देवा; चुपचाप बिस्तर के एक किनारे जाके बैठ जाता है उसके नज़रें नीचे थी वो हिम्मत रव से बहुत डरता था वो क्या गांव का हर इंसान हिम्मत रव से डरता था।
रानी;इधर देखो न मेरे तरफ।
देवा; नज़रें उठाके रानी की तरफ देखता है और फिर नज़रें झुका देता है।
रानी;उसके और पास आ जाती है और देवा का हाथ अपने हाथ में ले लेती है।
देवा;हाथ छुड़ाने की कोशिश करता है पर रानी मज़बूती से उसे पकडे रहती है।
मालकिन हाथ छोडो कोई आ जाएगा।
रानी;तुम तो बिलकुल लड़कियों जैसे हो एकदम डरपोक। अरे कुछ नहीं होंगा कोई आ भी गया तो क्या मै सब सँभाल लुंगी।
देवा;आपने मुझे क्यों बुलाया था।
रानी;ऐसे ही तुम्हारी बहुत याद आ रही थी मुझे । जानते हो जब से तुम्हे देखी हूँ तब से मेरे ऑंखों में सिर्फ तुम बस गए हो। सोते हुए तुम ही दिखते हो खाना खाती हूँ तो तुम्हारा चेहरा सामने आ जाता है। न दिन को चैन है ना रातो को करार है। नस नस में एक दर्द का शुमार है पता नहीं मुझे क्या हो गया है देव।
देवा;के हाथों में पसीना आने लगता है हाथ थर थर काँपने लगते है वो उठ के खड़ा हो जाता है।
रानी;उसके इतने पास आके खडी हो जाती है की रानी की साँसें देवा को अपने छाती पे महसूस होने लगती है।
देवा;बुरी तरह डर गया था रानी की बातों से। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो रानी को क्या कहे।
रानी;बताओ न देवा मुझे क्या हुआ है।
देवा;मुझे मुझे नहीं पता मालकिन आप ऐसी बातें मत करो।
देवा;का चेहरा पसीने से पूरी तरह भीग जाता है । हाथ पैर ठन्डे पड़ जाते है पदमा को जानवर की तरह चोदने वाला ये हटा कट्टा मरद आज एक लड़की की बातों से भिगी बिल्ली बना खड़ा था।
हकीकत ये थी की देवा जानता था की इस सब का अन्जाम क्या होंगा अगर वो रानी के साथ कुछ करेगा और पकड़ा जायेगा तो उसका इस गांव में जीना मुश्किल हो जाएंगा और सबसे बडी बात हिम्मत राव उसे अपनी बन्दूक से भून के रख दूँगा।
देवा;मालकिन आप कैसे बात कर रही है आप मालकिन है और मै आपका नौकर हूँ।।आपको मुझसे पता नहीं क्या हो गया है पर मै आपको सिर्फ अपनी मालकिन समझता हूँ और कुछ नही।
रानी; अच्छा एक बात बताओ तुम्हें मै कैसी लगती हूँ।सच सच बताना।
देवा;आप बहुत खूबसूरत है।
रानी: हम्म तुम्हें मेरे होंठ कैसे लगते है।
देवा;कुछ नहीं कहता।
रानी;उसके होठो के पास अपने होंठ लाती है।
अब बताओ कैसे लगते है तुम्हें मेरे होंठ।
देवा; अच्छे हैं मालकिन।
रानी;चूमो इन्हें।
देवा;की आँखें फटी की फटी रह जाती है।मूँह से बस एक शब्द निकलता है।
क्या?
