किरण ले ना इसे तू जानती है ना हां मेरी गाण्ड फट गई है आह्ह्ह्ह।
किरण;देवा निकाल ले बाहर वो नहीं ले पायेगी।
देवा;चुप कर साली वरना इसकी जगह तेरी गाण्ड फटेगी अभी आह्ह्ह्ह।
बिंदिया चीखती रही मगर देवा नहीं रुका और सटा सट अपने लंड की तेज़ धार से उसने आखिर कर बिंदिया की गाँड को जगह जगह से फाड़ देता है। खून बाहर गिरने लगता है मगर पागल हो चुके देवा पर उसका भी कोई असर नहीं पडता । उसे हिम्मत राव की हर उस चीज़ से नफरत सी हो गई थी जो उससे जुडी हुई थी।
काफी देर उसी तरह खड़े खड़े गाण्ड मारने के बाद देवा जब बिंदिया की गाण्ड में पानी निकाल के अपना लंड बाहर निकालता है। तब बिंदिया थकान की वजह से और गाण्ड के दर्द की वजह से निचे बैठ जाती है।
बिंदिया;माँ कसम आज तक कोई तेरे जैसा नहीं मिला मुझे। मानती हूँ तेरे मर्दांनगी मैं।
मुझे माफ़ कर दे बस मुझे हवेली पहुंचा दे देवा। मै किसी से कुछ नहीं कहुँगी।
देवा;किरण की तरफ देख के मुस्क़ुरा देता है और किरण को अपनी बाहों में लेके चुमने लगता है।
किरण;ठंडा सा लेप फिर से बिंदिया की गाण्ड पर लगा देती है और थोडी देर बाद देवा और बिंदिया हवेली की तरफ चल पडते है।
रास्ते में देवा बिंदिया से पूछता है।
देवा;क्या हुआ चुप चुप क्यों हो।
बिंदिया ;हरामी गाण्ड सुजा के बात करने को बोल रहा है यहाँ ठीक से बैठा भी नहीं जा रहा और तुम हो की....
देवा;क्या करुं पहले बोल देती की किसी से नहीं कहूँगी तो नहीं करता मै ऐसा।
बिंदिया ;मुझे करवाना था न तुझसे ऐसा।
देवा; मुँह खोले बिंदिया को देखने लगता है।
बिंदिया ;देवा को इस तरह देखते हुए ज़ोर ज़ोर से हंसने लगती है।
तूझे क्या लगा मै सच में गांव वालो को बताने वाली थी।
अरे बुध्धू तेरे जैसे कितने लौंडे मुझे पेलने के लिए मरते हैं गांव में।
मगर मै उसी से करवाती हूँ। जो मुझे अच्छा लगता है।
देवा; ट्रेक्टर रोक देता है।
और बिंदिया का हाथ पकड़ के उसे नीचे उतार देता है।
बिंदिया;क्या हुआ क्यों रुक गया।
देवा;मुझे तुझे चोदना है।
बिंदिया; क्या।
पागल हो गया है क्या तु।
चल बाबा हवेली चल।
मुझे नहीं करवाना तुझसे।
देवा;बिंदिया को अपनी बाहों में जकड लेता है और अपने दोनों हाथों से बिंदिया की कमर को सहलाने लगता है।
वो दोनों जंगल के ऐसी जगह थे जहाँ कोई नहीं था। दूर दूर तक किसी की भी आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी।
देवा;दोनों हाथों में बिंदिया की कमर को पकड़ के दना दन लंड उसकी गाण्ड में पेलने लगता है।
बिंदिया;आह मेरी गाण्ड माँ उईइइइइइइ आहह्ह्ह्ह।
देवा;चिल्लाती क्यों है तुझे तो लेने का शौक था ना आह्ह्ह्ह साली रंडी।
बिंदिया;आहह मार डाला रे आहह दर्द से नहीं चिल्ला रही हूँ मै आहह ये चीखें उन्हह तू नहीं समझेगा देवा आहह बस तू रुक मत अहह आह्ह्ह्ह्ह।
