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हाईईईईईईई में चुद गई दुबई में complete

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दूसरे दिन दोपहर का खाना खा कर यासिर तो विनोद के घर अपना और मेरा समान सेट करने निकल गया. जब कि में नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई.

बाथरूम में जा कर मैने अपनी चूत पर हेर रिमूविंग क्रीम लगा कर अपनी चूत को अच्छी तरह से सॉफ कर के अपनी फुद्दि को अपने नये शौहर विनोद के लंड के लिए तैयार किया.

बाथरूम से बाहर निकल कर मैने अपनी टाँगों, रानों,पेट मम्मे और जिस्म के हर हिस्से पर अच्छी तरह एक खुबूदार लोशन लगा कर कमरे में लगे हुए शीशे में से अपने जिस्म का जायज़ा लिया.

अपनी चूत की शेव करने के बाद जिस क़दर मेहनत से मैने अपने जिस्म के हर हिस्से पर लोशन लगा कर विनोद के लिए सजाने की मेहनत की थी.

उस वजह से मेरे जिस्म का हर हिसा कमरे की लाइट में अपनी पूरी आबो ताब से चमक रहा था.

“उफफफफफफफ्फ़ इतनी मेहनत से संवारे हुए मेरे इस खूबसूरत जिस्म को देख कर विनोद के तो होश ही उड़ जाएँगे” अपने गरम जवान जिस्म को शीशे में देखते हुए मैने सोचा. और फिर अपने जानू विनोद के लिए खुद को तैयार करने में मसरूफ़ हो गई.

मैने अपने सूट केस से विनोद की खरीदी हुई रेड कलर की पैंटी और उसी कलर का ब्रेज़र निकाल कर अपने गोरे और भरे हुए जिस्म पर पहन लिया.

विनोद का दिया हुआ ये सुर्ख रंग का पुश अप ब्रेजियर लो कट था.

जिस में से मेरे आधे मम्मे बिल्कुल नंगे नज़र आ रहे थे.

विनोद की दी हुई ब्रेज़ियर और पैंटी पहन लेने के बाद मैने अपना लहंगा और चोली भी उठा कर पहन ली.

लहँगे को अपने जिस्म के गिर्द बाँधने के बाद मैने अपनी चोली की हुक को बंद कर के शीशे के सामने अपने वजूद का दोबारा जायज़ा लिया.

तो दर्जी से अपनी चोली का गला खुला करवाने की वजह से मुझे अपने मोटे मम्मे अपनी चोली से बाहर झलकते हुए सॉफ नज़र आ रहे थे.

“उफफफफफफफफफ्फ़ मेरी इन सफेद चुचियों को यूँ चोली में से बाहर छलकता देख कर विनोद के साथ साथ मंदिर के पुजारी का लंड भी किसी लम्हे बैठेगा नहियीईईईईईई” अपनी छलकती चुचियों को देखते हुए मैने सोचा. तो अपने ही मम्मो का ये गरम नज़ारा देख कर मेरी अपनी ही चूत एक दम अपना पानी छोड़ने लगी थी.

मैने अपनी लहंगा और चोली पहन कर अपना मेक अप किया. और फिर कानों में एअर रिंग्स,हाथों में सोने की चूड़ियाँ और

माथे पर सोने का टीका पहन कर मैने पूरी दुल्हन के रूप में तैयार हो कर आखरी बार अपने आप को शीशे में देखा.

“उफफफफफफफफफ्फ़ मेरा जिस्म और इस लिबास पर आज तक सिर्फ़ और सिर्फ़ यासिर का ही हक था, मगर मेरे जिस्म की प्यास ने मुझे एक ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है, जिस का मेने कभी तसव्वुर भी नही किया था,और आज इस लहंगे को दुबारा से पहन कर में आज विनोद की दुल्हन बनुन्गी, और अपने इस गोरे खूबसूरत जिस्म को एक बार फिर विनोद के हवाले कर के उस के अनकट लंड की रगड़ से वो लुफ्त हाँसिल करूँगी , जो कि पिछले एक महीने पहले विनोद ने मुझे दिया था” ये बात सोचते हुए मेने दीवार पर लगी हुई घड़ी की तरफ नज़र दौड़ाई तो मुझे अंदाज़ा हुआ कि विनोद से मेरी शादी का वक्त बहुत ही नज़दीक आ पहुँचा है.

अभी में वॉल क्लॉक को देखने में ही मसरूफ़ थी कि दरवाज़े पर एक हल्की सी दस्तक हुई और मुझे बाहर से अपने शौहर यासिर की आवाज़ सुनाई दी “सायरा दरवाज़ा खोलो प्लीज़”.

होटेल के कमरे पर यासिर की दस्तक सुनते ही मैने फॉरन ही अपने शौहर के लिए कमरे का दरवाज़ा खोल दिया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ देखो तो सही क्या रूप चढ़ा है मेरी जवान बीवी के खूबसूरत वजूद पर, हाईईईईई जितना तुम विनोद का लिए आज सजी हो, इतने प्यार से तो तुम मेरे लिए भी तैयार नही हुई थी” मैने अपनी पूरी सूज बूझ के साथ तैयार हो कर ज्यों ही अपने रूम का दरवाज़ा खोला.

तो मेरी जवानी का ये हसीन रूप देख कर टीवी लाउंज में मेरा इंतिज़ार करते हुए मेरे अपने शौहर यासिर की आँखे फटी की फटी रह गईं. और वो बे इकतियार बोल पड़ा.

“उफ़फ्फ़ फफफफफ्फ़ विनोद के लंड ने शादी से पहले ही मेरी चूत को वो मज़ा दिया है, कि मुझे अपने होने वाले शौहर के लिए इस तरह तैयार होना ही पड़ा है मेरी जान” यासिर की बात को सुन कर मैने मुस्कुराते हुए जवाब दिया.

“अच्छा चलो विनोद मंदिर पहुँच कर हमारा इंतजार कर रहा है मेरी जान” मेरी बात सुन कर यासिर ने मेरे गाल पर हल्का से किस किया मुझे साथ ले कर बाहर की तरफ चल पड़ा.

आधे घंटे की ड्राइविंग के बाद यासिर ने दुबई के एक एरिया बड-दुबई में बने हुए एक हिंदू मंदिर के सामने आ कर अपनी कार पार्क की.

जहाँ विनोद ने टेंपल के एक पुजारी से अपनी और मेरी शादी की बात कर कर शादी का सारा अर्रेंजमेंट किया हुआ था.

में और यासिर अपनी कार से उतरे एक साथ चलते हुए मंदिर के में हाल की तरफ बढ़ने लगे थे.

में अपने शौहर यासिर के साथ दुल्हन के रूप में ज़िंदगी में पहली बार बड दुबई के इस मंदिर में दाखिल हुई.

शादी हाल में दाखिल होते ही मेरी नज़र हाल में मौजूद शादी के मेहमानों पर पड़ी. तो इतने सारे लोग वहाँ मौजूद देख कर मुझे बहुत हैरत हुई.

“विनोद ने तो कहा था कि वो पंडित के अलावा किसी और से हमारी शादी का ज़िक्र नही करे गा, तो फिर ये इतने सारे लोग यहाँ क्या कर रहे है यासिर” शादी हाल में बैठे हुए मेहमानों को देख कर में एक दम घबरा गई.

“अरे यार आज इस जगह पर पहले यहाँ एक और शादी भी हुई है,जिसे अटेंड करने ये सब लोग इंडिया से ख़ास तौर पर इधर आए हैं ,और अभी ये लोग अपने होटेल वापिस जा रहे है, इसीलिए तुम्हें परेशान होने की ज़रूरत नही मेरी जान” मुझे परेशान होते देख कर जब यासिर ने मुझे ये बात बताई. तो अपने शौहर की ये बात सुन कर मेरी जान में जान आई.

हाल में बैठे लोगो से अपनी तवज्जो हटा कर मैने दूसरे कोने की तरह अपनी नज़र दौड़ाई.

तो हाल के दूसरे कोने में बने हुए शादी के मंडप पर मुझे विनोद दूल्हा के रूप में अपना मुन्तिजर खड़ा नज़र आया.

“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ में तो में आज तो विनोद भी फिर से शादी के सूट और पगड़ी बाँध कर एक दूल्हे के रूप मे मेरा इंतिज़ार कर रहा है” अपने होने वाले शौहर विनोद को शादी के कुर्ते पाजामे, शेरवानी और इंडियन स्टाइल की पगड़ी पहने देख कर मेरी चूत एक दम से पानी अपनी होने लगी थी.

अपने होने वाले शौहर विनोद को देख कर मैने अपनी शादी के लिए सजाई गई स्टेज का जायज़ा लिया.

तो अपनी शादी के लिए बनाए गये शादी के मंडप की सजावट देख कर में तो हैरान ही रह गई.

अभी में हाल के दरवाज़े पर खड़ी ये सब देखने में मसरूफ़ थी. कि यासिर की हल्की सी सेरगोशी मेरे कान में पड़ी “चलो सायरा विनोद तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है”.

अपने शौहर यासिर की आवाज़ सुनते ही मुझे एक दम होश आया. और फिर यासिर के साथ हाल में मौजूद लोगो के दरमियाँ में से गुज़रते हुए में हाल के दूसरे कोने में बने शादी के मंडप की तरफ की तरफ बढ़ती चली गई. जहाँ अपने हाथ में फूलों की माला लिए मेरे होने वाला शौहर विनोद मेरी मुन्तिजर था.

