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हाईईईईईईई में चुद गई दुबई में complete

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विनोद के मोटे लंड के सामने अपनी टांगे पूरी तरह से खोलते हुए मैने अपने पीछे लेटे यासिर की गर्दन में अपना एक हाथ डाला. और अपने असल शौहर को अपनी चूत के होंठों में फँसे हुए विनोद के सख़्त और जवान लंड का दीदार करवाने लगी.

“ओह हाआआआआआअँ चोदूऊऊऊऊओ मेरी बीवी की गरम चूत को, और मेरी बीवी की प्यासी चूत में अपने अनकट लौडे का पानी भर कर, मेरी मुस्लिम बीवी की कोख में पलने वाले अपने हिंदू बच्चे की पैदाइश को यकीनी बना दूऊऊऊऊऊओ विनोद्द्द्द्द्द्द्द” मेरी बातों और मेरे मोटे चुतड़ों पर पड़ने वाली विनोद के मोटे टट्टों की थॅप थॅप से महज़ूज़ होते हुए यासिर ने मेरे कान के उपर किस करते हुए विनोद से कहा. तो अपने शौहर की बातों और यासिर की की गई हरकत से में भी सिस्कार्ने लगी थी.

“हाईईईईईईईईईईईई तुम्हारी बीवी की इस शादी शुदा चूत को चोदने में ही मुझे इतना मज़ा आ रहा है, यासिर काश अगर मुझे तुम्हारी असल सुहाग रात को सायरा की कंवारी चूत की सील खोलने का मोका मिल जाता, तो तुम्हारी बीवी की चूत की सील अपने लौडे से खोल कर में तो मज़े से पागल ही हो जाता मेरे दोस्त” ये कहते हुए विनोद ने मेरे पीछे बैठ कर अपनी बीवी को एक गैर मर्द का लौडा एंजाय करते देख कर अपने लौडे की मूठ लगाते मेरे शौहर यासिर की तरफ देखते हुए आँख मारी. और मज़े के साथ मुझे चोदने में मसरूफ़ हो गया.

विनोद मेरी फुद्दि में लंड डालने के बाद मेरी चूत को हल्के हल्के धक्कों से चोदने में मसरूफ़ था. और इस दौरान विनोद ने अभी तक अपना पूरा लौडा मेरी फुद्दि में नही डाला था.

मेरी चूत अपनी जिन्सी हवस के साथ साथ यासिर और विनोद की छेड़ छाड़ की वजह से पहले ही पानी पानी हो रही थी. और उपर से रही सही कसर अब मेरी चूत में गया हुआ विनोद का सख़्त और मज़बूत लंड निकाल रहा था.

अभी में विनोद के अपनी चूत में घुसे हुए आधे लंड के मज़े से बे हाल हो रही थी. कि इतने में विनोद ने अचानक ही एक ज़ोर दार धक्का लगा कर अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया.

“ आाऐययईईई,आआअहह,ऊऊऊओह,ओह फाड़ डालूऊऊऊ गे क्या मेरी फुद्दीईईइ को, ऊिइ,सच मुच फॅट जाईययययी गी मेरी चूत्त्त्त्त्त विनोद्द्द्द्द,” इस धक्के के साथ ही विनोद का पूरे का पूरा लौडा जड़ तक मेरी चूत में समा गया था.

अब अपनी चूत में निकलते हुए विनोद के लौडे को अपनी फुद्दि में महसूस कर के मुझे ये अहसास होने लगा था. कि जेसे अब मेरी चूत मेरी मे और जगह नहीं है.

विनोद अब पूरी ताक़त से मेरी मासूम सी चूत को चोदने में मसरूफ़ हो चुका था.

मुझे चोदने के दौरान विनोद का मोटा लंड तो मेरी चूत की दीवारों को एक तेज धार चाकू की मनिद उपर से खोलते हुए मेरी फुद्दि में दाखिल हो रहा था.

जब कि विनोद के ज़ूस से भरे मोटे टटटे नीचे से मेरी गान्ड से टकरा रहे थे.

विनोद के ज़ोर दार और जबर्जस्त धक्कों की वजह से मेरी भारी चुचियों के दरमियाँ पड़ा हुआ मंगल सूत्र भी अब मेरे बड़े और मोटे मम्मो के साथ इधर उधर उछल रहा था.

विनोद के हर धक्के पर उस का लंबा लंड अब जड़ तक मेरी फुद्दि में धंसता हुआ चला जा रहा था.

और अपने नये शौहर के इतने बड़े और मोटे लंड को अपनी चूत में यूँ आसानी से समाता हुआ देख कर मुझे तो यकीन ही नही हो रहा था. कि मेरी चूत विनोद का इतना बड़ा लंड भी अपने अंदर ले सकती है.

कहते है कि जब तक मर्द का पूरा लौडा चूत में ना जाए तब तक चुदाई का मज़ा नही आता.

बिल्कुल कुछ ऐसी ही हालत अब विनोद के मोटे ताज़े सख़्त और जवान लंड को अपनी चूत में पूरा लेने के बाद हो रही थी कि अब विनोद के इन लंबे और मोटे लंड से मुझे अपनी चूत भरी भरी और मुकमल सी महसूस हो रही थी.

और ये ही वो केफियत थी जो यासिर के लंड को लेते वक्त आज तक मुझे नसीब नही हुई थी.

इसी लिए मेने अपनी टाँगें खूब चौड़ी कर रखी थी. ताकि विनोद को लंड पूरा अंदर पेलने में कोई रुकावट ना हो.

विनोद ने मेरी भारी चुचियों को अपने दोनो हाथों में पकड़ कर अपनी पूरी ताक़त से मेरी फुद्दि में धक्के मारने शुरू कर दिए थे. और उस के जवाब में अब में भी अपने भारी चूतड़ उचका उचका कर विनोद के धक्कों का जवाब दे रही थी.

विनोद अपना लौडा मेरी चूत से पूरा निकाल कर मेरी फुद्दि में अब जड़ तक पेल रहा था.

जिस की वजह से विनोद के भारी टटटे मेरी गुदाज और भारी गान्ड से टकरा रहे थे.

विनोद की इस जबर्जस्त चुदाई की वजह से मेरी ऊट इतना ज़्यादा रस छोड़ रही थी. कि विनोद के हर धक्के के साथ मेरी चूत में से फ़च,फ़च ,फ़च,फ़च और मेरे मुँह से आआहहाआह,आआआआऐययईईई आआआहह ऊओो उम्म्म की मधुर सिसकियाँ निकल कर पूरे कमरे के माहौल को रंगीन बनाने में मसरूफ़ थी.

अपनी बीवी की प्यासी चूत पर पड़ने वाले किसी गैर मर्द के धक्कों और अपनी बीवी के चुतड़ों पर पड़ने वाले टट्टों की आवाज़ों के साथ साथ किसी और मर्द से अपनी चूत की जिन्सी भूक को मिटाते हुए फूटने वाली सिसकियों को सुन कर मेरे पीछे बैठा मेरा असल शौहर यासिर के जोश में भी इज़ाफ़ा होता जा रहा था.

