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वह आदमी सिर्फ दायी तरफ हाथसे इशारा करते हूए लिफ्टमें घुस गया. सॅम और कुछ पुछे इसके पहलेही लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया और वह आदमी लिफ्टमें गायब होगया था. दोनोंने और कोई पुछनेके लिए मिलता है क्या यह देखा. आसपासभी कोई दिख नही रहा था. उन्होने एक पल सोचा और वे दोनो दायी तरफ निकल पडे.
जॉनने फ्लॅटके दरवाजेपर देखा. 1015 नंबर लिखा हूवा था. दोनोने एक दुसरेकी तरफ देखकर स्वीकारातत्मक सर हिलाया. दोनोभी सतर्क हो गए. सॅमने अपनी बंदूक निकाली और सामने जाकर धीरेसे दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. सॅम और जॉन सावधानीसे अंदर घुस गए. अंदर हॉलमे सब तरफ सब सामान पडा हुवा था. और उस सामानके बिचमें फर्शपर खुनके तालाबमें एक शरीर पडा हूवा था.
" माय गॉड" सॅमके मुंहसे निकल गया.
" लेट मी चेक हिज बीट "
जॉनने निचे पडे हूए शरीर की नब्ज टटोली.
जॉनने सॅमकी तरफ देखा.
सॅमने जॉनको इशारेसेही पुछा.
" ही ईज डेड" जॉनने निराशायुक्त स्वरमें कहा.
सॅमने निराशासे भरी एक लंबी सांस छोडी.
और वह पुरा फ्लॅट ढूंढने के लिये अंदर चला गया.
जॉनने हमेशाकी तरह सामने दिवारपर देखा. इसबारभी खुनसे शून्य निकालनेसे कातील नही भूला था. शून्यके बिचमें खुनसे लिखनेसेभी वह नही चूका था. दूरसे कातिलने क्या लिखा है यह पहचानमें नही आ रहा था इसलिए वह दिवारके पास जाकर देखने लगा.
" शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " दिवारपर लिखा था.
दिवारपर लिखे उस मेसेजकी तरफ देखकर जॉन सोचने लगा. उधर अंदर सॅमका कुछ ढूंढनेका आवाज आ रहा था.
सोचते सोचत अचानक जॉनके चेहरेपर डर का साया छा गया.
"सॅम..." जॉनने सॅमको अपने कपकापाते स्वरमें आवाज दिया.
सॅम झटसे अपना काम छोडकर दौडतेही बाहर आ गया.
" क्या हूवा ?" सॅम जॉनके डरे हूए चेहरेकी तरफ देखकर बोला.
अबतक जॉन खुले दरवाजेकी तरफ दौड पडा था और सॅम कुछ समझ पाए इसके पहलेही जॉन दरवाजेके बाहर सॅमके नजरोंसे ओझल हो गया था.
दरवाजेके बाहरसे जॉनका आवाज आया,
" चलो ... चलो हमें जल्दी करनी पडेगी..."
" कहा ?" सॅमने दरवाजेके बाहर जाते हूए पुछा.
बाहर कॉरीडोरमें जॉन लिफ्टकी तरफ दौड पडा था. सॅमको जॉन क्यों दौड रहा है कुछ समझ नही आ रहा था.
सिर्फ उसके हरकतोंसे कुछ तो गडबड है या होनेकी संभावनाका डर झलक रहा था.
कुछ ना समझते हूए सॅमभी उसके पिछे दौडने लगा.
लिफ्टके पास पहूंचकर जॉनने लिफ्टका बटन दबाया. इत्तफाकसे लिफ्ट वही थी. लिफ्टका दरवाजा खुला.
जॉनने सॅमकी तरफ देखकर कहा, " चलो जल्दी ... हमें तुरंत निकलना चाहिए"
जॉन सॅमके लिए ना रुकते हूए लिफ्टमें घुस गया. सॅम और जोरसे दौडते हूए लिफ्टका दरवाजा बंद होनेके पहले लिफ्टमे घुस गया.