स्टेज के नज़दीक पहुँच कर मेरे शौहर यासिर ने मेरा हाथ स्टेज पर खड़े विनोद के हाथ में दिया.

तो में शरमाते हुए विनोद का हाथ पकड़ कर स्टेज के उपर चढ़ गई.

 
अपनी शादी के लिए सजाई गई स्टेज पर चढ़ते ही यासिर ने स्टेज पर एक कोने में रखी हुई दूसरी फुलो की माला मेरे हाथ में पकड़ा दी.

“आप दोनो अब अपने होने वाले जीवन साथी के गले में ये माला डाल दो” फुलो की माला मेरे हाथ में आते ही पास खड़े पंडित जी ने हम दोनो से कहा.

तो मैने अपनी माला विनोद के गले में और विनोद ने अपने हाथ में पकड़ी हुई फूलों की माला मेरे गले में डाल दी.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ आज मेरी जान मेरे लिए इतनी सज धज कर आई है, कि दिल करता है अभी सब के सामने तुम्हारी चूत में अपना लंड डाल कर तुम्हारी फुद्दि का फुद्दा बना दूं”मेरे गले में अपने नाम की माला डालते हुए विनोद ने आहिस्ता से मेरे कान में सरगोशी की. तो में चूत से पानी निकाल कर मेरी गुदाज रानों को भिगोने लगा था.

“अब आप दोनो एक दूसरे के साथ अग्नि के साथ फेरे लोगे” में और विनोद ज्यों ही एक दूसरे के गले में फूलों की माला डाल कर फारिग हुए. तो पंडित जी ने कहा और इस के साथ ही उस ने दो कपड़ों की गिरह बना कर उस कपड़े का एक सिरा विनोद और कपड़े का दूसरा सिरा मेरे कंधे पर रख कर हमे अपनी शादी के साथ फेरे लगाने का कह दिया.

मैने पंडित जी की बात पर अमल करते हुए हिंदू मज़हब के मुताबिक विनोद के पीछे पीछे चलते अग्नि के साथ फेरे लगा कर विनोद का हमेशा साथ निभाने की कसम खाई.

जिस दौरान मंदिर के पंडित सब हिंदू मज़हब के मुताबिक अपनी पूजा पाठ में मसरूफ़ रहे.

अग्नि के साथ फेरो से फारिग होने के बाद विनोद ने मेरी उंगली और मैने विनोद की उंगली में शादी की उंगूठी पहनाई.

फिर विनोद ने मेरी माँग में संदूर डालने के बाद मेरे गले में अपने नाम का मंगलसूत्र पहना कर हिंदू रस्मो रिवाज के मुताबिक मुझे अपनी पत्नी बना लिया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ विनोद के अनकट हिंदू लौडे ने मेरी पाकीज़ा मुस्लिम चूत पर जो रगड़ लगाई थी, उस रगड़ ने मुझे इतना पागल कर दिया है, कि एक शादी शुदा पाकिस्तानी मुस्लिम औरत होते हुए भी में आज एक इंडियन हिंदू मर्द से अपनी दूसरी शादी कर के विनोद की दूसरी बीवी चुकी हूँ” शादी की सारी रस्मों से फारिग होते ही मेरे दिल में ये ख्याल आया.

वैसे तो एक पाकिस्तानी मुसलमान की हैसियत से हिंदू शादी की ये सारी रस्मो रिवाज तो मैं इंडियन चेनल स्टार प्लस और कई इंडियन मूवीस में हज़ारों बार देख चुकी थी.

मगर एक मुसलमन औरत होते हुए आज खुद इन रस्मों से गुज़र कर अपने आप को एक हिंदू मर्द विनोद की बीवी बनते हुए देख और सोच कर मेरी चूत में एक अजीब सी गरमी चढ़ चुकी थी.

जो गर्मी मुझे यासिर से अपना असल निकाह पढ़वाते हुए भी नही चढ़ि थी. और में अच्छी तरह जानती थी कि मेरी इस गर्मी का इलाज अब सिर्फ़ और सिर्फ़ विनोद के अनकट लंड में ही छुपा हुआ था.

हिंदू मज़हब के मुताबिक की गई शादी की इन सारी रस्मों से गुज़र कर विनोद की बीवी बनते हुए मेरे पहले शौहर यासिर समेत हाल में मौजूद सब लोगो ने हमे शादी की मुबारकबाद दी.

तो मेरी चूत में लगी हुआ जवानी और जिन्सी हवस की आग एक दम अपनी बुलंदी पर जा पहुँची.

और अपनी इस चूत की गरमी से बे हाल होते हुए में सब लोगो के सामने ही विनोद की चौड़ी जवान और मज़बूत छाती के साथ चिपकती चली गई.

क्योंकि मुझे ये ख्याल आया था. कि आज जब सारी दुनिया के सामने में विनोद के हाथों से उस के नाम का मंगल सूत्र पहन कर और उस के हाथों से अपनी माँग में सिंदूर लगवा कर विनोद की पत्नी ऑर दुल्हन बन ही चुकी हूँ तो अब शरम केसी.

“चलो अब तुम्हारी पिया घर रुखसती का वक़्त आन पहुँचा है सायरा” अपने जज़्बात के हाथों मजबूर हो कर में ज्यों ही विनोद के साथ लिपटी. तो मेरे पहले शौहर यासिर ने मेरे कान में हल्की आवाज़ में कहा.

अपनी बात ख़तम करते ही यासिर ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे शादी के मंडप से उतार कर सामने रखी हुई एक डॉली में बैठा दिया.

ज्यों ही में डोली में बैठी तो दूसरे लोगो के साथ साथ मेरा पहला शौहर यासिर भी मेरी डोली को कंधा देते हुए मुझे विनोद की शादी के लिए सजाई गई कार में छोड़ने चला आया.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ आज से दो साल पहले में इसी यासिर की दुल्हन बन कर उस के घर आई थी, और आज अपने उसी शौहर के सामने में एक और मर्द की बीवी बन के ना सिर्फ़ अपने नये शौहर के घर विदा हो रही हूँ, बल्कि मेरी दूसरी शादी की डोली आज मेरा पहला शौहर खुद भी उठा कर मुझे एक दूसरे मर्द के साथ रुखसत कर रहा है” अपने असली शौहर यासिर को यूँ इतने प्यार से मेरी डोली उठाते देख कर मेरी चूत फिर से अपना पानी छोड़ने लगी.

यासिर ने मुझे विनोद के साथ कार की पिछली सीट पर बिठाया .और खुद विनोद की कार ड्राइव करते हुए विनोद के घर की तरफ चल पड़ा.

“हाईईईईईईईईईईईईईई ये में क्या देख रही हूँ, आज से दो साल पहले में इसी यासिर के साथ कार की पिछली सीट पर बैठ कर अपने ससुराल गई थी ,और आज में एक नये शौहर के साथ कार की बॅक सीट पर बैठी हूँ, जब कि मेरा आलसी शौहर कार चलाते हुए मुझे मेरे नये घर की तरफ ले जा रहा है” अपने आप को विनोद के साथ कार की बॅक सीट पर बैठे और यासिर को एक शॉफर की तरह कार चलाते देख कर मैने सोचा तो मेरी चूत विनोद के मोटे ताज़े सख़्त लंड के लिए मचलने लगी.

में अब अपनी नज़रें झुकाए एक नई नवेली दुल्ह्न की हैसियत में विनोद के पहलू में बैठी थी. आने वाले पल के इंतिज़ार में अपनी चूत का पानी छोड़े जा रही थी.

जब कि मेरे साथ बैठा मेरा नया खाविंद विनोद बहुत हवस भरी निगाहों के साथ दुल्हन बने हुए मेरे गरम वजूद को अपनी नज़रों से चोदने में मसरूफ़ था.

थोड़ी देर के सफ़र के बाद हम विनोद के घर आन पहुँचे.

तो विनोद ने एक दम उतर कर मेरी साइड वाला दरवाज़ा खोला और मुझे बहुत प्यार से अपनी सजी हुई कार से बाहर निकाला.

 
विनोद की सजी सजाई कार से बाहर आते ही मेरी नज़र विनोद के घर पर पड़ी.

“उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ अपनी शादी की खुशी में ना सिर्फ़ विनोद ने अपनी कार को डेकोरेट किया हुआ है, बल्कि उस के साथ साथ मेरे नये शौहर ने घर के सामने और उपर लाइट्स लगा कर अपने घर को भी अच्छी तरह सज़ा रखा है”शादी की खुशी में विनोद के घर के उपर और बाहर चमकती हुई रंग-बि-रंगी लाइट्स को रोशन देख कर मैने अपने दिल में खुश होते हुए सोचा.

“आओ तुम्हारा नया घर आ गया मेरी जान” में अभी अपनी सोच में गुम थी. कि विनोद की आवाज़ मुझे अपने कान में सुनाई दी.

अपने नये शौहर की ये बात सुनते ही में एक दम से होश में आई.

और फिर विनोद के हाथ में हाथ डाल कर उस के साथ साथ चलते हुए अपने नये घर के मेन दरवाज़े की तरफ चल पड़ी.

विनोद के घर के दरवाज़े की तरफ जाते हुए मुझे अहसास हुआ कि मेरी शादी के ल़हेंगे पर होने वाले काम की बदोलत मेरा लहंगा इतना भारी हुआ है.कि अब विनोद के साथ चलते वक्त मुझे अपना ये लहंगा अपनी कमर से फिसल फिसल कर नीचे जाता हुआ महसूस हो रहा था. जिस की वजह से मुझे इस वक्त चलने में बहुत प्राब्लम हो रही थी.

