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हाय रे ज़ालिम.......complete

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पप्पू; देवा की जांघ पे अपने नाज़ुक हाथ जैसे ही रखता है देवा के लंड में अकडाहट आने लगती है पप्पू के हाथ नाज़ुक लड़की की तरह थम जाता है वो धीरे धीरे देवा के लंड को भी पकड़ लेता है।

देवा;नज़र उठाके उसे देखता है पर उसकी नज़रें नीचे लंड पे टीकी हुई थी वो धीरे धीरे लंड को मज़बूती से पकड़ के साबुन लगे हाथों से सहलाने लगता है।

देवा; आहह ऐसा मत कर बेटा वरना बहुत पछतायेंगा।

पप्पू;कुछ नहीं बोलता शायद उसके गाण्ड के कीड़े जग गए थे और उसे खुजा रहे थे।

देवा;जिस्म पे पानी डालके खड़ा हो जाता है और टॉवल लपेट के पप्पू का हाथ पकड़ के अपने कमरे में ले जाता है।

वो जैसे ही पलंग पे लेटता है पप्पू उसके ऊपर चढ जाता है।

और धीरे धीरे देवा के छाती को चुमने लगता है।

देवा की ऑखें बंद हो जाती है।

पप्पू देवा के जिस्म पे लिपटे टॉवल हटा देता है और उसके लंड को चुमते हुए अपने मुंह में खिंच लेता है।गलपप गलप्प गलप्प।

देवा;आहह साले आराम से आहः।

पप्पू;बिना कोई अलफ़ाज़ मुंह से निकाले बस मुंह में चुसता चला जाता है गलप्प गलप्प।

कुछ देर बाद देवा पप्पु को अपने नीचे लिटा देता है उसका लंड तो पप्पू के पकड़ने से ही खड़ा हो चुका था और ऊपर से आज पप्पू ने खुद ही उसे अपने मुंह में ले के गीला कर चुका था।

देवा;दोनों हाथों से पप्पू के कमर को पकड़ के फैलाता है और अपने लंड को उसके गाण्ड में पेलने लगता है अहह आहः

देखते ही देखते देवा का लंड पप्पू के गाँड में फिट बैठ जाता है।
 
उस वक़्त पप्पू के मुंह से पहले मर्तबा आवाज़ निकलती है आहह ज़ालिम मार देंगा क्या।

देवा;तू खुद मरवाने चला आया। ले अब आहह आहः

देवा;पप्पू को अपने नीचे पूरी तरह लिटा के दनादन अपने लंड को पप्पू की नाजुक गाण्ड में पेलने लगता है।

पप्पू; आहह तू बड़ा हरामी है देवा ज़रा सा रहम नहीं करता आहह माँ वो।

देवा;क्या करूँ जब तक मुझे गांव में कोई चूत नहीं मिल जाती । तब तक तेरे गाण्ड से काम चलाना पड़ेंगा आहः

वो पेलता रहा और पप्पू सहता रहा । इस गाण्ड मराई में जितना मजा देवा को आता था उससे कही ज़्यादा पप्पू को आता था। वो खुद अब देवा के लंड का गुलाम बन चूका था । उसे हर दूसरे दिन देवा के लंड के खवाब आते थे। इसी लिए वो नखरे करता हुआ किसी न किसी तरह बहाने ढूंढता था देवा के नीचे पीसने के लिए।

20 मिनट के बाद देवा अपना लावा पप्पू के गाण्ड में उंडेल देता है।

और कुछ देर बाद दोनों कपडे पहन के शादी में जाने के लिए निकल जाते है।

रास्ते में देवा को कुछ याद आता है तो वो पप्पु से कहता है।

देवा;पप्पु तू ऐसा कर । तू शादी में जा मै ज़रा जागिरदार के हवेली होके आता हूँ।

पप्पू; ठीक है।

और देवा हवेली के तरफ चल देता है ये पुछने के लिए की क्या आज छोटी मालकिन कार सीखने चलेंगी।

जब वो हवेली पहुंचता है तो बाहर बाँए गार्डन में उसे हिम्मत राव और उसकी पत्नी चाय पीते मिलते है वो उन्हें नमस्ते करता है और अपने आने की वजह बताता है।
 
हिम्मत राव;तुम यहाँ बैठो मै रानी बिटिया से पूछ के आता हूँ।

देवा;वही रुक्मणी के पास बैठ जाता है।

हिम्मत राव अंदर अपने बेटी के कमरे में जब पहुँचता है तो रानी कुछ ढूंढ रही थी अपनी बापू को देख सीधी हो जाती है।

