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हाय रे ज़ालिम.......complete
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Jul 2, 2026
अपडेट 67
रानी;बापू ये क्या कर रहे हो गोली चल जाएगी।
हिम्मत; अच्छा देखता हूँ क्या सच में गोली चलती भी है या नहीं बहुत दिन से किसी का शिकार नहीं किया मैने।
रानी;बापू मज़ाक़ छोड़ो सच में गोली चल जाएगी।
हिम्मत;एक मिनट हिलना मत रानी।
वो बन्दूक की नाल को रानी के सर की तरफ रख के ऊँगली ट्रीगर पर रख देता है।
रानी हिल भी नहीं पाती ज़रा ची चूक उसका भेजा उड़ा सकती थी।
उसे अपने बाप पर बिलकुल भरोसा नहीं था शराब के नशे में हिम्मत कुछ भी कर सकता था।
रुक्मणी;ऑंखें फाड़े कभी हिम्मत को तो कभी रानी के पसीने में तरबतर चेहरे को देखने लगती है।
रानी;बापु।
हिम्मत की ऊँगली ट्रीगर पर दब जाती है।
रुक्मणी;भागते हुए रूम में अंदर आ जाती है रानी
रानी।
गोली रानी की कनपट्टी के पास से होकर गुज़री थी उस गोली की गूंज से रानी सुन्न पड़ गई थी।
अपने सर के इतने क़रीब से गोली गुज़रने से रानी जैसे बेसुध सी हो गई थी।
और सामने बैठा हिम्मत राव खिलखिला कर हँस रहा था।
रुक्मणी;अपने पति को ज़हरीली नजरों से देखने लगती है।
हिम्मत; ये क्या देख रही है हाँ क्या देख रही है साली। मादरचोद की बच्ची ऑखें दिखाती है।
वो रुक्मणी के मुँह पर सटा सट थप्पड़ों की बरसात कर देता है। थप्पड़ों की आवाज़ से रानी को होश आता है
और वो रुक्मणी को हिम्मत के हाथों पिटता देख हिम्मत का हाथ पकड़ लेती है।
रानी; बस बापू क्यों गोबर पर तलवार मार रहे हो।
माँ कुछ नहीं कहती इसका मतलब ये नहीं की वो बेजान है।
जाओ यहाँ से हमे अपने हाल पर छोड दो।
हिम्मत;रानी और रुक्मणी को घूरता हुआ हवेली के बाहर निकल जाता है।
रानी;माँ चुप हो जाओ चुप हो जाओ माँ।
बापु पागल हो गये हैं देवा को बताना पड़ेगा वरना वो पता नहीं क्या कर बैठेंगे।
रुक्मणी का दिल भी धड़कने लगता है हिम्मत बन्दूक लेकर गांव में गया था।
उधर से देवा अपने खेत से काम करके अपने घर की तरफ लौट रहा था।
और इधर से हिम्मत अपने कार में शराब पीता हुआ उसी रास्ते पर आ रहा था।
अचानक दोनों एक दूसरे के आमने सामने आ जाते है।
चररररर चरर की आवाज़ के साथ हिम्मत ब्रेक लगा देता है।
देवा बस कार के नीचे आते आते ही बचता है।
देवा;हिम्मत की तरफ देखता है और बिना कुछ बोले सर झुकाये आगे बढ़ जाता है।
हिम्मत;कार से उतरता है और देवा के सामने आ जाता है।
क्यूं बे कुत्ते अभी कार के नीचे आ जाता तो....
देवा;माफ़ करना मालिक मैंने आपकी कार देखी नही।
हिम्मत;शराब के नशे में धुत्त था।
मालिक के बच्चे हरामी साले कहाँ देख के चल रहा था। आईन्दा मेरे सामने दिखाई भी दिया न तो....
इस में की सारी गोलिया तेरे भेजे में उतार दूँगा।
देवा;दोनों हाथ जोड के हिम्मत से माफ़ी माँगता है।
हिम्मत की आवाज़ सुनके आस पास के खेत में काम करने वाले भी वहां जमा हो जाते है।
इसलिए हिम्मत राव बात को आगे नहीं बढाता।
वो तो बस चाहता था की देवा कुछ उल्टा सीधा कहे या कुछ बोले के वही उसका काम तमाम कर दे....