विनोद ने जब मुझे फूँक फूँक कर अपने कदम उठाते देखा. तो उस ने फॉरन मेरी परेशानी देखते हुए एक दम प्यार से मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे अपने साथ चिपकाया और बोला ““चलो में तुम्हारी हेल्प करता हूँ मेरी जान”

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ लगता है कि विनोद मेरे जिस्म के नसीब-ओ-फ़र्ज़ को पढ़ लेने के साथ साथ मेरे दिल की बातें भी पढ़ लेता है” विनोद ने जब मुझे पकड़ कर एक दम अपने साथ लिया. तो विनोद की इस हरकत के बारे में सोचते हुए शरम के मारे अपने ही आप में सिमट कर रह गई.

विनोद के घर के दरवाज़े के सामने आ कर यासिर ने चाभी से दरवाज़े का लॉक खोला.तो में फॉरन एक दम अपना पावं बढ़ा कर घर के अंदर दाखिल होने लगी.

” ज़रा एक मिनट रूको,क्योंकि और रस्मो के साथ साथ हमारे यहाँ एक और रसम भी है, जिस को पूरा करने के लिए, तुम चावलो से भरे इस लोटे को अपने पावं से उलटो, और फिर महावर की इस थाली में अपने पावं को भिगो कर अपने नये घर में अपने कदम दाखिल करो मेरी जान”. मैने नई नवली दुल्हन की हैसियत से ज्यों ही विनोद के घर में दाखिल होने के लिए अपना पावं उठाया. तो मेरे नये शौहर विनोद की आवाज़ एक दम मेरे कनों से टकराई.

विनोद की ये बात सुनते ही घर के अंदर जाते ही मेरे कदम एक दम थम से गये. और फिर विनोद की हिदायत पर अमल करते हुए मैने घर के मेन दरवाज़े पर पड़े हुए लोटे को पावं से ठोकर मार कर गिराया.

साथ ही विनोद की मदद से सामने पड़ी थाली में एक एक कर के अपने पैरों को भिगोने के बाद में अब अपने माथे पर विनोद के नाम का संदूर और अपने गले में विनोद के नाम का मंगल सूत्र पहन कर छम छम कर के अपने पीछे अपने कदमों के निशान बनाती विनोद की हिंदू पत्नी की हैसियत से उस के सुहाग रात वाले बेडरूम में दाखिल हो गई.

विनोद के बेड रूम में आते ही मैने अपने कमरे का जायज़ा लिया.

तो देखा कि विनोद ने अपनी और मेरी सुहाग की सेज को बहुत शानदार तरीके से सज़ा रखा था.

कमरे की सारी वॉल्स पर गुलाब ही गुलाब की लाडियाँ लटकी हुई थी.

इस के साथ साथ कमरे के एक कोने में रखे हुए बेड पर भी गुलाब के फूलों की पत्तियाँ ही पत्तियाँ बिखरी पड़ी थी.

जिन की भीनी-भीनी खुश्बू से पूरा कमरा महक रहा था.

“लो मेरी जान अपने नये बेड पर की गई सजावट को अच्छी तरह देख लो, क्योंकि आज रात को जो खेल मैने इस बिस्तर पर तुम्हारे साथ खेलना है, इस की वजह से सुबह तक इस बिस्तर की वो हालत नही रहे गी जो अभी इस वक्त है सायरा” मुझे अपने साथ अपने कमरे में ला कर विनोद ने मेरे साथ साथ अपनी सुहाग की सेज का जायज़ा लेते हुए यासिर के सामने ये अल्फ़ाज़ कहे .

तो विनोद की बात को सुन कर शरम और खुशी के मिले जुले अहसास से मेरे गाल सुर्ख हो गये. और अपनी जिन्सी हवस के हाथों मजबूर हो कर मैने अपने शौहर यासिर के सामने ही विनोद के गले में अपनी बाहें डाल दीं.

“रात काफ़ी हो रही है,इसीलिए तुम लोग आराम करो, में भी साथ वाले कमरे में जा कर सोने के लिए लेट जाता हूँ” मुझे यूँ खुद सुपुर्दगी से अपने नये शौहर विनोद के गले में बाहें डालते देख कर यासिर शायद समझ गया कि अब शादी वाला असल काम स्टार्ट होने वाला है.

इसी लिए वो विनोद और मुझे कमरे में अकेला छोड़ कर अपने कमरे में जाने के लिए बाहर निकल गया.

“ओह तुम नही जानती कि तुम्हें अपनी पत्नी बना कर मुझे कितनी खुशी हुई है,मगर अपनी सुहाग रात का आगाज़ करने से पहले में किचन से पानी की बॉटल ले आना चाहता हूँ,इसीलिए तुम बिस्तर पर बैठो में अभी किचन से हो कर आता हूँ मेरी जान” यासिर के बाहर निकलते ही विनोद ने मेरे मुँह में मुँह डाल कर मुझे आज एक महीने बाद एक भरपूर किस की. और मुझे छोड़ कर कमरे के साथ बने किचन की तरफ चला गया.

“हाईईईईईईईईईई आज की रात एक बार फिर मेरी चूत को विनोद के अनकट लंड का वो ही मज़ा हासिल होने वाला है, जिस मज़े की तलब ने मेरी चूत में एक आग बरपा कर रखी है, उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ देखूं तो सही,मेरी चूत तो इस लम्हे के इन्तिजार में केसे पानी पानी हो रही है” विनोद के किचन में जाते ही मेने गले में पड़े अपने दुपट्टे को उतारा.

और इस के साथ ही अपनी चोली के खुले गले अपने मोटे और भारी मॅमन को चलकाटी हुई में फुलो की पत्तियों से सजे हुए अपने सुहाग के बिस्तर पर बैठ गई.

“उफफफफफफ्फ़ अपनी टाँग चोली में कसे हुए अपने इन मम्मो को शान से उठा हुआ देख कर ऐसे लगता है कि मेरे मम्मो को भी ईलम है कि आज उन पर किसी किसी गैर का हाथ लगने वाला है, जब कि मम्मो के साथ साथ मेरी चूत भी दूसरे लंड की खुशी मे खुश है” बिस्तर पर बैठे बैठे मुझे पहले तो ये ख्याल आया.

और इस के साथ ही में अपने असल शौहर यासिर के बारे में सोचाने लगी थी.

जो आज एक बार फिर अपनी जवान और गरम बीवी को एक मर्द के साथ रात बसर करने के लिए छोड़ कर खुद साथ वाले कमरे में आराम करने चला गया था.

यासिर के बारे में सोचते सोचते मेरे ज़हन में एक आइडिया आया.

तो अपने दिमाग़ में आने वाले इस ख्याल को सोचते ही मेरी पहले से गरम और पानी पानी छोड़ती चूत में जिन्सी हवस की एक ऐसी लहर उठी जिस ने मेरे जवान और गरम वजूद में एक नई आग भड़का दी.

“ज़रा जल्दी से इधर मेरे पास आना यासिर” अपने दिमाग़ के कोने में आने वाले इस ख्याल से गरम होते हुए मेरे मुँह से बे इकतियार ये अल्फ़ाज़ खुद ब खुद निकल पड़े.

“हां जान क्या बात है” मेरी आवाज़ को सुनते ही यासिर एक दम ऐसे दौड़ता हुए आया,जेसे वो साथ वाले कमरे में नही बल्कि दरवाज़े के साथ ही खड़ा मेरी आवाज़ का मुंतजार था.

“ विनोद ज़रा किचन में गया है,उस के आने तक तुम मुझे प्यार करूऊओ यासीर्र्र्र्ररर” कमरे में आ कर यासिर ज्यों ही मेरे करीब हुआ. तो मैने बिस्तर से एक दम उठ कर अपने असली शौहर के मुँह में मुँह डालते हुए कहा.

“ओह क्या कर रही हो तुम,विनोद अभी किचन से वापिस आ जाएगा सायराआआआआआआ” अपने होंठों से मेरे होंठ मिलाते ही यासिर ने एक दम कमरे के दरवाज़े की तरफ देखा और फिर साथ ही मुझे अपनी बाहों में कसने लगा.

लगता था मेरे साथ साथ मेरे शौहर यासिर के दिमाग़ पर भी जवानी की गर्मी का नशा चढ़ कर बोल रहा था.

इसी लिए ज्यों ही मैने यासिर के होंठों में अपने गरम होंठ पैवस्त किए .

तो यासिर ने एक लम्हा ज़ाया किए बिना अपनी ज़ुबान को मेरे मुँह में डालते हुए साथ ही साथ अपने एक हाथ को नीचे ला कर मेरे लहंगे के उपर से मेरी गरम चूत को अपने हाथ से मसलने लगा था.

 
“यासिर में तुम्हारी बहुत ही शूकर गुज़ार हूँ कि तुम ने विनोद से मेरे रिश्ते की बात से ले कर,शादी की सारी रस्मो और फिर मेरी डोली को कंधा देने से ले कर विनोद और मेरी शादी वाली कार का ड्राइवर बनने तक अपने दोस्त के साथ अपनी ही बीवी की शादी की सारी रस्मो में खुद शिरकत कर के मुझे बहुत खुशी पहुँचाई है, इसी लिए अब मेरी दिली ख्वाहिश है कि तुम विनोद के साथ मेरी मनाई जाने वाली सुहाग रात में भी शिरकत करो मेरी जान” यासिर ने जेसे ही लहंगे के उपर से मेरी चूत को अपने हाथ से छेड़ा. तो में एक दम सिसकते हुए अपने होंठों को यासिर के मुँह से हटा कर अपने शौहर यासिर के एक कान पर अपने गरम होंठ पेवस्त किए. और यासिर के कान की लो को अपने दाँतों से हल्का से काटते हुए यासिर से धीमी आवाज़ में कहा.

