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हाय रे ज़ालिम.......complete

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अपडेट 81

रत्ना ने देवा के खड़े लंड पर जो धोखा की थी उस बात से देवा थोड़ा परेशान था मगर वो हिम्मत नहीं हारा था। वो ये समझ रहा था की नीलम की वजह से शायद रत्ना ने उसे और कुछ करने नहीं दिया।

सुबह सुबह देवा तैयार होकर अपने खेत देखने चला जाता है वो अपने खेतों में काम कर रहा था की उसे पदमा आती दिखाई देती है।

जब पदमा देवा के पास पहुँचती है तो देवा को उसे देख हंसी आ जाती है।

पदमा;हंस क्यों रहे हो।कुछ लगा हुआ है क्या मुझे।

देवा;नहीं नहीं बस तुम्हारा पेट देख कर हंसी आ गई। ऐसा लग रहा है जैस तूम एक नहीं दो तीन बच्चे पैदा करोगी।

पदमा;हरामी सब तेरी वजह से हुआ है मेरा हाल ये।

इतना बड़ा पेट लेकर घुमना पड़ता है मुझे पहले ही अच्छी थी ।

देवा;वैसे कौन सा महीना चल रहा है काकी।

पदमा;अरे बाप तू है तो तुझे पता होना चाहिए ना।

आखरी महिना चल रहा है।

हाँ तुझे क्या पता रहेगा कितने दिन से तो शक्ल नहीं दिखाया कम्बखत तूने मुझे।

देवा;पदमा का हाथ पकड़ के अपने पास बैठा लेता है और उसके पेट पर हाथ फेरते हुए बड़े प्यार से कहता है।

मेरी जान तू तो वो औरत है जिसने मुझे सारे सुख दिया सबसे पहले।

मै बहुत भाग्यशाली हूँ जो तेरी जैसी औरत मेरी ज़िन्दगी में आई।

पदमा की ऑंखें भर आती है।

नही नहीं ऐसा मत कहो भाग्यशाली तो मै हूँ देवा। सच कहूं माँ बनने की ख़ुशी क्या होती है जैसे मुझे पता नहीं थी।

तुमने मुझे माँ बना कर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है।

देवा;पदमा के होठो को चूम लेता है

वैसे तू आई क्यों थी इतनी सुबह सुबह।

पदमा;देख मै तेरी बातों में बताना भुल गई।

बडी मालकिन ने तुझे याद की थी कल। मै रात में आ नहीं सकी इसलिए सुबह आ गई।

तू शाम ढले हवेली चले जाना पता नहीं क्या काम है मालकिन को।

ये कहते हुए पदमा वहां से चली जाती है और देवा सोच में पड़ जाता है की आखिर रुक्मणी को अब क्या काम आ गया है उससे।

वो अपने काम में फिर से लग जाता है।

और जब दोपहर होती है तो खाना खाने के लिए घर चला आता है।
 
जब वो घर में दाखिल होता है तो उसे कोई भी नज़र नहीं आता न नीलम और न रत्ना। वो रत्न को ढूँढ़ते ढूँढ़ते उसके रूम में चला जाता है।

रत्ना;उस वक़्त नहा कर अभी अभी बाथरूम से बाहर निकली थी।

देवा की ऑंखें उसे ऐसे रूप में देख चकम जाती है।

वो दबे पांव चलता हुआ रत्ना के पीछे जाकर खड़ा हो जाता है और उसे अपनी बाहों में कस लेता है।

रत्ना;कौंन।

ओह देवा क्या कर रहा है छोड मुझे। पागल तो नहीं हो गया है ना तु।

देवा;हाँ माँ मै पागल हो गया हूँ तेरे प्यार में। कब तक इस प्यासे को तड़पाएगी मेरी माँ।दे दे न मुझे एक बार।

रत्ना;आह मै कहती हूँ छोड मुझे। रात में भी तूने जो हरकत की वो ठीक नहीं आहह क्या कर रहा है देवा।

देवा;अपने मज़बूत पंजो से रत्ना के बड़े बड़े ब्रैस्ट को मसलने लगता है और रत्ना जल बिन मछली की तरह तडपने लगती है।

