वह एक दम से घबड़ा गई और अपने को छुड़ाने की बेमन सी कोशिश करने लगी। पर लण्ड थामे रखा सो छोटे ठाकुर समझ गये कि चुदवाना तो चाहती है पर नखरे कर रही है। वो उसे चूमने की कोशिश करने लगे। वह लण्ड कस कर पकडे़ पकडे़ उससे दूर हटने की बेमन सी कोशिश करती रही। जय ने उसके दहकते गालों को चूम कर होंठों में दबा लिया और उसे लिए हुए बिस्तर पर जा पड़ा। उसे बिस्तर पर पटक कर उसके ऊपर चढ़ गया और फिर नीचे झुक कर उस के होठों को चूमने की कोशिश करने लगा। वह अपना चेहरा इधर उधर घुमा रही थी पर छोटे ठाकुर उसके होठों को चूमने में कामयाब हो ही गये और बड़े बड़े बेलों जैसी चूचियों को दोनों हाथों से थाम कर होठों का रस चूसने लगा। कुछ देर मे वो शान्त हुई मानो थक गई हो जय ठाकुर दोनो हाथों में पकड़ी बड़े बड़े बेलों जैसी चूचियों को दबाते हुए कहा –
“नखरे क्यों दिखाती है साली। तू ही तो सबको कहानी सुनाना चाहती थी रानी एक पकड़ तेरे साथ भी हो जाए। फिर तू सुनाना कहानी सबको। चुदा ले जब मन हो रहा है क्यों मन मार रही है। अरे हमें नहीं देगी तो क्या अचार डालेगी चूत का। चल आजा और प्यार से अपनी मस्त जवानी का मजा ले और कुछ अपने यारों को भी दे।
आशा बोली नहीं नहीं छोड़ दो मुझे नहीं तो मैं अभी भाभी को बुलाती हूं।”
जय ठाकुर –
“बुला ले दोनों साथ ही चुदवाना मैं तो आज बिना चोदे नहीं छोड़ने वाला आशा बोली पहले एक को तो निपटा लो दोनों साथ ही चोदने की बाद में सोचना।”
–कहते हुए अपने हाथ में थमे लण्ड को धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर उसने छोटे ठाकुर का तौलिया खोल दिया और उसके 8” के फनफनाते हुआ लौंड़े को आजाद कर दिया। जय ठाकुर ने उसका ब्लाउज खींच कर खोल दिया। बड़े बड़े बेलों जैसी चूचियाँ उछलकर बाहर आ गयी। फिर एक हाथ को नीचे ले जाकर उसके पेटीकोट के अन्दर हाथ डालकर उसकी चिकनी चिकनी जांघों को सहलाने लगा। धीरे धीरे हाथ उसकी चूत पर ले गया। पर वो दोनों जांघों को कस कर दबाए हुए थी। जय उसकी चूत को ऊपर से ही कस कस कर सहलाने लगा तो उसने टॉगें फैला दी और उंगली चूत के अन्दर डाली। उंगली अन्दर होते ही वह कमर हिलाने लगी। इस से उसका पेटीकोट ऊपर हो गया। जय ने कमर पीछे करके लण्ड को उसके नंगे चूतड़ों की दरार में लगा दिया। क्या बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ थे। जय उसकी बड़ी बड़ी चूचियां हाथों में थामकर दबाते हुए लण्ड को बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ों पर रगड़ने लगा़।
“क्यों रानी कैसा लग रहा है अब तो चुदाओगी ।”
-जय ठाकुर ने हाथों में थमी बड़ी बड़ी चूचियां के निपल मसलते हुए लण्ड को बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ों पर रगड़ते हुए पूछा।
