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रीटा की तडपती जवानी compleet

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रीटा की तडपती जवानी

By- Rita Raut

गतांक से आगे...............................

रीटा का परोपौज़ल सुन कर राजू का ठरक के मारे बुरा हाल हो गया। छछौरी रीटा के ईरादे से बेखबर राजू तो उपर उपर से ही ठरक पूरा करने के चक्कर मे था "बेब्बी अगर किसी को हमारी गुन्ड़ी गेम के बारे पत्ता लग गया तो "? राजू रीटा के मन को टटौलता बोला।

रीटा राजू के गाल गाल रगडती हुई फुसफुसाती और शर्माती बोली "भईया मै किसी को नही बताऊगीं और हम घर पर बिलकुल अकेले हैं। और दरवाजे और खिडकीयां भी तो बन्द है। और भईया वैसे भी अब मै बच्ची थोडी हूं" यह सुनते ही राजू का लन्ड बुरी तरहा से फडफडा उठा।

रीटा बडे ही भोलेपन से बोली "पता है अब मम्मी मुझे सकर्ट के नीचे पेंटी ना पहनने पर डांटती है और कहती है की अब मैं बडी हो गई हू। भईया कया अब मे सचमुच बडी हो गई हूं"?

"अच्छा देखे तो तुम कित्त्ती बडी हो गई हो"? राजू ने हाथ रीटा की रेशमी जाघो को सहलाते सहलाते उपर सरकाने लगा, किन्तु हरामी रीटा ने अपनी जाघो को भींच कर हाथ को मंजिल तक पहुंचने से रोक दिया। रीटा को राजू को सता कर खूब मजा आ रहा था पर रीटा की सांसे भी अब तेज हो गई थी।

"कयों कया हुआ "? राजू चिकनी रीटा की सुडौल जाघो की गदराहट का आनंद लेता हुआ बोला।

"भईयाऽऽऽ कुछ कुछ होता है" हांफती रीटा अपनी गौरी बाहो का हार राजू के गले मे डाल कर मदभरी नीगाहो से राजू को ताकती और मदहोशी मे सरसराती अवाज़ मे बोली।

"देखें कंहा होती है ये कुछ कुछ "? राजू बोला।

"यहाँ " रीटा अपने फूलती पिचकती चुच्चे की तरफ ईशारा कर बुरी तरहा शर्मा कर, हांफती हुई झटके से राजू से लिपटती हुई बोली। अब रीटा का दिल सीने के अंनदर बुरी तरहा से धक धक कर के धड़क रहा था।

"ज़रा देखें तो" यह कह राजू ने रीटा की गले से बाहर उबल पड रहे मम्मे को पकड कर जौश मे आ कर जोर से दबा कर रीटा के लवारीस जवानी की कठोरता का मजा लेने लगा।

"ऊई माऽऽ भऽऽ-ईऽऽ-याऽऽऽ आहऽऽऽ कित्त्ती जौर से दबाया है, आप बडे खचडे हो" रीटा के होठो पे दबी दबी आनंद भरी चीख सी उगल पडी। राजू रीटा के प्यासे मुम्मै को बराबर मसलता रहा और प्यासी मस्ताई हुई रीटा राजू की आँखों मे आँखों डाले होंटो मे अुगली दबाये शर्माती सी चुच्चे खिंचवाती और पटवाती चली गई।

"सीऽऽऽ छोडो दो भईया आऊचऽऽऽ मैं तो आप की बहन जैसी हूँ, ऊईऽऽ कया करते हो भईया मैं तो जाती हूँ, हायऽऽ मम्मीऽऽऽ ओह हायऽऽऽ उफऽऽऽ बहुत मजा आ रहा है दबाईये सीऽऽऽ और जोर से आहऽऽऽ भईया मत करौ यह सब आऽऽऽ ओहऽऽऽ उफऽऽऽऽऽ" उपर उपर से रीटा राजू का हल्का हल्का विरौध कर हाथ हटाने की कौशिश कर रही थी। राजू के लन्ड़ के ईश्क मे बावली हुई रीटा की हां हां और ना ना ने राजू को पागल सा कर दिया था। रीटा के स्तन अब पथर से कठोर हो कर अकड गये थे।
 
रीटा की रगडाई

रीटा ने आज पहली बार किसी मर्द की गौदी मे बैठ कर अपने मम्मै पटवाये थे। अब रीटा का ठरक सातवे आसमान पर था, मुँह लाल और सिर घूम सा रहा था। राजू भी अपने से पन्दरह साल छोटी लौडीयाँ को पा कर हाल बेहाल हो उठा था।

"बेब्बी पहले कभी किसी से ऐसा करवाया है कया"? राजू रीटा के पथ्थर से कठोर निप्पल्लस को चुटकी मे मसला तो रीटा मज़े से दौहरी हो कर चिहुक के राजू से बुरी तरहा से लिपटती और लज्जाती बोली "सीऽऽऽ नही भईया पहली बार करवा रही हू, ये सब हायऽऽ ये आप कया कर रहे हो"?

"मज़ा आ रहा है ना"? राजू चुच्चौ को पीसता बोला।

"जी भईया बहुत अच्छा लग रहा है और बहुत मजा आ रहा है। करीये और करते रहिये, मैं किसी को नही बताऊगीं" रीटा नींद मे फुसफुसाती सी बोली। रीटा ने मस्ती मे आ कर राजू को अपनी सुडौल चिकनी टागो और गौरी गौरी बाहों में दबौच लिया और अपने कोमल अंगौ को जोर खरोश से राजू के जिस्म से रगडने लगी।

"रीटा पलीज़ एक बार अपनी चिडीया तो दिखा दो" राजू रीटा की सकर्ट मे हाथ डालता हुआ बोला।

"हाऽऽ भईया आप तो बहुत गुन्डे हो" रीटा मुह पर हाथ रख कर बोली "हायऽऽ भला मै आपको अपनी कयो दीखाऊ। यहाँ कोई नुमायश लगी हुई है कया"?

"अरे मुझे तो सिर्फ यह देखना है की तुम कितनी जवान हो गई हो"? राजू के हाथ रीटा सकर्ट के नीचे घुस कर रीट के अधनंगे मलाई से मुलायम चूतडो पर ट्ठकनो की तरहा चिपक गये रीटा की कमर सहलाते सहलाते राजू ने झटके से रीटा की कच्छी को झटके से रीटा के केले की तनो सी रानौं से नीचे सरका कर घुटनो तक खींच दी। और फडफडाती रीटा को जबरदस्ती सकर्ट के नीचे से जन्मजात नन्गीं कर दिया।

रीटा शर्म से पानी पानी हो गई और अनमाने स्वर मे ना-नुकर करती बोली "पलीज़ भईया छोडीये, मुझे नन्गी मत करो नाऽऽऽऽ बहुत शर्म आ जायेगी"

"रीटा़ बस एक बार देख लेने दो अपनी पलीज" पगलाया सा राजू रीटा की सकर्ट मे हाथ डालता कर फिरयाद सी करता बोला।