और ये ही वजह थी कि मेरी चूत की चुदाई को देखते और मेरी गरम सिसकियों को सुनते हुए विनोद के धक्कों के साथ साथ यासिर के हाथ भी अब तेज़ी के साथ उस के लौडे पर फिसलते हुए अपनी मूठ लागने में मसरूफ़ थे.

फिर इसी तरह की धुआधार चुदाई के कुछ देर बाद ही विनोद ने मेरी चूत मे एक आख़िरी धक्का मारा. और इस के साथ ही मेरी बच्चे दानी को एक बार फिर अपने लंड के लैस दार पानी से भर दिया.

“ उफफफफफफफफफफ्फ़ एक शादी शुदा औरत होते हुए, आज मैने अपने असल शौहर की नज़रों के सामने ही अपना सब कुछ विनोद के मस्त अनकट लौडे पर निछावर कर दिया है” अपनी चूत की गहराइयों में विनोद के मोटे लंड से निकलने वाले गरम वीर्य को जज़ब होते महसूस कर के मेरे दिल में ये ख्याल आया. और इस के साथ ही मेरे जिस्म को एक झटका लगा तो मेरी चूत ने भी अपना गरम पानी विनोद के मोटे लौडे के उपर छोड़ दिया.

मेरी चूत की आखरी तह में एक बार फिर अपने लंड का पानी छोड़ने के थोड़ी देर बाद विनोद ने अपने मोटे लौडे को मेरी चूत में से निकाला .तो उस के मोटे सख़्त लंड से निकलने वाले गरम पानी की काफ़ी बूँदें चूत के साथ साथ मेरे पेट पर भी जा गिरीं.

विनोद के पानी छोड़ते लंड के मेरी फुद्दि से बाहर आते ही मैने अपनी चूत के पानी से भीगे हुए विनोद के मोटे लौडे को अपने हाथ में जकड लिया.

“ओह देखूऊऊऊओ एक गैर मर्द ने तुम्हारी बीवी की बच्चे दानी में अपने लंड का बीज डाल कर तुम्हारी बीवी को अपने बच्चे की माँ बना दिया है यासिर” विनोद के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर अपनी तपती चूत के उपर रगड़ते हुए मैने अपने शौहर यासिर की तरह देखते हुए कहा. जो मेरे पास ही बिस्तर पर लेट कर अपनी बिखरी सांसो को संभालने में मसरूफ़ था.

“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ हाईईईईईईई जो मज़ा तुम्हारी चूत को विनोद के लंड से मिला है,वो मज़ा में वाकई ही आज तक तुम्हें देने से कसीर रहा हूँ, इसीलिए आज के बाद दुनिया की नज़र में तो में तुम्हारा शौहर हूँ गा, मगर घर के अंदर तुम विनोद की बीवी की हैसियत से इसी कमरे में रहा करो गी,और विनोद ही एक शौहर की हैसियत से तुम्हारी चूत की प्यास बुझाया करे गा सायरा”

 
विनोद के मोटे अनकट लौडे को मेरी चूत के बाहर और पेट पर अपना रस छोड़ते हुए देख कर यासिर ने अपनी ज़ुबान को अपने होंठों पर मारते हुए मुझ से कहा.

मेरी फुद्दि को अच्छी तरह से अपने लंड के गरम पानी से भरने के बाद विनोद मेरे बराबर ही बिस्तर पर आ लेटा.

तो यासिर एक दम से बिस्तर से उठ कर मेरी खुली हुई टाँगों के दरमियाँ लेट कर अपनी बीवी की अभी अभी चुदि हुई जवान चूत का नज़ारा करने लगा था.

जिस में से विनोद के लंड का छोड़ा हुए गाढ़ा सफेद पानी आशिस्ता आहिस्ता बह कर मेरे चुतड़ों को भिगोता हुआ नीचे बिछि मेरी सुहाग की सफेद चादर को गीला करने में मसरूफ़ था.

मेरी चूत में से निकलने वाले विनोद के लंड के पानी को देखते हुए ना जाने यासिर को एक दम क्या हुआ. कि उसने अचानक मेरी खुली टाँगों के दरमियाँ झुकते हुए मेरी चूत के फूले हुए होंठों के दरमियाँ अपना मुँह रखा. और फिर मेरी चूत के खुले हुए होंठों के दरमियाँ में से विनोद के लंड का सफेद वीर्य अपनी ज़ुबान से चाटने लगा था.

“आआआः ये क्या कर रहे हो,उफफफफफ्फ़ मत करूऊओ ऐसे मेरी जान यासिर” अपने शौहर के मुँह को विनोद के लंड से भरी हुई चूत में से ताज़ा ताज़ा छोड़े थिक वीर्य को चाटते हुए देख कर मैने मज़े से बेसूध होते हुए अपने शौहर को कहा.

हालाकी आज से कुछ अरसा पहले मैने खुद विनोद के लंड से रात भर चुदि हुई अपनी चूत को अपने शौहर यासिर से सॉफ करवा कर अपने शौहर को विनोद का लंड के पानी से रोशनास करवाया था.

मगर इस के बावजूद आज विनोद की नज़रों के ऐन सामने मुझे यासिर का अपनी चूत से बहते विनोद के लंड के पानी को चाटते हुए देख कर शरम सी महसूस होने लगी थी.

इस से पहले कि में यासिर को मज़ीद आगे बढ़ने से रोकती या अपनी चूत के होंठों पर चिस्पान यासिर के मुँह को हटाने में कामयाब होती. कि मेरी चूत के फूले हुए लिप्स में अपनी ज़ुबान घुमाते हुए यासिर ने कहा “ उफफफफफफफफफफफ्फ़ मुझे खुद ही मेरे दोस्त विनॉद्द्द्द्द्दद्ड के लंड के पानी का चस्का लगा कर अब खुद ही मुझे इस मज़े से महरूम करना चाहती हो तुम, मुझे यूँ रोक कर मुझ पर ज़ुल्म तो ना करो ,यकीन जानो तुम्हारी चूत में छोड़े गये विनोद के इस मज़े दार पानी को चाटने में जो मज़ा मुझे मिलता है, वो मज़ा में लफ़ज़ो में बयान करने से कसीर हूँ, इसीलिए आज अपनी चूत में छोड़े गये विनोद के इस गाढ़े पानी को खा जाने दो मुझे सायरा”ये कहते हुए यासिर ने मेरी चूत के दोनो लबों को अपनी ज़ुबान की नौक से खोलते हुए अपनी ज़ुबान को मेरी चूत के सूराख के अंदर दाखिल कर दिया.

“अच्छाआआआआ अगर तुम्हें वाकई ही मेरी चूत में छोड़े गये विनोद के लंड के गरम पानी को खाने का इतना ही शौक है,तो खा जऊऊऊऊओ अपनी बीवी की चूत में मौजूद अपने दोस्त के पानी को,जो तुम्हारे दोस्त के लंड से प्रेग्नेंट हो चुकी है मेरी जाअन” ज्यों ही यासिर की लंबी लाल ज़ुबान मेरी चूत के अंदर दाखिल हुई. तो मज़े के मारे मेरे जिस्म को एक झटका सा लगा.

