देवा;अभी कहा से मरेंगी तू साली अभी कुछ किया भी नहीं मैंने तो.....
देवा अपने लंड को सुपाडे तक बाहर खीचता है और फिर से उसे देवकी की चूत को चीरता हुआ अंदर तक आगे पीछे करने लगता है।
जहां रामु पहुँच भी नहीं पाता था। उस सरहद के पार जा कर अपने नाम का परचम लहराने वाला देवा का वो मज़बूत लंड देवकी की चूत को अंदर तक चीर के रख देता है।
देवकी;आहह मार ड़ालता है तू अपनी मामी को हर बार।
हर औरत देवा के लंड के लिए तरसती थी मगर जब वही लंड चुत में पेला जाता तो वही औरत पनाह भी मांगती थी।
वही हाल देवकी का भी था। रात से देवा के लंड के लिए तडपने वाली देवकी की साँस रुक रुक के चलने लगती है। हर धक्का जानलेवा लगता है उसे।
वो चिखना चाहती है मगर उसके चीख़ निकलने से पहले देवा अगला धक्का देकर उसकी चीख़ को हलक के अंदर ही दबा देता है।
देवा;मामी तेरी चूत में जो बात है वो किसी की चूत में नहीं भाभी में भी नहीं आह्ह्ह।
देवकी;जानती हूँ तुझे बड़े गाण्ड वाली औरतें पसंद है बहुत बड़ा गांडु हैं तू।
तू पता नहीं कितनो की गाण्ड मार चुका है।
आह हरामी धीरे कर ना।
देवा;तेरी भी लुँगा साली चिंता क्यों करती है।
दोनो मामी भांजे एक दूसरे से चिपक कर एक दूसरे के होठो को चुमते हुए अपने रास लीला में लगे हुए थे। इस बात से अनजान की कोई खिडकी के बाहर खडा
उन दोनों की बातें भी सुन रहा है और उन दोनों को देख देख कर अपनी चूत भी गीला कर रहा है।
कोमल देवा के गीले कपडे देने देवकी के घर आई थी मगर अंदर का नजारा देख उसके पांव रुक जाते है और वो सोच में पड़ जाती है की एक आदमी मम्मी और भाभी दोनों को कैसे चोद सकता है।
देवकी; की वो बात की तुझे बड़े गाण्ड वाली औरतें पसंद है कोमल के कानों में घुमने लगती है और वो वहां और देर तक रुक नहीं पाती। धीमे धीमे कदमो से वो अपने घर में लौट आती है और सीधा जा कर अपने बिस्तर पर उल्टा लेट जाती है।
रानी;माँ मरहम सिर्फ ज़ख़्म पर काम करता है जो दर्द दिल में है उसका क्या।
रुक्मणी; मैं समझी नहीं रानी।
रानी;माँ बापू बहुत ख़राब इंसान है मुझे नफरत होने लगी हैं उनसे अब।
रुक्मणी;बस बेटी वो तेरे बापु है। जैसे भी हैं मेरे पति है और मेरे माँ बाबा ने मुझे एक ही सिख दे कर यहाँ भेजे थे की चाहे इस घर से मेरी अर्थी निकले पर मै अपना पत्नी धर्म निभाऊँ।
तू और परेशान न हो लेट जा।
रानी; बेड पर उल्टा लेट जाती है।
रुक्मणी;कहाँ दर्द हो रहा है बेटी।
रानी;कमर में और यहाँ जांघ पर भी लगा है।
रुक्मणी;तू सलवार उतार दे और ये कुर्ती भी।
रानी;माँ मैं....
