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Guest
शादी के एक महीने तक तो शिखा मेरे साथ ठीक ठाक सलूक कर रही थी और हमारी सेक्स लाइफ भी चल ही रही थी। शुरू से ही मुझे ऐसा लग रहा था की शिखा का किसी और के साथ कुछ अफेयर था। शादी के कुछ दिनों के बाद ही उसने अपने रंग दिखाने शुरू किये। वह मुझसे नफरत करने लगी थी, क्यों की उसका कोई बॉय फ्रेंड के साथ चक्कर था। मैंने उस के लिए काफी बलिदान दिया और काफी समय तक उसकी जली कटी सुनता रहा। वह बेतहाशा खर्च करती थी और पिता से पैसे मांगती रहती थी जो मुझे चुभता था। वह ना मेरी ना मेरे दोस्तों की, ना रिश्ते दारों की इज्जत करती थी।
वह सिर्फ पैसों को ही जानती है। मुझे नहीं चाहिए ऐसा जीवन साथी। मैं अकेला ही ठीक था। अब अचानक ही वह छोड़ कर चली गयी और ऊपर से एक के बाद एक लीगल नोटिस भेजनी शुरू कर दी। तुम ही बताओ मैं क्या करूँ? अब मैंने यह तय किया है की मैं शिखा को भूल जाऊं। पर क्या करूँ मैं उसे याद करना नहीं चाहता पर उसने जो मुझ पर घाव किये हैं उस कारण उसे भूल भी नहीं सकता। क्या तुम मुझे शिखा को भुलाने और नयी जिंदगी देने में मेरी मदद करोगी?"
दीपा कुछ सोच कर पूछा, "क्या उसे आपसे कुछ पैसे चाहिए?"
बॉस ने कहा, "वह एक घमंडी औरत है। उसने नोटिस में भी लिखा है की उसे कोई निर्वाह धन राशि नहीं चाहिए।"
बॉस की बात सुनकर दीपा सोच में पड़ गयी। दीपा ने बॉस का टेबल पर रखा हुआ हाथ थाम कर कहा, "सर, मेरा मतलब है सोमजी, मुझे नहीं पता की शिखाजी का आपके जीवन में क्या स्थान था अथवा है। पर ऐसी औरत को भूल जाने में ही भलाई है। अगर उसे कोई धन राशि नहीं चाहिए तो बेहतर है की शायद जो कुछ भी हुआ वह आप के लिए अच्छा ही हुआ, ऐसा मैं मानती हूँ। इसे आप एक घाव समझ कर भूल जाएँ। यह घाव धीरे धीरे भर जाएगा और मैं उस घाव को भरने में आपकी पूरी मदद करुँगी। आप चिंता मत करिये। हम आपके साथ हैं। अगर आप वास्तव में मेरी मदद चाहते हैं तो सबसे पहले तो ऑफिस जाना शुरू कीजिये और ऑफिस के बाद हर शाम आप यहां रोज आइये। हम साथ में खाएंगे और ऑफिस काम के बारे में या और कुछ गपशप मारेंगे उसके बाद ही आप घर जाइये। अब आप शांत हो जाइये।"
मेरी बीबी ने बातों बातों में बॉस को कह दिया की बॉस को अब रोज ऑफिस जाना होगा। उसके बाद ही वह शाम को हमारे घर डिनर के लिए आएं।
फिर दीपा कुछ रुक कर अपने आप से ही बोलने लगी, "साला यह 'आप' मुंह से निकल ही जाता है। सोमजी मुझे आप बोलने के लिए माफ़ करना पर मैं आपकी इतनी रेस्पेक्ट करती हूँ की तुम बोलना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है।"
बॉस ने कुछ पीछे हट कर कहा, "अगर तुम मुझे रेस्पेक्ट करती हो तो दीपा फिर मेरे और तुम्हारे बिच में रेस्पेक्ट की एक दिवार होगी। रेस्पेक्ट उनको करते हैं जिनको हम अंतरंग और उत्कट प्यार नहीं करते। जब अंतरंग और उत्कट प्यार होता है तो रेस्पेक्ट उसमें अन्तर्निहित होता है। उसे दिखाने की जरुरत नहीं पड़ती। हम सम्मान किसको करते हैं? शिक्षक को, हमारे प्रधान मंत्री को या हमारे पिता को। पर हम प्यार किसे करते हैं? हमारी प्रेमिका या प्रेमी को या बीबी या पति को या बच्चे को। जिसे प्यार करते हैं उसे सम्मान देने की आवश्यकता ही नहीं है। सम्मान बाहरी है। प्यार अंदरूनी है। सम्मान हो उससे प्यार होना जरुरी नहीं है, पर प्यार हो वहाँ सम्मान होता ही है।"
दीपा ने अपने दोनों हाथ अपने गालों पर रख दिए और हैरानी से बोली, "बापरे! इतना ज्ञान! आपतो, मेरा मतलब है तुम तो बड़े ग्यानी निकले सोमजी। फिर तो मैं कहती हूँ की मैं तुम्हें सम्मान भरा प्यार करती हूँ।"
मेरी बीबी दीपा की बात सुन कर बॉस की आँखों में फिर वह चमक की झांकी मुझे दिखाई पड़ी। दीपा को अपना प्यार जता कर बाँहों में लेने के लिये आगे बढ़ रहे थे की दीपा ने उन्हें रोका और बोली, "अरे रुको भी। क्या कर रहे हो? इतनी भी क्या जल्दी है? थोड़ी तो धीरज रखो? अभी नहीं। दीपक आते ही होंगे।"
वह सही वक्त था मेरे एंट्री करने का। मैंने बाहर जाकर दरवाजे की घंटी बजायी। दीपा ने अंदर से ही आवाज दी, "दरवाजा खुला है।"
मैं जब अंदर पहुंचा तो बॉस कुर्सी पर बैठे थे और दीपा रसोई में खाना बना कर डाइनिंग टेबल पर लगाने में जुटी हुई थी। दीपा का चेरा लाल दिख रहा था। बॉस ने कुछ सेकंड के लिए ही सही पर मेरी बीबी को किस किया था। शायद उसको किसी गैर मर्द ने पहली बार किस किया था।
वह सिर्फ पैसों को ही जानती है। मुझे नहीं चाहिए ऐसा जीवन साथी। मैं अकेला ही ठीक था। अब अचानक ही वह छोड़ कर चली गयी और ऊपर से एक के बाद एक लीगल नोटिस भेजनी शुरू कर दी। तुम ही बताओ मैं क्या करूँ? अब मैंने यह तय किया है की मैं शिखा को भूल जाऊं। पर क्या करूँ मैं उसे याद करना नहीं चाहता पर उसने जो मुझ पर घाव किये हैं उस कारण उसे भूल भी नहीं सकता। क्या तुम मुझे शिखा को भुलाने और नयी जिंदगी देने में मेरी मदद करोगी?"
