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हाय रे ज़ालिम.......complete

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देवा;खेत के कुछ काम निपटाके जागीरदार की हवेली के तरफ चल देता है ।

जब वो हवेली पहुंचता है तो उससे पदमा कपडे धोते हुए दिखाई देती है।

पदमा;देवा को देख खुश हो जाती है।

अरे देवा तू इस वक़्त।

देवा;वो मालकिन को गाड़ी सीखाना है ना ।

पानी में गीला हुआ पदमा का बदन देख देवा के लंड में एक ज़ोर दर झटका आता है और वो पेंट के ऊपर से लंड को सहलाने लगता है।

समने खड़ी पदमा भी अपनी चूत को साडी के ऊपर से सहलाते हुए कहती है।

पदमा;दोनों मालकिन तो मालिक के साथ पास वाले गांव गए है उनके किसी रिश्तेदार से मिलने।

देवा;तो क्या तुम घर पर अकेली हो।

पदमा;कोई जवाब नहीं देती और मुड के झुक जाती है और अपनी गाण्ड हिलाके देवा को जैसे कह रही हो हाँ ।

देवा;पीछे से जाके पदमा को अपने बाहों में भर लेता है।

पदमा;आहह रे ज़ालिम कल से तूने मुझे नशा चढ़ा के रखा है उतार देना ।

देवा;दोनों हाथों से पदमा के मोटे मोटे चुचियाँ मसलते हुए आह्ह्ह्हह्ह।

काकी आज इन आमों का सारा रस पीला दो मुझे आहह्ह्ह्ह।

पदमा;तू अंदर जा मै अभी आती हूँ।

और देवा लंड को सहलाता हुआ हवेली के अंदर चला जाता है।

वो एक कमरे में चला जाता है जो शायद रानी का था।

थोड़ी देर बाद पदमा वहां आती है।

उसे देखते ही देवा अपना कुर्ता उतार के फ़ेंक देता है कल से उसका लंड उसके वश में नहीं था।

पदमा झुक के बिस्तर ठीक करने लगती है।

देवा से बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था।वो पदमा के मोटे मोटे भरे हुए कमर देख के खुश हो जाता है।

देवा;आगे बढ़ता है और पदमा को पीछे से पकड़ के उसके साडी के ऊपर से अपना लंड उसकी कमर के बीच के दरार में घीसने लगता है।

पदमा का पूरा जिस्म काँपने लगता है।
 
अपडेट 4

देवा के लंड को अपने कमर के दरार में महसूस करके पदमा का पूरा जिस्म काँपने लगता है।

पदमा; उई माँ क्या करता है रे बड़ा बेसब्र है तू देवा।

देवा; दोनों हाथों से पदमा के चुचे मसलते हुए

क्या करू काकी आज तक किसी की चुदाई नहीं की है न । आज मौका मिला है आज तो जी खुश कर दूंगा तेरा आहह्ह्ह्हह्ह ।

पदमा;अपने चुचियों पे देवा के मज़बूत हाथों की पकड़ से और जोश में आने लगती है।

आह कर ले जो करना है आज से काकी तेरी हुई मेरे राजा।

देवा;पदमा की साडी खीच लेता है और अपने कपडे भी उतारने लगता है।

पदमा;देवा के ऑखों में देखते हुए अपना लहंगा और ब्लाउज उतारने लगती है।

कुछ ही पलों में दोनों बिलकुल नंगे हो चुके थे। आज देवा के साथ साथ पदमा को भी बहुत जल्दी थी अपने चुदाई करवाने की।

देवा बिस्तर पे लेट जाता है और पदमा गाण्ड हिलाते हुए उसके पास जाके बैठ जाती है।

पदमा के कमर काफी फैले हुए थी मोटे मोटे दोनों चुतड जब हिलते थे तो गांव वालों के दिल के धड़कन और तेज़ हो जाती थी।

दो बड़े बड़े रस मलाई से भरी हुई चूचियां । ऐसा लगता था जैसे इन में दूध ही दूध भरा हुआ है।

देवा पदमा की नरम चूचियों को पूरे ताकत से दबाने लगता है।

खेत में काम करने से देवा के हाथ किसी पत्थर की तरह मज़बूत हो गये थे । जब वो उन हाथों से पदमा की मोटी मोटी चूचियों को मसलने लगता है तो पदमा को ऐसे महसूस होता है जैसे कोई लोहार अपने हथोड़े से उसके चूचियों को मार रहा है।