“ओह आज विनोद के साथ तुम्हारी सुहाग रात है और तुम चाहती हो कि में तुम्हारे साथ इस कमरे में मौजूद रह कर तुम्हारे नये शौहर के रंग में भंग डालूं,दिमाग़ ठीक है तुम्हारा सायरा” मेरी बात को सुन कर यासिर ने हैरत भरे लहजे में बोला.

“ये बात ठीक है कि मैने सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी फेंटसी को पूरा करने की खातिर ही,तुम से ज़िद कर के विनोद से हिंदू महज़ब के मुताबिक शादी की है, मगर इस सब के बावजूद में,तुम और विनोद ये बात अच्छी तरह जानते हैं कि ये सब दिखावे की एक जहली शादी है, जब कि हक़ीकत में तो में अभी तक तुम्हारे ही निकाह में हूँ, जिस की वजह से तुम ही मेरे असल शौहर भी हो, और अब मेरे असली शौहर की हैसियत से मुझे सच सच बताना क्या तुम मुझे विनोद से चुदवाते हुए देखना चाहते हो यासिर” मैने यासिर के कान के अंदर अपनी ज़ुबान फिराते हुए और उस की पॅंट में खड़े हुए लंड को एक बार फिर अपने हाथ से मसल्ते हुए पूछा.

“ओह आईसीईईईईईईईईईईई बातेन्ंनननननणणन् नाआआआआअ करो सायराआआआआ” मेरे अल्फ़ाज़ की गर्मी और ज़ुबान और हाथ की मस्ती के अहसास से मचलते हुए यासिर ने सिसकार्टे हुए मेरी तरफ देखा और बोला.

“जवाब दो यासिर क्या तुम अपनी मुसलमान बीवी को उस के दूसरे हिंदू शौहर से अपनी चूत चटवाते और फिर विनोद का अनकट लंड मुझे अपनी फुद्दि में लेते देखना पसंद करो गे” यासिर के लंड को अपने हाथ में दबोचते हुए मैने फिर पूछा.

“क्या तुम ऐसा चाहती हूऊऊऊओ सायराआआआअ” मैने ज्यों ही यासिर के खड़े हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ कर मसला. तो मज़े की शिद्दत से यासिर एक दम चिल्ला उठा.

“उफफफफफफफफफ्फ़ तुम ने मुझे विनोद से शादी की इजाज़त दे कर मेरी ख्वाहिश तो पूरी कर दी है,अब में चाहती हूँ कि विनोद के मोटे अनकट लंड से मुझे चुद्ते हुए देख कर तुम भी अपनी दिल की हसरत पूरा कर लो मेरी जानंनननननणणन्” यासिर की पॅंट की ज़िप खोलते हुए अपने शौहर के लंड को पॅंट से बाहर निकाल कर उस पर अपने हाथ से मूठ लगाते हुए कहा.

“ओह तुम अच्छी तरह जानती हो कि तुम्हें किसी और मर्द से चुदवाने की इसी ख्वाहिश ही की वजह से मैने इस से पहले भी विनोद को तुम्हारे साथ एक रात बसर करने का मोका फ़ेरहाम किया है, और सच पूछो तो तुम्हारे मुँह से तुम्हारा ये आइडिया सुन कर मेरे तन बदन में एक आग सी लग गई है, और में अब वाकई ही अपनी आँखों से विनोद के लंड को तुम्हारी चूत में दाखिल होते हुए देखना चाहता हूँ, मगर क्या तुम ने विनोद से इस बारे में बात की है, क्या उसे मेरे सामने तुम्हें चोदने में कोई परेशानी तो नही होगी ना” अपने लौडे को मेरे हाथ में मचलते हुए देख कर यासिर ने सिसकते हुए पूछा.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ मैने तो पहले ही तुम्हें कहा था, कि सायरा से मेरी शादी के बाद हम दोनो मिल कर सायरा के गरम जिस्म को एंजाय करेंगे ,इसीलिए तुम मेरी फिकर मत करूऊऊऊऊऊ यार,क्योंकि मुझे तुम्हारी नज़रों के सामने तुम्हारी बीवी सायरा की गरम चूत की प्यास बुझाने में कोई शरम महसूस नही हो गी यासिर” यासिर की बात मुकमल होते ही विनोद एक दम कमरे में वापिस दाखिल हुआ तो उस ने यासिर और मेरी सारी बात सुन ली थी.

इसीलिए विनोद ने फॉरन ही यासिर की बात का जवाब देते हुए पीछे से आ कर चोली में कसे हुए मेरे मोटे और बड़े मम्मो को अपने हाथों में दबोचा.

और यासिर की नज़रों के सामने ही चोली के बाहर छलकते मेरे मम्मो को अपने हाथों में ले कर मेरी जवान चुचियों को प्यार से मसल्ने लगा था.

विनोद को यूँ एक दम कमरे में आते देख कर यासिर एक दम घबडा सा गया. और मुझ से एक दम अलग हो कर पॅंट में से निकले हुए अपने लंड को छुपाने की कोशिश करने लगा.

“उफफफफफफफफफ्फ़ आज चूँकि विनोद के साथ मेरी सुहाग रात है,इसीलिए आज की रात मेरी चूत पर सिर्फ़ और सिर्फ़ विनोद के लंड का ही हक है,इसीलिए तुम सकून से इस सोफे पर बैठ कर मेरे और विनोद के जिन्सी खेल को देख कर एंजाय करो. और घबराने या शरमाने की बजाय अपने लंड की मूठ लगा कर दूसरे मर्द के साथ अपनी बीवी की चुदाई को एंजाय करो यासिर”

ये बात कहते हुए में एक दम विनोद की तरफ अपने मुँह करते हुए मूडी और फिर अपने नये शौहर विनोद के जिस्म के साथ चिपकते हुए अपने हिंदू शौहर के मुँह में अपनी मुसलमान ज़ुबान को डाल दिया.

मेरी बात सुनते ही मेरा असल शौहर यासिर एक फर्माबरदार बच्चे की तरह मेरी बात पर अमल करते हुए कमरे के एक कोने पर पड़े हुए सोफे पर जा बैठा.

और अपनी साँस रोके अपनी जवान ,गरम और प्यासी बीवी की एक दूसरे मर्द के साथ की जानी वाली रंग रलियों को हवस भरी नज़रों से देखने में मसरूफ़ हो गया.

उधर यासिर सोफे पर बैठा और दूसरी तरफ मेरी बाहें अपने गले में पड़ते ही विनोद मुझे अपने जिस्म के साथ पुरजोश अंदाज़ में लिपटाते हुए कहने लगा. “ओह सायराआआआआआअ इस लम्हे के इंतिज़ार में तो में पीछे कई हफ्तों से मूठ मार मार कर पागल हुआ जा रहा था,चलूऊऊओ अब में तुम्हें अपने हाथ से नंगा कर के अपनी सुहाग रात का आगाज़ करता हूँ मेरी जानंननननननणणन्”

मैने विनोद की सख़्त जवान छाती के साथ अपने मोटे गुदाज मम्मे टकराते हुए ज्यों ही उस की ज़ुबान से ज़ुबान लड़ाना शुरू की. तो विनोद ने मेरे बाहरी चुतड़ों पर अपने दोनो हाथ रख कर मुझे अपनी तरफ खैंचते हुए कहा.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम अच्छी तरह जानते हो कि हिंदू और मुसलाम होने की बिना पर, मेरी और तुम्हारी ये शादी कोई रवायती शादी नही है ,इसी लिए आज की अपनी इस सुहाग रात को भी एक रवायती सुहाग रात नही बनाना चाहती में” अपनी गरम और नुकीली ज़ुबान को विनोद के खुले मुँह में तेज़ी से घुमा कर में एक दम विनोद की बाहों की क़ैद से अलग होते हुए मैने अपने नी शौहर विनोद से कहा.

“अच्छाआआआआ तो तुम फिर ऐसा क्या अलग करना चाहती हो आज, जो आज से पहले किसी ने अपनी सुहाग रात में नही किया मेरी जान” मेरी बात सुन कर विनोद को समझ नही आया और वो एक दम मेरे मुँह की तरफ देखते हुए मुझ से पूछने लगा.

“आअँ और रवायती सुहाग रात में तो दूल्हा ही हमेशा पहल कर कर अपनी दुल्हन को अपने हाथ से नंगा करता है, जब कि आज की रात एक दुल्हन की हैसियत से में तुम्हें अपने हाथों से नंगा करना पसंद करूँगी मेरी जानंननननणणन्”

विनोद से ये बात कहते हुए मैने अपने नये शौहर की पॅंट की बेल्ट खोल कर उस की पॅंट में खड़े हुए मोटे लौडे पर अपना हाथ फेरने लगी.

अपने हिंदू शौहर के लंड को पॅंट के उपर से मसल्ते हुए मैने विनोद को एक दम धक्का दिया. तो विनोद एक दम पीछे पड़े सोफे पर बैठे मेरे पहले शौहर यासिर के पहलू में जा गिरा.

 
विनोद के सोफे में बैठते ही मैने जल्दी से विनोद की शर्त के बटन खोल कर अपने नये शौहर की कसी हुई जवान और सख़्त छाती के उपर अपने गरम होंठ रख कर विनोद की छाती के निपल को अपने दाँतों से काटने लगी थी.

