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वह फरार जीप का पीछा करना, चहता था, किन्तु फिलहाल कसमसाने के अलावा कुछ न कर सका, क्योंकि अभी-अभी मरा सेनिक इस वात का गवाह था कि बचे हुए बदमाश दरवाजे के आस-पास पोजीशन लिए हुए हैं-फिर भी वह लॉन की घास पर धीरे-धीरे रेगकर अागे बढ़ रहा था ।
अचानक एक अन्य जीप स्टार्ट हुई ।
किसी ने जीप पर गोली चलाई, हालांकि वह गोली जीप को रोक न सकी । किन्तु नागर को यह बता गई कि अब दरवाजे पर एक भी बदमाश नहीं है, क्योकि सेनिक की गोली के जवाब में उधर से कोई गोली न चली थी और यह समझते ही वह रबर के बवुए की तरह न सिर्फ उछलकर खड़ा हो गया बल्कि जीप की तरफ़ लपकत्ता हुआ चीखा-" वे लोग भाग रहे हैं, पीछा करो ।"
सैनिक और सिपाही उसके पीछे लपके।
दरवाजा अन्दर से बन्द करने के वाद देव ने चटक्नी चढा दी और कंघे पर लटके छोटे से सफारी वेग से शक्तिशाली टार्च निकालकर अॉन की----रोशनी का विशाल दायरा सारे कमरे में चकराने लगा--एक मेज-कुर्सी के अलावा वहां सामान के नाम पर अन्य कुछ न था ।
प्रकाश का दायरा बाल क्लॉक पर जाकर स्थिर हो गया । धड़कते दिल से देव कुछ देर तक पुराने जमाने के उस घंटे को घूरता रहा-फिर कुर्सी उठाकर उसके नीचे रखी----जेब से चाबियां निकली, घंटे की चाबी के अलावा अन्य सब वापस जेब में डाली और चाबी छिद्र मे डालकर राऊंड देने शुरू किये ।।
अच्छी तरह गिनकर उसने सात राउंड दिए। टार्च का प्रकाश कमरे के फर्श पर ठीक बीच में स्थिर कर दिया ।
दो मिनट बाद--हल्की सी गड़गड़ाहट के साथ फर्श का एक हिस्सा हट गया और टॉर्च के प्रकाश में केवल पल-भर के लिए सीढि़यां चमकी क्योंकि देव ने तुरन्त ही टॉर्च आँफ कर ली थी ।
अब इसे सिर्फ यह डर था कि कहीं कुत्ते सीढियां तय करके जहां न पहुच जाएं, अत: तेजी के साथ सफारी बैग से भगतसिंह के विना घुले कपडे़ निकाले ।
मेज से उतरकर खुले रास्ते के नजदीक पहुंचा ।
इन कपडों में कर्नल भगतसिंह के जिस्म की गन्ध मौजूद थी, जिसे इन्सान भले ही न सूंघ सके, किन्तु 'कुत्ता सूंघ सकता धा और शायद कुत्तों को भ्रमित करने के लिए ही कपडों की यह गठरी सीढियों पर लुढका दी।
नीचे से कुत्तों के भौकनें की आवाज उभरी ।
इस आवाज ने न सिर्फ देव के रोंगटे खड़े कर दिए, वल्कि उसके दिलो-दिमाग को आतंकित भी कर दिया-उसने जल्दी से बैग से गोश्त का एक लोथड़ा निकलकर तहखाने में उछाल दिया-कुत्तो के झपटने की आवाज ऊपर तक अाई ।
देव की आंखे चमक गई । एक के बाद एक. . .उसने गोश्त के चार छोथड़े तहखाने में फेंके ।
मुश्ताक ने लिखा था…" कर्नल के कपडों की गंध से कुत्ते भ्रमित हो जाएंगे-जब तुम छोथड़े फेकोंगे तो वे यही समझेंगे कि कर्नल उनकी खुराक देने आया है इसलिए हमने तुम्हारे वहां पहुंचने का टाइम भी लगभग वही रखा है जब कर्नल उन्हें खुराक पहुचाता है, 'पुड़िया' में जहर है इसे गोश्त 'के लोथडों पर लगा दोगे…कोई भी चीज खाने से पहले कुत्ता उसे सूंघता जरूर है, वे भी खूंधेगे और सूंघते ही भांप जाऐंगे कि गोश्त को नहीं खाना है, परन्तु तब तक फाफी देर हो चुकी होगी, क्योंकि जहर इतना तीक्ष्ण है कि इसे सूंघने मात्र से कुत्तों का कल्याण हो जाएगा!" और अब...देव रहा था कि क्या सचमुच कुत्तो का कल्यान हो चुका है?
