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'शून्य' - (Shunya)-- Complete Novel

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" अँजेनी तूम मुझसे शादी करोगी ?" उसने उसके आंखोमे आखे डालकर देखते हूए उसे प्रपोज किया.

अँजेनीको तो एकदम भर आए जैसा हुवा.

लेकिन खुदकी भावनाए संभालते हूए वह बोली, " इज धीस सम काईंंड ऑफ जोक?"

" नही नही ... मै सिरीयसली बोल रहा हूं " वह बोला.

" देखो जॉन पहलेही तूम इतनी देर नही थे तो मुझे अकेलापन महसूस हो रहा था... कम से कम ऐसे वक्त ऐसा फालतू मजाक मत करो." वह बोली.

" नही अँजी ... मै मजाक नही कर रहा हूं " वह उसे विश्वास दिलानेका प्रयास करने लगा.

जॉनने उसे पहली बार प्यारसे 'अँजी' कहा था. वह उसकी आखोंमे देखकर उसकी भावनाए टटोलनेकी कोशीश करने लगी.

" तुम्हे सच नही लग रहा है ना ..."

उसने अपने कोटके जेबसे एक छोटा लाल बॉक्स निकालते हूए कहा ,

" यह देखो मैने तुम्हारे लिए क्या लाया है ..."

" क्या है ?" उसने प्रश्नार्थक मुद्रामें पुछा.

उसने बॉक्स खोलकर उसके सामने पकडते हूए कहा,

" एंंगेजमेंट रिंग ... ऑफ कोर्स इफ यू अॅग्री.."

उसने फिरसे एकबार उसे पुछा , " विल यू मॅरी मी प्लीज"

अँजेनीके आंखोमें आंसू तैरने लगे.

" इसके लिए गये थे तूम सिटीमें ?" उसका गला भर आया था.

उसने उसकी आंखोमें देखते हूए 'हां' मे अपनी गर्दन हिलाई.

वह कुर्सीसे उठकर खडी हो गई. वह भी अपने कुर्सीसे खडा हूवा. वह आवेगके साथ उसके बाहोंमे समा गई. .

" यस आय विल" उसके भरे हूए गले से शब्द निकले.

जॉनके चेहरेपर खुशी और समाधान फैल गया. वह अतीव आनंदसे उसे उठाते हूए उसे चूमने लगा. उसने फिर धीरेसे उसे निचे उतारते हूए बॉक्स से अंगूठी निकालकर धीरेसे उसकी तिसरी उंगलीमें सरका दी.

आधी रात बित चूकी थी. बाहर आकाशमें पूर्णीमा का चांद अपनी सफेद रोशनी सब तरफ फैला रहा था. बहते पाणी की मधूर आवाज और चांद का धूसर प्रकाश कॉटेजमें आ रहा था. दोनो बेडपर लेटे हूए थे और जॉनकी उंगलीयां अँजेनीके मुलायम जिस्मसे खेल रही थी. उसका हाथ जिस्मसे खेलते खेलते धीरे धीरे निचे सरकने लगा.

" अंगुठी लानेकी इतनी क्या जल्दी थी. ? " अँजेनीने एक मंद मुस्कान देते हूए उसके निचे खिसकते हूए हाथको अपने हाथमें पकडते हूए कहा.

" जानेवाले वक्तको तो मै रोक नही सकता लेकिन वह वक्त व्यर्थ ना जाए इसका खयाल मुझे रखनाही चाहिए." उसे बाहोंमे भरकर कसकर पकडते उसने कहा.

" अच्छा" उसने शरारतभरी हंसी बिखेरते हूए उसे दूर धकेला.

वह उसे फिरसे पकडनेके लिए लपका. वह उसके शिकंजेसे बचनेके लिए बेडसे निचे उतर गइ. जॉनभी अब उसे पकडनेके तडपने लगा. वह इधर दौडते हूए उसके पहूंचसे दूर दूर भाग रही थी. अब जॉनभी जिदपर अड गया. वहभी बेडसे निचे उतरते हूए उसके पिछे लपका. वह खिलखिलाती हूए सिढीयोंकी तरफ लपकी. वह भी उसका पिछा करने लगा.

सिढीयोंसे दौडते हूए आखीर अँजेनी टेरेसपर आकर पहूंची. जॉनभी उसके पिछे पिछे टेरेसपर पहूंचा. उपर टेरेसपर खुला आकाश, आसमानमें चमकती चांदनी और चांद की दूधसी सफेद रोशनी बहुत आकर्षक लग रही थी. और उपरसे चांदके रोशनीमें चमकता हूवा बहता पाणीभी दिख रहा था. वह उस चमकते बहते पाणीकी तरफ देखकर मानो खो सी गई.

" देखो देखो कितना सुंदर दिख रहा है वह चमकता पाणी " उसने कहा.

तबतक जॉनने पिछेसे आकर उसे अपनी बाहोंमे भर लिया था.

" लेकिन इस चांदकी रोशनीमें चमकते तुम्हारे चेहरेसे यकिनन सुंदर नही . " उसने कहा.

वह उसकी खुली लंबी, गोरी गोरी गर्दनके साथ अपने व्याकुल होठोंसे खेलने लगा.

उसका जिस्मभी अब तपने लगा था.

जॉनने उसे पलटाकर उसका चेहरा अपने चेहरेके सामने लाया और अपनी पकड और मजबुत करते हूए अपने गरम होंठ उसके होठोंपर रख दिए.

वहभी अब उसे आवेगके साथ प्रतिसाद देने लगी .

उसने उसके पिठको ढंके हूए उसके लंबे घने बालोको एक हाथसे बाजू हटाया और वह उसके टॉपकी पिठपर बंधी हूई लेस छोडने लगा.

अँजेनी उसके सिनेके बालोंसे खेलते हूए उसके शर्टके बटन निकालने लगी.

अब उन्हे एकदुसरेंके सांसमे भरी आर्द्रता और गर्मी महसूस हो रही थी.

" जॉन आय लव्ह यू व्हेरी मच" उसके मुंहसे अपनेआप निकल गया.

" आय टू" बोलते हूए उसने उसे टेरेसके खुले फ्लोवरपर अपने और उसके निकाले हूए कपडोका बिस्तर बनाकर धीरेसे फुलोजैसी नाजूकताके साथ उसपर लिटाया.

अब दोनोभी खुले टेरेसपर बिलकुल विवस्त्र होकर आवेगके साथ एकदूसरेसे लिपट गए थे.

चांदके सफेद रोशनीमें , बहते पाणीके मधूर संगीतमें, एकदुसरेकी उत्कट भावनावोंको प्रतिसाद देते हूए उस अंधेरी रातमें वे अपने मधूर मिलनमें प्यारसे धीरे धीर रंग भरने लगे.

ठंडसे एकदूसरेका बचाव करनेके लिए एक दूसरेको कसकर लिपटकर जॉन और अँजेनी टेरेसपरही सोए थे. सुबह पंछीयोंकी चहचहाटसे अँजेनी जाग गई. उसने अपनी आनंदभरी और गहरी निंद से हूए भारी आंखे खोलनेकी कोशीश की. उसे आंखे खोलनेका मन नही हो रहा था. उसे वैसेही जॉनकी बाहोंमे मानो पुरी जिंदगी रहनेका मन कर रहा हो. वैसेही लेटे हूए अवस्था मे उसने हलके अपनी आखे थोडीसी खोलकर देखा. पुरबकी ओर सुबहकी लाली छाई हूई थी. सुबह हो गई .. अब उठना ही चाहिए... उसने अपने कपडे पहनते हूए जॉनको धीरेसे हिलाया.

" जॉन ऊठो, देखो सुबह हो गई.."

"उं..." जॉनने सुस्तीमें अंगडाई ली और उसे फिरसे अपनी बाहोंमे खिंच लिया.

उसने खुदको छुडाते हूए अपने कपडे पहने और फिर उसे जगानेके लिए हिलाया. वह उठ गया. किलकीली आखोंसे इधर उधर देखा और फिर उसकी गोदमें सर रखकर सो गया. उसकी बालोंमे अपनी नाजूक उंगलीया फेरते हूए वह मुस्कुराने लगी. इतनेमें उन्हे अहसास हूवा की शायद निचे बेडरुममें रखा हूवा जॉनका मोबाईल बज रहा है.

" जॉन देखोतो, तुम्हारा मोबाईल बज रहा है.."

यहां आनेके बाद पहली बार जॉनका मोबाईल बजा था. वह एकदमसे उठ खडा हूवा. कपडे पहनते हूए जल्दी जल्दी निचे जाने लगा. वह भी उसके साथ हो ली.

हां जॉनकाही मोबाईल बज रहा था...

मोबाईल उठाकर जॉनने डिस्प्लेकी तरफ देखा. डिटेक्टीव्ह अॅलेक्सका फोन था.

इतनी सुबह अॅलेक्सका फोन ?...

जरुर कोई महत्वपुर्ण बात होगी...

झटसे जॉनने बटन दबाकर मोबाईल कानको लगाया.

" हं बोलो अॅलेक्स " जॉनने कहा.

" जॉन एक बहुत महत्वपुर्ण खबर है... " उधरसे आवाज आया.

अचानक मोबाईलके सिग्नलमे कुछतो डिस्टर्बन्स आने लगा. कुछ सुनाई नही दे रहा था.

" हॅलो हॅलो " जॉन ट्राय करने लगा.

" हॅलो" उधरसे प्रतिसाद आया.

" हं, बोलो ... क्या खबर है ?" जॉनने पुछा.

" खुनीके ठिकानेका पता चल चूका है... तूम जल्दीसे जल्दी ... " उधरसे बात पुरी होनेसे पहलेही कुछ न समजनेवाले टूटे हूए बोल जैसे आवाज आने लगे. और फिरतो वह भी आना बंद हूवा.

" हॅलो हॅलो" जॉनने बोलनेका प्रयास किया.

उसने उसके मोबाईलके डिस्प्लेके तरफ देखा. उसके मोबाईलका सिग्नल गया था.

शायद शहरसे दूर होनेके कारण इस इलाकेमे सिग्नल बराबर नही आ रहा होगा... .

" क्या हूवा ? किसका फोन है ?" अँजेनीने पुछा.

वह फोन लेकर बाल्कनीमें गया. लेकिन सिग्नल आनेका नाम नही ले रहा था.

" अँजी जल्दी तैयार हो जावो.. हमें अब यहांसे जल्दसे जल्द निकलना होगा.." बोलते हूए जॉन बाल्कनीसे सिढीयोंकी तरफ लपका.

सिढीयोंसे दौडते हूए वह टेरेसपर गया. कुछ ना समझते हूए अँजेनीभी उसके पिछे पिछे टेरसपर गई. टेरेसपरभी उसके मोबाईलका सिग्नल नही आ रहा था.

"अॅलेक्सका फोन था ... खुनीके बारेमें कुछतो महत्वपुर्ण जानकारी मिली है उसको शायद ... लेकिन बिचमेंही सिग्नल चला गया... " मोबाईलका डिस्प्ले अँजेनीको दिखाते हूए जॉनने कहा.

 


जॉन गाडी चला रहा था और उसके बगलमें अँजेनी बैठी हूई थी. दोनो सिधे सामने रस्तेपर देख रहे थे. एकदम शांत. काफी समयसे उन दोनोंके बिच रही अनैसर्गिक चुप्पी तोडते हूए जॉनने कहा ,

" मैने नही कहा था , यह खुनका किस्सा अभी तक खतम नही हूआ करके.."

अँजेनीने उसकी तरफ देखा.

" खुनी अभीभी खुला घुम रहा है" जॉनने आगे कहा.

" फिर जो मरा था वह कौन था? " अँजेनीने पुछा.

' बहुत सारी संभावनाए है' जॉन अँजेनीकी तरफ देखते हूए कहा.

अँजेनीने उसकी तरफ सिर्फ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" एक तो उसका खुनसे कोई वास्ता नही होगा... या फिर वह खुनीका साथी होगा.. या कीसी इस खुनसे संबंधीत संघटनाका एक क्षुद्र मेंबर होगा" जॉन ने कहा.

" लेकिन अॅलेक्सको ऐसी क्या महत्वपुर्ण जानकारी तुम्हे बतानी थी.? " अँजेनीने प्रश्न उपस्थित किया.

जॉनने कुछ तो खयालमें आये जैसा कहा ,

" देखोतो ... मेरे मोबाईलका सिग्नल आया क्या? "

" तुम्हारा मोबाईल?" प्रश्नार्थक मुद्रामें अँजेनीने पुछा.

जॉनने आंखोसे इशारा कर अँजेनीके उस तरफ सिटपर रखा उसका ओवरकोट दिखाया. अँजेनीने ओवरकोट उठाकर अपने हाथमें लिया. ओवरकोटकी जेबसे मोबाईल निकालकर उसने उसका डिस्प्ले देखा. मोबाईलका सिग्नल अब पुरी तरहसे आ चूका था.

" सिग्नल तो आया है... रुको मै उसे ट्राय करती हू"

अँजेनी अॅलेक्सका फोन ट्राय करने लगी. उसने अपने नाजूक उंगलीयोंसे कुछ बटन दबाकर मोबाईल अपने कानको लगाया. जॉन उत्कंठासे बिचबिचमें एखाद नजर उसपर डाल रहा था.

