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हाय रे ज़ालिम.......complete

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और इधर देवा को जानलेवा दर्द सताने लगता है उसके लंड में खिंचाव से उसके लंड की नसे मोटी हो चुकी थी। उसे कोई नरम चीज़ चाहिए थी जो उसे आराम दे।

वो दर्द से चीखने लगता है और उसकी चीख रत्ना सुन लेती है।

वो भागते हुए देवा के रूम में चली आती है और सामने देवा को नंगा पड़ा कराहता देख घबरा जाती है।

रत्ना;क्या हुआ रे तू ऐसा क्यों पड़ा है कुछ काटा क्या तुझे।

देवा;माँ मुझे यहाँ बहुत दर्द हो रहा है। मै मर रहा हूँ माँ कुछ करो अह्ह्ह।

रत्ना: मैं वैध को बुलवा भेजती हूँ।

देवा;उसके आने तक मै बचूँगा नहीं आह्ह्ह्ह।

रत्ना;घबरा कर देवा का लंड अपने कोमल हाथों में थाम लेती है।

गरम फौलादी लंड जैसे ही रत्ना के हाथों में आता है देवा का चिखना बंद हो जाता है और वो फटी फटी ऑंखों से रत्ना को देखने लगता है।

रत्ना;समझ जाती है की देवा को क्या हुआ है।

हकीकत में देवा अपने बापू पर गया था।

कभी कभी देवा के बापू को भी लंड में खींचाव से दर्द होता था। उस वक़्त रत्ना ही उस दर्द का इलाज करती थी।

रत्ना;रूम में अँधेरा कर देती है और धीरे से देवा के लंड को पकड़ के सहलाने लगती है।

देवा;आहें भरने लगता है उसका दर्द कम तो नहीं हुआ था मगर अब वो बढ़ नहीं रहा था।

देवा को कुछ गीला गीला अपने लंड पर महसूस होता है

वो सर उठा कर देखता है और देखता ही रह जाता है

रत्ना;उसके लंड पर झुक जाती है और अपने मुँह में देवा के लंड को लेकर चूसने लगती है गल्पप गप्प्प गलप्पप्प।

देवा; माँ

आह आह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह....

रत्ना;अपना काम शुरु रखती है वो किसी तरह अपने जज़्बात को एक तरफ रख कर अपने देवा के दर्द को कम करने की पूरी कोशिश करती है।

पहली बार अपनी माँ के गरम मुँह का स्वाद चख कर देवा का लंड भी निहाल हो जाता है और अपनी पहली धार अपनी माँ के मुंह के नाम कर देता है। इतनी जल्दी कभी देवा नहीं झडा था। शायद ये अपनी सगी माँ की चूत से निकलने वाली खुशबु का असर था की देवा अपना गरम लावा रत्ना के मुँह में उंडेल देता है।

वो थोडी देर बाद जब ऑंखें खोल कर देखता है तो रत्ना को वहां नहीं पाता।

रत्ना;अपने रूम में जाकर रूम अंदर से बंद कर लेती है

देवा का पानी अब भी उसके मुँह में था वो उसे थूकना चाहती थी मगर ऐसा नहीं करती और उस गाढ़े गाढ़े पानी को रत्ना ऑखें बंद करके पी जाती है। पानी हलक में उतारते ही उसकी चूत में कोई चिंगारी फ़ेंक देता है जिसे बुझाते बुझाते अपनी चूत को रगडते रगडते रत्ना बिस्तर पर लेट जाती है।
 
अब आगे क्या होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये।

बहुत सारे कमेंट और के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी प्रतिदिन देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks
 
इस कहानी के 150 पेज पूरा होने पर सभी पाठकों को thanks।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
अपडेट 83