मगर लोगों की मौजूदगी को देखते हुए हिम्मत अपने कार में बैठ के बिजली की तेजी से वहां से चला जाता है।
लोग हिम्मत को उसके जाने के बाद बुरा भला कहते है मगर देवा बिना कुछ कहे अपने घर की तरफ चल देता है।
हिम्मत;दिल ही दिल में सोचते हुए इस हरामी के लिए मुझे शहर ही जाना पडेगा।
अब बहुत हुआ। हाँ बहुत हुआ। वो कार शहर की तरफ मोड देता है।
जब देवा घर पहुँचता है तो ममता भागते हुए देवा से आके लिपट जाती है।
ममता;माँ देखो ना भैया आ गये है।
रत्ना;भी दौड़ते हुए देवा के क़रीब आ जाती है।
दोनो एक दूसरे की ऑखों में देखने लगते है।
मगर दोनों कुछ नहीं कहते।
रत्ना जैसे सारे गिले शिकवे भूलने को तैयार थी उसका बेटा देवा जो घर आ गया था।
ममता ;अब्ब यही खड़े रहोगे या अंदर भी चलोगे। आओ मैंने तुम्हारे लिए गरम गरम हलवा बनाई हूँ।
देवा;अपने रूम में चला जाता है और नहा धोके खाना खाने बैठ जाता है।
खाना खाते खाते भी सिर्फ ममता बड़ बड करती है। देवा और रत्ना चुप चाप खाना खाते है।
मगर रत्ना बार बार चोर नज़रों से देवा को देखती रहती है।
रत्ना खाना ख़तम करके अपने रूम में चलि जाती है।
ममता भी खाने के प्लेटें साफ़ करने बैठ जाती है।
देवा ममता को देखता हुआ रत्ना के रूम में चला जाता है
देवा; माँ...
रत्ना; उस वक़्त आइने के सामने अपने बाल संवार रही थी देवा के मुँह से माँ सुनके वो मुड के देखती है।
और भागते हुए देवा की छाती से जाके लिपट जाती है।
रत्ना;क्यूँ चला गया था तू मुझे छोड के।
इतना बड़ा हो गया है तू की अपनी माँ से नाराज़ होके चला गया कितनी परेशान थी मै। तुझे पता है।
देवा;रत्ना को अपनी बाहों में समेट लेता है।
नही माँ मै तुमसे नाराज़ नहीं था।
बस उस वक़्त पता नहीं क्या हो गया था । मुझे घर आने को दिल नहीं कर रहा था अब आ गया हूँ ना । अब कही नहीं जाऊँगा।
रत्ना;कभी मुझे छोड के मत जाना अरे सब कुछ तो तेरा है ये घर सारी ज़मीन जायदाद ममता मैं.....
रत्ना के मुँह से अचानक ही निकल जाता है मैं....
देवा और रत्ना की ऑखें टकराती है।
और देवा की पकड़ रत्ना की कमर पर थोड़े कस जाता है।
उन दोनों के होंठ एक दूसरे के इतने क़रीब थे की दोनों एक दूसरे की साँसें भी महसूस कर सकते थे।
देवा; धीरे से कहता है।
सब कुछ मेरा है माँ।
इससे पहले की रत्ना कुछ कहती ममता के क़दमों की आहट दोनों के कानो में आ जाती है और
रत्ना देवा से अलग होकर बाहर निकल जाता है।
देवा एक तरफ खुश था की उसकी माँ पहले जैसा बर्ताव उसके साथ कर रही है।
मगर दूसरी तरफ देवा को बहुत ज़्यादा उत्सुक्ता भी थी ये जानने की आखिर रत्ना के दिल में है क्या।
ममता ;भैया आपका बिस्तर लगा दी हूँ । आप आराम करो।
देवा;ममता का हाथ पकड़ के अपने पास खीच लेता है
तू नहीं चलेंगी।
ममता ;देवा के मुँह पर हाथ रखते हुए माँ सुन लेगी धीरे बोलो।
देवा;सुनने दे चल मेरे साथ।
ममता; नहीं तुम अभी जाओ मै रात में माँ के सोने के बाद आती हूँ।
देवा;जल्दी आजा।
देवा; अपने रूम में जाने लगता है तो रत्ना उसे आवाज़ दे के अपने पास बुला लेती है।
