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हाईईईईईईई में चुद गई दुबई में complete

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अब मेरी फ्रॉक के बटन खोल कर विनोद ने मेरी फ्रॉक को नीचे से पकड़ कर उपर किया. तो दूसरे ही लम्हे ब्रेज़ियर में कसे मेरे भारी जवान मम्मो के साथ साथ पैंटी में छुपी हुई मेरी प्यासी चूत और मेरा गरम और जवान भरा हुआ जिस्म विनोद की गरम नज़रों के सामने आ गया.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ मुझ से अब मज़ीद सहा नही जा रहाआआआअ मेरी ज़ाआाआआअँ”मेरे नीम नंगे जिस्म को देख कर विनोद की हवस की आग और भड़क उठी. और उस के सबर का पैमाना लबरेज हुआ तो एक दम सिसकता हुआ बोला.

इस के साथ ही विनोद ने मेरी छोटी सी पैंटी को अपने हाथों में पकड़ा. और मेरी पैंटी को एक दम से उतार कर मेरी जवान फुद्दि को अपनी प्यासी और भूकि निगाहों के सामने पूरे तौर पर नंगा कर दिया.

मेरी छोटी सी पैंटी के मेरे जिस्म से उतरते ही मेरी वो गरम और प्यासी चूत जिसे आज मैने बड़े अरमानो के साथ खास तौर पर अपने शौहर यासिर के लिए अच्छी तरफ से सॉफ कर के तैयार किया था.

बिना बालों के सॉफ,मुलायम और फूली हुई मेरी वो ही चूत मेरे शौहर यासिर की बजाय अब उस के हिंदू दोस्त विनोद के सामने अपनी पूरी आब-ओ-ताब के साथ बिल्कुल नंगी हो गई थी.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इतनीईीई खूबसूरत फुद्दिईईईईईई मैने अपनी पूरी ज़िंदगी में नहियीईईईई देखी” मेरी शेव्ड चूत को यूँ अपनी नज़रों के सामने एक दम नंगा पा कर विनोद तो जैसे बोखला सा गया. और वो अपनी पॅंट में तने हुए अपने लंड को पॅंट के उपर से ही अपने हाथ में मसल्ते हुए मुझ से कहने लगा.

ये बात कहते ही विनोद ने मेरी पैंटी को मेरी चूत से उतार कर नीचे फैंकने की बजाए मेरी पैंटी को अपने मुँह और नाक के नज़दीक किया.

और मेरी बारीक सी पैंटी को अपनी नाक से सूंघते हुआ बोला “उफफफफफफ्फ़ तुम्हारी इस पैंटी में से आती, तुम्हरीईई चूत की खुश्बू ने मुझे इतना पागल कर दिया है,तो तुम्हारी फुद्दि के साथ अपना मुँह लगाने के बाद मेरा क्या हाल हो गया सायराआआआअ”

मेरी शादी के बाद अपना शौहर यासिर ही एक वो वाहिद मर्द था. जिस ने मेरे बदन का हर पोशेदा हिस्सा पूरा नंगा देखा था.

और शादी के बाद वैसे तो यासिर भी अकसर मेरे हुश्न की तारीफ करते रहते थे.

लेकिन मेरे जिस्म के हर हिस्से को पूरा नंगा देखने के बावजूद यासिर ने मेरे जिस्म के किसी भी नंगे हिस्से की इस तरह के अल्फ़ाज़ में कभी तारीफ नही की थी. जिस तरह के नंगे अल्फ़ाज़ में विनोद इस वक्त कर रहा था.

आम हालत में अगर कोई गैर मर्द मेरे जिस्म की तरफ ग़लत नज़र भी डालता. तो मुझे एक दम बुरा लग जाता था.

मगर आज अपने शौहर के हिंदू दोस्त से अपने जवान भरे हुए जिस्म और खास तौर पर अपनी प्यारी और गरम चूत की यूँ खुलम खुल्ला तारीफ सुन कर मुझे शरम आने की बजाय मेरी जिन्सी भूक पहले से ज़्यादा तेज हो गई.

और में तो अपनी जिन्सी हवस के हाथों मजबूर हो कर इन विनोद की इन सब बातों का मज़ा लेते हुए अपनी चूत का पानी खारिज किए जा रही थी.

मेरी फूली हुई प्यासी चूत की तारीफ करते ही विनोद ने मेरी पैंटी को एक तरफ रखा. और फिर मेरी खुली टाँगों के दरमियाँ बैठे हुए विनोद ने दूसरे ही लम्हे मेरी गुदाज रानों को अपने हाथ से पकड़ कर मेरी टाँगों को मज़ीद चौड़ा कर दिया.

विनोद के इस तरह मेरी टाँगों को अपने हाथों से चौड़ा करने के दौरान मेरी रानों के साथ साथ मेरी गरम फुद्दि के फूले हुए लिप्स भी एक दम से विनोद की प्यासी आँखों के सामने ऐसे खुल गये कि मेरी टाँगों के दरमियाँ झुके हुए विनोद को अब मेरी फुद्दि के अंदर का पिंक हिस्सा भी वाजिया तौर पर नज़र आने लगा था.

“हाईईईईईईईईईईई तुम्हारी फुद्दि का अन्द्रुनि हिस्सा कितना गुलाबी है, और इस गुलाबी चूत से उठने वाली ये भीनी भीनी सी महक कितनी मज़े दार है मेरी जान”

मेरी चूत के होंठों को अपने दोनो हाथों से खोलते हुए विनोद अपने मुँह को मेरी खुली पिंक चूत के होंठों के इंतिहाई नज़दीक लाया. और मेरी चूत में से खारिज होती हुई मेरी फुद्दि की खुसबू को अपनी नाक के ज़रिए सूंघते हुए बोला.

