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लाइफ हो तो ऐसी complete

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अपडेट 133

राजत:- में तो आज आप की चुत और गांड फाड् के रहुंगा.

चाची :- बेटा चुत मार ले गांड में बहुत दर्द होता हे.

रजत :-चाची में धीरे धीरे मारूँगा तुम्हारी गांड जरा भी दर्द नहि होने दूँगा.

चाची :- नहि लला में तुझे गांड नहि दूंगी.

रजत :- ये सुन के में मुह फुला के बैठ गया.

चाची मुझे यु नाराज होते देख बोली “क्यों बेटा नाराज हो गया”?

रजत :- “नहि में क्यों नाराज होने लगा”.

चाची :- मुझे पता हे कैसे तुझे मनाना हे चाची ने मेरा लंड मुह में दाल लिया और चुस्ने लगी. ये देख के में हैरान हो गया चाची बहुत अच्छे से लंड का सुपडा चुस रही थी. लंड को मुह में ले ले कर सहला रही थी. चाची बोली “अब बोल बेटा मानेगा की नहि”?

रजत:- “आप गांड एक बार मुझसे मरवाओ फिर देखो गर मज़ा नहि आये तो बोल देना”.

चाची:- “बेटा तू क्यों जिद पे अडा हे”? मैंने बोल दिया “मुझे गांड भी मारनी हे रेणु

तो मज़े से मरवाती हे मुझसे अपनी गांड, आप उनसे इतनी बड़ी हो, फिर भी आप डरती हो”.

चाची बोली “ठीक हे बेटा तू नहि मानता तो कर ले अपने दिल की”

में खुश हो गया.

चाची की चूचियों को दबा दबा के पिने लगा चाची मेरा सर पकड़ के बोली

“बेटा धीरे धीरे दबा दर्द होता हे”. मैंने बोला अभी तो चुत मारूँगा तब बताना दर्द हुआ की नही”.

चाची बोली “में तो तेरा लंड लेने के लिए तड़प रही हूँ,मेरा बस चलता तो पहले ही चुदवा लेती, पर शर्म की वजह से कभी बोल नही पाई”

मैंने चाची को चित लिटा दिया

उनकी टांगो को मोड़ के बुर से लंड रगडने लगा. चाची सिसकिया लेने लगी अपनी चुचियो को दबाने लगी.

मैंने चाची की बुर में लंड घूसा दिया. थोड़ी दिक्कत हुई पर लंड पूरा अंदर चला

गया. चाची ने अपने होठ दांतों तले दबा लिये ऑंखे बंद कर ली में चाची की

चुचिओ को मसल ने लगा. चाची को बहुत मज़ा आ रहा था.

मैं बोला “चाची सब ठीक हे ना”.

चाची बोली “तेरा लंड चुत में गया हे राम जाने अंदर सब ठीक रहेगा की

नही,अब बाते मत कर चोद,रहा नहि जा रहा मुझसे”

मैंने चाची की बुर को

चोदना स्टार्ट किया चाची सिसकिया लेती रही अपने होठो को काटती रही जल्द ही चाची झड गई.

मैं बोला “चाची आप तो दो मीनट में ही ठण्डी हो गई”.

चाची बोली “इतने दीनो बाद चुदाई हुई और तेरा चाचा तो आग लगाके के सो जाता था, आज तूने लंड डाला तो खुद ही चुत से पाणी बहने लगा”.

में चाची को बुरी तरह चोदने लगा चाची की

सीसीकिया उसकी बेटिया सुन के गर्म हो गई थी अनु और रेणु दोनों एक दूसरे को चूमने

लगि दोनों एक दूसरे की चुचिओ को जोर जोर से मसलने लगी.

चाची फिर से झड गयी. मैं बोला “चाची अब बारी गांड मारने की हे”.

चाची बोली “ठीक हे बेटा मार ले पर धीरे धीरे मारना दर्द बहुत हुआ था, तेरे चाचा ने

जब मारि थी”.

मैं बोला चाची तेल लगा के मारूँगा दर्द का पता भी नहि चलेगा”.

मैंने चाची को घोड़ी बनाया. आज चाची की मदमस्त गांड मेरे सामने थी.

मैंने चाची की गांड को पकड़ के मसलना शुरू कर दिया.चाची मस्ती में मदहोश होने

लगि. मैंने चाची की गांड चाटना शुरू कर दिया.

चाची बोली “बेटा बहुत मज़ा आ रहा हे चाट अपनी चाची की गांड अच्छे से चाट”

मैंने चाची की गांड में जीभ घुसा घूसा के चाटना शुरू कर दिया. चाट चाट के चाची की गांड लाल कर दी.

चाची मधहोश सी झुकि रही उनकी सांसे तेज़ होती जा रही थी. यही सही मोका लगा मुझे चाची की गांड मारने का.

मैंने लंड को सुराख़ पे रखा और जोर से धक्का मार दिया.

चाची की ऑंखे खुल गई उनकी ऑंखे फैल गई दर्द से उनकी चीख निकल गयी मैंने चाची की चुचिओ और चुत को मसल के चाची को गर्मी पहुचाई .

चाची बोल रही थी “बेटा बहुत दर्द हो रहा हे निकाल ले ना”.

मैं बोला “चाची क्या बच्चों की तरह चिल्ला रही है लंड पूरा घूस चुका हे”

चाची बोली “बेटा अब धीरे धीरे ड़ालना बहुत दर्द हो रहा हे”.

मैंने धीरे धीरे धक्का मारना शुरू कर दिया चाची सिसकिया लेती रही. मैंने चाची की

कमर पकड़ के धक्के जारी रखे . अब चाची को दर्द कम हो रहा था. चाची अपनी बूर को सहलाने लगी में जोर जोर से गांड में लंड पेलता रहा. चाची मस्त गांड मरवा

रही थी में जोर जोर से पेलता हुआ चाची की गांड में झड गया. चाची थक गई थी और लेट गई. में चाची के साथ लेट गया. तभी रेणु और अनु आ गई और बोली।

“क्यों माँ भाई का लंड लेने में मज़ा आया”?

 
अपडेट 134

रेणु और अनु को देख कर चाची थोड़ी डर गयी.

मैंने बोला चाची डारो मत . ये भी तो मेरी रंडी हे जैसे आप चुदवाई हो ये भी चुद्वाती

है. चाची शर्म से निचे देखने लगी . रेणु बोली माँ शर्मा क्यों रही हे बोल

भाई का लंड आया पसंद”?

चाची निचे मुह करके बोली “हम्म”

अनु बोली “माँ भाई सच में बहुत अच्छे से चोदता हे” तभी तो हम इसकी दीवानी हे”. माया दी और काया भि आगई हम

सारे बाते करने लगे. में नंगा लेटा हुआ था. चाची ने खुद को चादर से छुपा लिया था.

मैंने चाची की चादर खीच के बोला “रंडी क्यों शर्मा रही हे अपनी बेटीयो से,ये तो सब देख चुकी हे”

और चाची की गोद में लेट कर चूचियों को चुस्ने लगा.

थोड़ी देर बाद सब ने कपडे पहने और हम घर की तरफ चल पड़े घर पहुचे तो ५ बज

गये थे. अब माँ को सम्भालना था इतनी देर सब कहा थे.

हम घर पहुचे ही थे तभी दरवाजे पर रूपा खड़ी दीखि. में उसके पास गया रूपा बोली “हीरो इतनी देर से वेट कर रही हूँ, कहा थे? ‘जानते हो क्या वक़्त हो गया अब,माँ को भी नहि पता तुम कहा हो”. तभी उसकी नजर चाची पर पड़ी. रूपा

बोली “चाची जी आज तो आप कयामत लग रही हो”.

चाची कार से निकली थोड़ी लड़खड़ाने

लगि. रूपा ने पूछ “क्या हुआ चाची”? चाची बोली “बेटा बुढ़िया को सेंडल पहनाओगे तो मोच तो आयगी, इसकी बहनो ने सेंडल पहन के चल्ने को बोला चल रही थी गिर गई”.

रूपा चाची को सहारा दे कर अंदर ले जाने लगी. माँ ने चाची को देखा फिर बोली

“भाभी क्या हुआ”?

रूपा बोली “कुछ नहि चाची बस गिर गई हे थोड़ी मोच आ गई हे,चाची को दर्द हो रहा हे माँ कोई पैन किलर हो तो चाची को दे दो”.

रूपा बोली “और रजत बाबू आप यहाँ क्या खड़े हो जाओ अपने रूम मे, में अभी तुम्हारी खबर लेती हूँ.

में सोच में पड़ गया आज इस लड़की को क्या हुआ. माँ को अंटी बोलने वाली माँ बोलने लगी. और मुझे धमका रही हे . जरूर कोई खिचडी पक रही हे इसके मन मे.