इस के साथ ही मैने अपने शौहर यासिर के बालों को अपने हाथ में थामा.और अपनी गान्ड को बिस्तर से उपर उठा उठा कर अपनी चूत को अपने शौहर के खुले मुँह पर मारती हुई विनोद के लंड के पानी को अपने शौहर यासिर के मुँह में खाली करने लगी थी.

“हाईईईईईईईईईईईईई में सदक़े में जाऊ अपनी बीवी की चूत में से किसी और मर्द का वीर्य खाने वाले अपने शौहर पर, हाईईईईईईई काश मेरी तरह हर पाकिस्तानी बीवी को ऐसा ही शौहर नसीब हो,जो ना सिर्फ़ अपनी बीवी की चुदाई के लिए किसी और मर्द के लंड का बंदोबस्त करे ,बल्कि फिर दूसरे लंड से चुदि हुई अपनी बीवी की फुद्दि को अपनी ज़ुबान से सॉफ कर के अपनी बीवी की चूत की चुदाई का मज़ा भी दुबारा करे”

लज़्जत के माहौल में अपने मुँह से इसी तरह की बहकी बहकी बातें निकालते हुए अब में यासिर का सर अपने दोनो हाथों में थाम कर अपने शौहर के मुँह पर अपनी चूत को रगड़ने में मसरूफ़ हो गई थी.

 
अब कमरे में ये हालत थी. कि एक तरफ मेरा शौहर यासिर अपने दोस्त विनोद के अनकट हिंदू लंड से निकले हुए नमकीन पानी को मेरी मुस्लिम चूत में से चाट चाट कर ख़ाते हुए मेरी चूत को अच्छी तरह से सॉफ कर के पाकीज़ा करने में मसरूफ़ था.

जब कि दूसरी तरह अपने शौहर यासिर की इस दीवाना वार चटाइ की वजह से मेरे जिस्म में एक अजीब सी हलचल मची हुई थी.

इसी दौरान तीसरी तरफ मेरे पहलू में लेटा हुआ मेरा इंडियन ठोकू अपने दोस्त यासिर को अपनी बीवी की चूत से उस का वीर्य ख़ाते देख कर हैरान होते हुए अपने मोटे लंड को हाथ में पकड़ कर अपनी मूठ लगाने में मसरूफ़ था.

इसी दौरान ही जब कुछ देर बाद में अपने उपर काबू ना रख पाई तो मेरी चूत ने एक बार फिर अपना पानी छोड़ दिया.

मेरी चूत से निकलने वाला ये पानी विनोद के लंड के पानी से मिक्स हो कर मज़ीद नमकीन हो गया.

फिर मेरी चूत का ये नमककेन पानी मेरी फुद्दि से निकल कर मेरे बाहर को उमड़ा. और मेरी टाँगों के दरमियाँ झुक कर मेरी चूत से अपने मुँह जोड़े मेरे प्यारे शौहर यासिर के मुँह में गिर कर मेरे शौहर के प्यासे मुँह को भरने लगा था.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मेरे लंड के छोड़े हुए पानी को इतनी दीवानगी से अपनी बीवी की चूत से चाट कर तुम ने ये साबित कर दिया है , कि तुम्हें वाकई ही अपनी बीवी से बहुत ही ज़्यादा मुहब्बत है,और इस मुहब्बत की खातिर तुम कुछ भी कर सकते हो यासिर” अपने दोस्त यासिर को मेरी फुद्दि में से निकलने वाले मिक्स पानी को यूँ मज़े से चाटते देख कर विनोद ने अपने लंड को अपने हाथों से मसल्ते हुए कहा.

थोड़ी देर मेरी चूत से निकलने वाले पानी से अपना पेट भरने के बाद मेरी टाँगों के दरमियाँ में से उठ कर यासिर बिस्तर से उतरा. और विनोद के लंड और मेरी चूत के पानी से भीगे हुए अपने होंठों पर मज़े से अपनी लंबी ज़ुबान फेरते हुए बोला “अब तुम लोग आराम करो और में भी जा कर अपने कमरे में सोता हूँ”

इस से पहले कि विनोद और में यासिर को दूसरे कमरे में जाने से रोक पाते. यासिर ने इधर उधर बिखरे अपने कपड़े समेटे और फिर एक दम कमरे से बाहर निकल गया.

“उफफफफफफफफफफ्फ़ में तो तुम्हारे इस हसीन सेरपे और तुम्हारी तंग और गरम चूत को ही हासिल कर के तुम्हारा दीवाना बन चुका था, मगर यासिर को इतने शौक से मेरे लंड से निकले वीर्य को खाते देख कर में तो यासिर का भी बहुत गेर्वेदा हो चुका हूँ मेरी सायरा बेगम” यासिर के कमरे से बाहर जाते ही विनोद ने मुझे अपनी बाहों में भरते कर मेरे मम्मो को अपने हाथों से मसल्ते हुए ये बात कही. तो विनोद को यूँ मुझे अपनी सायरा बेगम पुकारने पर मेरी चूत में जलती जिन्सी आग एक बार फिर से भड़काने लगी थी.

मैने जोश-ए-जज़्बात में मस्त होते हुए विनोद के होंठों के साथ अपने लब जोड़ दिए.

विनोद और मेरे होंठों का आपस में एक बार फिर मिलाप हुआ. तो मेरे रस भरे लबों से मेरे होंठों का रस चाटने के साथ साथ विनोद के हाथ मेरी गुदाज और भारी चुचियों पर फिसलते हुए मेरी जवानी का मज़ा लेने लगे.

में और विनोद दिन भर की मसरूफ़ियत और फिर ज़ोर दार चुदाई की वजह से काफ़ी थक चुके थे.

इसीलिए कब मुझे और विनोद को नीद आ गई इस बात का हम दोनो को पता ही नही चला और हम दोनो मियाँ बीवी की हैसियत में एक दूसरे की बाहों में सो गये.

आज मेरी ज़िंदगी में ये दूसरा मोका था जब में विनोद के साथ एक ही बिस्तर पर सो रही थी.

विनोद के लंड का मज़ा एक बार फिर हाँसिल करने के बाद मुझे अपना वजूद बहुत हल्का फूलका महसूस हो रहा था.

इसी लिए में दुनिया से बे नायाज़ हो कर अपने नये शौहर विनोद की बाहों में एक पूर सकून नींद के मज़े लेने में मसरूफ़ हो गई थी.

नज़ाने रात का ये कौन सा पहर था. जब अपनी नींद के दौरान मुझे एक ख्वाब आया. कि जेसे में पेट के बल बिस्तर पर उंड़ी (उल्टी) हालत में पड़ी हुई हूँ.

जब कि पीछे से किसी की गरम और नुकीली ज़ुबान तेज़ी के साथ मेरी गरम फुद्दि पर चल रही है. जिस की वजह से मेरे मुँह से सिसकियाँ निकल रही हैं.

