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हँसी तो फँसी

दीपा ने कहा, "सोमजी, अब इस खिचखिच से ऊपर उठिये और अपनी जिम्मेदारी सम्हालिए। आप एक कर्मठ बिजनेसमैन हैं। आप ऐसी छोटीमोटी परेशानी से विचलित नहीं हो सकते। आपको इससे कहीं बड़ी बड़ी बुलंदियों को छूना है। आपको आपकी कंपनी को हिन्दुस्तान की ही नहीं दुनिया की जानी मानी कंपनियों में स्थान दिलाना है। बोलिये यह आप कर सकते हैं या नहीं? मैं अपने आप को ऐसे व्यक्ति को समर्पित करुँगी जो इन छोटीमोटी समस्याओं से ऊपर उठकर अपना डंका न सिर्फ हिन्दुस्तान में बल्कि पुरे विश्व में बजाये ताकि मैं गर्व से कह सकूँ की यह मेरा प्रेमी है। बोलिये क्या मेरी यह चुनौती आपको स्वीकार्य है?"

बॉस दीपा की बात सुन कर बड़े ही आश्चर्य और अजूबे से मेरी बीबी को देखते ही रहे। उनकी समझ में यह नहीं आ रहा था की मेरी बीबी एक साधारण गृहिणी हो कर भी बिज़नेस की ऐसी गहराइयों और बारीकियों की इतनी पकड़ कैसे रखती थी। बॉस ने यह भी महसूस किया की कैसे एक औरत किसी इंसान को ऐसे मोटीवेट कर सकती है?

बॉस दीपा की बात सुन अभिभूत हो गए। अपनी बाँहे फैला कर उन्होंने दीपा को अपनीं बाँहों में जकड लिया और कहा, "दीपा, हाँ यह सही है की मैं शिखा ने जो मेरे साथ विश्वास घात किया उससे कमजोर पड़ गया हूँ और उससे उभर ने की कोशिश कर रहा हूँ। अगर मैं एक बार शिखा को उसकी औकात दिखा सकूँ तो मेरे मन में से उस राँड़ का साया हमेशा के लिए चला जाएगा। दीपा मैंने एम्.बी.ए. किया है और मैनेजमेंट में पी.एच.डी. भी हासिल की है। पर तुम्हारी बात में जो कोरा तथ्य है और और प्रोत्साहित करने की जो अद्भुत शक्ति है वह मैंने कहीं नहीं देखि ना पढ़ी है। वह मुझे आज तुमसे सिखने को मिली है। मैं मानता हूँ की मुझमें कमजोरियाँ हैं और उनसे ऊपर उठकर मैं तुम्हें प्रॉमिस करता हूँ की तुम्हें मुझसे जो उम्मीदें है वह मैं जरूर पूरी करूँगा। मैं हमारी कपनी को उस ऊंचाई पर ले जाऊंगा जिसकी तुम्हें और हमारे सारे कर्मचारियों को अपेक्षा है। इसमें कोई भी कसर नहीं छोडूंगा। यह मेरा वादा है।"

मैं हैरान रह गया जब दीपा ने कहा, "ऐसे सिर्फ वादे करने से नहीं चलेगा। मुझे बताओ, अभी बैठ कर प्लान करो की कल सुबह से तुम्हारा क्या शैड्यूल रहेगा? तुम कैसे इस कंपनी को अपने गंतव्य स्थान पर ले जाओगे। जहां तक शिखा को भुला ने का सवाल है उसको तो तुम मुझ पर छोड़ दो।"

बॉस की आँखों में और चेहरे पर निराशा के भाव दिखने लगे। बॉस के हाथ दीपा के गाउन के ऊपर उसकी छाती को हलके से मसाज कर रहे थे और बॉस के हाथ की हथेली और उँगलियाँ मेरी बीबी के स्तनों को अपनी हथेलियों में उठा कर उनसे खेल रहीं थीं। बॉस ने दीपा के गले में प्यार से अपनी दाढ़ी रगड़ते हुए अपनी हताशा जाहिर करते हुए पूछा, "दीपा, क्या स्केड्युअल अभी डिस्कस करना जरुरी है?" मेरी और देखते हुए बॉस ने पूछा, "क्या हम यह सब सुबह नहीं कर सकते? क्या यह सब अभी.....?"

दीपा ने वही सख्त आवाज में एक कड़े शिक्षक की अदा से मेरी और इशारा कर बॉस की बात आधे में ही काटते हुए कहा, "तुम मेरे प्राण नाथ पति की ज़रा भी चिंता मत करो। मुझे उनका सालों का तजुर्बा है। मुझे पता है की वह तो सुबह तक ऐसे ही पड़े रहेंगे। हम कितना भी चिल्लाएं, कुछ भी करें, उनके कानों में जु तक नहीं रेंगेगी। वह हिलेंगे भी नहीं। हमारे पास पूरी रात पड़ी है। मैं तुम से पूरी प्लानिंग नहीं मांग रही हूँ। मैं तुमसे सिर्फ टाइम लाइन चाहती हूँ की कब और क्या होगा। तुम्हारे जैसा मैनेजमेंट एक्सपर्ट तो इस प्लान के बगैर काम ही नहीं कर सकता। पिछले एक हफ्ते में तुमने यह तो सोचा ही होगा।"

बॉस की मेरी बीबी के प्रति निष्ठा हर पल उसकी बात सुन कर बढ़ती ही जाती थी। बॉस ने कहा, "जरूर सोचा है बॉस। मैं अभी आपको मेरी टाइम लाइन बताता हूँ। पर तुम्हारा यह रूप देख कर मेरा प्यार उमड़ रहा है। मैं इसे सम्हाल नहीं पा रहा। मुझे बस दो मिनट के लिए ही प्यार कर लेने दो। फिर तुम जो कहोगी वह मैं करूंगा।" बॉस ने ऐसा कह कर मेरी बीबी को अपनी बाँहों में दबोच लिया। उसको अपनी पूरी ताकत से जकड कर बॉस ने उसे अपने निचे सुला दिया और उसके ऊपर चढ़ गए। यह सब मेरी आँखों के सामने मरे एकदम करीब बिस्तर पर हो रहा था।

मैं मूक शाक्षी की तरह बिना हिले डुले चुपचाप बिस्तर में पड़ा इसे देख रहा था। मेरा लण्ड मेरे पाजामे में फर्राटे मार रहा था जिसे मैंने जबरदस्ती अपनी टाँगों के बिच में कस कर जकड रखा था।

दीपा ने बड़ी कोशिश की की वह बॉस के चंगुल से छूट जाए पर बॉस की सख्त पकड़ के सामने उसकी बेचारी की क्या चलती? आखिर में दीपा ने हाथ पाँव मारना बंद किया और बॉस से कहा, "ठीक है, बस दो ही मिनट।"

बॉस ने फ़ौरन अपना मुंह दीपा के मुंह के ऊपर रखा और अपने होँठों को दीपा के होंठो से कस कर दबाया और दीपा को बेतहाशा आवेश से चुम्बन करने लगे। बॉस के दोनों हाथ दीपा की गाँड़ के निचे घुस कर दीपा की गाँड़ को सेहला रहे थे। अपने पेंडू को उठा कर बॉस दीपा को गाउन के कपडे के ऊपर से ही चोदने की अदा करते हुए ऊपर निचे कर रहे थे।

बॉस की इतने जोश भरी प्यार की कवायद से मेरी बीबी के होश ही उड़ गए। उसके हालात भी कोई ज्यादा अच्छे नहीं थे। वह भी अपनी काम वासना में मरी जा रही थी। दो टांगों के बिच में उसका स्त्री रस भी तो बहने लगा था, जो उसे बॉस को ना रोकने के लिए जैसे दीपा को मजबूर कर रहा था।

बॉस दीपा के मुंह में अपनी जीभ को बड़ी दक्षता से घुमा फिरा रहे थे और कभी उसे अंदर तो कभी बाहर कर दीपा के होंठों को चाट रहे थे। दीपा बॉस के मुंह से निकलता हुआ रस बड़े चाव से निगल रही थी और मैं उसके चेहरे के भाव देख कर महसूस कर रहा था की वह बड़ी उत्तेजक स्थिति में थी। दीपा भी बॉस को अपनी बाँहों में जकड कर जैसे उन्हें अपने अंदर समा देना चाहती थी। बॉस बार बार अपनी जीभ अंदर बाहर कर मेरी बीबी के मुंह को अपनी जीभ से जैसे चोद रहे थे।

बॉस दीपा को इतने उन्माद भरी अवस्था में चुम्बन कर रहे थे जैसे उससे पहले उन्होंने किसी भी औरत को चुम्बन ही ना किया हो। करीब पांच मिनट तक बॉस और दीपा किस करते रहे। उस बिच बार बार बॉस दीपा के गाउन को उसकी जाँघों के ऊपर खिंच कर मेरी बीबी को निचे से नंगी करना चाह रहे थे और दीपा हर बार उसे फिर नीचा कर देती थी और बॉस को ऐसा करने से रोक रही थी।

ऐसे ही प्यार और चुम्बन की गेहमागहमी में काफी समय बीत गया तब दीपा ने बॉस को अपने ऊपर से हटने के लिए मजबूर किया। बॉस के बाजू में हट ने के बाद दीपा ने बॉस को अपनी चुटकियां बजाते हुए कहा, "तुम्हारे दो मिनट की जगह तुमने पांच मिनट ले लिए। धिस इस नॉट गुड सोमजी। समय सीमा की हमेशा पाबंदी रखनी चाहिए। चलो तुम्हारा प्यार करने का समय अब समाप्त। अब उठो और अपना काम करो।"

बॉस पर तो तब भी मेरी बीबी के होँठों के रस का नशा छाया हुआ था। वह बड़े ही क मन से उठ खड़े हुए और अपने खड़े हुए लण्ड को बड़ी मुश्किल से सम्हाल कर अपने पाजामें में एडजस्ट करते हुए लड़खड़ाते अपने बगल वाले कमरे में गए।

बॉस के जाने के बाद दीपा खिसक कर मेरे करीब आयी और मुझे बड़े प्यार से चद्दर ओढ़ाते हुए उस के अंदर अपना सर डाल कर मेरे होँठों पर अपने होँठ रख कर मुझे चुम्मा देते हुए बोली, "मेरे स्वामी, क्या मैं ठीक जा रही हूँ? तुम्हें कोई जलन या ईर्ष्या तो नहीं हो रही?"
 
