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रंगीली बीवी की मस्तियाँ complete

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जूही... मेरे मन में ये नाम कौंध गया मैं जल्दी से सिगरेट खत्म कर वहां से निकला और उस वेन के पीछे लगा ,कुछ देर में ही मुझे वो वेन एक जगह खड़ी दिखई दी साथ ही दिखाई दी काजल और रॉकी के साथ जूही ,काजल की गाड़ी कही नही दिख रही थी ,मैं भी थोड़ी दूर ही गाड़ी खड़ी कर छुपकर उन्हें देखने लगा वो रोड में ही खड़े थे ,जूही ने एक पैकेट दिया ,काजल उसे खोलकर देखती है और एक फ़ोटो को देखकर चौक जाती है,उनमे क्या बात हो रही थी मुझे सुनाई नही दे रहा था लेकिन जूही काजल को थोड़ा अलग ले गई और कुछ बात कर फिर से वो वेन में बैठ कर वहाँ से चल दी ,और काजल और रॉकी पैदल ही जाकर रेलवे ट्रेक पर पार किया ,मुझे अब समझ आया की उनकी गाड़ी मुझे क्यो नही दिखाई दी ,रेलवे ट्रेक सड़क से थोड़े ऊपर में था और उन्होंने गाड़ी उसपार पार्क की थी ,अब ये बात समझ नही आ रही थी की जूही और काजल में क्या संबंध है ,मैं तुरंत डॉ को फोन लगाकर सारी बात बताई …

“ओह तो साले मिश्रा ने इसमें जूही को भी लगा रखा है “

“तुम उसे जानते हो “

“बहुत अच्छे से जबसे वो एक पोलिस की कांस्टेबल हुआ करती थी ,कुछ ही सालो में उसे इतने प्रमोशन मिले की वो आज थाना इंचार्ज बन गयी है,बहुत चालू चीज है और खतरनाक भी ,गरीब घर की लड़की है ,शादी शुदा है ,पति एक साधारण सा किराने की शॉप चलता है ,गांव में रहता है ,ये लड़की अपने दम में इतना बड़ी है ,कई बड़े मिशन का हिस्सा रही ,जिस्म और खूबसूरती का इसने पूरा उपयोग किया और क्राइम ब्रांच में भी रही ,इसके जासूसी की काबिलियत के कारण इसे इतने प्रमोशन मिले,अब समझ आया की साले मिश्रा ने ही इसका ट्रांसफर यहां करवाया होगा,इससे पहले वो क्राइम में थी ,चलो ये अच्छी खबर है उसके रहने से काजल पर खतरा थोड़ा कम हो गया…”

“हम्म हमे इससे कोई प्रॉब्लम तो नही होगी “

“अरे नही उसे मैं सम्हाल लूँगा “

डॉ से बात कर मैं काजल को काल किया

“कहा हो जान हो गया तुम्हारा काम “

“हा हो गया लगता है बहुत याद आ रही है मेरी आज भी आ जाऊ क्या “

काजल ने मदहोशी से कहा ये बात पास बैठे रॉकी को बिल्कुल पसंद नही आयी होगी ,शायद इसलिए काजल की एक हँसी निकली जिसमे एक टिस भी थी,

“ह्म्म्म ऐसे अभी कहा हो तुम “

“होटल में ही हु “

“कौन सा कमरा “

“क्यो”

“बताओ तो सही “

मेरे इस सवाल से शायद काजल की हालत खराब हो रही होगी,लेकिन उसने कोई भी ऐसा रिएक्शन नही दिया जिससे मुझे कोई शक होता ,

“153 लक्सरी सुइट है”

“ओह ग्राहको की जगह तुम ही यूज़ कर रही हो..”

“अरे एक ही तो सुइट है उसमें भी कभी कोई बुकिंग नही आयी अभी तक “

“क्या हुआ हुआ आप थोड़े परेशान से लग रहे है,”काजल ने फिर से कहा

“कुछ नही जान बस यू ही मैं बहुत थक सा गया हु ,सोना चाहता हु “

“आप ठीक तो हो ना “

“हा बस थक गया हु “

“ओके जान आराम करो बाय गुड नाईट “

“गुड नाईट लव यु …”

“लव यु टू “

मैं अपनी बाइक स्टार्ट कर कुछ सोच रहा होता हु और अचानक ही मेरी गाड़ी की दिशा बदल जाती है मैं काजल के होटल की तरफ चलने लगता हु,मेरे दिल की धड़कन ना जाने किस वजह से तेज थी और मन में एक घबराहट थी,उसे दूर करने के लिए मैंने गाड़ी की रफ्तार बड़ा दी,काजल का होटल लगभग 1 घंटे की दूरी पर था,

हाइवे में तेजी से बढ़ती मेरी गाड़ी ने अचानक एक सफेद कलर की गाड़ी को क्रास किया,मुझे याद आया की ऐसी ही गाड़ी से वो दोनो गए थे,मैं थोड़ा पीछे हुआ ,रात की अंधेरे में अंदर देख पाना थोड़ा मुश्किल था लेकिन पास से गुजरते हुए मुझे अंदर का नजारा दिख ही गया,हा ये रॉकी ही था ,मैं तेजी से गाड़ी बड़ा दी और उनसे पहले होटल पहुच गया…….

बाहर खड़ा गार्ड मुझे पहचानता था अंदर रिसेप्शन में बैठा एक जवान सा युवक मुझे देखने लगा,उसे मैं भी पहली बार देखा था ऐसे भी यहां आता ही कब था…

“may i हेल्प यु sir “

“ह्म्म्म ओह हा काजल से मिलना है,”

“जी मेडम तो नही है सर ,”

“हम्म उसके रूम की चाबी दो “

“सर …?????सर वो मैं कैसे “

“वाचमैन को बुलाओ “

वो लड़का मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,

वो वाचमैन को बुला लेता है

“इसे बताओ की मैं कौन हु “

वाचमैन लड़के दो देखता है

“अरे मेडम के हसबेंड है “वो उसके पास जाकर उसके कान में फुसफुसाता है

“ओह सॉरी सर ,लीजिये चाबी “

“सुनो मेडम को या रॉकी को मत बताना की मैं आया हुआ हु मैं उन्हें सरप्राइज देना चाहता हु ..”मैंने उसे आंख मार दी

“जी सर वो भी थोड़ा मुस्कुराया “

“और हा मेडम जब आ जाए तो शेम्पियन की एक बोतल भिजवा देना “

“ओक्के सर “

मैं काजल के बताये रूम में गया जो की आखिरी फ्लोर में था,

वहां घुसते ही लगा मानो किसी जन्नत में पहुच गया हु ,इतना बड़ा सुइट था और साथ ही बहुत ही खर्च किया गया था,मैं कभी भी होटल के मामले में नही पड़ा लेकिन आज देखकर लगा की उसके भाई ने यहां बहुत पैसा इन्वेस्ट कर दिया है ,मुझे याद आया की ये इस होटल का एक ही सुइट टाइप रूम है ,फिर भी इसे आलीशान बनाया गया था,एक ड्राइंग रूम एक बैडरूम छोटा से बार काउंटर जिसमे सजी हुई कुछ चुनिदा बोतले और मंहगे ग्लास सेट्स और बहुत सारा स्पेस जहा महंगे कालीन ,जरीदार झालरों से फैलती हुई लाइट और मांगे किंग साइज के सोफा के कारण ये बहुत ही आकर्षक लग रहा था,ड्राइंग में के ही एक ओर सीढ़िया बनी थी 5 सीढ़ियों के बाद वहां कुछ स्पेस था और एक बड़ा कांच की दीवार थी जिससे पूरा शहर साफ दिख रहा था,वहां भी बिठाने के लिए आरामदायक सोफे सजाए गए थे,पूरा शहर जगमगा रहा था,ये कोई बड़ा शहर नही था फिर भी देखने से बहुत ही सुंदर लग रहा था,शहर का आखिरी छोर भी वहां के दिख रहा था जहा से पहाड़ो की श्रृंखला शुरू हो रही थी ,सचमे यहां बैठकर दारू पीने तो मजा आ जाएगा ,मेरा ध्यान वहां बने छोटे से बार में गई जंहा सलीके से कुछ बोलत रखे थे मेरी नजर पड़ी जॉनी वॉकर स्कॉच पर जब मैं कॉलेज में हुआ करता था तो इसे पीने के सपने देखता था,मैं एक ग्लास लिया दो आइस क्यूब डाले फिर याद आया की टेस्ट खराब हो जायेगा एक निकल लिए और उस छोटे से बोलत को उठा लिया ,21 साल की ब्लेंडेड स्कॉच था,

“वाह …”मेरे मुख से अनायास ही निकल गया छोटा सा पैक बनाकर मैं पहला सिप लगाया ,जैसे जन्नत …

मैं उसे लेकर बैडरूम की तरफ बढ़ा हल्की रोशनी से जगमगाता हुआ वो कमरा किसी को भी उत्तेजित करने को काफी था आज मैं ज्यादा उत्तेजित हो रहा था ये सोचकर की इस रोशनी में काजल के अंग कैसे लगेंगे,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई और मैं उस बिस्तर को देखने लगा ,किंग साइज के बिस्तर में अभी सफेद बेडसीट लगी थी ,बिस्तर के पास ही कांच की दीवार थी लेकिन उसमे पर्दा लगा हुआ था,जैसे ही मैंने वो पर्दा हटाया मेरे मुह से अनायस ही वाह निकल गया ,यहां सेक्स करने से खुले में सेक्स करने की फीलिंग आती होगी ,मेरे मन ने मुझसे कहा ..

वहां एक अटैच बाथरूम था,जंहा ग्लास के पीछे एक बड़ा सा बाथटब था,और एक चीज जिसने मुझे बहुत ही उतेजित किया वो था,बाथटब के पास पड़े दो कपड़े ,मेरे होठो में मुस्कान आ गई ये अब भी गीले थे,एक लाल कलर की पेंटी और ब्रा थी जिसके मखमली अहसास ने मेरे अंदर एक झुनझुनी सी भर दी,क्या ये काजल के थे,मैंने इसे कभी नही देखा था ये बहुत ही छोटे थे,लेकिन बहुत महंगे भी लग रहे थे,मैं अपने ही खयालो में खोया हुआ वहां से बाहर आया ये सोचते हुए की अमीरों के पास सच में कितनी सुविधाएं होती है,

और गरीब ...मेरे हाथो में रखा एक पैक किसी की एक महीने की सेलरी थी,लगभग 4-5हजार का एक पैक रहा होगा,खैर …...मैं वहां से उठा फिर से बाहर ड्राइंग में आया और उन आराम दायक सोफे में लेटा हुआ शहर के दृश्यों को देखने लगा,एक अजीब सा सकून मेरे अंदर उतर रहा था की दरवाजा फिर से खुला ,

“तुम जाओ यार मुझे आराम करने दो ,”

काजल कमरे में आते ही चिल्लाई

“अरे मेरी बात तो सुनो हमे …”रॉकी कुछ बोलने ही वाला था की वो रुक गया दोनो ने मुझे देखा उन्हें मेरा सर ही दिखाई दे रहा होगा,क्योकि मेरा चहरा दीवार की तरफ था और पीठ सोफे से चिपका हुआ ,

“कौन है …”

काजल की आवाज तेज थी,

मैं पलटा मेरे होठो में एक मुस्कान थी और दोनो मुझे देखकर दंग ,

“आप यहां “काजल की आवाज लड़खड़ा गई,रॉकी भी मुह फाडे मुझे देख रहा था.,

मैं अब भी मुस्कुरा रहा था मैं खड़ा होकर सीधे काजल के पास गया वो मुझसे लिपट गई और हमने हल्के से किस किया वो अभी भी थोड़े शॉक में थी ,उसके हाथो में एक बेग था और वो अभी उस साड़ी में बहुत गजब की लग रही थी लेकिन थोड़ी थकी हुई थी ,

“तुमने तो कहा था की होटल में हो …”

“वो कुछ काम आ गया था तो बाहर जाना पड़ गया “रॉकी ने बात को कांटा ,मैं उसे देखा और अपना हाथ बढ़ाया उसने भी हल्के से मेरे हाथो को पकड़ा ,

“यार मुझे पता होता की तुमने इतना अच्छा रूम बना के रखा है तो मैं कब का यहां आ जाता और ये दारू वाह “

अब काजल भी मुस्कुरा रही थी .

“आपको चाबी किसने दी और किसी ने मुझे बताया भी नही की आप आये हो “

“हा जान मैंने ही कहा था,”

“बहुत बढ़िया किये “वो फिर मेरे होठो के पास आयी मैंने हल्के से उसके होठो को चूमा तभी बाहर से एक वेटर आया जिसके हाथो में शेम्पियन की बोतल थी ,वो उसे सजा कर वहां से चला गया,

“हम्म्म्म पूरी तैयारी कर रखी है जनाब ने मैं तैयार होकर आती हु “

काजल बैडरूम की ओर बढ़ गई

“आओ यार एक ड्रिंक हो जाय “मैंने रॉकी से कहा

“नही सर थोड़ा थक गया हु आराम करूँगा आप लोग इंजॉय कीजिये “

वो बिना मेरे किसी रिस्पॉन्स का इंतजार किये वहां से निकल गया ,मैंने भी दरवाजा लगाया अपना पैक खत्म कर शेम्पियन पकड़ कर बैडरूम में चला गया …

मैं बिस्तर में लेटा हुआ था कि काजल बाथरूम से निकली, मैं मुह फाड़कर उसे देखता रहा, कोई इतना सेक्सी कैसे हो सकता है,

वो काले रंग के नाइटी में थी जो कि पूरी तरह से पारदर्शी थी,उसके अंगों की हर बनावट साफ झलक रही थी, उसके काले रंग की पेंटी और ब्रा भी उसमे से झांक रहे थे,मेरे हाथों में शेम्पियन से आधे भरे हुए दो ग्लास थे,वो मुझे देखते हुए मेरे पास आ रही थी, उसकी चाल और मुस्कान दोनो ही कातिल थी,वो मेरे पास आकर मेरे बाजू में बैठी और अपने हाथों में एक ग्लास थाम लिया,

“आजकल उमंग ज्यादा बड़ गई है आपके अंदर “

“जब बीबी इतनी मदहोश करने वाली हो तो कोई किसे दूर रहे जान “

मैं एक सिप लेकर उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया,मेरे होठो से वो शेम्पियन काजल के मुह में पहुच चुका था,वो हल्के से मुस्कुराई और एक सिप खुद लिया और मेरे मुह में उसे भर दिया,ये शराब पीने की नई अदा मुझे बहुत भा रही थी,

रात के साथ हम एक हुए और अपने प्यार की बारिस एक दूसरे पर कर दी….

काजल मेरी बनहो में सोई पड़ी थी और मैं उसके चहरे को देख रहा था,मेरे आंखों से नींद गायब थी या मैं जानबूझ कर नींद को अपने पास आने नही दे रहा था,कुछ घंटे बीते और मैं उठा पास ही पड़ा काजल का बेग लिया और और उसे खोला उसमे वही पैकेट दिखाई दिया जो की जूही ने काजल को दी थी ,उसे खोलने पर मेरी आंखे फटी रह गई मैं उसमे कुछ फोटोज थे जिसे मैं समझ नही पा रहा था की ये किसके है मैं अपने मोबाइल कर जल्दी से सारे फोटोज खिंच लिए ,इनमें दो शख्स को मैं जानता था वो था टाइगर और उसकी सेकेट्री रिहाना ,बाकियों का मुझे कोई भी पता नही था ,मैं तुरंत उसे डॉ के पास भेजा साथ ही ये भी बता दिया की ये मुझे कहा से मिले है,मैं उसे फिर से वैसे ही रख कर सोने लगा,अब जाकर काजल की बांहो में मुझे चैन की नींद आ रही थी…...

 
कहानी में थोड़ा टर्न लाते हैं और काजल का पॉइंट ऑफ view समझते हैं कि आखिर वो अभी तक क्या सोच रही है…

मेरा नाम काजल है,मेरा जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ जंहा मुझे बहुत ही प्यार मिला,मैं अपने तीन भाइयो की छोटी बहन हु,मेरे परिवार की इज्जत दूर दूर तक थी,गांव में रहने के बावजूद वो ऊंचे और आधुनिक खयालो के लोग है,

भाइयो और माता पिता के प्यार ने मुझे थोड़ा नकचढ़ी भी बना दिया,मेरी हर जरूरत पूरा करने में पूरा घर लगा होता था,लेकिन फिर भी मेरे घर वालो ने मुझे बड़ो का आदर करने और छोटो को प्यार देने के ही संस्कार दिए,

मेरी जवानी ने मेरे व्यक्तित्व में और भी निखार ला दिया ,मेरा मासूम चहरा और कसे हुए बदन ने मेरा आकर्षण बड़ा दिया,लेकिन फिर भी मेरा बचपना कभी नही गया,मेरे घर में कई नॉकर थे और मेरे घर वालो का व्यवहार उनके प्रति हमेशा प्रेमपूर्ण ही रहा ,उनका असर मुझे भी हुआ,गांव में भी लोग मुझे प्रेम की मूर्ती ही कहा करते थे,मैं चंचल थो थी लेकिन संवेदनाओ से भरी हुई ,किसी की तकलीफ मुझसे देखी नही जाती,मैं जंहा भी जाती मुझे बहुत प्यार और सम्मान मिलता था,कारण साफ था वो था मेरा लोगो के प्रति प्रेम भरा व्यवहार…

मैं लोगो को ऐसे ट्रीट करती थी जैसे की वो अजनबी नही बल्कि मेरे अपने है ,मैं किसी के लिए उनकी छोटी बहन थी तो कोई मुझे प्यार से दादी बुलाता था,मैं गांव में बहुत खुस थी जब तक की मेरी जिंदगी में मिश्रा जी नही आये ….

