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हाय रे ज़ालिम.......complete

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रश्मि: “नीलम नहीं बोल पायेगी देवा, मै बताती हुँ की आखिर क्या बात है…”

देवा रश्मि को देख कर चौंक जाता है, “तुम यहाँ कब आयी”

रश्मि: “तुम्हारे आने से भी पहले… मै तो यहीं छुपकर तुम लोगो की बाते सुन रही थी”

देवा:“और वो क्यों…”

रश्मि:“पता चल जायेगा जल्दी ही…”

देवा को कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है नीलम अपनी आँखे खोल चुकी थी।

नीलम: “रश्मि नहीं…”

रश्मि: “कोई बात नहीं है नीलम सब ठीक है…”

देवा: “यह हो क्या रहा है…”

रश्मी एक ही साँस में बोल देती है, “साली और जीजाजी की चुदाई का असर है सब देवा…”

देवा की तो यह सुनकर फट कर हाथ में आ जाती है,

उसका दिमाग एकदम सुन्न पड़ जाता है रश्मि की बात से....

रश्मी मुस्कुराते हुए देवा की तरफ और फिर नीलम की तरफ देख रही थी…

देवा: “यह क्या बकवास कर रही है तू रश्मि…”

रश्मि: “अच्छा अब बकवास लग रही है…कोई फायदा नहीं है जीजा जी आपकी होने वाली बीवी ने सब अपनी आँखों से देखा है…कैसे आपने अपनी आधि साली की गांड मारी है…”

देवा की तो एक दम माँ चुद जाती है यह सुनकर की नीलम ने देवा और रश्मि को चुदाई करते हुए देख लिया था।

उसे अचानक ही डर लगने लगता है और वो नीलम की तरफ नहीं देखता है…

रश्मि: “मेरे मोटे लंड वाले जीजा जी क्या हुआ सिट्टी पिट्टी क्यों गुम हो गयी…”

रश्मी हँसते हुए कहने लगी, पीछे से नीलम ने उसे चुप रहने का इशारा दिया…

रश्मि: “अरे मेरी बहना… भोली भाली बहना अब छोड भी दो यह शराफत और अपने होने वाले पति को बताओ की तुमने कितना मजा लिया है अपनी बहन की चुदाई का…”

नीलम रश्मि को एक थप्पड़ मारकर कहती है, “तू मुँह बंद करेगी अपना…”

देवा रश्मि की बात सुन कर सहम जाता है।

उसे डर लग रहा था नीलम से आँखे मिलाने में…

रश्मी अब चुप हो जाती है पर अब भी देवा की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी…

देवा:मैं चलता हुँ खेतो में काम है…”

देवा आगे बढ़ता है तो नीलम उसे आवाज देने ही वाली थी की अचानक देवा का हाथ किसी ने पकड़ लिया।

देवा: “रश्मि मेरा हाथ छोड़ मुझे जाने दे”

शालु:“मैं शालु हुँ पीछे मुडकर देखो दामाद जी”

देवा के कानो में शालु की आवाज पड़ती है तो वो पीछे मुडता है…
 
देवा “काकी आप कब आयी…”

शालु: “तुमसे भी पहले हम तीनो यहाँ एक साथ आये थे…रश्मि को बहुत रोका मैंने पर वो आ गयी तुम्हारे पास अभी…”

देवा: “क्या आप लोग एक साथ यहाँ थे तो छूप कर क्या कर रहे थे…”

शालु, “तुम्हारे मुँह से सारी बाते सुनने का इन्तजार कर रहे थे पर नीलम के मुँह से गलती से कुछ शब्द निकल गए जिससे तुम्हे भनक लग गयी तो रश्मि मेरे मना करने पर भी बाहर आ गई ।”

देवा का सर चकरा रहा था “आखिर यह हो क्या रहा है…मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है…”

शालू:“देखो देवा यह सारा खेल हमारा रचा हुआ है। कल जब हम तुम्हारे घर से लौटे थे रिश्ता पक्का कर के तो घर पर रश्मि पप्पू से चुदवा रही थी जिसे नीलम ने देख लिया…सबसे बड़ी बात तो यह की रश्मि चुद्वाते हुए तुम्हारे को ही याद कर रही थी और उसने मेरा भी नाम ले लिया की मै भी तुमसे चुदवाती हुँ…इसलिये नीलम को यह सब पता चल गया की हम दोनों तुमसे चुद्वाते है।