मैंने मेरी बीबी का हाथ मेरे फुले हुए लण्ड पर रख दिया। मैंने कहा, "ईर्ष्या? मैं तो उत्तेजना का मारा हुआ मेरे इस लण्ड को सम्हाल नहीं पा रहा हूँ। मैं तुम्हें अभी इसी वक्त चोदना चाहता हूँ।"

मेरी बीबी आसमान की और देखती हुई बोली, " हे भगवान, मेरे दोनों प्रेमी सब्र नाम का कोई शब्द का अर्थ जानते ही नहीं। पता नहीं, मुझे इन दो मर्दों को धैर्य की परिभाषा सिखाने में कितना समय लगेगा।" फिर मेरी आँखों में आँखें डाल कर बोली, "सारा खेल बिगाड़ना चाहते हो? चुपचाप पड़े रहो और कुछ ही देर में अपनी बीबी को चुदवाते हुए देख लेना। बड़ा ही शौक था ना अपनी बीबी को किसी से चुदवाने का? तो अब भुगतो उस शौक का परिणाम, जिंदगी भर। अब मुझसे कोई शिकायत मत करना। और जैसा मेरा प्लान है, मेरे पतिदेव, तुम्हें मेरी चेतावनी है, की अपने आप को सम्हालना। जो आप देखने वाले हो वह देखते हुए तुम्हारी नसें कहीं फट ना जाएँ!"

ऐसे मुझे डाँट लगा कर दीपा उठ खड़ी हुई और मुझसे दूर बैठ कर मुझे इशारे से अपना अंगूठा दिखाती हुई शरारती अंदाज से मुस्कराती हुई बॉस के वापस आने का इंतजार करने लगी।

बॉस कुछ ही देर में वापस आये। उनके हाथों में उनका लैपटॉप था। टेबल पर लैपटॉप रख कर वह दीपा के पास आये। दीपा को इंतजार करते हुए देख कर बॉस ने फिर दीपा को अपनी बाँहों में जकड कर दीपा के होठोँ पर अपने होँठ रख कर एक किस की और फिर दीपा से अलग होते हुए बोले, "दीपा, मैं तुमसे अलग हो नहीं पा रहा हूँ। एक ही दिन में जैसे मुझे तुम्हारी आदत हो गयी है। खैर सबसे पहले यह एक्शन प्लान टाइम लाइन के साथ मैंने पहले से बना रखा है यह मैं तुम्हें दिखा रहा हूँ। मैं आज यह दिखाना नहीं चाहता था। मैं तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था। पर तुम्हारी जिद के कारण अब मुझे मजबूरन इसको तुम्हारे साथ शेयर करना पडेगा। यह मैं कल ऑफिस की मीटिंग में सब के सामने रखूंगा।"

यह कह कर बॉस ने अपने लैपटॉप में दीपा को उनकी कंपनी के लिए बनाया एक्शन प्लान दिखाना शुरू किया। दीपा ने जब देखा तो उसकी आँखें फ़टी की फ़टी रह गयीं। दीपा बॉस के बनाये हुए एक्शन प्लान को पढ़ने लगी।

दिनांक..... दीपा को डायरेक्टर बनाना

दिनांक...... कर्मचारियों को योग्यता और योगदान के अनुसार कंपनी में शेयर होल्डर बनाना.......

दिनांक..... बैंक से....... रुपये का मंजूर हुए ऋण की लागत लगा कर सॉफ्टवेयर पार्क में जगह लेना.. दिनांक..... प्रोडक्ट लॉन्च करना.......

दिनांक..... नाराज ग्राहकों से मिलना और उनकी शिकायतों को सुलझाना ........

दिनांक..... सेल्स प्रमोशन टीम को टारगेट दे कर सेल्स प्लान रेखांकित करना........

एक के बाद एक ऐसे और कई कार्यों को करने का स्केड्यूल बॉस ने बना कर रखा था। दीपा ने जब यह देखा तो दीपा देखती ही रह गयी। दीपा ने अपनी नजरें उठा कर बॉस से नजरें मिलाते हुए पूछा, "बॉस, तुमने तो मुझे बोल्ड ही कर दिया। इसमें मेरा नाम क्यों डाला हुआ है? मैं तो तुम्हारी कंपनी में कुछ हूँ ही नहीं। मुझे इसमें तुमने डायरेक्टर के पद पर दिखाया है। मुझे लगता है तुम्हारे जहन में मेरे लिए जो पागलपन है इसके कारण मैं तुम्हें हर जगह दिखाई पड़ती हूँ। शायद इसी लिए तुमने गलती से मेरा नाम डायरेक्टर की जगह लिख दिया है।"

बॉस ने कहा, "तुमने मुझे फिर बॉस कह डाला। खबरदार मुझे बॉस कहा तो। और तुम्हारा नाम गलती से नहीं डाला गया है। मैंने बड़े सोच विचार से तुम्हारा नाम डायरेक्टर के पद के लिए रक्खा है। मैंने यह निर्णय कोई जल्दबाजी में नहीं लिया है। इसके पीछे मेरा तुम्हारे बारे में महीनों से किया गया निरिक्षण और परिक्षण है। मैंने तुम्हें इस दरम्यान बड़ी बारीकी से स्टडी किया है। हमारी कंपनी में जो रिक्त स्थान है उसके लिए तुम्हारी योग्यता के बारे में मैंने पूरी जिम्मेदारी से सोचा है। तुम इस ओहदे के काबिल हो इसमें मुझे कोई शक और शुबह नहीं है। मैंने तुम्हारा नाम इस लिए नहीं डाला की तुम मेरी प्रियतमा हो या मैं तुम पर कोई एहसान कर रहा हूँ। मैंने तुम्हारी काबिलियत देखते हुए तुम्हें बड़े सोच विचार कर पसंद किया है। मुझे पूरा भरोसा है की तुम हमारी कंपनी को जो ऊंचाई पर हम सब ले जाना चाहते हैं उस पर ले जाने की पूरी क्षमता रखती हो और उसे वहाँ पहुंचाने में अपना पूरा योगदान दोगी।"

बॉस की बात सुन कर मेरी बीबी के चेहरे पर तो हवाइयां उड़ने लगीं। दीपा ने बॉस को धीरे से डरते हुए पूछा, "आर यू स्योर?"
 
बॉस ने मेरी बीबी को अपनी बाँहों में लेते हुए कहा, "आई एम् १००% स्योर। धेर इस नो डाउट इन माय माइंड। आप ने ही मुझे इस कंपनी को आसमान की उचाईयों तक ले जाने की एक चुनौती दी थी। अब आप मुझे बताओ की आप हमारे साथ शामिल हो कर इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हो की नहीं?"

दीपा ने बॉस की और प्यार भरी नज़रों से देखा। बॉस ने दीपा की मन चाह समझते हुए अपनी बाँहें फैलायीं। दीपा ने बॉस की बाँहों में सिमट कर कहा, "अगर तुम मुझे "आप" कहना बंद करोगे तो मैं यह चुनौती स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ। जैसे तुमने मुझे महीनों से स्टडी किया और उसके बाद मुझे इतनी बड़ी जिम्मेवारी देने का डिसिशन लिया वैसे ही मैंने भी पिछले कुछ दिनों में तुम्हें स्टडी कर एक डिसिशन लिया है। तुम्हें मेरे बॉस होते हुए भी और (मेरी और इशारा करते हुए) इनको मेरे पति होए हुए भी मेरे आदेश मानने पड़ेंगे। तुम्हें तो पता है की मैं बहुत ही सख्त टास्क मास्टर हूँ। अगर तुम्हें मुझ पर और मेरी काबिलियत पूरा भरोसा है तो तुम्हें आज एक बहोत जरुरी काम करना है और तुम्हें अच्छा लगे या बुरा, यह करना ही है। इसमें कोई हाँ, ना या और कोई खिचखिच नहीं चलेगी। मैं जो कहूँगी वह तुम करोगे? बोलो मंजूर है?"

बॉस ने दीपा के होँठों को चूमते हुए कहा, " १०० % मंजूर है। बोलो क्या आदेश है?"

