किरण;आहह ऐसे ही आहह रोज़ आया करना मेरे पास। आहह देख न कैसे मेरी चूत सुखी सुखी सी हो गई थी आह्ह्ह्ह्ह्।
तेरे लंड के मार से ही सुनती है ये। मेरा तो एक बात नहीं मानती आहह माँ कुट के रख दे रे आह्ह्ह्ह्ह्ह।
देवा;अहह साली थोड़ा कम मुंह खोल आहह मेरी होने वाली सास न आ जाये आहह्ह्ह्हह्ह।
किरण;तू तो बड़ा आहह कमीना है उसे क्यों नहीं चोद देता आह्ह्ह्ह्ह्ह।
ज़िन्दगी भर तेरी गुलाम बनके रहेगी वो भी। आहह उसे भी इस मोटे लंड से एक बार पेल दे देवा आहह्ह्ह्ह
रह नहीं पायेगी वो एक पल भी माँ वू आहह तेरी बिना आहः।
देवा के चोदने की स्पीड से ही किरण के मुंह से ये लफ़्ज़ बाहर निकल रहे थे। दोनों के पास वक़्त बहुत कम था।
वो दोनों कुछ देर इस तरह एक दूसरे को नोचते खरोंचते चुदाई करते जाते है और उनके पानी छोड़ने से पहले बाहर खड़ी शालु की चूत पानी छोड देती है।
शालु;देवा को ढूँढ़ते ढूँढ़ते यहाँ तक आ गई थी उसके कदम टॉयलेट के बाहर इन दोनों की आवाज़ सुनके थम जाती है ऊपर से किरण की बातें बार बार शालु के कानों में गूँजने लगती है।
की एक बार उसे भी अपने लंड से चोद दे गुलाम बनके रहेगी वो तेरी।
उन दोनों के बाहर निकलने से पहले शालु अपनी जगह जाके बैठ जाती है।।
कुछ देर बाद देवा शालु के पास जाके बैठ जाता है उसकी साँस अभी भी फूली हुई थी। वैध उसे देख समझ जाता है की ये क्या करके आया है।
पर वो बेचारा कुछ बोल भी नहीं सकता था।
शालु और देवा थोड़े देर बाद वैध जी से दवायें लेके वापस घर की तरफ चल देते है।
वापसी में शालु चुप चाप बैठी हुई थी
देवा;शालू के पेट पे चुमटी काट लेता है।
शालु; उईई माँ
क्या करता है ।
देवा;मुझे लगा तुम सो गई कही गिर ना जाओ इसलिए जगा दिया।
शालु;इस तरह बेशरम।
देवा;इस में बेशर्म वाली कौन सी बात है।
शालु;क्या करने गया था तू वैध की बहु के साथ सब पता है मुझे।
देख देवा तेरी माँ सही सोचती है तेरे चालचलन ठीक नहीं लगती मुझे भी । ऐसे ही हरकतें करता रहा न तो कोई भी लड़की वाला तुझे अपने लड़की नहीं देगा।
ज़िन्दगी भर कुँवारा ही रहना पडेगा।
देवा;तुम हो ना।
शालु;क्या मतलब वो सकपका जाती है।
देवा;मेरा मतलब है तुम देख लेना मेरे लिए लड़की।।
शालु;बहुत गन्दा है रे तू देवा।
पता नहीं मेरा बेटा तेरे साथ रह रह के कही वो भी तो नही।
देवा;तुम्हें तो सब पता है ना की पप्पू कैसा है।
शालु की ऑखों के सामने वो मंज़र घुम जाता है जब पहली मर्तबा उसने पप्पू को और देवा को बिना कपडो के देखी थी और देवा जानवर के तरह पप्पू की नाज़ुक गाण्ड मार रहा था।।
उस दिन कुछ पल के लिए शालु और देवा के नज़रें भी मिली थी।
शालु;मुस्कुरा देती है।
चल कब सुधरेगा।
देवा;जब तुम मुझे दोगी।
शालु;क्या।
देवा;जब तुम मुझे ढूढ़ के दोगी लड़की शादी के लिये।
शालु;देवा की ऐसी बाते खूब समझती थी वो दूसरी तरफ मुंह करके मुस्कुरा देती है।।
घर पहुँच कर शालु बिस्तर पे ढेर हो जाती है और देवा उसके पैरों के पास बैठ जाता है।
देवा;कहो तो दबा दूँ ।
शालु;उससे अपने टाँग मारते हुए पीछे ढकेल देती है। कोई ज़रूरत नही।
देवा;क्या काकी दर्द कर रहे होंगे न।
शालु;मैंने कहा न नहीं मतलब नही।
रश्मी;क्या बात है माँ क्या दर्द कर रहे है।
रश्मी भी वहां आ जाती है।
शालु;अरे बेटी मेरे पैर दर्द कर रहे थे। वही देवा दबाने का बोल रहा था।।तु जा जाके खाना बना।
देवा सुबह सवेरे अपने खेत में चला जाता है पिछले कुछ दिनों से वो अपने खेत में हल चलाने के बजाये कही और ही हल चला रहा था और बीज बो रहा था जिससे उसके खेत में सूर्य फूल की फसल धीरे धीरे करके बर्बाद हो रही थी।।
सुबह से ही वो फसल पे फर्टीलाइज़र्स और कीटनाशक का छिडकाव कर रहा था।
और इसी चक्कर में उसे दोपहर हो जाती है।।
वो हाथ मुंह धोके कुंवे के मुंडेर पे बैठा ही था की उसे पप्पू आता दिखाई देता है।
पप्पू;अरे भाई देवा कहाँ हो आज कल जबसे मां के घर से आये हो न मिलते हो न बातचीत हो पा रही है तुमसे।
देवा;बैठ यहाँ।