"अच्छा आप जिद्द करते हो तो मे आपको अपनी दिखाये देती हूँ, पर कोई ज्यदा गुन्डी बात मत करना औके"? नन्ही रीटा पलको को फड़फड़ती बहुत ही भोलेपन से कहा।

रीटा ने गौदी मे बैठे बैठे ही बडी ही मासूमीयत से एक एक टांग को सुकोड कर बारी बारी अपनी कच्छी मे से नजाकता से खिंचा, तो राजू की प्यासी आँखों ने रीटा की एकदम नन्गी़ चूत की झलकी देखने को मिली।

चूत को अच्छी तरह से देखने के लिये राजू ने रीटा के घुटने को पकड कर जबरदस्ती रीटा की कन्धौ से लगा कर कुक्ड़ी सा बना दिया तो रीटा ने झट से अपने छौटे छौटे फूल से हाथो की कटौरीया बना कर अपनी टांगौ के बीच चिपका के नाचीज़ चूत के चीरे और बुन्ड के गुलाबी सुराख को छुपाती बोली "आहऽ नोऽऽऽ भईया बहुत शर्म आ रही है"

पर राजू के सिर पर चूत का भूत सवार था "देखो बेब्बी अगर तुम मुझे अपनी चिडीया दिखाओगी, तो में तुम्हे अपना तोता दिखाऊगां"

रीटा शक भरी निगाहों से राजू को देखती बोली "सच्चीऽऽऽऽऽ भईया"?

"सच्ची बेब्बी, तुम्हारी कसम और चाहे तुम उस से लालीपौप लालीपौप भी खेल लेना और मैं किसी को नही बताऊगां" राजू हांफता सा रीटा के चुच्चे को सहलाता बोला। लालीपौप सुन कर सुन्दरी रीटा की आखौ मे चमक आ गई और उस ने नीचे से हाथ हटा कर शर्मा कर अपना मुंह हाथो मे छुपा लिया। कया अदा थी लौंडीया की, चूत भी दिखा रही थी और शर्मा भी रही थी।
 


राजू के सम्मोहीत सा ईगल-सप्रेड हुई गौरी चिट्टी रीटा की बला सी खूबसुरत लबालब रस से भरी नन्ही सी सुडौल आमन्त्रण देती फुद्दी और रबड बैंड सी टाईट गुलाबी गाँड का आँखों ही आँखों में चौदने लगा। रोमवहीन गन्जी फुद्दी के रिक्त्त्म चीरे से रीटा का कंपकपाता छोटा सा कागजी बादाम सा दाना राजू को जैसे लल्कार दे रहा था। राजू को लगा के वो अब बिना हाथ लगाये ही झड़ जायेगा। दृश्य देख कर राजू का बिफरे हुआ लन्ड ने पानी के कई तुपके छोड दिये "ओहऽऽ रीटा यू आर सौ बयूटीफूल"

जैसे ही राजू का हाथ शरारत करने के लिये आगे आया, रीटा ने झटपट फुद्दी और गाँड को वापिस अपनी टांगो मे भींच लिया और बोली "नो नो भईया दिस ईज़ नाट अलाउड। अब आप अपना तौता दीखाओ, नही तो ये गेम यहीं खत्त्म" रीटा राजू को प्यार से धमकाती हुई बोली।

"ओके ओके, तुम खुद ही देख लो और जौ जी मे आये कर लो" राजू ने बात बिगड़ने के डर से सबर से काम लेन ठीक समझा।

"ओह भईया आई लव यू एन्ड यू आर सो क्यूट" रीटा राजू की बात सुन कर खुशी के मारे चिल्ला सी पडी और राजू की गाल पे पटाक से एक चुम्मा ठोक दिया। रीटा घुटने मोडे राजू के आगे कारपेट पे बैठ गई और चरर्ऽऽऽऽ की अवाज़ से हसीन रीटा ने कांपते नाजुक हाथौं से राजू की पैंट की जिप्प खींच दी। राजू का कच्छा नीचे खिचंते ही राजू का आठ ईंच्च लंबा लन्ड फटाक से रीटा के मुह पर लगा तो रीटा की डर के मारे चीख निकल गई "ऊईऽऽऽऽऽऽऽऽमांऽऽऽ ईत्त्ता बडा हाय रब्बाऽऽऽ मैं मर जांऊऽऽऽ"

खुली हवा मे आठ ईन्च लन्ड झटको के साथ उपर उठता चला गया और बुरी तरह से लोहे सा टना टन छत की तरफ अकडा गया। मौटे लन्ड का गीली गीली जामनी गुलाबी टोपी के उपर खूब बडा सुराख था। खून की तेज़ी से मजबूत लन की नसै फूल गई और लन हवा मे ही झटके खाने लगा। लन्ड़ के नीचे खूब बडे बडे सावले सलौने ट्टटौ की रेशमी थैलियां।

रीटा के जीवन का आज सब से महत्वपूर्ण दिन था। अंगूठे चूसने की उमर मे रीटा को शानदार और जानदार लन्ड चूसने को मिल गया था। सम्मोहीत सी रीटा झटके खाते लन्ड़ को लपक के अपने छौटे छौटे मखमली हाथौ मे ले कर लौड़े की उपरी चमड़ी को नीचे सरका दी, तो राजू की सिसकारी ही निकल गई। सख्त और सुलगते लौड़े के सुपाड़े से निकली सुगंधित हवा का झौंका रीटा के नथुनौ में घुस कर रीटा का दिल बाग बाग कर गया। रीटा के फूल से नादान हाथौं की गरमी और नरमी पा कर राजू को लन्ड़ ने कम्पकपां कर झरझरा के थौडा सा पानी छोड दिया।

मदहोशी में राजू की आँखें बंद सी हो गई। रीटा ने लन पर अपनी छोटी सी मुट्ठी कस कर उपर नीचे करने लगी। अब रीटा की मंजील करीब थी लन्ड़ की खूबसूरती के आगे अब रीटा राजू को भूल चुकी थी। रीटा अपने हौंटो पे भूखी बिल्ली की तरहा जीभ फेर रही थी और रीटा की हल्की भूरी आँखों मे बला की चमक थी।

तभी रीटा ने अचानक झटके से राजू के लन्ड़ की टोटनी पे अपने लाल लाल रसीले हौंट चिपका दिये और राजू की आखो मे आखे डाल कर चुसड़ चुसड़ कर लालीपौप की तरहा चुस्सा मारने लगी। रीटा ने अपना छोटा सा मुह पूरा खोल कर राजू का लन्ड़ अपने गले तक अंदर ले लिया तो राजू के मजे की सीमा न रही और राजू चीख पडा।

राजू की चीख सुन कर उत्तेजित रीटा ने लन्ड़ पर अपना मुह आगे पीछे करने लगी, तो राजू ने घस्से मार मार का रीटा के सुन्दर मुख को चोदना शुरू कर दिया। राजू ने लन्ड़ को रीटा के गले तक ठोक दिया। रीटा की जीभ रह रह कर राजू को लन्ड़ पे वार पे वार कर रही थी। कभी कभी रीटा नीचे से उपर तक राजू के औजार को प्यार से दाँतों से रगड देती। अब रीटा खुल कर और बुन्ड तक जोर लगा कर राजू का लन्ड चुसड चुसड कर के चूसने लगी। रीटा ने अपनी जीभ से लन्ड की गरारी को छेड कर पूरे जोर से चुस्सा मारा तो लन्ड ने भरभरा कर सारा रस रीटा के मुह मे छोड दिया। प्यासी रीटा लन्ड की झडन का कतरा कतरा पीने मे मस्त हो गई।
 
