• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

व्यभिचारी नारियाँ complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
“हाँ यार हमें भी कहाँ होश था... तभी तो रैगिंग इस हद तक पहुँच गयी थी कि हमने उन फ्रेशर लड़कियों कि चूत मोटी-मोटी मोमबत्तियों से चोदी थीं और बाद में उनसे अपनी चूत चटवायी थीं?”

और तूने तो हद ही कर दी थी जब तूने एक लड़की के मुंह में मूत ही दिया था?”

दोनों जोर से खिलखिला कर हंस पड़ी। नजीबा सोच रही थी कि उसे बाद में बेडरूम में जाकर अपने हाथ से अपनी चूत की प्यास बुझानी पड़ेगी। शाजिया भी सोच रही थी कि नजीबा के सोने के बाद अपने कमरे में जाकर आज तो औरंगजेब और टीपू से जी भर कर रात भर चुदवायेगी। शाजिया ये सोच कर मुस्कुरा दी कि नजीबा कि क्या प्रतिक्रिया होगी अगर उसे पता चल गया कि वो चुदवाने में आज भी पीछे नहीं है बल्कि उसकी चुदाई की भूख इस कद्र बढ़ चुखी है कि वो अपने कुत्तों से नियमित चुदवाती है।

-

नजीबा भी सोच रही थी कि शाजिया को बताये कि नहीं कि वो आज भी पराये मर्दो से | चुदवाती है क्योंकि उसके इंडस्ट्रियलिस्ट पति को उससे ज्यादा अपने बिज़नेस में दिलचस्पी थी। उसका पति भी अपनी सेक्रेटरी और दूसरी औरतों को चोदता था। नजीबा तो कॉलेज के समय से ही चुदासी थी इसलिए उसे अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिये दूसरे मर्दो से चुदवाने में कोई आपत्ति नहीं थी। सुबह जब वो यहाँ शाजिया से मिलने आयी इतर ५ थी तब से ही उसकी नज़र राज पर भी थी।

|

तभी वहाँ एक गधा दिखायी दिया। नजीबा तो अचानक गधे को देख कर डर गयी और चींख पड़ी।

{

“अरे यार! डरने की कोई बात नहीं है.. ये हमारे धोबी का गधा है... वो पास के गाँव में रहता है और आजकल विहार में कहीं अपने घर गया हुआ है। इसलिए अपना गधा हमारे फार्म पर छोड़ गया... राज इसे चारा-पानी इत्यादि दे देता है। वैसे तो ये ऊधर छप्पर (बान) में बंधा रहता है पर शायद राज इसे बाँधना भूल गया', शाजिया ने कहा पर ये नहीं बताया कि उस धोबी से भी वो चुदवा चुकी है।

शाजिया ने दोनों के लिए नया डिंक बनाया और दोनों फिर बतियाने लगीं।



उस गधे को भी शायद उन दोनों की चूत की महक आ गयी थी। वो उनकी कुर्सियों के पीछे बिल्कुल पास आकर खड़ा हो गया। शाजिया ने हाथ बढ़ा कर उसकी गर्दन पर हल्के से मारते हुए उसे भगाने की कोशिश की। पर गधा कहाँ इतनी आसानी हटने वाला था।

ये गधे बहुत अड़ियल होते हैं... शाजिया इतनी आसानी से नहीं हटेगा ये, नजीबा ने हँसते हुए कहा।

 
दोस्तो १० - १५ लोगों से ज़्यादा कोई कमेंट नहीं देता इसका मतलब तीन चार लोगो को छोड़कर जो दोस्त ये कहानियाँ पोस्ट करते हैं वही एक दूसरे की पीठ थपथपा लेते हैं

मैने पहले भी कई बार रिक्वेस्ट की है और कल एक बार फिर से आप सभी पढ़ने वाले और इस साइट के चाहने वालों से प्रार्थना की थी कि आप सब कहानी पोस्ट करने वालों की सराहना करें ताकि वो आपके लिए और भी अच्छी अच्छी कहानियाँ लाए जिससे आपका और ज़्यादा मनोरंजन हो .