देवा;मुझे एक बार दे दे माँ सच कहता हूँ।

मेरी दिवानी न बना दिया तो देवा नाम नहीं मेंरा।

वह अपने जोश में क्या क्या बड़बड़ाये जा रहा था उसे भी पता नहीं था।

रत्ना;देवा मै तेरी माँ हूँ बेटा। तू जो चाहता है वो मै तुझे नहीं दे सकती न उन्हह।

देवा;रत्ना की एक नहीं सुनता और उसे बिस्तर पर गिरा देता है।

देखो माँ जल्दी से मेरी बन जाओ और जो मै मंगलसुत्र तुम्हारे लिए लाया हूँ उसे पहन लो।

रत्ना;नहीं पहनूंगी कभी नहीं छोड दे मुझे अखरी बार कह देती हूँ।

देवा;रत्ना के तेवर देख अपना अखरी हथियार इस्तेमाल करता है।

वो रत्न को पूरी तरह अपने नीचे दबा देता है जिसे उसका खड़ा लंड सीधा रत्ना की जांघो में चुभता हुआ चूत पर जा रुकता है।

वो रत्ना के दोनों ब्रैस्ट को सहलता हुआ एक निप्पल को अपने मुँह में खीच लेता है गलप्प गलप्प गलप्प्प गलप्पप्प।

चुत पर लंड का धक्का और ब्रैस्ट की चुसाई से रत्ना थोडी ढीली पड़ जाती है और बस धीरे धीरे देवा को धकेलने लगती है।

रत्ना;देख छोड दे ना रे हां क्या करता है बेटा । आहह गांव वाले क्या सोचेंगे हमारे बारे में उहंन आह्ह।

देवा;मुझे किसी की परवाह नहीं गलप्प्प गलप्प गलप्प गलप्प्प।

देवा का लंड अपनी माँ की चूत की खुशबु से इतना खड़ा हो चूका था की वो उसके पायजामे में चीखने लगता है।

जैसे ही देवा अपने पयजामे का नाडा खोल कर अपना हथियार बाहर निकालता है । रत्ना उसका इरादा समझ जाती है और उसे धक्का देकर पीछे ढकेल देती है और झट से खडी हो जाती है।
 
देवा;माँ ये क्या है।

रत्ना: एक तरफ तुम मुझसे इतना प्यार करने की बात करता है और दूसरी तरफ ऐसे जबरदस्ती......।

रत्ना;देवा की तरफ पीठ करके खडी हो जाती है।

देख देवा तू जो करना चाहता है वो नहीं हो सकता।

देवा;मगर क्यों बोलो मुझे। क्या मै अपनी माँ को ख़ुशी नहीं दे सकता। क्या तुम मेरे नाम का मंगल सूत्र नहीं पहन सकती।

रत्ना;नहीं पहन सकती।

देवा;तुम्हें पहनना होगा और मै तुम्हें पहनाकर रहूँगा चाहे कुछ भी करना पड़े मुझे।

रत्ना;एक औरत एक पति के होते हुए दूसरे के नाम का मंगलसूत्र नहीं पहन सकती।

देवा;क्या मतलब माँ।

रत्ना;देवा के तरफ घूमते ही...

तेरे बापू मरे नहीं है वो लापता हुए है।

जब तक मुझे ये पता नहीं चल जाता की वो ज़िंदा है या नहीं मै उनकी जगह किसी को नहीं दे सकती।

और आइन्दा अगर तुमने मेरे साथ ज़बर्दस्ती करने की कोशिश भी की न तो याद रखना। मै तुमसे कभी बात नहीं करुँगी।

रत्ना की बात सुनकर देवा खड़ा हो जाता है

और उसका खड़ा लंड बैठ जाता है।

वो रत्ना के एकदम पास आकर खड़ा हो जाता है।

मै यही सुनना चाहता था की मेरी माँ मुझे कैसे मिलेगी।

माँ तूने अपने दिल की बात बता कर बहुत अच्छा की।

मै भी बापू के बारे में जानना चाहता हूँ आखिर उन्हें हुआ क्या है कहाँ है वो और मै जानता हूँ मुझे उनके बारे में कौन बता सकता है।

तू चिंता मत कर माँ मै बापू के बारे में तुझे सब कुछ बता दूँगा।

बस तुझे एक वादा करना होगा तुझे बापू के बारे में सब पता चलने के बाद तुम्हें मेरी हर बात माननी होगी।