पदमा;आह धीरे निचोड रे ज़ालिम आहह्ह्ह्हह्ह।

देवा;अपने लंड को पदमा के हाथ में थमा देता है।

इसे अपने रसीले मुंह में लेके ज़रा गीला तो करो काकी।

पदमा ने इससे पहले कभी इतना बड़ा लंड न देखी थी और ना आज तक किसी का लंड अपने मुंह में लेके चुसी थी वो उसे हिलाने लगती है।

देवा;आहह काकी मुंह में लो ना आहह्ह्ह्ह।

पदमा डरते ड़रते देवा के लंड को अपने मुंह के पास लाती है।

ये तो बहुत बड़ा है देवा मेरे मुंह में नहीं जा पायेंगा।
 
देवा; पुरे ताकत से पदमा की चूची मरोड़ देता है।

साली चूत में लेने का शौक है और मुंह में लेने को नाटक कर रही है। चल मुंह खोल सब होंगा तुझ से।

पदमा डरते ड़रते अपना मुंह खोलने लगती है और देवा लंड को पकड़ के उनके मुंह के पास ले आता है।

पदमा की ऑखें साफ़ बता रही थी की वो बहुत बुरी तरह डरी हुई थी।

देवा;आहह शाबाश। आखिर पदमा किसी तरह देवा के लंड को अपने मुंह में लेने में कामयाब हो जाती है।

पर न वो उसे चूस रही थी और न आगे पीछे कर रही थी अपनी मुंह में अटकाये देवा को देखे जा रही थी।

देवा;आहह अपने लंड को पहले मर्तबा किसी औरत के मुंह में ड़ालने में कामयाब हुआ था उसे इन सब में बहुत मजा आ रहा था।

आह साली देख क्या रही है चूस उसे आम कैसे चुसते है वैसे अंदर बाहर कर आहह ।

शाबाश आहह ऐसे ही आहह तेरा मुंह इतना नरम है तो चूत कितनी नरम होंगी काकी आहह्ह्ह्ह।

पदमा; लंड को बड़े प्यार से चूसने लगती है गलप्प गलप्प।

ज़िन्दगी का पहला अनुभव हर किसी को बहुत अच्छा लगता है। उसी तरह पदमा को भी देवा का लंड अपने मुंह में आते जाते बड़ा अच्छा लग रहा था । वो बड़े चाव से देवा के लंड को अपने मुंह के गहराइयों में लेने लगती है।

गलप्प गलप्प गलप्प्प गप्पल्लल्लल्लल्ल।

देवा;आहह काकी बस कर आहह्ह्ह्ह।

उसका लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था वो जब खड़ा होता था तो फिर बिना अंदर घुसे वो शांत नहीं होता था। देवा के लंड के मोटी मोटी नसें पूरे तरह तन चुकी थी।

वो लंड को पदमा के मुंह से निकाल लेता है और पदमा को अपनी छाती से चिपका के उसके मीठे मीठे होंठों को चुसते हुए पदमा के चूत में एक ऊँगली पेल देता है।
 
पदमा एक हलके से चीख़ मारती है उई माँ।

और कितना तड़पाएंगा आहह चोद ना आहह्ह्ह्ह्ह्।

दोनो एक दूसरे के मुंह में मुंह डाले एक दूसरे को चूसने चाटने लगते है।

थूक से दोनों के चेहरे पूरी तरह भीग चुके थे पर जोश अपने पूरे उफान पे था अब अगर कोई उन्हें रोकता तो देवा उसे भी चोद देता।

पदमा अपनी टाँगें खोल देती है।

आहह ले आजा देवा देख कैसे काँप रही है तेरे लंड के डर से तेरी काकी की चूत।

देवा;अपने लंड पे थूक लगा के उसे थोड़ा और चिकना करने लगता है।

पदमा के चूत से निकलता पानी इस बात का सुबूत था की वो बहुत गरम हो चुकी है।

पदमा;अपने दोनों चूचियों को मरोड़ते हुए देवा को बुलाती है और देवा अपने पहले चूत चुदाई के ख़ुशी में पदमा की तरफ बढ़ता है वो पदमा के पैर ऊपर उठाके अपने लंड को उसकी गीली चूत के मुंह पे रखता है।

