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हाय रे ज़ालिम.......complete

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अपडेट 131

हर रात के बाद सुबह होती ही है…

अन्धेरे को मिटाने के लिए रौशनी की एक किरण ही काफी होती है…

और लोगो को दोबारा मिलने के लिए एक वजह ही काफी होती है…

गुंडो से अपनी नीलम को बचा कर देवा ने अपने सच्चे प्यार का एहसास पूरी तरह नीलम को करवा दिया था।

नीलम का परिवार और रत्ना अब देवा के बारे में सब कुछ जानते थे…

नीलम ने देवा के प्यार को क़बूल करके उसकी पहली पत्नी बनने को भी राजी हो चुकी है।

अब वो खुशनुमा पल ज्यादा दुर नही

जो देवा और नीलम की जिंदगी में एक महत्वपूर्ण लम्हा जोड़ने वाला है…

दीन पे दिन हफ्ते पे हफ्ते निकलते गये।

नीलम और देवा रोज नदी किनारे मिलते और बहुत देर देर तक बाते करते।

देवा ने नीलम को अपनी जिंदगी से जुडी लगभग हर एक बात बता दी थी।

जिससे नीलम के दिल में देवा पर विश्वास मजबूत होता जा रहा था…

देवा ने नीलम को अपने द्वारा की लगभग हर चुदाई का ब्यौरा दे दिया था।

जिसे नीलम शरमाते हुए सुनी थी।

शुरूवात में तो नीलम बहुत शर्मा कर देवा के मुँह से यह बाते सुनती थी।

पर वक़्त के साथ नीलम उन्हें गौर से और कम शर्म से सुनने लगी।

नीलम इस बात का ध्यान रखती की देवा उसके सामने इतना भी खुल कर बात न करे की नीलम शर्म से पानी पानी हो जाए।

या फिर नीलम या देवा अपना आपा खो बैठे और शादी से पहले ही एक्साइटमेंट में कुछ कर न बैठे…

देवा को भी अब ख़ुशी थी की नीलम के साथ वो काफी हद तक खुल चुका था और ऐसा शायद ही कुछ रहा होगा जिसे देवा ने न बताया हो।

ऐसे ही देवा रोज सुबह अपने खेतो पर काम करता

दोपहर को नीलम के साथ बैठ कर गप्पे मारता और खाना खाता और शाम को खाना खा कर अपनी माँ रत्ना के साथ हमबिस्तर होता…

नीलम ने उसे अपनी शादी तक रश्मि या शालु के साथ कुछ भी करने से मना कर दिया था जिससे रश्मि को नीलम पर बहुत ग़ुस्सा भी आ रहा था।

पर नीलम ने उसे समझा कर मना लिया था…

दिन ब दिन नीलम और देवा का प्यार और गहराता जा रहा था…

पण्डितजी से भी बात हो चुकी थी और उन्होंने साफ़ मना कर दिया था की इस समय शादी का सही मुहरत नहीं है…
 
आज…

पुरे 2 महिने गुजर चुके है……

देवा अपने खेतो पर काम कर रहा है की तभी उसे खबर मिलति है की पदमा ने कल रात एक बच्चे को जनम दिया है…

देवा यह सुनकर अपना सारा काम छोड देता है और भागता हुआ पदमा के घर जाता है…

वहाँ उसे पदमा का पति मिलता है जिसकी ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं था वो बस गाँव में मिठाई बाटने जा ही रहा था…

देवा: “काका मुबारक मुबारक…… बेटे के जनम की बधाई हो…”

देवा उसके गले लग जाता है और मन में सोचता है। “साले तुझे तो मुझे मुबारक कहना चाहिए …”

फिर पदमा का पति गाँव में मिठाई बाटने चल देता है,

देवा घर के भीतर जाता है उसे आज बहुत ख़ुशी हो रही थी क्युकी पदमा की कोख ने देवा को पहली पहली बार बाप बनाने का सुख जो दिया था…

अंदर पहुँच कर देवा देखता है की कुछ औरते वहां पहले से ही बैठी बच्चे को देख कर कह रही थी…

“हाय कितना सुन्दर बच्चा जनमा है तूने पदमा एक दम तेरे पे गया है…पर अपने बाप से ज्यादा समानता नहीं दिख रही इसमें…”

ये सुनकर पदमा मुस्कुरायी और देवा भी पदमा को देख कर मुस्कराया।

और चुप चाप उन औरतो के साथ बैठ गया…

कुछ देर बात सारी औरते चलि गयी तब पदमा ने देवा को कहा…

पदमा: “मुझको बच्चे का सुख दे कर तूने मुझे बहुत बड़ी ख़ुशी दी है देवा…”