विनोद का मुँह अब मेरी शेव्ड चूत के इतने नज़दीक था. कि उस के मुँह से निकलने वाली गरम सांसो की गर्मी मुझे अपनी चूत के खुले लबों से गुज़र कर अपने दिमाग़ तक पहुँचती हुई महसूस होने लगी थी.

“हाईईईईई विनोद के मुँह में इतनी तपिश है,तो इस के लंड में कितनी गर्मी हो गी”अपने शौहर के दोस्त के मुँह की गर्मी को महसूस करते हुए पहली बार मेरे ज़हन में अपने शौहर के लंड के अलावा किसी गैर मर्द ले लंड का ख्याल आया.

तो मुझे अपनी इस सोच पर खुद भी हैरत हुई. मगर इस के साथ ही मेरी फुद्दि पहले से ज़्यादा गरम होने लगी थी.

इधर में अभी विनोद के मुँह से निकलती हुई गरम सांसो को ही अपनी चूत के लबों से टकराते हुए महसूस कर के मज़े लेने में मसगूल थी.

कि दूसरी तरफ मेरी चूत की खुश्बू को सूंघते हुए विनोद ने एक दम अपना मुँह मेरी चूत के मज़ीद नज़दीक किया.

और फिर देखते ही देखते अपने सख़्त होंठ मेरी जवान,नर्म-ओ-मुलायम चूत के फूले हुए होंठों पर रखते हुए मेरी फुद्दि के होंठों को अपनी मुँह में ले कर बाहर की तरफ खैंचा .

“ओह हाईईईईईईईईईईईई उफफफफफफफफफफफफ्फ़” विनोद का यूँ मेरी चूत के लिप्स को अपने मुँह में भर कर ज़ोर से खैंचने की वजह से दर्द के मारे मेरे जिस्म को ना सिर्फ़ एक दम झटका सा लगा.

बल्कि इस के साथ ही सरूर की एक लहर सर से ले कर पावं तक मेरे सारे जिस्म में दौड़ गई. और अपनी चूत का पानी छोड़ते हुए मेरे मुँह से सिसकियों का एक तूफान जारी हो गया.“अहह,ओह उफफफफफफ्फ़”

 
अभी में अपनी चूत पर किए गये विनोद के पहले हमले से ही सम्भल नही पाई थी. कि विनोद ने मेरी चूत के होंठों को अपनी नुकीली ज़ुबान से खोलते हुए अपने गरम मुँह को मेरी प्यासी चूत के साथ चिपका दिया.

विनोद का गरम मुँह अपनी फुद्दि पर पड़ते ही मेरे पूरे वजूद में एक हल चल सी मच गई.

मज़े से पागल होते हुए मेने सोफे से अपना सर एक दम उपर उठाया. और ब्रेज़ियर में कसे अपने जवान और गुदाज मम्मो को बेताबी से अपने हाथों से मसल्ते हुए मैने अपनी चूत को विनोद के खुले मुँह पर गरम जोशी से रगड़ कर एक ज़ोर दार सिसकारी भरी आवाज़ अपने मुँह से एक बार फिर निकाली “उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ कककककककककककक ओह”

यूँ तो विनोद की गरम ज़ुबान के असर की वजह से मेरे मुँह से सिसकारियो की हल्की हल्की आवाज़ निकलने तो लगी थी.

मगर अपने मुँह से ये आवाज़ें निकालने के बावजूद में अपने जज़्बात को थोड़ा संभाल भी रही थी. ताकि मेरी सिसकयों की गूँज मेरे शौहर के कानों में ना पड़ सके.

“हाईईईईईईईईईई सपना ने सही कहा था, तुम्हारी चूत का पानी वाकई ही इतना मज़े दार है, कि एक बार चखने के बाद, दिल करता है कि सारी ज़िंदगी तुम्हारी फुद्दि का रस पीता ही रहूं मेरी जान” मेरे मुँह से फूटने वाली सिसकयों को सुन कर विनोद का जोश मज़ीद बढ़ा . और वो गरम जोशी और वलिहाना अंदाज़ में मेरी चूत से बहते हुए पानी को अपनी ज़ुबान से चाटते हुए मुझ से कहने लगा.

चूत चाटने के इस नये मज़े से सपना मुझे पहले ही रोश्नास तो करवा ही चुकी थी.

मगर एक औरत होने के नाते सपना के मुँह में वो तासीर नही थी. जो एक मर्द के मुँह और होंठों के लामास में होती है.

इसीलिए ये ही वजह थी कि विनोद के होंठों,मुँह और ज़ुबान ने चन्द ही लम्हों में मुझे जिन्सी लज़्जत की उस मंज़िल पर पहुँचा दिया था. जिन तक पहुँचने का अपनी दो साला शादी शुदा जिंदगी में मैने इस से पहले कभी तसव्वुर भी नही किया था.

“ओह मेरा शौहर होने के नाते ये यासिर की ड्यूटी थी,कि वो मेरी फुद्दि को चाट कर मुझे चुदाई का ये मज़ा खुद देता, जिस मज़े को में अब अपने शौहर के हिंदू दोस्त से हासिल कर रही हूँ” ये बात सोचते हुए में विनोद की गरम मुँह और नुकीली ज़ुबान के हाथों इतनी गरम हो गई कि में अपने होश-ओ-हवास ही खो बैठी.