उसने कानको लगाया मोबाईल निकालकर रिडायल किया.

" क्या हूवा ?" जॉनने उत्कंठासे पुछा.

" मोबाईल स्वीच ऑफ किया हूवा है ऐसा मेसेज आ रहा है " उसने फिरसे मोबाईल कानको लगाते हूए कहा.

थोडी देर बाद उसने फिरसे रिडायल किया लेकिन वही मेसेज बार बार आ रहा था.

" उसने मोबाईल शायद बंद किया है " मोबाईल जॉनके पास देते हूए वह बोली.

जॉननेभी एक-दो बार प्रयास करके देखा. लेकिन व्यर्थ.

" मुझे लगता है उसने मोबाईल जानबुझकरही बंद कर रखा होगा. " जॉन मोबाईल अपने जेबमें रखते हूए बोला.

" जानबुझकर लेकिन क्यों? " अँजेनीने उत्सुकतावश पुछा.

" मोबाईलका संभाषण टॅप होनेकी शायद उसे आशंका होगी. " जॉनने संभावना बताई.

" ऐसा लगता है की अब उसे मिले बैगेर सच क्या है कुछ पता नही चलेगा. " अँजेनीने कहा.

जॉन कुछ ना बोलते हूए फिरसे सिधा सामने रस्तेपर देखते हूए ड्रायव्हींग करने लगा. अँजेनीभी सामने देखते हूए फिरसे अपने सोचमें डूब गई.

जॉनने डिटेक्टीव अॅलेक्सके दरवाजेकी बेल बजाई. अंदरसे हलकासा आवाज आया-

'डिंग डाँग'

जॉन दरवाजा खुलनेकी राह देखते हूए खडा रहा. जॉनने बिचमें आसपास एक नजर घुमाई.

....अॅलेक्स घरमें अकेलाही रहता था. जॉन और अॅलेक्सकी दोस्ती काफी पुरानी थी. घरके सामने जो बागीचा था उसकी अॅलेक्स कुछ खास देखभाल नही करता होगा ऐसा प्रतीत हो रहा था. जब अॅलेक्सकी बिवी जिंदा थी तब उसने बडे शौकसे यह बागीचा बनाया था. लगभग पाच साल पहले अॅलेक्सके बिवीका एक दुर्घटनामें इंतकाल हूवा था. तबसे इस बागकी देखभाल कोई नही करता था. बिच बिचमें वहां का एक चौकीदार किसीको पैसे देकर वह बागीचा ठिक कर लेता था. लेकिन वह नियमित नही होता था. इसलिए वह बागीचा भयाण और रूक्ष दिखता था. बिलकुल अॅलेक्सजैसा. .

बेल बजाकर काफी समय हूवा था. फिरभी अभीतक अॅलेक्सने दरवाजा कैसे नही खोला. ?...

जॉनने फिरसे एकबार बेल बजाई. दरवाजा जोरजोरसे ठोका और फिर दरवाजा खुलनेकी राह देखने लगा.

...अॅलेक्सकी पत्नीकी मृत्यूके बाद उसके व्यक्तीत्वमे बहुत बदल हुवा था. तबसे अॅलेक्सका दोस्तोंके साथ हंसना मस्तीकरना लगभग बंद हो चूका था. उसेके नेचरमेंभी बदलाव आया था. वह अब अकेला रहना पसंद करने लगा था. उसको मां बाप, बेटा कुछ भी आगे पिछे ना होनेके कारण वह और ही बेपर्वा हूवा था. उसकी बिवीही उसका सबकुछ थी और वही ना रहनेसे वह औरही अकेला हो गया था. उसका कामभी ऐसा था की उसका अंधेरेसे जादासे जादा पाला पडता था. लेकिन अब अंधेरेसे उसकी गहरी दोस्ती हो गई थी.

उसकी जिंदगी तबसे निरस बन चूकी थी और उसने उसके बाद किसीभी स्रीको उसके जिंदगीमें आनेके लिए कोई गुंजाईश नही छोडी थी.

अभीभी अॅलेक्सके घरका दरवाजा खुला नही था...

लेकिन अब जॉनको चिंता होने लगी थी. उसेने फिरसे दरवाजा ठोका.

" अॅलेक्स" जॉनने अंदर जोरसे आवाज लगाई.

अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी.

जॉन अब अॅलेक्सके घरके बाजूसे पिछे जाने लगा. पिछे जाते जाते उसने एक खिडकीसे अंदर झाककर और नॉक कर देखा. लेकिन अंदर कोई हरकत नही थी. वह घरके पिछवाडे पहूंच गया. पिछेका दरवाजा खुला था. जॉनने फिरसे अॅलेक्सको उसके खुले दरवाजेसे आवाज दिया. तोभी कोई प्रतिक्रिया नही थी. आवाज सिर्फ घरमें गुंजा. अंदर अंधेरा छाया हूवा था. जॉन धीरे धीर अंदर जाने लगा. अब जॉनके दिमागमें अलग अलग भले बुरे खयाल आने लगे थे...

क्या हूवा होगा?...

कुछ अघटीत तो नही घटा?...

उसके सांसोंकी गती विचलित होने लगी थी. अपने आप उसका हाथ उसकी कमरमे लगाए बंदूककी तरफ गया. उसने बंदूक निकाली और बंदूक ताने वह सावधानीसे अंदर जाने लगा. घरमें सब चिजें इधर उधर फैली हूई थी.

वैसेभी अॅलेक्सको चिजें ठिकठाक रखनेकी आदत नही थी....

कभी गुस्सा कर कभी प्यारसे समझाकर उसकी पत्नी उसे चिजे ठिक ढंगसे रखनेकी आदत डालनेका प्रयास करती थी...

लेकिन जबसे अॅलेक्सकी पत्नी गई तबसे घर की जानही चली गई थी. ...

बेडरूममें जातेही जॉनका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. बेडरूममें अॅलेक्स बेडपर गिरा हूवा था. जल्दीसे जॉन उसके पास गया.

" अलेक्स..." उसने उसे हिलाकर देखा.

शरीरमें कोई हरकत नही थी. उसने उसकी नब्ज टटोलकर देखी. उसकी नब्ज कबकी बंद हो चूकी थी. जॉनने झटसे अपना मोबाईल निकालनेके लिए जेबमें हाथ डाला. लेकिन व्हायब्रेट होता हूवा मोबाईल उसके हाथमें आया. उसने मोबाईलके डिस्प्लेकी तरफ देखा. वह उसका साथी सॅमका था.

उसने मोबाईल का एक बटन दबाकर उसे अटेंड किया.

" हं सॅम"

"सर एक बुरी खबर है... सर खुनीने चौथा खूनभी किया है... " उधरसे सॅमने कहा.

" क्या ?" जॉनके मुंह से अनायास निकल गया.

" नियोल वॅग्नर .. नॉर्थ स्ट्रीट, 2024.... उसका भी उसी तरहसे खुन हो चूका है.." सॅमने जानकारी दी.

जॉन नार्थ स्ट्रीटको नियोलके अपार्टमेंटमें जानेके लिए अपने गाडी से उतरा, तभी उसे चारो ओरसे प्रेसने घेर लिया.

" मि. जॉन.... आपनेतो कहा था की खुनी मर चूका है... और केस खतम हो चूकी है..."

एक पत्रकार भिडमें अपना कॅमेरा संभालते हूए अचानक जॉनके सामने उसका रस्ता रोकते हूए खडा होगया. भिडसे रास्ता निकालकर वहां पहूचनेतक उस पत्रकारके सारे कपडे और बाल खराब हो चूके थे.

जॉनके पिछे, आजू बाजू सब तरफसे पत्रकार उसे घेरकर खडे थे. वह एकदम सामने आनेसे उसे आगे जानेका रस्ताभी बंद हूवा था. अब उस पत्रकारको कुछतो जवाब देकर कमसे कम अभीके लिए शांत करना जरुरी था. क्या बोला जाए जॉनको कुछ सुझ नही रहा था.

" लेट मी र्फस्ट इनव्हेस्टीगेट द केस ..." ऐसा कहकर जॉनने उसे बाजू हटाया और वह आगे जाने लगा.

पिछेसे वह पत्रकार चिल्लाया -

" सर यू कान्ट जस्ट इग्नोर अस धिस वे"

" यू हॅव टू अॅन्सर अस" दुसरा एक चिल्लाया.

" यस ... यस" बाकी पत्रकारभी चिल्लाकर उन्हे साथ देने लगे.

 
उसके पिछे सब पत्रकार गुस्सेसे चिल्लाते हूए दंगा करने लगे थे. जॉन ब्रेक लगे जैसा रुका. उसने पलटकर देखा. उसे सब पत्रकार मानो खानेको तैयार थे. जॉनका चेहरा बुझसा गया. वह समझ रहा था की गलती पुलिसकी थी.

अब उन्हे कुछ तो समझा बुझाकर शांत करना जरुरी था.

कॅमेरेके फ्लॅश उसपर चमक रहे थे. कॅमेरेके फ्लॅशकी वजहसे वह विचलितसा हूवा. बाकीके पुलिस बडी मुश्कीलसे उन पत्रकारोंको घेरा बनाकर रोके हूए थे.

" इस इनव्हेस्टीगेशनके बाद शामको मै एक प्रेस कॉन्फरंस लेने वाला हूं ... उसमें मै सब विस्तारसे बोलूंगा" जॉन हिंम्मत कर बोला और पलटर तेजीसे चलते हूए अपार्टमेंटमें घुस गया.

पत्रकार कमसे कम उस वक्तके लिए शांत हूए थे. जॉनको खुदकाही आश्चर्य लग रहा था.

उसके मुंहसे वह सब कैसे निकल गया इसका उसेही पता नही था.

वह प्रेस कॉन्फरंसके बारेमे बोला तो था लेकिन प्रेस कॉन्फरंसमें वह क्या बोलने वाला था?...

चलो कमसे कम अबकी तो बला टली. शामका शामको देखेंगे...

ऐसा सोचकर वह लिफ्टमें घुस गया. लिफ्ट बंद हूई. उसने लिफ्टमे बटनोंके लाईनमेसे ढूंढकर 10 नंबरका बटन दबाया.

लिफ्टसे बाहर आकर जॉन फ्लॅट क्रमांक 3 की तरफ जाने लगा. फ्लॅटके खुले दरवाजेके सामने देखनेवालोंकी भीड जमा हूई थी. कुछ रिपोर्टरभी वहां इधर उधर घुम रहे थे. वहा बाहर दरवाजेके पास खडे पुलीस सुस्ताए हूए लग रहे थे. जॉनको देखतेही वे सुस्ताए हूए पुलिस सतर्क होकर हरकतमे आए. वे कुछ कारण ना होते हूए वहा खडे लोगोंको और रिपोर्टरोंको डांटते हूए वहासे भगाने लगे. जॉनको देखतेही वे रिपोर्टर जॉनके सामने आकर उसका रास्ता रोककर खडे हूए. वहा खडे और जॉनके पिछे आए पुलिसने उन्हे लगभग पकडकर बाजू हटाया. जॉन सिधा अंदर चला गया.

अंदर हॉलमें इन्व्हेस्टीगेशनके लोग अपने काम मे व्यस्त थे. जॉन उन्हे डिस्टर्ब नही होगा इसकी सावधानी बरतते हूए बेडरुमकी तरफ चला गया. बेडरूममें सॅम था. जॉनको देखतेही वह जॉनके सामने आया.

" साला कुछभी पत्ता नही चल रहा है " सॅम जॉनको कुछतो बोलना है ऐसे बोला.

' अपनेही डिपार्टमें अगर छेद हो तो कैसे पता चलेगा' जॉनने चिढकर तिरछे अंदाजमें कहा.

जॉनका मूड देखकर सॅमने चूप रहनाही बेहतर समझा. .

बेडरूममे फर्शपर खुनसे लथपथ नियोल वॅग्नरका शव पडा हूवा था. नियोल लगभग पच्चीसके आसपास, एक आकर्षक व्यक्तीत्व का युवक था. वह फ्लॅटमें शायद अकेलाही रह रहा होगा. मतलब फ्लॅटमेंके उसके सामानसे और अबतक उसके बारेमें पुछनेके लिये उसका कोई नही आया था, इसपरसे कमसे कम ऐसाही लग रहा था. नियोलके पेटपरसे बहकर फर्शपर उसका खुन जम गया था. उस तरफसे पिठके निचेसे बहकर एक खुन की धार बाहर आई थी. नियोलके शरीरपर बंदुककी गोलीयोंकी निशानियां तो थी ही साथमे चाकुकी वार की हूई निशानीयां थी. नियोलका मुहं आधा खुला और सर एक तरफ ढूलका हूवा था. जान जानेके पहले वह बहूत तडपा होगा ऐसा लग रहा था. और उसके शरीरपर उसके ऑफिसके या फिर बाहर जानेके लिए पहने रेग्यूलर कपडे थे.

इस परसे लग रहा था की खुनी शायद उसके पिछे पिछेही घरमें घुस गया होगा...

मतलब यह भी एक संभावना!...

कमरेमेंका, नियोलके शरीरपरका, उसके जेबमें जो था वह सब सामान जैसेके वैसा सही सलामत था.

सब मतलब जो किमती था वह...