ये ख्वाब आते ही मेरी आँखे नींद से एक दम खुद ब खुद ही खुल गई. तो मुझे अहसास हुआ कि जो कुछ में नींद की हालत में महसूस कर रही थी.वो सिर्फ़ एक सपना नही था.

बल्कि में हक़ीकत में अपने पेट के बल बिस्तर पर लेटी हुई थी. और इस दौरान हवा में उठी मेरी गान्ड के दरमियाँ अपना मुँह डाल कर विनोद पीछे से मेरी फुद्दि को चाटने में मसरूफ़ था.

“हाईईईईईईईईईईईईई लगता है तुम्हारा दिल मेरी चूत से अभी भरा नही मेरी जान” विनोद की गरम ज़ुबान को पीछे से अपनी चूत पर चलता हुआ महसूस कर के में सिसकी.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारी चूत और जवानी ऐसी चीज़ नही, जिस से इंसान का दिल एक ही बार में भर जाए, तुम्हारी फुद्दि और गरम जवानी का स्वाद तो में अपनी पूरी ज़िंदगी भी लेता रहूं, तो फिर भी ये कम है मेरी सायरा जानू” मेरी बात के जवाब में विनोद ने ये बात कही. तो अपने हिंदू आशिक़ के मुँह से अपनी मुस्लिम चूत और पाकीज़ा हुश्न की तारीफ सुन कर मेरी फुद्दि एक बार फिर अपना पानी छोड़ने लगी.

कुछ देर मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चोदने और चाटने के बाद विनोद ने मेरी गान्ड को अपने हाथ से थोड़ा मज़ीद उपर की तरफ किया. तो में पेट के बल बिस्तर पर लेटे लेटे एक घोड़ी की तरह बिस्तर पर विनोद के सामने झुकती चली गई.

मुझे इस स्टाइल में बिस्तर पर लेटा कर विनोद भी मेरी टाँगों के दरमियाँ में से उठ कर अपने घुटनों के बल बिस्तर पर मेरे पीछे खड़ा हुआ. और इस के साथ ही उस ने अपने हाथों से मेरी दोनो टांगे को खोल दिया

जिस वजह से मेरी चूत पीछे से उभार कर बाहर को निकल आई. और मेरी फुददी का मुँह पीछे से थोड़ा सा खुल गया.

इस के साथ ही विनोद अपने लंड को हाथ से पकड़ कर मेरी पानी पानी होती हुई चूत पर अपना लंड रख कर रगड़ने लगा.

“हाईईईईईई क्यों अपनी बीवी की चूत को इस तड़पा रहे हो मेरे साजना, आगे बढ़ो और जल्दी से अपने लौडे को अपनी इस गरम बीवी की प्यासी चूत में डाल भी दो नाआआ मेरे सरताज” विनोद के लौडे का मोटा टोपा अपनी चूत से टच होते हुए महसूस कर के में बे ताब हो गई. और सिसकते हुए अपनी जान विनोद से इल्तिजा करने लगी थी.

सच्ची बात ये थी कि मेरी चूत उस वक्त फिर से बे इंतिहा गरम हो चुकी थी. और मेरी चूत की गर्मी का एलाज़ उस वक्त सिर्फ़ और सिर्फ़ विनोद का मोटा बड़ा लंड ही था.

 
इधर में अपनी चूत की गरमी की वजह से बे चैन हो कर विनोद से चुदाई की रिक्वेस्ट करने पर तूल गई थी. जब कि दूसरी तरफ विनोद मेरी बेचैनि को देख कर जैसे लुफ्त अंदोज हो रहा था.

” अच्छा अभी डालता हूँ अपना लंड तुम्हारी इस गरम फुद्दि में मेरी बेगम” विनोद ने अपने मोटे अनकट लंड को मेरी चूत के मुँह पर उपर नीचे फेरते हुए कहा.और इस के साथ ही विनोद ने अपना काला मोटा लंड मेरी चूत में एक ज़बरदस्त झटके के साथ पेल दिया.

मेरी चूत जो ये लंड एक बार फिर अपने अंदर लेने के लिए बेचैन थी. वो भी विनोद के इस अचानक हमले को बर्दास्त नही कर पाई.

विनोद के इस अचानक और जबर्जस्त झटके से मेरी चूत में होने वाले दर्द की बदोलत मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जेसे दो साल से शादी शुदा होने के बावजूद में अब तक कुँवारी थी. और आज मेरी चूत की पहली चुदाई हो रही हो.

मेरे जवान शौहर विनोद का मोटा,लंबा सख़्त लंड ज्यों ही टहलता हुआ एक बार फिर मेरी प्यासी चूत में घुसा.तो मेरी चूत के देने पर लगने वाली विनोद के अनकट टोपे की रगड़ की वजह से मेरी चूत ने फिर अपना पानी छोड़ दिया.

मेरी फुद्दि का पानी यूँ एक दम छूटने की वजह से ना सिर्फ़ विनोद का सख़्त लंड भी मेरी फुद्दि के पानी से पूरा भीग गया,बल्कि साथ ही साथ मेरी चूत का पानी फुद्दि से बाहर भी निकल कर मेरी सॉफ शॅफॉफ चूत के गुदाज होंठों पर भी बहने लगा था.

विनोद के झुकते की वजह से मेरे नये शौहर विनोद का जान दार लौडा मेरे गुदाज चुतड़ों से टकराता हुआ ब आसानी मेरी चूत में जड़ तक घुस चुका था.

“आआआआआआआआआआआअहह,कितना गरम है तुम्हारा लंड,उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ पूरा डाल दो नाआ, मारो मेरी चूत अपने मोटी लंड से बहुत प्यासी है तुम्हारी बीवी की चूत मेरे प्यारे शौहर जी, डाल दो अंदर मेरे पूराआआआआआआआआ और मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो” अपने जानू के लौडे के वार को अपनी चूत पर झेलते हुए में चिल्ला उठी.

मज़े की शिद्दत से मेरे मुँह से ना जाने क्या क्या अल्फ़ाज़ निकलने लगे थे. इस का मुझे खुद भी पता नही चल रहा था.

और इस के साथ में भी मज़े से अपने भारी चूतड़ उठा उठा कर अपने यार के मोटे लौडे को अपनी चूत के अंदर क़ैद करने में मसरूफ़ हो चुकी थी.

“मेरी जान तुम्हारी प्यासी चूत में अपना पूरा लंड डालने के बाद मुझे तो यूँ महसूस हो रहा है, कि जेसे तुम्हारी ये गरम चूत की ये गर्मी तो मेरे लंड को पिघला कर ही रख देगी ”. मुझे यूँ अपने चूतड़ उठा उठा कर लंड के मज़े लेते देख कर विनोद ने भी पीछे से मेरी चूत को ज़ोर दार धक्कों से चोदते हुए मुझ से कहा.

