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सरवर ने कुछ गजब नाक झटके लगाए . जिस से में अपने पानी छोड़ने के क़रीब आ गई.
मेरा देवर मेरी फुद्दि की चुदाई करते वक़्त दीवाना वार बार बार एक ही बात कह रहा था.”कि भाभी जान मुझे आपने दीवाना बना दिया है”.
में उस की बात सुन कर खुश हो गई बल्कि मदहोश हो गई. कि में जिस की दीवानी थी वो मेरा भी दिवाना बन गया.
हक़ीकत ये थी कि आज इन दोनो बहन भाई ने मुझे उन का दिवाना बना दिया था.
कुछ ही देर बाद सरवर मुझ में डिसचार्ज होने लगा और उस का डिसचार्ज होने का अंदाज़ ऐसा था. कि जैसे वो मेरी चूत में छूट नही बल्कि मेरी चूत को अपने लंड के पानी से नहला रहा था.
उस के लंड के पानी को अपनी चूत में महसूस कर के में भी डिसचार्ज हुई और ऐसी हुई कि जैसे में पहली बार डिसचार्ज हुई हूँ.
डिसचार्ज होते वक़्त मेरे जिस्म को ऐसे ज़ोर ज़ोर से कई झटके लगे कि मुझे यूँ महसूस हुआ जैसी मेरे सारे जिस्म का जूस निकल गया हो.
उस रात हम तीनों सुबह तक नंगे रहे और सरवर ने मेरे सामने नाज़ के साथ और एक बार फिर मेरे साथ सेक्स किया.
अब तो मेरी ज़िंदगी का एक एक दिन खुशियों से लबरेज हो गया है.
क्यों कि जैसा “ससुराली प्यार” मुझे अपने ससुराल में मिला. वो शायद ही दुनिया की किसी और बहू को अपने ससुराल में मिला हो.
दोस्तो ये कहानी यहीं समाप्त हो चुकी है दोस्तो फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा
समाप्त
दा एंड….
मेरा देवर मेरी फुद्दि की चुदाई करते वक़्त दीवाना वार बार बार एक ही बात कह रहा था.”कि भाभी जान मुझे आपने दीवाना बना दिया है”.
में उस की बात सुन कर खुश हो गई बल्कि मदहोश हो गई. कि में जिस की दीवानी थी वो मेरा भी दिवाना बन गया.
हक़ीकत ये थी कि आज इन दोनो बहन भाई ने मुझे उन का दिवाना बना दिया था.
कुछ ही देर बाद सरवर मुझ में डिसचार्ज होने लगा और उस का डिसचार्ज होने का अंदाज़ ऐसा था. कि जैसे वो मेरी चूत में छूट नही बल्कि मेरी चूत को अपने लंड के पानी से नहला रहा था.
उस के लंड के पानी को अपनी चूत में महसूस कर के में भी डिसचार्ज हुई और ऐसी हुई कि जैसे में पहली बार डिसचार्ज हुई हूँ.
डिसचार्ज होते वक़्त मेरे जिस्म को ऐसे ज़ोर ज़ोर से कई झटके लगे कि मुझे यूँ महसूस हुआ जैसी मेरे सारे जिस्म का जूस निकल गया हो.
उस रात हम तीनों सुबह तक नंगे रहे और सरवर ने मेरे सामने नाज़ के साथ और एक बार फिर मेरे साथ सेक्स किया.
अब तो मेरी ज़िंदगी का एक एक दिन खुशियों से लबरेज हो गया है.
क्यों कि जैसा “ससुराली प्यार” मुझे अपने ससुराल में मिला. वो शायद ही दुनिया की किसी और बहू को अपने ससुराल में मिला हो.
दोस्तो ये कहानी यहीं समाप्त हो चुकी है दोस्तो फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा
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