देवा;भी अपनी रत्ना को बाहों में भर कर उसके रसीलें होंठो को चुमने लगता है।
वो मौसम ए बहार की आमद का दिन तो नहीं था हाँ मगर कई सालो से जमी हुए बर्फ की मोटी सी परत अब पिघलने लगी थी।
अपने प्यार को अपने आग़ोश में भर कर जहाँ रत्ना का दिल ख़ुशी से फुला नहीं समां रहा था वहीँ देवा भी अपनी माँ में आये इस बदलाव से बेहद खुश था।
देवा;रत्ना की कमर को पीछे से पकड़ कर उसे उठा लेता है।
मर्द की मज़बूत बाहों में आकर रत्ना अपना बदन ढीला छोड देती है।
दोनो के होंठ अब भी एक दूसरे से चिपके हुए थे।
बस साँसें तेज़ हुए जा रही थी।
जहां माँ की मोहब्बत एक प्रेमिका का रूप ले चुकी थी।
वही बेटा भी अपनी माँ को पत्नी का दर्जा देने को बेकरार था।
देवा;रत्ना को बिस्तर पर लिटा देता है।
रत्ना; आहह देवा....
धीरे से ना.....
देवा;के हाथ अपने काम में लग चुके थे। वो रत्ना का साडी का पल्लू हटा कर उसके ब्लाउज के बटनों को खोलते हुए उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को मसलने लगता है उसकी इस हरकत से रत्ना के तनबदन में झुरझुरी सी पैदा हो जाती है।
चुत की फाँके आपस में शोर मचाने लगती है
और चीखते हुए रत्ना से कहने लगती है की
आज मिला दे हमे भी हमारे मेहबूब से।
उस ज़ालिम लंड से जिस की तपीश में आकर कई चुतों ने हार मान ली।
जिस की गर्मी की इन्तहाँ इतनी ज़्यादा है की हर चूत उसे अपने अंदर लेना चाहती है।
रत्ना;क्या कर रहे हो देवा।
देवा;अपनी रत्ना का दूध पीना है मुझे माँ...
रत्ना;आहह ऐसे नही ना बेटा।
देवा;मुझे ऐसे ही पीना है माँ।
रत्ना;आहह धीरे से आह्ह्ह्ह।
देवा;सच में इतनी ज़ोर से रत्ना की चुचियों को मसल रहा था की एक पल के लिए रत्ना को ये डर सताने लग गया था की कहीं उसके इस तरह मसलने से कई सालों का जमा हुआ दूध न निकलने लगे।
देवा;सिर्फ मंगलसुत्र पहनाकर अपनी रत्ना को दिन भर रात भर चूत और गाण्ड दोनों मारना चाहता हूँ मै तेरी रत्ना।
तेरी चूत से निकला था मै और उसमें घुस जाना चाहता हूँ। मै तुझे अपनी पत्नी की तरह रखना चाहता हूँ । मै अपनी माँ की चूत को अपने पानी से भर देना चाहता हूँ मैं।
जब तू सुबह चले तो मेरा पानी तेरी चूत से गिरते हुए देखना चाहता हूँ मैं।
तूझे दिन रात नंगी रखना चाहता हूँ मै रत्ना।
जब मेरा मन करे तेरे मुँह में लंड डालकर तुझे चोदना चाहता हूँ मैं।
बोल माँ करने देगी न मुझे बोल ना।
रत्ना;देवा की बात सुनकर जलते हुए शोलों पर जा बैठी थी।
उसका तन उसके मन का साथ छोड चूका था और अग्नि की तरह जलने पर मजबूर हो चुकी रत्ना देवा को अपने नीचे लेकर उसके ऊपर चढ जाती है और अपने दोनों हाथ पीछे डालकर वो अपना ब्लाउज और ब्रा दोनों निकल कर फ़ेंक देती है।
अपने देवा की शर्ट भी वो उतेजना में उतार देती है।
देवा ने इस से पहले कभी अपनी माँ को इस रूप में नहीं देखा था।
वो जान गया था की उस ने औरत के उस रूप को जगा दिया है जिस रूप में वो बहुत कम आती है और जब आती है तो मरद को मरद नहीं रहने देती।
देवा;नीचे नंगा था और उसकी माँ उसके ऊपर आधी नंगी। दोनो एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे।
देवा;दोनों हाथ बढा कर अपने माँ के दोनों बडी बडी चुचियों को जकड लेता है और उसे अपनी तरफ नीचे झुकाता चला जाता है।
अपनी चूत को ठीक देवा के लंड के ऊपर टीका कर रत्ना भी देवा के ऊपर झुकती चली जाती है।
रत्ना;अपने देवा से चिपक जाती है उसके मुँह में अपने निप्पल डाल कर वो सिसकारियां भरने लगती है।
देवा;भी दोनों हाथों में रत्ना की कमर दबोच लेता है।
बस तुम्हारे बापू के बारे में बता दो वो ज़िंदा है की मर गये।
बस मुझे और कुछ नहीं जानना।
उसके बाद तुम जो कहोंगे मै करुँगी जैसा चाहोंगे वैसे रहुंगी।
बस मुझे अपनी बना लो....
बहुत तडपती हूँ मै तुम्हारे बिना। रातें नहीं कटती बेटा।
अपनी माँ को जल्दी से अपने लंड की रानी बना ले
तेरी गुलाम बनकर रहूँगी मैं वादा करती हूँ।
देवा;मेरी रत्ना।
तू फिकर मत कर मै भी तुझे चोदने को तड़प रहा हूँ ना।
बापु के बारे में अब जल्दी पता लगा लुँगा मैं।
उसके बाद मुझसे चुदवायेंगी न जैसे मै चाहता हूँ वैसे।
रत्ना; हाँ हाँ चुदवाऊँगी। रोज चुदवाएंगी रत्ना अपने बेटे से अपने होने वाले पति से अपने सुहाग से आहह ज़ोर से चूस मेरे चूचि को अपने मुँह में ले कर काट इसे आहह हाँ ऐसे ही आह्ह्ह....