पर नीलम ने कुछ बुरा नहीं माना, क्युकी उसे लगा की रश्मि झूठ बोल रही थी, इसलिए सच खुद जानने के लिए कल वो शाम तुम्हारे पास आयी थी और यहाँ आने का कहकर गयी……कल रात को आकर उसने मुझे और रश्मि को सारी बाते बता दी की उसने सब देखा है, पर उसे तब भी यकीन नहीं हुआ था।

मुझे लगा की अब कोई फायदा नहीं छुपा कर नीलम से कुछ, इसलिए उसके सामने सब साबित कर ही देते है तो इससे सबके बीच की बाते साफ़ हो जाएगी, तो मैंने रश्मि से कहा था की तुम आज सुबह उसके पास जाओ और यह बात साबित करवाओ…मैं नीलम को अपने साथ तुम्हारे खेतो पर ले गयी तब तुम रश्मि को अपनी बांहो में उठा कर अंदर ले जा रहे थे, कुछ पल बाद अंदर जाकर तुमने आगे जब करना शुरू किया तो हम लोग खिड़की से देखने लगे, पर जब उसने तुम्हे रश्मि के साथ देखा तो वो तुम्हे रोक ही नहीं पायी आगे करने से… और तुमने बातो ही बातो में सारा राज़ उगल दिया की तुमने उसे उसकी शादी की रात चोदा था और यह भी की तुम मुझे भी चोदते हो…

हम दोनों ने बाहर एक साथ तुम्हे रश्मि की गांड मारते हुए देखा था, जब चुदाई पूरी हो गयी और तुम सो रहे थे तब रश्मि ने दरवाजा खोला और हम अंदर आ गए तो मैंने ही नीलम के सामने तुम्हे कच्छा पहना दिया ताकि अगर अंदर कोई आ जाये तो तुम्हे नंगा न देख ले, फिर हम चले गये, तब तक नीलम को पता चल गया था की तुम अपनी माँ के अलावा मुझे नूतन और रश्मि को भी काफी समय से चोदते आ रहे हो…तो हमे लगा की शायद और भी कई औरते होंगी जिन्हे तुम चोदते हो, इसलिए हमने सोचा की तुमसे ही क्यों न पूछ ले सारा किस्सा…… इसलिए देवा अब सब जान चुके है तो बोल दो सब कुछ आज… नीलम तुमसे दुर नहीं होगी…बस राज़ बेनक़ाब कर दो सारे आज…”

शालु की बातो से देवा की गाण्ड फट गयी।

उसका चेहरा बेनक़ाब हो चुका है अब नीलम के सामने,

पर एक बात सुनकर देवा को ख़ुशी भी हुई की नीलम अब भी उससे दुर नहीं होना चाहती।
 
देवा “तुम सब ने मिलकर यह सब जान बुझ कर किया…”

देवा ने शालु रश्मि की तरफ देखते हुए कहा।

रश्मि: “जीजाजी समझिये नीलम का शक दुर करना जरुरी था नहीं तो वो यही सोचती रहती…अच्छा हुआ उसने हमे सब बता दिया..... हम भी डर गए थे सुनकर पर नीलम को देख कर लगा नहीं की इस बात से उसे बुरा लगा है इसलिए हमने चैन की साँस ली और यह खेल रचा, इसमें सबका अच्छा ही होगा, एक झूठ १०० झूठ को जनम देता है…पर सच भरोसा बढाता है…बोल दो देवा और डरो मत मै वायदा करती हूँ नीलम तुम्हारी ही रहेगी हम पर भी तुम्हारा हक होगा पर तुमपर और तुम्हारे प्यार पर सिर्फ और सिर्फ हमारी नीलम का हक़ होगा…नीलम तुम्हारी बीवी जरुर बनेगी…बस बोल दो कुछ मत छुपाओ…”

देवा फँस चुका था।

उसने पिछ्ली रात ही रत्ना को सब कुछ बताया था।

क्यूंकि रत्ना को बताना आसान था पर नीलम अपनी जान को खोने का डर देवा के मुँह को खुलने नहीं दे रहा था…