रीटा की गाँड की चुदाई



हांफते और करहाते हुए, बड़ी ही मुशकिल से ज़बरदस्ती जोर लगा कर राजू ने रीटा के मुँह से अपना लन्ड़ को झटके से "प्लापऽऽ" की ऊंची आवाज़ के साथ बाहर खींचा। ऐसा लगा की जैसे शैम्पयन की बौतल से कार्क हटाने से आवाज आई हो। लन्ड़ का सुपाड़ रीटा के मुख चोदन से गुलाबी से जामनी हो गया। और रह रह कर झटके खा रहा था। दम तोडते लन्ड़ ने आखीरी दो पिच्कारीयाँ रीटा के सुन्दर सलोने चेहरे पर पडी। वासना से अन्धी हुई रीटा हाँफती सी अपनी साप सी लम्बी और गुलाबी जबान को बाहर निकाल कर सड़प सड़प की आवाज़ से राजू के लन्ड़ की सफेद मलाई को भूखी बिल्ली की तरह चाट गई।

राजू के लन्ड़ के कस बल निकाल रीटा की आँखों मे अज़ीब सी सन्तुष्टी थी। पर रीटा की चूत की हालत बद से बदतर हो गई थी। रीटा की जाघें घुटनौ तक तर बतर थी और पनयाई हुई चूत से पानी अब बह सा रहा था। रीटा अपना सिर पकड कर कारपैट पे ठेर होती बोली "हायऽऽऽ भईया अब मे कया करू" रीटा अपने चुच्चे को मसलती और चूत को रगड़ती और कसमसाने लगी। रीटा वासना मे खुमार में अपनी कंदली जाघे रगड़ती सिसकती सी बोली "सीऽऽऽऽ भईया ऐसे तो मैं पागल हो जाऊ गीं"

हाँफनें सी रीटा की नंगी लौहार की धौंकनी सी फैलती सुकुड़ती छातीयाँ छत को छूने को बेताब लग रही थी। याकूत से सुर्ख लाल निप्पल्लस अकड कर एक एक ईंच्च लम्बे हो चुके थे। रीटा ने अपने घुटनौ को उपर उठ कर बेशर्मी से चौड़ा किया तो गजब की खूबसुरत चूत और चूत की पड़ौसन ने सारे कमरे मे जैसे रौशनी सी फैला दी। चूत एकदम सफाचट, जुगनु सी जगमग करती चिकनी चूत पर रौयों का नामो नीशान न था। भला खेलने के मैदान मे घास का कया काम।

राजू ने रीटा की दहकती और जलती जवानी को खींच कर अपने आगौश मे ले लिया गौदी में बैठाने से पहले ही समझदार रीटा ने खुद ही अपना सकर्ट उपर उठा कर अपनी नंगे रेशमी अंगो से राजू का लन्ड़ मसल सा डाला। रीटा ने अपनी गौरे बाजू राजू के गले मे डाल कर सीऽऽऽ सीऽऽऽ करती ज़ौर ज़ौर से अपना जलता और गीला यौवन रगड़ कर राजू के लन्ड़ खडा करने लगी|

राजू ने धधकती सुलगती जवानी को बाहो मे ले कर ताबा तौड़ पटाक पटाक से चुम्बन रीटा के गुलाबी गालौं पर जड दिये। रीटा ने भी राजू पे जवाबी चुम्मीयोँ की बौछार सी कर दी। रीटा को अपनी गाल चुसवा कर बहुत ही मजा आ रहा था। पुच्च पुच की लम्बी लम्बी गीली गीली आवाजो से और गीली फुद्दी की रगड से लन्ड़ का ठरक बुलल्दीयों पर पहुंच गया। निहाल और बलिहारी हुई रीटा अब राजू से अगं प्रतयंग पर गीली मुहरे ठुकवा रही थी।

राजू अब रीटा के नीचे वाले हौट को चूसने और काटने लगा, तो रीटा ने अपनी पिंक जुबान बाहर निकाल दी। राजू ने भी झट से रीटा की जुबान को अपने मुह मे सटक कर बुरी तरह चूसने लगा बीच बीच मे रीटा भी राजू की ज़बान को अपने मुह मे खीच कर जवाब दे देती। तो कभी कभी दोनो की जुबाने मिल कर डांस सा करने लगती। रीटा बुरी तरह राजू की जुबान को बहुत बुरी तरह वहशी हो कर चूस रही थी। एक बार राजू को लगा कि अगर उस नें जुबान को धीला छोडा तो शायद रीटा राजू की जुबान को पी ही ना जाये।

रीटा की मलाई सी गुदगुदी गाँड और गीली सटीमिंग चूत की घिसन से राजू का लन्ड़ फिर से तुनके लगा कर खडा होने लगा। रीटा ने राजू का सरसराते लन्ड़ अपनी रेशमी मुलायम जाघो मैं दबौच कर मसलने और पीसने लगी, तो राजू हाय हाय कर उठा। बावली रीटा पटाक की अवाज़ से चुम्मबन तौड़ती और हाँफनें हुई राजू के कान मे फुसफुसाती बोली "भईया आप को छोटी छोटी स्कूल गर्ल्स से ऐसी बाते करते शर्म नही आती"?

"बेब्बी अब तुम जवान और समझदार हो गई हो" राजू बच्ची रीटा के नंगे मुम्मौ पे चुम्बन ठोकता और सकर्ट के नीचे हाथ आगे बड़ता बोला।

रीटा राजू के आगे अपने मुम्मै नचाती और सताती सी बोली "पर भईया मैं तो आप की छोटी बहन जैसी हूँ "।

"अच्छा तो मैं यह सब नही करता" यह कह राजू ने अपना हाथ वापिस खींच लिया तो रीटा झट से ठुनक कर झूटे गुस्से से बोली "अरेऽऽऽ मैने ऐसा तो नही कहा था"।

अब तो राजू ने अपनी हथेली रज़ामंद रीटा की पानी पानी हुई चूत से चिपका दी और उपर से रीटा का एक चुच्चे की टौटनी को हौंटौं में ले जोर से पीने लगा। अब तो रीटा अपने आप को भूल चुकी थी रीटा ने अपना पूरा का पूरा मुम्म राजू के मुह मे ठोक दिया। रीटा का सारा बदन कमान की तरह अकड गया और झनझना उठा।

अनजाने मे ही चुदास मस्ती मे आई रीटा के मुह से निकल गया "ऊफऽऽऽ बाबा रेऽऽऽऽ बाबा भईयाऽऽऽ आप तो बड़े बहनचौद निकले। बहनचौद भाई अगली बार मैं राखी तेरे पप्पू पर ही बांधूगी"। फिर राजू की अुंगली नीचे सरकती हुई रीटा की फूल सी तूफानी जवानी की नरमी, गरमी और गहराई भांपने लगी।

