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सामूहिक चुदाई compleet

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Guest
सामूहिक चुदाई

मेरा नाम डॉली है, मेरे पति राज एक इंजीनियरिंग कंपनी में अच्छे पद पर हैं।

हम लोग वैसे तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, पर पिछले 15 सालों से नई दिल्ली में रह रहे हैं।

राज 40 साल के हैं, पर 35 से ज़्यादा नहीं दिखते, 5’8″ कद है, हल्के से मोटे हैं, गोरे और सुंदर हैं..।

मेरी उम्र 35 साल है, पर 30 साल की दिखती हूँ, 5’3″ कद है, जिस्म 36-27-36 है।

हम दोनों यहाँ पर अपने कुछ दोस्तों के साथ बीवियों को आपस में अदल-बदल करके चुदाई करते हैं।

इस बीवियों की अदला-बदली करके चुदाई में दो जोड़े अपने-अपने साथी बदल कर एक-दूसरे को चोदते हैं, एक की पत्नी दूसरे आदमी के साथ चुदती है और उसका पति किसी और की पत्नी को चोदता है।

हम नहीं जानते कि यहाँ पर हमारे अलावा और कितने जोड़े ऐसे अपनी-अपनी बीवियों को अदल-बदल कर चुदाई करते हैं। मेरे ख्याल से इसके लिए मन तो बहुतों का होता है, और अगर अवसर मिले तो शायद इसका आनन्द भी उठाएँ।

हम लोग फ़िलहाल अपने 4 नज़दीकी मित्र-जोड़ों के साथ बीवियों की अदला-बदली करके चुदाई करते हैं और करवाते हैं। अक्सर हममें से दो-तीन जोड़े ही एक साथ हो पाते हैं, पर कभी-कभार किसी विशिष्ट अवसर पर, जब सबको समय हो, हम पाँचों मिलते हैं, अदला-बदली करके ही चुदाई करते हैं।

हालाँकि हमारा उद्देश्य एक-दूसरे के जीवन साथी के साथ चुदाई का आनन्द उठाना होता है, पर इस में हमारी प्रगाढ़ मित्रता, यानि कि दावतें, पिकनिक, पार्टियाँ और दूसरे के साथी के साथ हँसी-मज़ाक और सबके सामने एक-दूसरे के कपड़ों के ऊपर से जो मर्ज़ी आए, करके मज़ा लेना भी शामिल हैं।

इनके साथ दूसरे के साथी के साथ अकेले फिल्म देखने जाना, बाहर खाना खाना और फिर उसे अपने साथ चुदाई के लिए घर लाना भी शामिल होता है।

जब मेरे पति किसी और की पत्नी के साथ यही सब कर रहे हों, तो मेरे द्वारा किसी और के साथ यही सब करना अपने आप में बहुत ही रोमांटिक है।

हम 2-3 जोड़ियाँ कभी-कभी एक साथ दूसरे शहर घूमने जाते हैं तो मैं दूसरे के पति के साथ ही अलग कमरे में रहती हूँ, जैसे कि उन दिनों के लिए हमारे पति वही हों !

हमने अपनी इस जिंदगी की शुरुआत कैसे की, अब मैं यह बताना चाहूँगी।

मुझे लम्बे अरसे से यह शक था कि राज दूसरी औरतों को चोदने का बहुत इच्छुक था, पर कोई 5-6 साल पहले उसने कहना शुरू किया कि डॉली, उमर बहुत छोटी होती है और हमें यह भी अनुभव करना चाहिए कि दूसरों के साथ चुदाई करने में कैसा मज़ा आता है क्योंकि हम दोनों ने विवाह के पहले किसी से चुदाई नहीं की थी।

वो किसी दूसरी स्त्री के साथ चुदाई का लुत्फ़ उठाना चाहता था और मुझे भी उत्साहित करता था कि मैं भी किसी दूसरे मर्द के साथ चुदाई का आनन्द उठाऊँ।

इन बातों के दौर से हमारी चुदाई में आनन्द और बढ़ गया था।

जब दोस्तों को अपने घर में बुलाते तो राज रसोई में मुझसे आकर बताता कि आज उसे किस दोस्त की बीवी को चोदने का मन कर रहा है। वह मुझसे भी पूछता कि आज मेरा मन किस दोस्त से चुदवाने को कर रहा है।

ये सब बातें करके हमें बड़ा मज़ा आने लगा और हम सबके जाने के बाद उस दोस्त और उसकी बीबी का नाम लेकर एक-दूसरे को चोदने लगते थे।

कुछ दिनों तक बिस्तर में चोदते समय इस बारे में बातें करते-करते मेरी भी हिम्मत बढ़ती गई और मैं दूसरे जोड़े के साथ काल्पनिक अदला-बदली चुदाई के लिए तैयार हो गई। फिर हमने ढूंढना शुरू किया और हमारी नज़र जय और ललिता पर पड़ी जो हमारे ही पड़ोस में कुछ ही दूरी पर रहते थे।

इन कुछ सालों में हमारी उनसे दोस्ती काफ़ी गहरी हो गई है। ये दोनों भी लगभग हमारी ही उमर के थे। जय 38 साल का था और ललिता 32 की, ललिता का शरीर बहुत सुंदर (32-26-38) था। वो काफ़ी पतली थी और नयन-नक्स तीखे थे।

हम दोनों उनके स्वभाव और सुंदरता से काफ़ी प्रभावित हुए थे।

अपनी चुदाई के समय अब हम जय और ललिता के बारे में सोचने लगे और उनके साथ चुदाई की कल्पना करने लगे।

जब भी राज मुझे चोदता था तो मुझसे यही कहता कि मेरी चूत कितनी रसीली और सुंदर है और मैं बड़ी आसानी से जय को अपने साथ चुदाई करने के लिए पटा सकती हूँ।

फिर मैंने भी राज से कहा कि उसका लंड इतना अच्छा है कि ललिता भी उसके लंड का स्वाद लेने के लिए आसानी से आतुर हो जाएगी।

वो मुझसे पूछता कि आज मुझे किसके लंड से चुदवाना है, उसके या जय के…! मैं भी राज से पूछती कि आज उसे किसकी चूत चोदने का मन कर रहा है, मेरी या ललिता की…!