में रूम में आके सचने लगा थोड़ी देर बाद रूपा आई. आते ही मुझे मारने लगी. मैंने रूपा को गले लगा लिया उसके गालो को चूमने लगा ओ शांत हो गई.

रूपा बोली “कहा थे में बहुत बेचैन हो गई थी. आगे फिर से बिना बताये गए तो ठीक नहि होगा . मैंने बोला “यार क्यों घबराती हे कुछ नहि होता”.

रूपा की ऑंखे नम हो गई.

रूपा बोली “में जानती हूँ आज कल माहोल ठीक नहि कही किसी दुश्मन ने धोके से वार किया तो”? तुम हमसब का आखरी सहारा हो”.

ये बोल के उसकी आँखों से दो मोती निचे गिरने वाले थे मैंने पकड़ लिया और

बोला “अपने मोतियो को संभाल के रखो, ये बहुत बेशक़ीमती हे”. मैंने रूपा की

आंख को चूम लिया. रूपा मेरे सीने पर सर रख के लेट गई . मैंने रूपा से पूछा

“आज माँ को अंटी की जगह माँ क्यों बुला रही थी”. रूपा बोली “माँ को माँ ही बुलाते

है समझे,वो मेरी सासु माँ हे अब”. मैंने बोला “अभी कोण सी शादी हो गई”. रूपा

बोली “हो जायेगी कुछ दिनों में देख लेना” मैंने बोला “पर अभी बहनो की भी नह हुई”

रूपा बोली “इतना कुछ होने के बाद तुमको लगता हे वो किसी दूसरे से शादी करेंगी”?

मैंने बोला “क्यों नहि में मनाउंगा उनको” रूपा बोली “नहि मानेंगी”.

मैंने बोला “तो कैसे हमारी शादी होगी”? रूपा बोली “तुम तीनो से कर लो शादी हम में से किसी को ऐतराज

नही हे,माँ भी रेडी हे”.

मैंने बोला “ये कैसे मुमकीन होगा? आस पडोस वाले क्या कहेंगे?

फिर मेरे रिश्तेदार लोग?. रूपा बोली “माँ ने एक आईडिया सुझाया हे”

मैंने पूछा “कोण सा ?.

रूपा बोली “हम सब नेपाल सेटेल हो जाते हे माँ के जान पहचान का एक आदमी हे जो नेपाल में अच्छे दाम पे घर दिलवा देगा और जो काम हम यहाँ करते है वह वहाँ कर लेंगे कोई दिकत नहि होगी”.

मैंने बोला “पर क्या वहा की गवरमेन्ट रहने

देगी”. रूपा बोली “जो आदमी अपना घर बेचेगा वो यही बतायेगा, की ये मेरे रिश्तेदार

है, अब वो दूसरी जगह जा के रहेगा, तो ये लोग यहाँ रहेंगे, यही घर के मालिक

होंगे, सारे कागज वो रेडी कर डेगा, माँ ने उस से बात कर ली, फिर तू माया से

कोर्ट मैरिज कर लेना,मुझसे यही शादी कर लेना,और काया से वहा जा के कर

लेना, किसको पता वो दोनों तुम्हारी बहने”

मैं बोला आईडिया तो अच्छा हे पर नेपाल क्यों कोई और कंट्री में भी तो जा

के रह सकते हे. रूपा बोली पासपोर्ट से दूसरी कंट्री में पता चल जायेगा ये

तुम्हरी बहने हे. नेपाल में पासपोर्ट की उतनी जरुरत नहि पड़ती, छोटा देश हे

हमारी जरुरत की हर चीज मिल जायेगी और बिजनेस भी सेट हो जायेगा. में बोला तुम

सच में बहुत बहुत तेज़ हो,पर अगर इस से बेटर कोई प्लान मिला तो में उस प्लान पे

काम करूँगा,ये देश छोडने वाली बात नहि जम रही . रूपा बोली “सब जम रहा

है,और कल जा के सरे केस वापस ले लो”. में बोला “ठीक हे,और कॉलेज का क्या होगा?

रूपा बोली “बहुत पड़ लिया जितना पढ़ना था काफी हे”.

तभी निचे से माँ की आवाज आई. माँ रूपा को बुला रही थी. में रूपा को

जोर से पकड़ रखा था. रूपा बोली “छोड़ो माँ बुला रही हे”.

में रूपा की चूचियों को मसलने लगा. रूपा बोली छोड़ो भी माँ आ जायेगी दोनों को डांट पड़ेगी तभी

दरवाजे पर किसी के आने की आहट सुनाइ दी मैंने रूपा को छोड़ दिया. माँ आई थी

मा बोली बेटी अब तू घर जा तेरे पापा भी परेशान हो रहे होंगे”.

रूपा बाई बोला के चलि गयी.

में निचे आया तो मेरी बहने भी आ चुकी थी अनु बोली “भाई माँ के साथ

मज़ा आया”?

मैंने बोला “हा मेरी प्यारी बहना, चाची एक दम मस्त माल हे,

जितना चोदो कम है”.

रेणु बोली “भाई धीरे बोलो चाचा भी आ गए है”.

मुझे तो पता ही नहि था वो भी आ गये

मैंने रेणु को बोला “कब आये चाचा”?

रेनू बोली “बस थोड़ी देर पहले थके हुए थे अपने रूम में रेस्ट कर रहे हे”

थोड़ी देर बात करके में टीवी देखने लगा.

टीवी पर बोरिंग प्रोग्राम आ रहे थे.

मैंने रोहित को कॉल लगायी. रोहित ने कॉल

उठाया और बोला “क्यों भाई कहा ग़ायब हो मिलने भी नहि आते”.

मैंने बोला यार बिज़ी था अच्छा बता ख़ुशी और आंटी कैसी हे”?

रोहित बोला “दोनों एक दम ठीक हे”.

मैं बोला तू कया कर रहा था”? रोहित बोला बस ख़ुशी को ख़ुराक दे रहा था”.

मैंने पूछा “कोनसी खुराक”?

रोहित बोला “उसे प्यास लगी थी तो लंड का पाणी पीला रहा था”

मैं बोला “साले थोड़ा कम चोद दोनों को खुद के बारे में भी सोच ले, अपनी सेहत का भी ख्याल रख”.

रोहित बोला “ठीक हे ब्रो आप ही रखो ख्याल मुझे मत करने दो, एक तो बड़ी

मुश्किल से देती हे ऊपर से आप कम करने को बोलते हो”.

में हॅसने लगा फिर मैंने बोला “चल रख कल कॉलेज में मिलते हे बाई गुडनाइट”.

 
अपडेट 135

रजत नेक्स्ट डे कॉलेज में रोहित से मिलता हे. रजत रोहित को बोलता हे एग्जाम के बाद वो अपनी फैमिली के साथ नेपाल शिफ़्ट हो रहा हे. रोहित बोलता हे यार इतनी दूर शिफ़्ट होने की क्या जरुरत. रजत उसे बताता है कि वो अपनी बहनो से शादी करना चाहता हे और तीनो से शादी अगर करूँगा तो कोई न कोई सवाल उठा ही देगा.

और किसी दिन कोई जान पहचान वाला मिल गया तो आफ़त हो जायेगी. रोहित बोलता हे “भाई ऐसा कुछ नहि होगा अगर ज्यादा ही दिक्कत हे तो दुसरी सिटी चले जाओ. गोवा में मेरे रिश्तेदार हे में उनसे बात करता हूँ

वहा एक घर का जुगाड़ हो जायेगा और फिर तुम वहि शादी कर लेना वहा लोगो को फरक नहि पडता कोण किस से

शादी कर रहा हे.मॉम भी हमे वहि रहने को बोल रही थी .उन्होंने अपनी एक सहेली को तो बोल भी रखा हे वह घर का जुगाड़ कर देगी.

तभी रूपा आ गई रजत बोलता हे “रूपा मैंने तुम्हारी बात गोर से सोची, में सोच रहा हूँ, हम गोवा क्यों नहि चले जाते, वहि पे शॉप भी खोल लेंगे,वहा बिजनेस अच्छा चलेगा माँ का,दी भी अडजैस्ट हो जाएँगी वहा”.

रूपा बोली “मैंने भी डैड को बोल दिया हे डैड को कोई प्रॉबल्म नहि हमारी शादी से, हम कोर्ट मर्रिज यही करेंगे फिर गोवा चले जायेंगे मैं बोला “पर उनको मेरी बहनो के बारे में तो नहि पता ना”?

रूपा बोली “नहि जान में सब संभाल लुंगी शादी के बाद”.

मैं बोला “पर में सब से पहले दी से शादी करूँगा”.

रूपा बोली “हा क्यों नही दी तुम्हारा फस्ट लव हे,एग्जाम के बाद हम शादी की प्लानिंग करेंगे”.

