और बाहर खड़ी नूतन का दिल इस बात से और ज़ोर से धड़कने लगता है की वो अपने देवा का लंड अपने पति के सामने लेगी।
देवा;सोच क्या रहा है यही एक रास्ता है।
वरना पूरे गांव में तेरे घर की बदनामी हो जाएगी।
पप्पू;अगर किसी को पता चल गया तो...
देवा;तेरी माँ बहन को हम चोदते है किसी को पता है क्या।
मै किसी से कुछ नहीं कहने वाला क्योंकि वो मेरी बहन है। हाँ मगर तेरी माँ को पता चल गया तो उसे तुझे संभालना होगा।
कुछ देर सोचने के बाद पप्पू हाँ कह देता है।
पप्पू;मगर मेरी एक बात तुम्हें भी माननी पडेगी।
देवा;क्या।
पप्पू;रोज़ रोज़ न सही हाँ मगर हफ्ते में तीन चार बार तुम्हें मेरे साथ भी....
देवा;अपने हाथ से पप्पू की छोटी सी पप्पी को दबा देता है।
गांडू का गांडु रहेगा तू सच में।
पप्पू;देवा के लंड को सहलाने लगता है।
क्या करूँ भाई तुम तो अपने गरीब दोस्त की तरफ देखते भी नहीं वरना एक वो दिन हुआ करता था जब रात रात भर हम खेतों में नंगे पड़ा रहा करते थे और तुम्हारा ये लंड मेरी गाण्ड में आराम किया करता था।
देवा;अपने पेंट को खोल कर लंड बाहर निकाल लेता है।
ले चूस ले जी भर कर तेरी माँ को चोदुं।
पप्पू;यही तो चाहता था वो देवा के लंड पर टूट पडता है और उसे झट से अपने मुँह में लेकर चूसने लगता है गलप्प गलप्प गलप्पप्प।
ये देख नूतन की आँखे फटी की फटी रह जाती है उसे कुछ कुछ पप्पू की हरक़तों पर शक तो था मगर आज उसे सबूत भी मिल गया था । सब कुछ सुनकर और देख कर।
पप्पू;जहाँ एक तरफ देवा के लंड को मुँह से निकालने के लिए तैयार नहीं था वही देवा जल्द से जल्द अपनी रुक्मणी के पास जाना चाहता था।
देवा;अपनी पेंट को उतार देता है और पप्पू को बिस्तर पर खीच लेता है एक हाथ से वो पप्पू की पेंट को निकाल लेता है।
पप्पू;अहह भाई धीरे से ना।
देवा;बड़ी आग लगी है ना तेरी गाण्ड में मेरे दोस्त। आ जा बहुत दिन हुए इसे नहीं लिया मैने।
वो पप्पू को लिटा देता है और अपने लंड को सीधा पप्पू की गाण्ड पर घीसने लगता है।
पप्पू;के ऑंखें बंद हो जाती है और मुँह खुल जाता है।
पप्पू;धी से करना देवा।
आह आहह्ह्ह।
देवा;और धीरे से ऐसा हो ही नहीं सकता था।
देवा का लंड पप्पू की गांड को चीरता हुआ अंदर तक धँस जाता है और पप्पू अपनी आवाज़ छूपाने के लिए तकिये को मुँह में भर लेता है।
देवा;आहह साला बहुत छोटा हो गया है तेरा सुराख़....