राज ने महसूस किया कि मुझे इन बातों से बहुत मज़ा आता है और मैं खूब उत्तेजित होकर राज से चुदवाने लगी थी।
 
एक दिन तो राज चुदाई के दौरान मुझसे पूछने लगा- डॉली, बताओ तो सही, अभी तुम्हारी चूत के अन्दर किसका लंड घुसा है?

मैं भी बिना ज़्यादा हिचक के बोली- राज, इस समय तो मेरी चूत जय के लंड का मज़ा ले रही है।

जल्द ही मैंने भी राज से पूछा- राज, तुम्हारा लंड किसकी चूत में है?

तो राज बड़े मज़े से बोला- ललिता की ललिता में है।

राज ने कुछ कहा नहीं पर यह ज़रूर महसूस किया कि जब मैं जय के साथ चुदाई की कल्पना करती हूँ, तो मेरा चुदाई में उत्साह और बढ़ जाता है और मैं राज से खूब ज़ोर से चुदवाती हूँ।

फिर एक दिन मैंने उससे कहा- तुम मुझे चोदते वक़्त यह कल्पना करते हो कि तुम ललिता को चोद रहे हो, तो क्यों नहीं चोदते समय मुझे ललिता कहकर ही पुकारो?

काफ़ी दिनों तक रोज़ हम लोग इस काल्पनिक दुनिया में एक-दूसरे को जय और ललिता के नाम से चोदते रहे। मैं उसे जय पुकारती और वो मुझे ललिता।

फिर लगभग आज से 5 साल पहले, एक दिन अचानक अंजाने में ही, जय और ललिता के साथ यह कल्पना हक़ीकत में बदल गई।

एक दिन जय और ललिता ने हमें रात को डिनर पर बुलाया।

हम उनके घर गए और वहाँ राज और जय ने साथ बैठ कर थोड़ी व्हिस्की पी। मैंने और ललिता ने भी थोड़ी सी ली।

तभी एकाएक जय ब्लू-फ़िल्मों के बारे में बात करने लगा, चूँकि उसे भी पता था कि हम दोनों ऐसी पिक्चर अक्सर देखा करते हैं।

जय ने राज से पूछा- क्या तुमने कभी कोई इंडियन ब्लू-फिल्म देखी है? ऐसी फिल्म देखने में बड़ा मज़ा आता है।

राज ने जय को बताया- अब ऐसी फ़िल्में अब धीरे-धीरे सभी जगह पर मिलने लगी हैं और हमने कुछ देखी भी हैं। ये ज़्यादा मज़ेदार होती हैं क्यूंकि साड़ी और पेटीकोट उठा कर भारतीय औरतों को अलग-अलग लोगों से अपनी ललिता चुदवाते देखने में अलग ही आनन्द आता है। जब भारतीय औरतें अपनी सुंदर सा मुँह खोल कर किसी का लंड चूसती हैं तो अपना लंड तो खड़ा हो जाता है।

राज ने जय को बताया- हमारी कार में एक वीडियो सीडी पड़ी है जो हम वापस लौटने वाले थे।

उसने कहा- अगर तुम चाहो तो उसे वापस करने के पहले देख सकते हो !

क्योंकि ललिता ने भी कभी भारतीय ब्लू-फिल्म नहीं देखी थी, जय ने उसे सुझाव दिया कि वे दोनों उसे अपने बेडरूम में देख लेंगे और हमारी वापसी पर लौटा देंगे।

राज ने उन्हें उत्साहित करते हुए कहा- हम दोनों तब तक कोई दूसरी हिन्दी फिल्म वही ड्राइंग-रूम में देखेंगे।

पर जय ने कहा- यह तो बदतमीज़ी होगी और चूँकि हम सब व्यस्क हैं, हम सब को ब्लू-फिल्म का आनन्द एक साथ उठाना चाहिए। हालाँकि राज और मुझे इसमें कोई इतराज़ नहीं था, पर ललिता कुछ शंका में लग रही थी।

उसके बाद ललिता के साथ मैं रसोई में गई और उसे हिम्मत दी कि नज़दीकी दोस्तों के साथ ऐसी फिल्म देखने में कोई हर्ज़ नहीं है।

हम रसोई से कुछ और ड्रिंक्स लेकर आए।

कुछ समय बाद ललिता ने हल्के से कह ही दिया कि उसे फिल्म देखने में कोई ऐतराज़ नहीं है।

राज बाहर जाकर कार से सीडी निकाल लाया जिसका नाम ‘बॉम्बे-फैंटेसी’ था।

हम सब उनके बेडरूम में चले गए। मैं और राज सोफे पर बैठ गए और जय और ललिता अपने बिस्तर पर।

जय ने लाइट बंद करके फिल्म चालू कर दी। हम लोगों ने ये फिल्म देखी हुई थी, जिसमें दो मर्द और दो औरत के एक ही बिस्तर पर चुदाई की कहानी थी।

हम शान्ति से सोफे पर बैठ कर जय और ललिता के भाव पढ़़ने की कोशिश कर रहे थे।

कमरे में टीवी की रोशनी के अलावा अंधेरा था।

कुछ देर में हमें लगा कि जय और ललिता गर्म हो रहे थे और उन्होंने अपने आप को कम्बल से ढक लिया था। ऐसा लग रहा था कि जैसे जय, ललिता के साथ चुदाई से पूर्व की हरकतों में मशगूल हो गया था।

 
यह देख कर राज भी गर्म हो गया और मुझे चूमने लगा, मेरी चूचियों से खेलने लगा।

अब जय और ललिता अपने आप में इतने व्यस्त थे कि उनका ध्यान हमारी ओर नहीं था।

यह जान मैंने भी राज के लंड को हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया। राज ने भी अपना हाथ मेरी ललिता पर रख दिया और हम भी जय और ललिता के बीच चल रहे संभावित खेल में शामिल हो गए।

अचानक राज ने देखा कि जय और ललिता के ऊपर से कम्बल एक ओर सरक गया था और उसकी नज़र जय के नंगे चूतड़ों पर पड़ी।

ललिता की साड़ी उतर चुकी थी और जय ललिता के ऊपर चढ़ा हुआ था, वे दोनों पूरी तरह चुदाई में लग गए थे, जय अपना 8″ का खड़ा लंड ललिता की चूत में घुसेड़ चुका था और अपने हाथों से ललिता की चूचियों को मसल रहा था।

यह देख कर राज ने कहा- चलो तुम भी मेरी ललिता बन जाओ !

