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अपडेट 133
राजत:- में तो आज आप की चुत और गांड फाड् के रहुंगा.
चाची :- बेटा चुत मार ले गांड में बहुत दर्द होता हे.
रजत :-चाची में धीरे धीरे मारूँगा तुम्हारी गांड जरा भी दर्द नहि होने दूँगा.
चाची :- नहि लला में तुझे गांड नहि दूंगी.
रजत :- ये सुन के में मुह फुला के बैठ गया.
चाची मुझे यु नाराज होते देख बोली “क्यों बेटा नाराज हो गया”?
रजत :- “नहि में क्यों नाराज होने लगा”.
चाची :- मुझे पता हे कैसे तुझे मनाना हे चाची ने मेरा लंड मुह में दाल लिया और चुस्ने लगी. ये देख के में हैरान हो गया चाची बहुत अच्छे से लंड का सुपडा चुस रही थी. लंड को मुह में ले ले कर सहला रही थी. चाची बोली “अब बोल बेटा मानेगा की नहि”?
रजत:- “आप गांड एक बार मुझसे मरवाओ फिर देखो गर मज़ा नहि आये तो बोल देना”.
चाची:- “बेटा तू क्यों जिद पे अडा हे”? मैंने बोल दिया “मुझे गांड भी मारनी हे रेणु
तो मज़े से मरवाती हे मुझसे अपनी गांड, आप उनसे इतनी बड़ी हो, फिर भी आप डरती हो”.
चाची बोली “ठीक हे बेटा तू नहि मानता तो कर ले अपने दिल की”
में खुश हो गया.
चाची की चूचियों को दबा दबा के पिने लगा चाची मेरा सर पकड़ के बोली
“बेटा धीरे धीरे दबा दर्द होता हे”. मैंने बोला अभी तो चुत मारूँगा तब बताना दर्द हुआ की नही”.
चाची बोली “में तो तेरा लंड लेने के लिए तड़प रही हूँ,मेरा बस चलता तो पहले ही चुदवा लेती, पर शर्म की वजह से कभी बोल नही पाई”
मैंने चाची को चित लिटा दिया
उनकी टांगो को मोड़ के बुर से लंड रगडने लगा. चाची सिसकिया लेने लगी अपनी चुचियो को दबाने लगी.
मैंने चाची की बुर में लंड घूसा दिया. थोड़ी दिक्कत हुई पर लंड पूरा अंदर चला
गया. चाची ने अपने होठ दांतों तले दबा लिये ऑंखे बंद कर ली में चाची की
चुचिओ को मसल ने लगा. चाची को बहुत मज़ा आ रहा था.
मैं बोला “चाची सब ठीक हे ना”.
चाची बोली “तेरा लंड चुत में गया हे राम जाने अंदर सब ठीक रहेगा की
नही,अब बाते मत कर चोद,रहा नहि जा रहा मुझसे”
मैंने चाची की बुर को
चोदना स्टार्ट किया चाची सिसकिया लेती रही अपने होठो को काटती रही जल्द ही चाची झड गई.
मैं बोला “चाची आप तो दो मीनट में ही ठण्डी हो गई”.
चाची बोली “इतने दीनो बाद चुदाई हुई और तेरा चाचा तो आग लगाके के सो जाता था, आज तूने लंड डाला तो खुद ही चुत से पाणी बहने लगा”.
में चाची को बुरी तरह चोदने लगा चाची की
सीसीकिया उसकी बेटिया सुन के गर्म हो गई थी अनु और रेणु दोनों एक दूसरे को चूमने
लगि दोनों एक दूसरे की चुचिओ को जोर जोर से मसलने लगी.
चाची फिर से झड गयी. मैं बोला “चाची अब बारी गांड मारने की हे”.
चाची बोली “ठीक हे बेटा मार ले पर धीरे धीरे मारना दर्द बहुत हुआ था, तेरे चाचा ने
जब मारि थी”.
मैं बोला चाची तेल लगा के मारूँगा दर्द का पता भी नहि चलेगा”.
मैंने चाची को घोड़ी बनाया. आज चाची की मदमस्त गांड मेरे सामने थी.
मैंने चाची की गांड को पकड़ के मसलना शुरू कर दिया.चाची मस्ती में मदहोश होने
लगि. मैंने चाची की गांड चाटना शुरू कर दिया.
चाची बोली “बेटा बहुत मज़ा आ रहा हे चाट अपनी चाची की गांड अच्छे से चाट”
मैंने चाची की गांड में जीभ घुसा घूसा के चाटना शुरू कर दिया. चाट चाट के चाची की गांड लाल कर दी.
चाची मधहोश सी झुकि रही उनकी सांसे तेज़ होती जा रही थी. यही सही मोका लगा मुझे चाची की गांड मारने का.
मैंने लंड को सुराख़ पे रखा और जोर से धक्का मार दिया.
चाची की ऑंखे खुल गई उनकी ऑंखे फैल गई दर्द से उनकी चीख निकल गयी मैंने चाची की चुचिओ और चुत को मसल के चाची को गर्मी पहुचाई .
चाची बोल रही थी “बेटा बहुत दर्द हो रहा हे निकाल ले ना”.
मैं बोला “चाची क्या बच्चों की तरह चिल्ला रही है लंड पूरा घूस चुका हे”
चाची बोली “बेटा अब धीरे धीरे ड़ालना बहुत दर्द हो रहा हे”.
मैंने धीरे धीरे धक्का मारना शुरू कर दिया चाची सिसकिया लेती रही. मैंने चाची की
कमर पकड़ के धक्के जारी रखे . अब चाची को दर्द कम हो रहा था. चाची अपनी बूर को सहलाने लगी में जोर जोर से गांड में लंड पेलता रहा. चाची मस्त गांड मरवा
रही थी में जोर जोर से पेलता हुआ चाची की गांड में झड गया. चाची थक गई थी और लेट गई. में चाची के साथ लेट गया. तभी रेणु और अनु आ गई और बोली।
“क्यों माँ भाई का लंड लेने में मज़ा आया”?