रानी; चूमते हो के नही।
देवा;नहीं मालकिन आप इस वक़्त होश में नहीं है मुझे जाने दो। बडी मालकिन मेरा इंतज़ार कर रही होंगी।
रानी ; चूमते हो या बुलाओ बापु को।
देवा;ये सुनते ही अपने होंठ रानी के होंठों से लगा देता है बाकी का काम रानी करने लगती है वो अपने जुबान को देवा के मुंह में घुसा के उसके जुबान को चुसने लगती है।
देवा;की ऑखें बंद हो जाती है साँस धीमे हो जाते है और हाथ पैर कोई हरकत नहीं करता।
कुछ देर बाद जब रानी अपने होंठ देवा के होठो से अलग कर देती है।
उसके होंठ गीले हो चुके थे।
देवा;मुझे जाने दो छोटी मालकिन।
रानी;आगे बढ़ के अपनी ब्रा के ऊपर पहने हुए वो पतली सी टी शर्ट उतारने लगती है।
देवा;उसे ऐसा करता देख बुरी तरह डर जाता है।
रानी; टी शर्ट निकाल के फ़ेंक देती है और देवा के सीने से चिपक जाती है।
मै तुझसे बहुत प्यार करती हूँ देवा। मुझे अपनी बना लो मुझे अपना बना लो।
देवा;रानी के बाजू पकड़ के उसे पीछे धकेलता है ।
आप पागल हो गई है मालकिन। मै आपसे प्यार नहीं करता मुझे ये सब ठीक नहीं लगता।
रानी;उसका हाथ पकड़ के अपने गोरे गोरे ब्रैस्ट पे रख देती है। देख देवा मेरे दिल की धड़कनो में सिर्फ तू बस गया है । अब अगर तू मुझे नहीं मिला तो मै ज़हर खा लूँगी मर जाऊँगी मैं।
देवा;नहीं नहीं मालकिन आप ऐसा मत कहो।
पर सच बात तो यही है की मै आपसे प्यार नहीं करता और जब दो लोगों में से एक इंसान प्यार नहीं करता तो उसे एक तरफा प्यार कहते है ।
अगर आप ज़ोर ज़बर्दस्ती का प्यार चाहती हैं तो ये ठीक बात नहीं है मालकिन।
रानी;ठीक है आज मै कसम खाती हूँ तेरे दिल में भी मेरे लिए प्यार जगा के रहूंग़ी।उसके बाद तू मुझे अपनाये या ठुकरा दे तेरी मरजी।
देवा;के जाते ही रानी मुस्कुराते हुए अपने कमरे की तरफ जाने लगती है की तभी उसकी नज़र आँगन में बैठी पदमा पर पडती है।
वो पदमा को आवाज़ देती है।
पदमा;हाँ बिटिया क्या बात है।
रानी;काकी मेरी पीठ और कमर में बहुत दर्द है ज़रा तेल से मालिश कर दो ना।
पदमा;मै तेल गरम करके तुम्हारे कमरे में लाती हूँ ।
रानी;अपने रूम में चली जाती है। रात की चुदाई से उसका पूरा बदन अकड गया था। जब औरत कस के लेती है तो उसे न अकडन होती है और न दर्द होता है ।
पर हिम्मत राव में अब वो बात नहीं रही थी की औरत की चूत सुजा दे वो तो बस रण्डियों को चोद चोद के ढिला हो चुका था।
कुछ देर बाद पदमा तेल ले के रानी के कमरे में आ जाती है।
बिटिया तुम बिस्तर पर पेट के बाल लेट जाओ मै मालिश कर देती हूं।
रानी;नहीं काकी बिस्तर ख़राब हो जाएगा। मुझे पूरे बदन की मालिश करवानी है ऐसा करते है यहाँ टॉवल बिछा देते है ।
और रानी;एक टॉवल नीचे बिछा देती है और अपने सारे कपडे निकाल देती है।
पदमा;पहली मर्तबा रानी को इस तरह देख रही थी। उसकी आँखें रानी के जिस्म से हट नहीं रही थी । रानी थी ही इतनी खूबसूरत । गोल गोल भरे भरे ब्रैस्ट साफ़ चिकनी चूत।
रानी;काकी तुम तो ऐसे मुझे देख रही हो जैसे ये सारा सामान तुम्हारे पास नहीं है।हेहेहेहेहेहेह
पदमा;शरमा जाती है।
नही बिटिया कैसे बात कर रही हो चलो तुम लेट जा ना।