और यह कह कर राज मेरे दोनों कबूतरों को पकड़ कर कस-कस कर मसलने लगा, पर मैं शर,आ रही थी क्योंकि जय और ललिता की तरह हमारे पास हमारे नंगे बदन को ढकने के लिए कुछ नहीं था।

पर थोड़ी ही देर में मैं भी चुदाई की चलती हुई फिल्म, अपनी चूची की मसलाई और जय और ललिता की खुली चुदाई से काफ़ी गर्म हो गई और राज से मैं भी अपनी चूत चुदवाने के लिए तड़पने लगी।

अब जय और ललिता के ऊपर पड़ा हुआ कम्बल बस नाम मात्र को ही उनके नंगे बदनों को ढक रहा था। ललिता की नंगी चूची और उसका पेट और नंगी जाँघें साफ-साफ दिख रही थीं।

जय इस समय ललिता के ऊपर चढ़ा हुआ था और अपनी कमर उठा-उठा कर जन्नत की चूत में अपना 8″ का लंड पेल रहा था और ललिता भी अपनी पतली कमर उठा-उठा कर जय के हर धक्के को अपनी चूत में ले रही थी और धीरे-धीरे बड़बड़ा रही थी जैसे ‘हाईईईईईईई, और जूऊऊर सीईई चोदूऊऊ, बहुउऊुउउट मज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ा आआआआ र्हईईईई हाईईईई..!’

यह देख कर मेरी चूत गीली हो गई और मैं भी राज से वहीं सोफे पर चुदवाने को राज़ी हो गई।

मेरी रज़ामंदी पाकर राज मुझ पर टूट पड़ा और मेरी दोनों चूचियों को लेकर पागलों की तरह उन्हें मसलने और चूसने लगा।

मैं भी अपना हाथ आगे ले जाकर राज का तना हुआ लंड पकड़ कर सहलाने लगी।

जब मैं राज के लंड तो सहला रही थी तो मुझे लगा कि आज राज का लंड कुछ ज़्यादा ही अकड़ा हुआ है।

राज ने तेज़ी से अपने कपड़े उतारे और मेरे ऊपर आते हुए मेरी भी साड़ी उतारने लगा।

कुछ ही देर में हम दोनों सोफे पर जय और ललिता की तरह नंगे हो चुके थे।

टीवी की धुंधली रोशनी में भी इतना तो साफ दिख रहा था कि कम्बल अब पूरी तरह से हट चुका था और जय खुले बिस्तर पर हमारे ही सामने ही ललिता को जमकर चोद रहा था।

ललिता भी अपने चारों तरफ से बेख़बर हो कर अपनी कमर उठा-उठा कर अपनी चूत चुदवा रही थी।

मेरे ख्याल से जय और ललिता की खुल्लम-खुल्ला चुदाई देख कर मैं भी अब बहुत गर्म हो चुकी थी और राज से बोली- अब जल्दी से तुम मुझे भी जय की तरह चोदो, मैं अपनी चूत की खुजली से मरी जा रही हूँ।

मेरी बात खत्म होने से पहले ही राज का तनतनाया हुआ लौड़ा मेरी चूत में एक जोरदार धक्के के साथ दाखिल हो गया।

राज अपने लंड से इतने ज़ोर से मेरी चूत में धक्का मारा कि मेरी मुँह से एक ज़ोरदार चीख निकल गई।

मैं तो इतनी ज़ोर से चीखी जैसे कि उसका लंड मेरी चूत के अन्दर पहली बार गया हो !

एकाएक पूरा माहौल ही बदल गया। मेरी चीख से जय और ललिता को भी पता लग गया था कि हम दोनों भी उसी कमरे में हैं और अपनी चुदाई में लग चुके हैं।

यह हमारे जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत थी जिसने कि हमें अदला-बदली करके चुदाई के आनन्द का रास्ता दिखाया।
 
मेरी चीख सुनकर ललिता ने जय का लंड अपनी चूत में लेते हुए धीरे से बोली- लगता है कि राज और डॉली ने भी अपनी चुदाई शुरू कर दी है।

यह सुनकर जय ने आवाज़ दी- क्या राज, क्या चल रहा है? क्या तुम और डॉली भी वही कर रहे हो जो हम दोनों कर रहे हैं?

राज ने जवाब दिया- क्यों नहीं, तुम दोनों का लाइव शो देख कर कौन अपने आप को रोक सकता है। इसीलिए मैं और डॉली भी वही कर रहे हैं जो इस वक्त तुम और ललिता कर रहे हो यानी तुम ललिता को चओ रहे हो और मैं डॉली को चोद रहा हूँ।

जय बोला- अगर हम लोग सभी एक ही काम रहे हैं तो फिर एक-दूसरे से क्या छिपाना और क्या परदा? खुले मंच पर आ जाओ, राज। आओ हम लोग एक ही पलंग पर अपनी-अपनी बीवियों को चित्त लेटा करके उनकी टाँगें उठा के उनकी चूतों की बखिया उधेड़ते हैं।

राज ने पूछा- तुम्हारा क्या मतलब है, जय?

“मेरा मतलब है कि तुम लोगों को सोफे पर चुदाई करने में मुश्किल आ रही होगी, क्यों नहीं यहीं पलंग पर आ जाते हो हमारे पास, आराम रहेगा और ठीक तरीके से डॉली की सेक्सी चूत में अपना लंड पेल सकोगे, मतलब डॉली को चोद सकोगे।”

उसकी बात तो सही थी कि हम वाकयी सोफे पर बड़ी विचित्र स्थिति में थे।

राज ने मुझसे पूछा- पलंग पर ललिता के बगल में लेट कर चूत चुदवाने में कोई आपत्ति है?