देवा: “ख़ुशी तो तुमने मुझे दी है पदमा काकी पहली बार बाप बनने का एहसास बहुत निराला लग रहा है…”

और देवा पदमा के पास आ जाता है।

बच्चा पदमा के पास ही था।

देवा ने उसके चेहरे को देखा और उसके नाजुक से हाथो पर चुमते हुए कहा…

देवा: “इस दुनिया में तुम्हारा स्वागत है मेरे बच्चे… तुम्हारा बाप तुम्हारा ख़याल जरुर रखेगा…”

देवा ने पदमा को भी चुमा।

पदमा की आँखो से आंसू बह रहे थे…

देवा: “अरे रो क्यों रही हो…”

पदमा: “बस ऐसे ही देवा, मुझे सुनने में आया है की नीलम और तेरी शादी तय हो गयी है… कब है…”

देवा: “अभी तारीख नहीं पक्की हुई है पर शायद आज हो जाये…पंडित शाम को मिलेगा…”

पदमा: “मैं बहुत खुश हूँ तेरे लिए देवा…भगवान करे तेरी जिंदगी में ख़ुशी ही ख़ुशी रहे…”

और पदमा अपने बच्चे के सर को सहलाने लगी…

देवा: “काकी मै समझ रहा हूँ पर तुम चिंता मत करो यह देवा तुम्हे नहीं भुलेगा कभी…”

और पदमा देवा को देख मुस्करायी।

“यह मै जानती हूँ… एक बाप अपने बच्चे की माँ को कभी नहीं भूल सकता…”

और देवा भी मुस्कुराया और कुछ देर बाद पदमा के घर से निकल पड़ा…
 
उसने नदी किनारे जाकर नीलम को भी खुशखबरी दी…

नीलम, “मुबारक हो आपको…आप बाप बन गए…”

देवा: “तुम्हारे मुह से सुन कर बहुत अजीब लग रहा है पर धन्यवाद…”

और देवा और नीलम हँसने लगे…।

खाना खाने के बाद देवा खेतो पर दोबारा चल दिया…

शाम को खेतो में काम करने के बाद देवा अपने घर पर आ गया।

अंदर आकर उसे पता चला की पण्डितजी भी घर पर है शादी की तारीख निकालने के लिये।

देवा “नमस्कार पण्डितजी…”

पण्डितजी:“राम राम बेटा…तुम्हारे लिए एक अच्छी खबर है…”

देवा ने यह सुनकर वही बैठी रत्ना को देखा जो मुस्कुरा रही थी…

देवा: “और वो क्या है…”

पण्डितजी “शालू भाभीजी ने मुझे तीन तारीखे पक्की की है शादी के लिए…अब तुम्हे तय करना है की तुम्हे उनमें से कौन सी तारीख सही लग रही है…”

देवा यह सुनकर बहुत खुश हुआ और हाथ मुँह धो कर अपनी माँ रत्नना के साथ बैठ गया…

देवा: “तो बताइये पण्डितजी क्या तारीख़े है ”

पण्डितजी… “सारी तारीखें 2 महिने के अंतर्गत है…सबसे पास की तारीख आज से 20 दिन बाद की है ।दुसरी 29 दिन बाद और तीसरी 45 दिन के बाद…”

देवा सुनकर खुश हुआ की दो महिने में नीलम उसकी हो जाएगी…

रत्ना “इनमें से कौन सी ज्यादा अच्छी रहेगी पंडितजी…”

पण्डितजी: “सबसे अच्छा मुहरत 29 दिन बाद है वैसे पर बाकी भी सही ही है।

भाभीजी…”

देवा:“अच्छा हम सोचते है पंडितजी…तैयारियां भी तो उसी हिसाब से करनी होंगी आखिर…”

रत्ना: “हाँ बेटा पर ज्यादा देर करके भी कुछ नही होगा मेरे ख्याल से 20 दिन में सारी तैयारियां हो जाएँगी…”

देवा रत्ना की बात पर गौर करता है पर वो चाहता है की नीलम और उसकी शादी अच्छे से हो और अच्छे समय पे हो…

देवा: “माँ मेरे ख्याल से २९ दिन बाद वाली तारिख ही सही रहेगी…

रत्ना:“जैसी तुम्हारी मरजी बेटा…।तो अब तुम्हे घोड़ी पे बिठाने का समय आ ही गया आखिर…”

