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सच्चा प्यार
एक जवान और सुंदर सा जोड़ा, एक बड़े से हॉल के अंदर आया, लड़की के हाथों में गुलदस्ता था,उन्हे देखकर एक बूढ़ी औरत ने पीछे से पुकारा "ओह, कितने सुंदर फूल हैं, ये किसके लिए हैं? अगर तुम जल्दी में नही हो तो थोड़ी देर के लिए रुकोगे क्या मेरे पास? मुझे मिलने कोई नही आता. तुम किसे देखने आए हो? उन्हे बुरा तो नही लगेगा ना?”
वो एक साथ कई बातें बोलती चली गयी.
वो दोनो रुक गये और उसके कमरे के अंदर आए, चारो तरफ सजावट की चीज़े थी, क्रिस्टल और पेंटिंग्स, मेडल्स..सब कुछ देखने के बाद वो लड़की बूढ़ी औरत से बोली "अभय ने मुझे शादी के लिए प्रपोज़ किया है अभी… और हम यहाँ किसी ख़ास इंसान को ये सब बताने के लिए आए हैं.”
"मैं तुम लोगो को ज़्यादा देर तक नही रोकूंगी – असल में ये बिल्कुल सुनसान जगह है, यहाँ कम ही लोग आते हैं, और यहाँ रहने वाले बूढ़े लोगों की यादाश्त भी कम है,समझे ना…मुझे अच्छी तरह याद है जब मेरी एंगेज्मेंट हुई थी..क्या मैं बताऊँ तुम्हे उस बारे में ?
"हाँ बिल्कुल..मुझे आपकी कहानी सुनकर काफ़ी खुशी होगी.”
वो बूढ़ी औरत रुकी और फिर पूरे शरीर को ढीला छोड़ दिया और बोली "मुझे लगता है की अब वो समय आ गया है जब मैं अपनी पूरी कहानी किसी को सुनाऊ ."
और फिर उनकी आँखों में कई पुरानी यादें तेर गयी "मुझे अभी भी याद है…जैसे वो कल की ही बात हो. मैं काफ़ी सुंदर थी अपने कॉलेज में, फुटबॉल के जितने भी मॅच होते थे, मैं और मेरी सहेलियाँ अपने कॉलेज टीम को एनकरेज करने के लिए चिल्लती थे…तुम कह सकती हो की हम सभी चियर्लीडर थी..और कॉलेज फुटबॉल टीम के कॅप्टन ने एक बार मुझे बाहर चलने के लिए कहा, हम दोनो कई दीनो तक डेट पर गये.”
"एक दिन फ्राइडे की रात को वो मुझे मूवी दिखाने ले गया,फिर हम रेस्टोरेंट में गये, मुझे लगा जैसे मैं किसी फिल्म स्टार के साथ हूँ, सभी लोग आ रहे थे ऑटओग्रॅफ लेने. रेस्टोरेंट का मॅनेज्मेंट हमसे काफ़ी खुश हुआ, उन्होने जाते हुए हमे पोर्ट वाइन की बॉटल भी दी थी.. पोर्ट में 20% आल्कोहॉल होता है..पता है," उन्होने मुझसे धीरे से कहा.
"खाने के बाद वो मुझे ब्रांड न्यू मेरसेडेसे में घूमने ले गया जो उसके एक कॉलेज के दोस्त ने दी थी उस दिन के लिए, हम नदी के किनारे एक सुनसान सी जघा पर जाकर रुके, आसमान पर पूरा चाँद था, नदी में दूर नाव चल रही थी, और उसमे से रोशनी आ रही थी, बड़ा सुंदर दृश्या था.”
उनकी आवाज़ और धीरे हो गयी "हमने एक दूसरे को छुआ और चूमना शुरू किया, वाइन की वजा से मैं थोडा नशे की हालत में थी, हम उस दिन काफ़ी आगे गये, और अंत में वो सब कुछ करना चाहता था…जिसके लिए मैं बिल्कुल तय्यार नही थी”
"उसने अपनी छाती पर लगे हुए हमारे कॉलेज के बॅच को निकाला और मुझसे कहा की मैं तुम्हे अभी ये दे सकता हूँ, जिससे तुम्हे मुझपर तोड़ा विश्वास हो जाए, वो बॅच फ्रॅटरनिटी पिन कहलाता था.."
"वो बॅच देने का मतलब हमारे कॉलेज में होता था 'एंगेज्ड टू बी एंगेज्ड.'
आगे बोलते हुए उनकी आवाज़ में पछतावा था "मुझे बहुत एग्ज़ाइट्मेंट हो रही थी, फिर वो मुझसे मनमानी करने लगा, मैने भी अब विरोध पहले से कम कर दिया था, पर मैं उसे मना करती रही, उसके गाल पर चांटा भी मारा, उसके मुँह को नोचा भी, पर वो काफ़ी स्ट्रॉंग था…और अंत में उसने अपनी मनमानी कर ही डाली …और वहीं कार की सीट पर ही उसने…सब कुछ कर डाला… मुझसे सही तरहा से चला भी नही जा रहा था घर जाते हुए.”
"मैं पूरी रात रोती रही,मैं उसके लिए सभी को यही कहती रही की मैने ही उसे काफ़ी एग्ज़ाइटेड कर दिया था जिसकी वजा से वो रुक नही पाया, मुझे ये सब करते हुए काफ़ी चीप लगा, लेकिन मुझे ज़्यादा परेशन होने की ज़रूरत नही हुई क्योंकि एक तरहा से मैं उसके साथ एंगेज थी.
"मैं शनिवार को पूरा दिन उसके फोन का इंतेजार करती रही, पर उसने फोन नही किया, मैने अपने मन में उसके लिए एक्सक्यूसस बनाना शुरू कर दिए की शायद वो अगले मॅच की तय्यरी कर रहा होगा”
"और काफ़ी दीनो तक उसने मुझसे कोई बात नही की, और एक दिन उसकी टीम के एक और लड़के ने आकर मुझे डेट पर चलने के लिए प्रपोज़ किया, मैने उसे सब कुछ बताते हुए समझना शुरू किया तो उसने बीच में ही मुझसे कहा की मेरे बाय्फ्रेंड सभी को ये कह रहा है की उसने मेरा कुँवारापन ले लिया है, अब कोई भी मेरे साथ कुछ भी कर सकता है..” और वो लड़का सबसे पहला चान्स चाहता था..इसलिए आया था मेरे पास..मैने उसे भगा दिया.
"तुम समझ सकते हो की मुझपर क्या बीती होगी..मैने तो ख़ुदकुशी करने की भी सोची.. तभी किसी ने आकर कहा की मुझसे कोई मिलने आया है..