बे खुदी के आलम में ही मैने अपने हाथों से अपने ब्रेजियर को खैंचा कर नीचे किया. और अपने हाथों से अपने भारी जवान और गुदाज मम्मो को अपने शौहर के दोस्त की गरम और प्यासी निगाहों के सामने बेपर्दा कर दिया.

ये मेरे वो ही सुडोल और भारी मम्मे थे. जिन का दीदार करने के लिए मँगनी के दिन से ले कर सोहाग रात तक यासिर की आँखे तरस गई थी.

और अपनी सोहाग रात को भी मैने काफ़ी मिन्नतों (रिक्वेस्ट्स) के बाद ही अपने शौहर यासिर को अपने इन जवान मम्मो का दीदार बख्शा था.

मगर आज विनोद की गरम ज़ुबान ने मेरी प्यासी फुद्दि और जवान जिस्म की आग को इतना भड़का दिया था. कि अपने जिस्म की गर्मी के हाथों मजबूर हो कर में विनोद को खुद ही अपने खूबसूरत और दूध जैसे सफेद मम्मो का दीदार करवाने पर तूल गई.

अपने जवान मम्मो को अपने ब्रेज़ियर से निकालने के बाद मैने अपनी भारी भारी छातियों को अपने हाथों में थामा और अपनी गुदाज छातियों को अपने हाथों से मसल्ने के साथ साथ अपने मुँह से सिसकियाँ लेते हुए अपनी चूत को विनोद के खुले मुँह पर तेज़ी से फेरने लगी.

 
अब कमरे में ये हालत थी. कि में सोफे पर लेटी आज पहली बार विनोद के होंठों को अपनी फुद्दि पर महसूस कर के पूरी पागल हो गई थी. और इस मज़े के आलम में अपनी गान्ड उठा उठा कर अपनी फुद्दि को ऊपर नीचे कर के विनोद के मुँह पर रगड़ने लगी थी.

मेरे इस वलिहान पन और खुद सुपुर्दगी के दिलकश अंदाज़ को देख और महसूस कर के विनोद भी पागलों की तरह मेरी चूत को मज़े से चाटते हुए कभी अपनी ज़ुबान को मेरी चूत के सुराख वाली जगह में डालता. और कभी वो मेरी चूत के दाने को ज़ुबान से रगड़ता और अपने दाँतों से मेरी चूत और रानों पर भी काट रहा था.

विनोद की इन हरकतों की वजह से मेरे सारे जिस्म में चीटियाँ सी रेगति हुई महसूस हो रही थी.

और मज़े से बे हाल हो कर में ज़ोर ज़ोर से “आआआआअहैीन” भरते हुए अपने हाथ विनोद के बालों में फेर रही थी.

मेरे मुँह से निकलने वाली सिसकियों की आवाज़ भी अब काफ़ी उँची थी. जिस की वजह से मुझे यकीन था कि मेरे मुँह से निकलने वाली इन सिसकियों की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही हो गी.

मगर मुझे विनोद के मुँह और ज़ुबान ने इतना मदहोश कर दिया था. कि मुझे अब किसी बात की परवाह ना रही थी.

विनोद की गरम ज़ुबान ने मेरी चूत को अब इतना गीला कर दिया था. कि मेरी चूत का रस मेरी टाँगों से होता हुआ मुझे मेरे हिप्स पर बहता हुआ महसूस हो रहा था.

मेरी चूत में ज़ुबान फेरते फेरते विनोद ने ज्यों ही मेरी गुलाबी चूत के फूले हुए दाने को अपनी ज़ुबान से एक बार फिर छेड़ा. तो मुझे यूँ लगा कि जैसे मेरे जिस्म में एक तूफान सा उमड़ रहा है.

फिर देखते ही देखते वो तूफान एक दम से ऐसे आया कि मेरा सारा जिस्म एक दम से अकड सा गया.

मज़े से बे हाल होते हुए मैने अपने कसे हुए जवान और भारी मम्मो को अपने हाथों में ज़ोर से दबोचा. तो मेरे जिस्म को एक ज़ोर दार झटका लगा और इस के साथ ही मेरी चूत किसी आतिश फिशान (झरना) की तरह एक दम से फट पड़ी.

इधर उपर मेरे मुँह से एक दम निकला “हाईईईईईईईईईईईईईईईईई विनोद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द”.

तो दूसरी तरफ नीचे से मेरी चूत का पानी एक गरम लावा की शकल में तेज़ी के साथ मेरी चूत से निकल कर एक भरपूर धार की बन कर विनोद के खुले मुँह में गा गिरा.

ये मेरी दो साला शादी शुदा ज़िंदगी में पहला मोका था. जब मैने अपने शौहर यासिर के अलावा किसी गैर मर्द का नाम लेते हुए अपनी चूत का पानी छोड़ा था. और वो मर्द कोई और नही बल्कि मेरे ही शौहर का हिंदू दोस्त विनोद था.

मेरी चूत से निकलने वाले मेरी फुद्दि के गरम और लैस दार पानी की लहर इतनी तेज और मिकदर इतनी ज़्यादा थी. कि मेरी चूत के गरम पानी से विनोद के होंठ और पूरा मुँह मेरी चूत के पानी से भर गया था.

“हाईईईईईईईईईईईई तुम्हारी चूत के इस पानी का ज़ायक़ा चखने को तो में कब से तरस रहा था,आज अपनी चूत का सारा पानी पिला कर मेरी महीनों की प्यास बुझा दो मेरी जान”

मेरी चूत के मुँह पर अपने मुँह को ज़ोर से दबाते हुए विनोद जोश और मज़े के साथ मेरी फुद्दि से निकलते हुए पानी को अपने हलक में उतारता रहा.

