और जिस दिन तुम मुझे अपना पति मान लोगी उस दिन से रात दिन मै तुम्हारी चूत में अपने लंड को डालकर तुम्हें चोदा करुँगा। ये बात समझ लो।
रत्ना;उन्हह नही देवा ये गलत है ना।
देवा;क्या गलत और क्या सही मुझे नहीं पता।
वो रत्ना की चुचियों को मसलने लगता है।
मुझे तुझसे सब चाहिए मेरी रत्नाआआ...
बदले में तुझे मै हर ख़ुशी दूँगा।
रत्ना की ऑंखें बंद होने लगती है।
होठ काँपने लगते है जब जब वो इन बाहों में आती थी जिस्म दिमाग का साथ छोड देता था। शरीर में सनसनाहट सी होने लगती थी और चूत के पानी में उबाल आने लगता था।
रत्ना; गांव वाले.....
देवा;गांव वालों की चिंता नहीं मुझे...
रही बात हमारे संबंध की तुम चिंता मत करो। ये बात हम दोनों के सिवा किसी को भी पता नहीं चलेगी।
और हाँ शालु काकी से मै उनकी बेटी नीलम की बात कर रहा था।
रत्ना;देवा को देखने लगती है।
देवा; हाँ रत्ना नीलम बनेगी इस घर की बहु
और तुम दोनों इस देवा की पत्नी।
ये मत समझना मै झूठ कह रहा हूँ।
गांव वालो के लिए नीलम से शादी करनी पडेगी।
मगर मेरे जिस्म पर सबसे पहला अधिकार तुम्हारा होगा।
रत्ना;देवा के बालों में उँगलियाँ डालकर उसे अपने क़रीब झुकाती है और देवा भी रत्ना के होठो पर झुकता चला जाता है।
दो प्रेमियों के बीच की दिवार धीरे धीरे कमज़ोर हो रही थी।
और वो दिन दूर नहीं था जिस दिन एक छोटा सा वार इस कच्ची दिवार को हमेशा के लिए गिरा देने वाला था।
रत्ना; मुझे इतना प्यार करते हो तुम।
देवा;सबसे ज़्यादा अगर मैंने किसी को अपना माना है तो वो तुम हो रत्ना।
देवा की मिठी बातें रत्ना के जिस्म में ऐसे घुलते है की रत्ना अपनी दोनों टाँगें खोल देती है और देवा भी इस मौके का फायदा उठाकर रत्ना की चूत को साडी के ऊपर से अपने लंड से दबाने लगता है।
जैसे ही चूत पर लंड का धक्का लगता है एक चिंगारी सी दोनों के बदन में पैदा हो जाती है और दोनों के जिस्म एक दूसरे में कस जाते है।
देवा;दोनों हाथों से रत्ना की चुचियों को मसलते हुए उसकी चूत पर लंड घिसते हुए रत्ना के रसीले होठो को चूसने लगता है।
रत्ना;गलप्प गलप्प गलप्प्प।
ओह्ह बस भी करो न मुझे खाना बनाना है उन्हह।
देवा;उन हूँ गलप्प मेरी जान के होठो को ठीक से साफ़ तो कर दूँ गलप्प गलप्प.....
रत्ना;आहह छोड़ो भी आह्ह्ह्ह्ह्ह....