दीपा ने कहा, "तो फिर सबसे पहले मेरा आदेश है की आज अभी तुम्हें मेरे साथ एक खेल खेलना होगा। मेरी और ऐसे मत देखो। तुम्हारे इस प्लान की सफलता के लिए यह यह खेल बहुत ही जरुरी है। यह खेल को रोल प्ले कहते हैं। रोल प्ले का मतलब समझते हो? रोल प्ले में हम अपना रोल यानी किरदार बदलते हैं। मैं मैं नहीं रहती और तुम तुम नहीं रहते। पर मैं जो रोल प्ले खेलने जा रही हूँ यह एक अलग सा रोल प्ले है। तुम तुम ही रहोगे पर मैं मैं नहीं रहूगी। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूँगी। आगे तुम्हें जैसा ठीक लगे ऐसा तुम प्ले करना। मैं जो चाहे वह मैं करुँगी। खेल में किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। हम जो चाहे, मेरी बात को ध्यान से सुनिए, जो कुछ भी चाहें कह सकते हैं और कर सकते हैं।"

बॉस दीपा की बात सुन कर उसे देखते ही रहे। दीपा ने बॉस की और देखा और कहा, "जब तुमने मुझे कुछ जिम्मेवारी के लिए चुना ही है तो देखते जाओ, मैं तुमसे और सब से क्या क्या करवाती हूँ। अब मैं अपने कमरे में जा रही हूँ। तुम यहीं रुको। मैं कुछ ही देर में वापस आती हूँ। मेरे वापस आते ही खेल शुरू होगा।"

फिर थोड़ा आगे चल कर रुकी, थोड़ा पीछे हट कर बॉस के करीब आयी और थोड़ी बुलंद आवाज में बोली, "मैं दुबारा कहती हूँ, इस रोल प्ले में तुम जो चाहे बिना झिझक कह सकते हो और जो भी करना चाहो बेधड़क बिना हिचकिचाहट कर सकते हो। तुम कुछ भी कर सकते हो। इसमें कोई पाबंदी नहीं है। मैं या कोई और, तुम को नहीं रोकेगा।"

बॉस ने दीपा को पकड़ना चाहा। पर दीपा खिसक गयी तब बॉस बोले, "क्या इसमें चुदाई करने पर भी कोई पाबंदी नहीं है?"

दीपा ने नजरें जमीन में गाड़े कहा, "मैंने बार बार कहा की कोई भी पाबंदी नहीं है। तुम कुछ भी कह सकते हो और कुछ भी कर सकते हो। चाहो तो तुम मर्डर भी कर सकते हो। इससे आगे मैं क्या कहूं?"

बॉस हैरानगी से दीपा को जाते हुए देखते रहे और अपने मन में बड़े ही उलझन में सोचते रहे की अब दीपा उनको क्या गुल खिलाएगी।

दीपा उठ खड़ी हुई और रूम के बाहर चली गयी। बॉस इंतजार करते रहे। धीरे धीरे समय बीतता जा रहा था। करीब आधे घंटे बाद जब बॉस को नींद आने लगी थी, तब बॉस को क़दमों की आहट सुनाई दी।

बॉस ने घूम कर देखा तो वह अपनी आँखों का विश्वास ना कर सके। उन के सामने साक्षात शिखा खड़ी थी। उस समय करीब आधी रात को अचानक उनकी पूर्व पत्नी जो उन्हें छोड़ कर चली गयी थी वह वापस कैसे आ गयी?

पर बॉस कुछ समझ सके उसके पहले बॉस को दीपा की आवाज सुनाई दी। दीपा ने हूबहू शिखा की तरह ही मेकअप किया था और चोटी भी शिखा की तरह बाँधी थी। यहां तक की अपने फुले हुए अल्लड़ स्तनों को छिपाने के लिए पता नहीं दीपा ने क्या पट्टी बाँध कर छाती सपाट दिखाने की कोशिश की थी। बॉस समझ ही नहीं पाए की शिखा के रूप में वह दीपा थी। बॉस को पलंग पर बैठे हुए देख कर दीपा ने बॉस को दहाड़ मारते हुए कहा, "सोम, क्या बात है? तुम आधी रात को मेरे कमरे में क्यों आये हो? जाओ अपने कमरे में जा कर सो जाओ। काफी रात हो चुकी है। मुझे डिस्टर्ब मत करो।"

बॉस ने दीपा की और देखा। दीपा शिखा के रोल और कपडे में भी निहायत खूबसूरत लग रही थी। बॉस ने आगे बढ़ कर दीपा को अपनी बाँहों में ले कर कहा, "डार्लिंग, आ जाओ ना मेरी बाँहों में। आज तुम्हें प्यार करने को मेरा मन तड़प रहा है।"

दीपा ने बॉस को एक करारा धक्का मार कर कहा, 'शर्म नहीं आती? तुम पागल तो नहीं हो गए? क्या मैं तुम्हारी बंधवा मजदूर हूँ की तुम जब चाहो मुझे यूज़ करो? तुम्हारी औकात ही क्या है सोम?"

बॉस ने फिर गिड़गिड़ाते हुए कहा, "डार्लिंग,क्या मैं इतना बुरा हूँ की तुम मुझे तुम्हारे प्यार के चंद लम्हे भी नहीं दे सकती? देखो आज मेरा बहुत मन कर रहा है? प्लीज?"

दीपा ने गुस्से से कहा, "अरे एक बार कहा ना? समझ में नहीं आ रहा है क्या? देखो, मुझे तंग मत करो। मुझे नींद आ रही है। मुझे कल अपने घर जाना है। पापा ने बुलाया है। उन्होंने नयी मर्सिडीज़ खरीदी है। मुझे वह लॉन्ग ड्राइव पर ले जाना चाहते हैं। अब जाओ और सो जाओ।"

दीपा के कड़वाहट भरे शब्द सुन कर बॉस में अचानक परिवर्तन आने लगा। उनकी आँखें लाल हो गयीं। शिखा को अचानक ही अपने सामने पा कर वह अपनी ब्याहता बीबी से इतने गुस्से में थे की पिछले कुछ महीनों की जो कड़वाहट, जो गुस्सा और जो कुंठा उनके मन में भरी थी वह उनक चहरे पर दिखने लगी। उन्हें लगा की धीरज की भी कोई हद होती है। उनके मन में दबी हुई काम वासना और गुस्से का खतरनाक संगम उस समय उनके दिमाग में धमाके की तरह तूफ़ान मचा रहा था।
 
बॉस ने दीपा का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड को सहलाने को लगाया और बोले, "साली छिनाल शिखा तू कितनी बेहया और जाहिल औरत है? मेरे साथ शादी कर के भी तूने मुझे पत्नी का सुख नहीं दिया। तो फिर तूने मुझसे शादी ही क्यों की? साली कुतिया, तू तो कुतिया कहलवाने के भी लायक नहीं है। मैं तुम्हारे लिए काफी समय से तड़प रहा हूँ। आज मैं नहीं रुकूंगा और तुझे पा कर ही छोडूंगा।"

दीपा ने बॉस के हाथ को झटके से हटा दिया और उतने ही गरम और तिरस्कार भरे शब्दों में कहा, "अच्छा? मेरे बापने मेरी शादी तुम्हारे साथ कर दी तो क्या तुम मेरे बदन के मालिक हो गए? मुझे जब चाहे तब रगड़ो और जब चाहो तब छोड़ो? अरे जाओ, तुम्हारे जैसे ऐरे गैरे तो मेरे बाबूजी के यहां नौकर हैं।"

यह सुन कर बॉस के दिमाग का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने दीपा की साड़ी पकड़ी और बड़ी ताकत से झटका मर कर खींची। एक ही झटके में दीपा घूमने लगी और बॉस ने दीपा की पहनी हुई साड़ी निकाल फेंकी। दीपा पेटीकोट में खड़ी हो गयी। दीपा ने जब बॉस की यह हरकत देखि तो उसकी चूत में से जैसे पानी की धार बहने लगी। पर उस समय उसे दीपा नहीं शिखा का रोल निभाना था।

दीपा जोर से चिल्ला कर बोली, "भड़वे! एक औरत पर ताकत दिखाता है? मैं तुझे कल सुबह देखती हूँ। मेरे पापा के पास जा कर तुझे मैंने जेल ना भिजवाया तो मेरा नाम शिखा नहीं।"

बॉस ने दीपा की एक भी बात ना सुनते हुए दीपा को करीब खींचा और दीपा के ब्लाउज को एक जोर से झटका मारा तो शिखा का ब्लाउज फट गया। बॉस ने अपनी आँखों से आग के शोले बरसाते हुए कहा, "अच्छा? कल सुबह की बात कर रही है तू राँड़? क्या तूने मुझे कोई नामर्द समझ रखा है? की मैं अपनी बीबी को किसी और से चुदवाते हुए देख कर भी कुछ ना बोलूं? मेरी सज्जनता को तू मेरी कमजोरी समझ रही है?"