बाकी कुछ सामान खुनी ले गया था या नही कुछ पता नही चल रहा था. जॉनको अबतकके अनुभवसे पता था की कुछ कातील सभी किमती सामान नही ले जाते. कुछ सामान वे पुलिसको गुमराह करनेके लिए वही छोड जाते है. और उपरसे नियोल अकेला होनेसे कातील क्या ले गया और क्या छोड गया यह समझनेके लिए कोई रास्ता नही था.

नियोलपरसे हटकर जॉनका ध्यान सामने खुनसे भरे दिवारकी तरफ गया.

फिर वही ...

खुनसे निकाला हूवा बडासा शुन्य... शुन्यही था वह...

और उस शुन्यमे कातील छीपा हूवा था...

लेकिन शून्यका मतलब होता है कुछ भी नही...

फिर उसमें कातील कैसा छिपा होगा ?...

शून्यके बिचोबिच खुनसे लिखा था -

" शून्याकी खोज किसने की ?"

फिर इस सवालमे जरुर कातील छिपा होगा ...

जॉन सोचने लगा.

जॉनको अब यह सब गुथ्थी सुलझानेकी सख्त जरुरत महसुस होने लगी थी.

उसने बोलातो सही था की 'शामको प्रेस कॉन्फरंसमे सब बताऊंगा' करके.

लेकिन कमसे कम अभीतो उसकेपास बोलनेके लिए कुछ नही था. मतलब कमसे कम शामतक खुनीका पता लगना जरुरी था.

जॉन उसके बॉसके कॅबिनमें उनके सामने बैठा था. कॅबिनमें वे दोनोही थे. काफी देर तक दोनोमें एक अनैसर्गीक चुप्पी छाई हूई थी.

"अलेक्सकाभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया है. " जॉनने उसके सामने रखे फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.

जॉनका बॉस आरामसे कुर्सीपर बैठकर सिगार पीते हूए शांतीसे जॉनको सुन रहा था.

" मृत्यूका कोई कारण नही पता चल रहा है.' जॉनने कहा.

उसके बॉसने मुंहमेसे सिगार निकालकर सामने रखे अॅश ट्रेमे उसकी राख झटकी.

" लेकिन मुझे यकिन है की उसे इन्शुलिनका ओवरडोज देकर मारा गया होगा. ... इन्शुलीनके ओवरडोजसे ऐसाही होता है. पोस्टमार्टममें मृत्यूका कोई कारण नही मिलता और कुछ साबीतभी नही किया जा सकता. ... कभी कभी तो वह कत्ल है या नैसर्गिक मृत्यू यहभी पता नही चल पाता.

जॉनका बॉस कुर्सीसे उठ गया और सिगार पिते हूए खिडकीसे बाहर देखने लगा. फिर पलटकर उसने जॉनसे कहा ,

" देखो जॉन हम यहा नियोलके कत्लके सिलसिलेमे बैठे है... तूमने बिचमेंही इस अलेक्सका क्या लगा रखा है..."

" क्योंकी उसकाभी इस खुनसे संबध है.." जॉन खंबीरतासे बोला.

" उसका इस कत्लसे क्या वास्ता ? तुम पागल तो नही हूए ? वह साला अॅलेक्स कैसे मरा कुछ भी पता नही... और तुम उसको इस केससे जोड रहे हो. " बॉस चिढकर बोला.

" संबंध है इसलिए जोड रहा हू" जॉन आवाज चढाकर बोला.

" अॅलेक्सको शायद उस कातिलका पता चल चूका था... इसलिए उसने अलेक्सकाही खातमा कर डाला.

इतनेमें एक पियून अंदर आगया. पियूनके आहटसे दोनोंका संवाद रुक गया. दोनोंने उस पियूनकी तरफ देखा. पियूनने बॉसके पास जाकर झूककर कहा,

" साहब , बाहर रिपोर्टर लोगोंकी भीड जमा हो गई है."

पियूनने पैगाम दिया और वह वहांसे चला गया.

" रिपोर्टर इस वक्त ? इन लोगोंका क्या दिमाग खराब हो गया है ?.." जॉनका बॉस आश्चर्यसे बोला.

" साले यहां वहां जमा हो जाते है... इनको सिर्फ खबर चाहिए...कौन मरा, कैसे मरा इसका इनको कुछ लेना देना नही होता... " बॉस चिढकर बोला.

" मैनेही शामको प्रेस कॉन्फरंन्स है ऐसा एलान किया था" जॉनने कहा.

" प्रेस कॉन्फरंन्स? तूमने ऐलान किया?... अब यह तो खुदके पैरपर पत्थर मार लेने जैसा होगया... पहलेही सब लोग और मिडीया भडकी हूई है. अब ये लोग हम सबको कच्चा चबा जाएंगे. यह फालतूका काम करनेके पहले तुमने किसको पुछा?"

अब बॉस जॉनपर बहुत आगबबुला हो गया था.

" सर सुबह उनको टालनेके लिए मेरे मुंहसे निकल गया" जॉन अपना बचाव करते हूए बोला.

" मुंहसे निकल गया? मतलब गलतीया तुम करते जावो और निपटना हमें पडे " बॉस कडे स्वरमें बोला.

" सर ... पिछले बार अगर मैने कहा वैसा अगर आप मानते तो यह नौबत हमपर नही आती. " अब जॉनभी अपना आपा खोने लगा था.

" तुम्हे क्या लगता है? पिछली बार तुम्हारा अगर मैने सुना होता तो यह जो नौबत आई है वक कबकी आ चूकी होती... तूमने इन्वेस्टीगेशनमें इतना वक्त लगाया इस बातको जादा उछाला नही जाए उसकी मैने भरसक कोशीश की थी. वैसे तुम्हे मैने ऑप्शन भी दिया था. जल्द से जल्द कातिलका पता लगावो या तुमसे होता नही ऐसा कहकर कमसे कम दुसरेकोभी तो करने दो."

जॉनको क्या बोला जाए कुछ सुझ नही रहा था.

जॉन थोडा नरम रुख अपनाकर बोला " लेकिन अब उन्हे क्या बताया जाये?"

" तुम उसकी चिंता मत करो ... मै सब संभाल लूंगा " बॉसनेभी गिरगटकी तरह अपना रंग बदलते हूए जॉनको तसल्ली देनेके लहजेमें कहा.

बॉसकी तसल्लीसे जॉनको थोडा सुकुन पहूंचा.

बॉसने सिगार सामने रखे अॅश ट्रेमें मसलकर बुझाई और कुर्सीसे उठते हूए बोला "चलो... मेरे साथ"

बॉस उठकर खुले दरवाजेसे 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बाहर निकल गया और उसके पिछे जॉन चूपचाप चलने लगा.

 


जॉनका बॉस और जॉन जैसेही रिपोर्टरोंको आते हूए दिखाई दिए, उनकी भिड उनकी दिशामें उमड पडी. बिजली चमकने जैसे कॅमेरोंके फ्लॅश उनके चेहरेपर पडने लगे. वहां खडे पुलिसने एक बडा घेरा बनाकर रिपोर्टर लोगोंको काबूमे रखनेकी कोशीश की. तोभी पिछे सब गडबड चल रही थी.

" क्वायट प्लीज" बॉसका कडा स्वर गुंजा.

सब तरफ सन्नाटा छाया. कुछ रिपोर्टर आगे आनेके लिए अधीर होकर गडबड करने लगे थे. बॉसने आत्मविश्वासके साथ चारोतरफ एक नजर डाली.

" यस्स" बासने रिपोर्टरोंको सवाल पुछनेके लिए इशारा किया.

सामने खडे रिपोर्टरकी भीड गडबड करने लगी. बॉसको सिर्फ शोर सुनाई दे रहा था. कौन क्या पुछ रहा था कुछ समझ नही आ रहा था.

" आय वुईल इन्शोर दॅट दी लास्ट पर्सन इज ऑल्सो अॅन्सर्ड... वन बाय वन प्लीज" बॉसने खंबीरतासे कहा.

जॉनने आश्चर्यसे बॉसकी तरफ देखा. उसे बॉस इतना बिनदास कैसे रह सकता है इसका आश्चर्य हो रहा था.

" तुम्हारा वह खुनीतो मर गया था... फिर क्या अब फिरसे जिवीत हो गया है.. ?" एक पत्रकारने व्यंग और आवेशसे से कहा.

" पुलिस डिपार्टमेंट लोगोंको इतना गुमराह करेगी इसकी अपेक्षा नही थी. " दुसरेने कहा.

" इतना होनेके बादभी बेशरमोंकी तरह लोगोंके सामने जानेकी तुम्हे हिम्मत कैसे होती है? " तिसरा चिढकर अपने आपेसे बाहर होता हुवा बोला.

" माईंंड यूवर लँगवेज" बॉस चिल्लाया.

बॉसने एकदम अपने तेवर बदले थे. जॉनभी एक पलके लिए चौंक गया. पुलिसका पलडा कमजोर होते हूए भी बॉस ऐसे कैसे बर्ताव कर सकता है इस बातका जॉनको आश्चर्य लग रहा था.

सब तरफ सन्नाटा छा गया.

' देखो... पिछलीबार हमारी गलती हूई इस बातसे मै इनकार नही करता... कातील एकसे जादा हो सकते है यह बात हमने सोचीही नही... '' बॉस फिरसे अपने तेवर नरम करते हूए एकदम हिन दिन होकर बोल रहा था.

बॉसकी यह स्टाईलही थी. पहले एकदम हमला करनेका और फिर दुसरेही पल एकदम बकरीकी तरह नरम रुख अपनानेका. इसकी वजहसे पहले तो सामनेका आदमीको अनपेक्षीत धक्का लगता है और बादमे वह गडबडा जाता है. वैसेही हूवा. पहले सब रिपोर्टरोंको गहरा धक्का लगा और वे एकदम शांत हो गए और दुसरेही पल गडबडा गए. इतनेकी उन्हे बॉसची दया आने लगी थी. लेकिन आखीर वे रिपोर्टर थे - चार घाटका पाणी पीने वाले. बॉसके डिपार्टमेंटके कोई उसके एहसानमंद पदाधिकारी नही थे. जल्दीही वे संभल गए और उन्होने बॉसपर फिरसे हल्ला बोल दिया.

" तुम लोग लोगोके रक्षक, लोगोका हित देखने वाले. तुम लोगोंपर लोगोंकी जिम्मेवारी होती है... तुम लोग ऐसे माफी मांगकर अपने हाथ नही झटक सकते. "

" और अभीभी इस केसका क्या प्रोग्रेस है? की जहांसे शुरु हुवा था फिरसे वही " कोई बोला.

" शून्य गोल होने जैसा " किसीने आगे जोड दिया.

लोगोमें थोडी व्यंगपुर्ण हंसकी लहर दौड गई.

" तुम माफी मांगकर ऐसे चूप नही बैठ सकते. तुम्हे कुछतो अॅक्शन लेनीही पडेगी"

बॉसको बोलनेके लिए कोई चान्स नही दे रहा था.

" और वहभी अब सबके सामने तुम्हे ऐलान करना पडेगा. "

" हां .. हां अभी सबके सामने... " बाकी बहुतोंने हांमे हां मिला दी.

अब बॉसके पसीने छूटने लगे थे. सामने रिपोर्टर उसे ऐसेही जाने देनेके मुडमें नही थे. बॉसकी ट्रीकभी कुछ चली नही थी. पर उतनेही जोरसे बूमरँगकी तरह उसपरही पलट गई थी.

" जस्ट अ मिनिट प्लीज" बॉसनं हाथ उपर कर लोगोंको शांत होनेके लिए कहा.

रिपोर्टर थोडे शांत हूए.

" मै मेरा अॅक्शन प्लान तुम लोगोंके सामने जाहिर करने वाला हूं "

बॉसका बोलना पुरा होनेके पहलेही कुछ लोग उसके बोलनेको बिचमेंही तोडकर चिल्लाए .

" अभी यहां... पहलेजैसी आनाकानी नही चलेगी. "

बॉसकी अब चक्रव्यूहमें फसे अभिमन्यूजैसी दशा हूई थी.

" हां ... हां अभी यही मै मेरा अॅक्शन प्लान जाहिर करने वाला हूं " बॉस नरम लहजेमें अपने चेहरेपरका पसिना पोंछते हूए बोला.

अब कहां रिपोर्टर एकदम शांत हूए - बॉसका अॅक्शन प्लान क्या है यह सुननेके लिए. सब रिपोर्टरोंने अपने मायक्रोफोन्स जितने हो सकते है उतने सामने घुसाए.

" नंबर एक. पुलिस लोगोंके रक्षक होते है... और लोगोंका उनपर पुरा विश्वास होता है... उनका हमपरका विश्वास टूटना नही चाहिए इसलिए पुलिसको गलती हूई ऐसा सिर्फ स्वीकार करके नही चलेगा. उसके लिए उन्हे बडीसे बडी सजा मिलनी चाहिए.. ताकी ऐसी गल्ती वे फिरसे नही दोहरानेकी हिम्मत नही करेंगे "

जॉनने गडबडाकर बॉसकी तरफ देखा. बॉस पुलिसकेही खिलाफ बोल रहा था.

अपनी सुननेमें तो गलती नही हो रही है...

