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व्यभिचारी नारियाँ complete

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नजीबा को एहसास था कि वो स्वयं भी नशे में धुत्त थी पर गधे के दिव्य लंड की छवी उसे आगे बढ़ने के लिये प्रेरित कर रही थी। दिन में शायद उसे ऐसा मौका ना मिले, इसलिए वो आज रात को ही अपनी विकृत मनोकामना पूरी कर लेना चहा रही थी। बाहर आकर अंधेरे में वो डगमगाती छप्पर की तरफ बढ़ी।

उसे गधे के रेंकने और घरघराने की आवाज़ सुनायी दी तो वो मुस्कुरा दी। “बेचारा उपेक्षित जानवर'' उसने सोचा, “जरूर मेरी दहकती चूत की कामुक गंध हवा में फैल कर गधे को उत्तेजित कर रही है।”

आ नशे में चूर नजीबा अपनी चूचियाँ झुलाती और अपने नंगे चूतड़ मटकाती हुई और तेजी से आगे बढ़ी तो हाई-हील के सैंडलों में संतुलन नहीं रख सकी और धड़ाम से लुढ़क गयी। पर नशे और वासना में उसे किसी बात की परवाह नहीं थी। वो फिर उठ कर झूमती

और गिरती- पड़ती आगे बढ़ी।

उसने छप्पर के बाहर कदम रखा - और बुत की तरह जम गयी। “मादरचोद?” नजीबा ने गहरी साँस ली। वो टकटकी लगा कर एक अदभुत दृश्य देख रही थी। वहाँ उसकी कामुक सहेली, बिल्कुल नंगी, सिर्फ हाई हील के सैंडल पहने, गधे के नीचे उस जानवर का विशाल लंड अपनी चूत में फँसाये हुए थी। शाजिया उस गधे के लंड पर झटकती और जोर-जोर से हिलती हुई चुदाई शुरू करने की बेकरारी से कोशिश कर रही थी। नजीबा फौरन अपनी सहेली शाजिया की समस्या समझ गयी। नजीबा के सुंदर मुखड़े से विस्मय के भाव दूर हो गये और उसके होंठों पर कामुक और कुटिल मुस्कुराहट आ गयी।

गर्दभ राज से चुदवा रही है... हँह, राँड’’ नजीबा लम्पटता से बोली।

शाजिया का सिर पीछे की तरफ चटक गया और उसने गर्दन घुमा कर अपनी सहेली को देखा। उसका चेहरा शरम से लाल हो गया। उसके होंठ फड़फड़ाये पर कोई शब्द नहीं निकले। ऐसी परिस्थिति में वो क्या कह सकती थी।

नजीबा अपनी सहेली की लंड भरी चूत पर नज़रें टिकाये उसके नज़दीक बढ़ी। उस औरत की चूत के गुलाबी होंठ गधे के धड़कते लंड के चारों तरफ चौड़े फैले हुए थे और उसका चूत-रस बह कर उसके चूतड़ों की दरार को भिगो रहा था और बूंद-बूंद करके जमीन पर टपक रहा था। नजीबा को अपनी सहेली से ईष्र्या होने लगी। वो अपनी स्वयं की चूत उस गधे के लंड से चुदवाना चाहती थी। परंतु उसे साफ दिख रहा था कि गधे को शाजिया की चूत से लंड बाहर निकालने के पहले शाजिया की चूत में झड़ना पड़ेगा और उसके बाद ही उसे वो लंड चखने का मौका मिलेगा।



तू.. तू.. क-क्या..." शाजिया हकलायी। उसे लगा कि इस हालत में उसे देख कर नजीबा बड़ा मुद्दा बना लेगी पर फिर उसने देखा कि नजीबा स्वीकृति से मुसकुरा रही थी। साथ ही उसने ध्यान दिया कि नजीबा सिर्फ अपने सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी ही वहाँ आयी थी।

लगता है कि तुझे कुछ मदद की जरूरत है, शाजिया!”

