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हाय रे ज़ालिम.......complete

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रत्ना;देवा बेटा जा तू हाथ मुंह धोले ये दोनों पगली है दिन भर ही ही हू हू हां हां करती रहती है । अब तू आ गया है ना । थोडा लगाम लगी रहेंगी इनके मुंह पर।

ममता ; माँ हम क्या घोड़ियाँ है जो लगाम लगी रहेगी।

देवा;ममता को सर पे चांटा मारता हुआ घर से बाहर निकल जाता है।

रत्ना;अरे कहाँ जा रहा है।

देवा;पप्पू के घर।

देवा;जब पप्पू के घर पहुँचता है तो उसे घर के ऑंगन में शालु और रश्मि बैठी मिलती है।जहां शालु के चेहरे पे देवा को देख चमक आ जाती है वही रश्मि बनावटी ग़ुस्सा दिखाने लगती है।

देवा;वही उन दोनों के पास बैठ के बातें करने लगता है

पर बात करते करते देवा की नज़र बार बार शालु के बड़े बड़े ख़रबूज़ों पे चली जाती है जिसे शालु के साथ साथ रश्मि भी भाँप लेती है।।

शालु;तो मुस्कुरा देती है मगर रश्मि दाँत पीसने लगती है।

देवा;काकी काका की तबियत अब कैसी है।

शालु;खुद जा के देख ले अंदर ही है नीलम भी वही होगी।

देवा;शालू को देख मुस्कुरा देता है और शालु से नज़रें बचा के रश्मि को आँख मारता हुआ घर के अंदर चला जाता है।

नीलम;अपने कमरे में उदास बैठे हुए थी देवा को देखते ही उसके चेहरे की रंगत ही बदल जाती है।

देवा;कैसी हो नीलम।

नीलम;ठीक हूँ आप कैसे हो।

देवा;नीलम को निचे से ऊपर तक देखने लगता है ।

नीलम;शरमा जाती है और अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा देती है।

देवा;उसे अपनी तरफ घुमा देता है।

इस चाँद को देखने के लिए आया हूँ और चाँद ऐसे बादल में चुप जायेगा तो कैसे चलेंगा।

नीलम;बस बस रहने दो। सब जानती हूँ मै एक बार भी मेरी याद नहीं आई होगी आपको।

देवा;जज़्बात से भरे लहजे में नीलम के चेहरे को अपने दोनों हाथों में थाम लेता है इधर देख मेरी ऑखों में। क्या तुझे लगता है मुझे तेरी याद नहीं आई होंगी।

नीलम; कांप के रह जाती है होंठ लरज के रह जाते है और दिल बस एक बात कहता है मुझे यक़ीन है तुम्हें मेरी याद ज़रूर आई होगी।

देवा;नीलम को अपने चौड़े मज़बूत छाती में समेट लेता है।

नीलम;आहह ।

देवा के दिल की धड़कन नीलम को अपने दिल में साफ़ सुनाई देने लगती है। दोनों की मोहब्बत को समझना बहुत मुश्किल था बिना कहे वो एक दूसरे के दिल की हालत समझ जाते थे।

उन्हें किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई देती है देवा नीलम से अलग हो जाता है।
 
कमरे में रश्मि को आता देख नीलम अपने सर पे दुपट्टा डाल के शालु की तरफ चल देती है।

रश्मी;देवा के पास खडी हो जाती है।

बापु इस कमरे में नहीं उस कमरे में है।

देवा; मुझे पता है।

रश्मी; पता है तो तुम यहाँ क्या कर रहे हो।

और एक बात बताओ तुम माँ को और मुझे घूर क्यों रहे थे।

देवा; तुझे याद है ना मैंने क्या कसम खाई है तेरी शादी से पहले।।

रश्मी;बस बस बड़े आये कसम खाने वाले। सुरत देखी है अपनी ये मुंह और मसुर की दाल।हूह्ह्ह

देवा; रश्मि को पकड़ के ..साली बडी बडी बातें करने लगी है अभी सिर्फ तेरी बिसार हुई है ख़रीदी नही।

रश्मी;आहह छोड मुझे वरना मै चिल्लाऊँगी।

देवा;रश्मि को घुमा के पीछे से पकड़ लेता है और पकड़ के उसके दोनों ब्रैस्ट को बुरी तरह मसलने लगता है।