दोस्तो कल से मैं किसी भी कहानी में पोस्ट नही करूँगा सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने लेखक बंधुओं की हॉंसलाहफजाई करूँगा ताकि उनके काम की सराहना करने वालों मे एक श्रोता की बढ़ोत्तरी हो . और जब तक कुछ और लोग कमेंट करने के लिए आगे नही आते तब तक मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ कहानियों पर कमेंट करूँगा
 
धन्यवाद दोस्तो

अपने साइलेंट पाठकों के लिए दुआ कि वो जल्दी से ठीक होकर कमेंट करने लग जाएँ और हमारा ये परिवार ( आरएसएस) आदर्श परिवार बन जाए

आपका दोस्त
 
उस गधे को भी शायद उन दोनों की चूत की महक आ गयी थी। वो उनकी कुर्सियों के पीछे बिल्कुल पास आकर खड़ा हो गया। शाजिया ने हाथ बढ़ा कर उसकी गर्दन पर हल्के से मारते हुए उसे भगाने की कोशिश की। पर गधा कहाँ इतनी आसानी हटने वाला था।

ये गधे बहुत अड़ियल होते हैं... शाजिया इतनी आसानी से नहीं हटेगा ये, नजीबा ने हँसते हुए कहा।



शाजिया भी अब नशे में थी और वो भी जोर से अपनी हर्कत पर खिलखिला कर हँस पड़ी। छोड़ यार... खड़ा रहने दे... अपने आप ही छप्पर में चला जायेगा।

उस गधे के आँड उसकी पिछली टाँगों के बीच खरबूजे की तरह फुलने लगे। भुरे रंग की बालों से भरी खाल धीरे से पीछे खिसकने लगी और उसका काला विशाल सुपाड़ा खिसकता हुआ बाहर निकलने लगा। वो विशाल सुपाड़ा काले ग्रेनाइट के पत्थर की तरह चमक रहा था। गधे का लंड पहले तो नीचे लटक गया और फिर दाँये-बाँये फड़फ़ड़ाने लगा। उसका लंड डगमगाता हुआ और बाहर निकल कर लंबा होने लगा और जल्दी ही लगभग ज़मीन तक पहुँचने लगा। फिर उसका वो विशाल लंड फूल कर मोटा और कड़क होने गया और अंत में झटक कर उसके पेट के नीचे समानंतर (हॉरिज़ोंटल) उठ गया।

नजीबा ने गधे के नथुने की घरघराहट सुनी तो उसने अपने पीछे तिरछी नज़र डाली और उसकी आँखें हैरत से फैल गयीं। वो इतने बड़े लंड को पहली बार इतनी करीब से देख रही थी। गधे के लंड का सुपाड़ा उसकी तगड़ी छाती तक पहुँच रहा था और उसका वो मोटा लंड खरबूजे जितने बड़े टट्टों से बाहर को विकसित हो रहा था।

नजीबा के चेहरे पर लाली आ गयी और उसने फटाफट अपने बराबर में बैठी शाजिया की तरफ नज़र घुमा ली। शाजिया अपने ड्रिंक की चुसकियाँ लेती हुई कोई किस्सा बता कर हँस रही थी। नजीबा ने अपने ड्रिंक का बड़ा पूँट पिया और उसकी नज़रें चुंबक की तरह उस विराट लंड की तरफ खिंच गयीं। उसका ध्यान शाजिया की बातों में बिल्कुल नहीं था। वो ऐसे ही उसकी बातों पे ‘हाँ... हुँ” कर रही थी। अचानक शाजिया ने नजीबा के हाथ से उसका खली ग्लास लेना चाहा तो नजीबा चौंक गयी और हड़बड़ाहट में उसका हाथ गधे की टाँगों को छू गया। उसे अपने हाथ के नीचे गधे का बलवान शरीर धड़कता सा महसूस हुआ और उसने लंड को भी फड़फड़ाते हुए महसूस किया।

नजीबा ने शाजिया पर एक नज़र डाली कि शाजिया उसे देख तो नहीं रही। शाजिया तो नशे में। डगमगाते हाथों से उन दोनों के लिये फिर से डिंक बना रही थी। नजीबा भी नशे में खुद पर काबू नहीं रख पा रही थी उसने धीरे से अपना हाथ गधे के पेट के नीचे खिसका दिया। उसकी अंगुलियाँ गधे के फड़कते लंड को छूने के लिये सनसना रही थीं। पर जैसे ही गधे को नजीबा का हाथ अपने पेट के नीचे खिसक कर अपने लंड की तरफ बढ़ता महसूस हुअ तो वो उत्तेजना में जोर से रेंकने लगा। शाजिया भी चौंक कर पीछे पलटी कि एकाएक गधे को क्या हो गया।