रानी;क्या बात है बापु।

हिम्मत राव;देवा बाहर आया है तुझे कार सिखाने के लिये।

रानी;ओहह ये तो बहुत अच्छी बात है।

हिम्मत राव;तुझे पता है न तुझे क्या करना है।

रानी;आप बिलकुल फिकर मत करो बापु देवा को तो मै अपने झुठे प्यार में ऐसे फँसाउंगी की वो मेरी उँगलियों पे नाचेंगा और फिर हम उससे अपना काम करवा लेंगे।

हिम्मत राव;शाबाश बिटिया बस एक बार किसी तरह देवा के प्यार में पड़ जाये समझो की हम करोड़ पति।

रानी ; हीही आप करोड़ पति और मै आपकी करोड़ पत्नी।

हिम्मत राव ;रानी को अपने बाहों में समेट लेता है।

रानी;बापू देवा को मै ऐसे पटाऊँगी की वो हमारे बीच के कांटे को हमेशा हमेशा के लिए निकल के फ़ेंक देंगा। उसके बाद मै उसे अपने जुत्ते के नोक पे रख के उसे भी लात मार दूंगी।

हिम्मत राव;रानी के होंठों को चुम लेता है।

और कुछ देर बाद रानी बाहर देवा से मिलने आ जाती है।
 
अपडेट 6

रानी;अरे देवा तुम कब आये बैठो बैठो।

देवा;नहीं मालिकन मै बस ये पुछने आया था की आज दोपहर में आप कार सीखने चलेंगी या ....

रानी;हाँ बिलकुल अगर तुम चाहो तो हम अभी चलते है।

देवा;अभी नहीं मालिकिन आज मेरे पड़ोस में शादी है इसलिए मुझे वहां अभी जाना है दोपहर तक शादी में से आ जाऊँगा।

रानी;ठीक है ।

देवा;हिम्मत राव और रुक्मणी को नमस्ते कहके वहां से चल देता है।

जब वो शादी में पहुँचता है तो हैरान रह जाता है । हर तरफ खूबसूरत औरतें जवान लड़कियां उसे दिखाई देतीं है ये सभी नए नवेली खूबसूरत चेहरे बारात के साथ आये थे।

पप्पू;देवा के काँधे पे हाथ रखता है।

कहाँ खो गए देवा।

देवा;सपनों की नगरी से वापस दुनिया में लौटते हुए हाँ अरे पप्पू माँ कहाँ है।

पप्पू; मेरी या तेरी।

देवा;अबे मेरी माँ कहाँ है तूने कही देखा क्या।

पप्पू;हम्म शायद दुल्हन के पास होंगी मै रश्मि को बुलाता हूँ।

रश्मि अरे ओ रश्मि।

रश्मी;मुस्कुराते हुए उन दोनों के पास आती है।

रश्मी;क्या बात है क्यों बुलाया मुझे।

पप्पू;अरे वो रत्ना काकी को ज़रा बुला ला कहना देवा बाहर बुला रहा है।

रश्मी;देवा को घूरते हुए ही वहां से चली जाती है।

पप्पू;अब इसे क्या हुआ ।

देवा;पता नहीं शायद इसने कुछ तीखा खा लिया होगा।

कुछ देर बाद वहां रत्ना आ जाती है।
 
रत्ना;क्या बात है बेटा क्यों बुलाया।

देवा;अपनी जेब से कुछ पैसे निकाल के रत्ना के पास दे देता है। ये लो कुमारी को हमारे तरफ से भेंट दे देना।ये इस गांव का ये रिवाज था की सभी मेहमान दुल्हन को तोहफे ना देके पैसे देते थे जो आने वाले वक़्त में उस के काम आता।

रत्ना;चल तू अपने हाथों से दे दे।

देवा;रत्ना के पीछे पीछे घर के अंदर चला जाता है।

कुमारी दुल्हन के लाल कपड़ों में बहुत प्यारी लग रही थी वो एक भोली भाली शरीफ लड़की थी देवा उसके सर पर हाथ रख के उसके हाथ में वो पैसे दे देता है।

पास में बैठी हुई रश्मि उसे अभी भी घूर रही थी पर ये घूरना क़ातिलाना था जैसे किसी चीज़ का बदला लेना चाहती हो।।उसके पास बैठी शालु देवा को देख रत्ना से कहती है।

शालु;रत्ना अब तू भी देवा के लिए जल्दी से कोई लड़की देख ले लड़का जवान हो गया है।

रत्ना से पहले देवा बोलता है।

काकी आपको कैसे पता चला की मै जवान हो गया हूँ।।

ये सुन के वहां बैठे सभी लोग हंसने लगते है और शालु का चेहरा लाल हो जाता है । शादी के मौक़ों पे ऐसे छोटे मोटे हंसी मज़ाक आम बात थी।