शालु: “बोलो देवा, भरोसा रखो हम पर…”

तभी अचानक पीछे नीलम खड़ी हो जाती है।

नीलम: “आप लोग मेरे देवा के पीछे क्यों पड गए हो… देख नहीं रहे उसे कितना पसीना आ गया है”

नीलम पानी की बोतल और रुमाल उठा कर देवा की तरफ बढाती है।

देवा नीलम को अपनी तरफ आता देख अपनी नज़रे नीचे झुका लेता है।

नीलम देवा के पास आकर उसका पसीना पोंछने लगती है और पानी उसे देती है…

देवा बोतल लेकर पानी पीता है।

नीलम: “मै तुमसे प्यार किसी चीज या मोहमाया के लिए नहीं किया है, मै तुम्हे चाहती हूँ, दिल से और जिस्म-ओ-जान से…मेरा रोम रोम तुमसे मोहब्बत करता है देवेन्द्र…”

और नीलम देवा के गले लग जाती है और उसकी आँखों से आँसू बहने लगते है।

देवा के कानो में नीलम के शब्द गूंजने लगते है और उसकी आँखों से पानी भी बहने लगता है…

नीलम देवा को गले लगाए रखती है और उसके कानो में देवा की आवाज पड़ती है…

देवा “पदमा काकी, हिम्मत राव की बीवी रुक्मणी और उसकी बेटी रानी,बिंदिया वैध जी की बहु किरण, मेरी मामी देवकी उनकी बहु और मेरी भाभी कौशल्या, ममता की सास कोमल और ननद प्रिया और खुद ममता, पदमा और काशी पेट से भी है”

नीलम देवा की बात सुनति है उससे गले लगे हुए ही और उसकी आँखे बंद हो जाती है और उसकी आँख से एक आंसू टपक कर गिर जाता है…

शालु और रश्मि, “क्या…इतनी सारी”

शालु और रश्मि का मुँह खुला का खुला रह जाता है…
 
अपडेट 130

“मोहब्बत”

हर किसी के लिए इस शब्द का अलग मतलब होता है,

दिल-ओ-जान से प्यार करने वालो के लिए तो यह पूरी दुनिया होता है।

प्यार करने वालो के लिए जिने की दुआ होता है,

और नफरत करने वालो के लिए यह सिर्फ एक शब्द ही होता है…

पर देवा और नीलम का प्यार तो इन सब से बढ़कर था उनके लिए तो यह पूरा जहां ही था…

कुछ पल ही बीते थे देवा के मुँह से वो शब्द निकले हुए,

जीसे सुन कर शालु और रश्मि तो बिलकुल चौंकी हुई थी।

पर नीलम की आँखों से तो आंसू बह रहे थे…

नीलम बिना कुछ बोले ही देवा से अलग हुई और अपना चेहरा पकड़ते हुए भागने लगी अपने घर की तरफ,

नीलम को भागता देख शालु और रश्मि चीखे… “नीलम कहाँ जा रही है…रुक जा…”

देवा तो मूरत बना हुआ खड़ा रहा उसकी आवाज में इस वक़्त इतना भार झेलने की ताक़त नहीं थी।

वह ना ही नीलम का नाम ले सकता था और ना ही उससे नजरे मिला सकता था…

देवा ने सर उठाकर शालु और रश्मि की तरफ गुस्से से देखा और वहाँ से जाने लगा…

शालू: “अरे देवा कहाँ जा रहे तुम…”

देवा ने कुछ जवाब नहीं दिया…

नीलम काफी तेजी से भाग रही थी उसे पता ही नहीं चला की वो गलत रास्ते पर जा रही है।

वह बस रोते हुए भाग रही थी…

कुछ देर भागने के बाद नीलम को एहसास हुआ की वो जंगल के भीतर आ चुकी है और उसे सामने एक झोपड पट्टी दिखाई देती है,

वह समझने में देर नहीं करती की वो एक शराब खाने के बाहर ही खड़ी है।

नीलम रोते हुए वही जमीन पर बैठ जाती है और जोर जोर से रोने लगती है।

इधर देवा चलते हुए अपने मन में नीलम का रोता चेहरा याद करता है और वहीँ रुक जाता है जब उसके कानो में आवाज पड़ती है।

रश्मि: “देवा सुनो…”

देवा पीछे मुडता है और रश्मि की तरफ गुस्से से देखता है....