मैं नीचे गयी और देखा की ये तो स्टूडेंट्स का नया कोच है, वो पिछले साल तक अपनी टीम का कॅप्टन था..पहले तो मुझे दर्र लगा की कहीं और कोई तो नही आया मुझे डेट पर ले जाने के लिए..पर मेरे पीछे हेड मिस्ट्रेस खड़ी हुई थी और मैं जानती थी की उनके रहते हुए मुझसे कोई इस तरहा की बात नही कर पाएगा.
"कोच ने बताया की मेरे बाय्फ्रेंड ने अपने दोस्तो के साथ शर्त लगाई थी की वो मुझे पाकर रहेगा, और उसने नशे की हालत में अपनी टीम पार्टी में सभी को उस दिन का किस्सा भी बता दिया है, जिसकी वजा से सभी को मेरे बारे में पता चल चुका है.
"मैं सोच रही थी की अभी ये धरती फट जाए और मैं उसमे समा जाऊ …इतनी शर्मिंदगी मुझे कभी नही हुई थी..”
"और तब कोच ने मुझे बताया की उसने मेरे बाय्फ्रेंड को अपने कमरे में लेजकर काफ़ी धमकाया और अपने दोस्तो से ये बोलने को कहा की शर्त जीतने के लिए उसने झूट बोला और कार सीट पर मुर्गे का खून लगाकर उसने अपनी बात को सही बनाया..सिर्फ़ शर्त जीतने के लिए.”
"और फिर कोच ने सभी टीम को एक साथ बुलाया और कहा की वो और मैं अच्छे दोस्त हैं, और कोई भी मेरे बारे में बुरी अफवाह ना फैलाए..”
"उन्होने मुझे विश्वास दिलाया की अब मेरे बारे में कोई भी कुछ नही बोलेगा, और ये प्रॉमिस भी किया की मुझे किसी भी तरहा की चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है, मेरी रेप्युटेशन पर कोई सवाल नही उठाएगा.”
"मैं उनकी बात सुनकर काफ़ी भावुक हो गयी और मैने पूरी कहानी सुना डाली उन्हे..जिसे सुनकर उनका खून खोल उठा....और मैं रोती रही ...उन्होने मुझसे कहा की ये सब तो उन्हे रेप जैसा लग रहा है, और मुझे पोलीस में कंप्लेंट करने को भी कहा.
"वो उस जमाने में मुमकिन नही था मेरे लिए..मैने ना जाने क्या सोचकर उनके गाल पर एक किस कर किया..जो मैं आजतक नही समझ पाई की क्यों..”
वो थोडा रुकी , पानी पिया और शरमाते हुए मुझे आँख मारकर बोली “अगले दिन, वो मेरे लिए फ्लावर्स लेकर आए, बिल्कुल ऐसे ही..हम घूमे, बाते करी, वो बिल्कुल पर्फेक्ट जेंटलमेन थे.. मुझे तब तक हँसाते थे, जब तक मेरी आँखों से आँसू ना निकल जाएँ..वो मुझमे काफ़ी दिलचस्पी लेते थे, अगले दो हफ्तों तक हम दोनो काफ़ी नज़दीक आ गये”
"और अगली गेम से ठीक पहले मुझे पता चला की वो मेरा बाय्फ्रेंड स्टेयर्स से गिर गया है और उसकी टाँग और बाजू में फ्रॅक्चर हो गया है..अगले दिन जब कोच मुझसे मिलने आए तो उनके चेहरे पर भी काफ़ी घाव थे और उनके हाथ पर पट्टी बँधी हुई थी..मैं सब समझ गयी ..मैने अगले ही पल उन्हे डॅन्स पर चलने के लिए कहा…तुम समझ सकती हो की उस समय एक लड़की किसी लड़के को डेट पर चलने के लिए कह रही थी, जो काफ़ी अड्वान्स माना चाहता था, वो मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दिए..”
"हम डेट पर गये और डांस किया..मुझे उनके साथ काफ़ी रिलॅक्स महसूस हुआ, पर मैं अपने पिछले एक्सपीरियेन्स से काफ़ी डरती थी इसलिए ज़्यादा नज़दीकियाँ नही बनाई..जाते हुए जब मुझे लगा की अब हमें किस भी करनी पड़ेगी तो मैं काफ़ी घबरा गयी…पर जब उन्होने किस किया तो उसमे वासना जैसी कोई बात नही थी…सिर्फ़ सच्चे प्यार की झलक थी..”
"वो जानते थे की मैं अब वर्जिन नही हूँ, उन्होने मेरी विश को भी माना की मैं अपनी शादी तक कुछ नही करना चाहती..लेकिन मैं सच बताऊँ , वेट करना मेरे लिए काफ़ी मुश्किल था..हम दोनो लगभग 3 महीनो से डटे पर जा रहे थे और अब मुझे ये विश्वास हो गया था की मुझे सच्चा प्यार हो गया है अपनी जिंदगी में पहली बार..”
"लेकिन वो कहते है ना..कभी-2 अपनी नज़र भी लग जाती है..कॉलेज ब्रेक से पहले मुझे डॉक्टर से अपायंटमेंट लेना पड़ा, और पता चला की मैं प्रेग्नेंट हूँ लगभग टीन महीनो से..मुझे मालूम था की ये कोई छोटी बात नही है, उन दीनो, अगर घर वालों ने दबाव में मेरी शादी उस लड़के से कर दी तो..मैं तो मॅर जाना ज़्यादा पसंद करूँगी”
उनकी आँखों में आँसू आ गये,वो थोडा रुकी और अपने आँसू पोंछकर बोली. "मैने जब अपने पेरेंट्स को वो सब बताया तो उन्हे लगा की मैं कोच की बात कर रही हूँ, क्योंकि वो भी उसके और मेरे बारे में जानते थे, पर जब मैने उनसे कहा की कोच मेरे बच्चे का बाप नही है तो मुझे ये कहते हुए भी काफ़ी शर्म आई, मेरे पापा तो गुस्से में आग बबूला हो गये, उन्होने कहा की उनके लाड प्यार की वजा से ही मैं ऐसी हो चुकी हूँ, उन्होने मुझे अपनी जिंदगी से, अपनी जायदाद से, और अपने घर से भी निकाल दिया..और मेरा सामान बाहर फैंक दिया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.”
"वापिस कॉलेज जाने के बाद, शाम के समय कोच मुझसे मिलने आए, मैने अपनी सहेली रीना को नीचे भेजा और उनको ये कहने को कहा की मेरी अपने पेरेंट्स के साथ लड़ाई हुई है और अब मैं कॉलेज छोड़ रही हूँ..और मैं अब उनसे कभी नही मिल पौँगी...मैं कोच को पूरा सच नही बताना चाहती थी..रीना ने सब कुछ कोच को बताया..और वो विज़िटर एरिया को पार करते हुए , किसी की भी परवाह किए बिना, मेरे रूम तक आ गये… उन्होने मुझसे कहा की वो मुझसे पिछले साल से ही प्यार करते आए हैं पर मेरी जिंदगी में उस समय वो लड़का था इसलिए वो कुछ ना बोल पाए थे..अब वो मुझसे शादी करना चाहते हैं..और मेरा बच्चा भी अपनाने को तय्यार हैं “
अगर मैं उनसे शादी कर लेती तो मेरी कई परेशानिया हट जाती..लेकिन ये मेरा स्वार्थ होता..
अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए उन्होने कहा “अगला पूरा हफ़्ता मेरे लिए परेशानियो वाला था..वो मेरी कोई भी बात सुनने को तय्यार नही थे, फिर मैने सोचा की बात करने में कोई बुराई नही है..पर जब भी वो बोलते थे तो मेरा जवाब कमजोर होता जाता था…और आख़िर में मैने उनसे कहा की इस स्केंडल की वजह से उनका करियर खराब हो सकता है..उनकी जॉब भी जा सकती है..”
आगे बोलते हुए उनका चेहरा फिर से खिल उठा…बिल्कुल किसी चियर्लीडर की तरहा..
”शनिवार को हमारे कॉलेज का लास्ट फूटबाल मॅच था..वो 14 फरवरी 1941 का दिन था, मैं उस दिन को कभी नही भूल सकती..जब मॅच का हाफटाइम हुआ तो कोच की आवाज़ गूँजी लाउडस्पिकर पर..”मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ..और मैं उससे शादी करना चाहता हूँ..वो बिल्कुल सामने वाली लाइन में बैठी है..मॅच ब्रेक के बाद मैं उसको प्रपोज़ करूँगा..मुझे पता है की उसका जवाब क्या होगा..पर मैं फिर भी आप लोगो से रिक्वेस्ट करता हूँ की आप भी मेरा साथ दे..!'
"पूरी दुनिया हिलने लगी थी मेरी आँखों के सामने…मुझे इतनी एंबॅरसमेंट कभी नही हुई थी अपनी लाइफ में..मैं जल्दी से अपनी दूसरी चियर्लीडर्स के साथ चेंजिंग रूम में गयी, वहाँ कोच मेरा इंतजार कर रहा था, मुझे समझ नही आ रहा था की मैं उनको किस करूँ या जान से मार दू … उन्होने कहा “अब सभी लोग ये समझेंगे की ये बच्चा मेरा है..अब तुम्हारे उपर है की तुम क्या कहती हो..अगर तुमने मना कर दिया तो लोग मुझे ही बुरा बोलेंगे..और तुम्हारे बच्चे का ज़िम्मेदार मुझे कहेंगे..
"उन्होने कहा की वो दूसरे शहर में एक जॉब का ऑफर ले चुके हैं, इससे किसी को भी ये पता नही चलेगा की हमारी शादी कब हुई, बच्चा कब हुआ..”
"और ब्रेक ख़त्म होने के बाद वो मुझे मैदान के बीचो बीच ले गये और अपने घुटनो पर बैठकर हाथो में रिंग लेकर मुझे प्रपोज़ किया..मैने एस कहा..सारा स्टेडियम झूम उठा..उसके बाद मुझे कुछ याद नही..सिवाए इसके की हमने वो गेम जीत ली थी..मेरे पास अभी वो रिंग नही है..वरना मैं तुम्हे वो ज़रूर दिखती..क्या तुमने इतनी रोमॅंटिक बात सुनी है कभी..?”
उस लड़की की आँखों में आँसू आ गये ये सब सुनकर और वो बोली “नही..…आगे क्या हुआ..?”
उस बूढ़ी औरत के चेहरे पर फिर से पजल लुक आ गया और वो फिर बोली, "ओह, कितने सुंदर फ्लावर्स है…किसके लिए हैं ये..? ये मुझे उसी कोच की याद दिला रहे हैं, वो भी ऐसे ही फ्लावर्स लेकर आता था..”
उस लड़की ने बूढ़ी औरत का हाथ पकड़ा और बोली..”हम आपको ही मिलने आए थे..कल हमारे कॉलेज का लास्ट फुटबॉल मॅच था, मैं एक चियर्लीडर हूँ और हाफ टाइम में लाउडस्पिकर से आवाज़ आई थी….”अस्सी साल पहले एक पुराने फुटबॉल खिलाड़ी ने बीच मैदान एक लड़की को प्रपोज़ किया था..और उसके ठीक बाद वो आर्मी में चला गया…देश के लिए लड़ाई करने, वो हमारे देश का एक हीरो था..और वो चियर्लीडर हमारे कॉलेज की फर्स्ट विमन प्रिन्सिपल बनी थी आगे चलकर..और अब मैं उनका पोता ..जो इसी मैदान में फूटबाल खेलता था, मैं भी लड़ाई के मैदान में जा रहा हूँ.. और मैं आज एक और चियर्लीडर को अपने दिल की बात कहना चाहता हूँ…और फिर अभ मुझे बीच मैदान में ले गया और अपनी नीस पर बैठकर मुझे रिंग पहनाई..मैने झट से हाँ कर दी..और वहाँ बैठे अस्सी हज़ार लोगो ने चीख कर हमारा उत्साह और भी बड़ा दिया..और उसने मुझे वोही सेम रिंग पहनाई…ये देखो..मैं उस औरत से मिलना चाहती थी जिसने अभय को पाल पोसकर इतना बड़ा किया.."
उस औरत ने अंगूठी को देखा, कन्फ्यूज़्ड, फिर प्यारी हँसी के साथ बोली “मैं तुम्हे ज़्यादा देर तक नही रोकना चाहती..असल में ये काफ़ी सुनसान जघा है..यहाँ कोई नही आता..यहाँ सभी बूढ़े लोग रहते हैं…जिन्हे अब कुछ याद भी नही है..समझी”
और हंसते हुए उन्होने अपनी आँखें बंद कर ली..और अगले ही पल वो सो गयी…उनकी स्नोरिंग की हल्की आवाज़ आ रही थी..
संजना ने पूरे कमरे में देखा, सारे कमरे में अभय के बचपन में बनाई गयी ड्रॉयिंग्स, पेंटिंग्स टंगी हुई थी..दादी ने अपने हाथो से पूरे कमरे में अपने पोते का सारा समान सॅंजो कर रखा हुआ था..
संजना ने अभय की आँखों में उठता दर्द देखा..और उसे बाहर लेजाकर बोली…”ओह अभय ..वो तुम्हे आज भी नही पहचान पाई...”
अभय बोला "कॉलेज में जाने से पहले उनकी यादाश्त कमजोर होने लगी थी..और जब मैं कॉलेज गया तो और भी बुरी हालत हो चुकी थी..मैं अकेला था और इनकी ज़्यादा देखबाल नही कर सकता था..ये मेरे लिए काफ़ी मुश्किल था पर ये जघा सबसे बेस्ट है..यहाँ इनका पूरा ध्यान रखा जाता है..”
