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सुरक्षीत कौन ?
लेखक-गुड्डू सिंह कुंदन
सबसे पवित्र और खूबसूरत सभ्यता भारतीय सभ्यता को माना जाता है। भारतीय सभ्यता में महिलों को देवी का दर्जा प्राप्त है...... मगर आज हमारे समाज या फिर यू कहिये हमारे चारों और कई साड़ी ऐसी - कुप्रथा है, जो इंसानियत या फिर मानव जाति को ताड़-ताड़ कर रही है। जातिप्रथा, बाल विवाह, दहेज प्रथा इत्यादि |
क्या आज हमारे देश मे महिलाये वाकई में सुरक्षित है| आज हम ऐसी ही कूप्रथा के बार में बात करेंगे, जो हमारे समाज में दीमक की तरह फैला है। किसी बच्चे में अच्छे परवरिश - संस्कार का श्रेय उस बच्चे की जननी (माँ )को दिया जाता है | वाकई में खूबसूरत तौफा है- माओ के लिए...... फिर भी आज हमारे समाज में महिलाओं की अवरू को ताड़ - ताड़ कर रही है |
करीब चार साल पहले मैं एक लोकल ट्रैन से सफर कर रहा था | पुरे डब्बे में गिने - चुने दस ग्यारह लोग ही थे....उस डब्बे में एक लड़की थी ,अकेली जो शायद कॉलेज या कोचीन (टियूशन ) क्लास से घर जा रही थी | उस लड़की के हाथ में कोई नॉवेल था...... जो वह खिड़की के पास बैठ कर पढ़ रही थी | तभी ट्रैन एक छोटी सी स्टेशन पर रुकी |
चार लड़के उस लड़की को अकेली देखर उस डब्बे में आ गए | उन चारो लड़को की उम्र तकरीबन बिस-बाईस के आस पास रही होगी | उन चारों लड़को के पास एक जैसा ही बैग था....... जो देखने से कोई कंपनी का लग रहा था | उन चारो ने उस लड़की की बगल में बैठ गया, और गली तथा अभद्र शब्दो से एक दूसरे के साथ मजाक मस्ती करने लगा | धीरे-धीरे उन लड़को की हिम्मत इतनी बढ़ गई..... उसने खुलेआम इतने लोगो के सामने उस लड़की को छेड़ने लगा | उस डब्बे में छाई शांति एक भयानक और आपत्तिजनक रूप में बदल गई | उस लड़की ने जब उस लड़को का बिरोध करने लगी...... तो पीछे वाले सीट से एक नवयुवक उस लड़की सहायता के लिए आगे आया | उस भले नवयुवक ने उस लड़को को समझाने का लाख प्रयत्न किया...... मगर उन लड़को ने उस नवयुवक पर थप्पड़ और गालियाँ बरसाने लगे....... तथा उस लड़की के साथ अनैतिक संबंध जोड़ने लगा | उस लड़की की आँखो में डर और घबराहट साफ दिखाई दे रहा था | उन चारों लड़के ने उस नवयुवक को इतनी बेरहमी से मारा की उस बेचारे का पूरा शरीर खून से सन गया | उसके बाद उनमे से एक लड़का ट्रैन का चैन (चैन पुलिंग ) खीचकर किसी सुनसान जगह पर रोका और भाग गये | डर का ऐसा भयानक मंजर मैंने शायद पहले कभी नहीं देखा था |
आज के दौड़ में महिलाओं को रात के समय अकेले घर से बहार निकला किसी चुनौती से कम नहीं है|
नई दिल्ली 16 दिसम्बर 2012 यह एक ऐसा मनहूष दिन था | जिसे याद आते ही अंतर - आत्मा में एक अजीब सी दर्द और पीड़ा का अनुभव होता है | आखिर क्या दोष था..... उस मासूम का जो उसे इतनी भयानक दर्दनाक पीड़ा से गुजरना पड़ा | हालाकि उन पापियों को उसकी सजा मिल गई | पर क्या सब सामान्य हो गया | बिलकुल भी नहीं ........