देवा;बहुत छोटी है तेरे गांड। साली हिम्मत राव पेलता नहीं है क्या तुझे ठीक से।
बिंदिया ;आहह वो बूढा क्या मुझे खुश रख पाएंगा उईईईईईई माँ जो बात तुझ में है वो उस में क्या किसी में भी नहीं आ सकती। आहह पूरा जड़ तक घूस्स रहा है मेरी गाण्ड के आह्ह्ह्ह।
मेरी चूचियां मरोड़ते हुए मर मेरी गांड आह्ह्ह्हह आज तक तेरे जैसा मरद नहीं देखा मैंने। आह क्या ताक़तवर जानवर है तू आहह चीर देता है। वो तो मै हूँ अगर किसी कच्ची कली की लेगा तो मर जाएँगी वो तेरे नीचे आके आह्ह्ह्हह्ह।
देवा;तेरी भी गाण्ड कच्ची कली से कम नहीं है बिंदिया।
बिंदिया; उईई माँ आहह रुकना मत बस करते जा करते जा आहह आह्हह्हह्हह्हह।
देवा अपने लंड को बिंदिया के गाण्ड के अंदर तक उतार के वही रुक जाता है और बिंदिया के साथ झरने लगता है । थोडी देर बाद जब बिंदिया और देवा की साँसें थमती है तो बिंदिया देवा के होठो को चुमने लगती है।
बिंदिया ;मान गयी देवा तुझे।
दिवानी कर दिया है तूने मुझे।
आज से बिंदिया हिम्मत राव की नहीं तेरी रखेल बनके रहेगी।
देवा;और हिम्मत राव क्या करेंगे फिर।
बिंदिया ;उस हरामी को मुझसे नहीं मेरे जिस्म से प्यार है वो किसी का नहीं हो सकता ।अरे जो अपनी पत्नी को मारना चाहे उस इंसान से भला कैसी हमदर्दी।
देवा;क्या मतलब।
बिंदिया ;देख देवा किसी को बताना मत।
देवा;पक्का नहीं बताउँगा।
बिंदिया ;नहीं नहीं तू बता देगा किसी को।
देवा;अपना हाथ बिंदिया के सर पर रख देता है तेरी कसम नहीं बताऊंगा बोल भी।
नही नहीं तुम झूठ बोल रहे हो भला वो अपनी पत्नी को क्यों मारने लगे नहीं मुझे विश्वास नहीं होता।
बिंदिया ;अरे मै सच कह रही हूँ।
मुझे भी इसी शर्त पर वो यहाँ ले के आया है।
देवा;मगर तुम मुझे ये सब क्यों बता रही हो।
बिंदिया;सच कहूं देवा।
मुझे तुझसे पहली नज़र में ही प्यार हो गया था। हाँ जानती हूँ तू क्या सोचेगा की मै एक रखेल हूँ बातें बनाना जानती हूँ।
देवा;नहीं ऐसे बात नही।
बिंदिया ;हाँ हाँ मुझे सब पता है।
मगर मै हमेशा से ऐसी नहीं थी। एक सीधे साधे किसान की बेटी थी जिस पर हिम्मत राव की बुरी नज़र पड़ गई। शादी तो मेरी होने से रही हिम्मत ने इसी का फायदा उठाके पूरे गांव भर में मुझे मशहूर करवा दिया की मै उसकी रखेल हूँ और कोई उससे शादी न करे।
मै उस दिन बहुत रोई थी मगर उस कमिने ने मुझे झूठे वादे करके फँसा लिया। ये कहके की वो मुझसे एक दिन शादी करेंगा और अपने साथ हवेली में रखेगा मगर मुझे कुछ ही दिन पहले पता चला है की पास के एक गांव में भी चंपा नाम की औरत के साथ वो यही कर चुका है ।
उस दिन मैंने सोच लिया की मै अपनी बर्बादी का बदला हिम्मत राव से ज़रूर लुंगी मगर किस्मत भी देख।