और सब हँसने लगे…

पंडित के जाने के बाद देवा और रत्ना शालु के घर पर शगुन ले के गए और उन्हें खुशखबरी सुनाई…
 
सब लोग बहुत खुश हुए और नीलम शरमाने लगी…

शालु ने देवा और रत्ना का मुँह मीठा करवाया और शगुन भी दिया…

शालु: “चलो रोका तो आज ही हो गया…अब बस शादी की तैयारीयाँ शुरू कर देते है जोर शोर से…”

देवा और नीलम एक दूसरे को बार बार देख रहे थे और नीलम बुरी तरह शर्मा रही थी…

फिर माँ बेटे अपने घर लौट गए…

कुछ दिन और बीते देवा और नीलम का मिलना अब शालु ने बंद करवा दिया था इसलिए देवा अब अपने खेतों पर ही काम करता और दोपहर को रत्ना खेतो पर देवा के लिए खाना लेकर आती…

देवा और रत्ना का प्यार काफी गहरा हो चुका था देवा रत्ना को हर रात तो नहीं चोदता था पर दोनों सोते एक ही साथ थे…

एक रात जबरदस्त चुदाई के बाद देवा और रत्ना बाते कर रहे थे की और कैसे कहाँ कहाँ चुदाई कर सकते है…

की तभी देवा के दिमाग में एक बात आयी जो रत्ना ने उसे अपनी पहली चुदाई में कही थी…

देवा बोला रत्ना से, “माँ याद है तुम्हे जब पहली पहली बार चोदा था ओह तुमने मुझसे कहा था की तुम मुझसे खेतो में भी चुदवाना चाहती हो…”

रत्ना: “अरे नहीं नहीं बेटा मैंने जोश में कहा होगा पर खेतो में चुदाई करना बहुत खतरनाक है अगर किसी ने हमे देख लिया तो…”

देवा: “देखने दे उसका क्या जा रहा है हमारी मर्जी…”

रत्ना देवा के गाल पर हल्का सा थप्पड़ मारती है…

रत्ना: “अपने बेटे के लिए यह रत्ना कुछ भी करने को तैयार है…।”

और देवा खुश हो गया…

देवा: “तो कल दोपहर को खाना खाने से पहले तुम्हारी जम कर चुदाई करेगा तुम्हारा यह बेटा…”

और देवा अपनी माँ के नंगे चुचे दबाते हुए उसके ऊपर लेट गया और दोनों नंगे ही सो गए…

अगली सुबह।

आज शादी को २३ दिन बचे थे…।

पर देवा के मन में तो सिर्फ अपनी माँ की खेतो में जम कर चुदाई करने का ख्याल ही था…

देवा खेतो की तरफ निकल गया और तभी उसे कुछ याद आया और वो शालु के घर पर चल दिया…

उसने पप्पू को बाहर बुलाया और उसे सब समझा दिया की आज वो अपनी माँ को खेतो में चोदेगा इसलिए उसे चौकीदारी करनी है की कोई आदमी ना आ जाये और उन्हें देख ना ले…

पप्पू को अंदर ही अंदर लगा की देवा ने क्या उसे चौंकीदार समझा है…

पर उसे मना भी नहीं कर पाया…

देवा और पप्पू खेतो में आ गए जहाँ पहले देवा ने काम करा और पप्पू ने भी उसका हाथ बटाया,

दोपहर का समय आ गया और देवा ने कहा…

देवा:“माँ आती ही होंगी देख कहीं वो तुझे न देख ले……वो नहीं चाहती की किसी को आज का कार्यक्रम पता चले या कोई देखे…इसलिए सतर्क रहना कोई ना आ पाए…”

और पप्पू खेतो के बाहर निकल गया।

कुछ ही पलो में रत्ना देवा को आते हुए दिखाई पड़ी और दोनों ने एक दूसरे को देख एक मुस्कुरा दिया…
 
अपडेट 32

रत्ना को खेतो की तरफ आता देख देवा बढा खुश था।

आज पहली बार वो अपनी माँ के साथ खुले आसमान के नीचे चुदाई जो करने वाला था।

रत्ना देवा को देख कर मुस्करायी।

रत्ना “क्या बात है बेटे क्यों इतना खुश हो"।

देवा, “आप तो जानती ही है माँ की आपका बेटा क्यों खुश है।”

रत्ना “नहीं मैं नही जानती तुम ही बता दो…।”

देवा “अरे, आज मै और आप साथ में……।”

रत्ना “हम्म…साथ में क्या…”

देवा “आप और मै साथ में खुले आसमान के नीचे…।।यहाँ खेतो में…।।”

रत्ना “हम्म…खेतो में क्या करेंगे…।”

देवा “खाना खाएंगे…रोज की तरह इसीलिए खुश है तुम्हारा बेटा…”

रत्ना हँस पडी… “बस खाना…।”

देवा “क्यू माँ कुछ और भी करना था क्या उससे पहले?”

