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हाईईईईईईई में चुद गई दुबई में complete

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“क्य्ाआआआआआआ” लेडी डॉक्टर की ये बात सुन कर यासिर के मुँह से ये अल्फ़ाज़ निकले.

मगर उस वक्त तक लेडी डॉक्टर यासिर की ये बात सुने बगैर ही कमरे से बाहर निकल चुकी थी.

लेडी डॉक्टर के बाहर जाते ही यासिर ने मेरी तरफ देखा. और फिर यासिर और में हैरत जदा अंदाज़ में अपना अपना मुँह खोले एक दूसरे की तरफ देखने लगे.

“चलो घर चल कर बात करते है सायरा” थोड़ी देर परेशानी के आलम में मेरा मुँह देखने के बाद यासिर बोला. तो में भी खामोशी से उठ कर यासिर के साथ क्लीनिक से बाहर निकल आई.

घर में वापिस आते ही यासिर टीवी लाउन्ज काए सोफे पर बैठा. और मेरी तरफ देखते हुए एक दम बोला “पाकिस्तानी डॉक्टर ने तो टेस्ट देखने के बाद ये कहा था, कि में कभी बाप नही बन सकता, तो फिर तुम प्रेगनेंट केसे हो गई सायराआ”

“पाकिस्तानी डॉक्टर ने तुम्हारे बाप ना बनने की बात की थी, मगर ये कभी नही कहा था, कि में कभी माँ नही बन सकती यासिर” अपने शौहर को बेताबी से ये सवाल पूछते हुए देख कर में भी यासिर के पास ही सोफे पर बैठते हुए बोली.

“ये ही तो में जाने की कोशिश कर रहा हूँ, कि जब मुझ में बच्चा पेदा करने वाले स्पर्म्ज़ नही हैं, तो फिर तुम माँ केसे बन सकती हो सायरा” मेरी बात को ना समझते हुए यासिर ने गुस्से में मुझे देखते हुए कहा.

“बात ये है कि तुम से शादी से पहले भी और शादी के बाद भी,हर 20 से 22 दिन बाद मेरे पीरियड्स बाक़ादगी से स्टार्ट होते रहे हैं,मगर विनोद से चुदाई के बाद ये पहला महीना है, जब मुझे पीरियड्स नही हुए,और पाकिस्तानी डॉक्टर की रिपोर्ट के मुताभिक अगर तुम वाकई ही बाप नही बन सकते, तो फिर इस का मतलब ये है कि मेरी कोख में जनम लेने वाला ये बच्चा तुम्हारा नही, बल्कि यक़ीनन तुम्हारे दोस्त विनोद का है मेरी जान” यासिर के पहलू में बैठ कर मैने बहुत आराम और सकून से जब ये बात अपने शौहर से कही .

तो एक इंडियन हिंदू मर्द के बच्चे को अपनी पाकिस्तानी मुस्लिम कोख में पालने के तस्व्वुर से ही मेरी चूत एक दम से गरम होने लगी.

“ओह नूऊऊऊ मेरी बीवी और एक हिंदू मर्द के बच्चे की माँ बने ये नही हो सकता, तुम्हें कल ही डॉक्टर के पास जा कर इस बच्चे को गिराना हो गा सायराआआआअ” यासिर ने मेरी बात सुनते ही मेरी तरफ देखा. और एक रवेति शौहर की तरह मुझे हुकम देते हुए बोला.

“ हिंदू मर्द से अपनी बीवी की चूत चुदवाने में कोई मसला नही तुम्हें,मगर उसी मर्द के बच्चे को मेरी कोख में जनम लेने वाली बात सुन कर तुम्हें प्राब्लम होने लगी, में जानती हूँ कि तुम्हें ये खबर सुन कर एक शॉक पहुँचा है, इसीलिए मेरी मानो और आज की रात ठंडे दिल और दिमाग़ से इस मामले के बारे में अच्छी तरह सोचो यासिर” इस के बावजूद के मेरे माँ बनने की ये खबर यासिर की तरह मुझ पर भी एक बिजली बन कर गिरी थी.

मगर फिर भी अपने शौहर के मुँह से बच्चा गिराने की बात सुन कर मुझे ना जाने क्यों अच्छा नही लगा.

इसी लिए में यासिर को समझाने वाले अंदाज़ में ये बात कहती हुई अपने बेड रूम की तरफ चल पड़ी.

मेरे इस रवैये और लबो लहजे को देख कर यासिर को पता चल गया. कि वो मुझ से अबॉर्षन वाला कम जबर्जस्ती नही करवा सकता.

इसीलिए यासिर ने उस वक्त खामोश रहने में ही भलाई समझी.और चुप चाप सोफे पर बैठ कर मुझे अपने बेड रूम की तरफ जाते हुए देखता रहा.

अगले दिन यासिर के ऑफीस जाने के बाद में अपनी बेड पर लेटी इस बात के मुतलक सोचने लगी. कि मुझे अपने पेट में परवरिश पाते हुए विनोद के बच्चे के बारे में अब आगे क्या करना चाहिए.

कल जिस वक्त से मुझे इस बात का ईलम हुआ था. कि मेरी चूत में विनोद का लंड के छोड़े हुए बीज ने एक बच्चे की शकल इकतियार करना शुरू कर दी है.

तो उस वक्त से मेरी चूत में एक हल चल सी मची हुई थी. अब अपने बेड पर लेट कर जब मैने दुबारा इस बात पर गौर करना शुरू किया. तो इस बारे में सोचते सोचते मेरी प्रेगनेंट चूत को अब एक बार फिर विनोद के अनकट लंड की तलब महसूस होने लगी थी.

अपनी इसी सोच में मगन हो कर में अपनी चूत से खेलते हुए आहिस्ता आहिस्ता शलवार के उपर से अपनी उंगली भी अपनी चूत के अंदर डालने लगी थी.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ विनोद के लंड की तरह विनोद के लंड का पानी भी कितना ताकतवर है, कि जो काम यासिर का लंड पूरे दो साल में नही कर पाया, वोही काम विनोद के सख़्त लंड के गाढ़े वीर्य ने एक ही रात में कर दिखाया है, दिल करता है ऐसे असल मर्द को बार बार अपनी चूत पेश की जाईययययययी” अपनी चूत को आहिस्ता आहिस्ता सहलाती हुए में ये बातें सोचने में मसगूल थी.

अभी मुझे अपनी चूत से छेड़ छाड़ का ये खेल शुरू किए हुए चन्द मिनट्स ही गुज़रे थे. कि इतने में मुझे अपने घर का मेन दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनाई दी.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ लगता है यासिर आज जल्दी घर आ गये हैं” घर का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनते ही में एक दम होश में आई. और बिस्तर से उठ कर अपने कपड़ों को ठीक करते हुए बाहर की तरफ जाने लगी.

अपने कमरे से बाहर निकल कर मैने देखा कि वाकई ही यासिर आज घर वापिस आ गये थे.

यासिर के आते ही मैने किचन में जा कर खाना गरम किया और फिर हम दोनो मियाँ बीवी इकट्ठे एक साथ लंच करने लगे.

खाने से फारिग होने के बाद यासिर टीवी लाउन्ज में आया. तो में भी उस के साथ ही टीवी लाउन्ज में आ कर सोफे पर बैठ गई.