और में अपनी फुद्दि से फूटने वाली गरम चश्मे से निकलने वाले पानी से अपने शौहर के हिंदू दोस्त का मुँह और हलक को पूरी तरह फ़ैज़ याब करती रही.

फिर मेरा झटके ख़ाता जिस्म जब तक ना संभला उस वक्त तक विनोद मेरी टाँगों के दरमियाँ ही मेरी चूत पर अपना मुँह रख कर लेटा रहा. और मेरी फुददी से बहते जूस से अपनी प्यास बुझाता रहा.

कमरे के हल्के अंधेरे में अपनी चूत का पानी विनोद के मुँह में छोड़ने के बाद में तो सोफे पर बेसूध हो कर पड़ गई थी.

जब कि मेरी फुद्दि से निकलने वेल गरम पानी की धार से अपना मुँह भरने के बावजूद विनोद अभी तक मेरी टाँगों के दरमियाँ बैठा अपनी गरम ज़ुबान को मेरी गुदाज रानो के उपर फेर रहा था.

मेरी रानों पर अपनी गरम ज़ुबान फेरने के साथ साथ विनोद अब गोश्त से भर पूर मेरी गुदाज रानों को अपने दाँतों से काट भी रहा था.

ज्यूँ ज्यूँ विनोद मेरी गुदाज रानों के गोश्त को अपने दाँतों से काटता. त्यु त्यु दर्द और मज़े से बे हाल होते हुए मेरे मुँह से आवाज़ निकल जाती, “ओह हाईईईईईई ककककककककककक”.

 
थोड़ी देर मेरी रानों पर अपने प्यार के निशान बनाने के बाद विनोद आहिस्ता आहिस्ता अपने मुँह को मेरी चूत के उपर वाले हिस्से की तरफ बढ़ने लगा.

विनोद के प्यासे होंठ और गरम मुँह मेरे पेट पर आया. और बहुत प्यार और जोश के साथ मेरे नरम पेट को चूमते हुए विनोद ने मेरे पेट को भी अपनी ज़ुबान से गीला करना शुरू कर दिया.

फिर चन्द लम्हे मेरे पेट को चूमने और चाटने के बाद विनोद की गरम ज़ुबान ने एक दम से मेरे कसे हुए पेट पर माजूद मेरी धुनि (नेवेल) पर रेंगना शुरू कर दिया.

“हाईईईईईईईईईईईईईई यासिर ने तो पिछले दो साल में मुझे ये मज़े नही दिए, जिन मज़ू से आज विनोद मुझे आशना कर रहा है,उफ्फ्फ्फ विनोद की ज़ुबान ना जाने आज मुझे किस किस मज़े से रोश्नास करवाएगी ” सपना के बाद अब विनोद की गरम ज़ुबान को अपनी धुनि पर फिरते हुए महसूस कर के सिसकते हुए में सोचने लगी.

ये सही था कि विनोद से पहले उस की बीवी सपना भी मेरी धुनि में अपनी ज़ुबान फेर कर मुझे मज़ा दे चुकी थी.

मगर सपना की ज़ुबान की मुक़ाबले विनोद की नोकेलि ज़ुबान को अपने नेवेल के अंदर चलता हुए महसूस करने का ये तजुर्बा मेरे लिए बिल्कुल अनोखा और दिल कश था.

अगरचे अभी थोड़ी देर पहले ही विनोद के गरम मुँह की बदोलत में अपनी चूत का पानी खारिज कर चुकी थी. मगर इस के बावजूद शायद मेरी चूत में लगी आग अभी तक बुझी नही थी.

इसीलिए अपनी गहरी धुनि की तह में चलती हुई विनोद की गरम ज़ुबान से लुफ्त अंदोज़ होते हुए मेरे बदन में सुलगती आग के शोले फिर से अपना सर उठाने लगे थे.

इसीलिए इधर मैने अपनी धुनि पर चलती हुई विनोद की नोकेलि ज़ुबान से बे हाल हो कर जोश और मज़े में आते हुए विनोद के सर पर अपने हाथ कसे. तो नीचे से मेरी फुद्दि एक बार फिर अपना पानी छोड़ने लगी.

कुछ देर यूँ ही मेरी धुनि और मेरे कसे हुए पेट पर अपनी ज़ुबान फेरते फेरते विनोद का मुँह आहिस्ता आहिस्ता मज़ीद उपर आया.

और कुछ ही देर बार विनोद की गरम ज़ुबान मेरे बदन पर फिसलते हुए ब्रेज़ियर से बाहर निकले मेरे जवान और मोटे मम्मो के दरमियाँ आ कर रुक गई.

मेरी जवान चुचियों के इतने करीब आ कर विनोद ने पहली बार मेरे मोटे और भारी मम्मो का बगौर जायज़ा लिया.

“उफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारे इन गोल गोल हसीन मम्मो को नंगा देखने को तो मेरी आँखे ही तरस गई थी, यकीन मानो तुम्हारे ये बड़े बड़े सुडोल मम्मे तो मेरे तसव्वुर से भी ज़्यादा खूबसूरत हैं ,लगता है कि उपर वाले ने तुम्हें बहुत फ़ुर्सत में बनाया है सायरा”मेरे मोटे मोटे मम्मो को यूँ अपनी नज़रों के सामने खुला हुआ देख कर विनोद की आँखों में हवस की एक चमक आई. और वो एक बार फिर मेरे हसीन जिस्म की तारीफ करते हुए बोला.