रानी;लेट जाती है और पदमा उसके सारे शरीर पे तेल डाल देती है पहले गर्दन के और उसके बाद नीचे ब्रैस्ट के पास जैसे ही पदमा के हाथ पहुँचते है रानी की ब्रैस्ट और निप्पल्स दोनों फुलने लगते है।
रानी;काकी तुम्हारे हाथ में तो जादू है ज़रा अच्छे से मालिश करो न दबा के । आह।
पदमा;समझ जाती है की रानी क्या चाहती है
वो दिल ही दिल में मुस्कुराते हुए धीरे धीरे पेट के फिर जांघों की तरफ बढ़ती है।
रानी;अपनी आँखें बंद कर लेती है ।
क्योंकी पदमा के हाथ अब रानी के जांघ के अंदरुनी भाग तक पहुँच चुके थे।
जैसे जैसे पदमा के हाथ आगे बढ़ते है वैसे वैसे रानी अपने पैर खोलती चली जाती है।
रानी;आहह काकी क्या कर रही हो आहह ।
पदमा; बिटिया यहाँ दर्द हो रहा है न।
रानी; काकी नहीं ना आह्ह्ह्ह्ह्।
पदमा;के हाथ रानी की चूत और गाण्ड को बुरी तरह मसल रहे थे।
असल बात तो ये थी की जहाँ रानी का जिस्म कम चुदाई से अकड़ गया था वहीँ पदमा की चूत सुज गई थी देवा के ज़ालिम लंड से।
और जब चूत वाली किसी चूत की मालिश करती है तो बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है।
पदमा;एक बात कहूं बिटिया।
रानी;आहह हाँ बोलो न काकी।
पदमा;तेरी चूत बहुत सूजी हुई लग रही है।
रानी;पता नहीं काकी वो तो हमेशा ऐसे ही रहती है आह।
पदमा;को अचानक पता नहीं क्या हो जाता है और वो अपनी दो उँगलियाँ रानी की चूत में घुसा देती है।
चूत की आग से परेशान रानी जब अपनी चूत में पदमा की उँगलियाँ महसूस करती है तो उसके ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की साँस नीचे रह जाती है वो पदमा को रोकना चाहती थी पर रोक नहीं पाती और पदमा धीरे धीरे अपनी उँगलियाँ अंदर बाहर करती रहती है।
पदमा;रानी को सीधी लेटने को कहती है और रानी जैसे ही करवट बदलती है ।
पदमा;उसके दोनों पैर हवा में उठा देती है।
पैरों का उठना था की पदमा की नाज़ुक नाज़ुक उँगलियाँ फिर से रानी की चूत के अंदर तक चली जाती है।
रानी;चिल्लाने लगती है।आहह घूसा दे काकी आहह निकलने दे सारा पानी आहह क्या कर दिया है तूने काकी आह।
पदमा;की ऑंखें भी बंद हो जाती है।उसके ऑंखों के सामने रात का मंज़र आ जाता है। जब देवा उसे उल्टा करके सटा सट उसकी गाण्ड मार रहा था।
दोनो अपने अपने खयालो में खो जाती है।
रानी;की चूत से पानी की एक तेज़ धार बाहर निकल पडती है।
क़ितने दिनों के बाद आज रानी की चूत से असली जवाला मुखी फटा था ।
कितनी ही देर वो ऐसे ही पड़ी रहती है।
पदमा;वहां से जा चुकी थी क्युंकी उसकी चूत भी जवाब दे चुकी थी।
वो कपडे बदलने के लिए अपने घर चली जाती है।
इधर देवा कार डॉ साहब के क्लिनिक के पास रोक देता है ।
पुरे रास्ते दोनों चुपचाप न रुक्मणी ने कुछ कहा और न देवा ने कोई बात किया।
वो दोनों क्लिनिक के अंदर पहुँचते है।क्लिनिक में एक चेयर के ऊपर एक लड़का बैठा हुआ था वो रुक्मणी को पहचानता था वो फ़ौरन बोल पड़ता है।
की डॉक्टरनी अपनी पति के साथ दूसरे गांव गई हुई हैं।वो 2 दिन बाद आयेंगे।
ये डॉ हिम्मत राव की पालतू कुतिया थी जिसे हर महिने हिम्मत राव हड्डी डाल दिया करता था जिसका काम सिर्फ इतना था की रुक्मणी को ये यक़ीन दिलाना की वो अभी माँ नहीं बन सकती और अगर वो अभी माँ बनती है तो उसके और बच्चे की जान को खतरा रहेगा।