• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

शरीफ़ या कमीना

तनु तभी चाय लेकर आ गयी। मैंने बिस्तर पर पड़े तनु की उस सेक्सी पैन्टी को अपने हाथ से एक तरफ़ हटाया और फ़िर तनु को बैठने के लिए इशारा किया। तनु थोडा झिझकते हुए उस पैन्टी की तरफ़ हाथ बढ़ाई कि उसको वो मेरी नजरों से दूर कर सके और तभी मैंने कहा।

मैं: रहने दो तनु, मैं समझ सकता हूँ। नये पति-पत्नी के कमरे में ऐसी चीज सब का होना स्वभाविक है।

दीपू: देखो.... तुम्हारा भाई कितना समझदार है, और एक तुम हो... (तनु झेपं गई)

तनु: जी....चाय लीजिए।

मैं: हा हा हा... मुझे पता है, अभी इस कमरे में कंडोम भी मिलेगा पक्का।

दीपू: जादूगर हो भई तुम तो (उन्होंने तकिये के नीचे से कंडोम का पैकेट निकाला और सामने रख दिया। पैकेट बन्द ही था)

दीपू: देख लो, अभी तक बन्द ही है।

मैं: मतलब दो पैकेट था?

दीपू: नहीं यार... तुम्हारी बहन को मेरे चमड़े से अपना चमडा रगडना होता है हमेशा।

मैं: ओह.... फ़िर तो तनु, तुम जल्दी ही प्रीग्नेंट हो जाओगी।

दीपू: अभी तो बेचारी शुरु ही की है, अभी तो तीन-चार साल तक तो इसकी जवानी का रस चूसना है फ़िर बच्चे पैदा करूँगा।

मैं: पर दीपू भैया, ऐसे बिना कोई प्रोटेक्शन?

दीपू: बस थोडा ध्यान रखना पड़ता है, बाहर पेट पर या मुँह में निकालना पडता है।

तनु: छीः.... चुप रहिए अब।

दीपू: क्यों??? अरे राज ऐसा बच्चा भी नहीं है और दोस्त ही है, फ़िर इससे कैसा पर्दा? वैसे भी बगल में यह सब तो सुन ही लेता

होगा ना, तो फ़िर क्यों पर्दा करें इससे। क्यों राज?

मैं: हाँ दीपू भैया... सुनाई तो आपलोग का सब देता है, बिल्कुल साफ़-साफ़। लकडी के पार्टिशन से कितना पर्दा होगा।

तनु: धत्त भैया, आप भी न। मुझे इतना शर्म लग रहा है अब।

दीपू: हा हा हा... अब शर्म-वर्म छोड़ो और जवानी के मजे लो। मेरा तो मन है कि राज को भी साथ में ही सुला लें। एक तरफ़ मैं

और दूसरी तरफ़ राज, बीच में तुम.... क्यों, क्या बोलती हो? (मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी, यह ज्यादा हो गया था)

तनु: भैट.... आपको भी पता नहीं कहाँ-कहाँ से शैतानी सुझता रहता है? (फ़िर मुझे बोली)

तनु: जानते हैं भैया??? कल रात में ये मेरा हाथ बाँध दिये और आँख पर पट्टी भी.... फ़िर किए।

दीपू: तुम्हें मजा आया ना?

मैं: अरे तनु, यह तो खुशी की बात है कि तुम्हें ऐसा मजेदार पति मिला है जो तुमको लगातार नया-नया मजा दे रहा है। मुझे सब

पता है कि कल तुम्हारे साथ क्या सब हुआ...। हमेशा खुश रहो, और ऐसे ही तुम्हारा पति रोज-रोज अलग-अलग तरीके से

तुम्हें इस सब का मजा देता रहे।

दीपू: अच्छा राज, एक बात बताओ...? तुम भी लडकी के साथ सेक्स करते हो?

मैं: आप भी क्या पूछ रहे है? तनु मेरी बहन है...।

दीपू: अरे तो मैं तुमसे बहन को चोदने की बात थोड़े ना पूछ रहा हूँ, मैं तो पूछ रहा हूँ कि तुम लडकी को चोदते हो कि नहीं?

मैं: जी भैया, चोदता तो हूँ मैं भी कभी-कभी।

दीपू: देख लो तनु, लडकी का बदन तुम्हारे भाई को भी खींच लिया वो भी शादी के पहले ही, और तुम शर्माते रहो।

 
तनु भी चुप और मैं भी। तभी मम्मी की आवाज सुनाई दी, वो हम सब को नीचे बुला रही थी तो हम सब नीचे आ गये और फ़िर हमारा दिन शुरु हो गया। मुझे पता था कि आज की रात तनु की हमारे घर पर आखिरी रात थी और अब जब मैं तनु को चोद लिया था तो तनु को मैं फ़िर से चोदने की सोचने लगा था। दिन में मौका मिलते ही मैंने यह बात दीपू भैया को बताई।

मै: भैया, काल तो आपलोग अपने घर चले जाएँगे?

दीपू: हाँ, और अब तो काम पर भी ज्वाईन करना है...क्यों?

मैं: अच्छा नहीं लग रहा है। अब तो तनु भी कभी-कभी ही आ पाएगी ना?

दीपू: ऐसी बात नहीं है, लोकल ही है तो आती ही रहेगी। असल में अगले महिने मैं उसको न्यूजीलैंड ले जा रहा हूँ। यह उसके लिए

सर्प्राईज है, तुम भी मत बताना। अभी यह बात सिर्फ़ मैं और तुम ही जानते हैं और कोई नहीं। उसको यही पता है

कि हम नैनिताल जाने वाले हैं।

मैं: वाह.... इंटरनेशनल हनिमून...।

दीपू: वो भी सबसे बेशर्म वाला। वहाँ खुल्लम्खुल्ला सी-बीच पर चोदना है उसको। एक न्यूडिस्ट कैंप में चार दिन की बूकिंग करवा

ली है। उसके ब्रोशर में तो ग्रूप सेक्स और स्वैपिंग की भी बात लिखी हुई है। अब जाने के पहले उसको जरा बेशर्म बना देना है

कि वहाँ कुछ तमाशा ना बन जाए। तुम भी अब कुछ मदद करो न।

मैं: उउउम्म्म्म्म... मैं कैसे?

दीपू: एकबार उसको खुल्लम-खुल्ला चोदो ना। कोशिश तो करो.... गर चुद गई तो पक्का हो जाएगा कि अब वहाँ वो शर्माएगी नहीं।

मैंने तो तुम्हें मौका दिना तो तुम डरते ही रहे और मैंने उसकी पट्टी नहीं खोली। तुमको थोडा ज्यादा बोल्ड बनना होगा।

मैं: अब इतना सब मेरे साथ नहीं हो पाएगा। आप बब्लू से कहिएगा न...।

दीपू: देखो राजू, बब्लू तनु का देवर है और तुम हो उसके भाई। देवर के साथ अगर ज्यादा खुल गई तो रिस्क है कि वो मेरा बेटा

पैदा करेगी कि अपने देवर का। तुम्हारे साथ यह पका है कि वो तुम्हारा बच्चा तो पैदा नहीं ही करेगी। वैसे भी उसका देवर के

साथ संबंध हो इससे ज्यादा बेशरमी की बात उसके लिए होगी कि वो अपने भाई के साथ संबंध बनाए। इसीलिए मेरा मन है कि

यहाँ से जाने के पहले कम-से-कम एक बार वो अपनी रजामन्दी से तुम्हारे साथ सेक्स करे। तुम कोशिश तो करो, मैं तुम्हारी

भरसक मदद करूँगा।

मेरा मन भी अब जरा बहकने लगा था और मैंने एक छोटा सा "ठीक है" कहा। तय हुआ कि आज तनु को दीपू भैया खुली छत पर ले आएँगे उसकी आँख बाँध कर और उस खुली छत पर उसको मैं चोदुँगा, जब मेरा लन्ड उसकी बूर में घुसा हुआ अर्हेगा तभी दीपू भैया उसके आँख की पट्टी खोल देंगे जिससे वो देख ले कि उसके बूर में मेरा लन्ड है। इसके बाद, सब कुछ उसके प्रतिक्रिया पर निर्भर करे। दो बातें होनी थी, या तो वो मेरी चुदाई का मजा लेगी, या फ़िर विरोध करेगी। वैसे भी मैं अब अपने जौब इंटरव्यू के लिए निकलने वाला था और फ़िर कहीं सेट होना था और उसको भी अगली सुबह ही अपने ससुराल निकल जाना था।