अभी हम दोनो मियाँ बीवी टीवी लाउन्ज के सोफे पर बैठे ही थे. कि इतने में घर के दरवाज़े की बेल बज उठी.

“इस वक्त कौन हो सकता है” यासिर ने मेरी तरफ देखते हुए कहा और खुद घर के दरवाज़े की तरफ चल पड़ा.

 
“ओह तुम और इस वक्त यहाँ,आओ अंदर आ जाओ,देखो तो कौन आया है हमारे घर सायरा” यासिर ने हमारे अपारटेमेंट का दरवाज़ा खोलते ही कहा.

तो इस के साथ ही मुझे अपने शौहर के पीछे पीछे मेरे शौहर का दोस्त विनोद अपने घर में दाखिल होता हुआ नज़र आ गया.

“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ विनॉद्द्द्द्द्दद्ड और इस वक्त हमारे घर में, हाईईईईईईईईईईईईईई अब में क्या करूँ” विनोद के साथ चुदाई करने के बाद से आज पहली बार मेरा विनोद से आमना सामना हो रहा था. इसीलिए विनोद को यूँ अचानक अपने सामने देख कर में एक दम परेशान हो कर सोचने पर मजबूर हो गई.

रात के अंधेरे में एक गैर मर्द से जिन्सी ताल्लुक़ात कायम करना एक अलग बात है.

लेकिन फिर दिन की रोशनी में उसी मर्द का सामना करना एक बहुत ही अलगा मामला है.

इसी लिए विनोद से अपनी गरम चूत फड्वाने के एक महीने के बाद विनोद को यूँ अचानक अपने सामने मौजूद पा कर मेरे तो होश ही उड़ गये.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ कहते हैं कि जेसे ही शैतान को याद करो, तो शैतान एक दम आप के सामने किसी ना किसी सूरत में हाज़िर हो जाता है, बिल्कुल उसी तरह में अभी थोड़ी देर पहले ही विनोद को याद कर के अपनी चूत में उंगली कर रही थी, और फिर कुछ ही देर बाद विनोद एक दम मेरे सामने भी आ गया है” विनोद को यूँ अपने सामने देख कर मेरे दिल में ख्याल आया.

विनोद को इतने दिनो बाद आज एक दम अपने घर में देख कर मेरे दिल ही हालत उस वक्त बिल्कुल उस टीन एज लड़की जेसी हो रही थी.

जो ज़िंदगी में पहली बार जब अपने महबूब का दीदार करती है. तो अपने महबूब को देखते ही अपने होश-ओ-हवास खो बैठती है.

बिल्कुल कुछ ऐसी ही हालत से गुज़रये हुए में भी अपनी साँस रोके खामोशी से विनोद को अपने घर के टीवी लाउन्ज में आते देखती रही.

“नमस्ते सायरा जी,आप केसी हैं” मुझे गुम सूम हालत में खड़े होने के बावजूद विनोद ने मेरे सामने आते ही अपने दोनो हाथ जोड़ कर मुझे खालिस इंडियन स्टाइल में सलाम किया.

“जीिइईईई में ठीक हूँ,आप केसे हैं” विनोद की आवाज़ अपने कानो में पड़ते ही मुझे एक दम होश आया. और अपने धड़कते दिल के साथ हिचकिचाते हुए मैने विनोद की बात का जवाब दिया.

“में भी बस ठीक ही हूँ,आज आप के घर के पास से गुज़र रहा था,तो सोचा आप लोगो को हेलो हाई करता चलूं” मेरी तरफ महनी खेज नज़रों से देखते हुए विनोद ने मुझ से ये बात कही. और फिर बहुत नॉर्मल अंदाज़ में खामोशी से सोफे पर बैठ गया.

“जल्दी से विनोद के लिए कुछ चाय पानी का बंदोबस्त करो सायरा” विनोद के साथ ही सोफे पर बैठे हुए यासिर ने मुझ से कहा.तो में इस मोके को गनीमत जानते हुए धड़कते दिल के सोफे से उठ कर तेज़ी के साथ किचन की तरफ चल पड़ी.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मेरी फुद्दि तो विनोद को याद करते हुए पहले ही से गरम हो रही थी,और अब अपने यार को यूँ अपने सामने पा कर मेरी चूत में तो एक आग सी जल उठी है” किचन में पहुँच कर ये बात सोचते हुए मैने अपनी भिखरी सांसो को संभाला. और फिर जल्दी जल्दी विनोद और यासिर के लिए चाय बनाने में मसगूल हो गई.

कुछ देर बाद चाय ले कर जब में टीवी लाउन्ज में वापिस दाखिल हुई. तो यासिर की बे तकलुफ अंदाज़ में विनोद से की जाने वाली खुश गपियाँ देख कर में हैरानी से अपने शौहर को देखते हुए ये सोचने लगी कि “लगता है मेरी चूत चोद कर मुझे हमला (प्रेगनेंट) करने के बावजूद भी, मेरे शौहर यासिर को आज विनोद के यूँ हमारे घर अचानक आ कर मुझ से मिलने का अमल बुरा नही लगा है शायद”.

इस के साथ ही मैने अपने शौहर यासिर और उस के दोस्त विनोद को चाय पेश की. तो इस दौरान सोफे पर बैठे विनोद ने मेरे हाथ से चाय का कप थामते हुए एक लम्हे के लिए मेरे सारे जिस्म का एक भेरपूर जायज़ा लिया. और फिर मेरे हाथ से चाय का कप ले कर यासिर के साथ दुबारा खुश गपियों में मसरूफ़ हो गया.

यासिर और विनोद को चाय पेश करने के बाद मैने अपना चाय का कप लिया और मूड कर अपने बेड रूम में जाने लगी. तो यासिर ने मुझे पीछे से आवाज़ दी “तुम किधर जा रही ही, इधर हमारे साथ ही बैठ कर चाय पिओ ना सायरा”.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ एक तो यासिर की समझ नही आती, कल तो मुझे अपने पेट में जनम लेने वाले विनोद के इस बच्चे को फॉरन ज़ाया करने की बात कर रहा था, और दूसरी तरफ अब खुद ही मुझे उसी विनोद के साथ बैठ कर चाइ पीने पर मजबूर कर रहा है, जिस का बच्चा मेरे पेट में पल रहा है” अपने शौहर की आवाज़ सुन कर कमरे में जाते मेरे कदम एक दम रुक गये. और में ना चाहते हुए भी टीवी लाउन्ज के दूसरे कोने में रखे हुए एक सोफे पर बैठ कर चाय पीने में यासिर और विनोद का साथ देने लगी.

विनोद और यासिर की आपस में होने वाली सारी बात चीत के दौरान मैने कोई हिस्सा नही लिया. बल्कि एक खामोश तमाशाई की हैसियात में सोफे पर बैठ कर चाय पीने के दौरान अपने शौहर और उस के दोस्त की बातों को सुनने में ही मसरूफ़ रही.

मगर इस दौरान मैने नोट किया कि बातों और चाय पीने के दौरान ही मेरे शौहर यासिर की आँखों के ऐन सामने विनोद बार बार मेरी तरफ देखते हुए मेरे बदन के अंग अंग को अपनी नज़रों से चोदने में मसरूफ़ था.

