …...याद है की नही मिश्रा …”

चटाक ……….एक जोर की आवाज आयी ,हमे नही पता था की किसने किसको मारा था लेकिन किसी ने बहुत ही जोर का झापड़ मारा था,शायद काजल ने मिश्रा को मारा होगा,...

“याद है की नही …”

हा काजल ने ही मिश्रा को मारा था,

“काजल मुझे माफ कर दो ...जो बीत गया उसे फिर से मत याद करो …”

“हा हा हा ,...”काजल के अट्हास की आवाज से पूरा माहौल गूंज गया

“तो फिर ये प्यार ,सहानुभूति ,इज्जत का दिखावा बन्द करो,मैं अपनी जिंदगी से बहुत खुश हु,मेरे पास एक बेहद प्यार करने वाला पति है,मेरे घरवाले है वो सब है जो एक लड़की चाहती है,और मेरी आग को बुझाने के लिए रॉकी और तुम्हारे जैसे कुत्ते है,और मुझे कुछ नही चाहिये…..”

कुछ देर तक फिर से शांति बनी रही …

“समझे बाबू “काजल की एक जोरो की हँसी से फिर से माहौल गूंज गया…

“जो तुम्हारा काम है वो मैं करने को तैयार हु,तुम्हारे लिए नही अपने जैसे कई उन लड़कियों के लिए जिनकी जिंदगी इस ड्रग्स की वजह बर्बाद हो जाएगी ….और हा मैं टाइगर ये पता होना चाहिये की मैं एक शादीशुदा लड़की हु,क्योकि शादीशुदा घरेलू औरते जब रांड बनती है तो ग्राहक को एक अलग ही मजा आता है ,और मेरा पति बनेगा रॉकी…”

मेरे दिल की धड़कन जैसे बढ़कर फटने वाली थी जो मैंने सुना उसे मैं कभी यकीन नही करता अगर मुझे पता नही होता की सच्चाई क्या है….

“चलो बाबू अब मेरी चाटो “काजल ने बड़े ही नशीले आवाज में कहा …

“काजल ये क्या बोल रही हो “मिश्रा की काँपती आवाज मुझे सुनाई दी

“बोला ना मादरचोद चाट ,इधर आ “

काजल की चूड़ियों की खनक मुझे सुनाई दी जैसे उसने किसी के सर को जोरो से दबा दिया हो ,मिश्रा की हालत शायद ऐसी थी जैसे कोई उसका रेप कर रहा हो ,

“नही काजल रुको तो सही आराम से मैं बूढ़ा हो गया हु “

“मादरचोद चाट इसे “

मैंने अपना हेडफोन जोरो से फर्श पर पटका और अपना सर पकड़कर वही बैठ गया ,मलीना को मेरे हालत का अहसास था,वो मेरे बालो को सहलाती हुई मुझे अपने सीने से लगा ली,उसके माध्यम आकर के स्तनों ने मेरे सर को सहारा दिया और सुकून भी…………

मलीना कल से ही तैयारी में लगी हुई थी वो एक छोटा सा डिवाइस मिश्रा के जूते में लगा चुकी थी ,उसके कारण आज हम मिश्रा और काजल की बातें सुन पा रहे थे,उनकी इस बातचीत का मैं क्या मतलब निकलू ये मुझे समझ नही आ रहा था पर इतना जरूर पता चला की कोई और भी ऐसा था जिसने असलियत में काजल की जिंदगी खराब की है,मिश्रा अपना बदला लेना चाहता था लेकिन उसके मन में आज भी काजल के लिए एक इज्जत और ग्लानि के भाव है,और काजल मिश्रा से प्यार नही बल्कि नफरत करती है जिसका पूर्ण कारण मुझे अभी तक समझ नही आया था………

काजल मिशन में जाने को तैयार थी और उसका सामना टाइगर से होने वाला था ,मैं टाइगर के क्लब की झलक देख चुका था लेकिन मुझे और भी बहुत कुछ देखना शायद बाकी था,वहां काजल रॉकी को अपना पति बनाकर वहां ले जाने वाली थी ,रॉकी को असलियत का कितना पता था ये तो मुझे नही पता पर मुझे क्या करना है ये मैंने लगभग ठान लिया था,टाइगर कितना खतरनाक है ये भी मुझे पता था पर वो डॉ का अच्छा दोस्त भी था,काजल क्या करेगी मुझे नही पता लेकिन मुझे उसका साया बनकर उसके साथ रहना होगा,ऐसे भी वो ड्रग्स मेरे कारण यहां आया है उससे होने वाले नुकसान का हिस्सेदार तो मैं भी हुआ, और इसमें मेरा साथ देगी मलीना,.......

मिश्रा ने काजल का उपयोग किया था और मैं मलीना का करूँगा ,मन तो नही मानता लेकिन इसके अलावा मेरे पास कोई और चारा भी तो नही था…..मलीना के स्तनों की कोमलता ने मुझे सोचने की शक्ति भी दी और थोड़ी ऊर्जा भी ,

“बाबू आप ठीक हो …”मलीना की मीठी आवाज मेरे कानो में पड़ी ,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई…

“अब तुझे भी चटवानी है क्या …”

मैंने मुस्कुराते हुए उसके चहरे को देखा वो हल्के से शरमाई ,

“चाटो ना लेकिन प्यार से “हम दोनो एक दूसरे के आंखों में देखने लगे और हमारे होठ मिल गए ………….

“सुनो ना जाकर उन्हें रंगे हाथ पकड़े क्या “

मलीना ने उत्सुकता से कहा,

“अरे नही जान उन्हें भी जीने दो और हम भी ऐस करते है,”

“फिर भी सुनो तो वो क्या कर रहे है”

“अरे अब सुनने को और क्या रखा है जान “

मलीना उठाकर मोबाइल को स्पीकर से लगा देती है,पूरे कमरे में उसकी आवाज गुज जाती है,मैं उसे बाहर इशारा करता हु वो आवाज थोड़ा कम कर मेरे पास आकर बैठ जाती है,

“आह आह आह चाट साले चाट इसे …”

मलीना के चहरे पर एक मुस्कुराहट थी ,

“ऐसे काजल है बहुत सेक्सी ,देखो उसकी आवाज से ही तुम्हारा भी खड़ा हो गया…”सचमे काजल की आवाज से ही मैं इतना उत्तेजित हो रहा था ,जैसे की मेरा जीन्स ही फट जाने वाला हो,मैंने मलीना को खिंच कर सीधे बिस्तर पर पटक दिया ,

“आउच क्या कर रहे हो “

“आज तो तेरा रेप ही कर दूंगा “

“हाहाहाहाहा अच्छा “वो जोर से हँसी लेकिन मैं उसके मुह को अपने हाथो से दबा दिया

‘आह आह आह मादरचोद साले चूस आह आह “

काजल की आवाज ने मुझे पागल बना दिया था

“तेरी माँ की “मैं मलीना पर ऐसे झपटा जैसे कोई शेर बकरी पर झपटता है,

“वो वो अरे उसका बदला मुझपर क्यो निकल रहे हो “

पर मैं कहा सुनने वाला था मैं उसेके कपड़े फाड़ने लगा

“निकाल रही हु ना बाबा “मलीना ने बड़ी मुश्किल से कहा ,

‘काजल सांस तो लेने दो ‘

‘भग मादरचोद ‘

‘रुको तो सही ,हो हो ‘मिश्रा की सांसे फिर से घुट गयी

मैं भी अपने कपड़े निकलने की जल्दी में था ,

 
“तू नही मैं निकलूंगा और निकलूंगा नही फडूंगा “मैं फिर से मलीना के कपड़ो को खिंचा

‘साले जब तेरी बेटी को कोई चोदेगा ना तब तुझे पता चलेगा...बहुत लड़कियों का शौक है ना तुझे ‘कजल की आवाज से मलीना का चहरा उतर गया ,लेकिन मैं उसे अपनी ओर खीचकर उसके होठो में अपने होठो को डाल दिया

‘ये क्या बोल रही हो,आह ‘मिश्रा कुछ बोलने को मुह ही उठाया होगा लेकिन काजल ने फिर से उसे दबा लिया

‘तू है ही इसी लायक ,तेरी बीवी तुझे छोड़ गई अब तेरी बेटी को तो मैं एक बड़े लंड से चुदवाउंगी ,सर क्या हटा रहा है मादरचोद चूस ,ऐसे रॉकी कैसा रहेगा हाहाहाहाहा’

काजल के इस अवतार से तो मैं भी डर गया ,और मलीना को देखने लगा उसकी आंखों में आंसू थे ,लेकिन मेरा भी तो खड़ा था,आंसुओ पर लंड भारी पड़ गया और मैं फिर से मलीना को सहलाते हुए उसे चुप करने लगा

“वो गुस्से में है जान इसलिए ऐसा बोल रही है ,”

“वो जो भी बोल रही हो पर क्या मेरे पापा नपुंसक है जो उसकी बात को यू ही सुन रहे है”

मैं कुछ जवाब देने की अपेक्षा उसके होठो में अपने होठो को सटा दिया लेकिन वो कुछ भी रिस्पॉन्स नही दी

“तुझे क्या चाहिये ,मैं तेरे साथ हु और तुझे कुछ भी नही होने दूंगा ,और मैं जहा तक काजल को जान पाया हु वो भी तुझे कुछ नही होने देगी इसलिए तेरे पापा भी कुछ नही कह रहे है,अब तो आजा नही तो फिर से सो जाएगा “

वो कुछ रिलेक्स हो कर मुझे देखी और मेरे होठो में अपने होठो को ले लिया,

‘अरे बाबू आपका तो खड़ा हो गया है ,पर इस वहम में ना रहना की मैं इसे अंदर डालने दूंगी ,तुम्हारी औकात बस इतनी है की तुम मेरी चाटो उससे ज्यादा नही ‘काजल की आवाज से मुझे एक अजीब सी खुसी महसूस हुई और मैं मलीना को दबोचकर उसके स्तनों को पीने लगा,

उधर काजल की आहे और इधर मलीना की दोनो ही मुझे पागल बना रही थी,और मैं बस मलीना को नंगा कर उसके ऊपर था,उसने मेरी लिंग को अपनी घाटियों में जाने दिया और जोरो से आहों की बरसात हो गई ….

“आह आहआह आहआह आहआह आह जान धीरे आह आह…”

“चाट साले आह आह चाट “

“बाबू धीरे आह आह आह “

“आह आह मादरचोद चाट …”

उधर काजल का अंत हुआ और उसकी सांसो की आवाज भी हमतक आ रही थी लेकिन इधर तो सिलसिला अभी शुरू ही हुआ था,.....

“मिश्रा मिश्रा साला बूढ़ा हो गया लेकिन समाज सेवा नही छोड़ेगा..और पता कैसे लगाएगा की वो ड्रग्स का चैन कैसे है …”

टाइगर थोड़ा चिंतित था,

“जैसे पहले किया था,एक लड़की को यहां प्लांट कर रहा है…”डॉ की आवाज आयी

“हा हा हा और हम चोदू है की किसी भी लड़की को यहां आने देंगे ..”