पहली बार में लंड फिसल के नीचे चला जाता है।

पदमा;लंड को अपने हाथ में पकड़ के उसे पहले चूत के दाने पे घिसती है और फिर चूत के मुंह पे लगा देती है।

आह ले घुसा दे अंदरर देवा।

देवा;एक टाँग पकड़ के अपने लंड को पदमा के चूत में जैसे ही घुसाता है।

पदमा के मुंह से एक दर्दनाक चीख़ निकलती है।

अभी देवा का लंड का सिर्फ सुपाडा ही अंदर गया था की बाहर से कार के हॉर्न की आवाज़ से दोनों चौंक जाते है।

पदमा ; उठ के खडी हो जाती है।

लगता है मालिक मालकिन आ गये देवा तू जल्दी से कपडे पहन और पीछे के दरवाज़े से बाहर निकल जा।
 
देवा;आहह तेरी माँ की मुझे चोदने दे वरना मेरा लंड अकड़ा हुआ रहेगा आहह देख ना।

पदमा;अपना लंहगा पहनते हुए पागल मत बन देवा। मालिक ने हमे इस तरह देख लिया तो मुसीबत आ जायेंगी। तू अभी जा मै तुझसे मिलने खेत में आती हूँ।

देवा;किसी तरह अपने कपडे पहन के पीछे के दरवाज़े से खेत की तरफ निकल जाता है।

पदमा;जिस कमरे में थी वो रानी का था पदमा अपनी साडी लपेट रही थी की तभी वहां रानी आ जाती है।

रानी;पदमा काकी आप और यहाँ और आप कर क्या रही थी।

पदमा;वो बिटिया मै वो मै तो हाँ वो मालकिन कपडे धो रही थी तो मेरे पूरे कपडे गीले हो गये थे तो उन्हें सुखाने यहाँ डाल दी थी बाहर डालती तो बिना कपड़ों के कैसे रहती।

रानी;बड़े बड़े ऑखें निकाल के पदमा को ऊपर से नीचे देखने लगती है पदमा का कहा हुआ झूठ उसके हलक के नीचे नहीं उतर रहा था।

पदमा;बाहर निकल जाती है और बचे हुए कपडे धोने बैठ जाती है।

उधर देवा किसी तरह अपने खेत में पहुँचता है।

लंड का तो बुरा हाल था वो नीचे बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था। देवा अपने खेत में बने झोपडे में चला जाता है और लंड को हाथ में लेके हिलाने लगता है।

पर पत्थर की तरह कड़क हाथ में जैसे जैसे वो लंड को हिलाता है वैसे वैसे उसे दर्द और होने लगता है

वो दिल में पदमा को गालीयां देने लगता है।

साली हरामज़ादी आहह चूत दिखा के खड़ा लंड हिलवा रही है आह।

उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो अपने लंड को किसी पत्थर पे रख के कूट रहा हो।
 
कहानी जारी रहेगी।कहानी पसंद करने और कमेंट के लिए थैंक्स।अपडेट भी जल्दी देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
अपडेट 5

देवा से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था वो जितना लंड को हाथ में पकड़ के आगे पीछे करता उतना ही दर्द और बढ़ जाता।

वो सामने पड़ा हुआ कपडा उठा लेता है और उससे अपने लंड पे लपेट के हलके हलके सहलाने लगता है उसकी ऑखें बंद हो जाती है। उसे दर्द से थोड़ी राहत मिलती है पर पूरी तरह सन्तुष्टि नही।

देवा के खेत में सुबह शालु की लड़की रश्मि ने बकरियाँ चरने को छोड़ी थी वो उन्हें वापस ले जाने के लिए पहुँचती है।

रश्मी को झोंपडे में से देवा की दर्द भरी आवाज़ सुनाई देती है तो वो ड़रते ड़रते जब झोंपडे के दरवाज़े के पास पहुंचती है तो एक दम से दो कदम पीछे को हो जाती है उसी वक़्त देवा की ऑखें उससे मिल जाती है।