“ओह किय्ाआआआआआ मसत्थत्टटटटतत्त और गरम बीवी नसीब हुई हाईईईईईईईईईईईईई मुझे यययययययययी” मैने ज्यों ही विनोद की मज़बूत छाती पर मौजूद उस के छोटे से निपल को अपने दाँतों में दबा का काटा. तो दर्द और मज़े की शिद्दत से विनोद एक दम सिसकते हुए बोल पड़ा.

थोड़ी देर विनोद की चौड़ी छाती पर अपनी गरम ज़ुबान फेरने के बाद मैने अपने मुँह को नीचे किया. और फिर आहिस्ता आहिस्ता मेरी ज़ुबान विनोद की धुनि के ऐन उपर आ गई.

विनोद की गहरी धुनि को देखते ही मुझे जोश आया. और मैने एक दम तेज़ी से अपनी ज़ुबान को अपने नये शौहर विनोद की नाफ़ के अंदर ज़ुबान डालते हुए विनोद की धुनि को अपनी ज़ुबान से चाटने लगी.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इतना मज़े को मुझे सपना ने पूरी ज़िंदगी मैने दिया था, जितना मज़ा तुम मुझे इस एक ही लम्हे में दे रही हो मेरी जानणन्न्” मेरी ज़ुबान के धुनि के अंदर जाते ही लज़्जत के मारे विनोद एक दम सिस्कार्ते हुए कहने लगा.

“विनोद्द्द्द्द्द्द्द को तो मज़ा आ ही रहा है, मगर तुम्हें विनोद से किए जाने वाले मेरे प्यार का ये अंदाज़ केसा लगा रहा है यासिर” विनोद के पेट और नाभि के अंदर अपने नुकीली ज़ुबान को फेरने के दौरान मैने सोफे पर साथ बैठे हुए अपने पहले शौहर यासिर से सवाल किया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारी ज़ुबान तो विनोद के जिस्म पर घूम रही है, मगर उस का असर मुझे अपने जिस्म पर महसूस हो रहा है मेरी जान,और अपनी बीवी को उस के दूसरे शौहर के साथ ये मस्तियाँ करते देख कर जोश के मारे मेरा लंड तो जैसे फटने लगा है मेरी जान” मेरी बात के जवाब में यासिर ने जब ये कहा तो मस्ती के मारे में एक दम अपने मुँह को विनोद के उस लंड के ऐन उपर ले आई. जिस लंड से एक ही रात चुद कर में तो उस लंड की अब एक पुजारन बन चुकी थी.

अपने हिंदू शौहर की पॅंट में खड़े हुए मोटे अनकट लंड पर अपने जवान और गरम हाथ फेरते हुए मैने विनोद से कहा “ज़रा एक बार फिर उठ कर खड़े होना मेरे सरताज”.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या बात है,जब में खड़ा था तो मुझे खुद ही सोफे पर गिरा दिया, अब सोफे पर बैठ कर तुम्हारी जवानी के मज़े लेने का सोच रहा हूँ, तो मुझे एक बार खड़ा करने का इरादा कर लिया है तुम ने सायराआआआआअ” मेरी बात सुन कर विनोद ने मुझ से पूछते हुए सोफे से उठ कर मेरे सामने खड़ा हो गया.

“वो इसीलिए कि तुम्हारी दुल्हन के रूप में सजी सन्वरि होने की वजह से में तुम्हारी बीवी की हैसियत से तुम्हारे कदमों में बैठ कर अपने शौहर के उस लंड की पूजा करना चाहती हूँ, जिस लंड को एक बार अपनी चूत में लेने के बाद में तुम्हारे लंड की दासी बन गई हूँ मेरे महाराज” विनोद की बात का जवाब देते हुए में बोली.

और फिर विनोद के अनकट लंड को उस की पॅंट में से बाहर निकलते ही बेसबरी के साथ अपना मुँह खोल कर विनोद के सख़्त और जवान लंड की मोटी टोपी को अपनी प्यासी ज़ुबान के साथ एक दम हल्का सा चूम लिया.

“उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मेरी बीवी की क्याआआअ गरम ज़ुबान है हाईईईईईईईईईईईईई” ज्यों ही मेरी नुकीली ज़ुबान ने अपने शौहर के अनकट लौडे को हलक से टच किया. तो मेरी प्यासी ज़ुबान की गर्मी को महसूस करते ही विनोद एक दम मचलते हुए कहने लगा.

इधर में अपने नये शौहर के लंड को उस की पॅंट से बाहर निकाल कर उस की टोपी के स्वाद से लुफ्तओअंदोज हो रही थी.

तो इस दौरान मेरी नज़र सोफे पर बैठे अपने पहले शौहर यासिर की तरफ भी गई.

मैने देखा कि यासिर अपनी आँखे फाड़ फाड़ कर मुझे विनोद के मोटे और बड़े लंड की चुसाइ लगाते देख रहा था.

“विनोद के काले, मोटे, अनकट लंबे लंड को पहली बार अपनी नज़रों के सामने देख कर ऐसा लग रहा था कि मेरे शौहर यासिर की तो जैसे बोलती ही बंद हो गई हो” अपने शौहर यासिर के चेहरे पर फैली हैरत को देखते हुए मैने सोचा.

“ऐसे लगता है कि मेरी तरह यासिर ने भी इतना बड़ा,मोटा और सख़्त लंड शायद पहले कभी नही देखा, इसी लिए आज अपनी बीवी को यूँ अपनी नज़रों के सामने एक दूसरे मर्द के सख़्त,मोटे और बड़े लंड को चूस्ता हुआ देख कर यासिर को यकीन नही हो रहा कि उस की बीवी जिस लंड को चूस रही है, क्या वाकई ही वो किसी इंसान का लंड है या किसी गधे का “

इसीलिए विनोद के लंड को आज पहली बार इस तरह अपनी नज़रों के सामने देख कर यासिर की आँखे फटी की फटी रह गई.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ विनोद्द्द्द्द्द के लंड का ये मोटा टोपा तो तुम्हारे मुँह में नही जा पा रहा, मुझे तो ये समझ नही आ रही कि तुम ने इस मोटे लंड को अपनी इस छोटी सी चूत में केसे लिया हो गा, हाईईईईईईईईई विनोद का ये लंड तो मेरी बीवी की कमसिन चूत्त्त्त्त्त्त्त्त्त को पूराआआआ खूऊऊऊल कर रख देगा एयाया सायराआआआ” मुझे मज़े ले ले कर यूँ अपने हिंदू शौहर के अनकट लंड के मोटे टोपे को चुसते देख कर सोफे पर मज़े से अपने लंड को मसल्ते हुए यासिर ने कहा. तो अपने शौहर यासिर की इस बात को सुन कर विनोद के साथ मेरे मुँह से भी एक सिसकी फुट पड़ी.

यासिर के मुँह से निकलने वाली इस बात को सुन कर मुझे एक दम जोश आया. और मैने विनोद की पॅंट को पूरा उतारते हुए सोफे पर बैठे अपने पहले शौहर यासिर से कहा “तुम भी अपनी पॅंट उतार कर इधर मेरे करीब आओ मेरी जान”.

यासिर ने मेरी बात सुन कर विनोद की तरफ देखा और फिर झिझकते हुए वो भी अपनी पॅंट उतार कर मेरे करीब आ खड़ा हुआ.

“अच्छी तरह देख लो मेरी जान,ये वो ही लंड है जिस से चुदवाने के लिए तुम खुद मुझे तैयार कर के विनोद के घर ले गये थे, और अगर तुम्हारा ये ख्याल है कि इस मोटे, लंबे,सख़्त अनकट हिंदू लंड से एक बार चुदवाने के बाद, तुम्हारी पाकिस्तानी बीवी की मुस्लिम चूत तुम्हारे क्यूट लंड से कभी दोबारा खुश रह सकती है,तो ये तुम्हारी खुश फ़हमी है यासिर”

ये कहते हुए मैने विनोद के लंड को एक बार फिर अपने मुँह में भरा.और यासिर की नज़रों के सामने मज़े ले ले कर विनोद के मोटे लंड पर अपनी गरम और प्यासी ज़ुबान घुमाने लगी.

“ओह तुम सही कह रही हो,गधे जैसे इस लंड को एक बार अपने अंदर लेने के बाद तुम क्या,कोई भी औरत कभी इस लंड के बिना नही रह सकती,मुझे खुशी है कि अंजाने में ही सही, मगर मैने अपनी जवान गरम बीवी की प्यासी चूत की प्यास बुझाने के लिए इतने मोटे और लंबे लंड का खुद ही बंदोबस्त कर दिया है सायराआआअ” मेरी बात सुनते हुए यासिर ने नाराज़ या शर्मिंदा होने की बजाय मेरी बात का समर्थन किया.

और फिर मेरे पीछे से मेरे सर को अपने हाथों में पकड़ते हुए मेरा मुँह विनोद के लंड की तरफ मोड़ा और मुझे अपने नये शौहर विनोद के तने हुए अनकट लौडे का मज़े से चूसने में मदद फहराम करने लगा था.

मुझे यासिर का अपनी ही बीवी को एक गैर मर्द के लंड की तरफ रगीब करने का ये अंदाज़ इतना अच्छा लगा. कि मैने मज़े से बे हाल होते हुए विनोद के लंड को दीवाना वार सक कारण शुरू कर दिया.