रत्ना “मुझे तो लगा था की हम पहले कुछ मेहनत करेंगे फिर खाना खाएंगे…।”

रत्ना ने इशारा करते हुए कहा…

देवा “क्या मेहनत करे माँ…”

रत्ना… “यह तो तुम समझ ही सकते हो बेटा…।”

देवा “नहीं समझा माँ बता भी दो…”

रत्ना “अपना हल चला कर मेहनत करने की बात कर रही हु…”

देवा “पर खेतो में तो अभी फसल बोई है अभी क्या फायदा हल चलाने का माँ।।”

रत्ना (शर्माते हुए,,) “मैं खेतो की बात ही कब कर रही हूँ…”

देवा रत्ना की बात समझ जाता है… “तो कहा और कौन सा हल चलाने की बात कर रही हो…”

रत्ना “तुम जानते हो अच्छे से…”

देवा “तब भी मै तुम्हारे मुँह से सुनना चाहता हूँ…”

रत्ना (गर्दन नीचे कर के) “अपने लंड को मेरी चूत और गांड में हल की तरह…”

देवा “और कहाँ लोगी मेरा लंड माँ तुम?”

रत्ना “यहाँ खुले में…”

देवा “और कैसे लोगी?”

रत्ना, “पूरी नंगी होके…।”

देवा “कोई देख लेगा तो…”

रत्ना “देखने दो मुझे तो बस अपने बेटे का लंड चाहिए अपने तीनो छेदों में…।”

देवा “तो किसने रोका है छिनाल चल शुरू हो जाते है फिर…।”

रत्ना देवा को देखते हुए मुस्कुरायी और उसके सामने ही अपने हाथो में अपने चुचे ले कर उन्हें कपडे के ऊपर से ही मसलने लगी।
 
रत्ना को ऐसा करते देख देवा गरम होना शुरू हो गया और उसका लंड खड़ा होने लगा…

कुछ ही पल में रत्ना ने अपने बेटे के सामने अपने ऊपर के सारे कपडे निकाल फ़ेंके और मुस्कराते हुए अपने नंगे चुचो को हाथ में लिए मसलने लगी…

देवा “आह जल्दी कर सारे कपडे उतार अपने…नंगी हो जा मेरी जान ”

देवा की बात सुनकर रत्ना ने अपने बाकी के भी कपडे उतार दिए और पूरी की पूरी नंगी हो गयी।।

सुरज की रोशनी से रत्ना का नंगा जिस्म चमक रहा था…

रत्ना पूरी नंगी अपने बेटे के सामने खुले आसमान के नीचे दिन की रोशनी में चूदने के लिए बेक़रार हुई पोज़ देती है।।

देवा रत्ना के उतावलेपन को देख कर उसकी तरफ बढ़ता है और अपने एक हाथ से उसके बड़ी बड़ी चुचियां मसलने लगता है और दूसरे से उसकी गरम गरम चुत को मसलने लगता है…

देवा “आह कितनी गरम चुत है तेरी माँ आज रगड कर चोदूँगा यहाँ तुझे…”

रत्ना “आह चोद न मादरचोद…रोज घर पर तो चोदता ही है यहाँ भी भोग लगा दे मेरे तीनो छेदो का…मेरे लाल…चोद अपनी माँ को रंडियो की तरह… भर दे मेरे तीनो छेद अपने लंड के पानी से…आह मसल मेरे चुचो को और मेरी चुत को भी…।”

देवा जोर जोर से रत्ना के चुचे और चुत मसल रहा था।

कुछ पल ऐसे ही खुले आसमान के नीचे अपने माँ के चुचे मसलने के बाद देवा रत्ना की चूत को मसलता हुआ उसके होठो को भी चुसने चाटने लगता है।।

रत्ना भी बेशरम सी खेतो में नंगी अपने बेटे से अपनी चुत मसलवाते हुए उसके होठो को चूस रही थी।चारों तरफ फसल लहलहा रही थी और बीच में रत्ना अपने देवा की बाहों में लहलहा रही थी।
 