देवा;चिल्ला न चिल्लाती क्यों नहीं ।

रश्मी;छोड नही तो मै सच में माँ को बुलाऊँगी देवा फिर मत कहना।

देवा; मुझे पता है तू नहीं चिल्लाएँगी ।

रश्मी; आहह आहह मै शोर मचा दूंगी देवा आखिरी बार बोल देती हूँ।

देवा;मुझे पता है तू नहीं चिल्लायेगी। तुझे पता है क्यूँ

क्यूंकि साली तू बहुत चालु चीज़ है और ये बात सिर्फ मुझे पता है अगर तुझे चिल्लाना होता न तो कबका चिल्ला चुकी होती पर तू भी चाहती है। मै तुझे ऐसे ही मसलूँ तेरा रस निकालूँ। है ना बोल यही बात है न।

रश्मी;के निप्पल्स कड़क हो जाते है और साँस रुक रुक के चलने लगती है गला सुख जाने से उसकी आवाज़ भी ठीक तरह से नहीं बल्कि लडखडा के बाहर निकलने लगती है।

आह कमीना है तू। तुझे सब पता है ना देख अब मै क्या करती हूँ।

और रश्मि जैसे ही चिल्लाने के लिए मुंह खोलती है देवा अपने होंठ उसके मुंह पे लगा देता है और उसे बुरी तरह चुसने लगता है।
 
पहले पहल रश्मि थोड़े हाथ पैर देवा को मारती है मगर धीरे धीरे उसे भी देवा का नशा चढ़ने लगता है और उसके हाथ देवा को कस के जकड लेते है और रश्मि भी अपना मुंह खोल के देवा को रस पिलाती जाती है।

देवा;अपने दोनों हाथों से रश्मि के नाज़ुक सी कमर पकड़ लेता है और धीरे धीरे उसे दबाते हुए रश्मि को चुसता चला जाता है।।

जब रश्मि का दिल भर जाता है तो वो देवा को धक्का देके अपने से अलग कर देती है।

रश्मी;कमीने कही के दूबारा ऐसे हरकत मेरे साथ करने की सोचना भी मत।

देवा;रश्मि को देखता रह जाता है और रश्मि पैर पटकते हुए वहां से चली जाती है।

देवा;कुछ देर वहाँ खड़ा रहने के बाद अपने सर को झटक के काका से मिलने उनके कमरे की तरफ बढ़ जाता है ।

इधर ममता और नूतन एक कमरे में दरवाज़ा बंद करके खुसुर पुसुर बातें कर रही थी।

ममता; सच बता न तुझे कैसा लड़का चाहिए।

नुतन ; मुझे नहीं पता।

ममता; नूतन के निप्पल को कमीज के ऊपर से मरोड़ देती है।

बोलती है या नही।

नुतन;आहह बोलती हूँ बोलती हूँ पहले छोड़ो ना।

ममता ; हाँ बोल तुझे कैसा जीवन साथी चाहिए।

नुतन; ऐसा जो मुझे प्यार करे मेरी हर छोटी बडी ज़रुरत बिना कहे पूरी कर दे । जो मेरे माँ बापु को अपना माँ बापु समझे बस।

ममता; हमम।

नुतन; अब तुम मुझे बताओ तुम्हें कैसा चाहिए।

ममता; अपनी ऑखें बंद कर लेती है और अपने जीवन साथी की तस्वीर अपने दिमाग में बनाना लगती है और उसके ऑखों के सामने देवा का चेहरा आ जाता है।

वो घबरा के अपनी ऑखें खोल देती है।
 
नुतन;बोलो न कैसा।

ममता; मुझे नहीं पता कुछ और बात कर।

नुतन; इस बार खुद ममता के ब्रैस्ट को अपने हाथों से दबा देती है बोलती हो या नही।

ममता; आहह बोलती हूँ बाबा।

मुझे ना भाई जैसा लड़का चाहिए।

नुतन; हाय दैया देवा भाई जैसा।

ममता; हाँ भाई जैसा हट्टा कटा मज़बूत ताक़तवर मरद जो हमेशा मेरी रक्षा करे।

नुतन; ये सुनके ममता की ब्रैस्ट और ज़ोर से दबा देती है

ओर ममता नूतन को मारने बढ़ती है और इसी चक्कर में वो दोनों एक दूसरे में गुथमगुथा हो जाते है।

ममता की तेज़ धड़कने नूतन की जवान साँसों से मिल जाती है और दोनों एक दूसरे की ऑखों में देखने लगते है उनके होंठ एक दूसरे के बिलकुल क़रीब आ जाते है।के तभी बाहर से रत्ना की आवाज़ आती है।

