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रंडी की मुहब्बत complete

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
शाम का वक्त था मैं वापस रूम आ रहा था,दिनभर मैंने कई दौड़ भाग किये थे,बैंक से पैसा निकाल कर सीनियर के बैंक में डलवाया था,कालेज भी शुरू हो चुके थे,क्लास अटेंड किया और बुक्स लेकर लाइब्रेरी में भी टाइम बिता आया था,मैं बुरी तरह से थका हुआ था कमरे में जाकर कल की तैयारी करनी थी ,कल से मार्किट में मेरा पैसा लगने वाला था..

मैं बाजार में पहुचा जिसके अंत में वो सकरी गली थी जंहा से होकर उस चाल में जाया जाता था,बाजू में ही एक सिनेमा घर भी था जिसमे हमेशा ही B ग्रेड की फिल्में लगती थी ,ग्राहक अघिकतर वही के पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी करके उस गली से अंदर आया करते थे,वो गली एक तरह एक मैदान के बाउंड्री तथा दूसरी ओर उस सिनेमाघर की बाउंड्री से बनी थी ,लगता था की पाताल लोक में जा रहा हु,बाहर का बाजार शहर के सबसे व्यस्त बाजार में से एक था,कितना हल्ला गुल्ला था वँहा की नरक से कम नही लगता था ……..

मैं थका होने के कारण उस शोर शराबे में और भी गुस्से से भर जाता था,मैं गली के मुहाने पर पहुचा ही था की एक आवाज मेरे कानो में पड़ी ..

“ये…”किसी ने जोरो से चिल्लाया ,और मैं पलटा तो चौक गया.ये आकाश था..

वो पास बने पान ठेले में खड़ा हुआ सिगरेट पी रहा था,साथ उसका वही दोस्त भी था…

वो मुझे हाथो के इशारे से अपने पास बुला रहा था..

“अरे तू तो मेरी ही क्लास में पढ़ता है ना,तुझे भी इसका शौक है क्या “वो हँसने लगा ,मैंने नजर नीची कर ली

“अबे शर्मा क्या रहा है ,मैं भी तो माल लेने ही आया हु यंहा पर ,कल ही दो माल ले गया था ,तबाही थी ,तू किसके पास आया है “

मुझे समझ नही आया की अब इससे क्या कहु ..

“जो मिल जाए ..सस्ते में “मैं डरते हुए बोला ,वो दोनो हँस पड़े

“चल मेरे साथ हमारा एक दलाल है यंहा पर “वो मुझे खिंचता हुआ मेरे ही आशियाने की तरफ ले जा रहा था,मेरी तो सांसे ही रुक सी गई थी ,समझ नही आ रहा हटा की अखिर अब इस साले का करू क्या …

हम उस चाल के सामने पहुचे ,गेट से अंदर गए और बड़े बरामदे में एक कोने पर बने पान ठेले से वो सिगरेट जलाकर कर पीने लगा …बनवारी उसे देखते ही दौड़ाता हुआ वँहा पहुच गया था लेकिन फिर उसकी नजर मुझसे मिली ,वो थोड़ा सकपकाया ..

“अरे बनवारी सुन कल वाली मालो को ही बुला ले .और इस लवंडे के लिए भी कोई सस्ता माल जुगाड़ दे .”उसके साथ आया वो शख्स बोला..

बनवारी की नजर मुझसे मिली लेकिन मेरी आंखों ने उसे कोई भी इशारा नही किया,वो दौड़ाता हुआ ऊपर गया और शबनम फिर काजल के कमरे में गया,थोड़ी देर में ही दोनो लडकिया बाहर आयी,काजल ऊपर से मुझे उनके साथ खड़ा देखा,शायद उसे माजरा समझ आ चुका था..

शबनम और बनवारी दोनो से काजल क्यो बात कर रही थी ,बनवारी थोड़ी चिंता में दिख रहा था ,वो बार बार हमारी ओर देखता मैं साफ देख पा रहा था की वो अपना पसीना रुमाल निकाल कर पोंछा रहा था…

फिर शबनम बनवारी के साथ नीचे आयी ..

“साहब वो लकड़ी तो आज नही जाऊंगी बोल रही है ,आपके लिए कोई दूसरी लड़की जुगाड़ू ..”

आकाश और उसके साथ वाला लड़का थोड़े देर काजल की तरफ देखे ..

“साली क्यो भाव खा रही है ,कितना चाहिए उसे जाकर बोल दुगुना पैसा मिलेगा ,लेकिन लड़की तो वही चाहिए “

आकाश बोल उठा,बनवारी फिर से ऊपर गया,इस बार काजल बात करते हुए मुस्कुरा रही थी साथ ही मुझे देखकर भी मुस्कुरा रही थी ,मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या करू ..

बनवारी फिर से आया ..

“कितना रेट बोली साली रंडी ..”

बनवारी चुप ही था..

“अबे बोल ना “

“साहब वो पागल हो गई है ,आप कोई दूसरी लड़की देख लो ..”

आकाश ने काजल को घुरा जो उसे चिढ़ाने जैसे मुस्कुरा रही थी ..

“तू बोल तो सही की क्या बोली ..”

“साहब 5 लाख मांग रही है ..”

सभी चौक गए ,मुझे भी एक तेज झटका लगा अब ये काजल को हो क्या गया है ,आकाश भी थोड़ी देर के लिए सुन्न हो गया था..

“साली पागल हो गई है क्या ?”

“वही तो कह रहा हु साहब दूसरी लकड़ी ले जाओ “

आकाश थोड़ी देर सोचा ..

“ठीक है दिया साली को 5 लाख,एक बार आ जाए साथ फिर देखो इसकी क्या हालत करता हु साली का पूरा घमंड निकाल दूंगा ..”

आकाश ने जैसे कहा था मेरे अंदर एक डर की लहर दौड़ गई वही ,शबनम और बनवारी तो जैसे उछाल ही गए ,बनवारी खुश होकर ऊपर भागा ..

वो काजल से बात कर रहा था,काजल के चहरे में भी आश्चर्य के भाव आये ,वो मेरी ओर देखने लगी,मैंने ना में सर हिलाया,क्योकि मुझे किसी बड़े खतरे का आभस हो रहा था,काजल थोड़ी देर के लिए सकते में थी ,बनवारी शायद से मनाने की पूरी कोशिस कर रहा था,काजल ने एक गहरी सांस ली और बनवारी से कुछ कहा और अंदर चली गई,बनवारी के चहरे का उतरा हुआ रंग देखकर मेरा चहरा खिल गया था…

बनवारी मायूसी से नीचे आया…

“बोलती है आज मूड नही है ..”

बनवारी की बात सुनकर आकाश का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ गया..

“मादरचोद की ये औकात की मुझे इनकार करती है “वो आगे बढ़ने ही वाला था की मैंने उसका कंधा पकड़ कर उसे रोक दिया ..

“यंहा कुछ करना ठीक नही होगा,ये शकील भाई का रंडीखाना है ,और इन लोगो के पास बहुत से आदमी भी है ,कुछ किया तो हाथ पैर तोड़ देंगे ..”

“साले मैं कौन हु जानता भी है ..”

आकाश भड़का ..

“भाई रंडीखाने में सब एक ही होते है ,नंगे...अगर गड़बड़ हुई और तस्वीर अखबार में आ गई तो इनका तो कुछ नही जाएगा लेकिन तेरी और तेरे परिवार की इज्जत जरूर उछाल जाएगी ..”

इस बार वो थोड़ा शांत हो गया था,

“इस साली को तो उसकी औकात दिखा कर रहूंगा ..”

वो बोलता हुआ वँहा से बाहर चला गया ….वही बनवारी मुझे खिसियाई निगाह से देखता हुआ उनके पीछे भागा..

 
मैं कमरे की चौखट में खड़ा था,अंदर काजल मुह फुलाये बैठी थी वही बाहर शबनम ,मैं समझता तो किसको …

“इस साली रंडी के भाव तो देखो ,मोटे ग्राहक को ठुकरा दिया,साली खुद तो डूबेगी मुझे भी ले डूबेगी ..”