अब बिस्तर पर लेटने के दौरान मेरी गान्ड उपर उठी हुई थी. और विनोद पीछे से मेरे कंधे पकड़ कर मेरे उपर झुका हुआ मेरी चूत में धक्के पर धक्के मार रहा था

विनोद की चुदाई की वजह से मेरी चूत पीछे से चौड़ी हो गई थी. जिस वजह से विनोद का मोटा,सख़्त,जवान लंबा लौडा अब मेरी चूत की दीवारों को आसानी से छेड़ता हुआ मेरी फुद्दि के अंदर बाहर होने लगा था.

विनोद के ज़ोर दार धक्कों का स्वाद लेते हुए मैने अपनी चौड़ी गान्ड की पहाड़ियों पर अपने हाथ रखते हुए अपनी चूत को विनोद के मोटे जवान और सख़्त लंड के लिए मज़ीद खोल दिया.

मेरी खुद सुपुर्दगी के इस अंदाज़ को देखते हुए विनोद मज़ीद जोश में आया. और अब वो अपनी पूरी ताक़त से मेरी फुद्दि में अपने बड़े लंड को पेलने में मशगूल हो चुका था.

मुझे चोदने के दौरान विनोद अब कभी अपने दोनो हाथों से मेरे लटकते हुए बड़े बड़े मम्मो को पकड़ कर उन्हे मसल्ने लगता था. और कभी मेरी कमर और कभी मेरे चूतड़ो को मसल्ते अपना पूरा लंड बाहर निकाल कर मेरी चूत के अंदर पेलने लगता था.

“फ़च,फ़च,फ़च,फ़च,फ़च एयाया एयेए इसस्स्स्सस्स ऊऊऊहह आआहह ऊऊओिईईई ऊऊहह,आआअहह” विनोद की चुदाई की वजह से मज़े के मारे इस तरह की आवाज़े अब पूरे कमरे में गूँज रही थी.

और इस दौरान में भी पीछे से अपनी गान्ड उपर उठा उठा कर चुदवाते हुए अपने नये शौहर के मज़े दार धक्कों का जवाब देने में मसरूफ़ थी.

“उफफफफफ्फ़ मुझे एक बार ही चोद कर यासिर की तो बस हो जाती है, मगर मेरे असली शौहर यासिर के मुक़ाबले में क्या दमदार मर्द है विनोद, जिस ने पिछली दफ़ा भी रात भर मुझे दो तीन दफ़ा चोदा था, और आज भी एक बार मेरी चूत में अपना पानी निकलने के बाद दुबारा से मेरी फुद्दि का मज़ा लेने और मुझे अपने लंड का मज़ा देने में लगा हुआ है” अपने भारी चूतड़ उपर उचका कर विनोद के अनकट तगड़े लंड को अपनी चूत मे पूरा अंदर लेते हुए मैने सोचा.

विनोद की इस मज़े दार चुदाई की वजह से मेरा पूरा बदन जवानी की आग में जल रहा था. और एक अजीब सा नशा मेरे सारे वजूद पर इस वक्त छाता जा रहा था.

विनोद के लंबे, मोटे लौडे के दमदार धक्कों से मेरी चूत में मीठा मीठा दर्द हो रहा था.

मगर इस के बावजूद मुझे ऐसा मज़ा मिल रहा था. जो यासिर से चुदाई के दौरान मुझे कभी नसीब नही हुआ था.

 
इसी दौरान विनोद को ना जाने किया सूजी के उस ने मेरी चूत को अपने लंड से चोदते चोदते मेरी चौड़ी और मखमली गान्ड के भारी चुतड़ों को अपने हाथ से मज़ीद चौड़ा किया. और मेरी गान्ड के गुलाबी कुंवारे सुराख पर अपनी एक उंगली को रखते हुए मुझ से पूछा “ तुम्हारी इस मस्त गान्ड के छेद को देख कर ऐसे लगता है जेसे यासिर ने तुम्हारी गान्ड की सील अभी तक नही तोड़ी मेरी जान”

“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ विनोद तो वाकई ही औरतों के मामले में एक बहुत ही माहिर खिलाड़ी है, जो मेरी गान्ड के सुराख को देखते ही समझ चुका है, कि यासिर ने मेरी गान्ड को अभी तक नही खोला” विनोद के हाथ की उंगली को अपनी गान्ड के सुराख में घुसते हुए महसूस करते ही मुझे इतना मज़ा आया कि मेरे जिस्म को एक झटका सा लगा. और सिसकते हुए मैने फिर से विनोद के मोटे सख़्त हिंदू लंड पर अपनी मुस्लिम चूत का पानी छोड़ दिया.

“हाआआआआअँ मेरी गान्ड अभी तक कंवारी है मेरी जान” अपनी गान्ड के सुराख पर फिरती हुई विनोद की उंगली के मज़े लेते हुए में आगे को झुकी और सिसकते हुए विनोद की बात का जवाब दिया.

“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इतनी दिल कश, चौड़ी , गुदाज और मज़े दार गान्ड का मज़ा यासिर ने अभी तक नही चखा ये केसे हो सकता है मेरी जान” मेरी बात के जवाब में मेरे थोड़े थोड़े राउंड शेप के चुतड़ों पर अपना हाथ फेरते हुए हैरत जदा अंदाज़ में विनोद ने मुझ से सवाल किया.

“शायद तुम्हें पता हो या ना हो, कि पठान लोग गान्ड मारने के बहुत ही शोकीन होते हैं, इसी लिया शादी की पहली रात ही से मेरा शौहर यासिर मेरी गान्ड को मारने के लिए मेरी मिन्नतें कर रहा है, मगर मैने आज तक उस की ये बात नही मानी, क्योंकि मुझे गान्ड मरवाने से डर लगता है, लेकिन एक हिसाब से ये तुम्हारे हक में तो बहुत ही अच्छी बात है विनोद” मैने विनोद की बात का जवाब दिया.

“वो केसे जानुउऊुुुुउउ” विनोद ने मेरी बात का मतल्ब ना समझते हुए फिर पूछा.

“वो ऐसे मेरी जान कि सुहाग की रात को हर शौहर अपनी बीवी की कंवारी चूत की सील तोड़ कर अपनी बीवी के साथ अपनी शादी शुदा ज़िंदगी का आगाज़ करता है,मगर चूँकि यासिर तो मेरी चूत की सील पहले ही तोड़ चुका है,इसीलिए में अपनी ये कंवारी गान्ड आज तुम्हें अपनी सुहाग रात के तोहफे की शकल में पेश कर के ,तुम्हारे लंड से अपनी गान्ड की सील खुलवाना चाहती हूँ, और अपनी दूसरी शादी की सुहाग रात को अपनी गान्ड तुम से पहली बार चुदवा कर तुम्हारे साथ अपनी सुहाग रात का मज़ा दुगुना करनी चाहती हूँ मेरे पति परमेश्वर जी” अपनी गान्ड के उपर चलती हुई विनोद के हाथ की उंगली के मज़े से ही में इतना बे हाल हो चुकी थी. कि अब में विनोद के लौडे का मज़ा अपनी गान्ड में लेने पर अपने आप ही आमादा हो गई. और इसी लिए अपनी चूत में फुल स्पीड में दौड़ते हुए विनोद के लंड के मज़े को महसूस कर के बे शरमाई से मैने ये बात अपने मुँह से निकाल दी.