या फिर बॉसकी बोलनेमें कोई गलती हो रही होगी...

" और इसलिए इसी वक्त मैने एक महत्वपुर्ण निर्णय लिया है..."

अपना निर्णय बयान करनेके पहले बॉसने जानबूझकर एक बडा पॉज लिया, ताकी उसके निर्णयसे उसे जो रिपोर्टरोंपर इफेक्ट करना था वह ठिक ढंगसे हो. सब तरफ सन्नाटा छा गया.

" और मेरा निर्णय यह है की जिनकी वजहसे गलती होगई उनको इमीडीएटली सजा दी जाए. इसलिए सबसे पहले मै एक समितीका गठन करता हू. वह समिती इस सब गडबडीयोंका और गलतियोंकी पुरी तफ्तीश करेगी. और जिनकी वजहसे यह गलती हो गई है उस ऑफीसरको इस समितीका रिपोर्ट आनेतक बडतर्फ करनेका मै ऐलान करता हूं. "

जॉनको खडे खडे मानो धरणीकंप हूवा हो ऐसा लगा. जॉन आश्चर्यसे उसके बॉसकी तरफ देखने लगा. लेकिन बॉसका खयाल उसकी तरफ कहां था.!

" और उस जगह तबतक आगेकी इन्व्हेस्टीगेशनके लिए मै इसी वक्त दुसरा काबील ऑफिसर नियूक्त कर रहा हूं "

जॉन उसके बॉसका यह रूप पहली बार देख रहा था. वह अभीभी आश्चर्यसे बॉसकी तरफही देख रहा था. अचानक जॉनके आश्चर्यसे बॉसकी तरफ देख रहे चेहरेपर कॅमेरेके फ्लॅश चमकने लगे. अब रिपोर्टरोंने अपना रुख जॉनकी तरफ किया था. बॉसने इस मौके फायदा उठाया और रिपोर्टरोंका रुख जॉनपर होता देखकर वह वहांसे दबे पाव खिसक गया.

बॉस पत्रकाररोंकी भीडसे जो छूटा तो सिधा 'खाट..खाट' जुतोंका आवाज करते हूए अपने कॅबीनकी तरफ निकल पडा. जॉनभी पत्रकारोको टालते हूए भीडसे बाहर आ गया और बॉसके पिछे पिछे चल पडा.

बॉस ऐसा भी धोखा दे सकता है...

पिछले बारभी सब बॉसनेही रिपोर्टरोंके सामने बताया. उसमें जॉनका कुछ भी हाथ नही था... वैसे देखा जाए तो बॉसनेही लगभग जबरदस्ती उसे छुटीपर भेजा था...

जॉनको बॉसका बहुत गुस्सा आ रहा था.

हर बार डिक्टेटरशीप करनेकी और कुछ गलत हूवा तो किसीकोतो भी फसानेका...

जॉन बॉसका काम करने का तरीका अब समझने लगा था.

जॉनकोही क्या किसीकोभी यह हजम ना होनेवाली बात थी. जॉन तेजीसे बॉसके पिछे पिछे जाने लगा. उसे बॉससे सफाई लेनी थी.

बॉस उसके कॅबिनके पास आकर पहूंचा. जॉन बॉसके पिछेही था. बॉसको जॉनकी आहट आई होगी या फिर जॉन उसके पिछे पिछे आएगा इसका अंदाजा हूवा होगा. कॅबिनके अंदर जानेके पहले अचानक ब्रेक लगेजैसा बॉस एकदम रुका. उसके पिछे जॉनभी रुका. बॉस पिछे पलटकर धीरे धीरे जॉनके पास आने लगा. जॉनके एकदम सामने आकर वह रुका. अब वह जॉनके सामने खंबीरतासे खडा होकर उसकी आंखोमे आंखे डालकर देखने लगा. जॉन अभीभी गुस्सेमे था. वह भी गुस्सेसे बॉसके आंखोसे आंखे मिलाकर देखने लगा.

" ऐसे क्या गुस्सेसे देख रहे हो? मुझे क्या खावोगे?" बॉस जॉनपर चिल्लाया.

बॉस अपनी हमशाकी ट्रीक आजमा रहा था. लेकिन इस बार जॉन बिलकुल विचलीत नही हूवा.

फिर एकदमसे बकरी बनकर बॉसने जॉनके कंधेपर अपना सांत्वनाभरा हाथ रख कर कहा,

" आय अॅम सॉरी जॉन. वक्त ही कुछ ऐसा था की मै कुछ नही कर सका "

इस बार जॉन गडबडायाभी नही. वह अभीभी बॉसकी आंखोसे आंखे मिलाकर गुस्सेसे एकटक देख रहा था. बॉसको अहसास हूवा की उसकी ट्रीक काम नही आई थी.

" आय अॅम रिअली सॉरी " बासॅने जॉनका कंधा थपथपाकर अपना हाथ पिछे लिया.

बॉस एकदमसे मुडकर फिरसे 'खाट खाट' ऐसा जुतोंका आवाज करते हूए कॅबिनमें घुस गया. बॉसने एक तिरमें दो निशाने साधे थे. पुलिस डिपार्टमेंटको लोगोंकी नजरोंसे निचा होनेसे बचाया था और जॉनको बरबाद कर डिपार्टमेंटमें अपना खौफ और महत्व और मजबुतीसे बढाया था.

 


एकदम हताश, निराश, बुझा हूवा चेहरा लेकर जॉन अॅँजेनीके सामने बैठा था.

" साला ब्लडी बॉस. ..उसने मुझे दगा दिया. " जॉन गुस्सेसे टेबलपर अपनी कसी हूही मुठ्ठी जोरसे मारते हूए बोला.

अॅँजेली उठकर जॉनके पास गई और उसे सहलाते हूए उसके बालोंमे अपना हाथ फेरने लगी.

'' ऐसा लगा की बंदूक सरेंडर करनेके पहले बंदूक की नाल उसके कनपटीमे रखू और सब की सब गोलीयां दाग दूं उसके मस्तकमें ' जॉन फिरसे गुस्सेसे बोला.

अॅँजेलीने उसके बालोंसे अपना हाथ निकाल लिया. और उसके सामने खडी होकर उसे समझानेके सुरमें बोली, '' देखो जॉन, बॉसपर चिढकर कुछ नही होनेवाला ... बॉसने जोभी किया अपनी चमडी बचानेके लिए. उसकी जगह कोईभी होता तो शायद वह वही करता. "

" नही ... पहलेसेही वह मेरे उपर खफा था... वह मौकेकी तलाशमेंही था और कभी ना कभी वह दगा देने वाला था. " जॉनने उसे तोडते हूए कहा.

" लेकिन बॉसने तुम्हे दगा दिया और उसके लिए तुम्हे क्या करना चाहिए यह बात अब उतनी महत्वपुर्ण नही रही. "

जॉनने उसकीतरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" तूम तुमपर लगे आरोप कैसे निकाल सकते हो यह अब सबसे महत्वपुर्ण है."

" मुझ पर लगे आरोप मै कैसे निकाल सकता हूं ?" जॉनने निराशायुक्त स्वरमें कहा.

" तुमपर लगे आरोप निकालनेका अब एकही रास्ता है "

जॉनने फिरसे उसकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" ... और वह है खुनीको पकडना " उसने जॉनको मानो रास्ता दिखानेकी कोशीश करते हूए कहा.

" पर वह कैसे मुमकीन है ? मेरे सब अधिकार , शस्त्र उन्होने निकाल लीये है. अब अगर मैने प्रयास कीया भी तो भी वह पर टूटे परींदेने आसमानमें उंची उडान भरनेकी कोशीश करने जैसा होगा. "

" नही. ऐसा एकदम हताश होकर नही चलेगा. यह सच है की अब काम बडा जोखीम भरा हो गया है. लेकिन तुम्हारे पास उसके सिवा कुछ चारा भी तो नही है'

जॉन कुर्सीसे उठ गया और खिडकीके पास जाकर खडा हो गया. उसे बाहर रात के अंधेरेमें आसपासके लाईटस की रोशनीमें चमकता हूवा गोल तालाब का पाणी दिखाई दिया.

एकदम शांत ना हलचल ना कोई आवाज...

उस चंचल पाणीको मानो तालाबके किनारोंने बांधा हूवा लग रहा था... .

उसे लग रहा था की शायद उसकी अवस्थाभी कुछ उस पाणी जैसीही थी....

वह गोल तालाबका किनारा देखकर उसे फिरसे शुन्यका खयाल आया. वह स्तब्धतासे काफी समयतक उस तालाबकी तरफ एकटक देखता रहा.

फिर धुमकर वह धीरेसे अँजेनीके पास जाकर खडा हो गया. काफी समयकी चुप्पीके बाद उसेने अँजेनीको एक सवाल पुछा,

" झीरोकी खोज किसने की यह तुम्हे पता है क्या ?"

ईस अचानक सवालसे गडबडाकर अँजेनीने कहा " नही ... लेकिन क्यो?"

जॉन फिरसे खिडकीके पास गया. सोचमें डूबकर वह फिरसे खिडकीके बाहर देखने लगा. फिर बेचैन होकर वह कमरेमे चहलकदमी करने लगा.

अँजेनी उसके दिमागमें क्या चल रहा होगा यह समझनेका प्रयास करती हूई उसके तरफ देखने लगी. लेकिन अँजेनीको उसके खयालोंका कुछ अंदाजा नही हो रहा था.

अचानक रुककर कॉम्प्यूटरकी तरफ निर्देश करते हूए उसने कहा,

"अँजी, जरा वह कॉम्प्यूटरतो शुरु करो"

" कॉम्प्यूटर... किस लिए?" अँजेनीने पुछा.

वह कुछ नही बोला. फिरसे बेचैनीसे कमरेमे चहलकदमी करने लगा. अँजेनी कॉम्प्यूटरके पास गई और उसने कॉम्प्यूटर शुरु किया.

जॉन अपनी चहलकदमी रोककर उसकेपास जाकर कॉम्प्यूटरके सामने बैठ गया और कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखने लगा. अँजेनी मॉनिटरकी तरफ देखते हूए कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखने लगी.

कॉम्प्यूटर बूट होतेही एकदम शांत था जॉन अचानक हरकतमे आगया. जॉन तेजीसे कीबोर्डकी बटन्स और माऊसकी बटन्स दबाने लगा.

अँजेनीने उससे कुछ ना बोलते हूए शांत रहनाही बेहतर समझा. वह कॉम्प्यूटरके स्क्रीनपर वह क्या कर रहा है यह देखने लगी.

जॉनने पहले इंटरनेट कनेक्ट किया. फिर ब्राऊजरपर डबल क्लीक किया.

ब्राऊजर ओपन होतेही उसने उस ब्राऊजरके 'अॅडेस' के जगह टाईप किया.

"गुगल डॉट कॉम"

गुगल सर्च इंजीनकी साईट ओपन हो गई.

गुगलमें उसने सर्च स्ट्रींग टाईप की.

"झीरो इन्व्हेन्शन"

जॉनके दिमागमें क्या चल रहा था यह सब अब अँजेनीके खयालमें आने लगा था.

" हां, मुझेभी लगता है... शून्यकी खोज किसने की ? इस सवालमेंही कातील कौन है ? और वह कत्ल क्यो कर रहा है ? इन सवालोंका जवाब छिपे होगे. " अँजेनी उत्साहसे बोली.

जॉनका तेजीसे की बोर्ड और माऊसकी बटन्स दबाना शुरुही था. की बोर्ड और माऊसकी बटन्स की आवाजसे उसका दिल मानो भर आने लगा था. हमेशा सानी जब ऐसाही कॉम्प्यूटरपर बैठकर काम करता था और ऐसाही की बोर्डका और माऊसका आवाज आता था तब उसे ऐसाही होता था.

वैसीही भावना अब उसे जॉनके बारेमेंभी लगने लगी थी...

चलो एक तो ठिक हूवा जॉन नये जोशके साथ फिरसे काम करने लगा है ...

उसे बहुत अच्छा और हलका हलका महसुस हो रहा था.

" तूम तुम्हारा चलने दो. मै एक गरम गरम मस्त कॉफी लाती हूं " ऐसा कहते हूए अँजेनी किचनमें चली गई.

अँजेनी कॉफी लेकर आयी. जॉन अभीभी काम्प्यूटरपर काम कर रहा था. उसने एक कॉफीका कप धीरेसे, उसे डीस्टर्ब ना हो इसका खयाल रखते हूए, उसके सामने रख दिया.

अपने कपसे एक घूंट लेते हूए वह बोली , " क्या कुछ मिला ? "

उसके बोलनेके दो उद्देश थे. एकतो उसके सामने रखे कॉफीके कपकी तरफ उसका ध्यान जाए और दुसरा सचमुछ उसे कुछ मिला की नही यह जानना.

जॉनने पहले अँजेनीकी तरफ और फिर कॉफीकी कपकी तरफ नजर डाली. और आजूबाजू कुछ ढूंढनेजैसा देखने लगा.

" क्या चाहिए ? " अँजेनीने पुछा.