 
रात में जैसा प्लान था दीपू भैया ने उसको पूरा नंगा करके उसके हाथ बाँध दिये और फ़िर उसके आँखों पर पट्टी बाँध कर उसका हाथ पकड कर कमरे के बाहर खुली छत पर ले आए। पूर्णिमा के एक दिन पहले की बात थी तो पूरा छत अच्छी खासी रौशनी से नहाया हुआ था। मैं तो पहले से नंगा हो कर अपनी बहन को चोदने का इंतजार कर रहा था। तनु जिस तेजी से सेक्स की गुडिया में बदलती जा रही थी, मुझे आश्चर्य हो रहा था कि क्या यह मेरी वही बहन है जो कभी इस बात पर दो-दो दिन स्कूल छोड़ देती थी कि किसी लडके ने उसको देख कर सीटी बजाई है। मैं किस्मत के खेल देख कर हँस रहा था कि ऐसी लडकी को पति मिला तो ऐसा जो उसको ऐसे खुल्लम-खुल्ला सेक्स की गुडिया बनाने में लगा हुआ था। मैंने अपने को समझाया कि अगर वो विरोध की तब भी उसकी चुदाई कर ही देना है, और उसको कहना है कि कन्यादान के बाद वो मेरी बहन से ज्यादा दीपू भैया की बीवी मतलब मेरी भाभी लगेगी और मैं उसको भाभी समझ कर चोद रहा हूँ। मैं अब निश्चिंत था कि आज फ़िर मुझे अपनी बहन चोदने के लिए मिलेगी। असल में तनु मेरी बहन है, यह सोच ही मेरे लन्ड को कुछ ज्यादा मजा दे रही थी। कहाँ तो मैंने बब्लू के साथ इतने पैसे खर्च करके वो कैमरा वगैरह लगाया था कि अपनी बहन की सुहागरात लाईव देख सकूँ और कहाँ किस्मत ने मुझे अपनी बहन की चूत चोदने का मौका दे दिया वो भी उसकी सुहागरात के ठीक बाद। अभी वो उन्नीस की भी नहीं हुई थी और मैं उसको चोदने में कामयाब हो गया था। आज दिन में मैंने अपने सारे झाँट साफ़ कर दिये थे और अब सोच कर बैठा था कि आज जब उसको चोदने के पहले उसकी मुँह में अपना लन्ड घुसाउँगा तब आँख बंधे होने पर भी वो समझ जाएगी कि आज उसके मुँह में उसके पति का लन्ड नहीं है।

दीपू भैया ने उसको बीच छत पर खड़ा कर दिया और तभी मैं कमरे से अपने बिस्तर का गद्दा ले कर वहाँ आ गया। दीपू भैया बिस्तर लगाए जबकि मैंने तनु को कंधे से पकड कर उसको बिस्तर की तरफ़ ले गया। जब वो बिस्तर को मह्सूस की तब खुश हो कर बोली, "वाह छत पर बिस्तर का भी इंतजाम है"। वो अब आराम से बिस्तर पर बैठ गयी। उसका बँधा हुआ हाथ उसकी गोद में था। मैं अब उसके सर के करीब आ गया और फ़िर उसका चेहरा अपने लन्ड की तरफ़ घुमा कर उसके हो्ठ से अपना लन्ड सटाया। इस समय तक तनु को मर्दाने लन्ड की खूब पहचान हो गयी थी। वो चट से अपना होठ खोली और मैंने उसके मुँह में अपना औजार घुसा दिया जिसको वो अब बड़े चाव से चाटने लगी थी। मैंने अपने दोनों हाथों से उसका सर पकड लिया था और फ़िर अपने लन्ड पर दबाने लगा। मेरा लन्ड उसके गले की तरफ़ जब गया तो वो हल्के से खाँसी और फ़िर आराम से मेरा लन्ड पूरी भीतर ले ली। पगली को पता भी नहीं चला कि उसकी नाक एक चिकने लन्ड पर ससर रही है, जबकि उसके पति के लन्ड पर बाल है। चुदाई के चक्कर में मेरी बहन सब भूल-भाल गयी थी। जवान लड़की को जब चुदाई का चस्का लग जाता है तो यही सब होता है। मैंने अपना लन्ड उसके मुँह से निकाल लिया और फ़िर झुक कर पहली बार अपनी बहन के होठों को चुमा। तनु अब अपने भाई के होठ को चूस रही थी। यहाँ भी उसको सतर्क होना चाहिए था क्योंकि मेरी हल्की मूँछें थी जबकि दीपू भैया क्लीन-शेव्ड थे। पर तनु तो जैसे किसी और दुनिया में खोई हुई थी और मेरे चुम्बनों का जोरदार तरीके से जवाब दे रही थी। मैंने उसके बँधे हाथों को उसके सर से ऊपर कर दिया और फ़िर उसकी काँख को सूँघा। उसके काँख में से गजब की तेज महक नाकों में गई, चुदासी से भरी लडकी की एक हल्की खट्टी सी महक। उसके काँख के बाल अब करीब आधा सें०मी० के दिखने लगे थे। उसकी चूत पर भी छिले हुए बाल अब हल्के-हल्के दिखने लगे थे। मैं अब उसकी छाती को मसल रहा था और वो मस्ती से कराह रही थी। दीपू भैया आराम से बगल में लेट कर सब देख रहे थे। मैंने अब तनु को बिस्तर पर लिटा दिया और फ़िर उसकी चूत को मुँह में ले कर चुभलाने लगा और वो मस्ती से चीखने लगी थी। करीब पाँच मिनट तक उसके चूत और चूचियों का मजा लेने के बाद मैंने उसके घुटने मोड़ कर उसके पेट से लगा दिया और फ़िर अपना खड़ा लन्ड उसकी गीली पनियाई हुई चूत में घुसा दिया। जब मैंने हल्के से दूसरा धक्का लगाया और फ़िर उसकी छाती पर झुकता चला गया तभी दीपू भैया बोले, "आँख खोल दे क्या?" और चुदाई में पागल तनु तब भी नहीं समझी कि यह आवाज उसको चोदने वाले की नहीं है। वो बस हाँफ़ते हुए बोली, "हाँ... हाथ भी, ठीक से छटपटा भी नहीं पा रही हूँ"। और जब तक उसका वाक्या पूरा हो, उसके आँख की पट्टी खुल गई थी। उसकी नजरें मुझसे टकराईं जो अब उसको ऊपर से घपाघप धक्के लगा-लगा कर चोद रहा था। मुझे इस तरह से जब वो देखी कि मैं कैसे उसको मस्त हो कर चोद रहा हूँ तो उसकी आँख अती की फ़टी रह गई, जैसे वो एक बड़े शौक में हो... फ़िर होश आया तो छटपटा कर मेरे नीचे से निकलने की कोशिश की... पर मैंने अबकि बार मस्त हो कर उसकी कमर को अपने मजबूत हाथों से पकड़ लिया और फ़िर जोरदार धक्के लगाते हुए उसको चोदने लगा। वो भी अब बेदम हो कर मेरे धक्के अपनी चूत में लेते हुए कराहने लगी... आअह आअह्ह ओह्ह ओह्ह इस्स्स इस्स्स्स , भैया प्लीज अब हट जाइए।