शाजिया अविश्वास से कराह उठी।

“कसकर फंस गया है ना?” नजीबा खिलखिलायी, “मैं तेरी मदद करती हैं।

- नजीबा अपनी सहेली की बगल में घुटनों के बल बैठ गयी। शाजिया लाचारी से गधे के लंड

से चिपकी हुई ऊपर-नीचे झटक रही थी। गधा तो मुर्ख जानवर था - उसे क्या पता की इन औरतों के साथ चुदाई करना विकृति थी - इसलिए उसने अपने कुल्हे आगे पिछे हिलाना जारी रखा। नजीबा ने शाजिया की चूत के ठीक बाहर गधे के उस मोटे लंड को । अपने दोनों हाथों में वहाँ से पकड़ लिया और चुदाई की क्रिया शुरू करने की कोशिश में उसे खींचने और ढकेलने लगी। वो अपनी सहेली के पेट पर झुकी तो उसकी सम्मोहित नज़रें शाजिया की लंड-भरी चूत पे टिक गयीं। नजीबा के काले लंबे बाल भी शाजिया की चूचियों पर लुढ़क गये। नजीबा अभी भी मुस्कुरा रही थी पर उसके कामुक होंठ अब काँपने लगे थे।

 
नजीबा को कुछ झिझक नहीं थी। कॉलेज के दिनों में दोनों सहेलियों ने अनेक बार एक दूसरे की चूत चाटी थी और एक ही बिस्तर पर दूसरे मर्दो के साथ चुदाई की थी। और फिर अपनी सहेली, जो कि गधों से चुदवाती हो, उसके सामने उसे क्यों शरम या झिझक होती।

तेरी चूत पूरी तरह गीली नहीं हुई है, नजीबा ने झूठ कहा। शाजिया की बाढ़ की तरह बहती हुई चूत से ज्यादा गीली कोई चूत कैसे हो सकती थी। नजीबा का मुखड़ा और नीचे झुका और वो होंठ खोल कर अपनी सहेली की चूत को चूमते हुए राल निकालने लगी। उसका थूक शाजिया की सख्त क्लिट पर से होता हुआ गधे के लंड के घेरे पर बहने लगा। उसकी जीभ इधर-उधर फिसलती हुई कभी शाजिया की चूत के फैले हुए होंठों को चाटने लगी, कभी गधे के लंड पर सुडकती और फिर शाजिया की फनफनाती हुई क्लिट पर चाबुक की तरह फिरती। अपनी जीभ और होंठ गधे के लंड और शाजिया की चूत पर रगड़ते हुए वो लगातार अपने हाथों से गधे के लंड को खींच रही थी।



नजीबा ने अपना सिर उठाया। उसके सुंदर मुखड़े का निचला हिस्सा अपने थुक, शाजिया के चूत-रस और गधे के वीर्य के मिश्रण से लिसड़ा हुआ चमक रहा था।

“ये साला चोद लंड मुझसे नहीं हिल रहा, वो फुसफुसायी, “यहाँ साइड से मेरी सही | पकड़ नहीं बन पा रही हड़ी' जब नजीबा ने अपनी सहेली के घबराये हुए चेहरे पर नज़र डाली तो नजीबा की आँखों में वासना और शरारत झलक रही थी। मेरे ख्याल से मुझे तेरे ऊपर आ कर झुकना पड़ेगा, राँडा'

नजीबा ने अपनी एक टाँग उठा कर शाजिया के दूसरी तरफ खिसका दी और उसके कमान की तरह मुड़े हुए धड़ पर बैठ गयी। उसकी स्वयं की धधकती चूत शाजिया के चेहरे के ठीक ऊपर थी। उसका चूत-रस उसकी सुडौल हँगों से नीचे बह रहा था और उसकी चूत के आस-पास का हिस्सा उसके चूत-रस और कुत्तों के वीर्य के मिश्रण से भिगा हुआ था। शाजिया के मुँह में पानी आ गया और गर्दन ऐंठ गयी और स्वतः ही उसका सिर उस मलाईदार चूत की तरफ उठ गया।

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योगित गधे के लंड को दोनों हाथों से खींचती हुई कसमसायी। लंड को खींचते वक्त उसकी चूत नीचे खिसक कर शाजिया के चेहरे के ठीक ऊपर आ गयी। नजीबा की चूत के होंठ चौड़े खुले हुए थे और उसमें से मलाईदार द्रव्य बह रहा था। शाजिया की जीभ बाहर निकल कर नजीबा की क्लिट पर फड़फड़ाने लगी और फिर उसकी चूत में घुस गयी।