मेरे मम्मो को देखते देखते विनोद ने एक दम मेरे मोटे मम्मो को अपने दोनो हाथों में कसा और मेरे मम्मो में अपनी नज़रें जमाते हुए कहने लगा. ““हाईईईईईईईईई ये मम्मे हैं या के2 की पहाड़ियाँ मेरी जान, हाईईईईईईईई दिल करता है सारी रात इन गुदाज मम्मो को अपने हाथों में ले कर यूँ ही मसलता रहूं”

 
में तो पहले ही विनोद के मुँह से अपनी चूत की नंगी तारीफ़ सुन कर गरम हो चुकी थी.

इसीलिए अब की बार जब विनोद ने फिर मेरे जवान मोटे मम्मो की शान में कसीदा पड़ा.

तो नसीबू लाल का ये पंजाबी गाना बे इकतियार मेरे जहाँ में आ गया कि,

“केरी केरी शै तेरी अख तू लुकावान में

इंज तकिया ना कर किद्रे मार ना जावा में”

“उफफफफफफफफफ्फ़ विनोद तो मेरे जिस्म के हर हर हिस्से की ऐसे ही तारीफ कर कर के मुझे तो मार ही डालेगा” अपने शौहर के दोस्त विनोद के मुँह से अपने जवान गरम जिस्म की खूबसूरती का सुन कर में फूले ना समाई . और इस बार शरमाने की बजाय मैने अपनी छाती को अकडा कर विनोद के सामने अपने मम्मो को मज़ीद आगे कर दिया.

इस वक्त कमरे में हालत ये थी. कि मेरी 36डी डी साइज़ की गोल गोल चुचियाँ जिन्हें आज तक यासिर के अलावा किसी और मर्द ने नही देखा था.

इने कमरे के हल्के अंधेरे में मेरे शौहर का हिंदू दोस्त ना सिर्फ़ बहुत ही नज़दीक से देख रहा था.

बल्कि वो मेरे इन जवान और खूबसूरत मम्मो को देखने और हाथों से दबने के साथ साथ अपने मुँह से मेरी जवान चुचियों की खूबसूरती का ताज़करा कर के मुझे मज़ीद गरम किए जा रहा था.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारे मम्मो के उपर तने हुए इन पिंक निपल्स ने तो मेरे होश ही उड़ा दिए हैं सायराआआआआआअ” अपने हाथों में कसे हुए मेरे जवान और मोटे मम्मो को बहुत करीब से देखते हुए विनोद ने सिसकारते हुए कहा.

इस के साथ ही दूसरे ही लम्हे विनोद के आग की तरह गरम होंठ मेरे लेफ्ट निपल पर आ कर जम गये.

और विनोद ने एक दम मेरे तने हुए ब्राउन निपल को अपने होंठों में भर कर उपर की तरफ खैंच लिया.

मेरी जवान छाती के मोटे निपल को अपने मुँह में भर कर उपर खैंचाई का विनोद का ये अमल इतना मज़े दार था. कि इस मज़े के मारे मेरी आँखे खुद ब खुद बंद हो गईं और स्वाद के मारे में चिल्ला उठी. “ओह”

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ कितने मोटे और लंबे निपल्स है तुम्हारे,दिल चाहता है तुम्हारे इन लंबे निपल्स को मुँह में भर कर सारी रात इन्हे यूँ ही सक करता रहूं”मेरे एक मम्मे के लंबे निपल को अपने मुँह में ले कर चुसते और दूसरे मम्मे को अपने हाथ में ले कर ज़ोर से मसल्ते हुए विनोद ने मुझ से कहा.

अब विनोद मेरे दोनो मम्मो को एक साथ अपने हाथों में दबाते हुए मेरे लेफ्ट मम्मे के निपल को अपनी ज़ुबान और होंठों से चूम और चाटने लगा था.

विनोद मज़े और जोश में कभी मेरे निपल को सक करता और कभी मेरे पूरे मम्मे पर अपनी गर्म ज़बान को मूव कर देता था.

और विनोद की गरम ज़ुबान की तपिश को अपनी भारी छाती और मोटे निपल पर महसूस कर के मज़े और स्वाद के मारे में तडप कर रह जाती थी.

“हाईईईईईईईईई विनोद तो मेरे मोटे और लंबे निपल को अपने मुँह में भर छोटे बच्चे की तरह ऐसे चूस रहा है,कि जैसे अगले ही लम्हे मेरे मम्मो में से दूध निकले गा, जिस को पी कर विनोद की भूक मिट जाएगी”

विनोद को पागलों की तरह अपनी छाती के लंबे निपल पर अपनी गरम ज़ुबान चलाते हुए देख कर मेरे दिल में ख्याल आया.और इस के साथ ही नीचे से मेरी फुद्दि ने एक बार फिर अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.

मेरी चुचियों को अपनी गरम ज़ुबान से चूमते और चाटते हुए विनोद अपने एक हाथ को मेरी कमर के पीछे लाया. और फिर आहिस्ता से मेरे ब्रेज़ियर की हुक को खोल कर मेरे जिस्म से मेरे ब्रेज़ियर को भी उतार दिया.

“उफफफफफफफफफ्फ़ विनोद तो मेरे जिस्म से एक एक कर के सारे कपड़े यूँ उतार रहा है,जैसे वो मेरे शौहर का दोस्त नही,बल्कि खुद मेरा शौहर हो” अपने शौहर यासिर की बजाय आज उस के दोस्त विनोद के हाथों मुकम्मल तौर पर नंगा होने के अमल के दौरान मेरी चूत अब बेतहासा अपना पानी छोड़ने पर मजबूर हो चुकी थी.