“पहले भी तो आने दिए थे “

टाइगर मुझे देखने लगा,

“तो तू क्या चाहता है ,की मैं उसे आने दु ,और सबूत इकट्ठे करने दू,ताकि मेरा इतना अच्छा धंधा चौपट हो जाय …”

“बिल्कुल “डॉ और मेरे होठो पर एक मुस्कान तैर गई लेकिन टाइगर को कुछ समझ नही आ रहा था,

“उसे आने दे लेकिन उसे ये बिल्कुल नही पता होगा की तुझे पता है,और उसे अपने मन की करने दे लेकिन उसके हाथ कोई भी सबूत नही लगेगा क्योकि तुझे पता होगा की वो कौन है,उसे अपना दिखावा करने दे और तू अपना खेल खेल…”

डॉ ने सफाई दी …

“हु मैं उसे उड़ा ही ना दु,उसे क्यो यहां अपने बीच रखकर खतरा मोल लूंगा “

“हा हा तुम्हारी औकात ही क्या है …”

टाइगर मुझे ऐसे देख रहा था जैसे की वो मुझे खा ही जाएगा

“सरकार के सामने तुम्हारी औकात कुछ भी नही है ,तुम्हे क्या लगता है की मिश्रा उस लड़की को ऐसे ही भेज देगा,तुम कोई आतंकवादी नही हो,ना ही किसी दूसरे देश में रह रहे हो,मिश्रा के एक फोन से पुलिस तुम्हारे बार में घुस जाएगी ये तुम्हे ही पता है ,तुम्हारे पास इतना ही पावर होता तो तुम ये काम यू छुप छुप कर नही करते...भले ही तुम्हारे जेब में कितने ही मंत्री और पुलिस वाले हो लेकिन हो तुम एक ड्रग्स डीलर ,जब ऊपर से प्रेशर पड़ेगा सभी तुम्हारा साथ छोड़ देंगे,लड़की को कुछ भी हुआ तो मिश्रा को सीधा बहाना मिल जाएगा यहां पुलिस भेजने का फिर क्या होगा तुम्हे पता है...क्या जवाब दोगे लोगो को की तुम इन बंद दरवाजो के पीछे क्या कराते हो..”

मैं आज फूल कॉन्फिडेंस में था,टाइगर का लंबा चौड़ा शरीर और उसकी वो लाल आंखे भी मुझे नही डरा पा रही थी...

“हम्म्म्म लेकिन इस इनफार्मेशन तुम्हारा क्या फायदा होने वाला है”टाइगर मुझे घूरने लगा

मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,

“होटल आदित्य जानते हो ,*** शहर का नया होटल “

“हा जो अभी अभी शुरू हुआ है,”

“बिल्कुल सही मैं उसका 10 प्रतिशत का हिस्सेदार हु,मुझे 100 प्रतिशत का बनना है…”

मेरी आंखों में एक चमक आ गई जो टाइगर को भी दीखने लगी वो मुझे बड़े ही आश्चर्य से देख रहा था,

“लेकिन कैसे “

“वो बाद में बताऊंगा,तुम डील फाइनल करो ,मैं लड़की की पहचान बताऊंगा और बदले में तुम मुझे वो करने दोगे जो मुझे करना है,”

“ठीक है क्या करने वाले हो यार तुम “

“कुछ ज्यादा नही पहली चीज तो तुमसे दोस्ती,मुझे भी अपने होटल को बढ़ाना है,मुझे भी ड्रग्स और लड़की चाहिए…”

टाइगर के चहरे पर स्माइल आ गई

“डॉ जब पहली बार इसे यहां लाये थे तो साला बिल्कुल ही भोला था मुझे नही पता था की ये इतना कमीना होगा”

डॉ के चहरे पर एक मुस्कान आ गई ,

“साला नही बेटा सर बोल बाप बनने वाला हु मैं तेरा”

मैं एक हल्की मुस्कान के साथ टाइगर को देखा वो मेरे व्यवहार से हैरान था,और आंखे फाडे मुझे देखे जा रहा था,मैं के ऐसे ही रहने दिया और वहां से निकलने के लिए मुड़ गया ,साथ ही डॉ भी मेरे पीछे आने लगा…

गाड़ी एक ब्रिज के ऊपर खड़ी थी और मैं एक सिगरेट पीता हुआ नीचे बहते पानी को देख रहा था,तभी पीछे से डॉ का हाथ मेरे कंधे पर रखाया …

“डर तो नही लग रहा है .”

“भाई डर नही एक चिंता जरूर है ,पूरी जिंदगी अच्छे और सीधे साधे काम में बिता दिए,काजल को इतना इतना बड़ा धोखा दूंगा सोचा नही था,”

“वो जो तुझे सालो से धोखा दे रही है उसका क्या ,और तू जो भी कर रहा है उसके भले के लिए ही तो कर रहा है ना “

“ह्म्म्म “

“पर यार एक बात बोलू तू तो टाइगर की फाड़ ही दिया ,अच्छे अच्छे उसके सामने आकर मिमियाने लगते है और तू तो ऐसे बात कर रहा था जैसे की वो तेरे ऑफिस का चपरासी हो “

हम दोनो हँसने लगे

“साले मेरी कितनी फट रही थी मैं ही जानता हु,उसके मसल्स देखे है एक हाथ घुमा देता तो मैं देर ही हो जाता ,यार चुतिया एक बात तो है ,उसके पास बाजुओ की बहुत ताकत है और मैं एक साधारण सा इंसान मुझे भी उसके जैसे किसी आदमी की जरूरत पड़ेगी जो दिमाग और बाजुओं दोनो से ताकतवर हो …”

“अबे ऐसा आदमी तो ……...हा है ना लेकिन वो तेरे पचड़े में क्यो पड़ेंगे”

“यार ना पड़े लेकिन अगर कुछ मदद लगी तो कर सकते है “

“हम्म्म्म दो लोग है एक मेरा खासमखास दोस्त है वीर ठाकुर और उसका भाई बाली ठाकुर यहां उसका अच्छा खासा कारोबार है,लेकिन वो रहते गांव में है,और एक और आदमी है इकबाल भाई,गुंडा है बहुत बड़ा गुंडा लेकिन दिल का साफ है और ड्रग्स से नफरत करता है...बहुत नफरत,वो हमारी मदद कर सकता है.”

“तो संपर्क करो जब भी जरूरत पड़े तैयार रहे “

“बिल्कुल इकबाल तो हमारी मदद बिना किसी शर्त के करेगा,क्योकि टाइगर से कई जगहों पर उसका झगड़ा है,लेकिन ठाकुरो का पता नही वो ऐसे भी अपने ही परिवार की लड़ाई में बहुत उलझे हुए रहते है ,सबसे बड़े दुश्मन उनके तिवारी है ,पुस्तैनी दुश्मनी ...लेकिन फिर भी बात कर के देखता हु वो साथ आ गए तो टाइगर तुम्हारा कुछ भी नही उखाड़ पायेगा “

“यार क्या हम इस जहर को फैलाने से रोक पाएंगे ,”

“फैलाना तो शुरू हो गया है,सिर्फ टाइगर को रोकने से कुछ भी नही होगा और भी कई डीलर है ,और ये सिर्फ टाइगर के पास नही है कई लोगो तक अलग अलग माध्यम से ये पहुच चुका है,बात ये है की काजल और तू दोनो अब इस गेम में हो देखना है की कौन कितने शिकार करता है…”

मैं और डॉ एक दूजे को देखकर मुस्कुराने लगे…

 
थका सा मैं घर पहुचा ,शहर के भीड़ भाड़ ने मुझे बहुत ही थका दिया था ,आज काजल घर में ही मौजूद थी,

मेरे आते ही उसने मेरा स्वागत एक बड़े ही मनमोहक मुस्कान से किया,और मैं बस उसे देखता ही रह गया….

यही वो औरत है जो कुछ दिनों में ही एक बिकाऊ लड़की की तरह व्यवहार करने वाली है ,ना जाने किसका बिस्तर गर्म करेगी,लेकिन वो मेरी बीवी है,जो बहुत ही मासूम है,जो मुझे इतने प्यार के देख रही थी,काजल को ये सब सहना पड़ रहा है और मैं सबकुछ जानते हुए भी उससे कोई भी बात शेयर नही कर सकता,कितनी बड़ी बदकिस्मती थी मेरी,जिसे मैं दिलोजान से प्यार करता था,जिसे मैं शायद दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करता था,जिसके एक मुस्कान से मेरी पूरी थकान दुर हो जाती ,जिसके चहरे के नूर पर मैं दुनिया की हर दौलत लुटा सकता था,उसके ही दुख को जानकर भी मुझे अनजानों से व्यवहार करना पड़ रहा था,जिसे कभी दुख ना पहुचने की कसमे मैंने खाई थी वही मेरी जान इतने खतरे में जा रही थी और मैं उसे बस देखने के सिवा क्या कर रहा हु,इंतजाम भी किया तो बस देखने का…..

उसके दर्द को देखकर कैसे मैं खुस हो पाऊंगा,एक बारी तो मेरे मन में आया की मैं सबकुछ उसे बता दु पर,अपने को बहुत मुश्किल से काबू में कर पाया,और मुस्कुराने की कोसीस में ही मेरे आंखों से कुछ बून्द गिर गए,मैं भी इंसान हु और कब तक मैं अपनी भावनाओ को काबू में रखता ……..

मेरे आंखों का पानी तो काजल के जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन थी,वो तो हर खतरे को खुद ही सहन करना चाहती थी,मुझतक कोई भी आंच आये ये उसे मंजूर नही था,और अचानक मेरी आंखों में आया पानी ???????

वो दौड़ती हुई मेरे पास आयी और मेरे गालो को अपने हाथो से सहलाने लगी…..

“जान क्या हुआ ,”उसने बहुत ही करीब से मुझे देखा वो मेरी आंखों में कोई सच तलाशने लगी थी ,

“क्या हुआ बताओ ना क्यो रो रहे हो कुछ हो गया क्या “अब तो उसका भी गाला भर गया था,

उसकी मसुमियत और मेरे लिये उसका प्यार देखकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई और उसके बालो में हाथ फेरता हुआ उसकी आंखों में झांका ,वो असीम प्यार से भरी हुई गीली आंखे जो मेरा दुख देख भी नही सकती थी,

“i love you जान “

मेरे मुह से फूटे वो कुछ शब्दो ने काजल को मेरे ठीक होने का कोई भी आश्वासन नही दिया

“प्लीज् बताओ ना क्या हुआ,कोई प्रॉब्लम है क्या “

“हा बहुत बड़ी प्रॉब्लम है …….”

वो सांस रोके मूझे देखने लगी,

“प्रॉब्लम ये है की ………….”

मेरी खामोशी उसके लिए जान लेवा थी

“की मुझे तुमसे प्यार हो गया है,और कुछ भी हो जाय मैं तुम्हे खोना नही चाहता “

काजल ने मुझे के अजीब नजरो से देखा उस नजर में प्यार था ,लेकिन शिकायत भी थी,और वो मुझसे लिपट गई ,

“किसने कहा की आप मुझे खो दोगे “

“मेरे दिल ने “

“झूट बोलता है आपका ये दिल ,मैं आपकी हु जान ,ये जिस्म ये सांसे ,ये मन ये रूह सबकुछ आपका है ,और दुनिया की कोई भी ताकत मुझे आपसे अलग नही कर पाएगी,मैं आपके लिए अपनी जान भी दे दूंगी….”

काजल के बातो में वो सच्चाई और प्यार था जो मेरे दिल को चीरता हुआ सीधे मेरे रूह तक पहुचा...वो मुझसे ऐसे लिपटी थी जिसे कोई सांप किसी पेड़ से ,कोई अमरबेल के लताओं की तरह उसका बदन मेरे बदन से मिल गया था….