ऊऊऊऊऊह - बहुत मज़ा आ रहा है... शाजिया, नजीबा बिल्ली की तरह घुरघुरायी।

 
शाजिया के अधीर मुँह पर अपनी चूत रगड़ती हुई नजीबा अपने चूतड़ हिलाने लगी। शाजिया रिरियाने लगी जब उसकी जीभ स्वादिष्ट चूत-रस से तर हो गयी। काफी अरसे के बाद वो चूत का स्वाद ले रही थी। लेकिन उसे यह एहसास नहीं हुआ कि नजीबा के चूत-रस में उसके स्वयं के कुत्तों का वीर्य भी मिश्रित है। उसने अपने हाथ उठा कर अपनी सहेली के चूतड़ों को पकड़ लिया और कस कर उसकी रसीली चूत को अपने चेहरे पर खींच लिया। शुरू में शाजिया सिर्फ अपनी जीभ का प्रयोग कर रही थी, पर अब उसने अपने खुले होंठ नजीबा की चूत पर कस लिये और लोलुपता से चूसने लगी। उसका मुँह चूत के मलाईदार रस से भर गया। वो मज़े से गलल–गलल कर के नजीबा का चूत-रस निगलने लगी। वो चूत चूसते हुए दिवानी सी हो गयी थी और साथ में अपनी चूत में गधे का लंड भरे होने से वो वासना में पागल हो रही थी।





अपनी सहेली की चूत को होंठों से चूसते हुए शाजिया अपनी जीभ उसकी चूत में चोदने

लगी। नजीबा मस्ती और आनंद से किलकारियाँ मारती हुई कलबलाने लगी। नजीबा का | स्वयं का सिर शाजिया की टाँगों के बीच ऊपर-नीचे कूदने लगा और वो शाजिया की क्लिट चूसने लगी। गधे का लंड नजीबा के होंठों के स्पर्श से धड़कने लगा -- और अब जबकि शाजिया की चूत और गर्म और रसीली हो गयी थी, गधे का वो विशाल लंड आखिर में अंदर-बाहर फिसलना शुरू हो गया।

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गधे का लगबग एक इंच लंड शाजिया की चूत के होंठों को अपने साथ घसीटता हुआ उसकी चूत से बाहर निकला। धीरे-धीरे और लंड बाहर निकलने लगा। उत्तेजित गधे ने जोर से झटका मारा और सुपाड़े की घुडी छोड़ कर उसका पूरा लंड बाहर आ गया। उसका लंड शाजिया कि चूत-मलाई से लिसड़ा हुआ था। लंड की फूली हुई घंडी शाजिया की चूत में दहक रही थी। नजीबा ने गहरी साँस ली और गधे के रसीले लंड पर अपनी जीभ फिराती हुई अपने सहेली के चूत का रस गधे के काले लंड से चाटने लगी। गधे ने ठेल कर लगभग पूरा लंड वापस चूत में चोद दिया। नजीबा की जीभ भी गधे के गरजते लंड के साथ शाजिया की चूत में फिसल गयी। गधा आवेशित हो कर अपना लंड शाजिया की चूत में ठेलने लग तो उसके आँड जोर से झूलने लगे। उसका लंड नजीबा के होंठों और जीभ पे रगड़ता हुआ उसकी सहेली की चूत में अलोप हो गया।

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ऊऊऊऊहहहह -- गधा चोद रह है तुझे... छिनाल शाजिया' नजीबा चिल्लायी तो उसकी आवाज़ शाजिया की टाँगों के बीच में घुट गयी।

परंतु शाजिया ये अच्छी तरह जानती थी। वो अपनी गाँड और चूतड़ हिला कर आगे ठेलती हुई गधे के वहशी धक्कों का जवाब दे रही थी और साथ ही अपनी सहेली की चूत लोलुप्ता से चूस रही थी। उसे पता नहीं था कि उसे किसमें अधिक मज़ा आ रहा था।

उसकी जीभ भी उतनी ही आगबबूला थी जितनी कि इस समय उसकी क्लिट - और आनजीबा की जीभ उसकी वासना की आग में तेल डाल रही थी। शाजिया ने नजीबा की गाँड

पकड़ी और अपनी कमर उठा कर उसकी चूत में से बहता हुआ रस पीने लगी। नजीबा ने कुछ पल गधे के लंड पर ऊपर-नीचे अपनी जीभ फिरायी और फिर अपनी सहेली की जाँघों में अपना सिर छिपा लिया। उसके खुले होंठ गधे के लंड से भरी हुई शाजिया की चूत के बाहर जोंक की तरह चिपक गये।।

“ओहह नजीबा! हुम्म... तू... तू नहीं... नहीं जानती कि कितना... ऊऊऊघघघ! कितना... अच्छा लग... रहा है इसका... लंड...', शाजिया फुसफुसायी ।