वो मोहब्बत ही क्या जो सर चढ़ कर न बोले।

देवा की लगाई हुई आग में कई बदन जल रहे थे

वो था ही ऐसा जिसे एक बार छु ले सोना हो जाए।

रत्ना की ऑखों से नींद ग़ायब हो चुकी थी।

उसके ज़ुबान पर अब भी देवा के लंड का गाढा गाढा पानी लगा हुआ था।

न वो अपना मुँह साफ़ की थी और न वो अपने दिमाग से देवा की सोच निकाल पा रही थी।

सुबह जब उसकी आँख खुली तो काफी उजाला हो चूका था।

वो अपने कपडे ठीक करके बाहर आ जाती है।

आज का दिन भी रोज़ की तरह निकला था।

मगर न जाने इस सुबह की धूप में क्यों रत्ना का बदन कांप रहा था।

पाँव थे की ज़मीन पर टिकना नहीं चाहते थे और दिल आसमान में उड़ने को चाह रहा था।

की तभी पीछे से देवा आकर रत्ना को अपनी बाहों में दबोच लेता है।

देवा;क्या बात है माँ आज बड़ी देर से उठी हो रात नींद नहीं आई क्या।

वो अपनी माँ के कानो के पास आकर धीरे से सरगोशी करते हुए कहता है।

उसकी बात को समझ रत्ना भी शर्मा जाती है।

रत्ना;चल हट मुये। जब देखो मज़ाक़ सूझता है तुझे बहुत काम पडा है छोड दे मुझे।

वो बस बोल रही थी।

मगर दिल ही दिल में वो भी देवा की गरम मज़बूत बाहों में रहना चाहती थी।

देवा; पीछे से अपनी माँ की कमर के दरार में अपने लंड को घीसने लगता है।

उसकी चुभन से ही रत्ना थरथराने लगती है।

उस ज़ालिम के हथियार को वो कल रात अपने मुँह में घुसा चुकी थी।

मगर न जाने दिल अब भी दिमाग पर हावी नहीं हो पाया था।

यही वजह थी की जिस खिलौने से वो अपने मुँह की मिठास बढा चुकी थी उसे अपनी चूत की गहराइयों में उतारने को दिल आगे पीछे कर रहा था।
 
माँ बेटे का रिश्ता ऐसा ही होता है।

अपनी सीमा लाँघने में वक़्त लगता है।

मगर एक बार जब वो सीमा लाँघ कर सारी मर्यादा पार कर जाता है तो दुनिया की कोई भी दिवार उनके सामने आ जाये वो उसके पार हो जाते है।

रत्ना; छोड़ न रे क्या करता है तुझे शर्म आनी चाहिए।

तेरी शादी करवा दूँ अगर तू कहे तो...

देवा;अपने दोनों हाथों से रत्ना के ब्रैस्ट को मसलने लगता है।

पहले मंगलसुत्र पहनकर लाल साडी में एक बार मेरे सामने आओ। उसके बाद मै कहुंगा की मुझे किससे शादी करनी है और कब करनी है।

रत्ना; आह्ह्ह।

मुझे दर्द हो रहा हैं रे।

देवा;कहाँ हो रहा है माँ...

वो पूरी ताकत से रत्ना की दोनों बड़ी बड़ी चूचियों को मरोडने लगता है ये जानते हुए की रत्ना को भी इस सब में मजा आ रहा है।

रत्ना की ऑखें बंद होने लगती है।

जवानी का नशा जो उसके पति ने उसकी चूत से पूरी तरह नहीं निकाला था चढ़ने लगता है।

चुत की दोनों फांको में थरथराहट सी होने लगती है।

शबनम सी छोटी छोटी पानी की बूंदें चूत के आजु बाजु जमने लगती है।

रत्ना;छोड दे रे ज़ालिम।

ऐसा मत कर ना आह्ह्ह्ह।

देवा;मुझे दूध पीना है इनका रत्ना।

देवा के मुँह से जब भी रत्ना शब्द निकलता था रत्ना को ऐसा लगता था जैसे उसका पति देवा का बाप उसे पुकार रहा हो।

रत्ना;माँ हूँ मै तेरी। तेरी पत्नी नही

आह मत कर मेरे साथ तु।

देवा;मेरी पत्नी है माँ तू। तुझे खुश देखना चाहता हूँ।

तूझे अपने पानी से नहलाना चाहता हूँ।

मेरे लंड के पानी से नहायेगी ना मेरी रत्ना तु।

बस मुझे एक बार ये दे दे।

वो अपनी माँ रत्ना की चूत को साडी के ऊपर से रगडने लगता है।

रत्ना के पांव उसका साथ नहीं देते वो देवा को धक्का देकर वहां से घर के अंदर की तरफ भागने लगती है

मगर देवा उसकी साडी का पल्लू पकड़ लेता है।

और अपनी तरफ खीचता है।
 
रत्ना;अपनी कमर के पास से साडी को निकाल कर वही देवा के हाथों में साडी छोड़ कर लंहगे और ब्लाउज में घर के अंदर भाग जाती है और दरवाज़ा बंद कर लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है।

उसके कानो में देवा के एक एक शब्द की गूंज अब भी सुनाई दे रही थी।

देवा;दरवाज़ा को ढकेल देता है और रत्ना सामने पड़े बिस्तर पर जा गिरती है।

दोनो की नज़रें एक दूसरे से इस कदर मिली हुई थी जैसे शिकारी अपने शिकार पर नज़रें गड़ाये रहता है।