रीटा ने पूरी अुंगली गपकने के लिये अपनी चूत को ठीला दिया और कमर को आगे और उपर को उछालने लगी। अुंगली जड़ तक अन्दर लेने को बाद रीटा ने अपनी टाईट चूत की मखमली फाकौं से भींच कर टाँगो को बंद कर के राजू के हाथ को जैसे हमेशा के लिये कैद कर लिया। जब राजू ने रीटा के जी सापाट को गुदगुदाया तो सवाद से रीटा का पौर पौर पिनपिना उठा। रीटा जोर से सिसकारा मार राजू की अुंगली को अपनी जानदार फाको मे भींचती खौलती और चूतड़ौ पे राजू के डंन्डे से लन्ड़ की सखती का मजा लेती बोली "सीऽऽऽऽ भईया उफ आप बहुत ज़ालिम हो सीऽऽऽ हाय हाय भईया मैं तो एसे मर जाऊ गीऽऽऽ सीऽऽऽऽ कुछ करीये नाऽऽऽ" मजे की ज्यादती से रीटा बडी अदा से अपने नीचे वाले हौंट के कोने को दांतौ मे दबा, दोनो हाथौं को ढीला कर जोर जोर से झटकने लगी।

दोस्तों कहानी अभी बाकी है कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना

Rita Raut

क्रमशः...................

 


रीटा की तडपती जवानी--4

By- Rita Raut

गतांक से आगे...............................

राजू वासना के जवालामुखी मे धधकती रीटा की हालत ताड गया़ अब राजू खुद भी रीटा को छोडने वाली हालत मे नही था। रीटा को धुमा कर रीटा की पीठ अपनी तरफ कर के रीट के शर्ट से बाहर आये आज़ाद चुच्चौ में अपनी अगुलीया़ धंसा दी और पौं पौं करने लगा। इस हालत मे तो यह चिकनी चिडीया की गाँड तो दे ही देगी, ये सोच राजू ने रीट की गाँड को उपर उठा कर चूतडौ को दाँतौं से कचौचने लगा। राजू की दंदीयां तो उलटी हईु रीटा पे कहर बन के गिरीं। साथ मे ही राजू ने रीटा की गाँड को अपनी जबान से गुदगुदा कर ठेर सारा थूक से गीला कर दिया। और अपने लन्ड़ का गरम सुपाड़ा रीटा की चूत के पानी से तर गाँड पर टीका दिया तो नादान रीटा सिहर कर अपनी कुंवारी गाड को जौर से भींच कर लौड़ का रास्ता रोक बोली "भईया मै तो बहुत छौटी हूँ "

राजू रीटा की गाड के सुराख पर परेशर बडाता बोला "चिन्त्ता मत करो बेब्बी, इस हालत में तुम्हारी शदाई चूत या गाँड किसी गधे का लन्ड़ सटक सकती है और फिर थूक से मेने तुम्हारी एकदम गीली कर दी है" रीटा पीछे मुड़ कर राजू की तरफ देखती मासूमीयत से बोली "पर भईया कहीं मेरी फट गई तो"?

राजू बोला "बेबी बहुत प्यार से मारूगा और फिर मैं तो कुछ कर भी नही रहा। जो भी करना हे वो तुम्ही को करना है"

राजू की झूठी तसल्ली से रीटा ने अपनी गाँड को आहिस्ता आहिस्ता ठीला छोड दिया। रीटा की चूत थूक और राजू की अपनी लेस से लिबडे लन्ड़ की टौपी "पक्क" की आवाज़ से रीटा की गाँड मे घुस गया "आईऽऽऽऽऽ" हल्की सी मीठी दर्द की लहर और मजे़ से रीटा चीख सी उठी और गाँड को दुबारा से भींच लिया। ईतनी छोटी, टाईट और बच्ची गाँड में राजू का लण्ड पिन पिना उठा।

परन्तु तुरन्त ही रीटा ने चुदास मस्ती मे अपनी गाँड को ठीला छोड अपने दात भींच कर राजू के लोह लन्ड़ पर बैठती सी चली गई। राजू का दहकता सरीये सा लौडा़ रीटा की बेहद टाईट गाँड की मखमली दीवारो को रगड़ता शैन शैन अन्दर घुसता चला गया। गाँड के रेशमी चुगंल मे फसा लौडा हिनहिना कर बिफर उठा। बार बार रीटा राजू के लौडे को अपनी गाँड को भींच कर चूस सा देती थी तो राजू को अपनी नानी याद आ जाती थी।

जैसे तैसे खुद रीटा ने लगभग तीन चौथई लौड़े को अपनी गाँड मे सटक ही लिया और हाँफती बोली "आहऽऽऽ बस भईया और नही ले सकती मैं। आप का तो बहुत ही मोटा और लम्बा है" रीटा पीछे मुड़ कर राजू की तरफ देखती बोली, तो शैतान राजू ने मौका देख रीटा के होंटो अपने होंटो मे प्यार से दबा कर चूसने लगा और साथ ही रीटा की पतली कमर पकड कर नीचे दबा कर और नीचे से लगातार एक के बाद एक तीन जबरदस्त धक्के लगा कर रीटा की गाँड मे पूरा का पूरा मुगदर सा लन्ड़ पेल दिया। राजू की मजबूत बांहो मे रीटा किसी घायल चिडीया सी फड़फडा़ के रह गई। बेचारी बेबस बिलबिलाती रीटा की चीख चुम्बन मे ही घुट के रह गई। पीडा से नन्ही रीटा की आंखो मे मोटे मोटे आंसू गुलाबी गालों पर लुडकते चले गये।

राजू के लन्ड़ पर रीटा की गाँड टाईट रबडबैंड की तरहा चढी हुई थी। रीटा करहाती और रोती हुई बोली "आहऽऽ ईऽऽऽऽ मेरी फट गई आहऽऽऽऽ मुझे नही करवाना ये सब भईया छोड दो मुझे" गिडगिडाती रोती रीटा ने दर्द की वजहा से अपने दौनौ होटौं को दाँतों मे दबा कर चीखौं को रोकने की असफल कोशिश कर रही थी।

परन्तु ठरक से अन्धा राजू अडीयला सांड़ की तरह काबू मे आई हुई नई कबुतरी रीटा को जबरदस्ती बालौं से पकड रीटा का मुह कारपैट पर लगा दिया,तो रीट की गाँड अब छत की तरफ उठ गई और राजू चीखती चिल्लाती रीटा के दबौचे हुऐ अपने लन्ड़ को थौड़ सा बाहर खींच कर दुबारा पूरा का पूरा अंदर ठौक दिया।