 


गधे ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला और फिर झटके से वापस अंदर ठेल दिया। उसके लंड की रॉड शाजिया की चूत में घुसते हुए नजीबा के खुले मुँह में से गुजरी। शाजिया की चूत द्वारा अपने लंड के चूसे जाने से और नजीबा की जीभ और होंठों के लंड पर फिरने और राल टपकाने से गधा उन्मत हुआ जा रहा था। वो अपने लंड से चोदते हुए शाजिया को इस कदर हिला रहा था कि शाजिया का पूरा बदन थरथराता हुआ आधी में पत्ते की तरह हिल रहा था।

शाजिया की चूत पानी छोड़ने लगी।



जैसे ही शाजिया की चूत का रस गधे के चोदते हुए लंड के चारों तरफ बह कर उसकी सहेली के अधीर मुँह में बाढ़ की तरह प्रवाहित होने लगा, तो शाजिया वासना से दिवानी हो कर कराहने चिल्लाने लगी। उसे अपना तन-मन अपनी चूत के साथ वासना की गर्मी में पिघलता महसूस होने लगा। हकीकत की कुछ चिंगारियाँ अभी भी बाकी थी। शाजिया को स्थिति का आभास था।

“गधा मुझे चोद रहा है और मैं अपनी कॉलेज की सहेली के साथ उनहत्तर (69) की मुद्रा में हूँ" शाजिया ने सोचा। यह अविश्वसनिय पर कामुक स्थिति थी।

और राज, जो छप्पर के दरवाजे पर मुँह खोले और आँखें फाड़े खड़ा था, उसे भी अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था।

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साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 
राज अपने दोस्त की शादी में से कुछ जल्दी लौट आया था। वहाँ उसने दोस्तों के साथ दारू भी पी थी और वो इस उम्मीद में जल्दी वापस आया था कि शायद आज की रात शाजिया मैडम को चोदने का मौका मिल जाये। जब वो घर से निकला था तो उसकी मालकिन अपनी सहेली के साथ शराब पीने बैठी थी और ये अच्छा संकेत था क्योंकि वो जानता था कि शराब के नशे में मैडम की चुदाई की भूख कई गुणा बढ़ जाती थी।

वापस लौट कर उसने पहले अपने सर्वेट क्वार्टर में जा कर अपने कपड़े बदले थे और फिर पानी पी कर मुख्य घर में गया था। वहाँ शाजिया मैडम या उनकी सहेली उसे कहीं नहीं दिखे। गेस्ट बेडरूम का नज़ारा देख कर उसे अंदाज़ा हो गया था कि वहाँ चुदाई हुई है। क्योंकि कुत्ते थके हारे कार्पेट पर पसरे हुए थे। व्हिस्की और एक सोडे की बोतल भी ज़मीन पर लुढ़की पड़ी थी। एक तरफ साड़ी, पेटीकोट इत्यादी बेतरतीबी से बिखरे हुए थे और बारहसिंघे के सींगों में एक पैंटी भी लटकी हुई थी।

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उसे याद आया कि वो साड़ी तो मैडम की सहेली ने पहनी हुई थी। पर शाजिया मैडम के कपड़े वहाँ कहीं नज़र नहीं आये और ना ही दोनों औरतों का कुछ अता-पता था। वो जानता था कि उसकी मालकिन कुत्तों के साथ अपनी चुदाई की बट बहुत ही गुप्त रखती है पर उसका दिल कह रहा था कि हालत से उसे गुमान हो रहा था कि आज कुत्तों के साथ चुदाई में शाजिया मैडम के साथ उनकी सहेली भी शरीक थी। साथ ही वो परेशान था कि वो दोनों हैं कहाँ? उसे लगा कि शायद दोनों औरतें बाहर लॉन में हो सकती हैं। इसलिये वो घर के पिछवाड़े में गया। वहाँ लॉन में भी छतरी के नीचे कुर्सियाँ गिरी पड़ी थीं पर उन दोनों का कहीं पता नहीं था। अंधेरा भी हो गया था और वो असमंजस में था कि तभी उसे छप्पर की तरफ से गधे के रेंकने और घरघराने की आवाज़ सुनायी दी। उसे छप्पर के पास एक व्हिस्की की बोतल भी पड़ी दिखायी दी तो वो उस तरफ बढ़ गया।

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और इस तरह राज उस हैरतअंगेज़ नज़ा मंज़र तक पहुँचा था।