रत्ना;अरे बेटा वो जहाँ ममता के रिश्ते की बात चल रही है ना वहां कल तुझे जाना है।
उन लोगों के कई बार बुलावा भेज चुके है तुझे याद कर रहे थे । जा एक दो दिन के लिए मिल आ। देवकी से भी और उन लोगों के बारे में भी पता कर लेना।
देवा;ठीक है माँ मै कल सुबह चला जाऊँगा।
रत्ना;ठीक है।
रत्ना और ममता एक रूम में आस पास सोई हुई थी। दोनों को लेटे हुए एक घण्टा बीत चूका था।
ममता उठके रत्ना की तरफ देखती है और रत्ना को गहरी नींद में सोता देख चुपचाप उठके अपने भाई के रूम में चली जाती है।
ममता के रूम में घुसते ही रत्ना टक से अपनी ऑखें खोल देती है। शायद वो देखना चाहती थी की ममता जाती है या नहीं अपने भाई से मिलने
रत्ना भी चुपचाप उठके देवा के रूम की खिडके के पास जाके खड़ी हो जाती है।
अंदर देवा और ममता एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे के मुँह में मुँह डाले एक दूसरे को मसल रहे थे।
ममता; भैया कहाँ थे इतने दिनों से । देखो न मेरी चूत सुख गई है आपके रस के बिना।
देवा;मेरा भी मुर्झा सा गया है बहना तेरी चूत के बिना।
ममता; इसे तो मै अभी गरम कर देती हूँ।
वो नीचे बैठ के देवा का पजामा उतार देती है और अपने हाथ में देवा का लंड पकड़ के पहले उसे चुमती है
और फिर मुँह में लेकर उसे गीला कर देती हैं गलप्प गलप्प्प।
देवा अपने बिस्तर पर लेट जाता है और ममता के कपडे भी निकाल के उसे पूरी नंगी कर देता है।
बाहर खड़ी रत्ना को अपने बेटी की हरक़तों पर यक़ीन नहीं होता मगर इस बार रत्ना की नज़र मे
ममता की चूत नहीं बल्कि देवा का वो मुसल लंड था। जिस पर से रत्ना की नज़र नहीं हट पा रही थी।
और ममता थी की बिना रुके देवा के लंड को मुँह में अंदर बाहर किये जा रही थी।
गलप्प गलप्प गलप्प करके चूस रही थी चाट रही थी।
देवा की नज़र अचानक ही खिडकी की तरफ जाती है और वहां खड़ी रत्ना उसे दिख जाती है।
देवा;आहह तेरी माँ रत्ना को चोदूँ धीरे धीरे चूस
ममता।
आह मेरा लौडा कैसा है ममता।
ममता;बहुत मीठा है भइया।
देवा;माँ को पसंद आएगा ऐ।
रत्ना की चूत से पहला पानी का कतरा निकल जाता है।
ममता; हाँ। माँ की चूत भी अभी जवान है गलप्प गलप्प।
ये तो हर किसी को पसंद आने जैसा है गलप्प गलप्प।
देवा; बस कर अब नहीं रुका जाता।
देवा ममता को लिटा देता है और उसकी चूत को सहलाने लगता है।
ममता; आहह क्या कर रहे हो भाई।
देवा; आज तो बहुत चिकनी लग रही है तेरी चूत ममता।।
ममता ;आपको ऐसे ही पसंद है ना भाई।
देवा; हाँ बस एक बार माँ की मिल जाए मुझे। फिर तुम दोनों माँ बेटी को रात भर नंगा करके चोदुँगा मैं।
ममता ;अभी बहन चोद लो माँ को बाद में पेल देना। आओं अंदर डाल दो भैया मेरी चूत में चींटियां रेंग रही हैं।
देवा;ममता को अपने ऊपर खीच लेता है।
आज तू मेरी सवारी कर चल चढ़ जा मेरे लंड पर।
ममता अपनी कमर उठाके अपने भाई के लौडे को अपनी चूत से मिलाती है और घच से
लंड पर धीरे धीरे बैठने लगती है जिससे लंड चूत में घुसता चला जाता है।
ममता; हाय मर गयी उन्हह।
देवा;चल चोद अपने भाई को आह्ह्ह्ह।
ममता; हाँ ऐसे न आहहह्ह्ह मेरी
आह माँ आह्ह्ह्ह्ह्ह।