मैं उसके सर पर हाथ फेर रहा था और अपनी आंखे बन्द किये उसके सर पर अपने सर को टिका दिया ,उसके बालो की नाज़ुकता मेरे गालो को सहला रही थी,वो सुबक रही थी ,और उसके आंसू मेरे कंधे को भिगो रहे थे,मैं उसके सर पर एक चुम्मन दिया और उसे अपने से अलग करने को उसकी बांहे पकड़ी लेकिन वो मुझसे अलग होने को तैयार नही थी मेरे होठो में भी एक मुस्कान आयी और मैं उससे लिपट गया….

कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे रहे ,

वो मेरे आंखों में देखने लगी

“आपके मन में ये कहा से आया ,”उसकी प्यारी आवाज ने मुझे उसके गालो पर किस करने को मजबूर कर दिया,कितनी अजीब है काजल जब प्यार दिखाए तो इतनी प्यारी है और जब गुस्से में आये तो …..फाड़ ही देती है..

“बस मुझे कुछ काम से बाहर जाना पड़ेगा कुछ दिनों के लिए ,मैं जाना तो नही चाहता लेकिन ऊपर से बहुत ही प्रेशर है,मिश्रा जी से बात की पर वो भी कुछ नही कर पाएंगे,”

बेचारी काजल क्या बोलती ,ये प्लान तो मिश्रा का ही था,अगर मैं यहां रहता तो काजल कैसे शहर जाकर रहती,लेकिन मिश्रा को ये नही पता था की मैं उसके प्लान को समझ गया हु और वहां के इंचार्ज से बात करके सेटिंग कर चुका हु,की मैं वहां कम ही आऊंगा,काम कितना लंबा चलेगा मुझे बताया नही गया था ,और कोई जिम्मेदारी का काम भी नही था,वरुण को सम्हालने को मेरे पास रेणु थी ,बाकी डॉ ने सेटिंग कर रखी थी,मिश्रा और मैं दोनो ही एक गेम खेल रहे थे ,बस मिश्रा मुझसे कुछ कदम पीछे था.

“कितने दिनों के लिए जाओगे …”इसबार काजल ने अपना सर झुका लिया शायद उसे इस बात की ग्लानि थी की उसके कारण मुझे बाहर जाना पड़ रहा है,

“पता नही ,कोई फिक्स टाइम तो नही बताया गया है,वही से काम करने का आदेश दिया गया है,ऐसे वहां सब सेटिंग हो गई है,रखना खान सब लेकिन काश तुम मेरे साथ चल सकती ...ये होटल का काम “

काजल अब भी अपना सर नीचे किये हुई थी,उसकी आंखों से पानी की कुछ बूंदे फिर से निकल गई ,

“अपने साथ रेणु और वरुण को भी ले जाने को कह रहे थे लेकिन तुम्हारे लिए प्रॉब्लम हो जाएगी इसलिए मैं माना कर दिया”

वो अब भी सर गड़ाए थी शायद नजर मिलाकर झूट बोलना उसके लिए आसान नही था,

“नही जान आपको उनकी जरूरत पड़ेगी,और मेरी फिक्र मत कीजिये मैं कुछ दिनों के लिए होटल में शिफ्ट हो जाऊंगी,वहां भी तो हर तरह की फेसिलिटी है और गेस्ट लोगो के साथ टाइम का पता भी नही चलता.”

“जान अगर तुम्हे कोई प्रॉब्लम हो तो मैं मना कर दूंगा,भाड़ में जाय ऐसी नॉकरी “

इसबार काजल ने सर उठाया वो सचमे रो रही थी ,उसकी आंखों में पानी भरा हुआ था,वो मेरे नजर में देखने लगी,शायद इस बार वो सच बोलने वाली थी,

“क्या पता जान की आपके इस काम से इतने लोगो की जिंदगी सुधार जाय,कोई बहुत मुसिबित में होगा तो ,आपको जाना चाहिये ….”काजल ने बातो ही बातो में अपने इस मिशन में जाने की वजह बता दी थी,..

“तुम्हारे बिना कैसे रहूंगा अकेला”

वो मेरे होठो पर अपने होठो को ले आती है,

“मैं आपसे दूर ही कब रहूंगी ,”वो फुसफुसाकर बोली

उसके होठो की नरमी और महकती सांसो ने मेरे होठो का दीवार खोल दिया और उसकी जीभ मेरे होठो में धसती चली गई,वो गीले गीले होठ पंखुड़ियों से नाजुक मैं उसे बस चूसने लगा,उसके जीभ को अपने जीभ से छेड़ने लगा,वो अपना प्यार मुझपर बरसने लगी और मैं उसके प्यार की हर एक रस को अपने अंदर ले जाने दिया…….

उसके गुलाबी साड़ी से झलकता उसका यौवन शायद किसी को भी दीवाना बना देता पर मेरे लिए तो वो प्यार की एक मूरत थी जिसकी मैं पूजा करता था,हम दोनो ही अपने को एक दूसरे के होठो में दबाये जा रहे थे,मेरा हाथ उसके सर के पीछे चला गया था और उसकी बालो में फंसकर मेरी उंगलिया उसे अपनी ओर और जोरो से खिंच रही थी वही हाल काजल की उंगलियों का भी था,जब सांसे उखड़ी तब तक आंखों में आया पानी सुख चुका था और उसकी जगह एक प्यारे मुस्कान ने ले ली थी,

हम दोनो ही एक दूसरे के चहरे को देख रहे थे,

“मुझे कल ही जाना है”मैंने उसके चहरे का रंग बदलते देखा वो कुछ मायूस सी हो गई ,

“ह्म्म्म “

“तो आज रात ….”मेरे होठो की शरारत ने काजल के चहरे पर एक मुस्कान ला दी और वो मेरा हाथ खिंचते हुए सीधे बैडरूम में ले गई जैसे मुझसे ज्यादा उसे जल्दी हो ,मैंने ना ही अभी हाथ पैर ही धोया था ना ही कुछ खाया था,वो सीधे मुझे बिस्तर में ले जाकर बिठा दी,मैं उसके हुस्न को देखता ही रह गया,

पिंक साड़ी में पिंक टाइट ब्लाउज़ ,जिससे उसके तने स्तनों की सुंदरता झांक रही थी,और नंगा पेट जो दूधिया सा चमक रहा था,भरा हुआ होने के कारण वो बहुत ही कामुक लग रहा था,कमर से नीचे भी उसने बड़े सलीके से साड़ी को मोड़ा था,उसके जिस्म का हर मोड़ दिखाई दे,साड़ी में भी कमाल की हसीना लग रही थी,मांग में हल्का सिंदूर था और हाथो में कुछ चूड़ियां,चहरा ………………..

चहरे पर नजर जाते ही सब कुछ भूल जाने का दिल करता ,वो मासूमियत और प्यारी सी हँसी,बालो की कोमलता और होठो की वो शरारते,मेरी जान किसी जन्नत के हूर से कम ना थी,बड़ी काली आंखों में सब कुछ लुटाने का समर्पण वो प्यार की दरिया थी,और मैं एक प्यासा ….

वो मेरे ऊपर झुकी मैं उसके जिस्म को हाथ लगता उससे पहले ही उसने मुझहे रोक दिया और पलटकर दर्पण के पास गई,वो अपने बेग से सिंदूर की डिबिया और अलमारी से चूड़ियां निकलने लगी,पिक कलर की ही चूड़ियों से उसने अपने हाथो को भर लिया और माथे में लगे हल्के सिंदूर को उसने गढ़ा कर लिया जब वो पलटी तो उसके बाल खुले हुए थे और वो कयामत की सुंदर लग रही थी ,मेरा मुह उसे देखकर ही खुल गया जो खुला ही रहा ,वो मुझे ऐसे देखता पाकर कुछ शर्मा गई और धीरे से मेरे पास आकर मेरे सामने खड़ी हो गई,मैं मेरा सर उसकी कमर के पास था,वो नीचे देखती हुई खड़ी थी ,मेरा मुह अनायास ही उसके नंगे नाभि पर चला गया और..

“आह “

वो मेरे सर को अपने हाथो से पकड़ ली,मैं उसके पेट पर हल्के हल्के से अपने होठो को चलाने लगा,वो भी मेरे बालो को सहलाती हुई हल्के से अपनी ओर दबाने लगी,

 
मैं उसके गालो को छुमने को उठा और उसके सर को पकड़कर अपनी ओर खिंचा वो मेरे साथ ही गिरती चली गई अब मैं बिस्तर में पड़ा था और काजल मेरे ऊपर ,हमारी नजरे मिली और बस वो शर्मा गई ,और अपने होठो को मेरे होठो के पास ला दिया,इशारा समझकर मैंने भी अपने प्यार को बंधनो से मुक्क्त किया और उसके होठो को भरते हुए बस उसमे ही खो गया……

उसके बिखरे हुए बाल मेरे चहरे पर आ रहे थे,और उसका दमकता हुआ चहरा मुझे उत्तेजित कर रहा था,उसकी सांसे मेरी सांसो से टकराकर दोनो के अंदर जा रही थी,और मेरा हाथ उसके गद्देदार नितंबो को सहला रहा था,वो हल्के से आहे लेने लगी और मैं उसके ब्लाउज़ के छोरो को पकड़ उसे कंधे से नीचे उतारने लगा,उसके कन्धे भी दमकते हुए मेरे सामने प्रगट हो रहे थे,काजल ने अपना हाथ पीछे कर ब्लाउज़ की चैन खोल दी उसके चहरे पर एक उत्तेजक मुस्कान फैल गई जो जिसने मुझे उसके कंधे को किस करने पर मजबूर कर दे रहा था,मैं उसके कंधों को अपने मुह में भरा और उसका ब्लाउज़ और भी नीचे हो गया मैं उसे अब उतार ही देना चाहता था पर उसे पूरी तरह से निकलना मुझे पसंद नही आया ,मैं उसके सीने के गौरव उन दो आमो के बीच की खाई को चूमने लगा,उसके चूड़ियों की आवाज तेज हो रही थी वो मेरे सर को पकड़ कर उसे जोरो से दबा रही थी,उसके ब्रा की कप भी मेरा साथ देते हुए कुछ सरक गई ऐसे भी वो बहुत ही मुश्किल से उन तरबूजों को सम्हाल के रखा था,उसके दूधिया स्तन कमरे मे फैली बल्ब की रोशनी से उजागर हो रहे थे,और उसके वो भूरे से निप्पल अपनी अकड़ में तने जा रहे थे मेरे मुह से आने वाली हवा ने उसके उजोरो को सहलाया और उसके रोम छिद्र भी खड़े हो गए,काजल के पूरे शरीर में एक सिरहन सी दौड़ी और वो थोड़ी गहरी सी सांसे लेकर एक आह भर पाई,

मेरे जीभ अनायास ही उसके निप्पलों पर चले गए,और हाथो से मैंने कब उसके ब्रा को खोल कर फेक दिया मुझे पता ही नही लगा,वो साड़ी में कमर तक लिपटी थी और उसका ऊपर का बदन पूरी तरहः से नंगा हो गया था,उसके ब्लाउज़ को भी फेक दिया गया था,मैं अभी भी कपड़े में था जो शायद काजल को बर्दास्त नही हो रहा था,मैं भी अपने जिस्म से उसके जिस्म की गर्मी को महसूस करना चाहता था ,और उसने मेरे कपड़ो को एक एक कर उतार दिया ,मैं पूरी तरह नंगा बिस्तर में पड़ा था और मेरी जान ने कमान सम्हाल ली थी वो मेरे जिस्म के हर एक इंच को अपने होठो से नाप रही थी,अब सिसकिया लेने की बारी मेरी थी,मैं सिसकिया भर रहा था और वो मुझे अपने प्यार से नहला रही थी ,

उसके होठ जब मेरे तने लिंग पर गए तो वो एक ही बार में उसे अपने अंदर ले ली,वो उसे ऐसे प्यार कर रही थी जैसे की वो उसे खाना चाहती हो ,वो प्यार ही था की मैं इतना उत्तेजित होकर भी अपने को निकलना नही चाहता था,लेकिन इंसानी शरीर कब तक बर्दास्त करता मेरा फुहार उसके गले में चला गया,काजल को जब इसका आभास हुआ उसने मुझे मुस्कुराते हुए देखा,उसके होठो के मेरे वीर्य की कुछ धारे बाहर को आने को हुई लेकिन काजल को जैसे ये मंजूर ही नही था वो झट से उसे चाट गई…और अब हल्के अकड़े से लिंग को एक दो बार ऐसे चूसा जैसे की बचा हुआ रस भी निकल देना चाहती हो ..