अंदर जाते हूए सॅमने दुबारा पुछा, " लेकिन ... हम कहां जा रहे है?"
" बताता हूं ' जॉन अपनी तेज हूई सांसे ठीक करने की कोशीश करते हूए बोला.
सॅम लिफ्टमें घुसकर जॉनकी तरफ आश्चर्यसे देखते हूए उसके पास जाकर खडा होगया और धीरे धीरे लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया.
जॉनने धडकते दिलसे फ्लॅटका दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. अंदरका नजारा देखकर जॉनको एक पलके लिए तो ऐसा लगा की उसका दिल धडकना बंद हो जाएगा देगा. उसके सामने हॉलमे उसकी प्रीया अँजेनी खुनसे लथपथ पडी हूई थी. और सामने दिवारपर एक बडा शुन्य निकाला हूवा था. जॉन उसके पास गया. उसको एहसास हूवा की उसके पैर क्षीण होने लगे है मानो पैरोंकी सारी शक्ती निकाल ली हो. इतनी की वह निराशासे निचेही बैठ गया. खुदको संभालकर उसने अँजेनीकी नब्ज टटोली और वह उसकी हथेलीमे अपना चेहरा छुपाकर अनियंत्रीत होकर रोने लगा.
अँजेनीके प्राण कबके जा चूके थे...
सॅमको क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. उसने सांत्वनाभरा एक हाथ जॉनके कंधेपर रखा. उसके हाथको जॉनके सिसकीयोंके धक्के किसी भूकंपके धक्के जैसे भयानक प्रतित हो रहे थे. सॅम जॉनके पास घूटने टेककर बैठ गया.
कातिल अपना आखरी शिकार करनेमेभी कामयाब रहा था.
सॅम " शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " इस बातका मतलब समझ गया था.
और 'शून्य' का आखरी अंग्रेजी अक्षर 'ए' का महत्व भी उसे समझ गया था.
अँजेनी - अँजेनीका नामभी 'ए' इस अक्षरसेही शुरु होता था...
जॉनको अपने कर्तव्यका एहसास होगया.
कातिल इतनेमेंही कत्ल कर भाग गया होगा ...
यानीकी वह यही कही आसपासही होना चाहिए...
कुछतो करना चाहिए...
लेकिन जॉनके हाथपैर साथ नही दे रहे थे. उसमें उठनेकी शक्तीही नही बची थी.
" खुनी अभी जादा दूर नही गया होगा ' जॉनने किसी तरह सॅमसे कहा.
सॅम खुदको संभालकर झटसे उठ खडा हूवा और आगेकी कार्यवाहीके लिए तैयार हो गया.
रातका समय था. डॅनने अपने घरका दरवाजा धकेलकर थोडासा खोला और बाहर झांककर देखा. चारो तरफ अंधेरा था. वह धीरेसे घरसे बाहर निकल गया. बाहर आनेके बाद उसने चारो तरफ अपनी नजरे घुमाकर उसे कोई देखतो नही रहा इसकी तसल्ली की. कोई देख नही रहा है इस बातकी तसल्ली होतेही वह कंपाऊंडके बाहर आ गया. फिरसे रस्तेपर उसने चारो ओर अपनी नजरे दौडाई. रास्ता एकदम खाली खाली था. अब वह दाई तरफ मुडकर चलने लगा - अंधेरेमे तेजीसे कदम बढाते हूए. उसके चलनेके गतीके साथही उसके सोचनेभी गती पकड ली. पिछले बार कातिलने हमें भरपूर बक्षिसी देकर खुश कर दिया था. इस बारभी जॉन, सॅम और बॉसको अगला खुन किसका होगा इसकी जानकारी मिलने की बात उसने कातिल को फौरन बताई थी. कातिल उसपर बहूत खुश हो गया था. फिदाही हूवा था.
