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सिफली अमल ( काला जादू ) complete

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मैने फ़ौरन बाजी की गर्दन पे जकड़े उन हाथो पे तलवार चला दी….और ठीक उसी पल हाथ कट के नीचे गिर पड़े….दहाड़ते हुए वो शातान पीछे होने लगा…..बाहर का तूफान थमने का नाम नही ले रहा था चारों ओर एक गहरा अंधेरा सा छाया हुआ था…

.और ठीक उसी वक़्त मशाल लिए बस्ती का हर आदमी क़िले की तरफ बढ़ने लगा….चार्ल्स ने उन्हें रोका लोगो के दिलो में गुस्सा फैल चुका था और अब वो मिलके उस खंडहर को आग लगाने वाले थे….चारो ओर की हवाओं में एक अज़ीब सा ख़ौफ़ था

ड्रॅक्यूला दहाड़ते हुए किसी जानवर की तरह शीबा बाजी और मेरे पीछे दौड़ पड़ा…मैं शीबा बाजी का हाथ पकड़े सीडियो से उपर आके तहख़ाने का दरवाजा जैसे ही बंद करने को हुआ इतनी देर में दरवाजा अपने आप खुल गया….

”तुम लोग यहाँ से ज़िंदा नही जाने वाले”….एक बेहद दोहरी आवाज़ हमारे कानो के पर्दे को फाड़ने को हो गयी

शीबा बाजी ने चिल्लाया कि मैं वहाँ से भाग जाउ पर मैं उन्हें राजा के करीब आने से रोक रहा था….तभी बादल की गरजते हुए बिजलिया शीशे को तोड़ते हुए अंदर दाखिल हुई ठहाका लगाते हुए वो राजा बेहद करीब आने लगा उसके नुकीले दाँत मेरी ओर ही बढ़ने लगे...लेकिन उसी पल लूसी उनके सामने खड़ी हुई थी

और मेरी उसी पल चीख निकली “लूसी”……उस शैतान की निगाहें लूसी की ओर थी और उसे अपने सम्मोहन में खीचते हुए उसने अपने दाँत उसकी गर्दन पे गाढ दिए थे…उग्घ्ह लूसी की सिर्फ़ इतनी सी आहह निकली उसकी आवाज़ उसके गले में घुट के रह गयी…राजा के दाँतों से निकाला पुर्ज़ ज़हेर उसके मृत शरीर में जाने लगा….फिर उसका खून बहने लगा..बाजी ने मुझे कस्के पकड़ लिया था मैं बस छटपटाया और बेबसी में रोए जा रहा था

और जब उसने लूसी को अपनी गिरफ़्त से छोड़ा तो उसका बेजान जिस्म ज़मीन पे गिर पड़ा…मैने उसे जगाया लूसी कराह रही थी “आहह उग्घह मार दो मुझे आसिफ्फ म..मेरे अंदर..र्र शैत्तान्नू का ज़हेर आ गया..आया हाईईइ शा..यद ये साथ कुछ पॅलो का ही सही लेकिन मैं अपने निर्दयी हाथो से तुम्हें जान से नही मार सकती आहह मुझे..ही मांफ करना”……

मैं चुपचाप बस आँखो में आँसू लिए उन पलों को याद करने लगा जब मुझे लूसी मिली थी शायद वो अपनापन दोस्ती से बढ़के था….उसकी वजह से आज मैं और बाजी एक हो सके…मैने अपनी आँखो को बंद करके उसके सीने में तलवार घुसा डाली..उसकी एक चीख निकली और उसके बाद उसका जिस्म जलता हुआ कोयले की तरह राख में तब्दील हो गया…

चार्ल्स और गाओं वाले अंदर दाखिल हुए क़िले को आग लगा चुके थे…”फ़ौरान चले आओ आसिफ्फ एशा”….उसकी आवाज़ को सुन मैं जैसे ही पीछे मुड़ा शीबा बाजी को अपनी गिरफ़्त में लिए राजा बाहर की ओर उड़ने लगा…मैने अपनी तलवार को लिया और दौड़ते हुए उसी दिशा की ओर कुदा मेरी तलवार राजा के पाँव को छूते हुए निकल गयी…राजा मेरी ओर ठहाका लगाए हँसने लगा