जब कि यासिर के बोलने के अंदाज़ और जिस्म की हरकत-ओ-सकनात को देखते हुए मुझे किसी तौर पर भी ये शक नही हो रहा था. कि मेरे शौहर यासिर को विनोद की ये हरकत बुरी लग रही है.

“ उफफफफफफफफफ्फ़ अपनी जवान बीवी के वजूद पर पड़ती हुई अपने दोस्त की गरम निगाहों का मतलब अच्छी तरह समझने के बावजूद भी यासिर बिल्कुल अंजान बना हुए विनोद को मेरे जिस्म का तोवाफ़ करने का मोका फ़ेरहाम करने में मसरूफ़ है” विनोद की नज़रों को अपने जिस्म पर चुभते हुए महसूस कर के मज़े से महज़ूज़ होते हुए मैने सोचा.

थोड़ी देर बातों बातों में यासिर ने विनोद से रस्मान पूछा “सपना की मौत के बाद, अगर तुम को हमारी किसी भी हेल्प या चीज़ की ज़रूरत हो तो बिना तकल्लूफ हम को बताना विनोद”

“में खुद तुम से इसी सिलसिले में एक बात करना चाहता था, मगर मुझे समझ नही आ रही थी, कि कहाँ से इस बात को स्टार्ट करूँ, मगर तुम ने मेरी मुश्किल आसान बना दी है, असल में आज में एक बहुत ज़रूरी रिक्वेस्ट ले कर तुम्हारे पास आया हूँ, और एक अच्छे दोस्त की हैसियत से मुझे उम्मीद है तुम हमेशा की तरह इस बार भी मुझे इनकार नही करो गे यासिर” मेरे शौहर की बात सुन कर विनोद बोला. तो अपने शौहर यासिर की तरह में भी अपनी चाय की चुस्की लगाते हुए एक दम विनोद की तरफ मुतवजू हो गई.

“हां हां बताओ मुझ से जो हो सकेगा वो में तुम्हारे लिए करने को तैयार हूँ विनोद” विनोद की बात सुनते ही यासिर एक बार फिर बोला.

“यासिर तुम जानते हो कि सपना की मौत के बाद में अकेला रह गया हूँ, इसीलिए में सोच रहा हूँ कि दुबारा से शादी कर लूँ” यासिर की बात के जवाब में विनोद बोला. तो विनोद की दूसरी शादी की बात कर सुन ना जाने क्यों मुझे अपना दिल एक दम डूबता हुआ महसूस हुआ.

“ओह ये तो बहुत अच्छी बात है,क्या दूसरी शादी के लिए इंडिया में कोई लड़की देख रखी है तुम ने विनोद” विनोद की ये बात सुन कर यासिर एक दम खुशी से बोलते हुए कहने लगा.

“इंडिया में नही बल्कि इधर दुबई में ही एक लड़की को में पसंद कर चुका हूँ, और इसी लिए में तुम्हारे पास आया हूँ यासिर” विनोद ने मेरे शौहर की बात का जवाब दिया.

 
“इंडिया में नही बल्कि इधर दुबई में ही एक लड़की को में पसंद कर चुका हूँ, और इसी लिए में तुम्हारे पास आया हूँ यासिर” विनोद ने मेरे शौहर की बात का जवाब दिया.

“अच्छा में समझ गया तुम चाहते हो कि हम तुम्हारे साथ जा कर उस लड़की के घर वालों से तुम्हारे रिश्ते की बात करें, ठीक है तो फिर किसी दिन लड़की के घर वालों से मिल कर तुम्हारे रिश्ते की बात पक्की कर लेते हैं यार” विनोद की बात ख़तम होते ही यासिर खुशी से मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देख कर कहने लगा.

“यार अपनी दूसरी शादी के लिए मुझे किसी और से बात करने को कोई ज़रूरत नही, बल्कि मुझे तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी हां की ज़रूरत है, और इसी लिए रिश्ते की बात करने और तुम्हारी इजाज़त लेने में तुम्हारे पास आया हूँ यासिर” यासिर की बात ख़तम होते ही विनोद ने जब ये बात कही. तो यासिर के साथ मुझे भी विनोद की इस बात बात पल्ले नही पड़ी.

इसीलिए विनोद की बात ख़तम होते ही में और यासिर एक दूसरे का मुँह देखने के बाद एक दम विनोद की तरफ देखने लगे.

“शादी तुम ने करनी है, मगर इजाज़त माँगने और रिश्ते की हां लेने के लिए तुम मेरे पास आए हो, में कुछ समझा नही विनोद” मेरी तरह यासिर को भी विनोद की इन अजीब बातों की कुछ समझ नही आ रही थी. इसीलिए अब की बार यासिर ने तज्सोस भरे लहजे में विनोद से बोलते हुए कहा.

“ चलो में खुल कर समझाता हूँ तुम्हें,असल में बात ये है कि मैने ज़िंदगी में बहुत सी औरतों के साथ चुदाई की है, मगर जो मज़ा मुझे तुम्हारी बीवी सायरा के साथ एक रात में मिला है, वो मज़ा सपना समेत मुझे आज तक किसी दूसरी औरत से ने नही मिला, सायरा के साथ गुज़ारी गई वो रात मुझे अभी तक नही भूली,इसी लिए सपना की मौत के बाद, अब मैने ये सोचा है, कि किसी और औरत को अपनी ज़िंदगी का साथी बनाने की बजाय, क्यों ना में सायरा से दूसरी शादी कर के तुम्हारी बीवी को में अपनी पत्नी बना लूँ, और इसी लिए सायरा का रिश्ता माँगने में तुम्हारे पास आया हूँ यासिर” विनोद ने इतनी बड़ी बात बहुत आराम और धीमे लहजे में यासिर से एक दम कह तो डाली.

मगर मैने महसूस किया कि ये बात अपने मुँह से निकालते ही विनोद के चेहरे पर एक अजीब सी शैतानी मुस्कराहट फैलती चली गई थी.

इधर विनोद ने मेरे और यासिर की तरफ देखते हुए बहुत बहुत खुले और नंगे अल्फ़ाज़ में ये बात कही.

तो विनोद से चुदवाने के बावजूद अपने शौहर के सामने विनोद की ज़ुबान से निकलने वाली ये गंदी बात सुन कर मुझे बहुत शरम महसूस होने लगी.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ आम तौर पर तो लोग गैर शादी शुदा लड़कियों का रिश्ता माँगने उन लड़कियों के माँ बाप के पास जाते ही हैं, मगर आज पहली बार कोई मर्द एक शादी शुदा औरत का रिश्ता माँगने उसी औरत के ज़िंदा शौहर के पास चला आया है, इसे कहते हैं कि आँखों का लाड़ला, खेलने को माँगे चाँद रे” विनोद को यूँ मेरे सामने मेरे शौहर यासिर से मेरा रिश्ता माँगते हुए देख कर मेरे दिल में इस ख्याल ने जनम लिया.

विनोद की इस अनोखी ख्वाहिश पर यासिर की तरह मुझे भी हद से ज़्यादा हैरत महसूस हुई. और इसी लिए यासिर के साथ साथ मेरा अपना मुँह भी हैरत के मारे खुला का खुला ही रह गया.