“हाय बहुत मजा आ रहा है।”
उसने अपना हाथ पीछे करके छोटे ठाकुर के लण्ड को पकड़ लिया और उसकी मोटाई को नाप कर बोली –
“हाय ठाकुर इतना मोटा लण्ड। कौन इस से चुदाने से इन्कार कर सकता है। चुदाना नहीं होता तो इतना हंगामा क्यों करती। चलो मुझे सीधी होने दो।”
–कहते हुए वह चित्त लेट गई।
अब वो दोनो अगल बगल लेटे थे। जय ठाकुर ने अपनी टांग उसकी टांग पर चढ़ा दी और लण्ड को उसकी जांघ पर रगड़ते हुए चूचियों को चूसने लगा। पत्थर की जैसी सख्त थी उसकी चूचियाँ। एक हाथ से उसकी चूची दबा सहला रहा था और दूसरे हाथ से नंगी नर्म चिकनी मोटी मोटी संगमरमरी जांघों को सहला नितंबों को दबा रहा था। वो ठाकुर के लण्ड को अपनी जांघों के बीच में दबा कर मसल रही थी। जब हम दोनो पूरी तरह जोश में आ गए तब आशा बोली –
“अब और मत तड़पाओ ठाकुर राज्जा। अब तो चोद दो।”
छोटे ठाकुर ने झटपट उसकी साड़ी और पेटीकोट को कमर से ऊपर उठा कर चूत को पूरा नंगा कर दिया। वो बोली “अरे कपड़े तो उतार लेने दो।”
जय ठाकुर बोला-
“नहीं तुझे अधनंगी देख कर जोश और डबल हो गया है। इसलिए पहली पकड़ तो कपडों के साथ ही होगी।”
फिर छोटे ठाकुर ने उसकी टांगें अपने कन्धें पर रखीं और उसने लण्ड पकड कर अपनी चूत के मुंह पर रख लिया और बोली –
“आजा राजा। शुरू हो जा।”
छोटे ठाकुर ने कमर आगे करके जोर का धक्का दिया और आधा लण्ड दनदनाता हुआ उसकी चूत में धंस गया। वो बोली
“हाय छोटे राज्जा ठाकुर जीयो। क्या शॉट लगाया है।”
छोटे ठाकुर ने उसकी सख्त चूचियों को पकड कर मसलते हुए दूसरा करारा शॉट लगाया और मेरा बचा हुआ लौंडा भी जड तक उसकी चूत में धंस गया। उसकी आह निकल गई। बोली हाय राज्जा बडा जालिम है तुम्हारा लौंडा। किसी कुंवारी छोकरी को चोदोगे तो वो तो मर ही जाएगी। संभल कर चोदना।”
छोटे ठाकुर उसकी चूचियों को दबाते हुए धीरे धीरे लण्ड चूत में अन्दर बाहर करने लगा। चूत तो इसकी भी टाईट लग रही थी। जैसे ठकुराइन भाभी ने सिखाया था वैसे ही लण्ड को पूरा बाहर निकाल कर दोबारा झटके से अन्दर डाल रहा था। जैसे जैसे उसकी मस्ती बढने लगी वो भी नीचे से कमर उठा उठा कर छोटे ठाकुर के हर शॉट का जवाब देने लगी। उसने धीरे धीरे अपनी रफ्तार तेज की और उसी हिसाब से वो भी तेजी से चूतड़ उछाल उछाल कर जवाब देने लगी। कन्धे पर टांग रखी होने की वजह से उसकी चूत पूरी फैल गई थी और छोटे ठाकुर का लण्ड सटासट उसकी चूत में पूरा का पूरा अन्दर बाहर हो रहा था। लम्बी चुदाई से उसकी चूत पानी छोड रही थी और ढीली सी लग रही थी। इस लिए थोड़ी तक इस आसन में चोदने के बाद छोटे ठाकुर ने आशा की टांगें नीचे कर दीं और उसके ऊपर लम्बा होकर चोदने लगा। अब उसकी चूत थोड़ी कस गई और लण्ड घर्षण के साथ अन्दर बाहर होने लगा जिससे मजा दोगुना हो गया। अब आशा ने छोटे ठाकुर की गर्दन में बांहें डाल कर सिर नीचे किया और अपनी चूची को उसके मुंह में देकर चुसाने लगी। सच आशा की चूचियां तो भाभी से भी ज्यादा रसीली और मजेदार थी। आशा साथ साथ मुझे बढावा भी दे रही थी।