ये हक़ीकत थी कि शादी के पहले दिन से ही मेरा असल शौहर यासिर मेरी गान्ड मारने के चक्कर में मुझे राज़ी करने की कोशिश कर रहा था.

मगर अपनी दो साला शादी शुदा जिंदगी के दौरान मैने यासिर को कभी अपनी गान्ड के नज़दीक आने की इजाज़त नही दी थी.

लेकिन विनोद के अनकट मोटे और बड़े लंड ने मेरी फुद्दि को चोद कर जो लज़्जत मुझे दी थी. और उस अनकट लंड ने मेरी फुददी में वो आग लगी थी.

ये उसी मज़े और जिन्सी हवस का असर था. कि चूत के साथ साथ अब में अपने इंडियन हिंदू यार को अपनी बड़ी और चौड़ी कंवारी पाकिस्तानी गान्ड भी पेश करने पर तूल चुकी थी.

“ओह सच पूछो तो मैने जब दुबई एरपोर्ट पर पहली दफ़ा तुम्हें देखा था, तो उसी दिन से ही में तुम्हारी इस चौड़ी और उठी हुई गान्ड का आशिक़ हो गया था, और उस दिन से आज तक ना जाने कितनी दफ़ा में अपने ख्वाबों में तुम्हारी इस भारी गान्ड के मज़े लिए हैं,और आज तो अपने लंड से तुम्हारी गान्ड की सील खोल कर ना सिर्फ़ में अपने इन ख्वाबों को हक़ीकत का रूप दूँगा, बल्कि में अपने आप को इस दुनाया का सब से खुश किस्मत इंसान महसूस करूँगा मेरी जान”

विनोद ने अपने हाथ के अंगूठे को मेरी सील बंद गान्ड के सुराख के ऐन उपर ज़ोर से दबाते हुए मुझ से ये बात कही. तो में विनोद की बात और उस के मोटे उंगुठे को अपनी गान्ड के सुदख पर महसूस करते हुए में अपनी गान्ड को ज़ोर से विनोद के लंड पर मारने लगी थी.

इस के साथ ही विनोद ने मेरी चूत के रस में भीगा हुआ अपना लंड एक दम खैंच कर बाहर निकाला.और मेरी कमर पर अपने होंठ रख कर पीछे से मेरे शोल्डर और कमर को आहिस्ता आहिस्ता किस करना शुरू कर दिया.

विनोद की ज़ुबान आहिस्ता आहिस्ता मेरी कमर पर चलती हुई मेरी थल थल करती गान्ड की भारी पहाड़ियो तक आन पहुँची.

विनोद के प्यासे होंठ ज्यों ही मेरी कमर से फिसलते हुए मेरी गान्ड की गोलाईयों तक आई.

तो विनोद तो जैसे मेरी गुदाज गान्ड को देख कर पागल और मेरी गान्ड की भीबी भीनी खुसबू को सूंघ कर जैसे मदहोश हो गया.

“ओह क्या पागल कर देने वाली मस्त और खुसबु दार महाक है तुम्हारी इस कंवारी गान्ड की मेरी जान” मेरी गान्ड के आन उपर चूमते और मेरी गान्ड की बू को अपनी नाक के नथुनो से सूंघते हुए विनोद ने अपने हाथों से मेरी बड़ी गान्ड की पहाड़ियो को खोला.

और फिर एक दम अपनी लंबी ज़ुबान को अपने मुँह से निकाल कर मेरी गान्ड के कंवारे सुराख को हल्का से चूम लिया.

“ओह विनॉद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड” अपने नये शौहर की नुकीली गरम ज़ुबान को अपनी गान्ड के सुराख से टच होते ही मैने मज़े के साथ एक सिसकी भरी.

और अपनी भारी और चौड़ी गान्ड को पीछे से एक दम उपर उठा दिया. तो विनोद का मुँह मेरी गान्ड की चौड़ी पहाड़ियों में एक दम फँस कर रह गया.

“उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारी इस कंवारी गान्ड से निकलने वाली इस खुसबू ने मुझे अपने दीवाना बना लिया है सायरा” मेरी गान्ड की पहाड़ियों में डॅन्स अपने मुँह को मेरी गान्ड के सुराख पर फेरते हुए विनोद ने कहा. और अपने गरम होंठ मेरी गान्ड के सुराख पर रख कर मेरी गान्ड की ब्राउन मोरी को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा.

विनोद ने मदहोशी के आलम में अपने गरम होंठों के साथ मेरी गान्ड को बे सखता और बे तहाशा चूमना शुरू कर दिया.

मेरी गान्ड को चूमते हुए विनोद अब मेरी गान्ड से ले कर चूत की दरार तक अपनी गरम और नुकीली ज़ुबान को फेरने में लग गया था. और अपनी चूत से गान्ड तक चलती हुई विनोद की ज़ुबान के कारण में मज़े से बे हाल हो रही थी.

 
मैने चूँकि यासिर को अपनी गान्ड कभी नही मारने दी थी. इसीलिए गान्ड को चाटने का काम करना तो दर किनार यासिर ने तो शायद मेरी गान्ड को चाटने के बारे में कभी सोचा तक नही था.

इसीलिए अपनी गान्ड से इस तरह किसी मर्द का पूर जोश प्यार करने का ये तजुर्बा मेरे लिए बिल्कुल नया था.

विनोद की ज़ुबान में एक जादू था. इसी लिए जब उस की ज़ुबान मेरी चूत से होते हुए मेरी कंवारी गान्ड के छेद के उपर से गुज़रती तो मज़े की शिद्दत से में काँप जाती.

मुझे अपने नये शौहर विनोद की इस हरकत से बहुत मज़ा आ रहा था. और में लज़्ज़त के मारे सिसकारियाँ लेने लगी. उूुुुुउउफफफफफफफफफफफफफ्फ़ आआआआआआआआअहह.

मेरा नया शौहर पहली रात की तरह आज फिर मुझे चुदाई के मज़े की एक नई दुनाया से पर्चित करवाने में मसरूफ़ था.

और उसी मज़े को पा कर में बिस्तर के तकिये में अपने मुँह दबा कर सिसकियाँ लिए जा रही थी.

कुछ देर मेरी गान्ड को चाट चाट कर विनोद ने मेरी गान्ड के सुराख को पूरा गीला कर दिया.

मेरी गान्ड को अपने मोटे लंड के लिए अच्छी तरह से तैयार करने के बाद विनोद ने मेरी गान्ड से अपना मुँह अलग किया. और फिर खुद थोड़ा उपर उठ कर साथ ही मेरी कमर में भी हाथ डाला और मेरी गान्ड को भी पीछे से थोड़ा उपर उठा लिया.

इस तरह बिस्तर पर लेटने से मेरी गुदाज और भारी चुचियाँ आगे से बिस्तर के गद्दे में धँसी.

तो पीछे से मेरी गान्ड पूरी तरह से हवा में उठ कर उपर की तरफ हो गई थी.