रश्मी;क्या हुआ क्यों इतना चिल्ला रहा है।

देवा;आहह रश्मि मेरी मदद कर।

रश्मी;घबराते हुए झोंपडे के अंदर घुस जाती है।

बोल तो सही हुआ क्या है और ये तू इस तरह क्यों बैठा है रश्मि का इशारा देवा के लंड की तरफ था जिसे उसने कपडे से छुपा रखा था।

देवा;पता नहीं रश्मि मेरे गुप्त अंग पे कीड़े ने काट लिया है बहुत दर्द हो रहा है। मै मर जाऊँगा तू कुछ कर ना।

रश्मी;उसके पास बैठ जाती है उसे बहुत डर भी लग रहा था और घबड़ाहट भी हो रही थी। वो देवा को इस हालत में देख भी नहीं पा रही थी और उसे छोड के जा भी नहीं सकती थी।

देवा तू बोल क्या करुं मै जिससे तेरा दर्द कम हो जाए।

देवा;अपने लंड पे लिपटा हुआ वो कपडे का टुकड़ा हटा देता है।

इसकी मालिश कर दे अपने हाथों से।

रश्मी;नहीं नहीं मै ऐसा कुछ नहीं करने वाली मै तेरी माँ को बुला लाऊँ।

देवा;वो जब तक आएंगी मै मर चुका होंऊँगा। तू भी चल जा मरने दे मुझे आहः।

रश्मी;बेचारी गांव की भोली भाली लड़की इतना बड़ा लंड देख के तो उसके होश उडे पड़े थे। ऊपर से देवा उसे उसकी मालिश करने को कह रहा था।
 
रश्मी किसी तरह देवा के पैरों के पास बैठ जाती है और काँपते हाथों से देवा के लंड को पहले पकड़ती है फिर छोड देती है फ़िर पकड़ती है फिर छोड देती है आखिर कर उसे देवा की चीखें नहीं सुनी जा रही थी वो मज़बूती से देवा के लंड को थाम लेती है।

देवा;चुप हो जाता है आहह इसे आगे पीछे कर रश्मि।

रश्मी;दोनों हाथों में देवा का लंड पकड़ के उसके चमड़े आगे पीछे करने लगती है।

पहले वो डर रही थी पर धीरे धीरे उसकी ऑखें देवा के लंड पे जम जाती है।

और वो बड़े प्यार से हलके हलके लंड को मुठियाने लगती है।रश्मि के मुलायम और कमसिन हाथों में देवा के लंड को बहुत सुकून मिल रहा था।

देवा की चीखें बंद हो चुकी थी उसे बड़ा अच्छा लग रहा था । उसके शातिर दिमाग की चाल काम कर गई थी

10 मिनट तक रश्मि बिना कुछ कहे देवा के लंड को सहलाते रहती है और फिर अचानक देवा के लंड से एक तेज़ धार सीधा रश्मि के चेहरे पे गिरने लगता है।

रश्मी की ऑंखें बंद हो जाती है और देवा वही धडाम से गिर जाता है उसके लंड का सारा पानी निकल चुका था जिस्म ढिला हो गया था और उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

पर रश्मि की हालत ख़राब थी उसे अब पता चल चूका था की देवा को क्या हुआ था वो उठ के खडी हो जाती है और देवा को एक लात मारती है।

रश्मी;हरामी तुझे दर्द कोई नहीं हो रहा था । तुझे मस्ती चढी थी जो तूने मेरे हाथों उतार ली। है ना बोल।

देवा;हँसता हुआ अपनी पेंट पहन लेता है और रश्मि को एक कपडा थमा देता है।

हाँ बिलकुल सही पहचाना तूने। ले चेहरा साफ कर ले अपना।

रश्मी;मुझे नहीं करना साफ़ अभी ऐसे ही तेरी माँ के पास जाती हूँ और उन्हें सब बताती हूँ।

देवा; जा बोल दे माँ को। मेरा क्या है तू मार खाएगी मेरे माँ के हाथ से भी और तेरी माँ से भी।

रश्मी;पैर पटकते हुए वहां से बकरियाँ हाँकते हुए अपने घर की तरफ चली जाती है।
 
देवा;हाथ मुंह धो के घर चला जाता है।

देवा की माँ रत्ना देवा का इंतज़ार कर रही थी । वो बहुत बेचैन हो जाती थी जब देवा वक़्त पे घर नहीं पहुँचता था।