मगर इस के साथ ही मुझे यूँ महसूस हुआ कि मुझे अपनी बीवी बनाने की बात विनोद के मुँह से सुनते ही मेरी चूत में लगी आग के शोले एक दम बुलंद हो चुके थे. और मेरी चूत का पानी मेरी फुद्दि से निकल कर मेरी गुदाज रानों को गीला करने लगा था.

“तुम्हारा दिमाग़ तो खराब नही हो गया विनोद, सायरा तो मेरी बीवी है और मेरे जीते जी तुम इस से शादी केसे कर सकते हूऊऊऊऊओ” विनोद की बात सुनते ही यासिर के गुस्से का पारा एक दम आसमान से बातें करने लगा. और वो चीखते हुए विनोद से बोला.

 
“यार आराम से मेरी बात सुनो ,शादी ना होने के बावजूद भी तुम और सपना और में और सायरा आपस में मियाँ बीवी वाला रिश्ता कायम तो कर ही चुके थे ना, अब जब कि सपना इस दुनिया में नही रही, तो क्यों ना में सायरा से शादी कर के तुम्हारी बीवी को अपनी भी बीवी बना लूँ, इस तरह सायरा तुम्हारे साथ साथ मेरी भी बीवी बन कर मेरे घर में रहे गी, और हम दोनो मिल कर एक साथ सायरा की जवानी के मज़े लूटेंगे ” यासिर को गुस्से में आते देख कर विनोद ने मेरे शौहर को समझते हुए मेरी तरफ प्यार भरी निगाहों से देखा.

“हाईईईईईईईईईईईईईईईई कषह मेरे बस में होता तो में अभी विनोद को अपना शौहर मान कर उस के मोटे लंड से एक बार फिर अपनी सुहाग रात मना लेती” विनोद को यूँ गरम निगाहों से अपनी तरफ देखते हुए मैने सोचा.

इस बात को अच्छी तरह जानते हुए भी कि विनोद की बात पर अमल होना एक नमुकिन अमल है.

मगर इस के बावजूद मेरे दिल को विनोद की बीवी बनने वाली ये बात एक दम से अच्छी लगने लगी थी.

जिस की वजह से मेरी चूत में लगी हुई जवानी की आग पहले से ज़्यादा तेज़ी से भड़कने लगी थी.

“तुम से अपनी प्रमोशन हासिल करने के लिए मैने तुम्हें अपनी बीवी के साथ एक रात गुजारने की इजाज़त दी थी, मगर तुम तो मुझे ब्लॅकमेल कर के मेरी बीवी के साथ अपनी पूरी ज़िंदगी बसर करने का सोचने लगे हो, मगर अच्छी तरह सुन लो कि ये बात नामुमकिन है, इसीलिए बेहतर है कि तुम इसी वक्त इधर से चले जाओ विनोद” विनोद की बात सुन कर यासिर ने गुस्से में कहा.

“ठीक है में चला जाता हूँ, मगर जाने से पहले एक बात ज़रूर बताना चाहता हूँ,कि मैने अपने घर के हर रूम में ख़ुफ़िया केमरे लगा रखे हैं, जिन में हर वक्त रेकॉर्डिंग होती रहती है, अगर में चाहता तो अपनी और सायरा की चुदाई की वीडियो के ज़रिए भी में तुम दोनो को ब्लॅकमेल कर के अपना काम निकलवा सकता था,मगर में ऐसा इसीलिए नही करूँगा , कि जो मज़ा रज़ामंदी से कोई चीज़ हासिल करने में है,वो ज़ोर जबर्जस्ती में नही, इसीलिए अगर तुम मेरी बात नही मान रहे तो कोई बात नही,में चला जाता हूँ , मगर जाने से पहले तुम्हें अपनी और सायरा की चुदाई की ऑरोजिनल सीडी भी दे कर जा रहा हूँ,ताकि तुम को ये डर ना रहे कि में आइन्दा तुम्हें कभी ब्लॅकमेल करने की कोशिश करूँगा ” विनोद ने ये बातें कहते हुए अपनी पॅंट की पॉकेट से एक सीडी निकाल कर सामने की टॅबेल पर रखी. और फिर एक दम से उठ कर हमारे घर से बाहर निकल गया.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ अभी तो में तुम्हारे पेट में विनोद के बच्चे वाली बात से ही सम्भल नही पाया था, और अब विनोद एक नई मुसीबत खड़ी कर गया है मेरे लिए” विनोद के जाने के बाद यासिर एक दम अपने सर को दोनो हाथों से थामते हुए मुझ से बोला.

“बड़ा शौक था ना तुम्हें अपनी बीवी को किसी और मर्द से शेर करने का,अब जब अपनी बीवी की चूत को एक गैर मर्द के लंड से चुदवा लिया है, तो अब इस तरह की बातें तो होंगी ही ना मेरी जान” यासिर की बात सुन कर मैने मुस्कुराते हुए अपने शौहर को जवाब दिया. और खुद चाय के बर्तन उठा कर किचन में चली गई.

उस शाम विनोद के जाने के बाद यासिर को तो एक अजीब सी चुप ही लग गई. और वो सारा वक्त टीवी देखने के दौरान गुम सूम अपनी किसी सोच में ही मगन रहा.

जब कि में पूरी शाम विनोद की कही गई बात और अपने पेट में पलने वाले उस के बच्चे के अहसास की बदोलत अपनी चूत में लगी आग की तपिश को महसूस कर के गरम होती रही.

उस रात सोने से पहले यासिर ने गर्मी की वजह से अपनी कमीज़ उतार दी. तो में भी अपनी पतली सी शलवार कमीज़ में मलबूस हो कर सोने के लिए यासिर के पहलू में लेट गई.

“ विनोद को में अच्छी तरह जानता हूँ,वो अक्सर नशे में धुत हो कर ऐसी बकवास करता रहता है, इसीलिए तुम उस की बातों की परवाह ना करो, बल्कि तुम बताओ तुम ने अपने पेट में पलने वाले विनोद के बच्चे के बारे में क्या फ़ैसला किया है सायरा” मेरे बेड पर लेटते ही यासिर एक दम कल वाली बात को याद करते हुए मुझ से पूछने लगा.

“अभी तो कोई फ़ैसला नही किया, अभी में सोच रही हूँ यासिर” अपने शौहर को यूँ बेताबी से मुझ से विनोद के बच्चे को गिराने का पूछने पर मैने बहुत आराम से जवाब दिया.

“बेहतर यही है कि मेरी बात मानते हुए तुम अपने पेट में पालने वाले इस बच्चे से निजात हासिल कर लो, क्योंकि में नही चाहता कि मेरी बीवी किसी गैर मर्द के बच्चे की माँ बने सायरा” यासिर ने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए मुझ से कल वाली बात दोबारा से कह दी.

“विनोद से चुद्ने में खुद तो नही गई थी ना, जब तुम खुद अपने होश-ओ-हवास में अपनी जवान बीवी को खुद एक हिंदू मर्द से चुदवाने के लिए ले गये थे, तो उस वक्त तुम्हें खुद ही इस बात का अंदाज़ा होना चाहिए था, कि एक रात की चुदाई का ये अंजाम भी निकल सकता है यासिर” यासिर के कहे हुए ये अल्फ़ाज़ सुन कर मेरे जिस्म में एक आग सी लगी और मैने गुस्से में अपने शौहर को जवाब दिया.