अपने शौहर के अलावा आज पहली बार किसी गैर मर्द के हाथों यूँ पूरा बे लिबास होने के अमल के दौरान मेरी चूत इस वक्त गरम हो कर इतना पानी छोड़ रही थी कि मेरी चूत का ये पानी अब मेरी चूत से निकल कर मेरी टाँगों से बहता हुआ नीचे सोफे के फोम को भी गीला करने लगा था.

मेरे जिस्म पर बचा आख़िरी कपड़ा भी उतार देने के बाद विनोद ने फिर से मेरे मम्मो पर अपना मुँह रखा.

और मेरे मम्मो और निपल्स को अपनी गरम ज़ुबान से गीला करते हुए मेरी चुचियों पर अपने प्यार के खेल को मज़ीद आगे बढ़ाने लगा था.

मेरे मम्मो के उपर,साइड्स और दरमियाँ वाली जगह पर अपनी गरम ज़ुबान और गीले होंठों को फेरते हुए विनोद अब मेरे मोटे और भारी मम्मो पर अपने प्यार का तूफान बरसा रहा था.

विनोद कभी मेरे तने हुए निपल्स पर ज़बान फेरता. तो कभी मेरे निपल्स को अपने लिप्स से चूस्ता हुआ अपने दाँतों से आहिस्ता से उन पर धंडी वेदता (बाइट्स) देता था.

विनोद का इस तरह मेरा मम्मो को सक करने से मेरा तो बुरा हाल हो गया था.और में विनोद के भारी वजूद के बोझ तले दबी दबी आवाज़ में सिसकियाँ लिए जा रही थी. “उफफफफफफफफफफफ्फ़ हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई”

थोड़ी देर मज़ीद मेरे मम्मो और निप्पलो से खेलने के बाद विनोद का जब दिल भर गया. तो उस ने मेरे मम्मो पर जमे हुए अपने मुँह को हटाया और एक दम मेरे जिस्म से हाथ कर सोफे के सामने फरश (फ्लोर) पर खड़ा हो गया.

“हाईईईईईईईईईईईईई ये मेरे पूरे जिस्म को अपने हाथों से नंगा करने और फिर अपने हाथों और मुँह से मेरे अंग अंग में हवस की आग भड़काने के बाद विनोद अब मुझे से अलग क्यों हो रहा है” सोफे पर नंगी हालत में अपनी टाँगे खोले विनोद को अपने सारे पाकीज़ा जिस्म का दीदार करवाते हुए मेरे जेहन में ख्याल आया.

 
अभी में ये ही अंदाज़ा लगाने में मसरूफ़ थी. कि विनोद इस तरह अचानक क्यों सोफे से उठ गया है. कि मेरी नज़र दुबारा अपने सामने खड़े विनोद पर पड़ी.

तो देखा कि विनोद अपनी पॅंट में तने हुए अपने लौडे को अपने हाथ से मसल्ते हुए मेरी तरफ देख रहा है. और अपनी पॅंट को तंबू बनाने वाले अपाने लौडे से खेलते हुए साथ ही साथ अपनी शर्ट के बटन खोलने में मसरूफ़ हो चुका था.

“उफफफफफफफफफ्फ़ आज यासिर की जगह एक गैर मर्द मेरे सामने अपने कपड़े उतार कर मुझे अपना नंगा जिस्म दिखाने के मूड में है” विनोद को यूँ अपने सामने बे शरमाई से अपने लंड से खेलता देख कर शरम के मारे एक लम्हे के लिए मेरी नज़रें खुद ब खुद नीचे को झुक गईं.

“जब मुझे तुम्हारे जिस्म का एक एक हिस्सा देखने में कोई शरम नही आई,तो तुम मुझे नंगा होते हुए देख कर क्यों शरमाने लगी हो मेरी जान” मेरी झुकी हुई नज़रों को देख कर विनोद मुझ से मुखातिब हुआ. तो ये बात सुन कर बे अख्तीयारी में एक बार फिर में विनोद की तरफ मतवज्जो हुई.

मेरी नज़रों के सामने विनोद अब अहिस्ता अहिस्ता अपनी शर्ट के सारे बटन एक एक कर के खोले जा रहा था.

कमरे की हल्की लाइट में अपने शौहर के दोस्त विनोद को अपने सामने एक एक कर के अपनी शर्ट के बटन खोल कर यूँ अहिस्ता अहिस्ता बढ़ाना होते देख कर मेरे दिल की धड़कन तेज होती चली गई.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मेरे जिस्म में इतनी मस्ती तो उस वक्त नही छाई थी, जब विनोद के हाथों में खुद बे लिबास हो रही थी” विनोद को अपने सामने अपने कपड़े उतारते देख कर मेरी फुद्दि में लगी आग पहले से ज़्यादा तेज होने लगी थी.और मेरी चूत से बहते पानी की रफ़्तार में भी तेज़ी आती चली गई.

फिर मेरे देखते ही देखते चन्द ही लम्हों बाद विनोद अपनी पॅंट और शर्ट उतार कर सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने अंडरवेार में मलबूस मेरे सामने नीम नंगी हालत में खड़ा हो गया.