|

|



नजीबा ने अपना हाथ ठीक समय पर फटाफट हटा लिया और जितना हो सके उतनी सहजता से आगे देखते हुए अपना ड्रिंक पीने लगी। उसे ग्लानि के साथ-साथ काफी उत्तेजना महसूस हो रही थी। उत्तेजना से उसका सिर घूम रहा था पर वो सोच रही थी कि सिर तो इतनी शराब पी लेने की वजह से घुम रहा है। शाजिया ने वैसे भी नजीबा के चेहरे के भावों पर ध्यान नहीं दिया।

शाजिया तो स्वयं आँखें फाड़े और मुँह खोले हुए गधे के विराट लंड को देख रही थी। गधे की टाँगें चौड़ी फैली हुई थीं और शाजिया की नज़र ठीक उसके फूले हुए सुपाड़े पर थी। वो गहरे रंग का विशाल लंड गधे की छाती तक बढ़ा हुआ था और लगभग उसकी अगली टाँगों के आगे निकल रहा था। गधे का लंड अंदर-बाहर ऐसे धड़क रहा था जैसे कि साँस लेते हुए फेफड़े और उसका मूत-छिद्र भी फैला हुआ था और उसमें से अग्रिम वीर्य-रस के कतरे बुदबुदा रहे थे। शाजिया ने उसके लंड की अविश्वसनीय लंबी छड़ पर नज़र दौड़ायी जैसे कि तोप की नाल को देख रही हो और फिर उसे खरबूजे जितने बड़े और प्रचुर वीर्य से भरे हुए आँड दिखायी दिये।

|

 
कुछ क्षणों के लिए तो शाजिया की आँखें उस जानवर के महान लंड पर चिपकी रहीं परंतु फिर अपनी सहेली नजीबा की मौजूदगी का एहसास होते ही उसने स्वयं को सामने देखने के लिए मजबूर किया। शाजिया का मुखड़ा उत्तेजना से लाल हो रहा था और नजीबा के गाल भी अभी तक सुर्ख थे। दोनों औरतें उस गधे के खड़े लंड की वजह से व्याकुल थीं और दोनों स्वयं को ही इसकी उत्तरदायी मान रही थी कि उनकी खुद की गर्म चूत की सुगंध ही उस जानवर के लंड की प्रचंडता का कारण थी।

शाजिया ने पलट कर एक ही पैंट में अपना भरा ग्लास खाली कर दिया। शाजिया की चूत इतनी गर्म हो गयी थी कि उसे लग रह था कि कहीं चूत में से रस के साथ-साथ धुंआ ना निकलने लगे और वो उम्मीद कर रही थी कि नजीबा ने गधे के लंड के प्रति उसकी भावनाओं को कहीं ताड़ ना लिया हो। परंतु नजीबा तो खुद उत्तेजना और कामुक्ता से जली जा रही थी और अपने ख्यालों में थी। वो अपनी चूत की आग बुझाने के लिए बेकरार हो रही थी।

तभी अंदर से फोन घंटी बजी। शाजिया ने पहले तो राज को कॉर्डलेस फोन बाहर लाने के लिए आवाज़ दी पर फिर उसे ध्यान आया कि राज तो घर में है ही नहीं। वो भुनभुनाती । हुई खड़ी हुई पर नशे में इतनी चूर होने के कारण बुरी तरह डगमगा रही थी। इसकी अतिरिक्त ऊँची हील के सैंडल पहने होने की वजह से इतने नशे में दो कदम भी सीधे चल पाना कठिन था पर फिर भी किसी तरह लड़खड़ाती हुई वो फोन सुनने अंदर गयी।

जब वहाँ नजीबा उस उत्तेजित गधे के साथ अकेली रह गयी तो उसने गधे के लंड को | अपने हाथ से छूने की अपनी नापाक विवशता को बड़ी मुश्किल से दबाया। नजीबा को बहुत तीव्र कामना हुई कि अपनी सहेली के वापस आने के पहले शीघ्रता से उसे हाथ में लेकर महसूस करले परंतु उसे भय था कि अगर एक बार उसने उस अद्भुत चुदाई-यंत्र । । को अपने हाथ में ले लिया तो शायद उसे छोड़ नहीं पायेगी।