“ तुम्हारी बातों से तो अंदाज़ा होता है कि जेसे तुम ने ये पक्का इरादा कर लिया है, कि तुम अपने पेट में पलने वाले विनोद के इस बच्चे को जनम ज़रूर दो गी सायरा” मेरी बात सुन कर यासिर ने मुझ से पूछा.

“अगर मेरा जवाब सुनना चाहते हो तो सुनो, हां मैने ये फ़ैसला कर लिया है कि में किसी सूरत अबॉर्षन नही करवाउन्गी यासिर” मैने अपने शौहर की बात का दो टुक अल्फ़ाज़ में जवाब दिया.

“तुम क्यों अपनी ज़िद पर अड़ी हुई हो यार, ज़रा सोचो कि जब तुम अपनी कोख से एक इंडियन मर्द के बच्चे को जनम दो गी, तो ये दुनिया तुम्हें क्या कहेगी सायरा” मेरी बात सुनते हुए यासिर ने गुस्से में मुझ से कहा.

“यासिर तुम अच्छी तरह जानते हो कि तुम कभी बाप नही बन सकते, अब अगर विनोद की वजह से में प्रेगनेंट हो गई हूँ, तो में ये बच्चा अब अपनी खुशी से नही, बल्कि तुम्हारी माँ को तुम्हारी जायदाद का एक वारिस देने की खातिर पेदा करना चाहती हूँ, रही दुनिया वालों की बात, तो इंडियन और पाकिस्तानी लोगो के रंग और रूप तो वैसे भी तकरीबन एक ही जैसे होते हैं, इसीलिए बाहर के लोगो को केसे पता चले गा, कि मेरी कोख से जनम लेने वाले इस बच्चे का बाप विनोद नामी एक इंडियन मर्द है, या यासिर नामी मेरा अपना पाकिस्तानी शौहर” मैने यासिर से ये बात कहते हुए अपने शौहर को उस की अम्मी की कही हुई सारी बात भी तफ़सील से बता दी.और साथ ही साथ यासिर की अम्मी की दी हुई तलाक़ वाली धमकी का भी बता दिया.

“तुम ठीक ही कह रही हो, अपनी इस जिन्सी ख्वाहिश को पूरी करने से पहले, मुझे इस बात का अंजाम सोचना चाहिए था, और अगर तुम ने मेरी खातिर इतना बड़ा कदम उठा लिया है,तो में भी अब किसी सूरत मे तुम्हें अपने आप से जुदा नही होने दूँगा,चाहे इस के लिए मुझे किसी और के बच्चे का बाप ही क्यों ना कहलाना पड़े सायरा” मेरे मुँह से अपनी अम्मी की सारी बात की तफ़सील सुन कर यासिर ने मुझे हॉंसला देते हुए कहा.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ यासीर्र्ररर तुम कितने अच्छे हो मेरी जान” अपने शौहर को यूँ मेरी बात मानते हुए देख कर मेरे दिल खुशी से बाग बाग हो गया.

और मैने एक दम अपने पास लेते हुए अपने शौहर के मुँह में मुँह डालते हुए यासिर के लिप्स को अपनी ज़ुबान से चूसना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर हम दोनो मियाँ बीवी एक दूसरे के होंठों को चूमते और चाटते रहे. और फिर किस वक्त हमे नींद ने घैर लिया. इस का हमे खुद भी पता ना चला.

कहते हैं कि जो बात या वाकिया आप को दिन के वक्त पेश आता है. कभी कभी वो ही बात रात को एक ख्वाब की शकल में आप के दिमाग़ में आ जाती है.

कुछ ऐसी ही बात उस रात मेरे साथ भी हुई. कि उस रात में यासिर के साथ एक बिस्तर पर सोते हुए मुझे नींद में एक ख्वाब नज़र आया.

मैने इस ख्वाब में देखा कि में एक दुल्हन बनी अपनी सुहाग की सेज पर बैठी हूँ. और विनोद दूल्हा के रूप में मेरे पास आ कर मेरा घूँघट उठाता है.

इधर मेरे ख्वाब में विनोद ने मेरा घूँघट उठाया. तो दूसरी तरफ “ओह हाइईईईईईईईई” करते हुए एक दम मेरी आँख खुल गई.

आँखे खुलते ही मुझे यूँ महसूस हुआ कि नींद के आलम में मेरा हाथ इस वक्त मेरी चूत पर है. और ये ख्वाब देखते हुए में अपनी चूत से खेलने में मसरूफ़ हूँ.

ज्यों ही मेरी आँख खुली तो इस के साथ ही मेरी मुँह से निकलती हुई सिसकियों ने मेरे शौहर यासिर को भी नींद से जगा दिया.

“क्या हुआ तुम्हें,सब ठीक है ना सायरा” मेरे पहलू में लेटे यासिर ने अपनी आँखे खोलते ही मुझ से पूछा.

“ओह मेरी फुद्दि में इस वक्त आग लगी हुई है, और मुझे तुम्हारे लंड की शदीद तलब हो रही है, चोदो मुझे यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर” यासिर की बात सुनते ही मैने एक दम अपने और यासिर के कपड़े उतारे .और फिर दूसरे ही लम्हे बिस्तर पर लेटे हुए अपने शौहर के नंगे जिस्म पर चढ़ गई.

 
ज्यों ही मेरा नंगा वजूद अपने शौहर यासिर के उपर आया. तो यासिर ने नीचे से मेरे चौड़े कुल्हों को अपने हाथों में जकडते हुए मेरी चूत के होंठों को अपने लंड के लिए खोल दिया.

यासिर के हाथों अपनी चूत का मुँह खुलते ही मैने अपने आप को आहिस्ता आहिस्ता नीचे ले जाते हुए अपनी चूत को अपने अपने शौहर यासिर के तने हुए लंड के ऐन उपर लगा कर यासिर के लंड को अपनी पानी छोड़ती गरम फुद्दि में दाखिल होने की इजाज़त दे दी.

यासिर का लंड ज्यों ही मेरी चूत के लबों से स्लिप हो कर मेरी गरम फुद्दि के अंदर आया. तो मज़े से बे हाल होते हुए मेरे होंठों से एक हल्की सी चीख निकल पड़ी.

“ओह मेरी चूत में एक आज लगी हुई है,मुझे चोद चोद कर मेरी चूत की आग को ठंडा करो मेरी जान” यासिर के लंड को अपनी चूत में जज़ब करते ही में मज़े से सिसकारती हुई अपने शौहर के लंड पर तेज़ी के साथ उछलते हुए यासिर से चुदवाने लगी थी.

उफफफफफ्फ़ क्या मज़ा था.कि में अपने शौहर के लंड के उपर बैठ कर तेज़ी से उपेर नीचे हो रही थी.

जब कि यासिर मेरे हाथों को अपने हाथों में थाम कर नीचे से मेरी चूत में ज़ोर दार धक्के लगाते हुए मेरी प्यासी चूत को अपने लंड से चोदने में मसरूफ़ हो गया था.