रीटा का सकर्ट अब उलट चुका था और रीटा की कसमसाती गोरी गोरी मखमली गाँड बाहर झाँक रही थी। सकूल ड्रैस और कुत्त्त्तीया सटाईल मे रीटा और भी सैक्सी लगने लगी थी। राजू ने बेरेहमी से शैतान लौडीयाँ की गाँड मारने लगा। रीटा गाँड को टाईट कर राजू के लन्ड़ को रौकने की असफल कोशीश करने लगी तो राजू ने तैश मे आ कर रीटा के उचके हुऐ चुतडौं पे खींच कर पूरे जौर से पाँच छ: थप्पड़ जमाते हुए बोला "साली फाड़ के रख दुंगा, अगर अपनी गाँड को टाईट किया तो" राजू के हाथ रीटा की मलाई सी गौरी गाँड पर छपते चले गये साथ मे राजू ने ठेर सारा थूक रीटा गाँड पे थूक दिया। जल्दी की राजू का आगे पीछे होता मस्त थूक से सना लन्ड़ रीटा को मस्ती देने लगा।
 


आखीर मुकाबिला करने को तैयार रीटा ने दाँत भींच कर जैसे तैसे टेबल का पाया पकड और पोजीशन सम्भाल कर अपनी शानदार गाँड को और उपर उठा दी। राजू के ठप्पौं की वजहा से टेबल और सौफे की चरर्ऽऽऽ चरर्ऽऽऽ की चरमराहट होने लगी। अब नन्ही रीटा भी अपनी गाँड को लौडे़ की ताल से ताल मिलाने लगी राजू भी अब रीटा की गाँड से पूरा का पूरा लन्ड़ खींच कर धक्के पे धक्के मारने लगा तो रीटा मजे के मारे चिल्ला उठी। सुन्दर रीटा की उछलती सिल्की गाँड को देख राजू उत्त्तेजित हो निगौड़ी छौकरी की बुंड को ओर जोर से मारने लगा।

अब तक बदमाश रीटा ने राजू के शैतान लौड़ पे पूरी तरहा काबु पा लिया था। रीटा लौड़े को अपनी गाँड में भींच भींच कर पीसने लगी। जब राजू धक्के मारता तो रीटा अपनी गाँड को बिलकुल ठीला छोड कर गाँड पीछे ओर उपर उछाल देती और जब राजू लौड़े को बाहर खींचता तो रीटा अपनी टाईट गाँड को जोर से सुकौड़ कर लौड़े को भींच सा लेती। लन्ड़ व गाँड की लड़ाई की घचर पचर और रीटा की गाँड पे राजू के मन्ज़ी तौड़ घस्सै की धपा धप की आवाज ने रीटा के बचे खुचे होश उडा दिये। जंगली चुदाई से चूत डबडबा गयी और सुराख से टप टप पानी बहने लगा। राजू का खम्बे सा लम्बा लौड़ा अपनी नन्ही सी गाँड मे गपक कर रीटा का चूत मरवाने का आत्मविश्वाश बुलंद हो गया था। राजू ने पूरे आधे धण्टे तक टेबल की चरमराहट को बनाये रखी। चुदास से पगलाई और मस्ताई हुई रीटा "डफली वाले डफली बजा" की परोडी गाने लगी जो कि रीटा ने मौनिका से सिखी थी -


लौड़े वाले लन्ड़ दिखाऽऽऽऽमेरी गाँड तुझे बुलाती है आऽऽऽऽ

तू चौदे मे चुदाऊऽऽऽऽऽ

गाँड मे गपक लूंगी

चूत मे सटक लूंगी

कर लूंगी झट ईस को अंदरऽऽऽ

लौड़े वाले लन्ड़ दिखाऽऽऽऽ

मेरी गाँड तुझे बुलाती है आऽऽऽऽ

तू चौदे मे चुदाऊऽऽऽऽऽ



हवस मे अन्धी रीटा अपने आप को भूल कर अश्लील हो गई और बकबक करने लगी "भईया और जौर से धक्के मारीये ईऽऽऽऽ आहऽऽऽ आह भईया ऊईऽऽऽ मांऽऽऽ हायऽऽऽ रेऽऽऽ मैं चुद गई रे मेरी मम्मीऽऽऽऽ सीऽऽऽ बडा मज़ा आ रहा है। भईया अच्छी तरह से चौदीये, फाड़ दीजीये मेरी निगौड़ी गाँड को ऊफऽऽ ईसऽऽऽ ईसऽऽऽ बहुत सताती है साली मां की लौड़ी, आह मेरे गाँडू भईया लूट लो मेरी जवानी, ओर जोर से, येस ओर जोर से वाहऽऽऽ फाड डालोऽऽऽ चौदू,चौद अपनी बहन की चूत कोऽऽऽ, कैरी आन डौन्ट स्टाप यू फकर बास्टर्ड़" रीटा जैसी मासूम स्कूल गर्ल के मुँह से शानदार गालीयाँ सुन कर राजू का ठरक चरम सीमा तक पहुच गया।

"लेऽऽऽ माँ की लौड़ी, हाय मेरी जलेबी, हाय मेरी रस-मलाई, ये ले भौंसड़ी की, चौद के रख दूंगा, फाड़ के रख दूंगा, साली रंडी कुतीया, तेरी चूत पर बहुत चर्बी चढ गई है, ले हरामजादी ले " राजू ने रीटा की गुदाज और गदराई हुई कमर मे अुंगलीया धंसा दी और लौंडीयाँ उछल उछल कर जानलेवा चोदा मारने लगा। ज़ालिम राजू ने आखिरी कमरा हिला देने वाले आटोमिक धक्के रीटा सम्भाल ना पाई और दोनों चूदाई करते करते कारपेट पर ठेर हो गऐ। गिरने से राजू के लन्ड रीटा की गाँड में जड तक दुबक गया और दोनो ठरक की चरम सीमा पर पँहुच गये। राजू के लन्ड़ ने फव्वारै छौडने शुरू किया, तो रीटा की चूत ने भी झरझरा कर बिना चुदे ही पानी छोड दिया। मजे से राजू ने रीटा को इस कदर बाहों मे दबाया, तो रीटा को लगा की उस के उपर से बुलड़ोज़र निकल गया हो और हडीया जैसे चरमरा सी उठी।

इस ताबा तौड़ चुदाई से रीटा का रौम रौम पुलकित हो गया और उस की आँखों मे खुशी के आंसू छलछला पडे। रीटा ने कुत्तियाँ की तरह राजू के लन्ड को अपनी नन्ही सी गाँड को सुकोड कर लन्ड को निचोडने लगी। थोडी देर बाद राजू ने पटाक की आवाज से अपना लन्ड़ बाहर खींचा तो गुलाबी गाँड हुच हुच कर लौड़े की झाग वाला पानी उगलने लगी।

वासना का तूफान खत्त्म होने पर राजू के नीचे दबी रीट हांफती और अपनी गाँड सहलाती बोली "आहऽऽऽ भईया आप तो बडे ही कसाई निकले उफऽऽऽ सारा बदन तोड़ मरोड के रख दिया हायऽऽऽऽ कितनी जोरो के मारी है मेरी उफऽऽ"। राजू रीटा की गाँड पर चटाक से चपत जमाते बोला "बेब्बी तुम भी तो ये उछाल उछाल कर मेरे लन्ड़ के परखच्चे उड़ने पे तुली हुई थी"। चुसी और चुदी हुई रीटा बुरी तरहा शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथो मे ढांप कर राजू की छाती मे छिपने की कोशिश करने लगी।
 


