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सुलग उठा सिन्दूर complete

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"हैंड ग्रेनेड के धमाके से मची अफरा-तफरी का लाभ उठाकर फाइल सहित देव तो यहीं से निकल गया ।" कर्नल ने यह सोचकर रिस्क लिया था कि सब लोग दीपा की लाश में उलझे हुए है,अतः अन्दर बाले कमरे तक जाने का ख्याल किसी के दिमाग में नहीं आएगा----"मगर चूंकि धमाका स्वयं दीपा ने किया था इसलिए टाइमिंग मिस कर जाने के कारण यह कोठी से बाहर न निकल सकी---- लोग जाने इससे क्या-क्या सवाल कर रहे थे, उनसे यह बूरी तरह आतंकित थी, इसीलिए ही यहां एकान्त में लाई, और देव की सारी करतूत के बाद कहने लगी कि मैं किसी भी तरह इसे अाप लोगों के चंगुल में फंसने से बनाने की कोई तरकीब करूं-बदले में पाकिस्तानी जासूस से मिलने वाली रकम का एक तिहाई हिस्सा मुझे भी मिलेगा-----यह आॉफर सुनते ही मैं गुस्से से पागल हो गया था ------

जब चीख कर यह कहा कि कर्नल भगतसिंह से इसने इतनी नीचता की कल्पना कैसे कर ली तो बौखलाकर यह भी चीखने लगी-मुझे गालियां देने लगी और मैं खुद को नियंत्रित न रख सका सर-----दो गोलियां भेजे में उतार दी ।"

कर्नल के चुप होने पर वहां सन्नाटा छा गया ।

काफी देर बाद जनरल साहब ने ही पूछा----"'क्या तुमने दीपा से यह सवाल नहीं किया कि यहाँ से निकलने के बाद----देव ,कहां जाएगा?"

"पूछा था, मगर इसे मालूम नहीं था ।" कर्नल ने यह सोचते हुए कहा कि देव की लाश वह वीडियो कैसेट और जब्बार की लाश वाले कमरे से ही बरामद कराएगा----"'मगर भागकर जाएगा कहां सर, जब तक मैं जिन्दा हूं तब तक ऩ वह बच सकता है और न ही एम. एक्स. ट्रिपल फाइव दुश्मन के हाथ लग सकती है ।"

"जब मालूम ही नहीं है कि वह कहां गया है तो क्या किया जा सकता है?"

"हम उसे तलाश करने के लिए धरती-आकाश एक कर देगें ।"

"तो फिर यहाँ खड़े क्यों हो?" जनरल साहब चीख पडे़----"उसे तलाश करने का बंदोबस्त करो, मुझे एम. एक्स. ट्रिपल फाइव चाहिए---अगर वह दुश्मन के हाथ लग गई तो सारा मुल्क तबाह हो जाएगा."

एक बार पुन: यहाँ गहरी खामोशी छा गई ।

कर्नल मन-ही-मन खुश था कि अन्तिम समय में भी बाजी उसने जीत ली है । हर चेहरे पर वह अपने बयान के प्रति विश्वास देख रहा था----अब ज़रूरत केवल मौका लगते ही देव की लाश को किराये के उस मकान में पहुंचा देने की थी।

अचानक वहां गहरे सन्नाटे को भंग करती हुईं उसकी अपनी आवाज गूंजी-----"क्योकि मैं ही मुश्ताक हूं बेवकूफ लड़की ।"

" त-तुम ?" दीपा की आवाज ।

"हां मैं -मगर एक भी लफ्ज़ ऊंची आवाज में निकालने की कोशिश की तो भेजा उड़ाकर रख दूगा, अपने बचाव में मुझें क्या बयान देना है, वह मैं सोच चुका हूं ।"

खामोशी छा गई ।

भगतसिंह सहित सभी जड़वत् खडे़ थे ।

अवाक ।

थोड़े अन्तराल के बाद वहां कर्नल की आवाज पुन: गूंजी-"तेरी इस देशभक्ति ने मेरा काम बढ़ा दिया है, वर्ना इस वक्त तुम 'सीरॉक' होटल में होते और मैं जनरल साहब को बता रहा होता कि मेरे किडनैप का ड्रामा रचकर तुम दोनो... ।"

खामोश ।" हिस्टीरियाई अन्दाज में चिल्लाते हुए कर्नल ने जेब से रिवॉल्वर निकलने के लिए हाथ बड़ाया ही था कि जनरल और चीफ ने एक साथ झपटकर उसे दबोच लिया-उसी पल हाथ मे एक टेप लिए बेड के नीचे से रेंगती हुई अंजली बाहर निकली, कर्नल चीख पड़ा-----"'त…तुम?"

"मैं यहाँ उस वक्त से छुपी हुई हूं जब दीपा ने देव की हत्पा की थी, किन्तु उस सारे ड्रामे को मैं टेप न कर सकी, क्योकि उस वत्त टेप मुझसे दूर, फ्रिज पर रखा था-देव का कत्ल करने के बाद जब दीपा यहाँ से गई तो दरवाजा बाहर से बन्द कर गई, मैं चाहकर भी निकल ना सकी, परन्तु शायद सबसे लाभदायक यही रहा-दीपा के साथ तुम्हारे आने पर मैं इस टेप के साथ पलंग के नीचे घुस गई ।"

"त--तू-*** कुतिया **** है तु।" कर्नल भगतसिंह बिक्षिप्तों के समान चीखा, जबकि अंजली ने गम्भीर स्वर में कहा-----"लद्दाख में मेरे पास दो महीने रहने वाला मेरा भाई था-मेरी शादी से पहले अंगद मरा नहीं था बल्कि एक खून के जुर्म में जेल में था-तुम्हें और तुम्हारे घर वालों को उसे मरा हुआ , इसलिए बताना पड़ा, क्योंकि उससे रिश्ता टूट सकता था-अंगद बीच ही में जेल से फरार होकर लद्दाख पहुच गया---" एक बहन खुद को भाई की मदद करने से न रोक सकी, मगर तुमने यह जाहिर नहीं किया भगत कि तुम्हें मुझ पर ऐसा शक है---वर्ना शायद मैं अंगद के जीवित होने का रहस्य तुम् पर खोल देती-----सारी जिन्दगी कम-से-कस तुम इतनी बड़ी कुंठा से ग्रस्त तो न रहते ।"

कर्नल ने पागलों की तरह अट्टाहास लगाया ।

अगले दिन सुबहा होटल 'सीरॉक' के दो सौ सोलह नम्बर कमरे में कदम रखते ही फ्रेंचकट दाढ़ी वाले पाकिस्तानी जासूस को भी गिरफ्तार कर लिया गया-उसके द्वारा किराये पर लिए गए मकान को सील कर दिया गया था ।



THE END
 
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