“ओह तुम्हारे लंड को अपने अंदर लेने के बावजूद मुझे नज़ाने क्यों मुझे अपनी चूत खाली खाली सी महसूस हो रही है यासिर” अपने शौहर के लंड पर पानी पानी होती हुई अपनी प्यासी चूत घुमाते हुए एक दम मेरे मुँह से ये बात निकल गई.

“शादी के बाद से आज तक तुम ने कभी मुझ से ऐसी बात नही की, और ना ही मैने इस से पहले कभी इस बारे में कभी गौर किया है, मगर आज तुम्हारी चूत मुझे भी पहले से कुछ खुली खुली सी महसूस हो रही है सायरा” मेरी बात सुन कर यासिर ने एक लम्हे के लिए नीचे से अपने मुँह उपर करते हुए मेरी तरफ देखा और फिर मुझ से बोला.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तो कुछ ऐसा करूऊऊऊऊओ ना मेरी जान, जिस से मेरी चूत को तुम्हारे लंड की सख्ती अपने अंदर महसूसस्स्स्स्स्स्सस्स हो यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर” यासिर का जवाब सुन कर में बे चेनी से सिस्कार्ते हुए बोली.

“अच्छाआआआअ अगर तुम्हारी चूत को मेरे लंड का अपने अंदर मौजूदगी का अहसास नही हो रहा तो फिर तो एक ही हल है मेरी जान” ये कहते हुए यासिर ने मेरी चूत के फूले हुए होंठों के दोनो तरफ अपने हाथों को रखते हुए मेरी चूत के होंठों को अपने तने हुए लंड के इरद गिर्द कसा.

और फिर अपनी गान्ड को बिस्तर से उपर उठाते हुए अपने खड़े हुए लंड को तेज़ी के साथ मेरी चूत के अंदर मारने लगा.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ आब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबब थोर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रररा सा अहससस्स्स्सस्स हो रहा है कि मेरी चूत में कोई चीज़ गई है यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर” अपनी चूत के फूले हुए लिप्स के दोनो तरफ यासिर के हाथों के दबाव की वजह से अपने शौहर के लंड के अहसास को फील करते हुए मैने यासिर से कहा. और अपनी चूत को अपनी पूरी ताक़त के साथ यासिर के लंड पर फेरने लगी थी.

ज्यों ही मज़े से बे हाल हो कर मैने यासिर के लंड पर अपनी गरम चूत मारी. तो मेरी चूत की गर्मी की वजह से यासिर के लंड का सबर ख़तम हो गया और यासिर ने एक दम अपने लंड का पानी मेरी गरम चूत में छोड़ दिया.

“अभी तो मेरी चूत की आग हल्की भी नही हुई थी, कि तुम एक दम फारिग भी हो गये यासिर” यासिर के यूँ अचानक अपने लंड का पानी छोड़ना मुझे अच्छा नही लगा. और मैने गुस्से में झुंझलाते हुए अपने शौहर से कहा.

“उफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारी चूत की गर्मी ने मुझे इतना पागल कर दिया था, कि में अपने आप पर काबू नही रख सका मेरी जान” मेरी बात सुन कर यासिर ने जवाब दिया.

“ओह मगर अब में क्या करूँ, मेरी चूत तो अभी तक गरम है मेरी जान” अपनी चूत को यासिर के ढीले पड़ते लंड पर रगड़ते हुए में चली.

“तुम अपनी चूत को मेरे मुँह पर रखो, में तुम्हारी चूत को अपनी ज़ुबान से चाट कर तुम्हारी चूत को ठंडा कर देता हूँ सायरा” मुझे अपनी चूत की गर्मी से बे हाल होते देख कर यासिर ने मेरी चूत को चाटने की खुद ही मुझे ऑफर दी.

अपने शौहर के मुँह से ये बात सुनते ही मेरी चूत और मचल उठी. और मैने एक लेम्हा ज़ाया किए बिना यासिर के लंड के पानी से भरी अपनी चूत अपने शौहर के मुँह पर रख दी.

“उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ चातूऊऊऊऊऊ मेरी चूत और अपने ही लंड के पानी का स्वाद चख लो मेरी चूत से यासिर” मैने अपने शौहर के मुँह पर बैठ कर अपनी चूत के मुँह को अपने दोनो हाथों से खोला. और फिर अपनी चूत को अपने शौहर के खुले मुँह पर तेज़ी के साथ मारने लगी.

“ये तो बताओ आज ये अचानक तुम्हें नींद में क्या हुआ कि तुम्हारी चूत इतनी गरम हो गई है सायरा”अपने ही लंड से ताज़ा ताज़ा चुदि हुई मेरी चूत में नीचे से अपनी नुकीली ज़ुबान घुमाते हुए यासिर ने मुझ से सवाल किया.

“ओह मैने अभी अभी एक अजीब से ख्वाब देखा है, कि मेरी शादी विनोद से हो चुकी है और में दुल्हन बन कर सुहाग की सेज पर बैठी हुई हूँ, तो ख्वाब में अपने आप को विनोद की दुल्हन बने देख कर मेरी चूत में आग लग गई है यैइसरर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर”

मज़े से बे हाल होते हुए मैने अपने एक मम्मे के निपल को अपने हाथ से मसल्ते हुए यासिर की बात सुन कर मैने जवाब दिया. और फिर यासिर के गरम होंठों पर अपनी नरम चूत को रगड़ने लगी.

“ओह अच्छााआअ ऐसे लगता है कि तुम्हें विनोद की बीवी बनने का आइडिया अच्छा लगा है मेरी जान” यासिर अपने मुँह पर फिरती हुई मेरी चूत के होंठों पर अपनी ज़ुबान घुमाते हुए एक दम मुझ से ये सवाल पूछ बैठा.

“हान्ंनननननननननणणन् ना सिर्फ़ मुझे उसका ये ख्याल अच्छा लगा है, बल्कि में हक़ीकत में भी अब विनोद की बीवी बनना चाहती हूँ, इसीलिए तुम कल सुबह विनोद को बता दो गे तुम्हें अपनी बीवी के लिए उस का रिश्ता कबूल है यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर”

ये बात कहते हुए मैने अपने मोटे मम्मे को अपने हाथ से दबाते हुए यासिर के मुँह पर अपनी चूत का दबाब बढ़ाया. तो मेरी गरम चूत से यासिर के लंड की मनी निकल कर मेरे शौहर के खुले मुँह में गिरने लगी थी.

“उम्म्म्ममममम जब शादी के बिना ही तुम्हें विनोद का लंड चुदाई के लिए दस्तियाब हो सकता है,तो फिर शादी के झंझट में पड़ने की ज़रूरत ही क्या है मेरी जान” मेरी बात सुन कर यासिर ने फुद्दि चाटते हुए मुझ से पूछा.

“जैसे तुम्हारी फॅंटेसी थी कि तुम मुझे किसी और मर्द से चुदवाओ,इसी तरह अब मेरी भी ये फॅंटेसी है कि में विनोद की बीवी बन कर उस के लंड से मज़े लूँ, क्योंकि जैसे पेप्सी की कमर्षिल में कहते है ना कि ये दिल माँगे मोर, इसी तरह एक बार विनोद से चुदने के बाद मेरी चूत भी अब विनोद का लंड माँगे मोर, वैसे भी विनोद से शादी कर के में एक तीर से तीन शिकार करूँगी यासिर”

अपने शौहर की बात का जवाब देते हुए में यासिर के सर को अपने दोनो हाथों में थामा. और अपनी गरम चूत को एक बार फिर यासिर के होंठों पर फेरा.