“चूस जोर जोर से ले चोद ले छोटे राज्जा ठाकुर चोद ले। चार ही दिन की तो जव्वानी है। मेरा सारा बदन तुम्हारे हवाले है। जी भर कर मजे ले लो। हाय राज्जा क्या मस्त लौंडा है तुम्हारा। पहले पता होता तो कब की चुदवा चुकी होती तुमसे।”
छोटे ठाकुर की भी सांसें फूल रही थी। पर पिछली दो रातों की चुदाई की वजह से लण्ड झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। आशा अब तक तीन बार झड़ चुकी थी पर छोटे ठाकुर के लण्ड की ताकत देख कर हैरान थी। छोटे ठाकुर ने सुस्ताने के खयाल से अपनी रफ्तार थोड़ी धीमी कर दी और उसकी चूचियो पर सिर रख लिया। कुछ देर तक उन्हें यूंही पड़े देख आशा उठ कर छोटे ठाकुर के बगल में ही चौपाया बन गई और बोली –
“आओ छोटे राज्जा अब पीछे से चोदो मेरी।”
छोटे ठाकुर उठ कर आशा के पीछे आया और लण्ड पकड़ कर उसकी चूत पर रगड़ने लगा। उसके उभरे उभरे चूतडों को देखकर छोटे ठाकुर का लण्ड टन्ना रहा था। जॉघों के आसपास रगडते फूले हुए चूतड़ मखमली गद्दों जैसे लग रहे थे। छोटे ठाकुर ने उसे बिस्तर पर अपने पास लिटा लिया और फिर से दबोच कर चूचियों का मजा लेने लगा। वो भी लण्ड को पकड कर हिलाने लगी।
“अच्छा तो ये हो रहा है ।”
-दरवाजे पर से ठकुराइन की आवाज आई।
दोंनो चौंके़।
चुदाई की मस्ती में ठकुराइन भाभी का खयाल ही दिमाग से उतर गया था। भाभी उनके पास आई और आशा के चूतड़ों पर चपत जमाती हुई बोली साली-
“मैं वहां रसोई में तेरा इन्तजार कर रही हूं कि आकर तू काम पूरा करे और यहां तू टांगे उठा कर लण्ड खा रही है। और तुम भी छोटे देवर राजा बडे बेसब्र हो। मैंने कहा था ना कि मैं आशा से बात करूंगी। पर तुमने तो चोद भी डाली।”
छोटे ठाकुर ने बड़ी ठकुराइन को पकड़ कर बिस्तर पर अपने पास ही गिरा लिया और उनकी बड़ी बड़ी चूचियॉं थामकर दबाते हुए बोला –
“आओ ना भाभी। बडी मस्त चीज है ये। अब हम सब साथ साथ मजे लेंगे।”
ठकुराइन ने बगल में ही चौपाया बनी आशा की चूचियों को पकड़कर सहलाते हुए कहा
-“हाँ है तो वाकई मस्त माल। चल तेरी हसरत पूरी हो गयी और आगे के लिए भी रास्ता साफ हो गया।”
आशा बोली-
“अरे भाभी इसे क्या खिलाती हो मैं तीन बार झड़ चुकी हूं साला झड़ने का नाम नहीं ले रहा है। अब आप ही सम्भालो इसे।