"वो काफ़ी हिम्मतवाली है..इन्होने अपना वो बच्चा तीन महीने बाद ही खो दिया था..वो नये शहर में बिल्कुल अकेली थी क्योंकि कोच की फॅमिली ने भी उसे रिजेक्ट कर दिया था..और कोच लड़ाई के लिए सरहद पर चला गया था..जो लगभग चार साल तक चली..इन्होने अपने कोच को फिर दोबारा नही देखा..बहुत बुरा हुआ था उस समय इनके साथ”
“कोच ने अपनी जिंदगी इनके लिए अर्पण कर दी थी, उन्होने अपने कॉलेज में मिल रही प्रमोशन को भी नही लिया..सिर्फ़ इनके साथ दूसरे शहर में जाकर रहने के लिए..उन्होने दादी को आगे पड़ने के लिए कहा और उनकी पढाई .पूरी करवाई.”
"कोच उनकी लाइफ का प्यार थे, दादी ने बाकी की उमर किसी और आदमी की तरफ नही देखा, मेरे पापा को अकेले बड़ा किया…वो भी लड़ाई में जा कर शहीद हुए, और बाद में जब मैं पैदा हुआ तो दोबारा वोही सब सहन करते हुए मुझे भी बड़ा किया.. मैं नही चाहता था की तुम्हारे साथ भी वोही सब कुछ हो..इसलिए मैं भी लड़ाई से वापिस आकर ही तुमसे शादी करूँगा..और बच्चे भी तभी..”
“देखो अभय ..हम ये बातें पहले भी कर चुके हैं....मैं नही जानती की आगे फ्यूचर में क्या होगा…इसलिए मैं अभी शादी चाहती हूँ..और बच्चा भी”
उसके चेहरे पर आते अनेक विचारों को देखकर उसने अभय का हाथ पकड़ा और बोली “ये सब यादें तो इन्होने सँजोकर रखी है,ये पेंटिंग्स जो तुमने और तुम्हारी मा ने मिलकर बनाई थी..ये उन ट्रोफीस की जगह हैं जो तुम्हारे दादाजी को मिली थी, क्या तुम्हे एक सेकेंड के लिए भी ये लगता है की इन्हे कोई गीला है तुम्हे अकेले पालने का..”
अभय ने गहरी साँस ली “नही, इन्होने हमेशा कहा है की मैं भगवान का भेजा हुआ तोहफा हूँ, जो अच्छे काम इन्होने जिंदगी में किए हैं उसका फल हूँ, “मुझे नही मालूम इनमे इतनी ताक़त कहाँ से आती थी, वो 60 साल की थी जब मैं इनकी जिंदगी में आया, वो स्कूल में जॉब करती थी पर हमेशा मेरे लिए हर जगह रहती थी,वो हर स्कूल फंक्शन में आती थी, मेरी हर गेम को देखती थी, मेरी हर छुट्टियों में वो मुझे घुमाने के लिए बाहर ले जाती थी, ये बिल्कुल सेल्फलेस हैं और ये बात मुझे यहाँ लगती है.” ये कहते हुए अभय ने अपने दिल पर हाथ रखा, “और जब इनकी यादाश्त जाने लगी तो सभी ने सोचा की अब इनका क्या होगा..मेरा बस चलता तो मैं हमेशा इनके साथ रहता, पर ये मुमकिन नही था.
संजना ने अभय को गले लगाया और बोली “ अभय , हमेशा से अच्छे लोगो को कोई पहचान नही मिल पाती है..उनके बच्चे ही उनके लिए वो मॉन्युमेंट्स होते हैं जिनकी वजह से वो पहचाने जाते हैं..और तुम बिल्कुल वैसे ही हो जैसा वो चाहती थी..”
तभी एक नर्स वहाँ आई और बोली “हेलो अभय , ये वोही लड़की हैं ना जिसके बारे में तुम हमेशा कहते रहते हो..” और वो संजना से बोली “ अभय यहाँ का सबसे ज़्यादा आने वाला विज़िटर है, किसी भी परिवार के लिए ये बड़ा ही कठिन समय होता है..जब कोई यहाँ आता है..जब भी अभय यहाँ होता है वो तभी बोलती है..वरना एक शब्द भी नही ..ये भी रोज यहाँ आता है..बारिश, धूप, आँधी तूफान..हमेशा लॉबी से फ्लवर्स लेकर यहाँ आता है, लेकिन कभी कोई दिन मिस नही करता…ये एक ही कहानी को दस हज़ार बार सुन चुका होगा..ऐसा करने के लिए जिगर चाहिए..कैसे करते हो तुम ये सब अभय ??”
अभय की आँखों में आंसू थे वो बोला "ये मुझे अब पहचानती नही..पर मेरी शक्ल बिल्कुल अपने दादाजी से मिलती है, ये जब भी मुझे देखती है इन फ्लावर्स के साथ इनके दिमाग़ में कुछ धुंदली यादें ताज़ा जो जाती है, और वो ये स्टोरी एग्ज़ॅक्ट्ली सेम वे में सुना देती है..और अंत में सो जाती है..अपने अच्छे समय को याद करते हुए. ”
वो नर्स मुस्कुरा उठी अभय की बात सुनकर “हाँ तुम ठीक कहते हो..मुझे पता नही की किसी ने तुम्हे ये पहले बताया है के नही..पर इनके चेहरे पर बड़ी प्यारी स्माइल रहती है घंटो तक..तुम्हारे जाने के बाद”
अभय का चेहरा खिल उठा “मुझे इसकी ही आशा थी..मैं इनके लिए यही कर सकता हूँ अब तो..इनकी कहानी सुन कर इन्हे सुख पहुँचा सकता हूँ, मैं यहाँ आता हूँ क्योंकि मैं इनसे बड़ा प्यार करता हूँ, यही है वो जिन्होने मुझे सच्चे प्यार के बारे में बताया और सिखाया.. ये हमेशा कहती थी की सच्चा प्यार सिर्फ़ फ्लावर्स या चॉक्लेट्स देना नही होता, सच्चा प्यार कोई फीलिंग या एमोशन भी नही है.. सच्चा प्यार तो किसी के लिए अच्छा चाहना है और इसके लिए चाहे अपनी ज़िंदगी का ही बलिदान ना देना पड़े ..तो मैं कैसे कम कर सकता हूँ..”
अभय ने संजना के हाथों को अपने हाथ में लिया और उसकी आँखों में देखकर कहा “ मेरे दादाजी भी इसी तरहा से प्यार करते थे इन्हे, और ये भी उसी तरहा से मुझे प्यार करती है…और मैं वादा करता हूँ की मैं भी तुम्हे अपनी पूरी जिंगी ऐसे ही प्यार करूँगा..आई लव यू .”
और दोनो गले मिलकर रोने लगे.