पप्पू;तुम्हारी वजह से भाई। तुम बहुत दिन से नहीं कर रहे हो न।
देवा;दिल ही दिल में सोचने लगता है जब तेरी माँ बहन मुझे मिल रही है तो मै तेरी गाण्ड क्यो माँरुन्गा।
पप्पू;अपनी गाण्ड के मज़े लेने लगता है और देवा उसे इसलिए ठोकने लगता है की उसकी गाण्ड के भरोसे उसे नूतन की चूत चोदने का लाइसेंस मिलने वाला था वो भी हमेशा की लिये।
उधर रत्ना अपने घर में अभी अभी नहा कर बाहर निकली थी।
देवा का नशा रत्न के बदन पर चढने लगा था।
अब वो खुद का ज़्यादा ख्याल रखने लगी थी
खुद को आईने में देखते हुए वो अपनी ब्रा पहनने लगती है।
छोटा सा ब्लाउज और उस पर छोटा सा पल्लू डाले क़यामत लग रही थी रत्ना।
पप्पू की गाण्ड को 15 मिनट तक ठोकने के बाद जब देवा घर पहुँचता है तो उसे रतना घर दरवाज़े के पास उसका इंतज़ार करते मिलती है।
हाथ में गरम चीज आते ही रत्ना की साँसें और ज़ोर से चलने लगती है।वो जान जाती है की उसके हाथ में क्या है।
रत्ना;ये दर्द कर रहा है क्या देवा।
देवा; हाँ माँ बहुत दर्द कर रहा है।
रत्ना;देवा की आँखों में देखते हुए नीचे बैठ जाती है और
हल्के से देवा के लंड को चुम लेती है।
देवा;आहह माँ।
रत्ना;गलप्प गलप्प गलप्प्प।
इसे आराम करने दिया कर ना। बहुत थका थका सा लग रहा है गलप्प गलप्प गलप्प्प गलप्प।
देवा;की धडकन तेज़ हो जाती है।
तेरी चूत में आराम मिलेगा इसे रत्ना। एक बार दे दे मुझे आज।
रत्ना;इतराते हुए अपनी गाण्ड हिलाते हुए देवा के लंड को चूसती चली जाती है । लंड चूसने का रत्ना का अंदाज़ देवा को पागल बना देता है। जो मज़ा देवा को किसी औरत की चूत मार कर मिलता था उतना मज़ा तो रत्ना के लंड चुसने से ही देवा को मिल रहा था।देवा अपनी माँ रत्ना के गरम मुँह को ही चूत समझकर चोदने लगता है।रत्ना देवा के लंड को पूरा अपनी थूक से गीला कर कर के देवा का लंड चूस रही है और चूसते चूसते कुछ ही देर में उसकी मलाई पूरी की पूरी खा जाती है।
रत्नाअपने होठो पर लगे देवा की मलाई को अपनी ज़ुबान से चाटते हुए वो देवा के पास से अपने रूम में चलि जाती है।
देवा;हैरान परेशान से रत्ना को जाता देखता रह जाता है। उससे बिलकुल भी रत्ना का ये रूप समझ नहीं आता।
मगर रत्न एक मँझी हुए खिलाडी थी।
वो जानती थी।
मर्द को जितना तडपाया जाए चूत के लिए । वो उतनी मोहब्बत और ताकत से चोदता है।
और वो देवा का लंड लेने के बाद उसे किसी के साथ बाँटना नहीं चाहती थी...
बस ये चाहती थी की देवा का लंड उसकी चूत में आराम करे चाहे दिन हो या रात और अपने मक़सद को पूरा करने के लिए वो देवा को दिन रात तड़पा रही थी।
देवा भी रत्ना की ऑखों में देखते हुए शालु से कहता है
काकी लड़की मैंने देख रखी है बस माँ के हाँ कहने की देर है।
क्यूं माँ क्या कहती हो। तुम तैयार हो ना।
रत्ना;क्या मतलब...
शालु को हंसी आ जाती है
अरे जब ऐसी बात है तो मुझे बता दे मै करवा देती हूँ तेरी शादी।
देवा; मैं शादी करुँगा तो सिर्फ माँ की इच्छा से वरना नही।
रत्ना;देवा को घुरने लगती है।
शालु;मुझे नहीं बतायेगा कौन है वो।
देवा;उसे तुम बहुत अच्छे से जानती हो काकी।
और हाँ एक बात और तुम्हें ज़्यादा परेशान होने की भी ज़रूरत नहीं है
लडकी घर की ही है।
ये कहकर देवा अपने रूम में चला जाता है।
जहां एक तरफ शालु के दिल में लड्डू फुटने लगते है की देवा नीलम को ही अपने पत्नी बनाना चाहता है वहीँ रत्ना को ये सोच कर पसीना आने लगता है की देवा को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही उसके बारे में शालु से इस तरह खुले आम बात करने में।
शालु;तो कुछ देर बाद अपने घर चली जाती है
उसके जाने के बाद रत्न देवा को ढूँढ़ते हुए उसके रूम में चली आती है।
देवा;अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था।
रत्ना; ये क्या बकवास कर रहे थे तुम बाहर।
देवा;क्या हुआ क्या गलत कहा मैंने।
रत्ना;देखो देवा मुझे ये बिलकुल भी पसंद नहीं है समझे तुम गांव वालों का कुछ तो ख्याल रखो।