मैंने कहा- नहीं…! बल्कि मैं तो उन दोनों की चुदाई देख कर काफ़ी चुदासी हो उठी थी और उनकी चुदाई को नज़दीक से देखना चाह रही थी।

टीवी की धीमी रोशनी में मैं यह सोच रही थी कि एक ही पलंग पर पर लेट करके ललिता के साथ साथ चूत चुदवाने में कोई परेशानी नहीं, पर मुझे आने वाली घटना का अंदेशा नहीं था।

राज ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और पलंग पर ले गया, जहाँ जय और ललिता चुदाई में लगे थे।

हमें आता देख जय ने अपनी चुदाई को रोक कर हमारे बिस्तर पर आने का इंतज़ार करने लगा।

जय ने ललिता की चुदाई तो रोक लिया था लेकिन अपना लंड ललिता की चूत से नहीं निकाला था, वो अभी भी ललिता की चूत में जड़ तक घुसा हुआ था और जय और ललिता की झांटें एक-दूसरे से मिली हुई थीं।

राज ने पलंग के नज़दीक पहुँच कर मुझे ललिता के पास चित्त हो कर लेटने को कहा।

जैसे ही मैं ललिता के बगल में चित्त हो कर लेटी, जय मुझे छूकर उठा और कमरे की लाइट जलाकर वापस बिस्तर पर आ गया।

हम लोगों को एकाएक सारा का सारा माहौल बदला हुआ नज़र आने लगा।

हम चारों एक ही पलंग पर चमकती रोशनी में सरे-आम नंग-धड़ंग चुदाई में लगे हुए थे।

जय और ललिता बिना कपड़ों के काफ़ी सुंदर लग रहे थे, ललिता की चूचियाँ छोटी-छोटी थीं पर चूतड़ काफ़ी बड़े थे। उसकी छोटी-छोटी झांटें बड़ी सफाई से उसकी सुंदर चूत को ढके हुए थीं।

कमरे की हल्की रोशनी में ललिता की चूत जो कि इस समय जय का लंड से चुद रही थी, काफ़ी खुली-खुली सी लग रही थी।

क्रमशः..................
 
गतान्क से आगे......................

मैंने कमरे की चमकती रोशनी में जय के खड़े लंड को ललिता की चूत के रस से चमचमाते हुए देखा, उसका लंड राज से थोड़ा लम्बा रहा होगा, पर राज का लंड उससे कहीं ज़्यादा मोटा था।

राज भी ललिता को नंगी देख कर बहुत खुश था।

मुझे याद आया कि राज को हमेशा छोटे मम्मों और बड़े चूतड़ों वाली औरतें पसंद थीं।

मैंने जय को अपने नंगे जिस्म को भारी नज़रों से आँकता पाया और उसे शर्तिया मेरे भारी मम्मे और गोल-गोल भरे-भरे चूतड़ भा गए थे।

जय ने बिस्तर पर आकर ललिता की खुली जांघों के बीच झुकते हुए अपना लंड उसकी गीली चूत से फिर से भिड़ा दिया।

ललिता ने भी जैसे ही जय का लंड अपनी चूत के मुँह में देखा तो झट से अपनी टाँगों को ऊपर उठा दिया और घुटने से अपने पैरों को पकड़ लिया।

अब ललिता की चूत बिल्कुल खुल गई और जय ने एक ज़ोरदार झटके के साथ अपना लंड ललिता की चूत में डाल दिया।

यह देख राज ने भी अपना लंड अपने हाथ से पकड़ कर मेरी चूत के छेद से लगाया और एक झटके के साथ मेरी चूत के अन्दर घुसेड़ कर मुझे चोदने लगा।

जय हालाँकि ललिता को बहुत ज़ोर से चोद रहा था पर उसकी नज़र मेरी चूत पर टिकी हुई थी।

राज का भी यही हाल था और उसकी नज़र ललिता की चुदती हुई चूत पर से हट नहीं पा रही थी!

मुझे जय के सामने अपने पति के साथ चुदाई करने में बहुत मज़ा आ रहा था और अब मैं भी गर्म होकर अपनी कमर उचका-उचका कर राज का लंड अपनी चूत में डलवा रही थी। मेरे बगल में ललिता भी अपनी टाँगों को उठा करके जय का लंड अपनी चूत से खा रही थी।

पलंग पर चार लोगों के लिए जगह कम थी और हमारे जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे। ललिता का पैर मेरे पैर से और राज की जाँघ जय के जाँघ से छू रही थी।

थोड़ी देर तक मैं अपनी चूत चुदवाते हुए ललिता को देख रही थी और थोड़ी देर के बाद मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर ललिता का हाथ पकड़ लिया।

ललिता ने खुशी का इज़हार करते हुए मेरे हाथ को दबाया और अपनी कमर उचकाते हुए मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई।

यह देख जय ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरे पेट, पर मेरी चूत से थोड़ा ऊपर रख दिया। मुझे जय का हाथ अपने पेट पर बहुत अच्छा लगा और मैंने जय से कुछ नहीं कहा।

जय की हरकत देख कर राज ने भी अपना हाथ ललिता की जाँघ पर उसकी चूत के पास रख दिया और ललिता की जाँघों को हल्के-हल्के से सहलाना और दबाने लगा। जय और राज की इन हरकतों से हम सब में एक नई तरह की चुदास भर गई और दोनों मर्द हम दोनों औरतों को ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।

अचानक राज को हमारा वो वार्तालाप याद आया जिसमे हम किसी दूसरे जोड़े के साथ चुदाई की कल्पना करते थे, राज ने मुझसे पूछा- डॉली क्या तुम आज किसी नई चीज़ का आनन्द उठाना चाहोगी?

मैंने राज से पूछा- तुम्हारा क्या मतलब है राज? तुम और किस नए आनन्द की बात कर हो? अभी तो मुझे ललिता के साथ उसके पलंग पर लेट कर तुमसे अपनी चूत चुदवाने में बहुत आनन्द मिल रहा है।

तब राज मुस्कुराते हुए मेरी चूचियों को अपने हाथों से मसलते हुए बोला- आज जय से चुदवाने का मज़ा लेने के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है?
 
मैं और राज कल्पना में जय और ललिता के साथ इतनी बार एक-दूसरे को चोद चुके थे कि ये सब बातें मेरे लिए नई नहीं थीं।

इसलिए मैं राज से बोली, “राज, आज मेरी चूत इतनी गर्म हो चुकी है कि मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आज मुझे कौन चोदता है, तुम या जय.. बस मुझे अपनी चूत में कोई ना कोई लंड की ठोकर चाहिए और वो लंड इतनी ठोकर मारे कि मैं जल्दी से झड़ जाऊँ। इस समय मैं अपनी चूत की खुजली से बहुत परेशान हूँ।

यह सुनते ही राज ने जय की ओर मुड़ कर कहा- जय, क्या तुम आज एक नए आनन्द के लिए डॉली की चूत में अपना लंड डालना चाहोगे? क्या तुम आज डॉली को चोदना चाहोगे?