" कोई कागज, नोटबूक या कुछ लिखनेके लिए है क्या ? "

अँजेनी हॉलमें गई. जॉनने उसके सामने रखे कॉफीका एक घूंट लिया और कॉफीका कप फिरसे वही वापस रखते हूए वह फिर अपने काममे व्यस्त हूवा. इतनेमें अँजेनी एक डायरी लेकर वहा आ गई. उसने वह डायरी खोलकर जॉनके सामने रख दी और पेन अपने हाथमें पकडकर वह हाथ उसके सामने ले गई. डायरी रखनेकी आहट होतेही उसने उधर देखा और अँजेनीके पाससे पेन लेकर वह डायरीपर कुछ लिखने लगा.

अँजेनीने अपने कॉफीका घूंट लेते हूए उसके कंधेपरसे झूककर वह क्या कर रहा है यस समझनेकी कोशीश की.

अचानक जॉनने अपने दायें हाथ की मुठ्ठी कसकर बनाते हूए विजयी स्वरमें चिल्लाया -

"यस्स्"

वह झटसे कुर्सीसे उठकर खडा हूवा. उसे शायद खुनके बारेमें या कातीलके बारेमे कुछ जानकारी मिली होगी.

" क्या ? कुछ मिला ?"

अँजेनीका चेहरा खिल गया था.

" इधर देखो, उस सिरीयल किलरने सबसे पहले सानीका खून किया"

सानीका जिक्र होतेही अँजेनीका खिला हूवा चेहरा मुरझासा गया.

" दुसरा जिसका कत्ल किया उसका नाम था - हुयाना"

अँजेनी उसे क्या कहना है यह समझनेके लिए कभी वह क्या बोल रहा है वह सुनती थी तो कभी उसने डायरीपर क्या लिखा है वह पढती थी.

"तिसरा कत्ल हूवा उस शख्स का नाम था उटीना और हालहीमें जो चौथा खुन हूवा उसका नाम था नियोल '

" तो फिर ? " प्रश्नार्थक मुद्रामें अँजेनीके खुले मुंह से निकल गया.

" और अब जो पाचवा खून होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होना चाहिए'

" यह तुम कैसे कह सकते हो ? "

फिर जॉनने सामने रखी डायरी और इंटरनेटकी कुछ जानकारी अँजेनीको दिखाकर वह उसके सामने कत्लका एक एक रहस्य खोलने लगा. जैसे जैसे एक एक रहस्य खुलता था वैसे वैसे उसकी आखोंमे आश्चर्य दिखने लगता.

 


बॉसके सामने सॅम बैठा था. वह केसके बारेमे बॉसको ब्रीफ कर रहा था. बॉसने जॉनकी सब जिम्मेदारी उसे दी थी. बॉस हमेशाकी तरह रिलॉक्स बैठा सिगारके कश भर रहा था.

इतनेमें वहा पियून आ गया.

बॉसके सामने एक चिठ्ठी रखते हूए बोला,

" साहब, जॉनसाहब आये हूए है "

" जॉन....साहब ..."

'साहब' इस शब्दके उपर जरुरत से जादा जोर देनेसे बॉसके बोलनेका उपरोध स्पष्ट झलक रहा था.

बॉसने चिठ्ठी खोली.

चिठ्ठीमें लिखा था -

" सिरियल किलर केसकी बहुत महत्वपुर्ण जानकारी मेरे हाथ आई है ... इसलिये आपको तत्काल मिलना है.

बॉसने चिठ्ठीके उपरसे चेहरेपर बिना कोई भाव लाये एक नजर घुमाई.

सॅमके सामने चिठ्ठी सरकाते हूए बॉस बोला,

" जब दिए लगाने थे तब तो नही लगाये ... अब ये क्या तिर मारनेवाले है...?"

सॅमने चिठ्ठीपर एक नजर डाली.

अचानक कुर्सीपर सिधा बैठते हूए बॉसने पियून को फर्माया ,

" सेंड हिम इन"

पियून जल्दीसे बाहर गया और बादमे जॉन अंदर आया.

" हॅलो जॉन, हाऊ आर यू?" बॉस उसे सामने कुर्सीपर बैठनेका इशारा करते हूए बोला.

जॉन कुछ ना बोलते हूए सामने कुर्सीपर बैठ गया.

" हॅलो जॉन"

" हॅलो सॅम"

जॉन और सॅममें कमसे कम शब्दोका आदान प्रदान हूवा. दोनोंको अटपटासा लग रहा था.

" यस ... व्हाट कॅन वुई डू फॉर यू?"

बॉस एकदम किसी अनजानकी तरह उससे बात कर रहा था.

" सर, आय हॅव अॅन इंपॉर्टंंट इनफॉरमेशन रिगाडीर्ंंग नेक्स्ट पॉसिबल मर्डर"

" बट अॅज ऑल नो यू आर राईट नाऊ डिस्मीस्ड "

जॉन कुछ नही बोला.

" देन व्हाय शुड यू शेअर द इंन्फारमेशन विथ अस"

" सर देखीए , यह जो जानकारी है उसका आपके डिपार्टमेंटल पॉलिटीक्सके साथ कोई लेना देना नही है. यहा पब्लीकके जिने मरनेका सवाल है. मै अगर इस जानकारी के सहारे अकेला कुछ कर सकता था तो आपके पास कभी नही आता. "

जॉनके शब्दोमें उसका उसके बॉसपरका रोष स्पष्ट झलक रहा था.

बॉसने सामने रखे अॅश ट्रेमे सिगार मसल दी और मुस्कुराते हूवे बोला , " इसे कहते है रस्सी जल गई लेकीन बल नही गया . ऐनीवे क्या जानकारी है तुम्हारे पास ?"

" अगला कत्ल किसका होनेवाला है इसकी पॉसीब्लीटी है मेरे पास " जॉनने कहा.

सॅम चूप था, कभी वह जॉनकी तरफ देखता तो कभी बॉसकी तरफ.

बॉसने जोरसे ठहाका लगाया.

" पॉसीब्लीटी!"

" सर धीस इज नॉट सम काइन्ड ऑफ अ जोक"

बॉसने अपना हंसना रोका.

" देखो , इस शहरमें लगभग 75 हजार मकान है. उसमेंकेही किसी एक मकानमें अगला कत्ल होनेवाला है.. यह पॉसीब्लीटी बतानेके लिए एक मुरखभी काफी है.

" अगला खून जिसका होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होगा. "

बॉसने फिरसे ठहाका लगाया.

" इज धीस सम काईन्ड ऑफ वर्ड पझल"

इतनी देरसे चूप्पी साधे बैठा हूवा सॅम हिम्मत करके बोला.

"सर मुझे लगता है... वुई शुड लिसन थरोली व्हाट हि वांट टू से"

सॅम बिचमें बोला हूवा बॉसको अच्छा नही लगा ऐसा लग रह था. .

" ओ... हो... सॉरी ... मै तो पुरी तरह भूल गया की यह केस तूम हॅन्डल कर रहे हो..." बॉसने उसे ताना मारा.

" सर, मेरा मतलब ... आखीर आपही हमारे बॉस हो... मैनेतो सिर्फ सलाह दी थी ... आखीर क्या डीसीजन लेना है वह आपकाही अधिकार है... ..." सॅम शर्मींदा होकर बोला.

बॉसका 'इगो' सॅटिसफाय हूवा ऐसा लग रहा था. .

बॉस एकदम सिरीयस होगया. कॅबीनमें सन्नाटा छा गया. बॉसने नई सिगार सुलगाई और कुर्सीपर रेलते हूए बोला,

" ओ के देन कॉल द मिटींग"

क्रमश:.

 
बोर्ड रूममें बॉस, सॅम, डॅन और बाकी काफी पुलिस अधिकारी बैठे हूए थे. जॉन सबके सामने एक जगह बैठा था. सब लोग अब वह क्या बताता है यह सुननेके लिए बेताब थे. बॉसको वह क्या बताता है इसमें कोई खास दिलचस्पी नही दिख रही थी.

जॉनने शुरवात की.

" यह जो कातील है वह एक सिरीयल किलर है इसमे किसीकी दोराय नही होगी".

जॉनने सब लोगोंपर एक नजर दौडाई.

" मुझे लगता है अगर हम सिधे मुद्देपरही बात करोगे तो ठिक रहेगा' बॉसने उसे बिचमें टोका.

जॉनको बॉसका ऐसा बिचमें टोकना अच्छा नही लगा था. उसे उसका गुस्सा भी आया. लेकिन अपना गुस्सा चेहरेपर जाहिर ना करते हूए जॉनने सिर्फ एक नजर बॉसपर डाली.

" देखो , कातिलने पहला कत्ल जिसका किया उसका नाम था सानी , दुसरे का हुयाना, और तिसरे शख्सका उटीना और अब हालहीमें जो चौथा कत्ल हूवा उसका नाम था नियोल.

जॉनने फिरसे एकबार बॉसको टालते हूए सब लोगोंपर अपनी नजर घुमाई.

" और अब पाचवा कत्ल जिसका होनेवाला है उसका नाम 'वाय' इस अक्षरसे शुरु होनेवाला है.." जॉन कोई राज खोलनेके आविर्भावमें बोला.

बॉसची उत्सुकता बढ गई थी लेकीन उसने वैसा जाहिर नही होने दिया.

" यह तूम इतने ठोस तरहसे कैसे कह सकते हो ?" किसीने अपनी शंका उपस्थित की.

" बोलता हूं " जॉन एक दीर्घ श्वास लेते हूए बोला.

अब सब लोग एकाग्र होकर ध्यान देकर सुनने लगे.

" हर कत्लके वक्त कातीलने हमे 'क्लू' देनेकी कोशीश की थी. उस सब क्लू में एक कॉमन मुद्दा जो था वह था 'झीरो' और अब चौथे कत्लके वक्त उसने दिवारपर लिखा था -

'झीरोकी खोज किसने की?'

... और उसीमें अगले खुनका रहस्य छिपा हूवा है ... वैसे देखा जाए तो झीरोकी खोज किसने की यह एक विवादातीत मुद्दा है ..."

जॉन झीरोकी खोजके बारेमे बोर्डरूममें बैठे सब लोगोकों जानकारी देने लगा. सब लोग ध्यान देकर सुन रहे थे. लेकिन वह सुनते हूए डॅन बेचैन होगया था. वह बोर्डरूमसे बाहर जानेके मौकेका इंतजार करने लगा...

दुनियाके इतिहासमें शून्यकी खोजको बडा महत्व है. शून्यकी खोजने गणितको एक नई दिशा और पुर्णत्व दिया. शून्यको एक नंबरके हैसीयतसेही नही तो एक कॉन्सेप्टके हैसीयतसे बडा महत्व है. अभीभी विज्ञानमें ऐसी बहुतसारी समस्याए है की जो शुन्यके बिना और परिणामत: 'अगणित' (infinity) इस कॉन्सेप्ट के बिना सुलझाना लगभग नामुमकिन है. शून्यकी खोज किसने की इस बातपर बहुत संभ्रम और अलग अलग धारणाए अस्तीत्वमें है. लेकिन यह भी एक सच है की अमेरिका और युरोप जैसे दुनियाके हिस्सेमें जिसकोकी अब बहुत जादा प्रगत समझा जाता है वहां शुन्यकी खोज नही हूई थी. वहां बाकी खोजोंकी तरह शून्यको चतूराई और कपटसे 'इंम्पोर्ट' किया गया था. इतनाही नही तो युरोप और अमेरिकामें जो रोमन अंकपध्दती शुरुमें इस्तेमाल की जाती थी वह बहुत ही अनपुयुक्त और अपरिपूर्ण थी. क्योंकी उस पध्दतीमें आंकडेंको उसके जगहके अनुसार महत्व या व्हॅल्यू ना होनेसे उस अंक पध्दतीममें गणितके बेसीक प्रक्रियायें जैसे जोडना, घटाना, विभाजन, गुणन भी ठिक ढंगसे और जलद नही किये जा सकते है.

अब शुन्यके बारेमेंही बोलना हो तो एक धारणा ऐसी है की शून्यकी खोज सबसे पहले भारतमें लगी. 1 यह प्राकृतिक पहली संख्या है. 1 के बाद आनेवाली प्राकृतिक संख्या .. 2,3,4,5,6 ... इत्यादि है. इन संख्यांयोंका कोई अंत नही. 1 में 1 का योग करनेसे 2 आता है. 2 में 1 का योग करनेसे 3 आता है. . 3 में 1 का और 4 में 1 का योग करनेसे क्रमश: 4 और 5 आता है. इसी प्रकार 6,7,8... इत्यादि संख्यायें आयेगी. योग इस क्रियाके विरुध्द क्रियाको व्यवकलन यानेकी घटाना कहते है. . 5 मेंसे 1 का व्यवकलन करनेसे 4 प्राप्त होता है , 4 से 1, 3 से 1 और 2 से 1 का व्यवकलन करनेसे क्रमश 3,2,1 ऐसे : प्राप्त होते है. लेकिन अब सवाल आता है की 1 से 1 का व्यवलोकन करनेसे क्या प्राप्त होगा? यह सवाल सबसे पहले भारतीय ऋषींयोंके दिमागमें आया . 1 से 1 का व्यवलोकन करनेसे रिक्तता उत्पन्न होती है , और उसे 0 के स्वरुपमें लिखा जाता है.. शून्यको संख्याके स्वरुपमें किसने उपयोगमें लाया यह कहना थोडा कठिन है. लेकिन इतनी जानकारी मिलती है की ई.पू. दुसरे शताब्दीमें यूनानके जोतिषी शून्यकेलिए 0 का इस्तेमाल करते थे. लेकिन वह लोगभी उसी अर्थसे उसका उपयोग करते थे जिस अर्थसे बॅबीलॉनीयन लोग उपयोग करते थे. 200 ई.पू. आचार्य पिंगलके छन्द: सूत्रमें शून्यका इस्तेमाल मिलता है. भक्षाली पाण्डूलिपिमें (300 ई.) शून्य चिन्हका (0) प्रयोग कर संख्याए लिखी हूई मिलती है. इस ग्रंथके 22वे पन्नेपर शून्य चिन्ह (0) मिलता है. शून्याका सबसे प्राचीन चिन्ह है (.).