मेरी गान्ड को इस तरह अपने सामने पूरी तरह खोलते हुए विनोद ने अपने मोटे लंड को अपने हाथ में थामा. और फिर पीछे से एक दम मेरी गान्ड के कंवारे सुराख के ऐन उपर थूक कर पहले से गीली मेरी गान्ड को अपने थूक से मज़ीद तर कर दिया.

विनोद की इस हरकत से में समझ गई कि अब मेरा नया हिंदू शौहर अपनी मुसलमान बीवी की कंवारी गान्ड के छेद को अपने अनकट लौडे से खोलाने के लिए बिल्कुल तैयार हो चुका है.

अपने जानू विनोद के इरादे को अच्छी तरह से भाँपते हुए मैने भी अपने दोनो हाथों को पीछे ले जा कर अपनी चौड़ी गान्ड की गुदाज पहाड़ियों को अपने हिंदू सनम के जान दार और तगड़े लंड का इस्तक्बाल करने के पूरी तरह से खोल दिया.

मुझे यूँ अपने हाथों से अपनी गान्ड की पहाड़ियों खोलते देख कर विनोद मेरे नज़दीक आया.

और उस ने अपने लंड का मोटा अनकट टोपा अपने थूक से भरी मेरी कंवारी गान्ड के ब्राउन सुराख के ऐन उपर टिका दिया.

विनोद के मोटे लंबे और सख़्त अनकट हिंदू लौडे को अपनी गान्ड के सुराख से पहली बार टच होते हुए महसूस कर के मेरी तो साँस ही मेरे गले मे अटक गई.और में अपनी साँस रोके आने वाले अगले पल का इंटिजार करने लगी थी.

इस से पहले के में कुछ समझ पाती विनोद ने एक दम से अपना मस्त लंड मेरी गान्ड के गीले सुराख पर रख कर एक ज़ोरदार झटका मारा.

तो विनोद के लंड का मोटा टोपा जो कि मेरी चूत के पानी की वजह से पहले ही बहुत चिकना हो चुका था.

वो मेरी गीली गान्ड की कंवारी दीवारों को चीरता हुआ मेरी गान्ड के अंदर घुस गया.

“हाईईईईईईईईईईईईईई मेन्ंनननननननणणन् मर गैिईईईईईईईईईईईईईईईईई” विनोद के सख़्त लौडे के इतने ज़ोरदार धक्कों को महसूस करते हुए मेरे मुँह से बे इकतियार एक चीख निकली.

और में विनोद के लंड के धक्के के ज़ोर से बिस्तर पर गिर गई.

विनोद के मोटे टोपे के मेरी गान्ड में घुसते ही घुड़ाप की तेज आवाज़ मेरी गान्ड से निकली.

तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी गान्ड के अंदर कुछ फॅट गया था.इस के साथ ही विनोद के मोटे अनकट लौडे ने मेरी कंवारी गान्ड की सील तोड़ दी.

विनोद का लंड मेरी गान्ड में घुसने की वजह से मुझे इतना शदीद दर्द हुआ और में इतने ज़ोर से चीखी थी. कि विनोद का घर तो घर मेरी चीख की आवाज़ शायद उस पूरे एरिया में पहुँच गई होगी.

अपनी कंवारी गान्ड में पेदा होने वाला ये दर्द मुझ से सहा नही जा रहा था. और मुझे यूँ महसूस हुआ कि जेसे पीछे से मेरी गान्ड का छेद बुरी तरह चोदा हो गया हो.

जिस की वजह से मेरी आँखों मे आँसू आ गये थे. और दर्द की शिद्दत से कराहते हुए मैने अपनी आँखे बंद कर ली.

इस से पहले कि में संभाल पाती .विनोद ने फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा और उस का लंड चन्द इंच मज़ीद मेरी कंवारी गान्ड में घुसता चला गया

“आआआआआअ ऊऊऊऊऊऊ,ईईईईईईईईईईईईई,मम्माआआअ बस करो विनोद आहह,छोड़ दो मुझे ,उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारे इस मोटे लौडे ने तो मेरी शादी शुदा चूत का कचूमार निकाल दिया है,तो अब तुम्हारा ये गधे जेसा लौडा मेरी इस मासूम कंवारी गान्ड की हालत ही बिगाड़ देगा ,में और नहीं झेल सकती, प्लीज़ में तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ,आआहह निकाल लो”दर्द के मारे चिल्लाते हुए मैने अपने हाथों में अपने सुहाग के बिस्तर की चादर को ज़ोर से पकड़ा.और साथ ही साथ अपने शौहर विनोद की मिन्नतें करने लग गई.

“आख़िर इतना लंबा चौड़ा और मोटा लंड कैसे किसी औरत की गान्ड मे जा सकता है, ये तो मुझे पहले सोचना चाहिए था” मगर अपने जिस्म की जिन्सी भूक के आगे मजबूर हो कर मैने विनोद को अपनी कंवारी गान्ड की सील खोलने की दावत तो दे दी थी.

मगर अब विनोद के लौडे को अपनी गान्ड में घुसते हुए महसूस कर के मुझे पूरा यकीन हो चुका था. कि में विनोद के गधे जेसे मोटे लंड को अपनी छोटी सी मासूम गान्ड में नही ले पाउन्गी.

अपनी गान्ड में इतना मोटा लंड पहली दफ़ा लेने दर्द की वजह से मेर बुरा हाल हो चुका था.और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी गान्ड का छेद फॅट चुका हो.

मगर विनोद कब रुकने वाला था.वो तो लगता था कि शायद गान्ड चोदने वाला एक पुराना खिलाड़ी है.

 
“ओूऊऊ सायरा तुम्हारी गान्ड बहुत ही टाइट है, इस की वजह से तुम्हें शुरू में यक़ीनन थोड़ी तकलीफ़ हो गी, मगर एक बार अपनी गान्ड मरवा लेने के बाद तुम्हें ऐसा मज़ा मिलेगा कि तुम अपना सारा दर्द भूल जाओ गी मेरी जान”ये कहते हुए विनोद ने गान्ड के उपर ज़ोर से थप्पड़ मारते हुए मेरे चुतड़ों को अपने हाथ में दबोच कर मेरी गान्ड को दुबारा उपर किया.

इस के साथ ही विनोद ने मेरी गान्ड में बुरी तरह से फँसाए हुए अपने लंड को गान्ड से थोड़ा सा बाहर निकाला. और फिर उसी तेज़ी से दोबारा झटका मार कर अपने लंड को दुबारा मेरी गान्ड में पेल दिया.

में दुबारा चीखती हुई बिस्तर से उठी तो मेरी कमर विनोद की सख़्त जवान छाती से टकराई.

दर्द की शिद्दत से घबराते हुए मैने बे इख्तियारी में अपने पीछे खड़े विनोद की गान्ड को ज़ोर से अपने हाथों में थाम कर विनोद के जिस्म के साथ अपने जिस्म चिपकाया.