रश्मी उसके गुस्से भरे चेहरे को देख डर जाती है और रोने लगती है पर अपनी हल्कि सी आवाज निकालती है…

रश्मि “वो वीरा ने… वीरा ने नीलम को जंगल की तरफ भागते देखा है…

तूम जानते हो न की उस गाँव के शुरुआत में कितने गुंडे दारू पीकर बैठे रहते है…”

देवा रश्मि की बात सुनकर तुरंत उसी गाँव की तरफ तेज रफ़्तार से भागने लगता है…
 
नीलम शराब खाने के बाहर रोये जा रही थी।

गुंडा 1: “अरे छम्मक छल्लो इधर का रास्ता कैसे पकड़ लिया…”

नीलम के कानो में यह आवाज पड़ी तो उसने अपनी नज़ारे घुमा कर देखा तो पाया की उसे 5 गुंडों ने घेर लिया है…

ये देख कर नीलम की गांड फट गयी…

गुंडा 2: “क्या कड़क माल है भाई… आज तो लंड को आराम मिल जायेगा…”

नीलम उन लोगो की बातो को सुनकर डर जाती है और उठकर भागने की कोशिश करती है…पर एक गुण्डा उसके सामने कुदकर उसका रास्ता रोक लेता है…

गुंडा 3:“ अबे चूतिये ऐसी मस्त माल देख कर तो मै अपने लंड को आराम ही नहीं दूंगा…”

एक गुण्डा नीलम की तरफ बढ़ता है तो नीलम उसे धक्का देती है…

गुंडा 2: “ए साली राँड़…तू कहीं नहीं जा पायेगी तू चुपचाप साथ दे… तुझे भी मजा मिलेगा…”

नीलम: “बचाओ देवा”

देवा जो अभी जंगल के अंदर घुस चुका था उसके कानो में नीलम की यह आवाज पड़ती है और वो और तेजी से भागता हुआ उस आवाज के पीछे जाने लगता है…

गुंडा 4: “इसकी गांड तो एक दम हलवा लग रही है मसलने में मजा आयेगा…”

गुंडा 5: “साली के चुचे भी मस्त लगते है, चीख़ने का कोई फायदा नही, हमे मजे देगी तो अच्छी तरह एक दिन में घर पर पंहुचा देंगे…”

सारे गुंडे शैतानो जैसे हँसने लगते है और नीलम का तो डर कर बुरा हाल हो गया था…

एक गुण्डा तभी आगे बढा और उसने नीलम के दुपट्टा को खीच कर उसके जिस्म से अलग कर दिया…

गुंडा 1: “आह साली के चुचो के बीच रगडूंगा अपने लौडे को सबसे पहले… फिर चोदूँगा दम लगा कर…हाहाहाहा”

नीलम को यह बाते सुनकर बहुत डर लग रहा था उसे एहसास हुआ की उसे वहाँ से भाग कर यहाँ नहीं आना चाहिए था…

नीलम: “मुझे बचाओ देवेंद्र”

और एक गुण्डा नीलम की तरफ अपना हाथ बढाता हुआ उसके कमीज पर रखने वाला होता है की तभी एक लकड़ी का टुकड़ा आ कर सीधा उसके हाथ पर लगता है…

गुंडा 2:“आह्ह्ह्ह”

और उस गुंडे के हाथ से खून निकलने लगता है।

सभी गुंडे उसे देख चौंक जाते है और अपनी गर्दन मोडते है और नीलम भी अपनी गरदन घुमाकर देखती है…

की तभी पेड़ की एक टहनी लेकर देवा उछल कर सामने आता है और सभी लोगो के कदम डगमगा जाते है। गुंडे देवा को देखकर चौंक जाते है। क्योंकि उन्होंने देवा को मारने के पैसे लिए थे।
 
लेकिन वो नहीं जानते है सबसे ज्यादा खतरनाक कौन हो सकता है?