“ हाईईईईईईईईईईईईईईई विनोद तो खुद भी किसी मॉडेल या फिल्म आक्टर से कम नही, लगता है कि विनोद ज़रूर जिम जाता है,तभी वो ऐसे कसे हुए मज़बूत जिस्म का मलिक है,काश यासिर भी कभी विनोद की तरह की बॉडी बना ले तो मज़ा ही आ जाए” विनोद के कपड़े उतराने के बाद ज्यों ही विनोद का चौड़ा सीना और उस के मसल से भेरपूर बाज़ू पहली दफ़ा यूँ आधी नंगी हालत में मेरे सामने हुए. तो विनोद के मर्दाना वझत से भेरपूर मज़बूत और स्मार्ट जिस्म को नीम नंगी हालत में अपनी नज़रों के सामने देख कर मेरी चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी थी.

अभी में सोफे पर नंगी लेटी विनोद के स्मार्ट जिस्म का जायज़ा लेने में मसरूफ़ थी. कि इतने में विनोद ने एक दम अपनी कमर के गिर्द कसे हुए अपने अंडरवेअर को हाथ से नीचे किया. और अपने मोटे ताज़े जवान लंड को मेरी प्यासी नज़रों के सामने पूरा नंगा कर दिया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इतना बड़ा लंड तो मैने कभी खुआब में भी नही देखा,ये इंसान का अनकट लंड है या किसी गधे (डोंकी) का” विनोद के तने हुए नंगे लंड का पहली बार दीदार करते ही मेरे जेहन में एक दम ये ख्याल आया.

विनोद के मोटे लंबे लंड को एकदम अपनी नज़रों के सामने नंगा पा कर ना सिर्फ़ मेरे हाथों के तोते उड़ गये थे.

बल्कि विनोद का लंबे और फूले हुए इस सख़्त लंड का दीदार करते वक्त हैरत के मारे मेरा मुँह खुद ब खुद खुल गया. और विनोद का लंड का साइज़ देख कर मेरी आँखे फटी की फटी रह गईं.

अपनी दो साला शादी शुदा ज़िंदगी के दौरान मेरी नज़रों ने सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने शौहर यासिर के लंड का ही दीदार किया हुआ था.

इसीलिए आज अपनी पूरी ज़िंदगी में ये पहला मोका था. जब में अपने शौहर के अलावा किसी गैर मर्द के लंड को अपने नज़रों के सामने यूँ नंगा होते हुए ना सिर्फ़ देख रही थी. बल्कि विनोद के मोटे तगड़े और लंबे लंड को उस के अंडरवेार में से उछल कर बाहर निकलता देख कर मेरी तो साँस ही मेरे हलक में अटक कर रह गई थी.

“ यासिर का लंड तो विनोद के लंड से बहुत मुक्तलफ है,यासिर के लंड पर तो इस तरह की स्किन नही,जिस तरह की स्किन विनोद के लंड की टोपी पर माजूद है, पाकिस्तानी मुस्लिम मर्दो के बदकास, इंडियन हिंदू मर्द शायद अपने लंड को कट (सरकम्साइज़्ड) नही करते,इसी लिए इस एक्सट्रा स्किन की वजह से विनोद के लंड का टोपा इतना चौड़ा है” विनोद के लंड की टोपी पर लगी स्किन को देखते हुए में सोचने लगी.

अपनी इसी सोच में गुम सूम में अपनी आँखे फाड़ फाड़ कर इस वक्त विनोद के तने हुए उस लंड को देखने में मगन थी.

जो इस वक्त मेरी नज़रों के सामने किसी शेष नाग की तरह अपने मोटा और चौड़ा फन फैलाए एक शान से खड़ा हो कर मेरी चूत की बिल में जाने का मोका तलाश कर रहा था .

 
में अभी टिकटकी बाँधे विनोद के लंड को देखने में मसरूफ़ थी. कि इतने में विनोद अपने अंडरवेअर को अपने जिस्म से अलग कर के मेरी नज़रों के सामने पूरा नंगा हो गया.

“यासिर के लंड को देखने के बाद से में तो आज तक ये ही समझती रही थी,कि सब मर्दो के लंड एक जैसे और एक ही साइज़ के होते हैं.

मगर विनोद का लंड ना सिर्फ़ लंबाई में मेरे शौहर यासिर के लंड से काफ़ी लंबा है,

बल्कि विनोद के लंड की चौड़ाई भी यासिर के लंड के मुक़ाबले में काफ़ी ज़्यादा है,

और उपर से लंड पर लगी फालतू स्किन ने सोने पर सुहागे का काम करते हुए विनोद के लंड की टोपी को टोपा बना दिया हाईईईईईईईईईईईईईई,अच्छा आज मुझे समझ आई है, कि जिस तरह हर औरत की चूत और मम्मो का साइज़ मुक्तलाफ होता है,उसी तरह सब मर्दो के लंड का साइज़ भी मुक्तलफ ही होता है”विनोद के लंड को पहली बार अपनी प्यासी आँखों के सामने हाइयर हुए देखते और अपनी फुद्दि के गरम पानी को चूत से खारिज करते हुए मैने अपने जेहन में यासिर और विनोद के लंड का आपस में मोज़ना किया. तो मुझे पूरा यकीन हो गया कि विनोद के इस बड़े लंड का यासिर के छोटे लंड से कोई मुकाबला और मोज़ना ही नही है.

अब कमरे में इस वक्त हालत ये थी. कि इधर में अपनी साँस रोके सोफे पर अपनी टाँगे चौड़ी किए पड़ी हुई विनोद के मोटे लंड को देख देख कर अपनी चूत का पानी छोड़ने में मसरूफ़ थी.

