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हँसी तो फँसी

शादी के एक महीने तक तो शिखा मेरे साथ ठीक ठाक सलूक कर रही थी और हमारी सेक्स लाइफ भी चल ही रही थी। शुरू से ही मुझे ऐसा लग रहा था की शिखा का किसी और के साथ कुछ अफेयर था। शादी के कुछ दिनों के बाद ही उसने अपने रंग दिखाने शुरू किये। वह मुझसे नफरत करने लगी थी, क्यों की उसका कोई बॉय फ्रेंड के साथ चक्कर था। मैंने उस के लिए काफी बलिदान दिया और काफी समय तक उसकी जली कटी सुनता रहा। वह बेतहाशा खर्च करती थी और पिता से पैसे मांगती रहती थी जो मुझे चुभता था। वह ना मेरी ना मेरे दोस्तों की, ना रिश्ते दारों की इज्जत करती थी।

वह सिर्फ पैसों को ही जानती है। मुझे नहीं चाहिए ऐसा जीवन साथी। मैं अकेला ही ठीक था। अब अचानक ही वह छोड़ कर चली गयी और ऊपर से एक के बाद एक लीगल नोटिस भेजनी शुरू कर दी। तुम ही बताओ मैं क्या करूँ? अब मैंने यह तय किया है की मैं शिखा को भूल जाऊं। पर क्या करूँ मैं उसे याद करना नहीं चाहता पर उसने जो मुझ पर घाव किये हैं उस कारण उसे भूल भी नहीं सकता। क्या तुम मुझे शिखा को भुलाने और नयी जिंदगी देने में मेरी मदद करोगी?"

दीपा कुछ सोच कर पूछा, "क्या उसे आपसे कुछ पैसे चाहिए?"

बॉस ने कहा, "वह एक घमंडी औरत है। उसने नोटिस में भी लिखा है की उसे कोई निर्वाह धन राशि नहीं चाहिए।"

बॉस की बात सुनकर दीपा सोच में पड़ गयी। दीपा ने बॉस का टेबल पर रखा हुआ हाथ थाम कर कहा, "सर, मेरा मतलब है सोमजी, मुझे नहीं पता की शिखाजी का आपके जीवन में क्या स्थान था अथवा है। पर ऐसी औरत को भूल जाने में ही भलाई है। अगर उसे कोई धन राशि नहीं चाहिए तो बेहतर है की शायद जो कुछ भी हुआ वह आप के लिए अच्छा ही हुआ, ऐसा मैं मानती हूँ। इसे आप एक घाव समझ कर भूल जाएँ। यह घाव धीरे धीरे भर जाएगा और मैं उस घाव को भरने में आपकी पूरी मदद करुँगी। आप चिंता मत करिये। हम आपके साथ हैं। अगर आप वास्तव में मेरी मदद चाहते हैं तो सबसे पहले तो ऑफिस जाना शुरू कीजिये और ऑफिस के बाद हर शाम आप यहां रोज आइये। हम साथ में खाएंगे और ऑफिस काम के बारे में या और कुछ गपशप मारेंगे उसके बाद ही आप घर जाइये। अब आप शांत हो जाइये।"

मेरी बीबी ने बातों बातों में बॉस को कह दिया की बॉस को अब रोज ऑफिस जाना होगा। उसके बाद ही वह शाम को हमारे घर डिनर के लिए आएं।

फिर दीपा कुछ रुक कर अपने आप से ही बोलने लगी, "साला यह 'आप' मुंह से निकल ही जाता है। सोमजी मुझे आप बोलने के लिए माफ़ करना पर मैं आपकी इतनी रेस्पेक्ट करती हूँ की तुम बोलना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है।"

बॉस ने कुछ पीछे हट कर कहा, "अगर तुम मुझे रेस्पेक्ट करती हो तो दीपा फिर मेरे और तुम्हारे बिच में रेस्पेक्ट की एक दिवार होगी। रेस्पेक्ट उनको करते हैं जिनको हम अंतरंग और उत्कट प्यार नहीं करते। जब अंतरंग और उत्कट प्यार होता है तो रेस्पेक्ट उसमें अन्तर्निहित होता है। उसे दिखाने की जरुरत नहीं पड़ती। हम सम्मान किसको करते हैं? शिक्षक को, हमारे प्रधान मंत्री को या हमारे पिता को। पर हम प्यार किसे करते हैं? हमारी प्रेमिका या प्रेमी को या बीबी या पति को या बच्चे को। जिसे प्यार करते हैं उसे सम्मान देने की आवश्यकता ही नहीं है। सम्मान बाहरी है। प्यार अंदरूनी है। सम्मान हो उससे प्यार होना जरुरी नहीं है, पर प्यार हो वहाँ सम्मान होता ही है।"

दीपा ने अपने दोनों हाथ अपने गालों पर रख दिए और हैरानी से बोली, "बापरे! इतना ज्ञान! आपतो, मेरा मतलब है तुम तो बड़े ग्यानी निकले सोमजी। फिर तो मैं कहती हूँ की मैं तुम्हें सम्मान भरा प्यार करती हूँ।"

मेरी बीबी दीपा की बात सुन कर बॉस की आँखों में फिर वह चमक की झांकी मुझे दिखाई पड़ी। दीपा को अपना प्यार जता कर बाँहों में लेने के लिये आगे बढ़ रहे थे की दीपा ने उन्हें रोका और बोली, "अरे रुको भी। क्या कर रहे हो? इतनी भी क्या जल्दी है? थोड़ी तो धीरज रखो? अभी नहीं। दीपक आते ही होंगे।"

वह सही वक्त था मेरे एंट्री करने का। मैंने बाहर जाकर दरवाजे की घंटी बजायी। दीपा ने अंदर से ही आवाज दी, "दरवाजा खुला है।"

मैं जब अंदर पहुंचा तो बॉस कुर्सी पर बैठे थे और दीपा रसोई में खाना बना कर डाइनिंग टेबल पर लगाने में जुटी हुई थी। दीपा का चेरा लाल दिख रहा था। बॉस ने कुछ सेकंड के लिए ही सही पर मेरी बीबी को किस किया था। शायद उसको किसी गैर मर्द ने पहली बार किस किया था।
 
मुझे देख कर औपचारिकता के तौर पर मेरी बीबी ने पूछा, "आपको आने में बड़ी देर हो गयी?"

मैंने झट से सारा आइसक्रीम और कुछ और सामान जो मैं लाया था वह फ्रिज में रख दिया और अपना पसीना पोंछते हुए बोला, "आज बहोत गर्मी है। यह नजदीक वाली दूकान पर आइसक्रीम नहीं मिला तो दूर जाना पड़ा।"

फिर मैं बॉस के साथ बैठ कर इधर उधर की बातें करने लगा। खाना खाकर बॉस जब जाने के लिए तैयार हुए तब दीपा ने बॉस से कहा, "सोमजी, मैं रोज आपके लिए लंच भेजती रहूंगी। आप रोज शाम को ऑफिस के बाद हमारे यहां खाना खाने आएंगे तो हमें बड़ी ख़ुशी होगी।"

बॉस ने कहा, "मैं चाहता हूँ की आप दोनों कुछ दिन मेरे यहाँ आओ। इतने बड़े घर में मैं अकेला ही रहता हूँ। मुझे अकेलापन खाये जाता है। अगर तुम दोनों आ कर कुछ दिन मेरे साथ रहोगे तो मुझे बहोत अच्छा लगेगा। इस घर को कुछ दिन ताला लगा दो। मरे घरमें दीपा खाना बना लेंगी और कुछ दिन आप दोनों मेरे वहाँ ही रहो। मुझे खाना मिल जाया करेगा। दीपक और मैं साथ में ऑफिस चले जायेंगें, और साथ में ही वापस आ जाएंगे। मैं यह भी सोच रहा हूँ की अगले हफ्ते तीन दिन छुट्टियां पड़ती हैं। हम नजदीक कोई जगह पर छुट्टी पर घूमने चले जाएंगे। आप के लिए एक चेंज हो जाएगा।"

दीपा ने पूछा, "सर वह तो ठीक है, पर अगर शिखाजी कहीं आ गयीं तो कैसा लगेगा?"

का चेरा शिखा का नाम सुनकर एकदम दुखी हो गया। वह बोले, "उस मनहूस का नाम मत लेना। अब वह कभी नहीं आएगी। उसने मुझे तलाक का नोटिस भेजा हुआ है। वह अब मेरे साथ रहना नहीं चाहती, और ना ही मैं उसके साथ रहना चाहता हूँ। बल्कि मुझे अफ़सोस हो रहा है की जब वह मेरे साथ रहती थी तब एक बार, सिर्फ एक बार मैं उसे एक पति होने की हैसियत से ऐसा सबक सिखाता की वह याद रखती। काश मैंने ऐसा किया होता तो मेरी यह भड़ास और कड़वाहट निकल जाती और मैं उसे हमेशा के लिए मेरी जिंदगी और मेरे मन से निकाल फेंक सकता।"

दीपा ने मेरी और देखा। मैंने कहा, "शिखा जी को छोड़िये सर। पर हम आपके वहाँ आएं उससे बेहतर है की आप यहाँ रोज आएं। यहां क्या बुराई है?"

