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Guest
और बिहारी भी अंडू के एकदम करीब चला जाता है और अपना दाया हाथ आगे बढाकर राधिका के बाल को कसकर पकड़ लेता हैं. राधिका के मूह से एक तेज़्ज़ सिसकारी निकल पड़ती हैं. फिर वो राधिका को घसीटता हुआ कृष्णा से दूर लेजाता है और कसकर एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर मार देता हैं. थप्पड़ इतना ज़ोरदार था कि राधिका के आँखों से आँसू निकल जाते हैं और उसकी आँखों के सामने कुछ पल के लिए अंधेरा छा जाता हैं.
ये सब देखकर कृष्णा ज़ोर से चिल्ला पड़ता हैं. अब इस वक़्त वो भी मज़बूर था उसके दोनो हाथ बिहारी के आदमियों ने कसकर पकड़ रखे थे इस लिए वो चाह कर भी अपना हाथ नही छुड़ा पा रहा था.
कृष्णा- छोड़ दे बिहारी मेरी बेहन को. तेरी बात मुझसे हैं. तू मेरी बेहन को क्यों बीच में ला रहा हैं.
तभी बिहारी का एक आदमी कहता हैं- मालिक ये लड़की तो आप पर हाथ उठाई हैं. साली को यही पर इसके भाई के सामने इसका बलात्कार करते हैं. कसम से बहुत मज़ा आएगा.
कृष्णा भी अगर होश में रहता तो शायद वो उन तीनो का अकेला सामना कर लेता मगर वो इस समय खुद ठीक से खड़ा भी नही हो पा रहा था. सामना क्या खाक करता.
बिहारी भी राधिका के करीब जाता हैं और उसके सीने से दुपट्टा को उतार कर फर्श पर फेंक देता हैं. ये सब देखकर कृष्णा की आँखों में खून समा जाता हैं. राधिका झट से अपने दोनो हाथ अपने सीने पर रख देती हैं और अपना सिर नीचे झुका कर रोने लगती हैं. आज तक उसे अपनी ज़िंदगी में कभी इस तरह से किसी ने हाथ भी नही उठाया था. और ना ही किसी ने ऐसा जॅलील किया था.
कृष्णा- तेरी दुश्मनी मुझसे हैं. अगर तूने अब की बार राधिका को हाथ भी लगाया तो मैं भूल जाउन्गा की तेरा मुझपर कोई एहसान भी हैं. फिर चाहे मुझे फाँसी ही क्यों ना हो जाए लेकिन तू भी ज़िंदा नही बचेगा.
राधिका के आँख से आँसू रुकने का नाम ही नही ले रहे थे. और वो उसी अवस्था में नीचे फर्श पर बैठी हुई थी.
अपना सिर को झुकाए.
बिहारी- देख कृष्णा अगर मैं चाहू तो यही पर तेरी बेहन के साथ गॅंगरेप करवा सकता हूँ तेरे आँखों के सामने. और तू तो जानता हैं कि इस दुनिया में कोई भी भाई कितना भी गिरा क्यों ना हो अपनी ही बेहन का गॅंगरेप होते हुए अपनी आँखों के सामने कभी नहीं देख सकता. और मैं जांटा हूँ कि तू भी ये नही चाहेगा.
कृष्णा- देख बिहारी मेरी बेहन को बीच में मत घसीट. तुझे जो करना हैं मेरे साथ कर. .......
बिहारी हंसते हुए..... देख भाई मैं यहाँ पर तुझसे कोई दुश्मनी निकालने के लिए नहीं आया हूँ. मैं तो बस एक सौगात लेकर आया था मगर तुझे तो मेरी कोई भी बात सीधी तरह समझ में नहीं आती .
कृष्णा- कैसा सौगात.??? मैं कुछ समझा नहीं. ???
बिहारी फिर अपने आदमियों से कृष्णा का हाथ छोड़ने का इशारा करता है और तीनों आदमी एक साइड खड़े हो जाते हैं.
बिहारी- देख कृष्णा अब जो मैं तुझसे कहना चाहता हूँ वो तू ध्यान से सुन. तू मेरे यहाँ काम कर चाहे ना कर इस बारे मे मैं तुझे कुछ नही कहूँगा. पर.............
कृष्णा-पर............क्या बिहारी.
बिहारी- मैं तो तेरी बेहन से अपने ब्याह का प्रस्ताव लेकर आया हूँ. मैं तेरी बेहन से शादी करना चाहता हूँ.