वो एक आकर्षक मर्द थे ,उनके व्यक्तित्व में एक अजीब सी कसक थी ,वो उस समय मेरे जिले के कलेक्टर थे,वो मेरे पिता से कुछ ही छोटे थे लेकिन फिर भी मैं उनके तरफ आकर्षित होने लगी थी ,जवानी की दहलीज में जब जिस्म की जरूरते करवटे लेती है मुझे बुरी नजरो से देखने वाला भी कोई नही था,मुझे इसका पहला आभास भी मिश्रा जी की नजरो से हुआ ,वो मुझे के अजीब से नजर से देखते थे जिससे मैं अनजान थी,पता नही क्यो धीरे धीरे मुझे वो अच्छा लगने लगा,वो कोई ऐसी बात कभी नही करते थे जिससे मुझे बुरा लग जाय,वो मेरा बहुत ही ख्याल रखते थे

जब मुझे पढ़ाई के लिए शहर जाना था तो इसकी जिम्मेदारी भी मिश्रा जी ने ले ली ,मेरे घर वाले उनपर भरोसा करते थे इसलिए मुझे भी इसपर कोई एतराज नही था,लेकिन मेरी जिंदगी बदलने वाली थी पता नही वो किस ओर जाने वाली थी ,

मिश्रा जी ने कभी मुझसे कोई भी जबरदस्ती नही की कोई कर भी नही सकता था,मेरे भाइयो ने ना सिर्फ मुझे प्यार दिया बल्कि कई कलाएं भी सिखाये जिनमे से कराटे भी एक था,मेरे भइया खुद भी एक ब्लैक बेल्ट थे और अपने भाइयो और मुझे भी उन्होंने ये ट्रेनिंग दी थी,उनका ही कमाल था की मैं छोटी उम्र से ही फिटनेस की ओर बहुत रुचि रखती थी,

कॉलेज का माहौल आम कालेजो जैसा ही था और ये वो दौर था जब अंडरवर्ड के माफिया इस शहर पर राज करते थे,उनमे से कई ने ड्रग्स का धंधा शुरू कर दिया ,और पहला शिकार हुए कालेज के बच्चे ,मैं जिस कॉलेज में पढ़ रही थी वहां अधिकतर लोग बड़े घरों से थे,और पार्टी करना क्लबो में जाना उनके लिए आम बात हुआ करती थी,इस दौर में पॉप म्यूजिक ने भारत में नया कदम रखा था जिससे एक डिस्को सभ्यता का जन्म हो रहा था,जगह जगह हिप्पी सभ्यता के लोगो का जमावड़ा मिल जाता था,और जो पार्टीयो ने नही जाता उसे लोग गवार की नजर से देखते ,स्वाभाविक है की बदलते समाज की भेंट कुछ मासूम लोग ही चढ़ते है,और इसी ड्रग्स जो की पार्टीयो में आम होने लगी थी का शिकार हुई मेरी सबसे अजीज दोस्त नेहा ,वो बेहद ही खूबसूरत थी ,और मेरी ही तरफ लोगो के साथ आराम से घुल मिल जाती थी ,लेकिन हममें एक ही असमानता थी की वो शहर में पली बढ़ी थी जबकि मैं गांव में और इस एक असमानता ने हमारे सोच में बहुत फर्क लाया था,वो बहुत खुले विचारों की लड़की थी ,उसने अपना कौमार्य बहुत कम उम्र ने ही खो दिया था,उससे ही मुझे सेक्स का पहला ज्ञान मिला उसे अधेड़ उम्र के लोग पसन्द थे और वो मिश्रा को भी लाइन मारा करती थी ,जो भी वो बहुत खुले विचारों की लड़की थी लेकिन दिल से बहुत नरम और साफ,यही हमारे दोस्ती की बुनियाद थी,वो ड्रग्स के नशे में पड़ गई और मेरी प्यारी सी नेहा ने अपनी जिंदगी बर्बाद करना शुरू कर दिया,ऐसे तो मैं भी ड्रग्स लिया करती थी पर कभी कभी मुझे अपने पर पूरा कन्ट्रोल था,ऐसे भी बचपन से कराटे ,योग ,और ध्यान की ट्रेनिंग और घर वालो के संस्कार ने मुझे कही ना कही बहुत ही प्रोटेक्ट किया था,लेकिन नेहा की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी ,वो एक बहुत ही अच्छे घर की लड़की थी ,बाप के पास पैसा भी बहुत था लेकिन किस काम का….

मैंने उसे तड़फते देखा,उसे समझने की कोसीसे की लेकिन ….

मैं उसे इस दलदल से निकलना चाहती थी पर मैं मजबूर थी,मैंने पूरी बात मिश्रा जी को बताई और उन्होंने मुझसे इससे निपटने का वादा किया,मुझे नही पता था की वो ऐसे भी इस काम में लगे हुए है और इसका कारण कुछ और था,

तभी मार्किट में एक नया ड्रग्स आया जो की युवाओं की पहली पसंद बन रहा था,काम उत्तेजक उस ड्रग्स से सेक्स की इच्छा और शक्ति दोनो ही बहुत बढ़ जाती थी ...सुनने में तो ये बहुत अच्छा लगता है लेकिन इसके ज्यादा प्रयोग से होने वाला नुकसान बहुत ही खतरनाक था,वो था कभी संतुष्ट ना होनी वाली सेक्स की इच्छा….अंदरवर्ड के लोग इसका प्रयोग लड़कियों को जिस्म फरोशी के धंधे में उतारने के लिए करना चाहते थे,और इसके लिए उन्हें कोई भी मेहनत नही करनी पड़ रही थी क्योकि लोग खुद ही इसे ले रहे थे वो भी ऊंचे दामो में ,और इसका प्रयोग कर मजा लेने वालो में मेरी फ्रेंड नेहा भी थी,शुरुवात तो बड़ी अच्छी हुई लेकिन ……..

वक़्त के साथ साथ नेहा की हालत एक सेक्स एडिक्ट की हो रही थी ,और उसे बचना मेरे लिए एक मात्रा मकसद बन गया था,तभी घटे एक वारदात ने मुझे हिला कर रख दिया ,पुलिस ने एक सेक्स रैकेट पकड़ा जिसमें नेहा भी शामिल थी,

मिश्रा जी की पहुच की वजह से ये बात कभी न्यूज़ में नहीं आई, लेकिन इससे ये जरूर साबित हो गया कि ये ड्रग्स क्या करा सकता हैं, इससे पुलिस और प्रशासन के भी कान खड़े हो गए, इसमें उनके भी कई नेता और अधिकारियो के शामिल होने के अंदेशे के कारण इसके खत्मे के लिए एक गुप्त समिति बनाई गई, मिश्रा जी ias होने और ईमानदार छबि के कारण उस समिति के सदस्य बने,जिसने एक टीम तैयार करने का प्रस्ताव रखा,लेकिन समस्या ये थी की इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए उसके अंदर घुसना पड़ता और वो काम करेगा कौन???

इसमें सिर्फ मर्दो से काम नही चलने वाला था इसके लिए लड़कियों को भी तैयार करना पड़ता लेकिन अंडरवर्ड के लोग अधिकार पुलिस वालो को जानते थे,और पुलिस और प्रशासन में बैठे लोगो जो इसमें शामिल है की नजर से बचाकर किसी अंदर कवर एजेंट की नियुक्ति करना संभव नही लग रहा था,उन्हें ऐसे लड़कियों की जरूरत थी जो की ना सिर्फ वहां घुस सके बल्कि बिल्कुल नए चहरे हो,ये काम मिश्रा ने अपने हाथो में लिया और एक लड़की ढूंढ ही निकली जिसे पैसे की बहुत जरूरत थी लेकिन काम उसे मिल नही रहा था,मिश्रा ने उसे पुलिस में नॉकरी दिलाने का वादा किया,और प्रारंभिक रूप के एक कांस्टेबल के जॉब में भी लगवा दिया,बिना ट्रेनिंग के ही उसे इस पहले मिशन में भेज दिया गया,

लड़की का नाम था जूही,वो एक शादीशुदा लेकिन कम उम्र की आकर्षक लड़की थी ,मिश्रा ने सभी प्रॉब्लम मुझसे शेयर की और मैं भी इस मिशन का हिस्सा बनने के लिए जिद करने लगी,तब तक मेरे और मिश्रा जी के बीच सिर्फ प्यार का रिश्ता था,लेकिन वो प्यार अपनत्व के अलावा कुछ भी नही था,मैं उसे दिलोजान से पसंद करती थी उसकी नजर भी मुझपर होती लेकिन मेरे घर वाले भी उससे कम पावरफुल लोग नही थे शायद इसिलए मिश्रा ने कभी आगे बढ़ने की हिम्मत नही की ,वही मेरे सामने पहले से कई समस्याएं खड़ी हो चुकी थी जिसका मुझे समाधान करना था,मेरा दिल रोज नेहा को देखकर रोता था,नेहा भी मेरी भावनाओ को समझती थी लेकिन उसे ये आदत ऐसे जकड़े हुए थी की उससे अलग होना उसके लिए अभी मुनासिब नही था,मैंने उसे तकिए को अपने योनि से लगाकर रगड़ते देखा था,अब वो मेरे पास ही रहती थी ,सेक्स की इच्छा इतनी घातक हो सकती है मुझे तभी समझ आया,वो रोया करती थी की कैसे भी मुझे सेक्स दिलाव ,सेक्स रैकेट में पकड़े जाने के बाद से मैंने उसका अकेले निकलना बंद कर रखा था,लेकिन उसके हालत से मजबूर होकर मुझे उसे पार्टी में जाने की अनुमति देनी पड़ती थी ,वो मुझसे इस कदर प्यार और भरोसा करती की मेरे एक ना में वो बस रोती रह जाती लेकिन कभी मेरे विरुद्ध जाने की जिद नही करती ,मेरे दिल में हमेशा कांटे चुभते थे की ना जाने मैं इसे कैसे इस दलदल से निकलू और एक गुस्सा मेरे जेहन में बस गया था की जिसने भी इसकी ये हालत की है मैं उसे मार डालूंगी…..

 
मिश्रा ने मेरे प्रस्ताव को टुकड़ा दिया लेकिन मेरे जिद करने पर वो भी सोचने पर मजबूर हो गए लेकिन नेहा इसके खिलाफ थी वो कभी नही चाहती थी की मैं उस दलदल में फंसु जंहा वो है ,वो खुद इस मिशन का हिस्सा बनने की जिद करने लगी थी आखिर में ये डिसाइड हुआ की दोनो ही अलग अलग रूप से इस मिशन में जुड़ेंगे,नेहा की सेक्स की भूख भी शायद यहां जाने से शांत रहे लेकिन मुझे कुछ ना हो इसके लिए मुझे कुछ अलग तरह के काम सौपे गए,मुझे ड्रग्स और सेक्स दोनो से दूर रहना था,लेकिन वक़्त क्या गुल खिलाने वाला था किसे पता था,हमारे सुरक्षा और सहयोग के लिए कुछ अंदर कवर एजेंट नियुक्त किये गए थे ,जो अलग अलग विभाग से चुने गए थे,हमे जगहों का पता लगाना था और जो लोग इसमें इन्वॉल्व है उन्हें गिरफ्तार करवाना था,ऐसे तो ये मिशन ज्यादा बड़ा नही था लेकिन उसे सफाई से करना बहुत जरूरी था,....

हमरी शुरुवात तो धमाके दार हुई जूही सचमे कमाल की थी ,उसके तीखे नयन नख़्स से लोग इतने जल्दी उसके दीवाने हो जाते की सारे सीक्रेट उगल देते,वही नेहा भी कमाल की साबित हुई और सबसे अच्छी बात ये हुई की वो इस काम से बहुत संतुस्ट थी उसने ड्रग्स लेना कम कर दिया था और वो खुस रहने लगी थी ,मेरा काम कुछ खास नही था,मैं बस निगरानी करने,इन्फॉर्म करने और वक़्त पड़े तो लड़ाई करने का काम करती थी,हमने 2 सप्ताह में ही कुल 20 लोगो को गिरफ्तार करवाया ,नेहा को पहले से सेक्स रैकेट के एजेंटों का पता था वो इसका फायदा उठा फिर से इस काम में निकल पड़ी और उसके इनफार्मेशन के बेस में जगह जगह छापे पड़ने लगे,इधर जो लोग इसमें इन्वॉल्व थे वो बौखला से गए थे,इतने छापे कई करोड़ो के ड्रग्स पकड़े गए थे,हम अपने शहर तक ही सीमित नही थे हम दूसरे जगहों पर भी जाते,कई फार्म हाउस में छापे पड़े,मैं सभी की नजरो से हमेशा ओझल ही रही लेकिन जूही और नेहा को स्पॉट कर लिया गया,इससे कोई खासा फर्क तो नही पड़ा और कई अधिकारियों को भी हमने गिरफ्तार करवाया,लेकिन जिसे मैं जानना चाहती थी वो अभी तक हमारे सामने नही आया था की आखिर इन सबके पीछे है कौन वो एक व्यक्ति जिसने पूरा जाल बिछाया है……..

कुछ समय बाद ऐसा लगने लगा की हमारा काम पूरा हो गया ,कही कोई भी वारदात नही ,ड्रग्स से पीड़ित लोगो के लिए केंद्र भी खोले गए जिसमे नेहा भी जाने लगी थी,किसी पार्टी में उस ड्रग्स का नामोनिशान नही मिलता था,आखिर 2 महीने के मेहनत के बाद शासन ने भी सोच लिया की उनका काम खत्म हो गया है,हमारी टीम को पुरुस्कार देने की बात होने लगी लेकिन मैं सामने नही आना चाहती थी ना ही नेहा,पूरा श्रेय अकेले जूही को मिला और साथ ही मिला उसे प्रमोशन ,............

लेकिन कहानी अभी खत्म नही हुई थी,असली गुनहगार बस इसी तलाश में बैठा था की कब हम शांत हो जाय और वो अपना वॉर करे ...

मैं अब भी नेहा के साथ ही रहा करती थी ,नेहा की हालत में काफी सुधार हो गया था लेकिन फिर भी उसके सेक्स का नशा गया नही था,वो कम लेकिन फिर भी क्लबो में जाया करती थी,उसके पेरेंट्स को इसके बारे में कुछ भी नही पता था,लेकिन कुदरत कभी कभी जब दुख देने में आती है तो तोड़कर ही रख देती है और ऐसा ही नेहा के साथ भी हुआ उसके माता पिता का एक एक्सीडेन्ट में देहांत हो गया ,वो इससे अंदर के टूट गई थी ,और अब वो थोड़ा चुप ही रहा करती,उसकी उदासी मुझे भी दुखी करने लगी थी,

इधर मेरे और मिश्रा जी के बीच कुछ होने लगा था,वो मेरे लिए प्यार का पहला आभास था,वो एक अजीब सी कुलबुलाहट मेरे अंदर होने लगी थी,हम दोनो को ही पता था की हमारे बीच ये सब थोड़ा अजीब था,लेकिन फिर भी मिश्रा जी का भी व्यवहार मेरे प्रति बदल रहा था,वो मुझे कभी कभी छू लिया करते और मैं जानती थी की उनकी इस छुवन में वो बात नही है जो एक अभिभावक के छूने में होती है,इम्की छुवन मेरे अंदर कुछ हिला सा देती थी,मैं अब उनके सामने बहुत शर्माने लगी थी ,मुझे लगता की मिश्रा जी मुझे देखेंगे तो उन्हें कैसा लगेगा वो क्या सोचेंगे,मैं अब कभी कभी उन्हें खुश करने के लिए ही सजने लगी थी,नेहा को अपनी उदासी ,और दुख में मेरे कारण खुस होने की एक वजह मिल गई थी,वो मुझे मिश्रा जी के नाम से छेड़ती थी,कभी कभी मिश्रा जी के सामने भी इस बात को निकाल देती हम दोनो ही इस बात को लेकर नर्वस हो जाते थे,तब वो खिलखिला कर हँसती,उसकी उस मासूम हँसी में मैं खुस हो जाती ,मिश्रा जी से नजदीकियां बढ़ाने को वो हमेशा ही जिद किया करती थी ,लेकिन मैं डरती थी वो डर एक अनजान सा डर था,उम्र की ये दूरियां,उनकी मेरे इतनी ही एक बेटी थी जिसके बारे में मिश्रा जी ने मुझे बताया था,मैं उनके बेटी के उम्र की थी और उनके साथ रिलेसन रखना ,एक डर तो था,लेकिन मिश्रा जी के अलावा किसी और की बात दिमाग में ही नही आती,लेकिन उस रात कुछ हुआ……………..