बॉस ने कहा, "वह तो सही है। पर मेरी इच्छा है की इस बहाने आपका चेंज हो जाएगा और कुछ दिनों के लिए ही सही पर मुझे आप दोनों की कंपनी भी मिल जायेगी। अगर आप को बुरा ना लगे तो। हम लोग मेरी गाडी में घूमने चलेंगे। मेरे खर्च पर। यहीं शिमला, मसूरी या कहीं और। सोचना की आप बिना कोई खर्च किये हनीमून पर जा रहे हो।आपको एक पैसा भी खर्चना नहीं पडेगा। यह मेरी इच्छा है। बाकी मैं आप पर जबरदस्ती कैसे कर सकता हूँ?" यह कहते हुआ बॉस का चेहरा मुरझा गया।

दीपा ने तालियां बजाते हुए मेरी और उत्सुकता से देखा और कहा, "दीपक, हिल स्टेशन पर घूमना और वह भी मुफ्त में? ऐसा मौक़ा कहाँ मिलेगा? वैसे भी हम हनीमून पर तो गए ही नहीं थे। तो चलो ना? सर के साथ चलेंगे तो और भी मजा आएगा।"

मैंने मजाकिया अंदाज में कहा, "यह शायद पहला हनीमून होगा जिसमें तीन लोग हनीमून मेंजाएंगे।"

तब दीपा की समझ में आया की उसने कैसा लोचा मार दिया था। दीपा अपनी बात को सुधारती हुई बोली, "मेरा कहने का मतलब था, अरे हनीमून को गोली मारो। सब साथ में चलेंगे तो मजा तो आएगा ना?"

बॉस ने कहा, "कोई जल्दी नहीं है। सोच लेना। कल जवाब देना। मैं इंतजार करूंगा।"

मैंने कहा, "चलो ठीक है। देखते हैं। हम लोग मशवरा करके आप को बताएँगे।"
 
बॉस के चले जाने के बाद मुझे लगा की मेरे दिमाग में जो प्लान था वह शायद काम कर सकता था। दीपा ने पहली मुलाक़ात में ही बॉस को राजी कर लिया की वह ऑफिस जायेंगे और काम करना शुरू कर देंगे। यह एक बड़ी उपलब्धि थी। मेरे मन में आया की मैं मेरी बीबी को पूछूं की मेरे आइसक्रीम लेने के लिए जाने के बाद क्या हुआ था? पर मैंने यह सोचा की अगर मैं ज्यादा पूछताछ करूंगा तो कहीं मेरी बीबी बॉस से करीब आने से हिचकिचाए; यह सोच कर की मैं मेरी बीबी और बॉस के मिलने से नाराज हूँ । इस लिए मैंने उस बात को छेड़ना ठीक नहीं समझा।

मैं चाहता था की मेरी बीबी बॉस के करीब आये और आगे आगे क्या होता है यह जानने के लिए मैं बहुत ही उत्सुक था। सिर्फ मेरी ही नहीं, हमारी कंपनी के अस्तित्व का सवाल था। मेरी दिली ख्वाहिश थी की दीपा और बॉस की बात आगे बढे और मैं उसमें रोड़ा अटकाना नहीं चाहता था। मेरी बीबी से कुछ देर के लिए ही मिलने से बॉस के मन में ऑफिस जाने की और काम करने की लालच जागी। मैंने उनमें काफी बदलाव देखा।

उस रात बॉस के बारे में दीपा ने ही बात छेड़ दी। दीपा ने कहा, "दीपक, आप को समझ नहीं आता की बॉस से कैसे बात करते हैं? मैंने जब हनीमून की बात की तब तुमने बिच में क्यों तीन लोगों की बात करके अड़ंगा डाल दिया? बुरी बात है। जब तुमने बॉस को खुश करने का काम मुझ पर छोड़ दिया है तो फिर तुम्हें हर बात में मुझे सपोर्ट करना है। समझे?"

मैंने अपने कान पकड़ा कर कहा, "समझ गया बॉस। सॉरी!"

दीपा मेरे अपने कान पकड़ते हुए देख हँस पड़ी और नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, "ठीक है। आगे से ध्यान रखना।"

फिर दीपा ने मुझे बड़े उत्साह से कहा, "जानते हो जब तुम आइसक्रीम लाने गए थे तब बॉस ने मुझे अपनी दर्द भरी कहानी सुनाई थी। उनकी बीबी उनसे लड़ाई करके पिछले करीब एक महीने से अपने मायके चली गयी है। पता नहीं ऐसे भले आदमी को ऐसी कुब्जा कहाँ से मिली?"

मैंने कहा, "बॉस की कहानी तुम्हें पता नहीं थी? ऑफिस में सब जानते हैं। उनकी बीबी बहोत ही बड़े बिज़नेस मेन की बेटी है और हर महीने अपने पिता से वह करीब एक लाख से भी ज्यादा पैसे मंगवाती है। बॉस को तो वह नौकर जैसे समझती है।"

दीपा मेरी बात सुन कर चौंक गयी और बोली, "बापरे! इतनी घमंडी? बेचारे बॉस का मन इधर उधर तो भटकेगा ही ना?"

मैंने कहा, "बिलकुल! इसी लिए बॉस बेचारे जब तुम्हारे साथ होते हैं तो खुश रहते हैं। वह तुम्हें देखने और तुम्हारी मीठी बातें सुनने के लिए बड़े ही बेताब रहते हैं। मैं तो कहता हूँ की हमें उनके साथ अपना कुछ समय देना चाहिए। तुम्हें देख कर उनकी आँखें कुछ तो ठंडी होंगी!"

दीपा ने कुछ शर्माते हुए कहा, "यह कहीं तुम जलन से तो नहीं कह रहे?"

मैंने कहा, "बिलकुल नहीं। बॉस ने हमें जो कांटे के समय दिल खोल कर मदद की है उसे मैं भी भुला नहीं सकता। ऊपर से मुझे मेरे काम में हमेशा सहायता करते हैं। उनकी ही मेहनत से मेरा प्रमोशन हुआ है। अगर वह मुरझाये हुए रहेंगे तो हमारा बिज़नेस ठप हो जाएगा। हमने जो कर्ज बॉस से लिया है उसे कैसे चुका पाएंगे? अगर उनको हमारे संग कुछ भी शकुन मिलता है तो सब कुछ बदल जाएगा। सब कुछ पहले जैसे ही अच्छा हो जाएगा। यह मत समझना की मुझे जलन होगी। क्यूंकि मैं भी उनको अपना समझता हूँ इस लिए हम उन्हें कुछ शकुन दें सकें तो यह हमारे लिए सौभाग्य की बात होगी। तुम मुझे प्यार करती हो और करती रहोगी इसका मुझे पूरा विश्वास है। देखो तुम औरत हो और यह नेचुरल है की किसी भी मर्द को तुम्हारे जैसी खूबसूरत सेक्सी औरत के संग शकुन तो मिलता ही है। मैं जानता हूँ की वह तुम्हे करीब पाकर मचल उठते हैं। इसमें कौन सी बुराई है? मैं तो इसे नेचुरल समझता हूँ।"

दीपा ने कुछ शर्माते हुए कहा, "देखो, मैं तुमसे छुपाउंगी नहीं। जब तुम आइसक्रीम लेने गए थे तो बॉस ने मेरा हाथ पकड़ा था और कुछ आवेश में आ कर मुझे करीब खिंच कर कुछ हरकत करने लगे थे। पर मैंने उनको आगे बढ़ने से रोका। बेचारे बहोत शर्मिंदा हुए और माफ़ी मांगने लगे।"

मैंने कहा, "वैसे मेरे बॉस बहोत ही शरीफ हैं। उन्हें कोई औरत का प्यार नहीं मिला तो वह भी क्या करें? तुमने कहीं उनको लताड़ा तो नहीं ना?"

दीपा ने वही नज़ारे निचीं कर कहा, "नहीं, पर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। मैंने तुम्हारा नाम लेकर कहा की कहीं तुम आ जाओगे तो अच्छा नहीं लगेगा।"

मैंने बीबी की कमर में नकली घूंसा मारते हुए कहा, "अच्छा? काम अपना और नाम मेरा? तुम उन्हें रोकना चाह रही थी तो मेरा नाम क्यों लिया? बॉस सोचेंगे की मैं उनसे जलता हूँ। अगर उन्हें तुम्हारे संग शकुन मिलता है तो फिर क्यों ना हम उनकी बात मानलें और कुछ दिन उनके बंगले में जा कर उनके साथ रहें?"

मेरी बात सुन कर दीपा बहुत खुश लग रही थी। उसने कहा, "सच्ची? आप तैयार हो? क्या हम चलेंगे? अच्छा है कुछ चेंज भी हो जाएगा। मैं रोज तुम्हें और तुम्हारे बॉस को अच्छा अच्छा खाना खिलाऊंगी। हमारे कुछ पैसे भी बच जाएंगे। बॉस खुश हो जाएंगे तो वह फिर शिखा की चिंता नहीं करेंगे। वह तुम पर और भी खुश हो जाएंगे और तुम्हारा और भी प्रमोशन हो जाएगा। पर एक डर जरूर है मेरे मन में। हमारे उनके वहाँ रुकने से बात कहीं आगे तो नहीं बढ़ जायेगी? मैंने बताया ना की आज तुम नहीं थे तो बॉस ने मुझे छेड़ दिया था। कहीं वह मुझे पटाने की कोशिश तो नहीं कर रहे? वह तो अच्छा हुआ की तुम सही वक्त पर आ गये।"

मैंने कहा, "अरे यार ऐसी छोटी मोटी बातों पर क्या सोचना? हम उनके उतने कर्जदार हैं की उनका कर्ज हम कैसे भी चुका नहीं सकते। उन्होंने ख़ास कर तुम्हारे कहने पर एक अपनी सारी कमाई तुम्हारे हाथों में सौंप दी। वाकई में देखा जाए तो तुम्हारे पिताजी की जान उन्होंने बचाई है। वरना हम कहाँ से इतने सारे रुपयों का इंतजाम कर सकते?"
 