यह कह कर बॉस ने लपक कर बॉस ने दीपा की ब्रा की पट्टी भी एक ही झटके में खोल दी। दीपा की ब्रा के अंदर दीपा के स्तनों को दीपा ने एक पट्टी में बाँध रखा था जिससे उसके स्तन छिप जाएँ। बॉस ने एक झटके में वह पट्टी भी फाड् डाली। दीपा के नंगे खूब सूरत स्तनोँ को देखते ही बॉस अपना होश खो बैठे। बॉस ने दीपा की कमर पकड़ कर उसे झुका कर उसके स्तनोँ पर अपना मुंह चिपका दिया। बॉस दीपा के गोर अल्लड़ सख्त और पुरे फुले हुए स्तनों को मुंह से चूसने लगे और दूसरे स्तन को एक हाथ में पकड़ कर उसे जोर से मसलने लगे।

अपने स्तनों पर बॉस का इतना जोशीला प्यार भरा चुम्बन का अनुभव कर दीपा मरी जा रही थी। दीपा का दिल जोर से धड़कने लगा था। दीपा की साँस फूल रही थी और उसकी छाती उपर निचे हो रही थी। दीपा की चूत में ना जाने क्या क्या मचलन हो रही थी। वह बॉस के बाहुपाश से बिलकुल छूटना नहीं चाहती थी। बल्कि वह बॉस को अपना सबकुछ समर्पण करना चाहती थी। पर उसे अपना काम करना था।

दीपा ने बॉस को धक्के मारते हुए हटाया और अपने स्तनोँ को दोनों हाथों से ढकते हुए तिरस्कार भरे शब्दों में कहा, "जबरदस्ती करना चाहते हो? खबरदार आगे बढे तो। मैं तुहारी कोई बंधवा मजदुर नहीं हूँ। मुझे हाथ मत लगाना। मैं तुम्हारी बीबी हूँ। कोई खरीदी हुई राँड़ नहीं। मैं एक रईस बाप की बेटी हूँ। मुझसे शादी करने के लिए कई रईसों के बेटों की लाइन लगी हुई थी। पर मेरी किस्मत खराब थी की मैंने तुम्हें पसंद किया। अब तुम मुझ पर कोई जबरदस्ती नहीं कर सकते।"

बॉस ने दीपा की बाँहें पकड़ कर अपने करीब खींचा और उसको अपनी टाँगों के बिच में लेकर बोले, "शिखा, मैं तुम्हारा पति हूँ। तुमने मुझे एक पत्नी का सुख कभी नहीं दिया। पति होने के नाते वह मेरा अधिकार था। पर तुमने मुझे हमेशा ना सिर्फ अपना नहीं समझा पर मुझे नीचा दिखाने की कोशिश की।"

दीपा ने बॉस को अपना विकराल रूप दिखाते हुए कहा, "अच्छा मैंने तुम्हें नीचा दिखा ने की कोशिश की? तुम सोमेंद्र, ऊँचे कबसे हो गए? तुम इतनी जल्दी भूल गए? अरे तुम तो वही सोम हो ना, जो मेरे बाप के आगे इन्वेस्टमेंट की भीख मांगने आये थे? और मेरे पिताजी ने दया कर के तुम्हारी कंपनी में इन्वेस्टमेंट कर तुम्हारे ऊपर बड़ा एहसान किया था? साथ साथ में तुम्हें अपनी बेटी मतलब मुझे भी ब्याह में दिया था? भीख मांगने वाला हमेशा नीचा होता है। मेरे पिताजी से और रुपये चाहिए तो मांग लो। शायद वह देदें। पर अब मुझे तुम्हारी बीबी बने रहने की कोई जरुरत नहीं है। तुम्हारे पास मुझे रखने के लिए पैसे नहीं है, इस लिए, गो टू हेल!" यह कह कर दीपा ने बॉस को ऐसा तगड़ा झटका दिया की बॉस कुछ कदम तक लड़खड़ाते पीछे हट गए।
 
दीपा की जली कुटी सुनकर बॉस के दिमाग की नसें फूल गयीं। बॉस की आँखों में खून की लालिमा लाल लाल दिखाई देने लगीं। इन्हें देख कर दिप को भी डर लगा। बॉस ने दीपा का गला पकड़ा और एक हाथ से उसके बाल पकड़ कर एक थप्पड़ मार कर कहा, "साली शिखा, तू अपने बाप के पैसे से मुझे अपना गुलाम बनाना चाहती है? तू सोचती है, मैं तुम्हारे पैसे से खरीदा जा सकता हूँ। राँड़, छिनाल, धोकेबाज। तू मुझ से बाप का पैसा दिखा कर ऐसे बात कर रही है? क्या तू यह समझ रही है की मैं अपने बलबुते पर पैसे नहीं कमा सकता? अरे तू आज मुझे क्या रोकेगी? आज मुझे तुम्हें चोदने से कोई नहीं रोक सकता। मैं तुझे दिखाता हूँ की मैं कौन हूँ।"

यह कह कर बॉस ने दीपा को पकड़ा और उसकी पेटीकोट का नाडा खोल दिया। दीपा का पेटीकोट सरक कर दीपा की जाँघों से निचे गिर पड़ा। दीपा हफडाताफड़ी में पैंटी पहनना भूल गयी थी। बॉस ने दीपा को पहली बार नंगी देखा। बॉस के नंगी दीपा को देख कर तो होश ही उड़ गए। शिखा का बदन और दीपा के नंगे बदन में आसमान जमीन का फर्क था।

दीपा एकदम रसीली, सेक्सी कामुकता की शिरोमणि और शिखा सुखी बंजर जमीन की तरह उजड़ी सी रूखी नीरस। दीपा के बदन का एक एक अंग बॉस को कराह कराह कर प्यार से चोदने के लिए पुकार रहा था। दीपा की अतुल्य खूब सूरत नंगी मूरत बॉस देखते ही रहे।

बिना कोई आवरण के नंगी दीपा जैसे कोई स्वर्णसुन्दरी लेटी हो ऐसी लग रही थी। बॉस के साथ गुत्थम गुत्थी के कारण दीपा ने बनायी चोटी खुल गयी थी। दीपा के बाल उसके कन्धों से होकर पीछे और आगे बिखरे थे। कुछ ही देर पहले नहाने के कारण उसके गीले बाल की जुल्फें चिपक कर खुले बालों के कई पतले गुच्छे बना रहीं थीं। दीपा की घनी तीखी भौंहें और उसकी छत्र छाया में दीपा की धनुष्य जैसी नशीली आँखें बॉस के मन को तीखी कटार से काट ने के लिए पर्याप्त थीं।

बॉस को नंगी दीपा की आँखें बड़ी नशीली और उन्मादक लग रहीं थीं। बॉस से चूमे हुए रसीले चमकते ओष्ट गुलाब की पंखुड़ियों के समान लगते थे। दीपा की नुकीली सुन्दर नाक और लम्बी गर्दन हँस की गर्दन सी लग रही थी। उसीके थोड़े निचे दीपा के अल्लड़ तने हुए फुले गुब्बारे सामान स्तन जो हलके चॉकलेट रंग की एरोलासे अच्छादीत थे; जिसमें उत्तेजना के कारण छोटी छोटी फुंसियां और उसके बिलकुल बीचमें तन कर खड़ी फूली निप्पलेँ स्तन की खूबसूरती में चार चाँद लगा देतीं थीं।

नंगे पेट और नाभि पर इस कदर लचीला घुमाव जो कूल्हों की विशालता दर्शाता था वह गिटार वाद्य के घुमाव सा मनमोहक था। ढूंटी के निचे हलके से पेट का उभरना और फिर वह उभार ढलाव में बदल कर चूत की पंखुडिपों में और कमल की डंडी सी जाँघों के बिच में समा जाना भी अपने आप में एक अद्भुत कामुक दृश्य था। बॉस लेटी हुई उनकी प्रियतमा का नग्न मनमोहक रूप देखते ही रह गए। "वाओ"के अलावा उनके मुंह से एक शब्द भी नक़ल नहीं पाया।

बॉस के हाथ का करारा थप्पड़ खाने से दीपा के गाल लाल हो गए थे। दीपा के कान में तमतमाती आवाजें चीखने लगी थीं। बॉस के चेहरे के भाव देख कर दीपा ने क्रोध से गुर्राते हुए बॉस को कहा, "एक औरत को थप्पड़ मार कर अपने आपको मर्द साबित करना चाहते हो? क्यों, क्या देख रहे हो? तुमने तो बहोत सारी लड़कियों को नंगा किया होगा? मैंने सूना है की तुमने मेरे पहले कई लड़कियों को चोदा है। तुम्हारे पास तो चुदवाने के लिए लडकियों और औरतों की लाइन लग जाती होंगी? तुम इतने हैंडसम जो हो? मैं भी तो फँस गयी थी तुम्हारे जालमें। पर शादी के बाद मुझे पता चला की तुम तो साले फक्कड़ हो। बीबी को पालने के लिए तुम्हारे पास दौलत नहीं तो फिर मेरे जैसी अरब पति की बेटी से शादी क्यों की? पर मैं उन सब औरतों की तरह वेश्या नहीं हूँ जो तुमने देख लिया तो कपडे उतार दूंगी और चुदवाने के लिए तैयार हो जाउंगी। ऐसे क्या देख रहे हो? तुम्हारी नियत ठीक नहीं लगती। देखो, तुम आगे मत बढ़ो। तुम मुझ पर बलात्कार करोगे? मेरे नजदीक मत आना। खबरदार मुझे हाथ लगाया तो।"