विनोद के लंड को सक करने के दौरान में विनोद के लंड की टोपी को लंड की स्किन में से बाहर निकाल कर चूस रही थी.

जिस की वजह से विनोद के मोटे लंड का टोपा मेरे होंठों पर लगी सुर्ख लिपस्टिक से पूरी तरह लाल हो गया था.

थोड़ी देर अपनी गरम जोशी से विनोद के लंड को सक करने के बाद मैने यासिर से कहा.“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ में जितनी देर में विनोद के इस मोटे लंड को सक करती हूँ,तुम उतनी देर में मेरी चूत को चाट कर मेरी फुद्दि को विनोद के लंड ले लिए अच्छी तरह से तैयार करो मेरी जान”

विनोद के मोटे लंड को अपने मुँह में भरते हुए मैने अपने पहले शौहर यासिर से फरमाइश की.

 
यासिर से ये फरमाइश करते ही मैने विनोद को हाथ से धक्का दे कर पास पड़े हुए सोफे पर गिरा दिया. और खुद आगे को झुकते हुए विनोद के तने हुए सख़्त लंड को अपने मुँह में डाला. और फिर से “शारप शारप” करते हुए अपने नये शौहर के लंड की चुसाइ लगाने लगी थी.

विनोद के लंड को चुसते वक्त इस तरह झुकने से पीछे से मेरी गान्ड हवा में उठ गई.

“ओह आज से पहले ना जाने कितनी दफ़ा मैने अपने हाथों की उंगलियो के साथ छेड़ छाड़ करते हुए तुम्हारी चूत को अपने लंड के लिए तैयार किया है, मगर आज पहली बार में अपनी ही बीवी की चूत को चाट चाट कर इसे एक दूसरे मर्द के लौडे के लिए तैयार करूँगा आआआआआ” में ज्यों ही ये बात कहते हुए सोफे पर नीम दराज लेटे हुए विनोद के लंड को सक करने में मसरूफ़ हुई.

तो मेरी बात सुनते ही यासिर एक फर्माबरदार शौहर की तरह मेरी बात पर अमल करते हुए मेरे पीछे आ कर हवा में उठी हुई मेरी गान्ड की चौड़ी पहाड़ियों को पीछे से अपने एक हाथ में दबोचते हुए अपने दूसरे हाथ को मेरी फूली हुई चूत के होंठों के दरमियाँ रखा.और इस के साथ ही पानी पानी होती मेरी फुद्दि के साथ अपने हाथ के अंगूठे से खेलने लगा था.

मेरी चूत के दाने को अपने अंगूठे से सहलाते सहलाते यासिर ने पीछे से ज्यों ही अपने हाथ ही दो उंगलियाँ मेरी गरम और प्यासी चूत के सूराख में दाखिल कीं. तो मज़े की शिद्दत से मैने तड़पते हुए में अपने दाँत अपने आगे पड़े नये शौहर विनोद के तने हुए लौडे के उपर गाढ दिए.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ लगता है कि मेरे लौडे को चुसते चुसते आज तो तुम मेरे लंड को जैसे काट कर पूरा खा ही जाओगी सायराआआआ” ज्यों ही मैने जोश में आते हुए विनोद के लंड पर अपने दाँतों से काटा. तो मेरी तरह मज़े की शिद्दत से बे हाल होते हुए विनोद भी चिल्ला उठा.

इधर में जोश और मस्ती से बे काबू होते हुए विनोद के मोटे अनकट लंड को दीवाना वार चूसने में मसरूफ़ थी.

तो दूसरी तार यासिर की मोटी उंगलियाँ मेरी चूत के अंदर अपना कम जारी रखे हुए थे.

जिस की वजह से में मेरी चूत का नम्कीम पानी मेरी फुद्दि से बैठे हुए मेरी गुदाज रानों के दरमियाँ से होते हुए नीचे फर्श को भी गीला करने में मसरूफ़ था.

“ओह तूमम्म कितने अच्छे और समझदार शौहर हो यासिर, जो अपनी बीवी की खुशी के लिए आज सब कुछ करने को तैयार हो चुको हो, चलूऊऊऊओ जल्दी करूऊऊ और मेरी फुद्दि में ज़ुबान डाल कर इसे विनोद के मोटे लौडे के लिए मज़ीद गरम कर दो, ताकि जब विनोद तुम्हारी बीवी की इस फुद्दि में अपना लंड डाले, तो उस का मोटा,लंबा और सख़्त लंड बिना किसी दिक्कत के मेरी चूत की बच्चे दानी तक जा पहुँचे मेरी ज़ाआाआ” यासिर की बात और फिर अपनी चूत की गहराई में फिरने वाली अपने पहले शौहर की उंगलियों की मस्तियों से बे हाल होते हुए मैने यासिर से कहा. और इस के साथ ही में जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार के मुकमल नंगी हो गई.

जब यासिर ने यूँ मुझे अपना लहंगा उतार कर अपनी और विनोद की नज़रों के सामने नंगा होते देखा.

तो यासिर को भी एक दम जोश आया और मेरी देखा देखी वो भी सपने सारे कपड़े उतार कर आज पहली बार अपने दोस्त और मेरे नये शौहर विनोद की नज़रों के सामने पूरे का पूरा नंगा हो गया था.

अपने कपड़े उतार के में एक बार फिर सोफे पर बैठे अपने नये शौहर विनोद की तरफ मतवूज हुई. और फिर विनोद के जिस्म के उपर झुकते हुए विनोद के मुँह में अपना मुँह डाल कर विनोद को किस करने लगी.

जब कि इस दौरान मेरे पहले शौहर यासिर ने मेरी गान्ड की पहाड़ियों में अपने मुँह को डाल कर पीछे से निकली हुई मेरी चूत को अपनी ज़ुबान और मुँह से सक करना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर पीछे से मेरी चूत की फांको को अपनी ज़ुबान से चोदने के बाद यासिर ने मेरी चूत से अपना मुँह हटाया और मुझ से कहने लगा “ज़ाआाआआआं अब अगर तुम ज़रा सीधी हो कर लेटो तो में सही तरीके से तुम्हारी चूत को चाट कर विनोद की चुदाई के लिए रेडी कर दूं”.

“हां ये सही रहे गा, क्यों कि इस तरह से तुम नीचे से मेरी चूत को चाटो गे, तो उपर से मुझे अपने जानू विनोद के लंड की पूजा करने का सही मोका मॉयसर हो सके गाआआआआआ” यासिर की बात सुनते ही करवट बदल कर में सीधी हुई. और सोफे पर बैठे विनोद के शेष नाग लंड को एक बार फिर अपने मुँह में भर लिया.

जब कि मेरा पहला शौहर यासिर ने मेरी टाँगों के दरमियाँ फर्श पर बैठ कर मेरी खुली टाँगों के दरमियाँ में से मेरी फूली हुई चूत पर अपने गरम मुँह को चिस्पान कर दिया.

 
मेरी चूत से मुँह लगते ही यासिर ने मेरी चूत के दोनो लबों को अपनी नोकिली ज़ुबान की नौक से खोला.

और फिर मेरी चूत के ऐन दरमियाँ अपनी ज़ुबान को डाल कर मेरी फुद्दि से निकलने वाले रस को अमृत समझ कर पीने में मसगूल हो गया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ खााआआआ जऊऊऊऊ मेरी चूत्त्त्त्त्त्त्त को यासीर्र्र्र्र्ररर और्र्र्र्र्ररर इसे चाट चातत्तटटटटतत्त कर विनोद के लंड के इस्त्कबाल के लिए तैयाररर्र्र्ररर करूऊऊऊऊऊ मेरी जनाआाआआं” यासिर की ज़ुबान ने ज्यों ही मेरी चूत के गुलाबी सूराख खोलते हुए मेरी चूत के अंदर के पिंक एरिया को चूमा. तो मज़े के मारे में सिसक उठी.

यासिर अब दीवाना वार मेरी चूत को अपने मुँह और ज़ुबान से चाटने और खाने में मसरूफ़ था.

कि इतने में मुझे और यासिर को विनोद की आवाज़ सुनाई दी. “चलो अब हम लोग सुहाग के बिस्तर पर चलते हैं और उधर जा कर यासिर तुम अब सायरा की टाँगों को अपने हाथ से मेरे लिए खोलना,ताकि में तुम्हारी और अपनी बीवी सायरा की चूत के पानी का ज़ायक़ा एक बार फिर चख लून्न्न्न्न्न्न्न”.

“ओह जेसा विनोद कह रहा है तुम वैसा ही करूऊऊऊऊओ,और आज खुद अपनी जवान बीवी की टाँगों को अपने हाथों से खोल कर अपने दोस्त को मेरी चूत पेश करो,इस तरह मुझे किसी और मर्द के साथ शेर करने की तुम्हारी ख्वाहिश की अच्छी तरह से तकमील हो सके गी यासीर्र्र्र्र्ररर”विनोद की ये बात सुनते ही मैने अपने हिंदू शौहर के मोटे सख़्त लंड को अपने हाथ में थामते हुए यासिर से कहा.

और फिर अपने पूराने शौहर यासिर के मुँह से अपना मुँह जोड़ कर विनोद के अनकट लंड से निकलने वाले उस के लंड के नम्कीम पानी को यासिर के मुँह में मुन्तकल करने लगी थी.

“ये आज तुम्हारे थूक का ज़ायक़ा थोड़ा पुख्तलफ क्यूँ है सायरा” विनोद के लंड के पानी से मिक्स होने वाले मेरे थूक को अपने हलक के अंदर उतारते हुए यासिर ने सवाल किया.

