रुक्मणि;अपनी छोटी सी ओखली में बड़ा सा मुसल कुटवाकर कसमसा रही थी।
और उसकी कसमसाहट देवा के लंड की नसें और मोटी कर रही थी।
रुक्मणी;को चुदवाने की आदत नहीं थी मगर आज जब बरसों बाद उसे वो मिला था जिसकी उसने खवाहिश दिल में बसा रखी थी तो वो भी दिल खोल कर अपनी चूत देवा के लंड से मरवा रही थी।
अपने दोनों पैरों को देवा के कमर से लपेट कर अपनी कमर को हर धक्के के साथ ऊपर की तरफ उठा उठा कर वो देवा का साथ दे रही थी।
देवा;आहह रुको ऐसी चूत पूरे गांव में किसी की भी नहीं होंगी आह्ह्ह बार बार फिसलता जा रहा है आह्ह्ह।
रुक्मणी;तुम्हारे लिए बचा कर रखी थी उन्हह
ले लो इसे अपनी बना लो हमेशा हमेशा के लिए आह्ह्ह्ह।
चूत और लंड की सरसराहट पूरे रूम में गूँजने लगती है पसीने में लथपथ दो शरीर अपनी काम वासना पूरी करने में लगे हुए थे।
देवा;हिम्मत को पता चल गया की तुम इतनी बड़ी चुदक्कड़ हो तो वो साला किसी की तरफ देखना भी भूल जायेंगा आह्ह्ह।
रुक्मणी;उस हरामि का नाम न लो आह्ह्ह।
औरत उसकी नज़र में दिल बहलाने का सामान है देवा।
वह अपने देवा की मोहब्बत में इस कदर गिरफ्तार हो चुकी थी की हिम्मत का नाम भी सुन नहीं सकती थी।
देवा;अपने लंड को चूत की गहराइयों में उतार देता है जिससे रुक्मणी का मुँह खुल जाता है और ज़ुबान बाहर की तरफ आ जाती है।
अपने मुँह में रुक्मणी की ज़ुबान को लेकर चुसते हुए देवा उसे चोदने लगता है।
पास में लेटी हुए रानी सब सुन भी रही थी और समझ भी रही थी की उसकी माँ अब देवा की हो चुकी है वही देवा जिसे वो कभी अपना दुश्मन समझा करती थी।
मगर जब से उसने देवा से अपनी जवानी बाँटी थी देवा का नशा उसके भी सर चढ़ कर बोल रहा था।
रानी;उठ कर दोनों के पास आ जाती है और रुक्मणी अपनी प्यासी बेटी की तडपती हुई चूत को अपने होठो से लगा लेती है
अपनी माँ के सर को अपनी चूत पर दबा कर रानी सिहर उठती है।
दोनो माँ बेटी किसी धंधे वाली औरतों की तरह व्यहवहार कर रही थी । कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा था की यी गांव के जागिरदार के घर की औरतें है
जीन पर नज़र उठाने वालो की ऑंखें निकाल दी जाती थी।
देवा;आज बहुत खुश था।
अपने लंड के कमाल की बदौलत ही उसने आज ये मक़ाम हासिल किया था।
लोग अपने पैसे अपने रुतबे की बदौलत बड़ी से बड़ी चीज़ हासिल कर लेते है।
मगर देवा के पास वो बेशक़ीमती चीज़ थी जिस की लालच हर तडपती हुए औरत को होती है।
यही वजह थी की गांव की हर औरत चाहे वो कुँवारी हो या शादीशुदा देवा का नाम जपती थी।
रानी;की चूत से मीठा मीठा पानी रुक्मणी के मुँह में बरसने लगता है।
चटखारे मारते हुए रुक्मणी को पहले कभी अपनी बेटी की चूत चाटने में इतना मजा नहीं आया था जितना की आज वो देवा से चुदाई करते हुए ले रही थी।