अब बारी मेरी थी मैंने कमान सम्हाल ली थी और काजल के साड़ी को निकलने लगा,मैं उसके चहरे से पैरो तक उसे चाटना चाहता था,उसके मांग का सिंदूर फैल चुका था ,बाल बिखरे हुए थे,हाथो की चूड़ियां अब भी खनक रही थी और कपड़ो की हालत कुछ ठीक नही थी,मैं उसे चूमता गया और मेरा हाथ उसके कपड़ो को उसके जिस्म से अलग करने लगा,जब मैं उसके कमर के नीचे पहुचा तो बस एक पिंक कलर की झीनी सी पेंटी का बस अवरोध था,पहले मैं उसके पैरो की एड़ियों तक गया और फिर वापस आकर उसके पेंटी पर नाक लगाई,वो एक मनमोहक खुसबू से भरी थी काजल की यही खासियत थी की वो अपने अन्तःअंगो का भी बहुत खयाल रखती थी वहां से कभी भी बदबू नही आती वो हमेशा ही उसे साफ करती,मैं पेंटी को हल्के से अलग किया और उसके गुलाबी मटर के दाने को अपने होठो में लेकर सहलाने लगा,काजल उतेजना में अपना सर पटक रही थी और मेरे बालो को हाथो में फंसा कर उसे दबा रही थी,मैं भी तब तक उसे नही छोड़ने वाला था जब तक की वो अपना रस ना निकाल दे,और काजल भी अपना संयम खो कर मेरे चहरे को भिगोने लगी बहुत सा रस मैंने अपने अंदर भी ले लिया,ऐसे तो ये सब मुझे पसंद नही था,पर प्यार और उत्तेजना जब साथ हो तो सब कुछ अच्छा लगने लगता है,

काजल की सांसे टूट रही थी और मेरी भी हालत ठीक नही थी,पर अभी तो बस एक ही बारी हुई थी आज तो पूरी रात हमे एक दूजे के अंदर बितानी थी,जैसे ही हम थोड़े नार्मल हुए काजल ने मुझे खाना खाने को कहा ,वो एक थाली में खाना ले आयी हम दोनो ही नंगे थे वो मेरे गोद में बैठ गयी,मेरा लिंग अकड़ाने लगा और वो ऊपर होकर उसे अपने योनि में जगह दे दी ,वो भी गीली थी लेकिन खाना ?????

“तुम मुझे खिलाओ मैं तुम्हे खिलता हु”

उसके होठो पर मुस्कान आ गई थी,मैं दीवार से लगा बैठा था मेरे ऊपर काजल थी ,मेरा लिंग काजल की भीगी रसीली योनि में समाया था वो हल्के से हिल भी जाती लेकिन ज्यादा नही ,मैंने एक टुकड़ा रोटि का तोड़ा और उसे खिलाया,वो उसे चबाई और मेरे सर को पकड़ अपनी ओर खिंच लिया,

हमारे होठ मिले और वो टुकड़ा उसके मुह में मेरे मुह और मेरे मुह से उसके मुह में जाने लगा,आखिर में कोन उसे अपने पेट में ले गया ये तो हमे नही पता लेकिन हम प्यार के ऐसे भवर में डूब गए थे जहा भूख के मायने नही थे और लगभग पूरा खाना हमने ऐसे ही खाया,और हम इतना गर्म हो गए थे की हमने थाली किचन तक पहुचने की भी फिक्र नही की ,ना ही पोजिशन बदलने की वो मेरे ऊपर ऐसे ही कूदने लगी उसके गद्देदार नितम्भ मेरे कमर में टकरा कर एक सुखद अनुभूति देते थे,मैं भी हल्के हल्के धक्के कमर ऊपर कर देता था,लेकिन जब वेग बढ़ा तो हमसे सहा नही गया और हम बिस्तर में गिर पड़े,मैं काजल के ऊपर था और उसके चुदड़ो पर धक्के लगता हुआ उसके योनि में अपने लिंग को जोरो से धक्के लगाने लगा ,उसकी पीठ पर मेरा पूरा शरीर बिछा हुआ था,और दोनो ही गहरी सांसे ले रहे थे,

ये खेल यू ही रात भर चला,ना जाने कितनी बार मैं काजल के अंदर गिरा और ना जाने कितनी बार काजल के अपने रस से मेरे लिंग को भिगोया,कोई भी पोज़िशन बनाने को कोई भी मेहनत नही करनी पड़ रही थी वो बस हो रहा था,पूरा बिस्तर हमारे प्यार का गवाह बन रहा था और फिर पूरा कमरा ,..........

 
मैं सुबह से ही निकल गया साथ में वरुण और रेणु भी थे,कजल ने भरी हुई आंखों से मुझे बिदाई दी,उसका चहरा देख कर मुझहे भी रोना आ गया था….

मैं अपनी गाड़ी में बैठा अपने मोबाइल को निकलता हु सोचा था की डॉ को मेसेज कर प्लान के बारे में कुछ पूछ लेता हु,तभी मुझे याद आय की यार काजल का मेसेज चेक किया जाय,

रॉकी के कुछ मेसेज आये थे ,पहला मेसेज मेरे निकलने से पहले का था,

‘so ready फ़ॉर एडवेंचर ‘

काजल ने उसका कुछ रिप्लाई नही किया था,रिप्लाई मेरे जाने के बाद किया गया था,

‘ह्म्म्म ‘

बस इतना ही रॉकी ने शायद तुरंत मेसेज किया

‘ओके आज कुछ शॉपिंग करनी है फिर शाम से क्लब चलेंगे ‘

‘किस चीज की शॉपिंग ?’

“अरे यार तुम्हारे लिए कुछ सेक्सी लिंगरिस लेना होगा ना ,ताकि तुम कहर ढा सको ‘

रॉकी ने साथ ही कुछ स्माइल्स भी भेजे थे,

‘नही कोई जरूरत नही है मेरे पास काफी है’

‘अरे नही कुछ और सेक्सी टाइप ‘

‘क्या होता है और सेक्सी आखिर में तो उतारना ही है’

काजल ने गुस्से वाले स्माइल्स भेजे

‘तुम खुस नही हो क्या बोलो तो प्लान केंसल करे ‘

‘नही मैं ठीक हु पर ….छोड़ो ठीक है चलते है शॉपिंग के लिए ‘

‘कब आएंगे विकास सर ‘

मैं तो पड़ के चौक गया साला मुझे मेसेज में भी सर बोल रहा है,शायद कभी काजल ने उसे इस बात के लिए डांटा रहा होगा वरना अपनी आइटम के पति हो कौन सर बोलता है,

“क्या पता जब भी आएंगे तो पता चल जायेगा,मैंने रेणु को बोल रखा है की जब आओगे तो बता देना ‘

‘चलो अच्छा ही मैं आधे घंटे में पहुचता हु ,ऐसे आज पहन क्या रही हो “

रॉकी ने फिर से स्माइल भेजी

‘क्या पहनू बताओ अब तो तुम मेरे पति बनकर जा रहे हो ‘

रॉकी ने वो आंखों में दिल वाली बहुत सी स्माइल भेजी

‘वो काली वाली साड़ी ,कातिल लगती हो और साथ में हर चीज मैचिंग हर चीज मतलब हर चीज …’

इस बार काजल भी हँसी (जैसा उसने स्माइल में भेजा था)

‘ठीक है मैं रेडी हो रही हु ‘

‘मैं आधे घंटे में पहुचता हु ‘

अभी मुझे निकले 15 मिनट ही हुए थे,मैं मोबाइल एक साइड में रख एक गहरी सांस ली …..

दिल में अजीब सी चुभन हो रही थी और साथ ही उत्तेजना में लिंग भी खड़ा हो रहा था,एक अजीब सी कसीस ,चुभन ,जलन,लेकिन सब के साथ एक उतेजना और मजा भी था,

रेणु आगे वरुण के साथ बैठी थी,दोनो बातो में मसलुफ थे,दोनो के बीच क्या हुआ था वो मेरे लेपटॉप में रेकॉर्ड पड़ा था लेकिन उसे देखने का समय ही मुझहे नही मिल पा रहा था,

अब रेणु जैसा हुस्न और वरुण का जवान खून मिले तो कुछ तो होना ही था,

वहां भी मुझहे एक अच्छा बंगले नुमा घर दिया गया था,ऐसे तो घोर जंगल था लेकिन बड़ा ही सुहानी सी जगह थी ,यहां से शहर की दूरी भी उतनी ही थी जितनी की केशरगढ़ से थी,सबसे अच्छी बात थी की बाजू वाला गांव ठाकुरो का था,जो की डॉ के अच्छे दोस्त थे,वीर और बाली ठाकुर ,वो मुझसे मिलने आने वाले थे,

दूसरे बाजू था तिवारियो का गांव ….खेर मुझे क्या करना है,मुझे तो अपनी तैयारी करनी थी,

यहां नॉकरो के लिए एक कमरा था,वरुण का बोरिया बिस्तर वही डाल दिया गया था,और अंदर दो बेडरूम था जिसमे एक में मैं और एक में रेणु का समान रख दिया गया था,वरुण मिश्रा का जासूस था जो जासूसी छोड़कर रेणु के घाघरे में घुस बैठा था ,मेरे लिए इससे काम और भी आसान हो गया क्योकि मिश्रा वरुण को मेरे साथ भेजकर निसफ़क्र था ,और रेणु उसे अपने से अलग ही नही जाने देती थी,

मैंने फोन कर सबसे पहले फोन काजल को किया वो शहर के लिए निकल चुकी थी ,और आज से वही होटल में रहने वाली थी ,दूसरा काल मलीना को किया गया ,वो डॉ के पास पहुच चुकी थी घर में बोल चुकी थी की किसी रिसर्च वर्क के लिए बाहर जा रही है,वो दो दिन पहले से निकल चुकी थी ,तीसरा काल डॉ को किया जिसने बताया की वो इकबाल से मेरी मीटिंग फिक्स करा दिया है,

मैं वहां से निकल कर उस गांव में घूमने लगा ,गांव कम ये कस्बे सा था,अपने ऑफिस के बंदे जिसका नाम सुरेश था से मिल कर काम की सभी बाते भी हो चुकी थी,रात होने को थी की मेरे ऑफिस में ही एक गाड़ी आकर रुकी वहां से कुछ लोग ऑफिस में घुसे जिसे देख कर मेरे ऑफिस का स्टाफ खड़ा हो गया,

