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कमांड1 ने फोन उठाया.
काम्प्यूटर का काम जारी रखते हूए वह फोनपर बोला,
" हॅलो"
उधरसे कुछभी जबाब नही आया.
" हॅलो ... कौन बात कर रहा है ?"
कमांड1ने फोनके डिस्प्लेपर उधरके फोनका नंबर देखा. डिस्प्लेपर कोई नंबर नही था. कोई नंबर नही देखकर कमांड1 सोच मे पड गया.
उसने अपना काम्प्यूटरका काम छोडकर फिरसे फोनमें कहा-
" हॅलो..."
" मै बॉस बोल रहा हूं " कमांड1को बिचमेंही काटते हूए उधर से आवाज आया.
"ब.. ब... बबॉस ? ... यस बॉस " कमांड1के मुंह से मुश्कीलसे निकल गया.
कमांड1 झटसे कुर्सीसे उठकर खडा हूवा था. उसके हाथ कांपने लगे थे. उसके पुरे चेहरेपर पसीनेकी बुंदे झलक रही थी. एक छोटी पसीनेकी लकीर कानके पिछेसे बहते हूए निचे आ गई.
कमांड2 को आश्चर्य होने लगा था.
कमांड2ने कमांड1को इतना घबराये हूए पहले कभी नही देखा था.
कमांड1की यह स्थिती देखकर कमांड2नेभी अपना व्हिस्कीका ग्लास बाजूमें रख दिया और वह भी कुर्सीसे उठ खडा हूवा.
बॉसने इसके पहले कभीभी फोन लगाया ऐसा उसने कभी सुना नही था.
बॉस उसके सब आदेश इंटरनेटके द्वाराही देता था.
फिर अचानक फोन करनेकी ऐसी कौनसी जरुरत आन पडी?
" तुम्हे जॉनको धडकानेकी बद्तमीजी करनेको किसने कहा था ?" उधरसे कडा और गंभीर आवाज आया.
आवाज किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणसे आये जैसा लग रहा था.
"बबबॉस ... हमने उसे जानसे मारने के उद्देशसे धडकाया नही था. '" कमांड1 अपनी सफाई देनेकी कोशीश कर रहा था.
" चूप. मूरख .... तुम्हे पता है ... खुदकी मनमानी करनेवालोंको इस संस्था कोई स्थान नही " उधरसे बॉसका झल्लाया हूवा स्वर आया.
" स सॉरी बॉस... गलती हूई .... फिरसे नही होगी ऐसी गलती... " कमांड1 फिरसे क्षमायाचना करने लगा.
" तुम्हे पता है?... तुम्हारी तकदीर अच्छी थी की वह क्षण तुम्हारे लिए अच्छा था ...इसलिए तुम लोग बच गए... तुम लोग अगर 45 मिनट इधर या 45 मिनट उधर होते तो तुम्हे उस वक्त कोईभी बचा नही सकता था. '" बॉसका कडा स्वर कमांड1के कानमें घुमा.
अब कमांड2 कमाड1के पास जाकर फोनके स्पीकरके पास अपना सर घुसाकर बॉस क्या बोल रहा है यह सुननेका प्रयास करने लगा था. .
" आय अॅम रिअली सॉरी बॉस " कमांड1 फिरसे माफी मांगने लगा.
" यह तुम्हारी पहली गलती... और यह गलती तुम्हारी आखरी गलती रहनी चाहिए ... समझे? '" उधरसे बॉसने ताकीद दी.
"हां सर; यस...."
कमांड1 अपना बोलना खतम करनेके पहलेही उधरसे बॉसने धडामसे फोन रख दिया.
कमांड1ने अपने चेहरेका पसीना पोछते हूए फोन क्रेडलपर रख दिया. वह अपने चेहरेके डर के भाव छिपानेकी कोशीश करने लगा.
" बॉसको अच्छा नही लगा ऐसा लग रहा है...'" कमांड2ने कहा.
" हमने अपनी मनमानी नही करनी चाहिए थी " कमांड1ने कहा.
" जो हूवा सो हूवा ... फिरसे ध्यान रखेंगे..." कमांड2ने उसे दिलासा देने की कोशीश करते हूए कहा.
" यह बॉसका पहली बार फोन आया... उसका फोन आया तभी मुझे संदेह हूवा था की कुछ सिरीयस हूवा है... " कमांड1 ने अपना व्हिस्कीका ग्लास भरते हूए कहा.