राज की बात सुन कर जय झटपट ललिता की चूत में चार-पाँच कस-कस कर धक्के मारे और ख़ुशी से बोला, “ज़रूर राज, पर अगर ललिता भी एक नए आनन्द के लिए तुम से अपनी चूत चुदवाना कहती है तो !

जब मैंने देखा कि जय और राज अपनी-अपनी बीवियों को एक-दूसरे से चुदवाना चाहते हैं, तो फिर मैंने हिम्मत करके ललिता से पूछा- ललिता, क्या तुम भी एक नया आनन्द लेना चाहती हो, राज का लंड अपनी चूत में डलवा करके उससे चुदवाना चाहती हो?

ललिता थोड़ी देर तक सोचने के बाद जय के गले में अपनी बाँहों को डाल कर और उसके सीने से अपनी चूचियों को रगड़ते हुए बोली- क्यूँ नहीं..! अगर दूसरे मर्द के साथ डॉली अपनी चूत चुदवा सकती है और यह डॉली के लिए ठीक है तो मुझे क्यों फ़र्क पड़ना चाहिए? मैं भी राज के लंड से अपनी चूत चुदवाना चाहती हूँ और यह भी देखना चाहती हूँ कि जय का लंड कैसे डॉली की चूत में घुसता है और निकलता है और कैसे डॉली अपनी चूत जय से चुदवाती है। आज मैं भी डॉली की तरह छिनाल बनना चाहती हूँ और किसी दूसरे मर्द का लंड अपनी चूत में पिलवाना चाहती हूँ।

और यही हम लोगों की अदला-बदली चुदाई का आगाज़ था।

ललिता की बातों को सुनकर जय ने अपना लंड ललिता की चूत से बाहर खींच लिया और राज से बोला- चल अब हम अपनी-अपनी बीवियाँ बदल कर उनकी चूत को चोद-चोद कर उनका भोसड़ा बनाते हैं।

जय की बात सुनकर राज ने भी अपना लंड मेरी चूत में से निकाला और ललिता की ओर बढ़ गया।

जय भी अपने हाथ से अपना लंड पकड़ कर मेरे पास आया, मेरे पास आकर मेरी जांघों के बीच झुकते हुए उसने पहले मेरी चूत पर एक जोरदार चुम्मा दिया और फिर अपना लंड मेरी कुलबुलाती हुई चूत में लगाया और एक धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत के अन्दर घुसेड़ दिया।

मैंने भी अपनी कमर उचका कर जय का पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में डलवा लिया। फिर मैं अपनी चूत में जय का लंड लेती हुई और राज को भी ललिता की चूत में अपना लंड घुसा कर ललिता की चुदाई शुरू करते हुए देखने लगी।

राज और ललिता दोनों बड़े जोश के साथ एक-दूसरे को चोद रहे थे।

जितना तेज़ी से राज अपना लंड ललिता की चूत में घुसेड़ता उतनी ही तेज़ी से ललिता भी अपनी कमर उचका कर राज का लंड अपनी चूत में ले रही थी। मैं एक नया लंड अपनी चूत में डलवा कर बहुत खुश थी और खूब मज़े से जय का लंड अपनी चूत में पिलवा रही थी।

जय का लम्बा लंड मेरी चूत के खूब अन्दर तक जा रहा था और मुझे जय की चुदाई से बहुत मज़ा मिल रहा था। जय भी मेरी चूचियों को अपने दोनों हाथों से मसलते हुए मुझे चोद रहा था।

मैं बार-बार राज के मोटे लंड को ललिता की चूत में जाता हुआ देख रही थी। राज भी मेरी चूत को जय के लंड से चुदते हुए बिना परेशानी के देख रहा था।

ललिता भी राज के लंड को मेरी चूत मैं अन्दर-बाहर होते देख रही थी और जय सिर्फ़ मेरी बिना झांटों वाली चिकनी चूत को देख कर उसे चोदने में पूरा ध्यान लगाए हुए था।

इस समय मुझे लगा कि दुनिया में अपने पति को अपनी सबसे चहेती सहेली को चोदते हुए देखने का सुख अपरम्पार है और तब जबकि मैं खुद भी उसी बिस्तर पर उस सहेली के पति से अपने पति के सामने खुल्ल्म-खुल्ला चुदवा रही होऊँ।

कमरे में सिर्फ हमारी चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी।
 
ललिता अपनी चूत में राज का लंड पिलवाते हुए हर धक्के के साथ ‘श.. श.. आ.. आ..’ कर रही थी और बोल रही थी- हाय राज क्या मस्त चोद रहे हो… और ज़ोर-ज़ोर से चोदो मुझे, बहुत दिनों के बाद आज मेरी कायदे से चुद रही है… हाय क्या मस्त लौड़ा है तुम्हारा… मेरी चूत… लग रही है आज फट ही जाएगी… तुम रुकना मत.. मुझे आज खूब चोदो… चोद-चोद कर मेरी चूत का भोसड़ा बना दो।

राज भी ललिता की चूची दबाते हुए अपनी कमर उठा-उठा कर हचक-हचक कर ललिता को चोद रहा था और बोल रहा था- हाय मेरी चुदक्कड़ रानी… आज तक तूने जय का लंड खाया है, आज तुझे मैं अपने लंड से चोद-चोद कर तेरी चूत का बाजा बजा दूँगा… आज तेरी चूत की खैर नहीं…!

इधर जय मेरी चूत चोदते हुए बोल रहा था- हाय मेरी जान.. तुम इतने दिन क्यों नहीं मुझसे चुदवाई… आज तेरी चूत देख.. मैं कैसे चोदता हूँ… तेरी चूत मेरे लंड के लिए ही बनी हुई है… आज के बाद तू सिर्फ़ मुझसे चुदवाएगी… ले ले मेरे लंड की रानी.. ले.. मेरे लंड की ठोकर खा.. अपनी चूत के अन्दर… मज़ा आ रहा कि नहीं.. मेरी जान.. बोल ना..! बोल.. कुछ तो बोल…!