मुझे तू मिल गया।
तेरी भोलेपन को देख के मुझे एक बात तो समझ आ गई की हिम्मत की बूरी नज़र तुझ पर ज़रूर किसी वजह से है भला तूने उसका क्या बिगाड़ा होगा। ये बात मुझे समझ नहीं आई।
देवा;यही बात तो मुझे भी पता करनी है बिंदिया।
बिंदिया ;वो तेरी बडी मालकिन को मारके उसकी जायदाद हड़पना चाहता है और मै जानती हूँ की वो जायदाद मिलने के बाद मुझे भी नहीं पहचानेगा।
देवा;अपने कपडे पहनने लगता है।
चलो देर बहुत हो गई है।
बिंदिया;देख देवा तूने मेरी सर की कसम खाई है ये बात किसी को पता न चलने पाये वरना हिम्मत राव मुझे भी जान से मार देगा उसकी पहुँच बड़े बड़े लोगों में है।
तूझे मेरी कसम है देवा।
देवा;मैंने तेरे सर की कसम खाया हूँ न। बस तुम फिकर मत करो मै ये बात किसी को भी नहीं बताऊँगा। बस किसी तरह मुझे अपने बापू के बारे में पता चल जाए अगर उनके ग़ायब होने के पीछे भी हिम्मत राव हुआ तो बहुत पछतायेगा वो हरामी।
बिंदिया ;तेरे बापू। क्या हुआ तेरे बापू को।
देवा;वो अचानक ग़ायब हो गये थे। हिम्मत राव की हवेली से उसके बाद कभी नहीं आए।
बिंदिया ;ज़रूर इस में भी उस कमिने का हाथ रहा होगा। भोले भाले लोगों को फँसना उसे अच्छी तरह आता है । देख देवा वो बहुत खतरनाक आदमी है उसे ज़रा बच के रहना तुम।
देवा;बचना तो अब उसे मुझसे पड़ेगा । देख लेना तुम अगर तुम्हे कोई बात पता चले तो मुझे ज़रूर बताना।
बिंदिया : मैं आज ही से पता लगाने की कोशिश करती हुए हूँ। क्योंकि शराब पीने के बाद उसे कुछ होश नहीं रहता की वो क्या बोल रहा है। एक दिन शराब पीते पीते ही उसने मुझे चंपा कहके पुकारा था। उसी दिन मेरा माथा ठनका था और मैंने चंपा के बारे में सब कुछ पता लगा ली थी । तेरे बापू के बारे में भी मै ज़रूर पता लगा लुंगी देवा । तू फिकर मत कर बस मेरा ख्याल रखने आ जाया कर हवेली पर।
देवा; हँस पडता है और बातो बातों में वो दोनों हवेली पहुँच जाते है।
जब रुक्मणी देवा और बिंदिया को एक साथ आते देखती है तो जल भून जाती है और चिल्लाते हुए देवा को अपने रूम में आने के लिए कहती है।
देवा;रुक्मणि के रूम में चला जाता है।
हाँ मालकिन आपने बुलाया मुझे।
रुक्मणी;मालकिन के बच्चे कहाँ था तू और क्या कर रहा है उस कमिनी के साथ। मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है ये सब देवा बोल देती हूँ।
देवा;मुस्कराता हुआ रुक्मणी के एकदम क़रीब पहुँच जाता है इतने क़रीब की दोनों की साँसे एक दूसरे से टकराने लगती है तब रुक्मणी को एहसास होता है की उसने क्या गलती की है।
देवा;ईई इधर देखो।
रुक्मणी;सर उठाके देवा की तरफ देखने लगती है।
देवा;क्या बात है एक आवाज़ में सुनने लगी हो तुम तो....