दीपा ने कहा, "हाँ दीपक यह तो सही है। पर...... "

मैंने कहा, "पर क्या? यही ना की वह कहीं तुम्हें छेड़ ना दें? कहीं वह तुम्हें पटाने की कोशिश ना करे? देखो तुम्हारे जैसी खूबसूरत और सेक्सी औरत को अगर कोई मर्द पटाने की कोशिश ना करे तो मैं यही मानूंगा की यातो वह मर्द नपुंशक है। अरे औरत और मर्द के बीच में पटना पटाना तो चलता रहता है। अगर तुम पटना चाहोगी तभी तो वह तुम्हें पटा पाएंगे। अगर तुम नहीं पटना चाहोगी तो वह तुम्हें थोड़े ही पटा पाएंगे? वह कोई जबरदस्ती थोड़े ही करेंगे? इसकी ज्यादा चिंता ना करो। देखो अगर तुम्हें एतराज नहीं है तभी हम चलेंगे, वरना नहीं चलेंगे। और अगर जाएंगे तो उनके घर में कुछ दिन रहेंगे।"

फिर मैंने धीरे से कुछ व्यंग के स्वर में कहा, "और बाद में हम तीनो छुट्टियों में तीन लोग हनीमून पर भी जाएंगे।"

दीपा ने मुंह बना कर कहा, "दीपक, मैंने गलती से हम तीन लोग हनीमून पर जाएंगे ऐसा बोल दिया तो अब तुम मेरी टाँग खिंच रहे हो?"

मैंने गंभीरता से कहा, "नहीं ऐसा नहीं है। मैं वाकई सीरियसली कह रहा हूँ की हनीमून तो हम जरूर मनाएंगे। और हम तीन लोग ही हनीमून पर भी जाएंगे। भाई हम बॉस को दुसरा कमरा दे देंगे। जब हम बॉसके वहाँ गए या बाहर गए तो क्या तुम मुझसे चुदवाओगी नहीं? देखो अगर तुमने मुझे बॉस के वहाँ या बाहर तुन्हें चोदने से रोका तो देख लेना। यह मत कहना की बॉस के घर में है या बॉस साथ में हैं तो मैं तुम्हें चोद नहीं सकता। बोलो मंजूर है? बोलो तुम तैयार हो?"

दीपा ने उलझन भरी आवाज में कहा, "जब हम तीनों साथ में जा रहे हैं तो क्या यह ठीक लगेगा की हम बॉस को अकेला छोड़ दें और हम दोनों अलग एक दूसरे कमरे में रह कर मौज करें? बेचारे बॉस! कम से कम एक महीने से तो बॉस को सेक्स नहीं मिला। तो क्या हमतो खुल कर जोश से चुदाई करें और बॉस को क्या दूसरे कमरे में मुठ मारने के लिए मजबूर करें? क्या बॉस यह नहीं सोचेंगे की हमने उनको अनदेखा कर उनकी अवमानना की? और फिर तुम यह भी चाहते हो की मैं तुम्हारे बॉस के करीब जा कर उनका मन ऐसे बहलाऊँ ताकि वह अपना दुःख भूल कर वापस अपना पुराना जोश और जज्बा वापस लाएं? दोनों चीज़ें एक साथ कैसे हो सकती हैं?"

मेरी सयानी पत्नी की बात सुन कर मैं सोचने लगा की बात उसकी सही है। अगर बॉस को ऐसा लगेगा की हम उन्हें नजर अंदाज कर रहे हैं तो फिर वह अकेलापन महसूस करने लगेंगे। वह सोचने लगेंगे की मैं तो मेरी बीबी को चोद रहा हूँ और उस के साथ मौज कर रहा हूँ और वह बेचारे अकेले को मैंने मुठ मारने के लिए छोड़ दिया। अकेलेपन में वह फिर से वही अपनी निराशाओं के चक्रव्यूह में फँस जाएंगे। तो फिर क्या करें जिससे की रात में मैं दीपा को चोद भी सकूँ और बॉस को बुरा भी ना लगे?

अब बात कठिन थी। क्या किया जाये? मैंने सोचा, ठीक है बॉस को भी हमें हमारे साथ ही रखना पडेगा। पर फिर मैं दीपा को चोद नहीं पाउँगा।

मैंने कहा, "फिर ठीक है। हमें बॉस को भी हमारे ही रूम में रखना पडेगा। फिर मैं तुम्हें कैसे चोद पाउँगा?" फिर मैं थोड़ी देर शांत रह कर दीपा की और शरारत भरी नजर से देख कर बोला, "दीपा सुनो, मैं तुम्हें चोदे बगैर तो रह नहीं सकता। तो फिर दो रास्ते हैं। पहला आप को शायद पसंद नहीं आएगा। वह है की हम बॉस को भी चुदाई में शामिल करलें। मतलब बॉस को भी तुम्हें चोदने का मौक़ा दें। या फिर हम दोनों ही अलग बेड पर रजाई में घुस कर चुदाई करें और बॉस को हमें चोदते हुए देखने दें? दूसरा मुझे ठीक नहीं लगता।"

दीपा ने गुस्से में कहा, "क्या बात करते हो? बॉस मेरे साथ तुम्हारे सामने कुछ नहीं कर सकते। बॉस तो तुम्हारे सामने मेरा हाथ भी नहीं पकड़ते।" मेरी बीबी ने अनजाने में ही कह दिया की उसे बॉस से चुदने में कोई आपत्ति नहीं थी अगर मैं वहाँ ना होऊं तो।

मैं मेरी बीबी से बच्चे की तरह चिपक गया। मैंने कहा, "दीपा मुझ से मत पूछो। मैं नहीं जानता। तुमने कहा की सब कुछ मुझ पर छोड़ दो। सो अब मैंने सब कुछ तुम पर छोड़ दिया है। अब तुम जानो। बस मैं यही चाहता हूँ की कुछ भी हो तो तुम मुझे अलग मत करना। तुम जो कुछ तय करो, वह मुझे मंजूर होगा। मुझे बिलकुल बुरा नहीं लगेगा। अगर तुम समझती हो की तुम्हें बॉस से चुदवाना पडेगा, तो वह भी मुझे मंजूर है। मैं सब कुछ देख लूंगा, सहन कर लूंगा। पर मैं तुम्हें कभी नहीं छोडूंगा। और तुम भी मुझे छोड़ने की सोचना भी मत।"

मेरी बच्चे वाली हरकत देख कर मेरी बीबी बरबस हँस पड़ी और बोली, "दीपक, बच्चे मत बनो। मैं तुम्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाली। पर तुम एक बात समझ लो। मर्दों की तरह औरतों के लिए यह छेड़ खानी और सेक्स सिर्फ शौकिया अथवा बदन की भूख मिटाने की बात नहीं होती। औरत के लिए किसी मर्द से सेक्स करना यह फीलिंग्स, सम्मान की बात होती है। हाँ कई बार जब कोई औरत को किसी चीज़ की सख्त जरूरियात होती है तब वह उसे पाने के लिए मजबूरी में अपना बदन किसी और को सौंपने के लिए तैयार हो जाती है, वह एक अलग बात है। मैं तुम्हारे बॉस से 'क्या करूँ मज़बूरी है' यह सोच सेक्स नहीं कर सकती, क्यूंकि तब वह बात नहीं बनेगी। वह बड़े अक्लमंद हैं। वह समझ जाएंगे की सेक्स में मेरा मन नहीं है। और सारी कवायद बेकार जायेगी।"

मेरी समझ में कुछ नहीं आया की मेरी बीबी क्या कहना चाहती थी। मैंने कहा, "मैं कुछ नहीं समझा।"

दीपा ने कहा, "या तो तुम बुद्धू हो या फिर तुम दिखावा कर रहे हो। जब मैं तुम्हारे बॉस के करीब जाने की कोशिश करुँगी तो क्या होगा? क्या तुम्हें नहीं पता की तुम्हारे बॉस मुझ से क्या चाहते हैं? क्या तुमने उनकी आँखों में मेरे लिए भड़क रही वासना की भूख को महसूस नहीं किया? मेरे और तुम्हारे बॉस सोमजी के बिच सेक्स का आकर्षण तो है ही। जब हम और करीब आएंगे तो जाहिर है की सेक्स की आग तो भड़केगी ही। तुम्हारे बॉस मुझे दिलोजान से चाहते हैं। शिखा के छोड़ देने के बाद तो उनकी यह चाहत अब बे-लगाम हो गयी है। तुम्हारे बॉस की मुझे अपना बनाने की चाहत है। जाहिर है की वह मुझे पुरे प्यार से सेक्स करना चाहेंगे। वह यह भी चाहेंगे की मैं उनसे मज़बूरी में नहीं, मैं उनसे पुरे प्यार से सेक्स करूँ। जब मैं तुम्हारे बॉस से सेक्स करूँगी तो मैं उनसे आधे अधूरे मन से नहीं, मैं उनको मेरा सब कुछ समर्पण करुँगी। क्या तुम मुझे तुम्हारे बॉस के साथ शेयर करने के लिए तैयार हो?

वैसे भी अपनी उदारता और प्यार से उन्होंने मुझे ऋणी बनाकर मेरे बदन और प्यार को तो खरीद ही लिया है। मेरी समझ में नहीं आता की अगर हम एक साथ अकेले हों और अगर वह मुझे सेक्स करना चाहेंगे तो मैं उनको मना कैसे कर पाउंगी?