कातिलने उसे एक जगह बताकर वहा वह सोच भी नही सकता उतना पैसा रखनेका वादा किया था. अब वह वहांही पैसे लेनेके लिए जा रहा था. पैसेका खयाल आतेही उसके दिलमें गुदगुदी होने लगी. पिछले बार मिले पैसेसे दस गुना पैसे उसको अपने आखोंके सामने दिखने लगे. खुशीसे वह झुम उठा. उसके चलनेकी गती धीमी होगई और चालमें एक मस्ती झलकने लगी थी.
होगया अब यह आखरी...
इसके बाद ऐसी बेईमानी नही करुंगा...
इतना पैसा मिलनेके बाद मुझे ऐसी बेइमानी करनेकी फिरसे नौबतही नही आयेगी...
पैसा मिलनेके बाद नौकरी एकदम नही छोडूंगा.. नहीतो किसीको शक हो सकता है...
नौकरीमें कुछ देरतक टाईमपास करेंगे और फिर सही वक्त आतेही नौकरी छोडकर कुछ बिझीनेस करेंगे....
नहीतो पहले बिझीनेस डालूंगा और वह अच्छा खासा चलनेके बाद नौकरी छोड दूंगा....
डॅन सोच रहा था. अचानक असे अहसास हूवा की जिस जगह कातिलने पैसे रखनेका कबुला था वह जगह नजदीक आ चूकी है. वह एक पल रुका. फिरसे एकबार चारो ओर देखकर जिस जगह पर पैसे रखे थे उधर निकल गया. उसके चेहरेपर एक मुस्कुराहट झलक रही थी. स्थान एकदम निर्जन था. चारो ओर अंधेरा छाया हूवा था. बिच बिचमें कुतोंका अजीब आवाज आ रहा था. वह जगह किसीकोभी डर लगेगा ऐसीही थी. लेकिन आज डॅनके डर पर उसका लालच पुरी तरहसे हावी हो चूका था.
सामने एक बडा पेढ था. यही वह पेढ था जिसके निचे कातिलने पैसे रखे थे...
अब मानो डॅनके शरीरमें खुशीकी लहरे दौड रही थी. अब कुछही और पल! कुछ पलमेंही अब मै एक बडे संपतीका मालिक बनने वाला हूं. वह अधीरतापुर्वक पेढके निचे चला गया. वहा एक बडा पत्थर रखा हूवा था. डॅनने एक पलकाभी विलंब ना लगाते हूए वह पत्थर वहासे हटाया. जैसेही उसने वह पत्थर वहा से हटाया एक बडा धमाका हुवा और उसके हाथके टूकडे टूकडे हो गए. उसके बदनमेंभी नुकीले पत्थरके टूकडे गए थे. और खुनसे लथपथ अवस्थामें उसकी जान चली गई. उसे अहसास हो गया था की उसने जैसे ठान लिया था वैसेही यह उसकी आखरी बेइमानी साबित हूई थी.
रातका 1 बजा था. आज कमसे कम तिनचार दिन हूए होंगे जॉनने अपने आपको घरमें बंद करके रखा था. वक्त का, दिनका, रातका उसे कुछभी होश नही था. आजभी उसे होश आया था वह उसके पासके व्हिस्कीका स्टॉक खतम होनेके वजहसे. जैसेही उसे होश आया वैसे उसके सब दर्द जाग उठे थे. उसे अँजनीके साथ गुजारा हूवा एक एक पल याद आने लगा.
उसे कृत्रिम सांस देकर मानो उसके सांसोसे जुडा उसका रिश्ता.....
उसे मिलनेके लिये हमेशा बेचैन रहता उसका मन...
कितनाभी खुदको रोकनेकी कोशीश करनेके बावजुद उसकी घरकी तरफ मुडते उसके कदम..
उसके साथ उसकी पहली डेट...
उसका उसके साथ उत्स्फुर्त, पवित्र प्रथम प्रणय...
उसके सासोंकी गरमाहट...