“आहह आअहह य्ाआअ”……..एक बार और वो दहाड़ उठी…और इस बार मैं अपने कपड़ों को फाड़ भेड़िए में तब्दील हो चुका था गाओं वाले ख़ौफ़ से बाहर की ओर भागे

“ठहर जाओ उससे डरो नही”……..शापित भेड़िया दीवारो पे चढ़ता हुआ ड्रॅक्यूला को महल से निकलने से पहले ही उसके जुतो को पकड़ चुका था और उसकी टाँगों को मज़बूती से पकड़े ज़मीन की ओर उसे गिरा दिया…राजा के बाजुओं से शीबा बाजी का बेहोश जिस्म छूट गया….और फुरती से भेड़िया उसे अपनी बाहों मे लेके फर्श पे कूद गया….बाजी बेहोश पड़ी थी जिसे उसने लिटा दिया….भेड़िया दहाड़ता हुआ ड्रॅक्यूला की गर्दन को जकड़े उसपे हावी हो चुका था

इस बार दो शैतान आपस में अंधाधुंध लड़ाई करने लगे….दोनो एक दूसरे पे पंजो का वार करने लगे…ड्रॅक्यूला भेड़िए को काटने की कोशिश करने लगा भेड़िया ने उसे दीवार में धसा दिया और उसे गर्दन से पकड़े फिर दूसरी ओर फ़ैक् डाला….ड्रॅक्यूला दर्द से कराहते हुए भेड़िए पे झपट पड़ा….इन शैतानों की लड़ाई का हर कोई गवाह था जो सामने दिख रहा था…दोनो आपस में काफ़ी देर तक लड़ाई करते रहे भेड़िए ने बेदर्दी से ड्रॅक्यूला की गर्दन पे दाँतों को गाढ दिया और उसे खींचता हुआ किसी लाश की तरह बाहर ले जाने लगा…हर कोई रास्ते से हट चुका था…क़िला ढहने लगा सब लोग भांगने को हुए

तब तक चार्ल्स भी बचते हुए शीबा बाजी को अपनी कंधे पे उठाए बाहर की ओर भागा….क़िले के अंदर रह गये दोनो शैतान….आपस में लड़ते हुए…डार्क्युला चीख रहा था चिल्ला रहा था दहाड़ रहा था….भेड़िया उसे छत पे ले आया….चारो ओर आग की लपटें जर्जर इमारत को गिरा रही थी बलाओ की चीख गूँज़ रही थी पूरे महल में

जल्द ही वो उमड़ा तूफान सॉफ होने लगा और सूरज फिरसे निकलने को हुआ…..”नही नहियीई”……..खुदा की वो रोशनी थी जो इस इब्लीस पे पड़ने वाली थी जिसके ख़ौफ़ से वो अपने चेहरे पे हाथ रखे हुए था ना जाने क्यूँ आसिफ़ को विश्वास था यकीन था कि एक ना एकदिन वो इस रास्ते पे ज़रूर भटक के वापिस लौटेगा जहाँ खुदा उसकी मदद करेगा उसने ड्रॅक्यूला को हवा में दूर फ़ैक् दिया और ठीक उसी पल सूरज की तेज़ रोशनी काले बदल के आर पारहोती हुई ड्रॅक्यूला के उपर पड़ी

 
नहियीईईईईई…एक तेज़ चीख निकली और ड्रॅक्यूला का शरीर धीरे धीरे धुए में तब्दील होने लगा और कुछ ही पलों में उसकी हड्डिया चटकने लगी और उसकी अबतक की जीवित लाश जल के राख होने लगी.…ड्रॅक्यूला अपनी बेदर्द मौत को महसूस करता हुआ मारा गया….और लाश की बजाय रह गया वहाँ चारो ओर एक काला निशान