“तीन शिकार वो केसे” यासिर ने नीचे से मेरी चूत के फूले हुए लिप्स में अपनी ज़ुबान फिराते हुए पूछा.

“पहला शिकार तो ये कि में विनोद के बच्चे की माँ बन कर तुम्हारी अम्मी को पोता दूं गी, दूसरा शिकार ये कि विनोद के लंड से चुद कर मेरी चूत को वो मज़ा और स्वाद मिले गा, जो अब तुम मुझे अपने लंड से देने से कसीर हो चुके हो, और तीसरा शिकार ये कि विनोद के लंड से चुदि हुई मेरी चूत से हर रोज़ तुम्हे ताज़ी मनी खाने को मिलेगी यासिर”

“तो इस का मतलब है कि विनोद से शादी के बाद तुम मुझे छोड़ दो गी सायरा” मेरी बात सुन कर यासिर ने इक दम मेरी चूत से अपन मुँह हटाया और अफ्सुर्दा हो कर बोला.

“नहियीईईईईई में तुम्हें हरगिज़ नही छोड़ूँगी यासिर,विनोद की तरह तुम भी मेरे शौहर की हैसयत् में मेरे साथ ही रहोगे मेरी जान” अपने शौहर को यूँ गुम्सुम होते देख कर मैने एक दम जवाब दिया.

“फॅंटेसी तक तो ये बात ठीक है, मगर हक़ीकत में दो शौहर एक साथ, ये केसे मुमकिन है सायरा” मेरी बात को ना समझते हुए यासिर ने फिर पूछा.

“ मुझे ये बात कहनी तो नही चाहिए, मगर बात ये है कि जब हमारे मुसलमान मर्द एक साथ चार बीवियाँ अपने निकाह में रख सकते हैं,तो फिर में एक ही वक्त में दो मर्दो की बीवी बन कर क्यों नही रह सकती” मैने यासिर की बात का जवाब दिया.

“तो तुम विनोद से निकाह करो गी, वो तो हिंदू है और हिंदू मर्द से एक मुसलाम औरत का निकाह जायज़ नही सायरा” मेरी बात के जवाब में यासिर बोला.

“में विनोद से निकाह नही बल्कि हिंदू मज़हब के मुताबिक मंदिर में विनोद के साथ फेरे ले कर शादी करूँगी यासिर” यासिर की बात के जवाब देते हुए मैने कहा.तो ये बात कहते हुए मेरी चूत में एक दम एक अजीब सी गर्मी की लहर सी उठ गई और मैने यासिर के खुले होंठों पर तेज़ी के साथ अपनी चूत घुमाई .

“मुसलमान होते हुए तुम मंदिर में साथ फेरे लो गी, ये तो गुनाह है,इस से बेहतर है विनोद को मुसलमान कर के उस से निकाह पढ़वा लो मेरी जान” यासिर ने मुझे समझाते हुए कहा और अपनी ज़ुबान का सफ़र मेरी चूत की सड़क पर जारी रखा.

 
“एक शौहर के होते हुए दूसरी शादी तो वैसे भी गुनाह ही है, और अगर गुनाह ही करना है तो इस बात से क्या फरक पड़ता है कि में अपनी दूसरी शादी मुस्जिद में करूँ या मंदिर में यासिर” यासिर की बात सुन कर मैने एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ अपने शौहर को जवाब दिया.

“इस का मतलब है कि तुम ने विनोद की बीवी बनने का पक्का इरादा कर लिया है सायरा” मुझे यूँ शौक से विनोद के साथ अपनी शादी की डीटेल्स डिसकस करते देख कर यासिर भी अब बहुत इश्तियाक से मुझ से बात करता हुआ पूछने लगा था.

“हां में अब हर सूरत में विनोद की बीवी बन कर अपने पेट में पालने वाले इस बच्चे को उस का असली बाप दूं गी, वैसे सच सच बताऊ कि तुम्हें भी मेरा विनोद की बीवी बन कर उस के बच्चे पेदा करने के ख्याल से मज़ा आ रहा है हैना यासिर” में अपने शौहर यासिर के मुँह पर अपनी चूत रगड़ते हुए सिसकारी.

“हाआआआआआअँ मेरी जनाआआआआआआं हाआंन्नााआअँ, कल तुम्हारी नाराज़गी के डर से मैने विनोद पर गुस्सा किया था, मगर हक़ीकत में विनोद की तुम से शादी करने वाली बात सुन कर मेरा लंड फुल तन गया था, विनोद के लंड से चुदि हुई तुम्हारी चूत को एक बार चाटने के बाद अब मेरी ज़ुबान हर रोज़ उसी स्वाद को चखने के लिए बे चैन रहती है, और अब विनोद से तुम्हारी शादी के बाद मुझे अगर डेली तुम्हारी रस भरी चूत खाने को मिल जाए तो मेरे तो मज़े ही हो जाएँगे मेरी जान” मेरी बात सुनते ही यासिर ने मज़े और जोश में एक बार फिर मेरी चूत में अपनी ज़ुबान तेज़ी के साथ डालते हुए जवाब दिया.

“तो ठीक है तुम कल ही विनोद से बात कर के मेरे लिए विनोद का रिश्ता कबूल कर लो मेरी जान” मैने अपने शौहर यासिर को अपना फ़ैसला सुनाने हुए फिर अपनी चूत को एक बार फिर यासिर के मुँह पर फिराया .

तो इस के साथ ही सबर का दामन मेरे हाथ से छूट गया और मैने एक दम अपनी प्रेगेनेंट चूत का गरम पानी अपने शौहर के मुँह में उडेल दिया.

दूसरी सुबह जब तक में अपनी नींद से जागी तो उस वक्त तक यासिर अपने ऑफीस जा चुका था.

नींद से उठने के बाद में नहा धो कर फारिग हुई और नाश्ते के बाद अपने घर के काम में मसरूफ़ हो गई.

दोपहर को यासिर ने अपने ऑफीस के लंच टाइम से कुछ देर पहले मुझे फोन किया.

“तुम रात को अपनी चूत की गरमी की वजह से ऐसी बहकी बहकी बातें कर रही थी, या तुम वाकई ही विनोद से शादी वाली बात पर सीरीयस हो सायरा” मैने ज्यों ही अपना मोबाइल फोन पिक किया तो मेरी आवाज़ सुनते ही यासिर ने मुझ से दुबारा पूछा.

“मैने रात को जो भी बात की थी वो पूरे होश-ओ-हवास में की थी, तुम आज ही विनोद से बात कर के मेरी और विनोद की शादी की तैयारी करो ,क्योंकि अब मेरी चूत विनोद के लंड से ज़्यादा दूरी बर्दास्त नही कर सकती मेरी जान” यासिर की बात सुन कर मैने दो टुक अंदाज़ में अपने शौहर से अपने दिल की बात की दी.

“अच्छा में लंच पर विनोद से ये बात करता हूँ मेरी जान” यासिर ने मुझे जवाब दिया.