उसपर होती उसके प्यारकी बारीश...
उसके साथ बिताए वे छुटी के दिन...
उसकी वे नटखट अदाए ...
रातोरात एंगेजमेंट रिंग लाकर उसे प्रपोज किया वह पल ...
उसका वह किसी लता की तरह लिपटकर किया हूवा इकरार ...
उसे निराशाके जंजालसे बाहर निकालकर दिया हूवा उसका प्रोत्साहन..
और ...
और उसका वह क्रुर कत्ल...
उसके आखोंमे आंसू तैरने लगे. आंसू बहकर उसके गालपर आगए. उसे अपने आपकीही चिढ आने लगी.
जब कत्ल का रहस्य खुल गया था तबही उसके क्यों खयालमें नही आया की पांचवे खुनके बाद छटवा खुन उसकी अपनी अँजीकाही होनेवाला है.....
यह इतनीसी बात उसके खयालमें क्यों नही आयी?..
लेकिन पांचवा कत्ल रोकने के चक्करमें वह कत्लके तफ्तीशमेंही इतना व्यस्त हो गया था की उसे छटवे खुन का खयालभी नही आया...
उसने अपने कलाईसे दोनो आंखोके आंसू पोंछ लिए. उसे अभीभी विश्वास नही हो रहा था की वह ऐसी उसे अकेला छोडकर चली गई है. उसने घरमें चारो ओर एक नजर दौडाई.
घरमें कैसा सब कुछ डरावना लग रहा था... ...
घर डरावना हो गया था या उसकी सोच वैसी हूई थी?...
उसने सामने दरवाजे की तरफ देखा. पेपरवालेने दरवाजेके निचेसे खिसकाए हूए तीन चार न्यूज पेपर जैसेकी वैसे पडे हूए थे. उसे ऐसा लग रहा था मानो वे न्यूजपेपरभी दरवाजेके निचेसे उसकी तरफ देखते हूए उसे चिढा रहे हो. वह उठ गया और दरवाजेके पास चला गया. एक पलके लिए उसे ऐसा लगा की दरवाजा खोले और बाहर थोडी देर खुली हवामे जाए.
लेकिन नही अब यह एकांतही अच्छा लगने लगा था..
जॉनने फ्लॅटके दरवाजेपर देखा. 1015 नंबर लिखा हूवा था. दोनोने एक दुसरेकी तरफ देखकर स्वीकारातत्मक सर हिलाया. दोनोभी सतर्क हो गए. सॅमने अपनी बंदूक निकाली और सामने जाकर धीरेसे दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. सॅम और जॉन सावधानीसे अंदर घुस गए. अंदर हॉलमे सब तरफ सब सामान पडा हुवा था. और उस सामानके बिचमें फर्शपर खुनके तालाबमें एक शरीर पडा हूवा था.
" माय गॉड" सॅमके मुंहसे निकल गया.
" लेट मी चेक हिज बीट "
जॉनने निचे पडे हूए शरीर की नब्ज टटोली.
जॉनने सॅमकी तरफ देखा.
सॅमने जॉनको इशारेसेही पुछा.
" ही ईज डेड" जॉनने निराशायुक्त स्वरमें कहा.
सॅमने निराशासे भरी एक लंबी सांस छोडी.
और वह पुरा फ्लॅट ढूंढने के लिये अंदर चला गया.
जॉनने हमेशाकी तरह सामने दिवारपर देखा. इसबारभी खुनसे शून्य निकालनेसे कातील नही भूला था. शून्यके बिचमें खुनसे लिखनेसेभी वह नही चूका था. दूरसे कातिलने क्या लिखा है यह पहचानमें नही आ रहा था इसलिए वह दिवारके पास जाकर देखने लगा.
" शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " दिवारपर लिखा था.
दिवारपर लिखे उस मेसेजकी तरफ देखकर जॉन सोचने लगा. उधर अंदर सॅमका कुछ ढूंढनेका आवाज आ रहा था.