राधिका ये सब सुनकर उसके होश उड़ जाते हैं और कृष्णा का भी मूह खुला रह जाता हैं.
कृष्णा- क्या............ ये......क्या कह रहे हो बिहारी.....ऐसा कभी नहीं हो सकता..
बिहारी- क्या करूँ कृष्णा तेरी बेहन हैं ही ऐसी. मेरा दिल उसपे आ गया हैं. सोच ले कोई जल्दी नहीं हैं. आराम से खूब सोच समझ कर बताना.
राधिका- भैया इनसे कह दो कि मैं मर जाउन्गि मगर इनसे कभी शादी नहीं करूँगी. अरे कम से कम अपनी उमर का तो लिहाज करो. मेरे बाप के उमर के हो और अपनी बेटी के बराबर लड़की से शादी करना चाहते हो.
बिहारी- अरे देख ना मुझे , क्या नहीं हैं मेरे पास. बंगला, गाड़ी, शोहरात, सब कुछ तो हैं. और तो और मैं इस सहर का एमएलए भी हूँ. बस तू हां कह दे फिर देखना तुझे रानी बनाकर रखूँगा. तुझे किसी भी चीज़ की तकलीफ़ नही होगी. यहाँ पर क्या रखा हैं. ये टूटा हुआ घर. तू कैसे ऐसे माहूल में रहती होगी. मेरे साथ चल तुझे मैं अपने पलकों पर बिठा कर रखूँगा.
कृष्णा- बिहारी , अगर तेरा मुझपर एहसान नहीं होता तो तू इस वक़्त यहाँ अपने कदमों पर खड़ा नही होता. तूने ये कैसे सोच लिया कि मैं अपनी बेहन का हाथ तुझे दूँगा. इससे पहले कि मैं सब कुछ भूल जाओं तू यहाँ से चला जा अपने आदमियों के साथ.
बिहारी- ठीक हैं अगर तुम दोनों का यही फैल्सा हैं तो यही सही. लेकिन एक बात जान ले अगर मुझे कोई भी चीज़ पसंद आ जाती हैं तो मैं उसे किसी भी तरह हासिल कर लेता हूँ. चाहे शाम................दाम ..........डंड................भेद......... अगर इन चारों नीति में से मुझे जो भी अपनाना पड़े , राधिका को अगर हासिल करने में तो.. मैं इससे पीछे नहीं हटूँगा. अगर राधिका मेरी नही हुई तो मैं उसे किसी और के लायक रहने भी नही दूँगा.
कृष्णा- बिहारी अबकी आखरी बार बोल रहा हूँ चुप चाप चल जा. वरना मैं भूल जाउन्गा कि ..................
बिहारी- जा रहा हूँ लेकिन कब तक तू अपनी बेहन को बचाता फ़िरेगा. देख लेना मुझसे दुश्मनी तुझे बहुत महँगी पड़ेगी.
और बिहारी अपने आदमियों से साथ बाहर निकल जाता हैं..
राधिका भी दौड़ कर कृष्णा के गले लग जाती हैं. आज वाकई में उसका दिन बहुत खराब बीता था. कृष्णा भी उसे बड़े प्यार से अपनी बाहों में ले लेता हैं और उसके सर पर अपना हाथ फेरता हैं.
राधिका- भैया मुझे कहीं से ज़हर लाकर दे दो. मैं सच में जीना नहीं चाहती. दुनिया में लोग खूबसूरत बनने के लिए ना जाने क्या क्या करते हैं. और आज मेरी सुंदरता ही मेरी दुश्मन बनती जा रही हैं. देख लेना किसी दिन ये मेरी जान लेकर ही रहेगी.
कृष्णा- वो तेरा कुछ नहीं बिगड़ पाएगा. मेरे जीते जी कोई तुझे आँख उठा कर भी देखेगा तो साले की आँखें निकाल लूँगा......
फिर दोनो की आँखें से आँसू बहने लगते हैं .................................
राधिका उसी तरह कृष्णा के बाहों में ऐसे ही लिपटी रहती हैं. फिर वो उठकर जाती हैं और डेटोल और रूई लेकर आती हैं और कृष्णा के होंठ पर लगाती हैं. कृष्णा भी एक टक राधिका को बड़े ही प्यार से देखने लगता हैं.