“हवववववववववववव”…….भेड़िए ने एक बहुत ज़ोर की आवाज़ निकाली और इस बार गाओं के सभी लोग उस दृश्य को देखने लगे…धूप की रोशनी में भेड़िए का जिस्म जलने लगा और जल्द ही उसके पूरे बदन से धुआ निकलने लगा और जल्द ही वो इंसान में तब्दील होता चला आया उसने फ़ौरन छलाँग लगा दी

और ठीक उसी पल वो ज़मीन पे कूदके गिर पड़ा…उसके पूरे जिस्म से धुआ निकलने लगा “आए खुदा इस बात का मैं पहला गवाह हूँ”…….चार्ल्स ने खुदा का शुक्रिया अदा किया और आसिफ़ की ओर देखा जो निढाल होके बदहवास उठ खड़ा हुआ….उसने आसमान की तरफ देखा और उस निकलते सूरज की आगे अपने हाथ फैलाए “या अल्लहह तूने मुझे मांफ किया है शायद ये तेरा ही करिश्मा था जो आज मुझे मेरी बाजी वापिस मिली और शायद मैं इस शाप से आज़ाद हो गया वरना मैं भी जलकर राख हो जाता मैं तेरे आगे अपने गुनाहो के लिए तेहदिल से मँफी माँगता हूँ”……आसिफ़ ने घुटनों के बल बैठके अपने हाथ सूरज की ओर उठाए और अपनी आँखे बंद कर ली उसकी मुस्कान में जीत की खुशी थी और खंडहर की जर्जर इमारत अपने आप एक एक करके ढहते हुए तबाह हो गयी

चार्ल्स जीत की खुशी में अपने आँसू पोछ रहा था ड्रॅक्यूला का अंत हो चुका था और उसके पिशाचो का भी गाओं वाले आसिफ़ को देख कर सहम उठे थे पर अब उनकी नज़रों में भी आसिफ़ किसी फरिश्ते से कम नही था उनके लिए शीबा जो कपड़ा ओढ़े हुए अपने भाई की जीत पे खुश हो रही थी आख़िरकार उसके भाई ने एक बार फिर अपनी बाजी को दोजख जाने से वापिस खींच लिया था

अगले दिन काफ़ी ज़ोरो से बरफबारी हुई थी....पिछली रात जब मैने राजा स्किवोच और उसके पिशाचो का ख़ात्मा किया उसी ही पल गाओं वालो की निगाहो में मैं किसी फरिश्ते से उन्हे कम ना लगा...आजतक उस बस्ती पे हो रहे ज़ुल्म का ख़ात्मा आज जाके हुआ...राजा स्किवोच उर्फ ड्रॅक्यूला का आतंक अब थम चुका था....और यही नही अल्लाह के फ़ज़ल से सूरज की रोशनी के बावजूद भी मैं बचा रहा...लेकिन मुझे महसूस हो सकता था कि मेरे अपने जिस्म से कुछ भारीपन मानो उतर सा गया था...शाप से मैं आज़ाद था...अब मैं कोई दरिन्दा बनने वाला नही था लिलिता का शाप टूट चुका था...शायद अल्लाह ने मुझे मांफ कर दिया था..पूरे रात जश्न मनाया गया था जिसमें मैं और बाजी शरीक हुए हालाँकि उनकी निगाहो में बाजी एक मात्र पिशाच बची हुई थी पर उन्हें ख़ौफ़ नही सताया कि वो उन्हें कोई नुकसान पहुचाएगी...रात कब कैसे ढली थी मालूम नही? पर वो चैन और खामोशी की रात थी काले साए इस इलाक़े से दूर दूर तक हट चुके थे...अब वो जंगल महेज़ सिर्फ़ एक जंगल ही लग रहा था खून पीते पिशाच और शैतानी भेड़ियों का आतंक ख़तम हो चुका था जिस बात का हरपल ये लोग फिकर किया करते थे...लेकिन अब उनके फरिश्ते को विदा लेनी थी मुझे अब बाजी के साथ एक नयी ज़िंदगी तलाशने अपने लिए जाना था

"हम तुम्हारा यह अहसान ज़िंदगी भर नही भूलेंगे".......चार्ल्स और बस्ती के लोग बरफ बारी के वक़्त सड़क पर खड़े हमे विदा करने आए थे...