मैं और नेहा एक पार्टी में गए थे कालेज के दोस्तो के साथ बहुत दिनों के बाद हम पार्टी कर रहे थे ,बारिस का मौसम था और बारिस अपने पूरे सबाब पर थी,हम दोनो ही शराब के नशे में थे ,नेहा को सेक्स का भूत चढ़ गया,हमारे ही क्लास का एक लड़का जिससे नेहा के पुराने रिलेसन थे वो नेहा को रुकने की जिद करने लगा,पार्टी उसके ही घर हो रही थी ,नेहा भी आज पूरी तरह से तैयार थी बस मेरे हा कहने का इंतजार था,दोनो ही मुझसे परमिशन मांग रहे थे,मैं लड़के को जानती थी और नेहा भी अपने माता पिता की मौत के बाद आज खुस लग रही थी ,मैं चाहती थी की वो भी अपने नार्मल जिंदगी में वापस आ जाय,मैंने उसे हा कह दिया लेकिन मैं वहां नही रुकना चाहती थी,और मैंने मिश्रा जी को बुला लिया,मिश्रा जी ने गाड़ी भेजने की बात कही ,हम सभी दोस्त बारिश में खूब नाचे थे,

मेरी गाड़ी आयी और मैं घर की तरफ चल दी,मैं जानती थी की हो ना हो मिश्रा जी भी आज मेरे रूम में होंगे …

मैं एक लाल कलर की साड़ी में लिपटी हुई थी,बदन और कपड़े दोनो ही भीगे हुए थे,नई नई जवानी आयी थी और मादकता अपने चरम पर थी,शरीर में अभी अभी भराव आने शुरू हुए थे,मैं एक अनखिली फूल थी…

मिश्रा जी के दरवाजा खोलते उनकी नजर मेरे पूरे बदन पर गई ,उनके बेटी की उम्र की लड़की आज उनके सामने खड़ी थी अपने जवानी के उफनते शैलाब को भीगे हुए कपड़ो में छुपाते हुए,लेकिन सच तो ये था की जिस्म की मादकता भीगने पर और निखर कर आ रही थी,

वो आंखे फाड़े मुझे घूर रहे थे और मैं शर्म से मरी जा रही थी,मैं भी शराब के सुरूर में थी लेकिन इतनी बेआबरू नही थी की बहक जाऊ,मैं अंदर आने को हुई मिश्रा जी ने मुझे रास्ता दिया मैं सीधे अपने कमरे में चली गई ,मिश्रा जी ने ही हमे ये 2 bhk का फ्लेट दिलवाया था,वो कभी कभी ही आते थे,लेकिन उनके लिए एक कमरा बुक था,शराब के नशे में मैंने एक गलती कर दी ,मैं अंदर तो आ गई लेकिन कमरे को बंद करना भूल गई,दरवाजा सरकता हुआ खुल गया था जब मैं दर्पण के सामने खड़े अपने यौवन को निहार रही थी,मेरा पल्लू सरका हुआ था और मेरे बड़े तरबूज मेरे कसे ब्लाउज़ से बाहर आने को बेताब थे,दरवाजा जब सरका तो मैं उन्हें ही हाथो में पकड़े थी और मुस्कुरा रही थी ,मिश्रा जी सामने ही खड़े थे और।मुझे आश्चर्य से घूर रहे थे,ना जाने उन्होंने क्या देख लिया था लेकिन उनकी आंखों में विस्मय के बहाव साफ साफ झलक रहा था,मुझे भी इसका आभास हुआ और मैं मुस्कार उनकी तरफ देखने लगी,हमारी आंखे मिली और मैं शर्म से मूर्ति की तरह खड़ी की खड़ी रह गई,जब मुझे होश आया की मैं क्या कर रही हु मैं भागते हुए गेट को बंद करने गयी लेकिन मिश्रा जी की सब्र की सीमा तब तक टूट चुकी थी,वो आगे बढ़कर गेट तक पहुचे और मुझे उसे बंद करने से रोक लिया वो अब मेरे कमरे में थे,वो मुझे देखते ही रहे और मेरी नजर जमीन को ……..

मेरा पल्लू अभी भी गिरा हुआ था,उन्होंने अपना हाथ मेरे कमर पर रखा,गिले बदन में जैसे आग लग गई हो,मैं एकदम से कांप गई ,वो मुझे अपनी ओर खिंचे और मैं किसी गुड़िया की तरह उनसे जाकर चिपक गई ,उन्होंने अभी एक बनियाइन और निकर डाल रखी थी ,उनके छाती के घने बाल में मेरा चहरा रगड़ खा रहा था,मेरे कान उनके धड़कनों की आवाज सुन सकते थे,उनके हाथ काँपते हुए मेरे बदन को सहला रहे थे ,हम दोनो की सांसे इतनी भारी थी की इसका अहसास दोनो की कर सकते थे,लेकिन दोनो ही आगे बढ़ने से डर रहे थे,एक अजीब से फीलिंग थी ,पहली बार किसी ने मुझे इस तरह से और इस मकसद से छुवा था,मैं कुछ भी नही करना चाहती थी बस चाहती थी की बस ऐसे ही उनके सीने में सर रखे पड़ी रहू,

लेकिन कब तक वासना की आग तो दोनो में धधक रही थी ,ये वासना था या प्यार????

कहा नही जा सकता ,लेकिन वासना हम पर हावी थी,एक दूजे से सटे रहने का कारण जरूर प्यार ही था ,वो प्यार जो सालो से हमारे बीच पल रहा था आज उसे अंजाम मिलने वाला था,लेकिन अभी तो हम जिस्म की उस आग के गिरफ्त में थे जिसने हमे जला दिया था,

उनके हाथ अब मेरे कमर से होते मेरे नितंबो पर पड़े मेरी सांसे रुक गई,और उनके हाथ भी मेरी इतनी भी हिम्मत नही हो रही थी की मैं उनसे अलग हो सकू,या उन्हें रोक सकू,या उन्हें आगे बढ़ने को कहु मैं क्या चाहती थी वो तो मुझे भी नही पता था,बस पता था तो ये पल,ये पल सचमे बड़ा ही खूबसूरत था और मैं बस यही रहना चाहती थी इसके सिवा कुछ भी जो हो रहा था ,मैं उसके अहसास में ही खोये रहना चाहती थी ,मैं उनके हाथो को अपने नितंबो के ऊपर महसूस किया और मेरे मुह से एक सिसकारी अनायास ही निकली,

“आह ,”

ये सिसकारी शायद मेरे इस खेल को इजाजत देने का प्रमाण था,मिश्रा जी को वो मिल गया था जो वो चाहते है,उन्होंने हल्के से नितम्भो को दबा दिया,

“आआआ हहहह “

इस बार मेरी सिसकी थोड़ी लंबी थी,

 
उन्होंने मेरे चहरे को उठाया,मेरे गीले बालो से अभी भी पानी की धार बह रही थी ,और मेरे चहरे में अभी भी नमी थी,वो मेरे आंखों में देखने का प्रयास करने लगे लेकिन मैं किसी नई दुल्हन की तरह शर्मा रही थी,उनसे नजर मिलने की हिम्मत मुझमे नही थी ,उनका मुझे यू देखना मुझे बहुत भा रहा है,लेकिन वो मीठा दर्द भी सहन से बाहर हो रहा था,मैं अपने चहरे को यू दूसरी ओर किया जैसे की मैं उन्हें इसे दिखना नही चाहती ,वो नाकाम कोसीसे थी और उनके होठ मेरे गालो में पड़े,

ये शराब का नशा था की मेरे प्यार का या उस हवस का लेकिन जिंदगी की पहली होठो की छुवन ने मुझे झकझोर कर रख दिया था,

उनके होठ मेरे गालो को भिगो रहे थे ,अब मिश्रा जी थोड़े तेज हो गए थे,वो मेरे गालो को चूस रहे थे,चाट रहे थे और मैं शर्म से बेहाल हो रही थी ,लेकिन उस आनंद को शब्दो में नही बंधा जा सकता,मैं जैसे एक जन्नत में थी ,शर्म का पर्दा कह रहा था की मैं उनसे अलग हो जाऊ ,लेकिन मेरे होठो से निकलने वाली हल्की सिसकारियां और मेरे होठो की मुस्कान कुछ और ही कहानी कह रही थी,

मैं उनकी बांहो में मचलने लगी,जैसे की मैं उनकी पकड़ से आजाद होना चाहती हु,लेकिन मिश्रा जी ने मेरे होठो तक अपने होठो को पहुचने का रास्ता खोज ही लिया,उनके होठ मेरे होठो से मील कुछ देर तक मैं उसे हटाने की कोसीसे करती रही लेकिन मेरे होठो में जैसे जैसे मिश्रा जी के लार का गीलापन चढ़ता गया मेरा विरोध कमजोर पड़ता गया,आखिर में हमारे होठ मिले,वो ऐसे मिले जैसे वो इसी के लिए बनाये गए हो,मिश्रा जी जैसे मेरे होठो को खाना चाहते थे और मैं भी इतनी उत्तेजित हो गई थी की मुझे नही पता चल रहा था की मैं क्या कर रही हु ,मेरी आंखे बंद थी और मैं इस खेल के पूरे नशे में थी ,हम कब बिस्तर में जा गिर गए हमे पता ही नही चला,मिश्रा जी मेरे ऊपर थे और मेरे होठो को चूसते हुए मेरे गीले उजोरो से खेल रहे थे और मेरे हाथ उनके बालो में थी मैं उसे अपने ओर जितनी ताकत से हो सके खिंच रही थी ,वो अपने हाथ को मेरे पूरे शरीर में चला रहे थे और उनका प्रिय स्थान मेरे वक्ष थे,वो मेरे टाइट ब्लाउज के अंदर अपने हाथो को घुसने की कोसीसे करने लगे और उन्होंने उसे सरका ही दिया,वो एक खिलाड़ी के तरह हर काम में माहिर थे,उनके हाथ कब मेरे पीठ में जाकर मेरे ब्लाउज़ और ब्रा के बटनों को खोल चुका था मझे पता ही नही चला,और चलता भी कैसे मझे कहा किसी का होशं था मैं तो बस उनके होठो के जरिये ही उनमे समाना चाहती थी,मुझे क्या पता था की उनमे सामने के असली रास्ते को तो मैंने अपनी साड़ी फिर पेटीकोट फिर पेंटी के अंदर छुपा रखा है,ऐसे मेरे योनि से धार की बरसात भी हो रही थी लेकिन फिकर किसे थी ,मैं बस उसी पल में सिमट गयी थी,जो हो रहा था उसी होने दे रही थी और उसका पूरा आनन्द ले रही थी.

मिश्रा जी मेरे बूब्स तक अपनी पहुच सीधे बनाने में कामयाबी हासिल कर ही ली ,वो उसे मसल रहे थे ,और शायद उसे चूसने के लिए मेरे होठो से अपने होठो को अलग करने लगे ,लेकिन मेरा मन अभी नही भरा था मैं उनके सर बार बार खिंच लाती और वो बार बार मेरे निप्पलों को अपने मुह में भरने की कोसीस करते,आखिर जब वो इसमें सफल हुए तो मैं जैसे टूट गई,इतना आनन्द मेरे समझ और बर्दास्त के बाहर था ,मैं टूट गई मेरा शरीर अकड़ाने लगा था और जैसे मेरी योनि से एक तेज धार बही हो ,क्या हुआ था मुझे इसकी समझ नही थी पर जो भी हुआ था उसके बाद मैं पूरी तरह से थक चुकी थी,मैं किसी लाश की तरह गिर गई ,मेरे हाथ फैल गए और मिश्रा जी मेरे निप्पलों को चूसने में ही व्यस्त थे ,वो खिलाड़ी थे उन्हें पता तो चल चुका था की मेरे साथ अभी क्या हुआ है वो फिर से मेरे होठो को अपने होठो में लेकर चूसने लगे ,मेरी आंखों से खुसी के आंसू बह निकले थे,मेरे हाथ उनके सर पर चले गए और इस बार हम बिल्कुल आराम से एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे,मैं एक कृतज्ञता के भाव से भर गई थी,जिसे की मिश्रा जी ने मुझे कोई अनमोल तोहफा दे दिया हो मैं उनके बालो को सहलाये जा रही थी,बड़े प्यार से उनके होठो को चूस रही थी ,वो भी बड़े शांत दिख रहे थे,शायद हवस अब प्यार में तबदील हो रहा था,मेरे बोब्स मेरे सीने में लटक रहे थे ,ब्रा को निकाल के फेक दिया गया था,लेकिन ब्लाउज भी उतरा हुआ था लेकिन निकला नही था,वो अभी मेरे कंधे से उतर कर मेरे हाथो के पास था वही थोड़ा सा मेरे उजोरो के नीचे सरक चुका था,वो मेरी साड़ी को हल्के से ऊपर सरकाने लगे,उनके हाथ मेरे जांघो पर चलने लगे ,मेरी आंखे इस बार खुली थी मैं उनके चहरे को एक बार प्यार से देखी और फिर उन्हें अपने ऊपर खिंच लीया मेरी आंखे फिर से बंद थी और मैं उसे बंद ही रखना चाहती थी,

मैं उनके होठो को छोड़ना ही नही चाहती थी,वो अलग होते तो उन्हें फिर से खिंच लेती,सांसे उखड़ रही थी लेकिन दम तो अभी बाकी था,उनके हाथ मेरे जांघो से होते हुए मेरे कूल्हों तक आ गए,मेरी पतली पेंटी से उनके हाथो का अहसास होते ही मेरे मुनिया ने फिर से एक धार छोड़ दी,मैंने इस उत्तेजना को पहले कभी महसूस नही कीया था ,वो गर्म सांसे वो सर्द हाथ ,वो कपकपी और यौवन की अजीब सी आग,जो जलती थी भड़कती थी और फिर एक धार सा योनि से छूट जाता और मैं फिर से निढल बिस्तर में पड़ जाती,लेकिन मिश्रा जी नही थकते थे वो मेरे बदन को रौंद देना चाहते थे और मैं भी उनके नीचे पीस जाना चाहती थी,मेरी साड़ी मेरे जांघो से ऊपर मेरे कमर पर थी ,मेरे वो गुप्त अंग जिसको मैंने सालो से छिपा रखा था वो बस एक पतले से पेंटी के अंदर कैद थे,उनके हाथ मेरे नितम्भो को मसलने में कोई भी कमी नही कर रहे थे,अब उन्होंने मेरी टांगे फैलाई जिन्हें मैंने सिकोड़े रखा था,मैं तो उनकी गुलाम बन गई थी,वो मेरी दो जांघो के बीच की एक छोटी सी सुराख को खोजने अपने हाथो की उंगलियों को वहां ले गए ,मेरे झरने दो बार बह चुके थे और इस एक छुवन से ही मेरी अंगड़ाई निकल गई ,वो फिर से रस बरसाने की तैयारी में थे,लेकिन वो झरे नही ,वो बह रहे थे,और मैं मचल रही थी,अपने उस पहले अहसास में मरी जा रही थी,उनकी उंगलियों ने मेरे सुराख को खोज ही लिया वो उसे छू कर बस सहला ही रहे थे कि …..

दरवाजे में जोरो की दस्तक हुई ,ऐसे जैसे की कोई उसे तोड़ ही देना चाहता है,मिश्रा जी घबरा गए थे वो जल्दी से उठे और अपने कपड़े ठीक करने लगे ,

“कौन है????”

मिश्रा जी की आवाज में एक अजीब सा गुस्सा और नाराजगी थी,

“सर मैं हु जल्दी खोलिए “

ये उनका पर्सनल इन्फॉर्मर था,साथ ही उनका पर्सनल ड्राइवर अरुण कुमार ,

“क्या हो गया “

वो वही से चिल्लाए

“सर इमरजेंसी है….”