ममता देवा के ऊपर सवार होके सटा सट उसके लंड को अपनी चूत की गहराइयों में लेने लगती है।
ये नज़ारा देख रत्ना का जिस्म इतना गरम हो जाता है जैसे अभी अभी वो भट्टी में से तप के आई हो।
रत्ना की चूत थी की पिघलते जा रही थी और पिघला हुआ गरम गरम पानी रत्ना के जांघो से होता हुआ नीचे गिर रहा था।
की तभी देवा और रत्ना की नज़र एक हो जाती है
और रत्ना मुँह पर हाथ रख के वहां से अपने रूम में भाग जाती है।
इधर शालु के घर पर सभी गहरी नींद में सो चुके थे।
सबसे पहले नीलम के बापु उसके पास नीलम कुछ दूरी पर शालु और उसके पास पप्पू सोया था।
जहां एक तरफ शालु की चूत उसे सोने नहीं दे रही थी वही पप्पू का लंड भी पायजामे के अंदर चीख चीख के माँ माँ बुला रहा था।
पप्पू अपनी एक टाँग शालु के जांघ पर रख देता है।
शालु गर्दन घुमा के पप्पू की तरफ देखती है।
पप्पू आगे सरकता है और शालु के पीछे से चिपक जाता है।
पप्पू का लंड शालु की गाण्ड के दरार में आगे पीछे होने लगता है।
देवा की लंड से मार खा चुकी शालु की गण्ड जग जाती है और शालु सिसकारियां भरने लगती है।
पप्पू अपने एक हाथ से शालु के ब्रैस्ट मसलने लगता है।
और धीरे से शालु के कान में कहता है।
माँ दूसरे रूम में चलो ना।
शालु;अहह तू पहले जा मै आती हूँ।
पप्पू;उठके दूसरे रूम में चला जाता है और वहां जाके अपने सारे कपडे उतार देता है और वो नंगा होके शालु का इंतज़ार करने लगता है।
कुछ देर बाद शालु भी वहां आ जाती है और दरवाज़ा बंद करके अपने कपडे पप्पू को देखते हुए निकाल देती है।
शालु पप्पू के ऊपर आके चिपक जाती है।
ले आ गई तेरी माँ ।बोल क्यों बुलाया है।
पप्पू;तुझे चोदना है माँ।
शालु;तो चोद ना । रोका किसने है दोनों माँ बेटे एक दुसरे से चिपक जाते है।
और शालु अपनी ज़ुबान पप्पू के मुँह में डालके उससे ज़ुबान चुसवाने लगती है।
पप्पू;का लंड शालु अपने हाथ में ले के उसे सहलाने लगती है।
पप्पू;आहह ज़्यादा मत हिला माँ झड जाऊँगा।
शालु;तेरा लंड मेरी चूत को ठन्डा नहीं कर पाएगा बेटा।
इसे देवा जैसा मरद चाहिए।
पप्पू;कर लुँगा माँ तुम बस देखते जाओ।
पप्पू;शालू की दोनों टाँगें खोल देता है और उसके पैरों के बीच जाके अपने लंड को शालु की चूत पर घीसने लगता है।
शालु; सुबह से बेचैन थी देवा ने रात भर उसे चोद के उसे पागल सा बना दिया था।
उपर से पप्पू बिना घुसाए ऊपर ऊपर रगड रहा था।
शालु;आहह हरामी घुसाता क्यों नही।
पप्पू;जल्दी से अपना लंड शालु की चूत में घूस्सा देता है
और उसके ऊपर लेट के लंड अंदर बाहर करने लगता है।।
शालू; आहह और अंदर घुसाता क्यों नही आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्।
पप्पू;ज़ोर ज़ोर से लंड को अपनी माँ की चूत के अंदर तक पेलने लगता है।
शालु;पीछे से ले मेरी। बेटा।
शालु कुतिया बन जाती है और पप्पू अपने लंड को हाथ में पकड़ के पीछे आ जाता है।
जैसे ही पप्पू शालु की चूत पर लंड लगाता है शालु उससे कहती है।
शालु;वहाँ नहीं गाण्ड में पेल दे बेटा।
और पप्पू अपना लंड पीछे से शालु की गाण्ड में पेल देता है।