और यहां तो बात एक कदम आगे की है। क्यूंकि तुम चाहते हो की मैं उनको अपनी पहली स्थिति में ले आऊं। इस का मतलब है मुझे उनसे सिर्फ सेक्स करना ही नहीं है, मुझे उनको दिलोजान से प्यार कर उनको जीवन की पटरी पर फिरसे लाना है। तभी मैं उनको एहसास दिला पाउंगी की वह अकेले नहीं है। मैं उनके साथ हूँ। तभी तुम्हारे बॉसमें वह जज़्बा और वह जोश वापस लौटेगा जो तुम चाहते हो। तो जनाब आप तैयार रहो की आपकी बीबी को आप एक और मर्द के साथ शेयर करोगे। मतलब उस के बाद मेरे बदन और मेरे प्यार पर तुम्हारे अलावा तुम्हारे बॉस का भी अधिकार रहेगा।

मेरे पतिदेव, अगर आप उस के लिए तैयार हो तो ही इस में आगे बढ़ो। वरना यह सही समय है की हम यहीं रुक जाएँ। बादमें यह अफ़सोस मत करना की मैं तुम्हारे बॉस से प्यार करने लगी हूँ, या उनसे सेक्स करने के लिए आतुर रहती हूँ।"
 
मेरी बीबी की बात सुन कर मैं थोड़ी देर सोचने के लिए मजबूर हो गया। क्या वाकई में मैं अपनी बीबी को शेयर करने के लिए तैयार था? उत्तेजना तो कुछ पल की होगी पर परिणाम शायद जीवन भर भुगतना पड़ सकता है, यह सोच कर मैं कुछ असमंजस में पड़ गया। पर मैंने इस के बारे में सोच तो रखा ही था।

मैं मेरी बीबी की बाँहों में चला गया। मैंने मेरी बीबी की दाढ़ी पकड़ते हुए कहा, "बेबी, मुझे कोई एतराज नहीं। पर डार्लिंग मैं तुम्हें शेयर तो कर सकता हूँ पर खोने के लिये तैयार नहीं हूँ। तुम्हें मुझे प्रॉमिस करना पडेगा की तुम मुझे निकाल फेंकोगी तो नहीं ना? मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता। तुम बेशक बॉस से रोज जो चाहो करो। पर मुझे साथ रखना। बेबी मैं खुद ही तुम को बॉस से चुदवाते हुए देखना चाहता हूँ।"

मेरी बीबी ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया। मेरा मुंह उसने अपनी छाती पर रखा और मुझे अपने बूब्स चूसने का इशारा किया और बोली, "डार्लिंग यह मुश्किल है। बॉस तुम्हारे सामने मुझे छेड़ने से डरते हैं। जब छेड़ ही नहीं सकते तो आग की तो बात ही क्या? यह मुमकिन नहीं लगता की बॉस तुम्हारे सामने मुझे किस भी करेंगे। सेक्स करना तो दूर की बात है।"

मैं मेरी बीबी की बात सुन कर दुखी हो गया। मैंने कहा, "कुछ रास्ता निकालो ना, डार्लिंग! तुम तो इतनी स्मार्ट हो! मैं कहीं छुप जाऊंगा या फिर आँखें बंद करके सोने का ढोंग करता हुआ पड़ा रहूंगा। पर मैं सब कुछ देख पाऊं। प्लीज?"

कुछ सोच कर दीपा बोली, "ठीक है। मैं कुछ सोचती हूँ। देखते हैं। कुछ करेंगे। ओके?"

मेरी बात सुन कर मेरी बीबी बहुत उत्तेजित हो गयी। जरूर उसने बॉस से चुदवाने के सपने देखे होंगे।

दीपा ने मेरे होंठ से होंठ चिपका कर और मेरे मुंह में अपनी जीभ डालकर मेरा रस चूसते हुए मेरी बाँहों में सिमटकर बोली, "बॉस से सेक्स करने की बात करके तुमने मुझे बहोत गरम कर दिया है।"

मैंने कहा, "तुम इतनी सेक्सी और खूबसूरत हो की बॉस भी अपने सब कुछ ग़म और दुःख भूल कर तुम्हारे पीछे पागल हो गए हैं। डार्लिंग, मैं तुम्हारा पति होने के बावजूद भी तुम्हारे पीछे इतना पागल हूँ तो फिर बॉस की बेचारे की तो बात ही क्या? अभी मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।"

दीपा ने कहा, "तुम्हारी बीबी तुम्हारे सामने है। मना किसने किया है।"

मैंने दीपा की चूत में हाथ डाला तो वह ना सिर्फ गीली हुई थी। उसकी चूत में से रस रिस रहा था।

मैंने दीपा को अपनी दोनों टांगों में जकड़ लिया। मेरी जाँघें मेरी बीवी के नंगे बदन ऊपर जैसे अजगर अपने शिकार को अपने आहोश में जकड लेता है वैसे ही लिपटी हुयी थीं। मेरी पत्नी उसमे समा गयी थी। मैं अपना लण्ड दीपा की चूत पर रगड़ने लगा। ऐसे कड़क लण्ड को सम्हालना मेरे लिए वास्तव में मुश्किल हो रहा था। दीपा और मैं एक दुसरेकी आहोश में चुम्बन कर रहे थे। दीपा ने एक हाथ में मेरा लण्ड पकड़ रखा था।

मेरी शर्मीली और रूढ़िवादी पत्नी एक हाथ में मेरा लण्ड बड़े प्रेम से सहला रही थी। मैंने मेरे और मेरी बीबी के कपडे निकाल दिए। हम पूर्ण रूप से नग्न हालात में थे और एक दूसरे को लिपटे हुए थे। दीपा बिच बिच में मेरे अंडकोष को अपने हाथों से इतने प्यार से सहलाती थी की मैं क्या बताऊँ। दीपा के हाथ में एक जादू था। वह मेरे एंडकोष को ऐसे सहलाती थी की मैं उस आनंद का कोई वर्णन कही कर सकता।

मैं दीपा के नंगे पिछवाड़े को सहला रहा था। मैं बार बार दीपा के कूल्हों को दबाता रहता था और मेरी उँगलियाँ कूल्हों के बिच वाली दरार में बार बार घुस कर दीपा की गाँड़ के छिद्र में घुसेड़ता रहता था। मैं कभी दीपा की चूत के उभार पर अपना हाथ फिरा कर हलके से दीपा की चूत को छू लेता और उसकी चूत की पंखुड़ियों को प्यार से सहलाता। इस से दीपा और उत्तेजित हो कर गहरी साँसे लेकर, "डार्लिंङ्ग यह क्या कर रहे हो? प्लीज मैं बहुत गरम हो रही हूँ। आहहह......". बोलती रहती थी। दीपा की उत्तेजना उसकी धीमी सी कराहटों में मेहसूस हो रही थी।

ऐसे ही प्यार से मैं मेरी बीबी को देख रहा था। धीरे धीरे मेरी कामुक हरकतों और सेक्सी बातों से दीपा इतनी गरम और उत्तेजित हो चुकी थी की वह कामोत्तेजना में कराह ने लगी।

दीपा कीउत्तेजना को देख दीपा के मैं पाँव से लेकर धीरे धीरे दीपा की चूत तक मसाज करने लगा। दीपा की उत्तेजना जैसे जैसे मेरे हाथ दीपा की जाँघों से हो कर उसकी चूत के करीब पहुँच रहे थे वैसे वैसे बढ़ने लगी। दीपा के मुंह से हाय.... ओह.... उफ़..... की कराहट बिना रुके निकल रही थी। दीपा बार बार कभी अपनी गाँड़ तो कभी अपना पूरा बदन हिलाकर अपनी उत्तेजना को जाहिर कर रही थी। मैंने दीपा की चूत पर अपना दायां हाथ रखा और वह चूत के होठों को बड़े प्यार से सहलाने लगा। जब मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाली तो दीपा एकदम उछल पड़ी। वह मेरी उँगलियों को अपनी चूत की पंखुड़ियों से खेलते अनुभव कर पगला रही थी।

उस समय दीपा का पूरा ध्यान मेरी उंगली पर था जो दीपा की चूत में खेल रही थीं। मैं तो जानता था की मेरी पत्नी को सेक्स के लिए तैयार करने का इससे बेहतर कोई रास्ता नहीं था। जब दीपा को चुदवाने के लिए तैयार करना होता था, तब मैं उसकी चूत में प्यार से अपनी एक उंगली डाल कर उसकी चूत के होठ को अंदर से धीरे धीरे रगड़ कर उसे चुदवाने के लिए मजबूर कर देता था। मेरी बीबी की चूत में अपनी उंगली को वह जगह रगड़ रहा था जहाँ पर रगड़ने से दीपा एकदम पागल सी होकर चुदवाने के लिए बेबस हो जाती थी।

दीपा की बेबसी अब देखते ही बनती थी। मेरे लगातार क्लाइटोरिस पर उंगली रगड़ते रहने से दीपा कामुकता भरी आवाज में कराहने लगी। जैसे जैसे दीपा की छटपटाहट और कामातुर आवाजें बढती गयी, मैं अपनी उंगली उतनी ही ज्यादा फुर्ती से और रगड़ने लगा। मेरी कामातुर पत्नी तब मुझ से चुदवाने के लिए मेरा हाथ पकड़ कर कहने लगी, " यार यह मत करो। मैं पागल हुयी जा रही हूँ। मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही। जल्दी मुझ पर चढ़ जाओ और प्लीज मेरी चुदाई करो।"