इतना कह आशा ठकुराइन से चिपट गई। छोटे ठाकुर के साथ मिल कर ठकुराइन को पूरा नंगा कर दिया। फिर आशा भी अपने पूरे कपड़े उतार कर नंगी हो गई। आशा उस दिन अपने घर नहीं गई क्योंकि उसके मॉ बाप बिल्लू और बेला दोनों ही तो ठाकुर साहब के साथ शिकार पर गये थे और घर पर कोई नहीं था सो वो छोटे ठाकुर और बड़ी ठकुराइन साथ जवानी का खेल खेलती रही। हर तरह से चुदाई की। पूरे घर में छोटे ठाकुर ने बड़ी ठकुराइन और आशा की चूतों की धुनाई की। कभी किचन में कभी ड्राइंग रूम में साथ साथ नहाते हुए ।
छोटे ठाकुर की नींद करीब 7 बजे खुली तो देखा बड़ी ठकुराइन अभी सोई पड़ी हैं।वे अपने कमरे मे गये और रोजमर्रा के कामों से निपट कर बिस्तर पर लेट कर एक किताब पढ़ने लगे और पढ़ते पढ़ते फिर सो गये। 10 बजे के करीब बड़ी ठकुराइन छोटे ठाकुर के कमरे मे बिस्तर के पास आयीं और उसे जगाने लगी। छोटे ठाकुर ने अपनी आँखे खोली देखा बड़ी ठकुराइन उनके ऊपर झुकी हुयी गालो को चूमकर जन्मदिन की बधाई दे रही थी बड़ी ठकुराइन की सारी का पल्लू उनके बदन से गिरकर छोटे ठाकुर के सीने पर पड़ा था। उनकी बड़ी बड़ी गोल ब्लाऊज मे कसी हुयी चूचियॉ ब्लाऊज से बाहर निकलकर आजाद होने के लिये बेकरार थीं। उन्होने अन्दर ब्रा नही पहन रखी थी उनकी चूचियो का निप्पल ब्लाउज मे चुभ कर बाहर निकल रहा था। न जाने कितनी बार इन चूचियो को छोटे ठाकुर पकड़ कर सहला दबा और खेल चुके थे। लेकिन उनकी चूचियो मे कुछ अलग ही आकर्षण था कि जब भी वे देखते उनको पाने के लिये दिल बेकरार हो जाता।
छोटे ठाकुर ने उनकी बड़ी बड़ी चूचियॉ पकड़ कर उन्हें अपने ऊपर खीचा और कसकर बॉहो मे भर लिया। उनके होठों पर जमकर चूमना शुरू कर दिया और अपने उपहार के बारे मे पूछने लगा। वे नहाकर आयी थी उनके बदन से साबुन की खुश्बू आ रही थी । छोटे ठाकुर के हाथ उनकी गदराई पीठ सहला रहे थे होठों पर एक जोरदार चुम्बन के बाद वे उठने लगी तभी छोटे ठाकुर का हाथ उन्हें अपने सीने से चिपकाये रखने के लिये उनकी कमर पर गया और उनकी कमर पर गया और उनकी साड़ी खुल गयी। उन्होंने कहा –
“थोड़ा सब्र करो सबकुछ मिलेगा।”
और अपनी साड़ी ठीक करते हुए उन्होने दरवाजे की तरफ इशारा किया तो छोटे ठाकुर ने देखा ठकुराइन भाभी की बहन वहॉ खडी थी।
वो पूरी सेक्स बॉम्ब दिख रही थी उसने बहुत नीचे गले का टॉप और मिनी स्कर्ट पहन रखा था। उसके कपड़े पारदर्शी थे उसकी काली ब्रा साफ दिखाई दे रही थी। उसके अधखुले उभार बहुत ही सेक्सी दिख रहे थे।
बड़ी ठकुराइन मुस्कराती हुई छोटे ठाकुर पास आयी और बोली-
“कैसा लगा जन्मदिन का उपहार। तुम ऐसी लड़की चोदना चाहते थे जो कुँवारी हो। लो देखो यह अभी कुँवारी है लेकिन इसकी भी दो अजीब सी शर्तें है।”
छोटे ठाकुर-
“वो क्या।”
ठकुराइन मुस्कराती हुई बोली –