शालु;उसे घुर के रह जाती है।

देवा मुस्कुरा देता है और कुछ देर बाद बाहर निकल जाता है।

शादी अपने रस्मो रिवाज के मुताबिक हो जाती है सभी लोग खाना खा चुके थे।

देवा;खाना खाने के बाद पप्पू से कहता है ।

चल पप्पू ज़रा खेतों से होके आते है।

पप्पू;ना बाबा तू जा मुझे बहुत काम है।

देवा;पप्पू के कमर पे ज़ोर से थप्पड मार के अकेला खेत की तरफ चल देता है।

रास्ते में उसे पदमा मिलती है वो उसे आवाज़ देती है पर देवा उसकी आवाज़ को नज़र अंदाज़ करते हुए सीधा अपने खेत की तरफ बढ़ने लगता है।

पदमा;तेज कदमों से उसके तरफ आ जाती है और उसका हाथ पकड़ लेती है उसकी साँसे तेज़ चलने से फूली हुई थी और जिसकी वजह से उसके मोटे मोटे सन्तरे भी ऊपर नीचे होने लगते है।
 
पदमा;कबसे तुझे आवाज़ दे रही हूँ तू सुनता भी नही।

देवा : क्या है कुछ काम था।

पदमा;मुझसे नाराज़ है मै जानती हूँ तेरे नाराज़गी सही है । बस किस्मत गांडु थी अपनी।

देवा;तुम्हारा क्या है काकी तुम तो मेरे खड़े लंड पे लात मार देती हो दर्द मुझे सहना पड़ता है इसलिए तुम मुझसे दूर रहो।

पदमा;उससे चिपकते हुए ऐसे कैसे दूर रहूँ मेरे गबरू जवान आज रात आ जाना घर पे खुश कर दूंगी तुझे।

देवा: मैं नहीं आने वाला वो तुम्हारा पियकड़ पति गालियां देता हुआ कभी भी आ सकता है।

पदमा;अरे बुधु वही तो बोलने के लिए तुझे आवाज़ दे रही थी । तेरे काका आज अपनी बहन के घर गए है और एक हफ्ते के बाद आयेंगे।

देवा की ऑखों में चमक आ जाती है और वो पदमा को कस के अपने से चिपका लेता है इसका मतलब एक हफ्ता तुझे जितना चाहुँ पेल सकता हूँ।

पदमा;आहह कुछ भी कर राजा। जल्दी से शाम ढले घर आ जाना न मुझसे रहा जा रहा है और ने मेरी चूत से।

देवा;देखूं ज़रा वो पदमा की साडी उठाके अपना हाथ उसके लहंगे के अंदर डाल देता है । पदमा अंदर कुछ नहीं पहनी थी उसकी चूत एकदम चिपचिपी थी और उसमें से ऐसे महसूस हो रहा था जैसे पानी रिस रहा हो।

पदमा;उई माँ यहाँ कहाँ कर रहा है छोड अभी रात में जी भर के करना।

देवा;वो गीली उँगलियाँ पदमा के मुंह में डालके उसे चुसने को कहता है।

पदमा;गलप्प गल्प चुसते हुए आहह ये तो खारा है मीठा तो तेरा पानी है रे।रात में आ जाना जल्दी से और ये कहके पदमा वहां से चल देती है।

दोपहर में देवा हवेली पहुँचता है रानी कार के पास उसका इंतज़ार कर रही थी।

रानी;बहुत देर कर दी देवा आने में।

देवा;हाँ वो कुछ काम निकल आया था।

देवा;कार में बैठ जाता है और रानी उसके पास थोड़ा सट के बैठ जाती है।
 
देवा;रानी को कार के सभी पार्ट्स के मालूमात देता है कब गियर बदलना है कब ऑक्सीलेटर लेना है।

रानी;उसकी बातों पे कम और देवा के चेहरे पे ज़्यादा ध्यान दे रही थी। ये बात देवा ने भी महसुस किया पर बोला कुछ नही।

फ़िर देवा कार स्टार्ट करके उसे गांव के बाहर बने हुए सड़क की तरफ दौड़ा देता है ये सड़क शहर की तरफ जाती थी रास्ता एकदम सुनसान था ।

रानी;देवा को कार रोकने के लिए कहती है।

जब देवा कार रोकता है तो रानी कार में अपने सीट पे से देवा के गोद में आके बैठ जाती है।