एक जवान और सुंदर सा जोड़ा, एक बड़े से हॉल के अंदर आया, लड़की के हाथों में गुलदस्ता था,उन्हे देखकर एक बूढ़ी औरत ने पीछे से पुकारा "ओह, कितने सुंदर फूल हैं, ये किसके लिए हैं? अगर तुम जल्दी में नही हो तो थोड़ी देर के लिए रुकोगे क्या मेरे पास? मुझे मिलने कोई नही आता. तुम किसे देखने आए हो? उन्हे बुरा तो नही लगेगा ना?”
वो एक साथ कई बातें बोलती चली गयी.
वो दोनो रुक गये और उसके कमरे के अंदर आए, चारो तरफ सजावट की चीज़े थी, क्रिस्टल और पेंटिंग्स, मेडल्स..सब कुछ देखने के बाद वो लड़की बूढ़ी औरत से बोली "अभय ने मुझे शादी के लिए प्रपोज़ किया है अभी… और हम यहाँ किसी ख़ास इंसान को ये सब बताने के लिए आए हैं.”
"मैं तुम लोगो को ज़्यादा देर तक नही रोकूंगी – असल में ये बिल्कुल सुनसान जगह है, यहाँ कम ही लोग आते हैं, और यहाँ रहने वाले बूढ़े लोगों की यादाश्त भी कम है,समझे ना…मुझे अच्छी तरह याद है जब मेरी एंगेज्मेंट हुई थी..क्या मैं बताऊँ तुम्हे उस बारे में ?
"हाँ बिल्कुल..मुझे आपकी कहानी सुनकर काफ़ी खुशी होगी.”
वो बूढ़ी औरत रुकी और फिर पूरे शरीर को ढीला छोड़ दिया और बोली "मुझे लगता है की अब वो समय आ गया है जब मैं अपनी पूरी कहानी किसी को सुनाऊ ."
और फिर उनकी आँखों में कई पुरानी यादें तेर गयी "मुझे अभी भी याद है…जैसे वो कल की ही बात हो. मैं काफ़ी सुंदर थी अपने कॉलेज में, फुटबॉल के जितने भी मॅच होते थे, मैं और मेरी सहेलियाँ अपने कॉलेज टीम को एनकरेज करने के लिए चिल्लती थे…तुम कह सकती हो की हम सभी चियर्लीडर थी..और कॉलेज फुटबॉल टीम के कॅप्टन ने एक बार मुझे बाहर चलने के लिए कहा, हम दोनो कई दीनो तक डेट पर गये.”
"एक दिन फ्राइडे की रात को वो मुझे मूवी दिखाने ले गया,फिर हम रेस्टोरेंट में गये, मुझे लगा जैसे मैं किसी फिल्म स्टार के साथ हूँ, सभी लोग आ रहे थे ऑटओग्रॅफ लेने. रेस्टोरेंट का मॅनेज्मेंट हमसे काफ़ी खुश हुआ, उन्होने जाते हुए हमे पोर्ट वाइन की बॉटल भी दी थी.. पोर्ट में 20% आल्कोहॉल होता है..पता है," उन्होने मुझसे धीरे से कहा.
"खाने के बाद वो मुझे ब्रांड न्यू मेरसेडेसे में घूमने ले गया जो उसके एक कॉलेज के दोस्त ने दी थी उस दिन के लिए, हम नदी के किनारे एक सुनसान सी जघा पर जाकर रुके, आसमान पर पूरा चाँद था, नदी में दूर नाव चल रही थी, और उसमे से रोशनी आ रही थी, बड़ा सुंदर दृश्या था.”
उनकी आवाज़ और धीरे हो गयी "हमने एक दूसरे को छुआ और चूमना शुरू किया, वाइन की वजा से मैं थोडा नशे की हालत में थी, हम उस दिन काफ़ी आगे गये, और अंत में वो सब कुछ करना चाहता था…जिसके लिए मैं बिल्कुल तय्यार नही थी”
"उसने अपनी छाती पर लगे हुए हमारे कॉलेज के बॅच को निकाला और मुझसे कहा की मैं तुम्हे अभी ये दे सकता हूँ, जिससे तुम्हे मुझपर तोड़ा विश्वास हो जाए, वो बॅच फ्रॅटरनिटी पिन कहलाता था.."
"वो बॅच देने का मतलब हमारे कॉलेज में होता था 'एंगेज्ड टू बी एंगेज्ड.'
आगे बोलते हुए उनकी आवाज़ में पछतावा था "मुझे बहुत एग्ज़ाइट्मेंट हो रही थी, फिर वो मुझसे मनमानी करने लगा, मैने भी अब विरोध पहले से कम कर दिया था, पर मैं उसे मना करती रही, उसके गाल पर चांटा भी मारा, उसके मुँह को नोचा भी, पर वो काफ़ी स्ट्रॉंग था…और अंत में उसने अपनी मनमानी कर ही डाली …और वहीं कार की सीट पर ही उसने…सब कुछ कर डाला… मुझसे सही तरहा से चला भी नही जा रहा था घर जाते हुए.”
"मैं पूरी रात रोती रही,मैं उसके लिए सभी को यही कहती रही की मैने ही उसे काफ़ी एग्ज़ाइटेड कर दिया था जिसकी वजा से वो रुक नही पाया, मुझे ये सब करते हुए काफ़ी चीप लगा, लेकिन मुझे ज़्यादा परेशन होने की ज़रूरत नही हुई क्योंकि एक तरहा से मैं उसके साथ एंगेज थी.
"मैं शनिवार को पूरा दिन उसके फोन का इंतेजार करती रही, पर उसने फोन नही किया, मैने अपने मन में उसके लिए एक्सक्यूसस बनाना शुरू कर दिए की शायद वो अगले मॅच की तय्यरी कर रहा होगा”
"और काफ़ी दीनो तक उसने मुझसे कोई बात नही की, और एक दिन उसकी टीम के एक और लड़के ने आकर मुझे डेट पर चलने के लिए प्रपोज़ किया, मैने उसे सब कुछ बताते हुए समझना शुरू किया तो उसने बीच में ही मुझसे कहा की मेरे बाय्फ्रेंड सभी को ये कह रहा है की उसने मेरा कुँवारापन ले लिया है, अब कोई भी मेरे साथ कुछ भी कर सकता है..” और वो लड़का सबसे पहला चान्स चाहता था..इसलिए आया था मेरे पास..मैने उसे भगा दिया.
"तुम समझ सकते हो की मुझपर क्या बीती होगी..मैने तो ख़ुदकुशी करने की भी सोची.. तभी किसी ने आकर कहा की मुझसे कोई मिलने आया है..