"ऐसा नही है ये सब सिर्फ़ आपकी बदौलत हुआ".......मैने मुस्कुरा के चार्ल्स के हाथ पे हाथ रखा....

"तुम जिस नेक इरादे से आए थे वो तो ईश्वर की इच्छा से तुम्हें मिल गया तुम्हारी बाजी सच में ये मुहब्बत मौत से भी बढ़कर है खून के प्यास से भी बढ़कर जो एक दरिंदे को एक इंसान से यूँ जोड़ देता है"............चार्ल्स ने शीबा बाजी की ओर देखा जिन्होने मुस्कुरा के नज़रें झुका ली

मैं : शायद लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि आपने और इन बस्तीवालो ने हमारी इतनी मदद की अब ना तो कोई साया इस बस्ती पे गुज़रेगा और ना ही कभी कोई क़बर से पिशाच निकलेगा बस दुख है कि कुछ अपनो को छोड़ने जा रहा हूँ कूछो को खोया सिर्फ़ अपनी बाजी को लेके ही यहाँ से जा रहा हूँ (दुख लूसी के लिए था जो मुझे बेहद याद आ रही थी इन्ही हाथो से मैने उसे ख़तम कर डाला था जिस बात का बेहद अफ़सोस था)

 
बस्तीवालो ने आगे आके मुझे एक लाल रंग का मूँगा दिया.."ये हमारी बस्ती की तरफ से उनको दी जाती है जिन्होने हमारी हमेशा रक्षा की...ये हमारे पूर्वजों का था जब उन्होने यहाँ के इलाक़ो के शैतानो से लड़कर अपनी जान दी और आज ये तोहफा इसके असल मालिक को दे रहे है क़बूल करिए"......

मैने हाथ जोड़के उस वृद्ध औरत के हाथ उसे लाल मूँगा के लॉकेट को अपने गले पे पहना...और फिर मुस्कुरा के चार्ल्स से गले मिला..सबकी आँखो में आँसू थे...पर मुझे बाजी को लिए यहाँ से भी कही दूर जाना था..ताकि इंसानो की निगाहों मे हमेशा ख़ौफ्फ में ना रहे और ना बाजी की शक्सियत के बारें में किसी को मालूम पड़े

हम घोड़े के टोंगा के अंदर घुस चुके थे....जल्द ही घोड़ा तेज़ी से सड़क की ओर दौड़ने लगा.....और पीछे बरफ गिरती हो हो करती हवाओं में चार्ल्स और उसके बस्तीवाले मुझे अलविदा का इशारा कर रहे थे "दोबारा ज़रूर आना और अपना ख्याल रखना"........चार्ल्स चिल्लाके मुस्कुराया....

"आप लोग भी"......मैने टंगा से निकालके उन सबकी ओर हाथ दिखाते हुए विदाई ली...कब कोहरा में दूर चला गया बस्ती पीछे और हम सड़क के बीचो बीच चलने लगे....मैने परदा लगा लिया और बाजी के करीब आके बैठ गया...

."तुमने मेरे लिए इतना बड़ा जोखिम उठाया भाई".....बाजी ने मुस्कुरा के मेरी ओर देखा और मेरे कंधे पे सर रख लिया...मैं बाजी से एकदम लिपट चुका था..भले ही मैं बाजी को वापिस इंसान ना बना सकूँ लेकिन एक सुकून तो था कि हम अब चैन से एक नयी ज़िंदगी बसर करेंगे...हम कहाँ जा रहे थे? इस बात की कोई मालूमत नही थी....बस हम जल्द ही दूसरे कस्बे की ओर जा रहे थे.....चार्ल्स ने पैसो की कुछ मदद की और उसने बताया कि हम रोमन साइड चले जाए ताकि वहाँ पे लोग हमसे बेख़बर रहेंगे वहाँ बाजी सर्द वीरानो में आराम से रहेंगी ना ही वहाँ इंसान की भीढ़ बाढ़ है और ना ही कोई झंझट