एक सच्चा प्यार करने वाला आशिक़…

अगर उसकी माशूक़ा के साथ कोई छेड छाड़ करे तो खून की नदिया बहा सकता है…

सभी गुंडों ने देवा को देखा…

गुंडा 3: “अबे ओये साले ज्यादा श्यानपंती मत कर हम नामी बदमाश है, हमसे पन्गा मत ले, इस लड़की को हमारे पास छोड जा तेरी जान बख्श देंगे…”

देवा उसकी आवाज सुनकर चौंक जाता है वह समझ जाता है की ये वही गुंडे है जो उस दिन जंगल में भागे थे।

देवा ने नीलम की तरफ देखा उसका रो रो कर बुरा हाल हो गया था…

वह देवा को देख कर खुश हुई और उठ कर उसकी तरफ भागने लगी, की एक गुंडे ने उसे पकड़ लिया।

गुंडा 5:“आयी साली बहन की लौड़ी ज्यादा न फुदक…और तू छोरे चला जा यहाँ से वरना आज ही मारा जायेगा बेकार में …”

नीलम: “देवा…”

नीलम की दर्द भरी आवाज देवा के कानो में पड़ती है और देवा जमीन पर से एक पत्थर उठा कर उस गुंडे 5 के मुँह पर मारता है।

जीससे वो गुण्डा चीख़ता हुआ अपना मुँह पकड़ लेता है…

गुंडा 5 “आह्ह्ह्ह”

चारो गुंडे देवा की तरफ दौड़ते है और देवा उन चारो की तरफ बेख़ौफ़ भागने लगता है और कुदकर दो के मुँह पर अपनी लात चलाता है जिससे चारो जमीन पर गिर पडते है…

देवा नीलम को इशारे से अपनी तरफ बुलाता है नीलम भागते हुए देवा के गले लग जाती है,

नीलम, “देवा देवा यह लोग…”

देवा:“मेरे जीते जी यह तुम्हे छू तक नहीं सकते अब नीलम…”

और देवा की नजर सामने पड़ती है एक गुण्डा हाथ में चाक़ू लिए उसकी तरफ दौडता हुआ आ रहा था…

देवा ने उसे देखते ही नीलम को अपने पीछे किया और अपनी हाथेली जैसे हथोड़ा उसके पेट पे मारा,

जीससे वो गुण्डा २० फ़ीट दुर जा कर गिरा…

दूसरा गुण्डा भी उठा और एक सारिया उठा कर देवा की तरफ आने लगा।

उसने सारिया हवा में घुमाते हुए देवा को मारना चाहा पर देवा ने उस सरिया को हाथ में पकड़ लिया और उस गुंडे के लंड पर लात मार दिया…

नीलम यह सब देखे जा रही थी।

उसे बहुत डर लग रहा था।

बाकि २ गुंडे उठे और हथोड़ा ले कर देवा की तरफ बढे।

गुंडा 4: “साले तेरी माँ को चोदूँ हमसे पंगा लेता है । आज तू जिन्दा नहीं बचेगा।अभी बताता हुँ तुझे…”

और देवा ने वहीँ से खड़े खड़े एक छलाँग लगाया और कुंगफु स्टाइल में अपनी लात घुमा कर उसके मुँह पर दे मारा।

उस गुंडे के हाथ से वो हथोड़ा छूट गया और दूसरे के पैरो पर जा गिरा जिससे वो गुण्डा दर्दनाक तरीके से चीखा….......
 
आखिरी बचा गुण्डा देवा की तरफ देखते हुए उसे मारने को आगे बढा देवा भी उसे शेर जैसी नजारो से देखता हुआ आगे बढा।

पर वो गुण्डा रास्ते में ही देवा का ग़ुस्सा देख और अपने साथियों की हालत देख कर वहाँ से भागने लगा जिसे देवा ने दौड़ कर पकड़ लिया और उसे मार मार कर पूछने लगा उस दिन के बारे में…

उस गुंडे ने बताया की शहर से एक आदमी आया था उसने तुमको जान से मारने के लिए पैसे दिए थे।

देवा:कौन था हरामी क्या नाम था उसका।

गुंडा 5: हम उसे नहीं जानते भाई।हमें माफ़ कर दो आज के बाद हम इस इलाके में दिखाई नहीं देंगे ये कहकर वो देवा के पैर पकड़ लेता है।