“रिश्ते की हां करने के साथ ही विनोद से कहना कि वो मुझ से अब शादी के दिन तक मिलने की कोशिश ना करे,क्योंकि में उस से मुलाकात अब सिर्फ़ अपनी सुहाग रात को ही करूँगी ” अपने शौहर के मुँह से विनोद के साथ मेरा रिश्ता करने वाली बात सुन कर मेरी चूत में एक दम आग सी भड़क उठी. और फोन पर यासिर से बात चीत के दौरान में आहिस्ता आहिस्ता अपनी चूत में एक उंगली डाल कर अपनी चुत को चोदने में मसरूफ़ रही.

“ठीक है में विनोद के साथ ये सारी बात कर के तुम्हें थोड़ी देर में दुबारा फोन करता हूँ मेरी जान” यासिर ने ये कह कर फोन बंद किया. तो में अपने शौहर के दुबारा फोन आने के इंतजार में सोफे पर बैठ कर टीवी देखने में मसरूफ़ हो गई.

एक घंटे बाद जब दोबारा मेरे फोन पर यासिर का फोन आया. तो मैने बेताबी से फोन उठा लिया.

“सायराआ विनोद तुम से खुद बात करना चाहता है” मैने ज्यों ही अपने फोन आन्सर किया तो यासिर ने मुझ से कहा.

“ठीक है मेरी बात करवा दो” यासिर की बात सुन कर मैने कहा और विनोद के फोन पर आने का इंतिज़ार करने लगी.

“हाईईईईईईईईईई सायरा में विनोद बात कर रहा हूँ, मेरी यासिर से बात हो गई, उफफफफफफफफफ्फ़ मुझे यकीन ही नही हो रहा कि तुम ने मेरी बीवी बनना कबूल कर लिया है” यासिर के फोन मिलाते ही विनोद ने जोश के साथ अपने दोस्त के हाथ से फोन खैंच लिया. और खुशी से चिल्लाते हुए मुझे अपने और यासिर के दरमियाँ होने वाली बात की तफ़सील बता दी.

“यासिर ने जो कुछ तुम्हें बताया है वो सच है, और वाकई ही सपना की मौत के बाद में दूसरी बीवी की हैसियत से तुम्हारी ज़िंदगी में शामिल होना चाहती हूँ विनोद” विनोद को खुशी से पागल होते सुन कर मैने भी उसी जोश और खुशी भरे लहजे में विनोद की बात का जवाब दिया.

“तो फिर ठीक है मेरी मंदिर के पंडित जी से बात हो चुकी है, और वो कुछ ज़्यादा पैसे ले कर तुम्हारी और मेरी जाली शादी करवाने पर राज़ी हो गये हैं, पंडित जी के कहने के मुताबिक शादी का शुभ महुरत नेक्स्ट संडे को बनता है,इसीलिए हम नेक्स्ट संडे को अपनी शादी का दिन पक्का कर लेते हैं,और में आज ही शादी का ल़हेंगा खरीद कर यासिर के हाथ तुम्हें भेज देता हूँ मेरी जान” मेरी बात सुन कर विनोद ने खुशी से झूमते हुए मुझे जवाब दिया.

“नही तुम मेरे लिए नया लहंगा मत ख़रीदो विनोद, क्योंकि तुम्हारे साथ अपनी शादी वाले दिन में वो ही लहंगा पहनुगी,जो मैने यासिर से अपनी शादी के दिन पहना था” विनोद की आवाज़ सुन कर मेरे दिल की धड़कनें एक दम तेज हो गईं. और इस के साथ ही विनोद के मुँह से अपनी शादी अगले वीक तय होने वाली बात सुन कर मेरी चूत में एक दम चीटियाँ सी रेंगने लगी थी.

“अच्छा जेसे तुम्हारी मर्ज़ी, मगर लहँगे के नीचे पहनने वाले तुम्हारे अंडर गारमेंट्स में खुद अपनी पसंद से खरिदुन्गा और तुम्हें अपनी शादी वाले दिन वो ही पहनना पड़े गा सायराआआअ” मेरी बात सुन कर विनोद ने कहा. तो में भी अपने होने वाले नये शौहर की फरमाइश सुन कर फोन पर ही खिल खिला कर हंस पड़ी.

“ठीक है तो मेरे लिए 36ड्ड का ब्रेज़र और मीडियम साइज़ की पैंटी खरीद लेना मेरे होने वाले सरताज” विनोद को अपने मोटे मम्मे और चुतड़ों का साइज़ बताने के बाद मैने फॉरन ही फोन बंद कर दिया.

शाम को घर आने के बाद यासिर ने मुझे बताया कि विनोद की ख्वाहिश है कि शादी के बाद यासिर और में विनोद के घर में शिफ्ट हो जाएँ. इसीलिए यासिर ने अपने अपार्टमेंट को खाली करने का नोटीस दे दिया है.

फिर अगले ही दिन विनोद के साथ मेरी शादी की तैयारियाँ शुरू हो गईं.

मैने यासिर से शादी के वक्त पहना हुआ अपना लहंगा और चोली अलमारी से निकाली. और एक टेलर के पास ले जा कर अपनी चोली का गला पहले से ज़्यादा डीप करवा कर चोली की फिटिंग को भी सही करवा लिया था.

इस दौरान यासिर मेरा और अपना समान थोड़ा थोड़ा कर के विनोद के घर शिफ्ट करने लगा था.

विनोद के घर समान शिफ्ट करने के दौरान यासिर ने अपने सारे कपड़े और ज़ाति इस्तेमाल की सारी चीज़ें एक अलग बेडरूम में सेट कीं.

मगर मेरे इस्तेमाल की सारी चीज़ें, कपड़े और मेकप का सारा समान वगेरा यासिर ने विनोद के कमरे की अलमारी में रख दीं थी.

में एक एक दिन गिन कर उस दिन का इंतज़ार करने लगी थी. जब विनोद से मेरी शादी का मुहूरत था.

इस दौरान विनोद ने मेरे मना करने के बावजूद मुझे एक दो दफ़ा फोन कर के मुझ से बात करने की कोशिश भी की.

मगर मेने अपने लिए विनोद की प्यास बढ़ाने के लिए जान बूझ कर विनोद से बात नही की थी.

अपनी शादी से एक दिन पहले मैने ब्यूटी पार्लर जा कर अपनी सुडोल और गुदाज टाँगों की वॅक्सिंग करवा ली थी.

और साथ ही साथ अपने हाथों और पैरों पर मेहन्दी भी लगवा ली.

फिर आख़िर कार वो दिन आ ही पहुँचा जिस दिन के इंतिज़ार में पिछले एक हफ्ते से मेरी चूत अपना पानी छोड़ छोड़ कर पागल हो रही थी.

शादी से एक दिन पहले तक हमारे घर का सारा समान विनोद के घर में शिफ्ट हो गया. तो में और यासिर एक रात के लिए घर के करीब ही एक होटेल में चले आए.

उस रात में और यासिर काफ़ी लेट सोए जिस की वजह से दूसरे दिन हम लोग दोपहर को ही उठ पाए थे.

दूसरे दिन दोपहर का खाना खा कर यासिर तो विनोद के घर अपना और मेरा समान सेट करने निकल गया. जब कि में नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई.

 
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