मैं नीचे गयी और देखा की ये तो स्टूडेंट्स का नया कोच है, वो पिछले साल तक अपनी टीम का कॅप्टन था..पहले तो मुझे दर्र लगा की कहीं और कोई तो नही आया मुझे डेट पर ले जाने के लिए..पर मेरे पीछे हेड मिस्ट्रेस खड़ी हुई थी और मैं जानती थी की उनके रहते हुए मुझसे कोई इस तरहा की बात नही कर पाएगा.
"कोच ने बताया की मेरे बाय्फ्रेंड ने अपने दोस्तो के साथ शर्त लगाई थी की वो मुझे पाकर रहेगा, और उसने नशे की हालत में अपनी टीम पार्टी में सभी को उस दिन का किस्सा भी बता दिया है, जिसकी वजा से सभी को मेरे बारे में पता चल चुका है.
"मैं सोच रही थी की अभी ये धरती फट जाए और मैं उसमे समा जाऊ …इतनी शर्मिंदगी मुझे कभी नही हुई थी..”
"और तब कोच ने मुझे बताया की उसने मेरे बाय्फ्रेंड को अपने कमरे में लेजकर काफ़ी धमकाया और अपने दोस्तो से ये बोलने को कहा की शर्त जीतने के लिए उसने झूट बोला और कार सीट पर मुर्गे का खून लगाकर उसने अपनी बात को सही बनाया..सिर्फ़ शर्त जीतने के लिए.”
"और फिर कोच ने सभी टीम को एक साथ बुलाया और कहा की वो और मैं अच्छे दोस्त हैं, और कोई भी मेरे बारे में बुरी अफवाह ना फैलाए..”
"उन्होने मुझे विश्वास दिलाया की अब मेरे बारे में कोई भी कुछ नही बोलेगा, और ये प्रॉमिस भी किया की मुझे किसी भी तरहा की चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है, मेरी रेप्युटेशन पर कोई सवाल नही उठाएगा.”
"मैं उनकी बात सुनकर काफ़ी भावुक हो गयी और मैने पूरी कहानी सुना डाली उन्हे..जिसे सुनकर उनका खून खोल उठा....और मैं रोती रही ...उन्होने मुझसे कहा की ये सब तो उन्हे रेप जैसा लग रहा है, और मुझे पोलीस में कंप्लेंट करने को भी कहा.
"वो उस जमाने में मुमकिन नही था मेरे लिए..मैने ना जाने क्या सोचकर उनके गाल पर एक किस कर किया..जो मैं आजतक नही समझ पाई की क्यों..”
वो थोडा रुकी , पानी पिया और शरमाते हुए मुझे आँख मारकर बोली “अगले दिन, वो मेरे लिए फ्लावर्स लेकर आए, बिल्कुल ऐसे ही..हम घूमे, बाते करी, वो बिल्कुल पर्फेक्ट जेंटलमेन थे.. मुझे तब तक हँसाते थे, जब तक मेरी आँखों से आँसू ना निकल जाएँ..वो मुझमे काफ़ी दिलचस्पी लेते थे, अगले दो हफ्तों तक हम दोनो काफ़ी नज़दीक आ गये”
"और अगली गेम से ठीक पहले मुझे पता चला की वो मेरा बाय्फ्रेंड स्टेयर्स से गिर गया है और उसकी टाँग और बाजू में फ्रॅक्चर हो गया है..अगले दिन जब कोच मुझसे मिलने आए तो उनके चेहरे पर भी काफ़ी घाव थे और उनके हाथ पर पट्टी बँधी हुई थी..मैं सब समझ गयी ..मैने अगले ही पल उन्हे डॅन्स पर चलने के लिए कहा…तुम समझ सकती हो की उस समय एक लड़की किसी लड़के को डेट पर चलने के लिए कह रही थी, जो काफ़ी अड्वान्स माना चाहता था, वो मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दिए..”
"हम डेट पर गये और डांस किया..मुझे उनके साथ काफ़ी रिलॅक्स महसूस हुआ, पर मैं अपने पिछले एक्सपीरियेन्स से काफ़ी डरती थी इसलिए ज़्यादा नज़दीकियाँ नही बनाई..जाते हुए जब मुझे लगा की अब हमें किस भी करनी पड़ेगी तो मैं काफ़ी घबरा गयी…पर जब उन्होने किस किया तो उसमे वासना जैसी कोई बात नही थी…सिर्फ़ सच्चे प्यार की झलक थी..”
"वो जानते थे की मैं अब वर्जिन नही हूँ, उन्होने मेरी विश को भी माना की मैं अपनी शादी तक कुछ नही करना चाहती..लेकिन मैं सच बताऊँ , वेट करना मेरे लिए काफ़ी मुश्किल था..हम दोनो लगभग 3 महीनो से डटे पर जा रहे थे और अब मुझे ये विश्वास हो गया था की मुझे सच्चा प्यार हो गया है अपनी जिंदगी में पहली बार..”
"लेकिन वो कहते है ना..कभी-2 अपनी नज़र भी लग जाती है..कॉलेज ब्रेक से पहले मुझे डॉक्टर से अपायंटमेंट लेना पड़ा, और पता चला की मैं प्रेग्नेंट हूँ लगभग टीन महीनो से..मुझे मालूम था की ये कोई छोटी बात नही है, उन दीनो, अगर घर वालों ने दबाव में मेरी शादी उस लड़के से कर दी तो..मैं तो मॅर जाना ज़्यादा पसंद करूँगी”
उनकी आँखों में आँसू आ गये,वो थोडा रुकी और अपने आँसू पोंछकर बोली. "मैने जब अपने पेरेंट्स को वो सब बताया तो उन्हे लगा की मैं कोच की बात कर रही हूँ, क्योंकि वो भी उसके और मेरे बारे में जानते थे, पर जब मैने उनसे कहा की कोच मेरे बच्चे का बाप नही है तो मुझे ये कहते हुए भी काफ़ी शर्म आई, मेरे पापा तो गुस्से में आग बबूला हो गये, उन्होने कहा की उनके लाड प्यार की वजा से ही मैं ऐसी हो चुकी हूँ, उन्होने मुझे अपनी जिंदगी से, अपनी जायदाद से, और अपने घर से भी निकाल दिया..और मेरा सामान बाहर फैंक दिया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.”
"वापिस कॉलेज जाने के बाद, शाम के समय कोच मुझसे मिलने आए, मैने अपनी सहेली रीना को नीचे भेजा और उनको ये कहने को कहा की मेरी अपने पेरेंट्स के साथ लड़ाई हुई है और अब मैं कॉलेज छोड़ रही हूँ..और मैं अब उनसे कभी नही मिल पौँगी...मैं कोच को पूरा सच नही बताना चाहती थी..रीना ने सब कुछ कोच को बताया..और वो विज़िटर एरिया को पार करते हुए , किसी की भी परवाह किए बिना, मेरे रूम तक आ गये… उन्होने मुझसे कहा की वो मुझसे पिछले साल से ही प्यार करते आए हैं पर मेरी जिंदगी में उस समय वो लड़का था इसलिए वो कुछ ना बोल पाए थे..अब वो मुझसे शादी करना चाहते हैं..और मेरा बच्चा भी अपनाने को तय्यार हैं “
अगर मैं उनसे शादी कर लेती तो मेरी कई परेशानिया हट जाती..लेकिन ये मेरा स्वार्थ होता..
अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए उन्होने कहा “अगला पूरा हफ़्ता मेरे लिए परेशानियो वाला था..वो मेरी कोई भी बात सुनने को तय्यार नही थे, फिर मैने सोचा की बात करने में कोई बुराई नही है..पर जब भी वो बोलते थे तो मेरा जवाब कमजोर होता जाता था…और आख़िर में मैने उनसे कहा की इस स्केंडल की वजह से उनका करियर खराब हो सकता है..उनकी जॉब भी जा सकती है..”
आगे बोलते हुए उनका चेहरा फिर से खिल उठा…बिल्कुल किसी चियर्लीडर की तरहा..
”शनिवार को हमारे कॉलेज का लास्ट फूटबाल मॅच था..वो 14 फरवरी 1941 का दिन था, मैं उस दिन को कभी नही भूल सकती..जब मॅच का हाफटाइम हुआ तो कोच की आवाज़ गूँजी लाउडस्पिकर पर..”मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ..और मैं उससे शादी करना चाहता हूँ..वो बिल्कुल सामने वाली लाइन में बैठी है..मॅच ब्रेक के बाद मैं उसको प्रपोज़ करूँगा..मुझे पता है की उसका जवाब क्या होगा..पर मैं फिर भी आप लोगो से रिक्वेस्ट करता हूँ की आप भी मेरा साथ दे..!'
"पूरी दुनिया हिलने लगी थी मेरी आँखों के सामने…मुझे इतनी एंबॅरसमेंट कभी नही हुई थी अपनी लाइफ में..मैं जल्दी से अपनी दूसरी चियर्लीडर्स के साथ चेंजिंग रूम में गयी, वहाँ कोच मेरा इंतजार कर रहा था, मुझे समझ नही आ रहा था की मैं उनको किस करूँ या जान से मार दू … उन्होने कहा “अब सभी लोग ये समझेंगे की ये बच्चा मेरा है..अब तुम्हारे उपर है की तुम क्या कहती हो..अगर तुमने मना कर दिया तो लोग मुझे ही बुरा बोलेंगे..और तुम्हारे बच्चे का ज़िम्मेदार मुझे कहेंगे..
"उन्होने कहा की वो दूसरे शहर में एक जॉब का ऑफर ले चुके हैं, इससे किसी को भी ये पता नही चलेगा की हमारी शादी कब हुई, बच्चा कब हुआ..”
"और ब्रेक ख़त्म होने के बाद वो मुझे मैदान के बीचो बीच ले गये और अपने घुटनो पर बैठकर हाथो में रिंग लेकर मुझे प्रपोज़ किया..मैने एस कहा..सारा स्टेडियम झूम उठा..उसके बाद मुझे कुछ याद नही..सिवाए इसके की हमने वो गेम जीत ली थी..मेरे पास अभी वो रिंग नही है..वरना मैं तुम्हे वो ज़रूर दिखती..क्या तुमने इतनी रोमॅंटिक बात सुनी है कभी..?”
उस लड़की की आँखों में आँसू आ गये ये सब सुनकर और वो बोली “नही..…आगे क्या हुआ..?”
उस बूढ़ी औरत के चेहरे पर फिर से पजल लुक आ गया और वो फिर बोली, "ओह, कितने सुंदर फ्लावर्स है…किसके लिए हैं ये..? ये मुझे उसी कोच की याद दिला रहे हैं, वो भी ऐसे ही फ्लावर्स लेकर आता था..”
उस लड़की ने बूढ़ी औरत का हाथ पकड़ा और बोली..”हम आपको ही मिलने आए थे..कल हमारे कॉलेज का लास्ट फुटबॉल मॅच था, मैं एक चियर्लीडर हूँ और हाफ टाइम में लाउडस्पिकर से आवाज़ आई थी….”अस्सी साल पहले एक पुराने फुटबॉल खिलाड़ी ने बीच मैदान एक लड़की को प्रपोज़ किया था..और उसके ठीक बाद वो आर्मी में चला गया…देश के लिए लड़ाई करने, वो हमारे देश का एक हीरो था..और वो चियर्लीडर हमारे कॉलेज की फर्स्ट विमन प्रिन्सिपल बनी थी आगे चलकर..और अब मैं उनका पोता ..जो इसी मैदान में फूटबाल खेलता था, मैं भी लड़ाई के मैदान में जा रहा हूँ.. और मैं आज एक और चियर्लीडर को अपने दिल की बात कहना चाहता हूँ…और फिर अभ मुझे बीच मैदान में ले गया और अपनी नीस पर बैठकर मुझे रिंग पहनाई..मैने झट से हाँ कर दी..और वहाँ बैठे अस्सी हज़ार लोगो ने चीख कर हमारा उत्साह और भी बड़ा दिया..और उसने मुझे वोही सेम रिंग पहनाई…ये देखो..मैं उस औरत से मिलना चाहती थी जिसने अभय को पाल पोसकर इतना बड़ा किया.."
उस औरत ने अंगूठी को देखा, कन्फ्यूज़्ड, फिर प्यारी हँसी के साथ बोली “मैं तुम्हे ज़्यादा देर तक नही रोकना चाहती..असल में ये काफ़ी सुनसान जघा है..यहाँ कोई नही आता..यहाँ सभी बूढ़े लोग रहते हैं…जिन्हे अब कुछ याद भी नही है..समझी”
और हंसते हुए उन्होने अपनी आँखें बंद कर ली..और अगले ही पल वो सो गयी…उनकी स्नोरिंग की हल्की आवाज़ आ रही थी..
संजना ने पूरे कमरे में देखा, सारे कमरे में अभय के बचपन में बनाई गयी ड्रॉयिंग्स, पेंटिंग्स टंगी हुई थी..दादी ने अपने हाथो से पूरे कमरे में अपने पोते का सारा समान सॅंजो कर रखा हुआ था..
संजना ने अभय की आँखों में उठता दर्द देखा..और उसे बाहर लेजाकर बोली…”ओह अभय ..वो तुम्हे आज भी नही पहचान पाई...”
अभय बोला "कॉलेज में जाने से पहले उनकी यादाश्त कमजोर होने लगी थी..और जब मैं कॉलेज गया तो और भी बुरी हालत हो चुकी थी..मैं अकेला था और इनकी ज़्यादा देखबाल नही कर सकता था..ये मेरे लिए काफ़ी मुश्किल था पर ये जघा सबसे बेस्ट है..यहाँ इनका पूरा ध्यान रखा जाता है..”