देवा सकपका जाता है।

अरे मालकिन ये आप क्या कर रही है आप वहां बैठिए ।

रानी;ओफ़ हो देवा इतने बड़े हो गये हो और लड़कियॉं के तरह घबरा रहे हो । मै लड़की होके जब यहाँ बैठ सकती हूँ तो तुम्हें क्या ऐतराज़ है और वैसे भी मुझे जल्द से जल्द कार चलाना सीखना है चलो कार स्टार्ट करो मै चलाती हूँ। तुम बस ब्रेक संभालो ठीक है।

देवा;ठीक है मालकीन।देवा गांव की किसी भी लड़की को चोद लेता तो कुछ नहीं होता पर हिम्मत राव के लड़की पे गलत नज़र डालना मतलब गांव निकाला। क्योंकी हिम्मत राव न सिर्फ गांव का सरपंच था बल्कि उसकी पहुँच दूसरे गांव के सरपंच से भी थी ।

देवा; चाह के भी रानी को हाथ नहीं लगाना चाहता था।

पर रानी बार बार एक्सेलेटर तेज कर देती जिससे देवा को ब्रेक्स लगाने पडते और रानी देवा के छाती से टकरा जाती वो अपने कमर को देवा के लंड पे भी घिस रही थी।

आखीर देवा एक मरद था कब तक खुद को संभाल पाता धीरे धीरे उसके लंड में अकडन होने लगती है और वो रानी के कमर के बीच में धँस जाता है।

रानी;आहह चुभता है रे।

देवा;क्या हुआ मालकीन।

रानी; कुछ नहीं और वो जान बूझ के अपनी कमर को और ज़ोर से देवा के लंड पे रगडने लगती है जिससे देवा का लंड दबता चला जाता है और उसमें दर्द होने लगता है।
 
देवा;दोनों हाथों से रानी की कमर पकड़ के उसे ऊपर उठाता है

रानी;आहह क्या कर रहे हो देवा ।

देवा;कुछ नहीं मालकिन आप तो अच्छी तरह कार चला रही है लगता है दो चार दिन में ही आप पूरी तरह सीख जाओंगी।

रानी;जब तक मै एकदम अच्छी तरह नहीं सिख लेती तब तक तुम रोज़ मुझे सिखाने आया करोगे समझे वरना मै बापु को बोल दूंगी ।

देवा;नहीं मालकिन जब तक आप चाहे मै आता रहूँगा।

रानी;फिर ठीक है ।

वो उसी तरह अपनी कमर लंड पे घिसते रही और कार सीखती रही तकरीबन २ घण्टे बाद देवा रानी से कहता है की मालकिन आज के लिए बहुत है घर चलते है।

रानी;मुस्कुराते हुए साइड में जाके बैठ जाती है और देवा कार चलाता हुआ हवेली पहुँच जाता है जब वो कार खड़ा करके अपने घर की तरफ बढ़ता है तो रानी उसे पीछे से आवाज़ देती है।

रानी;देवा कल जल्दी आ जाना।

देवा;जी मालकिन।

रानी;नाचते हुए अपने रूम में आ जाती है तभी उसे पीछे से हिम्मत राव अपनी बाँहों में कस लेता है।

हिम्मत राव;मेरी बिटिया रानी काम बना क्या। वो दोनों हाथों से रानी के नरम नरम चुचक मसलने लगता है।

रानी;आहह बापु आराम से न आहह सबर रखो सब ठीक होगा।

हिम्मत राव; सबर ही तो नहीं होता न गुड़िया उसके हाथ अब रानी के कपड़ों के अंदर तक चले गए थे और रानी के नंगे चुचकों को पूरी तरह मसल रहे थे।

की तभी किसी के कदमों की आवाज़ से दोनों बाप बेटी एक दूसरे से अलग हो जाते है।।
 
शाम के 6 बज रहे थे। देवा अपने घर जाने के बजाये पदमा के घर आ जाता है।

पदमा;उसे देख लेती है और उसके चेहरे पे एक क़ातिलाना मुसकान आ जाती है।

देवा;घर में आने के बाद दरवाज़ा बंद कर देता है।

पदमा;दूध का गिलास लेके उसके पास आती है

ये लो देवा दूध पि लो।

देवा;तुम्हें कैसे पता की मैं आया हूँ।

पदमा;दोपहर से तुम्हारी राह देख रही हूँ आँखें दरवाज़े की तरफ ही जमी हुई थी मेरी।

देवा;खड़ा हो जाता है और अपना कुर्ता पैजामा निकाल के खुट्टे में टाँग देता है वो सिर्फ चड्डी में खड़ा था।