शालु;आहह मेरी गाण्ड में ठीक से जाता है तेरा आहह मारते जा रे....और जोर जोर से अपनी माँ की गांड मार बेटा। पेल जोर जोर से मेरी गाँड में बहुत खुजली हो रही है बेटा आह्ह्ह्ह।
पप्पू;दोनों हाथों में अपनी माँ की कमर पकड़ के सटा सट पीछे से शालु की गाण्ड मारने लगता है और शालु भी कमर हिलाते हुए पप्पू का लंड गाण्ड में लेती चली जाती है।
ज्यादा देर भी नहीं गुज़रती की पप्पू के धक्के बढ़ जाते है और एक चीख़ के साथ पप्पू अपना माल शालु की गाण्ड में छोड़ने लगता है।
शालु;आहह हरामी तू किसी काम का नहीं है।
शालु;अपनी दोनों टाँगें खोल के लेट जाती है और पप्पू का सर पकड़ के अपनी चूत से लगा देती है।
मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घूस्सा अब।
पप्पू;अपनी माँ के ग़ुस्से को शांत करने के लिए ऐसा ही करता है और शालु की चूत को और गाण्ड को अपनी जीभ से चाटने लगता है गलप्प गलप्प्पप्प।
शालु;आहह ऐसे ही मेरे लल्ला आहह।
चाट मेरी चूत को उसे तैयार कर देवा के लंड के लिये।
आह मेरी गाण्ड में भी तेरी ज़ुबान घूस्सा दे रे।
शालु;कमर उछालते हुए पप्पू की ज़ुबान का मज़्ज़ा लेने लगती है और फिर पप्पू के बालों को पकड़ के
उसे अपनी चूत पर दबाते हुए चीख़ पडती है आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
एक तेज़ धार पप्पू के मुँह पर छूटने लगता है और शालु निढाल से पड़ जाती है।
उधर हिम्मत राव शहर में अपने खास आदमी से जाके मिलता है।
वो खास आदमी था।
विक्रांत
विक्रान्त एक पेशेवर कातिल था उसका काम लोगों को लूटना डकैती और खून करना था।
पूलिस की फाइल्स में विक्रांत के नाम पर कई गुनाह दर्ज थे।
और हिम्मत राव विक्रांत की मदद से रुक्मणी और देवा का काम तमाम करना चाहता था।
विक्रान्त हिम्मत से मिलता है।
विक्रान्त;कैसे हैं जागीरदार साहब।
हिम्मत;ठीक तुम कैसे हो।
विक्रान्त;दुआ है आपकी और कैसे आना हुआ आपका।
हिम्मत;किसी का काम करना था तुम्हारे हाथो।
विक्रान्त; हो जाएंगा। काम जो आप चाहे किमत जो मै चाहूँ।
हिम्मत;मंज़ूर है।
दोनो बातें करने बैठ जाते है और हिम्मत विक्रांत को सारी बात समझा देता है।
हिम्मत की बात ख़तम होने पर
विक्रान्त: कहता है आप फिकर ना करें जागिरदार सहाब
मै अगले हफ्ते आपके गांव आऊँगा आप मुझे उन दोनों के हुलिये बता देना समझ लो आपका सर दर्द हमेशा हमेशा के लिए खतम।
हिम्मत;विक्रांत को कुछ एडवांस पैसे दे कर वहां से चला जाता है।
हिम्मत और विक्रांत बहुत पुराने दोस्त थे। जब भी हिम्मत को किसी को अपने रास्ते से हटाना होता तो उसे विक्रांत याद आता।
हिम्मत बहुत खुश था की कुछ ही दिनों में देवा और रुक्मणी का काम हमेशा हमेशा के लिए ख़तम होने वाला है।
अपडेट 68
रात ममता को जम कर चोदने के बाद देवा गहरी नींद में सोया हुआ था । सुबह के 8 बज रहे थे।
मगर आज देवा न तो सुबह जल्दी उठा था और न अपने खेत में गया था।
ममता ;अपनी माँ के पास जाके सुबह सुबह लेट गई थी।
रत्ना;सुबह का नाश्ता बनाकर देवा को उठाने के लिए उसके रूम में चली जाती है।
देवा उस वक़्त सिर्फ लुंगी में सोया हुआ था पास ही में उसकी चड्डी पड़ी हुई थी।