मे रूपा के साथ क्लास में चला गया. कॉलेज के बाद में रोहित के साथ घर चला गया. घर पंहुचा तो चाचा चाची गाव जाने के लिये तैयार हो रहे थे. मैंने उनको कुछ दिन रुकने को भी बोला पर वो बोले गाव में खेती बाड़ी भी देखना जरुरी हे. फिर वो हम से विदा लेकर चले गए रेणु अनु की आँखों में आसु आ गए थे.

चाची बोली बेटी जब मन हो तब तुम अपने भाई से मिलने आ सकती हो वो दोनों खुश हो गई. माँ ने ऑटो कार मंगवा दी थी जो उनको घर तक छोड़ देगी.

चाचा चाची चले गए. हम सब अंदर आये मैंने काया को बोला तुम अच्छे से अब स्टडी करो एक्साम पास हे तो नो मस्ती. फिर मैंने सबको अपना प्लान बताया सब सुन के खुश हुये.

माया दी शादी का नाम सुन के शर्मा गई . में उनके पास गया और उसके हाथो को पकड़ के बोला “क्यों दी आप बनोगी मेरी बिवी”?

माया दी “बोली में तो पहले ही तुमको अपना पति मान चुकी हूँ,शादी तो फ़ॉर्मेल्टी हे”

मैंने माया दी के होठो को चुमते हुए बोला “है दी आप मेरी पहली बिवी हो”.

तभी माँ बोली “पहली तो में हूँ हमारी शादी तो पहले ही हो गई थी जब तुमने लंड से मेरी मांग भरी थी”.

माया दी बोली “हा माँ आप ही इनकी पहली पत्नी हो”

मैं माँ के पास गया और उनकी गोद में बैठ के उनकी चूचि को मसल के बोला तुम तो मेरी रंडी हो”

माँ मेरी तरफ देख के बोली “में तो तुम्हारी सब से बड़ी रंडी हूँ अब तो ये घर ही रंडियो का है, जो तुम्हारे लंड की दीवानी हे, तुमसे चुद्वाती रहती हे, तुम्हारा गरम गरम पानी पिती है”.

तीनो मुझसे चिपक के मेरे होठो को चूमैंने लगी.

मैं बोला “माँ वो तो सही हे पर मुझे डर इस बात का हे, हम गोवा जा रहे हे, कभी न कभी हमारे किसी रिश्तेदार को हमारा पता चल जायेगा तब क्या होगा”?

माँ बोली “क्यों फ़िक्र करता हे में हूँ ना जब होगा में संभाल लुंगी किसी को अपना पता बतायेंगे नहि ये घर भी बेचेंगे नहि इस घर में हम अपणे रिश्तेदारो से मिलेंगे, धीरे धीरे में सब को राजि कर लुंगी जब शादी हो जायेगी तो कोई क्या कर सकता है”.

मैंने माँ की ब्लाउज को खोलना शुरू कर दिया. काया बोलती हे “भाई आप माँ की चूचियों को चुस चुस कर और बड़ा कर दे रहे हो”. माँ बोली “तो क्या हुआ एक बिवी अपने पति को दूध भी नहि पीला सकती कितनी भी बड़ी कर दे मेरी चूचि मेरे लिए तो अच्छा हे. इनको दीवाना बना के रखूँगी”.

माया दी बोली “माँ जिस दिन मेरी चुचुओ

मे दूध निकलेगा तब देखूँगी तुमको भी”. अपनी माँ बहन की नोक झोक सुनने में मज़ा आ रहा था.

काया बोली “माँ अब तो में गोवा जा के ही भाई से चुदवाउंगी”.

माया दी बोली “में तो सबर नहि कर सकती मुझसे इतना वेट नहि हो पायेगा, तु तो कल भी चूदी हे मेरी बुर तो रोज ही खुजलि करती हे”.

मैंने बोला “दी इतनी ही खुजलि करती हे तो चोद दिया करूँगा बिच बिच में”.

हम तीनो की प्यार भरी मस्ति यु ही चलति रही

वक्त का पहिया घूम रहा था दिन बित रहे थे.मे बिच बिच में माँ बहन की बुर गांड मारता रहा. रूपा के डैड ने भी माँ से शादी की बात कर ली शादी के बाद वो अपने गाव चले जाएँगे और पेंशन से अपना गुजारा करेंगे. एग्जाम पास आ गए थे. काया और मुझे दी रोज स्टडी करवाती.

घर में तो जैसे कॉलेज खुल गया हो हर जगह किताबे पड़ी थी. सारा दिन स्टडी करते रह्ते हे आखिर वो दिन भी आ गये जब हमारे फाइनल एग्जाम शुरू हो गए एक्साम सारे के सारे अच्छे जा रहे थे साथ

मे पुलिस का लफड़ा भी ख़तम हो गया. मर्डर केस भी बंद हो गया आपसी दुष्मनी का केस बना कर फाइल बंद कर दी गई. घर में सब खुश थे. एग्जाम के साथ साथ माँ ने शादी का भी जुगाड़ कर दिया.

मेरी और माया दी की शादी कोर्ट में और रूपा मेरी एक मंदिर में एक दिन के फेर में. एग्जाम के ख़तम होते ही सारा प्रोग्राम था.

 
अपडेट 136

आखीर एग्जाम ख़तम हो गये. माँ ने बताया फ्राइडे को मेरी माया दी की शादी हे कोर्ट में और शनिवार को रूपा के साथ मंदिर में. सब शादी की शॉपिंग करने लगे. माँ रूपा माया दी के लिए शादी के जोड़े जेवर ख़रीदने लगी. सब लोग शादी की तैयारियॉ में जुट गए थे घर को भी सजा दिया था माँ ने चाचा चाची मामा मामि को भी बुला लिया था.मा गाव जा के सब को न्योता देकर आई थी और 10करोड की जामिन भी बेच दी थी. अभी भी काफी जमीन थी जिसे चाचा को दे दिया था खेती के लिए.अनु और रेणु के नाम 25-25लाख रूपये जमा करवा दिए थे. रोहित की माँ की सहेली से बात करके 3करोड़ की एक कोठी

खरीद ली थी. जो दो मंजिल थी . ऊपर तीन रूम थे विथ बाथरूम .ओर निचे ५रूम थे सब में अपना अपना बाथरूम था. माँ ने तक़रीबन 10करोड़ रूपये जमा करवा रखे थे और उनका जींवन बिमा का फिक्स था उसे भी तुड़वा के सारे रूपये जमा कर लिए थे कुल मिला के 25 करोड के लगभग हो गए थे.

माँ ने गोवा में 3करोड की तीन शॉप खरीद ली. माँ ने मुझे सारे पेपर चेक करवाये सारे पेपर ओके थे.

माँ और मैंने मिल कर गोवा की शॉप को रेडी करवा लिया उसमे एक में लेडी क्लोथ्स एक में जेंट्स और बच्चों के कपडे सेट करवा दिये सस्ते में पास ही में एक गोदाम भी मिल गया माँ ने ४५ लाख में उसे भी

खरीद लिया. गोदम में नई क्लोथ्स के कलेक्शन रखवा दिये गये . गोवा का एड्रेस डिस्टबूटर लोगो को दे दिया ताकि उनको भी माल भेजने में दिक्कत न हो. अच्छी जगह होने की वजह से हमारी शॉप 40 करोड रूपये में प्रॉपर्टी डीलर ने बिक्वा दी अब हमारे पास अभी भी बहुत बड़ी रक़म बचि हुई थी. सर ने रूपा की शादी के लिए जो रूपये बचा रखे थे हमने वो रुपयो से सर के लिए गाव में छोटा सा स्कूल खुलवा दिया

ताकी उनका भी मन लगा रहे. आखिर कल मेरी शादी थी में बहुत खुश था.

मामा मामि चाचा चाची भी आ गए थे हमारे फ्रेंड्स और रिश्तेदार फिर से घर में रोनक ले आये थे. मेरा बेटा मामी की गोद में खेल रहा था. मामा बोले बेटा में सब जान गया हूँ आखिर तुम्हारी वजह से में बाप बना हूँ मुझे बुरा नहि लगा क्यों की मैंने खुद कई बार तुम्हारी मामि को बोला था किस्सी से सम्बन्ध बना ले ताकि वो माँ बन जाये

मेरी वजह से ही तो वो बाँझ का जीवन जी रही थी.अब में तुम्हारी बिवी की गोद में भी एक बच्चा देखना चाहता हु.

मैं बोला “मामा मुझे ख़ुशी हे घर की इज्जत घर में ही हे,अब आप इसे एक अच्छा इंसान बनाओ”

माँ सुबह सुबह ही माया दी को लेकर शॉप पे चलि गई. शॉप पे पहुच के माँ ने मुझे कॉल किया और बोली “आज तेरी शादी हे कोर्ट में तो तुम रेडी रहना, घर से नार्मल कपडे पहन लेना, और पार्लर में जा के मेर्रिज ड्रेस बदल लेना, हमने सबका इन्तज़ाम करदिया हे, अब तू बस टाइम से आना, और काया को भी लेते आना,यहा विटनेस की जरुरत पड़ती हे”.