देवा;मुँह में ले लंड मेरा।चूत तो देती नहीं साली आज तेरी मुँह को ही चोदुँगा तेरी चूत के बदले।
रत्ना;नीचे सरकते चली जाती है अपने होने वाले पति की आज्ञा का पालन करते हुए वो उसका अंडरवियर उतार देती है और झट से उसके लंड को मुठी में भर कर पहले एक मर्तबा चुमती है और अगली मर्तबा मुँह के गहराइयों में ले कर चुसती चली जाती है।
देवा;का लंड अब रत्ना अपने मुँह से निकालने को तैयार नहीं थी।
मगर देवा की चाहत कुछ और ही था वो आज मिले इस मौके को खोना नहीं चाहता था।
वो अपने हाथ को रत्ना की पेंटी के अंदर डाल देता है।
अपनी चूत पर गरम हाथ लगते ही रत्ना उछल पडती है।
वो और ज़ोर जोर से देवा का लंड चाटने लगती है और देवा और ज़ोर से उसकी चूत को सहलाने लगता है।
देवा;जैसे ही अपनी एक ऊँगली रत्ना की चूत में ड़ालता है। रत्ना अपने मुँह से लंड निकाल कर खड़ी हो जाती है।
देवा;क्या हुआ।
रत्ना;बिना कुछ बोले वहां से जाने लगती है मगर देवा वहीँ उसे दिवार से दबोच लेता है।
देवा;आज अधूरा नहीं जाने दूंगा मैं।
वो अपनी ज़ुबान रत्ना के मुँह में डाल देता है और उसके हाथ में अपना लंड थमा देता है।
इसे ठण्डा कर साली रंडी वरना सब भूल जाऊँगा की तुझसे मैंने कोई वादा किया था।
रत्ना;आह्ह्ह्ह।
करती हूँ ना....
वह नीचे बैठकर फिर से देवा का लंड चाटने लगती है। मगर इस बार देवा के टेस्टीस को भी मरोड़ते हुए चाटती है जिससे देवा के लंड में बला का खिंचाव होने लगता है।देवा अपने लंड को बहुत स्पीड में अपनी माँ रत्ना के मुँह में पेलने लगता है।लंड रत्ना के मुँह में पूरा अंदर बाहर होने लगता है। लंड की नसें इतनी ज़्यादा फूल जाती है की उससे रहा नहीं जाता और वो वही खड़े खड़े रत्ना के मुँह में अपने लंड का गाढा गाढा पानी निकालने लगता है।
लंड से जितना भी पानी निकलता है उस पानी के एक एक क़तरे को रत्ना गिरने नहीं देती और चटखारे मारते हुए उसे पी जाती है।
देवा;खुश था की रत्ना उसकी बातें सुनने लगी है
हर मरद यही चाहता है की उसकी औरत उसकी बात एक आवाज़ में सुने वही करे जो वो चाहता है।
रत्ना;देवा की तरफ देख शरमा जाती है उसके होठो पर अब भी देवा के लंड का वीर्य लगा हुआ था।
रात के खाने के बाद देवा बाहर टहलने का कह कर चला जाता है।
रत्ना;भी देवा के लंड की चुसाई से मस्त हो चुकी थी। घर के थोड़े काम निपटा कर वो अपने बिस्तर पर सोने चली जाती है।
ममता और प्रिया एक रूम में सोने चले जाते है।
रत्ना ने ही ममता प्रिया को साथ सोने के लिए कही थी।
मेहमान को अकेले नहीं सुलाया जाता
और यही तो ममता चाहती थी।
रात काफी घिर चुकी थी।
सर्दियों के दिन होने की वजह से गांव वाले जल्दी घर आ जाते थे और रज़ाई में दुबक कर सो भी जल्दी जाते थे।
ममता ;बिना ब्रा और पेंटी के सिर्फ एक नाइटी पहन के प्रिया के बगल में लेटी हुई थी।
दोनो इधर उधर की बातें कर रही थी।
ठंडी हवायें जब खिडकी से होती हुई रूम में उनके बदन से गुज़रती तो एक सरसराहट सी दोनों के जिस्म में दौड जाती और दोनों के दिल में बस एक गरम चीज़ का ख्याल दौड जाता।
देवा के फौलादी लंड का.......
ममता ;तो कई बार उसकी मार खा चुकी थी।
मगर प्रिया अब भी उस दर्द से अन्जान थी।
अपनी माँ कोमल की चुदाई देख कर उसकी आँखों का पानी तो काफी हद तक मर चूका था।
उसे बस एक सहारे की ज़रूरत थी।
ऐसा सहारा जिसकी बदौलत वो देवा तक पहुँच सके।
अपनी भाभी के घर में अपनी भाभी के भाई से चुदवाना तो वो चाहती थी मगर उसे डर भी था की अगर किसी को पता चल गया तो हमेशा की बदनामी हो जाएगी।
मगर प्रिया नहीं जानती थी की आज रात उसकी ज़िन्दगी में वो होने वाला था
जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं होगा।
ममता ;एक टाँग प्रिया के टाँग के बिलकुल पास रख कर उसकी तरफ करवट करके बातें कर रही थी।
ये वही ममता थी जो चुदने से पहले नूतन की चूत की खुशबु सूँघ लेती थी और पहचान भी लेती थी की नूतन की चूत क्या चाहती है।