लूँगी में तम्बू बना हुआ लंड रत्ना को दावत दे रहा था।
रत्ना;देवा के काँधे को हिलाने लगती है।
उठ भी जा बेटा बहुत देर हो गई है।
देवा; सोने दो न माँ अभी अभी तो आँख लगी थी मेरी।
रत्ना;रात भर जागेगा तो सुबह आँख कैसे खुलेंगी तेरी। चल उठ जा।
देवा झटके से उठके बैठ जाता है और रात का वो रत्ना का खिडके से झाँकना उसे याद आ जाता है।
माँ तुम भी न। क्या वक़्त हुआ है अभी।
रत्ना;सूरज सर पर आ गया है और तुम यहाँ हो।
याद है ना अपने मामा के घर भी जाना है तुझे आज
देवा;हाँ याद है ना माँ।
वैसे माँ आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो इस साडी में।
तूम तो साडी पहनती ही नही।
रत्ना;बस बस मै ममता के लिए पूजा करने मंदिर गई थी इसलिए ये साडी पहन ली।
देवा;रत्ना का पल्लू पकड़ के उसे देखने लगता है।
बहुत खूबसूरत साडी है ये।
और अचानक पल्लू रत्ना की छाती से सरक जाता है।
रत्ना;उसे ठीक करने लगती है मगर उससे पहले देवा अपना हाथ सीधा रत्ना की ब्रैस्ट पर रख के उसे ज़ोर से मसल देता है।
रत्ना;आहह उन्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह।
एक सिसकी रत्ना के मुँह से निकल जाती है।
क्या कर रहा है रे
देवा;कुछ भी नहीं माँ।
रत्ना;देवा का हाथ नहीं हटाती बस मुँह से उसे रुकने के लिए कहती है। रात का नशा अब भी रत्ना की ऑखों में छाया हुआ था।
चुदाई तो ममता की हुई थी मगर चूत रत्ना की सुलग रही थी।
देवा;बहुत नरम है ये।
रत्ना; छोड दे हरामी मेरे हाथों की मार भूल गया तु।
देवा;नही भुला माँ।
वो रत्ना की गर्दन को चुमने लगता है।
रत्ना;बस कर रे । ममता समझ रखा है क्या मुझे।
देवा;ममता तो बड़े प्यार से देती है रात भर। तू तो देख चुकी है माँ।
बस एक बार मुझे ये चखने दे।
देवा रत्ना की साडी के ऊपर से उसकी सुलगती चूत पर हाथ रख देता है।[ /b]
चूत पर हाथ पडते ही रत्ना बहक जाती है उसे ऐसे लगता है जैसे किसी ने तपते हुए रेत पर पानी के कुछ क़तरे डाल दिए हो।
रत्ना;नही छोड़ मुझे। मै तेरी बातों में नहीं आने वाली।
ये पाप मै नहीं करुँगी आह्ह्ह्ह।
देवा;माँ शहर से मै दो मंगलसुत्र लाने वाला हूँ।
एक ममता की शादी के लिए और एक तेरे लिये।
रत्ना; ये सुनके देवा को धक्का देके उससे अलग हो जाती है।
क्या बकवास कर रहा है तू होश में तो है।
देवा;लपक के रत्ना का हाथ पकड़ के उसे अपने बेड पर गिरा देता है और उसके ऊपर सवार हो जाता है।
रत्ना;देवा से छूटने की लाख कोशिश करती है मगर देवा की मज़बूत पकड़ से वो निकल नहीं पाती।
देवा;हाँ माँ मै तुम्हें अपनी पत्नी बनाना चाहता हूँ बापु की मौत के बाद तुम बिल्कुल अकेली रह गई हो।
मै तुम्हे अपनी पत्नी बनाकर रात दिन चोदना चाहता हूँ। अगर तुम अपनी मर्ज़ी से हाँ कहती हो तो ठीक है।
वरना मै ज़बर्दस्ती भी कर सकता हूँ मगर अपनी बात से पीछे नहीं हटूँगा। मै बोल देता हूँ।
रत्ना;मैंने तुझे पैदा ही क्यों किया हरामी।
देवा;मुझे पैदा करके तूने बहुत अच्छा किया माँ वरना इस प्यासी चूत का कौन ख्याल रखता।
देवा रत्ना की चूत को साडी के ऊपर से सहलाने लगता है और दूसरे हाथ से रत्ना के निप्पल्स को भी मरोडने लगता है।