शबनम खिसिया रही थी ..

“चुप कर छिनाल जा कर चुदवा ले मुहल्ले भर से ,मेरा कोई मूड नही है ..”

काजल अंदर से ही चिल्लाई ,वो भी पता नही किस गुस्से में बैठी थी ..

“हा साली चुदवाऊंगी ,जो आएगा उससे चुदवाऊंगी,तेरे जैसा मेरे पास कोई परमानेंट ग्राहक नही है ..”वो मुझे देखकर बोली ,और काजल भड़क कर बाहर आने लगी

“साली अपनी औकात में रह ..”

मैंने चौखट में ही उसे पकड़ लिया वो मेरे बांहो में ऐसे छटपटा रही थी जैसे शबनम का कत्ल ही कर जाएगी ..

“हा री छिनाल बोलूंगी ,एक बार नही सौ बार बोलूंगी सारा चाल जानता है साली की तू अपने आशिक के कारण धंधा नही कर रही है ,साली तू कही भी अपनी चुद फड़वा लेकिन हमारे पेट में तो लात मत मार ..”

शबनम जाने को हुई ,काजल को मैं मुश्किल से सम्हाल कर रखा था..

“रुक मादरचोद कहा जा रही है ,मैं चुद फड़वाती हु,तू साली धंधे वाली ,छिनाल साली रांड ,एक ग्राहक क्या गया मुझ पर इल्जाम लगा रही है ..”

काजल खुदे जा रही थी ,मेरे लिए उसे सम्हालना मुश्किल हो रहा था,तभी शबनम रुक गई और काजल को देखने लगी,उसकी आंखों में आंसू के बून्द आ गए थे..

“हा चुदवाते है हम ,रोज चुदवाते है,है रंडी,तभी तो पेट पलता है हमारा, तेरे पास तो तेरा आशिक है कही से भी लाकर खिलायेगा,हम क्या करेंगे,हमारे पेट पर क्यो लात मार रही है ..”

शबनम को सुबकता हुआ देखकर काजल बिल्कुल ही शांत हो गई,मैंने भी उसे छोड़ दिया,वो शबनम के पास जाकर उसके कंधे में हाथ रखकर उसे अपने गले से लगा ली ..

मैं बस देखता ही रहा की ये अचानक कैसा परिवर्तन आ गया है ..

“माफ कर दे बहन लेकिन उसके साथ चली जाती तो पता नही वापस आ भी पाती की नही ,वो साला तो इतने गुस्से में था की पूरा नोच कर ही खा जाता ..”

काजल जिसे कुछ देर पहले रंडी छिनाल कह रही थी अब उसे इतने प्यार से बहन कह रही थी ..

शबनम और भी सुबकने लगी ..

“जानती हु बहन लेकिन हमारा तो काम ही ये है,नही करेंगे तो खाएंगे क्या,अभी जवानी है तो लोग पैसा भी दे रहे है,वरना मौसी को देख ना कोई 50 रुपये भी तो नही देता बूढ़े शरीर के ..अभी कुछ कमाएंगे तो बुढ़ापे के लिए कुछ बचा भी लेंगे,”

काजल की आंखों में भी आंसू आ गया था...और उसकी बातो में जो दर्द था उसने मेरा दिल भी भर दिया …

आसपास की महिलाएं भी जमा हो गई थी ,जिनके पास ग्राहक नही था वो सभी इधर ही देख रही थी ,सभी कुछ ना कुछ इन्हें कह रही थी ,पास वाली मौसी चिल्लाई

“बढ़िया हुआ उस कमीने के साथ नही गई ,साले रंडियों को तो इंसान ही नही समझते ,जाती तो नोच डालता पता नही क्या क्या डालता तेरे अंदर “

पास खड़ी महिलाएं जोरो से हँस पड़ी साथ ही काजल और शबनम भी ,फिर एक दूसरी औरत बोली

“अरे काजल लेकिन 5 लाख कम नही होते,मारता पिटता तो भी इलाज तो हो ही जाता “

किसी ने कहा

“अरे साली रांड 5 लाख में आधा तो वो दल्ला बनवारी ले जाता,पूरी मेहनत ये करे और घी खाये वो साला दल्ला ..”

सभी जोरो से हँसे तभी बनवारी जो की नीचे ही खड़ा था वो भी चिल्ला पड़ा ..

“अरे मौसी दल्ला हु तो क्या हुआ ,काम तो सही करता हु “

“क्या खाक काम करता है मादरचोद ऐसे ग्राहक लाता है ,अगर वो इसको मारता तो बचाने जाता क्या “

“अब 5 लाख के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा ना मौसी “

“तो साले अपनी मा बहन को भेज दे ना “

“क्या करे मौसी तो तुम्हारे जैसी नही है ना सेक्सी “

सभी फिर से खिलखिला उठे …

“तू फिक्र मत कर मैं तुझे अच्छा मोटा ग्राहक दिलवाऊंगी “

काजल ने शबनम के गाल को सहलाते हुए कहा ..वो भी मुस्कुरा उठी..

“हा दुसरो को ग्राहक दिलवा और तू ,शादी वादी करने वाली है क्या इस चिकने से “

पास खड़ी औरतो के साथ काजल भी ऐसे हँसी की मैं बुरी तरह से शर्मा गया..

“क्या मौसी बेचारे को नारभसा दिए “काजल ने झूठे गुस्से में कहा ,हँसी ठिठोली के बीच गाहको का आना जाना चल रहा था,

मैं उन हंसते और झगड़ते चहरो को देख रहा था,बात बात पर एक दूसरे को गाली देने लग जाते,मारने में उतारू ओ जाते ,और थोड़ी ही देर में एक हो जाते,ऐसा लगता की जैसे सबसे अच्छे दोस्त हो ,कोई कपट किसी चहरे में नही थी ,बुझे वक्त के सताए इन चहरो में भी खुशियों को जीने का जज़्बा था,गालियां देने और खाने का हौसला था,और प्यार जताने की हिम्मत …

जब प्यार करने पर आते तो सब लुटा देते और जब दुश्मनी निकालने पर आते तो सब गवाने को भी तैयार रहते,असल में उनके पास लूटने और गवाने को कुछ था भी तो नही ,अगर कुछ होता तो यंहा क्यो होते...

ये ही इस रंडीखाने की असली हकीकत थी ,बिना किसी आशा के भी उनके नरक जैसे जीवन में भी एक उमंग थी,जब दर्द उतरता तो जमाने का दर्द उन आंखों में उतर जाता था,और जब हँसी छूटती तो उस हँसी से जमाना ही खिल जाता,बूढ़ी उदास पनियाई आंखे हो या,जवान मदमस्त खिली हुई आंखे,सभी में एक समानता जरूर थी ..

यंहा कोई सपने नही देखता ……...

 
बहुत ज्यादा बेचैनी थी दिल में दर्द था,ख्वाहिशें थी जो पूरी नहीं हो पा रही थी , पता नहीं मैं उसे कितना चाहता था शायद जान से भी ज्यादा लेकिन शायद वह मुझे समझ नहीं पाई, वही मेरी आखरी तमन्ना थी वही मेरे शख्सियत का किस्सा थी वह मेरी जान थी जहां थी हर आरजू थी हर गुफ्तगू थी सब कुछ थी लेकिन वह रंडी थी…

अब कैसे कहता कि वह क्या थी, मेरी दुनिया थी.. खैर मैं काजल के प्यार में था , मैं उससे कहना चाहता था कि मैं उससे प्यार करता हूं लेकिन शायद वह समझने को ही तैयार नहीं थी, उसे लगता था कि कोई उससे कैसे प्यार कर सकता है, वह अपने आप को उस दर्जे का समझती थी जहां से कोई वापस नहीं आ सकता, उसे मैं कैसे समझाता कि जहां वह है वहां कोई जा नहीं सकता,वो मेरे दिल में बस चुकी थी , मेरा प्यार उसके लिए बिल्कुल बेपनाह था निर्दोष निष्कलंक था,

उसके लिए मेरा प्यार मेरी आंखों से ही झलकता था,मेरे दोस्तो को भी पता चल चुका था की मैं कुछ बदला बदला सा रहता हु ,लेकिन जिसे जानना था वही इन सबसे अनजान थी ..