रत्ना;अरे ममता कहाँ है ज़रा यहाँ आना रसोई में।

ममता; नूतन को देखते हुए आई माँ और वो उठके बाहर चली जाती है।

देवा;शालू के घर से निकल के गांव की गलियों में टहलता हुआ पदमा के घर की तरफ चला जाता है पदमा उसे घर के दरवाज़े पर चावल साफ़ करते देखाई देती है।

वो खुश होके उसके घर में चला जाता है पदमा भी चावल एक तरफ रख के देवा को घर के अंदर खीच लेती है और दरवाज़ा बंद कर देती है।

पदमा;इतने दिन कैसे लग गए मेरे राजा।

देवा;तेरी याद नहीं आ रही थी न पदमा वरना जल्दी चला आता।

पदमा;जानती हूँ तू मुझे क्यों याद करेगा। मगर मै बहुत खुश हूँ।

देवा;क्या बात है।

पदमा;ऐसे नहीं पहले मेरा मुंह मीठा करना पड़ेगा उसके बाद बताऊँगी।

देवा;पदमा को बिस्तर पे गिरा देता है और खुद क़मीज़ उतार के उसके ऊपर चढ़ जाता है दोनों ब्रैस्ट को दोनों हाथों में लेके मसलते हुए पूछता है।

अब बता न बात क्या है।

पदमा;ऐसे नहीं पहले मुझे किस करो कस के करो आह्ह।

देवा;तेरी माँ की।
 
कमेंट के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
अपडेट 29

इससे पहले देवा पदमा की साडी खोलता बाहर से पदमा के शराबी पति की गलियों की आवाज़ सुनाई देती है।

देवा;झट से पदमा के ऊपर से हट जाता है ।

ये हरामी कब आया।

पदमा;कल ही आया है तू पीछे के दरवाज़े से चला जा। अरे हाँ छोटी मालकिन तुझे याद कर रही थी ।

जा के मिल लेना और शाम ढले यहाँ आ जाना मै इसे पैसे देके शराब पीने भीजवा दूँगी।।

देवा;तूने बात तो बताया ही नही।

पदमा :रात में अब जा भी जल्दी।

देवा;पीछे के दरवाज़े से निकल जाता है और हवेली की तरफ चल देता है।

हवेली में हमेशा की तरह सन्नाटा पसरा हुआ था ।

देवा;सीधा हवेली के अंदर चला जाता है वो रुक्मणी के कमरे के सामने से होता हुआ रानी के कमरे की तरफ जा रहा था की तभी उसे रुक्मणी के कमरे से अजीब सी आवाज़ सुनाई देती है ।

ओ झाँक के अंदर देखता है तो

सामने बिस्तर पे रुक्मणी लेटी हुई सिसक रही थी।

देवा को देख वो अपनी साडी ठीक करके बैठ जाती है।

अरे देवा तू कब आया और तुम्हारी मामा के यहाँ सब कैसे है।

देवा;वहां तो सब ठीक है बडी मालकिन।

मगर आपकी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही।

क्या हुआ।

रुक्मणी;बस थोड़ा कमर में दर्द है लगता है कोई नस खीच गई है।

देवा;अरे तो इस में कौंन सी बडी बात है मै तेल से नस उतार देता हूँ।

रुक्मणी;तुझे नस उतरनी आती है।

देवा;बहुत अच्छी तरह आप लेट जाओ । मै अभी उतार देता हूँ।

रुक्मणी;पहले तू दरवाज़ा बंद कर दे।

देवा;क्यूँ मालकिन।

रुक्मणी;जैसा कहती हूँ वैसे कर।
 
देवा;जैसे ही दरवाज़ा बंद करके मुडता है रुक्मणी पेट के बल लेट चुकी थी वो हाथ के इशारे से देवा को दर्द वाली जागह बताती है।

देवा;हाथ में तेल लगा के उसी जगह मालिश करने लगता है।

नरम मुलायम त्वचा(स्किन)को छूते ही उसके दिल में हलचल सी होने लगती है।

जब से वो देवकी और काशी को चोद के आया था। उसका दिल हर औरत को देख ऐसे ही कर रहा था फिर वो उसके माँ रत्ना या बहन ममता ही क्यों न हो।

कुछ देर मालिश के बाद देव हलके से और फिर ज़ोर से एक जगह दबा देता है।

रुक्मणी;के मुंह से चीख़ निकल जाती है और चीख के साथ ही उसकी कमर का दर्द भी ग़ायब हो जाता है।