कुछ नहीं यार मां के यहाँ कुछ दिन रुक क्या गया। देख फसल पे कीड़े लगने लगे है।।गन्ने की फसल तो कट गए बस ये सूर्य फूल बाकी है अब।।
अच्छा तू बता तू क्यों नहीं दिखाई दे रहा है । मै तो दो तीन बार तेरे घर भी आया था।
पप्पू;वही खेती के काम।
और सुना मां के घर गया था तो वहां गांव में कोई चक्कर वक्कर चलाया की नही।
देवा;हंस पड़ता है
जब घर में गरम रोटी खाने को मिले तो कोई बाहर की सुखी रोटी क्यों खाये।
पप्पू;क्या मतलब।
देवा;अब तुझसे क्या छुपान।मामा के घर जाने में मेरा बहुत फायदा हो गया भाई।
मामी भी मिल गई और भाभी को भी ठोक आया।
पप्पू का मुंह खुला का खुला रह जाता है।
क्या बोल रहा है तू भाई। सच में मामी को कैसे।
देवा;पप्पू को सारी बात सुना देता है वो सुनके पप्पू की गाण्ड की सिट्टी बजने लगती है।
पप्पू;बड़ा कमीना है रे तू देवा।।यहाँ पदमा काकी और वहां मामी।
पप्पू के मुंह से ये दो लफ़्ज़ अचानक ही निकल गए थे। वो देवा से अपनी ये बात कभी भी शेयर करना नहीं चाहता था।।
देवा;अबे बोल भी कौन से दिल की मुराद।
पप्पू;नहीं वैसे ही बस एक आध लड़की को चोदने की भाई।
देवा;पप्पू के कमर पे दो हाथ जड़ देता है।
साले मुझसे छुपा रहा है चल जल्दी बोल मै तेरे दिल की मुराद पूरी करने में मदद करूँगा।
पप्पू;वो पहले तू मेरी कसम खा की तू ये बात किसी को नहीं बतायेगा।।
देवा पप्पू की कमर पे हाथ घुमा देता है।
ले बस तेरी गाण्ड की कसम जिसे मैंने कई बार लिया है नहीं कहुंगा किसी से भी।
पप्पू;देवा तुझे पता है मेरा दिल हमेशा से ये चाहता है की मै किसी अपने को चोदूँ। कोई मेरा सगा खून वाला रिश्ते में तेरे मुंह से तेरी मामी के बारे में सुना तो मुझे भी यक़ीन हो गया की दुनिया में ऐसा भी होता है।।
देवा का मुंह खुला का खुला रह जाता है।
इसका मतलब तू अपनी माँ और बहन को।
पप्पू देवा के मुंह पे हाथ रख देता है।
धीरे बोल कोई सुन न ले।
देवा;तू तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला बे साले।
पप्पू;हाँ भाई सच में मेरा दिल करता है की मै अपनी माँ शालु के साथ बस ज़्यादा नहीं एक बार रात गुज़ारूँगा।
देवा;सोचने लगता है की कही इसने जोश जोश में आके किसी दिन नीलम को ही ठोक दिया तो।
पप्पू;क्या हुआ किस सोच में पड़ गया।क्या तू करेगा मेरी मदद।
देवा;हाँ हाँ करुँगा न मगर मेरी दो शर्तें है भाई।
पप्पू;कैसी शर्तें।
देवा;पहली ये की तू तेरी माँ और बडी बहन रश्मि के साथ कुछ भी कर ले। मगर नीलम को गलत नज़र से देखा भी तो मुझसे बुरा कोई नही।
क्यूंकि मै नीलम से प्यार करता हूँ और उससे शादी भी करुँगा।
देवा;रश्मि के ऑंखें बंद करते ही धीरे धीरे उसकी कमीज ऊपर करने लगता है और रश्मि के कुछ कहने से पहले अपने होंठ रश्मि के काँपते पेट पे रख देता है।
रश्मी; उईईईईई माँ।
देवा;अपने मज़बूत हाथों से रश्मि के पेट को सहलाते हुए चुमने लगता है जिससे रश्मि तड़प उठती है। जबसे उसकी सगाई हुई थी तबसे उसकी चूत गीली रहने लगी थी। ऊपर से देवा की हरकतें उसे आये दिन सपने में परेशान करते रहती थी।।
आज देवा ने उस जगह अपनी ज़ुबान रखा था की वो खुद चाह के भी उसे रोक नहीं पा रही थी।
रश्मी;देवा ये गलत है ऐसा मत करो ना।
देवा;कुछ भी तो नहीं कर रहा हूँ मै गलप्प गलप्प्प।
देवा;सरकते सरकते रश्मि के होठो के पास आ जाता है और रश्मि के होठो पे होंठ लगा देता है।
पहले रश्मि अपने होंठ नहीं खोलती मगर देवा के उसे मसलने से उसका मुंह अपने आप खुल जाता है और ज़ुबान थोडी सी बाहर निकल जाती है।
उसी वक़्त दोनों की ज़ुबान एक दूसरे से और होंठ एक हो जाते है।गल्पप गलप्प।
रश्मी कुंवारी थी और कुँवारी चूत धक्का भी बर्दाश्त नहीं करती रश्मि भल भल करके पानी छोड देती है और पानी निकलते ही हर किसी का जो हाल होता है वही रश्मि का भी हो जाता है वो अपनी दोनों बंद आँखें खोल देती है और जल्दी से उठके खड़ी हो जाती है।
देवा;अरे रुक न कहाँ जा रही है।
रश्मी;तुम्हारे माँ के पास तुम्हारे कारनामे सुनाने।