पूरे कमरे में बस पक… पक.. पका.. पक.. की आवाज़ गूँज रही थी।

तभी अचानक जय ने मुझे चोदते-चोदते अचानक चोदना बंद कर दिया और अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर के मुझे पलंग पर से उठने के लिए बोला। जैसे ही मैं पलंग पर से उठी तो जय झट मेरी जगह पर लेट गया और मुझे अपने ऊपर खींच करके मुझसे उस पर चढ़ कर के चोदने के लिए बोला।

मैं तो गर्म थी ही और इसलिए मैं जय की कमर के दोनों तरफ अपने हाथों को रख कर के जय के लंड को अपने हाथों से पकड़ के उसके सुपारे पर एक चुम्मा दिया और जय के ऊपर चढ़ गई, अपने हाथों से जय का लंड पकड़ के अपनी चूत के छेद से भिड़ा दिया।

जय ने भी नीचे से मेरी दोनों चूचियों को अपने हाथों से पकड़ कर उनको दबाते हुए नीचे अपना कमर उठा कर के अपना लंड मेरी चूत के अन्दर पेल दिया।

मैं जय के ऊपर बैठ कर उसके लंड को अपने चूत में लेती हुई मुड़ कर देखने लगी कि राज ने भी ललिता की चूत मारने का आसान बदल लिया है और वो अब ललिता को घोड़ी बना करके उकडूँ होने के लिए कह रहा था। उसके बाद राज ने ललिता के बड़े चूतड़ों को पकड़ कर उसे पीछे से चोदना शुरू कर दिया।

ललिता घोड़ी बन कर राज के धक्कों का जवाब देने लगी और मैं भी जय को ऊपर से तेज़ी से जय को चोदने लगी। थोड़ी ही देर में हम चारों एक साथ झड़ गए।

झड़ते समय जय ने मुझे अपने से चिपका लिया और अपना लंड जड़ तक मेरी चूत में घुसेड़ कर अपना पूरा का पूरा माल मेरी चूत की गहराई में छोड़ दिया।

उधर राज भी ललिता को अपने चिपका कर ललिता की चूत अपने लंड के पानी से भर दिया। झड़ते वक़्त मैं और ललिता ने अपने हाथों से जय और राज को अपने से सटा लिया था और जैसे ही चूत के अन्दर लंड का फुव्वारा छूटा.. चूत ने भी अपनी अपना रस छोड़ दिया।

अपनी इस पहली अदला-बदली चुदाई के बाद हम सब बहुत थक गए और थोड़ी देर तक अपनी जगह पर लेट कर और बैठ करके सुस्ताने लगे।

जय अपना लंड मेरी चूत से बिना निकाले मेरे ऊपर ही पड़ा रहा और अपने हाथों से मेरी चूचियों से खेलता रहा और कभी-कभी मेरी होंठों पर चुम्मा दे रहा था, मैं भी जय को चुम्मा दे रही थी।

उधर राज भी ललिता की चूत से अपना लंड बिना निकाले उसकी चूचियों को चूस रहा था।
 
थोड़ी देर के बाद जब सांस थोड़ी सी ठीक हुई तब हम लोग बिना कपड़े पहने नंगे ही ड्राइंग-रूम में आए, कमरे में आकर जय ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और मेरी चूचियों से खेलने लगा।

उधर राज ने ललिता को पीछे से पकड़ा और अपना झड़ा हुआ लंड उसके नंगे चूतड़ों से रगड़ने लगा।

मैं और ललिता दोनों जय और राज की नंगी गोद में बैठ कर अपने अपने हाथों को पीछे करके उनके लंड को सहलाना शुरू कर दिया।

तभी जय ने ललिता से एक गिलास पानी माँगा, ललिता नंगी ही रसोई की तरफ चल दी और राज भी उसके पीछे-पीछे चल दिया।

जय एक सोफे पर बैठ गया और मुझे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया। मेरे नंगे चूतड़ उसके लम्बे लंड से छू रहे थे। राज और ललिता रसोई से ड्रिंक्स और खाने का सामान लेकर वापस आए।

राज ने भी ललिता को अपनी गोद में अपने लंड पर बिठा लिया और उसके चूतड़ों से खेलने लगा। इस तरह से दोनों लोग एक-दूसरे की पत्नियों के नंगे बदन से जी भर के खेलने लगे।

अचानक राज ने जय से पूछा- जय, बताओ तुमको डॉली कैसी लगी, खास कर उसकी चूत तुम्हें पसंद आई या नहीं?

जय ने उत्तर दिया- क्या बात करते हो राज..! डॉली को चोदने में तो मज़ा आ गया… अपने चूतड़ उठा-उठा कर… क्या चुदवाती है..! और सबसे मज़ा डॉली की चूची मसलने में है, क्या मस्त चूची है डॉली की…! कब से मैं ऐसी मस्त बड़ी-बड़ी चूचियों वाली औरत को चोदने के चक्कर में था, पर तुम बताओ कि तुम्हें ललिता को चोदने में कैसा मज़ा आया?

राज बोला- यार जय, मुझे भी ललिता की कसी हुई चूत चोदने में बड़ा मज़ा आया… मेरा लंड ललिता की चूत में फँस-फँस कर घुस रहा था। ललिता जब अपनी टांग उठा कर अपनी चूत में मेरा लंड पिलवा रही थी तब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं भी बहुत दिनों से एक छोटी-छोटी चूचियों और बड़े-बड़े चूतड़ों वाली औरत को चोदने के सपने देख रहा था। चाहो तो डॉली से पूछ लो।

मैंने कहा- हाँ राज को तो बस ललिता जैसी बीवी चाहिए थी। राज अपनी औरत को उल्टा लिटा करके पीछे से चूत में चोदना पसंद करता है और साथ ही साथ उसके भारी-भारी चूतड़ों से खेलना पसंद करता है।

यह सुन कर ललिता बोली- अच्छा तो राज को मेरे जैसी और जय को डॉली जैसी बीवी चाहिए थी, फिर हम क्यों ना एक-दूसरे से जीवन भर के लिए पति और पत्नी को बदल लें? वैसे मुझे भी राज के लंड की चुदाई बहुत अच्छी लगी। चूत चुदवाते वक़्त लग रहा था कि मेरी चूत पूरी की पूरी भर गई है।

राज तब झुक कर ललिता के होंठों को चूमते हुआ बोला- ललिता, थैंक्स फॉर दि कॉंप्लिमेंट्स… वैसे सारी उम्र का तो मैं नहीं जानता, पर मैं डॉली को ललिता से बदलने के लिए हमेशा तैयार हूँ। मुझे ललिता की चूत में लंड पेलना बहुत अच्छा लगा।

यह सुन कर जय बोला- यार राज, क्या बात है। तूने तो मेरे मन की बात कह डाली। तुम भी जब चाहो ललिता के साथ मज़ा ले सकते हो, उसकी चूत चाट सकते हो, उसकी चूत चोद सकते हो, चाहो तो तुम ललिता की गान्ड में अपना लंड भी घुसेड़ सकते हो। राज, कल शनिवार है और अगर तुम चाहो तो डॉली को मेरे पास ही कल तक रहने दो और तुम डॉली की जगह ललिता को अपने साथ घर ले जाओ।
 
राज ने उत्तर दिया- जय, इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है। मैं डॉली को तुम्हारे पास छोड़ जाता हूँ और तुम ललिता को कल शाम को आकर ले जाना, लेकिन पहले हम लोगों को ललिता और डॉली से भी पूछ लेना चाहिए कि उनकी क्या राय है। क्या वो अपने पति की गैर मौजूदगी में किसी और के लंड अपने चूत में पिलवाना चाहेंगी या नहीं?