सोचते सोचत अचानक जॉनके चेहरेपर डर का साया छा गया.
"सॅम..." जॉनने सॅमको अपने कपकापाते स्वरमें आवाज दिया.
सॅम झटसे अपना काम छोडकर दौडतेही बाहर आ गया.
" क्या हूवा ?" सॅम जॉनके डरे हूए चेहरेकी तरफ देखकर बोला.
अबतक जॉन खुले दरवाजेकी तरफ दौड पडा था और सॅम कुछ समझ पाए इसके पहलेही जॉन दरवाजेके बाहर सॅमके नजरोंसे ओझल हो गया था.
दरवाजेके बाहरसे जॉनका आवाज आया,
" चलो ... चलो हमें जल्दी करनी पडेगी..."
" कहा ?" सॅमने दरवाजेके बाहर जाते हूए पुछा.
बाहर कॉरीडोरमें जॉन लिफ्टकी तरफ दौड पडा था. सॅमको जॉन क्यों दौड रहा है कुछ समझ नही आ रहा था.
सिर्फ उसके हरकतोंसे कुछ तो गडबड है या होनेकी संभावनाका डर झलक रहा था.
कुछ ना समझते हूए सॅमभी उसके पिछे दौडने लगा.
लिफ्टके पास पहूंचकर जॉनने लिफ्टका बटन दबाया. इत्तफाकसे लिफ्ट वही थी. लिफ्टका दरवाजा खुला.
जॉनने सॅमकी तरफ देखकर कहा, " चलो जल्दी ... हमें तुरंत निकलना चाहिए"
जॉन सॅमके लिए ना रुकते हूए लिफ्टमें घुस गया. सॅम और जोरसे दौडते हूए लिफ्टका दरवाजा बंद होनेके पहले लिफ्टमे घुस गया.
अंदर जाते हूए सॅमने दुबारा पुछा, " लेकिन ... हम कहां जा रहे है?"
" बताता हूं ' जॉन अपनी तेज हूई सांसे ठीक करने की कोशीश करते हूए बोला.
सॅम लिफ्टमें घुसकर जॉनकी तरफ आश्चर्यसे देखते हूए उसके पास जाकर खडा होगया और धीरे धीरे लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया.
जॉनने धडकते दिलसे फ्लॅटका दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. अंदरका नजारा देखकर जॉनको एक पलके लिए तो ऐसा लगा की उसका दिल धडकना बंद हो जाएगा देगा. उसके सामने हॉलमे उसकी प्रीया अँजेनी खुनसे लथपथ पडी हूई थी. और सामने दिवारपर एक बडा शुन्य निकाला हूवा था. जॉन उसके पास गया. उसको एहसास हूवा की उसके पैर क्षीण होने लगे है मानो पैरोंकी सारी शक्ती निकाल ली हो. इतनी की वह निराशासे निचेही बैठ गया. खुदको संभालकर उसने अँजेनीकी नब्ज टटोली और वह उसकी हथेलीमे अपना चेहरा छुपाकर अनियंत्रीत होकर रोने लगा.
अँजेनीके प्राण कबके जा चूके थे...
सॅमको क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. उसने सांत्वनाभरा एक हाथ जॉनके कंधेपर रखा. उसके हाथको जॉनके सिसकीयोंके धक्के किसी भूकंपके धक्के जैसे भयानक प्रतित हो रहे थे. सॅम जॉनके पास घूटने टेककर बैठ गया.
कातिल अपना आखरी शिकार करनेमेभी कामयाब रहा था.
सॅम " शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " इस बातका मतलब समझ गया था.
और 'शून्य' का आखरी अंग्रेजी अक्षर 'ए' का महत्व भी उसे समझ गया था.
अँजेनी - अँजेनीका नामभी 'ए' इस अक्षरसेही शुरु होता था...
जॉनको अपने कर्तव्यका एहसास होगया.
कातिल इतनेमेंही कत्ल कर भाग गया होगा ...