कुछ समय के लिये वो हक्काबक्का नौकर छप्पर के दरवाजे पर खड़ा रहा। उसकी आँखें उस नज़ारे पर इस तरह चिपकी थीं जैसे उसकी आँखें बाहर गिर पड़ेंगी - और उसका लंड मिसाइल की तरह उसकी टाँगों के बीच में से उखड़ कर उड़ने को तैयार था।

वो सदमे में था या अपने सामने के मंज़र की विकृति से घृणित था... वो नहीं जानता था । - क्योंकि वो उस समय इतना उत्तेजित था कि उसे और कोई एहसास ही नहीं था। उसका सिर चकरा रहा था। उसके खड़े लंड में इतना खून प्रवाहित हो गया था कि उसके दिमाग में आक्सीजन की कमी हो रही थी। सामने के मंज़र का रसभरा ब्यौरा उसके दिमाग में गहरायी तक छप गया था।

- वहाँ उसकी चुदक्कड़ मालकिन थी जिसका सुडौल कामुक जिस्म गधे के नीचे टिका था। | - और उस गधे का भारी भीमकाय लंड उस औरत की चौड़ी खुली चूत में अंदर-बाहर कुटाई कर रहा था। यह मंजर खुद में बेहद अश्लील और विकृत था।

 
इसके अतिरिक्त, उसकी मालकिन के ऊपर उसकी हम-उम्र सहेली झुकी हुई, उल्टी हो कर उनहत्तर की मुद्रा में सवार थी। उसने देखा कि शाजिया मैडम की जीभ अपनी सहेली नजीबा की रसभरी चूत में लपलपा रही थी और अपना सिर एक तरफ तिरछा करके राज ने देखा कि नजीबा की जीभ भी लोलुप्ता से गधे के लौड़े और शाजिया की चूत पर फिर रही थी। वो खुद भी चूत चाटने का शौकीन था, इसलिये चूत के चाटने का मोह समझ सकता था - लेकिन वो उन दोनों औरतों के संबंध से जरूर चकित था। राज की आँखें पूरा रस ले रही थीं और उसका दिमाग उस कामुक विकृत दृश्य में बह रहा था। लेस्बियन और पशु-मैथुन जैसी विकृत यौन-क्रियायें एक साथ उसके सामने थी।

अब वो हक्काबक्का नौकर मुस्कुराया और उनके करीब बढ़ गया। अपनी चुदाई में लीन, दोनों औरतों को उसकी उपस्थिति का आभास नहीं हुआ और, हालांकि उस गधे ने उसे देखा पर उस मुर्ख जानवर ने उसकी परवाह नहीं की। राज उनके और भी करीब आ गया।

उसके कानों में खून जोर से प्रवाहित हो रहा था और उसे अपनी मालकिन की चूत में आ गधे के लंड के ऊँफकारने की आवाज़ सुनायी दी। एक-दूसरे की चूत में राल टपकाती

हुई उन औरतों के सुड़कने की आवाज़ भी उसे सुनायी दी। एक बात राज के ज़हन में शीशे की तरह साफ थी... उसके सामने चल रही चुदाई जितनी विकृत, पतित और अश्लील थी, इस समय राज के उसमें शरीक होने से वो चुदाई और अधिक विकृत नहीं हो सकती थी।

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हालांकि उसे खुद से अपनी मालकिन के साथ चुदाई की पहल करने की छूट नहीं थी पर दो जवान चुदक्कड़ औरतें जो जानवरों के लंड चूसती हों और उनसे चुदवाती हों -- और एक दूसरे को भी चूसती और चोदती हों, ऐसी औरतों के सामने होने से राज को काफी हिम्मत मिली। राज ने अपनी पैंट की ज़िप खोली और धीरे से आगे बढ़ते हुए उसने अपना लंड और गोटियाँ बाहर निकाल लीं। वो एक अज्ञात डर और उत्तेजना से बूरी तरह काँप रहा था। राज आकर नजीबा के पीछे खड़ा हो गया। उसका लंड नजीबा की झटकती हुई गाँड के ठीक ऊपर टॉर्च की तरह खड़ा था। सुबह जब नजीबा आयी थी तो उसकी सुंदरता और उसका सुडौल जिस्म देख कर राज का लंड खड़ा हो गया था पर उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे इस सुंदरी को चोदने का मौका मिलेगा।