राज की बात सुन कर ललिता सबसे पहले बोली- डॉली की बात तो मैं जानती नहीं, लेकिन मुझे जब नंगी करके जय के सामने एक बार राज चोद चुका है तो मुझे अब कोई फरक नहीं पड़ता कि राज दोबारा मुझे जय की गैर मौजूदगी में चोदता या जय के सामने चोदता। मुझे तो इस समय बस राज की चुदाई की खुमारी चढ़ी हुई है और मैं फिर से राज के लंड अपने चूत में पिलवाना चाहती हूँ।

ललिता की बातों को सुन कर मैं भी तब जय के लंड को अपने हाथों से मरोड़ते हुए बोली- हाय मेरी छिनाल ललिता रानी, तू एक बार राज का लंड खाकर ही उस पर फिदा हो गई? कोई बात नहीं, जा मैं आज और कल तक के लिए तुझे राज का लंड में दिया… जा तू अपनी चूत मेरे प्यारे राज के लंड से चुदवा या अपनी गान्ड मरवा… मैं आज रात तेरे पति के लण्ड से अपना काम चला लूँगी। वैसे ललिता मेरी जान, तेरा ठोकू खूब दम से ठोकता है अपना लंड। मुझे तो मज़ा आ गया और तुम लोगों के जाने के बाद मैं तो जय से फिर अपनी चूत में उसका लंड ठुकवाऊँगी।

ललिता और मेरी बातों को सुन कर जय और राज बहुत खुश हो गए और हम लोगों को ढेर सारी चुम्मियाँ दीं और चूचियाँ मसलीं।

फिर राज ललिता को मेरे कपड़े पहना कर अपने साथ ले गया और मुझे जय के पास नंगी छोड़ गया। सच बताऊँ तो जय और मैं अपने इस पहली अदला-बदली चुदाई के अनुभव से इतने उत्साहित हुए कि राज और ललिता के घर से जाते ही फिर से चुदाई में लग गए।

बाद में राज ने बताया कि उसने भी घर जाकर सारी रात ललिता को मेरे बिस्तर पर पटक कर खूब चोदा।

राज और ललिता के जाते ही जय ने सबसे पहले मुझको अपने बाँहों में लेकर के खूब चूमा और मेरी दोनों चूचियों को दबाया, मसला और चूसा फिर मुझे अपनी गोद में नंगी ही उठा लिया और बिस्तर पर ले आया।

बिस्तर पर लाकर जय ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद मेरे बगल में लेट कर मेरी चूचियों को दबाते हुए बोला- डॉली मेरी जान, मैं तुम्हें आज सारी रात जैसा तुम चाहोगी वैसे चोद कर पूरा मज़ा देना चाहता हूँ। बोलो आज रात मेरे साथ तुम अपनी चूत कैसे चुदवाना चाहती हो?

मैंने भी जय के मुँह से अपनी एक चूची लगाती हुए बोली- तो फिर मैं जैसे कहूँ वैसे मुझे धीरे-धीरे चोद कर सारी रात मुझे और मेरी चूत को मज़ा दो।

जय ने पूछा- तो बताओ मैं क्या करूँ… जो तुम बताओगी वही मैं करूँगा।

मैंने जय से अपने ऊपर नंगे लेट कर पहले मेरा सारा नंगा बदन चूमने और चाटने के लिए कहा। जय झट से मेरे ऊपर चढ़ कर मेरी नंगे बदन को सर से पैर तक चूमने लगा। पहले उसने मेरे होंठों को खूब चूमा, फिर मेरी चूचियों को खूब चूसा। उसके बाद मेरे पैर से लेकर मेरी जगहों तक मेरे बदन को खूब चूमा और चाटा। जय ने मेरे पेट को, मेरी नाभि को, मेरी चूत के ऊपर के उभरे हुए त्रिकोण को जी भर के चाटते हुए मेरी सब जगहों और मेरे पैरों को खूब चाटा।

मुझे जय के इस तरह से चूमना और चाटना बहुत अच्छा लग रहा था और जय भी बहुत मन लगा कर के मेरा सारा बदन चूम रहा था और चाट रहा था।

इतनी चुम्मा-चाटी के बाद भी अभी तक जय ने मेरी चूत के अन्दर अपनी जीभ नहीं घुसेड़ी थी।

अब मेरी चूत के अन्दर चीटियाँ रेंगना चालू हो गईं।

फिर उसके बाद मैं पेट के बल लेट गई और जय से फिर अपने सारे बदन को पीछे से चाटने को कहा। जय फिर मेरी गर्दन को, मेरी पीठ को और मेरे पैरों को चाटने लगा। अब मैंने जय से मेरे चूतड़ों को चाटने को कहा।

क्रमशः..................
 
गतान्क से आगे.....................

जय ने जी भर के मेरे चूतड़ों को अपने हाथ से फैला कर, उनके अन्दर अपनी जीभ डाल कर खूब चूमा और चाटा।

फिर मैंने जय को मेरी पीछे से चूत के आस-पास चूमने को कहा, मैंने जय को अपनी जीभ से मेरी चूत को धीरे-धीरे चाटने को कहा।

जय बड़े आराम से मेरी चूत चाटने लगा।

थोड़ी देर चूत चटवाने के बाद मेरी चूत पानी छोड़ दिया और मैंने जय को अपनी बाँहों में जकड़ लिया।

इसके बाद मैंने जय को मेरे ऊपर चढ़ा कर अपना लंड मेरे मुँह के अन्दर डालने को कहा।

जय ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया और मैं जय का लौड़ा बड़े आराम से अपने हाथों से पकड़ कर चूसने लगी।

मैं जैसे-जैसे जय का लंड चाट और चूस रही थी, वैसे-वैसे उसके लंड ने अकड़ना शुरू कर दिया।

जय अपने हाथों से मेरी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा।

थोड़ी देर में ही मेरे चूसने से जय का लंड तन्ना कर खड़ा हो गया..!