यानीकी वह यही कही आसपासही होना चाहिए...
कुछतो करना चाहिए...
लेकिन जॉनके हाथपैर साथ नही दे रहे थे. उसमें उठनेकी शक्तीही नही बची थी.
" खुनी अभी जादा दूर नही गया होगा ' जॉनने किसी तरह सॅमसे कहा.
सॅम खुदको संभालकर झटसे उठ खडा हूवा और आगेकी कार्यवाहीके लिए तैयार हो गया.
रातका समय था. डॅनने अपने घरका दरवाजा धकेलकर थोडासा खोला और बाहर झांककर देखा. चारो तरफ अंधेरा था. वह धीरेसे घरसे बाहर निकल गया. बाहर आनेके बाद उसने चारो तरफ अपनी नजरे घुमाकर उसे कोई देखतो नही रहा इसकी तसल्ली की. कोई देख नही रहा है इस बातकी तसल्ली होतेही वह कंपाऊंडके बाहर आ गया. फिरसे रस्तेपर उसने चारो ओर अपनी नजरे दौडाई. रास्ता एकदम खाली खाली था. अब वह दाई तरफ मुडकर चलने लगा - अंधेरेमे तेजीसे कदम बढाते हूए. उसके चलनेके गतीके साथही उसके सोचनेभी गती पकड ली. पिछले बार कातिलने हमें भरपूर बक्षिसी देकर खुश कर दिया था. इस बारभी जॉन, सॅम और बॉसको अगला खुन किसका होगा इसकी जानकारी मिलने की बात उसने कातिल को फौरन बताई थी. कातिल उसपर बहूत खुश हो गया था. फिदाही हूवा था.
कातिलने उसे एक जगह बताकर वहा वह सोच भी नही सकता उतना पैसा रखनेका वादा किया था. अब वह वहांही पैसे लेनेके लिए जा रहा था. पैसेका खयाल आतेही उसके दिलमें गुदगुदी होने लगी. पिछले बार मिले पैसेसे दस गुना पैसे उसको अपने आखोंके सामने दिखने लगे. खुशीसे वह झुम उठा. उसके चलनेकी गती धीमी होगई और चालमें एक मस्ती झलकने लगी थी.
होगया अब यह आखरी...
इसके बाद ऐसी बेईमानी नही करुंगा...
इतना पैसा मिलनेके बाद मुझे ऐसी बेइमानी करनेकी फिरसे नौबतही नही आयेगी...
पैसा मिलनेके बाद नौकरी एकदम नही छोडूंगा.. नहीतो किसीको शक हो सकता है...
नौकरीमें कुछ देरतक टाईमपास करेंगे और फिर सही वक्त आतेही नौकरी छोडकर कुछ बिझीनेस करेंगे....
नहीतो पहले बिझीनेस डालूंगा और वह अच्छा खासा चलनेके बाद नौकरी छोड दूंगा....
डॅन सोच रहा था. अचानक असे अहसास हूवा की जिस जगह कातिलने पैसे रखनेका कबुला था वह जगह नजदीक आ चूकी है. वह एक पल रुका. फिरसे एकबार चारो ओर देखकर जिस जगह पर पैसे रखे थे उधर निकल गया. उसके चेहरेपर एक मुस्कुराहट झलक रही थी. स्थान एकदम निर्जन था. चारो ओर अंधेरा छाया हूवा था. बिच बिचमें कुतोंका अजीब आवाज आ रहा था. वह जगह किसीकोभी डर लगेगा ऐसीही थी. लेकिन आज डॅनके डर पर उसका लालच पुरी तरहसे हावी हो चूका था.
सामने एक बडा पेढ था. यही वह पेढ था जिसके निचे कातिलने पैसे रखे थे...