“अरे ठाकुर साहब आप यहां आइए आइये कुछ परेशानी है क्या “

वहां के मेन इंचार्ज की भी जुबान थोड़ी लड़खड़ा गई थी,6फुट 2इंच के गोरे से दो बंदे जिनके माथे में लाल रंग का तिलक था ,और चहरे में किसी राजा की तरह तेज ,सामान्य कपड़ो में थे लेकिन फिर भी खानदानी लग रहे थे ,चौड़ी छाती और बड़ी मांसल भुजाओं के मालिक ये दोनो देखने से ही इनकी शक्ति का अहसास हो रहा था,मैं अपने कुर्सी में बैठा ही था जिसे देखकर इंचार्ज को पसीना आ गया,वो ना मुझे कुछ बोल सकता था ना ही उन्हें,

“ये नए है आज ही आये है,इन्हें यहां कुछ स्पेसल काम से भेजा गया है,ऑफिसर है वन विभाग के “

उसने जिसे सफाई देते हुए कहा ,उनके और मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गई,वो मेरी तरफ बढ़े और मैं भी खड़ा होकर उनका स्वागत किया वो मुझसे हाथ मिलाकर मेरे सामने के चेयर में बैठ गए,एक बैठा लेकिन दूसरा पीछे हाथ बांधकर खड़ा रहा ,उनके साथ ही एक काले रंग का आदमी भी था,डील डौल से वो भी इनका भाई भी लग रहा था लेकिन शायद वो उनका सेवादार था,वो भी दूसरे के साथ पीछे हाथ बांधकर खड़ा रहा ,,,,

बैठे हुए शख्स ने इंचार्ज से कहा ,

“ये हमारे मित्र है …”

उनके जान में जान आई

“जाइये कुछ चाय वगेरह लाइये “

मैंने सुरेश से कहा वो झट से वहां से निकल गया

,चेयर में बैठे शख्स ने कहना शुरू किया ,

“मेरा नाम वीर ठाकुर है और ये मेरा भाई बाली ,और साथ में ये मेरा भाई कलवा है हम खून से तो भाई नही लेकिन दिल से भाई ही है….”

“मैं विकास “

“हा डॉ ने बताया था ,हम आपकी क्या मदद कर सकते है ,”

“मुझे बाजू बल चाहिए …”

“देखिए बाजू बल तो आपको इकबाल भी दिला सकता है,हमसे आपको जो भी मदद चाहिए होगी आप एक बार बोल दीजिएगा,जो काम आप करना चाहते है वो समाज के लिए बहुत जरूरी है और हम चाहकर भी इसे नही कर पा रहे है,ड्रग्स के डीलरों को तिवारियो का समर्थन मिला हुआ है और वो हमारे मुकाबले में बहुत ज्यादा ताकतवर है खासकर शहर में उनके बहुत ज्यादा वफादार है ,तो हम आपकी मदद छुपकर ही करे तो ये आपके और हमारे दोनो के लिए बेहतर होगा,”

“जी मैं आपकी बात समझ सकता हु,”

“हमारा प्रभाव इस क्षेत्र में ज्यादा है ,यहां हमरे रहते आपको कोई भी परेशानी नही होगी,बाकी इकबाल और डॉ के रहते आप चिंता मत कीजिये ,बस जिस लड़की को आप इस काम में लगा रहे है उसकी फ़ोटो आप हमे दे दीजिएगा ताकि हम उसकी सुरक्षा कर पाए …”

मैं अपने जेब से मलीना की फ़ोटो निकल कर उसे दे दिया ,

“ठीक है हमारे आदमी इसपर नजर रखेंगे “

“जी बिल्कुल बाकी जो भी हो आप हमे सूचित करे “

“जी “

सुरेश चाय लेकर आ चुका था,सभी चाय पीकर वहां से विदा लेते है,सुरेश एक चैन की सांस लेता है,

“अरे सर आप तो बड़ी पहुच वाले लगते है ,”

“क्यो “

“ठाकुरो से आपकी दोस्ती है ,मिश्रा जी आपके लिए सिफारिश करते है ,वाह …”

मैं हस पड़ा

“बस यार दोस्ती है सबसे ,तू कहा से हो और ऐसे क्यो कांप रहे थे”

“मैं भी इसी इलाके का हु सर और कांपु कैसे नही ये ठाकुर है ,आजकल तो इनसे जमीदार तिवारी भी काँपते है ,जानते है वीर ठाकुर की शादी तिवारियो की बेटी से हुई और इतना लड़ाई झगड़ा हुआ की तिवारियो के छोटे बेटे वीरेंद्र की भी जान चली गई …. और सुरेश की आंखों में कुछ आंसू आ गए …”

“अरे तुम्हे क्या हो गया ???”

मुझे सचमे समझ नही आया था,

“सर वीरेंद्र की पत्नी आरती मेरे मामा की लड़की है ,हम बचपन से साथ ही खेले थे उस बेचारी की क्या गलती थी शादी को अभी कुछ ही महीने तो हुए थे,मानता हु की ठाकुरो का दिल बहुत बड़ा है और तिवारी तो है ही कमीने पर जब भी वीर को देखता हु ना जाने आरती क्यो चहरा सामने आ जाता है,मैं लाचार हु सर मैं कुछ तो कर नही सकता, …”

सुरेश की आंखों में आंसू थे ,मैं उठकर उसे गले से लगा लेता हु जिससे शायद उसे थोड़ी शांति मिले ….

“तुम्हे क्या लगता है ये ठाकुर भरोसे के लायक है “

वो मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगा

“सर वो तो आपके दोस्त है ना “

“हा दोस्त है पर कोई सगे तो है नही ना “मैं हँसते हुए कहा

“अगर कोई जिम्मेदारी का काम इन्हें दिया जाय तो “

“सर आपको जो करना है कीजिये लेकिन मुझे इनसे दूर ही रखियेगा ,ये है तो बड़े अच्छे लेकिन वो साला बाली और कलवा एक नम्बर के कमीने भी है ,खासकर लड़कियो के मामले में,मुझे तो उनका चहरा भी देखना पसंद नही है….”

“चलो ठीक है कोई बात नही ,और मैं शायद सीधे साइट विजिट करूगा ,तुम्हारी जरूरत पड़ेगी तो काल कर लूंगा ,”

“ठीक है सर आप जैसा समझे वैसे भी मेरी यहां ज्यादा जरूरत पड़ती है ,”

मैं वहां से निकल कर अपने क्वाटर में आया ,समान जमा दिया गया था,साफसफाई भी हो चुकी थी और खाना भी रेडी था,

मैं खाना खा ही रहा था की काजल का काल आ गया ….

“हैल्लो जान खाना खा लिए “

“हा अभी बैठा हु और तुम “

“अभी खाई ,आपका काम वहां कैसे चल रहा है ,”

“आज ही तो आया हु जान ,सब कुछ जम चुका है ...बस तुम्हारी बहुत याद आ रही है “

काजल कुछ देर को रुक गई शायद उसके आंखों में भी आंसू आ चुके होंगे

“मुझे भी ………”

थोड़ी देर तक दोनो ही कुछ नही कह पा रहे थे,मुझे उस सन्नाटे में कुछ आवाज आई जो काजल के तरफ से थी ,शायद किसी ने दरवाजा खोला था,पानी बहने की आवाज थी मानो बाथरूम की डोर खोली गई हो और फिर बंद की गई हो …

“कुछ तो कहो “

मैंने खामोशी तोड़ी

“आप मुझसे मिलने आओगे ना “

“जान कुछ ही दिनों की बात है ...तुम यहां आ जाना “

“कब आउ…”

 
काजल सच में रो पड़ी थी

“अभी “

“मैं आ रही हु “

फोन काट दिया गया …

मेरे दिल ने जोर का झटका दिया सचमे काजल आ रही है ,मुझे तो यकीन ही नही हो रहा था,अभी रात के 9 बज रहे थे और ये जंगल था ,शाम यहां मुर्दो जैसे होती है और रात इतनी डरावनी और घनी की आपको अपना हाथ भी ना दिखे मैं सचमे डर गया और तुरंत ही काजल को काल लगाया …

इस बार काजल ने थोड़ी देर में काल उठाया …

“बस एक घंटा मैं और रॉकी आ रहे है…..”

“अरे सुनो तो …….”

मैं कुछ बोलता इससे पहले ही काल कट हो चुका था ,मैं फिर से काल करता हु

“बेटू रात बहुत हो चुकी है तुम कल आ जाना …”

मैंने एक ही सांस में कहा ….

“सर वो रूम में तैयार हो रही है …”

इसबार रॉकी ने काल उठाया था,

“तो तुम कहा हो “

“सर मैं तो अपने कमरे में था ,काजल ने मुझे जल्दी बुलाया और आपके पास जाने को बोला वो ऐसे बोली की मैं मना नही कर पाया ,मैं उसके रूम के बाहर खड़ा हु मुझे फोन देकर बोली की अगर आपका काल आये तो बोलना की बस एक घंटे में पहुच जाएंगे ….”

मैं जानता था की रॉकी अपने नही काजल के रूम में ही था,लेकिन मेरे लिए ये कोई विषय नही था,

“साले चूतिये हो क्या तुम लोग अभी आओगे और एक घंटे में कैसे पहुच जाओगे यहां मजाक है क्या,जानते हो कितना खतरा है यहां पर “

मैं गुस्से में आ गया था,

“सर काजल को कैसे समझाऊ ,मेरी बात तो वो सुनती नही कल एक क्लाइंट से इम्पोर्टेन्ट मीटिंग भी है और ये है की …”

मैं जानता था की किस क्लाइंट से मीटिंग थी ...पर मैं अब क्या बोलू मैं थोड़ा शांत हुआ की की काजल की आवाज आई ,

और वो फोन ले ली

“जान मैं बस निकल रही हु ,और कुछ मत कहना बस एक घंटे,रॉकी बहुत अच्छी बाइक चलता है ,”

“रॉकी को दे “

“जी सर “

“अगर काजल को कुछ हुआ तो तेरे गांड में सरिया घुसा दूंगा ….”

उधर से कोई भी रिप्लाई नही आया और काल कट गया….

सुनी सी राह हो और किसी का इंतजार हो तो एक एक पल सदियों से लगते है,हल्की हवा के झोंके भी दर्द देने लगते है,और अगडाइयो में एक चुभन होती है,

घड़ी का वो कांटा आज पहली बार मुझे अपने होने का अहसास दिला रहा था,वो हर टक टक में मेरी बेताबी का इन्तहां लेने पर आमादा था,

“क्या हुआ साहब “

रेणु भी मेरे पास आकर बैठ गई

“कुछ नही काजल आने वाली है “

रेणु ने अपनी नजर थोड़ी चौड़ी कर दी

“अभी “

“हा “

“सच में साहब दीदी आपसे कितना प्यार करती है …”

मैं उसके चहरे को देखने लगा ,वो बड़ी मासूम सी लग रही थी ,ना जाने कौन सी ताकत होती है जो किसी भी का व्यवहार बदल देती है ,यही लड़की है जो कभी अपनी अदाओं से मेरे सामने मचला करती थी और आज यही है जो इतनी सभ्य और संस्कारी सी लग रही है,

दो चहरे होना शायद कोई मिथक नही है लेकिन ये पूरी तरहः से सच भी नही है,असल में माहौल और जिंदगी की मजबूरियां होती है ,कुछ आदते कुछ संस्कार जो हमे अलग अलग स्थानों में अलग अलग चहरे दिखाने पर मजबूर कर देते है…

सच ही कहा है हमारे पूर्वजो ने की जिंदगी एक माया है एक नाटक है और हम इसके किरदार...