तभी शाजिया उसी तरह हाई हील पहने नशे में डगमगाती वापस लौटी। नजीबा की तरह शाजिया भी गधे के लंड को सहलाने की दुष्ट इच्छा पर संयम पाने की कोशिश कर रही थी।

सॉरी यार... राँग नंबर था... ऐसे ही रंग में भंग पड़ गया... कितना मजा आ रहा था... चल मैं नये पैग बनाती हूँ... फिर..." शाजिया बोलने पर नजीबा ने बीच में ही उसकी बात काटकर हंसते हुए कहा, “काफी पी ली आज शाजिया... इससे पहले कि मैं यहीं लुढ़क जाऊ मेरा ख्याल है कि मुझे अब बेडरूम में जा कर सो जाना चाहिए... नजीबा की आवाज़ नशे में बहक रही थी।

ओके डियर... पर पहले हमारा गुड ओल्ड ट्रेडिशन... एक-एक वोडका शॉट..." शाजिया बोली। फिर उसने फटाफट दो छोटे-छोटे शॉट ग्लासों में नीट वोडका भरी और दोनों ने एक-दूसरे के बांह में अपनी बांह डाल कर एक ही साँस में वो तगड़ा शॉट पिया। फिर जब नजीबा अंदर जाने के लिये खड़ी हुई तो दूसरी कुर्सी पर गिरते-गिरते बची। शाजिया की तरह ही वो भी नशे में बेहद चूर थी।

इस समय तो बस वो किसी तरह कमरे में जाकर अपनी अंगुलियों से अपनी चूत को चोदकर विस्फोटक रूप से झड़ने का भरपूर आनंद लेना चाह रही थी। वो उसी तरह डगमगाती हुई शाजिया की तरफ बढ़ी और लगभग उस पर गिरते हुए उससे गले मिली।

चल यार! गुड-नाइट... तुझे भी बहुत चढ़ी हुई है.. तू भी आराम कर... सुबह बात करेंगे..” कहते हुए नजीबा ने धीरे से शाजिया के गाल पर चुम्मा दिया और जैसे ही वो चलने के लिए पलटी तो मेज से टकरा गयी। दोनों फिर खिलखिला कर हँस पड़ी।

नजीबा ने गधे के लंड पर एक बार फिर हसरत भरी निगाह डाली और घर की तरफ झूमती हुई चल पड़ी। नशे के कारण वो साढ़े चार-पाँच इंच ऊँची हील के सैंडलों में संतुलन नहीं रख पा रही थी। शाजिया ने उसे जाते हुए देखा और वो वहीं कुर्सी पर लुढ़कती हुई बैठ गयी। उसने नशे में थरथराते हाथों से अपने लिए एक और पैग बनाया। उसका एक हाथ अचेतन ही उसकी सलवार के ऊपर से ही चूत को सहलाने लगा।

नजीबा किसी तरह अपने बेडरूम में पहुँची। नशे और अपनी वासना में उसे दरवाजा बंद करने की सुध नहीं थी। खड़े-खड़े ही उसने फटाफट बेतरतीबी से अपनी साड़ी उतार । फेंकी और आननफ़ानन पेटीकोट भी उतार दिया। पैंटी के ऊपर से उसने अपनी चूत पर अपन हाथ रखा तो चूत इतनी गर्म महसूस हुई कि नजीबा को लगा कि उसकी हथेली पर छाले पड़ जायेंगे। साथ ही पैंटी इतनी तरबतर थी कि नजीबा की हथेली भी भीग गयी। उसने अपनी अंगुलियाँ पैंटी के इलास्टिक में डाल कर पैंटी भी नीचे खिसकायी और निकाल कर एक तरफ उछाल दी। दीवार पर बारहसींगे का सिर लगा था और नजीबा की चूत-रस से तरबतर पैंटी उछल कर बारहसींगे के सींगों में अटक गयी। कुछ क्षणों में उसका ब्लाउज़ कमरे के एक कोने में पड़ा था और ब्रा ऊपर पंखे पर लटकी थी।

 
दोस्तो अगर आप साथ देंगे और हॉंसला बढ़ाएँगे तो मेरा वादा है बोर नही होंगे
 
साथ बने रहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद दोस्तो

दोस्तो मुझे आप सपोर्ट ना करें चलेगा क्योंकि मुझे पता है आप सब मेरे साथ हैं दोस्तो मैं चाहता हूँ कि आप इस फोरम पर बाकी राइटरस की हॉंसलाअफजाई ज़रूर करें