में सोच्ने लगा आखिर माँ इतनी जल्दी सारा इन्तज़ाम कैसे कर लेती हे. फिर में नहा धो के तैयार हो गया.

२ बजे माँ का कॉल आया माँ ने बोला “बेटा ४ बाजे तेरी शादी हे तो तू निकल वहा से आने में देर न हो जाये”.

मैंने काया को बोला चलने को. में जैसे ही गेट से बाहर आया तो चाचा मिल गए चाचा

बोले बेटा “कल शादी हे आज कहा जा रहे हो”?

मैंने बोला “चाचा बैंक का जरुरी काम है, माँ बाहर हे तो मुझे जाना ही पड़ेगा, कुछ पेपर वर्क हे थोड़ी देर में आ जाऊंगा”. चाचा बोले “संभल के जाना और गाड़ी धीरे चलाना”.

तभी काया बोली “भाई मुझे अपनी सहेली के घर कोई काम हे आप मुझे भी छोड़ दो”. मैं बोला “चल जल्दी आ लेट हो रहा हूँ” .

हम दोनों बाइक पे बैठ के पार्लर पहुचे. पार्लर तो आज बंद था.

काया बोली “भाई में जानती थी जलद बाजी में चाभी भूल जाओगे इस लिए में खुद याद से लायी हूँ, जलदी से खोलों और ड्रेस बदल के आ जाओ”

मैंने पार्लर का लॉक खोला और अंदर चला

गया. अंदर कोट पेंट रखा हुआ था. मैंने जल्दी से वो पहना. पार्लर का थोड़ा सा पॉवडर भी लगा लिया. एक दम फिट हो के बाहर आया. काया बाहर ही टहल रही थी. मैंने बोला “कैसा लग रहा हूँ”.

काया बोली “ठीक लग रहे हो एक दम मस्त हीरो जैसे अब चलो ३ बज गये यही” माँ वेट कर रही थी. मैंने बाइक स्टार्ट कर दी काया चिपक के मेरे साथ बैठ गई. अब गाड़ी हवा से बाते करने लगी ३:३०बजे

हम कोर्ट पहुच गये. मैंने देखा माँ दी के साथ नेहा और कोमल आंटी भी

खड़ी हे .

 
अपडेट 137

मैंने बाइक पार्क की माँ ने मुझे देख के बोला आ गया राजा बेटा माँ ने मुझे गले लगा लिया. मैंने कोमल और नेहा की तरफ़ देख के पूछा माँ ये दोनो यहाँ पर क्यों.

कोमल आंटी बोली “आज तू मेरा बेटा हे, अपनी माँ का नहीं, आखीर लडके लड़की की फमिली की डिटेल भी तो कोर्ट में देनि होती हे”.

फिर नेहा बोली “जब माया ने बताया, वो तुमसे शादी करना चाहती हे,तब मैंने राहुल से पूछा था, कोर्ट मेर्रिज कैसे होगी मेरी फ्रेंड को करनी हे,उसने बताया की दोनों लड़के और लड़की की फैमिली की डिटेल देनि होती हे,तीन गवाह लगते है, फिर मैंने दी को सारी बात बताई और ये भी बोला ये बात हम लोगो के बिच रहे, दी तुरन्त मान गई आखिर उनके बच्चे के बाप हो, जो ख़ुशी तुमैंने उनको दी हे उसके, आगे तो ये कुछ भी नहि”.

मैंने पूछा “वेसे ऐसी हालत में तुमको कोई दिक्कत तो नही हो रही हे”?

कोमल आंटी बोली “नहि बेटा आई एम ओके”.

बातो बातों में मैंने माया दी की तरफ़ ध्यान ही नही दिया था वो एक कोने में खड़ी मुझे ही देख रही थी.

माँ बोली “वहा क्या कर रही है देख तेरा दूल्हा आ गया हे”.

माया दी शर्म से अपने हाथो की उँगलियों को रगढ रही थी और निचे देखते हुए बोली “माँ आप भी ना”.

माँ बोली “अब दूल्हे को दूल्हा ही बोलूँगी की, बोलू तेरा भाई आ गया तुझ से शादी करने”.

तभी एक आदमी आया ओर बोला “चलिये शादी का टाइम हो गया है”.

हम सब कोर्ट में गये.

वहा एक आदमी बैठा था उसने हमसे हमारे नाम पूछे. फिर एक रजिस्टर हमारे सामने कर दिया बोला इसपे साइन कर दो हम दोनों ने बारी बारी से साइन किये फिर उस्ने बोला “विटनेस भी साइन कर दो”. माँ काया कोमल नेहा ने विटनेस की जगह साइन कर दिये. फिर उसने एक मेर्रिज सर्टीफिकेट बना कर हमे दिया और बोला “मुबारक हो आप दोनों अबसे पति पत्नी हुये”

माँ बोली “बेटा अब तो किसी होटल में लंच करवा दे तेरे चक्कर में हम सब सुबह से भूके है.

मैंने बोला “माँ जहा खाना चाहो वहि चलो”.

हम सब एक होटल में पहुचे.

माँ ने मैनेजर से कुछ बात की फिर मैनेजर मुझे और माया दी को एक रूम टाइप केबिन में लेगया. सामने बैठी माँ बोली “बेटा अब मिया बिवी साथ खाओ हम चारो यहा खा लेंगे”. माँ ने वेटर को खाना ऑर्डर कर दिया.

में माया दी से बोला “दी चुप क्यों हो आज क्या हुआ”.

दी बोली “सॉरी जी शादी की ख़ुशी में कुछ समझ नहि आ रहा”.

मैंने बोला “दी पहले तो ये जी कौन है? में आपका भाई पहले हूँ और पति बाद में तो आप मेरी प्यारी बहना बन के बात करो”.

दी बोली “भाई अब मेरा वो सपना पूरा हुआ, जो मैंने कभी सोचा भी नहि था पुरा होगा”

मैंने बोला “दी मैंने भी नहि सोचा था ऐसा कुछ भी होगा, में बहुत खुश हूँ”

मे दि के पास जा के बैठ गया. आस पास कोई नहि था.

मैंने बोला “दी एक किस दोना”.

दी बोली “नहि भाई कोई आ जायेगा”

मैंने बोला “बस जल्दी से लुँगा छोटी सी किस”.

दी बोली “नहि भाई समझो,घर नहि हे” मैंने बोला “घर होता तो किस नहि कुछ और ही मांगता”.

दी बोली “बहुत बेशर्म,ओर जिद्दी हो गया हे”.

मैंने दी का चेहरा हाथो मे पकड़ के उनके होठो को चुमना शुरू कर दिया अभी दो मिनट्स ही हुए थे वेटर आ गया. मजबूरि में हटना पडा.

दी धीरे से बोली “देखा वेटर ने सब देख लिया”.

मैंने बोला “तो क्या हुआ अपनि प्यारी बिवी को चूम रहा था”.

दी शर्म से निचे देखने लगी.

मैंने बोला “चलो कुछ खा लो भूख बहुत लगी हे”.

खाने में मटरपनीर नान पुलाव और रायता था.

दी ने एक तुकडा तोड़ के मेरी तरफ करके बोली “पहले तुम खाओ फिर मे खावुंगी मैंने अपना मुह खोल के कौर अंदर कर लिया फिर मैंने भी दी को खीलाया. हम दोनों के प्यार को देख के माँ और बाकि सब घुर रहे थे हम दोनो एक दूसरे को प्यार से खिला रहे थे.

खाना खाने के बाद हम केबीन से बाहर निकले. माँ ने बिल पे किया. हम सब घर आने लगे तो मोम शॉप की तरफ़

चलने को बोली वहा पर कुछ कपडे खरीद के रखे थे रेणु अनु और चाची के लिये. हम शॉप से कपडे लेकर दी के पार्लर पे गये वहा पे मैंने कपडे चेंज किये फिर हम घर आ गये.

 
अपडेट 138

हम घर आ गये. मैंने डोर बेल्ल बजाई . चाची ने डोर खोला.

हम सब को एक साथ देख के बोली “तुम सब कहा घूम रहे हो कल शादी हे और तुम सबका पता नही कहा हो”.

मैंने बोला “चाची अंदर तो आने दो यही पर सवाल जवाब करने लगी हो”

माँ बोली “दीदी हम तो आप लोगो के लिए ही शॉपिंग कर रहे थे”.

हम सब अंदर आ गये. सोफ़े पे रेणु और अनु बैठी थी. हम भी उनके पास जा के बैठ

गये.

काया ने शॉपिंग बेग सामने रख दिये.

रेणु बोली “ताई जी क्या लेने गई थी”?