रीटा की चूत की ठुकाई




रीटा को लुत्त्फ तो बहुत आया पर पूरी सन्तुष्टी नहीं हुई। बेचैन रीटा को लगा कि अगर उसने आज चूत नही मरवाई तो वह पागल हो जाये गी दूसरी तरफ से रीटा राजू के मोटे और लम्बे लन्ड से डर भी रही थी। खडे लौडे का साईज़ सोच कर रीटा की चूत थर थर कांप उठती थी।

राजू से अलग हो कर रीटा शीशे के सामने खडे हो अपनी हालत सुधारने लगी। रीटा ने अपने मुसली मुचडी और गीली सकर्ट और शर्ट उतार फैंकी और जन्मजात नंगी हो गई अब रीटा के जि़स्म हाई हील और जवेलरी के ईलावा पर एक धज्जी भी नही थी। राजू को खड़की और चुदी हुई रीटा और भी मस्त और सैक्सी लगने लगी। रीटा के गौरे गौरे बदन पर राजू के चुम्बनौं की मोहरे, दांतौ के नीले नीले कचौके, हाथो के ठप्पे अुंगलीयौ की धसावट, घुटनों और कोहनीयोँ पर कारपैट की रगड के लाल निशान गीली जांघें बहुत ही लुभवनी लग रहीं थीं। बिखरे उलझे बाल आखो का फैला काज़ल और मेकअप, गीली चूत, रिसती गाड, चुसे हुऐ चुच्चे और सूजे हौंट तो देखते ही बनते थे।

राजू का लन्ड़ दुबारा छत की तरफ तना देख रीटा डर कर चीख मार के भागने लगी, तो राजू ने रीटा को उठा किंग साईज़ बैड पर पटक दिया और रीटा की अंगुलीयों मे अंगुलीयां पिरो कर फडफडाती रीटा को दबौच कर चित कर लिया। राजू रीटा के घुटने मोड कर रीटा को कंधौ से मिला दिये और बोला "जाती कहा है साली, मां की लोडी अभी तो तेरी मां की चूत भी मारनी है"

बेचारी तीन-फोलड हुई रीटा किसी घायल हिरणी की भांती छटपटा कर रह गई "आहऽऽऽ नही छोडो मुझे, प्लीज़ छोडो नाऽऽऽ मैं मर जाऊगी आप का बहुत बडा है"। पर जब राजू ने अपना लन्ड़ का सुलगता सुपाड रीटा की नन्ही चूत के चीरे पर आगे पीछे फिसला तो रीटा का बदन ढीला पड गया और ना नुकर हां मे तबदील हो गई। रीटा मचलने के बहाने अपनी फडफडाती चूत को राजू के लन्ड़ को चूत मे गपकने लगी, तो राजू ने शरारत मे लन्ड़ को पीछे खींच कर रीट को सताने लगा तो रीटा ने राजू की गाल पर जोर से चपेड लगा कर गन्दी गन्दी गालीयां बकने लगी "बहनचोद मां के लोडे अब डाल अंदर और चोद अपनी बहन को, साले मादरचोद, चोद नाऽऽऽऽ"।

राजू ने रजामंद रीटा को जैसे ही ठीला छोड़ा तो रीटा ने झट से राजू का लन्ड़ पकड कर अपने चूत के मुह पर सटा के नीचे से खींच के धक्का जमा दिया। उपर से रीटा ने अपनी हाई हीलस राजू के चूतडो मे चुभो कर राजू को अपनी तरफ दबा लिया। पलक झपकते ही राजू का लन्ड़ का आलुबुखारे सा सुपाड रीटा की चिकनी चूत मे था। उपर से रीटा ने राजू के लन्ड के सुपाड़े को चूत से चिकोटी काटने लगी। रेशम सी मुलायम चूत तन्दूर सी गरम और दहक रही थी। और पहली चुदाई के पानी से अभी भी पच्च पच्च गीली थी।

राजू का लन्ड़ अब रीटा की चूत की झिल्ली पर दबाव डाल रहा था पल भर के लिये दोनों ठहर से गये और राजू ने रीटा की झील सी आँखों मे झाँख कर पूछा "चोदू"?

"चौदीये नाऽऽऽ" चुदास की ठरक भाव विभोर हुई रीटा शहद से मीठे स्वर मे बोली। पीडा के डर से आखे भींच और थुक निगलती रीटा ने टांगो ने घडी के दस बज कर दस बजा दिये।

राजू ने रीटा की चीख को दबाने के लिये रीटा के होंटों को फिर अपने होंटों में दबा लिया और चूसने लगा। राजू ने कडियल लन्ड़ को बाहर खींच कर वापिस रीटा की चूत मे पूरे वेग से वापिस धकेल दिया। लन्ड राजा अपने ट्टटो की सेना समेत, रीटा रानी की चूत की सील को तोडता और धज्जीया उडाता हुआ, चूत की मुलायम दीवारो को बेरहमी से रगडता हुआ अंदर और अंदर और अंदर घुसता चला गया।

दर्द की वजह से रीटा बुरी तरह से राजू की मजबूत बाहों मे फडफडाई और उस की आँखें बाहर उबल पडी। राजू अब भी बुरी तरह से रीटा के होंटों के चबाये और चूसे जा रहा था। और रीटा की चीखे गले मे हि घुट के रह गई थी और वो घूं घूं की अवाजे निकलने लगी। रीटा अपनी छोटी छोटी हथेलीयों से राजू को अपने उपर से धकेलने की असफल कोशिश कर रही थी, पर राजू ने लौडियां को अपने शिकंजे मे बुरी तरहा से जकड रखा था। रीटा की चूत से निकलता पानी मे हलका सा खून भी आने लगा था। पीडा मे करहाती रीटा को मौनिका की बात याद आ गई की चूत और दूध गर्म हो कर ही फटते हैं और दोनो के फटने की अवाज नही आती बस फट जातें हैं।

लगभग दो मिनट तक राजू दर्द से बिलबिलाती और करहाती रीटा को बाहो मे दबाये उस की चूत की टाईटनेस, गरमी और नरमी का मजा लेता यू ही पडा रहा। जैसे ही चूत और लन्ड की गरमी एक हुई और बेहाल हुई रीट ने निढाल सी हि कर चूत ढीली छोडी, तो कसाई राजू ने अधमुइ रीटा को रूई पिजंने वाली मशीन की तरहा पिजंना शुरू कर दिया। रीटा के उपर की साँस उपर और नीचे की साँस नीचे रह गई। पहले एक मिनट तो रीटा को लगा वह मर जायेगी, परन्तु तरुन्त ही रीटा का दर्द काफूर हो गया और वह आलौकिक सवर्गीया सुख मे विचरण करने लगी। चुदती चूत ने ठेर सारा पानी उगल दिया, तो लन्ड बिना तकलीफ अंदर बाहर घचर पचर की मीठी मीठी आवाज के साथ चूत में अन्दर बाहर फिसलने लगा।
 