बाजी को अपनी ग़लती का अहसास था जिस पिशाच से उन्होने अपना दिल लगाया था वो महेज़ एक खिलवाड़ था उसे लगा था कि शायद हम सब एकसाथ एक नयी ज़िंदगी बिताएँगे लेकिन असलियत में वो एक छलावा था राजा स्किवोच की चाल को उन्हें पहले से समझ लेना चाहिए था...लेकिन अब बात बीत चुकी थी और उसे भुलाने के सिवाय कोई चारा नही था...जल्द ही टोंगे वाला हमे बड़े से शहर ले आया....वहाँ से रोमन जाने का सारा बंदोबस चार्ल्स की मदद से हो गया था..और हम जल्द ही रोमन के लिए रवाना हो गये पीछे छोड़ते चले गये एक और दास्तान

"वॉववव ये आपकी अपनी कहानी है या महेज़ ख्वाबो की ताबिर"..........एक लड़की जो मेरे लॅपटॉप को गोद में अपनी रखकर स्क्रीन पे लगे राजशर्मास्टॉरीज ( आरएसएस ) वेबसाइट पर इस कहानी को पढ़ रही थी जो मुस्कुराते हुए बोली..."हा हा हा आप लोगो के लिए महेज़ ख्वाबो की ताबिर पर मेरे लिए मेरी पूरी आप बीती"........मैने मुस्कुराते अपने चश्मे के फ्रेम से उसके हाथो से लॅपटॉप लिया....

एक 20 22 साल की लड़की थी और जिस ट्रेन मैं सफ़र कर रहा था उसी कोच में वो मेरी को-पॅसेंजर थी....

"वैसे सच कहूँ तो मुझे आपकी कहानी पे यकीन नही हो रहा इतना अड्वेंचर एक इंसान फिर एक पिशाच और एक शापित भेड़िया ये सब तो किसी नॉवेल की स्टोरी जैसा लगता है इस्न'ट इट स्ट्रेंज".........उसने मुस्कुराते मेरी ओर देखते हुए कहा

"मुझे अपनी ज़िंदगी के पन्नो को ही लिखने की आदत है ये जो आपने पढ़ी ये मेरी पर्सनल डाइयरी के पन्ने है जिन्हें मैने अब कहानी का एक नायाब रूप दिया है".........

उस लड़की ने मुस्कुराते हुए बड़ी ही बारीकी से मेरी बात को सुना....मैं काफ़ी देर से इस ट्रेन पे सफ़र कर रहा था जा रहा था कोलकाता सोचा क्यूँ ना? अपनी नयी कहानी को वेबसाइट पे पेश किया जाए ताकि जो रीडर्स मेरी कहानी का बेसवरी से इंतेज़ार कर रहे है उन्हें एक दिलचस्प कहानी तो मिलेगी...उसी पल लॅपटॉप पे टाइपिंग के वक़्त इस लड़की से मुलाक़ात हुई जो मेरी इस कहानी को सुनने लगी और जब कहानी सुनने के बाद शुरू हुई तो उसने पूरी दास्तान उसने पढ़ डाली...अचानक उसने फिर मेरी सोच को तोड़ा इस बार वो बहुत क्यूरियस दिख रही थी

"अच्छा अगर ये सच्ची घटना है तो फिर उस लड़की का क्या हुआ? आइ मीन शीबा बाजी जिसे सिफली अमल के तौर से मौत से फिर जगाया गया क्या वो आज भी अपने भाई के साथ ज़िंदा है कहीं रह रही है? या फिर वो मर चुकी है"..........

.मैं उसकी इस बात से काफ़ी ज़ोर से हंसा...मेरी इस हँसी को देख उसे भी शायद ऐसा लगा कि उसने मज़किया तौर पे कोई ऐसी टॉपिक छेड़ दी है जो मेरे हँसने का कारण बन गयी

"असल में मरा हुआ इंसान कभी दोबारा मर थोड़ी ना सकता है वो अमर हो जाता है....यक़ीनन सिफली अमल से उसके भाई को काफ़ी नुकसान झेलना पड़ा...लेकिन जब उसने अल्लाह के आगे सर झुकाए अपने गुनाहो की माँफी माँगी तो अल्लाह ताला ने उसे माफ़ कर दिया था दोनो फिर तबसे कयि जगह ऐसे घूमते रहे...उन्हें लोग महेज़ इंसान मानते लेकिन वो जानते नही थे कि वो असल में इंसान थी नही एक पिशाचनी थी जिसे इंसानो से कोई नफ़रत नही थी पर उसे अपने इंसानी भाई से ज़रूर मुहब्बत थी और वो उसे छोड़ने वाली नही थी....उसका भाई आज भी उसकी सांसो के साथ ज़िंदा है"........