रत्ना तडपने लगती है। एक तरफ आज देवा ने वो बात कहा था जो वो खवाब में भी नहीं सोच सकती थी।
वो हैरान थी की देवा में इतनी हिम्मत आई कहाँ से शायद क़सूर रत्ना का ही था।
देवा;आज दोपहर में मै मामा के यहां जा रहा हूँ वापस आने के बाद मुझे तुम्हारा जवाब चाहिए।
सोच लो मेरी पत्नी बनकर चुदवाना चाहती हो या कुछ और फैसला तुम पर छोडता हूँ।
देवा; रत्ना के लरज़ते होठो को चूम के उसके ऊपर से उठके बाहर चला जाता है।
और नहा धोकर अपने मामी देवकी के घर की तरफ अपना ट्रेक्टर बढा देता है।
रत्ना;हैरान परेशान से देवा की बात पर सोचने बैठ जाती है।
उधर जब हिम्मत राव को ये बात पता चलती है की देवा अपने मामा के यहाँ कुछ दिन के लिए गया है।
तो उसे हंसी आ जाती है देवा की किस्मत पर। मगर
अगले ही पल हिम्मत का शातिर दिमाग काम करता है और वो खुद से बात करने लगता है।
हिम्मत;देवा गया है अपने मम्मी के यहां । इसका मतलब रत्ना और उसकी बेटी घर में अकेली होगी।
अगर विक्रांत जल्दी आ जाये तो दोनों माँ बेटी का काम उनके घर में करवा दूंगा और देवा को रास्ते में ही।
खुद की बात पर मुस्कराता हुआ हिम्मत हुक्के के कश भरने लगता है।
देवा दोपहर तक अपने मामी देवकी के घर पहुँच जाता है।
देवा दरवाज़ा खटखटाता है।
दरवज़ा कौशल्या खोलती है।
कौशल्या;देवा तुम अचानक से आ गए। आओ अंदर आओ किसी के हाथ से संदेशा भिजवा देते। कैसे हो... बैठो ना।
देवा;हाँ वो ममता के रिश्ते की बात चल रही है तुम्हारे गांव में तो सोचा देख आता हूँ उन लोगों का रहन सहन।
कौशल्या;अरे बहुत अच्छा किया तुमने बहुत याद आ रही थी तुम्हारी।
देवा; सच्ची...... वो कौशल्या की बात पर उसे घुरने लगता है।
कौशल्या;शरमा जाती है अब ऐसे घूरो मत मुझे।
देवा;मामी और रामु कहाँ है कोई दिखाई नहीं दे रहा।
कौशल्या;अपनी नज़रें नीचे ज़मीन की तरफ रख के धीमी आवाज़ में उससे कहती है वो खेत में गए है पांच बजे से पहले नहीं आने वाले।
तूम हाथ मुंह धो लो। मै चाय बनाकर लाती हूँ।
कौशल्या;जैसे ही मुडती है देवा उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड लेता है।
कौशल्या;आह अभी नहीं देवा।
देवा;मैंने तो कुछ किया भी नहीं भाभी।
कौशल्या;भाभी नहीं पत्नी हूँ मै तुम्हारी पतिदेव। ये जो मेरे कोख में पल रहा है ये तुम्हारा ही खून है।
देवा;बहुत याद आ रही थी तेरी भाभी मुझे। जो बात तेरी चूत में है वो कही नहीं दिखती मुझे।
कौशल्या;आहह चूत तो आपको देख कर ही खुश हो जाती है। मेरे सैया अब तुम आ गये हो। जी भर के ले लो मेरी। कोई नहीं रोकेंगा तुम्हें।
देवा; मुँह में ले जल्दी।
कौशल्या; हाँ...
वो नीचे बैठ जाती है और हक़ीकत बात यही थी की कौशल्या दिल से देवा को अपना पति मानती थी।
दुनिया की नज़र में रामु उसका पति था मगर असली ख़ुशी उसे देवा ने ही दिया था।
वो नीचे बैठ के देवा का पेंट उतार देती है और झट से अपने नाज़ुक हाथों में देवा का लंड पकड़ के उसे चुम लेती है।
कौशल्या; हाय्य्य ये मुआ मुझे बहुत तड़पाता है कहके देवा का लंड चूसने लगती है।गल्प गल्प गलप्पप्पप्प।