देवा ने बाकी पड़े गुंडो के मुँह पर एक एक लात और मारा…

देवा: “मादरचोद बहन के लौडो मेरी नीलम के साथ छेड छाड़ करते हो…तुमहारे हाथ पैर काट कर कुत्तो को खिला दूंगा अगर दूबारा कभी इस इलाके में दिख गए या नीलम को छेडा तो…”

गुंडा 2: “माफ़ कर दो भाई, अब नहीं करेंगे…”

देवा ने उन्हें छोड दिया वो लोग उठ कर नीलम से माफ़ी माँग कर वहाँ से चले गए…

नीलम भागते हुए देवा के गले लग गयी।

देवा ने भी अपनी नीलम को अपनी बांहो में ले के जकड लिया…

देवा: “तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं…।”

नीलम: “हुआ है बहुत कुछ…”

देवा डर जाता है, “क्या उन्होंने कुछ किया तुम्हारे साथ गलत…”

नीलम, “नहीं कुछ नहीं किया…”

देवा: “तो ऐसा क्यों कहा की कुछ हुआ है तुम्हे ”

नीलम: “मैने तो सही ही कहा की मुझे हुआ है कुछ…”

देवा को समझ नहीं आया…और वो सवालिया नजरो से नीलम को देख रहा था…

नीलम उसे देख कर मुस्कुरायी और अपने होठो को उसके होंठो पर रख दिए…

और उसके होठो को चूसना शुरू कर दिया।

ये नीलम का पहला ऐसा चुम्बन था जिसमे उसने देवा के होठो को चूसा है…

देवा भी नीलम की कमर को पकड़ कर अपनी जीभ उसके मुँह में ड़ालने लगा और दोनों ने एक वाइल्ड किस शुरू कर दी…

कुछ पलो तक दोनों एक दूसरे के होठो को चुसते चाटते हुए बांहो में रहे और फिर जब नीलम की साँस अटकी तो उसने देवा के मुँह को छोड़ा,,

देवा ने नीलम को देखा।

वह मुस्कुरा रही थी और उसकी आँखे बंद थी…

और उसे एहसास भी हुआ की नीलम का हाथ उसके मोटे तगडे लंड को पहली बार

दबा रहा था जो की नीलम को चुमने के दौरान खड़ा हो चुका था…

देवा ने एक गहरी आह ली और नीलम के कान में कहा…

देवा:“यह तुम्हारा ही है नीलम…मेरी पहली पत्नी पर इसका सबसे ज्यादा हक होगा……”

नीलम देवा की बात सुनकर शर्मा गयी और मुस्कुराने लगी।

उसने देवा के लंड को छोड दिया और उससे दुर अपने गाँव की तरफ भागने लगी…

देवा भी ख़ुशी में नीलम के पीछे पीछे भाग खड़ा हुआ…

कुछ ही पल में दोनों अपने गाँव आ गये, देवा नीलम को छोडने उसके घर तक गया…
 
घर के बाहर ही शालू, नूतन, रश्मि और पप्पू परेशान खड़े थे…

नीलम को अपनी तरफ ख़ुशी से आता देख उन लोगो ने चैन की साँस ली।

नीलम देवा का हाथ पकडे हुए उसके साथ आ रही थी।।

ये देख कर शालु की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।

और उसके आँखों से आंसू बहने लगा।

घर पहुँच कर अपनी माँ को ख़ुशी से रोता देख नीलम उसके गले से लग गयी और रश्मि भी उन दोनों के साथ गले से लग गयी…नीलम ने जब जंगल की सभी बाते बताई तो सभी देवा की बहादुरी की प्रशंशा करने लगे।

नीलम: “माँ मुझे सब कुछ मंजूर है, मुझे बस मेरे देवा की दुल्हन बना दो जल्द से जल्द……”

नीलम के मुँह से यह बात सुनकर देवा को सबसे ज्यादा ख़ुशी हुई।

रत्ना भी तब तक वहां आ चुकी थी उसके भी कान में नीलम की यह बात पड़ी और उसे भी बहुत ज्यादा खुशी हुई…जब रत्ना को ये बात पता चली की देवा ने किस बहादूरी से नीलम की इज़्ज़त बचाई थी तो उसे अपने बेटे पर बहुत गर्व हुआ।