रत्ना;देवा को देख घर के भीतर चली जाती है और उसके लिए खाना गरम करने लगती है।

देवा; हाथ मुंह धोके रसोई में आता है।

अरे माँ तुम्हे कैसे पता की मै आ गया हूँ।

रत्ना;माँ हूँ मै तेरे कदमों की आहट सुन लेती हूँ चल बैठ जल्दी से और खाना खा ले।

देवा;अपने माँ के गले में बाँहें डालके उसे अपने सिने से लगा लेता है। सच माँ तुम जैसे माँ किस्मत वालो को मिलती है।

रत्ना;बस बस खाना खा ठण्डा हो रहा है ।

देवा;एक नज़र रत्ना पे ड़ालता है और फिर खाना खाने बैठ जाता है।

ये माँ बेटे के बीच में रोज होता था देवा कभी कभी रत्ना को अपने से चिपका लेता और रत्ना भी उसे कुछ नहीं कहती। बस उसके आगे दोनों में से कोई कभी आगे नहीं बढा था।

खाना ख़तम करके देवा बाहर आँगन में बिस्तर पे लेट जाता है और थकान के कारण उसे फ़ौरन नींद लग जाती है।

सुबह जब देवा की आँख खुलती है तो उसे रत्ना और ममता सजे साँवरी दिखाई देती है।

देवा;क्या बात है माँ कहाँ जा रही हो।

ममता ; ओफ़ हो भैया आप्प को तो कुछ याद नहीं रहता मैंने कल आपको कहा था न की मेरी सहेली कुमारी की शादी है माँ और मै वही जा रहें है। तुम भी तैयार हो जाओ और जल्दी से वहां आ जाना।

ये कहते हुए दोनों कुमारी के घर निकल जाते है।

देवा का मूड आज बहुत अच्छा था। कल रश्मि ने मुठ जो मार दी थी।

वो उठ के बारामदे में बने बाथरूम में नहाने चला जाता है की तभी उसे दरवाज़े पे किसी की आवाज़ सुनाई देती है वो मुड के देखता है तो सामने पप्पू खड़ा था वो घर से तैयार होके आया था शादी में जाने के लिये।
 
देवा;पप्पू को देख खुश हो जाता है।

अरे क्यों रे साले क्या हुआ है तुझे तेरी बहन कह रही थी तेरी तबियत ख़राब है।

पप्पू;मुस्कराता हुआ देवा के क़रीब आता है। हाँ बस थोड़ा बुखार आ गया था।

देवा;चल अच्छा किया जो तू आ गया।

पप्पू;क्या मतलब

देवा: मैं नहाने जा रहा था।

पप्पू; तो

देवा;अब्बे पीठ पे ज़रा साबुन घिस दे ।

पप्पू;मेरे कपडे खराब हो जाएंगे।

देवा;तो उतार देना बाद में पहन लेना। दोनों साथ शादी में चलेंगे।

पप्पू; चुपचाप कुर्ता पैजामा निकाल के रख देता है और एक टॉवल लपेट के देवा के पीछे पीछे बाथरूम में जाने लगता है।

देवा;अब्बे दरवाज़ा तो बंद कर दे पहले।

जब पप्पू दरवाज़ा बंद करके बाथरूम में पहुँचता है तो थोड़ा सहम जाता है देवा बिलकुल नंगा नीचे बैठा हुआ था और अपने जिस्म पे पानी डाल के साबुन लगा रहा था।

पप्पू;उसे देखता हुआ उसके पास बैठ जाता है और पीछे से उसकी पीठ घीसने लगता है।

देवा;अरे तेरे नाज़ुक हाथों में दम नहीं है क्या जोर से घिस ना।

पप्पू;थोडा जोर से अपना हाथ देवा के पीठ पे घीसने लगता है।

देवा;सामने से भी घिस दे ना।

पप्पू; चुपचाप उठ के देवा के सामने जाके बैठ जाता है और उसके गरदन पे ग़ले पे पेट पे और फिर नीचे नहीं बढ़ता तो देवा उसका हाथ पकड़ के अपने जांघ पे रख देता है यहाँ कौन घिसेगा।

पप्पू;तूने तो सिर्फ पीठ पे कहा था ना।

देवा;अब यहाँ कह रहा हूँ चल जल्दी कर।
 
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