जब अरुण ने कहा तो सच में इमरजेंसी होगी,वो उठकर तेजी से दरवाजे की तरफ बड़े मैं भी जल्दी से उठाकर बाथरूम में घुस गई ,मेरी सांसे अभी भी तेज थी मैंने उसे सम्हाला और अपने कपड़े ठीक किये ,ब्रा तो फेक दिया गया था और उसे ढूंढने की मैंने जहमत भी नही की मैं साड़ी ठीक कर हल्के से बालो को सवार कर बाहर निकली ,बाहर मिश्रा जी एक सोफे में सर पकड़े बैठे थे,उनकी निगाह मुझपर गई ,अरुण की निगाह मुझपर गई ,मेरी निगाह मिश्रा जी पर थी ,मैं अपने नजरो से ही उन्हें पूछ लिया की क्या हो गया …

“नेहा और जूही का किडनैप हो गया है,उन्हें पता चल गया की वो इस मिशन में इन्वॉल्व थी “

मैं पत्थर की मूर्ति की तरह जम गई थी,

“किसने किया ये “

मैं रोना तो चाहती थी पर मेरे आंखों से आंसू गायब थे ,चहरा जड़वत हो गया था,

“काजल मैंने तुमसे कुछ बाते छुपाई है …………”

वो मेरी नजरो से नजर भी नही मिला पा रहे थे और मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था ……

चटाक एक जोरदार थप्पड़ मैंने मिश्रा जी के गालो पर लगाया ,लेकिन वो हिले भी नही,

“आप जानते थे की वो हमे आसानी से ट्रेस कर सकता है और फिर भी अपने हमे शेर के लिए किसी बकरी की तरह इस्तमाल किया ,आप तो बड़ी समाज सेवा की बात करते थे लेकिन आपने हमारा इस्तमाल अपने निजी स्वार्थ के लिए किया,मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नही थी मिश्रा जी ,मैं आपसे प्यार करती हु और अपने …”

“काजल मैं भी तुमसे प्यार करता हु ,लेकिन रोबर्टो ने जो मेरे साथ किया वो मैं नही भूल सकता,हा मैंने तुम्हारा इस्तमाल किया लेकिन क्या मैंने कोई भी जबरदस्ती तुम्हारे साथ की तुम लोग खुद ही इस मिशन का हिस्सा बने ,”

“हा हम खुद ही इसका हिस्सा बने थे लेकिन आपको हमें रोबर्टो के बारे में बताना चाहिए था,हमे तो हमेशा लगता था की हमने सभी माफिया को खत्म कर दिया है लेकिन आपने ना सिर्फ हमसे बल्कि पुलिस से भी ये बात छुपा कर रखी की असली माफिया तो रोबर्टो है,”

“मैंने तुमलोगो की सुरक्षा का हमेशा ही ध्यान रखा है काजल,मेरे आदमी मिशन के पूरा होने के बाद भी तुमपर नजर रखे थे,लेकिन ना जाने ये कैसे हो गया,वो तुमलोगो से बदला लेने के लिए बेताब है ,वो ना जाने क्या करेगा,.....तुम इससे दूर रहो अपने घर चले जाओ मैं नेहा और जूही को बचने की पूरी कोसिस करूँगा ,”

मेरे चहरे में एक व्यंग भरी मुस्कान आ गई ,

“अच्छा क्या करेंगे आप ???जानते हो कहा लेकर गए ???”

मिश्रा जी चुप थे

“मैं ढूंढ लूंगा काजल ,मैं पूरी ताकत लगा दूंगा,तुम आज ही यहां से निकलो “

“मैं कही नही जा रही हु मिश्रा जी ,अपने सिर्फ मुझे धोका नही दिया है बल्कि मेरी दोस्त को भी मुसिबित में डाला है,मैं आपसे जितना प्यार करती हु उससे कही ज्यादा मैं नेहा से प्यार करती हु,मैं उसे ढूंढूंगी …”

वो मुझे आश्चर्य से देखने लगे

“बात फैला दो की वो 2 नही 3 लडकिया थे और तीसरी अभी भी आपके साथ है,इसी शहर में वो मुझे पकड़ने को सभी कुछ करेंगे और मैं उनके पकड़ में भी आ जाऊंगी ,आप मेरे पीछे उनतक पहुच सकते है “

‘तुम सोच नही सकती काजल की वो इतना खतरनाक है ,अगर तुम उसके हाथ लग गई तो ….ना जाने वो तुम्हारे साथ क्या करेगा ,”

“मुझे इसकी चिंता नही है “

मिश्रा जी ने कुछ देर मुझे देखा और फिर

“ठीक है ,तुम्हारे शरीर में एक डिवाइस लगा देते है जिससे तुम्हे हम ट्रेक कर सकेंगे “मिश्रा जी इतना कहते हुए वहां से निकल गए ….

मुझे अब भी आश्चर्य हो रहा था की मिश्रा जी ने मुझे रोका क्यो नही ,वो इतनी जल्दी मान जाएंगे मुझे पता नही था,

‘ह्म्म्म उन्हें मुझसे ज्यादा फिक्र उस रोबर्टो को पकड़ने की है ,अपनी बीवी को तो नही बचा पाया अब उसका कारोबार तबाह करेगा ,वो भी हमे बली का बकरा बनके ‘मैंने मन में सोचा और मिश्रा जी के लिए मेरे मन में एक घृणा के भाव आ गए ,मैं सोचती रही सोचती रही मैं कुछ भी डिसाइड नही कर पा रही थी की आखिर करना क्या है…..

मेरे बालो में एक छोटा सा डिवाइस फिट के दिया गया था,मैं सामान्य तौर से ही जीवन जी रही थी,मुझे मेरे आसपास पुलिस वाले दिख जाते जो की सादे कपड़ो में थे ,मुझे मिश्रा पर गुस्सा आ रहा था ,ये पोलिस वाले चहरे से पहचान में आ रहे थे ,कोई भी इन्हें दूर से पहचान सकता था,रोबर्टो इतना बड़ा माफिया इतना चुतिया तो नही होगा की वो कदकाठी और बालो की स्टाइल से इतना पहचान ना सके की ये ट्रेंड लोग है,5 दिन बीत चुके थे और मेरे अंदर एक आग सी फैल रही थी मुझे नेहा से मिलना था पता नही उसका क्या हाल किया गया होगा ,मुझे इस बात की कोई भी फिकर नही थी की पकड़े जाने पर मेरे साथ क्या होगा ,आखिर वो दिन आया मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज के लिए निकली दो दिनों से अपने आस पास उन पुलिस वालो को नही पाकर मैं सतर्क रहती थी ,बाकी सभी गायब थे,आखिर ये गए कहा ,तभी एक गाड़ी आकर रुकी और मुझे उसके अंदर खिंच लिया गया,अंदर जाते ही मुझे एक इंजेक्शन लगा दिया गया और मैं बेहोश हो गई ……….

जब मुझे होश आया तो मैंने खुद को एक बड़े से कमरे में पाया ,एक साधारण सा कमरा था,वहां कुछ लोग मुझे खड़े दिखे ,मैं हल्के से अपनी आंखे खोली ,कुछ आवाजे मुझे सुनाई दे रही थी ,किसी के जूतों की आवाज ,

“इसे ड्रग्स दे दिया तुमने “

“जी सर “

“और तलाशी ली “

“जी सर एक जीपीएस डिवाइस इसके बालो में लगा हुआ था ,उस वही फेक दिया हमने “

“साला मिश्रा अपने को बहुत बड़ा तीस मार खान समझता है,इस लड़की के बालो में फंसा कर जीपीएस डिवाइस लगाया था,सोचा होगा की सिक्योरिटी हटा देता हु जैसे ही किडनैप करेंगे तो उसे पता चल ही जाएगा ,हमे चुतिया समझ के रखा है,चलो लड़की को लेकर चलो रोबर्टो सर के पास “

वो लोग मुझे उठाकर ले जाने लगे मैं अब भी अपनी आंखे बन्द ही रखी थी ,हल्के से आंखे खोल कर मैं उस जगह को देखने की कोसीस कर रही थी वो एक जंगल था,सच में वो एक जंगल था,या कोई बगीचे जैसी जगह ,कोई फार्म हाउस होगा कहा लेकर आ गए थे ये लोग मुझे ,उन्होंने मुझे उस रूम से निकल कर एक बंगले जैसे जगह में ले जा रहे थे ,वहां अच्छी सजावट थी जमीन पर कालीन बिछे थे ,और शायद कुछ लोग भी थे लेकिन आवाज नही कर रहे थे,

“काजल “

मुझे पहली आवाज सुनाई दी ,इस आवाज को मैं अच्छे से पहचानती थी इसी के कारण तो मैं यहां आयी थी ,वो नेहा की आवाज थी ,

मैं उसे सुनकर भी अपनी आंखे नही खोली मुझे दो लोगो ने पकड़ रखा था,उनमे से एक बड़ा कमीना सा था ,थोड़ी ही दूरी लाने तक ना जाने कितने बार वो मेरे बड़े बड़े बूब्स से खेल चुका था ,कभी उसे दबाता तो कभी सहलाता,लेकिन मैं तो बेहोश थी ना…..

“इस पर पानी डालो और उठाओ इसे “

एक विदेशी आवाज मेरे कानो में पड़ी,और मेरे मुह में दो चार ग्लास पानी के पड़े मैंने जगाने की एक्टिंग की और चारो तरफ देखा मुझे जूही और नेहा दिखाई दिए वो बिल्कुल ठीक ही दिख रही थी बस उनकी आंखे लाल सी थी ,थोड़ी बन्द सी जैसे बहुत नशे में बैठी हो ,शायद ड्रग्स का कमाल था,कुछ लोग और वहां खड़े थे जो बॉडीगार्ड टाइप लग रहे थे,नेहा और जूही रोबर्टो के आजु बाजू में एक सोफे पर बैठे थे जैसे की वो उनकी दसिया हो ,इतने दिनों के मन के ऊहापोह में मैंने एक बात निश्चित कर ली थी वो था मिश्रा से बदला लेना.और नेहा और जूही को बचाना और इस माफिया की मा बहन एक करना,

इन सब काम को करने के लिए मुझे अपने मन को पहले से तैयार रखना था,और मैं इतने दिनों से यही कर रही थी ,मेरी नजर जैसे ही रोबर्टो पर पड़ी मैं घबराने की जगह बस मुस्कुरा दी ,जिसे देख कर वहां उपस्थित सभी लोग दंग हो गए ,

“आप ही रोबर्टो हो आपके बारे में बहुत बताया है उस मादरचोद मिश्रा ने मुझे ,कैसी है मेरी जान “

मैं नेहा की तरफ बढ़ी ,नेहा खड़ी हो गई थी ,मैं कुछ ही दूर चल कर ही गिरने को हुई मुझे अब समझ आया की मेरे अंदर कितनी सुस्ती है ,मैं इतनी कैसे थक गई हु ,मेरे जीभ भी बोलते समय थोड़े लड़खड़ा रहे थे….

नेहा खड़ी हो कर मुझे सम्हालती है ,

“तुझे भी इन्होंने ड्रग्स दे दिया ,शैतान कही के इस लड़की की क्या गलती है,जो करना है हमारे साथ करो इसे छोड़ दो ये बहुत मासूम है प्लीज् …”

नेहा के आंसू निकल गए वो रो ही पड़ी ,

“मासूम है????यानी कली फूल नही बनी है ,सर ये तो आपके लिए अच्छा तोहफा है मिश्रा का ,इन रंडियों के तो छेद में कुछ भी डालो सलियो को फर्क नही पड़ता,इसे भेजकर अच्छा किया मिश्रा ने “

एक आदमी ने कहा और बाकी हँसने लगे,

“वो तो है .बहुत सुंदर है ये इसे हम अपनी पर्सनल मिस्ट्रेस बनाएंगे “रोबर्टो की आवाज से नेहा की आंखे और भी पनिया गई ,उसने मुझे जमीन में बिठा दिया और खुद भी मेरे साथ बैठ गई,मुझमे इतनी ताकत तो थी मैं कुछ बोल सकती असल में मेरे शरीर में ये ड्रग्स पहली बार गया था और मुझे कोई सेक्सुअल फीलिंग भी नही थी इसलिए मैं इतनी सुस्त हो गई थी,जो नेहा की समझ में आ रहा था ,

 
“जो करना है कर लेना इसी लिए तो यहां आयी हु लेकिन पहले मुझे उस मिश्रा से बदला लेना है ,रोबर्टो मैं तेरी पर्सनल रांड बन जाऊंगी खुसी खुसी बनूंगी लेकिन मेरी बस एक ही ख्वाहिश है तू मुझे उस मिश्रा के सामने चोदेगा ,उसने मेरा दिल तोड़ा है मैं उससे प्यार करती थी………”

मैं रोने लगी और रोबर्टो को कुछ कुछ समझ आने लगा ,वंहा एक शांति छा गई थी ,

“तुम्हे क्या लगता है की तेरे चमचों को वो डिवाइस खोजने पर मिली थी ,मैंने जानबूझकर उसे बाहर कर दिया था ताकि वो तुमलोगो की नजर में आ सके ,मैं तो चाहती ही थी तुम मुझे पकड़ लो और जो काम मिश्रा नही कर पाया वो तुम करो और वो भी मिश्रा के सामने ,मेरा सील तोड़ने का काम,मिश्रा मुझसे प्यार करता है और उसे मुझे जलाना है,तुम उसे ये करके दिखा दो की जिसे भी वो अपनी समझता है असल में वो तुम्हारी है,जैसे उसकी बीवी और अब मैं ….करोगे ना ….”

रोबर्टो के चहरे में एक शैतानी मुस्कान खिल गई ,जैसे उसे कोई बहुत बड़ा खजाना मिल गया हो …

“बहुत सताया है मुझे मिश्रा ने ,मेरा पूरा कारोबार ही खत्म कर दिया ,अब मैं उसके ही सामने उसकी रांड को चोदकर अपनी रांड बनाऊंगा ,बहुत खुस रहा होगा की तेरी जवानी उसे मिल रही है ,अब मैं उसे दिखाऊंगा की जो भी उसने पसंद करेगा उसे मैं उससे छीन लूंगा ….”रोबर्टो की शैतानी हँसी फिर से गूंज गई ,नेहा के चहरे में डर था लेकिन मेरे चहरे में नही मेरे चहरे में थी बस मुस्कान ……….

“रोबर्टो तुम्हे शायद पता नही की मैं कौन हु ,अब मैं पहले वाला मिश्रा नही रहा ,मैं एक आईएएस अधिकारी हु ,पुलिश तुम्हे कुत्तों की तरह ढूंढ रही होगी तुम्हारा भारत से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा,बेहतर ये ही होगा की तुम अपने को पोलिस के हवाले कर दो और लड़कियों को छोड़ दो “

मिश्रा जी बहुत गुस्से में चिल्ला रहे थे,उनके हाथ ख़ुर्शी से बंधे हुए थे ,हमे उठाये बस दो ही दिन हुए थे की मिश्रा जी को भी किडनैप कर लिया गया था,रोबर्टो को भी पता था की शहर,क्या पूरे देश की पोलिस अब उसके पीछे होगी ,लेकिन सच में ये माफिया जैसे पर्सनाल्टी का मालिक था,साले ने मुझे पाने के लिए इतना बड़ा कदम उठा दिया,मैंने तो उसे फसाने के लिए कहा था,हा मेरी भी यही इच्छा थी क्योकि यहां से भागना तो इम्पॉसिबल ही लग रहा था,तो मैंने एक चाल चल दी,लेकिन रोबर्टो साला बहुत बहादुर निकला वो सच में मिश्रा को मेरे सामने बैठा दिया,पिछले दो दिनों से मुझे सेक्स ड्रग्स की थोड़ी थोड़ी डोस दी जा रही थी,ताकि मैं मर ही ना जाऊ,लेकिन मेरे शरीर भी इसके लिए अडॉप्ट होने लगे ,आज मुझे बड़ा डोस दिया जाना था,वो भी मिश्रा जी के सामने,रोबर्टो और मिश्रा की दुश्मनी क्या थी इससे मुझे कोई भी मतलब नही था लेकिन अब रोबर्टो मिश्रा के दिल को चुरा चुरा करना चाहता था,मैं मिश्रा और रोबर्टो के सामने सर झुकाए बैठी थी,दिल की धड़कने बड़ी हुई थी,हाल में एक बड़ा सा बिस्तर लगाया गया था,जिसमे मेरे सालो के सम्हाले हुए कौमार्य को एक इटालियन ड्रग्स माफिया लूटने वाला था,गुलाब के पंखुड़ियों से उसे ऐसे सजाया गया था जैसे की मेरी सुहागरात हो,मिश्रा को यहां लाये 2 घंटे से ज्यादा हो गए थे,लेकिन अभी वो 10 मिनट पहले ही होशं में आया था ,उसे नही पता था की ये सब क्यो किया जा रहा है ,पर आशंकाओ से उसके चहरे में एक अजीब सा दर्द उठ रहा था,करीब एक घंटे पहले ही नेहा ने मुझे रोते हुए एक क्रीम,मेरे योनि में लगाने को दी थी, वो इस दुख से मरी जा रही थी की उसके कारण मुझे ये सब सहना पड़ रहा है ,लेकिन मैंने उसे कहा की आज नही तो कल ये करना ही था,और ड्रग्स के सरूर में मुझे मजा ही आएगा,फिर टेंसन कैसा,वो मुझे एक अजीब निगाहों से देख रही थी जैसे की पूछ रही हो की तुझे हो क्या गया है,लेकिन पता नही क्यो मुझे डर नही लग रहा था,मैं तो एक उमंग में थी मिश्रा के साथ हुए मेरे पहले प्रसंग की याद कर ही मेरे योनि से एक धार बह जाती थी,शायद ये उस ड्र्ग्स का कमाल था या की मेरी उफनती जवानी का,

हा ये गलत था,लेकिन ये मेरा बलात्कार नही था,मैं एक संस्कारी घर की बेटी थी जिसने कभी भी अपने मर्यादा को भंग नही किया,शायद यही वो वजह थी जिसके कारण मेर मन में एक ग्लानि का भाव आ रहा था,लेकिन अगले ही पल मेरे सामने मिश्रा के चहरे के तस्वीर आ जाती और मैं रोबर्टो से अपने यौवन को मिश्रा के सामने लुटवाना चाहती ,मैं चाहती थी की मिश्रा को उस दर्द का अहसास हो जो मुझे हुआ था,नेहा को हुआ था,जलील होने का दर्द………….