अब राजू ने छमक छल्लो को चुच्चीयों से पकड कर ठप्पे पे ठप्पे मारने आरम्भ किये, तो रीटा की ठरक सातवें आसमान पर और मस्ती अंतिम छोर तक पहुच गई। अब तो बेशर्म रीटा अपनी चूत को पूरी तरह से ठीला छोड कर गाँड को एक एक फुट उपर उछाल देती। तब राजू तैश में वेग से धक्का मार कर उस की उछाल को दुगने वेग से दबा देता, तो रीटा गुदगुदे बैड मे धंस सी जाती। फाईनली लन्ड का मुँह, पीडा से बिलबिलाती रीटा की बच्चेदानी मे फंसा दिया।

राजू का लन्ड जब जब रीटा की चूत मे अंदर जाता तो राजू के लन्ड की गरारी पर चूत की मुलायम दिवारो की रगड से लन्ड़ मजे़ से गदगदा उठता और राजू बकरी सा मिनमिना उठता। तब लन्ड रीटा के दाने को रगडता हुआ रीटा की बच्चेदानी से टकरा कर रीटा को गुदगुदा जाता, तो हरामी रीटा मजे से दोहरी हो प्यार मे अपने चुच्चौ को राजू के सीने से रगड कर, राजू के मुह पर चुम्बन जड देती। जब राजू लौडे को बाहर खींचता तो रीटा अपनी चूत की फाँकौ को ज़ोर से सुकौड कर लौडे को पकड सा लेती। एक बार तो राजू को लगा कि रीटा की चूत उस के लन का कचूमर सा बना देगी। नन्ही रीटा के जोश खरोश के सामने राजू के हवली लौडे की हवा सरक गई।

चूत बेहद टाईट और लौड़ा बहुत मोटा होने की वजह से रीटा की चूत से पानी फिच्चक पिच्चक कर के पिच्चकारीयों जैसे निकल रहा था। रसीली चूत के पानी से झाग और झाग से बुलबुले बन के फटते जा रहे थे। लन्ड़ व चूत से पच्च पच्चर फच्च फच्चर की गुन्डी आवाजे, मस्ताई हुई रीटा की सुरीली ईसऽऽऽ ईसऽऽऽ सिसकारीयां और किलकारीयां, पलंग की चरमराहट राजू के दिल दहला देने वाले ठप्पौं की थाप की आवाज और दोनो की बहकी बहकी साँसों ने वातावरण को और भी गर्म और रंगीला बना दिया।

वासना के उन्माद मे रीटा आपे से बाहर हो कर मदहोशी में अनाप शनाप बकने लगी "हायऽऽऽ ले ले मेरी चूत, ईसस ईससससस चोद साले मां का लौडे,चोद लडकी चौद चूतीया और जौर से धक्के मार, ऊईईईई मांऽऽऽ, येसससस फासटर, याहऽऽऽ, हारडर, आहऽऽऽ आह फाड दे मेरी गुलाबो को सीईईईई,डोन्ट स्टाप रे, हाए मैं चुद गई रेएएए, मेरी मम्मीईईईई डेडीईईईई जीइइइइ बडा मज़ा आ रहा है, चोद बहनचोद चोद अपनी बहन को, चोद मादरचोद आहऽऽऽ मेरे चोदू राजा मसल दे मेरी जवानी को, चटनी बना दे मेरी एकलौती चूत की, ईस ईईईईईस ले मार ले अपनी बहन की चूत, भौसड़ी के हाय मेरे राजाऽऽऽऽ चक दे फटे मरी बासटड बन्नौ देएएए मेरी चूत ले वाहऽऽ शाबाश और जोर से यू बासटर्ड मदर फकर"।

"ले सम्भाल अपने बाप के लौडे को ये लेएए और लेएए हायएएएएएए मेरी रानी और जौर से कमर हिला आहऽऽऽ, ये ले भौंसड़ी की, आज चौद दूंगा,तेरी ऐसी की तैसी, तेरे जैसी कई रंड़ीयौं को मैने चौदा, साली कुत्तियां, तेरी चूत फाड के तेरे गले मे डाल दूंगा, मां की लौडी हंम्फ हंम्फ" करतो राजू ने अपने लन्ड़ से रीटा की चूत मे आठ बना कर चोदना शुरू किया, तो रीटा की खुशी के मारे चीखें ही निकल गई।

"हाय रेएएएएएए में तो गईईईईईईईईईईईई" यह कह रीटा राजू को अपनी गौरी गौरी टांगो और बाहो मे दबोच कर राजू से बुरी तरह से चिपक गई और जंगली बिल्ली की तरह राजू के कन्धे में दाँत गडा दिये और भूखी चूत की दीवारों को लन्ड पर पूरे जोर से कस दीं। चोदू राजू रीटा की टाईट चूत के चूस्से को सह नही पाया और वह भी रीटा के साथ झड़ने लगा। धमाके पे धमाका और पिच्कारीयो पे पिच्कारीयां। समय रूक सा गया। रीटा सूखे तिनके की भान्ती कंपने लगी। दोनो हांफते हुऐ एक दूसरे मे समा जाने की कोशिश कर रहे थे। हाय हाय करती रीटा अपनी प्यासी चूत से राजू के लौड़े को पूरा जौर लगा लगा कर चूस रही थी। राजू को लगा की जैसे रीटा की जानदार चूत ऊस के लन्ड़ को पी ही जायेगी। राजू का लौडा भी टाईट चूत की रगडाई से लाल और जल सा रहा था। दोनो का भिन्डा कुत्ते और कुत्तिया की चुदाई के बाद की तरह अब भी भिडा़ हुआ था।
 


असल में रीटा की चुदाई कम और रगडाई जयदा हुई थी। धूम धाम से चुदी हुई खस्ता हालत मे रीटा के बदन मे रह रह कर दर्द की टीसने उठ रही थी। मस्त लन्ड़ की पिटाई से चूत खुब लाल और सूज गई थी और टांगे बुरी तरहा कांप रही थी। राजू ने रीटा की हडी पसली एक कर दी थी और उस की जवानी को चारो खाने चित कर दिया था। रीटा गली के नुकड़ पर चार कुत्त्तो से चुदी कुत्तिया की तरहा करहा रही थी।

पर अ‍ब रीटा अपनी ठुकाई से पूरी तरहा सन्तुष्ट थी। भयंकर एतिहासिक चुदाई के बाद रीटा की प्यासी जवानी तरोतर हो उठी और वह कली फूल बन गई। रीटा की बन्द चूत अब नये नये फूल की तरह थोडा सा खिल कर छोटी भौसडी बन गई चूत की बाहरी फाके खुल सी गई थीं और बीच मे से गुलाबी पंखुड़ीयाँ अब दिखायी देने लगी थी। रीटा अब फेवरेट गेम सकेटिंग से चुदाई हो गया।

इस तरह रीट और राजू का चौदम चुदाई का सिलसिला जारी रहा और रीटा को तो सही मायनो मे चुदाई की लत लग गई थी। कई कई बार तो रीटा सुबह सुबह स्कूल की बस चढने से पहले लोगों की नजर बचा कर राजू के कमरे मे घुस कर जिद्द कर के खडे खडे एक टांग उठा कर चुपचाप चुदवा लेती थी। शाम को सकेटिंग करने के बहाने राजू से चुदवाती रहती थी।