पुर्वं-निर्धारित योजना के अनुसार पांच मिनट तक वह दम साधे खामोश बैठा रहा, फिर जेब से रिवॉल्वर निकलकर तहखाने के अंधेरे में एक गोली दाग दी ।
सारे तहखाने और प्राइवेट रूम में धमाका गूंज उठा ।
फायर के जवाब में तहखाने के अन्दर से कुत्ते की कोई आवाज़ नहीं अाई और यह समझते ही देव की आंखे चमक उठी कि कुत्तों का कल्याण हो चुका है ।
अब उसने निश्चित भाव से ही टॉर्च अॉन की ।
उसकी रोशनी में सीढियां उतरनी शुरू की-हालाक्रि वह अच्छी तरह जानता था कि कुत्ते मर चुके होंगे-परन्तु फिर भी तीन सीढियां तय करने के वाद उसकी टांगे कापने लगी-----मन में यह बिचार उठा कि कहीं किसी तरह कोई कुत्ता जीवित न बच गया हो? एक ही उसे फाड़ डालने के लिए काफी था ।
पाचर्वी सीढ़ी पर पहुंचकर उसने टॉर्च का प्रकाश नीचे, गैलरी में घुमाना शुरू किया शीघ्र ही प्रकाश के दायरे में चार कुत्तों की लाशें और गोश्त के लोथड़े दूंढ़ लिए-खाने के नाम पर गोश्त को उन्होंने छुआ तक न था मगर फिर भी वे लाश में तब्दील हो चुके थे ।
उनकी लाशें देखकर ही देवं की रीढ़ की हड्डी मैं सिहरंन-सी दौड गई---कद और स्वास्थ्य से वे कुत्ते नहीं, बल्कि भेड्रिए लगते थे-यह सोचकर वह कांप उठा कि यदि वे जीवित होते तो उसकी क्या हालत करते ?
कुछ देर तक उनका निरीक्षण करने और सन्तुष्ट होने के वाद नीचे उतरने लगा…अन्तिम सीढ़ी पर कदम रखते ही सारी गैलरी प्रकाश से भर गई ।
गैलरी की छत पर दूर-दूर तक लगे बल्ब अॉन हो गए---पहले मोड़ तक गैलरी बिल्कुल साफ नजर आ रही थी, कदमों मे पड़ी थी कर्नल के कपडों की गठरी-हाथो से उसने त्वचा की रंगत के दस्ताने उतारकर वहीं डाल दिए ।
टार्च आँफ करके सफारी बैग में रखी ।
इसके बाद तेज कदमों से गैलरी पार करने लगा…पहला मोड़ पार करने के बाद कुछ ही देर वाद ही उसके सामने कृत्रिम दरिया था--दरिया के इस किनारे पर खड़े होकर उसने ध्यान से देखा, एक विशालकाय मगरमच्छ और लम्बा अजगर दरिया में शायद सोए पड़े पे, क्योंकि पानी में कोई हलचल न थी-देव ने बेग से एक कार्क की गेद निकाली। गेद उसने दरिया के ठीक बीच में फेंकीं और उसके पानी में गिरते ही दरिया में जैसे भूचाल अा गया-सोया हुआ अजगर और मगरमच्छ हरकत में अा गए थे । दिल ने दहशत उभरी।
मगर मन में यह विश्वास लिए कि जव तक वह पानी से बाहर है, उसका वे कुछ न बिगाड सकेंगे-उस दिलचस्प उठा-पटक को देखता रहा---कुछ देर बाद अपने बाईं तरफ बढ़ा ।
दीवार में एक छिद्र टूढा ।
जेब से एक चाबी निकलकर उसमें डाली, तीन वार उल्टी चाबी घुमाते ही सारी गैलरी हल्की गड़गड़ाहट की आवाज़ से गूंज उठी --- उसने छत की तरफ देखा, बीचों--बीच दो फुट चौडा करीब डेढ सौ गज लम्बा टुकड़ा बाई तरफ सरक गया ।
दरिया के इस किनारे पर छत से नीचे की तरफ सरकती हुई एक मोटी जंजीर नजर अाई, छत पर एक विशाल बेलन था, बेलन पर जंजीर लिपटी थी और बेलन के घूमने के अनुपात में ही जंजीर नीचे अाती जारही थी।
दो मिनट वाद गड़गड़ाहट बन्द ।