दोनो माँ बेटी की चूत एक साथ अकड जाती है और रुक्मणी देवा के लंड को अपनी चूत के पानी से नहलाने लगती है और रानी अपनी माँ के चेहरे को।
हाँफते हुई दोनों औरतें देवा की तरफ देखने लगती है उनकी ऑंखों में बस एक सवाल था देवा के लिए कि
तूम थकते नहीं क्या ।
और देवा के पास उस सवाल का एक ही जवाब था रुक्मणी की चूत में एक और ज़ोरदार धक्का जिससे रुक्मणी की चीख़ निकल पडती है और वो आखिर कर देवा को रुकने के लिए हाथ जोड देती है।
मगर जब तक देवा का पानी नहीं निकल जाता था न वो किसी की गुहार सुनता था न पुकार।
देवा;अपना लंड रुक्मणी की चूत से बाहर निकाल लेता है । रुक्मणी बस चैन की साँस लेती है की देवा उसकी दोनों टाँगें खोल कर अपना मुँह उसी जगह लगा देता है जहाँ कुछ देर पहले उसका लंड था।
अपनी चूत पर देवा के होठो की गर्मी पा कर रुक्मणी की साँसें उखड़ने लगती है।
एक रात में औरत एक या दो बार चुदाई सह सकती है और अगर मँझी हुए औरत हो तो तीन बार मगर यहाँ तो देवा था। वो आदमी जिसे दुनिया में सबसे ज़्यादा अगर कोई चीज़ पसंद थी तो वो थी अलग अलग चूत।
रुक्मणी; रुक्क जाओ जी आहह बस भी आह्ह्ह्ह न उन्हह रानी बोल न इन्हें यह यह यह यह आहह्ह्ह्ह्ह।
रानी; आँखें फाड़े सामने का नज़ारा देख रही थी और देवा था की अपनी एक ऊँगली चूत में अंदर बाहर करते हुए न जाने अंदर से क्या बाहर निकालने की कोशिश करने में लगा हुआ था।
न वो रुक रहा था न कुछ बोल रहा था आखिरकार रुक्मणी चीख पडती है।
रुक्मणी;मुझे मुतने तो दे आह्ह्ह्ह।
उसे बहुत ज़ोर से पेशाब आया था।
देवा; अपना मुँह हटा लेता है और रुक्मणी रूम में के बाथरुम में घुस जाती है।
उसकी कमर इस तरह से लचक खा रही थी जैसे मोरनी अपने मोर को रीझाने के लिए नाचती है।
मोटे मोटे हिलते हुए सफेद कमर और उन दोनों के बीच की वो लम्बी सी दरार देख देवा खड़ा हो जाता है और अपने खड़े लंड को सहलाता हुआ रुक्मणी के पीछे पीछे बाथरूम में घुस जाता है।
रुक्मणी;पेशाब करने के लिए झुकती है की पीछे से देवा अपना हाथ उसकी कमर पर रख देता है।
रुक्मणी; आह्ह्ह्ह।
रुको भी थोडी देर....
देवा;अपनी दोनों उँगलियों को मुँह में लेकर गीला करता है और बिना रुक्मणी से कुछ बोले उसे सीधा उस दरार के छोटे से सुराख़ पर रख कर अंदर ठूँस देता है।
एक दर्दनाक चीख रुक्मणी के मुँह से निकलती है।
अपनी कुँवारी गाण्ड के सुराख़ में मोटी मोटी देवा की मरदाना उँगलियाँ घुसते ही वो तड़प उठी थी।
मगर न जाने उसे ये दर्द बहुत अच्छा भी लग रहा था
जहां तक कोई न पहुंचा हो। उस मक़ाम पर जब देवा पहली बार पहुँचता है।
तो ख़ुशी सारे दर्द और गम मिटा देती है।
देवा;अपनी दोनों उँगलियाँ आगे पीछे करने लगता है।रुकमनी की चीख सुनकर रानी भी वहां दौडी चली आती है।
और जब वो देखती है सामने का नज़ारा तो मारे हैरत के उसकी भी चीख निकल पडती है।
रानी;माँ तुम ठीक तो हो...