रत्ना;अपनी गर्दन मोड़ कर दिल में सोचने लगती है।

हाँ ज़ालिम जानती हूँ तेरी इच्छा।

अगर मै नहीं मानी तो....।

देवा; पीछे से रत्ना को जकड लेता है

और उसकी गर्दन पर चूम लेता है।

मुझे पता है ये खूबसूरत जिस्म एक दिन मेरे नीचे होगा और उस दिन मै दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान होऊंगा।

रत्ना;चल हट बेशर्म कहीं का।

रत्ना और कुछ नहीं कहती बस मुस्कुराते हुए वहां से बाहर निकल जाती है।
 
देवा भी मुस्कुरा देता है ये सोचते हुए की वो अपनी रत्ना को पूरी पाकर रहेगा बस उसे पता चल जाए की उसके बापू का क्या हुआ है।

शाम होते होते देवा खाना खाकर हवेली चला जाता है वो सीधा रुक्मणी के रूम में चला जाता है।

उसे हैरत भी होती है की इतनी बडी हवेली में कोई भी नज़र नहीं आ रहा।

रुक्मणी और रानी बिस्तर पर बैठी बातें ही कर रही थी जब देवा वहां पहुँचता है।

देवा;को देख दोनों बिस्तर से खड़ी हो जाती है और रानी दरवाज़ा बंद करके देवा का हाथ पकड़ के पीछे वाले रूम में ले आती है। उसके पीछे पीछे रुक्मणी भी चली आती है।

रुक्मणी;बडी देर लगा दिया देवा।

देवा;वो खेत में ज़्यादा काम था न। पदमा काकी कह रही थी आपने मुझे याद किया था।

रुक्मणी;तू बैठ तो सही तुझे किसी ने देखा तो नहीं न यहाँ आते हुए।

देवा;नहीं किसी ने नहीं। कोई भी नहीं है बाहर तो....

रानी;देखा माँ दोनों वहीँ गए होंगे।

रुक्मणी;हाँ वो छिनाल का आखरी दिन है यहाँ अब।

देवा को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो दोनों क्या बातें कर रही है।

बात क्या है मालकिन।

रुक्मणी;देवा मेरा एक काम करेगा।

देवा;एक क्या मालकिन आप जो कहो वो मै करुन्गा।

रुक्मणी;देवा का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ हवेली के पीछे बने रूम की तरफ ले जाती है।

आवाज़ मत करना चुपचाप चलते रह।

रानी भी दबे पांव उन दोनों के पीछे चलने लगती है।

उधर शालु के घर में पप्पू को तो जैसे सब कुछ मिल गया था।

नुतन और नीलम रत्ना के घर आई हुई थी।

और पप्पू अपनी बहन रश्मि के साथ बैठा घर में बातें कर रहा था।

रश्मी;क्यों भाई कैसे रही सुहागरात।

पप्पू; क्या तू भी कुछ भी पूछती है अच्छी ही रही।

रश्मी;एक बात बता। तुम ज़्यादा चले या नूतन भाभी।

पप्पू;तुझे क्या लगता है।

शालु;मेरा बेटा किसी से काम थोड़े न है।

शालु भी कमर मटकाती हुए उन दोनों के पास चली आती है।

पप्पू;देखो ना माँ रश्मि कैसी बातें कर रही है

रश्मी;उई हुई शर्मा तो ऐसे रहा है जैसे नई नवेली दुल्हन हो ज़रा मै भी तो देखूं रात भर इसकी घिसाये हुई भी है या नही

वो पप्पू को गिरा देती है और उसके पेंट को खोल कर नीचे सरका देती है।
 
पल भर में पप्पू का लंड रश्मि के हाथ में आ जाता है।

पप्पू;आहह रश्मी नूतन और नीलम आ जाएँगी ना।

रश्मी;देख रही हूँ बस गलप्प गलपप गलल्प।

पप्पू;माँ आहह रोको न इसे आह्ह्ह।

रश्मी;देखो माँ कैसे खड़ा हो रहा है तुझे देख कर

शालु;भी पप्पू का चप्पो देखने के लिए झुकती है और दोनों माँ बेटी किसी रण्डियों के तरह पप्पू के लंड पर झपट पडती है।

