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‘अब रहा नही जाता’ बोलके ससुरजी ने मुझे उल्टा कर दिया और ज़मीन पे कुत्ति की तरह बैठा के मेरे पीछे बैठ गये. मुझे डर था कि शायद ससुरजी फिर से मेरी गान्ड मारेंगे पर जब वो अपना लंड मेरी चूत के उपर रगड़ने लगे तो मेरे सारे बदन में हलचल हो गयी. मुझे फिर से एहसास हुआ कि मुझे एक बड़े लौडे की कितनी ज़रूरत हैं. ससुरजी अपना पूरा लंड मेरी चूत पे रगड़ रहे थे और इससे मेरी चूत दो ही मिनिट मे गीली हो गयी और मेरी चूत के पानी से ससुरजी का लंड भी चमकने लगा.
‘अर्रे बहू, तुम तो बहुत गीली हो गयी हो, हहहे लगता हैं हम दोनो को एक ही चीज़ चाहिए और वो हैं तुम्हारी प्यारी चूत में मेरा लॉडा’ ऐसा कह के उन्होने जंगली के जैसे एक बहुत ही ज़ोरदार धक्का लगाया और अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे अचानक लंड अंदर जाने से बहुत दर्द हुआ पर मज़ा भी बहुत आया. ससुरजी जंगली के जैसे मुझे पूरे लंड से ज़ोरदार चुदाई करने लगे, मुझे भी इस मीठे दर्द से बेहद मज़ा आ रहा था.
‘आआहह… बहू आआअहह… मेरी प्यारी बहू’ कहते हुए ससुरजी लगातार मेरी चूत में अपने लंड से धक्के लगा रहे थे. दो ही मिनिट मे मेरा दर्द गायब हो गया. मेरे बदन में अब आग लग गयी थी और बिकलूल बेशरम हो कर रंडी के जैसे मैं ससुरजी के हरेक धक्के का जवाब अपनी गान्ड पीछे धकेल के दे रही थी. मुझे कुत्ति की तरह चोदने में ससुरजी को बहुत ही मज़ा आ रहा था, मुझे चोदते हुए वो दोनो हाथो से मेरी गान्ड मसल रहें थे. मसल्ते वक़्त उनकी उंगलियाँ मेरे गान्ड के छेद पे लग जाती तो मेरे बदन में करेंट फैल जाता था.
मैं अब झरने के बहुत करीब आ गयी थी, ससुरजी का भी ये ही हाल था. डॉगी स्टाइल में चोद चोद के ससुरजी के घुटनो मे दर्द हो गया था और उन्हने पोज़िशन बदल डाली. वो अपने साइड पे हो कर ज़मीन पे लेट गये और मुझे भी साइड पे कर डाला, और मुझे तेज़ी से चोदने लगे, में अब झरने के बहुत ही करीब थी, साइड पे होने के कारण मुझे कमरे की खिड़की अब दिखाई दे रही थी. खिड़की पे नज़र पड़ते ही मेरी आँखें फैल गयी. खिड़की के बाहर मेरा सौतेला बेटा सुभाष खड़ा था और अंदर झाक रहा था. उसको सॉफ दिखाई दे रहा था अपने दादाजी का मोटा लॉडा अपनी प्यारी मा की चूत में अंदर बाहर हो रहा था.
सुभाष का हाथ मुझे हिलता दिखाई दे रहा था. मुझे पता चल गया कि वो ज़रूर मेरी चुदाई देख अपना लंड हिला रहा होगा. मेरा अपना प्यारा बेटा मेरी चुदाई देख रहा था इसी मुझे बेहद दुख पहुचा लेकिन मेरा बदन अब बिल्कुल बेकाबू हो गया था और मेरा झरना रुका नही, ससुरजी भी अब झरने लगे थे. उनके मोटे लंड से वीर्य बहना शुरू हो गया. अपनी चूत में उनके गरम वीर्य का एहसास पा के मेरा झरना और तेज़ हो गया. मैने अपनी आँखें बंद करली और झरने का मज़ा लेने लगी. ससुरजी भी पागल की तरह झार रहे थे, ना जाने कितनो दिनो से अपने बड़े बॉल्स में पानी जमा कर के रखा था उन्होने और अब आख़िर वो सारा पानी बाहर निकल रहा था. ससुरजी के लंड से इतना वीर्य निकला कि वो मेरी चूत से बह के बाहर निकल रहा था. हमारा झरना जारी रहा. बाहर सुभाष को भी मज़ा आ रहा था. दिमाग़ से वो बच्चा था पर उसके शरीर की भूक तो किसी जवान मर्द से कम नही थी. आख़िर कुछ मिनिट बाद मेरा और ससुरजी का झरना बंद हुआ.