या अनजान बनने की कोशिस कर रही थी..???

खैर..

जीवन की गाड़ी चल निकली थी ,मेरे पास मेरा अकाउंट था जिससे मैं शेयर मार्किट में पैसा लगाने को तैयार था,लेकिन दिल मे बेहद ही डर भी था,कारण साफ था की वो पैसे मेरे नही थे ,किसी और के थे जो की खुद ही बड़ा खतरनाक आदमी है..

मेरे रहते काजल धंधा नही करती थी ,और मैं अब अधिकतर घर में ही रहता था,वो दिल भर कुछ ना कुछ बोलती रहती लेकिन फिर मुझे अपने लेपटॉप में घुसा हुआ देखकर मुह बना कर बाहर चली जाती ,उसके यू रूठ कर जाने से मेरे होठो में एक मुस्कान सी फैल जाती थी,

अब उसका बिस्तर ही मेरे दिन भर का ठिकाना था,मैं रात सोते समय बस अपने बिस्तर में जाया करता..

मैं यू ही लेपटॉप में मुह गड़ाए बैठा था,और साथ ही पेन से कॉपी पर कुछ लिख रहा था..

वो पैर पटकते हुए कमरे में आयी,उसके पैरों की पायल की आवाज जोरो से आ रही थी,वो मेरे बाजू में बैठ गई और लेपटॉप को देखने लगी जिसपर अभी एक कंपनी के शेयर की चार्ट दिख रही थी,मैंने जितना भी सीखा था उसी हिसाब से मैं अभी पेपर ट्रेडिंग किया करता था,पैसे लगाने की हिम्मत मैं अभी भी नही जुटा पाया था….हेकेनेसी केण्डलस्टिक चार्ट हर एक के बाद एक बनता जा रहा था,मार्किट लाइव चल रहा था..

मैं अपनी उंगली दांतो में फसाये हुए उस 15 मिनट वाली केंडल को बनता हुआ देख रहा था..

अभी भाव 230 रुपये पर था,जो कभी ऊपर जाता तो कभी नीचे,कभी केंडल हरी होती तो कभी लाल (पुराने भाव से ज्यादा होने पर केंडल हरी हो जाती है और कम होने पर लाल) ..

मेरा दिमाग और गणित कह रहा था की भाव बढेगा ,लेकिन फिर भी मैंने पैसे नही लगाए थे,मैं बस ध्यान से मार्किट को देखकर समझना चाहता था..

“इतने ध्यान से क्या देख रहे हो ..”वो मेरे बाजू में बैठकर मेरे कंधे पर अपना सर रखकर लेपटॉप दो देखने लगी

“यही की ये लाइन ऊपर जाएगी की नीचे “मैंने अपनी होशियारी बघारी ..

“अरे इसमें इतना सोचना क्या है ऊपर ही जाएगी ..”

मैंने आश्चर्य से पलटकर उसे देखा,उसने बड़ी ही मासूमियत से ये कहा था जैसे उसे रत्ती भर भी अपनी कही बात पर शंका नही है ..

“क्यो..क्यो ऊपर जाएगी “

“अरे ये तो दिख ही रहा है ना ..”

मैंने अपनी आंखे बड़ी कर दी ,मैं जो महीने भर से अपना दिमाग पुस्तक में खपा रहा था,हर न्यूज़ देख रहा था,इतना रिसर्च कर रहा था उसे भी इसके बारे में कोई 100% कांफिडेंस नही था की भाव ऊपर जाएगा,100 छोड़ो 50% भी कांफिडेंस नही था,लेकिन इस लड़की ने ऐसा कहा था जैसे ये मार्किट की पृरानी ज्ञाता हो ..

“ओह्ह तो बताओ तो सही की क्या दिख रहा है ..”

वो खुस होते हुए अच्छे से बैठ गई और उंगली स्क्रीन पर दिखाने लगी..

“देखो पहले ये लाइन ऐसे आयी फिर यंहा से मुड़ गई फिर ऊपर गई फिर यंहा से मुड़ गई और नीचे आयी फिर यंहा से मुड़ गई अब यंहा से ऊपर जाएगी ,”

मैं मुस्कुराते हुए उसे देखते रहा,काजल को ये एक खेल लग रहा था ,की ये लाइन ऐसे ही बन रही है,असल में एक एक केंडल अगर 15 मिनट की हो(इंट्राडे ट्रेडर्स अधिकतर 15 या 5 मिनट की केंडल पर ही काम करते है) तो वो 15 मिनट में उस शेयर में हुए हर खरीदी बिक्री ,लाखों लोगो के द्वारा उस शेयर के पीछे चल रही राय को दर्शाते है,वो एक निचोड़ होता है जो 15 मिनट में लाखो करोड़ो लोगो द्वारा उस शेयर में किया गया काम होता है...और ऐसे ही कई हरी और लाल रंगों की केंडल(मोमबत्ती की आकर की होती है ,इसलिए इसे केंडल कहते है) एक चार्ट बनकर तैयार होता है..और काजल को ये बस मजाक लग रहा था..

उसने मेरा मुस्कुराता हुआ चहरा देखा और फिर अपनी बात पर जोर डालकर कहने लगी..

“अरे देखो ना ध्यान से ये लाइन नीचे उतरी लेकिन यंहा से नीचे नही गई ,फिर ऊपर गई लेकिन यंहा से फिर से नीचे,लेकिन दूसरी बार जब ये नीचे गई तो फिर उसी जगह से ऊपर गई जंहा से पहली बार गई थी,और ऊपर गई तो फिर लगभग उसी जगह से नीचे हो गई जंहा से पहली बार आयी थी,मतलब ये लाइन इससे ऊपर और इससे नीचे नही जा रही है,जैसे कोई दीवार हो जो उसे रोक रहा हो..”

मैं काजल को देखता ही रह गया ,क्योकि जो उसने अभी अभी कहा था वो शेयर मार्किट के टेक्निकल भाषा में सपोर्ट और रजिस्टेंस कहलाता है,वो दो भाव जंहा से शेयर ना नीचे जा पता है ना ही ऊपर ,मैं कैसे इतने इम्पोर्टेन्ट फेक्टर को भूल गया था,मैं इतना खुस हुआ की काजल के गालो में एक जोर की पप्पी ले ली ..

वो हल्के से हँसी लेकिन उसे भी ये समझ नही आया की आखिर मैंने ऐसा किसलिए किया था..

और मैंने अपने जीवन का पहला ट्रेड डाल दिया,मुझे कुछ संकेत मिलने लगे थे की ये शेयर ऊपर जाएगा..

मैंने तुरत ही निफ्टी की वेबसाइड से उस शेयर का ऑप्शन चार्ट निकाला,मैंने देखा की उस शेयर में लोगो की भागीदारी तेजी से बढ़ने लगी है(इसे मार्किट की भाषा में वोलेटलिटी कहते है) ,मैंने तुरंत ही एक काल ऑप्शन 10000 की खरीद ली (जब भाव बढ़ने वाला होता है तो लोग काल ऑप्सन और जब भाव गिरने की संभावना हो तो पुट ऑप्सन खरीदते है)

अगर आप लोग नही जानते तो मैं बताना चाहता हु की शेयर में पैसे लगाना और ऑप्सन में पैसे लगाने में बहुत फर्क होता है,शेयर का भाव अगर 1-2 परसेंट भी चढ़ा तो काल ऑप्शन का भाव 50-60 परसेंट चढ़ जाता है,वही put option का भाव वैसे ही गिर जाता है,अगर शेयर का भाव गिरता है तो उसका अपोज़िट होता है,इसलिए भाव चढ़ने पर लोग call को खरीदते है,और गिरने पर put को..और इसलिए ये जितना पैसे कमा के देने के लिए मशहूर है वैसे ही लोगो को नंगा भी कर देता है.. अभी हाल में ही एक शेयर(नाम नही बताऊंगा 3-4 दिन पहले की ही बात है)ऐसे चढ़ा था की उसका call एक ही दिन में 2000% बढ़ गया था,यानी जिसने उसका call खरीदा होगा उसका पैसा एक ही दिन में 20 गुना बढ़ गया..और जिसने put खरीदा होगा उसका पैसा ही डूब गया होगा..