रुक्मणी;क्या है देवा।
देवा;एक बात बताओ मुझे। तुम मुझे एक पत्नी की तरह क्यों डांट रही हो।
बात क्या है।
रुक्मणी;शरमा के धड़कते हुए दिल के साथ अपने गरदन मोड़ देती है। अब वो क्या बताती की देवा मैं तन मन धन से तेरी हो चुकी हूँ।
मुझे तुमसे बात नहीं करनी जाओ यहाँ से।
देवा;सच्ची चला जाऊं । सोच लो एक बार गया तो लौट के नहीं आऊँगा।
रुक्मणी; घरबरा के देवा की तरफ घूम जाती है मैंने ऐसा तो नहीं कहा।
देवा;तो फिर।
रुक्मणी;शरमा जाती है।
उससे कुछ भी कहा नहीं जाता।
देवा;सच बताओ तुम मुझे ऐसे क्यों डांट रही थी मालकिन।
रुक्मणी;सबसे पहली बात की मुझे अकेले में मालकिन मत बोला करो।
दूसरी बात मै नहीं चाहती की तुम उस बुरी औरत के संगत में आके बिगड जाओ। गांव के शरीफ बच्चे हो तुम इसलिये।
देवा;बच्चा...... लगता है इसे दिखाना पड़ेगा तीसरा पांव मेंरा।
उसने ये बात धीमी आवाज़ में कहा था मगर सरगोशी रुक्मणी की कानो तक पहुँच गई थी जिसे सुनके वो बुरी तरह शरमा भी गई थी।
रुक्मणी;क्या कुछ कहा तुमने।
देवा;नहीं नहीं। तो अच्छा मै चलता हूँ रात बहुत हो गई है
रुक्मणी;कल आओगे ना।
देवा;तुम चाहती हो।
रुक्मणी;अपनी नज़रें झुका के..
नही मै तो इसलिए कह रही थी की तुम अपना काम कर सको।
देवा;सच कौन सा काम।
वो खुश होता हुआ रुक्मणी के क़रीब आ जाता है।
रुक्मणी;बड़े बड़े ऑंखें से देवा को देखते हुए।
वही काम जो मैंने तुम्हे करने के लिए कही थी। बिंदिया के बारे में पता लगने का काम।
देवा;ओह्ह वो काम ठीक है। मै कर लूँगा मुझे लगा....
रुक्मणी;क्या क्या लगा तुम्हें।
देवा;कुछ नही।
सर झटकता हुआ देवा रूम से बाहर निकल जाता है और रुक्मणी अपने मुँह में ऊँगली दबाये मुस्कुरा देती है।
देवा सुबह का घर से निकला था और शाम हो गई थी। उसका बदन दर्द कर रहा था। वो सीधा घर पहुंच के हाथ मुँह धो के खाना खा लेता है और वही कौशल्या और ममता से बातें करता हुआ सो जाता है।
कुछ ही देर में वो गहरी नींद में सो जाता है।
ममता; भाभी भइया तो थक के सो गये।
कौशल्या;अपनी चूत को सहलाते हुए हाँ रे मगर इसका क्या।
ममता;अपनी ज़ुबान बाहर निकाल के होठो पर फेरते हुए कौशल्या से कुछ कहती है और कौशल्या मुस्कुराते हुए ममता का हाथ पकड़ के उसके रूम में चलि जाती है।
सुबह जब देवा की आँख खुलती है तो वो खुद को बहुत तरो ताज़ा महसुस करता है उसे अपने आस पास कोई नज़र नहीं आता तो वो उठके ममता के रूम में देखने चला जाता है और जब वो ममता के रूम में पहुँचता है तो ममता और कौशल्या को बिलकुल नंगी एक दूसरे की बाहों में लिपटे हुए पाता है तो उसे बहुत गुस्सा आता है की रात को इनदोनों ने मुझे जगाया भी नहीं और खुद नंगी मस्ती कर रही थी वैसे भी देवा को तेज पेशाब लगी हुई थी।