दीपा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपनी और खिंचा। मैं दीपा के कूल्हों से अपना लण्ड सटाकर बैठ गया। दीपा की गरम चूत का स्पर्श होते ही धीरे धीरे मेरा लण्ड कड़क होने लगा। थोड़ी देर तक मेरी नंगी बीबी को चूमने के बाद मैंने उसे पलंग के किनारे सुलाया और उसे अपनी टांगें नीचे लटकाने को कहा। जब दीपा पलंग के किनारे अपनी टाँगे नीचे लटका के पलंग के ऊपर लेट गयी तो मैं उसकी छाती पर अपना मुंह रख कर लेट गया। मैं झट से पलंग के नीचे उतरा और अपनी बीबी की टांगो को फैला कर उसकी चूत चाटने लगा। मेरी जीभ जैसे ही दीपा की चूत में घुसी की दीपा छटपटाने लगी। मुझे पता था की दीपा की चूत चाटने से या उंगली से चोदने से वह इतनी कामान्ध हो जाती थी की तब वह बार बार मुझे चोदने के लिए गिड़गिड़ाती थी। आज मैं उसे इतना उत्तेजित करना था की वह शर्म के सारे बंधन तोड़ कर खुल्लमखुला चुदवाने के लिए बाध्य हो जाए।

मेरी पत्नी की छटपटाहट पर ध्यान ना देते हुए मैंने उसकी चूत मैं एक उंगली डाल कर उसे उंगली से बड़ी फुर्ती और जोर से चोदना शुरू किया। दीपा के छटपटाहट देखते ही बनती थी। वह अपना पूरा बदन हिलाकर अपने कूल्हों को बेड पर रगड़ रगड़ कर कामाग्नि से कराह रही थी। उसका अपने बदन पर तब कोई नियंत्रण न रहा था। वह मुझे कहने लगी, "दीपक डार्लिंग, ऐसा मत करो। मुझे चोदो। अरे भाई मैं पागल हो जा रही हूँ।" मैं दीपा की बात पर ध्यान दिए बगैर, जोर शोर से उसको उंगली से चोद रहा था। उंगली से दीपा को चोदते हुए मैंने दीपा से कहा, "अब बताओ तुम बॉस के घर में मुझसे चुदवाओगी की नहीं?"

दीपा उस समय उत्तेजना के मारे उछाल रही थी। वह बोल पड़ी, "दीपक, मैं तुमसे चुदवाउंगी और तुम कहोगे उससे भी चुदवाउंगी पर अभी तो तुम मुझे चोदो प्लीज?"

उस रात हमारी ऐसी चुदाई हुई जो शायद काफी सालों के बाद हुई थी। उस रात शायद बॉस के बारे में बातों ने हमारी काम वासना की आग में घी का काम किया था। जब हमारी साँस में साँस आयी तब मैंने दीपा से कहा, "देखो डार्लिंग अब हम एकदम सच्ची और खुली बात करेंगे। जैसे तुमने कहा, बॉस कहीं तुमसे ज्यादा छूट ना ले ले। यही डर है ना तुमको?"

दीपा कुछ उलझन भरी सोच में डूब गयी और बोली, "पता नहीं। वैसे तो तुम्हारे बॉस बड़े ही नेक और शरीफ हैं। पर कभी कभी वह आवेश में भी आ जाते हैं। फिर सम्हल जाते हैं और माफ़ी भी मांग लेते हैं! मेरी तो कुछ समझ में नहीं आता। और हाँ, तुमसे वह बड़े ही ड़रते हैं।"

मैंने कहा, "मेरे बॉस मुझसे डरते हैं? क्या कहती हो?"

दीपा ने झिझकते हुए कहा, "मेरा मतलब है, उस दिन जब तुम आइसक्रीम लेने गए थे और तुम्हारे बॉस मुझसे कुछ छेड़खानी करने लगे थे तब मैंने उनको यह कह कर टरका दिया की कहीं तुम आ तो नहीं गए? यह सुन कर तुम्हारे बॉस एकदम डर गए और इधर उधर देखते हुए उन्होंने मुझे छोड़ दिया।"

मैंने मजाकिया स्वर में कहा, "अच्छा? तो मैं उस दिन कबाब में हड्डी का काम कर रहा था क्या?"

दीपा ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, "क्या दीपक तुम भी! क्यों मेरी टांग खींचते हो? मैं तो तुम्हें जो हुआ वह बता रही थी। पर देखो जब हम बॉस के साथ में या उनके घर में रहेंगे तो हमारी करीबियां बढ़ सकती हैं। और तुम्हारे बॉस कहीं वही पुरानी आदत पर ना आ जाएँ। यही डर मुझे लगता है।"
 
मैंने कहा, "डार्लिंग वही तो मैं चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की बॉस वैसे ही पहले जैसे चहकते हो जाएँ और उनकी वही पुरानी जिंदगी वापस लौट आये। अगर तुम यह कर पायी तो ना सिर्फ मैं पर हमारा सारा दफ्तर तुम्हारा ऋणी होगा।"

दीपा ने कहा, "ठीक है। अगर तुम कहते हो तो मैं पूरी कोशिश करुँगी। और तुम वैसे ही करोगे जैसा मैं कहूँगी।"

मैंने कहा, "वह तो मैं हमेशा ही करता हूँ। यह मेरे लिए कोई नयी बात नहीं है।"

मैंने बॉस से कह दिया की हम उनके वहाँ कुछ दिन रहने के लिए तैयार थे। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ जब बॉस ने मुझे दफ्तर में स्टाफ मीटिंग बुलाने के लिए कहा। सारा स्टाफ यह सुन कर बड़ा खुश हुआ। बॉस धीरे धीरे काम में रस लेने लगे थे ऐसा सभी को लगने लगा था। सारे मेरे साथी मुझे पूछने लगे की मैंने बॉस पर ऐसा क्या जादू किया था। मैंने सिर्फ ऊपर उंगली उठा कर कहा, "यह सब उपर वाले का कमाल है।"

मेरी बात सुनकर सब ने अपने हाथ ऊपर वाले की खिदमत में जोड़े। मेरी छोटी सी केबिन में मेरे ऊपर लगी मेरी बीबी की तस्वीर किसी ने नहीं देखि।

बॉस उस दिन के बाद रोज ऑफिस के बाद मेरे साथ घर आते थे और इंतजार कर रही दीपा के साथ बातें करने में खो जाते थे। बातें अक्सर घुमा फिरा कर बिज़नेस की और ऑफिस की होती थीं। दीपा बॉस को कई सुझाव देती थी और बॉस भी शायद मेरी बीबी को बुरा ना लगे इस लिए उसकी बातें बड़े ध्यान से सुनते भी थे और उसके ऊपर अपनी राय भी जाहिर करते थे। मैं उनको छोड़ इधर उधर हो जाता था और कई बार छुप कर उनको देख भी लेता था।

मौक़ा मिलने पर बॉस अकेले में दीपा को अपनी बाँहों में घेर लेते थे और जल्दबाजी में किस कर लेते थे और कपड़ों के ऊपर से ही मेरी बीबी के भरे हुए मम्मों को भी मसल देते थे। दीपा तब कुछ डरी, घबड़ायी सी हँस कर उसे नजर अंदाज कर देती थी।

शुक्रवार शामको बॉस हमें अपने घर ले जाने के लिये आये। बॉस के आने पर दीपा ने चाय बनायी और बॉस को दी। दीपा ने बॉस से कहा, "हम आपके घर आ तो रहे हैं, पर मेरी एक शर्त है वह मैं आपको बता देना चाहती हूँ। मैं घर में थोड़ी सी भी गन्दगी बर्दास्त नहीं कर सकती। मैंने देखा है की आपका घर है तो बहोत बढ़िया पर आपकी बीबी, मतलब शिखाजी उसे बिलकुल साफ़ नहीं रखती थी। घर पहुँचते ही मैं घर की सफाई में लग जाउंगी। आप भले ही मेरे पति के बड़े बॉस हों, पर आपको भी मेरे साथ सफाई में लगना पडेगा।"

बॉस ने मेरी बीबी की बात सुनी तो मुस्कुराये और बोले, "पर घर जाते ही मुझे नजदीक के स्टोर में ही मेरा अकाउंट है वहाँ से घर का कुछ सामान ग्रोसरी बगैरह लाना पडेगा।"

दीपा ने मेरी और इशारा करते हुए कहा, "कहीं ऐसा तो नहीं की आप सफाई के काम से बचना चाहते हो? दीपक भी तो वहाँ से ग्रोसरी ला सकते हैं।

बॉस ने कहा, "मुझे सफाई के काम करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। ठीक है, मैं आप के साथ सफाई के काम में लग जाऊंगा और दीपक ग्रोसरी ले आयेंगे।"

दीपा और बॉस कुछ बातचीत करते हुए बाहर निकले और बॉस की कार में जा बैठे। मैं घर के सब दरवाजे, खिड़कियाँ, बिजली की स्विच, नलके सब बंद कर सारी चीज़ों को चेक कर हरेक कमरे को अच्छी तरह बंद कर घर के बाहर निकला। दीपा ने हमारी दो सूट केस पैक की थी वह मैंने ली और उन्हें कार की डिक्की में रख कर घर में ताला लगा कर बॉस की कार में पीछे की सीट पर बैठ गया। दीपा आगे बॉस की बगल वाली सीट में बैठी थी।

घर पहुँचते ही दीपा ने घर का चार्ज सम्हाल लिया। दीपा कपडे बदल कर सिर्फ एक छोटी सी चड्डी और ऊपर बिना ब्रा पहने टैंक टॉप (एक गंजी के जैसा टॉप) पहन कर सफाई के लिए तैयार हो गयी। मुझे दीपा ने एक लिस्ट पकड़ा दी जिसमें जरुरी रसोई बगैरह का सामन लिखा हुआ था। बॉस भी सफाई के लिए चड्डी और टी शर्ट पहन कर प्लास्टिक के बकेट मशीन के साथ तैयार हो गए। बाहर निकल कर कुछ देर के लिए मैं दरवाजे के पीछे खड़ा हो कर चोरी से अंदर का नजारा देखने लगा। मैंने देखा की दीपा आगे झुक कर जब घर में कोने कोने में झाड़ू लगा रही थी तो बॉस उसके पीछे मेरी बीबी की बाहर निकली हुई सुआकार गाँड़ को, जो की उस छोटी सी चड्डी में इतनी कामुक लग रही थी, देखते ही रहते थे।

कुछ देर के बाद दीपा जब पीछे मुड़ी तो उसने बॉस को उसकी गाँड़ को घूरते हुए पकड़ लिया। दीपा फ़ौरन अपनी कमर पर हाथ रख कर नकली गुस्सा दिखाती हुई बोली, "क्या देख रहे हो? कभी कोई औरत को आगे से झुक कर झाड़ू लगाते हुए नहीं देखा क्या?"