ट्युसन , कॉलेज , ऑफिस से निकलते ही हर गली - चौराहे पर इतने आवारा किस्म के लड़के होते है........ जो लड़कियों को राह चलना मुश्किल कर देता है | मैं उनसे पूछना चाहता हु? ऐसी घटिया हरकत करने में उन्हें थोड़ी सी भी लज्जा आती | जिस तरह हम अपने माँ - बहन को सम्मान देते है..... वही सम्मान हर नारी को देना चाहिए और उनका यह हक भी है | मैंने अकसर देखा है महिलाओं को थप्पड़ों, लातों, पिटाई, अपमान, धमकियों, यौन शोषण और अनेक अन्य हिंसात्मक घटनाओं का सामना करते हुए |महिलाओं को पीड़ा देने में पुरषों का हाथ जय्दा होता है | छोटी -छोटी बातों पर मानो लड़ने का बहाना ढूढ़ रहा हो | जैसे - दाल में नमक कम है , शराब पिने के लिए मना करने पर | पुरुष बहार किसी ले लड़ाई करले तो उसका गुस्सा भी अपनी पत्नियों पर निकाला है | आखिर क्या है, ये खुद संभल नहीं सकते और दुसरो को दर्द देना कहाँ की बहादुरी है | पुरुष तो यहाँ तक की धमकी देते है....... अगर घर छोड़ कर गई तो तुम्हारे बच्चे को जान से मर दूंगा | कुछ महिलाओं का दूसरा ठिकाना और पैसे की कमी होने कारन पुरुष का अत्याचार को सहन करती है | जय्दा अत्याचार सहने से भी पुरुष का मनोबल बढ़ जाता है | वो यही सोचता है की मेरा क्या बिगड़ लेगी |
जय्दा पीड़ा सहना भी अत्याचार को बढ़ावा देना होता है| आप कानून का सहारा लीजिये | प्रेस - मिडिया के माध्यम से आप अपनी आवाज सरकार तक पंहुचा सकते है | अगर आप आगे बढ़ेंगे तो आपके जैसी -कितनी पीड़ित महिलाओं को भी हिम्मत मिलेगी और वह उस दल - दल से बाहर निकल पायेगी |
समाज और राष्ट्र के निर्माण में जितना पुरुष का योदान है...... उसे कही जय्दा महिला का योगदान होता है | हम इस बात को कभी भुला नहीं सकते...... महिला को देवी के साथ शक्ती का रूप भी माना जाता है | हर पुरुष का जन्म एक नारी (महिला )से ही हुआ है...... फिर उन पर क्रूरता क्यों ?आज के युग में हर छेत्र में लड़कियों ने अपना बेहतर कौशल का प्रद्रशन किया है , चाहे वह एक फिल्म अभिनेत्री हो, या फिर डॉक्टर | आज हमारे देश में लड़कियों की अपकेक्षा लड़कों की संख्या अधिक है | जिसका जिम्मेदार भी हमारा समाज है, आज भी कई लोग भूर्ण - हत्या जैसी घिनौना पापा करते है | आखिर उस मासूम को किस गुनाह की सजा मिलती है जो अभी तक इस दुनिया आकर आँखे भी नहीं खोली हो ......... यही की वो एक लड़की है | लड़कियों की शादी में दहेज़ देना और लेना को इस कुप्रथा का जन्म भी इसी समाज में ही हुआ | आज भी बहुत सारे ऐसे लोग है, जो बेटियों के जन्म होने पर अपनी पत्नी को दोष देते है | जिसका सजा उन्हें जिंदगी भर भुगतना पड़ता है | आज भी कुछ लोग अपनी बेटियों स्कूल नहीं भेजते | घर की चार दीवारी में ऐसे रखा जाता है, जैसे -सजा काट रही है | कई बार मैने सुना भी है बेटियों को घर से बहार भेजना समाज के नियम के विरुद्ध है | अगर ऐसा नियम है , समाज का तो उसमे बदलाव होना अति आवश्कयक है |
किसी लड़के की शादी में आज भी इनती मोटी रकम की माँग की जाती है..... मनो उसकी पढाई के साथ - साथ उसकी हर खर्चे को जोड़ लिया हो | यूथ हमारे समाज , राज्य अथवा देश के भविष्य है | उन्हें इस बात को समझना चाहिए ,दहेज़ प्रथा , बल विवाह ऐसी कोई भी प्रथा को समाज में फैलने नहीं देना चाहिए | हमारे देश में हर वयक्ति को समानता का अधिकार है | उन्हें उनके अधिकारों को खुलकर उपयोग करने दीजिये |नारी शब्द को भारतीय सभ्यता में पूज्य माना जाता है क्योकि नारी ही हमारे घर को सुशोभी करती है
लेखक-गुड्डू सिंह कुंदन