एक एक करके दोनों माँ बेटी अपने मुँह में पप्पू का लंड लेकर चुसने लगती है।

रश्मी;गलप्प गलप्प इससे अब भी नूतन की चूत की महक आ रही है।

शालु;मुझे भी चाटने दे मेरे बेटे का गलप्प गलपप

पप्पू;की हालत ख़राब होने लगती है। रात में नूतन के साथ क्या हुआ ये सिर्फ पप्पू और नूतन जानती थी मगर इस वक़्त जो पप्पू के छोटे से लंड के साथ ये दोनों कर रही थी वो पप्पू के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल था।

उसे ज़्यादा देर भी नहीं लगती और पप्पु चीखता हुआ रश्मि के मुँह में अपना चिपचिपा पानी छोड कर निढाल हो जाता है।

रश्मी;बेचैन से पप्पू को देखने लगती है।

माँ मुझे नहीं लगता भाई रात भर टीका भी होगा।

शालु;उसे चुप रहने के लिए कहती है उसने बाहर से आती आवाज़ सुन ली थी।

वो पप्पू को कपडे पहनने के लिए कहती है और खुद बाहर निकल आती है।

वो जैसे ही बाहर आती है सामने नूतन और नीलम को देख पहले घबरा जाती है मगर दोनों के चेहरे से लग रहा था की वो अभी अभी आये है।

शालु खुद को सँभाल कर किचन में चली जाती है।
 
अपडेट 82

रानी और रुक्मणी देवा को लेकर हवेली के पीछे बने एक छोटे से रूम की तरफ जा रही थी।

देवा को उस वक़्त तक कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की ये दोनों औरतें आखिर उससे चाहती क्या है।

रुक्मणी;रूम की खिडकी के पास आकर रुक जाती है और ईशारे से देवा और रानी को चुप रहने के लिए कहती है।

रानी; धीरे से खिडकी को थोड़ा सा धकेलती है और अंदर का नज़ारा देख उसका खून गरम हो जाता है।

वो देवा को वहां बुला लेती है और रुक्मणी भी पीछे से अंदर देखने लगती है।

लाईट की धीमी रौशनी में साफ़ नज़र आ रहा था की रूम के अंदर क्या शुरु है।

देवा;रुक्मणी की तरफ देखती है उसकी ऑंखों में वो चमक साफ़ दिखाई दे रही थी

जो एक मरद की ऑंखों में आ जाती है जब वो ऐसा नज़ारा देखता है और पास में दो जवान औरतें खड़ी हुई हो तब तो हालत और भी ख़राब हो जाती है।

अंदर का नज़ारा देवा के लिए नया नहीं था वो इस बात से पहले से वाकिफ़ था।

मगर वो उस वक़्त ऐसा दिखा रहा था जैसे पहली मर्तबा देख रहा हो।

रुक्मणी;चलो यहाँ से।

और तीनो फिर से हवेली में चले जाते है।

देवा;मुझे तो यक़ीन नहीं हो रहा मालकिन।

रुक्मणी;अपनी ऑंखों देखी पर भी तुझे यक़ीन नहीं आ रहा।

देवा;नहीं मेरे कहने का मतलब है की मालिक और वो औरत जिसे वो अपने दोस्त के बीवी कहते है वो दोनों ऐसा भी कर सकते है। मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था।

रुक्मणी;वो सब बातें बाद में करेंगे पहले एक काम कर।

वो धीरे धीरे अपनी बात देवा को समझा देती है और देवा रुक्मणी की बात सुनकर हवेली से तेज़ क़दमों के साथ बाहर निकल जाता है।

गांव के तीन सरपंच थे।

उन में से एक हिम्मत राव भी था।

देवा;सीधा दोनों सरपंच के घर चला जाता है और उन्हें और कुछ गांव वालों को लेकर उन्हें सीधा हवेली के पीछे वाले रूम की खिडके के पास ले जाता है।

और एक एक करके सभी को अंदर का नज़ारा दिखा देता है।
 
देवा;अब कहिये अगर गांव का सरपंच ही ऐसी हरकतें करेंगे तो हमारी बहु बेटियों की इज़्ज़त की रक्षा कौन करेंगा। बोलिये