रुक्मणी;अरे पगली तू मेरी बच्ची है एक। यहाँ तेरे मेरे सिवा और है भी कोई नही।
मुझसे कैसी शरम।
रानी;एक पल के लिए खामोश हो जाती है और फिर मुस्कुराते हुए अपनी सलवार और उपर का कुर्ता निकाल के बेड के एक तरफ रख देती है वो पेंटी और ब्रा में बेड पर लेट जाती है।
रुक्मणी;हाथ में मरहम लेकर धीरे धीरे रानी के पेट पर लेप लगाने लगती है।
दोनो औरतें बेचैन भी थी और बेक़रार भी।
जहां एक रानी थी जिसे देवा चोद चूका था वही रुक्मणी थी जो अपने बदन की आग में दिन रात जल रही थी। पति का सुख उस बेचारी को मिल नहीं पाया था और देवा था जीसने उसके तन बदन में एक ऐसी आग लगा दिया था जिसका इलाज सिर्फ और
सिर्फ देवा के पास था । मगर वो बेरहम अभी और सितम ढाने वाला था।
रानी;अपनी ऑंखें बंद कर लेती है।
नाजुक कोमल मख़मली हाथ जैसे जैसे रानी के पेट से होते हुए ऊपर और नीचे कमर की तरफ बढ़ने लगते है। वैसे वैसे रानी मदहोश होने लगती है। अभी तक उसकी मन में अपनी माँ को लेकर कोई गलत बात नहीं थी। मगर ना जाने क्या था रुक्मनी के हाथों में उसकी हथेली की तपीश पाकर रानी बेचैन सी होने लगती है और हलकी हलकी सिसकारियां भरने लगती है।
उसकी सिसकारियाँ रुक्मणी को भी सुनाये दे रही थी मगर माँ होने के नाते वो अपनी सीमा जानती थी।
रानी;हाथ पीछे ले जाकर अपना ब्रा का हुक खोल देती है। माँ इसे भी निकाल दो वरना ये भी गन्दी हो जाएगी मरहम से।
रानी का इशारा अपनी पेंटी की तरफ था।
रानी ने ऐसी बात कही थी जिसे सुनकर एक तरफ रुक्मणी का दिल जोर से धड़का था और दूसरी तरफ उसके हाथ काँपने लगे थे।
रुक्मणी;कांपते हाथों से रानी की पेंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगती है।
जैसे जैसे पेंटी नीचे होते जाती है।
कमर के उभार रुक्मणी की ऑखों के सामने आते चले जाते है ।
रुक्मणी की नज़रें रानी की कमर से हटने का नाम नहीं ले रही थी।
रानी;अपनी दोनों टाँगें थोड़ा खोल देती है जिससे उसकी गाण्ड की सुराख़ और चूत की दरार पीछे से रुक्मणी को नज़र आने लगती है।
इससे पहले रुक्मणी ने कभी भी किसी जवान लड़की की चूत को इतने क़रीब से नहीं देखी थी।
एक वासना भरी आवाज़ रुक्मणी की चूत से निकलती है और उसके हाथ खुद ब खुद रानी की कमर को दोनों हाथों में जकड लेते हैं।
रानी;माँ सीईईईईईइ।
रुक्मणी;एक बात पूंछूं।
रानी; हाँ माँ पुछो ना।
रुक्मणी;तेरे बापू तुझे देवा की रांड क्यों कह रहे थे। क्या देवा ने तुझे छुआ है।
रानी; हाँ उसने मुझे छुआ है।
रुक्मणी;कहाँ कहाँ।
रानी;जहाँ तुम छु रही हो । कमर पर।
रुक्मणी की उँगलियाँ रानी की गाण्ड के सुराख़ को सहलाने लगती है।
और उँगलियों का कुछ हिस्सा चूत के लिप्स को भी छूने लगता है।
रानी;आहह माँ।
रुक्मणी;बोल और कहाँ....