देवा कुछ सोच के अपने सारे कपडे उतार देता है।
और अपने लंड को हाथ में पकड़ के सीधा ममता और कौशल्या के मुँह पर पेशाब करने लगता है।
पेशाब मुँह पर पडते ही दोनों जग जाती है और उठके बैठने के बजाये मुँह खोल के पेशाब सीधा मुँह में लेने लगती है।
देवा का पेशाब सीधा ममता और कौशल्या के मुँह में छाती पर गिरने लगता है।
पेशाब करने के बाद देवा वही बैठ जाता है और ममता अपने मुँह में का पेशाब कौशल्या के मुँह में उंडेल के उसके होठो को चुमने लगती है। गलप्प गलप्प्प गलप्प्प।
ये देख देवा उन दोनों को अपने पास खीच लेता है
और ममता को दोनों ब्रैस्ट एक साथ पकड़ने के लिए कहता है।
ममता जैसे ही दोनों ब्रैस्ट आपस में पकड़ती है देवा उन दोनों के बीच में अपना लंड घुस्सा देता है।
ममता;आहह भइया।
हमारी चूत को प्यासा रख के खुद सो गए थे ना तुम।
देवा;अब जग गया हूँ न बहना। अपनी प्यारी से बहन के चूत की प्यास बुझाने।
देवा;अपने लंड को आगे पीछे करने लगता है और उसे हाथ में पकड़ के ममता के चेहरे पर रगड़ने लगता है।
जैसे ही ममता अपना मुँह खोलती है कौशल्या लपक के देवा के लंड को हाथ में ले लेती है।
बिना देरी किये वो देवा के लंड को अपने मुँह में उतार देती है गलप्प गलप्प।
ममता;भइया।
देवा;रुक जा भाभी मेहमान है ना।
कौशल्या; लंड को हिलाते हुए देवा आज माँ आने वाली है तेरी। ज़रा कस के गाण्ड में डाल दे मेरी उसके बाद चूत में भी पेल देना रे।
देवा; ये सुनके कौशल्या को उल्टा लिटा देता है और पीछे से दोनों टांगों के बीच कौशल्या को लेके अपने लंड पर थूक लगा के सन्न देने से लंड कौशल्या की गाण्ड में उतार देता है।
कौशल्या;मर गई रे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
कौशल्या;आहह देवा मेरे बच्चे के बाप आहह खोल दे मेरी गाण्ड को आह्ह्ह्ह।
बहुत तडपती रहती है तेरे बिना ये उन्हह इसमें बहुत खुजली होती है रे.....
देवा;ममता की तरफ देखते हुए कौशल्या की गाण्ड मारने लगता है। उसकी बहन उसके सामने अपनी चूत सहला सहला के उसे बुला रही थी मगर वो भी एक बड़े दिल वाला था। उसे भी अपने भाभी की इच्छा पूरी करनी थी। बिना रुके वो कौशल्या की गाण्ड मारता जाता है।
कौशल्या;की चूत और गाण्ड दोनो रात में ममता ने खूब चाटी थी इसलिए बहुत जल्द उस में चिकनाहट आने लगती है।
देवा;का लंड बडी आसानी से अंदर बाहर होने लगता है।
ममता;उठके कौशल्या के मुँह के पास जाके बैठ जाती है और अपनी दोनों टाँगे खोल देती है।
कौशल्या;के मुँह के एकदम सामने ममता की चूत थी वो अपनी ज़ुबान बाहर निकाल के ममता की चूत पर रख देती है।
कौशल्या;आहह पीछे से भाई का गरम लंड और सामने से बहन की चिकनी चूत चाटने से कौशल्या की चूत पनिया जाती है।