कृष्णा- रहने दे राधिका मैं इसी लायक हूँ. आज मेरी वजह से वो बिहारी तेरे पर हाथ उठा कर चला गया और मैं कुछ नहीं कर सका.
राधिका- इसमें आपकी कोई ग़लती नहीं हैं भैया. वो तो हैं ही कमीना.
ये सब देखकर कृष्णा ज़ोर से चिल्ला पड़ता हैं. अब इस वक़्त वो भी मज़बूर था उसके दोनो हाथ बिहारी के आदमियों ने कसकर पकड़ रखे थे इस लिए वो चाह कर भी अपना हाथ नही छुड़ा पा रहा था.
कृष्णा- छोड़ दे बिहारी मेरी बेहन को. तेरी बात मुझसे हैं. तू मेरी बेहन को क्यों बीच में ला रहा हैं.
तभी बिहारी का एक आदमी कहता हैं- मालिक ये लड़की तो आप पर हाथ उठाई हैं. साली को यही पर इसके भाई के सामने इसका बलात्कार करते हैं. कसम से बहुत मज़ा आएगा.
कृष्णा भी अगर होश में रहता तो शायद वो उन तीनो का अकेला सामना कर लेता मगर वो इस समय खुद ठीक से खड़ा भी नही हो पा रहा था. सामना क्या खाक करता.
बिहारी भी राधिका के करीब जाता हैं और उसके सीने से दुपट्टा को उतार कर फर्श पर फेंक देता हैं. ये सब देखकर कृष्णा की आँखों में खून समा जाता हैं. राधिका झट से अपने दोनो हाथ अपने सीने पर रख देती हैं और अपना सिर नीचे झुका कर रोने लगती हैं. आज तक उसे अपनी ज़िंदगी में कभी इस तरह से किसी ने हाथ भी नही उठाया था. और ना ही किसी ने ऐसा जॅलील किया था.
कृष्णा- तेरी दुश्मनी मुझसे हैं. अगर तूने अब की बार राधिका को हाथ भी लगाया तो मैं भूल जाउन्गा की तेरा मुझपर कोई एहसान भी हैं. फिर चाहे मुझे फाँसी ही क्यों ना हो जाए लेकिन तू भी ज़िंदा नही बचेगा.
राधिका के आँख से आँसू रुकने का नाम ही नही ले रहे थे. और वो उसी अवस्था में नीचे फर्श पर बैठी हुई थी.
अपना सिर को झुकाए.
बिहारी- देख कृष्णा अगर मैं चाहू तो यही पर तेरी बेहन के साथ गॅंगरेप करवा सकता हूँ तेरे आँखों के सामने. और तू तो जानता हैं कि इस दुनिया में कोई भी भाई कितना भी गिरा क्यों ना हो अपनी ही बेहन का गॅंगरेप होते हुए अपनी आँखों के सामने कभी नहीं देख सकता. और मैं जांटा हूँ कि तू भी ये नही चाहेगा.
कृष्णा- देख बिहारी मेरी बेहन को बीच में मत घसीट. तुझे जो करना हैं मेरे साथ कर. .......
बिहारी हंसते हुए..... देख भाई मैं यहाँ पर तुझसे कोई दुश्मनी निकालने के लिए नहीं आया हूँ. मैं तो बस एक सौगात लेकर आया था मगर तुझे तो मेरी कोई भी बात सीधी तरह समझ में नहीं आती .
कृष्णा- कैसा सौगात.??? मैं कुछ समझा नहीं. ???
बिहारी फिर अपने आदमियों से कृष्णा का हाथ छोड़ने का इशारा करता है और तीनों आदमी एक साइड खड़े हो जाते हैं.
बिहारी- देख कृष्णा अब जो मैं तुझसे कहना चाहता हूँ वो तू ध्यान से सुन. तू मेरे यहाँ काम कर चाहे ना कर इस बारे मे मैं तुझे कुछ नही कहूँगा. पर.............
कृष्णा-पर............क्या बिहारी.
बिहारी- मैं तो तेरी बेहन से अपने ब्याह का प्रस्ताव लेकर आया हूँ. मैं तेरी बेहन से शादी करना चाहता हूँ.
राधिका ये सब सुनकर उसके होश उड़ जाते हैं और कृष्णा का भी मूह खुला रह जाता हैं.
कृष्णा- क्या............ ये......क्या कह रहे हो बिहारी.....ऐसा कभी नहीं हो सकता..