सरपंच;चलो मेरे साथ।

वो सब की सब टोली उस रूम पर धावा बोल देती है और देवा एक लात में दरवाज़ा खोल देता है।

अंदर हिम्मत और बिंदिया।

दोनों एक दूसरे से नंगे बदन चिपके हुए थे

अचानक हुए इस हमले से वो दोनों बुरी तरह डर जाते है।

हिम्मत अपने सामने खड़े गांव वालो और दोनों सरपंच को देख बौखला जाता है।

वो जल्दी से खड़ा हो जाता है और पास में पड़ी हुए अपनी लुंगी पहनने लगता है।

सरपँच;हम सब देख चुके है हिम्मत राव जी अब आपकी चोरी पकड़ी जा चुकी है।

इस औरत को आप अपने दोस्त के बीवी बता कर यहाँ रख रहे थे और अब इसी के साथ रास रीला मनाये जा रहे है। क्या असर पड़ेंगा हमारे बेटियों पर बोलिये।

हिम्मत;सरपंच जी वो मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई।

सरपँच;भूल नहीं पाप हुआ है आपसे।

और इस पाप का प्राश्चित भी आपको करना होगा।

हिम्मत;क्या मतलब।

सरपँच;मतलब तो आपको कल पंचायत में पता चल ही जायेगा

पहले आज अभी इसी वक़्त आप अपनी इस औरत को वहां छोड आये जहाँ से आप इसे लाए हैं वरना ये काम हमे करना होगा और पूरा गांव यहाँ बुलाना होगा।

हिम्मत;को कुछ सुझ नहीं रहा था हाथ पैर काँप रहे थे उसके। यही हाल बिंदिया का भी था।

सबसे पीछे खड़ा देवा मुस्कुरा रहा था।

और उसकी मुस्कान हिम्मत ने देख लिया था।

हिम्मत; मैं अभी इसे इसके गांव छोड आता हूँ।

मगर गांव वालों के सामने कुछ मत कहना आप लोग। आपलोग जो कहेंगे मुझे मंज़ूर होगी वो सजा।

सरपँच;कल सुबह १० बजे पंचायत आ जाना।

ये कहकर दोनों सरपंच और देवा वहां से बाहर निकल जाते है।

बिंदिया; ये क्या हो गया जी।

हिम्मत;अरे करम जली जल्दी जल्दी कपडे पहन ले

तूझे तेरे घर छोड आता हूँ।

और मुझे पता है ये किसकी हरकत है साला अपने आखरी दिनों में भी मुझे परेशान कर रहा है।

बिंदिया;कौंन।

हिम्मत;देवा। वही है इस सबके पीछे। चल चल जल्दी कर।

दोनो कपडे पहनकर कार में बैठ कर बिंदिया के गांव की तरफ चले जाते है और उन दोनों के जाने के बाद दोनों सरपंच देवा का शुक्रिया अदा करके अपने घर लौट जाते है।

ये कहते हुए की इस गांव को एक जवान सरपंच मिलने वाला है।
 
देवा;हवेली के अंदर पहुँच के रुक्मणी और रानी को पूरी बात बताता है।

उसकी बात सुनकर दोनों झूम उठते है और रुक्मणी रानी के सामने देवा की छाती से चिपक जाती है।

वो ख़ुशी में देवा की गर्दन पर चुमने लगती है।

पास में खड़ी रानी भी हंसने लगती है।

दोनो औरतों के ज़िन्दगी का सबसे बड़ा कांटा देवा ने एक झटके में हटा दिया था।

मगर वो दोनों ये नहीं जानती थी की इस बात से देवा की जान को कितना बड़ा खतरा हो गया था।

हिम्मत अपनी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त करने वालों में से नहीं था।

जब रुक्मणी को होश आता है की रानी भी वहां खड़ी है तो वो शरमा जाती है और चाये बनाने के बहाने से किचन में चली जाती है।

देवा; मैं अभी आया।

वो भी रुक्मणी के पीछे पीछे किचन में चला जाता है और पीछे से रुक्मणी को अपनी बाहों में जकड लेता है।

रुक्मणी;आह्ह्ह्ह।

देवा क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे।

देवा;नहीं छोड़ूँगा जब तक मुझे मेरा इनाम नहीं मिल जाता।

रुक्मणी :क्या कैसा इनाम रे।

देवा; अच्छा कैसा इनाम। तुम्हारे एक कहने पर सब कुछ कर दिया और अब पूछती हो कैसा इनाम।

