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Guest
मैं राज एक बार फिर अपने दोस्तों के लिए एक दिलचस्प सच्चा किस्सा ले कर आया हूँ। हर बार की तरह इस बार भी मैंने इस किस्से को थोड़ा मसालेदार बनाने के लिए कुछ बाते इस में जोड़ दी है। पर इससे मूल कहानी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तो अब कहानी शुरू करता हूँ :
आप सब जानते है कि लण्ड बना ही चूत में घुसने के लिए है और चूत बनी ही लण्ड की पार्किग के लिए है। अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो चूत या वो लण्ड किसका है। लण्ड को जब चूत चाहिए तो वो यह नहीं देखता कि वो चूत किसकी है या चूत को जब लण्ड चाहिए तो वो यह नहीं देखती कि लण्ड किस का है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ।
मैं जब से शहर आया था चूत मुझे विरासत में मिली थी। पर आदमी कि यह फितरत है कि वो एक चीज से जल्दी ही ऊब जाता है। सो मैं भी उब गया था बुआ की चूत चोदते-चोदते।
बुआ हो तो ऐसी
वैसे भी अब बुआ गर्भवती हो गई थी, छठा महीना चल रहा था और डॉक्टर ने अब चुदाई से मना कर दिया था। मुझे भी चूत के दर्शन हुए दो हफ्ते से ज्यादा हो चुके थे।
बुआ बोली- मेरी चूत तो अब तुझे पाँच छह महीने से पहले नहीं मिलने वाली। तू एक काम कर- कोई सुन्दर सी लड़की देख ले अपने लिए। मेरी कोई सहायता अगर चाहिए तो मुझे बताना, मैं मदद कर दूंगी।
बुआ के ऐसा कहने से मेरी झिझक कम हुई और मैं बुआ से बोला- बुआ तुम्हारी ननद की बेटी है न सोनिया ! मुझे वो बहुत पसंद है। अगर तुम उसकी मुझे दिलवा दो तो सारी उम्र तुम्हारा अहसान मानूँगा।
बुआ हँस पड़ी और बोली- मुझे तो पहले से ही पता है कि तू सोनिया पर लट्टू है। कोई बात नहीं ! मैं सोनिया को बहाने से यहाँ बुला लेती हूँ फिर मौका देख कर तू भी चौका लगा देना।
बुआ ने अगले ही दिन सोनिया की मम्मी को फोन कर दिया कि अब मुझ से काम नहीं हो पाता है, तो अगर हो सके तो सोनिया को मेरे पास भेज दो, वैसे भी सोनिया आजकल खाली है।
मैं यहाँ बता दूँ कि सोनिया ने बारहवीं पास कर ली थी और घर की हालत ठीक न होने के कारण उसकी पढ़ाई बंद करवा दी थी। अब वो घर पर रह कर ही पढ़ाई कर रही थी। उम्र में मुझ से लगभग एक साल बड़ी थी।
सोनिया…… हाय क्या बयान करूँ सोनिया के बारे में। एकदम हूर ! खूबसूरत गोरा चेहरा, छाती पर दो बड़े बड़े संतरे जैसी दूधिया रंग की चूचियाँ, एकदम मस्त पीछे को निकली हुई गांड, पतली कमर…… हाय जो देखे बस देखता ही रह जाये। मैंने सोनिया को बस एक दो बार ही देखा था पर जबसे देखा था मैं तो दीवाना हो गया था सोनिया का।
जब बुआ ने फोन किया तो सोनिया की मम्मी ने हाँ कर दी और बोली- कोई छोड़ कर जाने वाला तो नहीं है, तुम एक काम करो, सोनिया के मामा को भेज दो ले जाने के लिए।
बुआ ने कहा- ये तो नहीं आ पायेंगे, मैं अपने भतीजे राज को भेज देती हूँ, वो कल आकर ले जायेगा सोनिया को।
सोनिया की मम्मी ने हाँ कर दी। मेरे तो पाँव जमींन पर नहीं पड़ रहे थे। मैं खुशी से झूमता हुआ कल का इन्तजार करने लगा।
अगले दिन मैं सुबह सुबह तैयार हो गया सोनिया को लेने जाने के लिए। बुआ ने एक बार फिर फोन करके सोनिया को तैयार होने के लिए कह दिया। मैं भी चल पड़ा सोनिया को लेने के लिए। सोनिया के शहर का रास्ता करीब दो घंटे का था।
मैं करीब बारह बजे सोनिया के घर पहुँच गया। पर मेरी जान सोनिया तो थी ही नहीं घर पर। उसकी मम्मी किरण ने दरवाजा खोला। मैं सोनिया की मम्मी से पहले कभी नहीं मिला था। जब उसे देखा तो देखता ही रह गया।
वाकई वो सोनिया की मम्मी थी ! क्या खूबसूरत औरत थी वो ! मैं तो बस देखता ही रह गया, मस्त पतली कमर जिस पर दो बड़े बड़े खरबूजे जैसी शानदार चूचियाँ, मोटी गांड। जब किरण यानि सोनिया की मम्मी ने दरवाजा खोला तो उसने दुपट्टा नहीं ले रखा था। बड़े गले वाले कमीज में उसके खरबूजे जैसी चूचियाँ जैसे बाहर निकलने को तड़प रही थी। चूचियों के बीच की घाटी देखकर ऐसा लगता था कि जैसे सारा संसार इस घाटी में समा सकता है। मैं पागलों की तरह किरण की तरफ देखता रहा।
वो बोली- अरे भाई, किस से मिलना है?