यह कह कर दीपा खड़ी हुई तब बॉस की तंद्रा हटी। कुछ पल के लिए वह दीपा के प्रति कामुकता के भाव में बह गए थे। पर शिखा के रोल में दीपा की तिरस्कार भरी जली कटी बात जब सुनी तो बॉस की आँखों में एक अजीब सा क्रूरता का जनून फिर से सवार हो गया। उन्हें फिर सामने खड़ी दीपा नहीं शिखा दिखाई देने लगी। उन्होंने तय किया की अगर शिखा नहीं मानी तो उसे वह जबरदस्ती चोद कर ही छोड़ेंगे। जो उन्होंने सालों तक नहीं किया वह उस रात करने पर बॉस आमादा हो गए थे। बॉस ने दीपा को एक जोरदार धक्का मार कर पलंग पर गिराया। दीपा गिरकर पलंग पर लेट गयी और गुस्से में कराहने लगी। वह बॉस को गालियां देने लगीं। मैंने पहली बार मेरी बीबी के मुंह से इतनी गन्दी गालियां सुनी थीं।
 
बॉस ने दीपा की और देख कर तिरस्कार भरे शब्दों में कहा, "तु समझती क्या है अपने आपको? क्या तू मुझे जिंदगी भर नचाती रहोगी, क्यूंकि तुम्हारे बाप ने मेरी कंपनी में पैसा लगाया है? तुमने मुझे अपनी मर्जी से शादी की। तुमने क्या सोचा था की शादी भी करोगी और मुझसे चुदवाओगी भी नहीं? क्या शादी पैसे के लिए ही करते हैं? तुमने मुझे शादी के बाद क्या दिया? मैंने सोचा था शादी करेंगे, बच्चे होंगे, एक परिवार होगा। पर तुम्हें तो पैसे, बंगला, गाडी, नौकर चाकर इसके आगे कुछ दिखता ही नहीं था। शिखा तुमने मेरी जिंदगी को जहर बना दिया। और फिर भी मैं तुम्हारा साथ निभाता रहा। मैंने सोचा तुम धीरे धीरे बदल जाओगी। पर तुमने तो डाइवोर्स का नोटिस भेज कर मेरी इज्जत का भी कबाड़ा कर दिया?"

दीपा भय भरी आँखों से बॉस की जिंदगी की उनकी कुण्ठा सुनती ही रह गयी। उसे तब तक इतना पता नहीं था की बॉस का ऐसा हाल था। बॉस अपनी कहानी बोले जा रहे थे , "तूने मुझे समाज में और अपनी खुद की नजर में ख़तम कर दिया, बर्बाद कर दिया।"

दीपा ने उसी कड्वाहट भरे शब्दों में बॉस को कहा, "अरे साले भड़वे, तुझ में हिम्मत है तो मुझे हाथ लगा कर दिखा। मैं तुम्हारी रंडियों जैसी नहीं हूँ की तुम्हारे बाँहें फैलाते ही मैं तुम्हारे निचे आ कर अपनी टांगें चौड़ी कर चुदवाने के लिए सो जाउंगी। समझे?"

बॉस का गुस्सा अब हद से पार जा रहा था। बोस ने देखा की उस दिन तक शिखा के साथ इस तरह की नौबत नहीं आयी थी। शिखा ने तो हद ही पार कर दी थी। वह अपने पति को गन्दी गन्दी गालियां दे रही थी और अपना बचाव करने के बजाय वह तो बॉस को ही लताड़े जा रही थी। इस औरत को सबक सिखाने का समय आ गया था।

बॉस ने फ़ौरन एक ही झटके में अपना पजामा उतार फेंका और वह दीपा के सामने अपना खड़ा लण्ड लहराते हुए खड़े हो गए। जब दीपा ने बॉस का इतना मोटा और लंबा तगड़ा लण्ड देखा तो उसकी हवा ही निकल गयी। उसने सपने में भी सोचा नहीं था की किसी मर्द का लण्ड इतना मोटा और इतना लम्बा हो सकता है। दीपा को समझ नहीं आ रहा था की उसकी छोटी सी चूत में इतना बड़े पाइप जैसा लण्ड अंदर घुसेगा कैसे और वह जब अंदर बाहर होगा तो वह तो दीपा की चूत को फाड़ ही देगा उसमें दीपा को कोई शक नहीं था। दीपा बॉस से चुदवाने के सपने देख रही थी वह बॉस के ऐसे घोड़े जैसे लण्ड को देख कर इतनी डर गयी की उससे बोला ही नहीं जा रहा था। पर तब बहोत देर हो चुकी थी।

दीपा ने लण्ड लहराते हुए बॉस से चिल्ला कर कहा, "सोम, तुम अभी के अभी यहां से चले जाओ। इतना मोटा लण्ड दिखा कर तुम यह समझते हो की मैं तुमसे चुदवाने के लिए तैयार हो जाउंगी? तो यह तुम्हारा भ्रम है।" दीपा ने अपनी चूत को दोनों हथेलियों से ढकते हुए कहा, "गेट आउट ऑफ़ माय रूम, ओ नामर्द इंसान।"

बॉस ने जैसे ही शिखा से नामर्द शब्द सूना की वह सीधा ही दीपा के ऊपर टूट पड़े। दीपा की चूत को ढकी हुई दीपा की हथेलियों को हटाया और दीपा की जाँघ के ऊपर एक करारा तमाचा मार कर दीपा की टाँगों को ऊपर उठाकर अपने कन्धों पर रखा। गुस्से में बिना कुछ सोचे समझे दीपा की चूत में अपना खड़ा हुआ लोहे की छड़ जैसा घोड़े के लण्ड सा लंबा और मोटा लण्ड घुसेड़ दिया। जैसे ही बॉस का इतना मोटा और लंबा लण्ड बिना कुछ तैयारी किये हुए घुसने लगा की दीपा की तगड़ी चीख से पूरा बैडरूम गूंज उठा। मैंने अपने आप को बड़ी ही मुश्किल से उठने से रोका।

बॉस का लण्ड घुसने से दीपा की चूत की चमड़ी शायद फटने लगी थी। दीपा दर्द के मरे कराहने लगी। मैंने भी देखा की दीपा की चूत में से खून की हल्की धार निकली। जब बॉस ने यह देखा तो अचानक वह हिल गए। गुस्सा, कड़वाहट और हैवानियत का भूत जो उनके दिमाग पर सवार था वह दीपा की चूत में से रिसते हुए खून को देख कर जैसे अचानक गायब हो गया। अचानक उन्हें होश आया की जिस पर वह टूट पड़े थे वह शिखा नहीं, उनकी प्यारी दीपा थी।

बॉस ने धीरे से अपना लण्ड दीपा की चूत में से निकाला। पर बॉस ने जब दीपा की और देखा तो पाया की दीपा हिल नहीं रही थी। बॉस को डर लगा। दीपा उस की चूत में अचानक बॉस को इतना बड़ा लण्ड घुसने से जो दर्द उसकी चूत में हुआ था उसके कारण शायद बेहोश हो गयी थी। बॉस ने दो या तीन बार दीपा को बुला कर हिलाया। पर दीपा नहीं उठ पायी। दीपा का यह हाल देख कर बॉस दीपा के ऊपर गिर पड़े और फफक फफक कर रोने लगे।

बॉस की आँखों से निकली अश्रुधारा से दीपा का चेहरा गीला हो रहा था। अपने चेहरे पर आँसुंओं की धार पड़ते ही दीपा हिली। उसे धीरे होश आया और उसने बॉस को बच्चे की तरह फफक फफक कर रोते हुए पाया।

इतने बड़े आदमी को इस तरह रोते हुए देख कर दीपा को बड़ा ही आश्चर्य हुआ। बीबी कैसी ही क्यों ना हो, उससे तलाक का सदमा कितना गहरा होता है और एक इज्जतदार आदमी के लिए वह कितना घातक होता है वह दीपा ने महसूस किया। दीपा ने बॉस को अपनी बाँहों में लेकर उनका सर अपनी छाती पर रख दिया। दीपा के नंगे कड़क स्तनोँ का स्पर्श बॉस के होंठों को हुआ। दीपा के स्तनों का स्पर्श होते ही बॉस की आँखों में से आंसू फव्वारे की तरह उमड़ पड़े।
 
बॉस ने दीपा के स्तनोँ को अपने मुंह से चूमते हुए ऊपर देख कर दीपा की आँखों से आँखें मिला कर कहा, "दीपा आज वाकई में मैं पागल हो गया था। मैं पता नहीं कैसे तुम्हें शिखा समझ बैठा और अपना आपा गँवा बैठा। मैंने तुम्हें जिस हिंसक तरीके से मारा है उसकी मुझे सजा मिलनी चाहिए। मैं तुम्हारी माफ़ी के लायक भी नहीं हूँ।"

दीपा ने बॉस के सर में अपनी उंगलियां घुसा कर उनके बालों को संवारते हुए कहा, "सोमजी, वह मैं नहीं वह शिखा ही थी जिसे तुम मार रहे थे। वह मैं नहीं शिखा ही थी जिसका तुमने अपमान किया और जिस को तुमने जबर्दस्ती चोदा। वह अब तुम्हारी जिंदगी में कभी वापस नहीं आएगी और नाही तुम्हें उसकी जरुरत है, क्यों की अब तुम्हारी जिंदगी से शिखा हमेशा हमेशा के लिए चली गयी है। तुम्हारी बाँहों में शिखा नहीं दीपा है। और वह तुम्हारी प्यारी दीपा नंगी तुम्हारी बाँहों में तुमसे चुदवाने के इंतजार में पड़ी हुई है। अब शिखा को भूल जाओ और दीपा को अपनाओ।"

दीपा की बात बॉस के कानों पर जैसे डंके की चोट सी असर कर रही थी। उनके मन में दीपा के प्रति जो सम्मान और प्यार था वह यह सब देख और सुन कर कई गुना बढ़ गया। उन्होंने दीपा के भरे हुए स्तनोँ को चूमते हुए कहा, "दीपा आज तुमने मुझे एक अनूठे तरीके से निराशा, अफ़सोस और दुःख की गर्त से निकाल कर आत्मसम्मान और उम्मीद के साथ प्यार की ऊंचाइयों पर लाने की सफल कोशिश की है। मुझे उस शिखा राँड़ से पिंड छुड़ाने के लिए तुमने जो किया है, मुझे पता नहीं उसका ऋण में कैसे चुका पाउँगा?"