मेरी जवानी आने से लेकर आज तक अगर मैंने किसी पर जान से ज्यादा भरोसा किया था वो मिश्रा जी ही थे,मैंने उनमे ना जाने क्या क्या देखा था,जब वो शहर में मेरे पूरे पढ़ाई की जिम्मेदारी लेकर घर वालो को मनाए थे तो मुझे लगा की ये मेरे लिए भगवान है,जब वो मुझे एक अजनबी निगाहों से देखते और मेरे तन मन में एक उमंग फैल जाती तो लगता था की ये मेरे जान है,जब वो मेरे हर तकलीफ में मेरे साथ होते ,जब वो मेरा केयर करते तो लगता की मैं इनकी ही हो जाऊ…….

मेरे उम्र की उनकी बेटी भी थी लेकिन फिर भी मैंने उन्हें अपना सब देना चाहा,शायद दुनिया से लड़कर मैं उनसे शादी भी कर लेती ,लेकिन उन्होंने क्या किया,उन्होंने सोचे समझे प्लान के तहत मुझे फसाया,वो किसी भी लड़की को यहां भेज सकते थे जो की ट्रेंड हो लेकिन उन्होंने अपने सफलता के लिए और अपने बदले को पूरा करने के लिए सबको धोखे में रखा,रोबर्टो का नाम कही भी नही लिया गया ,आखिर वो चाहते क्या थे,वो चाहते थे की रोबर्टो का नाम सुनकर कोई उनसे ये ना कह दे की ये तो वही है ना जिसने आपकी बीबी से शादी की है,और आप अपना बदला लेने के लिए ये सब कर रहे है,वो इस मिशन से खुद को अलग नही करना चाहते थे,उन्होंने नए लोगो को इतने खतरनाक मिशन में लगाया क्योकि हमे स्पॉट ना किया जा सके ,वो इस कदर अपने फितूर में पागल थे की उन्होंने 3 लड़कियों की जिंदगी और इज्जत की फिक्र ही नही की ,सजा तो उन्हें भी मिलनी चाहिए थी,

हा मैंने उनसे प्यार करती थी,शायद बहुत प्यार ,शायद दिल के किसी कोने से मैं उन्हें अपना मान चुकी थी,शायद जब रोबर्टो मेरी जवानी लूटेगा तो आंखे बंद करने पर मुझे मिश्रा जी ही दिखते,लेकिन मिश्रा जी देख रहे होंगे...मैंने उनकी आंखों में भी अपने लिए प्यार देखा था ,लेकिन वो उनका फितूर उनके प्यार पर हावी हो गया,वो तो सालो से मुझे पाना चाहते थे,और आज उनके ही सामने मुझे कोई दूसरा …...ये चोट होगी उनके आत्मसम्मान पर यही रोबर्टो की इच्छा थी,और अब यही मेरी इच्छा थी………..

 
मैं सलवार पहने बैठी थी जिसे आज ही मेरे लिए लाया गया था मेरी नजर जमीन पर थी ,पता नही क्यो पर मैं मिश्रा जी से नजर नही मिला पा रही थी,मेरे पास एक आदमी आकर बैठा मेरे हाथो को पकड़ कर रुई से सहलाने लगा ,मुझे समझ आ गया था की वो मुझे इंजेनक्शन देने वाला था,जूही और नेहा दूसरे कमरे में थे,मैं नही चाहती थी की वो ये सब देखे,रोबर्टो आष्चर्यजनक रूप से मेरी बात मान रहा था,अब वो बिस्तर में बैठा था,वो हाल बहुत बड़ा था और चारो ओर उसके कुछ 10 लोग भी खड़े थे,शायद इन सबके सामने ही मुझे नंगा किया जाना था,लेकिन मुझे तो बस मिश्रा जी से शर्म आ रही थी,वो इंजेनक्शन मेरे अंदर गया ,ये उसका फूल डोस था,5 मिनट के अंदर ही मेरी आंखे लाल हो गई ,पूरा शरीर गर्म हो गया,लगा की मैं मतवाली हो रही हु,मेरे चहरे में एक अजीब सी मुस्कान आ गई ,कुछ तो मैं होश में थी और कुछ उस नशे के गिरफ्त में ,मैंने पहली बार अपनी आंखे उठाई सामने मिश्रा जी मुझे घूर रहे थे,जितना उन्हें चिल्लाना था वो उतना चिल्ला चुके थे,मेरे होठो में मुस्कान देख कर उनके आंखों में दहसत आ गई ,

मैं इठलाती हुई खड़ी हुई देखा रोबर्टो भी मुस्कुरा रहा है,मैं मिश्रा जी की तरफ जाने लगी ….

“मिश्रा जी ….सालो से कहना चाहती थी आपसे आज कह ही देती हु ,I LOVE YOU…..”

मैं जाकर मिश्रा जी के गालो में एक किस किया,

“काजल तुम ये क्या कर रही हो,प्लीज् ...समझो बात को तुम्हे ड्रग्स दिया गया है,सम्हालो खुद को आज नही सम्हाल पाई तो इससे उबरना मुश्किल हो जाएगा तुम्हारे लिए”

मैं मिश्रा जी के आंखों में देखने लगी,उन्हें मेरी चिंता तो थी,लेकिन मेरे होठो की मुस्कान और बढ़ गई

“पहले बोलो की आप भी मुझसे प्यार करते हो “

मैं एक बच्ची की तरह उनके पास जाकर उनका गाल खिंचने लगी”

“मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु काजल प्लीज् इसे अपने पास मत आने दो …”उनके आंखों से आंसुओ के दो बून्द गिर गए और एक पल को ही सही मेरा दिल भी उनके लिए पिघल गया लेकिन शायद रोबर्टो को ये बहुत पसंद आया ,वो मेरा हाथ खिंच कर मुझे अपने गोद में बिठा लिया…

बिस्तर और मिश्रा जी के बीच थोड़ी ही दूरी थी,

रोबर्टो ने मेरे सफेद कमीज के ऊपर से ही अपनी उंगलियों को मेरे निप्पलों पर गोल गोल घुमाया ,मुझे एक करेंट सा लगा,

“देख मिश्रा ये लड़की कैसे मेरे छूने से ही मचल रही है,इसे भी वैसे ही चोदउँगा जैसे तेरी बीवी को चोदा था,ये भी मेरी दीवानी हो जाएगी ,तू अब मान ले की तू एक नामर्द है”उसकी शैतानी हँसी पूरे कमरे में गूंज गई

“इसे भी अपने साथ इटली ले जाऊंगा और इसे अपनी रखैल बना कर रखूंगा,इसे भी अपने बच्चों की मा बनाऊंगा जैसे की तेरी बीवी को बनाया था,”

वो फिर हंसा ,मिश्रा जी के आंखों में आंसू आ गए जाने कितने दिनों का वो दर्द दबा कर बैठे थे वो एक बारी पूरे ताकत से छूटने की कोसीस किये लेकिन छूट नही पाए,वो अपनी नजर झुकाकर बैठ गए ,

“नही मिश्रा तुझे तो देखना ही होगा,”

उसने एक लड़के को बुलाया ,

“इसका सर झुकने नही देना,और ना ही आंखे बंद करने इसे देखने दो की ये जिससे भी प्यार करता है उसे मैं किसे इससे छीन लेता हु …”

मिश्रा जी की मजबूरी उनके चहरे से साफ झलक रही थी,

रोबर्टो की उंगलिया जैसे जैसे मुझे हल्के हल्के सहला रही थी मेरे तन में एक अजीब सी आग बढ़ रही थी,शरीर जलने सा लगा था,होठ सुख रहे थे,आंखे किसी अनजाने नशे में बन्द हो रही थी,कुछ भी समझने के हालात अब नही रहे थे,मैं नदी की धार में बहना चाहती थी,किसी उम्मीद के बगैर की ये धार मुझे कहा पहुचायेगी मैं रास्ते का ही पूरा मजा लेना चाहती थी,और इसलिए मैंने आंखे बंद कर ली,मैं उस अहसास में खोते चली गई,मेरे उन्नत उजोरो की चोटियों को रोबर्टो सहला रहा था,मेरे निप्पल अपने आप ही कड़े होते जा रहे थे,ऐसे तो ये अहसास मुझे पहले भी हो चुका था लेकिन इस बार बात अलग थी,मैं ड्रग्स के नशे में भी थी,और हल्की से हल्की छुवन के प्रति बेहद संवेदन शील हो गई थी,रोबर्टो भी जैसे इस बात को अच्छे से जानता था,वो कोई भी जल्दबाजी करने के मूड में नही था वो बड़े आराम से मेरे जिस्म से खेल रहा था,

उसके उंगलिया अब मेरे गले तक पहुची फिर गालो को सहलाते हुए मेरे होठो तक मेरे होठ कप रहे थे,किसी अनजाने से सुख में खोये हुए ,उसने मेरे होठो के दोनो पोरो के बीच अपनी एक उंगली घुसा दी,मैं उसे चूसने लगी मेरे आंख अब भी बंद थी,और मैं उसके गोद में अपने को समर्पित कर चुकी थी,उसके एक हाथ की हथेली ने मेरे उरोजों को पूरे ताकत से मसला ,

“आह आह मिश्रा जी “

मेरे मुह से निकली इस सिसकारी से मिश्रा जी भी चौके जरूर होंगे लेकिन रोबर्टो के होठो में एक मुस्कान सी आ गई होगी,वो जरूर मिश्रा जी को देखकर मुस्कुराया होगा,और मिश्रा जी के आंखों से कुछ बून्द टपक ही गए होंगे,

वो मेरे उरोजों को फिर से हल्के हल्के दबाने लगा ,मैं नशे में और भी मस्त होने लगी मेरे होठो से सिसकारियां रुक ही नही रही थी,की उसने अपनी उंगली मेरे होठो से निकाली और अपने होठो को मेरे होठो से मिला दिया,दोनो ही होठ मिलकर गीले हो गए थे,एक दूसरे के लार से भीग चुके थे,जब उनके जीभ की छुवन मेरे जीभ पर पड़ी तो मैंने भी अपने जीभ को उससे रगड़ दिया………..

रोबर्टो ने मुझे अपने से अलग कर बिस्तर में लिटा दिया मैं उससे अलग नही होना चाहती थी ,मैं बार बार ही उसके होठो पर अपने होठो को मिलाने की कोसीसे करने लगी ,लेकिन वो मुझे बिस्तर के बीचो बीच लिटा कर ही माना,मेरे बाल अब खुले हुई बिखरे थे,सांसो के तेज चलने से सीना ऊपर नीचे हो रहा था,मेरी टांगे बिस्तर में पसरी हुई बस किसी का रास्ता जोह रही थी,मेरे हाथ फैले हुए किसी की राह देख रहे थे,कोई आ जाए तो उसे बांहो में भर लू,रोबर्टो ने कुछ गुलाब की पंखुड़ियां मेरे गालो पर फेक दी ,उसके कोमल अहसास से मेरी आंखे आधी खुली मैंने रोबर्टो को देखा और हल्के से शर्मा के हँस पड़ी ,वो मेरे कानो के पास अपने होठो को लाया और उसने हल्के से फूक मार दी ,

“आह ह्म्म्म “मैं एक बार मचल सी गई मैंने अपना चहरा दूसरी ओर कर लिया रोबर्टो मेरे चहरे को अपनी ओर कर फिर से मेरे गालो में एक पप्पी ले ली ,

“तुम बहुत खूबसूरत हो काजल ,आज हमारी सुहागरात है,अपने पति को प्यार नही करोगी “

वो मेरे कानो में फुसफुसाया ,मैं जैसे शर्म से डूबी जा रही थी,मुझे ये क्या हो गया था,मैं शर्मा रही थी लेकिन चाहती थी की वो अपनी मनमानी करे और मुझे रौंद कर रख दे ,मुझे मसले ,मुझ पर चढ़ जाय ,

लेकिन मैंने ना में सर हिलाया,मेरे होठो पर मुस्कान थी लेकिन आंखे नशे में आधे खुले हुए थे,नशा वासना का था की ड्रग्स का पता नही लेकिन सच में बहुत मजा आ रहा था,उसकी आवाज में मुझे और भी मदहोश कर दिया था,रोबर्टो अब मेरे ऊपर चढ़ गया और

“तुम मुझे जान ही कहा करो मेरा नाम अब से मत लेना ,अपने पति का नाम नही लेते “

वो मेरे ऊपर था,और मैंने बिना कुछ कहे उसे अपने बांहो के घेरे में बांध लिया,जैसे की मैंने उसे अपनी स्वीकृति दे दी हो,

वो मेरी नजाकत भरे व्यवहार से जैसे मेरा दीवाना हुआ जा रहा था,वो मेरी ओर झपटा मेरे होठो को अपने होठो से भरकर चूसने लगा,इसबार तो उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी,वो जैसे उसे खा ही जाना चाहता था,मैं भी पागलो की तरह उसे चूसे जा रही थी,उसका ताना हुआ लिंग मेरे जांघो के बीच रगड़ खा रहा था और उसने एक बार जोर से उसे जानबूझ कर रगड़ा ,मेरे मुह से एक जोर की सिसकारी निकल गई

“ओओह ह ह जान….”मैंने उसे जोरो से कस लिया

वो अपने हाथो का जादू दिखाने लगा मेरे पूरे शरीर में उसके हाथ बिना किसी बाधा के घूम रहे थे,वो मेरी जांघो को सहला रहा था,और उसका था मेरी कमीज के अंदर जाने लगा ,वो मेरे नंगे पेट को सहलाने लगी ,मैंने अपनी योनि में एक जोरो को खजली का अहसास किया और मेरे कमर हवा में उचकने लगे ,जो की उसकी कमर से टकराकर फिर से बिस्तर में आ जाते उसे भी जैसे इसका अहसास हो गया था,वो मेरे कमीज को निकल कर फेक देता है,मेरी भारी चुचिया जो की मेरे ब्रा में मश्किल से कैद थे वो उसके हाथो में आकर बहुत खुस लग रहे थे,मेरी आंखे दर्द में भी मिलने वाले मजे से अपने आंसू छोड़ रही थी,उसने देर ना करते हुए मेरी सलवार को भी निकाल फेक ,और अपने को सभी कपड़ो से आजाद किया ,मेरे बचे दो कपड़ो को भी निकलने में देरी नही की ,मेरी चिकनी योनि जिससे बहुत देर से पानी बह रहा था और जो क्रीम की मालिस के कारण और भी चिकना हो गया था,वो रोबर्टो के उंगलियों का अहसास करते ही एक जोर का धार छोड़ दिया ,मैं जैसे थक कर गिरी मेरे हलक से जोर की चीख निकली ……………

रोबर्टो ने बड़े प्यार से मुझे देखा और मेरे ऊपर आ कर फिर से मुझे चूमना शुरू कर दिया ,जब मैं फिर से उसके किस का रिप्लाई देने लगी तो वो अपने कड़े लिंग को मेरी योनि के ऊपर रगड़ने लगा ,मेरी योनि के दोनो पोरो के बीच जब उसके लिंग का अहसास मुझे हुआ तो मेरे पूरे सरीर में एक करेंट सा लगा ,मैंने अपने कमर को उछाला लेकिन मेरी योनि का छेद अभी इतना बड़ा नही हुआ था उसका लिंग फिसल गया ,वो जोरो से हंसा लेकिन मैं मजाक के मूड में नही थी,जैसे बहुत सी चींटियां एक साथ मेरी योनि को काट रही हो और वो खुजली बहुत ही मीठी थी ,उसे बुझाने के लिए मुझे उसे किसी चीज से उसे जोरो से रागड़ने का मन हो रहा था,रोबर्टो बिना कुछ कहे अपने लिंग को अपने हाथो से पकड़कर मेरे योनि के मुख पर लाया और धीरे धीरे उसे अंदर करने लगा,वो नेहा के दिए क्रीम का असर था या मेरे योनि से रिस रहे चिपचिपे तरल पदार्थ का लेकिन उसका सुपाड़ा आसानी से मेरे अंदर आ गया ,जैसे कोई चीज मेरे अंदर टूट गई हो ,मैं चिल्लाई ,लेकिन वो दर्द बड़ा ही मजेदार था,

“आह जान आह ….”