कमांड2नेभी अपने बगलमें रखा व्हिस्कीका ग्लास उठाया और वह कमांड1के सामने बैठ गया. कमांड1ने गटागट व्हिस्कीके घुंटके साथ अपना अपमान पिनेकी कोशीश की.
...
कमांड2ने जाना की यही सही वक्त है...
... की कमांड1से बहुत सारे राज पता किये जा सकते है...
वह एक एक घुटसे उसे साथ देता हूवा उसको नशा चढने का इंतजार करने लगा. थोडीही देरमें कमांड1 टून्न हो गया. यही मौका देखकर कमांड2ने अपने सवालोंका तांता लगा दिया...
"कमांड1, मुझे एक बता ..."
कमांड2ने पुछनेसे पहले जानबुझकर रुककर कमांड1के चढे हूए नशेका अंदाजा लिया.
कमांड2को रुका हूवा देखकर कमांड1 नशेमें बोला, " बोल क्या बतानेका है .... एक क्यू... दो पुछ... तिन पुछ... तुझे जितना चाहिए उतना पुछ... '"
उसका यह नशेमे धुत हूवा हाल देखकर कमांड2को हंसी आ रही थी लेकिन उसने बडे प्रयासके साथ अपनी हंसी दबाई.
"' नही मतलब... वह वक्त तुम्हारे तकदीरसे अच्छा था और अगर तुम 45 मिनट इधर या 45 मिनट उधर होते तो तुम्हे कोईभी बचा नही सकता था ' - ऐसा बॉसने क्यों कहा? मुझे तो कुछभी समझमें नही आ रहा है.." कमांड2ने कमांड1 को पुछा.
कमांड1को अब अच्छी खासी चढ गई थी. .
" वह तुम्हे नही समझेगा ... वह एक लंबी स्टोरी है " कमांड1ने कहा.
कमांड2 सोचने लगा.
अब इससे कैसे उगलवाया जाए...
उसने काम्प्यूटरपर बैठकर बॉसने पहले एक बार भेजा हूवा मेसेज खोला.
" और यह देख पहले एक बार बॉसने भेजे मेसेजमेंभी 11 तारख के रातको 3 से 4 का वक्त तुम्हारे लिए अच्छा है और 4 से 7 का वक्त बहुत ही खतरनाक है ऐसा लिखा था. उसका जोतिष्यपर जरा जादाही विश्वास दिखता है. " कमांड2 कमांड1को और उकसाने का प्रयत्न करने लगा.
" जोतिष्यपर विश्वास नही ... पूरी निष्ठा है. अबतक उसने कहे समयमें कभीभी दगा नही हूवा है " कमांड1ने कहा.
" वह केवल एक इत्तिफाक हो सकता है..." कमांड2 उसे और छेडनेके उद्देशसे बोला.
" इत्तिफाक नही. बॉसके पास ऐसी एक चिज है की जिसकी मदतसे वह कौनसी बात किस वक्त लाभदायक हो सकती है यह पहलेसे जान सकता है. "
कमांड1के मुंहसे अब बहुत सारी अंदर की बाते बाहर आनेको जैसे बेकरार थी.
" मुझे नही विश्वास होता' कमांड2 ने असहमती दर्शाकर अपना आखरी हथीयार इस्तेमाल किया.
" तुम्हाराही क्या किसीकाभी विश्वास नही होगा ''
" इसी एक बातसे तुम कह रहे हो की औरभी कुछ प्रमाण है?" कमांड2ने बिचमें टोककर पुछा.
" यह एकही बात नही ..... औरभी बहुत सारी बाते है... बॉसके पासका पैसा देखो ... बॉसके पास इतना पैसा कहांसे आगया? यह पुरी संस्था चलाना कोई मजाक नही... और यह सब वह अपने अकेले के बलबुतेपर चलाता है " कमांड2ने कहा.
" कैसे क्या?"
" उसके पासके तंत्रके सहाय्यता से कौनसे वक्त कौनसा शेअर फायदेमे रहेगा यह उसे पहलेसेही पता रहता है... और ऐसा कहते है की अबतक वह कभीभी नुकसानमें नही रहा " कमांड1 अब अच्छा खासा खुलकर बोल रहा था.
" तंत्र? ऐसा कौनसा तंत्र है उसके पास?" कमांड2ने उत्सुकतावश पुछा.
" बताता हूं" कमांड1 अपना व्हिस्कीका ग्लास फिरसे भरते हूए बोला.
" और बॉसने यह तंत्र कहासे हासिल किया ?" कमांड2 बेसब्रीसे सवालपर सवाल पुछे जा रहा था.
कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुनने के लिए बेताब हो गया था.
" बोलता हूं बाबा , सब बताता हूं " बोलते हूए कमांड1 खडा हो गया.
अपने दाएं हाथकी छोटी उंगली बताते हूए कमांड1ने कहा,
" एक मिनट रुको मै जरा इधरसे आता हूं''
कमांड1 झमता हूवा बेडरूमकी तरफ जाने लगा.
... कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुननेके लिए बेताब हो गया था. वह उसकी राह देखते हूए कॉम्पूटरके पास बेसब्रीसे चहलकदमी करने लगा.
कितनी देर हूई कमांड1 बेडरूमकी तरफ गया ... अभीतक बाहर कैसे नही आया... इतना टाईम?...
वह उधर के उधरही तो नही कही बाहर चला गया ?...
कमांड2को अब चिंता होने लगी थी. कमांड2 उसे देखनेके लिए उठ गया और कमांड1 जिधर गया था उधर जाने लगा. बेडरूमके सामने आकर देखा तो बेडरुमका दरवाजा अंदर की ऒर खिंचा हूवा था. उसने धीरेसे दरवाजा धकेलकर देखा तो सामने बेडपर कमांड1 घोडे बेचकर सो रहा था. कमांड2को अपने मुंह तक आया निवाला छिन लिया गया हो ऐसा लगा. बडी मुश्कीलसे वह सब बकनेके लिए तैयार हूवा था. होशमें आनेपर वह कुछभी बताने वाला नही था. वह उसके पास गया और उसे हिलाकर उठानेकी कोशीश करने लगा. उसने उसे जोर जोरसे हिलाकर देखा. लेकिन वह निंदमेंही नही तो नशेमे चूर हो गया था. कमांड2ने थोडी देर प्रयास कर फिर उसे जगानेका विचार छोड दिया. फिर उसने सोचा की...
यह तो सो गया ... मुझे दूसरा कुछ किया जा सकता है क्या यह देखना चाहिए...
कमांड1 जो जानकारी देनेवाला था जरुर वह उसने कहीतो छिपाकर रखी होगी...
वह अगर मैने ढूंढनेका प्रयास किया तो?...
काम्प्यूटर का काम जारी रखते हूए वह फोनपर बोला,
" हॅलो"
उधरसे कुछभी जबाब नही आया.
" हॅलो ... कौन बात कर रहा है ?"
कमांड1ने फोनके डिस्प्लेपर उधरके फोनका नंबर देखा. डिस्प्लेपर कोई नंबर नही था. कोई नंबर नही देखकर कमांड1 सोच मे पड गया.
उसने अपना काम्प्यूटरका काम छोडकर फिरसे फोनमें कहा-
" हॅलो..."
" मै बॉस बोल रहा हूं " कमांड1को बिचमेंही काटते हूए उधर से आवाज आया.
"ब.. ब... बबॉस ? ... यस बॉस " कमांड1के मुंह से मुश्कीलसे निकल गया.
कमांड1 झटसे कुर्सीसे उठकर खडा हूवा था. उसके हाथ कांपने लगे थे. उसके पुरे चेहरेपर पसीनेकी बुंदे झलक रही थी. एक छोटी पसीनेकी लकीर कानके पिछेसे बहते हूए निचे आ गई.
कमांड2 को आश्चर्य होने लगा था.
कमांड2ने कमांड1को इतना घबराये हूए पहले कभी नही देखा था.
कमांड1की यह स्थिती देखकर कमांड2नेभी अपना व्हिस्कीका ग्लास बाजूमें रख दिया और वह भी कुर्सीसे उठ खडा हूवा.
बॉसने इसके पहले कभीभी फोन लगाया ऐसा उसने कभी सुना नही था.
बॉस उसके सब आदेश इंटरनेटके द्वाराही देता था.
फिर अचानक फोन करनेकी ऐसी कौनसी जरुरत आन पडी?
" तुम्हे जॉनको धडकानेकी बद्तमीजी करनेको किसने कहा था ?" उधरसे कडा और गंभीर आवाज आया.
आवाज किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणसे आये जैसा लग रहा था.
"बबबॉस ... हमने उसे जानसे मारने के उद्देशसे धडकाया नही था. '" कमांड1 अपनी सफाई देनेकी कोशीश कर रहा था.