मैं: अब पूरा चोद लेने दो तनु, फ़िर हटता हूँ। बहुत नशीली जवानी है तुम्हारी।

वो कुछ नहीं बोली, और बस चुप-चाप लेट कर मुझसे चुदाने लगी। वो विरोध नहीं कर रही थी पर उसकी आँख्ह अब बन्द हो गयी थी जैसे वो मुझे अपनी चुदाई करते देखना न चाह रही हो। दीपू भैया अब उसकी छाती को सहला रहे थे और बीच-बीच में चुसने भी लगते थे। वो तब जोर-जोर से कराह उठती। मस्त नशीली आवाजें अब तनु के मुँह से निकल रही थी, और इसी सब के बीच मेरा लन्ड झडने के कगार पर पहुँच गया तो मैंने अपना लन्ड बाहर खींच लिया और फ़िर उसके होटःओं की तरह बढ़ा तो वो अपना होठ जोर से भींच ली। तब दीपू भैया ने उसके नाक बन्द कर दिये जिससे वो साँस लेने के लिए मुँह खोली कि मेरा लन्ड भीतर। वो कुछ समझे तबतक मेरे लन्ड ने ऊल्टी शुरु कर दी। वो लाख कोशिश की, पर मैंने अपना रस का आधा से ज्यादा भाग उसकी पेट में पहुँचा ही दिया, हालाँकि उसकी कोशिश यही थी कि वो मेरा माल अपने मुँह में ना ले। मैं अब अपनी प्यास बुझा कर अलग हट गया। तनु अब रो रही थी जोर-जोर से, जबकि मैं उसकी पीठ सहलाते हुए उसको सांत्वना देने की कोशिश कर रहा था। तभी दीपू भैया ने उसको अपने बाँहों के घेरे में लिया और फ़िर पुचकारते हुए उसको शान्त करने लगे। करीब पाँच मिनट बाद ही वो दीपू भैया से चुद रही थी और मैं आराम से बगल में बैठ कर उसकी चुदाई देख रहा था। वो अब हम दोनों साला-बहनोई के हाथों में अपने को पूरी तरह से सौंप दी थी। उस रात हमने दो बजे तक बारी-बारी से दो-दो बार चोदा फ़िर सोने चले गये।

 
तनु अब तीन दिन अपने मायके में बिताने के बाद फ़िर से अपने ससुराल आ गयी थी। उसके सास-ससुर ने बहुत गर्मजोशी से उसका स्वागत किया। उसकी ननद बब्ली अब चहक रही थी और मेरी नजर अपने दोस्त बब्लू को खोज रही थी। पता चला कि वो मचली लाने बाजार गया है। आज मेरी बहन के स्वागत में उसकी सास मछली पकाने वाली थी। दीपू भैया और उनके पापा आपस में बातें करने लग गये थे, तनु, बब्ली और उसकी सास अपने में बीजी हो गये थे तो मैं यह कह कर कि मैं बब्लू के कमरे में जाता हूँ कह कर बब्लू के कमरे में चला गया। मेरे पास उसके लौपटोप का पासवर्ड था सो मैंने चला लिया और फ़िर उसके पिछले तीन दिनों की रिकार्डिंग देखने लगा। सब रिकार्डिंग बब्लू ने अपने बहन बब्ली की ही कर रखी थी। हद तो यह था कि एक क्लीप थी जिसमें बब्ली को उसके बाथरूम में जमीन पर बैटः कर पेशाब करते हुए भी उसने रिकार्ड किया हुआ था। मुझे लग गया कि उसने शायद तनु के कमरे से एक कैमरा कम करके उसे बब्ली के बाथरूम में लगा दिया है। मैं अब एक-एक करके सब क्लीप देखनी शुरु कर दी। यह तो मुझे समझ में आ गया था कि बब्ली तनु से उम्र में भले ही छोटी थी पर अपने बूर से खेलने में पूरा एक्स्पर्ट थी। जब भी वो अपने चूत से खेलती तब उसके चेहरे के भाव ऐसे होते थे जैसे सिर्फ़ चेहरा देख कर ही मर्दाना लन्ड ठनक जाए। कमरे का दरवाजा मैंने भीतर से बन्द कर लिया था सो जब बब्लू आया तो उसने दरवाजा नौक किया और जब मैंने खोला तो हमदोनों गले लग गये। मैं खुश था और जल्द-से-जल्द यह बताने को उतावला था कि मैंने अपनी छोटी बहन तनु को उसके पति के सामने दो बार चोदा है। पर मैं यह सब किन शब्दों में कहों यह सोचता ही रह गया और बब्लू बोल पडा।

बब्लू: पता है... यहाँ मैंने बब्ली को तुम्हारी बहन की सुहागरात दिखा कर उसको गर्मा दिया और फ़िर उसके साथ मैंने कल ही रात

को अपनी सुहागरात मना ली।

मैं: अच्छा साले.... और मैं समझ रहा था कि सिर्फ़ मैंने ही अपनी बहन को चोदा है...।

मैं मुस्कुराया... और बब्लू अब भौंचक हो कर मुझे एक क्षण देखा और फ़िर एक प्यारा सा मुक्का मेरी पेट पर लगाया और बोला।

बब्लू: क्या सच में..... और मेरा भाई क्या कर रहा था और साली तनु मन कैसे गयी तुझसे चुदाने के लिए, यहाँ तो पति से चुदने

में साली की नानी मर रही थी।

मैं: अरे... दीपू भैया का ही आईडिया था यह सब, वही यह सब करवाए हमदोनों का।

तू बता, तू कैसे बब्ली को चोद लिया, अभी तो सही से जवान भी नहीं हुई लगती है।

बब्लू: क्या यार.... साले, लौंडिया सब तो १२ साल में जवान हो जाती है बब्ली तो फ़िर भी १६ की है अब तो। आँख से आँसू बह

निकला पर क्या मजाल जो मादरचोद के मुँह से एक चीख निकल जाए। रात में तो दर्द-वर्द का चक्कर था, पर आज सुबह तो

मस्त होकर खाई है मेरा लन्ड... पूरा का पूरा अपनी गाँड नीचे से ऊछाल-ऊछाल कर।

मैं: साले... हरामी। मेरी बहन की सील तेरा भाई तोड दिया और अपनी बहन की सील तुम्ने तोड़ दी, अब मैं साला एक नया

सील-पैक माल कहाँ से खोजूँ।

बब्लू: अरे... जुगाड कर दूँगा बे मादरचोद... ऐसे भडक मत।

मैं: अच्छा बेटा मैं मादरचोद... और तू बहनचोद.... (हम दोनों हँसने लगे)

बब्लू: यार... अब तो मैं भी बहनचोद हूँ - पूरा - वो भी अपनी बहन से सिर्टीफ़ाईड। देखे ही होगे, जब से बब्ली की सील टूटी है,

तब से कुछ ज्यादा ही चहक रही है। मम्मी तो आज सुबह बोली भी कि क्या बात है बब्ली आज कुछ ज्यादा ही बोल रही हो।

एक बारगी तो मुझे लगा कि कहीं मम्मी को शक तो कुछ नहीं हो गया।

मैं: हा हा हा... लगता है यह गुण बब्ली को विरासत से मिला है। चाची भी पक्का जब उसका सील टूटा होगा खुब बोलने लग गयी

होगी इसीलिए उसको यह शक हुआ होगा।

बब्लू: अच्छा... तो मेरी मम्मी को भी लपेटे में ले रहे हो बे.... जूते से सर लाल कर दूँगा साले।

मैं: अरे नहीं दोस्त..... ऐसे बात नहीं है, पर एक बात कहूँगा, तेरा माँ की बौडी अभी भी पूरा टँच है, बस हल्का सा पेट ढीला हुआ

है, पर हाथ, कंधे या छाती भी पूरी तरह से कसी हुई है।

बब्लू: और नहीं तो क्या, तेरी माँ की तरह थुलथुल हो जाना चाहिए था क्या? मेरी मम्मी रोज योग भी करती रहती है। जाँघ तक

कसी हुई है उसकी।

 
मैं: अच्छा बेटा.... जाँघ कब देख लिया बे हरामी?

बब्लू: देखता रहता हूँ बचपन से.... कभी-कभी जब नाईटी पहन कर जमीन पर बैठ वो सब्जी काट रही होती है तो उसकी नाईटी

खिसक जाती है और फ़िर तब उसकी कसी हुई जाँघ दिख ही जाती है। ज्यादा रूकता नहीं मैं उसके सामने खिसक लेता हूँ।

मैं: बहुत लक्की है बे साले तू.... चूत देखी उनकी?