जब मैं कुछ देर कुछ नहीं बोला तो उसने मेरा कंधा पकड़ कर हिलाया तो मैं जैसे सपने से जगा, वो बोली- अरे कहाँ गुम हो? मैंने पूछा कि किस से मिलना है?
मैं बोला- मैं सोनिया को लेने के लिया आया हूँ ! मुझे बबिता बुआ ने भेजा है !
तो वो बोली- क्या तुम राज हो?
मैंने हाँ में सर हिलाया। वो मुझे घर के अंदर ले कर गई। दिल तो उस समय ऐसा कर रहा था कि छोड़ सोनिया को बस अभी सोनिया की माँ किरण को पकड़ कर चोद दूँ। क्या मस्त माल थी यार यह औरत।
मुझे बैठा कर वो अंदर चली गई। कुछ देर बाद वो शरबत का गिलास लेकर फिर से मेरे सामने थी। उसने दुपट्टा अब भी नहीं लिया था। अधनंगी चूचियों का नजारा अब भी मेरे सामने था। जब वो झुक कर मुझे शरबत देने लगी तो मेरी तो साँसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई।
क्या मस्त चूचियाँ थी यार
आप सब जानते है कि लण्ड बना ही चूत में घुसने के लिए है और चूत बनी ही लण्ड की पार्किग के लिए है। अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो चूत या वो लण्ड किसका है। लण्ड को जब चूत चाहिए तो वो यह नहीं देखता कि वो चूत किसकी है या चूत को जब लण्ड चाहिए तो वो यह नहीं देखती कि लण्ड किस का है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ।
मैं जब से शहर आया था चूत मुझे विरासत में मिली थी। पर आदमी कि यह फितरत है कि वो एक चीज से जल्दी ही ऊब जाता है। सो मैं भी उब गया था बुआ की चूत चोदते-चोदते।
बुआ हो तो ऐसी
वैसे भी अब बुआ गर्भवती हो गई थी, छठा महीना चल रहा था और डॉक्टर ने अब चुदाई से मना कर दिया था। मुझे भी चूत के दर्शन हुए दो हफ्ते से ज्यादा हो चुके थे।
बुआ बोली- मेरी चूत तो अब तुझे पाँच छह महीने से पहले नहीं मिलने वाली। तू एक काम कर- कोई सुन्दर सी लड़की देख ले अपने लिए। मेरी कोई सहायता अगर चाहिए तो मुझे बताना, मैं मदद कर दूंगी।
बुआ के ऐसा कहने से मेरी झिझक कम हुई और मैं बुआ से बोला- बुआ तुम्हारी ननद की बेटी है न सोनिया ! मुझे वो बहुत पसंद है। अगर तुम उसकी मुझे दिलवा दो तो सारी उम्र तुम्हारा अहसान मानूँगा।
बुआ हँस पड़ी और बोली- मुझे तो पहले से ही पता है कि तू सोनिया पर लट्टू है। कोई बात नहीं ! मैं सोनिया को बहाने से यहाँ बुला लेती हूँ फिर मौका देख कर तू भी चौका लगा देना।
बुआ ने अगले ही दिन सोनिया की मम्मी को फोन कर दिया कि अब मुझ से काम नहीं हो पाता है, तो अगर हो सके तो सोनिया को मेरे पास भेज दो, वैसे भी सोनिया आजकल खाली है।
मैं यहाँ बता दूँ कि सोनिया ने बारहवीं पास कर ली थी और घर की हालत ठीक न होने के कारण उसकी पढ़ाई बंद करवा दी थी। अब वो घर पर रह कर ही पढ़ाई कर रही थी। उम्र में मुझ से लगभग एक साल बड़ी थी।