रुक्मणी;बोलो क्या चाहिए तुम्हें।

देवा;रुक्मणी को घुमा कर अपनी तरफ कर देता है।

रुक्मणी के सुड़ौल कड़क ब्रैस्ट देवा की छाती से रगडने लगते है

रुक्मणी;अपनी साँसों को किसी तरहं सँभाल रही थी वो देवा के सामने पिघलने लगते थी और इस बात से देवा भी बा खूबी वाकिफ़ था।

देवा;अपने दोनों हाथों में रुक्मणी का चेहरा थाम लेता है

मेरी तरफ देखो मालकिन।

रुक्मणी;हमम....

देवा; धीरे से अपने होठो को रुक्मणी के कान के पास लाकर कुछ फुसफुसाता है और उसकी बात सुनकर रुक्मणी के पैर काँपने लगते है।

आंखेँ फटी की फटी रह जाती है।

देवा ने बडी आसानी से उससे इतनी बड़ी बात कह दिया था जिसकी उम्मीद उसे उस वक़्त तो बिलकुल भी नहीं थी।

रुक्मणी;ना में सर हिलाती है।

देवा;फिर से रुक्मणी की ऑंखों में झाँकने लगता है।

मुझे पता है तुम अपनी बात से पीछे नहीं हटोगी।

रुक्मणी;मगर देवा। समझो ना।

देवा;मुझे मेरा इनाम चाहिए अभी और इसी वक़्त।
 
रुक्मणी;नज़रें झुकाये ज़मीन की तरफ देखने लगती है।

उसके हाथों में पसीना आने लगता है और दिल तेज़ रफ़्तार से धड़कने लगता है।

देवा;रुक्मणी के काँधे पर हाथ रख कर उसे नीचे बैठा देता है और रुक्मणी नीचे बैठती चलि जाती है।

देवा;रुक्मणि का आँचल हटा देता है और दोनों हाथों से रुक्मणी के ब्लाउज के सामने के बटन खोल देता है

उस वक़्त अंदर रुक्मणी ने कुछ नहीं पहनी थी।

सफेद मख़मली वो कपास के गोले देवा की ऑंखों के सामने लटकने लगते है जिसे देख देवा का लंड पहले सलामी देने लगता है।

देवा;अपने लंड को पकड़ कर रुक्मणी के ब्रैस्ट पर मारने लगता है।

मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर मुझे मेरा इनाम दे दो मालकिन ।

रुक्मणी;काँपते हाथों से देवा के लंड को पकड़ लीती है

ज़िन्दगी में जिसे इतने शिदत से उसने चाही थी आज वो हसीं तरीन चीज उसके ऑंखों के सामने थी वो काँपते हाथों से उस खूबसूरत लंड को पकड़ कर अपने होठो से लगने को बेताब थी।

देवा;जल्दी करो मालकिन आह्ह्ह।

जल्दी करो।

रुक्मणी;धीरे से देवा के लंड के सामने की चमड़ी को ऊपर सरका देती है और चमकता हुआ देवा का लंड का सुपाडा सामने आ जाता है जिस पर मोती सा एक पानी का कतरा चमकने लगता है।

उस मोती को रुक्मणी अपने होठो में जज़्ब कर लेती है और देखते ही देखते लंड को चुमते हुए अपने हलक के अंदर तक उतार लेती है।

वो नशा जो सर चढ़ कर बोलता है। आज रुक्मणी की जिस्म में आग भड़कने के लिए काफी था।

अपने देवा के लंड की खुशबु उसे अंदर ही अंदर मदहोश किये जा रही थी। वो दिवानी सी हो गई थी उसे पकड और अपनी दिवानगी की इन्तहा वो देवा के लंड को मरोड़ मरोड़ कर चुसते हुए उसे दिखा रही थी।

देवा सुलग उठा था।

आज तक कई औरतों लडकीयों की चुदाई करने वाला देवा के लंड में अकडन सी होने लगती है और वो रुक्मणी के बाल पकड़ कर अपने लंड को आगे पीछे करने लगता है।