रीटा ने अपनी कई सलवारो को नीचे से उधेड़ के रख दिया। कई बार तो रीटा सब के सामने छुप कर अपनी उधडी सलवार में से ही राजू का लन्ड़ अपनी चूत मे सरका लेती थी। और सब के सामने नजरे बचा कर राजू से घौडा घौडा खेल खेल लेती। कभी कभी सब घर वालों और राजू के साथ टलीवीज़न पर पिकचर देखते, तो रीटा राजू की गोद मे टैडीबियर ले कर बैठ जाती और टैडीबियर के नीचे रीटा के हाथ राजू के लन्ड को खूब खुजाती और राजू रीटा की चूत रगडता रहता। कइ बार तो रीटा बैठे बैठे बिना हिले ही राजू के पप्पू को अपनी चूत मे भींच भींच कर पप्पू के पसीने निकाल देती थी।

कभी कभी मस्ती में अकेले मे रीटा नन्गी हो के राजू को लन्ड़ पर बैठ झुन्टे लेती, तो कभी राजू रीटा को अपने खडे लन्ड़ से खूब पीटता। कई बार तो रीटा लन्ड़ से पिटती पिटती ही झड जाती थी। कभी कभी रीटा लजीज गालीयौं के साथ राजू के थपड शप्पड भी ठोक देती थी, तो राजू नें हिंसक रीटा की गाँड को झाडू, बैट, चप्पल और बैल्ट से भी खूब पीटा और जंगली रीटा को भी पिट के चुदने मे खूब मज़ा आता था। ना जाने कितनी बार रीटा ने राजू को शावर के नीचे अपने मूत से नहलाया और कई बार तो रीटा ने दीवाने राजू को अपना पिशाब भी पिला चुकी थी।

रीटा हर बार नये नये अन्दाज और पौज़ मे चुदना पसन्द करती थी। राजू ने रीटा को अलग अलग जगह पर दिन रात खूब चौदा मारा। किचन मे मख्खन लगा कर, डाय्निग टेबल पर टमेटौ केचअप लगा कर, गैराज मे कार के बौनट पर ग्रीस लगा कर, शावर के नीचे और टब बाथ मे तेल लगा कर, छत पर रात को चान्दनी के नीचे थूक लगा कर, लैदर के सौफे पर जूतों की पालीश लगा कर, घास पर झाडीयों के पीछे क्रीम से और ना जाने कहां कहां।
 


भौसडी की रीटा




रीटा की वासन दिन दुगनी और रात चौगनी हौती जा रही थी। मस्त रीटा ने राजू को लन्ड को एक महीने में ही निचौड कर रख दिया। कभी कभी रीटा राजू से जिद कर के पाँच पाँच बार चुदवाने के बाद भी और चुदवाने की जि़द करती। अब राजू, रीटा से अब कतराने लगा था। रीटा को अब समझ आया कि हर महीने मतवाली मौनीका नये आशिक से चूत कयो मरवाया करती थी। फिर राजू के डैडी की टरांसफर किसी और शहर मे हो गया और राजू वहाँ से दूसरे शहर मे चला गया।

तनहा रीटा अपनी मासूम चूत की ठरक पूरा करने के लिये ना जाने कया कया अपनी चूत और गाँड मे सटका चुकी थी - बैंगन, कमल-ककडी, हेयर ब्रश,हेयर डरायर, सेंडल, कोका-कोला की बोतल, मोमबत्त्त्ती, केला, घीया, खीरा, छल्ली, तौरी, कचालू, टेलीवीज़न रीमौट, टैलीफौन का हैंडसेट,फलावरपौट, पैन और पैंसील। ये सब करते करते और गुदगुदे बिस्तर पर नन्गी हो लुड़कीया लगाते लगाते रीट को अपने अंग ही चुभने लगते थे। उपर से मौनिका के दिये हुई ब्लयू मूवीस और मस्त राम के सैक्सी नावल देख और पड कर रीटा की चूत ने "चोदा मरवाओ चोदा मरवाओ" की बगावत कर दी।

फिर एक दिन स्कूल बस खराब होने की वजहा से रीटा के डैडी ने अपने नये चपडासी को साईकल से रीटा को स्कूल छोडने और लाने की ड्यूटी लगा दी। चपडासी नया नया गाँव से शहर आया था। खूब जवान, हटाकटा और खूब तन्दरूसत था। गौरखा होने से उस का रंग भी साफ व गौरा था। और सब उसे बहादुर के नाम से पुकारते थे।

सुबह सुबह मम्मी ने बहादुर को रीटा के कमरे मे रीटा का स्कूल बैग तैयार करने के लिये भेज दिया। जब बहादुर अन्दर आया तो ताज़ी ताज़ी नहाई रीटा डरैसिंग टेबल के सामने बैठी अपने बालो के संवार रही थी। ना जाने क्यों, बहादुर की जवानी को देख रीटा की चूत मे मीठी सी सरसरी सी दौड गई।

कुछ सोच कर रीटा ने बहादुर को अपने जुराबे और हील वाले सेन्डील डालने को कहा। बहादुर ने रीटा के सामने बैठा, तो शरारती रीटा ने अपना अपने नन्हे नन्हे सुडौल और सुन्दर पैर बहादुर की गौदी मे रख दिये। बहादुर के रीटा की मरमरी पिडंली पकड कर सेन्डील पहनाने लगा।

मर्द के खुरदरे हाथो के सपर्श मात्र से ही रीटा की चूत फडफडा उठी और झट से पनीया गई। शैतान रीटा लापरवाही से गुनगुनाती हुई अपने बालो मे कंघी करने लगी। रीटा ने महसूस किया कि बहादुर भी कुछ ज्यदा ही रीटा की टांगौ पे हाथ फैर रहा था। बहादुर रीटा की मलाई सी चिकनी टांगौं पर हाथ फैर रात को मुठ मारने का समान बना रहा था।

रीटा ने भी नौकर को शह देने के लिये अपना पैर से बहादुर के लन्ड़ को शरेआम दबा दिया और पैर से सहला कर बहादुर के लन्ड़ को खडा कर दिया। फिर बेशर्म रीटा ने बहादुर के लन्ड की टौटनी को पैर के अंगुठे और अुंगली में ले कर जोर से दबाया तो बहादुर चिहुक पडा। रीटा के चेहरे पर शरारती मुस्कूराहट आ गई।

फिर स्ट्रेप बाधने के लिये रीटा ने अपना सकर्ट उपर उठा पैर डरैसिंग टेबल पर रख दिया। रीटा तिरछी निगाहो से बहादुर की झुकी झुकी नजरो को अपनी सकर्ट कर अंदर अपनी पैंटी से चिपकी देख समझ गई कि चूतीये को आसानी से पटाया जा सकता है।

फिर रीटा अपना स्कूल बैच को बहादुर के हाथ थमा कर चूच्चे को आगे बढाती बोली "जरा यह भी लगा दो"।

बहादुर घबरा कर पिन की तरफ ईशारा कर बोला "बेब्बी ये चुभ जायेगा तुम खुद ही लगा लो"।

रीटा टाई बांधती बोली "अरेऽऽ कैसे चुभेगा एक हाथ अन्दर डाल के लगाओ नाऽऽ"।
 
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