और वो चीखते हुए ममता की चूत के अंदर ज़ुबान घुस्सा देती है।
कौशल्या;आहह देवा ज़ोर से हाँ हाँ ऐसे ही आह्ह्ह्ह्ह्ह।
एक और जबरदस्त धक्का कौशल्या की चूत से पानी के फुवार निकाल देता है जैसे ही कौशल्या की चूत से पानी निकलता है।
देवा ;उसके गाण्ड से लंड बाहर निकाल लेता है और ममता बिजली की तेजी से देवा के लंड को अपने भाई के लंड को अपने मुँह में ले लेती है।
ममता;अपने भाई के चेहरे को देखने लगती है उसका मुँह खुला ही रहता है। देवा के ज़ोरदार धक्के उसे साँस लेने भर की भी फुर्सत नहीं दे रहे थे।
ममता;भैया मै बहुत खुशनसीब वाली हूँ जो आप जैसा भाई मुझे मिला है। मै सारी ज़िन्दगी आपके साथ गुज़ार दूंगी भैया उईईईईई माँ।
कौशल्या ;पास में लेटे हुए देवा और ममता को ही देख रही थी।
देवा ने उसकी गाण्ड बुरी तरह सुजा दिया था।
देवा;अपनी रफ़्तार बढा देता है। वो जानता था रत्ना किसी भी वक़्त घर पहुँच सकती है।
नीचे लेटी ममता की चूत पर तो जैसे कहर टूट पड़ा था। देवा दोनों हाथों में कमर को दबोचे सटा सट ममता की चूत में लंड पेलते जाता है और ममता चीखते हुए आखिर कर देवा के लंड पर ही झरने लगती है।
देवा;एक लम्बी चीख़ मारता है उसी वक़्त कौशल्या देवा का लंड हाथ में पकड़ के बाहर खीच लेती है और देवा का गाढा गाढा पानी ममता की जांघ पर चूत के ऊपर गिरने लगता है।तभी बाहर से आवाज़ आती है...
रत्ना;ममता अरे ओ ममता कहाँ है सब के सब।
बाहर से रत्ना की आवाज़ सुनके सभी चौंक जाते है।
ममता;और कौशल्या रूम में भागते है और देवा बाथरूम में।
रत्ना;आँगन में बैठी हुई थी उसके साथ रामु भी आया हुआ था।
थोड़ी देर बाद जब कोई बाहर नहीं आता तो रत्ना घर के अंदर आने लगती है तभी वो कौशल्या से टकरा जाती है।
रत्ना;क्या बहु कहाँ थी तुम, और ममता कहाँ है।
कौशल्या;वो माँ जी ओ......
रत्ना;क्या माँ जी लगा रखी है देवा खेत में गया के नही।
ममता भी अपने कपडे पहन के रत्ना के पास आ जाती है
कौशल्या और ममता की हालत बिगडी हुई थी बाल खुले हुए जिस्म से अजीब सी गंध आती हुई। रत्ना गौर से कौशल्या और ममता को देखने लगती है
रत्ना;कहाँ से आ रही है भागी भागी। क्या कर रही थी अंदर
कौशल्या;रत्ना के पास आती है और धीमी आवाज़ में उससे कहती है।
माँ जी ममता की माहवारी पीरियडस शुरू है।
रत्ना;ओह्ह अच्छा अच्छा जा बाहर रामु बैठा है कितना सामान दे दिया है भाई ने। उठाया भी नहीं जाता। जा ज़रा ले के आजा। देवा कहाँ है?
ममता;माँ भैया नहा रहे है।
रत्ना;अभी उठा है क्या । ज़रा घर से क्या गई सारा घर सर पर उठा रखा है तुम दोनों ने।
रत्ना;बात बढ़ाते हुए देवा के रूम की तरफ चली जाती है और ममता कौशल्या को देख के अपने दिल पर हाथ रख देती है जैसे बोल रही हो की आज तो बाल बाल बच गये।