बब्लू: नहीं रे.... वो हमेशा पैन्टी पहने रहती है। पैन्टी तो वो नहाते समय भी नहीं उतारती। देख ही रहे हो, बाथरूम में झाँकने की

आदत मेरी बहुत पुरानी है।

मैं: हाँ बेटा, तुझमें हिम्मत तो मेरे से बहुत ज्यादा है। ये कैमरा वाला आयडिया और फ़िर अपनी बहन को ऐसे सुहागरात की

विडियो दिखा कर गर्म करके चोद लेना.... हर किसी के बस की बात नहीं है। अब जरा बब्ली को मेरे नीचे भी सूने के लिए

पटा लो ना एक बार, प्लीज।

बब्लू: अरे यार... ऐसे क्यों बोलते हो। आज ही रात को बुला लूँगा बब्ली को यहीं कमरे में और फ़िर मैं तेरी बहन की लाईव चुदाई

देखूँगा और तू मेरी बहन चोद लेना।

मैं: वो मानेगी ऐसे तेरे सामने चुदाने के लिए।

बब्लू: पूरा रंडी है मेरी बहन....कुँवारी थी तब से वो जैसे यही ट्रेनिंग कर रही थी कि वो कैसे चुदेगी। ऐसी-ऐसी गालियाँ बोलती है

कि पूछो मत। साली की मुस्लिम सहेलियों ने उसको पूरा ट्रेनिंग दिया है। वो सब तो घर में चुदाने में एक्स्पर्ट होती ही हैं सो

बब्ली को भी पूरा गर्मा दिया था जब से वो जवान हुई। बस एक बार मैंने कोशिश की और वो चट मेरा लन्ड खा ली, जैसे

उसको भी मेरे इशारे का ही इंतजार था।

चल अब तू बता, तेरी बहन किस तरह से राजी हुई और कैसे पेला तूने उसकी चूत में अपना लन्ड?

मैंने सब बात शुरुआत से उसको बताई और वो मेरी बात सुनते हुए अपने लन्ड से खेलता रहा। मैंने उसको सब बातों को पूरे विस्तार से बताया, यह भी कि मेरी बहन की गाँड़ भी लन्ड खा चुकी है। गाँड़ की बात सुन कर बब्लू बोल।

बब्लू: चल, तू भी मेरी बहन की गाँड़ मार लेना। बूर न सही गाँड़ ही सही, बब्ली की गाँड को तो अभी तक मैंने छूआ भी नही है।

मैं: ठीक है... अब देखना है वो अपना गाँड़ मेरे से फ़डवाना चाहेगी या नहीं।

बब्लू: बेटा... कोई लड़की ऐसे खुशी से अपना गाँड नहीं मराती, खास कर जब वो कमउम्र कमसीन हो बब्ली जैसी।

ऐसी लड़कियों को तो पटक कर उनकी गाँड को फ़ाडना पड़ता है।

मैं: पर मेरी बहन तो... अपनी मर्जी से अपना गाँड मरवाई थी, मैंने देखा था उसको।

बब्लू: वो बीवी थी यार.... उसको पता था कि उसका पति उसकी गाँड मारेगा ही... पक्का, वो हाँ बोले या ना। पर बब्ली अभी १६

की है और कमसीन भी। उसको पता है कि उसकी बूर की कीमत अभी भी बहुत ज्यादा है। ऐसे भी शादी के बाद लडकी के बूर

की कीमत अचानक कम हो जाती है तो वो अपना गाँड मरवा कर पति को रिझाती है, पर बब्ली की बूर ही अभी दो-तीन साल

तक लड़कों को अपना गुलाम बना कर रखने के लायक है।

मैं: सही बात कह रहे हो यार.... वैसे यार तुम भी उसको बोलना ना मेरे को अपना गाँड देने की।

बब्लू: पक्का....

और तभी नीचे से बब्ली हमें पुकारी, "आ जाओ... खाना निकल गया है", हम अब नीचे चल दिए।
 
तनु अब तीन दिन अपने मायके में बिताने के बाद फ़िर से अपने ससुराल आ गयी थी। उसके सास-ससुर ने बहुत गर्मजोशी से उसका स्वागत किया। उसकी ननद बब्ली अब चहक रही थी और मेरी नजर अपने दोस्त बब्लू को खोज रही थी। पता चला कि वो मचली लाने बाजार गया है। आज मेरी बहन के स्वागत में उसकी सास मछली पकाने वाली थी। दीपू भैया और उनके पापा आपस में बातें करने लग गये थे, तनु, बब्ली और उसकी सास अपने में बीजी हो गये थे तो मैं यह कह कर कि मैं बब्लू के कमरे में जाता हूँ कह कर बब्लू के कमरे में चला गया। मेरे पास उसके लौपटोप का पासवर्ड था सो मैंने चला लिया और फ़िर उसके पिछले तीन दिनों की रिकार्डिंग देखने लगा। सब रिकार्डिंग बब्लू ने अपने बहन बब्ली की ही कर रखी थी। हद तो यह था कि एक क्लीप थी जिसमें बब्ली को उसके बाथरूम में जमीन पर बैटः कर पेशाब करते हुए भी उसने रिकार्ड किया हुआ था। मुझे लग गया कि उसने शायद तनु के कमरे से एक कैमरा कम करके उसे बब्ली के बाथरूम में लगा दिया है। मैं अब एक-एक करके सब क्लीप देखनी शुरु कर दी। यह तो मुझे समझ में आ गया था कि बब्ली तनु से उम्र में भले ही छोटी थी पर अपने बूर से खेलने में पूरा एक्स्पर्ट थी। जब भी वो अपने चूत से खेलती तब उसके चेहरे के भाव ऐसे होते थे जैसे सिर्फ़ चेहरा देख कर ही मर्दाना लन्ड ठनक जाए। कमरे का दरवाजा मैंने भीतर से बन्द कर लिया था सो जब बब्लू आया तो उसने दरवाजा नौक किया और जब मैंने खोला तो हमदोनों गले लग गये। मैं खुश था और जल्द-से-जल्द यह बताने को उतावला था कि मैंने अपनी छोटी बहन तनु को उसके पति के सामने दो बार चोदा है। पर मैं यह सब किन शब्दों में कहों यह सोचता ही रह गया और बब्लू बोल पडा।

बब्लू: पता है... यहाँ मैंने बब्ली को तुम्हारी बहन की सुहागरात दिखा कर उसको गर्मा दिया और फ़िर उसके साथ मैंने कल ही रात

को अपनी सुहागरात मना ली।

मैं: अच्छा साले.... और मैं समझ रहा था कि सिर्फ़ मैंने ही अपनी बहन को चोदा है...।

मैं मुस्कुराया... और बब्लू अब भौंचक हो कर मुझे एक क्षण देखा और फ़िर एक प्यारा सा मुक्का मेरी पेट पर लगाया और बोला।

बब्लू: क्या सच में..... और मेरा भाई क्या कर रहा था और साली तनु मन कैसे गयी तुझसे चुदाने के लिए, यहाँ तो पति से चुदने

में साली की नानी मर रही थी।

मैं: अरे... दीपू भैया का ही आईडिया था यह सब, वही यह सब करवाए हमदोनों का।

तू बता, तू कैसे बब्ली को चोद लिया, अभी तो सही से जवान भी नहीं हुई लगती है।

बब्लू: क्या यार.... साले, लौंडिया सब तो १२ साल में जवान हो जाती है बब्ली तो फ़िर भी १६ की है अब तो। आँख से आँसू बह

निकला पर क्या मजाल जो मादरचोद के मुँह से एक चीख निकल जाए। रात में तो दर्द-वर्द का चक्कर था, पर आज सुबह तो

मस्त होकर खाई है मेरा लन्ड... पूरा का पूरा अपनी गाँड नीचे से ऊछाल-ऊछाल कर।

मैं: साले... हरामी। मेरी बहन की सील तेरा भाई तोड दिया और अपनी बहन की सील तुम्ने तोड़ दी, अब मैं साला एक नया

सील-पैक माल कहाँ से खोजूँ।

बब्लू: अरे... जुगाड कर दूँगा बे मादरचोद... ऐसे भडक मत।

मैं: अच्छा बेटा मैं मादरचोद... और तू बहनचोद.... (हम दोनों हँसने लगे)

बब्लू: यार... अब तो मैं भी बहनचोद हूँ - पूरा - वो भी अपनी बहन से सिर्टीफ़ाईड। देखे ही होगे, जब से बब्ली की सील टूटी है,

तब से कुछ ज्यादा ही चहक रही है। मम्मी तो आज सुबह बोली भी कि क्या बात है बब्ली आज कुछ ज्यादा ही बोल रही हो।

एक बारगी तो मुझे लगा कि कहीं मम्मी को शक तो कुछ नहीं हो गया।

मैं: हा हा हा... लगता है यह गुण बब्ली को विरासत से मिला है। चाची भी पक्का जब उसका सील टूटा होगा खुब बोलने लग गयी

होगी इसीलिए उसको यह शक हुआ होगा।

बब्लू: अच्छा... तो मेरी मम्मी को भी लपेटे में ले रहे हो बे.... जूते से सर लाल कर दूँगा साले।

मैं: अरे नहीं दोस्त..... ऐसे बात नहीं है, पर एक बात कहूँगा, तेरा माँ की बौडी अभी भी पूरा टँच है, बस हल्का सा पेट ढीला हुआ

है, पर हाथ, कंधे या छाती भी पूरी तरह से कसी हुई है।

बब्लू: और नहीं तो क्या, तेरी माँ की तरह थुलथुल हो जाना चाहिए था क्या? मेरी मम्मी रोज योग भी करती रहती है। जाँघ तक

कसी हुई है उसकी।

मैं: अच्छा बेटा.... जाँघ कब देख लिया बे हरामी?