देवा;अब बताओ दर्द हो रहा है क्या।

रुक्मणी;अरे वाह देवा तू तो सच में कमाल का है पता नहीं और क्या क्या कारनामे तू कर सकता है मेरा दर्द तो एकदम ग़ायब हो गया रे।

देवा;सच मालकिन अब कभी भी किसी भी चीज़ की ज़रुरत पड़े कोई भी दर्द हो मुझे बुला देना मै झट से दूर कर दूंगा।

रुक्मणी;तू दिल का दर्द भी दूर कर सकता है।

देवा;क्या।

रुक्मणी;कुछ नहीं चल मुझे उठाके बिस्तर पे डाल दे।

देवा एक हाथ रुक्मणी के गरदन के निचे और दुसरा हाथ कमर के निचे ड़ालने के बजाये सीधा कमर को ही पकड़ लेता है नरम गदराये हुए कमर जैसे ही देवा के कड़क मज़बूत हाथों में आते है रुक्मणी के मुंह से एक आहह सी सिसकारी निकल जाती है और वो देवा को मदमस्त निगाहों से देखने लगती है।

देवा;उसे जैसे ही बिस्तर पे ड़ालने के लिए झुकता है। उसका पैर फिसल जाता है और वो सीधा रुक्मणी को लेके बिस्तर पे गिर जाता है देवा का शरीर पूरा का पूरा रुक्मणी के ऊपर आ जाता है ।

रुक्मणी;की चूचि देवा की छाती के निचे दब जाती है। और जांघ से जांघ घिस जाते है।

बस कुछ ही देर के लिए ये होता है मगर रुक्मणी की चूत पे छोटी छोटी शबनम की बुँदे जमा हो जाती है।
 
देवा;माफ़ी मांग के उसके कमरे से बाहर तो चला जाता है पर लंड तो उसका भी थोड़ा टाइट हो चुका था।

पीछे से कोई उसके काँधे पे हाथ रखता है और वो रुक्मणी के ख्यालों से बाहर निकल के पीछे पलट के देखता है तो उसे सामने रानी खडी मिलती है।

वो उसका हाथ पकड़ के उसे अपने कमरे में ले जाती है।

रानी;क्या कर रहा था माँ के कमरे में कबसे खडी सुन रही हूँ तुम दोनों की बातें पहले मुझसे मिलने नहीं आ सकते थे।

देवा;मैं तो तुमसे ही मिलने आया था पर बडी मालकिन के कमर में मोच आ गई थी इसलिए पहले वहां चला गया।

रानी;बड़ा आया मोच सुधारने वाला ।

क्या ज़रुरत थी । देख देवा जितना मै कहूं उतना ही कर समझा न । ज़्यादा होशियारी दीखाना मत वरना तू जानता है मै क्या करुँगी।

देवा;पर मैंने किया क्या।

वो बेचारा नहीं जानता था की उसने गलती से शेरनी के दूम पे पैर रख दिया है और शेरनी भी घायल।

रानी;अब खड़ा खड़ा मेरा मुंह क्या देख रहा है

गले से नहीं लगेगा।

देवा;के चेहरे पे हलकी सी मुसकान आ जाती है और वो रानी को अपने सीने से लगा देता है।

रानी;तू नहीं जानता देवा मैंने तुझे कितना याद किया। एक एक पल तेरे बिना गुज़ारना मुश्किल हो रहा था मेरे लिए । मै तुझसे बहुत प्यार करती हूँ देवा। नहीं देख सकती किसी को भी तेरे साथ।

देवा;रानी मुझे भी तो बहुत याद आई तेरी।

वो रानी की कमर पकड़ के दबाने लगता है।

रानी;आहह आज नहीं मुझे महीना शुरू हुआ है।

ये कहते हुए वो देवा के होठो को चुमने लगती है और निचे बैठ के देवा का पेंट निचे उतार देती है।

हथ में आते ही देवा का लंड जैसे एकदम से खड़ा होने लगता है ।

रानी;बिना देर किये उसे चुमते हुए अपने मुंह में ले के चुसने लगती है गलप्प गलपप।

देवा;आहह ऐसा मत करा वरना आहह मुझसे बर्दाश्त नहीं होंगा आह्ह्ह्ह्ह्ह।

रानी;मुझसे भी नहीं होता गलप्प पर क्या करुं देवा बस आज के दिन की बात है गलप्प गलपप।
 