लड़की ने इमप्रेस्सिंग स्माइल पास करते हुए मेरी ओर देखा.."तब तो आपकी ये कहानी पक्का हिट होंगी".........

 
"मैं नही मानता भला कौन ऐसी चीज़ों पे यकीन करता है एनीवेस स्टेशन लगता है आने वाला है".........मैने अपने गले को खकारा..तभी एकदम से एक आवाज़ आई "हो गयी आप दोनो की बातें पूरी".......एक सुनहेरे बालों वाली किसी विलायती जैसी दिखने में एक गोरी मेम आसिफ़ के साथ बगल में बैठ गयी और उसने आसिफ़ को चाई दी

"ओह्ह सॉरी मैने तुम्हे इनसे मिलवाया नही इनसे मिलो मेरी वाइफ शीबा"........

.लड़की उसे हक्का बक्का देखते रह गयी उसकी खूबसूरती को बयान करना उसके लिए मुस्किल था उसे एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे उसकी आँखे उसके साथ धोका खा रही हो....

"फिरसे स्टोरीस? ये लड़का ना सच में जबसे राइटर की जॉब पकड़ी है बस लिखते रहते है लिखते रहते है ऑल टाइम यही बकवास हा हा हा"........शीबा ने हँसके लड़की की ओर देखा जो उसकी बातों से मुस्कुराने लगी.....

"वैसे सच कहूँ तो आप दिखने में काफ़ी बे-इंतिहा खूबसूरत हो"........

शीबा बाजी ने मेरी ओर मुस्कुराया देख कर..."दरअसल जैसे जैसे उमर होती है खूबसूरती बढ़ जाती है"......मैने हँसके जवाब दिया हम सब हँसने लगे...

"नही सच में लग ही नही रहे आप इंडियन हो लेकिन सच में आप दोनो वाक़ई काफ़ी अच्छे कपल हो".......

मैने उसे थॅंक्स कहा और शीबा ने भी...."दरअसल हम लोग रोमन और ट्रॅन्ज़ील्वेनिया में काफ़ी सालो से रहे है शायद इन्ही वजहों से खैर वैसे आओ कभी कोलकता में हम सॉल्ट लेक में रहते है"....शीबा ने मुस्कुरके लड़की को इन्वाइट किया और उसने बस मुस्कुराया

"ट्रॅन्ज़ील्वेनिया माइ गॉड मैं तो कभी ना जाउ हाहाहा".......एक बार फिर बौगी में हम तीनो के ठहाके लगाती हँसी निकल गयी उस लड़की की बातों को सुन...इतने में एक गुंडा दरवाजे पे एंट्री करता हुआ उस लड़की को अज़ीब निगाहो से देख कर दूसरी ओर चला गया

"क्या बात है?".......मैने चश्मा ठीक करते हुए उस शक्स को जाते हुए उस लड़की की ओर देखा

"पता नही सुबह से फॉलो कर रहा है सच में शैतान तो हम इंसानो में भी छुपा है"........

मैं मुस्कुराया "डॉन'ट वरी कुछ लोगो की प्यास महेज़ खून नही होती".........मेरी बातों से उस लड़की के चेहरे पे फिर मुस्कान आई

जल्द ही हमारा स्टॉप आने को हो गया...."चलो फिर हम चलते है और अगर दोबारा मिले ऐसी उम्मीद करते है"........मैने बॅग हाथो में लेते हुए लड़की की ओर खड़े होके कहा

"ओके सर ओके मॅम बाइ".....उसने हम दोनो से हाथ मिलाया और खड़ी होके अपना बॅग पॅक करने लगी....