रुक्मणी; हाँ मै ठिक हूँ। आहह अजी अजी क्या कर रहे हो।
देवा;इशारे से रानी को रुक्मणी की चूत के पास बुलाता है और अपनी उँगलियाँ बाहर निकाल लेता है।
जैसे ही रानी अपनी माँ की चूत से चिपकती है देवा का हथियार पीछे से रुक्मणी की गाण्ड पर हल्ला बोल देता है।
और लंड पहली बार कुँवारी रुक्मणी की छोटी सी गाण्ड के सुराख़ को चीरता हुआ अंदर अंदर और अंदर घुसता चला जाता है। हर अंदर जाता हुआ धक्का रुक्मणी की चीख में इजाफ़ा करता चला जाता है। वो तिलमिलाने लगती है मगर देवा तब तक नहीं रुकता जब तक किला फ़तह नहीं कर लेता है।
उसका पूरा का पूरा लंड रुक्मणी के गाण्ड में जा चुका था। दरद बहुत था मगर उस दर्द पर उत्तेजना हावी हो चुकी थी।
रुक्मणी;को अपनी ही बात याद आ जाती है की सब कुछ तुम्हारा ही है।
रुक्मणी;अपने होठो को दाँतो के नीचे दबा लेती है और देवा अपने काम में लग जाता है। खचा खच वो अपने लंड से रुक्मणी की गण्ड को दो मिनट में खोल कर रख देता है जब रुक्मणी से सहा नहीं जाता तो वो चीख़ पडती है।
रुक्मणी;अजी मार डालोगे क्या आह्ह्ह।
बस भी करो न मुतने भी नहीं देते आह्ह्ह्ह।
देवा; मुत साली किसने रोका है तुझे आहह तेरी गाण्ड के पीछे तो कब से था मै। आज मिली है तो मना कर रही है है आह्ह्ह्ह।
रुक्मणी; ओह मना नहीं कर रही न आह सुनो ना मुझे बहुत ज़ोरों से सु सु आई है आह्ह्ह्ह।
रानी;देवा के लंड को रुक्मणी की गाण्ड से निकाल कर चाटने लगती है गलप्प गलप्प
और मारो मेरी माँ की गाण्ड देवा और मारो गलप्प
वो फिर से उसे रुक्मणी की गाण्ड में घुसवा देती है।
रुक्मणी;आहह छिनाल जब तेरी गाण्ड फाडेगा न तब तुझे पता आहह चलेगा।
आह्ह्ह्ह।
रानी; मैं ले चुकी हूँ इसे वहां भी माँ ....
अब ये तुम्हारी फाड़ेगा गलप्प गलप्पप्प गलप्प्प।
वो दोनों को एक साथ चाटने लगती है अंदर बाहर होते देवा के लंड को और रुक्मणी की चूत को।
काफी देर तक देवा रुक्मिणी की गांड मारता है बीच बीच में देवा अपना लंड रुक्मिणी की गांड से निकाल कर रानी के मुँह में पेलने लगता है जब लंड पूरा साफ हो जाता है तो फिर से रुक्मिणी की गांड फाड़ने लगता है।
जब देवा;के लंड की नसे रुक्मणी की गाण्ड की सुराख़ से दबने लगती है और एक दो ज़ोरदार धक्कों के बाद देवा अपना सारा पानी रुक्मणी की गाण्ड में निकाल देता है
दोनो हाँफने लगते है जैसे ही देवा अपने लंड को बाहर निकालता है रुक्मणि सिसकारियाँ भरते हुए सीधा देवा के लंड पर मुतने लगती है।
देवा;का औज़ार उस पेशाब से नहाने लगता है।
जब रुक्मणी चैन की साँस लेती है तो देवा अपने भीगे हुए लंड को पास में बैठी हुई रानी के मुँह में पेल देता है जीसे रानी बड़े प्यार से चाटने लगती है गलप्प गलप्पप्प गलप्प।
देवा;जब देखो काम काम... बैठो भी वो उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बैठा देता है।
देवा;माँ ममता के जाने के बाद घर कितना खाली खाली लगता है न।
रत्ना;हम्म खूब समझती हूँ तेरी बातें
शालु की बेटी के खवाब देखने लगा है ना तु।
देवा;रत्ना की ऑंखों में झाँकते हुए बड़े प्यार से कहता है
मै तो अपनी रत्ना के खवाब देखता हूँ दिन रात।