कही वो लड़की एक बदचलन लड़की का किरदार निभाती है तो कही एक संस्कारी औरत बन जाती है ,कही कठोर तो कही नरम ,

मैं अपनी सोच में डूबा हुआ उसके चहरे पर थम गया था,वो मुझे ऐसे देखता पाकर थोड़ी शर्मा गई

“क्या हुआ साहब “

“कुछ नही आज तू अलग लग रही है,लगता है वरुण का नशा चढ़ रहा है ,

वो थोड़ी शरमाई ...

“ थैंक्यू जो आपके कारण ऐसा लड़का मुझे मिला “

वो शर्मा गई थी

“कैसा “

मैं भी थोड़ी शरारत के मूड में था

“वो बहुत अच्छा है और अब तो समझ लो मेरा दीवाना हो गया है ,सोच रही हु इससे ही शादी कर लू “

मैं आंख फाडे उसे देखेने लगा इतनी जल्दी वो इसका दीवाना हो गया आखिर क्या कर दी …

“साहब आपको एक बात बताऊ मिश्रा जी रोज उसको फोन करते है और आपके बारे में पूछते रहते है,ये भी उनसे बहुत झूट बोलता है ,की वो आपके साथ है,प्लीज सम्हाल लेना अगर मिश्रा जी कुछ बोले तो …”

मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“अच्छा बड़ी फिक्र हो रही है ..ठीक है और उसे बोलना की जब भी मिश्रा का फोन आये तो यही बोल दे की वो मेरे साथ है और मैं किसी काम में बिजी हु …”

“ठीक है साहब और एक बात और उसे मिश्रा ने आपकी जासूसी करने के लिए ही भेजा है ,पता नही मिश्रा को आपसे क्या ऐसा काम है ….लेकिन वो मुझे सब बताता है ..”

वो इठलाते हुए बताती है…

“ह्म्म्म ठीक है,उसे तो नही पता की तुम मुझे ये सब बताती हो “

“नही साहब मैं पागल हु क्या “

“और तुम्हारी मेडम को भी पता नही चलना चाहिए “

“जी साहब लगता है आपका उस मलीना से कोई चक्कर है ,साहब एक चीज बोलू काजल दीदी आपसे बहुत प्यार करती है उन्हें धोका मत देना ..”

उसकी आंखे बता रही थी की वो सच बोल रही है …

“मेरा कोई भी चक्कर नही है और काजल तो मेरी जान है ये तो तू भी जानती है ……”

तभी गाड़ी के रुकने की आवाज आती है,शायद दोनो पहुच गए थे,

काजल टी शर्ट सुर जीन्स में थी ऊपर एक जैकेट पहने हुए थी ,वो भागती अंदर आयी और मुझे देख कर वो दरवाजे में थी ठिठक गई,दोनो के नजर मिले और उसकी आंखे भीग गई……

वो हल्के पैरो से चलते हुए मेरे पास आई मैं अपनी जगह पर खड़ा उसे अपनी ओर आते देख रहा था,दोनो की नजर बस एक दूसरे की नजरो में ही खोई थी ,उसके पायल के थोड़े से घुंघरू हल्के हल्के से आवाज कर रहे थे,जैसे जैसे वो मेरे पास आती वो आवाज थोड़ी और बढ़ रही थी ,

इतने देर का इंतजार और अचानक ही जब वो सामने हो ……..दिल की धड़कने भी थोड़ी बढ़ ही जाती है ,वो आकर मेरे सामने खड़ी हो गई ,हम एक दूसरे को देखने के सिवा और कुछ भी नही कर रहे थे,उसका चहरा मेरे चहरे के पास आया और हमारे होठ मिल गए,मेरे हाथ अनायास ही उसके बालो में फसकर उसके चहरे को अपनी ओर खिंच रहे थे,और मेरी जीभ उसके होठो से अंदर किसी अस्तित्व की तलाश में जा चुके थे……..

हम काफी देर तक युही एक दूसरे से लिपटे हुए बस एक अहसासों की दरिया में डुबकी लगा रहे थे,पूरी दुनिया जैसे खो चुकी थी और समय कि कोई सीमा नही थी ,समय मानो खो गया था…..

जब हम एक दूसरे से अलग हुए मैंने सामने रॉकी को पाया उसके चहरे पे पसीना था,इस ठंड के मौसम में वो जंगलो से गाड़ी चलता हुआ आया था ,नियम के अनुसार उसे अभी ठंड में गुल्फ़ी बन जाना था लेकिन उसके चहरे का पसीना कुछ कहानी कह रहा था ,शायद एक जलन तो उसके सीने में भी उठी होगी,लेकिन मुझे उसपर कोई गुस्सा नही था,मेरे मन में उसके लिए कोई भी बुरा भाव नही था,ना जाने क्यो आज वो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था,उसने मेरी जान को मुझतक लाने के लिए इतनी मेहनत जो की थी ,मैं आगे बढ़कर उसके सामने अपना हाथ बढ़ाया,दोनो के हाथ मिले उसके हथेलियों से निकलने वाला पसीना मुझे उसकी मनोदशा का बयान कर रहा था,

“सॉरी यार मैंने तुम्हे जो भी कहा उसके लिए”

“कोई बात नही सर समझ सकता हु “

उसकी बात में ना ज्यादा एनर्जी थी ना ही ज्यादा हल्कापन …

मैं रॉकी को बैठने को कहा और रेणु से गर्म गर्म चाय बनाने,रेणु के होठो में हल्की मुस्कान थी …

और मैं काजल की तरफ देखा

“बहुत प्यार आ रहा था जान सॉरी ,आपसे कभी अलग नही रही ना तो अजीब लग रहा था…”

वो अपने कान पकड़कर बोलती है…

मैं उसके पास जाकर फिर से उसके गालो में एक किस ले लेता हु ,

 
ठंडा मौसम ,नरम बिस्तर और गर्म हमदम ये तो हर कोई चाहेगा,और आज मुझे सब मिल गया,आज फिर से हम उसी अवस्था में थे जैसे कल थे,एक दूसरे पर पूरा प्यार लुटाने को तैयार,ऐसे जैसे कल हम रहेंगे ही नही ,

सच ही है जो आज ही होता है ,और कल कभी आता ही नही,जो आज में जी लिया उसकी जिंदगी ही कुछ और होती है,वो आज में ही अभी में ही अपनी पूरी ताकत लगा देता है ,कल जाने रहे ना रहे ये मौसम ना रहे वो हमदम ना रहे….

काजल के माथे के पसीने की एक एक बून्द मेरे प्यार की ताकत का सबूत था,हर झटका इतना गहरा था की और उसकी आहे इतनी तेज की माहौल में बस हमारे प्यार की दांस्ता ही गूंज रही थी,शायद ये आवाजे वरुण के कमरे तक भी पहुच रही होंगी जहा रॉकी सोया था,

काजल के नर्म मख्खन की तरह योनि में मेरा कठोर लिंग जैसे पिघला जा रहा था,

आलिंगन के गर्म अहसास में नग्गे जिंस्मो की प्यास बुझ रही थी और प्यार प्यार और प्यार……..

सुबह की पहली किरण से पहले ही मेरी नींद खुली और मैंने काजल के चहरे को देखा जो किसी मासूम से बच्चे की तरह मुझसे लिपटी हुई थी,उसके होठो पर हल्की सी चुम्मन देकर मैं उठा मेरी नजर उसके मोबाइल में पड़ी ,अब मुझे उसके मोबाइल को छूने की जरूरत ही नही थी वो काम मैं अपने मोबाइल से ही कर सकता था,मैं अपने मोबाइल को निकल कर उसका वाट्सअप देखने लगा,रॉकी के कुछ मेसेज थे साथ ही मिश्रा जी के भी

रॉकी: आज के बाद मुझे यहां मत लाना ,तुम वहां अय्याशी कर रही हो और मैं इस ड्राइवर के साथ सो रहा हु ,उसने गुस्से वाली स्माइल साथ में भेजी थी ,मुझे उसपर थोड़ी हँसी आयी ,

मिश्रा ने काजल को बस मेसेज कर यही पूछा था की तुम वहां क्यो जा रही हो,उससे ज्यादा कुछ भी नही…

मैं फिर मोबाइल साइड में रख काजल को कस लिया इसबार वो थोड़ी कसमसाई और मेरे से लिपट गई,सुबह के अकड़े हुए लिंग ने उसकी योनि में अपना रास्ता बनाया और वो जैसे जाग गई ,मेरे बालो को सहलाती हुई मुझे खुद से जोड़ ली ,वो अभी भी अलसाई थी और मैं अभी भी निढल ही था,हल्के हल्के धक्कों ने हमे धीरे धीरे गर्म किया…..

आज कजल का अपने मिशन पर पहला दिन था और मुझे भी टाइगर और इकबाल से मिलना था,काजल कहा से शुरुवात करने वाली थी मुझे नही पता लेकिन मेरे लिए शहर जल्दी से जल्दी पहुचना बहुत जरूरी था,मैं साया बनकर काजल के साथ रहना चाहता था जो की शायद पॉसिबल ना हो पाए इसलिए अपने प्लान पर जल्द ही अमल करना बहुत जरूरी हो गया था,मैं इंतजार करने लगा की काजल कब वहां से निकलेगी,मेरे लिए एक बाइक का जुगाड़ ठाकुर साहब ने कर दिया था,जो टिपिकल बुलेट थी…

सोच रहा था की अब शायद वो cuckold वाली कहानी मेरे साथ होने वाली है,मैं बहुत नर्वस भी था और उत्तेजित भी,मैं इसे सोचकर ठंडा पड़ जाता और कभी गर्म भी हो जाता,काजल को किसी के साथ कैसे देख पाऊंगा ये खयाल ही रोंगटे खड़ा कर देता था,मुझे अपनी मजबूरी पर हताशा भी हो रही थी और वो करना जरूरी भी था,मैं चाहता तो सब से मुह मोड़कर घर में बैठ सकता था मुझे पता था की काजल वापस मेरे पास ही आएगी और मेरी होकर ही रहेगी पर फिर भी मैं घर में ही बैठकर नही रह सकता था,मैं कैसे इसे देख पाऊंगा,क्या मैं उत्तेजित हो जाऊंगा,या फिर मैं नर्वस हो जाऊंगा,या मैं सभी दायरों को छोड़कर काजल के सामने आ जाऊंगा,या मैं मिशन को बीच में छोड़ घर आ जाऊंगा,या मैं काजल के ऊपर ही गुस्सा निकल दूंगा..सब सोचकर मेरा सर फटा जा रहा था,काजल के जाने के बाद से मैं घर से निकलने की हिम्मत भी नही जुटा पा रहा था,इसका एक ही रास्ता मुझे दिखा वो था डॉ चुतिया..मैंने उसे तुरंत ही फोन लगाया

“कहा पहुचा एक घंटे में ******* यहां मिल इकबाल से मिलने जाना है “

“यार डॉ “........मेरी आवाज में एक उदासी थी

“यार मैं समझ नही पा रहा हु की क्या करू ,” मैंने उसे अपनी सारी तकलीफे एक ही सांस में बता दी

“हम्म्म्म तू आजा और अपनी भावनाओ को साथ लेकर ही आ यहां उसकी बहुत जरूरत पड़ेगी,और वही कर जो तेरा दिल कहता है,मैं तुझे अब और नही समझूंगा,तुझे अगर काजल के ऐसा करने से कोई प्रॉब्लम हो तो तू उसका विरोध कर देना और मजा आये तो मजा लेना ,दिल हमेशा सही राह दिखता है मेरे दोस्त ,अपनी भावनाओ की कद्र करो उसके साथ चलो सफर थोड़ी मुश्किल जरूर हो जाती है पर समाज का हर बंधन जो तुम्हारे विचारों को,भावनाओ को बांध कर रखता है वो टूट जाएगा,और तुम स्वतंत्र महसूस करोगे,काजल का दुसरो के साथ संबंध बनाना तुझे इसलिए गलत नही लगता क्योकि तू इसे गलत समझता है वो इसलिए गलत लगता है क्योकि समाज इसे गलत मानता है….अभी तू समाज के बंधे नियम में चल रहा है और असली आजादी तुझे तब मिलेगी जब तू इन नियमो के बाहर जाकर अपनी संवेदनों को फैलाएगा,अपनी भावनाओ की इज्जत कर मेरे दोस्त ,वो तुझे लड़ा भी सकती है और उत्तेजित भी कर सकती है जो उस समय तुझे ठीक लगेगा वही करना….चल अब जल्दी आ जा …”

डॉ की कुछ बाते दिमाग के ऊपर से चले गई पर इतना तो समझ आ गया की कुछ भी गलत और सही नही होता,उसे गलत और सही समाज और हमारे पूर्वाग्रह (prejudices) बनाते है,और मुझे दोनो से बाहर आना होगा तभी मैं अपनी और काजल की मदद कर पाऊंगा,मैं अब बिना देर किये ही घर से निकल गया……..