अब अपनी शाजिया मैडम के ऊपर घूमे हुए सिर के दोनों तरफ अपने टाँगें रख कर झुकते हुए उसका दिल उत्तेजना से जोर से धड़क रहा था। उसका लंड जब नजीबा के चुतड़ से छुआ तो नजीबा के चिकने चुतड़ उस दहकते लंड की गर्मी से तमतमा गये। राज ने उसे उसके कसमसाते चूतड़ों से पकड़ लिया।।

नजीबा ने चौंक कर अपनी सहेली की टाँगों के बीच में से अपना सिर उठाया तो उसका चेहरा शाजिया के चुत रस से सना हुआ था।

राज???” नजीबा जोर से किकियाई।

शाजिया ने भी अपनी आँखें खोलीं तो अपने चमकते चेहरे के ठीक ऊपर अपने अर्दली के बड़े टट्टों को झूलते हुए पाया। उसने चौंक कर चखना शुरू किया पर सिर्फ एक शब्दहीन ध्वनि शाजिया के मुँह से निकल कर नजीबा की चूत में ऊपर बुदबुदा गयी।

 


फिर राज ने अपने लंड का सुपाड़ा अपनी मालकिन की सहेली की चूत में घुसा दिया और एक-दो पल रुक कर पूरा लंड अंदर ठाँस दिया। नजीबा की चूत पहले ही इतनी गीली थी कि राज का बड़ा मोटा लंड बहुत आराम से अंदर घुस गया। राज ने धुंआधार चुदाई शुरू कर दी। उसका लंड नजीबा की चूत में अंदर बाहर होता हुआ शाजिया । के होंठों में से गुजर रहा था और राज के लंड से नजीबा की चूत का रस चाटते हुए शाजिया ने उन दोनों को एक साथ चूसना शुरू कर दिया। शाजिया की खुद की चूत पहले से ही गधे के लंड पर झड़ती हुई मलाई छोड़ रही थी और वो इस समय परिणाम की चिंता करने के मूड में नहीं थी।

ना ही नजीबा को कुछ फिक्र थी। जैसे ही उसे राज का लंड अपनी चूत में पिलता। महसूस हुआ, वो मज़े से चिल्लायी और फिर अपना सुंदर चेहरा अपनी सहेली की गधे के लंड से भरी चूत पर झुका दिया और दोनों छोरों से मिल रहे मज़े से मतवाली हो कर मज़े से गधे का लंड और शाजिया की चूत चाटने लगी।।

गधा भी शारीरिक मज़े के अलावा हर बात से अंजान हो कर खुशी से चोद रहा था। जब शाजिया की चूत झड़ने के बाद अपनी मलाई से भर गयी तो उसकी चिकनाहट पाकर गधे का विशाल लंड और भी तेजी से अंदर बाहर चोदने लगा। उसके आँड फुल गये और झूलते हुए नजीबा की ठुड्डी पर चपत लगाने लगे। जब राज ने नजीबा की चूत में ज़ोरदार झटके मारते हुए उसकी दिल की आकार की गाँड ऊपर उठायी तो नजीबा का सिर ऊपर नीचे झटकने लगा।

घरघराते हुए उस गधे ने बहुत जोर से धक्का मार कर अपना लंड शाजिया की चूत में ठेला और उसके आँड फूट पड़े। उसी समय शाजिया के होंठों से बहुत ही भयानक और दिल दहला देनी वाली चींख निकली जब शाजिया को अपनी चूत में गधे के लंड से छूटती वीर्य की पहली पछाड़ महसूस हुई। उस इकलौती पछाड़ से ही शाजिया की चूत और गर्भाशय भर गये और गधे ने तो झड़ना अभी सिर्फ शुरू ही किया था। उसने वीर्य की पछाड़े एक के बाद एक छोड़नी ज़ारी रखीं। वीर्य की दूसरी पछाड़ के बाद ही शाजिया की चूत के किनारों से वीर्य बाहर बहना शुरू हो गया।

कोई भी मौका ना छोड़ते हुए नजीबा झुक कर शाजिया की चूत में से बाहर बहता हुआ गधे का वीर्य भुखमरी की तरह निगलने लगी। वीर्य के अनुठे स्वाद और गंध से नजीबा की उत्तेजाना और परवान चढ़ गयी और उसकी खुद की चूत भी झड़ कर राज के लंड पर मलाईदार रस की बौछार करने लगी। सालीम को नजीबा की चूत पिघलती हुई महसूस हुई तो उसने नजीबा को कुल्हों से पकड़ पीछे खींच कर अपना लंड जड़ तक उसकी चूत में पेल कर अपना खौलता हुआ वीर्य उसकी चूत में सैलाब की तरह बहा दिया।