मैं सांसे रोके स्क्रीन पर देखने लगा था,

“अरे क्या हुआ इतने परेशान को हो गए हो “

“तेरे बोलने पर 30 हजार लगा दिया हु ,20 हजार उसके शेयर में और 10 हजार call में “

वो आश्चर्य से मुझे देखने लगी ..

“तू कर क्या रहा है,तूने जुआ खेला है??”

उसकी बात से मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई

“वही समझ ले ,लेकिन ये सोचा समझा जुआ है”
 
अब तो उसकी भी सांसे रुक गई थी क्योकि ऐसे भी उसे कुछ समझ नही आ रहा था की मैं कर क्या रहा हु लेकिन उसे इतना तो समझ आ चुका था की 30 हजार फंसे हुए है…

हम दोनो की नजर स्क्रीन में जमी सी गई थी ..

और मार्किट नीचे गिरने लगा ,मेरे माथे में पसीने की बूंदे टपकने लगी थी 2 बजकर 15 मिनट हुए थे (भारत का मार्किट 9:15 से 3:30 तक चलता है) अभी 2 घंटे थे मेरे पास ,अभी 15 मिनट ही हुए थे की हम दोनो की सांसे रुक सी गई थी,काजल को मैंने इतना तो समझा दिया था हमने 230 रुपये में खरीदा है और ये जितना ज्यादा जाएगा उतना हमे फायदा होगा,और 15 मिनट में शेयर का भाव 229 हो चुका था,लेकिन मैंने हिम्मत रखी अभी उसे बेचा नही ,स्क्रीन में हर सेकंड में वो पैसा बदल रहा था कभी वो 229.50 हो जाता तो अभी 229.30 तो अभी और कुछ मार्किट में ऐसे भी काम दशमलव में ही चलता है,अचानक से कुछ हुआ और भाव 225 में पहुच गया ,वो इतनी तेजी से गिरा की मुझे कुछ सोचने का मौका ही नही दिया,मैं बुरी तरह के घबरा चुका था ,मैंने तुरंत अपने call का भाव देखा वो 80% गिर चुका था मतलब की मुझे सीधे सीधे वँहा से 8हजार का घटा हो चुका था,मैं शेयर में हुआ घाटा अलग था,वँहा भी 1000 के लगभग का घाटा था ,मैं अपना सर पकड़ कर बैठ ,ये मेरा पहला ट्रेड था और पहली ही बार में इतना बड़ा घाटा ..

“क्या हुआ “

“लगभग 9 हजार का नुकसान हो गया है..”मेरे मुह से अचानक निकला और मैं अपने शेयर को बेचने के लिए अपना हाथ बढ़ाने ही वाला था की ..

“है भगवान नही “...

“ये क्या किया तुमने ??”मैं बुरी तरह से चिल्ला उठा था क्योकि काजल ने डर के मारे लेपटॉप ही बंद कर दिया था,

अभी तो ये घाटा सिर्फ 9 हजार का था लेकिन अगर अभी उसे नही बेचा तो पता नही 1-2 मिनट में मार्किट और कितना नीचे गिर जाए और लेपटॉप के चालू होते तक कितना नुकसान हो जाए ..

मैं सोचकर ही कांप गया था…

वही काजल रोने लगी थी

“मुझे लगा था इसे बंद कर देने से वो खत्म हो जाएगा ..”

सच कहु मन किया की उसके कान के नीचे एक खिंच कर लगाऊ लेकिन मेरे सामने अभी शकील का खूंखार चहरा घूम गया था ,मैंने तुरंत ही लेपटॉप चालू किया ..

लेकिन ..

जब किस्मत हो गांडू तो क्या करेगा पांडु..

पता नही क्या हुआ था की लेपटॉप चालू होने के बाद भी इंटरनेट से कनेक्ट नही हो रहा था..

मैं अपने आप को कोशे जा रहा था की मैंने इतनी जल्दबाजी में बिना किसी स्टॉपलॉस (स्टॉपलॉस एक तरीका है मार्किट में नुकसान से बचने का ,अगर इसे लगा दिया जाय तो गिरते मार्किट में सॉफ्टवेयर अपने आप ही शेयर को बेच देता है.. और नुकसान कम होता है..) लगाए ही क्यो ट्रेडिंग करने लगा ...लेकिन अब पछताने से होता भी क्या है..

मैं इंटरनेट से कनेक्ट होने की कोशिस कर रहा था वही काजल का चहरा लाल हो चुका था..

लगभग 2 बजकर 50 मिनट हो चुका था,मार्किट बंद होने के करीब था ,मुझे बुरी तरह नुकसान होने वाला था, मेरा मोबाइल घनघनाया …ये 5 वी बार था लेकिन मैं उसे उठा नही रहा था,क्योकि ये उसी सीनियर का था जो पहले से मार्किट में काम करता था,वो आधे घंटे से मुझे फोन लगा रहा था लेकिन मैं अपने ही दर्द में थे लेकिन फोन फिर से घनघना उठा..

“इसकी मा का अब इसे क्या हुआ ..”

उसी सीनियर का फोन था ..

“हल्लो सर “

“अबे कहा था तू पता है ,*** कंपनी के ऊपर आज बड़ी न्यूज़ आयी है”

उसने उसी कंपनी का नाम लिया था जिसे मैंने अभी खरीदा था,मैं सतर्क हो गया..

“उसके CEO ने रिजाइन कर दिया “

“क्या ??”

अब तो मैं पूरी तरह से ही टूट गया था,अब मुझे समझ आया की इसका प्राइस इतने तेजी से क्यो गिरने लगा था,मेरा दिल ही भर गया क्योकि अब मुझे 15 हजार तक या ज्यादा का भी घाटा हो सकता था,call वाले पैसे तो गए ही समझो ,

“लेकिन जानता है कंपनी ने आधे घंटे बाद ही अलाउंस किया की उनका अगला CEO **** होगा ..”

“क्या वो मशहूर बिजनेसमैन “

“हा ,भाई आज जिसने भी उसका शेयर खरीदा होगा वो तो मालामाल हो गया होगा ..”

सीनियर का ने ऐसे कहा था जैसे काश उसके पास वो सस्ते शेयर होते जो भाव गिरने के समय लिए गए थे..

मैंने तुरंत ही उनका फोन काटा और काजल की ओर देखा वो कुछ समझने की कोशिस जरूर कर रही थी लेकिन उसका चहरा बता रहा था की उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था..

मैंने फिर से कोशिस की और इस बार इंटरनेट से लेपटॉप कनेक्ट हो चुका था,और जैसे ही मैंने अपना सॉफ्टवेयर खोला मेरा मुह खुला का खुला रह गया ,क्योकि इतने समय में शेयर का भाव 264 रुपये पहुच चुका था मलतब लगभग 15% बढ़ चुका था,मैंने तुरंत ही call का रेट देखा मेरी आंखों से आंसू आ गए वो 400% बढ़ चुका था मतलब की मुझे 4 गुना का प्रॉफिट हो चुका था,मार्किट बंद होने में बस 15 मिनट ही बचे थे और मैं इसे दूसरे दिन के लिए रखकर रिस्क नही ले सकता था मैंने तुरंत ही उसी रेट में सभी को बेच दिया…

काजल मुझे घूर रही थी उसकी आंखों में प्रश्न था और एक दो आंसू भी ,

उसने आंखों से भी पूछा “क्या हु “

“मेरी जान 4 गुना प्रॉफिट हुआ है “मैं खुसी से उसके गले लग गया लेकिन उसके गले तक जाने से ही पहले ही मेरा चहरा उसके चहरे से टकराया और मैं खुसी से भरा हुआ उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया..