रानी पीठ के बल लेत जाती है और रुक्मणी के हाथों को अपनी चूत के ऊपर रख देती है।
यहाँ अंदर तक आह्ह्ह्ह।
रुक्मणी की हालत उस वक़्त तक बहुत ख़राब हो चुकी थी अपनी बेटी के साथ ऐसी नंगी बातें करने से उसकी चूत में बस एक इच्छा बन रही थी की कुछ भी कोई भी चीज़ उसकी चूत के अंदर जाए।
रुक्मणी;मुझे कब चोदेगा देवा आह्ह्हहह रानी और अंदर नही।
रानी की तीन उँगलियाँ रुक्मणी की चूत में घुस चुकी थी लंड के लिए तरसने वाली रुक्मणी के लिए ये बहुत थी। उसकी कमर ऊपर नीचे होने लगती है ।
रानी की ऊँगलियाँ इतने तेजी से आगे पीछे अंदर बाहर होने लगती है की रुक्मणी चीख पड़ती है मगर ठीक वक़्त पर रानी अपने मुँह में रुक्मणी का मुँह लेकर उसकी आवाज़ को अपने अंदर समा लेती है।
रुक्मणी;आहह रानी मेरी चूत आह्ह्ह्ह्ह्ह।
उसका कुछ कर बेटी कुछ कर ना रे.....
रानी;अपनी माँ को बेड पर लिटा कर उसके ऊपर चढ़ जाती है और धीरे धीरे ब्रेस्ट को चुमते हुए पतले नाज़ुक पेट से होते हुए चूत तक पहुँच जाती है।
जैसे ही रानी अपनी ज़ुबान बाहर निकाल कर रुक्मणी की चूत पर लगाती है रुक्मणी बेहोश होने लगती है।
रुक्मणी;आहह मर गयी उईईईईई माँ....
आह नही बस नही।
वहाँ नही ना।
रानी अपनी ज़ुबान को रुक्मणी की रसीली चूत के अंदर तक डाल कर क्लाइटोरिस को हल्के हलके दाँतो से काटने लगती है । रुक्मणी दोनों हाथों से रानी के सर
को पकड़ लेती है और कमर को ऊपर नीचे पटकने लगती है । उसके मुँह से बस यही निकलता है।
रुक्मणी;छोडो मुझे रानी बिटिया छोडो मुझे।
आह चाट चाट कर काट खाओ मेरे चूत को आहह माँ
मेरी चूत में ये क्या हो रहा है।
वो रुक्मणी जो शायद भूल ही गई थी की उसके पास एक खूबसूरत चूत भी है। आज पहली बार कई सालों के बाद ऐसा महसूस कर रही थी। जैसे उसे पंख
निकल आये हो और वो ऊँचे आकाश में उड़ रही हो। उसके ऑखें बंद हो जाती है जिस्म ऐंठते जाती है और कमर तेज़ रफ़्तार से ऊपर नीचे होने लगती है।
एक चीख़ मुँह से निकलती है और रुक्मणी अपनी बेटी रानी के मुँह पर अपना नमकीन पानी छोडने लगती है।
रानी;एक एक कतरा पीती चली जाती हैं गलप्प गलपप।
वो पानी इतना ज़्यादा था की रानी का पूरा चेहरा भीग जाता है। रुक्मणी रानी को अपने ऊपर खीच लेती है और उसके चेहरे को चाटने लगती है।
रुक्मणी;तूने मुझे वो सुख दिया है रानी जो मै शायद भूल ही गई थी।
इधर गांव में ही शालु के घर उसकी बेटी रश्मि अपने ससुराल से सुबह आ चुकी थी।
सुबह से पप्पू अपनी बहन को ताड़ रहा था और ये बात रश्मि भी जानती थी।
वो दोनों तो बस अकेले रहने का मौका ढूंढ़ रहे थे। रात का खाना खाने के बाद पप्पू अपने रूम में सोने चला जाता है और रश्मि नीलम के साथ बातें करने बैठ जाती है।
शालु;अपने काम जल्दी जल्दी निपटाकर पप्पू के रूम में चली जाती है।
पप्पू अपने बेड पर नंगा लेटा हाथ में लंड पकडे उसे रश्मि के नाम से हिला रहा था उसकी आँखे बंद थी और ध्यान में सिर्फ रश्मि छाई हुई थी।
शालु रूम के अंदर चलि आती है उसके आने से पप्पू ऑंखें खोल देता है।
शालु मुस्कुरा देती है अरे बाप रे तू बड़ा बेसब्र हो रहा है आज कल।
पप्पू;माँ तुम......