उसे डर लगने लगता है की कहीं जिस्म के आग में दो बदन जल न जाए । देवा के होठो की तपीश ही इतनी ज़्यादा थी की रोज़ रोज़ देवा के लंड को चूस चूस कर उसका पानी निकाल देने वाली रत्ना से आज अपने बेटे के लंड का धक्का भी सहा नहीं जाता और रत्ना ऑंखें बंद करके अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाने लगती है उसका जिस्म ऐंठ जाता है और एक चीख़ के साथ रत्ना अपना बदन ढीला छोड देती है।
देवा;मुस्कुरा देता है वो जान जाता है की रत्ना को क्या हुआ है।
रत्ना भी शर्मा कर देवा को अपने ऊपर से धक्का देकर
खाना पकाने चली जाती है और देवा अपने होठो पर ज़ुबान फेरते हुए दिल ही दिल में मुस्कुरा देता है।
खाना खाने के बाद देवा रत्ना को खेत में रात में रुकने का कहकर चला जाता है और रत्ना नीलम को अपने पास रात में रुकने के लिए बुला लेती है।
नीलम रत्ना को भी पसंद थी एक सुन्दर सुशील लड़की थी । नीलम रत्ना का बहुत ख्याल रखती थी।
देवा;खेत में जाता है मगर उसका दिल आज खुल कर किसी को चोदने के लिए कर रहा था।
आसमान में भी बादल घिर आये थे जिस से मौसम भी बहुत सुहाना बन गया था।
देवा;अपने लंड को सहलाने लगता है और हवेली की तरफ बढ़ जाता है।
गांव वाले जल्दी सो जाते थे इसलिए उसे कोई भी हवेली जाते नहीं देखता।
वो जैसे ही हवेली में दाखिल होता है
उसका सामना रुकमणि से होता है।
और रुक्मणी अपने देवा को देख इतना खुश हो जाती है की वो उसे अपने गले से लगा कर उसके गर्दन पर चुमने लगती है।
उसी तरह देवा के लंड को अपने मुठी में थाम कर रुक्मणी की चूत भी महक उठी थी।
देवा;क्या हुआ रुक्मणी डर गई क्या।
वो अपने हाथ से रुक्मणी के सर को पकड़ कर उसे अपने लंड की तरफ झुकाता है।
रुक्मणी;रानी की तरफ देखती है और फिर देवा के मुसल लंड को चुम लेती है मुआह्ह्ह्हह।
वो चुमना घडी भर का था। बस उसे अपने मुँह में लेकर चुसना असल मक़सद था दोनों का।
जहां रानी अपने जिस्म पर के कपडे निकाल कर फ़ेंक देती है वहीँ रुक्मणी अपना मुँह खोल कर देवा के लंड को अपने हलक में डाल लेती है।
गलप्प गलप्प गलप्पप्प गप्पप्प।
देवा;का मोटा चिकना लंड रुक्मणी के गुलाबी होठो पर से घिसता हुआ मुँह के अंदर बाहर होने लगता है।
देवा के मुँह से मोहब्बत भरी सिसकारियां निकलने लगती है।
आह रुक्मणि
आह्ह्ह्ह।
रानी;भी नीचे बैठ कर देवा के टेस्टीस को अपने मुँह में ले लेती है।
दोनो माँ बेटी आज रात क़यामत ढाने वाली थी देवा के लंड पर मगर वो ये नहीं जानती थी की ये सामने कौन खड़ा है।
देवा;भी अपनी कमर को आगे पीछे करने लगता है जिससे रुक्मणी के मुँह में पच पच के साथ लंड आगे पीछे होने लगता है।
रुक्मणी;के मुँह से गिरती राल सीधा रानी के मुँह पर गिरने लगती है।
और वही थूक रानी देवा के लंड के साथ चाटने लगती है।
रानी;देवा के कमर की तरफ से आ जाती है और अपनी ज़ुबान से पीछे से देवा के गाण्ड का सुराख़ चाटने लगती है।
इससे पहले किसी ने भी देवा की गाण्ड नहीं छुइ थी।
देवा को अजीब सा लगता है उसकी कमर पीछे की तरफ होने लगती है मगर सामने से रुक्मणी लंड को मुँह में लेकर खीच रही थी जिसकी वजह से देवा दोनों रंडियों के बीच में फँस सा गया था।
मगर आज वो रात नहीं थी जब सोचा जाये आज कुछ कर गुज़रने की रात थी अपना सब कुछ दे कर देवा को अपना बना लेने की रात थी।
रुक्मणी;अपने दोनों हाथों की उँगलियों से चूत के दोनों लिप्स को खोल कर देवा को दिखाती है जैसे कह रही हो।
अंदर डाल दे मै नहीं चीखुंगी।
और वही करता भी है देवा वो अपने लंड पर थूक लगा कर उसे रुक्मणी की चूत के मुहाने पर लगा देता है और एक ज़ोरदार झटका जैसे कुँवारी चूत को खोलने के लिए लगाया जाता है।
मार देता है।
रुक्मणी;चीख़ पड़ती है उईईईईई माँ....