दोनो की ही सांसे भारी थी और दोनो ही कुछ देर के लिए रुक गए थे,,,

 
रोबर्टो मेरे होठो को चूसता हुआ जोर से धक्का लगा देता है ,और उसका पूरा लिंग मेरे अंदर समा गया…

“ओ ओ ओ ह ओह ओह आह आह आह जाआआननन”

जैसे उसका लिंग किसी बहुत ही सकरी सी नली में धस गया हो वो थोड़ी भी हलचल नही कर पा रहा था ,रोबर्टो ने जोरो से उसे खिंचा और मैं फिर से जोरो से चीख पड़ी ,फिर उसने पूरे ताकत से उसे अंदर किया मैं फिर से चीखी ,लेकिन थोड़ी ही डरे में चीखों ने सिसकियों का स्थान ले लिया था मैं बस आह आह करने लगी थी,

मेरे अंदर जब उसका लिंग जाता तो मैं मेरे भगसिसन को रगड़ जाता और मेरे पूरे शरीर में उस अहसास से एक मजे का जन्म होता ,मैं जैसे इसे कभी भी खत्म नही करना चाहते थी ,लेकिन मैं बार बार इस सुखद अहसास से टूट जाती और मेरे योनि से एक जोरो की धार फुट पड़ती ये ना जाने कितनी बात हुआ हर बार मैं रोबर्टो के कंधे पर अपने दांतो को गड़ा देती थी,कभी वो मेरे निप्पलों को खा जाता कभी मैं अपने नाखूनों को उसके पीठ गड़ा कर उसे चिर देती कभी वो मेरे कंधों पर अपने दांतो से निशान बना देता ,वो भी पूरी ताकत लगा रहा था और मैं भी ,लेकिन दोनो ही इंसान ही थे ,उसने भी जोरो की धार मेरे योनि में छोड़ दी ,मुझे लगा जैसे किसी ने तपते तवे में पानी की एक बाल्टी उड़ेल दी हो ,मैं जोर से झटके खाकर शांत हो गई वो भी मेरे ऊपर मुर्दो सा गिर गया,मैं उनके बालो को अपने हाथो से सहलाने लगी,मुझे पहली बार ये अहसास हुआ की किसी को अपना पूरा अस्तित्व सौप देना क्या होता है,और उसका मजा क्या होता है,मुझे सचमे ऐसा लगा की जो शख्स मेरे साथ सोया है वही मेरा सबकुछ है और पूरी दुनिया जैसे कुछ पालो के लिए मेरे लिए खत्म हो गई थी,

मेरी आंखे पहली बार खुली और मिश्रा जी पर मेरी नजर पड़ी उनका कपड़ा खुला हुआ था उन्हें नंगा कर दिया गया था ,ये कब हुआ मुझे पता भी नही चला वो अब भी बंधे थे लेकिन उनका लिंग पूरी तरह से अकड़ा हुआ था,वो मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे किसी बच्चे की टॉफी छीनकर कोई उसके ही सामने खा रहा हो ,मेरे चहरे पर मुस्कान आ गई जैसे मैं उन्हें और भी चिढ़ाना चाहती थी,रोबर्टो की वीर्य की धार मेरे योनि से बाहर बह रही थी जो मुझे बहुत सुकून दे रही थी ,मैं उसे सहलाने लगी और उसे चूमने लगी,

थोड़ी देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे ,अब मेरा नशा खत्म हो चुका था,शायद हम नींद में चले गए थे,जब मेरी आंखे खुली तो वो मेरे ऊपर ही सोया था,मैं भी उसे उठाना नही चाहती थी, मुझे कुछ आभास हुआ ,कमरे में लोग भी बोर से खड़े थे बेचारे करते भी क्या ,ये सब देखकर भी कुछ कर नही पा रहे थे,मेरा दिमाग अचानक ही किसी घटना को परख गया था,नेहा और जूही जिस कमरे में थे मैंने वहां नजर दौड़ाई मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ….

रोबर्टो भी उठ चुका था ,वो उठाकर बैठा,मैंने भी अपने कपड़े पहनने शुरू किये उसने मुझे मना किया लेकिन मैंने उसे कहा की अभी नही जब आप और मैं रहेंगे तो कभी कपड़े नही पहनूँगी वो ऐसे खुस हो रहा था जैसे की मैं सच में उसकी नई पत्नी हु ,उसके वीर्य के साथ ही कुछ खून के धब्बे भी बिस्तर में पड़ चुके थे,

“मजा आया की नही काजल “

“बहुत मजा आया ,ये मैंने पहले क्यो नही किया …”मैं मदहोशी में बोली

“अब तो रोज होगा फिक्र मत करो “वो भी मुस्कुराया

“एक बात बोलू “

“हा “

“आपकी मेरे जितनी एक बेटी भी है ना “

वो मुझे अजीब निगाहों से देखने लगा

“हा क्यो “

“मैं कसम खाती हु की उसे भी ऐसे ही चुड़वाऊंगी “मैं जोरो से हँसी उसके चहरे में आयी पूरी खुसी जाती रही

“मादरचोद “उसने हाथ उठाया ही था की दरवाजे के टूटने की आवाज आयी ,नेहा और जूही जिस कमरे में थे वहां से गैस के गोले फेके गए,और धुवा पूरे कमरे में फैलने गया,गालिया चलने की आवाजे आने लगी ….रोबर्टो ने मुझे देखा और वहां से भागने लगा …………...

चारो तरफ अफरा तफरी मची थी और गोलियो की आवाजे आ रही थी,मैंने किसी तरह मिश्रा जी को खोला और उनके इशारे में हमे जगह दी गई लेकिन निकले किधर से ये ही समझ नही आ रहा था,अभी तक नेहा और जूही का कोई भी पता नही लग पाया था,वो एक तरफ फंस गए थे ,वही दोनो ओर से गोलियां चलने लगी,अचानक ही हमे एक हेलीकाफ्टर की आवाज सुनाई दी ,उस घने जंगल में ये हेलीकॉप्टर कहा से आया और कहा था,ऐसे मुझे कैसे पता होता,मैं तो एक रूम से बाहर नही गई थी,जब वो हमे नजर आया तब तक वो बहुत ऊपर जा चुका था,वहां खड़े पोलिस वालो ने तुरंत फोन करना शुरू कर दिया,रोबर्टो उसमें बैठा हमारे तरफ हाथ हिला रहा था,लेकिन हमारी आंखे तब चौड़ी हो गई जब जूही और नेहा भी उसके साथ थे,उनकी हालत बदहवास थी ,उसने उन्हें रस्सियों से बांध रखा था और वो हेलीकॉप्टर से बंधे झूल रहे थे,रोबर्टो के चहरे पर कमीनी मुस्कान आयी ,उसने अपने आंखों के पास दो उंगलिया करके मुझे देख लेने का इशारा किया और पहले जूही फिर नेहा की रस्सियों को कांट दिया,दोनो ही जमीन पर गीर गए,मेरे हलक से एक चीख निकली जिसने भी ये मंजर देखा वो चीख पड़ा,बचाव दस्ता जल्दी से उस ओर मुड़ा जहा उनके गिरने की आशंका थी,रोबर्टो को लोग जिन्हें उसने शायद मरने के लिए ही रखा था वो ज्यादा देर तक नही टिक पाए,जंगलो को छान मारा गया जूही एक पेट में फसी मिली लेकिन नेहा का कही पता नही चला,एक्सपर्ट्स ने हवा की दिशा और हेलीकॉप्टर की दिशा और जूही के मिलने की जगह,और जूही और नेहा को गिराने के बीच के समय के अंतर से जो डेटा निकला उससे यही पता चला की नेहा उस झरने में गिर गई होगी ,लेकिन बॉडी का कही भी पता नही चला ,नदी के साथ साथ बहुत खोज के महीनों तक चली लेकिन फिर भी कोई परिणाम नही ,वो नदी जाकर बांग्लादेश से होकर बंगाल की खड़ी में चले जाती थी,भारत के बोडर से बाहर होने के कारण खोज भी रुक गई और नेहा की फाइल सीक्रेट रूप से गायब कर दी गई , वजह साफ थी शासन की बदनामी,इस पूरे कांड को वहां के पेपरों ने बड़े बड़े शीर्षकों में छापा लेकिन मेरा और नेहा का नाम ही गायब था,मिश्रा और जूही को हीरो बना दिया गया,जूही को और प्रमोशन मिल गया,कहा गया की बड़े गैंग का पर्दाफाश,रोबर्टो का नाम फिर से गायब था,उसका जिक्र ही कही नही था,पता नही क्यो मिश्रा उसका नाम छुपा रहा था,कोई तो बड़ा कारण रहा होगा,

इधर नेहा के दुख में मैं पागलो सी हो गई थी,बड़ी मुश्किल से खुद को सम्हाल रही थी,मेरा साथ देने वाला कोई भी नही था,मिश्रा को मैं नेहा की मौत का जिम्मेदार समझने लगी थी और उससे दूरी बनाये हुए थी ,वो मेरे रूम भी आता लेकिन मैं उससे बात तक नही करती ,वो अपने कमरे में सोता ,साथ बैठकर खाना भी खाते लेकिन मुझे तो उसे देखना भी पसंद नही था,,मैं वो रूम नही छोड़ना चाहती थी,क्योकि उसमे नेहा की यादे जुड़ी हुई थी,........................

प्रजेंट में ...

मैं एक गहरी सांस लेकर उठ गई ,बिता हुआ समय तेजी से मेरे आंखों के सामने इस गुजर गया ,मेरे बाजू में विकाश जी सोए थे,मेरे पति जिन्हें मैं सबसे ज्यादा प्यार करती हु,आज ही मैं जूही से मिली ,मिश्रा ने उसे मेरी मदद के लिए यहां भेज है ,अब वो इंस्पेक्टर बन गई है,वो भी पूरे थाने की मालकिन .इतने कम सालो में उसने इतने प्रमोशन पाए,वो सच में बहुत ही बहादुर लड़की है,उसे भी सेक्स का भूत सवार रहता है और वो भी अपने पति से दिलो जान से प्यार करती है ,लेकिन मेरे और उसके स्वभाव में जमीन आसमान का अंतर है, उसके पति उसे संतुस्ट ही नही कर पाते ,लेकिन मेरे विकाश जी ….वाह ,कितना प्यार करते है वो मुझे,जब हम पहली बार मिले थे तो मुझे यकीन ही नही आया था की गांव में पला बढ़ा ये लड़का मेरे भावनाओ को समझेगा,मैंने जब उन्हें अपने वर्जिन ना होने के बारे में बताया तो वो बस हँस पड़े ,उन्होंने इसे मेरी कमी नही माना ,वो बहुत ही भोले भाले है,मैं सच में लक्की हु की मुझे इनके जैसा पति मिला,समझदार है,बेहद प्यार करने वाले है…..

मुझे देखने उनसे पहले भी कई लड़के आये ,वो उनसे ज्यादा पढ़े लिखे थे,कोई बड़ी नॉकरी में था तो कोई बड़े पैसे वाला लेकिन मैं किसी को भी धोखे में नही रखना चाहती थी,लेकिन मैं जैसे ही किसी को अपने वर्जिन ना होने की बात बताती वो शादी तोड़ देता,मेरे घरवालों को भी ये समझ नही आ रहा था की आखिर ये हो क्या रहा है,मैंने अपनी बड़ी भाभी को सबकुछ बता दिया था,लेकिन इतना ही की शहर में एक बॉयफ्रेंड था,उससे ज्यादा उन्हें नही बता पाई क्या कहती की ना जाने कितनो के साथ…भाभी ने भैया के कानो में ये बात डाली की मैं बिना सच बताये शादी नही करना चाहती,मेरे भइया मुझसे बेपनाह प्यार करते है.उन्होंने भी बात को समझा,तभी कही से उन्हें विकास जी के बारे में पता चला(अब मुझे पता है की मिश्रा जी ने ये रिश्ता किसी के माध्यम से भिजवाया था)उस ड्रग्स ने और नेहा की जुदाई ने मुझे पागल बना दिया था,जब मैं अच्छी होती तो सामान्य होती लेकिन जैसे ही कोई भी दुख टेंशन मेरे दिमाग में आता मैं बेचैन हो जाती मुझे सिर्फ शराब की तलब लगती फिर सेक्स की ,अब मुझे समझ आ रहा था की नेहा की हालत आखिर कैसे रहती रही होगी,मैं पार्टीयो में जाने लगी,वहाँ मैंने कुछ बॉयफ्रेंड भी बना लिए ,मेरे लिए ये कभी मुश्किल नही था,लड़के मेरे पीछे दुम हिलाते फिरते थे लेकिन मैं अपने रेस्पेक्ट को कभी कम होने नही दिया,जिससे भी सेक्स किया उसकी गुलाम बनकर नही बल्कि उसकी मालकिन बनकर….

लेकिन मुझे विकाश जी ने गुलाम बना लिया ,पहले मुझे लगता था की मैं इनके साथ खुस नही रहूंगी,इनकी पोस्टिंग जंगल में थी,मैं हमेशा से बड़े घर में रहने वाली और इनके पास था सरकारी क्वाटर ,मैं नाजो से पाली बढ़ी थी,अपना हुक्म सबपर चलाया था,लेकिन मैं घर वालो को भी दुखी नही करना चाहती थी,मैंने इनसे शादी कर ली,पहली रात में ही मुझे पता चला की आखिर प्यार नाम की भी कोई चीज होती है,लेकिन मेरे लिए तब भी प्यार और अपने हवस में फर्क करना आसान नही था,मैं उनके साथ जितना समय बिताते गई मैं इनकी होने लगी,पहली बार लगा की अगर कोई मुझे मेरे दुखो और वासना की आग से निकाल सकते है तो ये है,इनके प्यार ने मुझे जीत लिया,मैं भी इन्हें भरपूर प्यार देना चाहती थी,लेकिन मेरी भी कुछ मजबूरियां थी,

 
इसी बीच इनका काम फिर से बढ़ गया,किसी प्रोजेक्ट के कारण ये बहुत बिजी हो गए थे,मैं अपने को कब तक सम्हाल पाती,और एक दिन अचानक वो हुआ जो नही होना चाहये था,प्यारे हमारे घर का नॉकर था,रातो को जब मुझे नींद नही आती और शराब की तलब लगती तो मैं छटपटा जाया करती थी,मैं बाहर हवा खाने निकल जाती ,एक रात मैं ऐसे ही बाहर निकली और प्यारे के कमरे से आ रही आवाजो ने मेरा ध्यान खिंच लिया ,वहां प्यारे के अलावा कुछ लोग और भी थे,वो हमारा ड्राइवर रघु था ,एक लड़की की भी आवाज आ रही थी,

मैं उसके कमरे की तरफ बढ़ने लगी ,

“आह नही ना ,”

मुझे पायलों और चूड़ियों की आवाज सुनाई दी ,साथ ही लड़की की सिसकारी,मैंने गौर किया ये तो रघु की बीवी रेणु थी, ये लोग यहां क्या कर रहे है,??????????

“आह मेमसाहब “प्यारे ने गरजते हुए कहा ,मैं थोड़ी डर गई,आसपास देखने लगी,कही मैं इन्हें दिख तो नही गई,लेकिन मैं कही से भी इन्हें दिख नही सकती थी वो कमरे के अंदर थे और मैं बाहर ,

“मेमसाहब को याद करके इस रांड को चोद रहा है साले”इसबार रघु था,

मैं चौक गई ,जिनसे मैं इतने अपनेपन से बात किया करती थी वो ही मेरे बारे में ऐसी बाते कर रहे है,उससे ज्यादा मैं इसलिए चौक गई क्योकि रेणु रघु की पत्नी थी और उसे उसके ही सामने प्यारे चोद रहा है…..

मेरी हालत खराब हो गई थी,की आखिर मेरे घर में ये क्या हो रहा है,अगर मैं नार्मल होती तो हो सकता है मैं दरवाजा खटखटा कर अंदर चले जाती ,लेकिन मेरी गर्मी भी इससे बढ़ रही थी,और मैं अब किसी की इज्जत भी थी मैं नॉकरो के मुह नही लगना चाहती थी ,मैंने सुबह होते ही इन्हें बताने का फैसला किया ...