देवा और रत्ना कुछ देर तक ऐसे ही एक दूसरे के होठो को चुसते रहे।

और फिर अलग हुए।।

देवा “माँ यहाँ खुले में करने में एक अलग ही एहसास आ रहा है…।”

रत्ना “हाँ जान बहुत अच्छा लग रहा है मुझे यहाँ नंगी होकर…आज अपने जन्मस्थान के दर्शन कर ले इन खेतो में। आजा बेटा…”

देवा “करता तो रोज ही हूँ दर्शन पर आज का एहसास जिंदगी भर याद रहेगा…”

रत्ना देवा के सामने पीठ के बल बैठ जाती है और अपनी दोनों टाँगे खोल लेती है।।

देवा अपनी माँ की बेशरमी से प्रभावित हो जाता है और नीचे होता हुआ उसके होठो को दोबारा चूसने लगता है।।

फिर देवा रत्ना की गर्दन पर चुमते हुए नीचे की तरफ बढ़ता हुआ उसके चुचों के निप्पल को मुह में ले लेता है और चूसने लगता है

रत्ना “आह चूस देवा चूस अपने माँ के चुचियों को…।काट ले मेरे निप्पल को।

निपप्ल को…आह देवा…चूस रे……चूस अपनी माँ के चुचियों का दूध…”

देवा रत्ना के निप्पल को काटता हुआ रत्ना के निप्पल चुसता है…

कुछ देर अपने माँ के चुचे चूस कर और निप्पल काटकर देवा नीचे बढ़ता हुआ रत्ना की नाभी को काटता है।।

रत्ना “आह मादरचोद कमीने………मारेगा क्या मुझे…”

देवा कुछ पल और रत्ना के पेट पर प्यार करता है और फिर नीचे आकर उसकी गरम गरम चूत पर अपने हाथ फेरता हुआ उसके ऊपर अपनी जीभ चलाने लगता है।
 
रत्ना “आह चूस अंदर तक डाल अपनी जीभ…चोद अपनी माँ को अपनी जीभ से पूरी जीभ डाल दे अंदर अपनी…आह ज़ालिम……चूस अपनी माँ की चूत को…अंदर तक डाल दे अपनी जीभ…आह”

देवा अपनी माँ की चुत में अपनी दो उंगलिया घुसा कर अपनी जीभ चुत पर चलाने लगता है…

रत्ना “आह और जोर से चला दम ना है उंगलियो में…पूरी घुसा दे उंगलिया…और अंदर डाल अपनी जीभ…”

यह सब खुले आसमान के नीचे करके रत्ना का मजा दोगुना हो चुका था…

कुछ देर बाद देवा उठ जाता है और रत्ना भी नंगी अपने पैरो पर बैठ जाती है।।

उसका मुँह देवा के लंड के सामने था।।

उसने अपना हाथ आगे बढाकर देवा के कपडे उतारना शुरू कर दिया।।

कुछ ही पलो में रत्ना ने खेतो के बीच खुले आसमान के नीचे अपने बेटे को भी पूरा नंगा कर दिया…

देवा का लंड भी रत्ना के नंगे जिस्म की तरह खिली हुई धूप में चमक रहा था…

जिसे देख कर रत्ना को देवा के लंड पर बड़ा प्यार आया और उसने लपक कर देवा के लंड को अपने मुँह में भर लिया और उसे चुसने लगी बेशरम सी पूरी नंगी खुले खेत में…

देवा अपनी माँ की आँखों में देखता हुआ उससे अपना लंड चुसवा रहा था…

देवा “आह तेरा मुँह कितना गरम है रत्ना मेरी रांड…चूस…चुस अपने बेटे के लंड को बेशरमी से…चूस अपने बेटे के लंड को नंगी खुले खेत में…चूस साली रंडी चुस,,,,”

रत्ना अपनी राफ्तार को बढा देती है और तेजी से अपने मुँह में अपने बेटे के लंड को अंदर बाहर करती हुई उसका पूरा लंड चुसने लगती है।
 
रत्ना “आह मेरे बेटे का लौडा तो मै कभी ना छोड़ू……जहाँ कहेगा वहां दूंगी अपने तीनो छेद अपने बेटे को…।अपने बेटे की बीवी हूँ मैं…रखैल हूँ मैं…रांड़ हूँ अपने बेटे के लंड की…”

देवा रत्ना के सर को पकड़ कर उसके मुँह में जोर जोर से अपना लंड अंदर बाहर करने लगता है…