और उसे दबोच लेने के सही पल का इंतज़ार करता है

देवा;उस वक़्त पायजामे और बनियान में था

वो अपना बनियान उतार देता है और रत्ना के ऊपर चढ़ जाता है।

अपने ब्रैस्ट के ऊपर जब रत्ना देवा की चौडी छाती पाती है तो वो सिहर सी जाती है।

उसकी जाँघें खुल जाती है और देवा के पायजामे के अंदर खड़ा लंड सीधा रत्ना की चूत पर दस्तक देता है।

देवा को अपनी मंज़िल क़रीब दिखाई देने लगती है

वो अपने हाथों के जादू से धीरे धीरे रत्ना के ब्रैस्ट को सहलाते जाता है और अपनी माँ के नरम होठो पर अपने होंठ रख कर उसके शरबत को पीने लगता है

गलप्प गलप्प गलप्प्प।

रत्ना भी सीसकारियाँ लेकर अपने बेटे को अपने होठो का रसपान करवाने लगती है।

उसकी ऑखों के सामने फिर से वही रात का दमदार लंड जिसे उसने अपने मुँह में लेकर ढिला की थी आ जाता है।

वही फुंफकारता हुआ साँप जो उसे डसने को बेताब था।।

देवा;माँ मुझे मेरे बापू की जगह दे दे।

बस यही देवा गलती कर देता है।

वो उस वक़्त रत्ना को उसके पति की याद दिला देता है

और रत्ना को अपनी बात याद आ जाती है की जब तक देवा ये नहीं पता कर लेता की उसके बापू ज़िंदा है या नहीं और उनके साथ क्या हुआ था।

वो किसी और की नहीं हो सकती।

रत्ना;ऑंखें खोल देती है और देवा को अपने ऊपर से हटा कर खड़ी हो जाती है।

अचानक इस ब्यवहार से देवा सकते में पड़ जाता है।
 
देवा; माँ....

वो आगे कुछ नहीं कह पाता।

रत्ना;अपना वादा भूल गया लगता है तु।

देवा;कौन सा वादा माँ।

रत्ना;वही वादा जो तूने मुझसे किया था।

अपने बापू के बारे में पता लगाने का।

रत्ना; ये कहकर अपने रूम की तरफ बढ़ने लगती है।

देवा;चीख़ पडता है और अपने लंड को पायजामे के ऊपर से पकड़ के कराहने लगता है।

देवा; आह्ह्ह माँ माँ माँ माँ मुझे बचा ले आह्ह्ह

इस में फिर से दर्द होने लगा है।

रत्ना;घबरा कर देवा के पास आकर बैठ जाती है।

बता मुझे कहाँ दर्द हो रहा है।

देवा; वही जहाँ रात में हो रहा था।

रत्ना;इसे उतार।

देवा;अपने पायजामे को नीचे उतार देता है और

अपने लंड को हाथ में पकड़ के हिलाने लगता है।

उसका लंड सच में बहुत कड़क हो चूका था नसे फूल चुकी थी।

रत्ना की ऑखों में उसे देख नशा सा छाने लगता है

वो अपने नाज़ुक से हाथों में देवा के लंड को पकड़ लेती है।

देवा;माँ कुछ भी करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है ना।

रत्ना;क्या करूँ मैं।

देवा;वही जो रात में दर्द होने पर की थी तुमने आहह्ह्ह्

माँ मै मर जाऊँगा।

रत्ना;अपने हाथ में देवा के लंड को मज़बूती से पकड़ लेती है और अगले ही पल उसे अपने मुँह में खीच लेती है गलप्प गलप्प गलप्प।

देवा;चैन की साँस लेता है। धीरे से माँ दर्द हो रहा है ना आह्ह्ह

रत्ना;अपनी ज़ुबान को लंड के पूरे हिस्से पर घुम्मा घुम्मा कर उसे चाटने लगती है वो अपनी ऑंखें बंद कर लेती है और इसका फायदा उठाकर देवा उसकी ब्लाउज के दोनों बटन खोल देता है।
 
लंड चूस रही रत्ना को कोई भी परवाह नहीं थी की वो ऊपर से नंगी हो चुकी है बस वो तो अपने देवा के होने वाले लंड के दर्द को कम करने में लगी हुई थी।

देवा;झुक कर रत्ना के ब्रैस्ट को मसलने लगता है और रत्ना भी उसे दबाने देती है वो चटखारे मारते हुए किसी कुल्फ़ी की तरह देवा के लंड को चुसती जाती है गलप्प गलप्प।

हम्म उह्ह्ह गलप्प।

देवा;आहह आराम से माँ आह्ह्ह।

तेरी चूत भी इतनी नरम है रत्ना अहा हां अहा हां आह्ह आह आह आह आह आह्ह

रत्ना;हम्म गलप्प गलप्प

उह्ह्ह गलप्प।

न देवा से बर्दाश्त हो रहा था और न रत्ना से मगर दोनों अपने अपने वादे के आगे मजबूर थे।