गधा शाजिया की चूत में वीर्य की पिचकारी दाग रहा था और राज नजीबा की चूत में गधे की तरह ही अपने वीर्य की पछाड़ के बाद पछाड़ छोड़ रहा था। गधा इंसान की तरह घुरघुराया और वो इंसान उस गधे की तरह। दोनों मिल कर एक ताल में अपने आँड खाली कर रहे थे और दोनों औरतें ज्वालामुखी की तरह फूट कर झड़ती हुई चींख रही थीं। राज ने अपना लंड नजीबा की चूत से निकाला तो नजीबा ने अपनी चूत शाजिया की चेहरे पर झुका दी। शाजिया लोलुप्ता से अपनी सहेली की मलाईदार कटोरी से राज का वीर्य चूसने लगी।

अपनी चूत में गधे के गर्म गाढ़े वीर्य के गिरने से उत्तेजित हो कर शाजिया जोर से काँप रही थी। राज थक कर एक तरफ निढाल हो गया। उसका लंड नजीबा की चूत ने इस कद्र निचोड़ा था कि वो बे-जान सा हो कर बिल्कुल मुझ गया था। करीब दस मिनट तक नजीबा उसी स्थिति में अपनी सहेली की चूत से रिसता हुआ गधे का वीर्य पीती रही। गधे के वीर्य के अनूठे स्वाद और गंध से उसकी वासना और भड़क रही थी। शाजिया की चूत से इतना वीर्य बाहर रिस रहा था कि कहीं अंत नज़र नहीं आ रहा था। गधे का गाढ़ा वीर्य । इतनी देर से निगलते हुए नजीबा थकने लगी थी। उसने अपना सिर उठा कर देखा कि इतने चाव से वीर्य निगलने के बावजूद बहुत सारा वीर्य शाजिया की जाँघों और टाँगों से बह कर ज़मीन पर इकट्ठा हो रहा था। शाजिया के टाँगें और हाई-हील सैंडलों से युक्त पैर उस चिपचिपे वीर्य से सन गये थे। शाजिया अभी भी सिसकती हुई बीच-बीच में चींख पड़ती थी और नजीबा के ठोस चूतड़ों में अपनी अंगुलियाँ गड़ा देती।

 


नजीबा अपनी सहेली के ऊपर से किनारे हटी तो अपने चूत-रस से सना उसका चेहरा और खुला मुँह देख कर उसके मन में एक ख्याल आया। उसने अपना चेहरा एक बार फिर गधे के लंड से भरी शाजिया की चूत पे झुका कर बहुत सारा मलाईदार वीर्य अपने मुँह में भरा पर उसे पिया नहीं, बल्कि शाजिया के चेहरे के पास आ कर उसके मुँह में अपने मुँह से गधे का वीर्य उड़ेलती हुई उसे लंबा, दीर्घ चुंबन देने लगी।

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जब शाजिया को एहसास हुआ की उसके मुँह में गधे का वीर्य बह रहा है तो बड़े उत्साह से पी गयी। जब नजीबा के मुँह में वीर्य खत्म हो गया तो उसके बाद भी दोनों के होंठ आपस में चिपके रहे और फ्रेंच चुंबन करते हुए दोनों की जीभें आपस में गुत्थमगुत्था होने लगीं। दोनों एक दूसरे की चूचियाँ मल रही थीं जोकि पिछले घंटे भर से चल रही । उनकी विकृत चुदाई के कारण कठोर थीं।



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आखिरकार, उस रोमांचक किंतु विकृत चुदाई का अंत आ गया। वो गधा शाजिया की जकड़ी हुई चूत में से अपना लंड बाहर खींचने लगा। शाजिया की चूत के मुकाबले लंड का इतना बड़ा आकार होने के कारण, गधे के पीछे हटने से शाजिया का जिस्म भी उसके साथ घिसटने लगा। उन दोनों को अलग होने में सहायता के लिये नजीबा को शाजिया को पकड़ । कर रखना पड़ा।