रश्मी… “क्या बात है जीजा जी क्या 'जादू चला दिया मेरी बहन पर की इतनी उतावली हो गयी है वो शादी के लिए…”

रश्मी की बात सुनकर सब लोग हँसने लगे और नीलम ने उसे प्यार से एक थप्पड़ मारा…

रत्ना:“चलो सब ठीक हो गया अब… नीलम बस जल्द से जल्द हमारे घर की बहु बन कर आ जा… कसम से सास बनने की मुझे बहुत जल्दी है…”

नीलम रत्ना की बात सुनकर मुस्कुरायी और अपनी गरदन नीचे कर के शर्माने लगी…

नुतन, “अच्छा मामीजी… सास बनने की जल्दी है या सौतन बनने की?”

नुतन की यह बात सुन सब उसे घूर कर देखने लगे,

जीससे नूतन डर सी गयी की उसने कुछ गलत कह दिया है…।

पर अचानक ही सभी खिलखिला कर हँसने भी लगे…

शालु:“सौतन तो है पहले से ही पर मेरी बेटी की बात अलग है क्युकी वह देवा का सच्चा प्यार है जिससे देवा एक अलग ही जगह देगा अपनी जिंदगी में…”

शालु की बात सुन कर सब लोग खुश हुए…

शालु आगे बढ़कर देवा के हाथ में अपनी बेटी का हाथ रख देती है…
 
शालु: “बेटा मै तुझे अपनी बेटी ही नहीं अपनी इज़्ज़त भी सौप रही हूँ…। हम सब लोग अब जानते है की तेरी जिंदगी में कितनी औरते है, पर मुझसे वादा कर की मेरी बेटी को कभी दुःख नहीं पहूँचने देगा, उसकी जरुरत, उसके जज़्बातो का तू हमेशा हमेशा ख़याल रखेगा और उसके चेहरे पर कभी शिकन नहीं आने देगा...”

देवा ने शालु की बात सुनकर नीलम के हाथ को अपने दोनों हाथो में ले कर अपने सीने से लगा लिया और कहा…

देवा:“जिस दिन मै ऐसा करने में नाकामयाब रहा वो दिन मेरी जिंदगी का आखिरी दिन होगा…”

देवा की बात सुन नीलम ने अपना हाथ उसके मुँह पर रखा और कहा…

नीलम, “ख़बरदार अगर दोबारा यह शब्द अपने जेहन में भी लाये…मरे तुम्हारे दुश्मन… मै और तुम तो अनन्त काल तक एक साथ रहेंगे…हमारा प्यार ब्रह्माण्ड की गहराईओ से भी गहरा है देवेन्द्र… खुदा का वास्ता है तुम्हे यह कभी दोबारा मत कहना क्युकी तुम नहीं तो नीलम भी नहीं…मुझे सिर्फ तुम्हारा साथ चाहिए और तुम्हारे प्यार के सागर से चुल्ली भर प्यार… और कुछ नहीं…”

नीलम की बात सुनकर देवा ने उसे कस कर अपने गले से लगा लिया……

दोनो का बेइंतहा प्यार शालु और रत्ना के लिए किसी मिसाल से कम नहीं लग रहा था…

आज सभी के चेहरे पर ख़ुशी के भाव थे।

कुछ पल बाद दोनों एक दूसरे से अलग हुए और सभी अपने अपने घर की तरफ चले गए…

फ़िर कुछ ख़ास नहीं हुआ।

क्यूंकि अब सब कुछ सामने आ चुका था तो नीलम के घर पे होने के बावजूद शालु अपने बेटे और बहु के साथ अय्याशी करती रही रात भर और रश्मि नीलम के साथ उसके कमरे में सोने चलि गयी।

देवा और रत्ना ने उस रात कुछ नहीं किया।

वह चुप चाप खाना खा कर सोने चले गये।
 
कहानी के बारे में आपके सुझाव का स्वागत है।

कहानी पसंद और कॉमेंट करने के लिए सभी पाठकों को थैंक्स।

कहानी जारी रहेगी।अपडेट भी जल्दी देने की मैं कोशिश करूँगा।कहानी आपलोगों को कैसी लगी ।अपने विचार अवश्य दें।thanks.
 
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