"मैं आती हूँ"........शीबा बाहर निकल गयी

"ठीक है जल्दी आना"......मैं फिरसे अपना बॅग पॅक करने लगा

सीटी मारता हुआ वो आदमी जो कुछ देर पहले उस लड़की की ओर घूर के टाय्लेट में अभी घुसा ही था इतने में उसे किसी ने बड़ी ज़ोर से गर्दन से पकड़ लिया...और उसे टाय्लेट में लगे शीशे पे उसके सर को दे मारा....काँच टूट गया और उसका चेहरा खून से तरबतर...वो ख़ौफ्फ भरी निगाहो से टूटे शीशे में अपनी गर्दन को जकड़े उस औरत को देख सकता था..जिसकी आँखे सुर्ख लाल थी और उसके दाँत नुकीले हो गये थे

उसने उस आदमी के मुँह को कासके बंद किया और उसकी गर्दन पे अपने दाँत गाढ दिए......एक दर्द भरी घुटि आवाज़ सुनाई दी....उसके बाद जब टाय्लेट से बाहर निकलके उस औरत ने खुद को शीश मे देखा तो वो मुस्कुरा उठी...शीबा बाजी ने एक बार फिर इंसान का शिकार कर दिया था जिसके खून को पीते हुए वो सिसकिया भर रही थी इस अज़ीब सी प्यास के बुझते ही उसने अपने चेहरे पे लगे खून को धोया और फिर बौगी में आई..."चलो शीबा स्टेशन गया है ओके फिर ये लो".........मैने उस लड़की को एक बुक दी

"ये मेरी कहानी बुक के तौर पे जब चाहो तब पढ़ लेना और हाँ इस किताब के अंदर उन दोनो की तस्वीर है".........

"ऐसा क्या? थॅंक यू सो मच"......उस लड़की ने चहेकते हुए कहा....

"सम्टाइम्ज़ स्ट्रेंज ईज़ नोट फिक्षन किसी बहुत ही समझदार शक्स ने कहा सम्टाइम्ज़ फॅक्ट्स आर स्ट्रेंजर दॅन फिक्षन "......मैं मुस्कुराया और शीबा का हाथ पकड़े स्टेशन से बाहर चला गया....लड़की को सवर नही था और उसने फ़ौरन उस लिफाफे से किताब को बाहर निकाला और उसके पन्ने पलटे एकदम से वो तस्वीर उसके हाथो में आ गयी और उसके चेहरे की मानो जैसे हवाइयाँ उड़ गयी थी....वही चेहरा वही रूप....शीबा बाजी और उसके भाई आसिफ़ की जिसे वो कुछ देर पहले मिली थी उसके को-पॅसेंजर्स इसका मतलब ये कहानी झूट नही थी"........

 


वो लड़की खिड़की से बाहर झाँकने लगी पर उसे वो दो साए कही नही दिखे....जब वो बाहर की ओर दौड़ी उसे टाय्लेट के सामने सबकी भीड़ दिखाई दी जब उसने लोगो को हटाया तो अपने चेहरे पे हाथ रखके एकदम काँप उठी ये वही शक्स था जिसकी गर्दन को काट कर किसी ने बेरहेमी से उसका क़तल किया था उसके घाव के निशान सॉफ बता रहे थे किसीने उसकी गर्दन को अपने नुकीले दांतो से काटा है और उसका खून पिया है ये उसने आसिफ़ की दास्तान में भी पढ़ा था सारी सच्चाई एक तस्वीर की तरहा उसके ज़हन में घूमने लगी और तभी काँपते हुए उसके हाथो से वो तस्वीर उस आदमी के फर्श पे गिरे बह रहे खून पे गिर पड़ी और तस्वीर खून में मानो लाल खून से रंग सी गयी

बस उस लड़की के ज़हन में एक ही बात घूम रही थी और वो ख़ौफ़ से कांपें जा रही थी उन दोनो को सोचकर "फॅक्ट्स आर सम्टाइम्ज़ स्ट्रेंजर दॅन फिक्षन".

दा एंड....

 
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