तो इस के साथ ही मेरी गान्ड की भारी थल तल केरती पहाड़ियों में से टहलते हुए विनोद का मोटा लौडा जड़ तक मेरी गान्ड के अंदर फिसलता चला गया.

ज्यों ही विनोद का लंबा, मोटा अनकट लौडा मेरी गान्ड को पूरी ताक़त से खोलते हुए मेरी गान्ड में पूरा घुसा .

तो विनोद ने पीछे से मेरे कान में सेरगोशी की “तुम्हारी पाकिस्तानी गान्ड की सील मेरे इंडियन लौडे ने खोल दी है, मुबारक हो मेरी जान सायरा” ये कहते हुए विनोद ने अपने लंड को फिर थोड़ा पीछे खैंचते हुए दुबारा से धक्का मारा.

तो में पेट के बल दुबारा से अपने बिस्तर पर गिर गई और फिर विनोद मेरी चीखो की परवाह किए बगैर बे दरदी से मेरी गान्ड को चोदने में मसरूफ़ हो गया.

विनोद के ज़ोर दार धक्कों की बदौलत मेरी गान्ड में दर्द की शदीद टीन्से उठने लगी थी.

मगर विनोद मेरी चीखों की परवा किए बगैर एक जंगली सांड की तरह मेरे उपर चढ़ कर मेरी गान्ड चोदने में लग चुका था.

अपने नये शौहर से अपनी गान्ड मरवाने के दौरान मुझे जितनी तकलीफ़ हो रही थी. इतनी तकलीफ़ तो यासिर से पहली बार अपनी कंवारी चूत की सील तुड़वाते हुए भी मुझे नही महसूस हुई थी.

और अपनी गान्ड में होने वाले इस दर्द की वजह से मेरे बदन का रोया रोया काँप रहा था और मेरा पूरा बदन पसीने से भीग गया था.

“मुझे चाहिए कि विनोद के आगे से हट कर अपनी गान्ड से इस सख़्त लंड को निकाल दूं” मेरे रोकने के बावजूद जब विनोद ने मेरी गान्ड मारने का काम जारी रखा तो मेरे दिल में ये ख्याल आया.

“हाईईईईईईईईईईईईईईईई इसीईईईईईईई अनकट लौडे के मज़े को हासिल करने के लिए ही तो मैने अपना नाज़ुक बदन, अपनी चूत और अपनी इज़्ज़त दाँव पर लगाई थी,और अब जब इस अनकट लौडे का मज़ा मुझे नसीब हो रहा है तो मुझे इस मज़े को एंजाय करना चाहिए,क्योंकि इस दुनिया में ऐसी खुश नसीब औरते कम ही होती हों गी, जिन को इतना मोटा सख़्त और जान दार लंड से चुदवाने का मोका मिलता हो गा”पहले ख्याल के ज़हन में आते साथ ही दूसरे ही लम्हे एक नया ख्याल मेरे दिमाग़ में आया.

तो एक दम से मुझे अपनी गान्ड में दर्द कम सा महसूस होने लगा. और दर्द की तकलीफ़ कम होने के साथ ही मुझे पहली दफ़ा अपनी गान्ड को मरवाने में भी मज़ा आने लगा.

इसी लिए मैने अब एक बार फिर बिस्तर पर पेट के बल लेटते हुए अपनी गान्ड को अपने हाथों से खोलते हुए विनोद के लंड पर ज़ोर से मारा. और अपने नये शौहर विनोद से बे शरमाई से पूछने लगी “केसी लगी मेरी कंवारी पाकिस्तानी गान्ड की आराम गाह मेरे हिंदू सनम के अनकट लौडे को मेरी जान”

“उफफफफफफफफफ्फ़ लगता है कि तुम्हारी चूत के साथ साथ तुम्हारी ये गुदाज गान्ड भी सिर्फ़ मेरे लौडे के लिए बनी है,क्योंकि तुम्हारी ये चिकनी मुलायम भारी जवान मुस्लिम गान्ड ही वो जगह है, जहाँ अब मेरे हिंदू लंड को सकून मिल सकता है मेरी रानी”ये कहते हुए विनोद ने मेरी गान्ड से अपना आधा लौडा निकाला और फिर झटके से मेरी गान्ड में अपना लंड डाल दिया.

“उफफफफफफफफफफफ्फ़ तो अब इंतेज़ार किस बात का, मेरी गान्ड का दरवाज़ा तो तुम तोड़ ही चुके हो,अब मेरी गान्ड की वादी में अपना आना जाना जारी रखो और मेरी चूत की तरह मेरी गान्ड को भी अपना गुलाम बना लो मेरे हिंदू राजा”कहते हुए में भी अपनी चौड़ी गान्ड को पीछे धकेलते हुए विनोद के मोटे ताज़े जवान लंड को अपनी गान्ड की गहराई में खुशामदीद कहने लगी थी.

मेरी और विनोद की ज़ोर दार चुदाई की वजह से पूरे कमरे में मेरी और विनोद की लज़्ज़त भरी तेज चीखे गूँज रहीं थी. “आआहह उूुुउउफफफफफ्फ़ ऊउीईईईई माआईयईईईईईईन्न्नणणन् म्माआररर्र्र्ररर गगगैइिईईईईईईई उूुुउउफफफफ्फ़ विनोद आप बहुत अच्छी चुदाई करते हैं आअहह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है”

विनोद ने जब देखा कि में अब अपनी गान्ड की चुदाई को एंजाय करने लगी हूँ. तो उस ने भी और भी तेज झटके मेरी गान्ड में मारना शुरू कर दिए.

विनोद के ज़ोरदार घससों की बदौलत मेरी छाती से लटकते मेरे बड़े बड़े मम्मे बुरी तरह हिल हिल और उछल उछल कर मेरे बिस्तर के गद्दे के साथ रगड़ खा रहे थे.जिस की वजह से मेरे मम्मो के निपल्स मजीद अकड कर खड़े हो गये थे.

और फिर वो वक्त आ ही गया जब विनोद ने अपने लंड का सफेद पानी मेरी गान्ड की वादियों में उडेल दिया.

मेरी गान्ड मेरे नये शौहर विनोद के लौडे के थिक पानी से पूरी की पूरी भर गई.

तो विनोद के लंड का पानी क़तरा क़तरा कर के मेरी गान्ड से बाहर निकल कर मेरी रानो पर बहने लगा.

इतनी ज़ोर दार चुदाई के बाद हम दोनो प्रेमी जोड़ा पसीना पसीना जिस्मो के साथ बिस्तर पर एक दूसरे के उपर पड़े बुरी तरह हाँफ रहे थे.

थोड़ी देर साँस लेने के बाद विनोद ने अपना ढीला पड़ता लंड मेरी गान्ड से बाहर निकाला और बिस्तर पर मेरे बराबर लेट गया.

अब में कमरे में बिस्तर पर अपने नये शौहर के साथ लेटी हुई उस की छाती के बालों में अपनी उंगलियाँ फेर रही थी.

जब कि विनोद अपनी नई बीवी के बड़े बड़े मम्मो और तने हुए निपल्स के साथ खेलने में मशगूल था.

 
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