“पहली शर्त है कि ये उसी से पहली बार चुदवायेगी जो इसे सन्तुष्ट कर सके इसीलिए जब मैंने तेरे फौलादी लण्ड से चुदवाया और पाया कि तू तो जबरदस्त चुदक्कड़ है और बड़ी से बड़ी चुदक्कड़ औरत को सन्तुष्ट क्या हरा सकता है तो मैंने इस बताया। पूरी चुदाई की दास्तान सुनकर ये तैयार हो गयी और दूसरी शर्त ये कि कुँवारी सील लगी चूत देने के बदले में उस मर्द को इससे शादी करनी पड़ेगी पर ये भी हमारी तरह शादी के बाद स्वाद बदलने के लिए लण्ड और चूतें बदल बदलकर इस्तेमाल करने की तमन्ना रखती है।”
छोटे ठाकुर –
“भई वाह इसके तो विचार भी अपनी टक्कर के हैं। आज तो आपने कुँवारी चूत और परमानेन्ट चूत दिलवाने के अपने दोनों वादे पूरे कर दिये। मुझे भी दोनों शर्ते मन्जूर हैं।”
ठकुराइन फिर मुस्कराई –
“मैं ठकुराइन हूँ अपने वादे की पक्की। अब मजे करो।”
कहकर ठकुराइन उठकर बाहर जाने लगी छोटे ठाकुर ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा –
“अरे आप कहॉं चलीं आप हमेशा से मेरी पहली पसन्द हो आप भी हमारे साथ मजे लो।”
छोटे ठाकुर शुभा के पास गये और उसका हाथ पकड़कर कहा –
“मुझे आपकी दोनों शर्ते मन्जूर हैं। आप चाहे तो अपनी पहली शर्त अभी आजमा लें। शुभा बोली –
“दीदी ने मुझे बताया है कि आपका लण्ड बडे़ ठाकुर के टक्कर का है अपनी कुँवारी चूत देने का इतना बड़ा रिस्क लेने से पहले क्या मैं देख सकती हूँ।”
छोटे ठाकुर –
“जरूर जरूर क्यों नहीं।“
छोटे ठाकुर ने अपने पायजामे का नारा खीच दिया। पायजामा टॉगो से नीचे सरक गया और फौलादी लण्ड बाहर आ गया। शुभा ने छोटे ठाकुर फनफनाता फौलादी लण्ड थाम कर सहलाते हुए ठकुराइन से कहा-
“ वाकई दीदी है तो बडे़ जीजा ठाकुर के टक्कर का।
छोटे ठाकुर और बड़ी ठकुराइन एक साथ बोल पड़े-
“तूने उनका कब देखा।”
“एक दिन मैं बिना दस्तक दिये अन्दर चली गई थी वो बेला को चोद रहे थे।” –शुभा ने बताया।
छोटे ठाकुर –
“ओहो तो अब क्या इरादा है।”
शुभा –
“अब ठीक है चल अब अपनी पहली शर्त पूरी करके दिखा।
छोटे ठाकुर ने एक धीमा संगीत म्यूजिक सिस्टम पर लगाया और दोनों बॉहो मे बॉहें डाल कर झूमने लगे। जय ने ठकुराइन को भी अपने करीब खीच लिया तो उनके दोनों के अंग जय के बदन से रगड़ने लगे। उनके उभार जय के सीने पर चुभ रहे थे सॉसो की गरमी गरदन पर महसूस हो रही थी। छोटे ठाकुर ने शुभा के होठो पर अपने होठों को रख दिया और बेसब्री से उसके नरम गुलाबी होठों का रस पीने लगे । वह भी पूरा पूरा साथ दे रही थी। उसका एक हाथ शुभा की स्कर्ट के अन्दर उसके गोल उभरे चूतड़ो को दबोच रहा था और दूसरा ठकुराइन की पीठ के बीच की नाली से होता हुआ चूतड़ों को सहला रहा था। शुभा ने छोटे ठाकुर को अपनी बॉहो मे कसकर जकड़ लिया। छोटे ठाकुर ने उसकी मजबूत पकड़ को महसूस किया और जान लिया कि शुभा एक साधारण लड़की नही बल्कि बेहद तगड़ी कसरती ठकुराइन लड़की है।