दीपा ने बॉस के सर पर हाथ फेरते हुए कहा, "सोमजी, अब उस मुसीबत की जड़ को तुमने निकाल फेंका है। अब शिखा नहीं दीपा तुम्हारी है और सदैव तुम्हारे साथ रहेगी। जो उस राँड़ ने तुम्हें नहीं दिया वह मैं तुम्हें दूंगी। वह राँड़ तुम्हारे घर से तो निकल ही गयी है और उसकी जगह एक दूसरी राँड़ आ गयी है। अब तुम्हें उसे सम्हालना होगा।"

दीपा ने बॉस के पाजामे का नाडा खोल दिया और बॉस के होँठों को चूमते हुए कहा, "अब यह दीपा तुम्हारी है और रहेगी जब तक तुम उसे अपने दिल से या घर से निकाल नहीं दोगे। जहां तक तुम्हें पत्नी का सुख देने का सवाल है तो सोमजी, यह सुख तुम्हें मैं जरूर दूंगी और भरपूर दूंगी। पर साथ में मेरी एक शर्त है की मैं भी तुम्हें अपना गुलाम बना कर रखूंगी।"

दीपा की बात सुनकर बॉस हँस पड़े। उन्होंने कहा, "दीपा इसी लिए मैं तुम्हारा कायल हूँ। मैं तो तुम्हारा गुलाम बनने के सपने कभी से देख रहाहूं। मैंने इसी कारण तुम्हें मेरी कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए चुना है। हर समस्या का समाधान करने का एक असरदार तरिका होता है जिसे कहते हैं "बॉक्स के बाहर सोचने का तरिका' मतलब असाधारण योजना को अपनाना। और वह तुम भलीभाँती जानती हो। मेरे जहन में शिखा का अचानक ही मेरी जिंदगी से चले जाने का सदमा इतना तगड़ा था की पिछले कुछ हफ़्तों से उसने मुझे और मेरे आत्म विश्वास को तोड़ कर चकनाचूर कर दिया था। उस आत्म विश्वास को वापस लाना बड़ा ही मुश्किल था। इंसान का आत्मविश्वास जब टूट जाता है तब वह आसानी से वापस नहीं आता उसे वापस लाने के लिए मानसशास्त्री यानी साइकोलॉजिस्ट को भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

पर तुमने ऐसा सहज रास्ता अपनाया और यह रोल प्ले कर मुझे एहसास दिलाया की शिखा के मन में जब मेरे लिए कोई जगह थी ही नहीं और जब शिखा मेरे काम की थी ही नहीं तो फिर वह मेरी जिंदगी से चली जाए यही मेरे लिए बेहतर है। इसके लिए अफ़सोस करना या अपने आप को ग़म के अँधेरे कुँए में ड़ाल देना एक पागलपन या कोरी बेवकूफी है यह तुमने शिखा का रोल प्ले कर मुझे दिखा दिया। मेरे जहन में जो एक रंजिश घर कर गयी थी की मुझे उस औरत को एक सबक सिखाना था वह तुमने इस रोल प्ले कर दूर कर दी।"

बॉस की तारीफ़ सुन कर दीपा का चेहरा शर्म से लाल हो गया। दीपा ने शर्माते हुए कहा, "मेरा तुम्हें सर कहने का मन हो रहा है। पर मैं तुम्हें सोमजी ही कहूँगी। सोमजी, तुमने मेरी काबिलियत परखी इसलिए मैं तुम्हारी ऋणी हूँ। इसी कारण मुझे भरोसा है हमारी कंपनी बिज़नेस में तरक्की कर ऊँची बुंलदियों को छुएगी। पर आज रात हमारी सुहाग रात है। मेरे लिए यह दूसरी सुहाग रात है। तो मेरे राजा आओ और तुम्हारी दीपा को आज की रात पूरी तरह से एन्जॉय करो। आज की रात मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ।"

दीपा की बात सुनते ही बॉस ने दीपा के स्तन को अपने मुंह में बड़ी मुश्किल भर लिया। हालांकि वह पूरा स्तन तो भर नहीं पाए पर उन्होंने लगभग आधे से ज्यादा स्तन पने मुंह में चूस के इतने जोर से खींचा की दीपा के मुंह से चीख निकल गयी। दीपा ने कहा, "यार ज़रा धीरे से। मैं कहीं भागी नहीं जा रही। यह अब तुम्हारे ही हैं, चाहे जितना चुसो। पर थोड़ा धीरे से।" बॉस ने जब दीपा के स्तन को छोड़ा तब दीपा ने अपने स्तन को देखा तो बॉस के दाँतों के निशान दिख रहे थे और पूरा स्तन लाल हो गया था।
 
बॉस के चेहरे पर अब वही पुरानी मस्ती और शरारत थी। बॉस ने दीपा के स्तनोँ को चूसते हुए मेरी और उंगली करते हुए पूछा, "वह सब तो ठीक है, पर इन महाशय का क्या?"

दीपा ने कहा, "यह बेचारे कहाँ जाएंगे? तुम्हें मेरे साथ इनको भी झेलना पडेगा। तुम दोनों ने मिलकर मेरा हाल तो ऐसा कर दिया की क्या बताऊँ? सब ने सूना होगा की अक्सर एक पति की दो पत्नियां होतीं है, यहां तो एक पत्नी के दो पति होने वाले हैं।"

बॉस ने कहा, "तुम हो ही ऐसी। तुम्हारी जैसी सेक्सी और अक्लमंद औरत को तो कई पति होने चाहिए, पर अब मैं आ गया हूँ ना। मैं अब तुमको इस महाशय के अलावा और किसी के साथ शेयर नहीं कर सकता। क्या करूँ इनके साथ तुम्हें शेयर करना मेरी मज़बूरी है।"

अब बॉस के चेहरे पर वही पुरानी रौनक वापस आ चुकी थी। दीपा के पीछे आये और लेटी हुई दीपा की जांघें दोनों हाथों से चौड़ी करने लगे। दीपा ने कस कर अपनी जांघें बंद कर रखी थीं। बॉस ने ताकत लगा कर उन्हें खोलीं और दीपा की चूत को देखा। उस समय भी दीपा की चूत से निकले खून के कुछ धब्बे दिख रहे थे। बॉस ने झुक कर दीपा की चूत को चूमा और और खून के धब्बे चाट लिए और दीपा से कहा, "देखो, आज रात हम हनीमून मनाने का कार्य क्रम पोस्टपोन कर देते हैं। हम हनीमून कल मनाएंगे। आज तुम्हें मैं जो घाव दिए हैं उनको ठीक होने दो।"

दीपा ने कहा, "बिलकुल नहीं, यह घाव मेरे लिए तोहफे हैं। यह दर्द मेरे लिए सुख है। हम उस राँड़ के जाने का उत्सव और तुम्हारी इस नयी राँड़ के आने का उत्सव आज ही मेरी दूसरी सुहाग रात के रूप में मनाएंगे।"

बॉस बिस्तरे ऊपर बैठ गए। बॉस ने दीपा के नंगे बदन को दूसरी बार देखा। पर अब वह बदन शिखा का नहीं दीपा का था। दीपा के नंगे बदन को बारीकी से देखते हुए बॉस का लण्ड फुफकार ने लगा। बॉस ने दीपा के बदन का मुआयना करते हुए मुस्काते हुए कहा, "मैंने इससे पहले इतनी सुन्दर खूबसूरत नंगी औरत आज तक नहीं देखि। और वह भी मेरी अपनी होने वाली है यह मेरे लिए कितने गर्व का विषय है, यह तुम नहीं समझोगी।"

दीपा ने मुंह मोड़ते है कहा, "मैंने भी इसके पहले, इतनी सुन्दर नंगी औरत के साथ कुर्ता पहना हुआ ऐसा हैंडसम मर्द कभी नहीं देखा।"