उधर दूसरी तरफ विनोद सोफे के सामने खड़े हो कर मेरी खुली टाँगों में से मेरी गरम और प्यासी चूत में से रास्ता हुए मेरी चूत के पानी को देख देख कर अपने मोटे लंड की मूठ लगा कर अपने हिंदू लंड को मेरी मुस्लिम चूत में जाने के लिए तैयार करने में मसरूफ़ था.

मेरी फुद्दि जो मेरे पीरियड्स की वजह से पिछले एक हफ्ते से ज़्यादा वक्त से नही चुदि थी.

वो इस वक्त बे तहाशा गरम हो कर एक लंड माँगने पर मजबूर हो चुकी थी.

इस वक्त कमरे के हल्के अंधेरे में विनोद का मोटा, लंबा और तगड़ा मेरी नज़रों के ऐन सामने खड़े हो कर मुझे दावते गुनाह दे रहा था.

जब कि मेरी प्यासी चूत अपनी जिन्सी हवस के हसर में जाकर कर अपने आप को विनोद के अकडे हुए लंड के हवाले करने के लिए अपने लब खोलने लगी थी.

फिर जब इधर विनोद अपने लंड को अपने हाथ से मसलता हुआ आशिस्ता आहिस्ता मेरे करीब होने लगा था.

तो दूसरी तरफ मेरे दिल और दिमाग़ में एक बार फिर से एक गुनाह और सवाब की एक जंग शुरू हो चुकी थी.

मेरा दिमाग़ मुझे समझा रहा था. कि “अभी भी वक्त है, इस गुनाह से बाज़ आ जाओ.और अपनी इज़्ज़त बचा कर बाहर निकल जाओ, वरना विनोद का ये मोटा लंबा लंड तुम्हारी चूत की धज्जियाँ उड़ा देगा ,सायरा”.

जब कि मेरा दिल मुझ से कह रहा था. कि “ जब तुम्हारा यासिर तुम्हें एक दूसरे मर्द के साथ वक्त गुज़ारने के लिए खुद तैयार कर के इधर लाया है, तो तुम्हें इस मर्द के सामने अपनी टाँगे खोलने में क्या ऐतराज है सायराआ”.

“नहियीईईईईईईई ये मर्द एक हिंदू है, और में कैसे अपनी पाकीज़ा मुस्लिम चूत में एक हिंदू मर्द का लंड ले सकती हूँ भला” मेरे दिमाग़ ने फिर मुझे समझाते हुए कहा.

लगता था कि मेरे अंदर की मशराकी औरत अचानक एक बार फिर से जाग उठी थी.और अब वो मेरे उपर लानत मालमंत करते हुए मुझे इस गुनाह भरे अमल से रोकने की कोशिस कर रही थी.

“लंड और चूत,सिर्फ़ लंड और चूत ही होते है, उन का कोई मज़हब नही होता,ऐसे मोके रोज़ रोज़ नही मिलते, इसीलिए इस सुनहरे मोके से फ़ायदा उठाते हुए तुम भी आज एक नये लंड का मज़ा चख लो,नही तो सारी ज़िंदगी पछताओगी सायराआआआ” मेरे दिमाग़ की आवाज़ कम होते ही मेरे दिल ने मेरा होसला बढ़ाते हुए मुझे सलाह दी.

अभी में अपने दिल और दिमाग़ की इसी कश मकश में मुब्तेला थी. कि इतने में कमरे के दूसरे कोने से मुझे यासिर की सिसकी भरी आवाज़ सुनाई दी “ओह तुम्हारी चूत का तो जवाब नही सपनााआआआअ”.

अभी में यासिर की आवाज़ सुन कर चौंकी थी. कि दूसरे ही लम्हे मुझे सपना की आवाज़ भी सुनाई दी.“तुम भी तो बहुत मज़े दार चोदते हो मेरी जान,हाआईययययी उफफफफफफ्फ़ ऐसे ही चोदो मुझे यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर”

“उफफफफफफफफफफ्फ़ विनोद की हरकतों और अपने जिस्म की हवस में डूबते हुए में तो भूल ही गई थी,कि हमारे अलावा यासिर और सपना भी इसी कमरे में माजूद हैं” यासिर और सपना की आवाज़ अपने कान में पड़ते ही मुझे एक दम होश आया और मैने कमरे के दूसरे कोने की तरफ देखा.

जहाँ नशे की हालत में टन हो कर मेरा शौहर यासिर, अपने दोस्त विनोद की बीवी और मेरी सहेली सपना को घोड़ी बना कर पीछे से “टका ठक” चोद कर अपने लंड की तसल्ली करने में मसरूफ़ था.

“ये ठीक है कि एक मशराकी औरत की हैसियत से मुझे अपनी चूत की हिफ़ाज़त करनी चाहिए,मगर इस के साथ साथ एक अच्छी बीवी होने के नाते, अपने शौहर की तरहकी हासिल करने में अपना हिस्सा डालना भी तो मेरा फ़र्ज़ बनता है ना, और अगर मेरे शौहर की प्रमोशन का रास्ता मेरी फुद्दि से हो कर जाता है,तो एक मशराकी औरत होते हुए मुझे आज हर हालत में अपने शौहर की फाइल पर विनोद के साइन ले कर ही घर जाना चाहिए” इधर मेरे जेहन में ये ख्याल आया.

तो दूसरी तरफ कमरे में लगे टीवी की स्क्रीन पर एक और गरम गाना स्टार्ट हो गया.


“आजा गुफ़ाओं में आ

आजा गुनाह कर लो”


इंडियन मूवी अक्स के इस गाने में रवीना टॅंडन,अमिताभ और एक दूसरे आक्टर के साथ गुनाह करने में मसरूफ़ थी.
 
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