शून्यका खोजही नही तो बीजगणित, भूमिती इन सबपर आर्यभट्ट् गणिततज्ञके कालमें बहुत कार्य किया गया. लेकिन वह सब कार्य संस्कृतमें सूत्रोंके स्वरूपमें होनेसे जिनको संस्कृत नही आता वे उसे समझ नही पाए. कालके साथ भारतमें वह पिढी दर पिढीतक मुखोद्गद करके संजोया गया. शून्यके खोजका मूल भारतीय इतिहासके वैदिक कालमें अलग अलग स्वरूपमें मिलता है. सबसे पहला जिसे कोईभी ठूकरा नही सकता ऐसा प्रमाण ग्वालेर को मिला. ग्वाल्हेरमें एक जगह संवत 933 में खुदाये गये कुछ आंकडे मिले. वहा एक जगह 50 हार का उल्लेख मिलता है और 270 यह संख्या हिंदी अंकका उपयोग कर लिखी हूई है. यहा शून्यका संख्याही नही तो प्लेस होल्डर के हैसीयतसेभी उपयोग किया गया है.

दुनियाके इतिहासमें बह्मगुप्त यह पहले गणिततज्ञ थे की जिन्होने नॅचरल नंबर्स और झीरोपर अलग अलग गणिती प्रक्रिया करनेका प्रयास किया था. औरभी कुछ सभ्यताओंने जैसे बॅबीलॉनीयन लोगोंनेभी एक चिन्ह शून्यके लिए प्लेसहोल्डर और एक संख्या की हैसीयतसे इस्तेमाल कीया था. लेकिन एक धारणाके अनुसार दुनियाके इतिहासमें भारतीय सभ्यतामेंही सबसे पहले झीरोका एक संख्या, एक प्लेस होल्डर और एक संकल्पना के हैसीयतसे इस्तेमाल हूवा था. इस चिन्हको , उस प्लेस होल्डरको और संकल्पनाको भारतीय वेदीक साहित्यमें 'शून्य' ऐसा नाम दिया हूवा मिलता है .

जॉनने बोर्डरूममे इकठ्ठा हूए सबको झीरोके खोजके इतिहासके बारेमें संक्षीप्तमें जानकारी दी.

" और इस झीरोमेंही कत्लका रहस्य छिपा हूवा है... भारतीय इतिहासमें जगह जगह झीरोका उल्लेख 'शून्य' इस नामसे मिलता है. "

जॉनने एक दीर्घ सांस ली और आगे बोलने लगा.

" पहला खून हूवा उसका नाम सानी मतलब वह 'एस' (S) इस अक्षरसे शुरु होता है. दुसरा खून हूवा उसका नाम हूयाना यानी की वह 'एच' (H) इस अक्षरसे शुरु होता है. तिसरा खून जिसका हूवा उसका नाम उटीना जो की 'यू' (U) इस अक्षरसे शुरु होता है. और अब हालहीमें जिसका खुन हूवा उसका नाम 'नियोल' जो की 'एन' (N) इस अक्षरसे सुरू होता है. मतलब 'एस् एच् यू एन वाय ए' (SHUNYA) 'शून्य' यानीकी अब जो खून होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसेही शुरु होगा इसमें कोई दोराय नही होनी चाहिए"

जॉनने किये त्रुटी रहित विश्लेषनसे सब लोग उसपर खुश लग रहे थे - बॉसभी.

" लेकिन इस शहरमें जिसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होनेवाले हजारो या लाखो लोग होंगे. तब क्या हम उन सब लोगोंको प्रोटेक्शन देंगे?" बॉसने आपनी अडचन चाहिर की.

 
" इतने लोगोंको संरक्षण देना तो लगभग नामुमकीन होगा !" सॅम ने कहा.

" नही... और एक बात मुझे इस सब मामलेमें मिली है ... जिसकी वजहसे हम लोगोंका टारगेट नॅरो डाऊन होनेवाला है " जॉनने कहा.

और एक आशाका किरन दिखेजैसे सब लोग जॉनकी तरफ उत्सुकतासे देखने लगे. फिर जॉन अपने कुर्सीसे उठ गया और सामने टंगे शहरके नक्षेके पास गया. वह अपने पासके कुछ कागजभी साथ ले गया. फिर अपने पासके कागजकी तरफ देखते हूए उसने सामने नक्षेपर लाल स्केच पेनसे एक क्रॉस किया.

" पहला खून हूए सानीका घर शहरमें लगभग यहांपर है. "

सब लोग जॉन क्या बताना चाहता है यह समझनेका प्रयास करने लगे.

जॉनने अपने पासके कागजसे देख देखकर सामने नक्शेपर और एक लाल क्रॉस किया.

" दुसरा खून हूए हूयानाका घर यहां कही है.. "

उसने और एक क्रॉस नक्शेपर मारते हूए कहा,

" तिसरा खून उटिनाका हूवा और उसका घर यहा पर है.. "

" और आखरी खून नियोलका हूवा और उसका घर"

जॉनने फिरसे एकबार अपने पासके कागजकी तरफ देखते हूए नक्शेपर एक क्रॉस करते हूए कहा, , "ये .. यहा है "

सबके चेहरेपर अभीभी संभ्रम था .

" लेकिन इससे क्या साबीत होनेवाल है .?" सॅमने प्रश्न उपस्थित किया .

" मतलब .....एक तो तुम्हे क्या कहना है यह तुम्हेही नही समझ आ रहा है ... या फिर हमारे सरके उपरसे जा रहा है.. " बॉसने कहा.

" जरा ध्यान देकर देखो .... सोचो ... तुम्हारे कुछ खयालमें आता है क्या ?"

जॉनने एकबार बोर्डरूममें बैठे सब लोगोंकी उपरसे नजरे घुमाई.

काफी समय चुप्पीमें गया. सब लोग उससे कुछ साबीत होता है क्या यह देखने लगे.

फिर जॉनने सामनेके नक्शेपर हरे डॉटस देते हूए सब लाल क्रॉसके उपरसे एक वक्र लकिर निकाली. वह वक्र लकिर जहांसे निकाली थी वहां फिरसे जोड दी. फिर उस डॉटसके उपरसे एक मोटी हरी लकीर निकाली. और क्या आश्चर्य उस नक्शेके उपर एक सर्कल दिखने लगा.

"यह देखो यह क्या निकला"

" सर्कल" एकने कहा. .

" सर्कल नही... यह शून्य है " जॉनने गूढ भावसे कहा.

सामने बैठे सभी लोगोंके चेहरेपर सबकुछ बोध होनेके आनंदयुक्त और उत्साहपूर्ण भाव आ गये थे.

" यस्स... यू आर जिनीयस जॉन!" सॅमके मुंहसे अनायास ही निकल गया.

बॉसने सॅमकी तरफ नाराजगीसे देखा.

" पहला क्रास यहां, दुसरा यहां , यहां तिसरा और यहां चौथा. "

जॉन नक्शेपर क्रॉसकी तरफ निर्देश करते हूए बोला.

" मतलब पांचवा क्रास यही कही होना चाहिए. "

जॉनने चक्रपर चौथे और पहले क्रॉसके बिचमें जो खाली जगह थी वहा एक पांचवा क्रॉस निकाला.

" इस पांचवे क्रॉसके एरियामेंही कातिल का अगला निशाना छूपा हूवा है और उसका नाम 'वाय'(Y) इस अक्षरसे शुरु होता है . यह दो जानकारीयोंमे बैठनेवाले लगभग तिन या चार मकान होंगे. और वह भी पॉसीब्ली दसवे मालेपर ... क्योंकी हर खुनके वक्त कातिलने दसवा मालाही चूना है "

" यस ....इन मकानोंपर अगर हम नजर रखते है तो कातिलको हम जरुर पकड पायेंगे.." सॅमने उत्साहसे भरे स्वरमें कहा.

इतनेमें एक पियून अंदर आकर बॉसके पास जाकर धीरेसे बोला,

" साहब , आपका अर्जंंट फोन है "

बॉस कुर्सीसे उठ गया.

" यू कॅरी ऑन. आय वील बी बॅक सून" बॉस जॉनको और बाकी लोगोंको बोलते हूए 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बोर्डरूमसे बाहर निकल गया.

जॉन, सॅम और बाकी पुलिसके अधिकारी पांचवे कत्लके वक्त कातिलको कैसा पकडना है इस बारेमे चर्चा करने लगे. जॉनने पहले सबको बोलनेका चान्स दिया और उनका कहना ध्यान देकर सुना. और सबके चर्चाका एक मध्य निकालकर कातिलको पकडनेका एक तरीका तय किया. चर्चामें उसने सबको एक सरीका अवसर और मौका दिया था. यह चर्चाका तरीका सबके लिये नया ही था. क्योंकी बॉसका तरीका अलगही रहता था. उसका डिक्टेटरशीपमें जादा विश्वास था. यह डेमोक्रॅटीक तरीका सबको पसंद आया था. इसमें सबका इन्वॉल्वमेंट होनेसे सबको प्रोत्साहन मिलता था. लेकिन उनको चिंता थी की अगर अब बॉस वहा आगया तो सब गडबड कर देगा. और वैसाही हूवा. उनकी चर्चा आधेमेंही होगी तब अचानक वहां तेजीसे बॉस आया. उसके चेहरेपर पसिना आया हूवा था. उसकी वह दशा देखकर सब लोग शांत होगए. जरुर कुछ अघटीत घटा था. उसके पिछे पिछे एक पियून एक लॅपटॉप लेकर आया.

" एक गडबड हो गई है " आतेही बॉसने कहा.

सब लोग स्तब्ध होकर बॉस क्या कहता है यह सुनने लगे.

" यह कातिल कोई अकेला आदमी ना होकर कोई संघटना होगी ... कोई बडी संघटना .. शायद टेररिस्ट संघटना"

" टेररिस्ट संघटना?" सबके मुंहसे आश्चर्योद्गार निकले.

क्योंकी वहां बैठे सबके लिए यह नई जानकारी थी. किसीनेभी इस केसको उस तरहसे नही सोचा था.

" प्रेसका फोन था.. सब तरफ गडबडी मची हूई है... उन लोगोंने इंटरनेटपर एक ऑडीओ रिलीज किया है. " बॉसने एक सांसमे बताया.

फिर बॉसने डॅनको लॅपटॉप शुरू करनेका आदेश दिया. डॅन लॅपटॉप शुरू करने लगा और बॉस आगे बोलने लगा,

" मैने अभीतक ऑडीओ सुना नही है. मुझे लगता है वह हमें सुनना चाहिए" बॉस लॅपटॉपके सामने बैठते हूए बोला.

तबतक डॅनने लॅपटॉप शुरु कर गुगल सर्च इंजीन ओपन किया. डॅनको बॉसके बोलनेसे पता चला था की पहले वह ऑडीओ फाईल इंटरनेटपर ढूंढनी पडेगी.

डॅनने सर्च स्ट्रींग टाईप करनेके पहले 'क्या सर्च स्ट्रींग दूं ' इस आविर्भावसे बॉसकी तरफ देखा.

वैसे बॉसका और डॅनका टयूनिंग अच्छा था. किसके मनमें क्या चल रहा है यह उनको एकदूसरेके साथ हमेशा रहनेसे पहलेही पता चलता था.

" झीरो मिस्ट्री" बॉसने कहा.

डॅन ने ' झीरो मिस्ट्री' सर्च स्ट्रींग देकर सर्च बटन क्लीक किया. एक पलमें सौसे उपर निले कलरकी लिंक्स कॉम्पूटरके ब्राउजरपर दिखने लगी.

सब लोग अपना जितना हो सकता है उतना सर अंदर घुसाकर मॉनिटरकी तरफ देखने लगे.

" वह चौथी लिंक " बॉसने कहा.

सॅमने वह चौथी लिंक क्लीक की. एक साईट ओपन हो गई. उसपर एक ऑडीओ फाईलकी लिंक थी. प्ले और डाऊनलोड ऐसे दो ऑप्शन्स थे.

"प्ले इट डायरेक्टली" बॉस ने आदेश दिया.

सॅमने प्ले बटनपर क्लीक किया. पहले ऑडीओपर जैसे किसी चक्रवातके पहले सन्नाटा होता है वैसा सन्नाटा था. फिर एक धीरगंभीर आवाज घुमाने लगा. सब लोग एकदम चूप होकर सुनने लगे -

" मेरे हिंदूस्थानी भाईयों और बहनो..."

बिचमें एक लांबा पॉज था.