ये एक ही झटके में ऐसे हुआ की हम दोनो को ही समझ नही आया की कब वो एक सेकंड की गलती मिनट और फिर मिनटों में बदलने लगी थी………..
 
काजल के कोमल होठ मेरे होठो में थे,उसके होठो का स्पंदन मेरे दिल की धड़कनों के साथ साथ ही बढ़ने लगे थे,हमे जैसे ही अपने स्तिथि का आभास हुआ हम अलग हुए,काजल शर्म से मुझसे नजर ही नही मिला पा रही थी ,वही स्तिथि मेरी भी थी लेकिन मैं अगल बगल झांकने लगा,काजल के चहरे पर इतना गहरा शर्म मैंने आजतक नही देखा था ,उसकी कोमल आंखे नीची झुकी हुई थी ,होठो में अब भी हल्की हल्की हलचल मालूम पड़ती थी ,इतने दिनों से दोनों के दिल में जो प्यार की लहर चल रही थी वो आज प्रगट हुई थी,आज इस खुसी के मौके पर जब मैंने अनजाने में ही सही लेकिन कुछ ही घंटो में इतना पैसा कमा लिया था,और इसी खुशी में हम फिसल गए..

मैं वंहा से तुरंत ही उठा और बाहर को निकल गया मैं नही चाहता था की मेरे कारण काजल और भी असहज हो जाए …

मैं बाहर खड़ा हुआ नीचे को देख रहा था,मैं अपने को रोकने की बहुत ही कोशिस कर रहा था लेकिन साली जुबान से मुस्कान थी की जा ही नही रही थी,तभी मुझे लगा की कोई मेरे पीछे आकर खड़ा है,

“अब यंहा क्या देख रहे हो ..”

वो काजल ही थी,वो शायद मुझे सहज करने की गरज से यंहा आयी थी ..मैंने उसके चहरे को देखा लगा जैसे आंखों में कुछ नमी हो लेकिन होठो की मुस्कान भी एक अलग ही कहानी कह रही थी,

“कुछ नही बस यही सोच रहा हु की जो हुआ वो …….”मैं आगे नही बोल पाया

“क्या हुआ ??”काजल के चहरे में मासूमियत और आंखों में शरारत ने घर कर लिया था,मैं भी थोड़ा चौका ..

“मतलब..जो अंदर हुआ “

“वही तो पूछ रही हु की क्या हुआ “

उसके होठो में अब मुस्कान साफ साफ दिख रही थी साथ ही आंखों में एक शरारत भी थी,

“बोल के बताऊँ या करके “

मैं भी पीछे थोड़ी ना रहने वाला था,मेरी बात सुनकर वो बुरी तरह शरमाई

“धत्त कुछ भी “

वो बस इतना ही बोलकर मेरे बाजू में आकर खड़ी हो गई ,मैं उसके उस हसीन चहरे को ही देख रहा था,एक बार उसने मुझे देखा और आंखों से ही पूछा की क्या देख रहे हो ,मैंने भी सर हिला कर कह दिया की कुछ नही ..

वो सामने देखने लगी ,कही आसमान में ना जाने वो क्या देख रही थी ,उसके चहरे में आयी हुई मुस्कुराहट धीरे धीरे गुम होने लगी थी,उसका चहरा संजीदा होने लगा था,मैं उसके भाव को पढ़ रहा था,हमारे बीच जो हुआ वो महज एक इत्तेफाक ही तो था लेकिन देखा जाए तो ये कोई इत्तफाक नही था,इतने दिनों से हम साथ थे,हम एक दूसरे को चाहने लगे थे,मन ही मन ही सही लेकिन दोनों को ही पता था की हमारे अंदर क्या चल रहा है,हम इसे दोस्ती का नाम दे रहे थे लेकिन ये दोस्ती से कुछ अलग था,बस इसे व्यक्त करने का एक माध्यम हमे मिल गया था और वो ही हुआ जो होना था,भावनाओ के तूफान ने हमे डुबो दिया था..

काजल का संगीन चहरा देखते ही देखते बदल रहा था,उसके आंखों में कुछ आंसुओ की बूंदे आने लगी थी,उसने मुड़कर मुझे देखा मैं अब भी उसके चहरे को देख रहा था,

मुझे अपनी ओर देखता हुआ पाकर वो थोड़ी हिचकिचाई और आंखों से आंसू को पोछते हुए तुरंत ही अपने कमरे में चली गई ,मैं भी उसके पीछे बढ़ा…

वो कमरे में अपने बिस्तर पर पाव सिकोड़े बैठी थी ,मैंने उससे कुछ भी नही कहा और उसके करीब जाकर बैठ गया…

“जो हुआ वो भूल जाओ राहुल ,सोचो जैसे कुछ हुआ ही नही..”

उसने मुझे देखे बिना ही कहा था

“क्या नही हुआ “मैं उसके होठो में मुस्कान लाने की गरज से बोला,उसने एक बार मुझे देखा और उसके होठो में कोई भी मुस्कान नही थी,उसका चहरा संजीदा ही था..

“यही की हम एक दूसरे से प्यार करते है,ये नही हुआ हमारे बीच ...हम एक दूसरे से प्यार नही कर सकते राहुल ..”

उसके आंखों से जैसे बांध सा टूट गया था,उसके आंसू बहते ही चले गए ..वो अपना सर छिपकर सिसक रही थी..मैं उसके और भी करीब जा चुका था..

 
“काजल..ये मैं कैसे मान लू की मैं तुमसे प्यार नही करता,मेरी आंखों में देखो तुम्हे क्या लगता है ..”

उसने मेरी आंखों में नही देखा ,वो तो अब भी वैसे ही सिसक रही थी..

मैंने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा

“बोलो ना काजल ,देखो ना मेरी आंखों में “

“मुझे कुछ नही देखना..प्यार रंडियों के लिए नही होता राहुल “

मेरे दिल में उसकी बात सुनकर एक टिस सी उठी थी मैं उसका सर उठना चाहता था लेकिन वो उठा ही नही रही थी वो मुझे देखना ही नही चाहती थी,

“मेरे लिए तुम कोई रंडी नही हो काजल “इस बार मेरी आवाज भर्राई हुई थी मैंने अपना रोना रोके रखा था…उसने अपना सर उठाया लेकिन इस बार उसकी आंखे लाल थी वो मुझे अजीब निगाहों से गहरे जा रही थी...

“तुम अब पैसे कमाने लगे हो ,तुम एक दिन बहुत बड़े आदमी बनोगे,दुनिया तुम्हारे कदम चूमेगी तुम्हारे पास तुम्हारा भविष्य है ,तुम इसे ऐसे बर्बाद नही कर सकते ..मैं इसे बर्बाद होने नही दूंगी ..”

उसने मानो एक गर्जना की ,ऐसा लगा जैसे उसके आंसू सुख चुके है उसके चहरे में एक अजीब सा संकल्प था और मैं उस संकल्प से मानो डर ही गया..

“तुम मुझसे प्यार नही कर सकते,हम एक दूसरे के लिए नही बने है ..”वो उठ खड़ी हुई

“लेकिन ..”मैं कुछ बोलने ही वाला था की उसने मुझे रोक दिया..

“मैं एक रंडी हु राहुल और मुझे रंडी ही रहने दो ,आजतक मैं जिसके जीवन में आयी उसकी जिंदगी बर्बाद ही की है मैंने,और मैं अब तुम्हारी जिंदगी बर्बाद नही करना चाहती,मेरे जीवन में प्यार हो ही नही सकता,जिसे मैंने प्यार किया वो मुझसे छीन गया,बर्बाद हो गया ..नही नही राहुल ऐसा अब नही होगा,बिल्कुल भी नही “

उसके चहरा मानो किसी बुखार से तप रहा हो,वो तैश में आ चुकी थी,मैं आज उसका ये अलग ही रूप देख रहा था,

“काजल ..”मेरे मुह से आवाज निकलने के बजाय बस फुट कर रोना निकला ,उसने एक बार मुझे देखा

“मैं तुम्हे कमजोर नही बनाना चाहती राहुल किसी भी हाल में नही ...तुम्हे बहुत आगे जाना है तुम बहुत ही आगे जाओगे ..बहुत पैसे और नाम कमाओगे ..”