" चूप. मूरख .... तुम्हे पता है ... खुदकी मनमानी करनेवालोंको इस संस्था कोई स्थान नही " उधरसे बॉसका झल्लाया हूवा स्वर आया.
" स सॉरी बॉस... गलती हूई .... फिरसे नही होगी ऐसी गलती... " कमांड1 फिरसे क्षमायाचना करने लगा.
" तुम्हे पता है?... तुम्हारी तकदीर अच्छी थी की वह क्षण तुम्हारे लिए अच्छा था ...इसलिए तुम लोग बच गए... तुम लोग अगर 45 मिनट इधर या 45 मिनट उधर होते तो तुम्हे उस वक्त कोईभी बचा नही सकता था. '" बॉसका कडा स्वर कमांड1के कानमें घुमा.
अब कमांड2 कमाड1के पास जाकर फोनके स्पीकरके पास अपना सर घुसाकर बॉस क्या बोल रहा है यह सुननेका प्रयास करने लगा था. .
" आय अॅम रिअली सॉरी बॉस " कमांड1 फिरसे माफी मांगने लगा.
" यह तुम्हारी पहली गलती... और यह गलती तुम्हारी आखरी गलती रहनी चाहिए ... समझे? '" उधरसे बॉसने ताकीद दी.
"हां सर; यस...."
कमांड1 अपना बोलना खतम करनेके पहलेही उधरसे बॉसने धडामसे फोन रख दिया.
कमांड1ने अपने चेहरेका पसीना पोछते हूए फोन क्रेडलपर रख दिया. वह अपने चेहरेके डर के भाव छिपानेकी कोशीश करने लगा.
" बॉसको अच्छा नही लगा ऐसा लग रहा है...'" कमांड2ने कहा.
" हमने अपनी मनमानी नही करनी चाहिए थी " कमांड1ने कहा.
" जो हूवा सो हूवा ... फिरसे ध्यान रखेंगे..." कमांड2ने उसे दिलासा देने की कोशीश करते हूए कहा.
" यह बॉसका पहली बार फोन आया... उसका फोन आया तभी मुझे संदेह हूवा था की कुछ सिरीयस हूवा है... " कमांड1 ने अपना व्हिस्कीका ग्लास भरते हूए कहा.
कमांड2नेभी अपने बगलमें रखा व्हिस्कीका ग्लास उठाया और वह कमांड1के सामने बैठ गया. कमांड1ने गटागट व्हिस्कीके घुंटके साथ अपना अपमान पिनेकी कोशीश की.
...
कमांड2ने जाना की यही सही वक्त है...
... की कमांड1से बहुत सारे राज पता किये जा सकते है...
वह एक एक घुटसे उसे साथ देता हूवा उसको नशा चढने का इंतजार करने लगा. थोडीही देरमें कमांड1 टून्न हो गया. यही मौका देखकर कमांड2ने अपने सवालोंका तांता लगा दिया...
"कमांड1, मुझे एक बता ..."
कमांड2ने पुछनेसे पहले जानबुझकर रुककर कमांड1के चढे हूए नशेका अंदाजा लिया.
कमांड2को रुका हूवा देखकर कमांड1 नशेमें बोला, " बोल क्या बतानेका है .... एक क्यू... दो पुछ... तिन पुछ... तुझे जितना चाहिए उतना पुछ... '"
उसका यह नशेमे धुत हूवा हाल देखकर कमांड2को हंसी आ रही थी लेकिन उसने बडे प्रयासके साथ अपनी हंसी दबाई.
"' नही मतलब... वह वक्त तुम्हारे तकदीरसे अच्छा था और अगर तुम 45 मिनट इधर या 45 मिनट उधर होते तो तुम्हे कोईभी बचा नही सकता था ' - ऐसा बॉसने क्यों कहा? मुझे तो कुछभी समझमें नही आ रहा है.." कमांड2ने कमांड1 को पुछा.
कमांड1को अब अच्छी खासी चढ गई थी. .
" वह तुम्हे नही समझेगा ... वह एक लंबी स्टोरी है " कमांड1ने कहा.
कमांड2 सोचने लगा.
अब इससे कैसे उगलवाया जाए...
उसने काम्प्यूटरपर बैठकर बॉसने पहले एक बार भेजा हूवा मेसेज खोला.
" और यह देख पहले एक बार बॉसने भेजे मेसेजमेंभी 11 तारख के रातको 3 से 4 का वक्त तुम्हारे लिए अच्छा है और 4 से 7 का वक्त बहुत ही खतरनाक है ऐसा लिखा था. उसका जोतिष्यपर जरा जादाही विश्वास दिखता है. " कमांड2 कमांड1को और उकसाने का प्रयत्न करने लगा.