तभी ठकुराइन और शुभा दोनों ने छोटे ठाकुर को धक्का देकर बेड पर गिरा दिया छोटे ठाकुर उनके ब्लाऊजों में हाथ डालकर उरोजों को सहलाने लगे। छोटे ठाकुर शुभा के कपड़े खोलने लगे ठकुराइन छोटे ठाकुर के कपड़े उतारने लगी शुभा के बदन पर अब सिफर् काली रंग की ब्रा और अन्डरवियर थी। तभी छोटे ठाकुर और शुभा ने एकदूसरे की तरफ देखा और दोनों ने मिल कर ठकुराइन के कपडे नोच डाले। शुभा उनके बड़े बड़े उरोजों को पकड़कर बारी बारी से छोटे ठाकुर के मुँह में दे चुसवाने लगी ये देख ठकुराइन ने शुभा के पीछे हाथ डालकर की ब्रा का हुक खोल दिया और दूसरे हाथ से ब्रा खीचकर निकाल फेंकी और बड़ी बड़ी दूध सी सफेद गुलाबी गेंदों के समान गोल गोल ठोस उरोज नंगे हो गये जिन्हें देख छोटे ठाकुर झपटे और दोनों हाथों में पकड़कर मुँह मारने और निपल चुसने लगे वो धीरे धीरे बेड पर लेटती जा रही थी उसके दूध से सफेद गुलाबी गदराये बदन को छोटे ठाकुर पागलों की तरह चूम और मुँह मार रहे थे । उसकी पैंटी पहले से ही गीली हो गयी थी।छोटे ठाकुर शुभा की पैंटी उतार कर उसकी गदरायी संगमरमरी जांघों टॉगो के आस पास अपने हाथ फिराने और सहलाने लगे। जैसे ही छोटे ठाकुर ने शुभा की दूध सी सफेद गुलाबी पाव जैसी फूली हुई चिकनी चुत पर हाथ रखा उसके मुँह से एक सिसकारी सी निकली। छोटे ठाकुर ने अपनी अंगुलियो से चुत के ऊपरी भागों को सहलाने लगे और शुभा उत्तेजना से बेचैन होने लगी उसकी उसकी सिसकारियॉं बढ़ने लगी। वो अपने हाथो से बेड को कसकर भींच रही थी। बड़ी ठकुराइन ने छोटे ठाकुर और शुभा के बदनों के बीच में हाथ डालकर छोटे ठाकुर का फौलादी लण्ड थाम लिया और शुभा की चुत को लण्ड के सुपाड़े से सहलाने लगी। अब शुभा से बरदाश्त नही हो रहा था अपनी कमर को ऊपर उचकाते हुए उसने कहा -
“अबे कुछ कर न मेरी चुत मे जोरो की खुजली हो रही है।” छोटे ठाकुर का लण्ड शुभा की उस कच्ची कली सी बुर के लिये परेशान था ही। बड़ी ठकुराइन ने शुभा की टॉगो को फैलाया और उसकी चुत के ऊपर छोटे ठाकुर के प्यासे लण्ड का सुपाड़ा रखा और कहा –
“अबे धीरे से धक्का मारना छोटे। कच्ची कली है।“
छोटे ठाकुर ने धीरे से पर मजबूत धक्का मारा। वह जोरो से चीख पड़ी। सुपाड़ा घुसकर फॅस गया था। वो धीरे धीरे सुपाडे़ से ही चोदने लगा। जैसे जैसे मजा बढ़ा शुभा अपने चूतड़ों को ऊपर उचकाने लगी की चूत बेहद टाइट थी छोटे ठाकुर को ऐसा लग रहा था जैसे चूत लण्ड को अपने मुंह की दोनों फूली फांको मे दबाये हो। धीरे धीरे पूरा लण्ड अन्दर चला गया अन्दर जाते ह़ी शुभा के मुँह से निकला- “उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म आहहहहहहहहहहहहहहह आह हहहह…”
छोटे ठाकुर शुभा की बेहद टाइट चूत में धीरे धीरे धक्के मारने लगे। धीरे धीरे धक्के मारकर मजे लेने में वे भूल गये कि शुभा बेहद उत्तेजित हो रही है।