रत्ना;बुरी तरह शर्मा जाती है और उठकर जाने लगती है मगर देवा उसे जाने नहीं देता और अपनी बाहों में जकड लेता है और कितना तडपाना चाहती है मुझे माँ...।
रत्ना;कुछ नहीं कहती बस इधर उधर देखने लगती है
उसकी साँसें फुलने लगती है उसके हावभाव से ऐसा लगने लगता है जैसे वो रात भर तड़प तड़प कर जगी हो।
देवा;अपना एक हाथ रत्ना की जांघ पर रख देता है और उसे हलके से दबा देता है।
रत्ना;आह्ह्ह बेशरम कहीं का।
देवा;मुझे भूख लगी है।
रत्ना;तू उठेंगा तो दूंगी ना।
देवा;मुझे यहाँ से चाहिए।
वो अपनी ऊँगली सीधा रत्ना की चूत की तरफ बढाता है।।
रत्ना;नही ये गलत है।
देवा;अपने बेटे का लंड मुँह में लेना सही है।
रत्ना;अपनी आँखें बंद कर लेती है। उसके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
चुत उसकी भी मचल रही थी ।पानी उसकी चूत के मुहाने तक आ चुका था।
देवा;आज तक तुम मेरा लेती थी आज मै अपनी रत्ना की चूत का मीठा मीठा शरबत पिऊँगा।
रत्ना;अह्ह्ह बहुत गन्दा हो गया है तू उन्हह।
देवा;अपनी माँ को अपनी बाहों में समेट लेता है और रत्ना भी किसी बच्चे की तरह अपने देवा की गोद में चढ़ कर बैठ जाती है और अपनी कमर को वो धीरे धीरे देवा के लंड पर घीसने लगती है।
देवा;अपने दोनों हाथों में रत्ना की बडी बडी चुचियों को थाम लेता है और उन्हें मसलने लगता है।
माँ मुझे दे दे ना।
रत्ना;आहह नही दूंगीः कभी भी आहह नही।
देवा;अपने पयजामे का नाडा खोल देता है और अपने लंड को बाहर निकाल लेता है।
गराम लंड जैसे ही रत्ना की कमर से टकराता है वो मचल उठती है।
रत्ना;अपने हाथों में उसे पकड़ना चाहती थी मगर देवा उसे ऐसा करने नहीं देता बल्कि रत्ना को खडा करके एक झटके में उसकी साडी ब्लाउज निकाल देता है।
रत्ना उस वक़्त बिना पेंटी की थी।
अपने बेटे के सामने नंगी खड़ी रत्ना अपनी चूत पर हाथ रख कर बैठने लगती है मगर उससे पहले देवा उसे लिटा देता है और अपने लंड को उसके मुँह के पास लाकर अपने होठो को रत्ना की चूत से लगा देता है।
रत्ना;रात भी गरम थी।
अपने देवा के जवान लंड की खुशबु मजबूर कर देती है उसे अपना मुँह खोलने पर और एक माँ अपने बेटे के लंड को मुँह में ले लेती है।
देवा;अपनी माँ की मख़मली चूत पर अपने होंठ रख देता है।
दोनो प्यासे थे। मगर मजबूर थे।
एक दूसरे से इतने क़रीब थे मगर फिर भी दूर थे।
वो चाहते तो एक दूसरे में समां सकते थे मगर रत्न का वादा बार बार उन्हें अलग कर रहा था।
आपनी माँ की गुलाबी चूत की पंखडियाँ अपने मुँह में भर कर चुसते हुए देवा को बस एक बात सता रही थी काश मुझे अपने बाप के बारे में पता होता तो आज मेरी माँ मेरे लंड से पिस रही होती।
और रत्ना के मन में एक उलझन थी की देवा उस पर ज़ोर ज़बर्दस्ती क्यों नहीं करता।
दोनो किसी भूखे इंसान की तरह अपने मुँह सटाये अपनी सबसे प्यारे चीज़ चाटने में लगे हुए थे।
वो अपनी माँ के होठो की गर्मी का इतना आदि नहीं हुआ था ऊपर से वो इतना ज़्यादा उतेजित हो चूका था की रहा भी नहीं जा रहा था।देवा अपनी माँ रत्ना का गरम मुँह चोदने लगता है लेकिन ख्वाब में वो अपनी माँ की चूत में लंड पेल रहा है।रत्ना भी अपने बेटे के लंड को पूरा मुँह में भरके चूस रही है।दोनों की रफ़्तार तेज होने लगती है।