रुक्क जाओ बस रूक जा ना आह्ह्ह्ह।
मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वो साँप अपने बिल में घुस चूका था।
देवा;का लंड जब वापस बाहर की तरफ निकलता है तो उस पर खून लगा होता है।
अपनी माँ की चीखें दबाने के लिए रानी अपने मुँह को रुक्मणी के मुँह से लगा देती है और दोनों माँ बेटी एक दूसरे के मुँह में मुँह डाले उसकी ज़ुबान चूसने लगती है।
रुक्मणी को दर्द भी हो रहा था मगर
वो एहसास उस दर्द पर हावी हो चूका था की आज वो उस लंड से चुदवा रही है वो भी अपने देवा के जिससे वो तन से मन से और धन से अपना पति मान चुकी थी।
पच पच की आवाज़ें रूम में गूँजने लगती है और देवा सटा सट सटा सट सट अपने लंड को रुक्मणी की चूत में आगे पीछे घुसाता चला जाता है।
रुक्मणी;आहह आहह उहँन उन्हह
आह सशस नाई आह्ह्ह्ह।
धीरे ना आह्ह्ह्ह
रानी;की आँखों के सामने उसकी माँ अपनी दोनों टाँगें खोल कर चुदवा रही थी।
और रानी अपनी चूत में उबलते लावे को दबाने के लिए फिर से देवा की गाण्ड को चाटने लगती है।
मगर रानी भी चुदक्कड़ लड़की बन चुकी थी हिम्मत और देवा से चुदवा कर।
वो भी हवा में लटके अपनी कमर को आगे पीछे करने लगती है।
रानी; चोद मेरे सैया मेरी माँ की चूत चोद के मेरी माँ के सामने उसकी बेटी को भी आहह चोद....
हम दोनों माँ बेटी की चूत के मालिक आहह चोद न आह्ह्ह्ह।
रुक्मणी;नीचे बैठ कर देवा के लटकते हुए टेस्टीस को और अपनी बेटी रानी के गाण्ड को चाटने लगती है।
एक तरफ से देवा का लंड दूसरी तरफ से माँ के ज़ुबान रानी के तन बदन में चींटियां रेंगने लगती है और चूत से पानी रिसने लगता है।
जो नीचे बहता हुआ रुक्मणी के होठो को गीला करने लगता है।
दोनो माँ बेटी जैसे सोच कर बैठी थी की देवा को एक पल के लिए भी आराम नहीं करने देंगे।
रुक्मणी;रानी की चूत से लंड बाहर निकालती उसे मुँह में लेकर चुसती और फिर से अपनी बेटी की चूत में ठूँस देती।
उन्हें लग रहा था जैसे देवा बस कुछ देर और चलेगा मगर जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था देवा के धक्कों से रानी की कमर काँप रही थी।
वो रानी को बिना नीचे उतारे खचा खच अपने लंड से उसकी चूत को अंदर तक खोदता चला जाता है और रानी अपने देवा के गले में बाहें डाले चीखते हुए चुदती चलि जाती है । 15 मिनट तक देवा रानी को बिना रुके चोदता है और रानी की चूत से पानी का एक एक कतरा बाहर निकाल देता है।
देवा की गोद से रानी जैसे ही नीचे उतरती है।
निचे ज़मीन पर लेट जाती है और लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है।
देवा;भी अपनी साँसें धीमी करने के लिए बिस्तर पर लेट जाता है।
रुक्मणी;अपनी चूत को सहलाते हुए देवा के पास आकर लेट जाती है।
दोनो एक दूसरे को देखते है और बिना बोले दोनों के होंठ एक हो जाते है।