बब्लू: देखता रहता हूँ बचपन से.... कभी-कभी जब नाईटी पहन कर जमीन पर बैठ वो सब्जी काट रही होती है तो उसकी नाईटी

खिसक जाती है और फ़िर तब उसकी कसी हुई जाँघ दिख ही जाती है। ज्यादा रूकता नहीं मैं उसके सामने खिसक लेता हूँ।

मैं: बहुत लक्की है बे साले तू.... चूत देखी उनकी?

बब्लू: नहीं रे.... वो हमेशा पैन्टी पहने रहती है। पैन्टी तो वो नहाते समय भी नहीं उतारती। देख ही रहे हो, बाथरूम में झाँकने की

आदत मेरी बहुत पुरानी है।

मैं: हाँ बेटा, तुझमें हिम्मत तो मेरे से बहुत ज्यादा है। ये कैमरा वाला आयडिया और फ़िर अपनी बहन को ऐसे सुहागरात की

विडियो दिखा कर गर्म करके चोद लेना.... हर किसी के बस की बात नहीं है। अब जरा बब्ली को मेरे नीचे भी सूने के लिए

पटा लो ना एक बार, प्लीज।

बब्लू: अरे यार... ऐसे क्यों बोलते हो। आज ही रात को बुला लूँगा बब्ली को यहीं कमरे में और फ़िर मैं तेरी बहन की लाईव चुदाई

देखूँगा और तू मेरी बहन चोद लेना।

मैं: वो मानेगी ऐसे तेरे सामने चुदाने के लिए।

बब्लू: पूरा रंडी है मेरी बहन....कुँवारी थी तब से वो जैसे यही ट्रेनिंग कर रही थी कि वो कैसे चुदेगी। ऐसी-ऐसी गालियाँ बोलती है

कि पूछो मत। साली की मुस्लिम सहेलियों ने उसको पूरा ट्रेनिंग दिया है। वो सब तो घर में चुदाने में एक्स्पर्ट होती ही हैं सो

बब्ली को भी पूरा गर्मा दिया था जब से वो जवान हुई। बस एक बार मैंने कोशिश की और वो चट मेरा लन्ड खा ली, जैसे

उसको भी मेरे इशारे का ही इंतजार था।

चल अब तू बता, तेरी बहन किस तरह से राजी हुई और कैसे पेला तूने उसकी चूत में अपना लन्ड?

 
मैंने सब बात शुरुआत से उसको बताई और वो मेरी बात सुनते हुए अपने लन्ड से खेलता रहा। मैंने उसको सब बातों को पूरे विस्तार से बताया, यह भी कि मेरी बहन की गाँड़ भी लन्ड खा चुकी है। गाँड़ की बात सुन कर बब्लू बोल।

बब्लू: चल, तू भी मेरी बहन की गाँड़ मार लेना। बूर न सही गाँड़ ही सही, बब्ली की गाँड को तो अभी तक मैंने छूआ भी नही है।

मैं: ठीक है... अब देखना है वो अपना गाँड़ मेरे से फ़डवाना चाहेगी या नहीं।

बब्लू: बेटा... कोई लड़की ऐसे खुशी से अपना गाँड नहीं मराती, खास कर जब वो कमउम्र कमसीन हो बब्ली जैसी।

ऐसी लड़कियों को तो पटक कर उनकी गाँड को फ़ाडना पड़ता है।

मैं: पर मेरी बहन तो... अपनी मर्जी से अपना गाँड मरवाई थी, मैंने देखा था उसको।

बब्लू: वो बीवी थी यार.... उसको पता था कि उसका पति उसकी गाँड मारेगा ही... पक्का, वो हाँ बोले या ना। पर बब्ली अभी १६

की है और कमसीन भी। उसको पता है कि उसकी बूर की कीमत अभी भी बहुत ज्यादा है। ऐसे भी शादी के बाद लडकी के बूर

की कीमत अचानक कम हो जाती है तो वो अपना गाँड मरवा कर पति को रिझाती है, पर बब्ली की बूर ही अभी दो-तीन साल

तक लड़कों को अपना गुलाम बना कर रखने के लायक है।

मैं: सही बात कह रहे हो यार.... वैसे यार तुम भी उसको बोलना ना मेरे को अपना गाँड देने की।

बब्लू: पक्का....

और तभी नीचे से बब्ली हमें पुकारी, "आ जाओ... खाना निकल गया है", हम अब नीचे चल दिए।

नीचे आने के बाद मैं अब बब्ली को घूरने लगा था, मेरे पास अब उसके लिए एक नया नजरिया था तो दूसरी तरफ़ बब्लू भी मेरी बहन तनु को घूर रहा था.... पर वो तो उसकी भाभी थी रिश्ते में। आप ऐसे समझें कि हम दोनों बहनचोद अब एक दूसरे की बहन पर नजर गराए हुए थे। सब का खाना परोसा गया और हम सब खा रहे थे जब दीपू भैया ने ऐलान किया।

दीपू: परसों तनु को लेकर एक सप्ताह के लिए घूमने जा रहे हैं।

और तब बब्ली जो सच में आज कुछ ज्यादा ही चहक रही थी तुरन्त बोली।

बब्ली: ओ...हो, हनीमून.... बढिया है। कहाँ जा रहे हैं, साउथ या नैनीताल?

दीपू: यूरोप... सब बुकिंग वगैरह हो गया है। कल दिल्ली निकलना है ट्रेन से और परसों शाम की फ़्लाईट है।

यह सुनकर सब अब मेरी बहन को बधाई देने लगे और उसकी सास ने भी साफ़ कह दिया।

तनु की सास: वाह... अब वहाँ से आना तो पेट में मेरा पोता ले कर आना।

बब्लू: क्या मम्मी, इत्ती दूर सिर्फ़ पोता लाने जाएगी भाभी, पोता तो यही उसको एक सप्ताह बन्द कर दो कमरे में तो मिल

जाएगा तुम्हें।

हम सब ठहाका लगा कर हँस पडे इस बात पर और तब उसके ससुर बोले।

तनु के ससुर: अरे तनु बेटा को घूमने भी दो भाई, अभी-अभी शादी हुई है... बच्ची है बेचारी, जरा कुछ समय तो दो। ये पोता-पोती

सब देगी हमें, पर जरा हमारे घर में सेट तो हो जाए।

बब्लू: भैया के नीचे सेट तो हो गई, अब क्या पापाजी अपने नीचे भी सेट करने की बात कह रहे हैं क्या?

(वह मेरी कान में फ़ुसफ़ुसाया था और मैंने उसे झिडका - चुप कर, बेवकूफ़)

बब्ली: क्या खुसुर-पुसुर हो रहा है दोनों दोस्तों में?

बब्लू: तुझे क्यों बताएँ हम...? चुप-चप से खाना खा और फ़ूट ले।

इसके बाद सब साथ बैठ कर टीवी देखते हुए गप्प करने लगे और दीपू भैया अब सब को अपने यूरोप प्लान के बारे में सबको बता रहे थे, पर यह नहीं बताया कि उन्होने एक न्यूडिस्ट कैंप में भी बुकिंग करवाई है (यह मैं पहले से जानता था)। सब खूब चाव से सुन रहे थे। करीब दस बजे तक रसोई घर समेट कर बब्ली और तनु भी आ गई तो तनु की सास ही बोली कि जाओ अब सब सो जाओ। कल तुमलोग को निकलना भी है। वैसे भी उसके घर पर दस बजते-बजते सो जाने की परम्परा थी। उसके सास-ससुर अब अपने कमरे की तरफ़ बढ गए और तनु भी सीढी की तरफ़ चली गई और उसके पीछे-पीछे दीपू भैया। मैं भी सीढ़ी की तरफ़ बढा और तब मेरे कानों में आवाज आई।

बब्लू: बब्ली... पाँच मिनट में आ जाना मेरे रूम में ऊपर। भैया-भाभी का लाईव टेलीकास्ट देखने।

बब्ली: अरे कैसे... आज तो राज भैया भी यहीं तुम्हारे साथ ही सोएँगे न?

