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साजिश Thriller
अविनाश अपनी साई डिटैक्टिव एजन्सि के केबिन में बैठा कुछ काम कर रहा है। तब तक राजू प्रवेश करता है।
“चलिए सर आज शाम को सराय रानी ढाबा मे खाना खाकर आते हैं। आज बाहर खाने की इच्छा हो रही है और वह भी शुद्ध शाकाहारी। आपको तो पता ही है कि सराय रानी ढाबा शाकाहारी खानों के लिए कितना मशहूर हैं।”
अविनाश हंस कर बोलता है, “राजू तुम भी ना, 30 किलोमीटर दूर जाओगे वो भी खाना खाने के लिए। अच्छा ठीक है। बेबी और इंस्पेक्टर मनोज को भी बुला लेते हैं। मैं तुम दोनों को रात 9:00 बजे घर से पिकअप कर लूंगा और इंस्पेक्टर मनोज को भी ले लूँगा।” थोड़ी देर बाद बेबी केबिन में प्रवेश करती है।
अविनाश कहता है, “आज रात मैं,राजू और इंस्पेक्टर मनोज सराय रानी ढाबा पर खाना खाने के लिए जा रहे हैं। तुम्हें भी चलना है।”
“नहीं सर, मैं तो आपके पास आने ही वाली थी। मैं घर जा रही हूँ। आज मेरी सहेली की शादी है। आज मैं आपके साथ नहीं चलूँगी। मेरा डिनर उधार रहा।” इसके बाद बेबी चली जाती है।
“राजू, मैं भी निकलता हूँ। तुम भी थोड़ी देर बाद डिटेक्टिव एजेंसी बंद करके घर चले जाना। मैं 9:00 बजे तुमको तुम्हारे घर से पिकअप कर लूँगा।” रात 9:00 बजे अविनाश, राजू को उसके घर से पिकअप करता है और वो तीनों अविनाश, मनोज और राजू आजमनगर से सराय रानी ढाबा की तरफ चल देते हैं। अविनाश धीरे-धीरे अपनी होंडासिटि कार को हाईवे पर दौड़ा रहा होता है।
ढाबे पर खाना खाने के बाद राजू अविनाश से कहता है, “सर इधर कुछ बड़े अच्छे फॉर्म हाउस हैं, चलिए उधर का चक्कर लगाकर आते हैं।” इसके बाद अविनाश अपनी कार हाईवे से उतारकर कच्ची सड़क पर दौडाने लगता है। हालांकि रास्ता कच्चा था पर टूटा फूटा नहीं था। कार धीरे-धीरे चल रही थी। अचानक उन तीनों की नजर एक फार्म हाउस पर पड़ती है।
राजू अविनाश से कहता है, “सर कितना खूबसूरत बना हुआ है। काश ! अपना भी एक फार्महाउस होता।”
“अबे राजू तुझे पैसे की क्या कमी है ? तेरे बाप का इतना बड़ा ट्रांसपोर्ट का कारोबार है खरीद ले एक-आध फार्महाउस।”
“कहाँ सर वैसे ही पिताजी मुझसे बहुत नाराज रहते हैं। कहते हैं दिनभर मुझे जासूसी का भूत सवार रहता है। वो मुझे घर में घुसने देते हैं इतना क्या बहुत नहीं है ?” अचानक कार की रोशनी मे उन्होंने देखा फार्महाउस से थोड़ी दूर पर पुलिया पर बैठे एक वृद्ध महिला रो रही है। अविनाश तुरंत गाड़ी रोक देता है।
“राजू, लगता है कि यह महिला किसी दिक्कत में है।”
“लेकिन सर रात के 11:00 बजे वह भी ऐसी वीरान जगह पर।”
“चलो आओ पूछते हैं। शायद हम कोई मदद कर सके।” इसके बाद वे तीनों गाड़ी से उतरकर उस महिला के पास चले जाते हैं।
अविनाश बड़े अदब से पूछता है,-“माँ जी माफ कीजिएगा, आप क्यों रो रही हैं ? क्या आपको कोई कष्ट है ? क्या हम लोग आपकी कोई मदद कर सकते हैं ?”