वो जाने क्या सोच कर उठी और बाहर चली गई मैं बस उसे देखता ही रहा,वो सीधे मौसी के कमरे की तरफ बढ़ने लगी थी………

मैं वही खड़े हुए बस मौसी के कमरे को देखे जा रहा था लेकिन काजल वंहा से बाहर नही आयी..

लेकिन थोड़ी ही देर में कुछ लोग मौसी के कमरे में आये और फिर वो मेरी ओर बढ़ने लगे,मैं देख कर आश्चर्यचकित था की ये हो क्या रहा है,मैं उनमें के कुछ को पहचान भी गया था ये शकील के लोग थे,

“तुम अपना समान बांधो और हमारे साथ चलो ,अब से तुम शकील भाई के साथ रहोगे..”

“क्या??”

मैं बुरी तरह से चौक चुका था,काजल अब भी मौसी के कमरे में ही थी,

“लेकिन..”

“लेकिन वेकिंन कुछ भी नही शकील भाई का ऑर्डर है की तुम्हे अपने साथ ही लाये,जल्दी चलो “वो गुर्राया

मैं बस परेशान सा एक बार फिर से उस कमरे की ओर देखने लगा लेकिन काजल और मौसी दोनों का ही वंहा कोई अतापता नही था,दोनों ही अंदर थे ये देखने भी नही निकले की यंहा क्या हो रहा है,मैने बुझे हुए मन से अपना लेपटॉप और बेग उठाया इसके अलावा था भी क्या मेरे पास ,वो लोग मुझे गली से बाहर ले गए और एक कार में बैठने को कहा…

मैं अब भी सकते में था की आखिर काजल ने ऐसा क्या कह दिया की ये लोग मुझे लेने आगये..मैं जानता था की काजल कभी मेरे साथ कुछ गलत नही होने देगी,मैं ये भी जानता था की वो भी मुझे बेहद ही प्यार करती है और उसने ऐसा मेरे भविष्य के लिए किया है लेकिन मुझे बस एक ही बात खाये जा रही थी कि मेरे बाद आखिर काजल का ख्याल कौन रखेगा…??

शकील के सामने मैं सर झुका कर बैठा था ,ना जाने काजल ने मौसी से क्या कहा था की शकील ने मुझे बुलाया था..

“तो छोटे उस्ताद कैसे हो तुम “

शकील के लहजे से मुझे समझ नही आया की ये ऐसे क्यो बोल रहा है ..

मैंने उसे सर उठा कर देखा वो मुस्कुरा रहा था

“ठीक हु भाई..”

“तो पूरा प्रॉफिट खुद ही डकार जाना चाहते हो क्या ?”

मैं चौका

“क्या?? ये आप क्या बोल रहे है “

“आज तुम्हे मार्किट से बड़ा प्रॉफिट हुआ है और तुमने हमे बताया भी नही “

ओह्ह तो ये बात थी जो काजल ने मौसी को बताई और इसलिए शकील मुझे अपने पास ही रखना चाह रहा है ताकि साला अपने प्रॉफिट पर नजर रख सके

“अरे भाई मैं तो महीने के आखिर में आपको सारा हिसाब किताब देने ही वाला था,आप कहा काजल की बातों में आ गए वो तो नासमझ है उसे कहा हिसाब किताब की कोई समझ है “

मेरी बात सुनकर शकील मुस्कुराया

“हा सही कहा तूने ,इन साली रंडियों के बात में तो आना ही नही चाहिए ऐसे भी काजल तो सबसे बड़ी रंडी है हमारे रंडीखाने की है ना भोला “

उसने पास ही खड़े 50-55 साल के दुबले पतले शख्स को देखा जिसका नाम भोला था,वो साला अपने सड़े हुए दांत निकाल कर हँसने लगा था..

रंडी ...काजल को उसने रंडी कहा था,उस काजल को जो मेरे लिए किसी देवी से कम ना थी ,जिसने मुझे माँ वाला प्यार दिया था,जो मेरा पहला प्यार थी ,जो मेरी मोहोब्बत थी ..

 
मैंने भी तक की अपनी जिंदगी में ना जाने कितने बार कितने लोगो से काजल के बारे में ये बात सुनी थी लेकिन कभी मेरे जेहन में वो दर्द नही उभरा था,मन किया की अभी शकील का चहरा तोड़ दु लेकिन इतनी हिम्मत मुझमें नही थी ,शायद काजल को भी पता था की अगर मैं उससे प्यार करता हु तो ये दर्द मुझे जीवन भर झेलना पड़ सकता है शायद इसीलिए उसने मुझे अपने से अलग करने की सोची थी…

मैं बस अपना सर झुकाए हुए था,काजल को रंडी कहना मुझे बिल्कुल भी पसंद नही आया लेकिन मैं कर भी क्या सकता था,इन्हें ये तो नही बता सकता था की मैं उसके बारे में क्या सोचता हु,और मेरे अलावा किसी को इसकी फिक्र ही कहा थी,यंहा तक की काजल ने भी इसकी क्या फिक्र की उसने तो मुझे अपने से दूर ही कर दिया था…

“सुन बे छोरे,एक बात दिमाग में भर ले ,अगर मुझसे गद्दारी की ना तो तेरी बहन से यंहा रंडी नाच करवाऊंगा समझा ,बहन है की नही तेरी “

शकील की आवाज में एक दबंगई आ गई थी ,मैंने ना में सर हिलाया

“भाई ऐसे ये भी चिकना है ,इसका पिछवाड़ा मारने के लिए ग्राहक मिल जाएगा “भोला की बात सुनकर शकील फिर से बुरी तरह से हंसा फिर थोड़ा गंभीर हो गया..

“कितना मुनाफा कमाया आज तूने “

“भाई 4 गुना लगभग जितना अपने दिया था”

शकील और भोला दोनों की ही आवाज बंद हो गई ,मुझे समझ नही आ रहा था की आखिर ये दोनों चुप क्यो हो गए मैंने सर उठा कर देखा तो वो दोनों आंखे फाडे मुझे ही देख रहे थे..

“साला इतना फायदा तो अपने धंधे में भी नही है बे ,शाबास मेरे शेर ,अब तू एक काम कर की वो रंडीखाना छोड़ और यही रह तेरे लिए आलीशान कमरा तैयार कर देता हु और किसी चीज की जरूरत हो तो मांगने में बिल्कुल भी हिचक मत करना ,तुन आज इतना बड़ा प्रॉफिट किया है तो बोल आज तुझे क्या चाहिए,आज तेरी एक मुराद मैं पूरी कर दूंगा …”शकील के चहरे में खुशी के भाव आ गए लेकिन मेरे लिए ये जगह किसी जेल से कम नही होने वाली थी ..

“अरे शर्मा क्यो रहा है बोल भी दे,दारू पियेगा या किसी रंडी को बुलावा दु ठोकने के लिए”

शकील और भी मुस्कुरा रहा था..

“मुझे एक बार काजल से मिलना है..”

मेरी बात सुनकर वो और भोला दोनों ही मुझे आश्चर्य से देखने लगे ..

“मुझे पता था मुझे पता था मुझे पता था ..”शकील ऐसे हंसा जैसे कोई बड़ा जोक सुना दिया गया हो ,वो जोरो से हँस रहा था जबकि भोला आंखे फाडे उसे ही देख रहा था..