रत्ना को महसूस होता है की देवा का पानी छुटने वाला है वो थोड़ा पानी अपने मुँह में गिरने देती है और बाकी का अपने ब्रैस्ट पर।

जब देवा का लंड अपनी बौछार कर चूका होता है तो रत्ना देवा की ऑखों में ऑखें डाल कर दोनों ब्रैस्ट पर गिरी पानी को वही उन पर मल देती है।

और चुपचाप उठ कर अपने रूम में चली जाती है।

देवा;उसे जाता देखता रह जाता है।

थोड़ी देर बाद देवा नहा कर घर से बाहर निकल जाता है

और रत्ना अपने रूम में आईने के सामने बैठी खुद पर और देवा के झूठ पर मुस्कुराने लगती है।

वो जानती थी की देवा ने उसे झूठ बोल कर

जान बूझ कर उससे लंड चुसवाया है।

मगर शायद रत्ना भी यही चाहती थी।

उसे सामने मंगलसूत्र दिखाई देता है।

वो उसे अपने गले में डाल लेती है और खुद को आईने में देख शर्मा जाती है।
 
उधर देवा सीधा पंचायत पहुँचता है।

जहां पहले से हिम्मत और कुछ पंच मौजूद थे।

देवा के आने के बाद वो सभी अपनी अपनी बात एक एक करके पंचो के सामने रखते है।

थोड़ी देर बहस चलती है।

मगर हिम्मत को तो रात को ही पता चल गया था की उसका क्या होने वाला है।

आखीर सभी पंचो की सहमति से हिम्मत राव को फैसला सुना दिया जाता है।

हिम्मत राव को सरपंच पद से बर्ख़ास्त कर दिया जाता है

और उसे 15 दिन के लिए गांव निकाला भी कर दिया जाता है।

हिम्मत;इस फैसले से अंदर ही अंदर टूट भी जाता है और देवा के लिए उसके दिल में नफरत सारी हदें पार कर जाती है।

हिम्मत;हाथ जोड कर सभी पंचो से कहता है की

मै अपनी गलती के लिए शरमिंदा हूँ और आइंदा ऐसी गलती नहीं होंगी वादा करता हूँ।

वो ये कहकर वहां से बाहर जाने लगता है

मगर देवा को देख रुक जाता है और उसके सामने आकर देवा की ऑखों में ऑखें डाल कर दाँत पीसते हुए धीरे से कहता है।

15 दिन बाद जब मै वापस आऊँगा देवा।

याद रखना वो दिन तेरी ज़िन्दगी का आखरी दिन होगा।

देवा;मुझे उस दिन का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा हिम्मत।
 
अपडेट 84

हिम्मत की ऑखें जहाँ आग उगल रही थी वही देवा का लहु भी अपने बापू के कातिल से बदला लेने के लिए बेताब था।

देवा;के मुँह से निकला वो शब्द।

हिम्मत को तीर की तरह चुभा था उसकी ज़िन्दगी का सिर्फ और सिर्फ एक मक़सद रह गया था।

वापस आकर देवा को इस दुनिया से हमेशा हमेशा के लिये उसके बाप के पास पहुंचा देना।

जैसा की गांव वालों का फैसला था।

हिम्मत को 15 दिन के लिए गांव निकाला जाना था।

हिम्मत; ये बात अपनी पत्नी और बेटी रानी को नहीं बताना चाहता था।

वो रुक्मणी से ये बहाना करके अपनी कार में बैठ कर गांव से चला जाता है की उसके दोस्त की बेटी की शादी है और उसे वहां जाना है।

मगर रुक्मणी और रानी को पता था की असली बात क्या है। वो दोनों बेहद खुश भी थी और थोडी थोडी डरी हुए भी की पता नहीं वापस आकर हिम्मत क्या करेगा।

हिम्मत के चले जाने के बाद देवा हवेली चला जाता है।

देवा;रुक्मणि और रानी के रूम में आकर उन दोनों को पंचायत में हुई सारी बात बताता है और साथ में हिम्मत के दी हुई धमकी भी।

रुक्मणी;तुम चिंता मत करो देवा जब तक मै हूँ तुम्हें कोई छू भी नहीं सकता।

देवा;चिंता और मुझे बिलकुल नहीं मालकीन।

मै तो उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ जिस दिन आपका पति वापस आयेगा।

मुझे उस इंसान से बहुत ज़रूरी बात मालूम करनी है

मुझे मेरी मंज़िल तब तक नहीं मिलेगी।

जब तक हिम्मत राव अपना मुँह नहीं खोलेगा।

रानी;कौन सी बात देवा।

रुक्मणी;ओफ़ हो रानी। तू भी जा ज़रा चाये बना ला।
 
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