बॉस ने कहा, "हाँ देखा तो है, पर इतनी खूबसूरत औरत को कभी ऐसे झाड़ू लगाते हुए नहीं देखा।"

मेरी बीबी ने कुछ शर्माते हुए कहा, "चलो सोमजी, देखने के लिए बहुत कुछ है और बहोत दिन हैं। अभी काम पर ध्यान दो। अगर ऐसे देखते रहोगे तो काम कब होगा?"

बॉस शर्मिन्दा होते हुए दीपा के झाड़ू लगाने के बाद पोछा करने लगे। मैं वहाँ से सामान लेने के लिए निकल पड़ा। सामान फ़टाफ़ट ले लिया और बिल लेकर मैं बॉस के घर की और चल पड़ा। सामान लेकर वापस आने में मुझे करीब आधा घंटा लगा होगा। जब मैं घर पहुंचा तो शाम के करीब सात बज चुके थे। बाहर अन्धेरा था। मैंने फिर दरवाजे के पीछे छिप कर देखना चाहा की अंदर क्या हो रहा था।

घर में सारी बत्तियों की रौशनी से घर जगमगा रहा था। मैंने अंदर झाँक कर देखा तो दीपा ने अपना काम खतम कर लिया था और वह पसीने से तरबतर घर के एक कोने में थकान की मारी गहरी साँसें ले रही थी। बॉस भी पोछा लगा कर बाल्टी और मशीन अपनी जगह रख कर दीपा के सामने खड़े हो गए। दीपा का टॉप पूरा पसीने से भीगा हुआ था। ऊसके सर, बालों और पेट से भी पसीना बह रहा था। मेरी खूबसूरत बीबी पूरी पसीने में भीगी हुई थी। मेरी बीबी की मदमस्त भरी और फूली हुई चूँचियाँ उसके गहरे साँसें लेने के कारण टॉप में से ऊपर निचे बाहर निकली हुई दिख रहीं थीं। उस शाम दीपा जल्दी में शायद ब्रा पहनना भूल गयी थी। टॉप भिगने के कारण दीपा के बॉल की गोलाई, उसके गोर स्तनों पर कब्जा किये हुए कामुक अरोएला और उसकी कड़क निप्पलों की झांकी हो रही थी। दीपा का टॉप दीपा की कमर से काफी ऊंचा था। दीपा की नंगी कमर, नाभि बड़ी कामुक लग रही थी।
 
दीपा के मस्त फुले हुए टॉप में से जबरदस्ती से बाहर निकलने को व्याकुल धमन की तरह ऊपर निचे हो रहे स्तन को देखते बॉस की आँखें वहाँ से हटने का नाम ही नहीं ले रहीं थीं। दीपा ने बॉस की नजर देखि तो थोड़ा शर्माते हुए अपने आपको सम्हालती हुई बोली, "सोमजी, यह क्या देख रहे हैं? ऐसा मत करो प्लीज। मुझे शर्म आती है। आपने मेरा काम में साथ दिया उसके लिए शुक्रिया। मैं देखना चाहती थी की आप जैसा बड़ा आदमी ऐसे सफाई के काम करने में छोटापन तो नहीं महसूस करता।"

बॉस ने दीपा के सामने अपनी बाँहें फैलायीं और दीपा को उसमें जकड़ते हुए बोले, "तो मैडम, क्या मैं आपके टेस्ट में पास तो हुआ ना?"

दीपा बॉस को देख कर अपनी आँखें नचाती हुई कुछ हिचकिचाती हुई बोली, "हाँ पास तो हुए आप! पर सोमजी यह क्या है?"

बॉस ने कहा, "दीपा, क्या तुम मुझे तुम्हारे बताये हुए काम करने का इनाम नहीं दोगे? मैं कई हफ़्तों से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ। मुझे मत तड़पाओ ना।"

दीपा ने कहा, "मैं कहाँ तड़पा रही हूँ? आपको तड़पा तो आपकी शिखा रही है।"

बॉस यह सुनकर नाराज हो गए और दीपा की कमर से अपना हाथ हटा दिया और बोले, "प्लीज शिखा का नाम मत लो। अगर तुमने शिखा का नाम लिया तो मैं तुमसे बात नहीं करूंगा। मुझे उसके नाम से भी नफरत है।" ऐसा कह कर बॉस नाराज हो कर वहाँ से उठ कर सीढ़ी चढ़ कर ऊपर वाले उनके बैडरूम में चले गए। दीपा अफ़सोस करती हुई पंखे के निचे अपना पसीना सुखाते हुए खड़ी खड़ी इधर उधर देखती रही तब मैं सामान के बड़े थैले लेकर कमरे में दाखिल हुआ।

मैं जब घर में दाखिल हुआ तो मैंने देखा की बॉस ने शायद खाना बाहर से आर्डर कर दिया था जो टेबल पर रक्खा हुआ था। दीपा पंखे के निचे खड़ी थी और उसका चेहरा उतरा हुआ था। मैंने पहुँच कर थैले निचे रख कर दीपा के पास जा कर पूछा, "डार्लिंग, क्या बात है। आप का चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों है?"

दीपा ने कुछ रक्षात्मक भाव से कहा, " मैंने और बॉस ने मिलकर सफाई की। बात बात में मैंने बॉस को शिखाजी के बारे में पूछा तो वह दुखी हो गए। लगता है मैंने उनका मन दुखा दिया। वह उनके बारेमें बात भी नहीं करना चाहते हैं।"

मैंने कहा, "हाँ वह उनकी दुखती रग है। वह अब उनको भुला देना चाहते हैं। शिखाजी ने बॉस का दिल तोड़ दिया है।"

दीपा ने कहा, "हाय रब्बा, मुझे क्या पता की वह शिखाजी से इतनी नफरत करते हैं।"

मैंने कहा, "कोई बात नहीं। मैं जा कर बॉस से माफ़ी माँग लूंगा।"

दीपा ने कहा, "नहीं तुम कहीं नहीं जाओगे। तुम क्यों माफ़ी मांगोगे? गलती मैंने की है तो माफ़ी भी मुझे ही मांगनी चाहिए। तुम यह सब्जी धो कर बाद में फ्रिज में रख दो और यह खाना माइक्रो में गरम कर दो। मैं अभी बॉस से माफ़ी मांग कर उनको खाने के लिए बुला लाती हूँ।"

मैंने कहा, "ठीक है डार्लिंग। जैसा आप कहो। पर कैसे भी कर के बॉस का मूड़ ठीक करने की कोशिश करना।"

दीपा ऊपर बॉस के कमरे में गयी। मैं टेबल पर सब्जी धो कर टेबल पर रख कर सीढ़ी चढ़ कर धीरे से बॉस के बैडरूम के बाहर जाकर खड़ा अंदर का नजारा देखने लगा। बॉस कोने के एक टेबल के सामने एक कुर्सी पर बैठे हुए सामने की दीवार पर देख रहे थे और दीपा उनके पीछे खड़ी थी। दीपा ने पीछे से जाकर बॉस के कंधे पर हाथ रख कर कहा, "सॉरी सर! आई मीन सोमजी, मुझे माफ़ कर दो।"

बॉस ने वैसे ही बैठे रह कर दीपा की और पीठ रखते हुए, अपने कंधे पर रखे हुए दीपा के हाथ के ऊपर अपना हाथ रखा और उसे कस कर दबाते हुए कहा, "इट्स ओके दीपा। कोई बात नहीं। शिखा ने जो मुझे घाव दिए हैं मैं उसे भुलाना मेरे लिए बड़ा ही मुश्किल है। मैं उन्हें भुलाने की कोशिश कर रहा हूँ। वह बड़ी ही बददिमाग, उच्छृंखल, आलसी होते हुए भी मैंने उसकी सारी कमियां नजरअंदाज़ कीं क्यूंकि मैं मेरी दिनरात की मेहनत के बाद मेरी बीबी की बाँहों में रात को शकुन से सोना चाहता था। उसके प्यार की सिंचाई से अपना कुटुंब बनाना चाहता था। पर वह सुख भी मुझे उसने नहीं दिया। उसे सिर्फ पैसा ही नजर आता था। आखिर में जो होना था वही हुआ। अब मैं उसका नाम भी नहीं सुनना चाहता।

पर मुझे एक बड़ा अफ़सोस है की मेरे पास जब मौका था तब मैं एक बार भी उसे उसकी औकात का एहसास नहीं करा पाया। काश एक बार मैं उसकी ऐसी की तैसी कर उसकी बैंड बजा देता। एक बार उसे यह एहसास करा देता की वह पत्नी नहीं एक राँड़ थी जो शादीशुदा होते हुए भी अपने यार से पति से चोरी छुपी चुदवाती थी। काश मैं एक बार उसे एक राँड़ की तरह बड़ी बेदर्दी से ऐसी की तैसी कर देता ना? तो मेरे मन को बड़ी ही ढाढस मिलती और मैं उसे मेरे मन से और जिंदगी से हमेशा के लिए निकाल फेंकता।"

बॉस कुर्सी घुमा कर दीपा के सामने आगये। दीपा की कमर पर अपना हाथ टिकाते हुए बॉस ने कहा, "दीपा, मैंने तुममें अपने सपने की मूरत देखि है। मैं थोड़े समय के लिए ही सही, तुम्हें देखता हूँ तो अपने सारे ग़म भूल जाता हूँ। मैं जानता हूँ की तुम शादीशुदा हो। पर मैं क्या करूँ? तुम्हें देखते ही मेरा दिल मचल जाता है। अगर मैं ऐसी वैसी हरकत कर बैठूं तो मुझे तुम हड़का देना, डाँट देना। मुझे ज़रा भी बुरा नहीं लगेगा। पर मुझे माफ़ कर देना। मुझसे रूठ मत जाना। मुझ से दूर मत जाना। मैं कोशिश करूंगा की तुम्हें परेशान ना करूँ।"

दीपा ने बॉस के करीब जाते हुए कहा, "सोमजी, मैं शिखा राँड़ की तरह आपसे मेरे पति से छुप कर सम्बन्ध नहीं रखूंगी। मैं दीपक की बीबी हूँ, तुम किसी और के पति हो। यह सारा विधि का खेल है। पर मैंने तुम्हें अपना अंतरंग माना है।"

फिर ऊपर टेढ़ी नजर कर बॉस की आँखों में आँखें मिला कर दीपा ने कुछ नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, "अंतरंग का मतलब तो जानते हो ना? की भूल गए? मैंने तुम्हें बताया नहीं था?"