बोर्डरूमके सब लोगोंने एक दुसरेकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

ऑडीओका आवाज फिरसे बोर्डरूममें घुमने लगा. .

 
" किसी ना किसी तरह कोई हमपर आजतक राज करते आया है. हमे जैसे गुलामी की आदत सी हो गई है. इससे पहले 150 साल तक हमपर ब्रिटीश लोगोंने राज किया ... और बुरी तरह... किसी जानवरो की तरह हमसे बर्ताव किया. यह लोगोंका हमपर राज करने का सिलसिला अभीभी जारी है. अभीभी हमपर कोई राज कर रहा है. यह सुनकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा. लेकिन यह सच है और यह आश्चर्य की नही शर्म की बात है. हमारे गुजरे हूए कल पर थोडी नजर डाली जाएँ तो यह जो आजका प्रगत विज्ञान है. इसकी नींव हमने रची हुई है. लेकिन उसे कोई मानने को तैयार नही. वह विज्ञान इन प्रगत देशोंने या तो हमसे चुराया है या अपने ताकद की जोर पर जबरदस्ती हमसे हथीया लिया है. उदाहरण के तौरपर है शून्य. शून्य का शोध हमने लगाया है. लेकिन यह कोई मानने के लिए तैयार नही. पायथॅगोरस थेरम उसका शोध हमारे पूर्वज वैज्ञानिक आर्यभट्टने लगाया. लेकिन आज वह किसी और के नाम से प्रचलित है ज्या (sine) का शोधभी आर्यभटने लगाया है. ये होगए गणिती क्षेत्र के शोध और संशोधन. स्वास्थविज्ञानमें विविध जडीबूटीयाँ, उनके औषधीय उपयोग. इन सबको अनदेखा करते हूए अमेरिकाका हल्दीका पेटेंट अपने झोलीमें डालनेका प्रयास किसीको नागवार गुजरा नही क्योंकी वह एक शक्तीशाली देश है. अपने शक्तीके जोर पर वे कुछ भी करने की क्षमता रखते है. अपने शक्ती के जोर पर वे किसी झूठ को सच का सुनहरी मुलामा देकर मिडीया का सहारा लेकर सारे विश्वपर थोपते है. ऎैसे बहुत सारे शोध है जो हमने लगाये हूए है लेकिन वह आज कोई दुसरे लोगोंने चुराकर अपने नाम पर कर लिए है या फिर वे अपने ताकत के जोरो पर उसको वे अपना संशोधन या शोध बताते है. इससे एक बात साबीत होती है की हम दिमागी तौर पर ना कभी कीसी देशसे कम थे ना है. हाँ आज भी नही है. आज इस वक्त अमेरिका, युरोप मे हमारा ब्रेन ड्रेन हो चूका है. यह बात यह साबीत करती है की आज भी दिमागी तौर पर हम किसीसे कम नही है. हमारे पास दिमाग होते हूए भी यह सब क्यो हो रहा है? उसके लिये हमारी सोई हूई राष्ट्रीयता और इन प्रगत देशोंकी हमारे प्रति नीतीयाँ और उनका हमारे अंदरूनी मामलेमें हस्तक्षेप है.

उन लोगोंका हमारे प्रती ध्यान खिंचकर उन्हे झिंजोरने के लिए और अपने हिंदू लोगोंका सोया हूवा धर्माभीमान , अभिमान और राष्ट्रीयता जगाने के लिए हमने यह 'झीरो मिस्ट्री' हत्या श्रृंखला अभियान चलाया है. क्योंकी सोये को जगाया जा सकता है लेकीन सोनेका ढोंग करने वाले को जगाने के लिए किसी बडे धमाको की जरूरत होती है. हाँ इस वक्त हमें बडे धमाके की जरूरत है. क्योंकी हमेशा हमारे अहिंसा और शांतीप्रीय भाव को लोगोंने गलत तरीके से लिया है और उसकी वजहसे वे हमे कमजोर समझते है. यह तो सिर्फ पहला कदम है. हमें अपना खोया हूवा वैभव पाने के लिए और बहुत कुछ करना बाकी है. मुझे आशाही नही बल्की विश्वास है की आप सब हिंदू लोग इस अभियान मे हमारा तहे दिलसे साथ देंगे. हिंदूज आर मच मोर कॅपॅबल बी रेडी फॉर रूलींग द र्वल्ड ...

... जय हिंद! "

मेसेज हिंदीमें था. बोर्डरूमें किसीकोभी हिंन्दी नही आती थी. लेकिन बोर्डरुममें बैठे एक भारतीय मुलके एक अधिकारीके वजहसे बाकी लोगोंको समझनेमं दिक्कत नही हूई. मेसेज सुनते वक्त बिचबिचमें वह अपने साथीयोंको इंग्लीशमें ट्रान्सलेट कर बता रहा था.

बोर्डरूममें एक अजीब सन्नाटा फैला हूवा था.

" माय गॉड" बॉसके मुंहसे निकल गया.

" इट इज अ टेररीझम?" सॅमने पुछा.

" नो. नॉट सिप्ली टेररीझम इट्स हिंदू टेररीझम... अर्लीयर वुई वेअर व्हीक्टीम ऑफ मुस्लीम टेररीझम. नाऊ इटस् हिंदू टेररीझम आल्सो इन द लिस्ट" बॉसने कहा.

" सर मुझे लगता है हमें किसीभी हालमें अगला कत्ल होनेसे बचाना चाहिए. " जॉनने कहा.

" मि. जॉन अब यह मामला सिर्फ एक सिरीयल मर्डर केस नही रहा है.... नाऊ इट हॅज बिकम अ फेनॉमेनॉन" बॉसने कहा.

" लेकिन अगर हम यह अगला कत्ल होनेसे अगर रोक सके ... और कातिलको पकड सके ... तो इसपर जरुर कुछ नियंत्रण आयेगा " जॉनने अपनी राय व्यक्त की.

" अब क्या क्या टाल सकते है हम... अब पहलेसेही सारी अमरिकामें भारतीय अमेरिकन और अमेरिकन लोगोंमें दंगे भडक चूके है. और कातिल एक ना होकर एक टेररीस्ट संघटना है. हिंदू टेररिस्ट संघटना "

' लेकिन यह दंगे इतने जल्दी एकदमसे कैसे शुरु हूए? '' सॅमने आश्चर्य व्यक्त करते हूए कहा. .

" 9/11 के दरम्यान लोगोंका गुस्सा एक सीमातक यानी की उनकी थ्रेशोल्ड लेव्हलतक पहूंच गया था. ... और अब यह और एक टेररीझम सुनकर उनका गुस्सा आऊट र्बस्ट होगया है.." बॉसने मानो लोगोंके आचरण का विश्लेशण किया. वैसे मॉब बिहेवीयर और मॉब टेन्डंसीके बारेमे बॉसका अच्छा खासा अध्ययन था. फिरसे पियून अंदर आया.

" साहब, मेयरका फोन" पीयूनने बॉसके कानकेपास झूककर अदबसे कहा.

बॉस उठ खडा हूवा.

" चला उठो .. अब हमें यह दंगा फसाद काबूमें लाना पडेगा."

बॉस बाहर जाने लगा. जॉन छोडकर सब लोग उठकर बॉसके पिछे पिछे जाने लगे. जॉन नाउम्मीद होकर सब जानेवालोंको देखता रहा.

बॉस और बाकी पुलिस टीव्हीके सामने खडे होकर सारी अमेरीकामे किसी आगकी तरह फैले दंगे फसाद की खबरे देख रहे थे. बिच बिचमें फोन बज रहा था. उसे एक पुलिस अटेन्डंट अटॆंड कर रहा था. बॉसने दुसरा न्यूज चॅनल लगाया. वहां भी वही. सब न्यूज चॅनल्सपर वही खबरे - दंगा, फसाद, लाठीचार्ज , टीयर गॅस, सब वही खबरें थी.

इतनेमें जॉन आवेशसे अंदर आया. उसकी तरफ सॅमने सहानुभूतीपूर्वक देखा. बॉसने देखकर ना देखे ऐसा किया और बाकी सब अपने अपने काममे व्यस्तता का अभिनय कर रहे थे. बॉसका ऐसा टालना उसे अच्छा नही लगा. वह लगभग चिल्लाकरही बोला,

" सर, पाचवा कत्ल अगर हम रोक नही पाए तो यही दंगे पर उतारू लोग खुन खराबा कर सकते है...फिर उनको रोकना बडा मुश्कीलही नही नामुमकीन हो जाएगा.... किसीभी हालमें हमें यह कत्ल रोकना जरुरी है. "

बॉसने एक कटाक्ष जॉनकी तरफ डाला. फिर कुछ सोचा और सॅमकी तरफ देखकर बोला,

" सॅम मुझे लगता है जॉन सही कह रहा है. तूम और और दो लोग उसके साथ जाओ और कुछ करने लायक हो तो देखो. "

फिर बॉस जॉनकी तरफ मुडा.

" आय अॅम सॉरी जॉन लेकिन मै अब इस हालमें इतनाही कर सकता हूं "

जॉनने बॉसके बोलनेमेंका व्यंग भाप लीया था... उसने उसके सादे कपडे की तरफ देखकर ताना मारा था.

जॉन कुछ बोले इससे पहले बॉसने संभलकर कहा,

'' क्योंकी कॅनॉट प्लेसको दंगाफसाद शुरु हो चूका है... मुझे वहाभी लोग लगेंगे और औरभी जगह फसाद हो सकते है... "

जॉन बॉॅसको कुछ बोले इससे पहले बॉसके लिए और एक फोन आया.

बॉस फोन अटेंड करनेके पहले जॉन और सॅमसे बोला,

"तुम जल्दी जाओ... वक्त मत बरबाद करो "

जॉन और सॅम जल्दी जल्दी बाहरकी ओर निकले.

हिमालय के पर्बतोंकी गोदमें बहते नदी के तटपर जो गुंफा थी उसमें ध्यानमग्न अवस्थामें बैठा ऋषी, अचानक चौंककर अपने समाधी अवस्थासे बाहर आ गया. उसकी आंखे लाल थी और चेहरेपर कुछ रहस्य सुलझनेका गुढ आनंद झलक रहा था. उसके चेहरेपर एक रहस्यमय मुस्कुराहट फैल गई. धीरे धीरे अपने आप उसकी आंखे फिरसे बंद हो गई. और फिर वक्त, जगह और अपने शरीर से अनजान उनकी सुक्ष्म अस्तीत्वका विचर सब मर्यादाएं लांघकर बंधनमुक्त होकर होने लगा.

जंगलमें पर्णकुटीके पास तिन लोग आपसमे कुछ चर्चा कर रहे थे. इतनेमें वहा वह ऋषी आगया. उसकी आहट होतेही सबलोग पलटकर उसकी तरफ देखने लगे.

यह तो वही ऋषी है...

जो उनको पहले एक बार मिला था...

उनको उसके लब्ज याद आ गए-

" चिंता मत करो.. मै तुम्हे तुमारे दुविधासे बाहर निकालूंगा "

वे बडी आस से उसकी तरफ देखने लगे.

ऋषीके चेहरेपर एक गूढ मुस्कुराहट दिखने लगी.

" आप लोगोंकी पहेली सुलझीही समझो " ऋषी गूढभाव से बोला.

" क्या? ... हमारी पहेली सुलझी?" तिनोंके मुंहसे खुशीसे निकला.

ऋषीने एक संस्कृत श्लोकका जोरसे उच्चारण किया -

ॐ पूर्णं अद: पूर्णं इदं, पूर्णात् पूर्णं उदच्यते ।

पूर्णस्य पूर्णं आदाय, पूर्णं एवाव शिष्यते ॥

"अर्थात जब पूर्णका पूर्णसे संयोग होता है या पूर्णसे पूर्ण निकाला जाता है तब बाकी पूर्णही रहता है. ब्रह्म यह परिपूर्ण है... इसलिए ब्रह्ममें बह्म मिलाया जाए तो या ब्रह्मसे ब्रह्मको निकाला जाए तो आखीर बाकी ब्रह्मही रहता है.

यहां पूर्ण और ब्रह्म यानीकी अगणित हो सकता है... जैसा दिन हो तो रात आतीही है, प्रकाश के विरुध्द अंधेरा होता है... वैसे जहा पूर्ण यानी अगणित हो वहां उसका विरुद्ध रिक्तता यानी शून्य आनाही चाहिए."

सामने नदीकी तरफ इशारा करके फिर ऋषीने आगे कहा, " उस पाणीमे बुलबुले देखो कैसे बनते है और कैसे नष्ट होते है "

" ऐसी एक चिज है की वह कभी कुछभी नही और कभी कभी सबकुछ है... वह जहांसे शुरु होती है खतमभी वही होती है... वह ऐसी चिज है की जिससे यह ब्रह्मांड, आप और मै तैयार हुए है... वह ऐसी चिज है की जिसमे सबको एक दिन समा जाना है "

बोलते बोलते ऋषी उन तिनोंके इर्द गिर्द गोल गोल चल रहा था.

"ऋषीवर, हम लोग गणितपर संशोधन कर रहे है हमें हमारे पहेली का गणिती हल चाहिए ; ना की आध्यात्मिक ' उनमेंसे एकने कहा.