उस महिला ने अपने आँसू पोछे और अविनाश से कहा, “बेटा मेरा गांव यहाँ से थोड़ी दूरी पर है। बात दरअसल यह है कि मेरा लड़का ‘रानू’ 1 दिन से घर नहीं पहुंचा है। मैं उसी को यहां ढूंढने आई थी। मेरा लड़का इस फार्म हाउस का केयरटेकर है। कल रात को वो यह बोल कर गया था कि देर रात को घर लौटेगा पर आया नहीं लेकिन जब वो आज पूरे दिन घर नहीं आया तो मुझे घबराहट होने लगी इसलिए मैं उसे खोजने फार्महाउस पर सीधा चली आई लेकिन मैं यहां क्या देखती हूं कि फार्महाउस को पहले से ही ताला लगा है।”
अविनाश बोला, “लेकिन माँ जी उसका कोई मोबाइल नंबर तो होगा। आपने उस पर कॉल करके देखा की नहीं।”
“वो तो मोबाइल घर पर ही छोड़ कर गया है। वो गया भी नाइट सूट मे है और अपनी बाइक भी घर ही छोड़ कर गया है।”
“इसका मतलब कहीं पास मे ही गया होगा। आपने उसके दोस्त से बात की है।”
“अभी नहीं की है। कल सुबह पूछताछ करूंगी।”
“देखिए आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। क्या वह पहले भी कभी गायब रहा है ?”
“नहीं बेटा। वह रात में तो अक्सर गायब रहता है पर देर रात को घर वापस आ जाता है।”
“माँजी आप घबराइए नहीं। अगर रानू कल कल सुबह तक वापस नहीं आता है तो आप मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करा दीजिएगा। वैसे रानू की क्या उम्र है ?”
“वह करीब 20 साल का है। वो मेरा बुढ़ापे का एकलौता सहारा है। अगर उसको कुछ हो गया तो मैं जीते जी मर जाऊंगी।”
अविनाश अपनी साई डिटैक्टिव एजन्सि के केबिन में बैठा कुछ काम कर रहा है। तब तक राजू प्रवेश करता है।
“चलिए सर आज शाम को सराय रानी ढाबा मे खाना खाकर आते हैं। आज बाहर खाने की इच्छा हो रही है और वह भी शुद्ध शाकाहारी। आपको तो पता ही है कि सराय रानी ढाबा शाकाहारी खानों के लिए कितना मशहूर हैं।”
अविनाश हंस कर बोलता है, “राजू तुम भी ना, 30 किलोमीटर दूर जाओगे वो भी खाना खाने के लिए। अच्छा ठीक है। बेबी और इंस्पेक्टर मनोज को भी बुला लेते हैं। मैं तुम दोनों को रात 9:00 बजे घर से पिकअप कर लूंगा और इंस्पेक्टर मनोज को भी ले लूँगा।” थोड़ी देर बाद बेबी केबिन में प्रवेश करती है।
अविनाश कहता है, “आज रात मैं,राजू और इंस्पेक्टर मनोज सराय रानी ढाबा पर खाना खाने के लिए जा रहे हैं। तुम्हें भी चलना है।”
“नहीं सर, मैं तो आपके पास आने ही वाली थी। मैं घर जा रही हूँ। आज मेरी सहेली की शादी है। आज मैं आपके साथ नहीं चलूँगी। मेरा डिनर उधार रहा।” इसके बाद बेबी चली जाती है।
“राजू, मैं भी निकलता हूँ। तुम भी थोड़ी देर बाद डिटेक्टिव एजेंसी बंद करके घर चले जाना। मैं 9:00 बजे तुमको तुम्हारे घर से पिकअप कर लूँगा।” रात 9:00 बजे अविनाश, राजू को उसके घर से पिकअप करता है और वो तीनों अविनाश, मनोज और राजू आजमनगर से सराय रानी ढाबा की तरफ चल देते हैं। अविनाश धीरे-धीरे अपनी होंडासिटि कार को हाईवे पर दौड़ा रहा होता है।