जब जय का लंड पूरा का पूरा तन गया तो उसने मुझसे बोला- अरे मेरी लंड की रानी, अब तो छोड़ दो मेरे लंड को… मुझे अब तुम्हारी चूत में अपना लंड पेलना और तुम्हें चोदना है… देखो ना मेरा लंड अकड़ कैसे खड़ा हो गया है.. यह अब तुम्हारी चूत में घुसना चाहता है… चलो अब चूत चुदवाने के लिए तैयार हो जाओ।

जय का बात सुन कर मैं जय का लण्ड अपने मुँह से निकाल कर जय से बोली- हाय मेरी चूत के राजा, जैसे तुम्हारा लौड़ा तन कर खड़ा हुआ है, वैसे ही मेरी चूत भी लंड खाने के लिए अपनी लार छोड़ रही है। मेरी चूत बहुत गीली हो गई है, अब मैं भी तुमसे अपनी चूत चुदवाना चाहती हूँ। चलो अब जल्दी से अपना यह मोटा सा डंडा मेरी चूत में घुसेड़ो और चूत को चोद-चोद कर फाड़ दो।

जय मेरी बातों को सुन कर मेरे ऊपर से नीचे उतर गया और मेरी टाँगों के बीच बैठ गया। टाँगों के बीच बैठने के बाद जय ने मेरी टाँगों को अपने हाथों से खोल कर मेरी चूत को खोला और अपना लंड मेरी चूत के दरवाजे पर रख कर एक धक्के से पूरा का पूरा लंड चूत के अन्दर घुसेड़ दिया।

मैंने भी अपनी टाँगों को जितना हो सका, खोल कर जय का लंड अपनी चूत में ले लिया, लेकिन जय के धक्के के साथ साथ मेरे मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई।

जय ने मेरी चीख सुन कर के पूछा- क्या हुआ, डॉली तुम्हारी चुदी-चुदाई चूत क्या फिर से फट गई? अरे अभी तो सिर्फ़ लंड चूत के अन्दर डाला है, अभी तो पूरी चुदाई बाकी है और तुम अभी से चीख रही हो?

मैं जय की बातों को सुन कर बोली- साले हरामी चूत के पिस्सू, ऐसे धक्का मारा जाता है? चुदक्कड़ बीवी के चोदू खसम, अबे यह तेरी बीवी की चूत नहीं है, कि जैसे मर्ज़ी चोद रहा है… साले आराम-आराम से चोद..!

फिर मैंने जय से प्यार से बोली- जय, ऐसे नहीं, धीरे-धीरे, अपने लंड को मेरी चूत से पूरा बाहर निकाले बिना, हल्के-हल्के धक्के मार कर, जी भर के सारी रात चोद कर मुझे मज़ा दो। ऐसे जल्दी-जल्दी से चोदने से क्या फायदा? तुम जल्दी झड़ जाओगे और मुझे भी मज़ा नहीं मिलेगा।

अब जय मुझे धीरे-धीरे चोदने लगा। थोड़ी देर तक धीरे-धीरे चोदने के बाद जय ने मेरी टाँगें पकड़ कर ऊपर फैला लीं और अपने लंड को मेरी चूत से पहले आधा निकालता फिर उसको मेरी चूत के अन्दर घुसेड़ देता।

मुझे इस धीमी चुदाई से बहुत मज़ा मिल रहा था। मैं जय की कमर को अपने पैरों से पकड़ कर उसको अपनी चूचियों से चिपका लिया और अपनी कमर उठा-उठा कर जय का लंड अपनी चूत में पिलवाने लगी।

जय की इस धीमी चुदाई से मेरी चूत अब तक तीन बार पानी छोड़ चुकी थी, लेकिन चूत और चुदना चाहती थी।

थोड़ी देर जय मुझे धीरे-धीरे चोदने के बाद मुझसे से बोला- मेरी रानी, अब बहुत हो गया है.. अब मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदने दो। वैसे ललिता को मैं तो रोज़ ज़ोर-ज़ोर से चोदता हूँ और ललिता भी चुदते-चुदते ज़ोर-ज़ोर से चोदने के लिए बोलती है। अब तुम अपनी चूत संभालो और मैं तेज़ी से चोदता हूँ।

इतना कहने के बाद जय ने मेरी दोनों चूचियों को अपने हाथों से कस कर पकड़ लिया और अपनी कमर तेज़ी से उठा-उठा कर मुझे चोदने लगा।

अब मैं भी बहुत गर्म हो गई थी और मैंने भी जय को अपने दोनों हाथों और दोनों पैरों से पकड़ कर उससे चिपक कर जय की चुदाई का मज़ा लेने लगी।

थोड़ी देर मेरी चूत में लंड तेज़ी से पेलने के बाद जय का लंड मेरी चूत के अन्दर ठुमका मारने लगा और मैं समझ गई कि अब जय झड़ने वाला है।

वैसे मैं भी अब झड़ने वाली थी।

मैंने जय का मुँह खींच कर अपने चूचियों पर सटाते हुए जय से बोली- जय, जल्दी से तुम मेरी चूची चूसते हुए मुझे चोदो, मैं भी अब झड़ने वाली हूँ। चूची चुसवाते हुए चुदने से मैं बहुत जल्दी झड़ूँगी।

जय झट से मेरी एक चूची को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा।

मैं भी अपनी चूतड़ उचका-उचका कर जय के लंड से चुदवाने लगी।

थोड़ी देर में जय ने लंड तेज़ी से मेरी चूत में अन्दर तक पेल कर पानी छोड़ दिया और मेरी चूत को अपने पानी से भर दिया।

मैंने भी उसी समय अपनी चूत का पानी जय के लंड के ऊपर छोड़ दिया।

हम लोग इस चुदाई से बहुत ही थक गए थे और बिना चूत से लंड निकाले एक-दूसरे को अपने से चिपका कर सो गए।
 
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