मा बोली “बेटी हम लोगो ने आपने लिए कपडे तो ले लिए थे, पर तुम सब के लिए लेना भूल गए थे, वहि लेकर आज आये हे” चाची बोली “इसकी क्या जरुरत थी इतने कपडे तो है ना इनदोनो के पास”.

मैंने बोला “ये क्या बात हुई मेरी शादी हो रही हे, और मेरी ही बहने पुराने कपडे पहने, मुझ पर लानत है”.

चाची बोली “बेटा में कोण सा बोल रही हूँ पुराने कपडे हे, वो इन दोनों ने तो उन कपडों को कभी पहना भी नहि हे”.

माँ बोली “आप बस चुप रहो हमारी बचिया हे तो हमारे मुताबिक कपडे पेहनेगी”.

माँ ने रेणु और अनु को उनके बेग दे दिये.

रेणु ने बेग खोला तो उसमे एक बहुत खूब सूरत लला रूंग का लेहंगा था.

अनु बोली “वॉव दी आप का लेहंगा चोली तो बहुत खूबसूरत हे”.

रेणु बोली “तू अपनी ड्रेस तो दिखा”?.

अनु ने अपना बेग खोला तो उसमे भी ग्रीन क्लोर का लेहंगा चोली था. दोनों ही ड्रेस बहुत अच्छी थी.

अनु बोली “वॉव दी देखो कितनी प्यारी ड्रेस हे कल तो मज़ा ही आ जायेगा इसे पहन के”.

माँ ने चाची को उनकी साड़ी दी जिसे देख के

दोनो बोली “माँ तुम्हारी साड़ी के आगे तो ये कुछ भी नहि हे”.

चाची बोली दीदी इसकी क्या जरूरत थी”. माँ बोली “जरुरत हे तभी लाइ हूँ”.

तभी चाचा आ गए चाचा. हम सब को देख के बोले “भाभी सब को तो लाई हो कपडे अपने देवर को ही भूल गई हो मुझे लगता हे”.

माँ बोली “में किसि को नहि भूलि हु सबके लिए लाई हूँ,तुम्हारे कपडे कल सुबह ही मिलेंगे वो मैंने पहले ही ले लिए थे,ये ड्रेस तो घर की लेडीज और बच्चों के लिए ऑर्डर पे रेडी कारवाये हे”.

चाचा बोले वाह रे मेरी किस्मत मुझे देना चाहिए, और में ही लेता हूँ तुम सब से”.

माँ बोली “चुप कर इतना बड़ा नहि हुआ हे की मुझे कुछ दे सके, तेरे भैया जिंदा थे तब भी तो तू लेता ही था, ये सब में तेरे भैया के लिए करती हूँ, उनको ऎसा न लगे की में तुम सब का ख्याल नहि रख पा रही हूँ”.

ये बोलते हुये माँ की आंखे नम हो गई. चाचा बोले “मुझे माफ कर दो भाभी तुमने तो माँ बन के हमेशा भैया के जाने के बाद मेरा और मेरे परिवार का ख्याल रखा हे में ही नालायक निकला”.

मों बोली “चुप कर रुलाता भी हे और माफ़ी भी मांगता हे”.

तभी मामा मामि आ गये बोले क्या हो रहा हे सब लोग एक साथ. माँ बोली कुछ नहि भैया बस बच्चों के लिए कपडे लेने गई थी वहि लाई हूँ”.

माँ ने मामि को भी एक ड्रेस दीया.

मामा बोले “बाते बहुत हो गई अब थोड़ा खाना पीना भी बना लो अभी से भूख लगने लगी हे”.

चाची बोली “भैया आप बेठो तब तक में चाय बना लाती हूँ और थोड़े स्नैक्स भी”. चाची और माँ डिनर की तैयारी करने लगी. मामा चाचा को बोले चलो रूम में ताश खेलते हे”.

चाचा बोले हा बहुत दिन हो गये खेले आज दो दो हाथ हो ही जाये दोनों मामा के रूम में चले गये. हम तीनो थक गए थे तो

मामी बोली “तुम आराम करो कल बहुत बड़ा दिन हे तुम्हारे लिये”.

में अपने रूम में आ गया. थोड़ी देर बाद काया और माया भी ऊपर आ गई. माया दी को मैंने अवाज लगाई.

माया दी मेरे रूम में आने लगी मैंने बोला “डोर बंद कर दो”.

माया दी बोली “निचे हॉल में रेणु और मामि बैठी हे, कोई आ गया तो क्या सोचेगा”? मैंने बोला “उसकी फ़िक्र तुम मत करो मेरी बिवी बन गई हो, अब मेरी बाते मानना सिख जाओ”.

माया दी “बोली मानती तो हूँ लो बंद कर दिया डोर”.

डोर बंद करके बेड के पास आके खड़ी हो गई.

मैंने बोला “अब जाने मन दूर क्यों खड़ी हो मेरे पास आओ”.

दी मेरे से दूर हट के बैठ गई.

मैं बोला “ये क्या इतनी दूर क्यों बैठ गई मेरे पास आके बैठो”.

मैं माया दी का हाथ पकड़ के खीच लिया दी एक दम से मेरी गोद में आ गई. माया दी का मुह मेरे सीने से टकराया मेरे मुह से निकल गया “उफ्फ्फ्फ़”.

दी ने आपणे दोनों हाथ पीछे ले जा के कस के मुझे पकड़ लिया.मैंने भी दी को गले लगा लिया दी मेरे सीने से लगी हुई थी मैंने उनके सर पर किस किया.

माया दी बोली “भाई आप सब्र कर लो”.

मैं बोला “इतनी हॉट बिवी हो और वेट करना पडे नाइंसाफ़ी हे ये तो”.

माया दी मेरे होठ को चूमैंने लगी.

फिर बोली “भाई समझो कल तुम्हारी एक बिवी और आ रही हे और दो पहले से हे”. माया दी के होठ चुसते हुये मेरा लंड खडा होने लगा.

मैं बोला “में तो सब्र कर लुँगा पर ये नहि मानता”.

दि बोली “ये तो कभी नही मानेगा”.

दी ने मेरे लंड को पकड़ लिया और दबाने लगी.

 
अपडेट 139

मैंने भी दी को लिटा दिया उनके स्तन को मसलने लगा. दी मेरे होठो को चुस्ती रही

फिर थोड़ी देर चुस्ने के बाद मैंने पेण्ट से लंड बाहर निकाल लिया. मैंने दी का हाथ

लंड पे रख दिया और बोला “दी बुर नहि देनि अभी तो मत दो पर इसे तो शांत करो”.

दी लंड को बड़े प्यार से सहलाने लगी. लंड एक दम खड़ा हो गया था. दी ने थुक

लगा के लंड को सहलाना शुरू कर दिया.

मैंने दी के सूट में हाथ दाल के ब्रा के ऊपर से स्तन दबाना शुरू कर दिया. दी बार बार सुपाडे को दबाती बहुत अच्छा लग रहा था. फिर मैंने दी को बोला “दी इसे

मुह में लो ना”.

दी बोली “जानती हूँ बिना मुह में लिये ये शांत नहि होने वाला”

दी बोली “तुम आराम से लेट जाओ”.

में आराम से लेट गया दी मेरी टांगो के बिच आ गई और लंड को पकड़ लिया. दी ने लंड के सुपाडे को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. दी ने मेरे लंड के सुपाडे को मुह में लेकर चुस्ने लगी. तभी डोर पे किसी ने आवाज की आवाज काया की थी.

मैंने पूछा “क्या हे”

दी लंड चुस्ती रही.

काया बोली “डिनर के लिए थोड़ि देर में निचे आ जाना”

और वो चलि गई. दी मेरे लंड को मुह में भर के चुस्ने लगी.

मैंने पूंछा दी हनीमून के लिए कहा चलोगी”?.

दी बोली “जहा तुम ले जाओ”.

मैंने दी को पूछा “दी आप की कोई फैंटसी हे क्या”?

माया दी बोली “मेरी फेंटसी हे की हमारा घर ऐसा हो की कोई कपडे न पहने बस

एक दिन के लिए और तुम जिसे चाहो चोदो बस यही हे जो पूरा नहि हो सकता”.

में बोला “दि हम जब नये घर जायेंगे तब में आप की ये फैंटसी पूरी करने की कोशिश

करूंगा”.

दी मेरा लंड मुह में ले कर चुस्ती रही. मैंने दी का सर पकड़ लिया और

मुह में तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा.

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दी भी जोश में लंड चुस रही थी. मेरा पाणी

निकलने वाला था दी ने और तेज़ तेज़ लंड चुसना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में मेरा पानी निकलने लगा. दी मेरा पाणी पिने लगी. दी ने बिना एक बून्द गिराये सारा

पणी पि लिया. मेरा लंड झड़ने के बाद मुर्झा गया. दी ने उनके होठो से लगे पाणी को चाटा और बोली लो भाई ये शांत हो गया, मैंने दी को खुद के ऊपर खीच लिया

ओर उसके होठ चुस्ने लगा.