" हां, आप लोगोंका संशोधन आपलोगोंको जिस वजहसे अपूर्ण लग रहा है वह आपके पहेलीका हल जितना गणिती है उतनाही आध्यात्मिक है. "

फिर ऋषीने सबको उठकर एक तरफ आने के लिए कहा और गोल गोल चलकर पैरके निशानोंसे जो गोल बना था उसकी तरफ निर्देश कर कहा,

'' तुम्हे तुम्हारा संशोधन पुरा करनेके लिए जिस बात की जरुरत थी वह है शुन्य"

तिनोंके चेहरेपर खुशी झलक रही थी.

ऋषीने कहा " शून्य जहा शुरु होता है खतम भी वही होता है"

एकने बडासा गोल निकाला.

ऋषीने कहा " कभी शून्य कुछभी नही"

एकने 0 को 6 मे जोडकर 6 ही आता है ऐसे लिखा.

ऋषीने आगे कहा " कभी शून्य सबकुछ है यानी सर्वसमावेशक है"

दुसरेने 0 बार 6 करनेसे 0 आता है ऐसा लिखा.

उन तिनोंके संशोधन कार्यको अब गती मिली थी. वे तिनो अपने कार्यमें व्यस्त हो गए. जब वे व्यस्तसा से जागे तब उन्होने आजूबाजू देखा. तो ऋषी वहा नही था.

उनके चेहरेपर आश्चर्य झलक रहा था. .

कहा गया वह ऋषी?...

शायद वह शून्यमें विलीन हूवा था....

 


जॉन और सॅम कॉर्पोरेशनके ऑफीसमें बैठे थे. जॉनने अपने हातमे जो नक्षा था वह एक ऑफिसरके सामने खोलकर टेबलपर फैलाया. वह शहरका नक्षा था और उसपर पांच क्रास निकालकर उसमेंसे एक गोल चक्र निकाला था. जॉनने पांचवे क्रॉसकी तरफ इशारा कर ऑफीसरसे कहा,

" मि. पिटरसन हमें इस एरियामें रह रहे और जिनके नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होते हो ऐसे लोगोंकी लिस्ट चाहिए "

" इस एरियाके और 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होनेवाले निवासी? मुझे लगता है हमें उसके लिए कॉम्प्यूटरकी सहायता लेनी पडेगी "

फिर पीटरसन खडा होते हूए बोला,

" आवो मेरे साथ "

पिटरसनन उन्हे एक कॉम्प्यूटर सेंटरमें ले गया. अंदर चार पाच क्यूबीकल्स थे. और क्यूबीकल्समें कॉम्प्यूटरपर काम करनेमें व्यस्त स्टाफ बैठा हूवा था. कॉम्प्यूटरपर काम कर रहा स्टाफ खासकर लडकियांही थी. पिटरसन उन्हे एक क्यूबीकलके पास ले गया. वहां एक बॉबकटवाली युवा लडकी कॉम्प्यूटरपर बैठी हूई थी. वह अपने काममें व्यस्त थी. उसकी आंखोपर ऐनक लगा हूवा था.

पिटरसनने उस लडकीसे कहा,

" मेरी, इन लोगोंको कुछ निवासी लोगोंकी लिस्ट चाहिए"

जॉनने अपने हाथमें था व नक्शा फिरसे उसके सामने फैलाकर कहा,

" इस एरियामें रहनेवाले... " जॉन नक्शेपर किये क्रॉसकी तरफ निर्देश करते हूए बोला.

"... और जिनके नाम 'वाय' अक्षरसे शुरु होते हो ऐसे "

उस लडकीने पहले जॉन और फिर सॅमकी तरफ एक दृष्टीक्षेप डाला. नक्शेमें बताये हूए जगहपर देखकर वह बोली,

" शुअर सर... जस्ट अ मिनट"

उसने उस क्रॉसकी तरफ देखकर तिनचार कॉलनीके नाम उसके सामने रखे एक कागज के टूकडे पर लिखे. फिर उसने कॉम्प्यूटरके डेस्कटॉपपर एक आयकॉन ढूंढा और उसपर डबल क्लीक किया.

सामने एक सॉफ्टवेअर खुल गया था. उसमें अलग अलग मेनू थे और उन मेनूमें अलग अलग आप्शन्स दिख रहे थे. आंखे छोटी करते हूए उसने एका मेनूके निचेका एक ऑप्शन सिलेक्ट किया.

सामने टेक्स्ट बॉक्समें उसने 'वाय स्टार' (Y*) टाईप किया और दुसरे सिलेक्शन बॉक्समें उसने कागज के टूकडे पर लिखी सब कॉलनी और एरियाके नाम बिचमें कॉमा देकर एकके बाद एक ऐसे लाईनमें लिखे.

वह क्या टाईप कर रही है या कहां कहां माऊस क्लीक कर रही है यह देखनेसे उसकी सफाईसे चल रही हाथोकी और उंगलीयोकी गतिविधीयां मजेदार लग रही थी.

बस अब एक बटन क्लीक करनेकीही देरी थी !..

आखीर उसने 'फाईन्ड' बटनपर माऊस क्लीक किया.

मॉनिटरपर 'फाईन्डीग' ऐसा मेसेज दिखने लगा.

अगर कॉम्प्यूटर नही होता तो यह सब जानकारी ढूंढना बडाही मुष्कील काम था. ....

जॉन सोच रहा था.

और कॉम्प्यूटर भी क्या है तो सब 'शून्य' और 'एक' का खेल. यह 'शून्य' यहांभी आ गया!...

एकदम मॉनिटरपर 29 निवासी लोगोंके नाम उनके पत्तो के सहित दिखने लगे.

" उनतीस लोग !" सॅमके मुंहसे निकल गया.

" अच्छा अब इनमेंके कौन कौन दसवे मालेपर रहते है यह पता चल सकता है क्या?" जॉनने मेरीको पुछा.

" दसवे मालेपर ? कॉम्प्यूटरके मदतसे पता चल सकता है ... लेकिन मुझे लगता है ... अगर हम उनके पते पढकर पता करे तो जादा सुविधाजनक रहेगा. " मेरीने कहा.

उसने अपने उंगलीयोंकी सफाईदार हरकतोंसे प्रिंट कमांड देकर उनतीस लोगोंके नाम उनके पतेके साथ बगलकेही प्रिंटरपर प्रिंट किए.

मेरीने वह प्रिंट हाथमें लेतेही सॅम और जॉन अपना सर बिचमें घुसाकर उस प्रिंटकी तरफ देखने लगे. वे उस प्रिंटके निवासीयोंके अॅड्रेसके रकानेसे अपनी नजर दौडाने लगे. अॅड्रेसमें फ्लोअर का जिक्र कही फ्लॅटके नंबरमें था तो कही अलगसे था. कही कही तो फ्लोअरका जिक्र रोमन नंबरमें किया हूवा था. उनके अब खयालमें आया था की दसवे मालेके निवासी कॉम्प्यूटरके मदतसे ढूंढना सचमुछ कितना मुष्कील हूवा होता.

जॉनने वह प्रिंट अपने हाथमें लेकर उसमेंके तिन लोगोंके नामपर 'टीक' किया.

जॉनने मेरीसे और पिटरसनसे हाथ मिलाया.

" थँक यू मेरी... थँक यू पिटरसन... यू हॅव रिअली मेड अवर जॉब इझी... थँकस्"

" यू आर वेलकम"

जॉन और सॅम प्रिंट लेकर वहासे जल्दी जल्दी निकल गए.

जॉन और सॅम कार्पोरेशन आफिससे बाहर आ रहे थे. बाहर आते वक्त लोगोंकी भिड, इधरसे उधर फाइल्स ले जानेवाले ऑफिस बॉइज उनके बिचमें आ रहे थे. उस भिडसे रास्ता निकालते हूए वे ऑफिसके बाहर मैदानमें आगए. मैदानमें आनेके बाद कहा उन्हे अच्छा लगा.

" सर , अब क्या करेंगे ?" सॅमने जॉनके साथ चलते चलते कहा.

वैसे देखा जाए तो अब केसका पुरा चार्ज ऑफीशियली सॅमके हाथमें था. फिरभी वह उसके डिसमीस हूए बॉस जॉनका बडप्पन नही भूला था.

" मुझे लगता है बॉसने अपनेसाथ जो दो लोग दिए है उनको हम पहले इन दो जगह पर निगरानी करनेके लिए तैनात कर देंगे. ."

" हां ... मुझे लगता है यू आर राईट '' सॅम अपने जेबसे मोबाईल निकालते हूए बोला.

सॅमने एक नंबर डायल किया.

" हॅलो ... अँथानी ... देखो ... हमें पाचवे खुनके तीन पॉसीबल अॅड्रेसेस मिले है ... उसमेंका एक अॅड्रेस मै तुम्हे बताता हूं ... वहां तुम्हे जल्दसे जल्द निगरानीके लिए जाना है... हां अॅड्रेस लिख लो..."

सॅमने एक निवासीका नाम और अॅड्रेस अँथनीको बताया.

वह आगे बोला , "... और फौरन उधर जावो ... उसके जानको खतरा है..."

सॅमने फोन कट कर दिया. फिर उसने और एक नंबर डायल किया. उसके साथ दिए दुसरे पुलिसकोभी दुसरे एक अॅड्रेसपर फौरन तैनात होनेके लिए कहा.

" अब इस तिसरे अॅड्रेसका क्या करेंगे?...बॉसने तो अपने साथ सिर्फ दो लोग ही दिये थे..." जॉनने सॅमसे पुछा.

" एक काम करेंगे ... बॉसको फोन करके अपना अबतकका प्रोग्रेस बताएंगे और और एक जण को मांग लेंगे .. ताकी उसको हम इस तिसरे पत्ते पर तैनात कर सकेंगे"

" बॉस और एक आदमी हमें देगा ? ... मुझे तो संदेह है " जॉनने अपना संदेह व्यक्त किया.

" देखते तो है ..."

सॅम बॉसका फोन डायल करने लगा. इतनेमें उसकाही फोन बजा. जॉनने उसके मोबाईलके डिस्प्लेकी तरफ देखा. फोन बॉसकाही था. सॅमने तुरंत फोन अटेंड किया.

"एक अॅड्रेस बोलता हू ... लिख लो..." उधरसे बॉसने कहा.

" यस सर ....प्लीज '' पहले बॉस क्या बोलता है यह सुन लेंगे और फिर अपना प्रोग्रेस उसको बताएंगे ऐसा सॅमने सोचा.

सॅमने जॉनके जेबसे पेन और एक कागज अॅड्रेस लिखनेके लिए लिया.

" याहोता क्राफ्ट, बी-1011 हिलव्ह्यू अपार्टमेंटस, केटी लेन-3" उधरसे बॉसने एक अॅड्रेस बताया.

यह तो उनके पास था वह तिसरा अॅड्रेस था...

लेकिन बॉसको कैसे पता चला वह अॅड्रेस?...

हमने तो बताया नही था ....

" ...वहा फौरन पहूंचो ... पाचवा खूनभी हो चूका है " बॉसने आगे कहा.

उधरसे फोन कट होगया. बॉसको वह अॅड्रेस कैसे पता चला यह पहेली अब सॅमके लिए पहेली नही रही थी.

" हमें देर हो गई है " हताश होकर सॅमने जॉनसे कहा.

" क्या हूवा ?" जॉनने आश्चर्यसे पुछा.

" पाचवा कत्लभी हो गया है ... याहोता क्राफ्टका"

सायरन बजाती हूए पुलिसकी गाडी एका अपार्टमेंटके सामने रास्तेके किनारे आकर रुकी. गाडीसे जल्दी जल्दी जॉन और सॅम उतर गए. अभीतक प्रेस वहां नही पहूंची थी. उतनाही जॉनको अच्छा लगा. उतरने के बाद लगभग दौडतेही वे लिफ्टतक पहूंचे. दोनो लिफ्ट एंंगेज देखकर जॉनने लिफ्टका बटन दो-तीन बार दबाकर गुस्सेसे लिफ्टके दरवाजे को लात मारी. इस बारभी खून दसवे मालेपरही हूवा था. एक पलके लिए जॉनने सिढीयोंसे उपर जानेका सोचा. लेकिन दसवे मालेपर सिढीयोंसे जानेसे थोडी देर रुकना कभीभी समझदारी थी. बार बार अपने बाए हाथपर दाहिने हाथकी मुठ्ठी जोरसे मारते हूए जॉन लिफ्टकी राह देखने लगा. सॅमभी बेचैन होकर चहलकदमी करने लगा. कभी वह एक लिफ्टके सामने खडा रहता तो कभी दुसरे लिफ्टके सामने खडा होकर यूही उसका बटन दबाता. इतनेमे बाए तरफकी पहली लिफ्ट खुली. दोनोभी जल्दी जल्दी अंदर घुस गए. अंदर जातेही सॅमने 10 नंबरका बटन दबाया. लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया और लिफ्टके डिस्प्लेपर 1... 2... 3... 4... ऐसे एक के बाद एक नंबर दिखने लगे.

लिफ्टका दरवाजा खुलतेही दोनो बाहर आकर सहमेसे इधर उधर देखने लगे. बिल्डींगकी रचना थोडी जटीलही थी. जॉनने लिफ्टमें घुसरहे एक आदमीको पुछा,

"फ्लॅट नं. 15 किधर है "

 
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