" जोतिष्यपर विश्वास नही ... पूरी निष्ठा है. अबतक उसने कहे समयमें कभीभी दगा नही हूवा है " कमांड1ने कहा.
" वह केवल एक इत्तिफाक हो सकता है..." कमांड2 उसे और छेडनेके उद्देशसे बोला.
" इत्तिफाक नही. बॉसके पास ऐसी एक चिज है की जिसकी मदतसे वह कौनसी बात किस वक्त लाभदायक हो सकती है यह पहलेसे जान सकता है. "
कमांड1के मुंहसे अब बहुत सारी अंदर की बाते बाहर आनेको जैसे बेकरार थी.
" मुझे नही विश्वास होता' कमांड2 ने असहमती दर्शाकर अपना आखरी हथीयार इस्तेमाल किया.
" तुम्हाराही क्या किसीकाभी विश्वास नही होगा ''
" इसी एक बातसे तुम कह रहे हो की औरभी कुछ प्रमाण है?" कमांड2ने बिचमें टोककर पुछा.
" यह एकही बात नही ..... औरभी बहुत सारी बाते है... बॉसके पासका पैसा देखो ... बॉसके पास इतना पैसा कहांसे आगया? यह पुरी संस्था चलाना कोई मजाक नही... और यह सब वह अपने अकेले के बलबुतेपर चलाता है " कमांड2ने कहा.
" कैसे क्या?"
" उसके पासके तंत्रके सहाय्यता से कौनसे वक्त कौनसा शेअर फायदेमे रहेगा यह उसे पहलेसेही पता रहता है... और ऐसा कहते है की अबतक वह कभीभी नुकसानमें नही रहा " कमांड1 अब अच्छा खासा खुलकर बोल रहा था.
" तंत्र? ऐसा कौनसा तंत्र है उसके पास?" कमांड2ने उत्सुकतावश पुछा.
" बताता हूं" कमांड1 अपना व्हिस्कीका ग्लास फिरसे भरते हूए बोला.
" और बॉसने यह तंत्र कहासे हासिल किया ?" कमांड2 बेसब्रीसे सवालपर सवाल पुछे जा रहा था.
कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुनने के लिए बेताब हो गया था.
" बोलता हूं बाबा , सब बताता हूं " बोलते हूए कमांड1 खडा हो गया.
अपने दाएं हाथकी छोटी उंगली बताते हूए कमांड1ने कहा,
" एक मिनट रुको मै जरा इधरसे आता हूं''
कमांड1 झमता हूवा बेडरूमकी तरफ जाने लगा.
... कमांड2 कमांड1 क्या बताता है यह सुननेके लिए बेताब हो गया था. वह उसकी राह देखते हूए कॉम्पूटरके पास बेसब्रीसे चहलकदमी करने लगा.
कितनी देर हूई कमांड1 बेडरूमकी तरफ गया ... अभीतक बाहर कैसे नही आया... इतना टाईम?...
वह उधर के उधरही तो नही कही बाहर चला गया ?...
कमांड2को अब चिंता होने लगी थी. कमांड2 उसे देखनेके लिए उठ गया और कमांड1 जिधर गया था उधर जाने लगा. बेडरूमके सामने आकर देखा तो बेडरुमका दरवाजा अंदर की ऒर खिंचा हूवा था. उसने धीरेसे दरवाजा धकेलकर देखा तो सामने बेडपर कमांड1 घोडे बेचकर सो रहा था. कमांड2को अपने मुंह तक आया निवाला छिन लिया गया हो ऐसा लगा. बडी मुश्कीलसे वह सब बकनेके लिए तैयार हूवा था. होशमें आनेपर वह कुछभी बताने वाला नही था. वह उसके पास गया और उसे हिलाकर उठानेकी कोशीश करने लगा. उसने उसे जोर जोरसे हिलाकर देखा. लेकिन वह निंदमेंही नही तो नशेमे चूर हो गया था. कमांड2ने थोडी देर प्रयास कर फिर उसे जगानेका विचार छोड दिया. फिर उसने सोचा की...
यह तो सो गया ... मुझे दूसरा कुछ किया जा सकता है क्या यह देखना चाहिए...
कमांड1 जो जानकारी देनेवाला था जरुर वह उसने कहीतो छिपाकर रखी होगी...
वह अगर मैने ढूंढनेका प्रयास किया तो?...