शेंपेन की बोतल के कॉर्क की तरह गधे का लंड अंत में शाजिया की चूत में से ‘तड़ाक’ की आवाज़ के साथ बाहर निकल आया और साथ ही शाजिया की चूत से गधे के वीर्य की तेज़ धार बाहर बह कर ज़मीन पर दलदल की तरह इकट्ठा होने लगा। शाजिया जोकि इतनी देर से अपनी कमर मोड़ कर सिर्फ अपनी टाँगों के सहारे थी, वहीं पर वीर्य के कीचड़ में कमर के बल लेट गयी। उसे अपने जिस्म पे गर्धब-वीर्य का एहसास बहुत मादक लग रहा ।

था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो मलाई के तालाब में नहा रही हो। उसने अपने जिस्म पे वो सफ़ेद द्रव्य मलते हुए अपनी सहेली की तरफ देका और अपनी अंगुली के इशारे से नजीबा को अपने साथ शामिल होने का निमंत्रण दिया।

नजीबा कामुक्ता से मुस्कुरायी और शाजिया की बगल में आ गयी। शाजिया ने थोड़ा सा खिसक कर नजीबा को अपनी बगल में, सूख कर गाढ़े बनते हुए वीर्य के कीचड़ में लिटा लिया। नजीबा वीर्य के उस कीचड़ में अपनी गाँड हिलाने-डुलाने लगी और अपनी चूचियों पर भी वीर्य उछाल कर मलने लगी। फिर दोनों विकृत औरतें एक दूसरे का जिस्म चाट कर गर्धब-वीर्य का रस लेने लगीं।

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राज एक तरफ बैठा काफी देर से उन दोनों छिनाल औरतों की बेहुदा और विकृत हरकतें देख रह था। दोनों औरतों पर चुदाई और विकृति का जुनून सा सवार दिख रहा था। उसका लंड एक बार फिर तन गया था पर गधे के वीर्य में लथपथ उन चुदक्कड़ सहेलियों के पास जाने का उसका कोई इरादा नहीं था। हालाँकि उन दोनों का फूहड़ और गंदा खेल उसे उत्तेजित कर रहा था पर खुद उस गधे के वीर्य को छूने के ख्याल से भी उसे नफ़रत हो रही थी। इसलिए वहीं दूर बैठे-बैठे वो उन औरतों का विकृत नाच देखते हुए मुठ मारने लगा।



उन दोनों चुदक्कड़ औरतों की हवस देख कर वो सोचने लगा कि इस समय इस गधे और उन दो कुत्तों की बजाय किसी आदमी को अगर अकेले इन औरतों के सुपुर्द कर दिया जाये तो ये दोनों उसे निचोड़ कर उसकी जान ही ले लें और फिर भी इनकी हवस को । इतमीनान ना हो। यह सब सोचते हुए और सामने का कामुक मंज़र देखते हुए उसके लंड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। फिर वो संतुष्ट होकर थका-हारा वहाँ से निकल कर अपने क्वार्टर में चला गया। उसे दोनों सहेलियों की आँखों में वासना दिख रही थी और उसे यकीन था कि जल्दी ही दोनों फिर चुदाई के लिये तैयार जो जायेंगी और उसमें अब और चुदाई के लिये ताकत बकी नहीं थी।

राज का अंदेशा सही था। ।

एक दूसरे के बदन से वीर्य चाट लेने बाद दोनों वहीं पसर गयीं। एक ख्वाबी मुस्कुराहट शाजिया के सुंदर चेहरे को निखार रही थी। वो अभी भी अपने झड़ने की प्रचंडता से सुन्न थी और गधे के वीर्य की प्रचुरता से हैरतअंगेज़ थी जो उस गधे ने उसकी चूत में पंप किया था।

“ऊहहह.. मजा आ गया यार.. चूत का हर हिस्सा, हर रेशा निहाल हो गया... एंड सो मच स्पंक... कैन यू इमैजिन...', शाजिया ने अंगड़ायी लेते हुए कहा।।

“हाँ यार.. अनबिलिवेबल... कितना डेलिशस टेस्ट है इसका... और इतना बड़ा लंड... चूत के अंदर लिया कैसे तूने... बड़ी चुदक्कड़ है तू... तू बदली नहीं... जैसी कॉलेज के जमाने में लंडखोर थी... अब तो और भी ज्यादा चुदास हो गयी है; नजीबा ने उसे छेड़ा।

पर तू अचानक कैसे यहाँ आ गयी... मैं तो डर ही गयी थी. मैं तो सोच रही थी कि तू नशे में धुत्त हो कर बेखबर सो रही होगी... क्या मेरी चींखें तेरे बेडरूम तक आ रही थीं..?” शाजिया बोली।

 
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