बब्लू: अरे उसकी फ़िक्र छोड... अपनी चिन्ता कर। उसको भी देखना है, वो सब जानता है। अगर तुझे भी देखना है तो आ जाना

कपडे बदल कर मेरे कमरे में।
 
बब्ली यह सुनकर अकचकाई... पर फ़िर मुस्कुराते हुए अपने कमरे की तरफ़ चली गई। मैं अब सीढी के अंत में था जब बब्लू तेजी से मेरे पास आया।

बब्लू: राज... बब्ली को न्योता दे दिया है, अब यह तेरे पर है कि तू उसको कितनी जल्दी चौड़ी करता है। अब इसके आगे मैं कुछ

ज्यादा मदद अभी तो नहीं ही करूँगा।

मैं: थैंक्यू दोस्त... इतना ही काफ़ी है। जरा तनु की चुदाई शुरु हो ले कि उसको गर्म करता हूँ।

मैं अब अपना जींस-शर्ट खोल कर एक गंजी और बरमूडा पहन लिया था, जबकि बब्लू जल्दी-जल्दी सबसे पहले बब्ली वले रूम के कैमरे को लौग-औफ़ करके क्लोज कर दिया जिससे गलती से भी बब्ली यह न जान पाए कि उसका अपना भाई उसकी भी विडियो देखता है। साला अब एक नंबर का हरामी बन गया था। तनु के कमरे से तीनों कैमरा चेक हो जाने के बाद उसने स्पीकर औन किया और जब तनु की आवाज कानों में आई तो मैं भी स्क्रीन की तरफ़ मुडा। इस तीन दिनों में दीपू ने एक ४०" का टीवी अपने कमरे में लगा लिया था और अब हम और बड़े स्क्रीन पर तनु के कमरे के सीन देख रहे थे।

तनु: वहाँ साड़ी भी ले कर चलना है क्या?

दीपू: रख लेना एक सुंदर सी दुल्हन टाईप, वहाँ न्युडिस्ट कैंप में अंतिम दिन फ़ैंसी ड्रेस पार्टी होती है और जो जीता उसका सब पैसा

वापस कर दिया जाता है। तुम वहा भारतीय दुल्हन बन जाना, तुम्हारे लिए सबसे आसान होगा।

तनु: ठीक है फ़िर।

दीपू: जींस-टौप टाईप दो जोड़ी रख लोगी तो काम चल जाएगा। सात दिन में तीन दिन चार रात तो न्यूड ही रहना है वहाँ। बाकी

वहाँ कपडे गंदे भी ज्यादा थोडे न होंगे।

तनु: जींस नहीं है ना....।

दीपू: अरे तो लेगिंग्स रख लो ना दो। जींस से कम ही जगह लेगा बैग में ये लेगिंग्स। दिल्ली में एक बढिया स्पोर्ट्स शू खरीद लेना।

यहाँ तो सब दुल्हन टाईप सैंडल ले कर आ गयी हो। अब चलो आओ, आज का दवा खाओ पहले फ़िर सो जाना।

तनु आलमारी से अपना नाईट ड्रेस निकाल रही थी तभी बब्ली कमरे में आई.... उसने एक नाईटी पहना हुआ था तब। हम दोनों दोस्त को ऐसे तनु के कमरे की गतिविधि देख कर वो थोडा हिचकी भीतर आते समय। मैं उसे देख कर मुस्कुराया और बब्लू ने बिस्तर पर साईड में घिसकते हुए बब्ली के लिए जगह बनाया, फ़िर हाथ से पास आकर बैठने का इशारा किया। जब उसने देखा कि मैं आराम से बैठ कर अपनी बहन के कमरे की सब चीज देख रहा हूँ तो वो भी हमारे साथ बगल में बैठ कर टीवी पर नजर गडा ली। तनु को देर करते देख दीपू भैया फ़िर बोले।

दीपू: अरे आओ ना भी... ये ड्रेस-फ़्रेस का चक्कर छोडो। ये सब तो वैसे भी एक-सवा घन्टा देह पर रहने वाला नहीं है। चलो जल्दी

से अपना दवा खाओ और मुझे अपना वाला खाने दो अब, चलो इधर आओ जल्दी से।

यह कह कर दीपू भैया अपना कपडा अपने बदन से उतारने लगे। पहले टीशर्ट खोला और एक तरफ़ ऊछाल दिया। उनका चौडा सपाट सीना अब साफ़ दिख रहा था। फ़िर अपना जींस उतारने लगे तो मैंने एक नजर बब्ली को देखा। उसकी नजर सामने स्क्रीन पर लगी हुई थी और वो भैया को नंगे होते देखने में मशगुल थी।

दीपू: चलो आओ अब यार, यह कपडा तो अब निकालो, बीवी हो मेरी।

तनु अब हँसते हुए आई और फ़िर घुटनों पर बैठ कर दीपू भैया के अंडर्वीयर को नीचे ससार कर उनके खड़े लन्ड को अपने हाथों से सहलाने के बाद अपने मुँह में ले कर चुसने लगी। मैं देख रहा था कि तनु हर बीतते दिन के साथ ज्यादा बेहतर होती जा रही थी सेक्स के मामले में। बब्लू और बब्ली की नजरें भी तनु को इस तरह से दीपू भैया के लन्ड को चूसते देखने में लगी हुई थी और कोई कुछ बोल नहीं रहा था। दीपू भैया अब तनु के बदन से उसकी साडी खींचने लगे थे और उसने भी पेट के पास अपने हाथ ले कर साडी के वो भाग जो भीतर दबा रहता है निकल दिया था और लगातार लंड को चूसे जा रही थी। बीच-बीच में अपने जीभ से पूरा चाट भी लेती थी। दीपू भैया ने झुक कर अब उसके ब्लाऊज के हुक खोलने शुरु कर दिये थे। जल्द ही वो ब्लाऊज भी हटा दी और फ़िर खुद ही खडी हो कर अपना पेटीकोट खोल दी। दीपू भैया अपना फ़नफ़नाया हुआ लंड ले कर सामने खडे हो कर सब देख रहे थे, और हम तीनों उस दोनों देख रहे थे। मेरी बहन अब सिर्फ़ एक गुलाबी ब्रा-पैन्टी में मुस्कुराते हुए दीपू भैया को देख रही थी। तभी दीपू भैया ने उसको अपनी गोदी में उठा लिया और फ़िर बिस्तर पर पटक दिया।

बब्लू: यार... अपना भाई ऐसा रोमैंटिक कब से हो गया?

मैं: सब मेरी बहन का कमाल है। (बब्ली चुपचाप सब देख रही थी, मेरी बात पर उसने पहली बार नजर घुमाई)

बब्ली: राज भैया, आप कैसे यह सब देख रहे हैं आराम से?