सोनिया…… हाय क्या बयान करूँ सोनिया के बारे में। एकदम हूर ! खूबसूरत गोरा चेहरा, छाती पर दो बड़े बड़े संतरे जैसी दूधिया रंग की चूचियाँ, एकदम मस्त पीछे को निकली हुई गांड, पतली कमर…… हाय जो देखे बस देखता ही रह जाये। मैंने सोनिया को बस एक दो बार ही देखा था पर जबसे देखा था मैं तो दीवाना हो गया था सोनिया का।
जब बुआ ने फोन किया तो सोनिया की मम्मी ने हाँ कर दी और बोली- कोई छोड़ कर जाने वाला तो नहीं है, तुम एक काम करो, सोनिया के मामा को भेज दो ले जाने के लिए।
बुआ ने कहा- ये तो नहीं आ पायेंगे, मैं अपने भतीजे राज को भेज देती हूँ, वो कल आकर ले जायेगा सोनिया को।
सोनिया की मम्मी ने हाँ कर दी। मेरे तो पाँव जमींन पर नहीं पड़ रहे थे। मैं खुशी से झूमता हुआ कल का इन्तजार करने लगा।
अगले दिन मैं सुबह सुबह तैयार हो गया सोनिया को लेने जाने के लिए। बुआ ने एक बार फिर फोन करके सोनिया को तैयार होने के लिए कह दिया। मैं भी चल पड़ा सोनिया को लेने के लिए। सोनिया के शहर का रास्ता करीब दो घंटे का था।
मैं करीब बारह बजे सोनिया के घर पहुँच गया। पर मेरी जान सोनिया तो थी ही नहीं घर पर। उसकी मम्मी किरण ने दरवाजा खोला। मैं सोनिया की मम्मी से पहले कभी नहीं मिला था। जब उसे देखा तो देखता ही रह गया।
वाकई वो सोनिया की मम्मी थी ! क्या खूबसूरत औरत थी वो ! मैं तो बस देखता ही रह गया, मस्त पतली कमर जिस पर दो बड़े बड़े खरबूजे जैसी शानदार चूचियाँ, मोटी गांड। जब किरण यानि सोनिया की मम्मी ने दरवाजा खोला तो उसने दुपट्टा नहीं ले रखा था। बड़े गले वाले कमीज में उसके खरबूजे जैसी चूचियाँ जैसे बाहर निकलने को तड़प रही थी। चूचियों के बीच की घाटी देखकर ऐसा लगता था कि जैसे सारा संसार इस घाटी में समा सकता है। मैं पागलों की तरह किरण की तरफ देखता रहा।
वो बोली- अरे भाई, किस से मिलना है?
जब मैं कुछ देर कुछ नहीं बोला तो उसने मेरा कंधा पकड़ कर हिलाया तो मैं जैसे सपने से जगा, वो बोली- अरे कहाँ गुम हो? मैंने पूछा कि किस से मिलना है?
मैं बोला- मैं सोनिया को लेने के लिया आया हूँ ! मुझे बबिता बुआ ने भेजा है !
तो वो बोली- क्या तुम राज हो?
मैंने हाँ में सर हिलाया। वो मुझे घर के अंदर ले कर गई। दिल तो उस समय ऐसा कर रहा था कि छोड़ सोनिया को बस अभी सोनिया की माँ किरण को पकड़ कर चोद दूँ। क्या मस्त माल थी यार यह औरत।
मुझे बैठा कर वो अंदर चली गई। कुछ देर बाद वो शरबत का गिलास लेकर फिर से मेरे सामने थी। उसने दुपट्टा अब भी नहीं लिया था। अधनंगी चूचियों का नजारा अब भी मेरे सामने था। जब वो झुक कर मुझे शरबत देने लगी तो मेरी तो साँसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई।
क्या मस्त चूचियाँ थी यार