“ओह येह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कोई आम थूक नही, बल्कि इस थूक में आज तुम्हारे दोस्त और मेरे शौहर विनोद के सख़्त लंड का लैस दार पानी भी मौजूद है,जो इस से पहले तुम मेरी चूत में से चाट कर खा चुके हो, मगर आज में तुम्हें विनोद के लंड का वही पानी अपने मुँह के ज़रिए पिला रही हूँ मेरी जान” यासिर से ये बात कहते हुए मैने एक बार फिर अपना मुँह मज़बूती के साथ यासिर के मुँह से जोड़ दिया.

तो यासिर बेशर्मी के साथ मेरे मुँह के अंदर अपनी ज़ुबान घुमाते हुए मेरे थूक को बेताबी से अपने मुँह में ट्रान्स्फर करने लगा था.

कुछ देर बाद हम तीनो सोफे से उठे तो मैने विनोद के सारे कपड़े अपने हाथ से उतार कर अपने नये शौहर को खुद पहली बार अपने हाथों से मुकमल नंगा किया.

और फिर हम सब इकट्ठे ही विनोद और मेरी सुहाग रात के लिए सजाई गई सुहाग की सेज पर आ गये.

अपने सुहाग के बिस्तर पर आते ही यासिर मुझ से पहले ही मेरे बिस्तर पर जा कर बैठा.

तो उस के पीछे पीछे मैं भी अपने बिस्तर पर चढ़ कर अपने पहले शौहर यासिर की गोद अपना सर रख कर लेट गई.

यासिर की गोद में लेटते ही मेरे पहले शौहर यासिर ने मेरी गुदाज और लंबी टाँगों को अपने हाथों से खोलते हुए अपनी पाकिस्तानी बीवी की जवान, प्यासी और गरम मुस्लिम चूत को मेरे नये हिंदू शौहर विनोद के मुँह के लिए पूरे का पूरा खोल दिया और बोला” लूऊऊऊओ चाआआआआट लो मेरी और अपनी जवान बीवी की मस्त चूत को दोस्त, जो तुम्हारे मोटे अनकट लंड के इंतिज़ार में पानी पानी हो रही है विनोद्द्द्द्द्द्द्द्द”.

यासिर की गोद में इस स्टाइल में लेटने से मेरी फूली हुई चूत और भी ज़्यादा उभर आई थी, और मेरी फुद्दि का मुँह ऐसे खुल गया जैसे बरसों से विनोद के लंड की भूकि हो.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ सायराआआआआआअ की इस चूत की तलब ने तो मुझे इतना पागल कर दिया है कि में चूत का पानी तो क्या, अपनी बीवी की चूत से निकलने वाले पेशाब को भी पीने को तैयार हूऊओन यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर”

ये बात कहते हुए विनोद ने गौर से मेरी चूत के खुले मुँह को देखा.

और फिर अचानक विनोद ने एक दम अपने गरम मुँह को मेरी तपती चूत के होंठों पर रखा और अपनी ज़ुबान से मेरी चूत के फूले हुए होंठों को चाटने लगा था.

“उफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या जबर्जस्त नसीब हैं मेरे, कि मेरा असली शौहर मेरी टाँगों को अपने हाथों से चौड़ा करते हुए मेरी चूत को एक और मर्द के मज़े के लिए पेश कर रहा है” यासिर के हाथों की मेहरबानी से खुली मेरी टाँगों के दरमियाँ बैठ कर विनोद ने ज्यों ही मेरी प्यासी चूत पर अपने गरम होंठों को रखा.तो मेरे दिल में ये ख्याल आया.

और विनोद की गरम और नोकिली ज़ुबान आज एक बार फिर मेरी गरम और मुलायम फुद्दि से टकराते ही मज़े की शिद्दत से अपनी भारी और कसी हुई जवान चुचियों को अपने दोनो हाथों से दबाते हुए में में चिल्ला उठी “ओह विनोद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द”

“उम्म्म्ममममममममममममम तुम्हारी चूत्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त से तो पानी ऐसे निकल रहा है जैसे चूत नही कोई अब्शर हो मेरिइईईईईईईई ज़ाआाआआअँ सायराआआआआआ” मेरे शौहर यासिर की मदद से मज़ीद चौड़ी होने वाली मेरी खुली टाँगों के दरमियाँ अपने मुँह और ज़ुबान को आज़ादी से मेरी फुद्दि की गहराई में फेरते हुए विनोद ने जब मुझे ये बात कही तो मेरे सबर का दामन मेरे हाथ से छूट गया. और एक झटके के साथ मैने अपनी चूत का नमकीन पानी अपने नये शौहर विनोद के खुले मुँह में उडेल दिया.

“ओह विनोद अब मुझ से और सबर नही हो रहा ,आओ और मेरी चूत में एक बार फिर अपना ये मस्त अनकट लौडा डाल कर मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाओ, और मेरे साथ अपनी सुहाग रात मना कर मुझे अपनी असली बीवी बना लूऊऊऊऊऊ मेरे राजा.”

अपनी टाँगों के दरमियाँ झुक कर मेरी चूत में से बहते पानी को अपनी ज़ुबान से चाटते हुए विनोद के मुँह पर तेज़ी के साथ अपनी चूत मारते हुए में सिसकार रही थी.

और विनोद ने मेरी चूत से निकलने वाले पानी की एक भी बूँद को ज़मीन पर नही गिरने नही दिया. बल्कि उस ने मेरी चूत का सारा पानी शरप शर्प कर अपने मुँह में ही चाट कर खा गया था.

मुझे यूँ अपने हिंदू लंड के लिए तड़प्ते देख कर विनोद ने मेरी टाँगों के दरमियाँ में से उठा.

तो मैने देखा कि विनोद का पूरा मुँह मेरी चूत में से बहने वाले नमकीन पानी से भीग गया था.

मेरी चूत को चाटने के बाद अपने मोटे, लंबे, सख़्त,जवान लौडे को अपने हाथ से मसलता हुए विनोद मुझे एक बार फिर से चोदने के लिए मेरी चूत के नज़दीक होने लगा था.

“विनोद तुम्हारा लंड अपनी चूत में लेने से पहले में एक बात तुम्हें बताना चाहती हूँ मेरी जान” विनोद को अपनी खुली टाँगों के दरमियाँ में से यूँ अपने मोटे लंड की मूठ लगाता देख कर मैने सिसकारते हुए कहा.

“हान्ंनननणणन् कहो मेरी जान क्या कहना चाहती हो तूमम्म्ममममम” मेरी गरम चूत के होंठो को अपने लंड के लिए खुलते और बंद होते देख कर विनोद ने अपने होंठों पर अपनी ज़ुबान फेरते हुए मुझ से पूछा.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ तुम जानते हो कि दुनिया की तकरीबन सारी औरतें शादी के बाद ही अपने शौहर के बच्चे की माँ बनती हैं, मगर में शायद इस दुनिया की वहीद औरत हूँ, जो शादी से पहले ही अपने शौहर के बच्चे को अपने पेट में पाल रही हूँ विनोद” विनोद की गरम निगाहों को अपनी प्यासी चूत के उपर फिरते देख कर मैने सिस्कार्ते हुए अपनी चूत पर हाथ फेरा. और बे शरमाई के साथ विनोद से ये बात की दी.

“ओह तो तुम मुझ से सुहाग रात मनाने से पहले ही यासिर के बच्चे की माँ बन चुकी हो क्या” मेरी बात को सुन कर विनोद को समझ नही आया. और वो हैरत से मेरा मुँह देखते हुए मुझ से पूछने लगा.

 
“हान्ंनननननननणणन् में माँ तो बनने वाली हूँ, मगर मेरे पेट में पलने वाला इस बच्चे का बाप यासिर नही बल्कि तुम हो विनोद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द” विनोद की बात के जवाब में मुस्कुराते हुए जब मैने अपने नये शौहर विनोद को ये बात बताई. तो खुशी और हैरत के मारे विनोद का मुँह एक दम खुला का खुला ही रह गया.

“ओह इतनी बड़ी बात तुम ने मुझ से अब तक क्यों छुपाई रखिईीईईईईईई सायराआआआआआअ” मेरी बात के ख़तम होते ही विनोद एक दम मेरे बहुत नज़दीक आया. और अपने तने हुए लंड को मेरी मुलायम चूत के गीले होंठों पर फेरते हुए कहने लगा.

“तुम जानते हो कि सुहाग रात को शौहर ही हमेशा अपनी बीवी को मुँह दिखाई की रसम में कोई चीज़ तोहफे में देते है, मगर इस दफ़ा अपनी सुहाग रात को ये खबर सुना कर, में तुम्हें चूत चुदाई का ये तोहफा देना चाहती थी मेरी जान” विनोद के अनकट लंड के टोपे की रगड़ को अपनी चूत के मोटे छोले पर महसूस करते हुए में सिसकारते हुए जवाब दिया.

“ओह मुझे अपनी जान के पेट में पालने वाले इस तोहफे को कबूल करते हुए बहुत ही मूसरत हो रही है, चलूऊऊऊओ इसी खुशी में तुम्हारी चूत को एक बार फिर चोद कर में तुम्हारी कोख में पलने वाले अपने बच्चे की पैदाइश को ज़केनी बना दूं मेरी जान” ये बात कहते हुए विनोद ने मेरी चूत के फूले हुए लिप्स को अपने हाथ से खोला. ताकि वो एक बार फिर अपने मोटे लंड को मेरी चूत में डाल कर अपने और मेरे जवान जिस्म की जिन्सी भूक मिटा सके.