“हम आपकी बात समझ रहे है डॉ साहब,हम मदद को तैयार है... “

एक मोटी सी आवाज मेरे कानो में पड़ी ,और मेरे तथा डॉ के चहरे पर मुस्कान आ गई,इकबाल भाई,अंडरवर्ड का सरगना,जितना सोचा था उससे कही ज्यादा मासूम सा आदमी ,जिसके नाम से बड़े बड़े लोग काँपते हो उसे मैं मासूम कह रहा हु ???

लेकिन वो सच में बड़ा मासूम था,व्यक्तिगत तौर पर भावनात्मक तौर पर जब की ड्रग्स और लड़कियों के धंधे में सबसे ज्यादा कमाई थी वो उसके खिलाफ था,डॉ ने मुझे बता रखा था की ये ऐसा आदमी है जिसे कोई भी बेवकूफ बना सकता है ,वो इतना सीधा है,लेकिन जब वो अपनी में आये तो फिर कहर ढा देता है इसलिए कोई भी इसे बेवकूफ बनाने से पहले 10 बार सोचता है ,

वो एक अजीब सा कैरेक्टर था,बड़े डील डौल वाला शख्स 6फुट 5इंच के करीब की लंबाई,इतना मोटा की चले तो जैसे धरती भी हिल जाय ,फुला हुआ मुह काले रंग का पठानी कुर्ता पहना हुआ,आंखों में सुरमा ,बड़ा सा पेट जैसे की पहले वाला अदनान सामी बस हाइट बहुत ज्यादा थी ,वैसा ही गोरा चिट्टा और क्यूट सा ...कोई शायद ही सोच पता की ऐसा आदमी अंडरवर्ड का डॉन होगा…..

वो अपने एक बड़े से सिंहासन नुमा कुर्सी पर किसी राजा की तरह बैठा था,पूरा घर जैसे एक किला हो ,बंदूख धारी लोगो से घिरा हुआ,लोभंग और इत्रों की खुसबू चारसु आ रही थी,सामने पड़े टेबल में चिकन के बड़े बड़े फ्राइड पीस जो लाल रंग के हो चुके थे रखे थे,वो उसे ऐसे खाता था जैसे की सालो से भूखा हो ,हमारे सामने ही वो दो तीन किलो चिकन अपने पेट में समा चुका था,उसने हमे बताया था की वो इसका नाश्ता है,और हमे भी पेशकश की गई हमने प्यार से मना कर दिया था,घर पुराने जमाने का था लेकिन नए तरीके से उसे सजाया गया था,

चहरे में क्यूटनेस और शरीर से कोई राक्षस जैसा व्यक्तित्व उसे देखकर कभी मुझे हँसी भी आ जाती और कभी डर भी लगता कुल मिलाकर वो हमे बाहुबल का साथ देने को तैयार था,

हम बैठे बाते कर रहे थे की के अप्सरा सी लड़की पंजाबी चूड़ीदार कमीज पहने हाथो में चाय लिए कमरे में प्रवेश हुई ,गजब की खूबसूरती थी,समझ लीजिये की सनी लियोन चूड़ीदार कमीज पहन कर आ रही हो ,शरीर का हर कसाव साफ दिख रहा था,सर पर एक चुन्नी थी जो उसे किसी पंजाबी कन्या की तरह खूबसूरत बनाती थी,वो हमे देखकर मुस्कुराई और चाय देकर बड़ी अदा से इकबाल के गोद में आकर बैठ गई,वो इकबाल के सामने एक गुड़िया सी लग रही थी,मैं जो पहले उसकी खूबसूरती और नजाकत का दीवाना हुआ जा रहा था उसकी इस हरकत से चौक सा गया ,लेकिन डॉ सामान्य था शायद उसके लिए ये कोई नई बात ना हो ..

“ये हमारी बेगम है ,मैरी डिसूजा …”

वो हाथ जोड़कर हमे नमस्कार करती है ,मेरा दिमाग फिर से चकरा गया ये साला हो क्या रहा है,मैरी डिसूजा ???

और आदाब की जगह पर नमस्कार माजरा क्या है, मेरे चहरे का माजरा इकबाल मैरी और डॉ को समझ आ गया ,

“असल में मैरी क्रिशचन है,इकबाल भाई की लव मैरिज हुई है “

“ओह “मेरे मुख से निकला

“हमारी बेगम मैरी हमे डॉ के द्वारा दिया गया सबसे कीमती नगीना है”

मैं डॉ को देखा

“असल में इनकी शादी मैंने ही करवाई थी,दोनो अपने घर से भाग कर शादी की है ,

डॉ के चहरे में मासूमियत और कमिनियत दोनो ही झलक रहे थे,

“आप ये हम हम क्या लगाते रहते हो ,हमारी बेगम क्या होता है ,मेरी बेगम नही बोल सकते “

मैरी ने पहली बार मुह खोला था,मुझे और डॉ को हँसी आ गई वही इकबाल थोड़ा हिचकिचाया ,

“तुम नही सुधारोगी क्यो “

इसबार डॉ ने मेरी से कहा ,लगता था की बहुत पुरानी जान पहचान थी उनके बीच

“क्या डॉ आप भी,अपने जिस इकबाल से मेरी शादी करवाई थी वो तो पूरा बदल गया है,जो कभी कालेज का जवान हेंडसम मर्द हुआ करता था,आज देखो कैसे मोटे हो गए है, …अपने और इन्होंने मुझसे वादा किया था ना की ये अपना वजन घटाएंगे देखो जैसे के तैसे बस इन्हें चिकन और मटन चाहिए वो भी किलो किलो बटर लगाकर ,इनके साथ बैठो तो ऐसे लगता है जिसे की फुटबाल में बैठ गई हु,”

वहां बैठे सभी की हँसी छूट गई मैं और डॉ हस्ते रहे लेकिन बाकी लोग जैसे होशं में आये की इकबाल वही बैठा है सभी चुप हो गए ,वही इकबाल थोड़ा झेप गया ,और मैरी ने उसके गालो को पकड़ कर पप्पी ले ली ,इकबाल का चहरा फिर से खिल गया,,,.......

“ये अभी भी वही बच्ची है “

डॉ ने कहा

“अरे कहा की बच्ची डॉ साहब देख तो रहे हो ,इसके सामने मेरी एक नही चलती,ये तो इस घर की डॉन है,हम जो भी है इनके सामने इनके सेवक बन जाते है इनकी हुक्म की तामील करना ही हमारे लिए इबादत है..”

 
मैरी जैसे उसकी बात से बहुत भावुक हो गई और वो इकबाल के चहरे को पकड़कर उसके होठो में अपने होठो को भर दी...मेरे लिए ये किसी शॉक से कम नही था,साला मैं किसी डॉन के पास आया हु या किसी नए मैरिड कपल के पास ,वो भी सब के सामने दोनो ही एक दूसरे के मुह में जीभ डाल रहे थे,और मेरे सिवा वहां किसी को कोई फर्क भी नही पड़ रहा था जैसे की ये उनका रोज का काम है….

अलग होकर इकबाल ने मुझसे इस बात के लिए माफी मांगी ,

“अब हमे चलना चाहिए “

डॉ बोल उठा

“ठीक है विकास साहब आप हमारा और हमारे बन्दों का फोन नम्बर रख लीजिये जब भी आपको कोई काम पड़े आप फोन कर दीजिएगा ,हमारे कुछ लोग आपके आसपास ही होंगे लेकिन वो जरूरत पड़ने पर ही सामने आएंगे,ताकि टाइगर के गुर्गे उन्हें पहचान ना पाए ,”

“ठीक है खान साहब आपके मदद के लिए शुक्रिया “

“अरे साहब आप भी हमे क्यो शर्मिंदा कर रहे है,वैसे भी इससे हमारा भी काम हो जाएगा उस टाइगर से हमे भी बहुत सा हिसाब चुकाना है ,...

हम वहां से निकले और डॉ मुझे मैरी और इकबाल की प्रेम कहानी बताने लगा ,की जब मैरी स्कूल में थी तब इकबाल कॉलेज का डॉन हुआ करता था,दोनो में मोहोब्बत हो गई,लेकिन समस्या थी की घर वाले तैयार नही थे,होते भी कैसे इकबाल था आवारा और बड़ा ही खतरनाक और मैरी से लगभग 9-10 साल बड़ा भी है,और मैरी तभी स्कूल से निकली थी वो मासूम सी गुड़िया जैसे थी ..”

“उम्र का इतना अंतर ,”

“हा यार इकबाल सालो तक स्कूल और कॉलेज के पॉलिटिक्स में रहा,गुंडा गर्दी और पॉलिटिक्स का टाइम था वो ,मैं भी तभी थोड़ी दुनियादारी में आया था,तभी मेरी भी दोस्ती इकबाल और ठाकुरो तिवारियो से हो गई,साले एक नंबर के लुच्चे थे सारे के सारे ….लेकिन सब की एक बात जानदार थी की सभी बहुत अच्छे दोस्त और दिल के बहुत अच्छे थे,मैरी तब स्कूल में थी तब ये गुंडा हुआ करता था.मेरी का दिल इस गुंडे पर आ गया और उसे प्रपोज कर दी ,पहले तो इकबाल ने बहुत पीछा छुड़ाने की कोसीसे की वो किसी नादान लड़की की जिंदगी से नही खेल सकता था,लेकिन धीरे धीरे उसे भी ये भा गई...लेकिन घर वालो के सामने बड़ी मुसिबित थी,इकबाल का तो कोई नही था लेकिन मैरी एक संपन्न घर की बेटी है,इसी बात का बहस था,वो सीधा साधा परिवार ये कैसे मान जाता की उनकी मासूम सी नादान उम्र की बेटी किसी गुंडे के साथ चले जाय,वो गलत नही थे लेकिन शायद मैरी उतनी नादान भी नही थी ,उसे इस बात का आभास था की इकबाल दिल से कितना अच्छा है.घर वालो को समझने के लिए उसे एक ऐसे आदमी की जरूरत थी जो थोड़ा पढ़ा लिखा हो तो इकबाल ने मुझे चुना ,उस समय हमारी दोस्ती के कुछ ही दिन हुए थे लेकिन इस बात ने हमे एक बहुत अच्छा दोस्त बना दिया,मैरी भी शायद किसी के ऊपर सबसे ज्यादा भरोसा करती है तो वो मैं हु ,समय ने उसे एक सेक्सी लड़की बना दिया और इकबाल को फुटबाल ….पता नही अब इनका क्या होगा,मेरी हमेशा से चिंता रहती है की इकबाल जैसे भोले आदमी को मेरी धोखा ना दे ,;लेकिन मैरी हद से ज्यादा बोल्ड हो गई है और इकबाल के शिकंजे से बाहर है,उसे सम्हाल पाना इकबाल के बस का नही है….”डॉ कुछ सोच में खो जाता है,

“खैर छोड़ो यार अभी तो चलो टाइगर के पास …”

हम टाइगर के पास पहुचे और सीधे उसके केबिन में जा कर उससे मिले ………

“बड़ी देर लगा दी सर अपने तो “

मैं टाइगर की तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराया वो मुझे आज सर से संबोधित कर रहा था,

जल्दी से आज के फुटेज दिखाओ पता नही वो लड़की आज आयी भी की नही .