बॉस ने दीपा का ताना सुनकर फ़ौरन अपना कुर्ता निकाल दिया। फिर एकदम नंगधडंग बॉस दीपा के सामने खड़े हो गए। दीपा भी अपनी साँस थामे बॉस के फिट बदन को देखती ही रही। बॉस के बड़ी ही बारीकी से कटे हुए काले घने घुंघराले बाल उनके खूबसूरत चेहरे पर मुकुट की तरह सजे हुए लग रहे थे। बॉस की लम्बी नाक शायद उनकी बुद्धिमत्ता की गवाही दे रही थी। बॉस का विशाल ललाट और उस पर अंकित कुछ रेखाएं उनको इतनी कम उम्र में इतनी सारी जिम्मेदारियां उठा लेने की क्षमता दर्शा रहीं थीं। दीपा की लाल लिपस्टिक से लाल रंग में रंगे बॉस के होँठ कुछ ही देर पहले दीपा को किस की थी उसकी चुगली खा रहे थे। उनके मजबूत कंधे, बड़ी विशाल भुजाएं, चौड़ी छाती और करारे बाइसेप्स (बाँहों के स्नायु पेशियाँ) एकदम गठीली और सख्त थीं। बॉस के पेट में कई बल पड़े थे (सिक्स पैक्स) जैसे कसरत करने वालों के पेट में पड़े होते हैं।
 
बॉस की पतली कमर के नीचे उनके लण्ड की लम्बाई और मोटाई देख कर दीपा को उस लण्ड के कारण जो असह्य टीस उसकी चूत में उठी थी उसे याद कर दीपा सिहर उठी। पर साथ में ही उसे यह भी एहसास हुआ की जब बॉस का वह लण्ड अंदर घुस रहा था तो पता नहीं क्यों, उस दर्द में भी एक गजब की मिठास उसे महसूस हो रही थी जिसका वर्णन करना नामुमकिन था। जब एक औरत उसी चूत में से बच्चा निकालती है तो उसका क्या हाल होता होगा? दीपा ने यह सोच कर तय किया की उसे बॉस के ही लण्ड से चुदवाना है। इसके लिए जो चिकनाहट लगानी पड़े वह लगाएगी पर बॉस का लण्ड वह लेगी जरूर।

जैसे जैसे वह दीपा को उस घोड़े जैसे लण्ड से चुदवाने की आदत होती जायेगी वैसे वैसे उस लण्ड से चुदवाने का मजा कुछ और ही होगा। शायद फिर उसे हलके फुल्के लण्ड से चुदवाने में कोई मजा ना आये। दीपा को उसी लण्ड को अपनी चूत में डलवाना ही पडेगा यह सोच कर दीपा की उत्तेजना और चिंता दोनों बढ़ती ही जा रही थी। बॉस का लटकता लण्ड दीपा ने एक हाथ में पकड़ा और उसे वह धीरे धीरे बड़े प्यार से सहलाने लगी।

बॉस का लण्ड उत्तेजना के कारण एकदम टाइट हुए खड़ा था। पर उसकी ख़ास बात यह थी की वह सीधे खड़े होने के बजाय टेढ़ा सा खड़ा था। उसे अगर आपको नापना हो तो आपको उसे पकड़ कर सीधा करना पडेगा। बोस का लण्ड चिकनाहट से लोथपोथ था और काफी मोटे लण्ड के अंदर श्याम रंग की पूरी तरह से फूली हुई रगों में उनका वीर्य फर्राटे मारता हुआ दिख रहा था। दीपा को अपनी हाथ की हथेली और उँगलियों में बॉस के वीर्य की चिकनाहट चमकती हुई दिख रही थी।

दीपा बार बार अपनी बॉस के वीर्य से लिपटी हुई उँगलियों को देख रहीं थीं। दीपा को वैसे हाथ की उंगलियां पर वीर्य लिपटा हुआ अच्छा नहीं लगता था। वह ऐसा कुछ होने पर फौरन हाथ धो कर आ जाती थी। पर बॉस के वीर्य में उसे बड़ी पसंदीदा खुशबु और एक तरह का आकर्षण महसूस हो रहा था। दीपा को लण्ड चूमना या चूसना अच्छा नहीं लगता था। पर बॉस का लण्ड पता नहीं दीपा को बड़ा ही रोमांटिक लग रहा था।

बॉस का लण्ड देख कर दीपा का मन उसे चूमने के लिए मचल उठा। शायद उसका कारण यह था की दीपा उस रात अपने आप को पूरी तरह बॉस को समर्पित करना चाहती थी। वह बॉस को कोई भी स्त्री सुख से वंचित रखना नहीं चाहती थी। उस रात दीपा सिर्फ और सिर्फ बॉस के सेक्स के खिलौने के रूप में ही अपने आप को पेश करना चाहती थी। वह चाहती थी की उस रात के बाद शिखाजी बॉस की जिंदगी से हमेशा के लिए गायब हो जाए। उस रात दीपा चाहती थी की बॉस दीपा को ही अपनी समझे और उसके आगे किस औरत के बारे में सोचे ही नहीं।

दीपा को इसमें जबरदस्त कामयाबी भी हासिल हुई। दीपा ने बॉस के मन से शिखा को आखिर में निकाल ही दिया। अब बॉस की पुरानी पत्नी एक भुला हुआ इतिहास ही बन कर रह गयी थी। दीपा ने झुक कर खड़े हुए बॉस की दो टांगों के बिच में अपनी जगह बना ली और अपना मुंह बॉस के लंड के ऊपर रखा। बॉस के लण्ड को पकड़ कर दीपा ने बॉस से कहा, "बॉस सर, सॉरी सोमजी, आज तुम मेरे मुंह को अपने लण्ड से चोदो। आज मेरे मुंह में तुम अपना माल निकालो। मैं आज तुम्हारे प्यार की भीख मांगती हूँ।"

दीपा ने बॉस के लण्ड को अपनी उँगलियों में पकड़ ने की कोशिश करते हुए कहा, "बापरे! तुम्हारा लण्ड तो इतना बड़ा और मोटा हो चुका है! कितनी चिकनाहट इसके ऊपर जमी हुई है! पता नहीं कितने दिनों से इसे कोई चूत को चोदने का अवसर नहीं मिला है। मैं तुम्हारे इस लण्ड से चुदवाने के लिए बड़े समय से बेताब थी। जिस दिन उस पार्टी में तुमने मेरे बदन से अपना बदन रगड़ रगड़ कर डान्स किया था उसी समय मैंने तुम्हारे इस खड़े और तगड़े लण्ड को मेरी दोनों जाँघों के बिच में महसूस किया था। उसी समय से मैं इस लण्ड से चुदवाने के लिए बेताब थी। दिन ब दिन मेरी तुमसे चुदवाने की यह बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी।"

मेरी और इशारा करते हुए मेरी बीबी ने बॉस को कहा, "आज मौक़ा मिला है। मेरे बुद्धू पति गहरी नींद में सो रहे हैं। उन्हें क्या पता की उनकी बीबी आज रात उसी पलंग पर उन्हीं के बगल में उनके ही बॉस से चुदवाने के लिए कितनी तड़प रही है? आज रात के बाद उनकी बीबी किसी और की बीबी बनने जा रही है, इस बात का मेरे पति को अंदाज भी नहीं होगा। खैर वह तो पता तो उन्हें लग ही जाएगा। मैं ही उन्हें वक्त आने पर बता दूंगी।"

बॉस ने जब दीपा के हाथ की उंगलियां अपने लण्ड पर महसूस कीं तो बॉस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। दीपा ने बॉस को पलंग पर सुला दिया और बॉस के खम्भे की तरह खड़े हुए लण्ड को देख कर आश्चर्य से बोली, "सोमजी, तुम्हारा लण्ड तो बड़ा तगड़ा है यार! मैंने मेरे पति का ही फुला हुआ लण्ड देखा है। वह भी काफी मोटा और तगड़ा है। पर तुम्हारा लण्ड तो मेरे पति के लण्ड से भी काफी बड़ा है! बापरे, जो औरतें तुमसे चुदवाती होंगीं उनकी तो फट ही जाती होगी।"

बॉस दीपा की उटपटांग बातें सुन कर हैरान हो रहे थे। एक संस्कारी शादीशुदा शर्मीली औरत कैसे अपने मन के कोने में गड़े हुए अपने गुह्य विचार उनसे शेयर कर रही थी। कुछ खिसियानी सी आवाज में बॉस ने कहा, "ऐसी कोई बात नहीं है। पिछले कई महीनों से मैंने किसी औरत को उस निगाह से देखा तक नहीं है। मैं सच कहता हूँ, शिखा के एक्सपीरियंस के बाद मुझे एक तरह से पूरी औरत जात पर नफरत सी हो गयी थी। जब से तुम मेरी जिंदगी में आयी तो मुझे लगा की सब औरतें एक सी नहीं होतीं। तुम एक अलग ही औरत हो। दीपा तुम्हें देख कर तुम्हारी पूजा करने का मन हो रहा है।"

दीपा बॉस की बात सुनकर जैसे बॉस ने कोई जोक मारा हो ऐसे हँस पड़ी और बॉस को झकझोरते हुए कहा, "ऐ सोमजी, आज की रात मेरी पूजा नहीं करवानी मुझे। आज की रात मुझे तुमसे चुदाई करवानी है, यार!"