बॉस ने अपने कान पकड़ते हुए कहा, "हाँ भई हाँ, जानता हूँ। मैं कैसे भूलता? तुमने मुझे डंके की चोट पर जो समझाया था।अंतरंग माने जो अपने अंतःकरण के अंग जैसा हो। जिससे कोई भी, मतलब कोई भी बात की जा सकती फिर वह चाहे सेक्स की हो या कोई और समस्या की हो या कोई और कितनी प्राइवेट या गुह्य क्यों ना हो। जिससे कुछ भी किया जा सकता है जैसे छूना, प्यार करना किस करना इत्यादि। अंतरंग की व्याख्या में प्रिय, प्रियतम, पति, पत्नी (अगर उनमें गहरी आत्मीयता हो तो) या गहरा दोस्त भी आता है, उसे अंतरंग कहते हैं। इस में पिता, माँ, बेटी, भाई या बहन नहीं आते, हालांकि वह बहोत ही प्यारे होते हैं; क्यूंकि इन संबंधों में कुछ बंदिशें हैं। खून के रिश्तों में होती हैं।"

बॉस ने फिर दीपा की और देख कर कहा, "क्यों टीचर, मैंने ठीक समझा ना?"
 
दीपा ने अपने दांतों तले उंगली दबाते हुए कहा, "बापरे! सोमजी, तुम तो बड़े नकलची निकले यार! तुमने तो मेरी बात का रट्टा ही लगा लिया ऐसा मुझे लगता है।"

बॉस ने कहा, "दीपा! मैं तुम्हारी बातों को हलके में नहीं लेता। अब तुम आगे कहो क्या कहना चाहती थी?"

दीपा ने अपनी बात पूरी गंभीरता से जारी रखते हुए कहा, "सोमजी. मेरी जिंदगी में सिर्फ दो ही लोग मेरे अंतरंग हैं, एक मेरे पति और दूसरे तुम। अगर तुम भी मुझे अंतरंग मानते हो तो हमारे बिच कोई भी पर्दा नहीं होना चाहिए। इसलिए यह माफ़ी बगैरह की बात मत कीजिये।" यह कह कर दीपा ने बॉस का सर अपने नंगे पेट के साथ सटा दिया और बोली, " अभी तो मेरा बदन पसीने से तरबतर है।अभी मैं नहाने के लिए जा रही हूँ। देखना कहीं आपके मुंह में मेरा खारा पसीना ना आ जाए।"

यह कर क्या दीपा बॉस को खुला आमंत्रण दे रही थी कीअगर बॉस चाहे तो दीपा के पेट को और नाभि को या फिर किसी और अंग को जीभ से चाट सकते हैं? अगर ऐसा था तो मुझे दीपा का ऐसा कहना अच्छा लगा।

दीपा की प्रोत्साहित करने वाली भाषा सुन कर बॉस ने दीपा का टॉप उठाना चाहा तो दीपा ने धीरे से बॉस के हाथ हटाते हुए कहा, "रुको भी सोमजी। धीरज रखो। धीरज का फल मीठा होता है।"

बॉस ने मेरी बीबी के पेट और नाभि को अपनी जीभ से हलके से चूम कर चाटते हुए कहा, "कोई बात नहीं, जल्दबाजी में मुझे थोड़ा खारा रस मिल रहा है, फिर भी मैं खुश हूँ।"

दीपा ने बॉस का हाथ पकड़ कर उठाते हुए कहा, "अब उठो और मेरे पतिदेव को रसोई में मदद करो। आज मैं रसोई में कोई काम नहीं करुँगी। आज रात काम करने के लिए मेरे साथ दो हट्टेकट्टे मर्द जो हैं।"

बॉस ने दीपा को आँख मार कर पूछा, "मैडम, इस बात के कई मतलब हो सकते हैं। क्या आप जानती हो?"

दीपा ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा, "अरे हटो, गंदे कहीं के। अगर तुम मुझे आप कह कर बुलाओगे तो मैं तुमसे बात नहीं करुँगी। लो मैं तो चली नहाने।"

बॉस ने दीपा को मुंह बना कर कहा, "क्या मैं भी चलूँ तुम्हारे साथ? जहां तुम्हारे हाथ नहीं पहोचेंगे वहाँ मैं साबुन लगा दूंगा और धो भी दूंगा।"

दीपा ने उसी अंदाज में कहा, "जानती हूँ, तुम तो कभी से यही करने के सपने देख रहे होंगे?"

बॉस ने जवाब दिया, "यह तो कुछ भी नहीं है। और भी बहुत कुछ करने के सपने देखता हूँ मैं।"

दीपा ने कहा, "कहीं मेरे पति ने सुन लिया ना, तो आप तो बॉस हो, बच जाओगे; पर मुझे तो मार पड़ेगी और कहीं मुझे घर से निकाल ही ना दें।"

बॉस ने कहा, "तो मेरा घर खुला है, खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए।"

दीपा ने कोई जवाब नहीं दिया। वह तो वहाँ से फ़ौरन भाग कर नहाने के लिए जा चुकी थी। उसके पहले की बॉस निचे उतरे, मैं फुर्ती से निचे रसोई में पहुँच गया और खाने को गरम करने की कवायद में लग गया। मेरा लण्ड मेरी पतलून में खड़ा हो गया था। मेरे बॉस और मेरी बीबी की गरमागरम बातें मुझे भी गरम कर रही थीं।

बॉस ने आकर मेरा हाथ थाम कर मुझे "हेलो!" किया और बोले, "दीपक, मैं आपसे क्या कहूं? आप दोनों ने मेरे घर आ कर मुझ पर बड़ा एहसान किया है। आप दोनों मेरी टूटी हुई जिंदगी को जोड़ कर वापस पटरी पर लाने ने में मेरी मदद कर रहे हो उसका एहसान मैं जिंदगी भर तक चुका नहीं पाउँगा।"

मैंने बॉस का हाथ मेरी हथेलियों में दबाते हुए कहा, "बॉस, आप की जिंदगी हमारी जिंदगी से अलग थोड़े ही है? आप की जिंदगी से हम सब जुड़े हुए हैं। ख़ास तौर से मैं और दीपा तो आप को हमारा 'अंतरंग' मानते हैं।"

जब बॉस ने मेरे मुंह से भी 'अंतरंग' शब्द सूना तो वह मुझे देखते ही रहे। उनकी समझ में यह नहीं आया की मेरी पत्नी और मैं कैसे एक ही सुर में बात कर रहे थे। बॉस ने मुझसे लिपट कर कहा, "दीपक, आज से तुम मेरे जूनियर साथीदार नहीं, मेरे अंतरंग मित्र हो। तुम मुझे बॉस या सर मत कहो। मुझे सोम कह कर बुला सकते हो।"

मैंने कहा, "नहीं सर, मैं आपको सर ना कहूं तो फिर सोमजी कह कर बुलाऊंगा जैसे दीपा आपको बुलाती है। और सिर्फ मैं ही नहीं, दीपा भी आपकी अंतरंग मित्र है। जैसे दीपा और मैं मतलब हम अलग अलग नहीं हैं, वैसे ही आप हम दोनों को आपसे अलग मत समझो। हम जो कुछ कर रहे हैं वह आपके लिए नहीं, हमारे लिए कर रहे हैं। आजसे हम तीनो एक हैं। बॉस एक बात और। आप दीपा के साथ किसी भी तरह की बात करते हुए या कोई भी हरकत करते हुए मन में कोई भी संकोच कोई भी ऐसा ख़याल मन में मत रखना की मुझे बुरा लगेगा। दीपा जितनी मेरी है उतनी ही आपकी भी है। यह मैं पूरी तरह से मानता हूँ।"

मेरी बात भी तो सही थी। मैं तो चाहता ही था की बॉस दीपा के साथ सब कुछ करे। बॉस की जिंदगी वापस पटरी पर आने से हम को भी तो फायदा था।

बॉस ने कुछ समय के लिए मुझे उलझन भरी नज़रों से देखा, फिर बोले, "दीपक, मैं बता नहीं सकता की मैं आज आपके यह भाव से कितना खुश हूँ। मैं आप दोनोंके लिए कुछ भी कर सकता हूँ।"

उतनी ही देर में मेरी पत्नी दीपा नहा कर अपने कपडे बदल कर गाउन पहन कर हाजिर हुई। उन्होंने बॉस से मुझे बातें करते हुए सुन कर कहा, "मैं सुन रही थी की आप बिच बिच में मेरा नाम ले रहे थे। कहीं आप दोनों मुझे फँसाने का कोई प्लान तो नहीं कर रहे हो?"