मैं एक झीनी सी नाइटी में थी जिसे मैंने विकाश जी को रिझाने के लीये पहना था,लेकिन काम के बोझ में उन्होंने मेरे साथ कुछ भी नही किया ,मैं भी बेशर्म बनकर उनसे कोई फरमाइस नही करना चाहती थी,वो बड़े प्यार से मुझे देखकर रह गए और किस करके ही रो गए ,मेरी तड़फने बढ़ रही थी,बहुत दिनों के बाद मैंने ऐसे गन्दे शब्द सुने थे ,जिससे मैं बहुत गर्म हो गई थी,

शादी के बाद के लिए मेरी भाभियों ने मुझे कुछ महंगे लेगिंस लेकर दिए थे,उनमे से ही एक मखमली पेंटी मैं पहने हुई थी,जो अब गिला हो गया था,मेरे हाथ भी उसके ऊपर चले गए थे,मैं अपनी पेंटी में हाथ घुसाकर अपनी जांघो के बीच के छेद को सहला रही थी,हल्के हल्के बालो वाली मेरी योनि भीगने के कारण बालो में भी कुछ बून्द पड़ चुके थे,ये शादी के बाद पहली बार था जब मैं विकास जी के अलावा किसी और से उत्तेजित हो रही थी,

उधर से आवाजे बढ़ गई

“बोल ना मादरचोद प्यारे डार्लिंग ,मैं तुम्हारी काजल हु ,और तुम्हारी रंडी हु चोदो मुझे ...बोल “

प्यारे शायद बहुत ही उत्तेजना में था वो जोरो से बोला ,रेणु के कुछ ना कहने पर वो एक झापड़ उसे लगा दिया ,

सच में मुझे उसके ऊपर बहुत ही गुस्सा आ रहा था लेकिन उसके ऐसा बोलने से मेरे अंदर कुछ हो सा गया,इसबार रेणु ने उसकी बात दुहरा दी ,

“हा मादरचोद मैं काजल हु ,तेरी मालकिन काजल ,चोद मुझे जोर से चोद “

“आह काजल,वह काजल मेरी जान ओह ओह “

प्यारे के आवाज ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया था,मेरी आंखे बंद हो गई,मुझे शहर के मेरे बॉयफ्रेंड की याद आ गई जो ऐसे ही मेरा नाम लेकर मुझसे सेक्स किया करते थे,मैंने दो उंगलिया अपने गीली हुई योनि के छेद में घुसा दी ,मेरे मुह से भी एक सिसकारी निकली पर वो बहुत ही धीरे थी,

मेरी आंखे बंद हुई और ….उधर से

“काजल मेरी जान ,ओह ओह “

“आह आह चोद मादरचोद अपनी काजल को “

प्यारे की आवाज में मैं खो सी गई थी ,वासना का उफान चरम में था,मैंने आंखे बंद ही किया था की मुझे एक झटका लगा,मेरे आंखों के सामने प्यारे की तस्वीर उभर कर आयी ,उसकी आवाज तो मेरे कानो में आ ही रही थी ,ऐसा लगा की वो अभी मेरे ऊपर चढ़ा मुझे धक्के मार रहा है,मैंने जोरो से अपनी आंखे खोली ...मेरी सांसे बहुत तेज थी ,

मुझे अपनी स्थिति का अहसास होते समय लगा ,लेकिन जैसे ही मुझे समझ आया की मेरे साथ ये क्या हुआ मैं भागती अपने घर में घुस गई,किचन में जाकर पानी पिया और उनके बगल में जाकर सो गई,लेकिन आंख बंद करने पर वही तस्वीर और कानो में वही आवाज……..

मैंने जोरो से योनि में उंगली डालकर हिलाने लगी,तब तक की मैं झर ना गई,लेकिन फिर मुझे याद आया की मैं कौन हु ,मैं अब कोई कालेज की लड़की नही बल्कि एक पत्नी हु जिसका पति अब भी मेरे बाजू में सोया था……..

उस वाकये को याद कर अभी मेरे माथे में पसीना गया यही वो रात थी जंहा से मेरे जिंदगी में आये उस मोड़ की शुरुवात थी जंहा से मैं अपने मालिक विकास जी के लिए भी बेवफा हो गई ….

मैं पुरानी बातो को सोचकर थोड़ी घबरा गई,विकाश जी अभी भी मेरे साथ सोए हुए थे,होटल के इस आलीशान कमरे में ,जिसे मेरे भैया ने किसी खास गेस्ट के लिये बनाया था और जंहा से पूरे शहर का नजारा दिखता था,ऐसे तो अभी तक कोई गेस्ट इसमें रहने नही आया लेकिन अब मैं इसका इस्तमाल किया करती थी,....

मैं उठकर कांच की दीवार के पास आ गई,हाथो में शेम्पियन का एक ग्लास था,प्यारे के बारे में सोचकर मुझे अपने पर गुस्सा आ रहा था ,मैं उस रात में डूबे शहर को देखने लगी और फिर से अपनी यादो में खो गई….

उस रात से मेरा प्यारे को देखने का नजीरिया ही बदल गया था,मैंने पहले तो रात की बात विकास जी को बतानी चाही लेकिन वो काम के कारण मेरी बात बिना सुने ही चले गए वो ऐसे भी बहुत अपसेट थे मैं उन्हें फिर से अपसेट नही करना चाहती थी,लेकिन प्यारे और मेरे बीच कुछ होने लगा,वो मेरे पास आने की कोसीसे तो हमेशा ही करता था,लेकिन अब मुझे पता चल गया था की उसके दिल में मेरे लिए क्या है,

मैं थोड़ी शरारती तो बचपन से थी,और कालेज में नेहा के साथ रहकर मैंने लड़को तो टिस करना भी सिख लिया था,इसमें मुझे और नेहा को बहुत मजा आता जब कोई लड़का हमारी जवानी को देखकर पागल हो जाता लेकिन कुछ भी नही कर पता,उनके चहरे में आये भाव से हम खिलखिलाकर हँस पड़ते,नेहा के जाने के बाद ये सब कम हो गया था,लेकिन पता नही मुझे इस बुड्ढे को जलाने की सूझी ऐसे भी मैं घर में बैठी बैठी बोर हो जाती थी ,सोचा की इससे थोड़ा टाइम पास भी हो जाएगा और इस बुढ्ढे को भी थोड़ा मजा आ जाएगा,साथ ही कही ना कही इससे मुझे भी बहुत मजा आने वाला था,अभी हाल के समय में विकास जी की बेरुखी से मैं थोड़ी बेचैन रहने लगी थी,इसी बहाने मैं भी थोड़े मजे करने की सोची …………..

मुझे कभी कभी रेणु के व्यवहार पर भी शक होता,वो मुझे सेक्सुअली उकसाने की कोसीसे करती,उसे शायद लागता हो की मैं एक नई नई दुल्हन हु और मुझे कुछ भी नही पता,लेकिन उसे नही पता था की जिस खेल के बारे में वो मुझे समझना चाहती है मैं उसने एक्सपर्ट थी,मुझे ये जानना था की रेणु रघु के होते हुए भी प्यारे के साथ क्यो सेकस कर रही थी,और रघु उसका साथ क्यो दे रहा था,मैं प्यारे से अब ज्यादा हँस हँस कर बाते किया करती,मेरे आवाज में एक मदहोशी होती थी,मैं उसे इतना टिस करती की कभी कभी उसके लूस पेंट में उसका लिंग अकड़ जाता ,मैं अकेले में बहुत हस्ती और प्यारे पूरी कसर रेणु के उपर निकाला करता था,

कुछ ही दिन बीते और प्यारे और रेणु भी मुझसे खुलने लगे,रेणु ने धीरे धीरे मुझे प्यारे के बारे में सब कुछ बता दिया,उसका जोर बस इसपर था की प्यारे कितना अच्छा सेक्स करता है और कैसे उसे संतुस्ट करता है इसलिए वो ये सब कर रही है,लेकिन उसने ये नही बताया की रघु भी इस खेल में शामिल था,समझने को मैं सब समाझ रही थी की रेणु असल में प्यारे के बोलने पर ही ये सब मुझे बोल रही है ताकि मेरे अंदर प्यारे के लिए एक उत्सुकता का जन्म हो ,मैं भी भोली भाली सी उसका साथ देती और उसकी बातो को झूठे आश्चर्य से सुनती थी,वो बहुत ही खुस होते और मैं मन में मुस्कुराती ,हम दोस्तो की तरह रहने लगे थे,प्यारे मुझे छूने की हिम्मत तो नही करता लेकिन हमेशा ही मेरे साथ फ्लर्ट करने की कोसीसे करता था,मैं भी उसे मुसका कर जवाब दे देती थी,

इधर विकास जी से प्यार का परवान चढ़ता गया लेकिन साथ ही प्यारे के कारण दिन भर मैं गीली रहने लगी थी,विकास जी से रात में तो सुख मिल जाता था,पर सुबह और दोपहर पूरा समय तो प्यारे ही सामने होता था,

एक दिन मैं रात को जागी,प्यारे आज अकेले ही था,वो भी कमरे के बाहर निकाला हुआ बैठा था,

वो मुझे देखते ही खड़ा हो गया ,

“अरे काका आज नींद नही आ रही आपको “

मेरे चहरे में एक शरारती मुस्कान आ गई ,

“कुछ नही बिटिया मुझे तो अक्सर रातो में नींद नही आती ,”

वो उदास सा कहने लगा,मैं उसके पास जाकर उसके कमरे के चौखट में ही बैठ गई ,ये पहली बार था जब प्यारे मेरे इतने करीब था,मैं और विकास जी अभी अभी ही प्यार के समुंदर में डुबकी लगाए थे ,मेरे शरीर से सेक्स के बाद आने वाली एक मनमोहक खुसबू अभी भी आ रही थी,प्यारे जैसे एक गहरी सांस लिया ,उसका लिंग उसके लुंगी में तन गया,मेरी नजर जैसे ही उसपर गई मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,वो थोड़ा नर्वस था,

“आपकी खुसबू बड़ी ही कमाल की है बिटिया “

वो झिझकते हुए कहा और मैं शर्माने की एक्टिंग करने लगी ,

वो इससे बहुत खुस हुआ,

“मैं रातो को अपने को बड़ा अकेला पाता हु,काश मेरी बीवी अब भी जिंदा होती “

वो फिर से एक गहरी सांस लेकर कहता है,साले ने अपना गेम खेलना शुरू कर दिया,जैसे मुझे पता नही की वो कितना अकेला होता है,लेकिन मैं अनजान बनती रही ,

“अरे हम लोग तो है ना आपके साथ “मैंने बड़ी ही मासूमियत से कहा

“हा लेकिन रात को कहा “

“अरे काका रात में भी तो आपके साथ बैठी हु ,आप बोलो तो मैं विकास जी को जगा लाती हु “

मैंने अपना भोलापन कायम रखा था,वो बुरी तरह से चौका

“अरे नही नही …”थोड़ा सा रिलेक्स हुआ

“वो वो साहब को क्यो तकलीफ देती हो ,बेचारे थक जाते होंगे काम से “

“हा थक तो जाते है,ठीक है अब मैं ही आपके पास आकर आपसे बाते किया करूँगी “

प्यारे की तो जैसे बांछे खिल गई ,उसे मेरी बात से इतनी खुसी हुई की उसके गले से कोई शब्द ही नही फुट रहा था,उसे शायद लग रहा था की उसका प्लान कामियाब हो रहा है और मैं भी उसे यही यकीन दिलाना चाहती थी,

“हा बिटिया बिल्कुल बिल्कुल “

“चलिए आपको चाय पिलाती हु ,मैं कालेज के दिनों में रातो को काली चाय पिया करती थी,जब भी मुझे नींद नही आती थी,आपको भी पिलाती हु ,जब आपको नींद नही आया करे मुझे बुला लिया कीजिये ,ये मेरा नंबर है आप मेसेज कर दिया कीजिये मैं अगर जागते रहु तो आ जाऊंगी ..”

शायद प्यारे को ये यकीन ही नही हो रहा था की उसके साथ सचमे ये हो रहा है,इतनी जल्दी उसे ये सब मिल जाएगा उसने नही सोचा होगा,खैर मैं उसे उसके ही रूम में चाय बनाकर पिलाने लगी,हम थोड़ी देर बाते करते जिसमे वो अक्सर अपने अकेले होने का रोना रोता और मैं उसे दिलासा दिलाती ,एक दो दिनों तक यही चलता रहा,अब प्यारे मेरे पास बैठने में झिझकता नही था ,लेकिन अब भी वो मुझसे दूर ही रहता,एक दिन हम ऐसे ही बैठे चाय पी रहे थे…और प्यारे अपने अकेले होने के बात पर रो रहा था,

“अच्छा काका एक बात बताइये ,”

“हा हा बोलो बहु “

“आप हमेशा मुझसे कहते है की आप अकेले है ,लेकिन रेणु तो मुझे कोई अलग ही कहानी सुनाती है,”

प्यारे को पता था की रेणु मुझे क्या कहानी सुनाती है,लेकिन फिर भी वो अनजान बनने लगा

“क्या,क्या कहानी सुनाती है बहुरानी “

 
साला ठरकी बुड्डा एक तरह तो मुझे चोदने के ख्वाब रखता है और दूसरी तरफ मुझे बड़े ही प्यार से बाहुरानी बुला रहा है,मैं उसे कुछ शब्दो में तो नही कहा,उसकी आंखे मेरी आंखों में गड़ी जा रही थी,हा प्यारे एक नॉकर था,और उसकी उम्र भी थोड़ी ज्यादा थी लेकिन था बड़ा ही सॉलिड टाइप का मर्द ,आर्मी में रहा था और कई दिनों तक खेती की थी,शाररिक परिश्रम का असर उसके व्यक्तित्व पर दिखता था वो भी कोई मिश्रा जी की उम्र का था,45-50 लगभग ,लेकिन मिश्रा जी से बहुत ही ताकतवर था,उसके मसल्स अभी भी गठीले थे,छाती के बाल पसीने से भीग कर मर्दानगी की खुसबू छोड़ते,और जैसे वो रेणु के साथ सेक्स करता था उसकी स्टेमना पर भी मुझे ताजुब्ब होता था,हा मैं उसके प्रति थोड़े आकर्षित तो महसूस करती थी ,ये गलत था,अब मैं शादी शुदा लड़की थी ,जिसका पति अभी अभी उसे निचोड़कर बिस्तर में सोया हुआ है,और मैं एक नॉकर के कमरे में उसके साथ ऐसी बाते कर रही हु,.......

हा ये गलत तो था,लेकिन बड़े पाप का मजा भी बड़ा होता है,मैं प्यारे को बस टिस करना चाहती थी ,लेकिन उसके प्रति मेरा आकर्षण मेरे योनि से बहते पानी से मुझे आभास होने लगा था,वो एक गर्म सांसे छोड़ कर वहां से जाना चाहती थी लेकिन अपने ही बात में फंस चुकी थी ,मैं अपने खयालो में ऐसे खोई थी की मुझे आभास नही हुआ की वो अभी अभी मेरे पास बैठा है,और उसने मुझसे कुछ पूछा है,मैं सही और गलत के फेरे में फसी हुई थी,

“अरे बताइये ना की रेणु ने आपसे क्या कहा “वो मेरे कंधे पर हाथ रखता है

“आप ठीक तो हो “

ये उसका ऑफिसियली मुझपर किया पहला स्पर्श था,मैं होशं में आयी,मेरी सांसे थोड़ी उखड़ रही थी,पता नही इस स्पर्श में क्या था ,या मेरे मन में एक दबी हुई कोई आकांक्षा थी जो फुट पड़ी थी,मेरी योनि ने अपने पानी का रिसाव बड़ा दिया था ,जैसे उसे आशंका हो की कोई कड़ा सा रॉड मेरे अंदर जाने वाला हो ,लेकिन ऐसा नही होने वाला था,मेरे मुह से एक आह निकलने से रह गई थी,योनि में वही खुजली होनी शुरू हो गई थी जिसकी मैं आदी हो चुकी थी,मैं वहां से निकल जाना चाहती थी ,मैं एक नॉकर के सामने बेआबरू नही होना चाहती थी,मेरे दिमाग ने मुझे रोका था,अगर मैं अभी शादी शुदा नही होती और किसी पार्टी में किसी हेंडसम लड़के के साथ होती तो मैं उसेके नीचे रात भर खुद को रगड़ाती रहती,लेकिन अब माहौल ही कुछ दूसरा था,मैं ऐसे किसी से भी अपने को मसला नही सकती थी,ये अलग बात है की मैं अभी भी चाहती थी की कोई मुझे जोरो से बिस्तर में रगड़ कर रख दे ,खुजली बढ़ने लगी थी और अब मेरे सामने योनि में उंगली डालने के सिवा कोई चारा भी नही था,मैं उठने वाली थी,लेकिन प्यारे को भी मेरे सांसो का पता चल गया ,उसे समझ आ गया था की मैं गर्म हो चुकी हु,उसने एक चांस लेने की सोची ,वो अपना हाथ मेरे पीठ से होता हुआ मेरे कंधे तक ले गया,और उस अपने हथेलियों से मसलने लगा,

“बताओ ना क्या कहा रेणु ने “

इसबार उसकी आवाज में अजीब सा हरामीपन था,जैसे वो जानता था की मैं कुछ नही कह पहुंगी लेकिन उसे याद कर गर्म हो जाऊंगी ,लेकिन मेरी खुजली और मन के उथलपुथल ने ऐसे भी मेरे दिमाग की मा बहन कर रखी थी,मैं उठी और उसके गालो में एक जोरदार थप्पड़ मारा ,मुझे अपनी ऊर्जा को बाहर निकलने का ये नया जरिया मिल गया था,गुस्सा ….