मैं: जैसे तुम देख रही हो अपने दीपू भैया को आराम से? ( मैंने उसकी टोन मिलाते हुए जवाब दिया)

बब्ली: फ़िर भी.... भाभी आपकी बहन है, और अपने ससुराल में है।

मैं: हाँ तो मैं भी अपने दोस्त के साथ हूँ और उसकी भाभी की नाईट-लाईफ़ देख रहा हूँ।

बब्लू: साले...नाईट-लाईफ़ देख रहा है? साफ़ कह न कि अपनी बहन की चुदाई देखने बैठा हुआ हूँ। ये बब्ली लडकी होकर जरा भी

ना शर्माई जब मैंने उसको न्योता दिया और तुम हो कि साले सच बोलने में हिचक रहे हो।

मैं: हाँ दोस्त... आजकल का जमाना ही उल्टा हो गया है। बहन सब ही भाई से आगे हो गयी है। यहाँ बब्ली को देख ही रहा हूँ और

सामने तनु को देख लो, कैसे न्योता दे रही है।

बब्ली: हा हा हा... गर्ल-पावर.... जिन्दाबाद।

अब तनु के पैन्टी उतर गयी थी और वो अपने टाँग खोल कर दीपू भैया से अपना बूर चटवा रही थी। बब्लू ने अब बिस्तर के ऊपर वाला कैमरा का सीन बडा कर दिया था और तनु अपने हाथ बाहर की तरफ़ खोल कर बिस्तर पर पसरी हुई थी। चुचियों पर अब भी उसके ब्रा था पर कमर से नीचे वो पूरी नंगी थी। दीपू उसकी बूर चाट रहा था और बीच-बीच में हमें उसके बूर के ऊपर बने दिल की झलक मिल रही थी।

तनु: जरा ब्रा खोल दीजिए न, कम-से-कम अपने हाथ से तो मसलूँ।

दीपू: खोलता हूँ रानी, जरा दो मिनट यह जीवन-टौनिक तो पीने दो न प्लीज, इसके बाद दूध ही पीना है।

और दीपू भैया अब उठे फ़िर उसका ब्रा खोल कर उसकी चुचियों को मसलने लगे। एक को हाथ से मसलते तो दूसरी को चूसते। जब वो उसकी निप्पल को मुँह में ले कर चुभला रहे थे तब तनु बोली।

तनु: अल्ले मेला बाबू.... दुद्धू पी लहा है। मीत्था-मीत्था है मम्मी का दूद्धू... मेला लाजा, मेला छोना।

बब्ली: माय गौड... ये क्या बोल रही है?

बब्लू: सब लडकी में एक माँ होती है, तो उसकी माँ जाग गयी हो और अपने बेटे को दूध पीला रही है। तुम भी जब समय आएगा

पीला लेना अपने बाबू को अपना दूध... बेवकूफ़ लडकी।

मैं: यार अब मन बेकाबू हो रहा है...।

बब्लू: निकाल कर हिला फ़िर... और क्या उपाय है?

मैं: हाँ यार... पर बब्ली??? (बब्ली मुझे एक बार घूरी फ़िर टीवी पर नजर टिका दी, तो मैं बब्ली से बोला) बब्ली, तुम बुरा तो नहीं

मानोगी?

बब्ली: किस बात का?

मैं: अगर मैं अपना औजार बाहर निकल कर थोडा हिलाऊँ तो?

बब्लू: अबे कोई संकोच नहीं। बब्ली ऐसी लडकी नहीं है यार (फ़िर उसने बब्ली से बोला) क्यों बब्ली, अगर तुम्हारा भी मन हो रहा

हो तो खेल सकती हो अपनी ऊँगली से (वो हम दोनों को उकसा रहा था)

बब्ली: जी भैया...
 
वो अपना घुटना मोड़ कर दीवार से पीठ टिका कर बैठ गयी और अपना एक हाथ अपने नाईटी के भीतर कर लिया। उसकी साँस वैसे भी तेज होने लग गयी थी। बब्लू भी उठा और चट से नंगा हो गया। मैंने यही समय सही जाना और फ़िर अपना बरमूडा खोल कर बब्ली के बगल में आकर बैठ गया। मेरा लंड फ़नफ़नाया हुआ था। मेरा ७.५ इंच का मोटा काला भुजंग सलामी ठोक रहा था। सामने की टीवी कर मेरी बहन की चुदाई शुरु हो गयी थी और बब्ली कभी तनु की चुदाई देख रही थी, कभी मेरे काले नाग को। बब्लू यह सब देख कर मुस्कुरा रहा था। मैंने मौका ताड़ कर कहा।

मैं: बब्ली, तुमको मेरा औजार कैसा लगा? (उसकी भरपूर नजर अब मेरे से मिली फ़िर नीचे झुकी मेरे लंड की तरफ़)

बब्ली: जबर्दस्त है

मैं: खेलोगी?

बब्ली: मेरे कमरे में चलिएगा तब। यहाँ नहीं, यहाँ भैया हैं। (वो मेरे कान में फ़ुस्फ़ुसाई थी)

मैं: अब इतना भी मत शर्माओ बब्ली। जब तुम तनु की चुदाई हमारे साथ देख सकती हो तो मेरे लंड से भी खेल सकती हो।

बब्ली: हाँ, पर यहाँ भैया भी है न, सो अजीब लग रहा है। टीवी पर देखना अलग बात है पर ऐसे उसके सामने...?

मैं: मुझे तो कोई फ़र्क नहीं पड रहा। आराम से अपनी बहन की चुदाई देख ही रहा हूँ और मजे भी ले रहा हूँ। खैर जैसी तुम्हारी

मर्जी। वैसे कहोगी तो मैं तुम्हारा सहला दूँगा। जब मर्दाना हाथ वहाँ सटेगा ना तुम्हरी बूर तो तब तुम्हारे अपने हाथ से सौ गुना

ज्यादा मजा मिलेगा।

बब्ली की चूत अभी तक दिखी नहीं थी। वो अपना नाईटी घुटने के करीब तक रखे हुए थी और अपना हाथ भीतर डाल कर अपने चूत से खेल रही थी। बब्लू अब अपना थुक अपने खडे लन्ड पर लगा कर हौले-हौले सहला रहा था और मेरी बहन तनु की चुदाई देख रहा था। वो बिस्तर पर आगे की तरफ़ पैर नीचे लटका कर बैठा था जबकि मैं और बब्ली दीवार से पीठ टिकाए उसके पीछे बैठे थे। मैंने तनु के हाथ को पकड कर उसके नाईटी से बाहर निकाल दिया और फ़िर अपना लन्ड उसको पकड़ा दिया। उसकी ऊँगलियाँ उसके ही चूत से रस से गीली हुई थी और वही गीली ऊँगलियाँ अब मेरे लन्ड को सहला रही थी। मैंने अपना एक हाथ अब उसकी नाईटी के भीतर घुसा दिया और चट से उसकी चिकनी चूत पर पहुँचा दिया। जब मेरी मोटी ऊँगली उसके चूत के भीतर घुसी तो उसके मुँह से सिसकी निकल गयी। उसकी आँखें चुदास से बन्द हो गयी। मैंने अब उसकी नाईटी को ऊपर कर दिया और उसकी चिकनी चूत का दीदार करने लगा। मेरी दाहिने हाथ की बीच वाली ऊँगली अब उसको चोदने लगी थी और वो अब आँख बन्द करके मस्त हो कर कराह रही थी। बब्लू पीछे मुडा और हमें आपसे में लगा हुआ देख कर अपने अंगुठे और तर्जनी ऊँगली को आपसे में सटा कर इशारे से जता दिया कि वो भी अब सहमती दे रहा है। मैंने अब बब्ली के सर को पीछे से पकड कर चुमने लगा और भी मेरे चुम्बन का जवाब देने लगी। मैं अब उसकी कान में फ़ुसफ़ुसा कर कहा, "मेरा लन्ड चूसोगी बब्ली?" वो बिना कोई जवाब दिये एक बार मेरी आँखों में देखा फ़िर अपने भाई की तरफ़ देखा कि वो मेरी बहन की चुदाई देखने में मशगुल है तो झुकी और मेरा खड़ा लन्ड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। उसने अपनी आँखें बन्द कर रखी थी और मैं अब इशारे से बोला कि मैं उसको नंगा करना चाहता हूँ। बब्ली पर अब चुदास पूरी तरह से हावी था, वो खुद सीधा बैठ कर अपना नाईटी अपने बदन से अलग कर दी और पूरी नंगी हो कर मेरे लंद को फ़िर मुँह में लेकर चूसने लगी। मेरा दो मिनट की चुसाई में ही हाल विस्फ़ोटक हो गया। मैंने उसको रोका और फ़िर उसको पलट दिया और वो मेरा इशारा समझ कर सीधा बिस्तर पर लेट गयी और उसके पैर फ़ैलाने से उसके भाई की पीठ से उसका पैर लग गया। बब्लू अब पीछे मुडा और इस तरह से अपनी बहन को नंगी बिस्तर पर पसरे देख कर एक हल्की सी सीटी बजाई और बब्ली शर्म से अपने चेहरे को अपने हाथों से ढक लिया और बोली।

बब्ली: भैया, प्लीज तुम मत देखो... आज प्लीज। अब रोक नहीं सकती अपने को... छीः मुँह घुमाओ।

बब्लू: अरे बहन, जब मैंने हुमच-हुमच कर तुम्हें चोद ही लिया है तो मुझसे अब कैसी शर्म।