मैंने तपाक से जवाब देते हुए कहा, "हम मर्द तुम्हें फँसाने वाले कौन हैं? तुमने ही हमें फँसा दिया है। इस संसार को औरतों ने ही अपने चक्कर में फँसा रखा है।"

हालांकि दीपा ने ढीला खुला हुआ गाउन पहना था पर मुझे दिख रहा था की उस गाउन के अंदर उसने और कुछ नहीं पहना था। नहाने के कारण दीपा का गाउन भी कुछ थोड़ा सा गीला था। दीपा के बाल भीगे हुए दीपा के पुरे ऊपरी बदन पर बिखरे हुए थे। दीपा ने एक तौलिया वैसे ही अपने बालों पर डाल रखा था। उनमें से हलकी सी बूंदें दीपा के गाउन को गीला कर रही थीं। हवा में बार बार गाउन दीपा की जाँघों के बिच में चिपक जाता था और दीपा की गाँड़ और उसकी चूत की झांकी भी हो रही थी। कभी दीपा के बड़े फुले हुए स्तन के दो गोले साफ़ दिख रहे थे और उन के ऊपर खड़ी दो फूली हुई निप्पलेँ भी दिख रहीं थीं।

बॉस बड़ी आतंरिक मशक्कत के बाद भी अपनी नजर वहाँ से हटा नहीं पाते थे। दीपा यह देख कर बिंदास बोली, "बॉस, ऐसे क्या देख रहे हो? जुठ मत बोलना?"

बॉस ने घबड़ाते हुए कहा, "कुछ नहीं, तुम्हारे गाउन पर एक मच्छर मंडरा रहा था।"

दीपा ने उसी अंदाज में पर धीरे से कहा, "एयरक्राफ्ट देख रहे थे या एयरपोर्ट? मच्छर देख रहे थे या मच्छर जहां बैठा था वह जगह? "

बॉस ने दीपा की बात का कोई जवाब नहीं दिया।

मैं भी दीपा की बात सुनकर हैरान रह गया। मैंने जैसे उसकी बात नहीं सुनी ऐसे काम में लग गया। बॉस भी अपनी नजरें वहाँ से हटा कर मेरे साथ काम में जुट गए।
 
खाना टेबल पर रखने के बाद मैंने कहा, "खाना लग गया है। सब आइये और बैठिये।"

दीपा ने कुर्सी में बैठते हुए कहा, "आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया। आप दोनों क्या बात कर रहे थे?"

बॉस ने अपना गला खुंखारते हुए कहा, "मैं दीपक को कह रहा था की अब दीपक मेरा असिस्टेंट नहीं मेरा अंतरंग मित्र है।"

दीपा ने खुश हो कर बॉस के हाथ पर अपना हाथ रख कर कहा, "सिर्फ दीपक ही क्यूँ? क्या मैं आपकी अंतरंग नहीं हूँ?"

बॉस ने दीपा के हाथ दबाते हुए कहा, "दीपा, हम तुम्हारे बारे में यही बात कर रहे थे। तुम सब से पहले मेरी अंतरंग हो। इसमें कोई शक नहीं है। दीपक कह रहे थे की जैसे तुम और दीपक एक हो वैसे ही उसने अब मुझे भी तुम दोनों के साथ शामिल कर दिया है। वह कहता है हम तीनों अंतरंग हैं हम तीनों एक हैं।"

मैंने कहा, "सर, अभी हम डिनर खा कर फिर आराम से बाते करेंगे।"

बॉस ने कहा, "आप मेरे घर आने का यह पहला दिन है। क्यों न आज पार्टी हो जाए?"

मैंने कहा, "जरूर पार्टी तो होनी चाहिए।"

बॉस ने फ़ौरन उनके बार में से आयात की हुई व्हिस्की की एक बोतल निकाली। साथ साथ ऊपर के शेल्फ में से तीन गिलास भी निकाले और सब में व्हिस्की डालने लगे।"

दीपा ने फ़ौरन अपना हाथ एक गिलास पर रखते हुए कहा, "मैं नहीं पियूँगी। मैं शराब नहीं पीती।"

बॉस ने कहा, "दीपा यह कोई देसी शराब नहीं है। यह इम्पोर्टेड व्हिस्की है। थोड़ी पीलो ना? हमारी खातिर?"

दीपा ने बॉस की और देखा फिर मेरी और देखा। मैंने कंधा हिला कर मेरी सहमति जाहिर की। दीपा ने आखिर कहा, "ठीक है, तुम कह रहे हो तो थोड़ी सी आप लोगों की कंपनी के लिए पी लुंगी। पर मैं यह बतादूँ की मुझे थोड़ी सी भी चढ़ जाती है। इस लिए आगे मुझे ज़रा भी आग्रह मत करना प्लीज?" और मेरी और घूम कर बोली, "सोमजी, इनको तो बिलकुल मत पिलाना। इनको तो एकदम नशा चढ़ जाता है और फिर वह ऐसे सो जाते हैं की इनको होश ही नहीं रहता। फिर आप नगाड़े बजाओगे तब भी वह सुबह तक नहीं उठेंगे।"

हम तीनों ने गिलास उठा कर "चियर्स" किया। बॉस ने कहा, "हम तीनों की लम्बी और ख़ुशी भरी दोस्ती के लिए "चियर्स"।"

मैंने मेरा गिलास जल्दी ही ख़त्म किया। दीपा ने तो सिर्फ एक घूंट अपनी आँखें बंद कर पी और फिर ग्लास छोड़ दिया। दीपा ने मेरे करीब आ कर बॉस ना सुन सके ऐसे हलके से कहा, "दीपक, तुम नशे में लुढ़क जाने का नाटक करो।"

मैंने खड़े हो कर मेरी पीठ बॉस की तरफ कर ऐसा दिखावा किया जैसे मैंने एक बड़ा पेग बनाया और मैं उसे गटागट पी गया। बॉस दीपा के साथ कुछ इधरउधर की बातें करने में लगे थे। बॉस बार बार दीपा के गाउन को इधर उधर लहराते हुए देख रहे थे। कई बार वह ऊपर से चोरी से दीपा के क्लीवेज को घूर रहे थे।

मैं उनसे बातें करते हुए फिर खड़ा हुआ और मैंने फिर एक और पेग बना कर पीने का नाटक किया। कुछ देर बाद मैं उनकी बातें सुनते हुए ही धीरे से टेबल के ऊपर अपने दोनों हाथ लम्बे कर लेट गया। बॉस ने मेरी और देखा और फिर दीपा की और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा।

दीपा ने कहा, "मैंने कहा था ना की इन्हें ज्यादा मत पिलाओ? इन्होने ज्यादा पी ली है। लगता है यह लुढ़क गए।" फिर मुझे पकड़ कर दीपा झकझोरने लगी। वह मुझे खाना खा कर सोने के लिए कह रही थी। पर जो जाग रहा हो उसे कैसे जगाया जाए? मैं बिलकुल ही नहीं हिला।

आखिर में दीपा ने उलझन भरी आवाज में बॉस से कहा, "यह तो गए काम से। इन्हें अब हम को उठा कर ऊपर ले जा कर बिस्तर पर सुलाना पडेगा। पर पहले हम खाना खा लेते हैं।"

ऐसा कह कर दीपा ने अपने और बॉस के लिए खाना परोसा। खाना परोसते हुए दीपा बॉस के करीब गयी और उसने पहला निवाला बना कर बॉस के मुंह में देना चाहा तब बॉस ने मेरी और देख कर मेरी बीबी को इशारों में ही पूछा की कहीं मैं देख तो नहीं रहा?

तब दीपा ने मैं सुन सकूँ ऐसे बॉस को बोला, "अब इनकी चिंता मत करो। सुबह तक उन्हें होश नहीं आएगा।" यह कह कर दीपा ने बॉस के मुंह में वह निवाला रख दिया।

बॉस ने एकदम दीपा को अपनी बाँहों में खिंच कर अपनी गोद में बिठा दिया और दीपा का मुंह ऊपर कर बॉस ने दीपा को किस करना चाहा। मैंने अपनी आँखों के ऊपर एक बाजू रखी थी ताकि मैं तो उनको देख सकूँ, पर उनको मेरी खुली आँख ना दिखे। बॉस की बाँहों में जाते ही मेरी बीबी मचल उठी और बॉस के मुंह को दूसरी तरफ हटाती हुई बोली, "अरे अभी खाना खा रहे हो तो मुंह का उपयोग खाने में करो। मुंह साफ़ करने के बाद जो चाहे कर लेना।"

मेरी बीबी बॉस को साफ़ इशारा कर रही थी की खाने के बाद जो चाहे वह कर सकते हैं। बॉस और दीपा ने जल्दी ही खाना खा लिया। दोनों ने मिल कर टेबल साफ़ लिया और बर्तनों को सिंक में रख दिए।

जैसे ही दीपा ने सारा काम कर अपने हाथ साफ़ किये की बॉस उससे लिपट गए और इस बार बॉस ने दीपा का मुंह अपने एकदम करीब ले लिया और दीपा का कोई भी प्रत्यारोध की परवाह ना करते हुए दीपा के होँठों के ऊपर अपने होँठ कस कर भींच दिए और दीपा को गहराई से किस करने लगे। उस समय मैं उनको देख नहीं पा रहा था। पर मैं वहाँ से हिल भी नहीं सकता था।
 
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