देवा बेहरहमी से अपने माँ के मुँह को चोदते हुए चीख़ता है…

देवा “ले साली ले....ले अपने बेटे के लौडे को…खा जा साली राँड़…ले रत्ना बहन की लौडी…ले पूरा ले साली…साली लंड की प्यासी औरत ले……तेरी माँ को चोदुं साली कुतिया……तेरी बेटी को चोदुं…बहनचोद मादरचोद है तेरा बेटा…ले खुले आसमान के नीचे ले अपने बेट के लंड को…”

देवा चिलाते हुआ अपनी माँ के मुँह में अपना लंड पेल रहा था…

वहाँ दोनों खुले आम नंगे खेतो के बीच यह काम कर रहे थे…

कुछ देर ऐसे ही रत्ना के मुँह को चोदने के बाद देवा ने रत्ना के मुँह से अपने लंड को बाहर निकाल लिया…

रत्ना “आह ज़ालिम चोद मुझे…पेल अपना लंड…चोद मादरचोद……यहाँ बेहरहमी से चोद अपनी माँ को खुले आसमान के नीचे…”

और रत्ना अपने बेटे के सामने कुतिया बन जाती है।

देवा भी इंतजार नहीं करता और पीछे से अपना लंड रत्ना की चुत पे सेट करता है और एक जोरदार झटका मारते हुआ कहता है…

देवा “ले साली खा लंड अपनी चुत से आज…अपने मादरचोद बेटे का लंड महसूस कर इस खेत में अपनी चुत के अंदर…”

देवा ने बहुत जोर का झटका मारा था की रत्ना के हाथ भी झटके को सह नहीं पाये और रत्ना नीचे गिर पड़ी…।

रत्ना “आह,माँ मार डाला……हाय रे ज़ालिम्म धीरे कर………आहह……उई माँ…………आआह्ह्ह्ह मेरी चूत…आहह”

रत्ना को बहुत दर्द हो रहा था क्युकी देवा सटा सट रत्ना की चुत को चोदे जा रहा था अपने सांड़ जैसे लंड से।
 
वह बिना रुके रत्ना की चुत में अपना लंड पेलता हुए उसकी गांड पर थप्पड़ मारने लगा…

देवा “बोल साली बोल कौन है तेरे छेदों का मालिक…बोल साली…रंडी…”

रत्ना “आअह्ह्ह्हह मार मतत…तु ही है मेरे रोम-रोम का मालिक…आआह्ह्ह्हह्ह ज़ालिम…मत मार…दरद हो रहा है.....आह्ह्ह्हह”

देवा “नखरे मत कर साली…मेरी मरजी कैसे भी चोदूँ तुझे…चूप चाप चुदायेगी तू बस…ले साली रंडी…”

और देवा ने गांड पर एक और थप्पड़ मारते हुए रत्ना की चुत को चोदना जारी रखा…

कुछ पलो के बाद देवा ने अपना लंड बिना रत्ना की चुत से निकाले उसे अपनी गोद में उठाया और खुद लेट कर उसे अपने लंड पर बैठा कर चोदना शुरू कर दिया।।

रत्ना “आअह्हह्ह्ह्हह चोद और जोर से चोद अपनी माँ को खुले खेत के बीच…दम लगा कर घूस्सा अपना लंड अंदर तक…”

देवा रत्ना की गांड पर थप्पड़ मारते हुए गांड की फाँके फ़ैलाता हुआ उसकी चूत में अपना लंड पेले जा रहा था।

लगभग 20 मिनट तक रत्ना अपने बेटे के लंड पर ऐसे ही सवारी कर रही थी…

दोनो खूब शोर मचाते हुए चुदाई का मजा मार रहे थे…।

देवा “अब मुझे तुम्हारी गांड मारनी है माँ…।”

रत्ना “आअह्ह्ह्हह तू नहीं बोलता तब भी तेरी यह छिनाल खुद तेरे तगडे लंड को अपने गांड के छेद में घुसा ही देती बेटा……चोद बस मुझे पेल कर आज इस खेत में…इस खेत का रोम रोम मेरे जिस्म की आग से आंच पा ले ऐसे चोद अपनी माँ को…”

और देवा ने अपना लंड रत्ना की चूत से निकाला और रत्ना अपने देवा के ऊपर बैठे बैठे ही पलट गयी और अपने पैरो और हाथों के सहारे फिर से कुतिया बन गई और अपने गांड को देवा के लंड पर रगड़ने लगी…
 
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