पदमा;उसे देखते हुए अपने साडी नीचे गिरा देती है और ब्लाउज निकाल देती है।

ब्रा में पदमा को देख देवा से रहा नहीं जाता और वो आगे बढ़ के पदमा को अपनी बाहों में जकड लेता है।

देवा;आहह काकी आज मिली हो तुम कसम से आज मेरे लंड को खा जाओ अपने सुराखों में कही गुमा दो। मेरी काकी आहह वो दोनों कड़क हाथों से पदमा के चुचकों को निचोड़ के रख देता है।

पदमा;अपना लंहगा नीचे गिरा देती है । हाँ मेरे राजा आज तेरी पदमा तुझे अपने चूत में कही छुपा लेंगी। आ जा।

देवा; पीछे से ब्रा के हुक खोल के पदमा के नरम नरम ब्रैस्ट मुंह में ले के चुस्ने लगता है गलप्प गलप्प।

नीचे देवा के हाथ पदमा के चूत के छेद के अंदर घुसना चाहते थे। वो दो उँगलियाँ एक साथ मिला के उसे पदमा के चिपचिपे चूत में घुसा देता है जिससे पदमा उछलने लगती है।

पदमा;आहह ज़ालिम आहह मत तड़पा एक बार चोद दे मुझे । फिर रात भर तरसाता रह उसके बाद आहः

देवा;पहले ज़रा मुंह तो मीठा कर ले काकी।

और देवा पदमा को अपने लंड के पास बैठा देता है।

पदमा तो बस लंड के प्यासी थी चाहे वो मुंह में जाये चूत में या गाण्ड में। वो देवा के लंड पे पहले थूकती है और फिर उसे बिना देरी किये अपने मुंह में ले लेती है गलप्प गल्प।
 
पदमा के गीले थूक से भरा हुआ देवा का लंड बहुत जल्द अपने असली औक़ात में आ जाता है और उसके मोटी मोटी नसें तन जाती है।

पदमा; लंड मुंह से निकलने को तैयार नहीं थी और देवा लंड को चूत में ड़ालने के लिए तड़प रहा था वो पदमा को सीधा करके पलंग पे लिटा देता है और उसके ऊपर चढ जाता है।

वो आगे बढ़ते बढ़ते पदमा के पेट पे अपने कमर टीका देती है और अपने लंड को पदमा के मोटे मोटे चूचियों के बीच में लगा देता है।

देवा;पदमा ज़रा ज़ोर से पकड़ तेरे चुचे को।

पदमा;वैसे ही करती है और देवा अपने लंड को दोनों चूचियों के बीच घुसा देता है।

पदमा; जितना चुचे कसती देवा उतनी ज़ोर से लंड को दोनों के बीच रगड़ता।

पदमा;आहह देवा रे ज़ालिम आहह चोद न अपनी पदमा को रंडी के तरह बेरहमी से। आहह फाड़ दे रे मेरे चूत आहह मै कल चल भी न पाऊँ ऐसे रगड के चोद दे मुझे आहः।

देवा;पदमा के पैर खोल देता है और अपने लंड को उसके चूत के मुंह पे लगा के आहह एक ज़ोरदार झटका अंदर की तरफ मारता है । ये इतना ज़ोरदार धक्का था की पदमा रो पड़ती है जैसे पहली बार चूदाई हो। देवा का लंड था ही इतना मोटा जो चूत को चीर के रख देने वाला।

पदमा;आहह हरामी ने फाड़ दिया मेरी चूत तो आहः

देवा;तूने तो कहा की फाड़ दे देवा आहह देख कैसे फ़ाड़ता हूँ आहह और वो पदमा की बात को जैसे सच करने पे तुला हुआ था । सटा सट बिना रुके पदमा की चूत में लंड को आगे पीछे करने लगता है।

पदमा;आहह देवा तू क्या सच में मेरी चूत फाडना चाहता है जो इतनी बुरी तरह चोद रहा है आहह माँ।

देवा;पदमा बहुत तड़पाया है तूने मुझे कुछ तो वसूल करना पड़ेंगा न आहह और वैसे भी अभी तेरा एक सुराख़ बाकी है आहः।

पदमा;उई माँ मै वहां नहीं लुंगी तेरा।

देवा;कैसे नहीं लेगी छिनाल आहह घर तब तक नहीं जाऊँगा जब तक तेरे तीनो सुराख़ भर न दूँ अपने लंड के पानी से।

अभी तो शाम हुई है अभी रात होना बाकी है।
 
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