मेरे सामने उसके क्लब का पूरा फुटेज था जो की एक बड़े स्क्रीन पर चल रहा था,अभी दोपहर खत्म ही हुआ था कुछ 5 बजे थे मुझे यकीन था की वो शाम को ही आने वाली थी फिर भी मैंने दिन भर का फुटेज चेक कर लिया ….

हम बैठकर बाते करने लगे और टाइगर ने केबिन में ही कुछ पैक मंगा लिए,थोडे सुरूर में मैं टाइगर के व्यक्तित्व को थोड़ा समझ पाया ,हमारी अच्छी बनने लगी थी वो साला हँसता भी है मुझे आज पता लगा था ,उसकी सेकेट्री भी हमारी बात सुनकर हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ,वो भी एक खूबसूरत बाला थी लेकिन बहुत शालीन ….

हम किसी बहुत ही अच्छे दोस्त की तरह एक दूसरे से बात कर रहे थे,साथ ही मेरे सामने स्क्रीन खुली हुई थी मैं थोड़ी थोड़ी देर में उसे देखता उसका पूरा क्लब उसमे साफ दिख रहा था,साले ने HD कैमरा लगा रखे थे,शाम के जवान होते ही क्लब में भीड़ बढ़ने लगी तभी एक लड़की सफेद स्कर्ट पहने क्लब में प्रवेश की उसे देखकर मेरी नजर चौड़ी हो गई थी,और होठो में मुस्कान आ गई मेरी मुस्कान देखकर टाइगर और डॉ भी स्क्रीन की तरफ देखने लगे मैं उसके कन्ट्रोल कीबोर्ड पर अपना हाथ फेरा और उस लड़की के चहरे में जूम किया ….

“ले भाई तेरा शिकार …”

टाइगर उस लड़की को ध्यान से देखने लगा ,उसके चहरे में मुस्कान आ गई ,4 पैक के बाद से ही वो मेरा और मैं उसका भाई बन गया था ,,,

“साले मिश्रा ने तो कमाल की लड़की ढूंढी है कोई सोच भी नही सकता की एक विदेसी लड़की सरकार के लिए जासूसी कर रही होगी…”

मैं और डॉ एक दूसरे को देख कर मुस्कुराए ,

“भाई बस एक बात का धयन रखना इसे कुछ ना हो पाए वरना बहुत गलत हो जाएगा “

“तूने मुझे बताया था तभी मुझे समझ आ गया की तू बहुत दिमाग वाला बंदा है,फिक्र मत कर इसे भी करने दे जासूसी ,साली को लगने दे की बहुत कुछ हाथ में आ गया ,ऐसे तेरा टॉरगेट कहा है ,”

मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गई मैंने फिर से हाथ चलाया,और क्लब के दूसरे कोने में फोकस किया

“वो तो बहुत देर से आ गए है”

एक सेक्सी सी साड़ी में लिपटी जवानी मांग में सिंदूर और हाथो में हल्की पतले मेटल की चूड़ियां ,बिल्कुल कातिल

“बहनचोद क्या माल है भाई ,”

टाइगर पहली बार ऐसे बात कर रहा था जैसे की वो कोई स्मगलर नही कोई युवा दिल्ली का लवंडा हो ,

डॉ और मेरे चहरे में मुस्कान खिल गई वही पास खड़ी टाइगर की सेकेट्री रिहाना भी उत्सुकता से काजल को देख रही थी उसके चहरे का एक्सप्रेशन बता रहा था की वो भी उसकी खूबसूरती से आकर्षित हो गई है…

“ये है मिस्टर एंड मिसेज वर्मा आदित्य इंटरनेशनल के मालीक “

टाइगर ने तुरंत मलीना के ऊपर फोकस किया

“भाई तू उसे सम्हाल और मुझे इसको सम्हालने दे ,इसके ऊपर निगरानी रखो “उसका इशारा पड़ते ही रिहाना वहाँ से निकल पडी ….

“अरे ये कहा जा रहे है”

डॉ ने सवाल किया जैसे मुझे कुछ पता हो लेकिन मुझे भी इसका जवाब नही पता था,काजल और रॉकी वहां से उठाकर जाने लगे ,

“क्या हम इसका पीछा करे ,”डॉ का अगला सवाल था

टाइगर ने मुझे एक एप्लिकेशन लिंक और एक पासवर्ड दिया ,

“तुम इससे कही से भी यहां लगे कैमरे को एक्सेस कर सकते हो ,लेकिन सभी को नही पर्सनल रूम में लगे,और कुछ इम्पोर्टेन्ट जगह का सिर्फ मेरे पास रहेगा,उसका मत मांगना अगर तुम्हे जरूरत हो तो भले मैं दिखा सकता हु लेकिन एक्सेस करने का पासवर्ड नही दे सकता …”

मेरे लिए इतना भी बहुत था,मैंने उसका वो एप्लिकेशन अपने मोबाइल में डाला और पासवर्ड से वहां लगा लगभग सभी सार्वजनिक कैमरा मेरे सामने था,मैं को देखने लगा वो लोग नीचे बने पार्किंग में दिखे वो एक कर में बैठे और वहां से चले गए,मैं डॉ को देखने लगा ,

“अब देख क्या रहा है चलो “

“शायद मुझे अकेले ही जाना चाहिए “

“हा सही कहा और मैं भी अपने काम में जाता हु कुछ प्रॉब्लम हो तो बताना “

डॉ और मैं वहां से निकल गए ,मेरे निकलने और काजल के निकलने में लगभग 10 मिनट का अंतर आ चुका था अब उसे ढूंढना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल था,मैं सोच में पड़ गया ...मैं अपनी बाइक तक पहुचा ,समय देखा कोई 10 बजे थे ,

मैंने काजल को काल लगाया ,दो ही रिंग में वो काल उठा ली

“हैल्लो जान “

“हम्म क्या कर रही है मेरी सोना “मैं आराम से बाइक में बैठ गया ,मैं अभी भी पार्किंग में था ,और अपने बुलेट में बैठा था,

“कुछ भी तो नही अभी बस आपको याद कर रही थी ,आप क्या आकर रहे हो ,”

“तुम्हे याद कर रहा हु “

मैं उसके आसपास कुछ सुनने की कोसीस था लेकिन नाकाम हो रहा था,वहां एक शांति थी शायद कार में बैठे होने के कारण था,

“कैसा रहा आज का दिन “

“कुछ खास नही वही पुराना होटल का काम ,और आपका “

“मेरा भी वही साइट विजिट वगेरह “

हम दोनो ही झूट बोल रहे थे लेकिन कितने आराम से ,कोई भी ग्लानि और चिंता नही थी ,काजल को लग रहा था की मैं उससे बहुत दूर हु और मुझे पता था की वो मुझसे बहुत दूर है…

“जान मुझे एक काम है चलना हो गया …”

काजल ने कहा

“ओक्के “

शायद वो अपने गंतव्य में पहुच गई थी वो अपने होटल तो नही गई थी क्योकि वो लगभग आधे घंटे का रास्ता था,तो फिर कहा ,मैं सोच में पड़ा था की मेरे दिमाग ने मुझे धिक्कारा साले काजल के मोबाइल का एक्सेस रखा है और सोच रहा है खोल के देख ले ,

मैं तुरन्त मोबाइल से काजल के मोबाइल को एक्सेस करने लगा ,उसके मेसेज बॉक्स में एक मेसेज आया था वो किसी जूही के नाम से सेव था,उसमे एक पता था जो की पास का ही था,मैं उस पाते को कॉपी कर अपने गूगल मेप में पेस्ट किया और मुझे वो लोकेसन दिखने लगा,ओह यहां से बस 15 मिनट का रास्ता है,ये गूगल बता रहा था ,मैं उस जगह को धयन से देखा

ये कोई घनी आबादी वाली जगह नही थी,एक एकांत सी जगह थी कुछ पेड़ पौधों से घिरा हुआ ,लगता था की कोई सरकारी जगह है जहा पर सरकारी कालोनियां बसाई गई हो ,या किसी फेक्ट्री के द्वारा अधिग्रहित जगह कुछ मकान दिख रहे थे पास ही एक पोलिस स्टेशन था,एक्ज़ेक्ट एडरेस देखने पर वो कोई एक निश्चित जगह नही थी वो एक पूरा इलाका था ,

मैं अपने हेलमेट को लगाया और उधर को निकल गया ..

मैं बस आवारा की तरह घूमता रहा छोटी सी जगह थी पर काजल की कर कही मिली ही नही ,एक छोटा सा पान का ठेला खुला दिखा जो शायद बंद करने की तैयारी में था ,मैं एक सिगरेट लेकर पीने लगा की तभी वहां एक पोलिस वेन का कर रुकी ,

“क्या बे झींगुर अभी तक बंद नही किया है “

एक औरत की आवाज ने मेरा धयन अपनी ओर खिंचा मैं जब उसे देखा तो देखता ही रह गया,शायद वो एक लेडिस इंस्पेक्टर थी कमाल की लग रही थी ,वो सिविल ड्रेश में थी और सफेद रंग की शर्ट और जीन्स पहने हुए थी ,उसके कसे उजोर बेहद आर्कषक थे,और फिगर बहुत मस्त ,चहरे से वो ज्यादा उम्र की भी नही लग रही थी लेकिन उसके शैली से ये पता लगाना मुश्किल नही था की वो बेहद कड़क अधिकारी है,मुख मंडल का तेज और बंधे हुए बाल,जीन्स से उसकी कमर का आकर भी साफ दिख रहा था की वो जरूर अपने सेहत का बहुत ध्यान रखती है ,अचानक उसकी नजर मुझसे मिली और मैं झेप कर दूसरी ओर देखने लगा ,शायद उसके चहरे पर एक मुस्कान आ गई

“जी मेडम बस बन्द करने वाला हु ,ये आपका सिगरेट “

“चल जल्दी बन्द कर के निकल “

गाड़ी जैसे ही बड़ी

“साली छिनाल रोज मुफ्त का सिगरेट पी जाती है”

दुकानदार के मुख से अनायास ही निकल गया

“कुछ भी बोल लेकिन बहुत सुंदर है कौन है ये “

मैंने उसे पूछा

“ये इंस्पेक्टर जूही है ,हमारे थाने की इंचार्ज ,”

 
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