तभी माँ की अवाज आई “डिनर रेडी हे निचे आओ दोनों”. माँ की बात सुन हम निचे जाने के लिये रेडी होने लगे. दी ने खुद को सही किया. डोर जैसे ही खोला माँ सामने खड़ी थी. माँ बोली “क्या करते हो दोनों थोड़ा तो सब्र करो घर में मेहमान आये हे और तुम ऐसे रूम में हो”.

माया दी बोली “माँ मैंने भाई को समझाया था, पर आप जानती हो ये बहुत जिदी हो जाता हे”. माँ बोली “ठीक हे चलो डिनर कर लो, और ध्यान रखो समझे”.

हम निचे आ गए. सब लोग डिनर

टेबल पे वेट कर रहे थे.

अनु बोली “क्या भाई इतनी देर कर दी और हसने लगी.

मैंने बोला “थक गया था तो आंख लग गई थी”.

हम सब बैठ के डिनर करने लगे.

अनु बार बार माया दी को उंगली से इशारा कर के कुछ पूछ रही थी. मैंने बोला माँ खाना तो बहुत अच्छा बनाया हे आप ने. माँ बोली मैंने नहि तेरी चाची ने

बनाया हे. मैंने बोला सच में चाची के हाथो में जादू हे. खाने के साथ

उन्गलिया भी खा जाने को मन करता हे.

चाची बोली तेरी बिवी जब आएगी तो हम सब के हाथो के खाने को भूल

जायेगा. मैंने बोला क्या बात करती हो चाची. वो आप से अच्छा खाना तो नहि बना सकती. मामि बोली सब ऐसा ही कहते हे और बाद में बिवी के पीछे पीछे घूमते हे.

मैं बोला सब और मुझ में कुछ तो फर्क हे न मामि जी. सब हॅसने लगे. सब ने डीनर कर लिया. मामि बोली बेटा कल जल्दी उठ जाना पहले मंदिर में पूजा हे फिर शादी है. मैं बोला मामि उठा देना मुझे जब जाना होगा. माँ बोली पहले रूपा के घर भी जाना हे उसके शादी का जोड़ा आज रेडी हुआ हे तो सुबह सुबह ही भेजना होगा . मामि बोली दीदी आप भी न शादी का जोड़ा तो टाइम पे दे देती अभी उसके घर भीजवा दो. मामि ने मामा को बोला रजत तो जा नहि सकता ऐसा करो आप ही दे आओ.

शादी के दिन जोड़ा पहुचाना शुभ नहि होता लोग बाते बनाएँगे. मामा बोले ठीक है में दे आता हूँ.

तभी डोर बेल बजी. अनु ने डोर खोला बाहर रोहित खड़ा था. उसे भी मेरी और माया दी की शादी के बारे पता चल गया था. रोहित को देख के में बोला “क्यों भाई रात में आने हुआ सब ठीक हे न”?

रोहित बोला “भाई कल शादी कर रहे हो बैचलर पार्टी तो दे देते बहुत कंजूस होते जा रहे हो”.

माँ बोली “बेटा पार्टी शादी के बाद ले लेना ना”.

रोहित बोला “वो तो देनि ही पड़ेगी, पर अभी भाई को मेरे साथ चलना होगा, हम फ्रेंड्स ने छोटी सी पार्टी रखी हे”.

माँ बोली “बेटा ठीक हे रजत जल्दी आ जाना”.

मैंने बोला “माँ ओके जल्दी आउंगा”.

में रोहित के साथ घर से बाहर निकला तो बाहर तीन चार कॉलेज फ्रेंड और खडे थे. मुझे देख के बोले “क्यों भाई बड़े छुपे रुस्तम निकले, किसी को बताया भी नहि की शादी हो रही हे, वो तो रोहित हे जो हमे बताया वरना तुम्, तो बताते ही नहि”.

मैंने बोला “नहि यार सब जल्दी जल्दी में हो रहा था तो दिमाग में नहि रही बात, वेसे भी शादी के बाद पार्टी तो देता ही में”.

कॉलेज फ्रेंड “हा हा जानते हे प्रिन्सिपल के दामाद बनने वाले हो,हमे आज पार्टी चाहिए रोहित किसी बार में चल आज बेयर शेअर के बगैर कोई पार्टी नही होगी”.

मैंने भी बोल दिया “रोहित चल यार इनको आज पीला ही दे”.

हम एक बार में पहुचे. रोहित ने बीअर ऑर्डर की हम सब ने एक एक बीअर ली . फिर रोहित बोला “भाई आज

वोड्का पिने का मन कर रहा हे. मैंने बोला “मँगवा ले सब खुश हो गये”.

रोहित न दे दो वोडका की बॉटल मँगवाई में पहली बार पि रहा था. बाकि सब तो जाम पे जाम पिए जा रहे थे. मैं बोला यार थोड़ा धीरे टल्ली मत हो जाना. रोहित ने

स्नैक्स भी मँगवा लिया. मैंने स्नैक्स खाये और वोडका पि मुझे चड़ने लगी तो

मैंने और पिने से मना कर दिया सब पिके धूत हो गए थे. मैंने बिल पे कीया और

हम घर की तरफ चल पड़े. घर पहुच के रोहित बोला “तू जा अंदर में नहि आने वाला, आंटी ने तुझे ऐसी हालत में देखा तो मुझे ही डाटेंगी”. में गाड़ी से उत्तरा लडखडाते हुये डोर के पास पंहुचा ही था की डोर खुला सामने

माया दी खड़ी थी. माया दी ने मेरी ऐसी हालत देखि कुछ नहि बोली मुझे अंदर ले

जा के सोफ़े पर बिठाया.

 
अपडेट 140

मैं घर पंहुचा तो माया दी ने मुझे देखा . में नशे में था थोड़ा.

मेरे पैर लडखडा रहे थे. माया दी ने मुझे सहारा दे कर अंदर सोफ़े पर ले

गयी. मुझे ऐसे लडखडाते देख मोम ने पूछा क्या हुआ. माया दी बोली कुछ नहि

मोम बस भाई की तबियत थोड़ी खऱाब लग रही हे. आप जाओ सो जाओ में भाई को रूम

मे ले जाती हूँ. माँ मुझे यु नशे में देख के बोली रजत ये क्या हे तुमैंने ड्रिंक

की हे. मैं बोला माँ ड्रिंक नहि की बस दोस्तों ने बियर पिला दी. माँ बोली माया इसे

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रूम में ले जाओ और सुला दो. माया दी मुझे सहारा देकर ऊपर ले जाने लगी. माया दीने कंधे का सहारा देकर ऊपर रूम में पंहुचा दिया. माया दी ने मुझे बेड

पे लिटा दिया. दी ने मेरे जूते उतार दिये. में बोला “दी आई लव यु”.

माया दी बोली “आई लव यु टू जान”.

ड़ी ने मेरी शर्ट ऊतारनी शुरू कर दी. मुझे नशा तो चढ़ ही रहा था इस

नशे की वजह से आज मुझे दी और भी खूबसुरत लग रही थी. मैंने दी को पकड़

लिया.

दी बोली “भैय्या क्या कर रहे हो शर्ट तो निकालने दो”.

मैंने बोला “में तो प्यार ही कर रहा हूँ”. मैंने दी के होठो से अपने होठ रख दिए. मैं दी के होठो को चुसना

शुरु कर दिया. दी मेरे सीने को सहला रही थी. थोड़ी देर चुस्ने के बाद दी बोली

“कपडे उतारने दो मुझे”.

दी ने मेरी पेण्ट खोल दी और उतारकर के साइड में रख दी.

मैंने दी को अपने ऊपर खीच लिया उनके होठो को चुस्ने लगा उनके गालो गले पर

चुमैंने लगा. दी ने भी मेरे चहेरे पे चूमियो की बोछार कर दी.

थोड़ी देर बाद दी बोली “अब सो जाओ”. माया दी उठ के जाने लगी. मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.

माया दी पलटी और बोली “क्या हुआ भाई”.

मैंने बोला “मेरे साथ ही आज सो जाओ”. माया दी बोली “भाई समझो”.

मैंने बोला “दी प्लीज्” .

माया दी मुस्कुरा के मेरे पास बैठ गई.

माया दी मेरे पास ही टांगे फैला के बिस्तर पर बैठ गई. मैंने अपना सर माया दी की गोद में रखा.

माया दी बोली “क्या हुआ आज बहुत प्यार आ रहा हे”

मैंने बोला “आज आप बहुत खोबसूरत लग रही हूँ”.

माया दी बोली “सच बोल रहा है की

ड्रिंक का असर है”.

