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उधेर बिहारी का लंड तेज़ी से आगे पीछे होने लगता हैं और इधेर उसकी हाथ तेज़ी से हरकत करने लगती हैं. विजय और जग्गा अपने हाथों से अपना लंड सहला रहे थे. तभी विजय धीरे धीरे राधिका के पास आता हैं और अपना लंड राधिका के मूह के पास ले जाता हैं. राधिका समझ जाती है कि विजय क्या चाहता हैं. फिर वो बिना रुके झट से विजय के लंड को अपने मूह में ले लेती हैं और धीरे धीरे उसे चूसने लगती हैं. ऐसा पहली बार था कि राधिका आज दो लंड एक साथ अपने गान्ड और मूह में ली हुई थी. धीरे धीरे विजय भी अपने लंड पर दबाव बढ़ाने लगता हैं और कुछ देर में उसका लंड राधिका के हलक में पहुँच जाता हैं. इतनी देर से जग्गा भी खड़ा चुप चाप अपने लंड को हिला रहा था वो भी अब राधिका के पास जाता हैं और अपना लंड सीधा उसकी चूत में डालने लगता हैं. राधिका लंड चूसना छोड़ कर एक नज़र जग्गा की ओर देखने लगती हैं.
वैसे राधिका जानती थी कि इस तरह का सेक्स फ़िल्मो में होता हैं मगर उसे क्या मालून था कि ऐसा सेक्स उसके साथ भी होगा. उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था कुछ एग्ज़ाइट्मेंट की वजह से और कुछ डर से.. फिर भी वो जग्गा की किसी भी बात का कोई विरोध नहीं करती और धीरे धीरे जग्गा का लंड उसकी चूत में जाना चालू हो जाता हैं. जैसे जैसे लंड उसकी चूत में जाता हैं वैसे वैसे राधिका की चीखें बढ़ती जाती हैं और उसका दर्द भी बढ़ता जाता हैं. थोड़ी देर कोशिश करने के बाद जग्गा अपना लंड पूरा बाहर निकालता हैं और बिना रुके एक ही झटके में अपना लंड पूरा अंदर डाल देता हैं. राधिका की एक ज़ोरदार चीख निकल पड़ती हैं और उसकी आँखें लज़्ज़त से बंद हो जाती हैं.
थोड़ी देर के बाद राधिका की तकलीफ़ अब धीरे धीरे मज़े में बदल जाती हैं. उसकी भी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी और एक ही समय पर एक साथ तीन लंड वो अपने अंदर ली हुई थी. उसे तो ऐसा लग रहा था कि वो अब जन्नत में हैं उपर से ड्रग्स और वियाग्रा का नशा पहले से उसपर हावी था. इस समय वो कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं थी. बस कैसे भी करके उसको चूत की आग ठंडी करनी थी और वो इसके लिए आज कितना भी नीचे गिर सकती थी. करीब 10 मिनिट ही बीते होंगे राधिका के अंदर इतनी देर से जो तूफान रूका हुआ था अब वो सैलाब बनकर उमड़ पड़ा था. अब वो अपने चरम सीमा पर थी तभी वो चीख पड़ती हैं और विजय का भी लंड पानी छोड़ देता हैं और उधेर बिहार और जग्गा के लंड से भी एक सैलाब उमड़ पड़ता हैं और तीनों वहीं निढाल होकर उसके उपर पसर जाते हैं और राधिका की चूत के अंदर भी एक लावा बह निकलता हैं जिससे उसकी आँखें बंद हो जाती हैं. जिसके लिए वो इतनी देर से तड़प रही थी. आज उसके अंदर का लावा फुट पड़ा था. वो भी वहीं उन तीनों के साथ धाम से बिस्तेर पर गिर पड़ती हैं. ना जाने कितने देर तक वो ऐसे ही अपनी साँसों को कंट्रोल करने की कोशिश करती हैं.