“रूको ज़रा,आज तुम नही बल्कि यासिर खुद तुम्हारे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर मेरी चूत में डाले गा विनोद” अपनी चूत के खुले मुँह पर विनोद के लहराते हुए लंड को देखते हुए मैने अपने असल शौहर यासिर की तरफ देखा. और यासिर को विनोद का लंड अपनी चूत में डालने का इशारा किया.

“मैने तुम्हारे कहने के मुताबिक तुम्हारी चूत को चाट कर विनोद के लंड के लिए तैयार तो कर दिया है,मगर विनोद के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर तुम्हारी फुददी में डालने का काम मुझ से नही हो पाएगा सायराआआआआ” मेरी बात सुन कर यासिर ने झिझकते हुए मुझे जवाब दिया.

“इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद ना जाने तुम्हे शरम क्यों आ रही है मेरी जान, तुम्हें अपनी बीवी को किसी और मर्द से चुदवाने का शौक है ना, तो चलो अब शरमाना छोड़ो और अपने हाथ से अपने दोस्त का लंड अपनी जवान बीवी की प्यासी चूत में डाल कर मेरी तपती फुद्दि की गरमी को ठंडा करने के साथ अपने इस शौक को भी पूरा कर लो यासिर” यासिर की बात के जवाब में ये कहते हुए मैने अपने शौहर यासिर के हाथ को पकड़ कर विनोद के तने हुए मोटे लौडे पर रख दिया.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ देखूऊऊऊऊ तुम्हारी बीवी की फुद्दि के लिए मेरा लंड कितना सख़्त हो रहा है दोस्त, इस से पहले कि मेरा ये लंड फूल कर फट जाए, इसे अपनी बीवी की गरम और टाइट चूत में डाल भी दो ना यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर” यासिर के हाथ की गिरफ़्त को अपने लोहे जैसे सख़्त लंड पर महसूस करते ही मेरी तरह विनोद भी सिसकार उठा.

“ओह हान्ंनणणन् तुम दोनो सही कह रहे हो,सायरा की चूत को किसी और मर्द के लंड के लिए खुलता देखने की मेरी बहुत ख्वाहिश है, और अब जब कि तुम से अपनी प्रमोशन लेने की खातिर में एक बार अपनी बीवी को तुम से चुदवा ही चुका हूँ, तो फिर अपने हाथ से अपनी बीवी की प्यासी चूत में तुम्हारे इस लंड को डालने में कोई हर्ज नही, जिस लंड के लिए मेरी बीवी की चूत पिछले एक महीने से पानी छोड़ छोड़ कर बे हाल हो रही है” मेरी और विनोद की बातों के जवाब में यासिर ने भी आख़िर हार मानते हुए कहा.

और इस के साथ उस ने अपने दोस्त और मेरे नये शौहर विनोद का मोटा,ताज़ा,गरम लंड अपने हाथ से पकड़ कर मेरी तंदूर जैसी गरम चूत के अंदर दाखिल कर दिया.

“ आआआअहह, ऊऊऊहह.” विनोद का बड़ा सख़्त और मज़बूत लौडे की चमड़ी वाला टोपा जेसे ही मेरी चूत के दाने से टकराता हुआ मेरी तंग चूत में एक बार फिर दाखिल हुआ.

तो विनोद के इस अनकट लौडे की लज़्जत को महसूस कर के पैरों से ले कर सर तक एक मस्ती की सिहरन मेरे पूरे वजूद में छाती चली गई.

हालाकी यासिर की प्रमोशन की खातिर विनोद से एक बार चुदवाने के बाद मैने अपने दिल में ये इरादा कर लिया था. कि अब कभी विनोद को अपने करीब आने का मोका नही दूँगी.

मगर हक़ीकत ये थी. कि विनोद से एक बार चुदने के बाद मैने पिछले एक महीने में ना जाने कितनी दफ़ा उस के लौडे को याद कर के अपनी चूत की आग को अपने हाथों से ठंडा करने की नाकाम कोशिश की थी.

विनोद के मोटे सख़्त और जवान लंड का ये ही वो स्वाद और ये ही वो मज़ा था. जिस की तलब ने मुझे पिछले एक महीने से पागल बना रखा था.

और जिसे आज अपनी चूत में एक बार फिर से लेने के बाद मेरी चूत में लगी आग ठंडा होने की बजाय मज़ीद भड़क चुकी थी.

“ओह कैसाआआआआअ लगा है मेरी जान को विनोद का ये सख़्त लंडन्न्नन्न्नन्नन्न्न्न सायराआआआआआआअ” विनोद के अनकट लौडे को मेरी तंग चूत में डालते ही यासिर ने एक दम मुझ से पूछा.

“ ओह क्या बताऊ,विनोद्द्द्द्द्द का लौडा तुम्हारे लंड से बहुत ज़्यादा मोटा और सख़्त हह हाईईईई, सच बात ये है कि मेरे दिल ने तो तुम से प्यार किया है, मगर मेरी चूत अब विनोद के लंड की आशिक़ बन चुकी है, वैसे भी अब मेरी छोड़ो,तुम बताओ कि अपनी नज़रों के सामने एक और मर्द का मोटा,ताज़ा जवान लंड को अपनी जवान बीवी की गरम चूत में जाते देख कर तुम्हें कैसा महसूस हो रहा है मेरी जान” यासिर ने ज्यों ही विनोद के मोटे लंबे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर मेरी पानी छोड़ती चूत के मुँह पर रख कर मेरी फुद्दि के अंदर डाला. तो मज़े से सिसकते हुए में अपने असली शौहर के सर पर अपना हाथ रख कर यासिर के मुँह को अपनी चूत में जाते हुए विनोद के बड़े और सख़्त लंड के नज़दीक किया. और फिर अपने शौहर यासिर से पूछने लगी.

“उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मैने आज तक वाइफ शेरिंग वाली जितनी भी स्टोरीस राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ी, या इस तरह की पॉर्न मूवीस देखी हैं, उन सब को पढ़ने या देखने में मुझे वो मज़ा नही मिला,जो मज़ा मुझे विनोद के लंड को अपने हाथ से तुम्हारी चूत में डालने और फिर तुम्हारी चूत को विनोद के लंड के लिए खुलता देख कर मिला है, और इस मज़े की वजह से लगता है कि मेरा लंड जेसे फॅट ही जाए गा”

मेरी फुद्दि के ऐन उपर झुक कर मेरी चूत में दाखिल होते हुए विनोद के शेष नाग लंड पर अपनी नज़रें घुमाते हुए यासिर ने मुझ से कहा.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मुझे तो यकीन ही नही हो रहा कि विनोद्द्द का इतना बड़ा और मॉटााअ लौडा तुम्हारी इस मासूम सी चूत में घुस भी पाएगा मेरी ज़ाआाआअँ” मेरी चूत के अंदर फिसलते हुए मेरे नये शौहर के गधे जेसे लंड पर बदस्तूर अपनी नज़रें जमाए यासिर ने मुझ से सवाल किया.

और इस के साथ ही विनोद के सामने खुली हुई मेरी टाँगों में से हट कर बिस्तर पर पड़े हुए मेरे जिस्म के ऐन पीछे आ कर बैठ गया.

“ओह ,हाईईईईईईई विनोद्द तुम्हारी तरह कोई अनाड़ी नही बल्कि औरतों के मामले में एक माहिर खिलाड़ी है, जो बहुत अच्छी तरह जानता है कि किसी औरत को चोदने से पहले उसे गरम केसे किया जाता है, वैसे भी विनोद का ये लंड शायद दुनिया के सब से बड़े लौडो में से एक है, और इतना लंबा और मोटा लौडा करोड़ों औरतों में किसी एक औरत ही को ही नसीब होता हो गा,इस लहाज़ से में सच मूच बहुत ही खुश किस्मत औरत हूँ कि जिस की चूत विनोद के इस सख़्त, मज़बूत और ताक़त वर लौडे को अपनी चूत में ले रही हूँ, मुझे ऐसे लगता है कि मेरी ये चूत्त्त्त्त्त्त्त शायाद्द्दद्ड विनोद्द्द्द्द्द्द के लंड के लिए है बनी है यासीर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर” मैने विनोद के सख़्त अनकट लौडे के गिर्द अपनी चूत के मसल कसते हुए अपने शौहर यासिर से कहा.

“ओह तुम्हारी चूत में जाते हुए विनोद के लंड की पच पच ने तो मुझे पागल कर दिया है,और ज़ोर और मज़े से खुल कर अपनी चूत को विनोद के लंड से चुदवाओ मेरी बेगम सायराआा ज़ाआआआं” मेरी मुस्लिम चूत के अंदर बाहर होते विनोद के अनकट हिंदू लौडे को मेरे पीछे बिस्तर पर बैठ कर देखते हुए यासिर ने मुझ से कहा.

“ देखना चाहते हो कि एक असल मर्द अपनी बीवी की चूत की कैसी खातिर करता हाईईईईईईईईईईईईईईईईईईई,तो देख लो मेरी चूत की गहराई में फिसलते हुए मेरे नये शौहर विनोद के इस अनकट लौडे को यासिर, जिस के लंड की चमड़ी ने तुम्हारी मुस्लिम बीवी की चूत को अपना इतना गेर्वेदा बना लिया है, कि अब तुम्हारे जीते जी में इस हिंदू लौडे की रखैल बन चुकी हूँ यासीर्र्र्र्र्ररर”

 
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