शुभा अपनी कमर को ऊपर उचकाते हुए बोली-
“अबे जोर जोर से चोद न ये बड़ी ठकुराइन की बहन की चूत है अगर तुझसे न बने तो मैं चोदूँ तुझे पटक के।”
ऐसा कहकर उसने छोटे ठाकुर को पलट दिया और पहले अपनी चूत की सील टूटने से निकला खुन तौलिये से पोछा फिर उनके ऊपर चढ़कर छोटे ठाकुर के लण्ड को पकड़कर सुपाड़ा चूत पर धरा और धीरे धीरे पूरा लण्ड चूत में धांस लिया फिर बरदास्त करने की कोशिश में अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी पहले धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये जैसे जैसे मजा बढ़ा वो सिसकारियॉं भरने लगी और उछल उछलकर धक्के पे धक्का लगाने लगी। तभी छोटे ठाकुर के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा शुभा पैर के पंजों के बल बैठ गयी और उसकी कमर के नीचे हाथो को डालकर उनकी कमर अपने हाथों की ताकत से उठा उठाकर अपनी चूत में लण्ड लेने लगी। अब तो छोटे ठाकुर के मजे ही मजे थे जब शुभा के बड़े बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ उनके लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे शुभा की गोरी गुलाबी बड़ी बड़ी उभरी चूचियां भी थिरक रही थी जिन्हें वो कभी मुंह से तो कभी दोनों हाथों से पकड़ता। शुभा करीब 15 मिनट तक ऐसे ही छोटे ठाकुर लण्ड लेती रही और छोटा ठाकुर शुभा के गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलने जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचता बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर झपटता सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारता रहा। तभी शुभा के मुँह से जोर से निकला –
“उम्म्म्म्महहहहहहहहहहह ”
और शुभा दोनों हाथों से उनके चूतड़ों को दबोचकर अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक छोटे ठाकुर का लण्ड धॉंसकर दबाते हुए और लण्ड पर बुरी तरह चूत रगड़ते हुए झड़ने लगी। जब शुभा झड़कर छोटे ठाकुर के ऊपर से हटी आवाक रह गयी क्योंकि उनका फौलादी लण्ड अभी भी मुस्तैद खड़ा था।
छोटे ठाकुर ने तो सिवाय लण्ड खड़ा कर लेटे रहने के अलावा कोई मेहनत की नहीं थी इसीलिए उनका लण्ड अभी भी मुस्तैद खड़ा था।
पर वहीं खड़ी बड़ी ठकुराइन जिन्होंने शुभा को अपनी निगरानी में चुदवाया था इतना सब देख कर बुरी तरह चुदासी हो रही थी । बड़ी ठकुराइन से छोटे ठाकुर ने कहा- “मुझे मालूम है कि आपकी चूत इतना सब देख कर बुरी तरह चुदासी हो रही है इस उपहार के धन्यवाद स्वरूप मैं आपको अभी चोदकर इस मुसीबत से छुटकारा दिला व खुश करना चाहता हूँ । फिर दोनों ने जबरदस्त चुदाई की और बुरी तरह से थककर तीनों वैसे ही बिस्तर पर पडे़ सो गये।