देवा;अपने लंड को रानी के मुंह में आगे पीछे करने लगती है पर आज शायद देवा के लंड की किस्मत ख़राब थी । हिम्मत राव की कार की आवाज़ सुनाई देने से देवा की गाण्ड फट जाती है। रानी के रोकने के बाद भी वो अपनी पेंट पहन के पीछे के दरवाज़े से बाहर निकल जाता है।

रानी;अपने मुंह को पोंछने लगती है की तभी हिम्मत राव अंदर आता है।

रानी;क्या बापू थोडी देर से नहीं आ सकते थे।

हिम्मत राव;क्यूँ बिटिया क्या हुआ।

रानी; अरे देवा आया था बस मुंह मीठा करने ही वाली थी की तुम आ गए। डर के मारे भाग गया मुआ।

हिम्मत राव;कोई बात नहीं ।

पर एक बात बता वो तेरे मुठी में तो आ गया है न।

रानी;इतराते हुए हाँ बापु लगभग आ गया है बस कुछ दिन और रुक जाओ उसके बाद ।

दोनो बाप बेटी एक दूसरे को चिपक के चुमने लगते है।

देवा;अपने खेत में चला जाता है।कुछ देर खेत में काम करने के बाद वो झोंपडे में सो जाता है।

और शाम ढले वापस पदमा के घर पे चला जाता है।

पदमा उसी का इंतज़ार कर रही थी। देवा को आता देख वो झट से दरवाज़ा खोल के उसे अंदर खीच लेती है और दरवाज़ा बंद कर देती है।

कब से आ रहा था ।

देवा; मैं वो खेत में सो गया था अब बोलो क्या बात थी।

पदमा; शरमा के देवा के सीने से लग जाती है और धीरे से उसके कान में कहती है।

तू हमारे बच्चे का बाप बनने वाला है।

देवा;सच। वो पदमा को अपने गोद में उठा लेता है उसे ये तो पता था की उसके लंड में बहुत ताकत है वो काफी देर तक औरत को चोद भी सकता है पर आज उसे ये भी पता चल गया था की वो बच्चा भी पैदा कर सकता है।

वो ख़ुशी के मारे पदमा की साडी खोल देता है और एक झटके में अपने कपडे भी निकल फेंकता है।

दोनो के होंठ एक दूसरे से चिपक जाते है।
 
पदमा;आहह देवा हमारे बच्चे को ताकत की ज़रुरत है मुझे जम के चोद। सारा पानी मेरी चूत में निकाल दे आह्ह्ह्ह।

देवा;पदमा को लिटा के उसकी चूत को चाटने लगता है गलप्प गलप्प।

इसमें से निकलेगा न हमारा बच्चा पदमा गलप्प गलप्प।

पदमा;हाँ इसमें से आहह काट मत ना रे।

देवा;के चूत चाटने से पदमा निहाल हो जाती है । पसीने से उसका पूरा जिस्म भीग जाता है उसे भी लंड चाहिए था । देवा का लंड था ही ऐसा एक बार किसी को मिल जाए वो उसकी दिवानी हो जाती थी।।

देवा;पदमा की चूत को चाटता हुआ ऊपर पेट पे आता है और पदमा की नाभि में ज़ुबान डालके उसे चाटने लगता है ।

पदमा को एक नया अनुभव होने लगता है वो अपनी ऑंखें बंद करके देवा को उसकी मनमानी करने देता है।

देवा; धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ता चला जाता है और निप्पल्स को मुंह में भर के चुसते हुए दूसरे चूचि को मसलने लगता है गलप्प गलप्प।

आज मै तेरे बदन को हर जगह चूमूँगा मेरी पदमा गलप्प।

पदमा;आहह जो करना है करो न तुमने मुझे वो ख़ुशी दी है जो कोई नहीं दे पाया अहह उई माँ।

देवा;को पदमा की पसीने की खुशबु बहुत आकर्षित करती थी वो पदमा के दोनों हाथ ऊपर उठाके उसके बगल(आर्मपिटस)में मुंह डालके उसे चाटने लगता है।

गलप्प गलप्प्प।

पदमा;पागल सी हो जाती है और देवा को अपने से अलग करके उसके लंड पे टूट पडती है।

देवा का लंड पदमा के हाथ में आ जाता है आज इस लंड पे बहुत ज़ुलम हुए थे।

पदमा; आहह इसने मुझे माँ बनाया है मै इसे बहुत प्यार करती हूँ और करती रहूँगी गलप्प गलप्प।
 
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