रुक्मणी;गलप्प अहह गलप्प गलप्पप्प।

मेरे देवा गलप्प गलप्प

वो दिल ही दिल में सोचने लगती है।

मेरे देवा आहह गलप्प मुझे ये दे दो गलप्प गलप्प्प गप्पप्प।

हमेशा के लिए गलप्प गलप्प्प।

मुझे दासी बना लो अपनी देवा गलप्प गलप्प्प।

रानी;माँ कहाँ हो माँ

रानी किचन के दरवाज़े के पास आकर ख़ड़ी हो जाती है और रुक्मणी के मुँह में देवा का लंड देख सहम सी जाती है।वो कुछ नहीं कहती और अपने रूम में चलि जाती है।
 
रुक्मणी;उससे अपने मुँह से निकालना तो बिलकुल भी नहीं चाहती थी।

और देवा उसे रुक्मणी के दूसरे सुराख़ में जल्द से जल्द घुसाना चाहता था मगर वो वक़्त शायद अभी नहीं आया था।

रुक्मणी;अपने दिल को सँभालते हुए खड़ी हो जाती है और रानी के रूम की तरफ चलि जाती है।

देवा;ये तो जैसे गाण्ड में किसी ने ऊँगली करके भाग गया हो ऐसा लगता है।

इस खड़े लंड के दर्द से देवा को बहुत ग़ुस्सा आता था।

एक बार जब उसका लंड खड़ा हो जाता तो उसे चूत या गाण्ड चाहिए ही चाहिए होती थी और रुक्मणी की हरकत उसे तिलमिला देती है।

वो अपने लंड को किसी तरह अपने पेंट में डाल कर हवेली से बाहर निकल जाता है। ये सोचते हुए की पप्पू की गाण्ड या शालु की चूत ही मिल जाये तो दर्द से आराम मिले। मगर शायद उसकी किस्मत आज कुछ खास नहीं थी।

न पप्पू था और न शालु नज़र आ रही थी। शालु के घर में अँधेरा था।

वो उस वक़्त जाकर कोई हंगमा नहीं करना चाहता था।

देवा; लंड को सहलाते हुए अपने घर चला आता है और सीधा अपने रूम में आकर बिस्तर पर लेट जाता है। अपने कपडे निकाल कर वो अपने लंड को सहलाने लगता है मगर उसके पथरीले हाथ में लंड को और दर्द होने लगता है।

रत्ना;उसे घर में घुसता देख चुकी थी उसे ये बात अजीब भी लगी थी की बिना बोले चाले वो सीधा अपने रूम में क्यों चला गया।

इधर रानी बिस्तर पर लेटी हुई थी। जब रुक्मणी वहां आती है अपनी रानी को बिस्तर पर आधी नंगी पड़ी देख वो मुसकरा देती है और उसकी ऑंखों में देखते हुए अपने सारे कपडे निकाल देती है और रानी के ऊपर चढ जाती है।

रानी;माँ वो देवा क्या कर रहा था ।

रुक्मणी;अपने होठो से रानी के गाल को चुमते हुए अपने दो उँगलियों से रानी की चूत को सहलाने लगती है।

वो मुझे कुछ नहीं कर रहा था मै उसका लंड चूस रही थी जैसे तू चुसा करती थी पहले।

रानी;माँ ऐसा मत करो न आह्ह्ह्ह।

रुक्मणी;क्यूँ दर्द होता है।

रानी;नहीं माँ आग बढ़ जाती है।

रुक्मणी;कहाँ बिटिया।

रानी;यहाँ मेरी चूत में माँ।

रुक्मणी;रानी के होठो को चुमते हुए नीचे झुकती चली जाती है और रानी की चूत पर पहुँच कर अपनी ज़ुबान से रानी की चूत को चुमते हुए खाने लगती है।

यहाँ।

रानी; हाँ माँ....

इसे कुछ करो न माँ

मै मर रही हूँ इस आग में आह्ह्ह्ह।

रुक्मणी;अपनी दो उँगलियों को मुँह में डालकर गीला करती है और फिर उन गीली उँगलियों को रानी की चूत में घूस्सा देती है।

रानी;माँ आह्ह्ह्ह धीरे से करो ना.....

रानी को मीठा मीठा दर्द होने लगता है।

दोनों माँ बेटी एक दूसरे के जिस्म की आग शांत करने लग जाती है।
 
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