दीपा कुछ सोच कर पूछा, "क्या उसे आपसे कुछ पैसे चाहिए?"
बॉस ने कहा, "वह एक घमंडी औरत है। उसने नोटिस में भी लिखा है की उसे कोई निर्वाह धन राशि नहीं चाहिए।"
बॉस की बात सुनकर दीपा सोच में पड़ गयी। दीपा ने बॉस का टेबल पर रखा हुआ हाथ थाम कर कहा, "सर, मेरा मतलब है सोमजी, मुझे नहीं पता की शिखाजी का आपके जीवन में क्या स्थान था अथवा है। पर ऐसी औरत को भूल जाने में ही भलाई है। अगर उसे कोई धन राशि नहीं चाहिए तो बेहतर है की शायद जो कुछ भी हुआ वह आप के लिए अच्छा ही हुआ, ऐसा मैं मानती हूँ। इसे आप एक घाव समझ कर भूल जाएँ। यह घाव धीरे धीरे भर जाएगा और मैं उस घाव को भरने में आपकी पूरी मदद करुँगी। आप चिंता मत करिये। हम आपके साथ हैं। अगर आप वास्तव में मेरी मदद चाहते हैं तो सबसे पहले तो ऑफिस जाना शुरू कीजिये और ऑफिस के बाद हर शाम आप यहां रोज आइये। हम साथ में खाएंगे और ऑफिस काम के बारे में या और कुछ गपशप मारेंगे उसके बाद ही आप घर जाइये। अब आप शांत हो जाइये।"
मेरी बीबी ने बातों बातों में बॉस को कह दिया की बॉस को अब रोज ऑफिस जाना होगा। उसके बाद ही वह शाम को हमारे घर डिनर के लिए आएं।
फिर दीपा कुछ रुक कर अपने आप से ही बोलने लगी, "साला यह 'आप' मुंह से निकल ही जाता है। सोमजी मुझे आप बोलने के लिए माफ़ करना पर मैं आपकी इतनी रेस्पेक्ट करती हूँ की तुम बोलना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है।"
बॉस ने कुछ पीछे हट कर कहा, "अगर तुम मुझे रेस्पेक्ट करती हो तो दीपा फिर मेरे और तुम्हारे बिच में रेस्पेक्ट की एक दिवार होगी। रेस्पेक्ट उनको करते हैं जिनको हम अंतरंग और उत्कट प्यार नहीं करते। जब अंतरंग और उत्कट प्यार होता है तो रेस्पेक्ट उसमें अन्तर्निहित होता है। उसे दिखाने की जरुरत नहीं पड़ती। हम सम्मान किसको करते हैं? शिक्षक को, हमारे प्रधान मंत्री को या हमारे पिता को। पर हम प्यार किसे करते हैं? हमारी प्रेमिका या प्रेमी को या बीबी या पति को या बच्चे को। जिसे प्यार करते हैं उसे सम्मान देने की आवश्यकता ही नहीं है। सम्मान बाहरी है। प्यार अंदरूनी है। सम्मान हो उससे प्यार होना जरुरी नहीं है, पर प्यार हो वहाँ सम्मान होता ही है।"
दीपा ने अपने दोनों हाथ अपने गालों पर रख दिए और हैरानी से बोली, "बापरे! इतना ज्ञान! आपतो, मेरा मतलब है तुम तो बड़े ग्यानी निकले सोमजी। फिर तो मैं कहती हूँ की मैं तुम्हें सम्मान भरा प्यार करती हूँ।"
मेरी बीबी दीपा की बात सुन कर बॉस की आँखों में फिर वह चमक की झांकी मुझे दिखाई पड़ी। दीपा को अपना प्यार जता कर बाँहों में लेने के लिये आगे बढ़ रहे थे की दीपा ने उन्हें रोका और बोली, "अरे रुको भी। क्या कर रहे हो? इतनी भी क्या जल्दी है? थोड़ी तो धीरज रखो? अभी नहीं। दीपक आते ही होंगे।"
वह सही वक्त था मेरे एंट्री करने का। मैंने बाहर जाकर दरवाजे की घंटी बजायी। दीपा ने अंदर से ही आवाज दी, "दरवाजा खुला है।"
मैं जब अंदर पहुंचा तो बॉस कुर्सी पर बैठे थे और दीपा रसोई में खाना बना कर डाइनिंग टेबल पर लगाने में जुटी हुई थी। दीपा का चेरा लाल दिख रहा था। बॉस ने कुछ सेकंड के लिए ही सही पर मेरी बीबी को किस किया था। शायद उसको किसी गैर मर्द ने पहली बार किस किया था।