अब मानो डॅनके शरीरमें खुशीकी लहरे दौड रही थी. अब कुछही और पल! कुछ पलमेंही अब मै एक बडे संपतीका मालिक बनने वाला हूं. वह अधीरतापुर्वक पेढके निचे चला गया. वहा एक बडा पत्थर रखा हूवा था. डॅनने एक पलकाभी विलंब ना लगाते हूए वह पत्थर वहासे हटाया. जैसेही उसने वह पत्थर वहा से हटाया एक बडा धमाका हुवा और उसके हाथके टूकडे टूकडे हो गए. उसके बदनमेंभी नुकीले पत्थरके टूकडे गए थे. और खुनसे लथपथ अवस्थामें उसकी जान चली गई. उसे अहसास हो गया था की उसने जैसे ठान लिया था वैसेही यह उसकी आखरी बेइमानी साबित हूई थी.
रातका 1 बजा था. आज कमसे कम तिनचार दिन हूए होंगे जॉनने अपने आपको घरमें बंद करके रखा था. वक्त का, दिनका, रातका उसे कुछभी होश नही था. आजभी उसे होश आया था वह उसके पासके व्हिस्कीका स्टॉक खतम होनेके वजहसे. जैसेही उसे होश आया वैसे उसके सब दर्द जाग उठे थे. उसे अँजनीके साथ गुजारा हूवा एक एक पल याद आने लगा.
उसे कृत्रिम सांस देकर मानो उसके सांसोसे जुडा उसका रिश्ता.....
उसे मिलनेके लिये हमेशा बेचैन रहता उसका मन...
कितनाभी खुदको रोकनेकी कोशीश करनेके बावजुद उसकी घरकी तरफ मुडते उसके कदम..
उसके साथ उसकी पहली डेट...
उसका उसके साथ उत्स्फुर्त, पवित्र प्रथम प्रणय...
उसके सासोंकी गरमाहट...
उसपर होती उसके प्यारकी बारीश...
उसके साथ बिताए वे छुटी के दिन...
उसकी वे नटखट अदाए ...
रातोरात एंगेजमेंट रिंग लाकर उसे प्रपोज किया वह पल ...
उसका वह किसी लता की तरह लिपटकर किया हूवा इकरार ...
उसे निराशाके जंजालसे बाहर निकालकर दिया हूवा उसका प्रोत्साहन..
और ...
और उसका वह क्रुर कत्ल...
उसके आखोंमे आंसू तैरने लगे. आंसू बहकर उसके गालपर आगए. उसे अपने आपकीही चिढ आने लगी.
जब कत्ल का रहस्य खुल गया था तबही उसके क्यों खयालमें नही आया की पांचवे खुनके बाद छटवा खुन उसकी अपनी अँजीकाही होनेवाला है.....
यह इतनीसी बात उसके खयालमें क्यों नही आयी?..
लेकिन पांचवा कत्ल रोकने के चक्करमें वह कत्लके तफ्तीशमेंही इतना व्यस्त हो गया था की उसे छटवे खुन का खयालभी नही आया...
उसने अपने कलाईसे दोनो आंखोके आंसू पोंछ लिए. उसे अभीभी विश्वास नही हो रहा था की वह ऐसी उसे अकेला छोडकर चली गई है. उसने घरमें चारो ओर एक नजर दौडाई.
घरमें कैसा सब कुछ डरावना लग रहा था... ...
घर डरावना हो गया था या उसकी सोच वैसी हूई थी?...
उसने सामने दरवाजे की तरफ देखा. पेपरवालेने दरवाजेके निचेसे खिसकाए हूए तीन चार न्यूज पेपर जैसेकी वैसे पडे हूए थे. उसे ऐसा लग रहा था मानो वे न्यूजपेपरभी दरवाजेके निचेसे उसकी तरफ देखते हूए उसे चिढा रहे हो. वह उठ गया और दरवाजेके पास चला गया. एक पलके लिए उसे ऐसा लगा की दरवाजा खोले और बाहर थोडी देर खुली हवामे जाए.
लेकिन नही अब यह एकांतही अच्छा लगने लगा था..