बॉस दीपा को देखते ही रह गए। कभी यह औरत शर्मा जाती है, कभी खिलखिला कर हंस पड़ती है और कभी खुल्लमखुल्ला लण्ड, चूत बगैरह बोलती है तो कभी ऐसे शब्दों का उपयोग करने से कतराती है। दीपा बॉस से एकदम खुल्लमखुल्ला बात कर रही थी। दीपा के मुंह में अपना लण्ड पाकर बॉस के पुरे बदन में एक सिहरन फ़ैल गयी। शिखा ने कभी बॉस के लण्ड को चूसना तो और चूमा तक नहीं था। दीपा बॉस के लण्ड को इतने प्यार चुम और चूस रही थी की बॉस का पूरा बदन मचल उठा।

बॉस ने दीपा का सर पकड़ कर उसे ऊपर उठाया और उसे पलंग के एक छोर पर बिठाया और दीपा के पाँव फर्श पर लटका कर वह दीपा की टाँगें चौड़ी कर उन्होंने अपना सर उसमें घुसेड़ दिया। वह बोले, "दीपा आज महीनों के बाद मुझे मौक़ा मिला है की मैं एक मेरी चाहने वाली, खूब सूरत, नंगी औरत की बाँहों में हूँ, जो मुझसे चुदवाना चाहती है। अगर तुम्हें एतराज ना हो तो आज मैं तुम्हें चूसना चाहता हूँ।"

दीपा शर्म की मारी अपनी नजर नीची कर चुप रही पर उसने अपनी जांघें अपने प्रियतम बॉस के लिए खोल दीं। बॉस ने दीपा की जांघें पूरी तरह चौड़ी कर अपनी जीभ दीपा की चूत की पंखुड़ियों पर रखी और प्यार से धीरे धीरे दीपा की चूत को चाटने लगे। दीपा के लिए यह बड़ा ही रोमांच कारी पल था। जब बॉस की जीभ उसकी चूत को छू कर चाटने लगी तो दीपा बरबस ही मचल उठी। दीपा की चूत में से उसका स्त्री रस चू ने लगा। बॉस उस रस को अपनी जीभ से लपालप चाटने लगे। बॉस ऐसे चाट रहे थे जैसे दीपा की चूत में से शहद निकल रहा हो।

दीपा बॉस की जीभ की हरकतों से काँप ने लगी। बॉस दीपा की कमजोर और बड़ी ही संवेदनशील चमड़ी को अपनी जीभ से कुरेद रहे थे और चाट रहे थे। साथ साथ में दीपा की चूत से चू रहे रस का भी वह रस पान कर रहे थे। दीपा के लिए यह बड़ा ही रोमांचक अनुभव था। मैं कभी कभी दीपा की चूत चाटने की कोशिश जरूर करता था पर मुझे उसमें ज्यादा रोमांच नहीं लगता था।

बॉस की हरकतों से दीपा के मुंह से हलकी सी कामुक कराहटें निकलने लगी। वह बॉस का सर अपने हाथ में पकडे हुए हलकी आवाज में वासना से कराह उठती थी। दीपा का बदन एक अजीब रोमांच का अनुभव कर रहा था। जिनसे चुदवाने की वह कई हफ़्तों से उम्मीद कर रही थी वोह बॉस उस रात उसके दो जाँघों के बिच में अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहे थे। दीपा का बदन कामुकता और रोमांचक उत्तेजना से खिंच रहा था। दीपा को लगा की अगर बॉस उसी तरह उसकी चूत को चाटने में लगे रहे तो वह जरूर झड़ जायेगी।
 
बॉस भी अपनी प्रियतमा को उन उचाईयों पर ले जाना चाहते थे जहां शायद वह अपने पति के साथ जा नहीं पाती हो। उस को ध्यान में रख कर कुछ देर बाद बॉस ने पीछे हट कर अपनी जीभ की जगह दो उँगलियाँ दीपा की चूत में डाल दीं। पहले तो वह हलके हलके उँगलियों को चूत की पंखुड़ियों पर प्यार से रगड़ते रहे। कभी कभी उस पंखुड़ियों की चमड़ी को उँगलियों में पिचकाते हुए दीपा की क्लाइटोरिस को भी छेड़ते रहे। इसका असर यह हुआ की दीपा अपने कूल्हे बिस्तर पर कभी इधर उधर खिसकाने तो कभी ऊपर निचे पटक ने लगी। बॉस की जीभ के चाटने से दीपा काफी गरम हो चुकी थी और झड़ ने के कगार पर पहुँच गयी थी। बॉस के उंगली चोदने से वह एकदम अपना आपा भूल कर उन्माद की स्थिति में पहुँच गयी।

वह अपने ओर्गास्म को रोक नहीं पा रही थी और बॉस के उंगली छे चोदने के चंद पलों में ही "आह....... सोमजी........ मुझे पकड़ो........ मैं झड़ रही हूँ........." और ऐसे ही कई उद्गार के साथ कुछ देर तक मचलते हुए दीपा झड़ गयी और कुछ देर तक चुपचाप पड़ी अपनी उत्तेजना को आराम देने की कोशिश में बिस्तरे पर ही पड़ी रही।

दीपा को साँस लेते हुए देख बॉस भी कुछ देर लेटी हुई नंगी दीपा को देखते रहे। दीपा की छाती हांफने से ऊपर निचे हो रही थी जो बॉस की नजर को अपने ऊपर गाड़े हुए राखी थी। दीपा के नंगे बदन की एक एक रेखा बॉस अपने दिमाग की हार्ड डिस्क में सेव करते जा रहे थे। दीपा के बाल, उसका कपाल, उसकी आँखें, उसकी नाक, गाल, होँठ, कंधे, उसकी खूबसूरत भरी हुई खड़ी अक्कड़ चूँचियाँ, उसकी पतली कमर, रसीली गाँड़, मस्त गठीली जाँघे और सबसे ज्यादा खूबसूरत दीपा की चूत जो कमल की डंडियों के बिचमें जैसे छुपने की कोशिश कर रही थी।

कुछ देर तक साँस लेने के बाद दीपा ने घूम कर बॉस की और देखा और उन्हें उसके के बदन को घूरते हुए देखा तो दीपा शर्मा गयी और बोली, "इतना देखा है तो भी अभी तक देखते पेट नहीं भरा क्या?"

बॉस ने मुस्कराए कर कहा, "लगता है तुम्हें ऐसे जिंदगी भर देखता रहूंगा तो भी पेट नहीं भरेगा। मन करता है ऐसे ही तुम नंगी मेरे सामने बैठी रहो और मैं तुम्हें देखता ही रहूं।"

दीपा ने नकली मुंह फुलाते हुए कहा, "तुमने मुझे पहली बार नंगी देखा है ना इसलिए। सब मर्द शुरू शुरू में ऐसा ही कहते हैं। फिर जब बार बार देखते हैं ना, तो उनका भी जी भर जाता है। फिर तो तुम देखोगे भी नहीं।"

बॉस ने कहा, "जानेमन, मौक़ा तो दो! आज से सौ साल के बाद भी जब तुम और मैं बूढ़े हो जाएंगे, तुम और मैं मोटे हो जाएंगे तब भी मैं तुम्हें नंगी देखने का मौक़ा नहीं चुकूँगा। तब भी तुम्हें नंगी देखते हुए मेरा पेट नहीं भरेगा।"

दीपा ने हँसते हुए कहा, "अरे! इतना नहीं जीना है मुझे। चलो, अब तुम्हें सिर्फ देखने से काम नहीं चलेगा सोमजी। मेरा पेट तो भरा नहीं अब तक। अभी तो तुम्हें बड़ी मशक्कत करनी है।"

बॉस ने कहा, "मैं हूँ ना? तुम्हारा पेट भरने के लिए।"

बॉस की बात सुन कर दीपा खिलखिला कर हँस पड़ी। हंसती हुई बोली, "वह तो मैं जानती हूँ, इतने महीनों, या सालों का माल जो भरा हुआ है तुम्हारे अंडकोषों में! उसे निकालोगे तो मेरा पेट तो भर ही दोगे तुम।"

बॉस ने दीपा को अपनी बाँहों में भर कर कहा, "दीपा यह जो तुम्हारी हँसी है ना, यह मुझे मार देती है। पता है, मेरा दिल तुम पर कब आ गया था?"

दीपा ने बॉस की और नजरें उठाकर पूछा, "कब?"

बॉस ने कहा, "जब हम पहली बार तुम मुझे देख कर खिलखिला कर हँस पड़ी थी तब से मैंने तय किया था की एक न एक दिन मैं तुम्हें पा कर ही रहूंगा।"

फिर हँसते हुए कहा, "मतलब मैं हँसी तो फँसी?"

बॉस ने कहा, "बिलकुल!"

दीपा ने बॉस के लण्ड को हिलाते हुए कहा, "तो फिर फाँसो मुझे अच्छी तरह। ऐसे फाँसो की मैं निकल ही ना पाऊं? मछली तुम्हारे जाल में फँसने के लिए तड़प रही है।"

बॉस पलंग से उठ खड़े हुए और दीपा का हाथ पकड़ कर एक बार फिर उसे अपने बैडरूम की और ले जाने लगे तब दीपा ने उनसे हाथ छुड़ाते हुए मेरी और इशारा करते हुए कहा, "यह तो कुम्भकरण सी गहरी नींद सो रहे हैं। तुम कितना भी चिल्लाओ, जब तक इन पर ठन्डे पानी की बाल्टी नहीं फेंकोगे, तब तक यह नहीं उठेंगे। यही मौक़ा है की उनकी बीबी को उनके बगल में रख कर चोदो ना? क्या तुम्हें इसमें एक अजीब उत्तेजना का अनुभव नहीं होगा? पति की बगल में सो कर तुमसे चुदवाने के आईडिया से ही मेरी तो ऐसी की तैसी हो रही है।"

end
 
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