शालु;क्यूँ कोई और आना चाहिये था क्या।
पप्पू;नहीं वो तो.....
शालु;अरे इसे क्यों छुपा रहा है बता मै इसे ठीक करती हूँ वो पप्पु के लंड को हाथ में पकड़ती है और गलप्प गलप्प्प जल्दी से उसे अपने हलक में उतार देती है।
रश्मी;पानी पीने के लिए किचन में आती है मगर उसे पप्पू के रुम से सिसकारियों की आवाज़ सुनाई देती है।
उसे लगता है के पप्पू मुठ मार रहा है। वो धीरे धीरे दबे पांव चलते हुए पप्पू के रूम में चलि जाती है और जाते ही उसके मुँह से चीख़ निकल पडती है।
रश्मी के मुँह में पप्पू का छोटा सा लंड आगे पीछे होने लगता है और इधर पप्पू की उंगलिया अपनी बहन की चूत में हलचल मचाने लगती है।
जैसे जैसे पप्पू की ऊँगली रश्मि की चूत में आगे पीछे
जाती है रश्मि के मुँह में पप्पू के लंड की पकड़ बढ़ती जाती है।
पप्पू;मेरी बहन आह्ह्ह। लगता है तेरा पति तुझे ठीक से नहीं करता आह्ह्ह्ह।
रश्मी;करता है भाई मगर बहुत जल्दी हार मान जाता है।
गलप्प उस में वो बात कहाँ जो देवा में और तुम में है। गलप्प गलप्प
आज तक उसके करने से मै वैसी गीली नहीं हो पाई जैसे तुम्हारे और देवा के करने से हो जाती हूँ गलपप गलप्प्प।
पप्पू;बस अब रुक जा वरना तेरे मुँह में मेरा माल निकल जाएगा।
पप्पू;रश्मि को लिटा देता है और उसके ऊपर के कपडे भी निकाल कर निप्पल्स को मुँह में लेकर चुसने लगता है गलप्प गलप्पप्प।
रश्मी की चूत पर पप्पू अपना लंड घीसने लगता है और निप्पल चुस्ने से उसके तन बदन में जो आग बढ़ रही थी पप्पू को डर था की वो उसे पूरी तरह बुझा पाएगा भी या नही।
वो निप्पल्स को चुसते हुए फिर से अपनी दो उंगलियाँ रश्मि की चूत में डाल देता है।
रश्मी;आहह हरामी हाथ कहाँ डाल रहा है वहां लंड है ना तेरे पास उसे मेरी चूत में डाल न आहह।
कहते है शादी के बाद लड़की भाई से भी बड़ी हो जाती है यही हाल रश्मि का भी था। अपने भाई के सामने सर न उठाने वाली रश्मि आज उसे खुलेआम गालिया दे रही थी और हैरत की बात तो ये थी की पप्पू को भी उसके मुँह से गालिया पसंद आ रही थी।
देवा जब भी पप्पू की गाण्ड मारा करता था। वो उसे गंदी गंदी गालिया दिया करता था। आज जब रश्मि उसे गालिया देती है तो पप्पू के सोये गाण्ड में से आवाज़ से आती है और देवा का वो कोहराम मचा देने वाला लंड उसे फिर से याद आ जाता है।।
पप्पू;हाँ छिनाल जानता हूँ तुझे लंड चाहिए ले अभी ड़ालता हूँ तेरे ओखली में।
वो रश्मि की दोनों टाँगें चौडी करके उसके बीच में आ जाता है और अपने लंड को रश्मी की चूत पर टीका कर सट से अंदर घूस्सा देता है।