"वो काफ़ी हिम्मतवाली है..इन्होने अपना वो बच्चा तीन महीने बाद ही खो दिया था..वो नये शहर में बिल्कुल अकेली थी क्योंकि कोच की फॅमिली ने भी उसे रिजेक्ट कर दिया था..और कोच लड़ाई के लिए सरहद पर चला गया था..जो लगभग चार साल तक चली..इन्होने अपने कोच को फिर दोबारा नही देखा..बहुत बुरा हुआ था उस समय इनके साथ”
“कोच ने अपनी जिंदगी इनके लिए अर्पण कर दी थी, उन्होने अपने कॉलेज में मिल रही प्रमोशन को भी नही लिया..सिर्फ़ इनके साथ दूसरे शहर में जाकर रहने के लिए..उन्होने दादी को आगे पड़ने के लिए कहा और उनकी पढाई .पूरी करवाई.”
"कोच उनकी लाइफ का प्यार थे, दादी ने बाकी की उमर किसी और आदमी की तरफ नही देखा, मेरे पापा को अकेले बड़ा किया…वो भी लड़ाई में जा कर शहीद हुए, और बाद में जब मैं पैदा हुआ तो दोबारा वोही सब सहन करते हुए मुझे भी बड़ा किया.. मैं नही चाहता था की तुम्हारे साथ भी वोही सब कुछ हो..इसलिए मैं भी लड़ाई से वापिस आकर ही तुमसे शादी करूँगा..और बच्चे भी तभी..”
“देखो अभय ..हम ये बातें पहले भी कर चुके हैं....मैं नही जानती की आगे फ्यूचर में क्या होगा…इसलिए मैं अभी शादी चाहती हूँ..और बच्चा भी”
उसके चेहरे पर आते अनेक विचारों को देखकर उसने अभय का हाथ पकड़ा और बोली “ये सब यादें तो इन्होने सँजोकर रखी है,ये पेंटिंग्स जो तुमने और तुम्हारी मा ने मिलकर बनाई थी..ये उन ट्रोफीस की जगह हैं जो तुम्हारे दादाजी को मिली थी, क्या तुम्हे एक सेकेंड के लिए भी ये लगता है की इन्हे कोई गीला है तुम्हे अकेले पालने का..”
अभय ने गहरी साँस ली “नही, इन्होने हमेशा कहा है की मैं भगवान का भेजा हुआ तोहफा हूँ, जो अच्छे काम इन्होने जिंदगी में किए हैं उसका फल हूँ, “मुझे नही मालूम इनमे इतनी ताक़त कहाँ से आती थी, वो 60 साल की थी जब मैं इनकी जिंदगी में आया, वो स्कूल में जॉब करती थी पर हमेशा मेरे लिए हर जगह रहती थी,वो हर स्कूल फंक्शन में आती थी, मेरी हर गेम को देखती थी, मेरी हर छुट्टियों में वो मुझे घुमाने के लिए बाहर ले जाती थी, ये बिल्कुल सेल्फलेस हैं और ये बात मुझे यहाँ लगती है.” ये कहते हुए अभय ने अपने दिल पर हाथ रखा, “और जब इनकी यादाश्त जाने लगी तो सभी ने सोचा की अब इनका क्या होगा..मेरा बस चलता तो मैं हमेशा इनके साथ रहता, पर ये मुमकिन नही था.
संजना ने अभय को गले लगाया और बोली “ अभय , हमेशा से अच्छे लोगो को कोई पहचान नही मिल पाती है..उनके बच्चे ही उनके लिए वो मॉन्युमेंट्स होते हैं जिनकी वजह से वो पहचाने जाते हैं..और तुम बिल्कुल वैसे ही हो जैसा वो चाहती थी..”
तभी एक नर्स वहाँ आई और बोली “हेलो अभय , ये वोही लड़की हैं ना जिसके बारे में तुम हमेशा कहते रहते हो..” और वो संजना से बोली “ अभय यहाँ का सबसे ज़्यादा आने वाला विज़िटर है, किसी भी परिवार के लिए ये बड़ा ही कठिन समय होता है..जब कोई यहाँ आता है..जब भी अभय यहाँ होता है वो तभी बोलती है..वरना एक शब्द भी नही ..ये भी रोज यहाँ आता है..बारिश, धूप, आँधी तूफान..हमेशा लॉबी से फ्लवर्स लेकर यहाँ आता है, लेकिन कभी कोई दिन मिस नही करता…ये एक ही कहानी को दस हज़ार बार सुन चुका होगा..ऐसा करने के लिए जिगर चाहिए..कैसे करते हो तुम ये सब अभय ??”
अभय की आँखों में आंसू थे वो बोला "ये मुझे अब पहचानती नही..पर मेरी शक्ल बिल्कुल अपने दादाजी से मिलती है, ये जब भी मुझे देखती है इन फ्लावर्स के साथ इनके दिमाग़ में कुछ धुंदली यादें ताज़ा जो जाती है, और वो ये स्टोरी एग्ज़ॅक्ट्ली सेम वे में सुना देती है..और अंत में सो जाती है..अपने अच्छे समय को याद करते हुए. ”
वो नर्स मुस्कुरा उठी अभय की बात सुनकर “हाँ तुम ठीक कहते हो..मुझे पता नही की किसी ने तुम्हे ये पहले बताया है के नही..पर इनके चेहरे पर बड़ी प्यारी स्माइल रहती है घंटो तक..तुम्हारे जाने के बाद”
अभय का चेहरा खिल उठा “मुझे इसकी ही आशा थी..मैं इनके लिए यही कर सकता हूँ अब तो..इनकी कहानी सुन कर इन्हे सुख पहुँचा सकता हूँ, मैं यहाँ आता हूँ क्योंकि मैं इनसे बड़ा प्यार करता हूँ, यही है वो जिन्होने मुझे सच्चे प्यार के बारे में बताया और सिखाया.. ये हमेशा कहती थी की सच्चा प्यार सिर्फ़ फ्लावर्स या चॉक्लेट्स देना नही होता, सच्चा प्यार कोई फीलिंग या एमोशन भी नही है.. सच्चा प्यार तो किसी के लिए अच्छा चाहना है और इसके लिए चाहे अपनी ज़िंदगी का ही बलिदान ना देना पड़े ..तो मैं कैसे कम कर सकता हूँ..”
अभय ने संजना के हाथों को अपने हाथ में लिया और उसकी आँखों में देखकर कहा “ मेरे दादाजी भी इसी तरहा से प्यार करते थे इन्हे, और ये भी उसी तरहा से मुझे प्यार करती है…और मैं वादा करता हूँ की मैं भी तुम्हे अपनी पूरी जिंगी ऐसे ही प्यार करूँगा..आई लव यू .”
और दोनो गले मिलकर रोने लगे.