और खास कर सलिल भाई , विजयराज भाई , नाईक भाई , राकेश सिंग 1999 , अंकुर 2018 , एबी पंजाबी , आर्यन , अभयकेके , स्मार्टीश्री , रॉकी 123 ,रोहित भाई , और कई है कुछ इस फोरम को छोड़ कर जा चुके हैं दोस्तो जो नाम मैने दिए हैं इनका साथ ज़रूर दें मैं समझूंगा आप सब मेरा साथ दे रहे हैं

और नये आने वाले लेखक का भी साथ ज़रूर दें मेरी आपसे हाथ जोड़ कर प्रार्थना है
 
जितनी देर तक नजीबा निर्वस्त्र हो रही थी, वो नशे में ऊंची हील के सैंडल पहने खड़ीखड़ी आगे पीछे गिरती हुई डगमगा रही थी। नजीबा ने झुक कर अपनी चूत निहारी और उसे ताज्जुब हुआ कि वो कितनी उत्तेजित और गरम थी। उसे ऐसा लगा जैसे ज़िंदगी में वो पहले कभी इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी। उसकी चूत की गुलाबी फाँकें ऐसे खुली हुई थी जैसे कि मोतियों जैसी ओस की बूंदों से भीगी हुई किसी गुलाब की कली की आ पंखुड़ियाँ खिल रही हों। उसकी चूत की दरार फैल कर अण्डाकार हो गयी थी और चूत की भीतरी परतें चूत रस के झाग से भीगी हुई दिख रही थीं। उसकी तनी हुई गुलाबी क्लिट भी बहर को खड़ी थी। चूत-रस की कईं धारें चू कर नजीबा की भीतरी जाँघों से। नीचे बह रही थीं।



नजीबा ने अपनी अंगुलियों को अपनी चूत पे फिराया तो उसे अपनी सख्त क्लिट थिरकती हुई महसूस हुई। उसने धीरे से सहलाते हुए अपनी अंगुलियाँ चूत के अंदर खिसका दीं। ॥ उसकी चूत में लहरें उठने लगीं और उसके हाथ में और अधिक चूत-रस बह निकला। वो दोनों हाथों से अपनी चूत रगड़ने लगी। वो वहीं फॉयर-प्लेस के पास खड़ी-खड़ी ही अपनी चूत की गर्मी शाँत कर लेना चाहती थी। परंतु उसकी टाँगें बुरी तरह काँप रही थीं और नशे में उन हाई हील सैंडलों में वो टिक कर खड़ी नहीं हो पा रही थी। नजीबा को लगा कि कहीं वो गिर ना पड़े।

नजीबा लड़खड़ाती हुई पास ही रखी चमड़े की कुर्सी पर जा का इस तरह बैठ गयी कि उसकी ठोस गाँड सीट के किनारे पर टिकी थी और उसकी लंबी टाँगें फैली हुई थीं। उसी क्षण उसका काम-रस चूत में से बह कर नजीबा की गाँड के नीचे लैदर की सीट पर फैल गया। एक क्षण के लिए अपनी चूत को बगैर छुए नजीबा ने सारस की भांति अपनी सुराहीदार गर्दन आगे को निकाल कर अपना सिर झुकाया। नजीबा झड़ने के लिए तड़प रही थी किंतु फिर भी वो विलंब कर रही थी। उसे आभास था कि आज उसका कामोन्माद बहुत ही विस्फोटक होगा और वो चूदासी औरत इसी उम्मीद में उत्तेजना से उन्मादित हो रही थी।

थोड़ा और नीचे झुक कर नजीबा ने अपनी टाँगों के बीच में फेंक मारी। उसकी क्लिट धधकने लगी और चूत जलती हुई प्रतीत हुई जैसे कि उसने सुलगती हुई लकड़ी में अपनी साँस फेंक कर उसमें आग भड़का दी हो। अपनी चूत की प्रचंड गर्मी का झोंका उसे अपने चेहरे पर महसूस हो रहा था। अपनी ही चूत की तीक्ष्ण खशबू से उसकी नाक फड़क उठी। सुगंध लेते हुए वो सोचने लगी कि इसमें आश्चर्य वाली कोई बात नहीं थी कि वो गधा इतना उत्तेजित हो गया था।