ससुरजी ने अपना लंड मेरी चूत के अंदर ही रखा ‘लगता हैं तुम्हे भी बहुत मज़ा आया हहहे’
मुझे अब बहुत बुरा लग रहा था. सुभाष बाहर सब कुछ देख रहा था. ससुरजी ने अपना लंड मेरे अंदर से निकाल दिया और खड़े हो गये. मैं बैठ गयी. ससुरजी का मोटा लंड मेरे चेहरे के पास था, वो आधा बैठा हुआ था और मेरी चूत के पानी और उनके वीर्य से चमक रहा था. मुझे लगा कि शायद ससुरजी अब मुझे जाने देंगे.
‘अरे ये देखो बहू मेरा लंड कितना गंदा हो गया हैं, प्लीज़ थोड़ा इसको सॉफ कर दोगि’ ससुरजी ने कहा. मैं समझ गयी कि उनके गंदे दिमाग़ में क्या हैं. उनका लंड अब सिर्फ़ आधा खड़ा था, मुझे यकीन नही हो रहा था कि एक बार झरने के बावजूद उनको तुरंत फिर से कुछ करना था. ससुरजी ने एक हाथ से मेरे बाल कस के पकड़ लिए जिससे मैं अपना सर हिला नही पा रही थी. दूसरे हाथ से उन्होने मेरे मूह पे बँधे कपड़े को निकाल दिया. कपड़ा निकलते ही मैने उनको सुभाष के बारे मे कहना चाहा.
‘पिताजी ऐसा मत करो बाहर सब…म्म्म्ममम’ मेरी बात निकलने से पहले ही ससुरजी ने अपना गीला लॉडा मेरे मूह में ठूंस दिया. उनका बैठा हुआ लंड भी बड़ी मुश्किल से मेरे मूह में समा रहा था. दोनो हाथो से मेरा सर पकड़ ससुरजी अपना पूरा लंड मेरे मूह में डाल रहे थे. ससुरजी नीचे देख रहे थे और मेरे मूह में अपना लंड घुसा हुआ देख मज़ा ले रहें थे.
‘आआआहह…. बहू रानी आआआअहह… तुम कितनी सुंदर हो’
नज़ारा देख उनके लंड में हलचल होने लगी. मुझे उनका मोटा लंड मेरे मूह के अंदर और मोटा होता हुआ महसूस होने लगा. में ‘म्म्म्मममममम… म्म्म्ममममममम..’ करके उनका रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन बँधे हाथों के कारण बिल्कुल लाचार थी. मैने ज़िंदगी में एक ही बार इतना बड़ा लंड अपने मूह में लिया था, और वो था जब डिज़िल्वा ने बेरहमी से मेरा मूह चोदा था. उस बार मूह की चुदाई के बाद मेरा जो हाल हुआ था वो मुझे अच्छी तरह से याद था. ससुरजी ने अब पागल के जैसे मेरे मूह की चुदाई शुरू कर दी. मेरा मूह इतना फैला हुआ था कि मुझे पूरे जबड़े में बेहद दर्द हो रहा था. ससुरजी अपना पूरा लंड बाहर निकालते और फिर ज़ोर से उसको पूरा का पूरा अंदर घुसेड देते.
‘अर्रे बहू, तुम तो बहुत गीली हो गयी हो, हहहे लगता हैं हम दोनो को एक ही चीज़ चाहिए और वो हैं तुम्हारी प्यारी चूत में मेरा लॉडा’ ऐसा कह के उन्होने जंगली के जैसे एक बहुत ही ज़ोरदार धक्का लगाया और अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया. मुझे अचानक लंड अंदर जाने से बहुत दर्द हुआ पर मज़ा भी बहुत आया. ससुरजी जंगली के जैसे मुझे पूरे लंड से ज़ोरदार चुदाई करने लगे, मुझे भी इस मीठे दर्द से बेहद मज़ा आ रहा था.
‘आआहह… बहू आआअहह… मेरी प्यारी बहू’ कहते हुए ससुरजी लगातार मेरी चूत में अपने लंड से धक्के लगा रहे थे. दो ही मिनिट मे मेरा दर्द गायब हो गया. मेरे बदन में अब आग लग गयी थी और बिकलूल बेशरम हो कर रंडी के जैसे मैं ससुरजी के हरेक धक्के का जवाब अपनी गान्ड पीछे धकेल के दे रही थी. मुझे कुत्ति की तरह चोदने में ससुरजी को बहुत ही मज़ा आ रहा था, मुझे चोदते हुए वो दोनो हाथो से मेरी गान्ड मसल रहें थे. मसल्ते वक़्त उनकी उंगलियाँ मेरे गान्ड के छेद पे लग जाती तो मेरे बदन में करेंट फैल जाता था.
मैं अब झरने के बहुत करीब आ गयी थी, ससुरजी का भी ये ही हाल था. डॉगी स्टाइल में चोद चोद के ससुरजी के घुटनो मे दर्द हो गया था और उन्हने पोज़िशन बदल डाली. वो अपने साइड पे हो कर ज़मीन पे लेट गये और मुझे भी साइड पे कर डाला, और मुझे तेज़ी से चोदने लगे, में अब झरने के बहुत ही करीब थी, साइड पे होने के कारण मुझे कमरे की खिड़की अब दिखाई दे रही थी. खिड़की पे नज़र पड़ते ही मेरी आँखें फैल गयी. खिड़की के बाहर मेरा सौतेला बेटा सुभाष खड़ा था और अंदर झाक रहा था. उसको सॉफ दिखाई दे रहा था अपने दादाजी का मोटा लॉडा अपनी प्यारी मा की चूत में अंदर बाहर हो रहा था.