“तुम्हे शर्म नही आती एक शादी शुदा लड़की के साथ ऐसा करने से,और मुझे पूछते हो की क्या कहा उसने तुम्हे नही पता क्या की क्या कहा उसने मुझे ,मैं साफ साफ बता देती हु काका मेरे घर में ये सब नही चलेगा ,वरना मैं विकास जी को ये सब बता दूंगी और आपकी नॉकरी गई समझो ….आप अकेले है इसका मतलब नही की एक जवान शादी शुदा लड़की के साथ …….आपके बच्चों की उम्र भी उससे बड़ी है “

वो बस मुझे ऐसे देखने लगा जैसे की वो कोई ख्वाब देख रहा हो ,उसे तो समझ ही नही आ रहा था की आखिर सच क्या है,पहले वाला सीन सच था जिसमे मैं एक नाजुक सी ,शरमाई सी ,और बेकाबू होती काजल थी ,या अभी अभी वाली काजल सच है जो की उसके गालो में थप्पड़ मार कर उसे चेतावनी दे रही है,वो बस मुझे देखने लगा ,और मैं वहां से जल्दी से अपने कमरे में भागी,मैं बाथरूम में जाकर जल्दी से अपनी नाइटी को ऊपर कर अपनी पेंटी निकाल फेकी ,वो बहुत ही गीली हो चुकी थी मैं ने अपनी दो उंगलिया अपने योनि में डाली ,सच में गर्म गर्म योनि थी मेरी ,जैसे कोई भट्टी तप रही हो ,मैं उंगलियों को अंदर बाहर करने लगी ,मेरी आंखे बंद हो गई ,मैं बाथरूम के फर्श पर बैठ गई थी,टांगे फैला कर जितना उंगली अंदर जा सकता था किया,मुझे जल्दी से झडना था,शांत होना था,मेरी आंखे बंद हुई और पहली तस्वीर आई प्यारे की ,

“मेमसाहब आह “जैसे वो मुझे चोद रहा हो जोर जोर से ,मैं अपनी सांसो को सम्हालते हुए विकास जी को देखने की कोसीसे करने लगी लेकिन बार बार प्यारे विकास जी की जगह में आ जाता था,आखिर मैंने अपने को छोड़ दिया और अपने खयालो में ही प्यारे से कुतिया बने चुदने लगी,जैसे मुझे लगा की वो मेरी कमर को पकड़े हुए मुझे जोर जोर से धक्के मार रहा हो और मैं चिल्ला रही हु ,

“आह प्यारे साले कुत्ते क्या कर दिया तूने अब चोद चोद मादरचोद “

मैं ये सच में बोल रही थी ,बाथरूम के अंदर अच्छा था की विकास जी गहरी नींद में थे वरना मेरे मुह से ये सब सुनकर ना जाने उनके ऊपर क्या बीतती ,

“चोद मादरचोद चोद …”

“हा मेडम मेरी बाहुरानी तेरी चूत फडूंगा आह …”

मेरे कान अपने आप ही प्यारे की आवाज को दोहराने लगे ,

“हा मादरचोद बुड्ढे साले कुत्ते चोद चोद “मानो मैं रोने लगी मेरी उंगली बहुत ही तेज हो गई थी मैं झरने वाली थी .

“आहहहहहहहह ओ ह आआआआ ओ ह “

मैं इतने जोरो से झड़ गई,और जैसे मैं मुर्दा सी हो कर वही पड़ी रही ,कुछ देर बाद जब मुझे होश आया की मैंने क्या किया है तब मेरे होठो में बस एक मुस्कान थी ,वहां मुझे कोई भी देखने वाला नही था लेकिन मेरी आंखों में शर्म आ गई थी……..

“तुम लोग समझ के क्या रखे हो मुझे मैं क्या कोई रंडी हु “

रेणु की बात से मेरा दिमाग फटा जा रहा था,ना जाने प्यारे ने उसे क्या पाठ पढ़ा के रखा था की सुबह से ही वो प्यारे के बारे में बोले जा रही थी,वो मुझे ये समझने की कोसीसे कर रही थी की प्यारे कितना अच्छा मर्द है और मैंने जो उसे थप्पड़ मारा वो गलत था,

“नही दीदी मैं ये कब बोली “

“तो और क्या बोलना चाहती है कि तेरी तरह मैं भी उसके साथ वो सब करू,तेरा पति नामर्द है तो मेरी क्या गलती है,”

मेरा दिमाग खराब होने लगा था

“अरे दीदी आप तो बुरा मान गई ,वो …….,वो मैं …….,वो मैं ये बोलना चाहती थी की वो इतना बुरा भी नही है जितना आप समझती है ,वो अच्छा इंसान है ,,वो भी अपने किये पर शर्मिंदा है लेकिन वो चाहता है की आप विकास जी से उसकी शिकायत मत करे ,वो बेचारा आखिर जाएगा कहा और वो मेरे साथ मेरी मर्जी से करता है तो …….”

मेरा गुस्सा खत्म हो चुका था मैं हल्के से मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी,

“तो क्या “

“तो आप हमारे रिस्ते को सहमति दे दीजिये,घर के काम में कोई भी बाधा इससे नही आएगी ,मैं प्रोमिश करती हु ,लेकिन मेमसाब आप तो समझती है ना ,जब टांगो के बीच खुजली होती है तो कुछ भी नही सूझता,अगर वो बुड्डा ही उसे मिटा दे तो क्या परेशानी है,”

इसबार हम दोनो ही हँस पड़े

“ठीक है ठीक है तू अपनी खुजली मिटा लेकिन अगर विकास जी को पता चला ना तो पता नही क्या कर जाए …इसलिए सम्हाल के “

“अरे मेडम आप हो ना साहब को सम्हालने के लिए”

वो मचलती हुई बोली

“अच्छा ...खुद गलत काम करो साथ ही मुझे भी घसीटो “

“दीदी आप कितनी अच्छी हो ,सच में अगर मेरे से आपके लिए कुछ हो सके तो बताना मैं सब कुछ करूँगी आपके लिए “

 
मैं उसे हल्के हल्के मुस्कुराकर देखने लगी

“क्या करेगी ??/”

“प्यारे से आपके लिए बात करू “

वो जोरो से हँसने लगी

“तू फिर से शुरू हो गई ना ,मेरे पति के सामने वो क्या है …??”

“सच में दीदी ऐसे आप हो बड़ी किश्मत वाली जो ऐसे पति मिले है सच में साहब बहुत ही बढ़िया है काश मेरे पति भी ऐसे होते,मुझे इतना प्यार करते ??”

रेणु ये सच में कह रही थी या मुझे मस्का लगा रही थी ये तो नही कहा जा सकता लेकिन सच में विकास जी थे तो कमाल के जब भी प्यार करते दिलो जान लगा देते थे,इतनी खुसी तो मुझे कोई भी नही दे पाया ,अगर उनकी जगह कोई और होता तो मैं शायद कब की बहक गई होती ,आग तो मेरे अंदर भी थी वो भी बाकियों से कुछ ज्यादा ,लेकिन फिर भी मैं उनके प्यार के सहारे ही अपने को सम्हाल पाती थी ,

“तो मेडम मैं जाऊ”

“कहा ???”

“प्यारे के पास वो नाराज बैठा है आज “

मुझे हँसी आ गई .

“हा ठीक है जा मना अपने प्यारे को “

रेणु के जाने के बाद ही मैं आदत के मुताबित उसके कमरे के बाहर जाकर खड़ी हो गई,वही उसका रोल प्ले और वही मेरा मचल जाना ,पता नही क्यो लेकिन मुझे भी इसमें बहुत ही मजा आने लगा था,प्यारे कुछ कुछ फिर से सामान्य हो गया मैं भी उससे खुल के बात किया करती लेकिन कभी उसे इतना आगे बढ़ने नही देती की मेरे शरीर से खेले ,

तभी मेरी जिंदगी में एक तूफान आया ………….

उस दिन विकास जी काम में गए हुए थे,मैं तैयार होकर अपने कमरे से बाहर निकली,मेरे बाल अब भी गीले थे ,मैं हमेशा ही नई दुल्हन की तरह सज कर रहती थी ,अभी शादी को भी ज्यादा वक्त नही बिता था ,मुझे घर में भी साड़ी पहनना और चूड़ियां सिंदूर लगाकर रखना अच्छा लगता,मैं श्रृंगार कर अपने कमरे से बाहर निकली ,लगा जैसे की कोई आया हुआ है ,मैं बाहर आयी तो देखकर दंग रह गई ये तो मिश्रा जी थे,ये यहां क्या कर रहे है और इन्हें मेरे घर का पता कहा से चला ,मुझे देखकर वो खड़े हो गए,प्यारे उन्हें चाय पिला रहा था,

मिश्रा जी मुझे देखते ही खड़े हो गए ,

“आप यहां ??????”

मेरी नजर प्यारे पर पड़ी वो मेरे चहरे के भावों को नापने की कोसीसे कर रहा था लेकिन मैने तुरंत खुद को सम्हाला

“अरे आप बैठिये ना बहुत दिनों बाद याद आयी आपको मेरी ,”मैं झूठी मुस्कुराहट अपने चहरे में लाते हुए कहा

“हा बस इधर से गुजर रहा था तो सोचा मिलता चलू ,विकास कहा है “

“बहुत अच्छा किया ,विकास जी तो आफिस गए हुए है ,काका आप जाइये जरूरत होगी तो आपको बुला लुंगी “मैं प्यारे की तरफ घूमी वो भी चुपचाप ही वहां से चला गया….

“क्या लेने आये है आप यहां “मैंने मिश्रा को गुस्से से देखा

“काजल तुम अब भी मुझसे नाराज हो ,मैं तुम्हे आज भी उतना ही प्यार करता हु “

“देखिए मिश्रा जी मेरा दिमाग खराब मत कीजिए ,निकल जाइये मेरे घर से मैं अपनी जिंदगी में बहुत खुस हु और आपको यहां का पता किसने दिए मेरे भइया ने ???”

मिश्रा जी ने एक गहरी सांस ली

“काजल तुम मुझसे अलग हो गई थी लेकिन मैं तुमसे कभी भी अलग नही हुआ ,विकास से तुम्हारी शादी करवाने वाला भी मैं हु और तुम्हे यंहा लाने वाला भी मैं हु ,मैं अब रिटायर हो चुका हु और यही रहता हु ,जो हुआ उसे मैं बदल तो नही सकता काजल लेकिन …तुम चाहो मुझे जो सजा दो लेकिन कम से कम मुझसे बात तो करो सालो से तुमने मुझसे बात ही नही की है “

मिश्रा जी रोने लगे थे ,उनके रोने में एक पीड़ा थी ,वो बुजुर्ग आदमी मेरे बाप की उम्र का था और मेरे सामने इस तरह रो रहा था,कभी वो मेरे लिए भगवान हुआ करता था,मैं उससे प्यार किया करती थी ,वो ही तो मेरा पहला प्यार था,जिसकी हो जाने के कभी सपने देखे थे ,जिसकी बांहो में पूरी जिंदगी गुजरना चाहती थी,आज ओ ही मेरे सामने बैठा ऐसे रो रहा था,भले ही उसने मेरे साथ कुछ भी किया हो लेकिन मेरे दिल में उसके लिए प्यार खत्म तो नही हो गया,दिल के किसी कोने में वो आज भी जिंदा था,मैं सोफे में उसके बाजू में जाकर बैठ गई,मुझे सचमे बहुत बुरा लग रहा था,उसने जो किया उसकी सजा तो मैंने उसे दे दी थी,सालो से मैंने उनसे बात भी नही किया था,अब शायद समय आ चुका था की मैं अपने जख्मो को भुला कर उनसे बात करू ,मैंने अपना हाथ उनके बालो में रखकर सहलाया ,वो मुझसे लिपट गए ………

“काजल मुझे माफ कर दो मैं सच में बड़ा ही स्वार्थी हो गया था,लेकिन ये सच है की मैंने तुमसे दिलो जान से प्यार किया है ,लेकिन मैं भी अपने फर्ज और राजनीतिक दबाव में मजबूर था,मेरे फर्ज ने मुझे बांध रखा था,मेरा कैरियर भी बड़े खतरे में था काजल ,अगर मैं रोबर्टो का नाम उछाल देता तो वंहा मार्किट में बड़ा प्रभाव पड़ता और साथ ही कई नेता जिनके शेयर रोबर्टो से जुड़े हुए कंपनी में थे उसके भाव गिर जाते,मेरे ऊपर उस समय बड़ा प्रेशर था की मै इस खेल को खत्म भी करू और रोबर्टो का नाम भी उछलने ना पाए….मेरी समझ में कुछ भी नही आया था काजल ….”

वो मुझसे लिपटे हुए थी थे मैं भी उन्हें अपने से अलग नही कर रही थी ,बीती बातो को याद करके मेरे आंखों में भी आंसू आ गए थे,मेरे साथ हो हुआ वो तो हो गया लेकिन नेहा ????क्या वो वापस आ पाएगी ,मेरे दिमाग में उसकी एक तस्वीर घूम गई ,

“मैं जानता हु काजल की तुम क्या सोच रही हो ...नेहा का दुख तो मुझे भी होता है ,वही तो है जिसने हमे मिलाया था,जिसने तुम्हारे मन में मेरे लिए प्यार के बीज बोए थे ,सच मानो काजल मैं भी उसे बहुत चाहता था,उसके साथ जो भी हुआ वो मैं कभी नही भूल पाऊंगा ,”

मिश्रा जी का चहरा मेरे सीने में दबा हुआ था ,उनके आंसू मेरे अब भी बह रहे थे ,मैं अभी अभी नहा कर निकली थी ,मेरे शरीर में गीलापन अब भी था शायद वो मिश्रा जी के चहरे पर भी लग रहा होगा,उनके आंसू मेरे उजोरो के बीच से होते हुए नीचे को बह रहे थे ,इस समय हमारे मन में कोई भी वासना तो नही थी लेकिन सालो बाद हमारे शरीर एक दूजे के संपर्क में आये थे,

मेरे मन में एक रुदन गूंज गया था ,बीती बातो को मैं जितना भुलाने की कोसीसे करती वो उतना ही सर उठाकर मेरे सामने आ जाता था,मैं तो अपने दुनिया में खुस थी लेकिन ये मिश्रा जी ने आकर मुझे फिर से उसी यादो के देश में धकेल दिया था,मैं सोचती रही और मेरा सर भारी होने लगा,चिंता दुख ये ही तो मेरे दुश्मन थे ,मैं फिर से बेचैन होने लगी ,और इसका एक ही इलाज मुझे पता था वो था नशा या सेक्स लेकिन किसीसे ,मिश्रा जी से????

नही इनसे तो मैं मरकर भी सेक्स नही करना चाहती थी ,लेकिन मेरे आँसू भी अभी बंद नही हुए थे मैं फ्रस्ट्रेशन में आ गई थी मैं मिश्रा को दिखाना चाहती थी की उसके कारण मैं क्या से क्या बन गई हु ,उसने मुझसे जो चीज छीनी थी वो था मेरा इनोसेंटनेस मेरी मासूमियत ,सभी चीजे मेरे दिमाग में ही चल रही थी मेरे जिस्म में कोई भी हरकत अभी तक नही हुई थी मैं ऊपर निगाह करके देखा मुझे प्यारे दिखाई दिया वो खिड़की में खड़े होकर हमारी बात सुन रहा था, साला हरामी मेरे मन एक उसके लिए एक गाली निकली ,मैं अभी और भी गुस्से में आ गई

“ये इधर आ “

मैं जोरो से चिल्लाई ,प्यारे कांपता हुआ मेरे पास आया उसने मेरे गुस्से का नमूना तो देखा ही था ,मैं अब मिश्रा जी के सीने से निकालकर अलग हो चुकी थी ,प्यारे मेरे सामने आकर खड़ा हो गया ,

“मादरचोद क्या देख रहा था तू खिड़की से ,की मैं इससे चुदवा रही हु की नही “

गुस्से में मेरे मुह से ऐसी गालिया निकली जिसके बारे में अभी तक मिश्रा जी और प्यारे दोनो ने ही कल्पना नही की होगी ,मैं गुस्से में कांप रही थी ,सालो का गुस्सा था ,जो मैं कभी मिश्रा के ऊपर निकलना चाहती थी वो सभी जमा हो कर मेरे अवचेतन में भरा हुआ था आज मौका देखकर अचानक ही निकल रहा था मेरे स्वभाव में ये गुस्सा ही शायद उसी अवचेतन की दमित भावनाओ का नतीजा था,मेरी आंखे लाल होने लगी थी ,रोंगटे खड़े हो रहे थे,शरीर और मन दोनो में एक अनजानी सी जलन फैल रही थी ,

मेरे कदम आप ही आप प्यारे के पास चले गए और एक जोर का थप्पड़ मैंने उसके गालो में लगा दिया ,वो आंखे फाडे मुझे देखने लगा ,

“घूर क्या रहा है मादरचोद आंखे निकाल लुंगी “प्यारे जैसा ताकती मर्द भी मेरी बात से कांप गया ,मिश्रा जी भी कांप रहे थे ,एक नाजुक सी लड़की का ख़ौफ़ दो मर्दो के चहरो पर साफ झलक रहा था ,तभी रेणु की इंट्री हुई उसने भी मुझे प्यारे को मारते और गली देते सुन लिया था वो स्तब्ध सी दरवाजे में आकर ही रुक गई ,मेरे नजर उसपर पड़ी ,

“लो आ गई तेरी रांड “मैंने रेणु को देखते हुए ,रेणु वहां से उल्टे पाव भागने को हुई लेकिन मैंने फिर से चिल्लाया ,

“रुक साली आयी है तो चुद के ही जाएगी तू यहां से इधर आ “वो नजर झुकाए हुए हमारे पास आयी,वो एक सस्ती सी साड़ी में थी लेकिन गजब की सेक्सी लग रही थी ,उसके जिस्म का भराव मर्दो को हिलाने पर मजबूर कर देने वाला था ,

“अबे कुत्ते चल सुरु हो जा अपनी रांड के साथ “

 
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