|

नजीबा अपनी गोद में आगे झुकी। उसकी जीभ उसके निचले होंठ पर आगे-पीछे फिसलने लगी। उसके मुँह में उसके झगदार थूक के बुलबुले उठने लगे। नजीबा सोच रही थी कि काश वो इतनी लचीली होती कि स्वयं अपनी चूत चाट सकती। उसे अपनी चूत । इतनी स्वादिष्ट और मनोहर लग रही थी कि उसे अपनी जीभ भी अपनी क्लिट जितनी ही उत्तेजित महसूस हो रही थी। कितना अद्भुत होता अगर वो अपनी चूत खा सकती और अपनी फड़फड़ाती जीभ पर झड़ सकती। कितना कामुक रोमांचक होता अगर वो अपनी ही चूत का गरमागरम रस अपने ही मुँह में बहा सकती। झड़ते हुए अपनी ही चूत से काम-रस पीने का दोहरा आनंद कितना निराला होता। ये विचार उसे और उत्तेजित कर रहे थे और साथ ही तड़पा भी रहे थे क्योंकि वो जानती थी कि ये उसके बस की बात नहीं है। उसने पहले भी कई बार कोशिश की थी।

 
हांफते हुए फिर से पीछे हो कर नजीबा अपनी भितरी जाँघों की गर्म और गीली त्वचा पर अपने हाथ फिराने लगी। उसकी गाँड लैदर की सीट पर मथ रही थी और उसका पेट ऊपर-नीचे हो रहा था। उसने अपना एक हाथ चूत की मेंड़ पर रखा और उसकी अंगुलियाँ फिसल कर क्लिट को आहिस्ता से सहलाने लगी।

नजीबा ने अपने दूसरे हाथ की चार अंगुलियाँ आपस में जोड़कर लंड के आकार में । इकट्ठी कीं और धीरे से स्थिरतापूर्वक चूत में अंदर घुसा दीं। उसकी क्लिट प्रबलता से हिलकोरे मारने लगी और चूत से बहुत सारा झाग निकलने लगा। ।

नजीबा थरथराते हुए सिसकने लगी। वो एक हाथ की अंगुलियों से अपनी चूत को चोद रही थी और दूसरे हाथ से अपनी क्लिट सहला रही थी। उसकी जाँचें हिलोरे मारते हुए झटक रही थीं। वो जानती थी कि आज तृप्ति के लिए उसे एक से अधिक बार झड़ना पड़ेगा।

-

उसकी पलकें बंद हो गयी और उसके हाथ तीव्रता से चलते हुए कामोन्माद के पहले मलाईदार उत्कर्ष के लिए उद्यम करने लगे। उसकी चूत जितनी गर्मी ही उसके दिमाग में भी चढ़ी हुई थी। कई कल्पनायें और तसवीरें उसके दिमाग में प्रचंड नृत्य कर रही थीं। बारबार उसके ख्यालों में गधे के विशाल लंड की तसवीर ही आ रही थी। उसे एहसास था कि अपनी चूत को अंगुलियों से चोदते हुए जानवरों के लौड़ों की कल्पना करना कितना विकृत था, किंतु ये ख्याल था कितना उत्तेजक और मादक। एक लहराती हुई तरंग उसके पेट और चूत में दौड़ गयी। हांफते हुए नजीबा ने अपनी आ चारों अंगुलियाँ पूरी की पूरी अपनी चूत में घुसा दीं। दूसरे हाथ से अपनी क्लिट को प्रचंडता से रगड़ते हुए नजीबा अपनी तरबतर चूत के अंदर चारों अंगुलियाँ घुमाने लगी।

अचनक ही वो कामोत्कर्ष पर पहुँच गयी। एक पल वो कामोन्माद के शिखर पर मंडरा रही थी उर दूसरे ही क्षण उसकी चूत ज्वालमुखी की तरह फट पड़ी।



एक के बाद एक लहर उसके शरीर में हिलोरे मारती हुई दौड़ने लगी और एक के बाद ॥ एक ऐंठन उसकी चूत और जाँघों को झंझोड़ने लगी। नजीबा को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उसका पूरा शरीर पिघल रहा है और रगों में चरम आनंद की करोड़ों चिंगारियाँ फूट रही हैं और जैसे उसका दिमाग फट जायेगा और उसकी धमनियाँ काम-रस से भर गयी हैं।