अचानक ही शकील ने मुझे देखा,उसकी हंसी रुक गई थी और आंखों में जैसे अंगारे नाच रहे हो ,वो स्थिर आंखे जैसे अभी उनकी नशे फट जाएगी ,उसके आंखों में असीमित गुस्से का उबार आ गया था, मैं उसकी इस मनोस्तिथि को समझ ही नही पा रहा था वो मुझे खा जाने वाली निगाहों से देख रहा था,ऐसा लगा जैसे वो सच में मुझे आंखों से ही मार देने वाला है,बहुत देर तक वो मुझे ऐसे ही घूरता रहा,मेरे हड्डियों में जैसे कंपन हो गई मुझे लगा की अभी ये उठेगा और मुझे जोरो से एक थप्पड़ लगाएगा या शायद जान से ही मार दे…

लेकिन...उसके चहरे के भाव अचानक ही बदलने लगे उसके होठो में मुस्कुराहट ने जगह ले ली थी ..

“जा आज दिया समय तुझे जितना समय तुझे चाहिए दिया,मिल ले काजल से ,मेरे आदमी तुझे वंहा ले जायेगे …”

उसने बड़े ही शांत भाव से कहा,और अपने आदमियों को मुझे वंहा ले जाने की नसियत दे दी ,भोला के चहरे में असीम आश्चर्य देख मुझे माजरा कुछ समझ नही आया ,मैं उसे सलाम करके वंहा से निकला ही था की भोला की आवाज से मेरे पैर रुक गए,शकील के कमरे से मैं बाहर निकल चुका था और उसके आदमी मेरे आगे थे,मैं वही रुक कर उनकी बात सुनने की कोशिस करने लगा…

“आपने उसे काजल से मिलने की इजाजत दे दी भाई”भोला की बात में के आश्चर्य था…

“जाने दे उसे ,मैं चाहता हु की ये काजल से और काजल इससे इतनी मोहोब्बत करे की इन्हें जुदा करने में मजा ही आ जाए “

उसकी बात सुनकर मैं दंग रह गया था

“जैसे पिछली बार किया था “भोला की हँसने की आवाज आयी,मैं और भी दंग हो गया,अब मुझे काजल की कही हर बात का मतलब समझ आने लगा था ..

“पिछली बार तो वो साली बच्ची ही थी,लेकिन इस बार तो उसे ऐसा तड़फाउंगा की उसे अपने लिए फैसले पर जीवन भर दुख रहेगा,मुझे ना कहा था उसने आज देख दुनिया भर से मरवाते फिर रही है,इस बार उसे फिर से प्यार में पड़ने दे,फिर से उसके दिल को चकनाचूर करने का ये मौका मिला है जाने कैसे दु “

 
शकील की आवाज मुझे किसी दैत्य सी लगने लगी थी,काजल के लिए उसके दिल में इतनी नफरत बेवजह तो नही हो सकती थी,लेकिन उसकी बातों से इसका अनुमान साफ लगाया जा सकता था की वो काजल से कितनी नफरत करता है,वो चाहता था की काजल किसी से बेपनाह प्यार करे और फिर वो उस लड़के को काजल की जिंदगी से जुदा कर दे ,लेकिन क्यो….??

शकील के आदमी मुझसे दूर निकल चुके थे मैं झट से उनकी ओर दौड़ा अब इन सवालों का जवाब तो मुझे काजल ही दे सकती थी……….

********

मैं कमरे के दरवाजे में खड़ा था,अंदर भावनाओ का तूफान खलबली मचा रहा था,मैंने धीरे से दरवाजे को खटखटाया..

“कौन है …”

काजल की वो तीखी आवाज मेरे कानो से टकराई थी ,उसकी आवाज से मुझे समझ आ रहा था की उसका मूड कुछ ठीक नही है ,मैंने कुछ नही कहा था,शकील के आदमी नीचे खड़े थे,शायद मौसी के पास बैठे हो या पान के टपरी में बैठे गपिया रहे हो,शकील ने मुझे काजल से बात करने का पूरा समय दिया था…

दरवाजा खुला ...और …

काजल की निगाह मुझपर ही टिक गई वो थोड़ी घबरा गई थी…

“यंहा क्यो आया है तू शकील को पता चलेगा तो …”

“मैं उसकी परमिशन लेके ही आया हु “वो थोड़ी चौकी फिर कमरे से निकल कर नीचे देखने लगी उसे शकील के आदमी बेफिक्र दिखाई दिए होंगे,वो फिर से मेरे पास थी..

“यंहा क्या लेने आया है चूतिये,यंहा अब तेरा कोई भी नही है,या मेरी लेने आया है “

अब उसके चहरे में फिक्र की जगह गुस्सा था,मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुराया

“अंदर नही आने बोलोगी “

वो मेरे चहरे को देखती रही मैं बिना कुछ बोले ही अंदर चला गया था और उसके बिस्तर में बैठ गया…

वो मुझे अब भी देख रही थी …

“तूने ऐसा क्यो किया काजल ,क्या तुझे मेरे प्यार में यकीन नही था…”

मेरी बात से उसके चहरे में एक अजीब सा तूफान आ गया था...वो थोड़ी देर चुप रही

“कितनी बार कहु तुझे की मुझे प्यार करने का हक नही है ,मैं अब एक रंडी हु बस एक रंडी जो लोगो के जिस्म की आग तो बुझा सकती है लेकिन …….लेकिन किसी को अपने सीने में जगह नही दे सकती ..”

वो थोड़ी झल्लाते हुए बोली लेकिन बोलते ही बोलते उसकी आवाज धीमी हो चुकी थी

“लेकिन क्यो…?क्या किया था शकील ने तेरे साथ जो तू प्यार से इतना डरती है ,तू शकील की फिक्र मत कर मैं उसे देख लूंगा…”

मेरी बात सुनकर थोड़ी देर के लिए उसकी नजर मेरे चहरे में जम गई ,फिर उसके होठो में एक फीकी सी मुस्कान आ गई

“तू शकिल को देख लेगा...मेरे लिए..कितनी बार तुझे कहु की तेरे सामने एक उज्वल भविष्य है ,इस रंडी के चक्कर में उसे खराब मत कर रे..अगर ऐसा कुछ हुआ तो सबसे ज्यादा मुझे दुख होगा,क्योकि इसका कारण मैं ही रहूंगी..”

वो रोते हुए बैठ गई थी मैंने बड़े ही प्यार से उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया वो मेरे सीने में छुपने लगी …

“तुझे नही पता की शकील कितना बड़ा कमीना है ,और वो चाहता है की मैं तुझसे बेपनाह मोहोब्बत करू ताकि उसे तुझे बर्बाद करने में मजा आये,मैं फिर से ये सब नही झेल पाऊंगी राहुल प्लीज्...प्लीज् मेरी जिंदगी से चले जा और फिर कभी मेरे बारे में मत सोचना ..”

उसके आंखों से टपकते हुए मोतियों ने मेरे कमीज को गीला कर दिया था,मेरी आंखों में कोई पानी नही था मैं बस अपनी ही दुनिया में खोया था,जो शकील हमे मिलने नही देना चाहता,जो शकील हमारे प्यार में सबसे बड़ी बाधा है मैं उसे ही मिटाने के ख्वाब देखने लगा था,मुझे पता था की उसके पास मुझसे ज्यादा पैसे है पॉवर है और मैं अभी तो उसका कुछ भी नही कर सकता लेकिन मैं अपनी काजल को भी नही छोड़ सकता था,और काजल को पाने का एक ही रास्ता था ,शकील के नाक के नीचे से मुझे काजल को ले जाना था,मुझे काजल को इस जहन्नुम से आजाद करना था और अब मेरे लिए यही मेरा लक्ष्य था…

काजल ना जाने कब से मेरे चहरे को देख रही थी

“क्या हुआ तू कहा खो गया ..”