ढाबे पर खाना खाने के बाद राजू अविनाश से कहता है, “सर इधर कुछ बड़े अच्छे फॉर्म हाउस हैं, चलिए उधर का चक्कर लगाकर आते हैं।” इसके बाद अविनाश अपनी कार हाईवे से उतारकर कच्ची सड़क पर दौडाने लगता है। हालांकि रास्ता कच्चा था पर टूटा फूटा नहीं था। कार धीरे-धीरे चल रही थी। अचानक उन तीनों की नजर एक फार्म हाउस पर पड़ती है।
राजू अविनाश से कहता है, “सर कितना खूबसूरत बना हुआ है। काश ! अपना भी एक फार्महाउस होता।”
“अबे राजू तुझे पैसे की क्या कमी है ? तेरे बाप का इतना बड़ा ट्रांसपोर्ट का कारोबार है खरीद ले एक-आध फार्महाउस।”
“कहाँ सर वैसे ही पिताजी मुझसे बहुत नाराज रहते हैं। कहते हैं दिनभर मुझे जासूसी का भूत सवार रहता है। वो मुझे घर में घुसने देते हैं इतना क्या बहुत नहीं है ?” अचानक कार की रोशनी मे उन्होंने देखा फार्महाउस से थोड़ी दूर पर पुलिया पर बैठे एक वृद्ध महिला रो रही है। अविनाश तुरंत गाड़ी रोक देता है।
“राजू, लगता है कि यह महिला किसी दिक्कत में है।”
“लेकिन सर रात के 11:00 बजे वह भी ऐसी वीरान जगह पर।”
“चलो आओ पूछते हैं। शायद हम कोई मदद कर सके।” इसके बाद वे तीनों गाड़ी से उतरकर उस महिला के पास चले जाते हैं।
अविनाश बड़े अदब से पूछता है,-“माँ जी माफ कीजिएगा, आप क्यों रो रही हैं ? क्या आपको कोई कष्ट है ? क्या हम लोग आपकी कोई मदद कर सकते हैं ?”
उस महिला ने अपने आँसू पोछे और अविनाश से कहा, “बेटा मेरा गांव यहाँ से थोड़ी दूरी पर है। बात दरअसल यह है कि मेरा लड़का ‘रानू’ 1 दिन से घर नहीं पहुंचा है। मैं उसी को यहां ढूंढने आई थी। मेरा लड़का इस फार्म हाउस का केयरटेकर है। कल रात को वो यह बोल कर गया था कि देर रात को घर लौटेगा पर आया नहीं लेकिन जब वो आज पूरे दिन घर नहीं आया तो मुझे घबराहट होने लगी इसलिए मैं उसे खोजने फार्महाउस पर सीधा चली आई लेकिन मैं यहां क्या देखती हूं कि फार्महाउस को पहले से ही ताला लगा है।”
अविनाश बोला, “लेकिन माँ जी उसका कोई मोबाइल नंबर तो होगा। आपने उस पर कॉल करके देखा की नहीं।”
“वो तो मोबाइल घर पर ही छोड़ कर गया है। वो गया भी नाइट सूट मे है और अपनी बाइक भी घर ही छोड़ कर गया है।”
“इसका मतलब कहीं पास मे ही गया होगा। आपने उसके दोस्त से बात की है।”
“अभी नहीं की है। कल सुबह पूछताछ करूंगी।”
“देखिए आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। क्या वह पहले भी कभी गायब रहा है ?”
“नहीं बेटा। वह रात में तो अक्सर गायब रहता है पर देर रात को घर वापस आ जाता है।”
“माँजी आप घबराइए नहीं। अगर रानू कल कल सुबह तक वापस नहीं आता है तो आप मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करा दीजिएगा। वैसे रानू की क्या उम्र है ?”
“वह करीब 20 साल का है। वो मेरा बुढ़ापे का एकलौता सहारा है। अगर उसको कुछ हो गया तो मैं जीते जी मर जाऊंगी।”