सुभाष का हाथ मुझे हिलता दिखाई दे रहा था. मुझे पता चल गया कि वो ज़रूर मेरी चुदाई देख अपना लंड हिला रहा होगा. मेरा अपना प्यारा बेटा मेरी चुदाई देख रहा था इसी मुझे बेहद दुख पहुचा लेकिन मेरा बदन अब बिल्कुल बेकाबू हो गया था और मेरा झरना रुका नही, ससुरजी भी अब झरने लगे थे. उनके मोटे लंड से वीर्य बहना शुरू हो गया. अपनी चूत में उनके गरम वीर्य का एहसास पा के मेरा झरना और तेज़ हो गया. मैने अपनी आँखें बंद करली और झरने का मज़ा लेने लगी. ससुरजी भी पागल की तरह झार रहे थे, ना जाने कितनो दिनो से अपने बड़े बॉल्स में पानी जमा कर के रखा था उन्होने और अब आख़िर वो सारा पानी बाहर निकल रहा था. ससुरजी के लंड से इतना वीर्य निकला कि वो मेरी चूत से बह के बाहर निकल रहा था. हमारा झरना जारी रहा. बाहर सुभाष को भी मज़ा आ रहा था. दिमाग़ से वो बच्चा था पर उसके शरीर की भूक तो किसी जवान मर्द से कम नही थी. आख़िर कुछ मिनिट बाद मेरा और ससुरजी का झरना बंद हुआ.
ससुरजी ने अपना लंड मेरी चूत के अंदर ही रखा ‘लगता हैं तुम्हे भी बहुत मज़ा आया हहहे’
मुझे अब बहुत बुरा लग रहा था. सुभाष बाहर सब कुछ देख रहा था. ससुरजी ने अपना लंड मेरे अंदर से निकाल दिया और खड़े हो गये. मैं बैठ गयी. ससुरजी का मोटा लंड मेरे चेहरे के पास था, वो आधा बैठा हुआ था और मेरी चूत के पानी और उनके वीर्य से चमक रहा था. मुझे लगा कि शायद ससुरजी अब मुझे जाने देंगे.
‘अरे ये देखो बहू मेरा लंड कितना गंदा हो गया हैं, प्लीज़ थोड़ा इसको सॉफ कर दोगि’ ससुरजी ने कहा. मैं समझ गयी कि उनके गंदे दिमाग़ में क्या हैं. उनका लंड अब सिर्फ़ आधा खड़ा था, मुझे यकीन नही हो रहा था कि एक बार झरने के बावजूद उनको तुरंत फिर से कुछ करना था. ससुरजी ने एक हाथ से मेरे बाल कस के पकड़ लिए जिससे मैं अपना सर हिला नही पा रही थी. दूसरे हाथ से उन्होने मेरे मूह पे बँधे कपड़े को निकाल दिया. कपड़ा निकलते ही मैने उनको सुभाष के बारे मे कहना चाहा.
‘पिताजी ऐसा मत करो बाहर सब…म्म्म्ममम’ मेरी बात निकलने से पहले ही ससुरजी ने अपना गीला लॉडा मेरे मूह में ठूंस दिया. उनका बैठा हुआ लंड भी बड़ी मुश्किल से मेरे मूह में समा रहा था. दोनो हाथो से मेरा सर पकड़ ससुरजी अपना पूरा लंड मेरे मूह में डाल रहे थे. ससुरजी नीचे देख रहे थे और मेरे मूह में अपना लंड घुसा हुआ देख मज़ा ले रहें थे.
‘आआआहह…. बहू रानी आआआअहह… तुम कितनी सुंदर हो’
नज़ारा देख उनके लंड में हलचल होने लगी. मुझे उनका मोटा लंड मेरे मूह के अंदर और मोटा होता हुआ महसूस होने लगा. में ‘म्म्म्मममममम… म्म्म्ममममममम..’ करके उनका रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन बँधे हाथों के कारण बिल्कुल लाचार थी. मैने ज़िंदगी में एक ही बार इतना बड़ा लंड अपने मूह में लिया था, और वो था जब डिज़िल्वा ने बेरहमी से मेरा मूह चोदा था. उस बार मूह की चुदाई के बाद मेरा जो हाल हुआ था वो मुझे अच्छी तरह से याद था. ससुरजी ने अब पागल के जैसे मेरे मूह की चुदाई शुरू कर दी. मेरा मूह इतना फैला हुआ था कि मुझे पूरे जबड़े में बेहद दर्द हो रहा था. ससुरजी अपना पूरा लंड बाहर निकालते और फिर ज़ोर से उसको पूरा का पूरा अंदर घुसेड देते.