“मैं उस शकील को बर्बाद कर दूंगा,तुझे इस जहन्नुम से बाहर निकलूंगा,तू ही मेरी पत्नी बनेगी ,मेरा पहला प्यार है तू मैं तुझे किसी भी कीमत में नही खो सकता …”

काजल के चहरे में आश्चर्य नाचने लगा था,वो थोड़े देर मुझे ऐसे ही देखती फिर …

‘चटाक’

एक जोरदार झापड़ आकर मेरे गालों में पड़ा…

“तू पागल होई गया है ,मैं तुझे समझने की कितनी कोशिस कर रही हु और तू है की मेरी बात ही नही सुन रहा है,वो एक दैत्य है तुझे खा जाएगा,तेरा केरियर तेरे सपने,तेरे माँ बाप के सपने सबको खा जायेगा ,तेरे लिए क्या इन सबकी कोई अहमियत नही है ,तुझे बस अपनी पड़ी है ,क्या चाहिए तुझे मेरा जिस्म ले अभी पूरी कर ले अपनी तमन्ना “

काजल ने अपनी साड़ी का पल्लू अपने छाती से अलग कर दिया ,उसके आंखों में आंसू लेकिन चहरे में तमतमाहट थी …

और मेरे होठो में उसे देखकर बस एक मुस्कान ..

“तुझे भी पता है की मुझे क्या चाहिए,अगर ये ही सब चाहिए होता तो तू मुझे अपने से यू अलग नही करती ..है ना…”

काजल की नजर झुक आई और उसने मेरे सीने को एक जोर का मुक्का मारा और फिर मुझसे सट गई ..

“तू क्यो समझ क्यो नही रहा है ,हमारा यू मिलना खतरनाक हो सकता है.हमारा प्यार हमारी बर्बादी का कारण बन सकती है “

अब वो खुलकर रोने लगी थी,वो मुझे समझाने में असफल रही थी ..

“मुझे सब चीजो की समझ है काजल,और आज के बाद मैं ऐसे तुझसे कभी नही मिलूंगा,मुझे अपने सपनो की और अपने माता पिता के सपनो की भी फिक्र है और मैं उसे पूरा भी करूंगा,लेकिन इन सबका मैं क्या करूंगा जब तू ही मेरे साथ ना हो ……..तू फिक्र मत कर आज के बाद हम कभी नही मिलेंगे,लेकिन तुझे मुझसे एक वादा करना होगा…”

उसने फिर से मुझे असमंजस से देखा

 
“तू जब तक ठीक नही हो जाती तब तक कोई धंधा नही करेगी ,दूसरा बनवारी काका तुझे अगर कोई पैसे दे तो तू चुपचाप उसे रख लेगी ,तीसरा तू डॉ के पास नियमित जाएगी और समय पर अपनी दवाई लेगी ..बस इतना तुझे करना है करेगी ना..”

उसने मुझे झूठे गुस्से से देखा

“मतलब तू नही सुधरेगा “

उसकी वो मासूम आंखे कुछ खिल गई थी जैसे उसे मेरे प्यार और प्यार की ताकत पर भरोसा हो गया हो ,

“मरना और बर्बाद होना इससे ज्यादा वो क्या बिगड़ लेगा मेरा और तेरा हमने इससे भी बत्तर दुनिया देखी है काजल,अब हम और नही सताए जा सकते,अब तो रोने की बारी उनकी है जो हमारे बीच में आएंगे,मुझपर भरोसा कर ,तुझे भरोसा है ना ..”

हम दोनों ही एक दूजे की आंखों में खो गए थे,उसने बस हा में अपना सर हिलाया और मेरे होठो पर अपने होठो को रख दिया,हमारे होठ मिले ,इतने नाजुक होठो को चूमने के बाद भी मेरे जेहन में कोई हलचल नही कौंधी थी मुझे बस उसके प्यार भरे स्पर्श का अहसास हुआ ,वो नाजुक सी छुवन का अहसास ,वो मेरे प्यार की गंध जो मेरे नासिका में गहरा रही थी ,वो भरोसे की महक,वो दर्द के हर कतरे से आजाद होने की खुशी…

मैं उनमे डूब रहा था वो मुझमें डूब रही थी,ना मेरे दिमाग में कोई शकील था ना ही कोई केरियर मेरे दिमाग में थी सिर्फ और सिर्फ मेरी काजल,मेरी काजल जिसे मैं सच में पाना चाहता था,ये पाना क्या होता है मुझे इसका आभास ही था क्योकि काजल तो शायद अब मेरी ही थी,......

बस उसके पास होने के अहसास में ही वो खुशी थी जो दुनिया की कोई दौलत मुझे नही दे सकती थी और ना ही दुनिया का कोई डर मुझसे वो छीन सकती थी……...

मेरे दिमाग में बस काजल और शकील ही चल रहे थे,मुझे भी पता था की शकील कितना खतरनाक और पैसे वाला है,वो कितना ताकतवर है इसका अंदाजा भी मुझे नही था ,इसलिए कुछ भी करने की जल्दबाजी करना बहुत ही बड़ी मूर्खता थी,लेकिन मैं काजल को किसी भी हालत में खोना नही देना चाहता था…

सोच सोच कर मेरा दिमाग फटने लगा था लेकिन कुछ भी समझ नही आ रहा था,आखिर में मैं आंखे बंद करके सो गया,मैंने खुद को बिल्कुल ही ढीला छोड़ दिया कई सारे दृश्य मेरे सामने तैरने लगे थे,

काजल का आंसू से भरा हुआ वो चहरा मेरे सामने आ जाता था,उसकी आंखों में मेरे लिए वो प्यार जिसे देख कर मेरे मन एक सिहरन सी दौड़ जाती थी,वही शकील की बाते भी मेरे दिमाग में घूम जाती,मैंने खुद को शांत किया और बस अपने को छोड़ दिया…

मेरे बचपन का वो दृश्य मेरे आंखों में घुमा...

गांव में मेरे बचपन में जब हम स्कूल जाय करते थे तो एक टीचर थे पांडे सर,पांडे सर बच्चों से कई सवाल पूछा करते थे,एक दिन उन्होंने पूछा था…

“बताओ बच्चों की ताकत,पैसा और दिमाग में सबसे महत्वपूर्ण क्या है …”

सभी बच्चों ने अपने अपने तर्क दिए थे,मैंने कहा था की पैसा सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योकि उसके बिना जीवन नही चल सकता,अधिकतर बच्चों ने पैसे और ताकत को अहम बताया था,तब सर मुस्कुराए और कहने लगे..

“सभी चीजो का अपना महत्व है लेकिन मेरे हिसाब से अगर तुम्हरे पास दिमाग ही नही है तो तुम पैसे और ताकत का गलत उपयोग करोगे,हो सकता है की तुम उसे खो भी दो लेकिन अगर तुम्हारे पास दिमाग है तो तुम पैसा और ताकत दोनों कमा सकते हो,तुम ऐसा कुछ कर सकते हो जिससे पैसा और ताकत दोनों तुम्हारे कदम चूमे..सोचो एक राजा के बारे में उसकी सेना में बहुत से ताकतवर लोग होते है और साथ ही उसके राज्य में कई धनवान लोग भी होते है लेकिन सभी राजा के गुलाम होते है,अगर राजा को जरूरत पड़ी तो उनका उपयोग करता है,सोचो ऐसा क्यो होता है,क्योकि राजा के पास वो दिमाग है की वो पैसे की मदद से ताकत को खरीदता है और फिर उसी ताकत की मदद से पैसे वालो पर अपना कब्जा जमाता है,और अगर राजा मूर्ख हुआ तो तुमने इतिहास में पढ़ा ही है की बड़े से बड़े राजवंश किस तरह से एक राजा की मूर्खता के कारण खत्म हो गए...हमेशा राजा जैसा सोचो ,दिमाग से सबको काबू में रखो यही राजनीति है…”

पांडे सर की बात याद आते ही मैं अचानक से उठ खड़ा हुआ,जैसे मुझे राह मिल गई हो ……..

रात के करीब दो बज चुके थे और मैं अपने लेपटॉप खोले हुए कुछ सर्च कर रहा था,मैंने एक गेमप्लान तैयार किया मैंने अपनी कैलकुलेशन की और मुस्कुराते हुए सो गया……..

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