बिहारी- क्या करूँ कृष्णा तेरी बेहन हैं ही ऐसी. मेरा दिल उसपे आ गया हैं. सोच ले कोई जल्दी नहीं हैं. आराम से खूब सोच समझ कर बताना.
राधिका- भैया इनसे कह दो कि मैं मर जाउन्गि मगर इनसे कभी शादी नहीं करूँगी. अरे कम से कम अपनी उमर का तो लिहाज करो. मेरे बाप के उमर के हो और अपनी बेटी के बराबर लड़की से शादी करना चाहते हो.
बिहारी- अरे देख ना मुझे , क्या नहीं हैं मेरे पास. बंगला, गाड़ी, शोहरात, सब कुछ तो हैं. और तो और मैं इस सहर का एमएलए भी हूँ. बस तू हां कह दे फिर देखना तुझे रानी बनाकर रखूँगा. तुझे किसी भी चीज़ की तकलीफ़ नही होगी. यहाँ पर क्या रखा हैं. ये टूटा हुआ घर. तू कैसे ऐसे माहूल में रहती होगी. मेरे साथ चल तुझे मैं अपने पलकों पर बिठा कर रखूँगा.
कृष्णा- बिहारी , अगर तेरा मुझपर एहसान नहीं होता तो तू इस वक़्त यहाँ अपने कदमों पर खड़ा नही होता. तूने ये कैसे सोच लिया कि मैं अपनी बेहन का हाथ तुझे दूँगा. इससे पहले कि मैं सब कुछ भूल जाओं तू यहाँ से चला जा अपने आदमियों के साथ.
बिहारी- ठीक हैं अगर तुम दोनों का यही फैल्सा हैं तो यही सही. लेकिन एक बात जान ले अगर मुझे कोई भी चीज़ पसंद आ जाती हैं तो मैं उसे किसी भी तरह हासिल कर लेता हूँ. चाहे शाम................दाम ..........डंड................भेद......... अगर इन चारों नीति में से मुझे जो भी अपनाना पड़े , राधिका को अगर हासिल करने में तो.. मैं इससे पीछे नहीं हटूँगा. अगर राधिका मेरी नही हुई तो मैं उसे किसी और के लायक रहने भी नही दूँगा.
कृष्णा- बिहारी अबकी आखरी बार बोल रहा हूँ चुप चाप चल जा. वरना मैं भूल जाउन्गा कि ..................
बिहारी- जा रहा हूँ लेकिन कब तक तू अपनी बेहन को बचाता फ़िरेगा. देख लेना मुझसे दुश्मनी तुझे बहुत महँगी पड़ेगी.
और बिहारी अपने आदमियों से साथ बाहर निकल जाता हैं..
राधिका भी दौड़ कर कृष्णा के गले लग जाती हैं. आज वाकई में उसका दिन बहुत खराब बीता था. कृष्णा भी उसे बड़े प्यार से अपनी बाहों में ले लेता हैं और उसके सर पर अपना हाथ फेरता हैं.
राधिका- भैया मुझे कहीं से ज़हर लाकर दे दो. मैं सच में जीना नहीं चाहती. दुनिया में लोग खूबसूरत बनने के लिए ना जाने क्या क्या करते हैं. और आज मेरी सुंदरता ही मेरी दुश्मन बनती जा रही हैं. देख लेना किसी दिन ये मेरी जान लेकर ही रहेगी.
कृष्णा- वो तेरा कुछ नहीं बिगड़ पाएगा. मेरे जीते जी कोई तुझे आँख उठा कर भी देखेगा तो साले की आँखें निकाल लूँगा......
फिर दोनो की आँखें से आँसू बहने लगते हैं .................................
राधिका उसी तरह कृष्णा के बाहों में ऐसे ही लिपटी रहती हैं. फिर वो उठकर जाती हैं और डेटोल और रूई लेकर आती हैं और कृष्णा के होंठ पर लगाती हैं. कृष्णा भी एक टक राधिका को बड़े ही प्यार से देखने लगता हैं.
कृष्णा- रहने दे राधिका मैं इसी लायक हूँ. आज मेरी वजह से वो बिहारी तेरे पर हाथ उठा कर चला गया और मैं कुछ नहीं कर सका.
राधिका- इसमें आपकी कोई ग़लती नहीं हैं भैया. वो तो हैं ही कमीना.