नजीबा आगे झुकी और फिर कमर पीछे मोड़कर अपनी चूत को अंगुलियों से लगातार चोदते हुए उत्तेजना से अपनी चूत का रस निकालने लगी और चरम-आनंद की लहरें श्रृंखला में फूटने लगी। उसकी चूत का अमृत उसके पेट के नीचे झाग बनाने लगा और उसकी धारायें टाँगों से नीचे बहने लगी। उसकी क्लिट में भी बार-बार विस्फोट होने लगा -

और हर विस्फोट के साथ उसकी चूत की गहराइयों से चूत-रस की धार फूट पड़ती।

चूत मे कामोन्माद की एक जोरदार आखिरी लहर ने उसे झंझोड़ कर रख दिया और नजीबा हाँफती हुई कुर्सी पर पीछे फिसल कर मुस्कुराने लगी। उसकी अंगुलियाँ अभी भी उसकी चूत में चल रही थी कि कहीं रोमांच की कोई लहर अंदर ना रह जाये। उसकी उत्तेजना कुछ कम हुई पर जैसे-जैसे उसने अपनी चूत को सहलाना जारी रखा, उसकी क्लिट फिर से तनने लगी। इतनी बार झड़ने के कुछ ही क्षणों पश्चात वो चुदक्कड़ औरत फिर से उत्तेजित हो गयी थी।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
उधर शाजिया ने भी अपना पैग खत्म किया और नशे में अपना ग्लास एक तरफ घास पर उछाल दिया। उसकी चूत भी भट्टी की तरह दहक रही थी। उसने अपनी कमीज़ के हुक खोलकर उतार दी। शाजिया ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी और उसकी भारी चूचियाँ बाहर उछल पड़ीं। शाम की पहाड़ी ठंडी हवा चल रही थी जिसके सपर्श से उसके गुलाबी निप्पल तन कर सीधे खड़े थे। शाजिया ने अपनी चुचियों को गूंधते हुए अपने सनसनाते निप्पलों को मरोड़ा। उसके निप्पल मानो उसकी अंगुलियों में तड़क-से उठे। उसने अपनी चूचियों को हाथों में भरकर ऊपर उठाया और साथ ही अपनी गर्दन झुका कर अपना सिर नीचे गिरा दिया। उसकी जीभ चाबुक की तरह बाहर निकली और गरम शाजिया अपनी जीभ से अपने निप्पल चाटने लगी। पहले उसने अपने एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसा और फिर दूसरे निप्पल को चूसने लगी।

|

उमममम” वो आनंद से बिल्ली जैसी घुरघुरायी। वो जल्दी ही अपने बेडरूम में जाकर औरंगजेब और टीपू से चुदाई की आकांक्षा कर रही थी। परंतु वो चाहती थी कि पहले। नजीबा दूसरे बेडरूम में ठीक से सो जाये, फिर वो अंदर अपने बेडरूम में कुत्तों के

लौड़ों से अपनी चूत को शांत करेगी। वो जानती थी कि नजीबा भी अय्याश और चुदक्कड़ | किस्म की औरत है पर उसे डर था कि कुत्तों से चुदाई का विषय शायद नजीबा सहजता

से नहीं ले पायेगी। इसलिए शाजिया ने कुछ देर तक वहीं बैठ कर अपने हाथों से मज़ा लेने का निश्चय किया। उसने अपनी गर्दन घुमा कर देखा तो वो गधा नदारद था। शायद वो अपने छप्पर में चला गया था। उस गधे के विशाल लंड के दर्शन ने उसे अत्यधिक उत्तेजित कर दिया था।

। उसने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और टाँगों से सलवार नीचे खिसकाने लगी। सलवार

के नीचे उसने काले रंग की बिकिनी पैंटी पहनी हुई थी जो महज एक सिल्क के बारीक पट्टे जितनी थी। चूत के ऊपर का पैंटी का पतला सा पट्टा शाजिया के चूत-रस से तरबतर था और पैंटी के काले रेशमी कपड़े में से चूत-रस की सफ़ेद धारियाँ निकल रही थी। उसने पैंटी भी नीचे खींच कर एक तरफ घास पर उछाल दी। वो पैंटी जमीन पर ऐसे गिरी जैसे कि भीगे परों वाला काला पतंगा पड़ा हो। शाजिया की चूत का अमृत उसकी चिकनी अंदरूनी जाँघों पर बह निकला।



 
Back
Top