मैं माया दी के पेट् से मुह रगड़ते हुये बोला “दिल से बोल रहा हु, आज आप बहुत ही जियादा क्यूट लग रही हो”.

मैंने माया दी की चुचीओं को कपडे

के ऊपर से पकड़ के दबाना शुरू कर दिया. माया दी बोली “भाई कुछ तो सब्र कर”.

मैंने बोला “दी आज लास्ट बार प्लीज् फिर गोवा जा के करूँगा पक्का”.

दी बोली “तुम कभी नहि सब्र कर सकते,तुमको तो हर टाइम चाहिए मुझे नहि मनाओंगे तो किसी और से

माँगने लगोगे”.

मैंने माया दी का सूट ऊपर कर दिया. और निकालने लगा. माया दी ने भी हाथ उपर करके सूट निकलने दिया. फिर मैंने दी की सलवार का नाडा भी खोल

दिया. दी ने उसे भी अपनी कमर से निचे उतार दिया. दी ने ब्लू पेन्टी पहनी थी जिस पर चुत वाली जगह पे हार्ट बना हुआ था,मैंने दी को लिटा दिया. में दी की ब्रा के ऊपर से चूचियों को मुह में दाल कर चुस्ने लगा. मेरा हाथ माया दी की बुर पे गया तो पता चला पेन्टी गिल्ली हे

ब्लू रूंग की वजह से देखने में नहि पता चला की गिल्ली हे. मैंने माया दी को बोला

“दि आप की चुत तो बहुत गिल्ली हे”.

दी बोली “सुबह से ही बहुत मन था तुम्हारी याद मे गिल्ली हो रही थी”.

मैंने बोला “फिर दी आ जाती मेरी बाहो में” दी बोली “कैसे आती माँ सारा दिन पीछे पड़ी थी अब जा के मोका मिला हे”.

मैंने दी की चुत को जोर से मसला दी

के मुह से सिसकि फ़ुट गई “ओह माँ”

दी बोली “कब से तरस रही थी इसके लिए”. मैंने दी की पेन्टी में हाथ दाल दिया दी की चुत बहुत पाणी

छोड़ रही थी. मैंने अपनी उंगली उनकी चुत में घूसा दी.

“उइ माँ भाई ऐसे ही करो बहुत अच्छा लग रहा है”.

मैंने दी की चुत में उंगली अंदर बाहर करना शुरू कर दि. मैंने दी की ब्रा को

पीछे हाथ दाल के खोल दिया दी ने ब्रा को हटा दिया. मेरी निकर में लंड तन के टेंट बना रहा था. दी ने मेरे लंड को

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निकर के ऊपर से सहलाया.मैंने दी की एक चुची को मुठी में पकड़ चूसना शुरू

कर दिया. मेरी उंगली दी की चुत में लगा तार अंदर बाहर हो रही थी. दी मेरी निकर

मे हाथ दाल लंड हिला रही थी. जोश में मैंने दी के निप्पल को जोर से काट

लिया.माया दी चिल्लाई.

 
अपडेट 141

मेरे दांत माया दी की चूचि पे

गड चुके थे उनसे खून निकलने लगा जिसे देख दी बोली भाई ये क्या किया आपने

बोला प्यार की निशानी दी हे आज मैने. और में चूचि से निकलता खून चाटने लगा

दि को सुकून मिला मेरे ऐसे चाटने से. में दी के निप्पल को चूसने लगा कभी होठो को चूसता कभी निप्पल को चूसता

दि की चुत में उंगली करता गया. दी भी मेरे लंड को जोर जोर से दबा और सहला

रही थी

मैंने माया दी को ६९ पोज में लिटा दिया और उनकी चुत चाटने लगा. दी ने

भी मेरे लंड को मुह में ले लिया और चुस्ने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दी के मुह

मे धक्के मारने लगा. मेरे धक्के लगने से दी के मुह में चोट लगने गई. दी

ने मुझे पलट दिया और खुद ऊपर आ गई. दी अब आराम आराम से मेरे लंड को चूस

रही थी. मैंने दी की बुर में दो उंगलिया घूसा दी दी की चीख निकल गई

मैंने दी की बुर में उंगलिया दाल के

चोदना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में ही दी का पानी निकल गया. मैंने दी का सारा

पाणी पिया दी सुस्त पड़ गई पर मेरा लंड तो तूफ़ान मचाना चाहता था. मैंने

सीधा दी की टांगो के बिच आ गया. दी मुझे देख रही थी. मैंने दी की चुत से

लंड लगा के जोर से धक्का मारा दी की चीख निकल गई

“ओह मा मर गयी”

मैं बोला “अभी कहा मरने दूंगा आज तो फुल हनी मून मनायेंगे”.

माया दी की चुत को चिरता हुआ

लंड घुसता जा रहा था. उनकी आँखों से दर्द का अहसास हो रहा था.

मैंने झुक कर दीदी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया उनको बेदर्दी से

मसलने लगा. माया दी सिसकिया लेती हुई बोलने लगी “भाई धीरे दबाओ बहुत

दर्द हो रहा हे”

पर मुझे उनकी बाते सुनाई नहि दे रही थी. में चूचियों को मसल के चुस्ने लगा और चुत में जोर जोर से धक्के मारने लगा.

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माया दी को बहुत दर्द हो रहा था. उनकी चूचियों को मसलने से खून निकल रहा था जिसको में चाट

रहा था. मेरे धक्कों से दी पूरी हिल रही थी. थोड़ी ही देर में दी भी मुझे जकड के जोर जोर से धक्कों का रिस्पोंस देणे लगी.माया दी बोली भाई और जोर से चोदो . फाड्

दालो आज मेरी चुत. मैं बोला “दी आप बहुत सेक्सी हो”. दी बोली “आप भी भाई”. मैंने दी

की टांगो को कंधे पे रख के चोदना शुरू कर दिया. मेरे धक्कों से दी की

चुचिया उछाल रही थी. दी अपनी एक चूचि को पकड़ के चुस्ने की कोशिश कर रही

थी. माया दी फिर से झड़ने लगी. मेरा पाणी निकलने को राजि नहि था. में माया दी की

चुत मारता रहा.

थोड़ी देर बाद माया दी बोली “भाई चुत में जलन हो रही हे थोड़ा रेस्ट करने दो”.

मैं बोला “दी में तो झडा नहि, मेरा लंड जब तक आग नहि उगलता, मे नहि रुकुंगा”.

दी बोली “भाई रहम कर प्लीज् बहुत जलन हो रही हे”.

दी की आँखों के आसु देख के रुक गया में फिर बोला “ठीक हे चुत नहि मारता पर गांड मरूँगा अब”.

दि बोली “भाई रेस्ट करने दो फिर चुत मार लेना गांड में बहुत दर्द होता हे”.

मैंने दी की बात नहि सुनि दी को पलट दिया उनकी गांड पकड़ के ऊपर खीच के उठा दिया.

मेरा लंड दी की गांड की सुराख़ के एक दम सामने था.

दी बोली “भाई रेस्ट करने दो ना”.

मैंने बोला “नहि अब गांड मारूँगा, चुत को रेस्ट मिल तो रही हे”.

मैंने लंड पकड़ के गांड की सुराख़ पे रख के दबाया लंड गांड में समां गया. कई

दीनो से गांड नहि मारी थी तो दी की गांड फिर से टाइट हो गयी थी.

मैंने बोला “दी आप की गांड फिर से टाइट हो गई इस बार ऐसी गांड मारूँगा की टाइट नहि होगी”.

दी झुक के लेटी रही. मैंने दी की गांड में जोर से धक्का मारा और पुरा लंड घूसा दिया. माया

दि सीसकिया लेने लगी मैंने फिर से धक्का मारा और माया दी की गांड में पूरा लंड घूसा दिया. माया दी छटपटाने लगी. मैंने माया दी की गांड

पे थप्पड़ मारा.

माया दी फिर चिल्लाई “भाई मारो मत”.

मैंने बोला “चुप रहो वरना, आज आप की खैर नहि”. नशे की वजह से मेरा पाणी आज नहि निकल रहा था में माया दि की गांड में लंड घुसाने लगा. कमर पकड़ के जोर जोर से धक्के मारने लगा.

फीर मैंने माया दी की चूचिया को पकड़ के माया दी को सीधा कर दिया. अब में और

माया दी दोनों घुटने के बल बैथे थे. में माया दी की चूचियों को पकड़ के

माया दी की गांड मारने लगा. माया दी को भी मज़ा आने लगा. माया दी अपनी चुत

मे उंगली करने लगी. में घुटनों के बल बैठा बैठा थक गया था. मैंने माया दि को पकड़ के लेटने की सोच. मैंने माया दी की कमर को पकड़ के लेट गया.