उसने अपने हाथों से उसके चेहरे पर से उसकी हथेलियों को हटा दिया और फ़िर उसके सीने पर बैठ कर अपना खड़ा लन्ड अपनी बहन के मुँह में घुसेड़ दिया। बब्ली की आँख बन्द ही पर वो समझ गयी और उसने में अपने अपने भाई का लन्ड को लौलिपौप बना लिया। उसकी बूर खुब पानी निकाल रही थी और मैंने उसी पानी को अपने लन्ड पर लगा लिया और फ़िर उसके मुड़े हुए घुटनों कओ अपने हाथों से पकड कर और खोला। अपना लन्ड उसकी बूर की मुहाने से लगाने के बाद पेलना शुरु किया। वो लन्ड चुसना भूल गयी और कराह उठी, सेक्सी आवाज में ... आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.... और मेरा लन्ड धीरे-धीरे उसकी गुफ़ा में गायब हो गया।

मैं: बब्ली.... आँख खोलो ना प्लीज। देखो तो तुम्हारे दो छेद.... बूर और मुँह दोनों को हम दोनों दोस्त एक साथ चोद रहे हैं।

बब्ली: आह्ह्ह्ह्ह्ह सिर्फ़ चोदते रहो अभी....कोई बात नहीं

मैं: वाह मेरी छमिया... ले चुद।

इसके बाद तो दे घपाघप उसकी चुदाई शुरु हो गयी। बब्लू अब उसके ऊपर से उठ गया और फ़िर बब्ली के सर की तरफ़ जाकर बैठ, उसके सर को अपने गोदी में सर लिया। वो बब्ली के सर को प्यार से सहला रहा था और बोला।

बब्लू: अपने भैया के गोदी में सर रख कर चुदाओ मेरी बाबू। मेरा दोस्त अच्छे से चोद रहा है ना मेरी गुड़िया को?

बब्ली: हाँ भैया.... ईईईस्स्स्स्स्स्स्स, भैया मेरी चूचियों को दबाओ ना प्लीज.. आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

 
बब्लू ने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चुचियों को पकड़ कर उसका चूची-मर्दन शुरु कर दिया। वो मस्ती से कराह रही थी और मैं आराम से चोद रहा था। बब्लू अब झुका और बब्ली को चूम लिया। फ़िर हल्के से उसके निप्पल को चुटकी में पकड़ कर हल्के-हल्के रगड़ने लगा। वो मस्त हो करे पहली बार चीखी। अगर बगल के कमरे में तनु और दीपू भैया चुदाई का खेल नहीं खेल रहे होते तो पक्का वो समझ जाते की बबली बगल के कमरे में चुद रही है। पर वो दोनों तो अपने में मस्त थे। बब्लू भी अब ऐसे चीख के बाद खतरा समझ कर हल्के से सहलाने लगा। मैं अब छूटने की हद तक आ गया था। मैंने बब्लू को इशारे से यह बताया तो उसने सर हिला कर मुझे उसके भीतर ही छूतने के लिए बोल दिया। मैं अब मस्त हो कर बब्ली की पतली नाजुक कमर को अपने मजबूत हथेलियों की जकड़ में लेकर तेज धक्के लगाने लगा। बब्ली अब दूसरी बार झड रही थी, जब मैं अपना पानी भी उसकी बूर में निकलना शुरु कर दिया। वो मेरे लन्ड के झतके अपनी बूर के भीतर महसूस करके घबडाते हुए उठना चाही। पर मैंने और उसके भाई बब्लऊ ने उसको दबोच कर बिस्तर पर स्थिर कर दिया और मैंने अपना पूरा पानी पाँच छोटे-बड़े झटके के साथ पूरा उसकी बूर के भीतर जड में छोड़ दिया, फ़िर उसके ऊपर औंधे मुँह पसर गया। हमारी नजरें अब फ़िर से टीवी पर गई, जहाँ मेरी बहन तनु की गाँड पर थुक लगाया जा रहा था दीपू भैया द्वारा। मतलब, आज फ़िर से वो अपना गाँड़ मरवाने वाली थी। मैं यह देख कर चट से बब्ली के ऊपर से हटा और बोला।

मैं: वाओ.... मतलब आज फ़िर से तनु गाँड मरवाने के लिए राजी हो गई।

मेरी बात सुनकर बब्ली को भी होश आया और वो भी उठ कर बैठते हुए बोली।

बब्ली: राज भैया... आप मेरे भीतर क्यों यह निकाल दिए? कुछ ऊँच-नीचो गया तब क्या होगा?

बब्लू: यह नया टाईप का अनुभव मिला ना तुम्हें। कुछ नहीं होगा, बेफ़िक्र रहो। मेरे पास है दो टैब्लेट अनवान्टेड-७२, एक तुम अभी

खा लेना सोने से पहले। अगर इसके बाद भी कुछ हो गया तो राज से तुम्हारी शादी करवा दूँगा।

यह सुनकर वो आश्वस्त हो गई और फ़िर झुक कर अपने बूर से बाहर बह रहे मेरे वीर्य को देखते हुए बोली।

बब्ली: कितना गन्दा लग रहा है इस तरह से जब मेरे भीतर से बह रहा है... छीः

मैं: मुझे तो बहुत मजा आया। पहली बार किसी लड़की की बूर के भीतर अपने लन्ड को झटका खिलाया है। थैंक्यू बब्ली।

बब्ली मेरी तरफ़ प्यार देखते हुए मेरे से चिपकी और फ़िर मुझे चूम ली, मुझे भी जवाब में उसको चूमना ही था। हम तीनों की नजर अब टीवी पर टिक गयी थी जहाँ तनु अब चौपाया बन कर झुकी हुई थी, और दीपू भैया पीछे खड़े होकर अपने लन्ड पर वह जेली लगा रहे थे। तनु अपनी दो ऊँगलियों को अपने गाँड में घुसा कर आराम से तैयार थी। मैंने बब्ली के बाँहों को सहलाते हुए पूछा।

मैं: तनु कभी अपना गाँड मरवाई हो?

बब्ली: ना.... अभी दो दिन पहले तो भैया के साथ पहली बार किया था, रात मे दो बार और सुबह एक बार। इसके बाद आज ही

आपके साथ सेक्स की हूँ।

मैं: ये साला बब्लू है ही ऐसा...। मुझे बोला कि वो तुम्हारी सील मेरे से खुलवाएगा और फ़िर खुद पेल दिया तुमको मेरे से पहले।

बब्लू: अरे तो बब्ली को गाँड़ है ना अभी कोरी। तू ही मार लेना इसकी गाँड पहली बार।

बब्ली: ना ना..... मैं गाँड नहीं मराऊँगी। यह बूर तो चुदाने के लिए बना हुआ है, तब तो इतना दर्द हुआ था जब पहली बार घुसवाई

थी भैया से। गाँड तो इस काम के लिए बनी भी नहीं है और कित्ती छोटी से छेद है... मैं तो मर ही जाऊँगी।

मैं: अरे तो देखो ना, तनु भी तो तुम्हारी तरह ही घरेलू लडकी थी शादी से पहले तक और शादी होते हीं कैसी रंडी टाईप बन गयी

है। देख लो, कैसे गाँड मरवाने के लिए बेचैन हो कर इंतजार कर रही है। पहली बार वो मेरे घर पर ही अपना गाँड मरवाई थी।

बब्ली: आपको कैसे पता कि वो पहली बार कब अपना गाँड़ मराई?

बब्लू: अरे ये मादरचोद खुद देखा था तनु की पहली गाँड़ मराई। इसने उसकी गाँड के घाव ठीक करने के लिए बोरोलिन भी दिया था

बब्ली: ओह... मतलब आप अपने घर पर भी कैमरा लगाए हुए हैं।

मैं: नहीं, कैमरा तो तुम्हारे घर में ही है। असल में ये दोनों मेरे कमरे में थे और मैं बगल के कमरे में। बीच में प्लाईवुड का

पार्टीशन था जिसमें जोड के पास हल्का सा दरार था तो सब दिख जाता था और पतले प्लाईवुड के पार बात भी साफ़ सुनाई

पड़ता रहता था। उस बार भी आराम से मरवा ली थी, आज तो और बेहतर मरवाएगी।

मेरा लन्ड दो बार झडने के बाद अब थोड़ा ढ़ीला हो गया था, जबकि बब्लू का अभी खडा था। वो अब बब्ली को बोला।
 
Back
Top