मैंने माया दी की एक टांग पकड़ के उठा ली और गांड मारने लगा. माया दी

अपणे हाथ से अपनी चुत मसल रही थी. में दूसरे हाथ से माया दी की चूचि को बुरी

तरह मसल रहा था. मेरा पाणी निकलने वाला था मैंने अपना लंड गांड से निकाल के

माया दी की चुत में घूसा दिया और ताबड़तोड़ चुत मारने लगा. इतनी जबर दस्त

चुदायीं करने लगा की माया दी पूरी हिल गई फिर में झड़ने लगा उनकी चुत में

मेरा आज बहुत पाणी निकला. माया दी की चुत मेरे पाणी से भर गई थी. मैंने माया दि को कस के पकड लिया, हम दोनों थक गए थे नंगे ही लेटे रहे. माया दी बोली “आज तुमने बहुत जबरदस्त चुदाई की मेरी” क्यों”?

मैं बोला “आज आप मेरी बिवी जो बनी हो तो नजराना तो देना ही था इस लिए चोद दिया”. दी बोली “आज एक और नजराना

दिया”,

मैंने पूछा “कोण सा”?

माया दी ने अपनी चूचियों को दिखाया. जिनपे मेरे दाँतो के निशान पड़ गए थे. मैंने माया दी के होठो को चुस्ने लगा.

माया दी बोली “भाई अब तो सो जाओ की अभी भी मन नहि भरा”.

मैंने बोला “दी आप से कभी मन

नही भर सकता”.

हम दोनों एक दूसरे को चुमने लगे मैंने माया दी की गांड जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया. माया दी बोली “भाई अब तो सो जाओ मुझे भी नींद आ रही हे”.

मैंने बोला “एक शर्त पे सारी रात लंड चुत में रहेगा, निकलने ना पाये”.

दी मान गई दी ने मुझे जकड के पकड़ लिया हम दोनों एक दूसरे से लिपट के बाते

करते करते सो गए.

सूबह काया की आवाज से हमारी आंख खुली

 
अपडेट 142

सूबह काया की आवाज से हमारी आंख खुली

काया बाहर डोर खड़खड़ा रही थी. मेरी आंख खुली तो सामने माया दी का चेहरा था. माया दी ने अपनी टांगे मेरे से लपेट रखी थी और मेरा लंड दी की चुत

मे फसा हुआ था. सुबह सुबह प्रेशर से लंड चुत में एक दम खड़ा हो गया था. मैंने दी के होठो से अपने होठ चिपका दिए और दी के होठ चुसते हुये बोला गुड मॉर्निंग डियर”.

माया दी भी जग गई जवाब में बोली गुड मॉर्निंग जाणू” .

बाहर काया बोल रही थी “भाई रेडी हो जाओ, मंदिर जाना हे चाची बोल रही हे”.

माया दी बोली “जानु आप का लंड सुबह सुबह खड़ा हे और मंदिर जाना हे”

मैंने माया दी की चुत में धक्का मार के कहा. “अपनी बिवी को बाहो में लेकर सोउंगा तो खड़ा ही रहेगा”.

काया की आवाज सुन के माया दी जोर से बोली “बस रेडी करती हूँ भाई को तुम

सब रेडी हो जाओ”.

काया चलि गई . मैंने माया दी को बाहो में लेकर बोला कैसे रेडी करोगी जब तक मेरा लंड नहि बैठ जाता. माया दी बोली “रेडी हो जाओ लंड को बैठाने वाली, एक और आप का वेट कर रही है”.

मैंने माया दी को उठा के बैठा लिया

गोड़ में. मेरा लंड माया दी की चुत में पूरा समया हुआ था. माया दी मेरे लंड पर उछलने लगी

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कुछ देर बाद उनका पानी निकल गया वह शांत पड गयी फिर

माया दी बोली “भाई मुझे बहुत तेज़ सुसु आया हे”.

मैंने बोला “मुझे भी आया हे”.

में माया दी को गोद मे उठा के बाथ रूम में ले आया .दीदी को मैंने उतार दिया और बोला “मेरे सामने खड़ी हो के मुतो”.

माया दी बोली “मुझे शर्म आती हे”.

मैं बोला “दी हमारे बिच क्या रह गया हे जो शर्मा रही हो”.

माया दी बोली “ओरत बेशक मर्द के सामने सब कुछ कर लेती हे पर फिर भी शर्म ख़तम नहि होती”.

मैंने जिद की तो दी मेरे सामने बैठ गई. और छल छल

मुतने लगी मुझे भी सुसु आ रही थी में बैठ गया लंड को पकड़ के दीदी की बुर

पे निशाना लगाया और मुतने लगा. मेरा सुसु सिधा माया दी की चुत पे गीरने

लगा. माया दी भी पूरा जोर लगा के मूत रही थी. दोनों मुतने के बाद खड़े हो

गये. में माया दी के पास गया. उनका बदन जगह जगह से लाल हो गया था.

माया दी और में शावर के निचे खड़े हो गए. माया दी ने शावर ऑन कर दिया.

ठंडा पाणी हमारे गर्म बदन पे गिरने लगा. मैंने माया दी को पकड़ के खुद

से चिपका लिया. मेरा लंड माया दी की चुत पे दस्तक देणे लगा. माया दी ने साबुन

मेरे बदन पे लगाते हुए बोली “भाई नहा लो जलदी हम लेट हो रहे हे, ये सब

करने को तो बहुत टाइम हे हमारे पास”.

मैंने दी की चूचि को मुह में ड़ालते हुए बोला “वक़्त का मोहताज़ नहि जब मन होगा अपनी बिवी के साथ प्यार करूँगा”.

मैंने माया दी को घुमा दिया अब मेरा लंड माया दी की गांड में घुस रहा था. मैंने

सोप माया दी की चूचियों पे मला उनके बदन पे लगा के उनकी चुत पे लगाया. माया

दि ने सूप लंड पे लगया . मैंने दी की चूचियों को दबा दबा के मसलना शुरू कर

दिया. दी भी मेरे लंड को सहलाती रही.

मैंने लंड को पकड़ के दी की गांड में घूसा दिया.

दी सिसिक्य लेती हुई बोली “भाई क्या कर रहे हो हम लेट हो रहे हे, और तुम मस्ती किये जा रहे हो” , मैंने बोला बस ५मिनट दीदी क्या करू लंड ऐसे ही शांत होगा”. माया दी दीवार के सहारे खड़ी हो गई. में उनकी कमर पकड़ के गांड में धक्के मारने लगा. मेरे धक्कों

के साथ माया दी आगे की तरफ भागति में भी उनके साथ साथ चिपकता जा रहा था.मैंने आगे हाथ बड़ा के माया दी की चुत को पकड़ लिया. मैंने चुत में उंगली

दाल के सेहलाना शुरू कर दिया. में माया दी की चुत जोर जोर से मसल रहा था और

गांड में धक्के मारे जा रहा था. दोनों के बदन का साबुन सुख रहा था. जलद ही

माया दी का पाणी निकल गया वो हाँफने लगी और मेरा भी निकलने वाला था. मैंने

गांड से लंड निकाल दी को बैठने का इशारा किया दी बैठ गई. मैंने लंड उनके मुह

मे दाल दिया और झड़ने लगा.

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माया दी ने सारा पाणी पि लिया. में पस्त हो चुका था.

मे बैठ गया. हम दोनों थोड़ी देर सुस्ताने लगे. माया दी ने शावर फिर ऑन किया

पाणी हमारे बदन को गिला करने लगा. दोनों नहा के बाहर आ गये. माया दी

नंगी मेरे सामने घूम रही थी. माया दी मेरे लिए कपडे लायी. फिर माया दी मेरे

सामने ही रेडी होने लगी. जल्द ही हम दोनों रेडी हो चुके थे. सुबह सुबह

चुदाई करके में हलका फील कर रहा था. दी भी आज कुछ ज्यादा ही चमक रही

थी हम दोनों रेडी थे.

तभी माँ आ गई. माया दी ने डोर खोला तो माँ बोली “क्या कर रहे हो हम लेट हो रहे है” माया दी बोली “माँ हम रेड़ी हे बस आ ही रहे थे अभी बहुत टाइम है”.

माँ बोली हमे मंदिर में पूजा भी करनी हे उसके बाद शादी हे”.

हम तीनो निचे आ गए निचे सब रेडी थे सब एक से बढ़ कर एक लग रहे थे.

मामा ने बोला बेटा ऐसे ही देर करोगे तो शुभ मुहुरत निकल जायेगा. हम बाहर

आए तो राहुल और रोहित अपनी फॅमिली के साथ हमरा वेट कर रहे थे. मामा ने कार

निकाल ली माँ और माया दीदी मेरे साथ बैठ गई. मामा ने मामि चाचा चाची और

बहनो को राहुल और रोहित की गाड़ी में आने को कहा. सब उनकी गाडियो में बैठ

गये. थोड़ी ही देर में हम टेम्पल पहुच गए.

 
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